In this Hindi‑English devotional monologue, the speakers (devotees Amogh Lila Prabhu and Ishwar Gauranga Prabhu) report to Guru Maharaj about the current state of their community’s activities. They describe monthly devotional events that attract around a thousand participants, the transition from physical gatherings to online sessions after COVID‑19, and the typical format of these events (one‑hour talk by the Maharaj, meditation, prasadam, and light snacks). They explain a corporate‑focused program that adapts Bhagavad Gita lessons for workplace life, noting that it is a paid offering and must balance spiritual teaching with corporate expectations. The speakers highlight the international reach of the community, mentioning participants from India, Nepal, Sri Lanka, China, Pakistan, and the United States (Phoenix, Los Angeles). Personal details are shared, including the speaker’s educational background (Delhi university), professional experience (Bangalore IT work since 2012), and family caregiving responsibilities (wife’s father with advanced cancer, parents residing in Bengal). The narrative also touches on logistical aspects such as the office staff size (≈10,000 employees, 80 % Indian), the role of disabled volunteers, and the challenges of coordinating events across diverse locations. The overall tone is reverent yet pragmatic, expressing gratitude to the Guru while outlining operational realities and personal commitments.
Chapters
तो वहाँ पर जो भी विश मंथली इवेंट करते है तो उसमे लगभग हजार के करीब वह कनेक्ट है फेवरेबल है और उसके लावा हमारे 5 तो उसमे सेवा दी है और अभी रिसेंटली में थोड़ा ऑनलाइन शुरू कर उसमें भी मुझे सहायता दे थोड़ा तो just like drs online find काफी पुराना है में इंडिया मतलब गर्मी में बहुत गर्म है सर्दी सर्दी है लगभग इंडिया जैसे तो अभी आपको तो मैंने बात करी थी की आपको आपको भी एरिजोना होना लेकिन उन्हें बोला स्वास् का राज नहीं लेकिन हमारे यहाँ पे आपको डिसाइपल भी है जो आपके डिसाइपल वो डिसाइपल है जो कुछ भी हो जाए हमेशा मंगला गौर के शोर को होते है नेपाल से भी नेपाल से की सारी डोटी नेपाल से कई सारी टूलिटीज हमारे यहां हाउसमे a o do, o s राजी तुम्हारा it में बिली दोनों है वो इंटर में काम करती है it ed ofice काफी बा confess office soज कैलिफो इंटर में लगभग 10 हजार लोग काम करते है और उसमे से ऑलमोस्ट फट्टी परसेंट इंडियन सी मेरी बाइक एक्वल इंटर में कम करते है और इंटर में ही हमारा कॉरपोरेट प्रोग्राम रहता है में तो पहले हम फिजिकल भी कर रहे थे लेकिन कोविटकेबादसेवा ऑनलाइन शुरू हो गया तो ऑनलाइन होने के कारण पूरी दुनिया से जो भी लोग ज्वाइन करने लगे तो जब हम फिजिकल कर रहे थे तो 203 सौ 400 लोग टाइम करते थे वटiप्रोगरामयू डू सो महाराज जी वहाँ पे जैसे अलग अलग जो सीनियर गोरान पर है स्वयं भगवान महाराज है या फिर जैसे अलग अलग भक्त जो महीने में 1 इवेंट करते है तो वो थोड़ा सा साफफिकमोटीवेशन रहता है इवेंट में महाराज जैसे 1 घंटे का टॉक रहता है और उसके बाद कई बार थोड़ा मेडिटेशन रहता है उसके बाद थोडा सा प्रसाद है बहुत लाइट स्नैक्स इस टाइप से जब किसी का होता है तो ऑनलाइन है तो फिर ऑनलाइन ऑनलाइन टॉकी होता है ऊपर से वो कंपनी का ऊपर से वो पेड इवेंट है और काफी पैसा पे करते है सो एकदम नहीं कर सकता है क्योंकी कंपनी से खोता बेसिकली हम उसमे उनको ये हमारा परस्पेक्टिव ही रहता है कि भगवत गीता के वो लेसंस जिनसे आपकी लाइफ में हेल्प हो सकती है आपकी कॉरपोरेट लाइफ में हेल्प हो सकती है 10 और कंपनी बोल कंपनी चाहती आप ये बताओ की इनको कॉर्पोरेट लाइफ में कैसे हेल्प तो शास्त्रों से लेकिन शास्त्रों को एकदम से मतलब ऐसे महसूस न की हम अपने धर्म का प्रचार करने फिल्म धर्म का प्रचार करने वाली फीलिंग नहीं आनी चाहे ऐसा लगना महाराज जी जो बाहर प्रोग्राम होते हैं जो घर में है उसमे तो उसमे भी वेश्म नही नहीं इंग्लिश में कंपनी में तो सारे में तुम्हारा वो भी महाराज जी वहाँ पे सब इंग्लिश में रहता है की इंडिया में भी अलग अलग जगह से लोग साउथ इंडियन भी है वेश्नलसभीहैतो 1 जनरल फॉर्मेट हमेशा इंग्लिश एक्ली मैं ऑनलाइन शुरू इसलिए किया था मेरा थोड़ा हिंदी बोलने की इच्छा हो गयी मैं दिल्ली से ही हूँ तो मैंने सोचा की चलो कैमरे के सामने बोल तो मन कहाँ से स्टडी किया स्टडी महाजी मैंने दिल्ली से किया था, इन यूनिवरसिटी से मैंने किया था। job ke data diy banglore to job की तो 2012 में you have अभी 20 डी मिला थोड़ा स्ट्रिक्ट हो गया 10 साल आपको प्राइड किस चीज में नेपाल वालों को, नेपाल वालों को, एक्ली इंडिया के अलावा जो भी ज्यादातर कंट्रीज है न इंडिया का और चाइना का बहुत दिल है इंडिया चाइना से बहुत लोग मर जाते हैं इनफैक्ट अगर पाकिस्तान से, पाकिस्तान के अगर कोई इशू नहीं है तो उनको जल्दी मिल सकता मैं पॉइंट बना चाहूँगी इंडिया और चाइना के बहुत लोग जॉब करने के लिए जाते है। तो जो क्यों है वो बहुत लंबी हो जाती है इसलिए दिल हो जाता है। लेकिन और भी अगर किसी को श्रीलंका से है नेपाल की तो उनको दिन का जल्दी मिल जाता है। you as you can say में भी सुबह आता तो मैंने सोचा दर्शन कर लूंगा, भक्तों से मिल लूंगा और मुझे उम्मीद है कि आपके दर्शन हो जाएंगे। to have be have a menefo। महाराज जी में 12 बार आपसे से की और 2010 में जी बी सी की मीटिंग थी बैंगलोर में बैंगलोर में 10 में तो स्व में आपकी सेवा में था मंदिर से तो सब सारे सन्यास तो मेरे श्रोता की सेवा में सेवा में थाना। थी 2 दिन के 10, 10, 11, 10, 11 में मैं गया था उसके कुछ दिन बाद, कुछ महीने बाद आनंद में था तो बहुत अच्छी थी इसके अलावा लेकिन आपसे बात करने का सौभाग्य ा 10 साल से में क्यों महाराज। मैं आपको बताना चाहता हूँ की आपकी जितनी शिष्य जो आपको बता आर वेरी पर्टिकुलर अबाउट मंगलावती तो मंगलावती में मंदिर में कोई न हो लेकिन आपके शिष्य सुनी खड़े है। तो सबके अंदर इतना वो है की हमारे महाराज को मंगलावती बहुत संद बहुत पसंद है आपकी शीशों comuationi महाराज। हाँ 1 चीज ये भी है की वहाँ किसी तरह की कोई स्टिक नहीं मिलती है तो घर के भी सारे काम है तो वो क्या है बच्चे वो सब देखना होता तो शायद आपके ड्यूटी। हम हर साल कार्तिक के लिए आते है 1 महीना 1 महीना में और रुकता हूँ एक्ली मेरी वाइफ पिताजी को कैंसर है एडवांस्ड कैंसर सो शी वंस तो सो वो अपने पिताजी को परसती प्रदर्शन वो वहाँ पर रहते हैं लखनऊ के पास रेल में तो लगभग 2 मे हम कोशिश करते हैं हर साल कार्तिक में कोशिश करते हैं वृंदावन में जितना समय दिख जाए के पास आपके बंदा में में बहुत कई बार दर्शन सनासनी। इसके अलावा मेरे माता पिता भी बंगाल में रहते है, वो वाली गली उसे हरीकृष्ण रेजिडेंट से 1 बिल्डिंग है तो उसी में रहते है और मंदिर में सेवा करते हैं। तो जब बहुत गर्मी सर्दी होती है तो गजवादआजाताहैयहाँ राजवाल मंदिर से कनेक्ट है वो दोनों आपके शिष्य है मेरे सब आपके शिष्य हूँ। मेरे माता पिता भी लगभग 70 साल के है क्लोज तो सेंट सिक्सटी नाइन और मेरे सिस्टम से छोटी है। थोड़ा मैं भी आपकी डिसाइपरहूँ। officially de ant please हम फिनिक्स में रहते, हमारे पास लॉस एंजिलिस है तो हर साल महाराज वहाँ पर हर साल जाते कोई बकती सेंटर में काफी समय है। ताबो में फिल्म का थोड़ा बेस है। वहां हाँ महाराज थैंक यू सो मच महाराज आप प्लीज मेरा बहुत अच्छे से अक्षय की शो यहां प्रसाद में महसूस कर। यहाँ पर की सब भक्तों का भमचारुकइतनाप्रेन है सब लोग 1 बहुत आपस में अपने प्रेम से सोचा। मैं भी भगवान से मुझे। इतना समय कभी अपनी मदद के साथ नहीं मिलता। थैंक यू।