In this Hindi devotional lecture Srila Gopal Krishna Goswami explains how a devotee should constantly remember and meditate on God. He begins by affirming that God is sagar (has a form) and can be worshipped through a murti or picture, urging the use of modern printing technology to keep an image at home and to offer food at God’s feet. He describes God as the all‑knowing (sarvajña) and eternal being, citing the ancient name ‘Sarvajña’ and references from the Brahma‑samhita and Vyasadeva’s scriptures. Goswami stresses that true remembrance requires purification of the mind, which is achieved through bhakti practices such as listening to Krishna‑katha, chanting, and following the rules of devotion. He warns against trying to understand the divine with material intellect alone, emphasizing that God’s leela transcends physical perception. By consistently engaging in these devotional activities, the mind becomes pure, enabling direct experience of the divine. The lecture concludes with a devotional chant invoking Krishna.
Chapters
आज का विषय है की किस प्रकार भगवान का ध्यान करना चाहिए। सबसे पहले तो ये मानते है की भगवान साकार है, उनका रूप है भगवान की पूजा कर सकते हो। या अगर आप घर में अपने आप को मूर्ति रखने के योग्य नहीं समझते, तुम भगवान की तस्वीर घर में रख सकते हो। प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी का लाभ उठाओ और भगवान की मूर्ति की पूजा करो। जो खाओ उसको भगवान के चरणों में अर्पण करो। इस लोक में भगवान स्वयं अर्जुन के द्वारा हम सबको उपदेश दे रहे हैं। किस प्रकार से हमें भगवान का स्मरण करना चाहिए। सबसे पहले तो यह सोचना चाहिए भगवान साकार है, रूप है, दिव्य है। जनम जनम मेरा आना जाना, दोनों ही दिव्य है। फिर भगवान कहते हैं मनुष्य को चाहिए की परम पुरुष का ध्यान स सर्वज्ञा। तो सबसे पहले तो आपको ये सोचना चाहिए की भगवान सर्वज्ञ है, सर्वज्ञा क्या? क्या? जो सब कुछ जानते है। भगवान के हजारों नाम हैं, जिनमें 1 नाम है। सर्वज्ञ है पुरातन, जो की सबसे प्राचीन है। ब्रह्म समित में ब्रह्मा जी भगवान के वर्णन करते हैं। अनेक गुणों के अध्ययन व्योम अध्यन पुराना पुरुष पुराना सबसे पुराने पुरुष है, पर दिखते है। युवक के समान। भगवान को समझने के लिए हमें थोड़ा प्रयास करना पड़ेगा। इसलिए भगवान ने स्वयं व्यास देव के रूप में विधि शास्त्र की रचना की और महान आचार्यों प्रपा ने इन ग्रंथों का अनुवाद किया है। क्यूँ की, क्यूँ की हम भगवान की वाणी को समझ सके। भगवान के विषय में ज्ञान को बढ़ाने के लिए आगे वो हर चीज़ के नियंता है। भौतिक संसार में हर व्यक्ति नियंता बनना चाहता है। सच बात है, व्यक्ति यह सोचता है। बस अभी ताकत नियंता बन गया है, कोई प्रधानमंत्री बनता है, राष्ट्रपति बनता है, राज्यपाल बनता है। क्या सोचता है कि मैं राजा बन गया हूँ। तो भारतीय सोचता है की मैं नियंता न हूँ, ना मैं बन, सकूंगा, नियंता कौन है। परम भगवान और तैतीस करोड़ देवता, देवियां। सब उनपर परतंत्र हैं, उनकी आशीर्वाद पर निर्भर है। हमारे हाथ में कुछ भी नहीं है। आपके हाथ में केवल इतनी छूट है। क्या? भगवान के आदेश का पालन करो या विरोध करो? बस उसके पास आपके हाथ में कुछ भी नहीं है। और भगवान गीता में क्या कहते हैं? जो प्रयास करते हैं, मेरी सेवा करने के लिए, उनमे अगर कोई कमी भी हो तो उसे मैं पूरा कर देता हूँ। आगे क्या लघुतम से भी लघुतम, छोटे से छोटा बड़े से बड़े हैं और छोटे से में। इस विषय पर पापाजी ने उदाहरण दिया था। क्या उदाहरण है आपकी आत्मा का? क्या मत है? के केस के कोने का 10 हजार का हिस्सा। कोई विज्ञानी हैं? यहाँ जो माप सकता है, कोई मार भी नहीं सकता। और उसके अन्दर भगवान निवास करते हैं। परमात्मा के रूप में अंदाजा लगा लो तो लघुतम से भी लघुतम है कौन? परम भगवान, फिर आगे समय भौतिक बुद्धि से पढ़े। भगवान को हमें भौतिक नदियों के द्वारा समझने का प्रयास नहीं करना चाहिए। वो भौतिक बुद्धि से परे है। जब भगवान इस पृथ्वी पर आते हैं तो अपनी लीला प्रकट करते हैं जिसकी तुलना कोई साधारण व्यक्ति किसी स्थिति में नहीं कर सकता, वो दिव्य लीला करते हैं। तो इसीलिए भगवान कहते हैं हम सब से कि मेरे बारे में सोचो की मैं समाज भौतिक बुद्धि से परे हूँ और मै हूँ। तो कहा क्या है शास्त्र में नित्यों नित्य नाम चेतन, चेतना ना 1 भाव नाम बिदाती हम नित्य है, भगवान भी नित्य है, हम नित्य है, भगवान भी नित्य हैं। आरोप अंतर क्या है, अंतर है, क्या है, अंतर यह है के वो 1 नित्य बाकी सब नितियों की देखभाल कर रहा है। तो भगवान के अनेक गुण हैं, मुनि जी कहते है और वो भौतिक प्रकृति से परे दिव्य रूप के हैं। अत हमें भूलना नहीं चाहिए की भगवान क्या कह रहे है इसलिए संतो का कहना है की हमे कृष्ण कथा में रूचि लेनी चाहिए, करते है ये जो कृष्ण कथा है इसका हमें स्मरण करना चाहिए और अगर हम इस कृष्ण कथा का स्मरण करेंगे तो के द्वारा यह मन जो है वश में आयेगा, शुद्ध बनेगा और शुद्ध मन से ही आप भगवान को समझ सकोगे आखिर ये जो भक्ति के अनेक नियम हैं, इनका पालन क्यूँ करते हैं इसलिए करते हैं क्योंकि इन कार्यों के द्वारा हमारा अशुद्ध मन, अशुद्ध, इंदिया शुद्ध बनेंगी और शुद्ध मन और इंडिया से ही आप भगवान को समझ सकोगे। हाय कृश्णा हरकिशन क्रिष्णा हारे हारे हमारा हार हार।