In this live lecture, Srila Gopal Krishna Goswami expounds on the core principles of bhakti (devotional service) as presented in the Bhagavatam. He explains how sincere presence before the deity and service to fellow devotees can alleviate the heart’s suffering, leading to deepening love for God. The discourse highlights the transformative power of studying the Bhagavatam, describing miraculous effects and spiritual advancements that arise from dedicated practice. Throughout the session, audience members pose questions about the nature of devotion, the role of scriptural study, and practical aspects of living a bhakti‑oriented life, to which the teacher responds with clarifications and encouragement. The overall tone is devotional, instructional, and uplifting, aiming to inspire listeners to deepen their commitment to Krishna consciousness.
Chapters
गहरा गया
क
2
en
ना
ले
र रे जामाममो हर जाले
हर वह
बचे न हा हा हा गाहा
हो matiनाwo
की गले
के क
हर गा देना पोरागा र इंदारा a हा
e thank you
as one
to
शोक संख्या प्राइस हरे शो नित्यम भारत से या भगवती गुतममस्लोते मन्कीन्षपइशभशो त्यम भागवत से रा धरवतीककश्वके नसइशजरेशुमद्यमभागरत सेवा भारती गततसलोकेभकभती से या से या आगत तमाशोकेतके
हर
नव
सपा
रायशूरअबदरेशू समस्त कनमगरसेविद्यमभगत
या
भगवती भगवान उत्तम दिद्यमलोकच भवतिीप्रेमाभक्ति से भवती उत्पन होती है। नई स्थिति अटल अनुवाद चित्रकार है।
भागवत की कक्षाओं में
निमित उपस्थित रहने तथा सुष्तभक्तकी सेवा करने से हृदय के सारे दुख लगभग पूरी तह विनिष्ट हो जाते है और उन 19 लोग भगवान में अल परमभक्ति सावित हो जाती है,
जिसकी प्रसन्नता विवो से की जाती। यहाँ अमंगकारवस्तुओं को निकालने का उपचार दिया गया है, जो आपने साक्षात कार के पद पर अनुरोध रूप यह उपचार है कि भगत के समधि भागवत 2 प्रकार के होते हैं 1 तो भागवत और दूसरे भाग, दोनों ही भागवत कार और सियार और इनमे से कोई 1 या दोनों ही और धोखों हटाने वाले है। भक्त भागवत ग्रंथ भागवत के ही समान है क्योंकि भक्त भागवत ग्रंथ भागवत के अनुसार ही जीवन यापन करता है और गंध भागवत को भगवान तथा उनके शुद्ध भक्त नामसिक, भागवत ग्रंथ तथा भारत व्यक्ति भक्त भाग भगवान का प्रत्यक्ष भक्त भागवत भक्त को पसंद करने से भाग लाभ
उठाया जा सकता है।
मानवीय तक यह नहीं समझ पाता कि किस प्रकार भागवत भागवत की सेवा द्वारा उन के पद पर होता है। किन्तु यह तथ्य हैं जिनकी यात्रा के नारे द्वारा की गयी है, जो अपने पूर्व जमा 1 दासी के पुत्र थे। दासी विषयों की की थी और इस तरह वह भी उनके सम केवल उनके
पुत्र।
1 महान भागवतों की संधि के ऐसे चमत्कार होते हैं। इन प्रभावों को व्ारिरूपसेसमझने ध्यान देना आवश्यक है। ये क लिसपनुषषयसंगधि से दिव्यज्ञान अवश्य बड़ी आसानी से प्राप्त होगा जिससे मनुष्य भगवान की भक्ति व सेवा में हो जाता है। भक्ति में जितनी ही प्रगति करता है उतना ही सेव हो जाता है। गंदभादकीकथाओको भक्त भारत से साफ करना जरूरी है और इस प्रकार इन दोनो भागों के संयोग से 9 की प्रगति होती रहेगी।
b मुझे तो जाराहै मे
है मुझे
मुझे so i o na o beti ज्यादा हो लो को और no no whatt ग जब बात हो we besar
कल
जाने जब से हम तो आप किताबों को पढ़ते सबसे पहले ये भाव भगवान अंदर जाने तो यही है हर भाग को सुनते हैं a contr for की दूर दूर से अब क्या बनेगे दूर दूर बजे च helo मैं लोग जुड़े है है वो जुड़े
सर मे
सजी हो इसलिए
अगर
आप को साल 7 जिंदगी का रोज बड़ी के सा इन चीजों को मसकरना मन को
ो
जरा किस प्रकार के आपके लिए दीदी और बताओ इस कार की उनके मंदर और हमारे नाम करता है आदि
है
इस करता है क्या कई सिर जो पाप की इच्छा है वो क्या जा है ये सो इस प्रकार से इस की आवाज है इस धरती के तो 1 पार्टी कर रहा है मुझे काफी जाती 5 साल पूर्व परचीशासोमें इस और पाली 10 और बाल मे 1 बुत उन्होंने ज्यादा बहु इस प्रकार जाने है दिन में कई बार और उसे पाके करनेज
है ये
कौन है गायेगा t कौन है फ्री घुबरागेयू हो होगा मै सो ये गहरी बात है आप ै xcushe माली से तुमने नाम बन चुका और उन्होंने जो है वो पाप मान कर जी सके तो आज मे भगवान तो आप पढ़ते बहुत जानकारी तो यह है या अपने आप को और बहुत सा कहा जाता है हम तो नीचे के भाग को या से असली तो
में
इसलिए बाजी से बारिश ही है बारिश चाहे पहल मोबाइल बिना के
2
हे क्या मुझे कोई बेटा कोई भी मार नहीं है 1 बार दूसरे
इसलिए
सो जो अपने गाँव में ये है
है
और इस तो मैं करना चाहता हूँ मैं हर तो हो खाली
है
ने वाली है और थाली ले सवाल तो ये माँ को जाने दीजिए म हम होते हैं उनमें ये bहुtgez de कोई नहीं है इसका नाम तो क्या बहुत ही है है वारी लाल पुर में 1 है इस
त
बुलेवार हम पांण
100 भागवत और दूसरे भाग और दोनों ही भागवत की ओर से इन में से कोई 1 दोनों की और हो कहचानेवालतो।