श्रील प्रभुपाद का प्रचार संघर्ष | प्रभुपाद जीवन कथा | Aug 20, 2021 | Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Goswāmī

यह वीडियो में वक्ता (संभवतः एक ISKCON सदस्य) श्रीयुक्त प्रभुपाद (श्रील प्रभुपाद) के जीवन और प्रचार संघर्षों का विस्तृत विवरण देते हैं। वे उनके बचपन, परिवारिक पृष्ठभूमि, आध्यात्मिक गुरु के साथ प्रथम मुलाक़ात, भारत में प्रारम्भिक भक्ति कार्य, आर्थिक कठिनाइयाँ, और 1922 में उनके आध्यात्मिक मार्ग पर चलने की शुरुआत को उजागर करते हैं। फिर वे प्रभुपाद के विदेश यात्रा की तैयारी, बम्बे में ग्रंथ वितरण, और अमेरिका (न्यूयॉर्क) में प्रथम केंद्र की स्थापना की कहानी बताते हैं, जिसमें वित्तीय अभाव, आवास समस्या, और स्थानीय लोगों के साथ प्रारम्भिक संपर्क शामिल है। वीडियो में उनके ग्रंथों के अनुवाद एवं प्रकाशन (पहले 3 ग्रंथ, फिर 70 से अधिक) की प्रक्रिया, शिष्यों की संख्या, और विभिन्न देशों में ISKCON के विस्तार का उल्लेख है। साथ ही, पश्चिमी विश्वविद्यालयों, कानूनी चुनौतियों, और विभिन्न सांस्कृतिक बाधाओं का सामना करने के दौरान उनके दृढ़ संकल्प और रणनीतियों को भी रेखांकित किया गया है। अंत में, उनके संदेश के वैश्विक प्रभाव, विभिन्न भाषाओं में अनुवाद, और आज के भक्तों के लिए उनके शिक्षाओं के महत्व को पुनः स्थापित किया गया है।
Chapters
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a a a a hi krishna आप सब भक्तों का हार्दिक स्वागत, मैं इस समय आपके साथ दिल्ली में नहीं हूँ। मैं इस समय अमदाबाद बंधन में हूँ पिछले हफ्ते। हम जरा 1 मंद में जा रहे थे और आज हम हमदाबाद पहुँचे ह और आपका प्रापर के प्रोग्राम का आज है। 1 समय किसी ने प्रावार से पूछा आप को अपने गुरु राज बगलीसेनादाजीके विषय में o e o a e what क्या पृथ्वी पर चेतने महाप्रभु जी की भविश्यवाणी को स्कोर बनाने के लिए चेतने महाप्रभु पर्व भगवान हैं कृषणाचेतनराधाकृष निया राधा कृष्ण प्रकट हुए केतने महाप्रभु के रूप में और उनकी भविश्यवाणी थी के नाम 1 दिन दुनिया के कोने कोने में पहुंचेगा तो भाय आचार्यों ने प्रयास किया था इस भविष्य वाणी को सकुल बनाने के लिए। इनमें ठाकुर भक्ति से सबसे प्रसिद्ध उन्हें अपना ग्रंथ भक्त ठाकुर जी के ऊपर से प्रसिद्ध थे मरीन ठाकुर ने 1 लिखा था उन्होंने सरे के प्रसिद मा मा विधान को भेजा ठाकुर भक्त जी ने कृष्ण भक्त को ठाकुर ने शोध रूप से ृष्णभक्तीकी स्थापना की और उन्होंने राधा की भाभा की कोई संत प्रगट हो खादान में इसके द्वारा ये आंदोल और वे आगे जा सके उनकी प्राथना में प्रकट हुए थे। 5 साल पाकिसिनाराशवती ठाकुर जन्म हुआ था 1 धार्मिक वातन में गोर, मोंदे, ज्यादा, बडे, बडे पानी नहीं थे। बाबर जी कहते हैं कि आमदन लगभग 200 रुपए महीना थी 200 रुपए में बहुत अंतर है और संतों के बकैदा सेवा करते थे। पर पिता ने पूरा प्रयास किया के बेटे को धानवेज्ञान, संस्कत, भाषा की सुरक्षा, दंगा बजाना ये सब सिखाया जाए माता की छाती मेरा बेटा इंग्लैंड में पढ़ के आये पता की दिशा कुछ और थी तो छोटी आई हुए बाबा जी ने वृंदावन वृंदावन की इच्छा है हम वृंदावन जायेंगे, अब हम मथुरा जाएंगे बिंदा मे जाने के लिए कब अगली गाड़ी है पूरी की और छोटी आयु में हथियार पर बंद किया और ऐसे से यह विचार बढ़ाते गए। पुछरपरबद छोटी सी आयु से धार्मिक लक्षण को पकड़कर रे थे और 1922 में उनके गुरु बनाने होने जो मिले हाँ साल बगदीसिनादाजी से पहली मुलाकात में ही उन्होंने पहचान लिया कि ये वो सिर्फ युवक हैं कि मां की विश्वानी को सफल बनाने में सहयोग देंगे और बड़े संघर्ष के साथ जैसे आप जानते हो। बाबा जी इन्हें विदेश की यात्रा की। विदेश जाने से पहले बाबा जी बॉम्बे में थे, काफी समय के लिए में आए थे ग्रंतों को बांटने के लिए और श्रीमती मुरारजी से मिलने के लिए। श्रीमती मोराजी धार्मिक औरत थी जो बकैदा संतों की सेवा कर दीजिए। और प्रभजी ो किसी ने कहा था इस औरत के चलते देश मे के पास और उन्हें निवेदन किया। मैं आप लोगों की शिक्षा को पश्चिम देशों में बचाना चाहता हूँ। श्ीवीपाजीनेकहा अच्छा भाव है आप पहले भारत में बुचारा प्रॉपर जी का आदेश किया था देश में ले जाओ इस संदेश को, क्योंकि ये थी आप लोगों की भविष्य वाली वाली तो अंत में शीवालीउनार्जी ने देखा की प्रॉपर की बड़ी घेरी इच्छा है। उन्होंने कैसे जानते हो खारगोशिप में जाने की सुविधा दी और 40 रुपए के साथ आगे हे नाइंटी सिक्टी फाइव पर चले थे। कालका से रास्ते में उनके 2 हार्ड और प्रॉपर होरे थे। मेरी योजना सफल नहीं होगी और घबराये थे। उसे से महंगे जाते। वापस लौटेंगे। रात को सपना आया, जिसमें देवता और भगवान स्वयं थे। और तुम भगवान ने कहा बा बात, तुम्हारी योजना सफल हो गई। उुशलपापर विदेश जाने से पहले का मन मुराठखांजी घर जाते थे। उन्होंने पारी के लिए रहने के लिए 1 सुविधा बनाई थी। कंपनी के मकान हुए तो प्रॉपर जी गुजरते थे। उस स्थान से आज उन्होंने 1 बड़ा मंदिर बनाया है। उस समय यह 1 लैंड, 1 जंगल था। बिल्कुल जंग। उस समय प्रॉपाजी की ऐसी स्थिति थी। उनके पास बिल्कुल धन नहीं था। अंधेरी से अंधेर ही प्रबल पैदल जाते थे क्योंकि उनके पास बस का किराया नहीं था। अंधेरी जाकर ट्रेन तो उस समय jungle पापा ने भावना के लिए बहुत खुबसूरत मंद बनाऊंगा। शास्र में लिखा है कि बंदरों का निर्माण होना चाहिए के रूप, हा, जॉब, वृंदावन और बंदों का निर्माण करो शासन की रचना करो सान को खोजो मा जा। हमारे अपनी इन गोमी ने, वृंदावन ने अनेक प्रसिद्ध मंदिर बनाए राधा। गोपी रा प्रापा जी ने इच्छा प्रकट की भगवान स्थान दे भी भविष्य में वो उनके लिए गोल सुंदर मंदिर बनायेंगे। तो प्रापा जी
गए।
बड़े कठिनाई से कहा अमेरिका में घर जा रहे थे आप की भविष्य वाणी को ूरा करने के लिए और जब ये सपना या जे मंगवाने का बड़ा योजना सफल होगी। प्रॉपर्जी का हौसला बढ़ गया तो प्रॉपर्जी अमेरिका पहुंचे और उस व्यक्ति घर बैठे रहे थे 1 महीने के लिए जिसके यहां जिसने प्रॉपर्जी को विदा बनाने के लिए 1 कॉलशिप लेटर दिया था। गरवाल नाम था और पति शैली अग्रवाल
सेली अगरवाल अमेरिकन औरत थी। बड़ी शिया के घर में
छोटा शहर
था, बटलर या प्रॉबजीनिवासकररे थे।
उस समय बटलर में 1 अमेरिका गुण हिस्ट्री की जीप की फैक्ट्री जीप की फैक्ट्री थी। नई जीप बनती मिलिट्री है तो अखबारों में निकल प्रकाश हुआ। 1 स्वामी आए हैं इंडिया से। in
e news people item 1 प्रोफेसर
ने उस प्रोफेसर ने सलिवा से पूछा क्या आप अपने विमान को हमारे यूनिवर्सिटी में भेज सकते हैं? प्रोफेसर फलॉसविताप्रॉपर्जी ने इलेक्शन लिया और विद्यार्थियों
से पूछा क्वें
प्रॉपर्जी ने देख लिया
के अमेरिकन युवक थे, बहुत जिज्ञासु थे
राबजी
मेरा यहाँ रहने की वजह न्यूयॉर्क जाना चाहिए।
पापा जी न्यूयॉर्क पहुंच गए। वहां उनके बाद कोई रहने का ठिकाना
नहीं था, लगभग कोई जान बचाने 1 मिश्रा जी थे, योगा सेंटर चिल्ला रहे
थे और किसी प्रकार से आबाजीगोनसेपरिचेव उनके आस में रहने लगे। पर मिश्रा को डर था कि हे स्वामी जी ज्यादा देर रहेंगे से भाग जाएंगे।
तो उन्होने बुरे तरीके से प्रभा जी को कहा। अभी मेरा घर में आश्रम से बाहर
जाइए अनेक स्थान में जाना पड़ा और
परांते प्रावा जी ने सफलता प्राप्त की।
और 1 पहला केंद्र खोला है न्यूयॉर्क
सेकेंड में, उससे पहले 1 park amिकनयॉrkमें टॉम के पेयrpaरसपार्क के ऊपर 1 प्लेट है जिसमें लिखा है this tree nervig
mobil।
और तो इस कान के भाग नियोग जाते हैं, अक्सर जाते हैं इस पार्क में इस पार्क का दर्शन लेने के लिए रॉपरजीेप्रचार शुरू कर दिया था और और
संस्था को क्या नाम दिया जाए
और क्या नाम दिया जाए के कहा उन्होंने क्या कहा इंटरनेशनल साइटी फॉर। तो बड़े परिश्रम के साथ पापाजी ने इस साल की स्थापना की। विदेश जाने से पहले, पापाजी ने केवल 3 ग्रंथ प्रकाशित की। वार्ड में, विदेश जाने के बाद, 11 सालों में उन्होंने 70 से अधिक ग्रंथों का अनुवाद किया। अंग्रेजी भाषा में जो ग्रंथ थे, यू, वेरी, मच, एप्रीशिएट, वायरस, कॉलर, कॉलर और अमेरिका के विदेशों के कई प्रसिद्ध महाविद्यालयों में एयरफ्रेंस बुक के रूप में रूप में इन गंधों का उपयोग किया जा रहा है। तो प्रभाजी 1, 60 से अधिक गंधों को प्रकाशित किया।
विदेश जाने से पहले।
विदेश जाने से पहले, प्रभाजी के 1 ही शिष्य थे। अचार या प्रभाग या प्रभाकर संस्कृत के पंडित थे। प्रभाजी के पहले शिष्य थे भारत में और अमेरिका देशों में जाने के बाद प्रॉपर जी ने 5000 से अधिक को दे तो प्रॉपर जी ने कृष्ण भक्ति के संदेश को विश्व के हर कोने में ले प्रॉपर क्या देखते हैं। उनको पूरा विश्वास था गुरु के। आज देश में गुरु के प्रॉपर
ये
शिक्षा विधि कैसे मारा व्यवहार होना चाहिए। 1 मंच कैनाडा में प्रॉपर
1 हाई
स्कूल एंगेजमेंट में गए थे, ये था 1 क्रिस्टियन स्कूल। इसमें नंसीऑपरीसीयेथा मॉनटयमेंमॉंटिय में प्रॉपर्टी ने लगभग 4 महीने काटे थे। उनको अमेरिकन विधा प्राप्त करना था। इसे वहां ज्यादा समय है काटना पड़ा और उसी समय मैं भी जुड़ा था इस काल के साथ प्रोवर्टी ने ने दिया यदि वह हर साल में देते थे पूछा कोई पर एनी क्वेशन, कोई प्रश्न है तो 1 भारतीय व्यक्ति है proबाजीकीबesi का था आप इन किशन देश में आकर ऐसा प्रचार क्यों करते हो। उसके बाद अपना प्राबाजीबिकचुप रहे। bk probe alu इस व्यक्ति को बुलाओ पर आशीर्वाद दिया
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s last इसका उन्होंने बदला लिया। हम देखते हैं बजी अत्यंत सेंसी बड़े प्रेम के साथ बाजी ने भक्तों को शिक्षा दी और उन्होंने रंगी रचना की। हबल के मनमें 1 ही भाव था 1 में पापा जी ने रात के 12 बजे 1 एडबिटेजमेटनेखार मुझे बुलाया पापाजी ने हा for this edvitesmentin the paper इंडिया गरीब देश है मैं पूरे सबका भोजन की योजना करोगा पर उन्हें हमारे साथ रहना पड़ेगा एडरीफिलतयारकिया इसमें लिखा था कमल लिव, वित लाइक, वित मतलब, हमारे आगे रहो, इन आश्रम लाइक और हमारे जैसे नाम करो साधना भक्ति रखो और चान पालन करो। प्रबल ने कहा लोग तयार है सब की देखभाल करने को तैयार हूं। पूरे शब्दों में प्रभाजी ने कहा कृष्ण भक्ति को स्वीकार करो प्रोबी यही सोचते रहते थे किस प्रकार से इस भक्ति को आगे बढ़ाया जाए। 1 समय मैंने बराबर से पूछा हम क्या इंडिया में वेनिक रिसर्च इंस्टीट्यूट बना सकते हैं? क्योंकि जब मैं आया भारत में तो हमारे टैक्स से थो ने कहा we should make chart रिसर्च institut और उनसे टैक्स का लाभ होता है pro कहते है vedic research institute, probawhाईवेदिक resrचaseteenall, the reसर्च, we need to do n। रीसर्च फॉलो ब्याज दे, ये था प्रोपज का गुण उन्होंने हमें या रुप भगवान का संदेश दिया। 1 शब्द नहीं बदला लोगो को आग लिए पूरा विश्वास था कि अगर हम भगवान के स्वामी संदेश को यात रूप प्रस्तुत करेंगे लोग स्वीकार करेंगे पापाजी हमेशा प्रचार की भावना। 1 समय जब पापाजी मॉम में थे, गाय कमजोर हो गया था, तो
यह निर्णय किया था यही कुछ दिनों केले पापाजी को कोई डिस्टर्व नहीं करेगा और उन दिनों में रोज शाम को 56 बजे से 8 बजे पापा जी लोगों को मिलते थे तो उनकी फैक्टरी रोक दिए नहीं जा सकते स्वामी जी को मिले परबाबाजी ने सुन लिया क्या कोई लोग आये हैं उन्हें दर्शन लेने के लिए उन्हें रोका जा रहा है दम कम क्योंकि उनकी क्या इचा थी हर व्यक्ति को यह संदेश दिया जाए हालांकि अंगार कमजोर यह भी उन्होंने प्रचार नहीं होगा प्रचार प्रचार का उस प्रपद बेटर, सोलजर टू, डाय, बैटर फील, लाल हो परोबरजीजरशरीरत्याग भी है तो युद्ध प्रचार करते करते हुए करे परoबरजीnयूkमें ान की। 1 बहुत बड़ी बिल्डिंग थी मंजिल की please take rest in gitenagretenagre project था। यहाँ के बाद बाबा ने भक्त क्या कह रहे थे लीस ग्रेस रावजी ने कहा उनको उत्तर में प्रभा ने कहा प्लीज dont take a
स्ट्रगल।
उन्होंने कहा ये जो संघर्ष मुझे करना पड़ता है उसे मुझे दूर ले जा और डर जाते हैं जब संघर्ष करना पड़े और प्रावषि जीवन में क्या देखते हैं। उन्होंने कई रिस्क लिए भक्ति को आगे बढ़ाने के लिए, तो 1 समय जब प्रचार शुरू हुआ तो कई अमेरिकन, अब आप ये शुरू किया ब्रेन वॉश कर रहे हैं को वो कई कोर्ट केस भी चले अक्सर जीत रहा था सारे केस कई केस हुए हा वी आर नॉट ब्रेनवॉशिंग दे, but they are brenworsiyasbrेn wosi। हम उनकी बुद्धि को नहीं बदल रहे, माया जो है उनके दिमाग को
बना
रही है, यह विश्वास दिलाती है। जीवनका लाइक ने उदाहरण दिया होंने कहा 1 समय 1 मैना पति था वो पत्नी को उत्तर दे रहा था, हर पत्नी रसोई में थी, भोजन दिया कर थी और पत्नी ने कहा आ रही हूँ।
3 बार बोला वो बहरा था तो
सुन नहीं पाया तुम मेरे हो सुन नहीं सकते मैं कब से बुला रहा हूँ। तो ब्रहमा ने कहा मेरा वो था उसे या तो मेरे हो। उसी प्रकार ब्रहमा ने कहा बहुत प्रोपगंडा वो बुद्धि को नश कर रहा है। वो कहते हैं कि हम नश्ट करने, हम तो केवल धूल को दूर कर रहे हैं, लोग असली आनंद अनुभव कर सके। अब जी के मन में 1 इच्छा थी गुरुवार का देश को सबल बनाने के लिए, तो जब प्रभा ने इंडिया अमेरिका कैनाडा कृष्ण सामने की उपरी रशिया वो दिल्मे रशिया होता था कॉमरेस देश और उस कॉलेज देश में कोई सार नहीं था पर गए उन्हें 5 दिन का टूडिसवीदमिलाथा tudi घूमने भी जा सकते हो मोसकोमें प्रोपर जी गए थे 1 परपसरमिलेानाम था। डॉक्टर के राज तो परोबरजसेकटरीएकि र में ढूंढ रहा था। कोई दुकान है यहां दूध और पॉल मिले तो उन दिनों में रशना खास, ये देखती थी लोग इंग्लिश नहीं सीखे, क्योंकि बीबीसी वगैरह वगैरह का प्रॉपर होता था इंग्लिश में और सरकार चाहती थी उनके लोग समझे है तो russia profesor war रास्ते में उन्हें resin mil, a i will taken to the shop wiki
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और रास्ते में इस रशियन विद्यार्थी को पता लगा कि श्याम संता के साथ उनकी योगा टीचर हैं। मैं मिल सकता हूं गुरु से। पहली मुलाकात में ही परजिनसे पूरा उपदेश दिया और दूसरे और तीसरे दिन उसे दीक्षा भी दे दी। और ये भी सिखाया कि ऐसे बिलिंग भोजन बनाना, कैसे, धोती, पहना, इत्यादि और 4 दिन में ट्रेनिंग देकर। वहीं चौथे पांचवे दिन रशिया से निकले उनके प्रतिनिधि आनंद शांति प्रचार करते गए। आज भी देश में हजारों भक्त हैं। पाबूजी कोई साधारण व्यक्ति नहीं थे। वो कृष्णा शक्ति बिना, कृष्ण की शक्ति की बिना कोई प्रचार नहीं कर सकता। पापाजी ने सारे विश्व में वृंदावन के संदेश को पहुंचाया। आज दुनिया के किसी कोने में चले जाओ। कृष्ण भगवान के भक्त मिलेंगे। 4 साल पहले टाइम फइडियानेहमेटोरि में 1 लेख लिखा था, जिसकी हेडिंग थी चाइनीज इन लव विद कृष्णा, जिसमें यह वर्णन किया था। इस प्रकार जन्वसमी चाइना में मनाई जा रही है। आज जलमसमीविश्वकी हर कोने में, पुजाई कोने में मनाई जा रही है। प्रापा जी बल से प्रकट हुए थे। महाप्रभु जी की विश्वानी को सभलानेकेलिएप्रापाजी की लीला, प्रापा जी की, जीवन की मीरा लीला। मितने पढ़ सकते हो। और रावजी के विषय में जितना आप सुनोगे उतना ही कम है, जितना पढोगे, उतना ही कम है, क्योंकि वो थे। और अगर आप सुखा नीचे है तो क्या है उपाय जितना मगदी का संदेश कोंतरमैnprपwa, waditotelodpodi body और जिन्होंने बड़े परिश्रम के साथ इन ग्रंथों को भी प्रकाशित किया। वृंदावन में उनके अंतिम दिनों में बहुत कमजोर था। बड़ी मुश्किल से शरद निकलते थे तो उनके कई सी से मदद करते थे। उनके बैठने में उनके ग्रंथ को पढ़कर सुनाता था और प्रोजी अनिवार्य करते थे। यह था प्रभजी बा कि अंत तक भगवान की सेवा में जुड़े रहना। अंत मे गधों का पान किया। आज के वतन में हमें कई वक्त मिलते हैं। वो कहते हैं ओह क्या, हमारा दुर्भाग्य, हम पर नहीं मिले? उत्तर क्या है जी का दुर्भाग्य, हम आपका कोई दुर्भाग्य नहीं है। आपका भाग्य ये है आप्रवरकीसंसा से जुड़े को वाजी का संदेश ज्यादा महत्वपूर्ण है, संत है, वो प्रकट होते हैं। 2 माादिसेवापोऔरवानी परवाज की वाणी, आप उनके ग्रंथ पढ़ सकते हैं। बाजी का उपदेश ग्रंथ पढ़ सकती। पत्रों के द्वारा, प्रेस कॉन्फ्रेंस द्वारा, अंतर के अनुवाद के द्वारा। बाजी ने भक्ति का प्रचार किया। 11 सालों के अंदर 14 बार ने सारे विश्व की यात्रा की और कठिन स्थिति में भी उपचार से नहीं आते। बाजी का 1 ही भावना थी कि गुरु के आदेश का पालन करें। हम भक्तों को क्या करना चाह में प्राजी शिक्षा को स्वीकार करना चाह। शिक्षा प्रभाजी के ग्रंथों में है। और इन ग्रंथों का अनुवाद लगभग हर प्रसिद्ध भाषा में हो गया है और आज सारे देशों में लोग इन ग्रंथों
को पढ़ रहे हैं।
इन ग्रंथों में दिव्यज्ञान जिसके उपयोग से हम जीवन को सफल बदा सक। party dedicate to for, canto them to his grumoraenchelives, were haver lives, worevrwyevin instructions and the the follower did with him? प्रभाजी ने कहा कि मेरा गुरु हमेशा मेरे साथ हैं, उनके दीवे शिक्षा द्वारा, मारे सेशन के साथ है। ये हम सब की सीधी है। अगर हम प्रभाजी के शिक्षा को सदा मन में रखें हमें यह मजबूर होगा या प्रभाजी के साथ हो तो उनके ग्रंथों के द्वारा, उनके टीम के द्वारा, के विडियो के द्वारा, अब आय भी उनका दर्शन आप कर सकते हो। आप सब का भार, आप सब पिछले 5 दिनों से प्रॉपर ग्लोरिफिकेशन का प्रोग्राम में आये हो। इससे इस साल परीक्षा है 1 बड़ा प्रसिद्ध प्रोग्राम करें प्रधानमंत्री राष्ट्रपति के साथ, पर कोविल के किला कारण हम निर्णय नहीं कर सकते, यह प्रोग्राम करें या नहीं करें यह समस्या है। आपको जानकर खुशी होगी कि 1 कोइनमिणइंडियाने रिलीज कर किया है बाजी के वन ट्वेंटी 20 बुत एनिवर्सरी े विषय में और ये कोइन सब नंबर पहली तारीख हो प्रधानमंत्री रिलीज करेंगे ऑनलाइन तो आप सब का बहुत बहुत धन्यवाद जी के ग्रंथों को पढ़ो और इन गंधों को बातो और वही ाम को अपनाओ अब जी के कहने के विषय में कहने के लिए तो बहुत कुछ है औ और हमें उनकी शिक्षा का लाभ चाहिए और शिक्षा द्वारा सुर बनाना चाहिए आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद अरेृ्णकै wah to de e।
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