Book Distribution महत्वपूर्ण क्यों है? | 03 Feb 2024 | Srila Gopal Krishna Goswami

In this devotional lecture Srila Gopal Krishna Goswami explains why distributing spiritual books, especially the Bhagavad‑Gita, is essential for personal transformation and societal well‑being. He recounts the historic effort of his organization – the establishment of three printing presses, translation of the Gita into more than sixty languages, and worldwide outreach from New York to Moscow. Real‑life anecdotes illustrate how reading the Gita has rescued people from addiction, crime, and despair, turning them into devoted practitioners. Goswami stresses that the greatest shortage today is not books but the willingness to share them, urging listeners to become sponsors, volunteers, and distributors. He outlines practical steps – one‑to‑one distribution, sponsoring printing runs, organizing contests for children, and leveraging community events – and calls for collective effort to spread the message of Krishna bhakti for the benefit of humanity.
Chapters
krishna krishna in to station hi krishna or data woliamnehikrishna a guy srikrishna krna hasna में रिपीट कहा था? इसलिए म रूप से समझ में रीपीकराथाउसकेताकी। आप समझ सको, सो, आप सब चंद भाग्यशाली हो, आप सब के खाते शाली हो, क्यों? क्यों आप कृष्ण भक्ति में जुड़े, आप
कृष्ण भक्ति में जुड़े हो।
प्रापा जी ने कहा कि जब तक जो संस्कार बोझ पूर्व जन्म के अच्छे नहीं हो, भक्ति में नहीं जुड़ सकते।
रोपा जी ने कहा कि जब तक आपके संस्कार पूर, जन्म की अच्छे नहीं हो, आप कृष्ण भक्ति में नहीं जुड़ सकते।
शूल भक्ति के मांग पर, सुसब्दीकेमार्ग पर सबने निर्णय किया। जीवन का लक्ष में प्राप्त करना चाहिए।
आप सबने निर्वेद किया कि जीवन का लक्ष्य हमें प्राप्त करना चाहिए।
क्या है जीवन का क्या, जीवन का
लक्ष्य,
जन्म के बंधन से छुटकारा प्राप्त
करना, जन बिंटू के बंधन से छुटकारा प्राप्त करना।
तो हमारे परम भगवान प्रकट हुए थे। किसी पर व्यास देव के रूप में,
तो परम भगवान पती, पर व्याज देव के रूप में प्रकट हुए थे।
वो व्याज देव के रूप में। उन्होने अनेक ग्रंथों की रचना की।
व्याज देव के रूप में उन्होंने अनेक ग्रंथों की रचना की।
अरे पहले 1 ही वेद होता था,
पहले 1 ही देव होता था।
उसको 4 भागों में बाट डाले, उसको
4 भागों में बटा
को कुछ समझ नहीं पाएगा।
अगर आपको कहते कि जाओ तो पढो आप में से कोई समझ नहीं पाता।
इन शास्त्र के संदेश ग्रंथों में तो
हमारे आचारों में विधिक शास्त्रों का अधिक ग्रंथों में बंधन किया है।
और भक्ति से जाना ठाकुर भक्ति हमारे परम प्रसाद है। उन्होंने 1 गर्द देखा था, के माग हो गई जीवन के ऊपर, तो हमारे
जो परम गुरु के विकास ही भक्तिन ठाकुर। उन्होंने गर लिखा था चेतन महापुर के
जीवन पर, जो उन्होंने अंतरराष्ट्रीय महाविद्या जो
अंतरराष्ट्रीय महाविद्यालों को भेजा था।
तो उनके पुत्र भक्ति से उनके पुत्र के बहती सिधांताजीउन्होंने, ग्रंथों का अनुवाद और प्रकाशन और भी बढ़ाई।
तो उन्होंने ग्रंथों का प्रकाशन और वितरण और भी बड़ा दनबायाउन्होंने।
3 प्रिंटिंग प्रेस खोल।
उन्होंने 3 प्रिंटिंग प्रेस खुले थे, केवल
1 ही काम था,
उसका केवल 1 ही काम था।
भगवान के संदेश सवरणकरनातोबगीसधा जी ने शपाबजहमारीसंस्था को आदेश दिया। जब हम सुविधा ले, इन ग्रंथों का प्रकाशन करना, न करना, तो बंदीसाजीनेशिलाोपाज के
आदेश दिया था कि कि भगवान कोई सुविधा दे।
तो इन गंतुग्रंतोंकाप्रकाशन करना और उत्तरण करना अछमारमेकिरकीकी कमी है।
आज समाज में किसी की कमी है कौन?
सबसे बड़ी कमी है आधार ज्ञान की,
सबसे बड़ी कमी आयी ज्ञान की।
ज्ञानदा में लोग जन्म लेते हैं, पलते हैं और मृत्यु होती है।
अब ज्ञानता में लोग जन्म लेते हैं, पलते हैं और की हो जाती है।
भाग्यशाली व्यक्ति है। वो किसी भर के संगर्ष में आता है।
वो भाग्यशाली व्यक्ति है, जो किसी भक्त के संदर्भ में आता है।
संग में आने के 2 साल है,
संघर्ष 2 साल है।
आप किस को निमंत्रण देते हो, 1 है।
आप किसको निमंत्रण देते हो?
आप किसको उद्देश देते हो?
आप किसको उद्देश देते हो?
उसका प्रभाव पड़ता है और उसका प्रभाव पड़ता है। प्रॉपर जानते हो 70 साल में 40 रुपए के साथ भारत से ले आप।
जैसे जानते हो कि प्रॉपरटी 70 साल में टेबल 40 रुपए के साथ भारत से निदेश को चले थे।
मुंगेर पुसाद कोई भारत नहीं था, उनके साथ कोई भक्त नहीं था, कोई सेकेट्री
नहीं था, कोई सेकेट्री नहीं था।
उन्होंने प्रचार शुरू किया, उन्होंने प्रचार शुरू किया, न्यू यॉर्क में, न्यूयार्क में से सारे विश्व में पहुँच गया और आस्ते
सारे विशु में पहुँच गया।
1 दिन पापाजी की मूर्तियों को की
प्रार्थना कर रे थे, लेकन प्रॉपर्टी लॉसिकिसीमूर्तियों के सामने प्रार्थना कर रहे थे।
और भगवान ने कहा फिर लॉग तुमने पश्चिमी देशों में भरने की स्थापना कर ली है। और वापस जाओ भारत।
तो भगवान ने कहा कि आप तुम पश्चिमी देशों में करिश्नभकतिकीसथामना कर दी है।
अब भारत को जाओ का देश, पर देशों में से।
उनके गुरु का आदेश था कि पश्चिमी
देशों में संदेश को पहुंचाना बाबा भी भारत आए प्रोपर्टी के भारत आये, उन्होंने आया से भारत में 4, उन्होंने आसिया से भारत प्रचार शुरू किया, आशय से भागोंकी संख्या भर्ती। आज लगभग शांसकेलरहैं कल और स्तेस्प संक्या
बचेंगे आर 400 की है। भारत के स्वामी
क्या रपरजग्रंहैसधार जैसे नहीं
है, प्रॉपर साधारण जैसी नहीं है, ये
है भगवान की वाणी, ये है भगवान की वाणी। और चाय। और अचार, तो इन फ्लो को, इन गंधों में इतनी शक्ति है। 1 धार से सफल होगे को जीवन सफल हो जाएगा।
इन रंगों में भी शक्ति है कि आप 1 स्लो को विधान समझ लोगे का जीवन सफल हो सकता है।
भगवान कहते हैं सबसे प्रेस, सबसे परे, बर्क कौन है?
भवन कहते हैं सबसे पहले, सबसे प्रिय भरत कौन है?
कौन है, कौन है जो प्रचार करता
है, जो मेरा प्रचार करता है, हर
साल मैं सन करते है, हर साल।
आप जाने कौन करते हैं?
मैं है। विश्व के हर केंद्र में लोग समझते
हैं, क्या है मतलब मेरा शब्द है। और विश्व के हर केंद्र में लोग समझते हैं। इसका मतलब क्या है?
मेरा क्या, अधिक परिश्रम करना, अधिक परिश्रम करना, मै आपको विचलित करने के लिए,
माया का मकान, आपको विचलित करने के लिए ठीक है।
ठीक है माया आकर किलकी आप लोगों
को माया, आकरशनसतीहैआपलोगको
सरा सावधान माया किसी को भी पकड़ सकती है।
इसने हमें सावधान माया किसी को पकड़ सकती है।
तो बहाने सब सबसे कॉल,
हम सब बातों में सबसे प्रिय हुआ है, जो मेरा प्रचार करता है, जो
2 साल में
इसके 2 साल ने प्रचार करने
भारत के द्वारा और ग्रंथ के द्वारा,
भक्त के द्वारा और ग्रंथ के द्वारा।
ई बार लोग पूछते हैं हमें 20 गीतावादी, 20 हजार नहीं बरता जाना चाहिए।
कई बार लोग पूछते हैं कि हमने 20 हजार गीताबाली, तो 20 जार, नई बा जाने चाहिए।
प्लांटिंग
आप प्लांटिंग कर रहे हो, कुछ
पता नहीं, कल भी लोग गीता को
पड़े, कुछ पता नहीं कब लोग इस
किताब पढ़ेंगे 1 समभा बाद में भग बना, 1 समय 1 किसी ने गीता खरीदी थी, 10 साल पहले 11 व्यक्ति
जो भगत बना, उसने गीता खरीद।
10 साल पहले उसने हमने अलमारी में
रख दिया और उसके क्या नाई में रख दिया।
कभी देखा भी नहीं, कभी देखा भी नहीं। बिल्कुल दुर्घटना भी तेज हुई, फिर को
दुर्घटना भी हुई थी।
अनेक धार्मिक गंथों को तो वो खोजने लगा।
अधिक खाली घंटों को
उसको,
और जो भागे सारी रखते हैं, उसको क्या होता है।
10 साल पहले साल बाद गीत लोग उसके हाथ में आई, तो 10 साल
बाद बीता था उसके हाथ में आग
और
और उसने उसे पढ़ा। वही का मंदिर जाना शुरू किया। और बंद बन गया।
10 साल बाद वो क्रेन में आपने उक्रेन।
नाम सुना है आपने युक्रेन, नाम सुना
है रशिया का पड़ोसी देश, रशिया का पड़ोसी देश। 1 चोर था, जो कि चोरी कर घर जाता।
1 चोर था जो लोग रजा का
चोरी करता था, और वो चोरी करने आया। 1 देबोडीकेगायमवो चोरी करने आया। 1 डेवोटीकेघरमें बोडी जा गया, या तो भाग छोड़ पर ज्याद से ज्याद का हाथ में हाथ है लेना कहा, जो बगल की तरी काफी बड़ी थी, उसके हाथ में आया।
1 गीत कापी पड़ी थी, वश था
काली, तो गीत गया, चोरी करने भागा, मालिक उठा लिया
चोरी करने के लिए, लेकिन माली जा गया तो भागा। और उसे आग में गीता
के गीता पालना शुरू किया।
उस ने गीता पढ़ना शुरू किया, फिर
भगवन से मिला है। ऐसे अनेक लाए हैं, जो इन ग्रंथों में दिव्य शक्ति है।
इन ग्रंथों में दिव्य सकती है।
का पनीले यथलगूपनामसे प्रस्तुत किया।
प्रपज ने, उसे यथा नाम से प्रस्तुत किया।
यो क्यों? क्योंकि उनके लाभ उठाने के लिए, उसी विचारधारा से बाबा ने स्वीकार किया। समझाया के भार से बनाने का ने स्वीकार किया।
तो? क्योंकि प्रोपोसे उसी भाव से प्रस्तुत किया, जिस भाव से भगवान ने उसे सिखाया और अर्जुन को रेड किया।
धर्म पृथ्वी पर और 10 हजार साल रहेगा।
धर्म पृथ्वी पर और 10 हजार साल रहेगा।
उसके पश्चात धर्म फैलेगा लेगा, उसके पश्चात
अधर्म फैलेगा,
मा जी, जो अंडोननहैवह फैल जाएगा और 10 हजार साल रह।
तो जैसे हम लोग ही आंदोलन है, वो करता जाएगा।
और 10 हजार साल तक हमें केवल विश्वास करना चाहिए और प्रयास करना चाहिए,
हमें केवल विश्वास करना चाहिए और प्रयास करना चाहिए।
तो ये जो आंदोलन है समाज के लाभ के लिए है।
ये जो आंदोलन है, समाज के लाभ के लिए है।
आज की सदी में, समाज में अत्यंत निराशा है। आज की स्थिती में अत्यंत निराशा, बेचैनी, निराशा, तनाव, तनाव, चिन्ता, सच है, सच है, आप राष्ट्रपति बन जाओ। तो लीजिए,
अगर आप राष्ट्रपति बन जाओ
तो भी कई शुआ शो, उपाय क्या है? ध्यान, उपाय, उपाय क्या है?
अहापनिकउपाय जीता का ज्ञान, गीता का ज्ञान,
गीता ज्ञान पूरे मानव समाज के है।
जीता का ध्यान पूरे मानव समाज के लिए है।
अभी 2 घंटे पहले में मोकाम से
बात कर था, अभी 2 घंटे पहले में मास्को रशिया में भगों से बात कर रहा था।
2 है हम वीसा कॉंटेस्ट इंडियन बच्चों में करने लगे हैं।
गीता कांटेस्ट मॉस्को में बच्चों के पीछे करना है। मॉस्को इंडियन
चाय भार सर कार का 1 कूल 400 मिलाती है तो वहाँ
पर 1 पुल समें 400 भी है। अरे भारत से भरे रशियन भी है
तो गीता का संदेश पूरे मान समाज
के लिए, गीता का संदेश पूरे मानव
समाज के लिए और गीता का संदेश द्वारा स है और गीता के संदेश
के द्वारा समाज सुखी बन सकता है।
गीता का संदेश हिंदू के लिए नहीं है।
पूरे बार गीता का संदेश केवल हिंदू
के लिए नहीं है परम भगवन गीता का 60 से अधिक भाषा में हुआ
है ्रॉपाजीजीजीता का नुवाद 60 से भी भाजी में हो चुका है
में लोग गीला को पढ़ रहे हैं। अपने जीवन को सुखी बनाने के सारे
विश्व में लोग गीता को पर हे जीवन को सुखी बनाने के लिए
भारत में हमें गिर पड़ी है।
भारत में हम सोचते हैं हमने तो गीता पढ़ी है
लाभ क्या होगा जब आप देश को कार करो बट लाभ
तब होगा जब आप भवाद सदेश थारु,
सुकारो है, भारी है आप भक्तों के प्रबल इच्छा को पूरा किया तो हम
बारी है आप हमको का जितने प्रपरजीकीइच्छा को पूरा किया
की सvsuीेवाजन्होने जन की
सेवा सास किया था।
आपका नाम क्या है?
तो माँ आपने पूछा उनसे आपका नाम क्या है?
दुखी दासी। उन्होंने कहा दुखी दासी माँ आज तुम्हारा नाम है सूखी दासी माँ पे खरा
है सुखी दासी,
दुखी दास, दुसीदासीथेअबआप बन रहे हो सूखी दास।
तो हम सब दुखी दास दुखी राशी से और अब आप सब बन रहे हो की राशी पर
हमे की यूज नहीं हम कंजूस मतलब ज्ञान है और हम नहीं करना चाहते कंजूसमतलबज्ञान नहीं करना चाहते। स जीवन में परिवर्तन हु आ है,
आपके जीवन में परिवर्तन हुआ है।
हम जाते है दूसरे भी कम जा
जाते दूसरे भी सुखी बने तो आप
सबका बहुत बहुत धन्यवाद, आप सबका बहुत बहुत धन्यवाद। बोल विजन हमेशा होते रहेंगे बुक किस्से हमेशा होती रहेगी। इसके के कई साधन है, इसके कई साधन है। 1 लोग स्पोंसर करते हैं।
1 ई लोग स्पांसर करते हैं।
वो कहते हैं हम चाहते हैं कि गीता का संदेश फैले है।
वो कहते है संदेश फैले है, हमारे
पास समय नहीं है, हमारे पास समय नहीं है। 20 जा गीता बाटने के वीजा गीता बाटने के लिए बाटो बाट हमारे हम तुम भर जाकर कांस जैसे राम में सौ भर गए थे
हमारे सौ
उन्होंने कई लाख की बात ने कई बार ने स्पांसर किया था और लोगों ने निकाल लिया था गीताबा कई लोगों ने
स्पांसर भी किया था जीताबाटनेकलिाहर साल कई
पंच स्पोंसर क हम जीता ये लो मैं
ते है की हम
तो मैं जान से आपके गागर कइयों ने स्पोंसर
किया तो मेरे खयाल से आपके कार्यो
कैयो ने स्पांसर किया है उनका बहुत बहुत धन्यवाद, उनका बहुत बहुत धन्यवाद। कैयो ने वन टू, वन डिस्ट्रीब्यूट किया
औरकहियोने वन डिस्ट्र्ूट किया है।
वन टू, वन डिस्ट्रीब्यूशन,
वन टू डिस्टिल्ूशन बड़ा महत्वपूर्ण है।
तुम लोग फ्लैग में आकर क्यों बात
कई लोग कहते है तुम लोग को
नहीं देने का है, 2 सालों में वह धूप में बाटने और कई लोग
के बात देखो इस साल को इतनी धूप में आज बाटने के लिए रशिया
में गहरी ठंड है, रशिया में बहुत गहरी ठंड है, और खली देश है यहाँ और भी ज्यादा ठंड है।
रशिया गजेकिस्तादेशहै जहाँ रखा है मां नाम
है कृष्ण का ाल के हर दिन
जाती किताब माना शिशियाहैकृष्णनायतार जो हंडरादर्मियों हर
दिन जाती वातेगेगे कैंसर हॉस्पिटल हो,
कैंसर हॉस्पिटल या कहीं ओर हो।
और ये मुसलमान देश है।
और ये मुसलमान देश है।
तो बक्सों में उच्ाहैप्रचारको बढ़ाने के लिए किसी ने
तो हम तो में उत्साह है प्रचार को बढ़ाने के लिए इस साल संस्था बढ़ रही है। आप सब का बहुत आभार
महत्वपूण सेवा
में सूरदास गोदी में आप सब इस जुड़े हो।
तो मेरा जौन हर साल करना है,
तो मेरा जान हर साल करना है।
ये देखा गया भारत में लोग महीने में उत्साहित हो जाते हैं, तो बाद में आस की ओर देखा गया है
की लोग जिताजंदीकेमहीने में उसईकजानेबादमोजाते है, तो
मैं उन्हें कहता हूँ मैं राजन के
लिए देसना बट मैं कहता हूँ पर चलता है।
12 महीने बार, 24 घंटे, 24 घंटे, हम 4
हमारा प्रचार का काम वैसा ही होना चाहिए।
जोधपुर में था, मोर मोर जाता गीता
मोडर तो मैं जोधपुर में था, वहाँ पर 1 शिष्य है जो हर दी जब अपनी मोटर में जाते तो उसके
गिशाफरखतेहैलाइट में खड़ा है। मोर पडोस के मोटर को
लाइट में खड़ी होती है। मोटर अपने पडोस के मोटर को गीता
बाडदेहैबडनेेसा, हम जा जा देंगे आपके बाद
बादवीयानीसादाहै, आप सब का बहुत बहुत शुक्रिया। पर हम जानते हैं की आप के
बात नहीं, उसको पढ़ो गीता पढ़ते आप
मेसे कितने गीता पढ़ते हो,
हमारी गीता पर रोज पड़े।
हमारी कोशिश होनी चाहिए कि हम गीता को रोज पढ़े।
गीता में भगवान के मानी में कोई अंतर नहीं।
गीता में भगवान की वाणी में कोई अंतर नहीं।
जी भगवान पर भगवान बोल रहे है।
श्री भगवान।
हाजरा, भगवान बोल रहे हैं, क्या बोल रहे हैं, क्या बोल रहे हैं, संदेश संदेश क्या करो, क्या नहीं करो, क्या
करो, क्या नहीं करो।
वो गीता के द्वार स्थापित होता है
और इस गीता के पास स्थापित किशन
भगवान आप लोग दूर दूर से आये हो। मैं वाणी विश्णाकेनाचाहता, हूँ, थैंक यू और हो। ये बोलता है कि सीटामनी शुभकामनाए, इस पर काट दी, गा, आप सब बहुत
दूर से आया है। मैं बीमारी को विश्राम दे रहा हूँ। आप सबको सबसे ज्यादा शिकार का आशीर्वाद
4 के लि, ये सबसे अच्छा समय है।
प्रचार के लिए, सबसे अच्छा समय है।
या श्रीराम में हिंदू वेव आ गया है।
अया में राम की मूर्ति की स्थापना के बाद भारत के सनातन का वेव आ गया है।
और जायसी बोलेंगे और साथ में यह बोल रहा है का संदेश क्या है? उसका पालन तो लोग जैसीराम तो बोल
रहे हैं लेकिन साथ में यही बताना है कि राम संदेशों का पालन कीजिए।
तो इस समय हिंदू में थोड़ी जागत।
इस समय हिंदू में थोड़ी जागती हुई है।
हमें इसका लाभ उठाना चाहिए, हमे सलाब नाना चाहिए। उसे प्रचार बढ़ाना चाहिए, उत्साह से प्रचार
बनाना चाहिए,
न बनाना चाहिए, भंगी भंगी, बेस बनाना चाहिए। और आपके सामने मंदिर का भी हो रहा है,
आपके सामने मंदी का निरमाण हो रहा है। कई सालों से ह
प्रयास है की
तो हमारा प्रयास अच्छे कितियाजेशुअवसर पर इस मंदिर का उद्घाटन होगा,
सम्भव हो पायेगा, हम सब परिश्रम करे, ये संभव हो पाएगा हम सब परिश्रम करें केवल सुधा
यह केवल सुधा शुरू करेंगे परिश्रम सबको
पूजा से जुड़ना चाहिए सेवा में हम
सब कुछ कसा सोना चाहिए।
सेवा में ठीक है न ठीक है न सेवा करोगे, हमारी गुफा मिलेगी, सेवा करोगे।
तो को हमारी गुफा मिलेगी, मंदिर विभाग भी आप सब सहयोग का बहुत बहुत धन्यवाद देंगे पर महाराज का इस सुंदर शब्दों में होने हमें उत्साह किया तो हम ज्यादा समझ लेंगे क्योंकि महाराज को भी जाना है और उनको निशा है तो अभी हम जो है पहले जैसे महाराज की कार में स्पांसर करते हैं तो हम सुगापुर द्वारा प्रेरणा से 3 भक्तियां माली ने हमें हजारो वटी ट्वेंटी वा और कई सालों से कतरा रहे हैं तो हम रिक्वेस्ट करेंगे के सामने आये और महाराज जी के हाथ से जो है अपने पुरस्कार दे तो वो सीधी से चलेंगे और वहीं से जाएंगे मैं नाम इससे पहले फूल उनके बारे में पूछना चाहते है
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tation prोgramsअरकूशना तो में ज्यादा समय नही चाहता हूँ महाराज को ज्यादा जिनका भी नाम होगा तुरंत से स्टेशन से कराएंगे आप तुरंत प्रणाम नहीं करेंगे लेकर नीचे प्रणाम करके। तो अभी हम नीचे से लेकर पोर्ट 20 में जा रहे हैं जैसा कि चौवन हजार 233 का बाकी इस मेले में तो लगभग 34 वोटों की टीम है तो हम नाम लेंगे आप और फिर जाएंगे इस प्रभार विश्णप्रभुथरटी सिक्स प्रभानु कृष्ण प्रभु जल्दी जान की माताजी हंड्रेड
ट्वेंटी टू भर
यहाँ टीवी न बनी है करना जावद विता इस तरेह चक्कुरआदिप्रभु हंडरेड टू का विकी प्रभु टू हंड्रेड जीता है ये हमारे प्रेस का या हर दिन रेट 23 पोती का पार्टी हर दे तो महीने में नेट है रिश्ता वतीशोताबादाजींटी टू हंड्रेड best and college two hundred sixty it as माताजी थ्री हंड्रेड भागिता एंड 3 300 भावगीत राम किसका प्रमुख कर तोलेटी थ्री हंड्रेड भाव गीता रामकेश का निजी पेज 300 भावगीत देन केंटन आद थ्री हंड्रेड पार्टी सिक्स भाबगीतासक।
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