भक्तियोग का वर्णन | BG 12.9 | 31 Mar 1996 | Srīla Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī Maharaja

In this extensive devotional lecture, Srīla Gopāla Kṛṣṇa Goswāmī Maharaja expounds upon the teachings of Bhagavad‑Gītā chapter 12, verse 9, elucidating the nature and practice of bhakti‑yoga. He begins with a reverent invocation and proceeds to describe the original instruction given by the sun‑god Vivasvan, tracing its transmission through ancient monarchs such as Mahārāja Ekśavaku. The discourse weaves together scriptural citations, mythic anecdotes, and practical guidance. Key themes include the distinction between saguna (personal) and nirguṇa (formless) conceptions of the Divine, the centrality of the Hare Krishna mantra, the importance of steady mind (citta‑sthiratā) and heart (hṛdaya‑sthiratā) in devotion, and the role of guru‑shishya relationship and community service. The speaker repeatedly emphasizes that true bhakti is unwavering, that the devotee must align thoughts, speech, and actions with divine consciousness, and that obstacles such as doubt or material attachment are overcome through chanting, meditation, and selfless service. The lecture concludes with moral stories illustrating the power of vows made before the deity’s image, reinforcing the principle that sincere devotion never fails.
Chapters
ओम्रमो भगवते वास दिवाय। ओम्रमो भगवते वास दिवाय। ओम्रमो भगवते वास दिवाय। ओम्रमो भगवते वास दिवाय। ओम्रमो भगवते वास दिवाय। ओम्रमो भगवते वास दिवाय। ओम्रमो भगवते वास दिवाय। ओम्रमो भगवते वास बारविया दिवाय। दिखाय का उदेश आज आपको देंगे भगवत घीता के बारविया दिखाय का नाम है खती हो बारविया दिखाय के नौ विश्लोग को आपको पढ़े कर सुनाएंगे अधाचीतं समाधातों नाशक्नोशी मैं सिरम् अभ्यासयुगेना ततो मां इच्छाप्तुम � एक हरणज़ यदि तुम अपने चित को अविचल धाव से मुझे पर स्थिर नहीं कर सके तो तुम भक्तियों के विदी विधानों का पालन करो इस परकार तुम मुझे प्रात करने की चाहाँ उत्पन करो ओमियां भिमिरांदास्या ज्ञाना इंचला अचल धया चक्षुर मिलिता जेना रस्माई श्रीप रवे नमः श्रीचेता ज्यां मनो विस्तव साधिता जेना भूतले स्वयं लूपा कदावयां चदाधी स्वावसंदिखां बन्ते हम श्रीप लोग श्री नुपा पदकम्रं श्री गुरुन वैश्णा वंशा श्री नुपा सग्राजतां सहाँजना लगुणा सर्वतां संस देवं सत्वेतां सुवधूतां परिजना समयतां श्रिष्णा चेतन्या देवं श्री राजवा श्रिष्णा पतां सहाँजना दनीदा श्रीव शाधान तमश्चा एक प्रिश्णा करुणा सेन्तो दिन पंदू जगतते भोगेता भोगीका कंता रादा करता नमसुते सबता कंचन दोराअगी राधेत सबनेश्वरी पिश्वानू सुदेवि शनमामि हरिद्विये जाय श्रीव श्रीव कृष्णा चेतन्य प्रभु दिख्यनंदः श्री अन्वेद विदानः शिमशदि गोर्म चलंदः खरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा धर्मकीता का जो उप्देश है वो बहुती प्रांची उप्देश है सबसे पहले ये उप्देश भगवान ने सूर्य की देवता विवास्मान को दिया था और सूर्य की देवता विवास्मान को ये उप्देश भगवान ने दिया था क्रोरों साल पहले और फिर ये उ� महराज एकश्वाकू तक पहुंचा महराज एकश्वाकू का राज्या था इस प्रित्री पर लगपत 20 लाँ साल पूर्व चेत्र युगर के आदन में उनका राज्या था इस प्रित्री पर और ठक्वत घीता में हमें पुरे वेदिक शास्व का सार्व प्रास होता है � अर्जुन को दिया था भगवत कीता के बारवे अधिखाय में भगवान हमें भक्तियों के अनेक सान्पनों का वड़नंग करते हैं सबसे पड़े तो भगवान कहते हैं मन मना भावा मन मनतो मनयाजी मनन मसको हे अर्जुन सगा मेरा चिंतन करो चोबेत खंडे मेरा चिंतन करो प چوبین گھنٹے بھگوان کا چنتن کرنا سرال کاریاں نہیں ہے ہمارے کے بھی کھتے ہیں ہم جھوکیوں بولے تو چوبین گھنٹے کرتن کرنا اور اس بھگوان کا سمانن کرنا اتنا سرال نہیں ہے تو بھگوان کہتے ہیں کہ اگر تم چوبین گھنٹے میرا سمانن نہیں کر سکتے تو تم بھکتیوں کی نیوموں کا پانن کرو اگر تم بھکتیوں کی نیوموں کا پانن نہیں کر سکتے تو اپنے کرم کو میرے لیے ارپن کرو اگر تم کرم کو میرے لیے ارپن نہیں کر سکتے تو اپنی کرموں کے فرقوں سے مجھے تیار ہو اگر تم کرموں کے فرقوں سے مجھے تیار نہیں سکتے تو میرے پرچار میں کسی نہیں کیسی ہوتا سیوک ہو पर कुछ जा कुछ तो करो ये मानवनी मन को सभल बनाने के लिए जैसे की जब कोई माता पिता अभी मुलाद को सभल बनाने का प्रयास करती हैं तो प्रयास करते हैं माता पिता के किसी न किसी रूप से बच्चे सुझर जाएं तो उसी प्रकार बनवान भी हमें उपदेश द جو نیم ہیں ان کا ہمیں پالن کرنا چاہئے بھکتیوں کے ودی ودھانوں کا پالن تو بھکتیوں کے ودی ودھان کیا ہیں؟ کیونکہ ایک روپ سے ہر لوگ بھی یہ کہتا کہ ہم بھگوان کے بھگت ہیں پھر بھکتیوں کا پالن کرنا چاہئے ودھی ودھانوں کے انصاف ان پر اتھار ہے بھکتیوں کا ارض ہے प्रेंबाई सेवा मन इन्पियों के द्वारा किस न किसी लुप से भगवान के समबन में जोड़ना ये है भक्तियों का समशेख में आगे तो भक्ति के बिदी पिथान क्या है जैसे इस मंदर में स्रीशी लुप मिली प्राकडश का विग्राह है भगवान अपन अपने आच्च विग्रहा के रूप हैं आच्च विग्रहा भगवान का भी रूप है भगवान निराकार नहीं है जो व्यक्ती यह सोचते हैं कि भगवान निराकार है वो भगवान की अनेग शक्तियों को उनों को नहीं समझते हैं भगवान साकार है उनका रूप है पर उनके रूप और हमारे रूप में अंतर है हमारा जो शरीर है अस्ते अस्ते बुड़ा होता है नश्ट होता है तर दक्वान के जो शरीर है उस समय के साथ नश्ट नहीं होता है इसलिए प्रमाधी कहते हैं अध्यम् पुराना पुरुषम् नव यौनं चार अग सबसे प्र भगवान अपने आपको प्रकट करते हैं आच्चा विग्रहा के रूप में क्यों भगतों को मौका देने के लिए उनका स्मौलन करने के लिए उनकी सेवा में चूड़ने के लिए अगर हम सोचे की ये केवल मुर्ती है और ये नहीं सोचें कि भगवान इन मुर् نہیں کھاسکتے ہیں جب ہم ان مورتیوں کے سامنے ہم آتے ہیں تو ہمیں مونا نہیں چاہئے کہ بھگوان سویم ان مورتیوں میں اُپستے ہیں شاستر میں ایک قطعہ ہے ساکشی گوپاس جس کے دوارہ ہمیں یہ جان ملتا ہے کہ اس کے سپرکار بھگوان اور ان مورتیوں میں کوئی انتر نہیں سنشیف میں قطعہ یہ سپرکار تھے एक बुड़ा धनी ब्यक्ति तीर के स्थान में गया था यात्रा करने के लिए और वहाँ तीर के स्थान में एक जवान ब्रामन ने उनका स्वयोग दिया अपने यात्रा को सपल हनाने में और वो बुड़ा धनी ब्रामन इतना भारी हो गया था इस गरीव ब्रामन की पती کہ मुझे जनूर के इस गरीग प्रामनन के लिए कुछ सेवा का कारिया रहना है। तो उसने उससे पूछा, मैं तुम्हारे लिए क्या कर सकता हूँ? तुम ने मेरी जान बचाई है, इस यात्र को सपोड बनाने में स्रियोग दिया है। उस गरीग प्रामनन ने कहा, सेव आपको याज़ा पूरी करने में सेयोग दिया कुछ नहीं चाहिए आपसे तो सेव जी ने कहा नहीं नहीं कुछ तो जिरूरी करूँगा मैं ठीक है मेरी एक बेटी है उसका विवा मैं करूँगा तुम्हारे साथ गरी ब्राम्द ने कहा आप तो मेरा मखाल कर रहे हो आप इ اپکی بیتیا کی شادی میرے ساتھ کرنے کے لیے۔ کھیت، کری برامن نے کہا یہ میری جمع داری ہے میرا آدش کوئی ٹال نہیں سکتا میرے گھر میں۔ تو کری برامن نے کہا، ٹھیک ہے اگر آپ کی یہی اچھا ہے میں تو آپ سے کچھ نہیں مانگ رہا ہوں۔ پر اگر یہ آپ کی حافظ کی اچھا ہے تو آپ یہ وچن भगवान की गोपाल, भगवान गोपाल की मुंती के सामने लो तो गोपाल की मुंती के सामने उन्होंने ये वच्छन दिया कि मैं अपने बीटी की शादी इतने समय तर उमारे साथ करवा चुछा समय बीच किया और गरी ब्राह्मन को कोई सुनुष्णा नहीं पहुंच ल آپ کو یاد ہے آپ نے وہ وعدہ دیا تھا مجھے سیدھ جی نے گھن لوٹنے پر یہ چھرچہ کی تھی اپنی پتنی کے ساتھ اور بیٹے کے ساتھ پھر وہ نے اسے سکاک نہیں کیا سیدھ جی کی پتنی نے کہا کہ اگر تم کسی میں لوگ سے نئے بیٹی کی شارع کراؤں گے اس گری برامن سے تو میں آپ کا ہتیا کروں گے اور اُن کے بیٹے میں بھی اِس کا ابروک کیا۔ تو جب سیڑھ جی کے پاس یہ برامن پہنچا اُس کو یاد لیلانے کے لئے سیڑھ جی نے کہا ارے بھائی میں نے سب کو کب دیا تھا یہ وجہ سے؟ اُس نے بالکل انکار کر دیا۔ پھر یہ گری برامن برامنوں کو لے کر آیا کیونکہ بھگوان کے ملتی کے سامنے وچن دیا تھا اُس کا پالت نہیں کرے تو اِس پر ہی گوش آئے گا तो दोशों अप्रादन दे बचाने के लिए प्री ब्रामन, प्रामनों की, कई प्रामनों को ले के आए जब सब प्रामनों दे कहा सेड़ जी से क्या पुछ अपने वचन का पालन करना चाहिए सेड़ जी ने कहा कि अरे उसकी बेटे ने कहा तुम जानते नहीं हो ये चोड़ा سارا پیسہ اس کا لوگ لیا تو دھنی بھرامن کی بیستی ہو گئی سب بھرامنوں کے سامنے وہ کہہ رہا تھا نہیں نہیں یہ خود بول رہے ہیں پر کسی نے ان کا بیشواس نہیں کیا خیر انت میں اس دھنی بھرامن کے بیٹے نے کہا کہ اگر تم کوئی ساکشی لا سکتے ہو کہ میرے پتا نے یہ نیڈنے کیا تھا کہ وہ میری بہن کی شادی تمہارے ساتھ کروائیں گے تو پھر میں تیار ہو جاؤں گا یہ شادی کی بشیر میں گری برامن نے کہا ہے میرا ایک سانکشی اس نے کہا کہ کون بھاگوان تمہارے پیتا نے یہ وچن بھاگوان کوبا کی مونتی کے سامنے دیا تھا تو اُن کا وہ بیٹا اُن کا برامن کا ہسنے لگا اس کے مند میں یہ کچھ وہا تھا بھاگوان نے کہا تھا वो तो सोचता था ये पथथ के मुर्टी है ये कहान से साक्षी बनेगे तो वो खुश होकर कहने लगा था ठीक है मान लिया अगर मारी गुपास के मुर्टी ये साक्षी ये गवाई देंगे कि मेरे पिता ने ये वचन दिया था हम तो नहीं से प्यार उठाओंगा क्योंकि उस अपनी पुरुपाल की मुल्दी के बाद पहुंचे वापस जुन्दावन में उनके चाला में परनाम करके कहने लगे मेरी इजद में तीम्में कही है आप मेरी इजद की रखशा करो आप साक्षी हो इस घटना के तो पुरुपाल मुल्दी ने कहा साक्षी तो या भू اور تیر کرنے وہ گئے تھے برنداوان میں برنداوان سے اڑستا تو کافی لمبا سفر ہے میں تو چل کر نہیں آ سکتا تو قریب برامن نے کہا اے بہو آپ ساتھے مرکزوں کے لیے کچھ بھی کر سکتے ہو اور اگر آپ ہو سکتے ہو تو آپ چل بھی سکتے ہو اور پھر گوپا کی مدی ساچی بن کر آئیں اڑستا تک اور پھر پورے گھام کے لوگوں نے سنا گوبا کی موردی نے گواہی دی کہ ہاں پورے گھاموں نے یہ بچھا دیا تو اس قطعہ کے دوارہ ہم کیون اپکو یہ بتانا چاہتے ہیں کہ اگر سردھاں کے ساتھ अग्वान کی موردی کے सेवा کرو گے दर्शन प्रास करو گے یہ مانتے ہو کہ भगवान हैं आच्छा ग्रहा में पस्तित हैं तो फिर आप भक्तियों के एपार में आगे होते हैं क्यों भक्तियों के विदी विधानों का पाला है एक और विदी विधान है हरे कृष्ण मंत्र का उचारल करना हैं हम हरे कृष्ण मंत्र का उचारल क्यों करते हैं क्यो चारे मौंके युग हैं सत्य युग, सेद्य युग, द्वार्व युग, और घर्युग हर युग में अलग अलग सादन होता है अग्वान को रात करने के लिए जैसे कि सत्य युग में क्या सादन है अग्वान का चिंजन करने तो लोगों में युगता थी अग्वान का चिं� जैसे वान्दिकी जी ने भगवान का चित्तर किया था साथ ला साथ सेट्र युग्र में बड़े बड़ी यक्यों लोग करते थे ध्वाप युग्र में रेट अर्पन करते थे भगवान के चर्णों में पर कनिव का लक्षन येड़ है कि अब आती हैं तो भागशाली हैं और � جس کا हर व्यक्ति लाभ उठा होता है जब हम ये महा मंतर का उचारण करते हैं भगवान के पुनों का आप वर्णन करते हैं तो इसके दौरा हम भगवान को आकरिशन करते हैं जैसे के महा मंतर के उचारण के दौरा हम भगवान के पात्मा करते हैं हमको सेवा लोग, हमक कि भक्तों को भगवान के अनेक उनों का वर्णन करना चाहें भगवान की महिमा का वर्णन करना चाहें और भगवान तो कहते हैं कि मेरा जो भक्त है वो कभी नश नहीं हो श्रीमा धगवत के आत्मे सिस्कंत में एक कथा है कि राजा की जिसका नाम था महराज इंदर दुबना धमनाडू के पाहं सक्षिन भारत में सोनन अतने राज्जे को तियाग कर भावणों में चल गया थे भगवान का चिंतन करने तो एक संत वहाँ पहुंचे क्योंकि भगवान के चिंतन में लीन थे तो उनको आधर नहीं दे पाए तो उस संत का उनने स्वागत नहीं किया तो संथ जो है उस या आशिरपा से या श्राथ से दो गुरी आपकी भगलाई के लिए होते हैं वो समझने के लिए अन्ध्यात्मिक शक्ती चाहिए और ज्ञान चाहिए है खेल अगले जनब में महाराज इंद्रतुम्दा एक बड़े प्रसिद हाथी बने जितन का नाम था कि जि और जंगल के वो राजा मनते हैं अच्छा तो शेर को जंगल का राजा मानते हैं पर यह हाथी जंगल के राजा मनते हैं सारे चान्मण उन्जे तरते थे उनको आदर देते थे एक दिन हाथी हाथीयों के साथ वो अपनी पत्यों के साथ जल में खेल दे खेल दे आए اسی منا کا بیوار آپ پرستود کرو گے جیسے سمجھو کس کو کتے کا شریف ملا تو کتے کا شریف مل جائے تو آپ بات کیسے کرو گے بھاو بھاو بھاو پھر سمجھو کس کو بلی کا شریف ملے تو پھر میو میو میو کر کے آپ مطلع کرو گے آپ اور ہم نہیں سمجھ سکتے اپنے دوسری بلی سمجھ سکتی ہے تو جس طرح کا شریف پراتھ ہو گا اسی پرکار کا بیوار ہوتا ہے بیفتی کا تو اندھے دندہ مراج پتہ وہ ہاتھی کا شریف ملا تو ہاتھی کا بیوار تھا پتیوں سے کھیلنا وغیرہ پہلے تو اندھے دندہ مراج کی روپے میں تو انہوں نے سب کو تیار دیا تھا خیر اب شراب ملا تھا جس کے کارنہ ہاتھی کا دہن ملا تو ایک دن جب وہ پتیوں کے ساتھ کھیلنے آئے تھے جلنے तो जल में एक मगरमच था उस मगरमच ने उनके पाहूंड फकर लिया मगरमच तो आप जानते हो वह छोटा जानवर है हाथी की प्रिज्दा में पर एक अंतर ये है कि मगरमच है जल का जानवर और हाथी है पृत्री का हो तो अजार सास तक यूप हुआ थो ہاتھی پرایات کر رہا تھا کسی پرکار سے باؤں کو مگرمچ کے موں سے نکالا جاتی اور دن پر دن یہ ہوا کہ ہاتھی کم جوڑ ہوتے گیا اور مگرمچ تو ہے اس کی طاقت شکری بڑھتے گئے اس تجھتنا کے دوالہ ہم یہ دیکھ سکتے ہیں کہ جیسے ہم ساتھ کا جو سوروپ ہے وہ ہے ادھیاتمک پر ہم پریاست کر رہے ہیں کہ بہت سے سماج میں ہم کچھ نہ کچھ پربن کر کے سکھ کی پرابتی کریں کبھی ہم نئی موٹر کھڑی دیتے ہیں کبھی چھٹی میں امریکہ چلے جاتے ہیں کبھی بڑا دھنڈا، نیا پیکٹری وغیرہ لگا لیتے ہیں پر ہم سوچتے ہیں کہ کاریگرموں کے دوارہ ہمیں سکھ کی پرابتی ہوئی ہیں پر انادی راہ سے آج سے نہیں کل سے نہیں انادی کھال سے ہم یہ دیکھتے آئے ہیں کہ بہت ایک سنسان میں کوئی سکھی نہیں رہ سکتا جس نے بھی چلنگ لیا ہے وہ جرور بڑا ہے چاہے کینیا میں ہو یا امریکہ میں ہو کوئی نیحاس میں کوئی ایک ادھارت نہیں دے سکتا کسی بیفتی کا جس کو منتقل کے سانے نہیں چھکنا پڑے جس کو بڑا نہیں ہونا پڑے جس کو روت ویڑا انبواب نہیں کرنا پڑے سب کو یہ انہیں پرکار کے کشت کو بننے پڑتے ہیں پھر ہم اتنے گھونٹ ہیں کہ ان سب سمجھیوں کو دیکھتے ہوئے بھی ہم یہ سوچتے ہیں کہ ہم کسی پرکار سے ان کشتوں سے اپنے آپ کو پچھا دیں گے تو یہ ہاڈیو اور مکرمچ کا یوت ایک ہزار سال تک ہوا اور अनेंग देवता देवी यूठ को देख रहे थे देवता ये सोच रहे थे हाथी हमारा सुयोग पांगेगा पर जब ये हाथी बहुत कठें स्थिती में था उसने पूरा प्रयास कर लिया था अपने आपको बचाने के लिए वो असफन हुआ आन्त में उससे याद आया क् पूर्वजनन में तो ये बहुत बड़ा भग था भगवान जिसको पूर्वजनन की सूतियां यादा थी और जब उसे पूर्वजनन की सूतियां यादा आई तो उसने बहवान कृशन का गुन्डान शुरू कर दिया भुण सूतियों के दौर और जैसे बहवान ने अपने भ� उस हाथी के पाउं को मगरमच के भूँ से लिकाल दिया और मगरमच के मूप्शरीय को दो तुक्रों में कर दिया इस कठना के द्वारा मगरमच भी भगवान के दाम दिया वो गंधारो लोग का था और हाथी भी भगवान के दाम दिया क्योंकि तोनों को भगवान का दर्शन � परंद भगवान के लावा और कीसी को नहीं जानता है हर स्थिती में वो केवल परंद भगवान के ही शर्नगर्ष होता है इसी विषय के ओपर महाभारत में एक और सुन्दर कसा है एक समय जुरवासा मुनी जुरवासा मुनी पड़े प्रस्तित योगी थे वो 10,000 सिश्यों पहुंचे दुर्योधन के महल में और दुर्योधन जो जितरास्तर के पुत्र थे वो राजनिती में बहुत उशार थे तो दुर्योधन ने उनका बड़ा आदनिया स्वाकत किया बहुत अच्छी देखवाल की जिसके कारण दर्वासमुदी जी बहुत प्रसंद हुए और निक کہ تم سے میری پڑیشی سواگت کی ہے میں تمہیں کوئی وردان دینا چاہتا ہوں مانگو تو دریودھن نے کہا جیسے آپ نے میرے محل کو پووچھر بنایا ہے اسی پرکار میرا پریہ بھائی یدشتر یوں کہ اس وقت جنگل میں ہے بند میں ہے آپ اس کی جھپری کو بھی پوڑھتا بنا دو آپ سے جانتے ہو کہ دیوری ہودھن کی ہندے میں کوئی پریم نہیں تھا یہ دشتر کے پرتیب ہاں ان کے ہندے میں تو یہی بھالنا ہے کہ کیسے ان پانڈوں کو ستن کیا جائے اور انہوں نے کوئی کاریاں نہیں چھوڑا جس کے دوارہ یہ پانڈوں کا انتہا جائے اور کیونکہ جیسے کہا گیا ہے राखे कृष्णा मारे के मारे कृष्णा राखे के जिसको कृष्ण भगवान बचाना चाहे उसको कोई मार नहीं सकता और जिसको मारना चाहे उसको कोई बचान नहीं सकता और पांड़ा उपर भगवान की आश्रभात थी वो भग थे तो धुर्योदन का कोई औरी विचार था जैसे कि दुर्योधन ने जिवेधन किया था युदिश्टर की छोपडी में जंगल में जंगल में तो छोपडी थी और क्या था कोई बड़ा महल थोड़ी था तो छोपडी में पहुंचे तो युदिश्टर महाज उनका स्वागन किया परेआदर के साथ और जब मेमान आके आये आये बैठे प्रशात खाये एक चीज़ है कि दुर्योदन ने जब उनसे निवेधन किया तुम मेरे भाई के घट आओ उन्होंने समय भी दिया कब जाने के लिए क्योंकि दुर्योदन की एच्छा थी कि वो पौँचे जब कि युदिष्टरम का फिर सौगत नहीं कर सके کیونکہ दुर्वासन मुनी में एक गुन था एक गुन यह है कि वो प्रसन भी बड़ी चल्दी हो जाते हैं और वो ख्रोगत भी बहुत चल्दी हो जाते हैं तो दुर्योधन युदेश्टर की पत्ति द्रोपदी को सुयों की देवता से एक खास वादान प्राप्त हुआ था जिस कि उने एक अक्शाय पत्र वो प्राप्त हुआ था कि जब तक रोपनी अपना तुप्यार का भोजन नहीं करें जितने मी लोग उनके घर में आएंगे वो उनको भोजन खिला सकेंगे अजार क्या लाखो लोग में आ जाते हैं क्योंकि जब युदिष्टर जंगल में ज जब वो शहर में थे तो भोत ब्रामनों सब को भोजन खिलाते थे पर जब उन्हें जंगल में जाना पड़ा तो उनको ये चिंता थी कि जंगल में हम ये कारिया कैसे कर सकेगे तो भी वहां तो इतनी सुविदा नहीं होगी तो सुरिय के देवता ने उन्हें एक वर दिया अक् پھر کیونکہ ان کے دوپیر کے بوجھن کھانے پر اس کے بعد کچھ بوجھن نہیں ملتا تھا تو اسی لئے جریوہ دھن نے انہیں کہا اب دوپیر کے سبے جانا دو بجے تھی ان کو پتا تھا وہ ایک بجے کھانا کھانے گے انہیں کہا دو بجے جانا تو مدیشتر نے تو اپنے مہمان کو نمنظر دیا بوجھن کھانے کے لئے تو سرواستہ مولی نے کہا ठीक है मैं आता हूँ भोजन खाने उनके साथ 10,000 सिश्यों दे आज तो 10,000 सिश्यों के साथ कोई आत्ता नहीं कर सकता है एक हवाई जाथ की टिकेट प्रिशे में दिवाना उड़ जाएगा पर विवासमुनी एपना योगिक सिधियां थी जिसके द्वारा वो एक देश ते द ہاں ناگویگڑا کیا ہو سکتا ہے تو وہ دس ہزار سشیوں کے ساتھ آئے ان کے گھر یدیشتر کے گھر تو انہوں نے کہا ہاں ٹھیک ہے ہم بھوجن کرنے آتے ہیں ہم جلڑا کوپیتر ندی میں جلڑا سنان کر کے آجائیں جو برامن ہیں وہ دن میں تین بار سنان کرتے ہیں انہوں نے دپیار کا سنان نہیں کیا تو سنان کرنے گئے تو وہاں سے منی اپنے سشیوں کے ساتھ वो युदिश्टे ने जोपदी से कहा दस जान भक्तों के लिए भोजन तियार करो जोपदी ने कहा कि रसोई में कुछ भी नहीं अभी और अभी मैंने भी भोजन खा लिया है अग मैं इन दस जान मेमानों की स्वागत नहीं कर सकती वो जोपदी चिंदित हो गई क्यों? क्यों وہ جلدی کھو دیت ہو جاتے ہیں اور آپ میوزیشنر نے تو ان کو نمانتر دیا ہے بھوجن کھانے کے لیے اور جب وہ بھوجن کھانے آئیں گے تو کچھ ہوگا ہی نہیں کھانے کے لیے اور پھر پروازمانی کھو دیت ہو کر ان کو شراب دیں گے اور کشت بھگتنے کے لیے تو ضروپتی گھڑا آ گئی رونے لگی اور بھچو جائے سکھ میں اور دکھ میں ایک ہی جگہ شرن لیتا ہے بھگوان کے چڑھنوں میں سکھ میں اکثر ہم بھگوان کو پھول جاتے ہیں سکھ میں ہم سوچتے ہیں ہماری پتی نے ہمیں سپک بنا رہا ہے دکھ میں اگر آپ کے پاکی اچھی ہوں پورو جنم کے تو آپ دکھ میں بھگوان کے شرنہ کا سو جاتے ہو نہیں تو دکھ میں شراب کی پودوں کی شرن لیتے ہو یا بری سنگل کی द्रोपती धब्ला गई इस धर्म की स्थिती को देखता और वो परद भगवाईच्यकेशन से प्रातना करने लगी बचाओ मुझे आग के इलावा कोई मुझे इस स्थिती में बचा नहीं सकता जैसे वो प्रातना कर रही थी भगवाईच्यकेशन वहाँ पहुंच गए उनकी � یونیشتر مجھے بہت بھوک لگی کچھ کھانے کو دو ارمان کو کبھی بھوک نہیں لگی تو وہ موقع دیتے ہیں اپنے بھاکتوں کو سیوہ کرنے کا جیسے یسودہ ماتا کو چندہ ہوتی تھی کوئی میرے پیٹے کو زہن نہیں کھلا دے میرے پیٹے نے کھانا نہیں کھایا ٹھیک سمجھو دھوپدی نے کہا بھگوان سے آپ سے کچھ بچا ہی نہیں ہماری رسوئی میں سر تھانا ختم کچھ نہیں ہے آپ کے لیے بھگوان نے کہا نہیں نہیں جاؤ کیاں سے دیکھو کچھ کی دنیا کی دنیا روک سن جائے گا جوپنی نے پھر لوڑ کر کہا کچھ نہیں ہے رسوئی میں کھانے کے لیے بھگوان نے کہا یہ سمبھم نہیں ہو سکتا تو انہوں نے کہا وہ اکشائ پتھر منے دکھاؤ اور اس کی پونے میں ایک چھوٹا ساڑھ کا ٹکڑا اوپر پھنسا ہوا تھا جو کہ روپنی کو دکھا نہیں نہ ہی یونسٹر کو نہیں دکھا تو بھگوان نے چھوٹے ہی اسے دیکھ لیا اور کہا چھوٹے ہی کچھ نہیں ہے کھانے کے لیے یہ دیکھو تو اپنے امری سے وہ ساڑھ کے چھوٹے پتے کو نکال کر کھا لیا جیسے ہی انہوں نے کھایا इस विश्व के जितने भी प्रामन थे सब का पेट भर गया। जैसे कि जब आपको भुख लगती हैं तो आपके सारे अंध कम जोड बचाते हैं। और जब आप पेट में खना दालते हो तो सारे अंधों में ताकत आ जाती हैं। तो दुर्वासन मुनी अपने सिश्यों के साथ تو سب کو کیا محسوس ہوا؟ سب کو اچکی آنے لگے سب جب آپ بیادا کھالوں تو کل پر اچکی آتی ہے نا تو جب وہ سب انہیں سمجھ گئے یا تو انہوں نے کچھ اپراد کیا ہے یا بھگوان کی کوئی خاص میلا چل رہی ہے کیونکہ چھوٹی دیر پہلے ہی سب بھوکے تھے اب سب بڑھامن کہنے لگے ارے ہمارا تو پیٹ پر گیا گروھو جی ہم مدرشہ کے ہیں کھانے کے لیے نہیں جانے گے کیونکہ ہم یودیشتر کیہاں جائیں گے اور کچھ کھائیں گے نہیں تو پھر ہم اپراد کریں گے اور سب کو پتا تھا کہ یودیشتر بھگمان کا بڑا پریم بھاگتا ہے اور دروازہ مونی کا ایک ابحاث ہو گیا تھا امریشن مراج کے ساتھ تو دروازہ مونی اور ان کے سکھشت سب کو محسوس ہوا کہ ان کا بیٹھ اتنا بھڑ گیا ہے तो उन्होंने सोचा कि अभी युदिष्टर ने तो हम साथ के लिए इतना भोजन त्यार किया होगा तो आप तो पेट में भूखी नहीं हैं काम घर कैसे जाएं तो इससे हम आथे भाज गयें तो रह्मान ने युदिष्टर को कहा जाओ बुलाओ जर्वासमुनी उनके सिख्� اس نے سنائی یہ بتانے کے لیے کہ جب آپ پرم بھگوان کے شرنگت ہوتے ہو بھکتی ہو کے اکے ویلی ویدھانوں کے دوارہ بھگوان کہتے ہیں کون سے آپ پتی جانے گے نہیں ہمیں بھگتہ کرنا شکریہ हे अजल तुम सारे विश्वों को ये सूचना दे दो कि मेरा जो धर्थ है वो कभी नश्च नहीं हो یہ ہت نہیں کہ بھک جہاں دھندہ ہاتھ لگائے گا وہ سب سونا بن جائے گا یہ بھک نہیں کہ بھک کو روک پیدا نہیں محسوس کرنی پڑتی نہیں اس کا یہ حالت ہے کہ بھک کے مند میں یہ بدھی رہتی ہے کہ بہت ایک سنسال میں سکھ اور دھکتر ہیں پر اس کے مند میں یہ بیشواث کرتا ہے کہ اگر کھشت بھی وہ بھگترہ ہے تو بھگوان کی اثیر دعا کے کارن لاکھوں گناہوں کھم ہو چکا جیسے ایک طرح سے تو پڑکشت مہاج کو ایک شنکی نام کے لڑکے نے شاپ دیا تھا کہ سات دن میں ان کا ہند آ جائے گا پڑکشت مہاج اس سے گھڑائی نہیں اور ساتھ میں مہمان نے شکرِ دیو گسوانی کو پھیل دیا جس کے ذریعے اپنے یہ اُبدیش پراتھ ہوا کہ کس پرکار سے جس بیٹے کا اندھ آنے والا ہے پہلے کیا کرنا چاہتے ہیں تو کہنے کا ساتھ پر یہ ہے کہ جس بیٹے کے پاس اتحاق میں گیان ہم بہتی گیان انفور کرنے کے ایک امتحان ہیں اس کے لئے اگر جیسے چھوڑے پیسے کھاپتے ہیں بچوں کو انگلینڈ یا امریکہ بھیج دیتے ہوں پڑھنے کے لئے ہم سب چاہتے ہیں ہمارے بچے بڑی بڑی یونیورسٹی میں پڑھ کھڑا ہے کیونکہ ہم بہتے کیاں کی قدر کرتے ہیں بہتے کیاں ایک سادھن بن رہا ہے دھن کمانے کا اسی لیے ہم اس کی قدر کرتے ہیں پھر یہ جو ادیہاتمی کیاں جو ہمارے شاستوں میں پراتھ ہوتا ہے اس کی ہم قدر نہیں کرتے اس کی ہم چندہ نہیں کرتے ہم سوٹھتے ہیں اس کی کیا ہو سکتا اس میں ہم ژیتا بھی نہیں پڑھتے ہیں بھاگوت بھی نہیں پڑھتے ہیں اور بھاگوت ایتیالی سنتے میں ہیں تو نام کے لیے سنتے ہیں ایک نام سے اندر دوسرے نام पर गंभीर्दा के साथ ये अधियातने ज्यान को समझने का प्रयास नहीं करते हैं तो शास्त्रों के दुबारा जैसे कि घीता में कर्मा कान, ज्याना कान, ज्याने योगा, कर्मा योगा सब का वर्णन है पर आंज में धभ्वीयोग पर सबसे ज़्यादा बल दिया जाया है ध आप मन और इन्दियों का उस हिर बनात रखते हो भक्तियों द्वारा आप अशुग इन्दियों और मन को शुद बनात रखते हो जैसे की जब आप पीड़ित होते हो तो दवाई लेनी पड़नी है और लोग पीड़ा को जूर करने के लिए तो उसी तरकार भक्तियों की विदी اشد ناکھ ہے اشد جین ہے اشد انکھ ہے اندھی انکھ وہ شمک بن جاتا ہے اس وقت اشد نظروں کو کیا چاہتا ہے کوئی گنڈی تصویر ہم دیکھنا چاہتے ہیں جس کے لئے جو لوگ فلم بناتے ہیں تو اس میں گنڈی تصویریں ضرور دکھاتے ہیں کیوں کہ یہ لوگ دیکھنا چاہتے ہیں لیکن فلم پیر ہو جاتی ہے تو ہمارے نظروں کو یہ گنڈی چیزیں دیتے ہیں جین کو پیر دھوکے بینا کچھ بھی چسکے کے لیے کھانا چاہیے کھان کو کیا چاہیے؟ سنگین چاہیے، ڈسکو، کیوں دیکھو، گیرہ ناکو کیا چاہیے؟ کچھ اچھا سونگنے کے لیے اس کے لیے آپ پینچ کولیفیوم خریدنے جاؤ تو کتنا پیسہ دینا پڑتا ہے چھوٹی سی بوٹر کے لیے کیوں؟ ایک گوند نگاتے ہو تو اس کا دھوم تک خشبو گیاتی ہے ہاں؟ تو سب کہتے ہیں ہاں یہ بڑا دھنی کھانا کا بیٹھتی ہے تو हम ये बोल जाते हैं कि ये अशुद इन्द्यों को शुद कैसे बनाया जाते हैं तो जब हम हरे कृष्णा मंचा का चाप करते हैं धार्वत घीता धार्वता में क्या भी पढ़ते हैं और हम सबा के समय जागते हैं घर में मंगल आर्थी करते हैं विदी विदानों का क्या � سمجھو آپ گھر میں رہتے ہو جیسے آپ سب گھر میں رہتے ہو اپنی بتنی بچوں کے ساتھ تو گھر میں ایسا باطنہ رکھو جس کے دوارہ آپ جیون کے لکھش کو فراہد کرسکیں ہارے کرشنا ہارے کرشنا कृष्णा कृष्णा हारे हारे हारे रामा हारे हारे रामा रामा हारे हारे
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