किस प्रकार भगवान के प्रिय बनें | BG 12.12 | 19 May 2023 | Srila Gopal Krishna Goswami

Srila Gopal Krishna Goswami explains Bhagavad-Gita 12.12 on becoming beloved to God through seven essential qualities: equanimity, compassion, detachment, humility, obedience to the guru, steady devotion, and self-control. He teaches that true devotion is internal, not ritual, and requires regular chanting, service, and aligning your intentions with your guru's instructions.
Chapters
डाले
ल
गंगा के
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रेस होने से या
सामने बगल
हमे
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जल्दी
सो राम के बाद रे ब्रामण गीत में क्या है जिसके कारन मे को
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guru मैं हूँ अnpरमैंमनेकुछयन करना नहीं, ता पर के गुरुका आदेश है, जरा परिणाम पूरा करने है। और फिर मैं हूँ कि फ्रम भगवान
द
आंसर सा तुम्हारे से जा
गा।
to pita pita to get े भारत में कि तुम किस प्रकार बनना चाहिए सकते हो आप में बनेगी हाँ प्रयास
करना
a so mit तो टीजर के द्वारा अंधेरे में
तो
को मार के प में से कितने भक्त
व
meron भक्तों ने अपने स्मार्टफोन में गीता को मार्टोन
वाह, प्यारका, तेरा और चौथा, शो, अदवष्टसरवगूताना नैट करण, ए वजह जा, मो, हंकार संतुष, योगी,
योगी,
शाम, विदा
का
सभी से या श्रद्धा, अशकादिशावीसर्वदुताना समस्त जीवों के प्रति मेत्रहमेतरीभाव वाला दयालु व बच्चे ही जी ने स्वामी की भावना से
रहे,
अहंकार का वित अहंकार से रहे। समभाव, सुख तथा सुख में कमी में जमाव संतुष्ट, आसन्न दुष्ट, सदतानिरंतयोगी भक्ति में निरस्त या नान, म, आत्म संयमी, आत्म संकल्प सहित
लगना,
देवी तथा बुद्धि को यह जो भक्त मेरा भक्त
है, मेरा
प्यारा महाराज की अनुवाद, जो किसी से देश नहीं करता। 1 सभी जीवों का दयालु मित्र है, जो अपने को स्वामी जी मान का और मिकीता है, जो सुख दुख में समभाव रहता है। सही शुरू में सदेव आत्म तुष्ट रहता है। आत्म सिमी है, जो निश्चय के साथ मन में मत्था वृद्धि को स्थिर करके भक्ति में लगा रहता है। ऐसा वक्त होने अत्यंत प्रिय है। कादरी शुद्ध भक्ति पर आकर भगवान इन दोनों लोगों में शुद्ध भक्त के दीप का वर्णन कर रहे हैं। शुद्ध किसी भी परिस्थिति में विचलित नहीं होता, नहीं, वो किसी के प्रति फिर चालू होता है, न ही अपने शत्रु को शत्रु बनाता है। वह तो सोचता है। ये व्यक्ति मेरे नीदत दुष्कर्मों के कारण मेरा शत्रु बना हुआ है। अत विरोध करने की अपेक्षा कष्ट सहना अच्छा है। शिवन भावलतमकेद दसवें अध्याय के चौदहवें, दसवें स्कंध के चौदहवे अध्याय के आठवें शोक में कहा गया है। तत्नवपदसमेषमानो गुना ने नेवा पा। जब भी कोई वक्त दूसरे वर में पड़ता है तो वह सोचता है कि वह वार्ड की मेरे ऊपर कृपा भी है। विगत दुष्कर्मों के अनुसार इस से भी अधिक कष्ट भोगना चाहिए था। यह तो बहुत कृपा है कि मुझे मिलने वाला पूरा दर्द नहीं मिल रहा है। भगवत दीपा से थोड़ा हिरण मिल रहा है। अतेवअनेकष्टपूर्व परिस्थितियों में भी वह सदेव शाम बना रहता है। वक्त सदेव, प्राणी, पर, यहाँ तक की अपने शत्रु पर भी दयालु होता है। यह वह का अर्थ यह है कि वक्त शारीरिक कष्टों को प्रधानता नहीं प्रदान करता, क्योंकि वह अच्छी तरह जानता है कि वो बहुत ही शरीर नहीं है। वह अपने को शरीर नहीं मानता है। अत वह वित्य अनुकार के बोझ से मुक्त रहता है और सुख तथा दुख में संभाव रखता है। वह सही शुरू होता है। और भगवत कृपा से जो कुछ प्राप्त होता है, उसी से संतुष्ट रहता है। वह ऐसी वस्तु को प्राप्त करने का प्रयास नहीं करता। जो कठिनाई से मिले, अत वो सदी सन्चित रहता है। वो पूर्ण योगी होता है, क्योंकि वो अपने गुरु के आदेशों पर अटल रहता है। और जो कि उसके क्रिया वश में रहती है, अत वह दृढ़ होता है। वह झूठे तर्कों से विचलित नहीं होता, क्योंकि कोई उसे भक्ति के संकल्प से हटा नहीं सकता। वह पूर्णतया अवगत रहता है। कृष्ण उसके सास प्रभू है। अत कोई भी उसे विचलित नहीं कर सकता। इन समस्त गुणों के फलस्वरूप वह अपने मन तथा बुद्धि को पूर्णतया परमेश्वर और स्थिर करने में समर्थ होता है। भक्ति का ऐसा आदर्श अत्यंत दुर्गम है। लेकिन वक्त भक्ति के विधि विधानों का पालन करते हुए उसी अवस्था में स्थित रहता है। और फिर भगवान कहते हैं कि ऐसा वक्त ने अतिप्रिय, क्योंकि भगवान उसकी कृष्ण भावना से, युक्त, ारिकलाकोंमें से देव, महाराज की
ध्यान से सुना। नुवाल कम हो गया। ना क्या कह रहे हैं, कह रहे हैं कि अगर हम इन गुणों को अनुकूल करें, हम भगवान के ये बग बन जाएंगे, तो हर व्यक्ति की ही होनी है। भगवान के पीएफ बग बने। और इन 2 लोगों में अनेक गुणों का नहीं कर पा रहा। पहले कहते हैं, अजवेशताअजवेशा का अर्थ है, क्या है, अजवेशााइंशयासे रहे। कल हम आपको मोगा भग का उदाहरण दिया था कि मौका बहुत एशिया थी, इसके प्रति और दया से का। जब तक ये द्वेश रहेगा, तुम भगत पेपर कुल नहीं कर पाओगे। तो एशिया देश, एशिया देश है। सब एशिया क्सर क्यों होती है? हम सोचते हैं कि हम सोचते हैं, इसके पास बड़ी सुविधा है, तो हमारा पर रेशा हो जाती है। और एशिया अनेक रूप, अनेक रूप से होती है। एशिया से हम है। अगर हम देखते हैं कि किसी के पास कोई सुविधा है। हार, हमें यह सोचना चाह के भाई, कृपा व्यक्ति को अपने कर्मों के इतिहास के अनुसार सुकर दुख पाप हो जा, इस पर प्राप्त होता है। दुनिया कि खान में एशिया और एशिया तो आप भगवान को
है।
क्योंकि सबका मित्र है। भाई भरत क्या आए हैं, भागवत में दे देते हैं। शादी क्या है? और फूल से साली है। वह का मित्र है, किसी को अपना नहीं। और बड़ी मार गया है। शथूर अनेक सेना बन जाती है। यह मेरा भगवान के जो भर है, वो किसी नहीं मानता है। वो है। उसे मेरा इतना नुकसान और कहते है। वो। हमारा तो प्रबल सर्वर कहते है। अगर कष्ट की पोजीशन में हो। अगर आप कष्ट अनुभव कर ले। आप ये मान में क्या सोचना चाहिए? गवान की कृपा से मुझे थोड़ी मात्रा में कैश है। मुझे कैश पापोन हजारों बना है, थोड़ी मात्र में स नहीं मानता। और सब सा क्यों है। क्योंकि वो जानता है
और
कोई शक नहीं। समाज में क्या करे?
वो मेरा,
मेरा
और जो
बाजी
पर यहाँ का है कि जो भाई है, वो सब जो लोग बिलकुल कैसे है, क्या सान कर रहा है, काम करती है। राहुल नाइनटीन सिटी में हम बाबा जी के साथ 1 प्रोग्राम में गए थे, काला में 1 स्कूल बाबा जी ने लेक्चर दिया। मेशाesion canada की ro, वो शहर छोड़कर किसी और सान में जाने दे। तो पापा ने कहा। उन्होंने कहा कि न्होंने कहा बे की आपको, उनसे मिलना चाहते है कि मैंने कुछ मैं पिछले, धन में कुछ किया होगा, इसका बर्दाश नहीं है बुलाया। और आज आगे बढ़े तो ये मानसन भाव खोलने कैश वो उसे दोष नहीं देते और सोचते हैं कि मुझे इससे हजार। गुना अधिक चाहिए। स के पहल के छोटी मात्र में कठिनाएं भगवान के हैं देश ने और और सब व्यक्तियों को अपना मिरर का भाव रण। आगे ये नही सोच की तुम हर चीज के सभी ज्ञान। तब हम क्या सोचते हैं? ये हमारे ही संपत्ति है, सोचते हैं हमारी सब और हम इसका उपयोग करना चाहते हैं किस लिए? किस लिए? जो
यहाँ
वो क्या सोचता है? कि फोरम कौन है कि asian a control point मानोगे तो आप भगवान के बल बन सके। यहा का है। go जो व्यक्ति ये सोचता हूँ सो हम में क्या समझते हैं, ये हमारी सम्बंधी है, हमारे पैदा हुई है प्रकार रखेंगे तो उसका परिणाम ही ना पड़े। गीत गीत में भगवान क्या कहते है? बोकरा सुने या भगवान? भगवान कौन है? वो है से भोक्ता। हम सोचे कि भगवान से भोगता है हर कार्य का उपयोग किस लिए? हमारी समस्या ये है कि हम कह सुन मुझे भी नाम के लिए हम कहेंगे, हमारा तो कोई कहेंगे सहज है सम्बधी भगवान भगवान की है, भगवान की है। सब की चाबी तो धार क्षेत्र में ज्ञान प्राप्त कर दे। हम क्या सोचते हैं? क्या इसे गाय करना चाहिए? इसलिए हमें करना चाहिए किस लिए? अगर ब चाहे तो क्या है? बार बोले, समाज में जार जार, पाप,
मत
सबको भूलना पड़ा प्रकृति के नियम है। वेरी सिट पर हम से ज्ञान में रहते है। अक्सर लोग क्या करते, अज्ञान में जन्म लेते हैं, ज्ञान धन में पढते हैं और ज्ञान में भाग्यशाली बनते हो तो ज्ञान को यह कहा जा रहा है कि कभी यह नहीं सोचो कि मैं हूं हर चीज का सु जूड़ेांकर से बचो जूडेयांका के कारण हम जियो के दास बन जाते हैं। और झूठे अंका के कारण हम भगवान के संदेश को भी निकाल नहीं करते। हम सोचते हैं कि आई नो मुझे, बताओ मैं जानता और इस कारण हम भगवान के संग देश यहाँ कहा जा रहा है? झूठी कहा से बचे? झूठे अंगार से कैसे बच्चों? ज्ञान हो? क्या गया आई एम फूल नंबर वन, मैं हूँ, क्या भूख नंबरे मुझे। अगर असली ज्ञान चाहिए तो क्या करना चाहिए? भगवान के तो आकर रहेगा। असली आं है तो क्या भी का मैं क्या हूँ भगवान का दीतेदारनितेदज है सदा भगवान का। आज दास हो भगवान जाने। मायावनी भी वामन सेवर को जार है। तो आइये कहते है जो खुशी में समानता के साथ मान लो। आपको नहीं क्या होगा तुम यहाँ कहा जा रहा है समाज में तुमहो
हम
सोचते हैं कि कोई दुखरादनीहोनाजे दुख ता को नहीं आएगा मिलना माने हम दुख की प्राथना करते है दुखाता नहीं आता मान के जिस सूखा मांगे दुख भी आएगा मिला मांगे तो हमें कोई करता नहीं हो आयेगा बिना मांगे आएगा मांगे तुम्हे 1 बोल ज्यादा नहीं मिलेगा क्या समानता के साथ बोली से ये ये संदेश सेंशीलहोनाये बार बार पढ़ते हो। उसका क्या है कि बहुत ही महतवपूर्ण
है
इस में आगे सो भागवतम के 30 में साधु के नक्शों का वर्णन किया और वो में खाता अगर तुम चाहते हो हमारा केस अगर तुम चाहते हो वाइरबनगालकरक्या कहना चाहिए और क्या उदाहरण देते हैं उदाहरण देते हैं पेड से अध्यन कैसे में बहुत गर्मी होगी में तो हैवी बढ़ती जा रही है सर्दी में विकेट तो पेड़ जो है आज थिकिमेंसंतुष कहता है मुझे सी कमा कहता है आप गोगेमेंइसीच
सर्दी के मौसम में
आप गरम जो पेड़ है आपके आंगन में गरम तो कि पेड़ से भी ज्यादा सरजी ये सेंडेवंटरबिजाअसल में व वन से अनुकूल सो में से 1 समय 1 दुआ का फार्मूला बनाया है
मैं
गुरु बने ये देखिये इसमें है नए वाइटे, ये नहीं चाहिए मुझे चाहिए formula i know the format god krishna i don t have the menino आपको चेंज सो सदा जमाने में कई बार वो लोग कई लोग हमें क्या करना चाहिए क्या हो बीठा तो इसलिए आज ये प्रजाती के बेटा का चाय जागबताएरकाओतू कृष्णा का उपदेश देना सरल नहीं है सर सान में कहते हैं में समझते हैं इंडिया में सभी है सभी में किताबों को लेता है क्या कहते है विचार को बहाने ले तो विचार में जा रहा है विचार में अनेक कठिनाइयों का सामना करना स शी के शो पर जा ने जा रहे है सब हमारा विरोध कर रहे है जा जा रहे हो ये मत सोचो कि जाते ही हर व्यक्ति और फिर किताब है जातियों के खिलाफ डिस्ट्रीब्यूशन में अपनी किताब
हम
बात करे और 1 थोड़ी सी आई कनच आपको करना है सेंशन मे ये जो सेंशीरप और ट्राई कर सकोगे ज्यादा आनंद से करोगे 1 समय केस में बग जब चाय ans ओlesedसदासतुष तो जिसके आधार विज्ञान है की सदा संतोष रहता है कि आपको प्राप्त हो जो सुविधा चाहिए आज स्थिति में संतोष है भवाकेमितरथे मेरा नाम था सुधा बहुत गरीब थे होती थी और जब बिलकुल कभी जानेगा धोती क्यूँ है नाम था कोल सीदा
न
को कौन से छोड़ी को a छोटे बडे भाई डा गधा था कब बनाना इसे लोग गंगा को शान छोड़
दी
वो जब छोटी आंगन से 50 प्रतिशत देते थे इसमें और दिन रात आम करते रहते थे सो ली लोग उनकी दुकान में चोरी में संसद का ज्यादा खोला था और रोज दुकान से क्या माँ का वो पूछते थे केले का क्या भाव है तुम बहुत कमा हो किसी और की दुकान से जाकर क्यों नहीं खरीद लेते वो कहते थे है न शैली सप्लाई है बहने के लिए उसके पास 1 ही कमरा था और उस कमरे की कोई नही बारिशातीथीवोअपने आप को चिपका दे दे थे विभाग के साथ और 1 को बदर करने वाले थे।
उन्होंने
45 पीएम पंचों को बुलाया है। ज भेजा तुम वसानी चनोग जोर जोर से चिल्लाए अरे रे जोर जोर जोर रोसी थे उनके वो सो देते है दिल को भूल सा छोटी से
उनके
पास छोटी सी आम थी 50 परिसर देते भवानी भरत है आज में वो वृंदावन में थे समय उनका समाज में बहुत दूरचसकाना प्रधान मंत्री अलग अलग पेड़ के नीचे रह और लोकिन एग्जाम्पल ऑफ थे गुना करोड़ प्रति व्यक्ति थे धन गा कहाँ गए आ गए उन गए वहाँ वो शाम को उन्हें कुछ जो व्यक्ति भगवान की सेवा में जुड़ा है वो व्यक्ति में क्या रहेगा आज हम क्या देखते है anybody sad is wait कर पद्यों कमी है, करपी नहीं है, नगदी कमी नहीं है। ये क्या संतु स्तेमाल क्या मोर मोर
हो
r r r t a
go
to जो भोले वाले व्यक्ति हैं वो कभी संतोष नहीं होता उन्हें जिला प्राप्त हो उतना ही कम भक्त हैं वो कुछ अगर आप होना चाहते हो क्या है पाय मैं भगवान के सेल्फ कंट्रोल इंडियन को वश मिला है। ये बहुत की चर्चा है उन्हें कोई भी संतुष्ट कर सकता है। चाहे को क्या है भगवान के नाम में 1 नाम है और इसी के नाम कर क्या है। फोन कभी चाहे कितना आपको क्या लगेगा मु थोड़ा ज्यादा आप को भगवान की सेवा में तो मांग में जुड़ते मन बुद्धि इंदियों नहीं की है मुमे राम राम और हम की सेवा में जुड़े हैं में अनेक उलाहना पर जिनका उपदेश क्या है या क्या भगवान से जुड़े हो क्या यह भगवान के है हमेशा संतुष मन में रहता है। अगर हम कहें गोस्वामी और गो दासा। ये 2 शब्द हैं सी भाषा में गोस्वामी से कहते हैं जिसने मन महीना को वश किया और कोजासा किसे कहते हैं जो कि तो आप मान में प्रवेश करते आपको मन बुलिनियकोवरषमें लाना पड़े अगर आप उनके 10 बनोगे तो भक्ति में न हमें भक्ति में सफलता पाते। क्या करना है इंडियन को इंडियन ववशमिलाकेअरआपउनका उपयोग से भगवान के नाम गोल का उपयोग कर, मा मन में चले जाएंगे, हज का उपयोग कर किसी के मन को कई बार हमारे को सेव वाले हे में झाड़ू मारो हमें भंगी भी भगवान की सेवा में भंगी का काम ही भगवान की सेवा में दीदी तो सेवा हो उसने जरा अगर हम के स्वामी बने हम मास्टर बन जाए। अगर वो लेना चाहे भर्ती में कभी आगे नहीं बढ़ सके आप तैयार हो वहीं भर्ती के लिए किसी प्रकार का विरोध सेना में फ को के भी भेजा जाता है खो जाना ही पड़ता है पर हमारा भाव ना इंग्लिश में फेस है। कम्फर्ट जोन ने सुना क्या मतलब है है कॉम्फर्ट लोन हम सेवा करेंगे हमारे आपके आपका कम्फर्ट जोन आगे नेबरजर कुछ सेवा भी करते हैं, कुछ सेवा भी उल्टा भगवान प्रश्नों से है उस सेवा को लेकर मैंने कई बार बोला है कि बुधवारों में लार है वो लड़ते हैं किसी है सफेद सेवा प्रात करने के क्या वो झाडू देना है पानी पुराना है बड़ी टूट सेवा है तो
ये
लड़ते है, हमारा नंबर आना तो हमें भरती के हिमालय में सेवा, या और इन को क्या मन में गाना चाहिए। राय के भगवान कहते है और जो में भक्तियों में जुड़ता है। देश होकर विजिट में कई गन दिए। इनमें 1 है। इस व्रत में केवल 11 शो की शो है। गंध में मुझसे अगर आप भक्ति में आगे बढ़ना चाहो तो हमे क्या होना था। इससे डिटर्मिनेशन बोले समाज में न प्राप्त कर सके। आपको अच्छे हैं, कॉलेज में दाता भोई करनी, आपको अच्छी नौकरी दे। तो यहाँ भगवान भर्तियों को जुड़ना चाहिए कि जिस भाग का यह अर्थ है कि चाहे कठिनाई आये, हम हर स्थिति में करना है यह है कि मौसम मा नहीं है हम छोड़ so not be ferveterfriend, nglish farvedrfrend मौसम वो यह मौसम निकल जाता है हमारे बरती में जोड़ना चाहिए चाहे सुख हो हमें मार्ग जी नहीं भगवान आगे नो। bूdधीकुे भगवान में मन ली है और मन द्वारा या भगवान का और मन द्वारा। ये सोचना चाह कैसे आप भगवान मन का योग कर सकते हो? कहते हैं हमें मन को क्या कहना है, मंजू बनाना है मन बुद्धि को मुझे शासन 1 उधारण है जिनके द्वारा, आप की मन को क्या कहना मैं आपका बंद कहने या भगवान कह रहे हैं मान न मन के उपाय क्या
है
बुद्धी आपका मन कैसा है? गाँव से चुराओ चुढाओकिमतीवस कोई देखा नहीं है, भले ही कैमरा दे मन कैसा है बुद्धि जाओगे तो गाली मिलेगी। तो साधारण जीवन में buddi बुद्ध तो हम भगवान के मन बुद्धी को ऐसे भग हैं, वो मेरे होत बनना चाहो। तो क्या है ने बड़ा सुंदर है। तो हमें सारे गुलों को पुल करना चाहिए। बाजी तुम कदम 2 भगवान की तरफ भगवान 10 कदम छोड़ जाए। आप भरतियों में बड़ी इच्छा है वाह बनने की, उसकी क्या क्वालिफिकेशन होती है, वो है इन लोग शो आप पढिए यहाँ से बोलिए और याद कीजिये इन गुलों को अभी जीवन में उतारने के लिए आए क्या हो रा है। कम
detyecomsmisnitis इस प्रसंग से एक्टिंग म स सो इस बेटर को सफल टेस्ट, मेरा प्रश्न यह है सो बेटर को सफल टेस्ट, आपको रक्षा नहीं कर सकते
है
हम आप क्या नहीं कर सकते हैं?
नहीं अगर कोई शख्स के रूप में आ रहा है और तो हम सुरक्षा के जैसे हमारे मन है आप सिक्योरिटी के चौकीदार देखते हो वो कम क्यों लगे चौकीदार है, हर जाता हमें बॉम्बे असली चौकीदार है, ये हमें करना पड़ता है। सूरा में प्रैक्टिकल की
शत्रु अपना शत्रु
मान सकते है मान के शत्रु को,
हम भगवान के शत्रु को, हम अपना शत्रु मान सकते हैं। उदाहरण के लिए जटायु ने रावण से युद्ध के आता शिकार महिला को बचा तो जब कटाई के वध किया था दावत से सोची ने किया होगा की दुश्मन है तो भगवान के दुश्मन को हम अपने मान सकते हैं।
भगवान का
पेशावर शांत भारत से अपने
बल विनम्रता के बताया कि भक्तों को बहुत विनम्र होना चाहिए। ये बड़ा मुश्किल है विनम्र कभी कभी
हम सबसे मश कि हमें मत वाले, हमें हमारी वाली को मीठा रखना है, ये सबसे कट है। आप देखिये और भक्तों में भी कितना जोश होता है कितना क्रोध हरा सीके का पालन करना तो हमें bras im try gen, you will trim try yowilयाा मिठाई के साथ बोलना इसका वजन बोल जाता है। आपके शरीर का वजन होगा, सिक्सटी के जी पिंका का वजन है तो कार का वजन शरीर के वजन से ज्यादा है।
हेलो कुमार बहुत बहुत धन्यवाद जैसे बोला
की
हमे ना जो भाव रखता है या जितना आदमी जितना नीचे सेवा करते है तो इससे और बहुत प्रसन्न होते है लेकिन इन जनरल कभी कभी ऐसे भी है कि मंदिरों में हमारा ऑथोरिटी या योग से देखा जाता है कि जो लाइमलाइट में रहते है उन लोगो को काफी इंटरनेट किया जाता है इन फैक्ट कुछ ऐसा है जो बीजिंग को कभी कभी ऐसे भी डायरेक् भी बोल दिया जाता है वे कोई जना वाले बोल देते है तो ऐसे करेंगे स्पेशल जब कोई सीन अपनी बातों में विवाह करेंगे
अगर कोई में अधिकारी हमें भगतंग समझाना चाहा भगवान से भी प्रसन्न और कई उदार मुनि क्या मांदर की सफाई उधारण लिया किस बाद क्यों सेवा में 4 करना चाहि?
what should we do is the special master?
no, what a and man man instruction shan all the westin sir और गोल लाइफ फिर नोट भी हम साफ बनना चाहते हैं, हम सा में जुड़ रहे हैं, ये भावना साफ बनेंगे, भाव होना चाहिए, दास बनेंगे जितना, दास बनोगे ज्यादा
मेरा सवाल, मेरा सवाल, हमारे ssl चाहते हैं कि हम प्रचार करें, लेकिन प्रचार के दौरान जो है वो हम ये चाहते हैं कि आगे वाले में बदलाव हो वो भक्ति में आगे बढ़े और अच्छे सेवक बने। अच्छे भक्त बदलेगी, उसी के साथ साथ खुद पर योग का काम करने के खुद के ऊपर जो भक्ति का प्रभाव होना चाहिए उसका हम उतना ध्यान नहीं देते तो इससे कैसे बचे कैसे हम खुद भी सुधरना चाहिए भक्ति वाला प्रचार करने के दौरान हम जो है सोचते हैं कि आगे वाले में बदलाव होना चाहिए, भक्ति में आगे बढ़ना चाहिए लेकिन उसी दौरान खुद पर हम खुद के अंदर तो में ध्यान देना। भूल जाते हैं तो इससे इससे कैसे
बचे मदद दूसरों के जाते है पापाजी कैसे थे we should be the flाyबीफ्लाई में क्या आंसर है फ्लाई मी गंदे थाना में निवास कर r कोई कमजोरी देख रहे हो तो आप अगर नहीं, आपके पास योग्यता नहीं है, आपकी जो सीन है बग्स को कह सकते हैं कि नई कमी देख रहा हूँ, इसमें सुधार न आप सुधार है।
hrikshnadnyaasjspenशn lot of the प्रोपराइटर एंड कंट्रोलर और हमारे जो कोटा का हम सब मिल रहा है, काम में ज्यादा तो everything is free tested to be have some privil? अगर सब पूर्व निर्धारित है तो हमारे हाथ में क्या है?
you have to w, because lot says? what is right? what is wrong and it you in seponesoyou have the fee? you can we want to swine lord, you can a lot in cordes
thank
you
okay i
krishna amtafisr प्रोब्लम मेरा प्रणाम, महाराज आज जो आपने लेक्चर दिया, मैंने आज पहली बार बहुत अच्छे से सब समझा महाराज। आपने जो कुछ बताया, बहुत ज्यादा ऐसा लग रहा है कि उसे फॉलो कर पाना बहुत कठिन है। लेकिन फिर भी सुंदर बहुत प्रयास कर रहे हैं, उस समय पढ़ा रहे हैं। तो प्रयास से मरज यही पूछना है कि ये जो कुछ हक बता रहे हैं, ये प्रैक्टिकली कर पाना बहुत कठिन
है, बहुत कठिन है, बहुत कठिन है। but it is not in bosiblsosctin posible छाई हार्ड किशन इस वन्स दयारे हमेशा हमारा सहयोग देने के लिए हमें पहला कदम उठाना पड़ेगा फ्री के
मेरा खुद
देख क सोने के बताया की हमें
बिल्कुल से होना ये बिलकुल नीचे वाले
भक्तों
से
बताया की सुनी के ब अपर क्लास के भरते लिए की क्लास
के भकतेलिअपरक्लासपर क्लास के भक्तों को ज्यादा गम ज्यादा उदाहरण है हमारा सिधांत है पीच ए्जाहउदरणसे को संदेश दे ते है के don preaching so we have to sad example जूनियर हो सब को और कोई भी करमा से मुक्त नहीं है हमारा इतना ऊंचा पद है, कोई हमें कुछ नहीं बोल सकता है, कोई भी कर्मो से मुक्त नहीं है का प्लाई ओके
रनिशमनाजीमैनेइसबे पदक में लिखा कि, सच स्टैंडर्ड ऑफ डिवोशनल सर्विसेज, अंडाउटेड भी वेरी रेयर, बट, इट वोल्टी बिकम सिचुएटेड इन द स्टेज, वाई कॉलिंग, द रेग्ुलेटिवनस्पर ऑफ डिवोशनल सर्विस, तुम्हारे जेसे साधन भक्ति का जो अभ्यास करते हैं वो अभ्या करते रहने से ये सब हमारे
प्रैक्टिसिंग tak time आप यह नहीं सोच सकते हैं कि आज हम भक्ति से जुड़े हैं, कल हमें भगवान का रूप प्रै
की
होती हे गुरु माने।
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