भक्त समाधि में किस प्रकार रह सकता है | CC 1.199 | 23 Nov 2020 | Delhi | Gopal Krishna Goswami

Gopal Krishna Goswami explains how a devotee reaches samādhi through pure bhakti, or devotion to Krishna. He draws on historical examples of devotees who maintained their practice even under oppressive rule, and emphasizes reciting holy names, daily discipline, and distributing Krishna literature as essential service.
Chapters
ओम नमो भगवते वासु, मल भागवते वासु। मलभोभगवतेवासव सोमवार को चेत पढ़ते हैं और मुझे सूचना दी थी की मध्य अध्याय 1 शोक वन नाइन टी आई तक पढ़ चुके हैं तो वन नाइनटी नाइन से शुरू करेंगे और आगे के 5 श्लोकों में कोई 7 प्रिय नहीं है लक्सर, देंगे वो 200 6 के pr ok you have indisishindi इंग्लिश to सोमवार खान से पढ़ते हो
sir he
was in the bord bord ka re from there to
इंग्लिश जीता है,
ठीक है इसका या नुवाल सीधा कर 2
मैंने
5 शोकों का कोई चाहत नहीं है, ठीक है टेक्स उन
आम हरिदेबलीनहींप्रिभुने इसको
रिपीट रिपीट करेंगे
ओनली ओनली ट्रांसलेशन translasion no one within the three words। इस सuफिcेंटलy पाrful to deliver us you are the ओनली savior ऑफ the फ पोलेंड सोल्स देर फॉर देयर इज नो वन बट यू हिंदी में इस इन तीनों जगत में कोई भी इतना शक्तिशाली नहीं है, जो कि हमें हमारा उद्धार कर सके। आप ही हम सभी पतित आत्माओं के को उद्धार करने वाले हैं, इ। इसलिए आपके अलावा और कोई नहीं है।
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टेक्स ट्वंटी टू हंड्रेड आमाउधरिययदिदखानि जबल पति दपा बना नाम, तबे से सफल ट्रांस if you simply deliver स बाई योर ट्रांसलेट स्ट्रेंस दैन सर्टेनली योर नेम विल बी नोन ऐज पतित पावन द सेवियर ऑफ द फॉनेंससोल्s अगर आप हमारा उद्धार करेंगे अपनी दृदय शक्ति के द्वारा, तब आपका नाम प्रसिद्ध होगा, तभी आपका नाम जाना जाएगा। पतित पावन बद्ध जीवात्माओं के उद्धारक के रूप में सत्य बात कह सुन दया
मया
यार पात्र जगदे नहया
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speak one word that is very true, plainly her us mursi full one, there is no one, there is no other object of mercy। थ्री वर्ड्स but s। हम अब 1 शब्द बोलेंगे जो कि बिल्कुल सत्य है, कृपया उसे ध्यान से सुनिए। हे कृपा मै। ऐसा कोई भी दया का पात्र नहीं है, ऐसा कोई भी दया करने वाला नहीं है। इन तीनों जगत में sex two hundred to more दया krikara sada saphala akila brand ecugatomaradयa bala, we are the most follen, there for by shoin, s your merci, your mursi is most successful let the power of your merci। बी एक्जीबिटेड दोसो 2 हम सर्वाधिक पतित हैं, अत हम पर दया करने पर आपकी दया सर्वाधिक सफल होगी। संपूर्ण ब्रह्मांड को आपकी दया की शादी देखने दीजिए। नाव टू हंड्रेड थ्री टू हंड्रेड फोन टू nde नाम बरसा परमार्थ एव में शुरू, विज्ञापन 1 अम्र रहा। यदि मैं न दई, जैसे तदा द इस यंत्र नाथ दुर्ग अनुवाद पीछे दोराए,
कौन सा लोक है, आप
उसमें भी
का
अनुवाद श्रवण कीजिए। हे प्रभु, हमे आपके समक्ष 1 बात कहने दें। यह रंज मात्र भी विधा नहीं है। अभी तो सार्थक है। यह इस प्रकार है। यदि आप हम पर दयालु नहीं होंगे तो आप की कृपा के लिए हमसे अधिक योग्य पात्र ढूंढ पाना। अधिक कठिन होगा। टू जीरो फोर आप ने आयोग के देखी मने, पान शोभा तथा पीदोमारंनेहजाएलोभा अनुवाद आप की कृपा के लिए उपयुक्त पात न होने से हम अत्यधिक शुभ हैं। फिर भी हमने आपके दिव्य गुणों के विषय में सुन रखा है। हम आपके प्रति अत्यधिक आकृष्ट हैं। 200 5 वावनएसेचादरधरीरे चाहे करें तैसे वांछा पोरउधयेअंतरे नि संदेह हम उस वामन के तुल्य है, जो चांद को पकड़ना चाहता है। यद्यपि हम सर्वथा अयोग्य है, किन्तु हमारे मनों में आपकी कृपा प्राप्त करने की इच्छा उठ रही है,
किसे
टू जीरो सिक्स। इसको वार्ड वाय वर्ड भवंता, आप एवं निश्चित रूप से अनुचलनसेवा करने से निरंतर हा निरंतर प्रशांत, शांत संतुष्ट निश्चेत सब मना रहा। दौरत बिछाए अंत रहा। अंजली कदा कब अहम मैं 1 कांतिकर अकेले नित्य नित्य किंकर सेवक प्रहर्ष श्यामी मैं प्रसन्न हूंगा सनाथ साथ सनाथ जीवित जीवन पाकर
रवाल।
अगुवा कबका पीछे तो है। आपकी निरंतर सेवा करने से मनुष्य सारी, पथिक इच्छाओं से मुक्त हो जाता है और पूर्ण शांति प्राप्त करता है। वह समय कब आएगा, जब मैं आपका नित रास्ता और ऐसा योग्य स्वामी पाकर संदेह प्रसन्नता का अनुभव हुआ। तानबरेशिलकपालजी के द्वारा बाल कृपयासवरकरेसरातन गोस्वामी को शिक्षा देते समय श्री चैतन्य महाकरभूने यह घोषणा की है की प्रत्येक जीव पूर्ण पुसुंदमभभवान का सनातन दास है। यही समस्त जीवों की स्वाभाविक स्थिति है। जिस प्रकार 1 कुत्ता या नौकर दक्ष मालिक पाकर या 1 बालक सक्षम पिता पाकर पूर्ण संतुष्ट रहता है, उसी तरह जीव भगवान की सेवा में उदया संतुष्ट रहता है। इससे वह जान लेता है कि उसका सक्षण स्वामी उसे सभी प्रकार के संकटों से उबार लेगा। जब तक जीव को भगवान का निश्चित संरक्षण प्राप्त नहीं हो जाता, तब तक वह चिंतित रहता है। यह चिंता का जीवन ही भाविक जीवन कहलाता है। पूर्ण दुष्ट एवं चिंता मुक्त होने के लिए मनुष्य को भगवान की निरंतर सेवा करने की स्थिति पर आना होगा। यह स्रोत भी श्री यमुनाचार्यकरण
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में
दमीखासाऔकमलेहरे है कि हम जो हैं हम सबसे पी जगह मदाई सेवी हजार गुना ज्यादा प्रतीत है। तो आप कृपा करके हमारा उद्धार खिलेगा भक्तों का ये भाव रहता है कि हम सबसे पतित है कृष्ण कृष्ण राज का राज कहते हैं मैं तो इतना पतित हूँ कि तुम मेरा नाम भी लोगे, तो तुम्हारे सारे गोल मिल जायेंगे। तो मेरा नाम ही मत लो। तो रूप और सनातन उन्होंने उनकी थी महा है। उन्होंने कहा कि हम तो सबसे पतित हैं, वैसे सबसे पतीत माना जाता है जगाय बदाई को, पर हम जगाए बदाई से भी यादा प्रतीत है। तो आज इस शोक में क्या कहा जा रहा है? अगर हम सदा निरंतर आपकी सेवा करेंगे तो हम जो भौतिक आकर्षण है उससे हम मुक्त हो जायेंगे और हम संतोष रहेंगे और आपके हम नाथन सहयोग बन जाएंगे। और उसके द्वारा असली आनंद प्राप्त होगा। तो यहाँ यही उद्देश्य दिया जा रहा है क्यू? और यहाँ क्या कह रहे हैं रुपरसनाथन हमें अपनी सेवा में जोड़ें और आप की सेवा में जुडेंगे। तो अभी जो बौद्धिक आकर्षण है वो भी समाप्त हो जाएगा। कृष्ण हम सब का सनातन संदेश क्या है? ये हम हैं भगवान के दास। हर व्यक्ति इसे स्वीकार नहीं करता। पर में यह उपदेश दिया जाता है। और बहुत ही आकर्षण से। अगर आप बचना चाहते हो तो क्या है? उपाय यहाँ इस लोक में दिया जा रहा है। उपाय है कि आप कृष्ण भक्ति में जोड़ो, जहाँ हम भगवान के नामों का उच्चालन करेंगे। अगर हम शास्त्र को पढ़ेंगे और भगवान की सेवा में रहेंगे, फिर मेरा शंका के आपके शुद्ध विचार शुद्ध बन जायेंगे। तो रूप और सनातन कह रहे हैं कि हमारा कर्तव्य यह है कि हम आपकी सेवा में जुड़े। तो पहले तो रूप स्वामी ने नौकरी त्याग दी थी। और जब उन्होंने नौकरी त्याग, उनके पास इतने सोने के सिक्के थे कि पूरी नाव बढ़ गई थी सोने के से कांग्रेस, और उन्होंने अपनी संपत्ति को किस रूप से बाटा? 50 प्रतिशत उन्होंने लिया, ब्राहमणों को शो बराबर, 25 प्रतिशत उन्होंने दिया अपने रिश्तेदारों को रिश्तेदार, यही नही कहे तुमने सब कुछ त्याग दिया, हमारे ने कुछ नहीं किया। और और बाकी उन्होंने रखा भविश्य की आवश्यकताओं के लिए इमरजेंसी फंड। और यह एजेंसी फर्म बड़ा काम में आया था। क्योंकि जब सिनाधंगोस्वामी को राजा ने जेल में डाल दिया था, क्यों जेल में डाला। क्योंकि सनातन गोस्वामी ने भी थोड़ी देर बाद अपनी नौकरी थी, आग दी थी। नागस्वामी ने। पहले तो सूचना दी राजा को, कि मैं बीमार हूँ, वो बीमार नहीं थे, वो 30 ब्रामण के साथ बैठकर भागवत का अध्ययन कर रहे थे। और राजा ने सोचा राजा बड़ा दुखी था। रूप नौकरी के आगे, राजा ने राजा उड़ीसा जाने की तैयारी कर रहा था। युद्ध में लड़ने के लिए, युद्ध में लड़ने के लिए। राजा ने अपने वैली को भेजा देखो, सुना सर की क्या बीमारी है। 1 महिना हो गया दफ्तर लॉक डाउन to set सुना सर के कमरे में आ गया। आज आप किसी के घर जाते हो तो घंटी बनी माननी पड़ती है। वो व्यक्ति पूछता कौन हो? नई चाहत नहीं आ। सुदवाजाइनेखोलहनदल में यह सुविधा नहीं थी। तो वह सीधा अन्दर चला गया। और उसे क्या देगा राजा तो बिल्कुल ठीक है, 30 ब्राहमण के साथ बैठकर भागवत का अध्ययन कर रहे है। तो राजा को सूचना ी सुनाता तो बिल्कुल ठीक है, वो तो भागवतम पड रहा है। तो राजा ने सनातन को बुलाया। और क्योंकि वो राजा था, सुनाजा ने पूरी इज्जत दी, उनको प्रणाम किया। फिर राजा ने कहा थोडा बड़ाओ भाई छोटा है, छोटे से भाई, उसने नौकरी से याग दी अब तुम भी लापरवाह बन रहे हो, तुम भी दफ्तर नहीं आ रहे। आओ कल से शुरू करो अपना काम। सारा ने कहा मेरी रूची नहीं है बस का, ये नहीं हो पाएगा। तो राजा ने गुस्से में आकर कहा डाल। 2 इसे जेल में, तू ने जेल में डाल दिया। तो जो जेलर था मुस्लिम से, सनातन का भ्यास था, राजनीति कार में, 7 ने उस जेलर को कहा तुम मुझे छोड़। 2 ये है 5000 सोने के सीखे, क्योंकि जब सनातन जेल में जाने वाला था, पस आया था। जिसमे स्वामी ने कहा मैंने तुम्हारी आवश्यकता के लिए एमरजेंसी के लिए दसरा होने के छोड़े हैं। इस दुकान में सदा ये सोचा था कैसे? जेल से निकले वो वर्ना जाना चाहते थे वह प्रभू को मिलने के लिए। ये थी उनकी रूचि, यह था। तो जेलर ने कहा तुम्हे मैं छोडूंगा तो राजा मुझे नहीं छोड़ेगा। तुम सधार कैदी नहीं हो? बी पी कैदी? जो अच्छा 8000 से ले तो और तुम क्या देना? राजा से सुबह गया था मल वगैरह निकालने के लिए मेरे छलाग मारी नदी में बड़ी कठिनाई से निकले माह प्रभु को मिले का में तो दोनों भाइयों ने नौकरी त्याग दी थी। और यहाँ हम देख रहे हैं दोनों भाइयों को 3 माह, प्रभु ने शिक्षा दी और दीक्षा देकर देस खान को और क्या नाम दिए गोस्वामी और सधारजगोस्वामी। तो यहाँ ये कह रहे हैं कि बौद्धिक आकर्षण से अगर आप मुक्त होना चाहते हैं तो आपकी सेवा में हमें जुड़ना चाहिए। तो ये बड़ा महत्वपूर्ण संदेश है हम सब के लिए, की अगर हम मुक्त होना चाहते हो। जन्म मृत के बंधन से तो क्या करना चाहिए? हार की सेवा में जुड़ना चाहिए। शास्र का निर्णय क्या है? भक्ति योग भगवत हम का यही निर्णय है, भगवत गीता का भी यही निर्णय है। भक्ति हो और भक्तियों के पालन से हमारा शुद्ध मन, शुद्ध बन सकते है। संक्षि भक्तियों का अर्थ है भक्ति की विधियों का पालन करना और भगवान की सेवा में जुड़े रहना। और भगवान की सेवा में जुड़े रहोगे। तो हिजेकाकीमयल अवश्य ही दूर होगी। तो हमें सेवा में जुड़े रहना चाहिए। यह बहुत बहुत महत्वपूर्ण है। जब हम महा मंत्र का उच्चारण करते हैं, तो इसके द्वारा भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं। क्या? हमें क्या 2, सेवा 2, सेवा 2, सेवा 2, और कई बार जब सेवा दी जाती है, हम भाग जाते हैं, हम उसका लाभ भी उठा रहे हैं। सो भगवान की सेवा और हरि नाम के जाप का उचारण यह आवश्यक है कि निवेदन। तो भागवत के दसवें में से सेवा से। सम्बंधित बाबा जी तार में कहते हैं हमारे सारे कार्य का उद्देश्य होना चाहिए कि हम लोगो को ग्रंथ, बाटे, ग्रंथ, बाटे, क्यू और सब जुड़ सकते हैं। हमें यह नहीं सोचना चाहिए। सर जो समकृतमेंजाते हैं, भक्त, उनकी यह सेवा है और दूसरों की सेवा नहीं प्रॉपर। बड़े स्पष्ट रूप से कह रहे हैं gेनइनप्रैक्टिकल सर्विस लॉ, हमें प्रैक्टिकल तरीके से भगवान की सेवा में जुड़ना चाहिए। और हम भगवान की सेवा में जुडेंगे। तो भगवान का प्रचार भी होगा, भगवान के बंदों का भी ठीक मैनेजमेंट होगा। पर हम सेवा नहीं करेंगे। तो किसका नुकसान है? हमारा तो चाहे आप पुजारी हो, कुछ भी आपकी सेवा हो, हमें मौका मिले, हमें ग्रंथों को बांटना चाहिए। क्यूं? प्रभाजी कहते हैं, यह बहुत महत्वपूर्ण सेवा है। और क्यों? क्योंकि आप अगर उसको ग्रंथ दोगे, तो 1 ने 1 दिन वह भक्त बनेगा। यहाँ प्रभाजी स्पष्ट कह रहे हैं। property why men aproch any person and desimtorekisnlettr to that an a फयuचurehemaalso become a divoti कई बार लोग पूछते हैं, तुम लोग इतने सार साल धन को क्यों बाटते हो, वो कहेगा जाओ। लोगों के पास। तो कई बार लोग कहते है बहुत कमा हो, पैसा, पैसा कमा रहे हो। कमीशन, कमीशन तो मिलती है। भगवान की कृपा। तो पापा जी कह रहे हैं हम सब का कर्तव्य होना चाहिए कि हम इस बोक्टरिस्ट्रिप्यूशन की सेवा में जुड़े। ये सब का कर्तव्य होना चाहिए। यह हमें सोचना चाहिए कि सिर्फ जो ब्रह्माचारी है मकतन पार्टी के लीडर, उनका। उदाहरण के लिए पुजारी के महीने में तो पुजारी सलूशन करते है, पर सारा साल उनका भाव होना चाहिए। जब भी मौका मिले, हमें को बांटा जाए। कुछ भी, किसी भी प्रकार की सेवा हो, हमारा यह भाव होना चाहिए। गधों को बांटे और लोगों को प्रेरणा दे कि वो पढ़े, यह भी बहुत महत्वपूर्ण है। कई बार लोग किताब लेते है, पर पढ़ते नहीं। हम जब बाटते है, किताबों को हमें पूरा लाभ उठाना चाहिए।
हम
1 पड़ो और गंध पढेंगे। बहुत अच्छी संभावनाएं हैं। भविष्य में क्या बनेंगे, भग्य बनेगे और प्राबजीकहरेहैतारपरी में, ये जो सेवा है प्रचार की, ये सबसे महत्वपूर्ण है। और भगवान के चरण का का स्मरण कर पाओगे। तो प्रचार की सेवा की। महिमा आप भागवत पढते हो। जिसकी रचना 57 भले हुई थी। उदाहरण के लिए नादमुनीकरतेहै दया या सर्वा बुद्धेश संतुष्ट। अगर भगवान को प्रसन्न करना चाहते हो। आप इसे कौन कौन? भगवान को प्रसन्न करना चाहते हो? अगर हम भगवान को प्रसन्न करना चाहते हैं तो 3 महत्वपूर्ण सेवाएं हैं। क्या? दया? या सबसे पहले लोगों पर दया कीजिए। और दया का असली अर्थ क्या है? वो ज्ञान देना, जिसके द्वारा वो जन्म मिलते के बंधन से मुक्त हो सके। तो सबसे बेहतर पूर्ण खरे हैं। दया। फिर संतुष्ट है। हमें संतुष्ट रहना चाहिए। हर स्थिति में। वैसे तो हम कभी संतोष नहीं रहते। जितना प्राप्त हो जाए, उतना ही कम लगता है हमे और बोधवालीबीकेआजाते है और और और और। जो धार्मिक जीवन अपनाता है, वो हर स्थिति में संतोष का है। नियो वश में रखो, इडिया, वश में रखो कंट्रोल संsuजnबaiऔरनामुनी कह रहे है। अगर आप इन तीचीजोोकरोगेतो भगवान को संतोष कर सकोगे आसानी के साथ तो ये संदेश कई लोगों में प्राप्त होता है। भगवान के पिल देव ने साधु के लक्षणों का वर्णन किया है। भागुदमगतिसेसुकनबै साधु के क्या लक्षण होते हैं। तथिकशवाकरुणिगा करुणा दया की भावना पर हम ये जानते हैं कि असली दया क्या है? असली दया है वो ज्ञान देना, जिसके उपयोग से, जिसके पालन से, हम जन्म मृत के बंधन से मुक्त हो सके। तो ये है असली दया। तो भक्तों में यह भाव होना चाहिए कि हमने ये संदेश लोगों को देना क्यों? उनकी भलाई के लिए। कई बार हम सोचते हैं कि हम ग्रंथ भाते हैं। परेशानी ये लोग पढ़ते हैं। सौ प्रतिशत बेशक नहीं पढ़ते होंगे। और लोग पढ़ते हैं। अगर पढ़ने नहीं होते तो भक्त मं भक्तों की संख्या कैसे बढ़ती? जो लोग पढ़ रहे हैं तो हम जब बुृषिविश्वमें जाते हैं। हमें ये सोचना चाहिए कि ये भगवान ने भगवान की इच्छा है कि हम सब का उद्धार करें और उद्धार करने का 1 साधन किया है। इन ग्रंथों का मिशन बाबा जी कहते थे तुम किसी को चर्चा करके उपदेश दोगे, वो सुनेगा और भूल जाएगा। पर आप किताबें 2 उन्हें तो किताब पढ़ेंगे और जीवन को सफल बनाएंगे। कई उदाहरण है कि 10, 10 साल तक किसने किताब पढ़ी नहीं, 10 साल बाद किताब पढ़ी और उसके संदेह से प्रभावित होकर भाग बन गए। तो हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि अगर हम ग्रंथों को बांटें उदाहरण तो उसका परिणाम एकदम आएगा, उसका परिणाम आएगा पर समय के साथ लान। बराज कहते हैं जब मैं देखता हूँ कि किस प्रकार भौतिक बड़ी व्यक्ति प्रयास कर रहे हैं, दुख की स्थिति को सुख में बदलने के लिए तुमने क्या है? क्यूंकि भगत जानता है कि चाहे कितनी भी सफलता प्राप्त करो, भौतिक जगत में कितनी धन प्राप्त हो जाए। असली आनंद केवल जब प्राप्त होगा जब वह भगवान के शरण नगत हो जाए। जो लोग पड़े थे, उनमें ये संदेश देना था कि भौतिक कार्यों के द्वारा कभी संतोष नहीं हो सकता की पर भगवान की सेवा में जुड़ेगे तो हर स्थिति में संतोष रहोगे। तो हमें जोड़ना चाहिए भगवान की सेवा में, तो हम जब बुक डिस्टिूशनमेंजाए जाते हैं, वहाँ ये भाव होना चाहिए की किसी प्रकार से हम इनका उद्धार कर ले। और इन ग्रंथों में इतनी शक्ति है की अगर आप ध्यान से पढ़ोगे तो उनका प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए पापा जी ने कहा जब तक ग्रंथों का विस्तर होगा, मैं हमेशा जीवित रहूंगा। क्यूँ, क्यूँ, क्यूंकि इन ग्रंथों के द्वारा क्या हो रहा है। प्रचार बना जो संत है वो 2 माल्मो से संदेश देता है। बापू और वाणी वाणी जो है वो सनातन है। तो ये जो ग्रंथों के वेतन की सेवाएं है, इसमें अगर हम जुड़े रहे तो ये सबसे बेहत्वपूर्ण सेवा है। पूरे सेवा हर व्यक्ति के लिए है। और ये है असली समाधि। कई बार हम जानना चाहते हैं। समाधि का क्या है समाधि का अर्थ है तन मन धन से भगवान की सेवा में जुड़े रहना। और जब हम ग्रंथों को बांटने जाते हैं तो हमारा यह भाव होना चाहिए कि हम आये हैं। यहाँ क्यों लोगों का उद्धार करने के लिए बड़ा दुख, दुखी वैश्य को कहा जाता है। बड़ा दुःख, दुखी। जब वैश्व देखता है कि कोई भगवान की शिक्षा से दूर जा रहा है से दुख होता है। क्यों वो जानता है कि चाहे कितनी भी सफलता प्राप्त कर लो, आवाज दी खुशी प्राप्त नहीं कर सकते। चिंता से भरे रहोगे 1 बार भक्त में बाजे हरे मन की रचना की है। ठाकुर क्या कहते है हे मेरा मन, तुम भरे हो किसके साथ, किस के साथ, चिंता के साथ, तुम चिंता से भरे हुए हो। और हर प्रकार की चिंता। जैसे की आज के वासन में समाज की स्थिति ऐसी है, लोगों की चिंता तो बहुत बढ़ गई है। अब तो 1 भय रहता है ये वायरस हमारे ऊपर निहार। अभी तो यही सूचना है कि wारेsisसकाईतो किले से भी आ सकती है, चिंता है नौकरी की है। तो लोचनदास ठाकुर कहते हैं हे मेरा बल, तुम चिंता से भरे हो और अगर तुम चिंता से रहित होना चाहते हो तो क्या है? उपाय महानंदा के पुत्र की शरण लेना। दूसरे शब्दों में हम जॉब करना और शासन पढना, भगवान के शरणगत होना, भगवान के शरणगत होगे चिंता इत्यादि से बच सकते है। तो प्रभाजी कहते हैं कि हमें ग्रंथो की सेवा करनी चाहिए। तो ये ग्रंथ की सेवा हम सबको जोड़ना चाहिए में हर ान के महीने में हम देखते हैं कि भक्तों का उत्सा बढ़ जाता है। पर असल में यह उत्साह पूरे साल रहना चाहिए। मया का साल में कितने महीने चलता है? 12 महीने 24 घंटे या 22 घंटे या 20 घंटे, 24 घंटे मया का ओवर टाइम रहता है के 24 घंटे 300 है। तो वो ही तो भक्तों का भी भाव हमारा प्रचार का मान कभी बंद नहीं हो पा के। this is real samay। ये असली सवारी हम ये सोचते रहे। कैसे हम लोगों को आकर्षित कर सकते हैं? और कैसे हम लोगों को जोड़ सकते हैं? भगवान की सेवा में तो इन ग्रंथों के वेतन पर बल दिया जाता है। क्योंकि इन ग्रंथों के द्वारा अज्ञानता दूर होती है। हम मनसा का उच्चारन करते हैं। ओम ज्ञान। तिमरिया इसका अनुवाद क्या है। वहां जन्म हुआ था ज्ञानता में भी गुरु साधु की कृपा से यह ज्ञानता दूर हो रही है। तो पापा को जैसे आप पुछा, उसके हाथ ये संभव है कि वो 1 श्लोक भी पड़ेगा तो उसे अपने जीवन को सुधार सकता है। ये जो प्रचार की सेवा है, यह बहुत महत्वपूर्ण है, वो हर व्यक्ति से कर सकता है। मैं पिछले साल जोधपुर में था और हमारा 1 भग एरपोर्ट छोड़ने जा रहा था। मैंने देखा की हर रेड लाइट में जब गाड़ियां रुक दिए हैं, वो 1 मिनट में भरा के किताबों को बांट रहा था। पर मोटर आगे बढ़ तो मैंने उनसे पूछा आपकी किताबें बस 34 किसानों को केवल गाड़ी में या सा करते ऊपर 4 भी करता है। तो प्रचार के अनेक साधन हैं। हवा में, ये उत्साह होना चाहिए प्रचार का उत्साह नष्ट धारिया तर कहते हैं तुम भक्ति में सफलता चाहते हो तो हमें क्या होना चाहिए? शायद है क्या? और ये उत्साह की हम लोगो को जोड़ सके भगवान की सेवा में। और जैसे पापाजी ने हम सब भक्तों से निवेदन करना चाहते हैं। सब जुड़े इस सेवा में। मेरे ख्याल से गोपी भाव आपका टीम कितने मोटे जा रहे हैं। हमर बोली थर्टी यार तो लोगों का उधार करने के लिए गोपी पैलेस भाग जायेंगे, इंदौर में लोगों की आबादी का उधार हो जायेगा और मनी सूदन की टीम कल जा रही है। न इतने भक्त बने सू को माली को दक्षिण भारत बहुत पसंद आ ा हर साल दक्षिण भारत पहुँच जाते हैं। hedrabad can ban छोटा कौन जायेगा merta सुंदर माला का है बनाना चाहेंगे आप कहां जाओगे जिले में कोई नहीं करना चाहता। लगता है कि दिल्ली वालों को बहुत कृपा प्राप्त हो गई है। भक्त सदा ये सोचते हैं कहाँ जाए? बुक डिस्ट्रीब्यूशन के लिए कौन सी क्या टेक्निक भी एम्प्लॉय करे। क्योंकि भक्त सोचते हैं ये। इस लिये में हमने किया है तो वहाँ जाना चाहते हो, जहा इसी ने किया। बेंगलुरु इतना बड़ा शेयर जोन नहीं है, पर शायद पंद्रह भक्तों के लिए है। तो ये बुक्स डिस्ट्रीब्यूशन का जो मैराथन है, यह पद और चारों की खुशी के लिए है। भक्ती दादाजी भी। आप जानते हो। भेजे अपने शिष्य को कर का वितरण करने के लिए। वो 2 या 3 की राह बाटते थे किसान बड़े होते ह मुझे प्रापा जी ने अमेरिका आए, प्रापा जी ने बुक्स डिस्ट्रब्यूशन इंटरव्यूस किया, जो अमेरिकन से थे, वो चिंता में आ गए। प्रापा जी रोज कहते हैं बुक कैसे करे, कैसे बांटे, किसी का कोई अभ्यास नहीं था। और वो भी किशन देश में वेदों का प्रचार किसी को अभ्यास नहीं था। सारे। तो 1 दिन, 1 भक्त हर नाम से वापस सैनफेंसकामंदर जा रहे थे। तो रास्ते में और रुके गाड़ी में। पेट्रोल दाल ने तो भाग देने नाम था केशव। उन्होंने कहा पैसे देने की। वजह मैं $10 का पेट्रोल ले आये, $10 का नोट देता हूँ। तो उसने पेट्रोल बम के मालिक से पूछा ये $10 देने की बजाय यू kिsnboऔरनकी बड़ी तारीफ है, उसने किताब ले लिया, $10 की बजाय। और फिर भक्तों ने सोचा कि अगर 1 व्यक्ति $10 की कीमत देने की बजाय किताब देने को तैयार है तो उसका मतलब है कि अच्छा स्कोप है। तो उन्होंने फिर ट्राई किया अलग अलग तरीकों से। फि स्टोर्स के सामने, क्रिसमस के समय, क्रिसमस के समय, जैसे दिवाली के समय, यहां इंडिया में दुकानें खुली रहती हैं, वहाँ क्रिसमस के समय, दुकानें लेट, खोल लेट समय तक खोल के रखे हैं। भागो िपार्टमेंट, शोर में जाना शुरू किया, असतेस अलग अलग स्थानों में। बढ़ते हिंदु। पहले हम किताब खड़े होकर बढ़ते थे, भक्तों ने स्पांसरशिप शुरू किया अनेक और साल के स्कूल प्रोग्राम पर। तो हमें बुद्धि लगानी चाहिए किस तरीके से हम लोगों को जोड़ें वार की सेवा में, ये हम सब का उद्देश्य जो आप सेवा कर रहे हो, ये सबसे बड़ी सेवा, सफेद ऊँची सेवा है। और ये असली समाधि आप जुडे हो भगवान की सेवा में। और आप जा रहे हो किस उद्देश्य के साथ, उनके उधार के लिए। तो ये जो समकेतनमहरसान है, बहुत ही आवश्यक है। और सारे विश्व में, भक्ति में आसान कर रहे हैं। कई देशों में, जहाँ बर्फ है, उस वन में भी बुक चल रहा है। तो आप सब से निवेदन है कि प्राप की खुशी के लिए, चायों की खुशी के लिए, हम सब को इसमें जोड़ना चाहेंगे। और आपके दिल्ली शेयर में तो जैसे मैं कई बार कह चुका हूँ, खास कृपा है? क्योंकि आपका 1 शहर है। पूरे विश्व में। यहाँ पापाजी ने खुद बुक डिस्ट्रिब्यूशन किया है। बॉम्बे में भी पापाजी ने थोड़ा बुक डिस्ट्रिब्यूशन किया था। पर दिल्ली में कई सालों के लिए किए, प्रोपर्ली ने 1 दिन के लिए नहीं। क्योंकि दिल्ली में किताबों को छापते थे, प्रॉपर्ली खुद ही जाते थे। दुकान में, यूनिवर्सिटीज में इत्यादि और बैक कॉल। मैगजीन जब छापना शुरू किया, उसको खुद जाकर बांटते थे। 1 में 1 कॉफी हाउस था। पहले अब शायद बंद हो गया है। और फेमस कॉफी हाउस पर 2 कॉफी हाउस में जाते थे। वहाँ जाकर बैठते थे दूसरे लोगों के साथ जो कि कॉफी पीने आए थे। यह कुछ खाने आये थे और प्रौपाजी अंदर जाते थे। प्रचार करने तो उनसे चर्चा करते थे। और रास्ते उनको प्रयास करते थे कि उनको आकर्षित करें। गंध लेने के लिए तो प्रौबाजीनेभी अनेक साधनों का उपयोग किया। इन गंधों को भरने के लिए आप सब से निवेदन है। आप जुड़े बड़े उत्साह के साथ और उत्साह से जुडेंगे तो आप दूसरों को प्रभावित कर सकोगे। अगर हाँ में कोई उत्साह लीरा जिसे व्यवहार हो जैसे लगे की हम जबरदस्ती आ रहे हैं, जबरदस्ती मुझे भेज दिया है मे रूची ने, तो फिर आप दूसरों को प्रभावित नहीं कर सकोगे। आप उत्साहित हो जैसे रूप है, फिर आप दूसरों को प्रभावित कर सकोगे। तो ये संकेतन का टोटल योजना क्या है? जितना हो सके उतना प्यार कई इन eलमेटमतलबकि जितना करो उतना ही कम है। और ये बात सच है। भाग कभी यह नहीं सोचता, मैंने बोल कर दिया है। वो यही सोचता है। वही सेवा बहुत कुछ है और भगवान की प्रशंसा के लिए वे सेवा को बढ़ाना चाहिए। सन शुरू हुआ, प्रॉपर्जीनेएकमांसर दिया था डबल हर साल दुगना करो। आप दुगना सकते हैं तो कम से कम जितना पहले किया है उतना तो करना चाहिए। अगर सारे भगत जुड़ेंगे मेरसन में तो यह संभव है। यह बुक डिस्ट्रिब्यूशन मेजोन हर भग के लिए है। हर भगत को कम से कम ये गीताजंली के उपलक्ष हम सब को करना चाहिए और सब को प्रयास करना चाहिए। 1 से 2 ग्राम जरूर बातें पुना में सारे कम्यूनिकेशन भक्तों ने जिम्मेदारी ली है, सब ने जिम्मेदारी ली है। 1 ग्रंथ दिन में हर व्यक्ति बाटेगा ज्यादा हो सके तो ठीक है कम से कम 1 भक्त 1 कर को जरूर मेरा जान डेलिकेट हो रहा है बाबा जी के वन ट्वेंटी फाइव से जनम दिन के लिए अगले साल, अगले साल अनटफसबoदे यह मेरा साल डेडिकेट कर रहे हैं प्रॉपर जी की अनड्रेस सब जुड़े इस मैराथन में और आप प्रॉपर के में रापार के पदसोमेंपढतेहो के बार बार डिस्ट्रीब्यूट बुक डिस्ट्रीब्यूट बुक डिस्ट्रब book आप सब जुड़िए समेत में और प्रयास कीजिये लोगों को ग्रंथ बांटो जब ग्रंथ बाटते हो, ऐसे भी प्रयास करो की वो ग्रंथों को पढे और पढ़ने से उनका उदाहरण सो सब जुड़े उत्सा के साथ या हार, मैं सोच रहा था कि कई और भाग भी। 22 मिलन बोला हाँ बोलिए गोबरवा। this is very powerful way proper, said, this is real somali all the members of party or fir up a question
verb
verb poison things in and ission
time were very testing basely clients
and
then the situation as gets wear orte
ये बात सच है कि इस साल आप लोग मेहतन कर रहे हो। बड़े कठिन मारण में यह वायरस के कारण हम लोग बिल्कुल सावधान नहीं we toll फुल प्रिकॉशन जो जो भगत जा रहे हैं, मै राधार में, उन्हें सावधान रहना चाहिए। जो शिक्षा दी how do void p्rैc्टिसकरना। if you do changing in a morning and sad, चांस, red propartletrsyou have proper leter on book, i do the round in the morning, one on or save you word,
हरे कृश्ण बहुत बहुत धन्यवाद और इंस्पायर करने है और हम सबको कहा कि विश मेले और 3 सेकेंड पार्टी हमारी और हमारी इच्छा है कि चल कर 10 पार्टी कम से कम की क्या है की हम चाहते है की जो फोकस करना expired पीस होगा और जितने धिक लोगो को आप जुड़ेंगे इसमें वो ही हमारा सक्सेस प्रैक्टिकली देखा जा जैसे 2000 हम हर साल 3000, इस साल 3000 लोग तो इससे जितनी संख्या बढ़ेगी ऑपरेशन ऑटोमेटिकली बोल और इस बार टारगेट साल को थोड़ा बढ़ाना पड़ेगा जो वर्ड में है क्योंकि आप से ही हम लोग ज्यादा की कर रहे है कनरलेशनमोडिस अभी स्टार्ट होने के टाइम फैमिली सेंटर ने की हालांकि राय प्रैक्टिकली लिखा फैमली है लेकिन आप लोग जो लोग ज्यादा ब सेंटर पार्टी से हमारे और एटलीस्ट हर सेकेंड पार्टी को जो 1 लाख का टारगेट 1 लाख का
हो
आपको पड़ेगा हालांकि सिचुएशन आपको जरुर लेकिन साथ में साधा और लेने के लिए मौसम सावधान होती है। कई सितिन में कभी हो चुका है जयपुर में है का भी क्यू है
जयपुर में भी है कै से दिन में भी हो चुका है 2 दिन
के पूरे आज नाइट टाइम में टाइम ओपन है रात को 10 बजे से
कलराज को तो ये लोग जाते नहीं
है
ज्यादा तो भगत सुध दिन में
कर दे तो आपको एडवांस जाने से पहले सारा सिचुएशन ज्यादा तो कहीं भी जाने से पहले अच्छे से बता कर
लीजिगा
at least
cifyouevwerein in evening
on
और आप भी आये है हम बोले
सारे आचार विभाग और मान
मारा
निवेदन आप लोग जुडिए तो सारे अच्छा कृपा बन रही है तो वह रक्षा करने की जो सिचुएशन है सना में नहीं है बस जो सावधानियां बताई गई है उसको हम लोग जो बहर करेंगे पाषाकिलेंगेतो रक्षा करेंगे और बुद्धि भी देंगे हम पस्त करे मैं बुद्धि देता हूँ की कैसे प्रस्तर तो चिंता की बात नहीं और हम लोग जो करते हैं देख देंगे ऐसी ऐसी बातें हम लोग बोल जाते है की जो सोचते नहीं है। जैसे की अभी पिछले साल हम लोग हैदराबाद में थे तो हमारे शोमा को तो पहले उन्होंने सेकेंड चांस किताब swami second is first as से
लोगो ने
सो
1 बार में था तुमने देखा
की
समझ जाओ तो जी को जात ban n
तुम मेरे पास है अच्छा
तो मैंने उसको और या गीता पानी
तो है बुद्धी
हवा जो है किसी को क्यूंकि कल भी तो है तो बच्चे है लेकिन उस के लाभ के लिए तो बहुत बड़ा काम है जो भी तुरंत देलेगा शरभकुमारजीकहतेहै जो भी गरतोंकोलेदेगा वो अवश्य भक्त बने गा तो यह
है
कैसे है कारण तो आज कुछ कुछ गर्म बात नहीं बनेगा जरूर माँ है ज्यादा का गा तुम बोला
के
बारे बता 2 की कोई बनिया तो उसी गलत है अगर हमलोग दे दिया तो मैंने इस शो की बबूजी
कर
रहे हैं, लेकिन देखे तो उन्होंने बोला कि तुम उसे ब तुम जरा ग्रंथ पाट में जाओ। जैसे कि किसान क्या करता है बिल को तो वो क्या करते है 1 समय वो पेड़ होते है मुझे निकलते है तो इस तरीके आप
दिखने बंद नहीं
हम लोग बड़े बड़ा सौभाग्य है की इसमें संसार इतने जीव है से ऐसी हम हम लोग जीव है वर्तमान आचार्य के पास है हम लोगो को जोड़ा गया है तो हम भाग, हम लोग ऐसे चाल और वर्तमान आचार्य ने
हम लोगों को
जो भक्त ट्रैवलिंग में नहीं जा रहे है जो यहा ही रहेंगे उनको भी प्रयास करना चाहिए रोहित थोड़ा मकान करे ये नहीं कि सेव फुल टाइम बकतोमेरखानससबका भाव होना चाहिए यह सुन
कसा होना चाहिए मैंने अभी जब विश्व की कोशिश करता कुछ देखा तो नंबर मिलेगा तो मतलब आप लेना चाहते है तो मतलब फ़ोन कर सकते है इस तरीके को नंबर दिया अभी भी मुझे मेरे पास फ़ोन आता है तो इस तरीके से भारत से मेनका करना कुमार 7 मुझे रोड किया आईटी से तो मुझे ही कर लिया था 1 बार मुझे फोन करके बोला भारत सी उन्हें बोला प्रभा के सारे काम सारे भारत और सीसी छूटी तो कल 16 माना रीता जी और आपका सुने
आपको
सर पता है कि समय हमारे सेट डिस्ट्रिब्यूशन पर कॉन्सेट करने और सेल डिस्ट्रिब्यूशन के माध्यम से अमेरिका में इस स्थिती में भी लोग डेट्रिबूशनबहुल बढ़ गई है
सबसे ज्यादा उत्साह होना ज्यादा ज्यादा उससेे कभी कस कर सकते हैं तो नहीं हो सकते है में है अभी रात के टाइम से सारा बजे के बाद पोर्ट करता हूँ कोर्ट रहते है उनसे बात कर के सीधा भी सिखते देके आप नंबर मे भारती से ले जे तो मेरा प्रयास है कि मैं सौमाकसेफकरूऔनथटी मार सी ऑफ पंद्रह सीसी हो ओ
भगवान सर के के घर में भी पहुँच जाए। ko anybody man is on here हनुमान
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