भगवद गीता में है सभी कठिनाइयों का हल | BG 18.66 | 21 Jul 2023 | Dehradun | Gopal Krishna Goswami

In this informal Hindi discourse, the speakers explore how the Bhagavad Gita, especially verse 18.66, offers a comprehensive remedy for life’s difficulties. They stress the importance of reading the Gita repeatedly to sharpen intellect and overcome maya (illusion). The conversation weaves together scriptural exposition, personal anecdotes, and practical guidance on balancing worldly duties, managing time, and serving the community through temples. Central themes include the mind’s dual nature as friend or foe, the necessity of bhakti (devotion) and surrender to the Divine, compassionate conduct toward all beings, and the belief that God witnesses every action. The speakers repeatedly affirm that sincere devotion, adherence to dharma, and reliance on the Gita’s teachings can transform personal challenges into spiritual growth.
Chapters
krishna in play the hero have you like code you game plan that
he
krishna krishna को nicl krishna is जायरा जायरा दमा
ह
जहा गोपी जाना व न गोपी जाना, वाल जरा जरा जमा
ल,
जन का ह मन ही जला sip so nera no me bat
हम हरे से, हम से
हो जा
pरmbकaroho ा
हरे हरे रामा हरे हरे हरे चलो सबसे पहले मैं बार बार पकड़ना जाता ह a a a a sa के मा a to go आप सब पहली बार आ रहे हैं। आज मंडी के
a
pen थैंक्यू वेरी मच, कई बार लोग पुलिस आप करवा ले, इसे मंद से मंद बना की कमी हो रही है। समझाना पड़ा कि में क्या वादा होना चाहिए और बदले में सोना को तो यह जो स्थान है स्थान और हमारी पूरी कृपा पर जिन्होने धन लिया स्थान को 1 व्यक्ति ने दिया या भगे उसी से और वो 1 काबा बड़े खुश होंगे ये लेकर के स्थान का
इधर आये
थैंक यू
भी महाराज ने सबसे पहले धन्यवाद ज्ञापन किया, लीला पुष्तमप्रुभुजी का परम करुणा माधु प्रभु और जो भी भक्त प्रयास की इस सुन्दर मंदिर के साथ मे और फिर महाराज ने कहा कि कई बार लोग पूछते हैं कौन कितने मंदिर क्यों बनाने की आवश्यकता है। भारत में तो ऑलरेडी, इतने सारे मंदिर हैं। तो महाराज बोले कि हमारी जो मंदिर हो वैसे मंदिर ही नहीं लेकिन आध्यात्मिक शिक्षा के केंद्र है और महाराज कुछ भी सबको आप काफी मंदिर सुन्दर लगा महाराज के हर समय के साथ और भी सुंदर बन जाएगा।
ये तो केवल शुालहैभीशुरुआद है प्रशन होगे ये लेकर के तेरा शहर में ये सुंदर बनने जा रहा है
की शहर में कितना सुन्द मंदिर बनने जा रहा है।
कहा गया है मंदिर बनाने में भगवान
की शीाप्राप्तहशास्तरी ता जो भी भगवान की बंदी बंदी में बनाने में सहयोग करते हैं उनको 80 की तो प्राप्त होगी।
आपने हर बॉम्बे सुनाये आपने हरी किशन
लैंड शुरू बकरे के बारे में सुना ये कितने
राजा दर्शन दिया कितने लोगों
ने राज का दर्शन किया है में
तो बड़े ने संघर्ष के साथ सान प्राप्त हुआ
बड़े गहरे संघर्ष के साथ पूछना प्राप्त हुआ था
जो कि बकैलाप्रापाकर मिलने आते थे और जो कॉन्ट्रेक्ट था
तो 1 भक्त थी जो हर समय पोप से मिलने आती थ व कॉंट्रेक्टर
थे उन्होंने पुरानी,
उन्होंने कुपाजी को सुझाव दिया उस जमीन को लेने के लिए ो तो वो प्रमुखाजी को सो कंस्ट्रक्शन को सुपरवाइज करने के लिए।
तुम भगवान का मंदिर यहाँ बना रहे हो, भगवान तुम्हारा मन घर म धान में बना रहे है
से आप भगवान के यहाँ बना रहे, भगवान आपका घर पने धाम में बना रहे
बहुत आवश्यक रहे। भारत मे कुल कोने में
आज हम देखते हैं भारत में कोने कोने में चर्च और बची दिखाई देते ह और
इसी तेजी के साथ 4 कर रहे
हैं और इससे तेजी के साथ प्रचार कर रहे हैं।
पंजाब में आप मुश्किल से लोग बना
रहे हैं जैसे पंजाब में पहले मुश्किल से कुछ दिखता था दि कोनेकोने में
चल दिखाई देता है तो आप भक्तों को प्रयास करना चाहिए। वे पहुंचे तो आप लोगों को प्रयास करना चाहिए। वेलू अरे रे।
आप सबको प्रयास करना चाहिए कि हमारा भगता का सन्देश है। यह आज पास पॉसिबल दुनिया के हर काल में पहुँचे।
हम बागरी पढ़ेंगे
अभी तो पढेंगे चे।
se man to माँ मे कम शonbeजो शाम शाम
कंटर्स दिया हुआ है।
आपको याद है 1 बार हर
सर्व धर्मान समस्त प्रकार के धर्म सहित हज्जा त्याग कर। माँ माँ मेरी 11 मात्र 1 मात्र शर्म शरण में शरण में ज जाओ। हम मैं तुम को सर्व मस्त काफी भ्यापहसेमोश्यामी उधार करूंगा माँ मत सूचना चिंता डर अनुवाद तथा शुरू समस्त प्रकार के धर्मों का प्रत्योग करो और मेरी शहर में आ मैं समस्त पापों से तुम्हारा भाग कर दूंगा डरो मत अनुवाद धरा समस्त प्रकार के धर्मों का समस्त प्रकार पर त्याग करो और मेरी शरण में आओ मैं समस्त पापों से तुम्हारा उधार कर। 2 डरो मत भगवान ने अनेक प्रकार से किया। धर्म की विविधाएं बताई है परम परम का ज्ञान, परमात्मा का ज्ञान, अनेक प्रकार के आश्मा का ज्ञान, संन्यास का ज्ञान, अनाशक्ति, इंदियधरमन का सही, ध्यान आदि ज्ञान। उन्होंने अनेक प्रकार से नाना प्रकार के धर्मों का वर्धन किया है। अब भगवेताकासायप्रस्तुत करते हुए भगवान कहते है कि हे अर्जुन। अभी तक बताई गयी सारी विधियों का प्रत्यार करके अब केवल मेरी शरण में आओ। इस शरणागति से वह समस्त पापों से बच जाएगा, क्योंकि भगवान स्वयं उसकी रक्षा का वचन दे रहे हैं। सातवें अध्याय में यह कहा गया था कि वही कृष्ण की पूजा कर सकता है, जो सारे पापों से मुक्त हो गया है। इस प्रकार कोई सोच सकता है कि समस्त पापों से मुक्त हुए बिना कोई शरणागति नहीं पा सकता है। ऐसे संदेह के लिए यहाँ यह कहा गया है कि कोई समस्त पापों से मुक्त न हो। न भी हो तो केवल की शरणागत होने पर स्वत मुक्त कर दी या जाता है। पापों से मुक्त होने के लिए कठोर विलास करने की अवश्यकता नहीं है। मनुष्यों को बिना जल के कृष्ण को समस्त जीवों के रक्षक के रूप में स्वीकार कर लेना चाहिए। उसे चाहिए कि चलता तब प्रेम से उनकी शरण ग्रहण करें। हरि भक्ति विलास में कृष्ण की शरण ग्रहण कर। विधि का वर्णन हुआ है। आनुकलस्यसंकल्पहा प्रति पुलस्य वर्जन क्षितित विश्वास गुरु प्रबंधन था। आत्मक्शेपकारपरन्या विधा श्रद्नागदि भक्ति योग के अनुसार नुष्य को वही धर्म स्वीकार करना चाहिए, जिससे अंतत भगवत भक्ति हो सके। समाज में अपनी स्थिति के अनुसार कोई 1 विशेष कर्म कर सकता है। लेकिन यदि अपना कर्म करने से कोई कृष्ण भावनामृत तक नहीं पहुँच पाता तो उसके सारे कारे क्लाक भक्त हो जाते हैं। जिस कर्म से कृष्ण भावना मृत की पूर्ण व्यवस्था ना प्राप्त हो सके, उससे बचना चाहिए। मनुष्यों को विश्वास होना चाहिए कि कृष्ण समस्त परिस्थितियों में उसकी सभी कठिनाइयों से रक्षा करेंगे। इसके विषय में सोचने की कोई आवश्यकता नहीं कि जीवन निर्भाग कैसे होगा। क्रिश्न इसको संभाल लेंगे। मनुष्यों को चाहिए कि वे अपने आप को निस्सहाय माने और जीवन और अपने जीवन की प्रगति के लिए कृष्ण को ही अवलंब समझे। पूर्ण कृष्ण भावना भावित होकर भगवत भक्ति में प्रवृत होते हुए होते ही वे प्रकृति के समस्त कलम से मुक्त हो जाता है। धन की विविध विधिया है और ज्ञान, ध्यान, योग आदि जैसे शुद्ध करने वाले अनुष्ठान है। लेकिन जो कृष्ण कृषनागतहो जाता है, उसे इतने सारे अनुस्ठाधों के पालन की आवश्यकता नहीं रह जाती
है।
भगवत गीता विश्व का सबसे प्रसिद्ध क्या है।
वीर का a कैसे थे पीएफ भक्त को अर्जुन
देश भगवान ने अपने पीए भक्त अर्जुन को दिया।
भगवान ने अर्जुन को क्यों लिया। अर्जुन तो बियर से आश्रम में थे, कोई सन्यासी जारी नहीं थे।
भगवान ने अर्जुन को क्यों क्या दिया? वो तो था, आश्रम में थे। कुछ सन्यासी कर्मचारी न।
और भगवान ने क्या कहा कि मित्र हो और भक्त हो। इसलिए तुम दिव्य ज्ञान को समझ पाओगे।
भगवान ने कहा कि तुम मित्र और भक्त। इसलिए इस विज्ञान को समझ पाओगे।
पापाजी ने भगगिपरकाकीउन्होंने कहा गिरा था। कई बार लोग पूछते थे यह ऐसा रूप क्या है? और बाबा जी ने समझाया भूमिका में उन्होने उसी भाग से किसने भाग मे भगवान ने लिया ने स्वीकार किया।
तो कई बार लोग पूछते हैं बाबा जी को बोलते है। रूपा जी समझाते हैं की उन्होंने इसको इसी तरह से प्रस्तुत किया जिस तरह से भगवान ने अर्जुन को प्रस्तुत किया।
आज 60 से अधिक भाषा में ना
की तो आज 60 से अधिक भाषा अनुवाद हो चुका है और जाए
पढ़ रहे है।
सारे विश्व में लोग दीजिये साउंड थोड़ा सा बढ़ सकता है।
रे भगवान गीता का ज्ञान है। तुम्हारे सबसे पहले कैसे लिया था
ज्ञान? भगवान ने सबसे पहले किसको दिया था?
और समय के साथ ज्ञान खो गया था। भगवान ने फिर से ज्ञान लिया और
समय के अनुसार ही ज्ञान खो गया। तो भगवान ने दुबारा ही ज्ञान दिया।
तो भगवन गीत का जो ज्ञान है, पूरे मानव समाज के के लिए है। जो
भगवत गीता को सिक् किताब नहीं है, पूरे मानव समाज के लिए है।
हम बीजापदापरभगवान अभी के पिता, हम वीजा
पिता, भगवान सबके पिता है।
क्या कहा? क्या?
अर्जुन ने दुसरे भगवान से कहा। मुझे ल करते हुए कहा पता नहीं आप मुझे शिक्षा दीजिए।
भगवान ने शिक्षा जी पूछ हे अर्जुन, आज तुम्हारी अभियान दूर हो गई है।
तो भगवान ने शिक्षा दिया। फिर पूछा भगवान ने अर्जुन क्या तुम्हारी अज्ञानता दूर हो चुकी है?
हाँ अब मैं आपके आने का पालन करने वाली हूँ।
अर्जुन ने कहा, हाँ, अब मैं आपके आदेश का पालन करने के लिए तैयार हूँ।
हमें भगवन ही लगा रोज करना चाहिए,
हमे रोज करना चाहिए।
प्रभा इस संस्था की स्थापना की। उन्होंने हाथ से लिखा क्या कि सुवा भागतों का अध्ययन, शाम को
तो प्रपाजीनजबसंस्था शुरुआत किया। आदेश दिया की सुबह भागवतों का अध्यन और शाम को भगत को करना चाहिए।
चेनदिनेमहाप्रभू दक्षिण भारत की यात्रा कर रहे थे,
चेतन को दक्षिण भारत की यात्रा
करें और यात्रा के दौरान वो रंग में
और रास्ते में वो श्रीरंगम मंदिर जो की बहुत प्रसिद्ध मंदिर है,
माना जाता है भारत का सबसे प्रसिद्ध मनो में
श्रीरंगम में, जो पत्नी है, भारत में सबसे प्रसिद्ध मंदिर में से 1 माना जाता है।
कुचेसेमापमने ेखावहएकअंपर ब्राहमण गीता को सामने रखता है। 4 करा स्टोको जब लोगों का उचारण कर रहा है, उनके नेत्रों से आज
सुबह तो क्षेत्र तू ने देखा अलपररावल्डगीता का पाठ कर रहे है और जब वो गीता को सामने रखे है उनकी आंखों से सुधारा रह जाता है।
शील भक्ति के लक्षण प्रगट हो रहे,
शुद्ध भक्ति के लक्षण प्रगट हो रहे हे।
कई बार हम देखते ह, ढोंगी बची
उसकी नकल करते, कई बार ढोंगी, वे उसका नकल भी करते हैं।
माँ मिलने का यह अच्छा ब्रामण बदली।
लेकिन चेतन वापने देखा की जो एक्ट्रेस सुधार भरे थे उसी भक्त के लक्षण थे।
माँ ब्राहमण से पूछा हे ब्रा।
उन्होंने पूछा हे ब्राह्मण तुम क्यों बता पढे?
ब्राहमण ने कहा भगवान पारद से अधिक बन गए तो होते है।
तो ब्राह्मण ने कहा कि जब मैं गीता पढ़ने का प्रयास करता हूँ तो दृश्य देखता हूँ कि इसे भगवान अर्जुन के साथ भी बने।
और इसलिए अशधरारहतेहैब्राहमण मैं हूँ। अनपढ़ और गाँव के सब लोग जानते में अपर।
राम ने कहा गाँव के सब लोग
जानते है की मेरे गुरु ने 1 आदेश दिया था,
लेकिन मेरे गुरु ने 1 आदेश दिया था।
रोज 18 हजारों का चालन करो, 2
18 का उचारण करू।
मैं रोज। इसी साल में बैठकर गीता पढ़ता हूँ
मैं वो स्थान में बैठ के गीता
पढ़ता हूँ, क्योंकी मैं अनपढ़ हूँ मैं लोगों को नहीं रखता, क्यूंकि मैं अनपढ़
हूँ साजिश लोगों को समझ नहीं पाता।
पर जब मैं देखता हूँ तो मैं देख के महान तो भगवान की देखता
तो समझता भगवान कितने महान है।
गीता समझ नहीं पाता तो गीता के
शव को को समझ नहीं पाता।
भगवान ने गले लगाया और कहा तुम गीता के देशको
तो क्षेत्र से मारने से गले लगाया और खूब जीता के साथ देश को समझ चुके हो।
माँ ब्रा अपने साथ 6 महीनो के
लिए रखा और अपने साथ 4 महीनों
के लिए रखा और रोज उन को समझा
और रोज उनको गीता का अर्थ समझाते।
बाबा कहते है कि इस प्रकार के नियमित
तो प्रपोज डॉक्टर समझाते हैं। जिस प्रकार से ग्राम अपने गुरु का आदेश पालन करता था और नियमित रूप से कितना पढ़ता था।
भगवान खुद आ गए, भगवान का इतने
प्रसन्न हुए कि खुद उनके पास आ गए।
तो आंत व जल है। साल के सम्बन्ध में। आकर
तो कहते ज्ञान से हमारा जन्म अज्ञानता में हो कि किसी साथ ही विकास से हमें ज्ञात प्राप्त होता है।
नाइंटी नाइन प्राइट, नाइन, नाइन, नाइन, नाइन परसेंट पैदा हो जीते है। आग्ामेंउी या तो नाइनटी, नाइन प्वाइंट, नाइन
नाइन परसेंट लोग उनका जन्म होता। ज्ञान में वो जीत ज्ञानता में अज्ञानता में हो जाते है।
जो भाग व्यक्ति हैं उनके में आकर अपने जीवन को सुधार आयम करता है।
लेकिन जो भाग्य व्यक्ति है वो किसी सब के संपर्क में आ के अपने जीवन को सुधारने का प्रयास करते हैं।
चर उदाहरण दिया जाता है। यह 1 लॉन्ग बोर्ड सर ऊपर से नीचे आ रहा है। पानी के प्रेशर के द्वारा और 1 सर के अटक जाता है। अनेको में गुजरे हैं। पर भागवान भो तो भगवान कृष्ण से
तो चेत हा ऐसे लकड़ीका टुकड़ा नदी में तैरता है और अचानक से किनारे बाते जाते है। उसी प्रकार उरभाग्यवारजीवी संसार से उधार हो कहा?
सब जो भक्त हैं, उन सब का बहुत पूछे हैं। उन सब ने भी की जनों में
तो बुखार जी कहते हैं जो भी भकबुछतभावनावेक संघ से जुड़े हैं, भाग्यशाली हैं। पिछले जनों में कुछ न कुछ भक्ति किया है।
आज समाज में देखते हो चिंता तनाव बेचारी अब बढ़ती जा रही है।
आज हम समाज में देखते हैं। चिंता तनाव बेचैनी से बढ़ती जा रही
है के बढ़ते जा रहा प्लीज बढ़ते जाना मानते हो।
आप सब मानते। इस बात को क्या क्या है?
क्या है? उपाय?
क्या है?
उपाय उपाय है कि हम आदमी को
गुल करना चाहिए, उपाय आातमिकामकोगुल करना चाहिए।
परम मैं पर्म गुरुजी कहते थे अगर इस विश्व में किसी चीज की कमी है तो केवल ज्ञान की कमी है।
हमारे पर्म गुरुजी कहते थे अगर इस दुनिया में किसी की कमी है तो ज्ञान की कमी है।
ये जो कृष्ण पक्ष का संदेश है, यह पूरे समाज के सुरक्षा क कृष्ण
भक्ति का सन्देश है की पूरे समाज
की सुरक्षा के लिए भगवान गीता के हर्ष लोग, भगवान पर, हम भगवान बोल रहे हैं।
गीता के हर्ष लोक में कहा गया श्री भगवान पास पर हम भगवान बुल
और हमें नियमित रूप से पढ़ना चाहिए।
यह दिवीज्ञानऔरहमें नियमित रूप से 2 इसको पढना चाहिए।
जितना पढ़ोगे उतना ज्यादा आप जीजा को
समझ पाओगे, जितना आप पढोगे, उतना ज्यादा कुछ न समझ पाओगे।
तो जीजा के द्वारा यह साबित होता है। कौन है?
गीता के द्वारा स्थापित होता है कि भगवान कौन है? सुप्रीम लॉर्ड।
भगवान का किया ज्ञान, कोई दोष नहीं, कोई कमी नहीं।
तो पर भगवान जो ज्ञान देते हैं, उसमे भी दोष नहीं है, उसमें भी कमी नहीं है।
जैसे आज भी गीता पढ़ते हो, उसको भगवान ने हजारों हजारों साल पहले दिया था।
तो आज भी हम गीता पढ़ते हैं। जिसको देश ने हजारों वर्ष कूट दिया
था और दीदी बार पढ़ोगे घाई समझ
और जितनी बार पढेंगे उतना गहराई, वे संदेश को समझ पाएंगे।
तुम्हारी की इच्छा क्या है? भगवान क्या संदेश दे?
भगवान आपके क्या उपदेश दे कि सारे धर्मों को प्यार करके मेरे से रखते ह।
मैं आज तुम्हारी सुरक्षा करूंगा, घर मा
सूचा, मैं तुम्हारी सुरक्षा करूंगा, घबराओ मत माँ सूचना।
हमारी समस्या क्या है? भगवान के उपदेश को हम पूरे रूप से स्वीकार नहीं करते।
हमारी समस्या क्या है? क्या भगवान के उपदेश को पूरे रूप से स्वीकार नहीं करते?
हम कहते है या सच हो या गीत, सच न भी हो।
हम कहते हैं तो सच हो या सच, न भी हो, पर सकते है।
जवाब मानव मन कुछ ले जाते और फिर आपको वापस पाना है, वापस लेले तो अमाजोन गारंटी देता है, उसे हमारी मुशवातहैऔभगवानी लगा। 10 बार सोचे।
अमाजोन से कुछ खरीदते हैं, उसपे विश्वास हो जाता है। किसी को खरीदे में अगर ठीक नहीं होगा तो वापस कर देंगे। भगवान कविता में कहते हैं, उससे हमारा विश्वास नहीं होता है।
सदा व्यक्ति कह रहा है, 40 घंटे का काम करो और हम के साथ काम करे।
जब हम नौकरी करते हैं तो वो कहते हैं के काम को कितना पैसा मिलेगा करते हैं।
और भगवान कहते हैं मेरे सर में आओ।
लेकिन जब भगवान के मेरी शरण में आओ, हम रजीजकतेहैइसलिए
हमें करना चाहिए।
इसलिए हमें बिजली गात का कुल करना चाहिए। भक्तों के साथ हैं।
महाप्रभु ने बड़ा गहरा उपदेश दिया था
और नाना क्षेत्र ने कहा पुरने सनातेकुसामी को बड़ा गहरा संदेश दिया था।
ये 2 भाई जो हैं उस समय के सबसे प्रसिद्ध राजा के राज्य का शासन कर रहे थे।
तो ये 2 भाई बहुत प्रसिद्ध थे और राजा के शासन में बहुत इम्पोटेंट स्थान में थे।
आज से 500 साल पहले भारत ने का राज बंगाल बंगाल राजा था जबरदस्ती
उस 500 साल पहले जो भारत का 1 बड़ा राज्य था, बंगाल वहाँ के राजा ने इन 2 भाइयों को जबरदस्ती नौकरी में रखा था।
राजा उशा नाइन नाइन परसेंट पर है, कौन है, स विश्वास है,
राजा होशियार था नाइटी नाइन पर से लोग हिंदू थे। तुमने भूला कि ऐसे कौन व्यक्ति है जिससे सबका भरोसा होगा।
जे पर 5 महतपर विशयों की स्थापना,
तो चेतना कुमारी 1 शिक्षा दी, कि अंत में 5 महत्वपूर्ण विश्व की स्थापना की।
सबसे पहले उन्होंने कहा साधु हमें भक्तों के संग में रहना चाहिए।
तो सबसे पहले उनका साधु संग हमें हर समय भक्तों के संग में रहना चाहिए।
अगर आप श बक्सर, कैसे रहोगे तो आपको आशी संदेश मिले।
अगर आप शुभ भक्त रहोगे
और बक्सों किसे होगे और आरपिकारमेंऊँची प्राप्त हो, अगर
भक्तों के समर होगे तो आध्यात्मिक कार्यों में रुचि प्राप्त होगी।
तो साल भर के साल के सम्बंध में आते है। आपको ये ज्ञान मिलता है जिसके द्वारा मनुष्य जीवन को सबल बना सकते है।
तो जब आपको इस साधु के सम में आते हो तो आपको यह ज्ञान प्राप्त होता है जिसके द्वारा आप मनुष्य जीवन को सफल बना सकते हैं।
आज आप देख ले भारत में कई प्रचारक हैं। आप से देश को देखो तो देखोगे, स्टार्स से कोई समय नहीं मिल।
सका तो भारत में कई प्रचारक हैं।
संदेश को
तो आप के संदेश को पढ़ो तो शास्त्र से या किसे का सम्बंध नहीं देता है।
सो आपको सच्ची संदेश देगा।
लेकिन असली साधु आपको सच्चा संदेश देता है।
प्रॉपर बेरिक गई थे। पहली बार तो कई स्वामी पहले पहुँच चुके थे। उन्हें देगा मीडिया ने आये हो। आप लोग आप के संदेश को नहीं स्वीकार करेंगे।
जब उसके परे कई भारतीय स्वाद का विवाह गए थे तूने कहा कि आपके संदेश को अमेरिकी लोग स्वीकार नहीं करेंगे।
भारत में व्यापक को संघर्ष करना पड़ा और विदेश जाकर भी पहले साल के करना पड़ा।
प्रभुता जी को भारत में भी बहुत संघर्ष करना पड़ा और विदेश में भी पहला साल बहुत कड़ा संघर्ष करना पड़ा।
असली संदेश।
लेकिन से प्रभुता जी ने 80 संदेश दिया
की स्थिति में होकर भी संदेश
देते है तो साधू कठिक परिस्थिति में होकर भी हमेशा शुर संदेश देता है।
नामा के
नाम
नाम है बड़ा सर से उपयोग कर सकते हैं।
इस कलियुग में हम नाम की का सरकार से उपयोग कर सकते हैं।
परीक्षित ने पूछा था ये बताओ कि कलयुग में तुम उधार कैसे होगा?
तो परीक्षित महाले सुदेव से पूछा था कि कलयुग में लोग का उपहार कैसे होगा?
कलेतोसेलद राज राजा कलियुग में दोष है
तो दुरदुरिया कल तो सीधे राज हे राजन कलियुग में दोष ही कुछ सच
बात है सच बात है किसी कोने में चले जाओ आपको निमंत्रण दे रहे है
किसी भी कोने में चल देंगे
आपको इस तिकतीकेलिनिमंतरन मिलेगा हो ने कहा 1 गोल है लेकिन उनने कहा 1
गोल इस कलयुग में
मुफ्त की द्वारा
मुक्ति प्राप्त कर, इतना देवकिशन की मुक्ति प्राप्त कर।
ये जो हरिनाम है ये इसका लाभ हम सबको उठाना चाह तो हरीराम का लाभ सबको उठाना चाहिए आप लोगो को में दयालु अफ्तार माना जाता है तो
क्षेत्र मे महापूकुसारेअफतारों में सबसे दयालु अवतार माना जाता है।
और हा हा नाम का प्रचार कोने
कोने में किया और वहा पर ने सरीना का प्रचार कोने कोने में किया
जब वो यात्रा में दूर दूर से लोग आते थे उनमें देखने के लिए, उनके गे को लेकर वो भी खुशी में नैशनल डालना शुरू कर देते थे
तो जब वो दक्षिण भारत में जाते थे तो दूर दूर से लोग उनको देखने आते थे, सुनने आते थे और उनको वेतन करता वो देखते खुद भी जितन करते थे और भक्त जाते तो
जो भक्त है वही पूरी है, पूरा
विश्वास है नाम में सुबकते उनका पूरा
श्रद्धा होता है ना की कि वहाँ पर दिया। उन्होंने कहा कोई नियम नहीं है आप किसी स्थिति में नाम का, उजालनहोकोचेतरनातु ने
कहा इसमें कोई नियम नहीं आप हर स्थिति में हरिनाम को 4 कर सकते हैं।
सो हाई भगवान के नाम से है
और हरी नाव भगवान से अभी में है
वो 1 और लाजीबल मिलने के
लिए 1 बार हम दिल्ली में थे और 1 और 1 आईटी में प्रोपज से मिलने के लिए प्रबल प्रोपज हरी कुश तो ने सौरत को कहा की
आप चैकिंग कर उसे मैं, हमेशा 24 घंटे
तो 24 के चेकिंग कर के
बनेगा कैसे तो तोपाजनेकाकैसे मन में कहा मन में मन में
ने कहा कि मन में 24 घंटा ना
भूख लगती है तो मन में खा खा जाएगा,
टोपाज भूख लगती है तो मन मे खाना खा। ग
so i am a 4
दोस्त उसमे उत्तर दीपा के हरिनाम का उचारण करना चाहिए पर इससे क्या लाभ होगा।
आनंदादि गीता को
ताप दिली बीता और
भागवत जब हम पढ़ते हैं को भगवान बड़े प्रसन्न होते है।
जब हम ग्रंथों को पढ़ते हैं तो भगवान बड़े प्रसन्न होते है।
भगवान देखते है में लेट मी गिव अंडरस्टैंड भगवान समझते हैं ये भक्त मुझे समाना चाहता है मैं मिशा फील हो मुझे समझने के लिए।
तो जब हम ग्रंथ पढ़ते हैं तो भगवान पर प्रसन्न होते हैं और देखते हैं कि यह भक्त मुझे जानना चाहता है, तो मैं उसे ऐसा पति दूंगा कि मुझे जान पाए है।
आप में कितने वर्ष हो? गीता रोज, पढे, आप ऐसे कितने भरते
हैं जो भगुगीतारोजपढ़ते
के पास, तो गीता
की कॉपी सबके पास
थोड़ी संख्या में
यहाँ पढ़ते हैं, लेकिन थोड़ी संख्या में।
पर हम सबको ये नियम बनाना चाहिए। कम से कम 1 साथ के साथ
रो, पड़े सबको नियम बनाना चाहिए। रोज 1 स्लो डॉक्टर के साथ पढ़ना चाहिए।
कम से कम कम से कम कई भक्त ज, 1
तो कई पे जरूर पढ़ते है।
कम से कम 1 शोक फैक्परेसाकमसी कम
1 स्टोर फैक्टरी के साथ जरूर पड़े।
गीता को बार बार पढ़ोगे। पापा के ट्रांजेशन
1 बात में में था बो id का जो तीसरा संदेश था कथा भाग, गीता
इसके द्वारा बुद्धि
तेज होगी, इससे हमारे तेज होगी, तेज
बुद्धी का क्या, तेज बुद्धि का क्या है आप सरलता से माया का, आप
सरलता के साथ माया का विरोध कर सकते हैं।
माया का विरोध करना बहुत मुश्किल है।
देवी गुलाम भगवान कहते है इस माया
का विरोध करना बहुत मुश्किल होगा। फिर हम प्रयास भी क्यों करे? भगवान
बोल सकते है प्याज का भगवान को खुद के लिए बहुत मुश्किल ह
गे तो माया का कर पायेगा।
भगवान आगे कहते हैं कि जो भी में आएगा ताकि साथ इस मां का व्यू पर
माया, इज, वेरी स्ट्रांग, माया वेरी स्रांग, माया बड़ी बलवान है, माया कृष्ण भगवान और भगती से कमजोर है
तो हम बोले माया इज, वेरी, स्ट्रॉंग स्ट्रॉंग। कुछ भगवान के साथ में माया कमजोर है।
दूसरे शब्दों में अगर हम भी भक्ति, बेली, भक्ति, मतलब, नियमों का पालन, मेरी भर्ती का पालन करे। उसे यह परिणाम होगा कि आप पहले जो है वो शुरू हो जाएगा।
तो अगर आप वेदी भक्ति का पालन करेंगे, भर्ती के नियमों का पालन करेंगे, मारी शुरू हो जाएगी।
जो भर्ती, जो आपको प्राप्त किए, हमें किसी हालत से उसे नहीं छोड़ना चाहिए।
जो हमें भक्ति प्राप्त हुए, हमें किसी हालत में उसको छोड़ना नहीं चाहिए।
का, जो उसने को समझे, जो भक्ति के लिए अनुकूल है, उसे स्वीकार है।
सनातन गुस्सा ने कहा जो भक्ति के कोलेज को स्वीकार करो, जो प्रति कुल
को त्याग करो, जैसे कि साधारण समाज में से आपको नुकसान होगा, वो बोल खाओगे आपको डायबिटीज है। तो अगर आपको कोई मीठा दे, आप स्वीकार करोगे।
मान लीजिए अगर आपको डायबिटीज से और आपको कोई मीठा देने तो स्वीकार करोगे।
और अगर कोई स्वाद के लिए अच्छा है तो स्वीकार करे।
अगर स्वास्थ के लिए अच्छा है तो उसको स्वीकार करते है।
उसी प्रकार जो अनुकूल कार्य है, उसे में पालन करना चाहिए, जो प्रतिकूल है उसे ना चाहिए।
उसी प्रकार भक्ति के लिए जो अनुकूल कार्य इसे स्वीकार करना चाहिए और प्रतिकूल कार्य का त्याग करना चाहिए।
तो भगवन के अध्ययन से ध्यान।
तो भगत पिता के अध्ययन से अज्ञानता
दूर होती है की वृत्ति हो जाती है, सारे रिश्तेदार है
तो किसी की मृतु हो जाती है। सारे सुधार होते है।
गीला पड़ेगा पचानेगामृत्यनेम चेंज।
लेकिन जो गीता पढ़ता है वो समझता है। मृत्यु कुछ नहीं, केवल शरीर का ग्रेस बदलना है।
अगला ने के कर्मों के आधार पर
और आपके कर्मों के आधार पर अगला देर ने किया जाएगा।
हमारे हर कार्य के अनेक साक्षियों से,
हमारे हर कार्य के अनेक साक्षी होते हैं।
हम सोचते हैं, किसी ने देखा नहीं,
संभल हम सोचते हैं, किसी ने देखा भी यहाँ बच गया।
भगवान जो है वो हर का साथी है और उनका कंप्यूटर कभी फेल नहीं होता।
तो भगवान हर कार्य की साक्षी है उनका कंप्यूटर कभी फेल नहीं होता है।
तो हमें शास्त्र के आधार पर जीवन को बचाना।
तो हमें शास्त्रों के आधार पर जीवन को बिताना चाहिए।
जिसे वो शोक नहीं करना कठिन
इसके पास अधतमेज्ञाने कठिन परिस्थिति में भी शोक शोक नहीं करना।
वा जो बुरी मा है वो शो
द वाइस में बिंग चाहे कोई जीवित
हो, कि
अगर कोई जीवित या किसी की भी हो तो शूट नहीं करता।
जिसके बाद जान सो राजा विदिया राजा घर में सबसे महत्व राज, विद्या राज
सबसे बड़ा ज्ञान है।
तो भवान ा गे है मेरी शरण में आओ और आप सोचो भवानी की शहर में नहीं आगे तुम किसी शहर में रहोगे।
अंत में भ भगवान कह रहे है की मेरी शर्म आप सोचोगे भगवान की शरण में नहीं जाओगे तो किसकी शरण में जाएगी।
मैं माया की भगवान की शरण का है, शिक्षा का पालन करे, भगवान के
शरण का है की शिक्षा का पालन करें।
और जो शिक्षा है उसकी चर्चा की जाती है क्लास में और शास्त्र में
तो और जो शिक्षा है उसकी चर्चा की जाती है शास्त्र में और जो क्लास होते हैं उसकी।
तो आज अगर हम सुख जाते हैं तो क्या हो पाय भगवान की शरण?
क्या उपाय है भगवान की शरनाकहोनेचालिए, उनके आदेश का पालन, उनके आदेश का पालन है।
भारत में कई लोग है हम लोग किस भगवान के में कुछ और फिल्म का भाग लेते।
तो भारत में कई लोग बोलते हैं। भगवान कृष्ण के भक्त हैं उनका आश्चर्य हम देखेंगे तो किसी दूसरी तरह का आश्रय होता है।
गीतरकेज्ञायनके द्वारा आप असली ज्ञान लोगगीत द्वारा
असली ज्ञान प्राप्त करते हो तो
भगवान मेरे बाबा
भगवान कहते है मन मन भर भक्तों से में मेरी चिंतन, मेरे भक्त बनो उसे प्रणाम कर।
भगवान प्रकट हो है तुने सनातन शादी अर्जुन अत्यंत तो भाग में देखते हैं।
बस जब भगवान हो गई तो अर्जुन बड़ी दुखी थी।
अर्जुन हमारी सनातन काफी है।
अर्जुन भगवान के सनाथन साथी हैं।
अर्जुन ने उन घटनाओं का स्मरण, भगवान
ने उनकी सुरक्षा की थी, अर्जुन ने इन भटटावकोस्परट किया। जब भगवा किशन की रक्षा की थी,
वो बड़े दुखी थे, भगवान हो अर्जुन बहुत दुखी थे, भगवान होगए तुम्हारे लिए ये सोचना कि कितना गहरा दुख सा। यह संभव है। आप पढ़ते हो। वो क्यों सा भाव था कि वो ब्रह्मा जी को भी जोर देते। यह आलीदबलक्योंबनाए की 1 पल के लिए बंद होती है। हम भगवान को लेने से ऐसे गोपियों
का भाव था कि ब्रह्मा जी को दोषी बोल रहे थे। क्या आपने आंखे बनाये से है? तो हम भगवान के लिए, नहीं तो
अर्जुन अत्यंत शोक में न हो गए।
अर्जुन अत्यंत शोक में थे
ने गीता के संदेश स्मरण आराम किया।
इस अर्जुन ने भगवन पिता के उद्देश्य का स्मरण आरंभ किया
किया। उन्हें लगा कि भगवान स्वयं वहाँ उपस्थित है।
और तब उनको लगा कि पर भगवान स्वयं उपस्थित थे।
शो समाप्त हो गया और उनका शो समाप्त हो गया। सो इसी प्रकार हमें गीता संदेश अध्यन करना चाहिए, प्रेस का समान करना चाहिए।
इसी प्रकार हमें गीता का संदेश को अध्ययन करना चाहिए और स्मरण करना चाहिए।
आप आज ने ज्ञान को प्राप्त करे,
फिर सती आपको प्राप्त हो।
हे मन के द्वारा हमारे करना।
तभी मन के द्वारा भगवान का चिंतन करना चाहिए।
मन जो है, मित्र भी बन सकता है और त्र भी बन सकता है।
मन हमारा मित्र भी बन सकता है, शत्रु भी बन सकता है।
जवाब। माना ज मै नाम का मित्र है।
अगर आप भगवान के उद्देश्य के अनुसार कार्य करते हैं तो मन आपका मित्र
है और विपरीत कार्य कर थे। यही नाम का है।
लेकिन जब हम शास्त्र के विपरीत कार्य करते हैं तो मारा मन हमारा शत्रु है।
तो हो बयान में लगा दिया है। जिसके द्वारा हम अपने जीवन को सुधार
भगवान पिता का संदेश दिया है। ताकि जीवन को सुधार सके।
भगवान इच्छा क्या है।
भगवान की इच्छा यह है कि हम
सब उसके तिेथापेलौटेपरहममारा मन क्या कहता है? नहीं, ये बॉलिंग जगह अच्छा है।
लेकिन हमारा मन क्या कहता है?
ये बहुत ही जगह अच्छा से आद क्लेश में है। मैं
दूसरा आदमी क्लेश में। लेकिन मैं सुखी हूँ
किसी मात हो,
लेकिन इस सदी का किसी मूल समाप्त हो सकते हैं।
तो आप सब भक्तों से निवेदन है। श कीजियेगा कि हमें इधर को 1 स्लो कम से कम ना है।
तार और आपखदकोसरूकरता हूँ की आप निश्चय कीजिये। 1 स्लो कम से कम ततपरकेसाथसताहरदिक पड़ता
है जब हम इसे पढ़ते हैं। हम छोडते, हम केवल अनुवाल पड़े साल
कई बार गीता पढ़ते हैं। हम सूची अलवार पढेंगे को देदी समय
जेगासमयबजाएगा 1 मिला था। मैंने पापा जी से पूछा या ना चाहिए।
बेली मपोर्टटएकबारमे ला से पूछा की क्या हम बिना ताजपुर केवल कार के साथ पिता छाप दे? तो ब्रोकर ने नहीं। ताजपुर बहुत आवश्यक है।
हमारे महान संत हैं, उनके विचारों का
छोड़,
जो तारपुर, जो हमारे महान संत हैं, उनके विचार का भी चोर परपसनिदिहैपरपरजी की गीता है। तो जो भगीता, जो तातपुरहैवबनदेबुदिया भूषण ने
कम आधारित जीता पढ़ोगे, रोज का
पक्का पक्का पक्का पड़ोगे
जे कैमरा से रिकॉर्ड करना चाहिए,
रिकॉर्ड करना चाहिए। आज कु
hi कई pres कोई best
इधर साबनeध con a बोल bol कoछoजहै अरे महाराज जी, मेरा प्रश्न ये है
की जब श्री कृष्ण चाहते है की
हम लोग सीधे गोलोक जाए तो उन्होंने हमें सीधे गोल में यहाँ सब पीड़ा सी।
अगर वो हमारे पिता है जो जगत है, यह खेल खाना है, हम बोले जगत में क्यों आये क्योंकि हमारे में शा का भाव हो गया था। भगवान के इस प्रकार का सुख तो जब में इन प्रकार के 4 थे, जाओ होली। का असली सुख में रहेगा। भोली जगह हैं, क्या लिखते हैं, देखते हैं कि कलेशीकलेनवाइकुलसा वाइक गलत किया है। यहाँ कुछ प्लेस नहीं, कोई बोली जग का नाम क्या है? क बार के प्ले मुकी। इसलिए जो बोली वो कहता है भगवान हमें निमंत्रण
तो प्रेस में था कि भगवान ने हमें क्यों इस भौतिक संसार में कर्ज खुलने के लिए भेजते है। क्यों न मार, भौतिक जगह जेल के जैसे है। तो क्योंकि हम भगवान सिर्फ चालू हो गए और अलग भोग करना चाहिए। इसलिए भगवान ने बोला कि इस भौतिक जगत मे जाओ और यह केवल कसी कस्ट उल और भगवान परदा बैंकोल। भगवान सबको बुला ले की बीना ना नहीं चाहते।
शाल संग के द्वारा पति से पति
भी उधार हो सकता लेकिन साधु संघ के द्वारा किसी का विभाग हो सकता है।
साधु जो है चीटी को भी कष्ट नहीं देना चाहता।
1 साधु 1 चीटी को भी कष्ट नहीं देना चाहता
है। ऐसा व्यवहार करो कि तुम क किसी और को चिंता मत लो।
तो भक्त ठाकुर कहते हैं ऐसा विभाग को किसी और को चिंता मत। 2
ये ही अपने स्वाद का सोचा, उसे पूरी प्रजा सुधार के विश्व सोचना चाहिए।
तो भक्त अपने सवार बारे में सोचता हूँ सबका उधार करना चाहता है।
पर दुख दुखी दूसरे व्यक्ति को दुखी देगा वो भी दुखी हो जाता है।
पर दुख दुखी दूसरे व्यक्ति को देख के वो भी दुखी हो जाता और कोई प्रश्न न मारा है। राज सुना अरजनकोप्रशनाया की से, क्योंकि वो इशारे नहीं था। तो ये निकाबसते पहली चीज देखता है की ईशा हमारे तो देख सकते हैं, हम कैसे रह सकता है, हम कैसे
सकते हैं ऑपरेशन
ईशा से कैसे दे सकता है? भगवान तुम्हें ज्ञान दे रहा हूँ की कितमाम नहीं है, हमारे तो ईशा तो
मैं गीता कैसे समझ पाएंगे हमारे एशियाई अनेक जानलों में अक्सर 1 फ्रेंस होती डाउन डेड हमारे शरीर में है जैसे की मछली मछली, गूगल की कमी क्या है, जल में झीदरबााह जो है, धूल है जिसके प्रति आप हमें क्या है, हम नेशुद्वारा गंदी तस्वीरें देखना चाहते हैं आन द्वारा, भले ना सो सा सा निकल े भजीनापेयरके द्वारा। उन्होंने कहते हैं कि वह अनाथ एशिया का भाव
जो पशु जैसे मछली है वो जीवा से आकर्षित हो जाती है हिरन खान के द्वारा, लेकिन हम तो सारे से आकर्षित हो जाते है और हमारे पास सारे अलर्ट है इन सारे अलर्ट से होगा भजन करे के द्वारा, तो अगर हम भजन प्रेयर करेंगे तो हमारे अलर्ट दूर हो जाएगा।
हर समझ
भगवत गीता में हर समस्या का हल है और हर प्रश्न का उत्तर है। 1 और प्रश्न लेंगे हर किशन मारा मारा जी रहती हूँ हम लोग करते हैं और का का काम भी करता है, भारत भी, पत्नी का, बच्चों का भी, हाथ पर जिम्मेदारी महत की जिम्मेदारी भी है, सामाजिक जिम्मेदारी भी है और साथ साथ में और मंदिर भी, हमारे पास की जिम्मेदारी कुछ कई बार हमें लगता है कि हम बैलेंस नहीं कर पाते, हम कैसे चीजों को बैलेंस करें,
मुर्गी का उपयोग कर के। 1 दिन में 24 घंटे होते, 24 घंटे में मान लो आपने, 8 घंटे हो गया 8 घंटे, ऑफिस में 8 घंटे मजा पेपर पेन से लेकर लिखो आप देखोगे आप टाइम की बचत कर सकते है। और यह भगवान की कृपा है हमें मन का बोजा भी मिले भगवान उन व्यक्ति को ये मौका देते बस बागी शाली हमारा लक् मन को प्रदान ना हम कई श्रोता साना में करेंगे। आजकल 1 फ्रेज है इस में कoमfोजोकॉफोरोमतलब हम सेवा करेंगे उसके बदले में हमें यह सुविधा चाहिए यह सुविधा चाहि ये भाग ली ना जा। ए इस फौज में आपको कश्मीर बॉर्डर फ्रेंड में भेजे भरी अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। लाल हमें डरना नहीं चाहिए और किसी हालत में भी भक्ति का जसमें है को मत करो
तो प्रेस के बैलेंस कैसे करें। तो महाराज ने कहा कि इटली के द्वारा और अपने समय को अच्छे 24 घंटे में पाठ ऑफिस में काम किए तो अच्छे से इसको बांट सकते हैं समय वेश नहीं करना चाहिए और अच्छे से जो भी होती का नियम उसका पालन करना चाहिए और कंफर्ट जोन तो हमें कंफर्ट जोन भी नहीं रहना चाहिए कि बस आराम का जीवन नहीं मंदिर का सेवा भी करना चाहिए जो मंदिर का सेवा करते है बड़े स्वभाव से प्राप्त होता है। और जैसे लोग सीमा में जाते हैं कितना कर्ज करते हैं तो वैसे हमें कंफोर्ट में प्यार करना चाहिए और बुद्धि का इस्तेमाल करके और भक्ति भी करना चाहिए और भक्ति करना चाहिए।
रूप कहते हैं जो भी कीमत भर नहीं पड़े भरो कृष्ण बकरी को हाथ से नहीं
जो कीमत भरना पड़, इसको भर कृष्ण भक्ति को हाथ से फिसलने
पर 2 अगर आपके आपके शरीर को छोड़ जाती है इलाज करने के लिए कुछ भी पैसा देना पड़े।
अगर हमारे बच्चे को कुछ चोट लग जाती है, बीमारी हो जाती है तो जो भी कीमत भरनी पड़ी है भरते लाज करते है कौन कौन और को प्रश्न
माता माता जी, माता जी को
को पस्त मार तो क्या
जितना पढोगे क कई बग डेढ़ सौ बार भी बढ़ी है
तो आज के जितना पर मार के समय से डेढ़ सौ बार पढ़ चुके है। माताजी
नहीं है
न
यह भगवान की लीला है वा के ली पाटन भाइयों को भी जाना पड़ा और अनेक बता के कष्टों क सामना करना पड़ा। पर हर स्थिति में हवा उनकी सुरक्षा की। 1 समय वास गए थे नियोजन के घर नियोजन बड़े सावधानी से उनका उनकी सेवा की। ये न बता था के समोली सरलता से परेशान होते हैं और फूल भी हो जाते हैं। तो हमरी छोड़कर डाले थे उन्हें से पूछा कि मैं आपके लिए कुछ खास कर सकता हूँ उसे कोई कुछ करे पूछ से हो। तो जरूर ने कहा आपने मेरे घर को पिसे बनाया है, वैसे मेरे भाई के घर को पिसे बनाया के बाद भेजा और कहा कि दुपहर को जाना पाना। भाई जंगल जा रहे थे तो 2 को खास सुविधा दिया। वो क्या था जब तक वो खाना नहीं खाते उनके अक्षय जितने लोग आयेंगे उनके लिए भोजन से जब उन्हें भोजन खा लिया, उसे मार खुशी मिले। पहुंचे के स्थान पर समान आओ बैठो। 2 वास ने कहा जाता हूँ पहले मेरे पैर का नान करने नान करने गए। विदेश ने पूछा कुशाल का ये वो चिंतन करने गए थे, इसी देर में भगवान आ गए। भगवान ने कहा मुझे भूख लग रही है, कुछ खाने के लिए है, वो बोलेगा कुछ भी नहीं है, मैं तो भगवान नहीं होगा। उन्होंने रसोई में गए और देखा कि बर्तन में ताकेपरवातााभगवान ने वो खाया और ये विश्व में अपना पेट भर गया। फिर में पानी डालोगे तो पानी पर तक पहुंचेगा। to s तो भगवान है। मिशा रक्षा करते
तो पांडव के कष्ट भगवान की, भगवान हरि की रक्षा की, तुम्हारे जी वो कहानी उधारण के रूप में बताए ऐसे दुर्भाषा होगी। 1 बार दुर्योधन को भेजा पांडवों के पास जो बर्बाद में थे और जब वो साथ दार शिष्यों के साथ आए और चिता में कैसे भोजन कराएंगे तो भगवान खुद प्रकट होते हैं और थोड़ा सा साफ का ताना था के प्रसन्न होते है। और पूरा विश् के सारे लोग सी से पूछो थैंक यू महाराज महाराज आप हमारी इस इस कान।
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