The YouTube video presents a Hindi devotional hymn (Chalisa) performed by HG Sundar Gopal Prji, with credit to HG Rambhadhra Prji. The lyrics extol Guru Maharaja as the ocean of compassion, source of divine knowledge, protector of devotees, and guide to spiritual liberation. Throughout the chant, the singer invokes the Guru’s blessings, describes the Guru’s divine attributes (compassion, wisdom, power, and grace), and expresses the devotee’s surrender, gratitude, and yearning for divine grace. The composition blends poetic imagery, traditional religious motifs, and rhythmic chanting, serving both as a spiritual offering and a means for listeners to connect with the Guru’s benevolent presence.
Chapters
ग्यानिधी करुनासिन्धूमहेप धरमाधुरंदरज्ञाननिधी ओडियावनसप्रदीप धिल्ली नगर सो भागत हारो भक्त शिरो मनी प्रगट जारो सन चोवालिष सत नवदश सर ती थी अनदा भकती प्रद सुन्दर धिल्ली एंद्र प्रस्त यती पावन रक्त भये सब के मन भावन। जै गुरुदेव दया के सागर। भक्त प्रवर सब भून गण आत। शरन कमल गुरुदेव तुम्हारे भवभयो बंजन कुष्ट निवारे गुरुदेव चरणरज महिमा कहत सुनत जगजरज दिव्यद्रिष्टी गुरुदेव तुम्हारी पावन पतित अधम जनतारी हस्त कामल गुरुदेव तुम्हारी मरस सकल सोभाक्य पधारी माल तुमारे मोहा घ्यान आमंगल तारे।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।� करुना सिन्दुना मयति शोबे सुमीरत भकत समुह मनलोबे मिरत दव वेवहारा पितत सकोलोहिया के अधकारा प्रभुपाद प्रिया जन जग जाना वितरन ग्रिह ग्रिह ग्रंथ विधाना। ग्रंथ आसंख्या वितरन करवाई। प्रभुपाद ही अरश बडाई। शिला प्रभुपाद नायना के तारे। निताई प्रान गोरांग दुलारे। भारत के सोभाक्य बडाये जीवी सीवन के जब आये पाथ सार्थी के भये सार्थी प्रती दिन करे मंगल आरती स्वयम ग्रिहोवे हीन मेरा भव्यदेवाल्यक्रेष्णदेला सत्रहमंदिरप्रकटकराई प्रभुपादमनोहेष्टपुराई प्रते धिन करते गुरुदेवा श्री गुरुदेव युवक परचारा विपलवो सभरश आपारा। आपुरवशोबा वरनि नजाई। कीर्ति मान विश्व करभाई। जुवकस हस दस हरी हरी गाई। गुरुदेव करुना बरशाई। भूतल नगर ग्राम ग्रिह वासी श्री गुरु क्रिपा दूबो ही सुक्राशी साधन भजन आतुलयनु रागा विप्रह सेवा मन लागा। सहनशीलता के प्रती मूरत शथ सुदरे जरश ही तव सूरत। रभुपाद हर सास तुम्हारे इस कौन के काज सवारे। अगती रभोती गुरुदेव हमारे करुना सिंदु दूष्ट जनतारे यथारूप संदेश सुनाये विवहार निज जगत सिखाये तनमन ब्रान समरपन सेवा धन्य जगत पावन गुरुभेव भक्ति भकत रक्षाहित लागी नरहरि स्थापन यति अनुरागी जय गुरुदे जय जय गुरुभेव तवमुख चंद्रमण शकल अमंगल शोक नसाई। निजसंमान नही आश तुमारे। आधम पतित जन सदा सहारे। चीत कीत सब के हितकारी। विप्रवासु देव वेवहारी। चपतप भजन विरागन रेशा करत प्रचार फिराई सब देशा हरी कीतने सदायनु रागी शवन ही कृष्ण प्रेम उर जागी जगद मंगल गुरुदेव चरण रज महिमा कहत सुनत जग अच्रज जो सत बार पास गौर प्रेम प्रकट ही आसोई। दास सुन्दर गोपाल यधमयती। कृपा सिंदु देहू शरण चरणमती। दास सुन्दर गोपाल यधमयती। भक्ति ही नती दीन गुरुदेव करुना करो ए सर्वज्या प्रवीन