अद्वैत आचार्य | प्राकट्य दिवस विशेष | CC 1.3.92 | ISKCON Juhu | Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Goswāmī

Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Goswāmī speaks on Advaita Acharya's appearance day, recounting how Advaita's prayers brought Krishna's incarnation. The discourse weaves stories of devotees and the Shaligram stone, then turns to forgiveness, mental purity, and selfless service as the path to transcend illusion.
Chapters
हाय सब भक्तों का हार्दिक स्वागत।
तो जैसे आप जानते हो आज मोदी शुभ दिन है। क्या हैं हम भागहत, भागते वासु भागते। shaam praburabktaaa tara
ho तारा हमारा
चाय को सानी प्रभुरा भक्ता बता रा बता हेतु प्रभुरा बता बता रा हेतु इधर
आचार्य गोसाईं अद्वैत आचार्य घोशाई्रहुरभगवान भक्त के कृष्ण, भगवान कृष्ण के अवता बेतूोबारयामारा चिती बोकारा, उची दर्जना धनबाद, अजवैदआचार्यगो स्वामी भक्त के रूप में भगवान के अवतार में, उनकी उची दर्जना से ही कृष्ण अवसर हुए थे। दुाइएअलुवादअवअध आचार्य हो स्वामी आचार्य स्वामी भक्त के रूप में के रूप में भगवान के अवतार में है उनकी ऊँची दर्जना
ऐसी
सर हुए थे।
क छेत्र में पढ़ते हो कि भगवान
के प्रगट होने से पहले उनके भक्त
पहले प्रगट होते हैं, जैसे कि चेतन
महाप्रभु ेत्र महाप्रभु कौन है raja kisna प्रगट होने से पहले उनके माता पिता, उनके गुरु
कौन
बाद में गोरी प्रगट
हो गए थे, ईश्वर पूरी प्रगट हुए थे और वे चाय और प्रगट हो गए थे। कौन है स्वयं भगवान है जो प्रगट हुए हैं बाकी।
तो अद्वेता चाय, अद्वेता अद्वेता शब्द का
अर्थ है जिसके आत्मा धे में कोई अंत नहीं है।
पर चाय जो कि भगवान के संदेश
का 4 करता है।
तुझे अद्वेदेचरेपगट हुए।
उन्होंने देखा कि समाज में
बहुत सी कमियां है। उन्होंने देखा कि समाज की जो प्रजा
है उनकी
ध्यान में बहुत कम रुचि है।
जो भगवान के जो भक्त हैं वो क्या चाहते हैं चाहते हैं कि समाज का उधार हो तो समाज का उधार
तो केवल जब होगा जब वो
भगवान के संदेश का पालन करेंगे।
परतितेचेरीने देखा
कि
उन्होंने देखा कि समाज की प्रजा जुड़ी है, वो गहरे
गहरे रूप में मौलेकायोमेंतोदचा और हयदाजठाकुरहयेदाज ठाकुर namo tाकurखानिवास
और दिन रात उनकी 1 ही
चिंता थी, था भगवान उसके अलावा उनकी और किसी विश्व में रुची और चाय हरदा से देखा कि समाज की जो
प्रजा है बहुत गहराई के साथ जुड़ गई है।
बहुत कार्य में उन्होंने
बड़ी गहराई से
सेवा की और े पड़ा था कि भगवान की आप भक्ति तुलसी के पत्ते से भी कर सकते हैं पतसंपुषपोरमथोा तुलसी
चंदन लेकर उनके पास 1 शायद शीला
भी थे, इनको लेकर वेद और दा
दिन रात क्या कर रहे थे भागवत
भागवत का अध्ययन और भगवान की लीलाओं की
और जोर जोर से
उचल
कृष्णा
पर
स्वयं तो परम भगवान जो प्रकट हुए के रूप में प्रकट हुए। उनके भक्तों के हुकार के द्वारा उनके
भक्तों ने बड़ी श्रद्धा के साथ ये प्रार्थना की थी।
क्या हे भगवान।
और उन्होंने देखा समाज का वह वो समझ गये इस समाज को सुधारना
सारे, सारे व्यक्ति का कार्य है या तो
भगवान को ही आना पड़ेगा, ये थी
उनकी पुकार, तो समाज का वह
उम्र आप लोग से ज्यादा थी।
इसलिए आप देखते हो कि अधवेरजाएकितस्वीर में क्या 1 दाढ़ी भी रहती है। तो और ठाकुर उन्होंने दिन रात भगवान का
पालना की और तुलसी का पत्ता और गंगा जल
से लेकर वो प्राधा कर रहे थे। और जब प्रात में इतनी शक्ती भी कि भगवान प्रकट हुए इसके के उत्तर में जा और हैराजा। तो अलवेदाजायाप्रकट हुए थे सबसे पहले और प्रगटहुएपहलेक्यों, क्योंकि उन्होंने ऐसा वासल रखा था की भगवान, भगवान प्रकट होते हैं। पक्षों के राजा की मे।
तो इस अध्याय में लेखप्रसिलोकहै जिनमें यह स्थापित किया जा रहा है।
क्या कि भगवान प्रकट हुए? क्यों प्रकट हुए, क्योंकि उनके भक्तों ने प्रार्थना की थी। महाप्रभु सब क्या है, भगवान है।
और कहा जाता है सब अवतारों में सबसे दयालु।
अवतार ठाकुर ने अ 1 सुन्दर रचनाओं का वर्णन किया है। और इस प्रसिद्ध में वो कहते हैं
ही किस चेतन प्रभु, दया को बोले। 2 मेन के दयालु,
चेतन प्रभु, आप
क्या करो, दया करो। आप से ज्यादा दयालु कोई नही है। इतने दिया को क्यों कहा जाता
है?
pti,
pti, ii का के लिए में क्या है?
a लगभग पूरी प्रजा सूरों के समान है।
सपा का कान खोले
हे भगवान नितेनंदानितेनंदा सनातन है। और जोर की शरण लें कोई सदा
आनन्द अनुभव कर पाया, जो भी की शो में आप, आप,
आप जो हो, अत्यंत सुखी हो, क्योंकि आप जुड़े हो,
भगवान की सेवा है।
मैं जो हूँ, अत्यंत दुखी हूँ, जो आपके शरणागत होने के माध्यम से मुझे भी शांति पर दया करो। सीतापति अधेतरघुसाए बाले।
2 पत्नियां थीं, 1 थी। तो सीता जल्दी।
उनका बड़ा प्रेम का न हिस्सा था।
और भगवान के साथ आगे कहते हैं दया करो सीता पति, अलवेताघुस्साय सीता के पति, अदा आप दया करो,
जो आपकी
दया होगी तो फिर दया भी पाप होगी, दया करो। प्रभु निवास।
रामचंद्र संग मागे वास भी कहते हैं रामचंद्र काविराजरामचंद्रकाविराज। 1 भक्त थे जिन्होंने अनेक कविताओं की
रचना की, और इसलिए रामचंद्र का नाम था काविराज। वो कविता लिखते थे।
तो अद्वेद कि प्रार्थना के उत्तर में भगवान प्रकट हुए।
और शास्त्र में कहा जाता है ये जो भगवान का अवतार था, इस सबसे
दयालु दूसरे शब्दों में केतेमापुने कोई कंडीशन नहीं रखे।
उन्होंने कहा आना जाब कोई भी कर सकता है, उसे कोई नियम दें। चाय भगवान के अवतार से प्रकट हुए थे, इसलिए खास करके मा प्रभु को मेरे के लिए तू कैसे माफ। खुले रूप में पूछा गया है।
तो द्वेत प्रार्थना के उत्तर में।
और ये जो शायग्रमशिला जिसकी उपासना आज
तेरे करते थे, शालिग्राम शिला का दर्शन आज भी आप प्राप्त कर सकते है। शांतिपुर में, शांतिपुर में, मंदिर में जाओ तो आपको दर्शन मिलेगा। वो ही शालिग्राम शिला जिसकी उपासना जिसने
की
देदे चाय ने की। अदवेदेचायाबादना की शुद्र में भगवान पलटें तो अदवेदेचायकीकईलिलाय हैं। अदवेदेचाया ने दीक्षा ली थी किसे धनपुरी में धनपुरी का इतिहास अब चेत पढते हो।
धनपुरी बहुत ही ऊंचे कोठे के थे, और इतना गहरा था उनका अध्ययन, कुछ खाते नहीं थे, किसी से कुछ मांग
कर, अगर किसी ने कुछ दे दिया तो खाते थे, अगर कुछ नहीं तो पुकारते थे, तो पर उनकी भक्ति से बहुत ही प्रभावित हुए थे।
1 देर बाद पुरी ने goa smapt
cul, vishram ter, goal
gala puri, तुम भूखे नजर आते हो। ये मैं दूर
हो गए थे। इसे कैसे पता लगा वाले को मैं खाऊँ।
को वाले ने कहा, मेरे गाँव की ओर से जा रही थी। पानी लाने को कुए से अपने चेहरे उपचार गए। क्या भूखे हो पीली दूर। मैं लौट रहा हूँ।
थोड़ी देर में काले पुरी ने इतना
सुंदर कभी नहीं सुना था। वो इतना सुंदर बालक कभी नहीं देखा था। तो पुरी ने दूध पिया वो कभी
गा मटका लेने
आया ही नहीं।
कोई हलकी सी नींद आ रही।
नींद में पुरी ने उस बालक का सपना लिया और उस बालक ने कहा बादल पूरी साई भक्ति से बहुत प्रसन्न
हूँ और मुझे
छुपा हुआ है। 1 स्थान पर मैं चाहता हूँ कि तुम मुझे वहाँ से बचाओ। मुझे बहुत गर्मी लग रही है।
वहां बाय 5 सौ साल पूर्व मुसलमानों का राज्य था, खास करके उत्तर भारत
में और लगभग जिलेसे हिंदू मंडल थे,
या तो उनको तोड़ दिया था या
मुर्गियों को लेकर पुजारी भाग गए थे। जयपुर जयपुर में उस समय हिंदू राजधानी थी।
इसलिए आप देखते हो की कई प्रसिद्ध प्राचीन मुर्गियों को आप काम प्राप्त करते हो। जयपुर का दूसरा नाम है गुप्त
और कई मुर्गियों को पूजा ने छुपा दिया था।
मिटटी के नीचे जो बाद पुरी सपना आया, पु ने देखा कि वही बालक
जिसके हाथों से उसे दूध लिया था, वही बालक भगवान है तो 1 तरफ से वो शमिंदा हो। दूसरी तरफ से वह प्रसन्न हुए, प्रसन्न हुए। इस दृष्टि से के ने भगवान का दर्शन मिला, आपको भगवान के दर्शन मिले होगे
थे, उनको भगवान का दर्शन मिला
दूसरी तरफ से दुखी थे उन्होंने भगवान ऐसी सेवा ले ली। भगवान के जो भक्त हैं सेवा करना चाहते हैं, लेना नहीं चाहते है।
अक्सर हम सोचते हैं भगवान शुड, बी, हर ऑर्डर सप्लायर। जैसे आप बाजार में जाते हो तो
लिखते हो ये खरीदना, ये खरीदना, ये
खरीदना, भूल नहीं जाए जागे।
तो उसी प्रकार आज हमारा भाव रहता है। हमारे पौधे की इच्छा को पूरा करे।
भगवान शॉपिंग लेस
है।
वो यह नहीं चाहता है।
वो चाहता है की भगवान की इच्छा उसकी इच्छा बने, हम चाहते हैं हमारी इच्छा भगवान की इच्छा है।
बाद में पूरी बड़े थे की उन्हें भगवान के से दुखी थे, उन्होंने भगवान से सेवा ले ली।
भाई श्रम भक्त मरा 1 दिन उसे प्रसन्न थे कि उ भक्ति योग में जुड़े हुए हैं थे कि उन्हें माता के घर में िविज्ञान प्राप्त हो गया था। वह दूसरी तरह से दुखी भी थे दुखी थे यह देखकर कि पे का प्रयास कर रहे हैं।
दुख की सू को सूखी सी 2 होना चाहिए।
हमारा भार पूरी
ने
भक्तों को अपना सपना सुनाया सबने कहा चलो खोद कर देखते हैं।
वो सच है। और उन्होंने खोला और क्या देखा बिल्कुल
सच है उसी स्थान जिसका वॉर्डन हुआ था सपने में, उसी स्थान पर क्या
प्राप्ति वा पूरी भक्त ने मूर्ति को
वहां से उठाया स्नान करवाया और 2 दिन में क्या हुआ।
हमने पुरी ने मूर्ती की स्थापना भी दी 2 दिन में 2 दिन में स्थापना कर रहे और मानपुर
ने गूलदनमेस्थापना और थोड़ी बना दिया पता के ऊपर
और ठाकुर जी की सेवा करे। यह सेवा उन्होंने की लगभग 2 सा
और माधुरी के सारे की देखभाल करते थे। 1 पुजारी सुबह दिन में 8 आसिया और मानपुर कुछ नहीं खाते थे रात को भगवान को सुनाने के पश्चात क्या
लेते थे, हुई सी लेते थे। बस आप इस खुराक पर काम करने को तैयार
ने 2 साल से पूजा की और फिर भगवान ने उन्हें सपने
में गौर दे
पूरी खुश हो। भाई भक्ति से मुझे अभी भी गर्मी लग रही है। मुझे क्या चाहिए, चंदन चाहिए
देश का पूरा करने का। प्रयास
का पहुंचना था जरा
स में,
मानपुर रुके शांतिपुर में, शांतिपुर में, किसका
घर था
पुरी रुके शांतिपुर में, और या बहुत ही प्रभावित हुए थे उनके
उनके ऊंचे विचार से कुछ खाते नहीं
थे, कुछ पीने नहीं, अगर किसी ने खुद ही देरे धीरे कुछ खाने के
लिए फिर खाते थे। पर स्वयं उन्होंने कमी मांगा और प्रभावित
हुए कि उन्होंने दीक्षा ग्रहण कर ली। किस से अरनपुर दे चाहिया की प्राथना
के उत्तर में भगवान प्रकट हुए और
दे 2 चाहिया शिक्षा ग्रहण की किससे
पुर सो आप शास्र में देखते भी हैं, आध्यात्मिक गुरु की शरण लेते हैं। भगवान ने भी लिया था सनी पुणमुरनीसेछनिक्षा स्वीकार की कल भगत
को महा प्रभु बहुत आदर देते थे। मा चेहरे क्या थे उनके गुरु के, गुरु के गुरु कौन थे? पुरी के गुरु कौन थे?
कौन थे? तो
soयamaपnehesama
cयaगoै
गुरु क्या थे उनके गुरु पूरी वे उनके मन में
ये
ज्ञान था पीछे कौन है स्वयं भगवान
हैं
को भी भर के रूप में। उन्हें पता था कि भगवान प्रकट हुए
हैं चेतन मा के रूप में।
इसलिए
चेतन मा पपू
पूरा आदर्श दे ते हैं। उनके मन में क्या था भाव चेत्र कौन है?
पर भगवान है।
वो उनको देते थे
आप परम गुरु
को देते है तो देते
खुश नहीं चाहते थे कि मुझे
डाट पड़े किस
के द्वारा, मा प्रभु के द्वारा
ये प्रचार करने दिया। तुम भगवान हम भगवान, हम सब भगवान हैं। भक्ति में क्या पड़ा है? असी तो गाल में है। तो उन्होंने मायावती प्रचार शुरू कर गया
और से योगोविस्टसिद्धांत का प्रचार शुरू और
से से पूरे गाँव में यह सूचना फैल गई कि अधेरेचायया जो कि भक्ति के सिद्धांत का प्रचार करता था अब मायावादी बन गया है।
अब उनका ये कहना है कि भक्ति से ज्यादा उत्तम है यार तो तो से
सूचना का
बाबू ने को बुलाया
ये क्या सच है गार ज्ञानी बन गया है ने कहीं से पूछा सबने कहा हम सब दुखी हैं आश्चर्य है कि भक्ति का इतना बड़ा प्रचार ज्ञानी
कैसे बन गया ने चारों तरफ से मेरी ये ज्ञान मिला कि
ये सच
है की मायावती बन गये है।
मा बहुत गुस्से में पहुंचे अजमेर चाया
के घर में सीता देवी रसोई में प्रशाल की तैयारी कर रही थी और उन्होंने देखा माँ बाबू आए हैं। जो
माँ बाबू ने देखा चाय वहाँ बैठे है। तो सीधा जाकर उन्होंने क्या किया को जोर से पैर से मारा और उनको मारना शुरू।
और सीधा देवी ने देखा रसोई से भागेगे बचाओ बचाओ बचाओ फिर उन्हें ा
ये तो नाटक था, क्यूंकि आप मुझे
बहुत आदर दे रहे थे, मैं
किसी
आदर के योग्य नहीं हो,
बहुत data
माँ, उनकी पत्नी ने आकर उन्हें बचाया पर छाया है। वो माँ प्रभु स्वीकार करते थे, क्या कि वो स्वयं भगवान है। वो, ये था उनका भाव,
माँ, प्रबु
ने मा, उनको पता लग गया, इतना नाटक था हमेशा इसे आदर दे रहे थे।
बड़े दयालु थे उनकी, इच्छा क्या थी
माँ की महिमा का प्रचार,
चेतना की
माता का नाम क्या था? सर जी, माता जो है उनके मन में थोड़ा क्रोध था, चेतना अनेक गंधों
में अब वैसा अपराध के विषय में
पढ़ते हो, पढते हो के भक्ति का
सुन्दर बगीचा नष्ट हो जाता है।
कैसे वैष्णव अपराध के द्वारा
गुरु हमें देने के पश्चात भाग्यशाली व्यक्ति हैं, जिसे
भक्ति का बीज प्राप्त होता है।
भक्ति का बीज प्राप्त होने का अर्थ है ये ज्ञान कि भारतीय योग के
माध्यम से हम भगवान नगर हो सकते हैं। और यह बीज उगता कैसे है? कैसे उगता है जो भक्ति के बीच उगेगा और बापू
ये भक्ति के बीच ये भक्ति का सुन्दर बगीचा न जायेगा। आप क्या करोगे?
पागल हाथी को अन्दर आने दोगे, आगे
हाथी को अंदर आने दोगे तो क्या होगा?
वो बक्शी का बगीचा न जाएगा। तो इसलिए हमें 10 अपराधों से बचना चाहिए।
शास्त्र में अनेक लोक है जिसमें परे
हमें बेशन अप्राधों से बचना चाहिए।
तो सच्ची माता
गोदा भगवान की माँ है।
तो सच्ची माता के मन में थोड़ा
क्रोध था, क्या था क्रोध उनके मन में? 1 क्रोध था कि अद्वेता जो है टुपपीसेदआदमीहैमुबर कुछ कहता है। और वे ने मेरे
बड़े बेटे का
दिमाग बदल दिया, जिसके कारण यहाँ बड़ा बेटा घर छोड़कर रूप याद करेंगे और
मेरा छोटा बेटा है,
उससे भी बहुत मिठाई के साथ बात करता है। मुझे लगता है कि छोटे बेटे अभी दिमाग बदलना है और बदलना चाहा है।
ये था उनका।
तो भक्तों के मन में ये संदेश पहुंच गया था कि जितने दयालु है पर वो खुश नहीं है, उन्हें मा भाव तो भक्त कहते थे।
अब सच्ची माता को,
सच्ची माता को,
आशी्वरक्योनहीलेे आप तो सब को आप। तो सबसे दयालु अवतार हो। तो क्या काम है कि सच्ची माता
को आप कृपा नहीं दे? तो वहा पर उन्होंने क्या कहा? मेरी माँ ने
अपराध किया है। और जब तक उस अपराध से मुक्त
हो जाए,
जब
कृपा नहीं देता। और
अपराध से मुक्त होने के लिए जिस व्यक्ति के प्रति अब ने अपराध किया है, उस व्यक्ति को माफ करना पड़ा।
इन्हें आप अपराध करो।
ठीक है।
मैं माफ करता हूँ जिस ने अपराध किया है, उसी के योग्य है। आपको, आप
i am
a map on a अपराध किए हैं। वही मा की दिन वहा अपना करते थे।
शिवा उसके अंदर केवल उन भक्तों को
आने की इजाजत थी जो महाप्रभु के
भावों को समझते थे।
उस समझते थे कि महाप्रभु के भाव जो महाप्रभु यायना
वो ब्रा मिला जिसने इसे रोक दिया था।
अंदर आने
मैं
आपके
में उपस्थित होने के लिए आपके भक्तों ने मुझे
team
तुम्हे shrab देता हूँ। in
ces you
you, मैं तुम शराब
देता हूँ कि तुम्हें कभी भौतिक सुख नहीं होगा। जाएगा थैंक यू
शराब दे के बौधिक
नहीं हो कभी शराब घबराना मत। तो जब हम अपराध करते है, जिस व्यक्ति के प्रति अपराध हुए, उसी को आपको माफ। तो सारे भाग क्या कहते थे
मा
अब सब पर दया कर हो अपनी माता पर।
और जब को
कहा जाता था कि
मा प्रभु
अभी मादा से खुश नहीं है, क्योंकि मुझे लगता है कि
अपराध किया है।
फिर
यह कैसे संभव हो सकता है? सच्ची बात है जो भगवान की माता
है वो अपराध कर सकती है। तो माँ पर शची माता ने देखा
भगवान ने
में
मा प्रभु से प्राथना की थी कि वो लोग जो कि आपने पकड किया था
पुरुष मैभीउ गुरु का दर्शन जाता हूँ था और उन्होंने विंदगीितोजबभगवान बा अपना या था में पूरे विश्व को
तो सचिदा पीछे से आई,
उन्हें देख पीछे से आई, उनके चरणों की धूल लेकर अपने माता और
बाबू ने देखा कि माँ ने
चरणों की धूल माफी माँगी है।
मा ने क्या का अब मेरी माता को भगवत प्रेम
चो 1 उदाहरण से हम देखते हैं हमें किसे बचना चाहिए, घोषण अपराध से बचना चाहिए और अगर
से परा हो जाए तो हमें उस
भगत जिसके प्रति अपराध किया है, उसे क्या माफी मांग लेना चाहिए। और फिर आप से बचते हो तो आप शास्त्र में अनेक उदाहरण पढ़ते हो। तो भगवान ने जो उनकी माता की कथा का उदाहरण है बड़ा प्रसिद्ध है। क्योंकि इससे आप देख सकते हो की
माप व अपराध को
इतना बहतर दिया
कि उन्होंने अपनी मां को भी
इसे एग्जाम नहीं किया, माँ का भी उदाहरण दिया और अपनी माँ को भी छुड़ाने
मार को
यही संदेश दिया वो भी अपराध करे, उसे हमें बचा जाए। तो हर साल पूरी बजाते थे किसे मिले कितने मा को मिले
सो
वा
प्रभु चाय साखू के साथ बहुत समय उन्होंने क्या इकट्ठा
तो अद्वेत चाय जो
है
उन्होंने शरादकरनाथापने पिता के लिए और यदा ठाकुर ने हा आप चाय और आयदा ठाकुर halanki is my way unce
तु शाद का उत्सव था और
क्या किया शाद का जो भोजन था किसे
दिया अब क्या कर रहे हो? मुझे विशाल
खाना ले रहे हो, समाज
में लोग आपकी तरफ देखेंगे नहीं, समाज में लोग आपकी निंदा करेंगे।
उस समय इतना गंभीर वातारण था क्या कहा आपने किसी मुसलमान के घर में खाना खा लिया हो तो आपको हिंदू समाज बाहर कर देता। तो 1 बग से नाम था सुबूलीयसुबुली रॉय by
cap
उनका jo manager tha
wo bna mali
bekar bilकug
तू 1
दिन
इस नवाब की पत्नी ने देखा कि पर्दे की पीठ में
1 लकी का निशाना है।
तूझेगायलखीघर निशाना कैसे आ गया आज बे तो सबुरी रॉय ने कहा
में नवाब
ने कहा सुबुधiरॉयमेंसाल रहता था,
मैं उसके
साथ रहता था, वहीं भी मैंने गलती की थी जिसके कारण सुबुधी रोय मुझे मारा इसकी निशानी है। तो
तुम जा बाल तुम्हार पूरा धिकार उसे इशारे का नहीं, इतना हत्या में
नहीं कर सकता उसने मुझे बच्चे जैसा पाला था उसने कहा अच्छा, कम से
कम उसे बलवान बना।
2
प्राचीन में
मुसलमान के घर में भोजन खा लिया।
so out a ruporatnbiइतनी।
ऊंची समाज कभी भी बंधन के अंदर प्रवेश न तो सुबुधी रोय बन गए। मान गया बाली का पानी फेंका, उनके वो पानी गिरा, उनके शरीर बार सो
आउटसबूधिरोयने कई ओर से पूछा, मुझे इस स्थिति में क्या करना चाहिए?
मुझे मुसलमान बना दिया है।
सब ने कहा उबलती हुई घी को पी लो।
मुझे आग बहाते वो मैं तो समझ
we bole go to r chan
का बना हो जा।
2 पैसा महीने में उनके आमदन 2
पैसे में से 1 पैसा खर्चते थे, विधवा औरतों की सेवा में और 1 पैसे महीने में। घर का खर्चा चलाता है। तो समाज से ऐसे भी कि अगर
आप
थोड़ा भी आपका सम्बंध हो, म
मुसलमानों के साथ आपको हिंदू समाज भार कर देता रहा। प्रभाजी ने इस विचार का विरोध किया है। राम जी कहते थे हिंदू समाज इतना कटर नहीं होता तो इतने हिंदू मुसलमान नहीं बनते। तो महार स्कूल को का मिलना है। तो
ठाकुर ने गाया आप मुझे कितना आदर देते हो, पर मैं
आदर के योग्य नहीं हो।
और अब
आप मुझे विश्वास करा रहे हो, समाज आपको बाहर कर देगा। मुझे विश्वास न खिला।
आपको खिलाना 10 हजार ब्रामणों के बराबर है आप। अकेले
तो उन्हें बचा गया और वो डरे नहीं, समाज के आप कैसे खिला रहे हो कागुरसमाजकेबाहर सो आज है उनके पिता man a
a
a mhawisणकेgdhea इसलिए पर फिर उनके पाथना के सर में बवाल पलट रोएहेदिनमागोकेरूप।
आज के दिन हमें
से नगर होकर ये प्राथना कर नीचे किया। हमें क्या प्राप्त हो उनके मा? ap s pain wall in that for manasi, you ehele any covilh।
आप बताए कि राश्ट्र अपराध के बारे में तो सचिव मन में अपराध किया। सो कज ा जाता है कि मानसिक अपराध देना नहीं चाहता। तो वो अपराध इतना सीरियसली लोगों ने लिया हम जब ली। जब भग समाज में रहते हैं तो मिस कस्टडी जाता है तो मन कुछ गलत धारणा थोड़े समय के लिए उत्पन हो जाती है। पर जब हमको वास्तविक पता लगती है
तो फिर न है।
तो ये जो मानसिक अपराध है वो बिना जाता है या नहीं?
रजा पढ़ते रहो में छूट है मनसे पढ़ाने। पर उसी में हमें बचना चाहिए। मान लो आप किसके प्रति पल विचार कर सोच रहे हो तो से जुड़ भी जाओगे। एक्शन मे थे, जैसे आज में आज मिल गए थे, जंगल में पूजा के लिए फूल लाने गए, कोई सिनेमा देखने
नहीं गए थे, फूल लाने गए थे।
पर उन्होंने देखा, वह होकर प्रेमी तो उसका चिंतन शुरू कर दिया। कि इसका क्या परिणाम हुआ। पहले तो उन्होंने उस वर्षा को घर में रखा, नौकरानी के रूप में। फिर उसे विवाह कर लिया, पत्नी को छोड़ दिया और मेरी a for all the started oup fithermioensason, there
we should
be cosesokay he man se rah ko ye।
हाँ, मेरे पास 1 गलत प्रश्न प्रश्न है और 1 कॉमेंट है। कॉमेंट सुना देता हूँ पानी रश्नपशाजैसेआपके, मर्जी इस नदी किनारे पर कथा काम का गाव है ना में वह सब रुपए 1 बरामदे रहती थी समय पानी लाने के गली अपना मंजिल उस समन सारे व्ोंभकवारकरीतीरतन पंडरपुर जा रहे थे तो उस का मन भी अच्छा हो मैं भी पंडरपुर चली जाए तो सुखद हो गई था जैसे भागते कोशिश किया उन सभी लोगो ने घर बताया को संभालो वो
भागने वटरपुरजानेके कॉमेंट है यह क्वेशन
कमेंट
कमेंट है
1 तो उसके बाद लोन को घर में बाया भाग के रस से और दरवाजे को ताला लग रहा है सब को पुकारा तो स्वयं आये और उन्हें बोला की यह क्या है खोल ले जाना चाहे परदे दर्शन के लिए दोनों ने भगवान स्वयं सघोभाईबनगए और और को छोड़ दी दिन के लिए दर्शन करने के लिए तो उन्होंने ग्रामीण परिवार में भगवान स्वयं अपने की सेवा
और
और 1 प्रश्न है जब खेत में स्वयं भगवान है तो क्या उनको कोई सा देने का साम
sab ho ke mele yeh yah
की जैसे आपने बताया कि ताजा ने जो नाटक किया था तो मा ने उनको उनसे लाख मारा तो मां को तो जैसे भगवान थे तो उनकी एक्टिविटी से उनका मतलब ऐसा लगता है कि इस ऑर्डर एक्टिविटी से उनको तो पता होगा की की घूकरलेसाा तो मा को ऐसा क्यों करते हैं इससे हम समझ नहीं पाते हैं
ये उनके दिन मे ले रहा है और माभुभीबधाेहै मायावादी की भी बाकी सीधा सड़क के जाये दे सारे माया वाली बा तरफ जाते तुम डिविलियर पर कर लेते है और वो ये बताए कि जान सिधान से हम सबको बचना चाहिए
यह
se
is करते है छमा
निज की तरफ अपराध किया है वो ही सेवा हम
तो हम अगर अपराध करते हैं तो क्षमा मान लेते है और कभी अंदाज भी अपराध करते है। ऐसे में तो ऐसे बता अंजारेमें अपराध
हो तो आप भाभी हो या दे पर 1 बार, 2 बार, 3 बार अपराध करते जाओ लोग अंजाने में हो गया
जैसे
श्वास ठाकरों के कोई
माफ
किया था तो अपराध किए थे तो
वो अपराध की क्रेशर पंडे जब सेवा किए थे तो उसका सेवा बाद दोनो ऐसा अलग जिस भक्तों का बड़ा दे दूसरा सेवा है वहाँ को माफ करने
थी
पंडित को माफ कर दे क्यूंकि पकरेसरपंडितको सहायता दे तो उनको सहायता कि तो यहाँ दोनो अलगलग
ने उनकी सेवा की लोगों को रोका उनके भाग
आप
को भगवान है सुन्दर उदार या उन्हें माफ भूले भगवान कुछ भी कर है आपका परेशान है कि भगवान ने पाकी शोक सेवा के कारण देव को
किया सेवा सवारी सेवा का
हाँ बाबू ने देखा की बड़े से हजारों लोग बाबू ki bcaa
थाना मारा सा प्रश्न है कि अपराध जब करते तब कई बार ऐसा बोला जाता कि हम जो दिल्ली करते वक्त के साथ उसमें हमने वॉशियसहोनाचाहिए थोड़ा सा सतर्क लेना चाहिए लेकिन ये मैं देखता हूँ कभी सतर्क में
महाराज
अभी से दिली करते, हम व्यवहार करते तो वैसा अपराध नहीं होने के लिए हम थोड़ा सतर्क होना चाहिए तो लेकिन ऐसा देखा जाता है कि 70 के होते होते हम खुद सेल्फ कोसिस जिसको बोलते हैं वैसा हो तो क्या करे की हम सेल्फ कोसिसे सोने भी कर
से प्रयास करो इश्वर बचने एशिवरदेसेबचोगे तो अगर आज अपराध से छू दी एशिया गोवा में अगर कोई आप से अच्छी सेवा कर रहा है आप भी ज्यादा
i
m sorry please repeat
i
just
for that is
so as such we
ebiliti s s
s pet
appreciation, how we see that all advise you no o r o
give me a more give
one for you name is
my
name, you my name, a quality or many example, how adisyooiano
a
all good
quality by an
a
good quality to help a sa
a a a a
a a a we go difice would do v full color okay when i do more?
गाड़ी कैश है जिसके रूप को स्वामी जी के फासले में भी लगा कि कैसे वो बुरा बन जाते हैं। हालांकि मे कोई टेंशन नहीं तो कई बार देखा है कि काफी सारे जोटगोटीहैपाइलनेजर ॉफ्ट लेजर सॉफ्ट होते है, छोटी छोटी बातों को बुरा और रिजर्व है या मैनेजर है वो थोडा सा होता है। तो अनइंटेंशनल मैनेजमेंट में पीजी कर दे कुछ बोला और सामने वाले को सॉफ्ट ने छोटी छोटी बातें बुरा लग जाता है। तो क्या वो भी वेस्ट बन जाए
के हो नहीं करना चाहिए वो बाइफमेपरानहींबना अगर हम सोचे उसको भी सेवा करने लगे वो हमारे से आगे बढ़ जाएगा। there is a band, ऐसे e gt s question in a y he yes।
ओके बोल, कई लोग इसे बंद के साथ कुछ अपराध करते हैं, उसके साथ गलत कर देते है तो ार कहते है कि गलती उसने पहले किया से गलती किया तो उसके पास आगे सुना बल्कि उसको आगे तुमसे समा पाता माना
आप जानते हैं कि फरका a o o m i
total sense
that is a price, you have repaid is
it
okay
thank you i।
More from PRASAD

Rare Pastimes & Timeless Lessons of Guru Mahārāja | Stories Every Disciple Should Hear

ISKCON Legends- pure devotees meet-HH Jayapataka Swami, HH Gopal Krishna Goswami, HH Radhanath Swami

Jagannātha Ratha-yātrā Through Śrīla Prabhupāda's Mercy | 29 April 2006 | Nairobi, Kenya

Lord Jagannātha's Appearance Pastime | 21.07.2019 | ISKCON Calgary | Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

The Ācārya Teaches by His Own ExampleGuṇḍicā Mārjana by Guru Mahārāja #shorts

Guṇḍicā Mārjana – Lord Jagannātha's Pastime | 21.7.2019 | ISKCON Calgary |Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

H.H. Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī Mahārāja - Exemplary Sādhana and Deity Worship # shorts

भगवान की कृपा कैसे प्राप्त होगी ? | 11 Jan 2014 | Punjabi Bagh | Srila Gopal Krishna Goswami

Material Education vs Spiritual Education | Srila Gopal Krishna Goswami #shorts

