चैतन्य महाप्रभु का दिव्य प्राकट्य | CC Adi 14.5 | 12 Mar 2017 | Juhu | Srila Gopal Krishna Goswami

The video presents a devotional discourse on the divine appearance (प्राकट्य) of Chaitanya Mahaprabhu, exploring his role as an incarnation of Lord Krishna and the theological significance of his emergence. The speakers recount various pastimes (लीलाएँ) of Chaitanya and earlier Vaishnava saints, illustrating how miracles, guru‑disciple interactions, and the chanting of the holy name (नाम संकीर्तन) manifest divine grace. Central to the talk are five core practices emphasized by Chaitanya for attaining pure devotion, the importance of associating with advanced devotees, and the universal spread of Hari‑nama across the world. The lecture weaves narrative anecdotes—such as the brass plate incident with a bird, the transformation of a humble pot into a vessel of jewels, and prophetic visions of future dharma—to underscore the power of bhakti. The discourse concludes with a prayer for the audience to receive shuddha bhakti and to live in constant remembrance of the divine name.
Chapters
हाई कृष्ण। हमारे वैदिक शास्त्र के अनुसार के महा पवजी स्वयं भगवान है। जैसे प्रलाद महाज कह रहे हैं, वो ढके हुए भगवान है। दूसरे शब्दों में प्रकट हुए हैं भक्त के रूप में, किसलिए हमें शिक्षा देने के लिए किस प्रकार भक्ति।
भगवान के अनेक अवतार हैं।
उन अफ्तारों का वर्णन आप शास्त्र में प्राप्त करते हो और चेतन महाप्रभु विषय में कहा जाता है। सब अवतारों में सबसे दयालु अवतार है। अधवेदाचायया महा विष्णु के अवतार हैं। जब भगवान प्रकट होते हैं, उनके सनातन साथ ही साथ में प्रकट होते हैं।
पर कहीं उनसे पहले भी प्रकट हो जाते हैं?
जब भगवान कृष्ण पृथ्वी पर आये थे तो मदायसौदावासुदेव मनान बाल राम पहले प्रकट हो गए थे और भगवान बाद में प्रकट हुए।
उसी प्रकार चेतना महा प्रभु जी के
प्रकट होने से पहले उनके सनातन साथी भी प्रकट हो गए थे। उदाहरण के लिए अधवेदाचायाअधवेदचाया ने जब समाज की स्थिति देखी देखा कि कितना बिगड़ा हुआ समाज है। शुद्ध भक्ति में लगभग किसी की रुचि नहीं थी, लोग जुड़े हुए थे। त्यारियों में।
या
ने देखा, समाज की स्थिति। उन्होंने सोचा की भगवान को स्वयं प्रकट होना पड़ेगा। पतितों का उद्धार करने के लिए वेद ने भगवान कृष्ण की उपासना की, तुलसी के पत्ते अर्पण किए, गंगा का जल अर्पण किया और बहुत जोर जोर से चिल्ला रहे थे।
भगवान आप स्वयं प्रकट हो जाओ। पतितों का उद्धार करने के लिए
हीरा ठाकुर दिन रात भागवत का स्वर्ण की चर्चा करते थे। दोनो की यही इच्छा थी की भगवान हो जाए। किस लिए परतों का उधार।
इसलिए निर्धन ठाकुर कहते हैं पति भगवान हेतु बता रहा। आप अवतरित हुए हो।
किस लिए हैं पति? आप? कहोगे हम पति थोड़े है।
ब्राहमण कुल
में कहा गया है कलर सो सम्भव सभी दी बड़ी घराई के साथ श्रद्धा के साथ उपासना की। भगवान की इस भाव के साथ स्वयं भगवान प्रकट हो जाए।
अत लावा,
अनेक और भक्त पहले प्रगट हो गए सनातन साथी। उदाहरण के लिए उपेन्द्र मिश्र
जगनाथ मिश्रा, जिला
सचि माता माधंदपुरीईश्वरापुरी देवी प्रकट हो गए। भगवान से पहले उपेंद्र मिश्रा
के 7 बेटे थे।
उनका रहने का स्थान था बांग्लादेश।
बांग्लादेश का बड़ा गहरा सम्बंध है।
वैश्य सिद्धांत के साथ हमारे कई अचार प्रकट हुए थे। बंग्लादेश में कई की समाधि भी। बांग्लादेश में। तो उपर मिश्रा के 7 बेटे थे, जिसमे 1 बेटा था जगनाथ मिश्रा, जिसकी शास्तिक अध्ययन में बड़ी गहरी रूची थी। तो बुस्तान छोडकर आये नमलिलहामें। आज से लगभग 500 साल पूर्व नव शयर जो था। विश्व के सारे सबसे बड़े विद्वान संस्कृत के। वहाँ निवास करते थे और चर्चा करते थे।
जगनाथ मिश्रा
फिनदामिंशा के बेटे थे और नंबर दिन में आये। चक्रवती से दिव्य ज्ञान प्राप्त करने के लिए। चक्रवती बहुत ऊँचे कोटे के विद्वान भी थे और जोशी भी थे। कॉलेज शिक्षा दी। देखा कि जगनाथ मिश्रा में अनेक दिव्य लक्षण हैं। दिव्य भाव है। उनकी 1 बेटी थी, जिसका नाम था क्या। था, का विवाह कर दिया। किसके साथ जगना तो जगत मिश्रा और सच्ची माता हैं। था। फिर माधेंद्रपुरी कुछ दिन पहले हमने माधवेंद्र पुरी का तिरवावतीती मनाई थी।
माधवेंद्र पुरी उस समय के बहुत ही
ऊँचे कुटी के भक्त थे, दिन रात
उनके मन में
1 ही भाव था, भगवान की सेवा महान भक्त थे, कभी
किसी से कुछ मांगते नहीं थे, अगर
किसी ने कुछ दे दिया तो स्वीकार करते थे, और नहीं तो भूखा रहते थे। और महादमदपुरी ने 1 समय गोलान की परिक्रम समाप्त की थी जब वो भूखे भूखे थे। 1 सुन्दर गुाले ने उन्हें दूध दिया, इतना सुन्दर बालक उन्होंने कभी देखा नहीं था, इतना मधुर कंड कभी सुना नहीं था।
तो फिर उसी बालक ने सपने में
आदेश दिया की मुझे यहाँ छुपाया हुआ है, दबाया हुआ है मुसलमानों के हाते 4 से बचाने के लिए, मेरी स्थापना को पुरी का ऐसा भाव था। 1 समय भगवान ने आदेश दिया, चन्दन
लेकर आओ मेरे लिए 2000 मिल की यात्रा की, उन्होंने
लिए चन्दन ले आप को कहा, जाए के लिए चंदन ला 2000 मील की यात्रा करके स प्लेन की टिकट। 2 तो हम जाएंगे माधंदपुरीनेयहनही कहा प्लेन की गाड़ी की टिकट पैदल गए। पुरी बहुत ऊँचे कोरी के भक्त हैं, और अदवेदचारियानेभी उनसे और पुरी के पश्चात 1 साथ उनके 1 और सेशियथेईश्वरपुरी, जो कि महा प्रभो के गुरु बने, तो ये सनातन भक्त हैं, प्रकट हुए थे
भगवान के प्रकट होने से पहले।
इसके अलावा भगवान कृष्ण प्रकट होते हैं, तो उनके भाई कभी बड़े भाई या छोटे भाई के रूप में आते हैं। जैसे लक्ष्मण जी के राम के समय लक्ष्मण छोटे भाई के रूप में, बलराम
जी आये बड़े भाई के रूप में,
उसे भगवान नहीं थे, नंदा भी प्रकट हुए थे। पहले और
चेतन मा
प्रकट होने से पहले, उनकी माता ने 8 बेटियों को जन्म दिया था, जिनका पैदाइशी भी देहांत हो गया।
भगवान ने प्रकट होना था।
जैसे हमने कहा भगवान अपने भक्तों को ही चुनते हैं माता पिता के रूप में। जैसे की वासुदेव देवकी, उन्होंने 12 हजार देवताओं के वर्षों के लिए बहुत ही
गहरी तपस्या उठाई थी, कुछ खाया नहीं।
पिया ने, केवल पत्ते जो पेड़ से गिरते थे, और हवा और दिन रात उनका चिंतन था। हमें भगवान प्राप्त हो पुत्र के रूप में। और जिसके उत्तर में भगवान प्रगट हुए। तो इसी प्रकार जगनाथ मिश्र सच्ची माता उनके दिव्य भाव थे। और भगवान कैसे प्रगट हुए।
साधारण व्यक्ति जन्म लेता है।
सम्बंध के कारण पति पत्ती का सम्बंध होता है और संतान उत्पन होती है।
महा प्रभु का जन्म उस प्रकार का नहीं था।
महा प्रभु प्रकट हुए, जगन मिश्रा के हृदय से, सच्ची माता के हृदय में, सच्ची माता के हृदय से, उनके घर में, शुभ अवसर पर, जबकि पूरा समाज
जुड़ा हुआ था भगवान के नामों के उच्चारण करने में।
उस शुभ अवसर पर भगवान प्रकट हुए। जब वो प्रकट हुए, उन्हें अनेक नाम दिए गए। जंबर चक्रवती जो उनके नाना जी थे, उन्होंने उनकी जो जन्म पतली बनाई, और को
जिसे उन्होंने देखा कि ये तो
बच्चा है, साधारण बच्चा नहीं, ये तो नारायण है। चेतन में पढ़ते हो।
देवी व्यक्ति के 32 गुण लक्षण होते हैं।
नंबर और चक्रवती ने देखा, ये सारे
32 लक्षण प्रकट हैं।
इसमें
उनके नेक नाम थे।
1 गोर हरी। उनका सोनार का रंग था, सदा हरी का नाम लेते थे।
जब वो छोटे थे,
पैदा हुए थे, प्रकट हुए थे, रोते थे।
जान बुझकर पड़ोस की औरतों को पता था।
जब वो हरे कृष्ण मंत्र बोलेंगे तो वो बच्चा रोना बंद कर देगा। इस प्रकार उन्होंने बचपन से ही, बचपन से ही, दूसरों के द्वारा इनाम करवाए नेलंबर्चक्रवर्ती ने उनकी जनपति बनाई, जिसके द्वारा वो समझ पाये।
ये लड़का तो सुधार है, लड़का नहीं
है, ये तो नारायण है। उन्होंने देखा कि सारे 22 दिव्य लक्षण उनके शरीर में प्रकट है। और उन्होंने उन्हें 1 नाम दिया विश्व। विश्व का क्या क्या अर्थ है जो पूरी सृष्टि को संभालता है। भगवान ही पुरे सृष्टि को संभव दे। भाग भगवान हर चीज के कारण है।
1 नाम उन्हें दिया गया था।
नीम निमाई क्यूकि नीम के पेड़ के नीचे जन्म था। और यह भी माना जाता है कि नीम द्वारा कोई अशुद्ध भाव हो, विचार हो, वो भी नष्ट हो जाते हैं। क्यूंकि सच आज बेटियों का पैदाइशी में बद हो गया था, तो भक्तों की छत के बचे तो माँ छोटी आयु में दिली प्रकट करना आरम्भ किया। जैसे कृष्ण भगवान की लीला को आप देखो तो देखते हो, ये अद्भुत लीलाये हैं।
साधारण समाज में अगर शिक्षा 2
के
छोटे से बच्चे ने 1 पूतना जाती
राक्षसी का वध किया। लोग क्या कहेंगे? आज के आधुनिक समाज में माइथोलॉजी इमैजिनेशन, ये हिंदू शासकों की कल्पना है। जैसे जब अंग्रेजों का शासन था, तब
मुसलमान का शासन था।
उन्होंने तो कई हिंदू मंदिर तुड़वा दिए, पर अंग्रेजों के शासन में मंदिर नहीं तोड़े।
उनके विद्वान आये, जिन्होंने संस्कृत भाषा का
अध्ययन किया, उसके पश्चात ग्रंथों का नुवाद किया। ये स्थापित करने के लिए ये सिद्धांत में कुछ दम नहीं। ये सिद्धांत कल्पना है तो कई भारतीयों का भी विश्वास टूडिया वो पी एच
डी कह रहा है कि यह कल्पना
है तो कल्पना ही होगी। ि का का विश्वास। या तो
साधारण व्यक्ति जब लीलाओं को
सुनेगा तो क्या कहेगा। इसे आप किसको हो?
छोटे 7 साल के बालक ने 1 बड़े पर्वत को उठाया।
यह छोटी उंगली के लाखों के बल पर कोई विश्वास करे, कोई भगवान प्रकट हुए। आधे पुरुष आधे पर्चों रूप में 1 समय इस कोन का 1 कोर्ट केस चल रहा था। अमेरिका में सामने की पार्टी
दे भगवान की फोटो लेके आई।
कोर्ट में my lod गोड, फैन हाफन और मोदीवादी जूरी ने कहा मानिक नहीं देखा तो भगवान की लीलाओं को समझने के लिए सेवा का भाव चाहिए। भौतिक इंद्रियों से आप भगवान की शिक्षा को नहीं समझ पाओगे। जिस प्रकार कृष्ण भगवान ने अद्भुत लीला, पकड़ी, अद्भुत किस दृष्टि से इसकी तुलना
कोई कर नहीं सकता।
चाहे कोई देवता हो या देवी हो, कोई लीलाओं की तुलना नहीं कर सकता, उसी प्रकार भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं की तुलना कोई नहीं कर सकता। चेतने महारबबूनेभी अद्भुत लीला पकड़ की। 1 समय 1 ब्राहमण था यात्री जो कि जगनाथ मिश्रा के घर में आया था। जगनाथ मिश्रा बकैदा संतों की सेवा करते थे, जगनाथ मिश्रा ने उन्हें भोजन दिया। खाने के लिए। रामन अक्सर अपना प्रसाद खुद बनाते हैं। तो राम ने प्रसाद बनाया,
भोग लगाने
लगा था, भोग लगा रहा था। जब शैतान ने, माई ने आकर उसे झूठा कर दिया। राम ने सोचा शायद भगवान की इच्छा की, मैं भूखा रहा हूँ,
नहीं, नहीं, नहीं, तुम हमारे मैं मन हूँ। बड़ा अपमान होगा तुम हो तो फिर
से बनाया, फिर से झूठा कर दिया। 30 बार बाप ने कहा घबराओ मत, अभी मैं बेटे को दूर बंद कर देता हूँ। और दूरी पर बंद कर दिया। गाँव बनाओ, लगभग रात हो गयी थी, गैरी, रात सब सो रहे थे। और तीसरी बार जब फिर से भोग लगा रहे थे, तो ये हमाए फिर से वहाँ पहुँच। जब ब्राहमण ने देखा, तीसरी बार
फिर से आ गये, कहाँ से आ गए?
तुम्हारे मे बंद कर दिया तो वो
किसको लगा रहे हो? मुझे तो लगा रहे हो। चिंता क्या है?
फिर उन्होंने अपना श्याम सुंदर का रूप या किसी को ये सूचना मत देना कि तुमने मेरा दर्शन। 1 समय भगवान जब छोटे थे, तो उनका शरीर सजा था घनों के साथ, तो 2 चोरों ने उन्हें चुरा लिया,
कन्धे में बिठाया और ले जा रहे
थे दूर जंगल में, इन बघार के साथ, उनको मार देंगे और गैना इत्यादि चुरा लेंगे। और जब भी वो प्रयास कर रहे थे दूर भागने के लिए, भगवान की शक्ति द्वारा, वो वापस लौटकर जगना मिशा के घर में बोझ जाते थे।
जब जगना मिस सचिव, माता ने देखा बेटा बाहर खेल रहा था, आप घूम
हो गया है, सब घबरा गए, घर में, सब घबरा गए, ढूंढने लगे कहाँ है बेटा, कहाँ है बेटा, जब भगवान लौटे ने एकदम बच्चे को वहाँ छोडकर भाग गए। इस प्रकार उनकी अनेक लीलाएं हैं। जब वो छोटे थे। 1 सवे खेलते समय अपने दोस्तों के साथ खेल रहे थे, वहाँ कई पिले थे। पaपीdoगऔरभगवान ने जो सबसे खुबसूरत पीला था उसे उठा लिया। वो पीले को अपने घर में ले गया।
दोस्तों ने कहा ने माई तुमने सबसे लिए
े हम तुम्हारे से बात नहीं करेंगे। माय पिल्ले को घर ले आया। वो बड़े प्रेम से पिल्ले के साथ खेल रहे थे, पिल्ले को बिठा रहे थे। सच्ची माता ने कहा हम ब्राह्मण हैं ब्राह्मण के घर में, पिल्ला, समाज में
हमारी बस्ती हो जाएगी।
तुम इस पीले को घर के बाहर रख। 2 माही ने कहा अगर आप घर
के बाहर पीले को भेजोगे मैं भी
घर के बाहर चला जाऊंगा तो शची माता को और कुछ फाइन निमाई बड़े प्रेम से इस पिले के साथ खेलता था। 1 दिन निमाई, जब गए थे स्नान करने के ले गंगा में, क्योंकि माता ने निमाई पिले को कुर्जी के साथ
बाहर बांध कर गए थे स्नान करने के लिए।
और जब गंगा शची माता ने गांड खोल कर पिले को छोड़ दिया, फिर घर के बाहर चला गया। निमाई मित्रों ने कहा दौड़ गए निमायक
मित्र माई, नी माई, तुम जानते क्या हुआ है? नहीं, तुम्हारी माँ ने पिल्ले को छोड़ दिया है। और पता नहीं वो पिल्ला कहाँ घूम रहा है।
तो सब ढूंढने लगे का है। वो पिला न्होंने देखा, वो पिल्ला
दोपहरों
में नाच रहा था, 2 हाथों को ऊपर उठा रहा था,
शुद्ध भक्ति के
लक्ष्य प्रकट हो रहे थे, आंसू भरे थे नेत्र से और उनका शरीर का काम रहा था भक्त
और व हरे
कृष्ण गोविंद, हरे कृष्ण गोविंद, हरे कृष्ण गोविंद था। तो सारा शहर आकर्षित हो गया। सारा शहर आश्चर्य चकित हो गया।
पिला भगवान का नाम ले रहा है नचराहशेधभक्तिके लक्ष्य को पकड़ करते हुए और
सबके समक्ष भगवान के धाम से 1 रथ आया, जिसमें वो रथ आया किसलिए पिल्ले को लेने के लिए वो पिल्ला सबको भाई, भाई, बोलते, बोलते भगवान के धाम गया। ये सब कहने लगे देखो इस निवाई में कितनी शक्ति है। पेले को भी भगत बनाने। अगर आप का हो या सोचो अगर
रिमाई पिला रख सकता है तो हम
भी रख सकते है। अगर आप मे पीला रखना है तो
आपको गैरेंटी लेना पड़ेगा या पेले से
हरिनाम करवाओगे और पेले को शुद्ध भक्त बनाओगे।
अगर ये गैरंटी नहीं ले सकते तो ज्यादा बेहतर है।
हम ने तो छोटी आयु में से ही माने। अनेक दिव्य लक्शन पकड़कर ने आराम कर दिए थे।
जैसे मैंने कहा।
कुछ समय पहले, कुछ समय नंबर धाम बड़ा बड़ा ऐतिहासिक स्थान था। यहाँ के अनेक बंदे नवाज करते थे। उन दिनों में 1 संस्कृत के बड़े विद्वान थे, जिनका नाम था केशव कश्मीरी केशव कश्मीरी का 1 और नाम था दिग्विजय। उन्होंने सबको संस्कृत भाषा मे आया हुआ था। जैसे आजकल क्रिकेट कॉम्पिटिशन होता है। उन दिनों में उमीदवारों की डिबेट होते
थे देखने के लिए किस का ज्ञान
ज्यादा अधिक
धा में
साढ़े पंदे थे। और कैसे कश्मीरी ने भारत के सब
पंधतोंको डिबेट में हरा दिया था
के
कश्मीर में सूचना भेजी
के पंडितों को की।
मैं आपके शेयर में आना चाहता हूँ
आपके प्रतिनिधियों से डिबेट करने के लिए। तो उन्होंने 1 हवा बुलाई
केश कश्मीरी हमारे शहर में आना चाहता है।
हमारे पतिनिधि से, वेद से कौन उसके आगे खड़े होगा। सब घबरा गए। कश्मीर का नाम सुनते ही सब डर जाते थे। हम तो नहीं जायेंगे उनके सामने सबने इनकार कर दिया। में। फिर उन्होंने कहा कि हम हमारे शहर के जो सबसे छोटे पंडित हैं माय 11 साल की आयु में उन्होंने अपना पाठशाला खोल दिया था और उस पाठशाला में वो बड़े ध्यान से ग्राम सिखाते थे। कृष्णा से जोड़कर उनके हजारों विद्यार्थी बन गए थे, इसलिए उनका 1 और नाम था पन्नेमायपंदित पंदित। तो आपको पंडित जी मिलते है जो बीड़ी सिगरेट पीते हैं। द का अर्थ है इसके बाद ध्यान में ज्ञान हो और आचरण भी हो आचरण भी। यही नहीं, केवल ज्ञान दिनेमायपंदि छोटी आयु में ही बड़े प्रसिद्ध पंडित बन गए थे। और जब सूचना मिली कि किश्मे उनके शेयर में आना चाहता है, सब घबरा गये। फिर उन्होंने ये निर्णय किया हमारे शहर
के जो सबसे छोटे पंडित थे निमाई
पंडित, उनको हम दिग्विजय के सामने रख देंगे।
अगर तो निमाई ने दिग्विजय को हरा
दिया तो हम कहेंगे जो हमारे शहर का बच्चा हरा सकते हैं। मैं तो बात ही छोड़ो।
और अगर किसी हालत में देख विजय ने हरा दिया।
माई को हम कहेंगे, हमारे शेर के बच्चे को हराया, उसने हमें थोड़ी हराया
देख।
विजय और देविजे थे, ज्ञान था, वह भक्ति की कमी थी, सरस्वती के बड़े उपासक थे और वो ये चर्चा डिबेट करते थे स्थापित करने के लिए।
मैं देखो कितना विद्वान हूँ।
सरस्वती देवी के भक्त केशर कश्मीरी अपने भक्तों के साथ आ रहे थे। माय उन्हें मिले जो कि गंगा के दर्द पर बैठ कर अपने विद्यार्थियों को शिक्षा ले रहे थे। केशर कृश्मी ने कहा
आप ही हो,
जिसकी इतनी प्रशंसा सुनी है।
माई ने कहा पानी लोग प्रशंसा क्यों
करते हैं, मैं तो 1 भी ठीक नहीं बोल सकता। खैर दोनो की चर्चा हुई और निमाई के कहने पर कैसे किश्वर ने गंगा की प्रशंसा की, सोच लोगों की रचना की, मिनटों में सौ लोगों की रचना की और इतनी तेजी के साथ। फिर उन्होंने माई से पूछा तो कैसे लगा मेरी रचना। वाह। बहुत ही सुन्दर विजन मैने 1 श्लोक का उच्चालन करके सुनाया में आश्चर्य हो गए थे। कहने लगे मैंने तो
वायु की तेजी से सौ श्लोकों की चर्चा की थी, इस तेजी के साथ की थी। तुमने 1 श्लोक को कंटेस्ट कैसे कर लिया।
सास में सूती धारा शब्द पढ़ते हो, सूधीगरतहैसुनना भरा करते हैं, कब्जा कर लेना। श्री नारा उसे कहते हैं जो व्यक्ति
1 बार सुनने से ही
कंटेस्ट कर लेता है।
शुक्र देव को स्वामी
जब भागवत का उपदेश दे रहे थे, उस सभा में हजारों भक्त उपस्थित थे, जिनमें 1 सूतक स्वामी नाम का भक्त भी उपस्थित था। और जब नाम सानिया में संतों ने उनसे मार्ग दर्शन पूछा तो उन्होंने वो ही अट्ठारह हज़ार लोग जो उन्होंने सुने थे। शुकदेव गोस्वामी के माध्यम से उन्होंने 1 बार सुनने से कंटर कर लिया। तो प्राचीन समय में लगभग सभी शुरी थे। और आज की स्थिति में हम बार बार पढ़ते तो भी भूल जाते हैं। या दायजीभीकमजोरहै
तो केशो किशी
आश्चर्य हो गए थे। छोटे लड़के 1 बार सुनने से ही लो को कंटर्स। फिर निमाई कैसे? कश्मीरी ने पूछा क्या कमियाँ हैं? क्या गुण है निमाई, जब कमी और गुणों की चर्चा की कैसे कश्मिरी हर पल, हर विषय का उत्तर नहीं दे पाए।
निमाई के जो विद्यार्थी थे, क्योंकि ये
सभा चल रही थी। माई की क्लास में निमाई के विद्यार्थी थे, वो जरा हसने लगे,
हँसी उड़ाने लगे।
कैसे के चुनिनेमाईकेप्रशन का हर वा रे मायने मे रोक दिया। मां ने कहा नहीं केशर के थकाव है कल उत्तर देगा। और केश जब घर गए, उोंेछसवती सारस्वती के उपासक थे तो सास्वती से पूछा कि आप हमेशा मेरी सुरक्षा करते आए हो,
आज आपने बिल्कुल सुरक्षा नहीं की।
क्या कारण है ये जो, ये जो बालक है ना, ये कोई साधारण व्यक्ति नहीं, ये स्वयं भगवान है। दिन हो गए।
के चरणो में
माई के माई जो
थे,
जैसा मैंने कहा कि उन्होंने साल खोली थी
और अपने पर साला में
रोज जाते थे पढ़ाने के लिए।
और रास्ते में 1 वो पारी था,
जिनसे उनका बड़ा गहरा सम्मान था। वो व्यपारी का नाम क्या था। खोला बचे,
खोला बचे, शीधा, आप जैसे
बड़े व्यापारी नहीं थे। छोटा भाई भारी था। केले के पत्तों के प्याले बनाना, जब लोग जाते हैं गंगा में फूल बन कर
दिन रात। खुले बेचे श्रीधर
भगवान के नामों का उच्चारन करते थे। उनके जो पडोसी थे वो कहते थे
ये खुले बचे खुद भी सोता नहीं,
हमें भी सोने नहीं देता ये सारी
रात वो हरे, हरे
पडोसी कहते थे,
लगता है भूत सता रहे हैं इस
व्यक्ति को, क्यूंकि इस दिन मे कुछ खाता नहीं है, गरीब आदमी है।
माई रोज उनकी दुकान में जाते थे
और पूछते थे तो आज केले का क्या भाव है? इसका क्या भाव है? और खेल। खोलबे जो कहते थे, फिर आगे कहते थे ये तो बहुत महंगा है, तुम बहुत नफा बना रहे हो, इतना नफा मत बनाओ। खोले। मुझे सीधा कहते थे अगर तुम्हें लगता है मेरे भाव ऊंचे हैं तो दूसरी दुकान में चले जाओ। क्यों आती है मेरा सिर खाने के लिए। रोज। निमाई कहते थे मैं क्यों दूसरी दुकान में जाऊँ, तुम अच्छे सप्लायर हो, मैं तुम्हारे पास ही आऊंगा। मुझे पता है कि तुम्हार बार कितना था। मैं
खुले
जैसे हमने कहा
दिन रात
भगवान के नामों का उच्चालन करते थे और उनमें प्यार की भावना थी और सेवा की भावना थी। अपनी छोटी आमदन का 50 प्रतिशत। वो खरे से थे किसकी सेवा में
रहने के लिए उनके घर में 1 ही कमरा था, जिसमें कोई छत नहीं।
फैलने के लिए उनके पास
1 ही
धोती थी, जिसमें 11 छेक थे। अंदाजा लगाओ जब बारिश आती थी, दीवार के साथ चिपक जाते थे। जब भी उन्होंने सेवा नहीं होगी, उनके
घर में 1 ही टूटा हुआ बर्तन
था, जिसमें वो पानी पीते थे और भोजन खाते थे। चेतन भगवत में लिखा है। वो बर्तन इतना टूटा हुआ था कि कोई चोर भी उसे नहीं चुराए। इतनी बुरी स्थिति में वे इस प्रकार
माई का
रोज बर्तलाव होता था। के खोले माई कहते थे मुझे पता
है तुम बड़े धनी हो।
शीला था तो आगे देख क्यो नही
लेते, मेरे पास कितना धन है।
निमाई कहते थे 1 दिन मैं तुम्हारे
सारे विश्व को सुनाऊँगा।
बताऊँगा तुम कितने धनी क्या था। निमाई का भाव आध्यात्मिक दृष्टि से ये धनी थे।
माई ने अपना सब के आंदोलन आरम्भ किया।
शिवा आंगन में शिवा संगन शिवा जी का घर मा मायापुर मंदर के निकट है। शिवांग में मा प्रभु बड़े शैतान थे। फिर वो संस्कृत के विद्वान बने। फिर उन्होंने अपना प्रचार का आंदोलन शिंगन में किर्तन होते रहता था। 899 घंटे, 1 साथ और 1 समय जब किर्तन हो रहा था,
भक्तों को भूख लगी।
भक्तों ने कहा
भूख लगी है,
आम की इच्छा है। पिछले दिन मा ने 1 आम का बीज बो दिया
जो मिनटों में मिनटों में 1 बार पेड़ बन गया, जिसमें
200 पके म थे।
पके
नामों में नाक घुटली थी,
न छिलका।
आप ने ऐसा आम देखा कभी नाकपोपोसकैते गुटली रोज वो पेड़ या साथी केतन के पश्चात थक जाते थे, जब थकते थे 200 आम पेड़ रोज दे रहे है। 1 म इतना भारी था, पेट भरने के लिए, काफी था, 1 म से पेट भर जाता था। इस प्रकार 1 साल हुए। ये लीला बीती
तो महा बहु ने जो अपना सम किया, शिव में
प्रचार कर रहे थे।
केवल जोन के फ्री निकट के भक्त
थे, उन्हें अधिकार था ये दर्शन लेने के लिए। 1 ब्राह्मण था, जो बड़ा तपसी था,
केवल दूध पीता था
और फल खाता था। और कुछ नहीं तो मैं श्रीवास को
बार बार कह रहा था, मैं दर्शन लेना चाहता हूँ। वह प्लग के अद्भुत किरतन का।
और श्रीवास ने कहा, मैं यह नहीं दिखा सकता, मुझे इजाजत नहीं है। दूसरों को बुलाने के ल और ये ने बड़ी जिद की ठीक है वो
दीवार के पीछे 1 छोटा सा केक
बना लो दरवाजे में वो चेक से देखना तुम महा प्रभु की लीला तो महा प्रभु नाच रहे थे, अपने भक्तों के साथ कितन कर रहे थे, एकदम रुक गए।
यहाँ कोई है जिसे नहीं होना चाहिए।
शिवा ने घबराकर।
हाँ हाँ 1 ब्राहमण है, बड़ा तपस्वी था केवल दूध दूध के सहारे जीता
है, जिसकी इच्छा थी आपके दर्शन, आपके देवी कीर्तन का दर्शन कहा केवल तपस्या
द्वारा थोड़ी तो मुझे प्राप्त कर सकते हो।
दूसरे शब्द में शुद्ध भक्ति होनी चाहिए की कृपा से बार बहू ने जब अपना
सम आंदोलन आरम्भ किया,
जब धाम में जो मुसलमान थे,
उन दिनों में
मुसलमानों का शासन था। बड़ी अजीब बात है, पर लगभग हिंदू थी, प्वाइंट फाइव परसेंट आबादी मान थी, जभी भी उनका शासन था। बड़े आश्चर्य की बात है, हिंदू लोग बड़े डरपोक होंगे, उस समय को कई बार सोचे गिराई से देखता हूँ, समझ नहीं आता, आबादी लगभग नाइनटी नाइन परसेंट हिंदू थी, उस समय भी ने कब्जा कर लिया और अनेक हिंदू को मुसलमान बना लिया। आप हो गो तो मुसलमानों का शासन था। वो अधिकारी थे उधर के जान काजी, तो मुसलमानों ने कहा जान काजी निमाई
के सब कितना डॉलर को रोको तो सारे मुसलमान यहाँ हिंदू बन जाएंगे।
1 अधिकारी था दाढ़ी के साथ, हो गया था बोलने के लिए
रोको रोको
ये हरे हरि नाम के को दाड़ी जल गयी। और मुसलमान था
जो बार बार जाकर
चान काजी से कहता था रोको हरी राम को नहीं रोकोगे तो सारे मुसलमान बन जायेंगे। तो गांधी ने 1 दिन पूछा, जब
भी तुम आते हो मेरे पास शिकायत
करने के लिए, मैं देखता हूँ की तुम ही नाम कर रहे हो। ये क्या बात है। 1 दम से शिकायत करते हो रोको
रोको रोको है राव, डॉलर को दूसरी
तरफ से है, नाम कर रहे हो। मुसलमान ने कहा, ये बात सच हैं,
जब से मैंने नेमार के द्वारा है, राम सुना है। रीना में तो मुसलमानों ने तो शिकायत
की थी, पर आश्चर्य की बात है,
हिंदुओं ने भी की, क्योंकि
ब्राहमण थे जिनकी कमाई थी, स्मार ब्राह्मण थे, जो कमा रहे थे पैसा यज्ञ कर के, उनका तो धंदा ठप हो गया ने माइक सब के डॉलर में कोई यज्ञों की जरूरत ही नहीं। तो हिंदू ने भी शिकायत की काजी से अरे ये जो धर्म ने माइक कर रहा है। असली धर्म नहीं है, हिंदू धर्म नहीं है। कोई बनाउड़ीधरमैमुझे याद है जब इस काम के भक्त पहले इंडो नेजा में गए थे प्रचार करने लोग अमेरिकन भक्त थे। उस भक्त ने स्परष्ट कह दिया व्यक्ति
ब्रामण गुणों के आधार पर, जम के आधार पर।
नहीं। तो समाज को बिलकुल अच्छा नहीं लगा शिकायत सरकार से झूठी शिकायत करे ये
स कौन वाले असली हिंदू नहीं है,
नकली है नहीं आने। 2 तो हिंदू ने भी शिकायत की निमाई जो आंदोलन कर रहा है यह तो बनावटी है। जानकारी ने अपने प्रतिनिधियों को भेजा और कहा बोल 2
शाम के दर नहीं बदलेंगे बंद करेंगे
तो
सब की संपत्ति
को हड़प कर देंगे, सरकार ले लेगी। सारे हिंदुओं को मुसलमान बनाने
देने में
मुसलमान बनना बड़ा आसान था
मुसलमान के
घर भोजन खा लिया, मसला बन गए है
बात बन भी गया आपके शरीर
बन गए समय 1 राजा थे हुसेन शाह
1 दिन हुसेन शाह पहले तो
साधारण गरीब थे सेवक थे धनी बुधी रॉय के सुबुधी रॉय बहुत बड़ा जमींदार था तो बचपन में सुबुधी हुसेन शाह ने कुछ गलती की थी जिसके कारण सुबुधी रॉय ने प्रेम से चाबुक मारा था। जिसका निशाना रह गया तो चापलूसी करके सुबुधी रॉय से शा नौकर था वो सेठ बन गया बड़ा जमींदार सुबीर गरीब हो गए जब उसकी पत्नी सेन शाह की पत्नी ने देखा लकीर का निशाना, उसने पाती से पूछा अरे
ये निशाना कहाँ से आ गया
तो उसने कहा बचपन में मैंने गलती की थी से इंसान तो सुब दी रॉय ने प्रेम से माना था इसका ये निशाना अरे अब तो तुम बड़े हो गए हो। और मार 2 सुबुधी राय को क्या हिम्मत थी उसमें ये करने की, तो
शान ने कहा नहीं मैं कैसे मारूँ उसने तो मुझे बच्चे जैसा पाला था
छोटे से अपराध के लिए या अच्छा
बनाने चाहते तो मुसलमान तो बना। 2
उसे इंसान का ठीक है इंसान बुरी को बुलाया अपनी बाली से पानी सुधी रोये बसवा घर वालों ने कहा घर के बाहर जाओ घर में नहीं रह सकते। बुधी रोये प्रसन्न था सब समाज उसे जुदा हो गया
पर वो जरा
और
मुझे क्या करना चाहिए
की सवा मुझे क्या करना चाहिए।
वो बोलते हुए घी को पीकर आत्महत्या कर लो।
सब रो पंच महा प्रभु के पास माँ प्रबु से पूछा मुझे स्थिति में क्या करना चाहिए? माँ प्रबु ने कहा
हाय के जाब करो
वृंदावन में आये हैं अपनी छोटी आमदनी की सेवा की तो
है पर
आंदोलन शुरू हुआ धमकी काले मैं तुम्हे जबरदस्त ही मुसलमान बना लूंगा, माँ प्रभू के भग डर गए। भक्त ने सूचना दी की क्या बीता था
घबराओ मत हम चंद काजी के पास मोर्चा लेकर चलेंगे, हर घर में
सजाओ केतन करो और 1 बड़ा मोर्चा लेकर प्रभु आगे बढ़े जानकारी के पास और महा प्रभु के मोर्चे में
लाखों
भक्त इतनी लम्बी लाइन। बाबाजी कहते हैं
असल में नॉन वायलेंट
मूवमेंट भारत में हाँ प्रभु ने शुरू किया था। जब चानकाजीने देखा, हाँ प्रबु सबको ले गए मोर्चा में, जब वो पहुंचे चानकाजीकेमहल में चनका जी घबरा गया, छुप गया,
देखा लाखों लोग मेरे घर के आगे खड़े हैं।
और सा बगीचा खराब कर लिया।
चनका सामने आया।
महा प्रभु उसकी हुई। चनका जी ने माँ प्रभु के गुस्से
को कम करने के कहा निलबचक्रवतीतुमे दादाजी मेरे अंकल माने जाते हैं।
वह बड़ा गहरा सम्मान था। और अगर चाचा को गुस्सा आये तो भतीजा शांत कर देता है। भतीजे को गुस्सा क। दोनों का वर्ताव हुआ की माँ प्रभु
ने कहा ये क्या धर्म है। यह माता पिता का वद्ध किया जाता है। गाय के द्वारा हमें दूध प्राप्त होता है।
वहीं 7 माताएँ हैं। शास्त्र के अनुसार साथ माता, असली माता गुरु की पत्नी, साथ माताओं के अलावा में गाय माता की जाती है। और बैल जिसके सहयोग से का उत्पादन होता है। तो महा प्रभु की इस प्रकार की चर्चा हुई। और महा प्रभु ने कहा,
1 विश्वास
दीजिये भविष्य में आप और आपके प्रतिनिधि
कभी समकित आंदोलन को नहीं रोकोगे।
जानकारी ने स्वीकार किया, हमारा जो धर्म है, हमारे जो शास्त्र हैं, उनमें काफी कमी आई है। पर आपकी बेरिक साहित्य में कमी फिर। इस प्रकार चर्चा। तुम्हा पर ने 1 निवेदन किया, क्या
आप यह विश्वास दीजिये कि भविष्य में कोई भी आपका प्रतिनिधि, ये सरकार का
अधिकारी सब कि आंदोलन को नहीं रोकेगा। काजी ने कहा, जिस दिन मैंने अपने
प्रतिनिधि द्वारा तुम्हारे मृदंग को तुड़ाया था,
उस उस दिन रात को ये सपना 1 आधा पुरुष आधा पशु शेर
आया
मेरे पास तेज नाकों के साथ मेरे शरीर को चीरा। ये देखो ये निशाने और कहा
अगर तुमने भविष्य में कभी रोका निमायक
छोड़ना नहीं, पूरा छेड़ दिया जाएगा। मैं घबरा गया हूँ।
इस प्रकार काफी लम्बी कथा हुई।
माँ पर बहुत लम्बे किर्तन इसके पश्चात महा प्रभु को प्यास लगी।
महा प्रबु को जब प्यास लगी तो पानी पीने कहाँ गए? जो प्यास लगी पानी पीने गए।
कहा वही झूठा प्याला
जिसमें खोले सीधा
पानी पीते थे, पर वो ही प्याला
लिया, उसे पानी पीने लगे। शीला ने कहा माँ प्रभु क्या कर रहे हो? झूठे मेरे जूठे प्याले से पानी पी रहे हो।
माँ मैं अपने आप को पेट से बना रहा हूँ। माँ इतना स्नेह था अपने मैं अपने आप को पवित्र बना रहा हूँ। अपना उद्धार कर कहा था न ले।
1 दिन में पूरे विश्व को बताऊंगा
तुम कितने धनी हो माँ लोगो ने ये बताया कितने धनी हैं माँ मुझे घर में आये के प्याले से पानी पी सी आप लोगों को मिलने हैं। 1 समय सनातन गोस्वामी गए थे, जगनाथपुर जगनातपुरी पहुँचने के लिए रास्ते में जाराखंड जंगल से गुजर गए थे। और जब वो जगनातपुरी पहुँचे के पूरे शरीर में पस पुल्सी से भरा था उनका शरीर। महा प्रभु जब उधर आये पर सोच
रहे थे और मेरा शरीर निकम्मा हो
गया है, वो जा रहे थे जगनार पुरी महाप्रभु को मेरा शरीर निकम्मा हो गया है, फुंसी पस से भरा हुआ है। मैं रत के नीचे। आत्महत्या कर लूंगा। महा प्रभु समझ गए, लोगों ने गले लगाया और उनकी बीमारी दूर नहीं, तचेरिनेमहाप्रभू की। अदभूत भी लाए हैं। जिनका ज्ञान आप 3 प्रसिद्ध ग्रंथ हैं में 1 है चेतना मंगल, इसकी रचना लोचन राज ठाकुर ने की,
1 है
चेतन भागवत, इसकी रचना बृंदावन राज ठाकुर ने की और 1 है चेतन है चर्दवीदा।
कहा गया है कि चेतन महाप्रभु जी की कृपा से कठिन कार्य संभव हो जाता है।
उनकी कृपा के बिना सरल कार्य कठिन हो जाता है। तो और यह भी कहा गया चेतन
चेतना में जो व्यक्ति महाप्रभु की लीलाओं का स्मरण करेगा। आज आपने कई लीला सुनी है। जो व्यक्ति महा प्रभु की लीलाओं का
स्मरण करेगा उसके लिए कठिन कार्य सरल हो जाएगा। इसलिए भगवान गीता में कहते हैं
न
मेरा भाग बना, मेरा चिंतन करो। हे महा प्रभु की दिनां का स्मरन करना चाहिए। माँ और उनकी कृपा से कठिन कार्य है। चेतन प्रभु ध्यान माँ को ही बना लिया। जो चेतन मारू 1 समय वर्ना से गए थे, वहाँ चंद्रशेखर नाम के भक्त घर में निवास करते थे।
चंद्रशेखर भौतिक दृष्टि से नीची जाति का था।
आजकल हिंदुस्तान में ऊँची जाती, नीची जाती की बात करते हैं।
हम लड़ते हैं कि नीची जाती में
वहाँ नाम गिना जाए।
फिर दाखला वगैरह जल्दी मिल जाता है।
कहते हैं कि
नीची जाती का था, उस के घर में क्यों थे रे
क्यूंकि वो भक्त था। हमारे भक्ति के सिधांत में जो भक्त
है, वो ऊंची जाती है,
भक्त है, वो नीची जाती है। जैसे कई बार लोग पूछते हैं काला पैसा, सफेद पैसा क्या है? वाइट ब्लैक, हमारा सिधांत है सब जो भगवान की सेवा में उपयोग करे वो वाइट है। और जो भगवान की सेवा में उपयोग नहीं करे वो ब्लैक है।
ठीक है। तो
ये तो महा प्रभु चन्दर शेखर के साथ। 1 और भक्त
अमल मे चितेरे महाप्रभु को बंग्लादेश में मिले थे, जहाँ उन्होंने
पूछा था कि जीवन का क्या लक्ष्य होना चाहिए? और महाप्रभु ने कहा जीवन का लक्ष्य होना चाहिए शुद्ध भक्ति,
ये होना चाहिए
जीवन का लक्ष और ये प्राप्त हो सकती है नई नाम के द्वारा। फिर महा प्रभु के कहने पर महा प्रभु ने पद वर्ना सी भेजा है
जो महा प्रभु
और नासी आये।
चेतन महा प्रभु।
और तो शेखर ने कहा हम सह नहीं सकते।
आपकी इतनी बेसी हो रही है। सारे सन्यासी कह रहे हैं देखो ये क्या सन्यासी है? बाल वेदांत सूत्र पढने की बजाय पागलों जैसे नाच और गा आय। हम यह सह नहीं सकते। भगत जो है अपनी बेस्टी से लेगा
की, बस्ती नहीं खास कर के भगवान के बस में होने का।
हम चाहते हैं। 1 सबा हो आपकी
बनी सन्यासियों के द्वारा।
नंद सरस्वती बहुत ही ऊँचे कोटी के
मायावादी गुरु थे, जिनके हजारों शिष्य थे।
तो 1 ब्राह्मण था जिसने ब्राहमण जिसने इन सन्यासियों को अपने घर में निमंत्रन
दिया था, वो महा प्रभु के घर में आये, चंद्रशेखर के घर में आये। महा प्रभु को निमंतन देने के लिए।
महा प्रभु अक्सर जाते नहीं थे। किस के घर में माँ प्रभु ने
स्वीकार कर लिया उनके घर जाने के लिए। और माँ प्रभु उनके घर में गये। जो मायावनी सन्यासी थे,
सब ऊँचे साल
में बैठे हुए थे। और माँ प्रभु जम गये।
वो बैठे जहां की 5 होते हैं लोग।
मंदिर में आने से पहले तो वो
मां प्रभु जब आये।
हालांकि मायावती सन्यासी दे माँ प्रबु ने सबको प्रणाम किया। प्रणाम करने के बाद पश्चात भा प्रभु
ने अपने दिव्य लक्षण प्रकट किया। उन्होंने अपने चेहरे के द्वारा इतना प्रकाश प्रकट किया कि लाखों सूर्यों के द्वारा प्राप्त नहीं होता। जब सन्यास ने देखा महाप्रभु के चेहरे से इतना प्रकाश प्रकट हो रहा है, वो हैरान हो गये।
कैसे संभव है? फिर उन्होंने कहा कि
आप इतने बड़े विद्वान हो, आप हमारे साथ बैठ कर,
वेदानदसहोदाका ध्यान क्यों नहीं करते? उन्होंने कहा कि मैंने गुरु ने देखा मुझे और कहा तुम्हारे में योग्यता नहीं है, केवल यह है।
नाम के उच्चारण की योग्यता है।
नाम ही नाम ही नाम, केवल नाम लो, सेवा, केवल यह योग्यता है। और आगे निमाने कहा, आगे निमाहने कहा कि
और कोई योग्यता नहीं है मन में।
और मायने।
ये बात सच है। जब से मैंने हरी नाम किया है,
कभी मैं नाचता हूँ, कभी मैं गाता हूँ, कभी विहासताऊयहमहामंदर का जादू। महा प्रभु के प्रचार से
सारे
सन्यासी प्रभावित हो गए। सारे हजारों प्रकाश प्रकाश वासना बन गए से सबको वैसा बना दिया।
जहाँ भी जाते थे जंगल में गए, जंगल में पशु से भी हरी नाम करवाया।
हाथी, शेर टाइगर, पक्षियों सबसे भारत की यात्रा थी सबको। उन्होंने भग बना दिया। तो सरस्वती के साथ सारे भग क्या बन गए, वैसा बन गए।
1 बुद्दस्
गुरु था जिसे महा प्रभु ने हराया था।
डिबेट में
ये बुद्धि भग्ज थे, उन्होंने सोचा इसने हमारी बेस्ट की है, हमारे
गुरु की, हमें बदला लेना चाहिए।
तो अगले दिन 1 पीतल की थाली में सरावा भोजन लगकर। महा बजाय महा प्रसाद राय हैं। आप लीजियेगा।
जैसे वो पीतल की थाली वहाँ प्रभु
को दे रहे थे। 1 चिडिया आई जिसने पीतल की थाली को उठा लिया। और जो सरावा खाना था।
ये बुद्देसके सिर पर पीतल की थाली थी।
चिड़िया ने ऊपर से खूब फेंकी, वो गुरुजी के सिर पर गिर गई। और जब वो भारी थाली गुरुजी के सिर पर गिरी तो गुरुजी बेहोश हो गए। तो उनके शिष्य घबरा गए।
अरे हमारे अपराध के कार देखो क्या परिनावहमारे गुरुजी का जीवन खतरे में है।
सारे शीश गए।
अब चाहिए हमारे गुरु जी को उमड़ने वाले हैं।
हमारा यह दोषी भाव ने कहा
जाओ गुरु के कानों में हाई नाम का उच्चारन करो
हो गए, गुरु थे, नाम का उच्चारन किया, जिसके द्वारा गुरु जी
होश में आ गए।
सारे बुद्धि वैश्नव बन गए। तो
इस प्रकार महा प्रबुध की अनेक लीलाएं हैं। हमें इन लीला में रुचि लेनी चाहिए,
पढ़ना चाहिए। वहाँ प्रभु सन्यास लेकर जा रहे थे। जगना जी का दर्शन लेने
अपने साथि छोड़कर आगे तेजी से जल रहे थे।
तो वो जा रहे थे।
तुम्हें प्यास लगी। रास्ते में
जो उन्हें प्यास लगी तो वहां 1 गोला ली बेच रहा था मा ने उसके मटके को लेकर सारी लस्सी पी ली। ग्वाला ने कहा पैसा महारोगो ने कहा
मेरे साथी पीछे आ रहे हैं, वो पैसा देंगे। जब नितिन नंदजी वगैरह पहुँचे
वाले ने
कहा तुम्हारे 1 सन्यासी आये थे जो सारी लस्सी पी गए और कहा कि
आप पैसे दोगे पैसा दीजिये। नितिन नंदा ने कहा हमारे पास भी पैसा नहीं है,
ठीक है। अभी मैं घर जाता हूँ। चलो सन्यासी को कह देता हो। ली मेरी तरफ से दान थी सन्यासी मटका उठा कर घर जाने की योजना बना रहा था।
तो जब वह मटका उठाने गया तो इतना भारी था कि वो स्टल्यहोगयाभरीमटका कैसे हो गया। वो लसी तो सब खत्म हो गयी थी। उसने अंदर देखा और देखा कि उसका खाली मटका भर गया था हीरे मोतियों के साथ,
मोदी के साथ भर गया
था भगवत प्रेम भी
उत्पन हो गया था। वह प्रभु की सेवा करके ली है। बड़ा शुभ अवसर है।
हम भक्तों को महा प्रभु से यह प्रार्थना करनी चाहिए क्या हमें शुद्ध भक्ति प्राप्त हो। और महा प्रभु ने वैसे तो बड़ी गहरी शिक्षा दी है, पर 5 विषयों पर बल दिया।
साधु संग नामा, किरतन भागवत, तब का
अध्ययन, आज से, की पूजा, श्रदा से और धाम वासी हमारा प्रयास रहना चाहिए कि हम भक्तों की संगत में रहे, खास कर के उत्तम भक्तों की संगत
भक्तों की संगत में रहोगे।
तो आपको असली उदेश्य मिलेगा असली उपदेश क्या है है नाम, वही नाम ही नाम और केवल नाम करो, भागवत का
अध्ययन करो, भागवत नम और चेतन भगवान
के आचे की उपासना करो और जहाँ हो वहां हा नाम का जॉब करोगे, वो धाम हो जाएगा।
राम का बॉम्बे तो धाम है ही।
आप कहोगे क्यूं पापाजी ने बॉम्बे में इतना समय काटा ये धाम है हो इन 5 कार्यों का पालन करोगे तो भक्ति सदा हो जाएगी।
चेति ने महा प्रभु की वाणी थी
विश्व के हर कोने में हर नाम पहुँचेगा। आज पापाजी की कृपा से यह नाम
हर जगह पहुंच गया है। जैसे चेति ने महा प्रभु ने झारखंड जंगल में पशुओं द्वारा हरी नाम करवाया। जब प्रापा जी अमेरिका पहुंचे थे तो
समाज का वादा पशु जैसे था, सब
जुड़े हुए थे
और ये हरि नाम के माध्यम से जोड़ा और सब भक्त बने। तो चेतन प्रभु स्वयं भगवान हैं। राधा कृष्ण प्रकट हुए केतने महाप्रभुजी के रूप में। 1 भाव यह था कि देखें कि राधारानी का कितना गहरा व आकर्षण है भगवान के प्रति दूसरा भाव यह था समाज में भक्ति का भाव भक्ति का ज्ञान दिया जाए और भक्ति के असली भक्ति के ज्ञान के माध्यम से ही भगवान प्रेम प्राप्त कर सकते है। तो चेतना अत्यंत दयालु हैं
श्वेत द्वारा सत्य युग में भगवत प्राप्ति का साधन क्या था?
भगवान का चिंतन 1 1 लाख साल 60 साल भगवान का चिंतन करते थे है। फिराया च्रेतेयोगमेंट्रेतय योगा में भागवत पाप्ति का साधन किया था बड़े बड़े यज्ञ द्वापर में महंगी भेड आपको बोला मंदिरा दर्शन
के लिए लाख रुपए का सोना मिलाना
था तो कलयुग में वो ही लाभ प्राप्त हो सकता है। ई नाम के माध्यम से तो है।
नाम का लाभ तो हर स्थिति में है।
अगर हम पूरा लाभ उठाना चाहे। ध्यान पूर्वक जॉब करना चाय तो हमारा यह प्रयास है। ध्यान पूर्वक जॉब करें। क्या जॉब, अरे, कृष्ण, रे, कृष्णा, कृष्णा,
जी,
ज्ञानपुर और जॉब करेंगे। शाह से पढेंगे जीवन को सफल बना पाएंगे।
ये प्रार्थना करोगे। भगवान से क्या प्रार्थना न जनम कविताओं
जगदीश में हमारे जन बता रही। ा और चेतन।
माप ने कहा नादपिसुनेचेनथरोरपीसा ना माने माना देना। अगर तुम सदा किरत चाहते हो, क्या भाव होना चाहिए। गाय से भी ज्यादा पतीदपेड़सेभी। ज्यादा सेंशीलऔर
आदर की उम्मीद किए बिना लोगों को आदर देना।
ये भाव रहेगा। तब सदा हरी का नाम ले।
सकोगे।
यह भाव रहेगा। नहीं, हम कितने बड़े भक्त हुए हैं।
सबको हमें सलाम करना चाहिए। फिर हरी नाम नहीं निकलेगा।
तो ये भाव रहेगा कि हम तो सब के दास हैं, दासों के दास हैं, दासों के, दास के 10, के 10 है।
फिर ये हरिनाम द्वारा केतदरपरमार्जन प्राप्त होगा और अनंदबुधिवर्दनम प्राप्त होगा। तो गुरंग महाप्रभु अत्यंत दयालु हैं। उनकी भविष्य वाणी थी। पृथ्वी के हर कोने में हरी नाम पहुँचेगा। प्र। प्रयास से हर कोने में पहुँच गए। तो गो
गो रंग गो रंग गो गो रंग रंग गो रंग गो गो रंग गोरा ghi
हाई कृश्णा।
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