नित्यानंद प्रभु की महिमा | CC Ādi 5.6 | 18 Feb 2019 | Juhu | Srila Gopal Krishna Goswami

In this Hindi devotional discourse, Srila Gopal Krishna Goswami expounds on the supreme compassion and universal mission of Nityananda Prabhu (referred to as Nitin) as described in Chaitanya Charitamrita Ādi 5.6. He emphasizes that modern seekers must take shelter of Nityananda to escape material attraction (the "vish" of worldly work) and to cultivate a heart free of ego. Using a vivid analogy of feeding a horse—requiring six people—to illustrate how difficult it is to convert souls to Krishna‑bhakti in the present age, he underscores the urgency of spreading Hari‑nama without discrimination. The discourse highlights Nityananda and Chaitanya Mahaprabhu as the most merciful incarnations, whose grace enables anyone, regardless of background, to receive the holy name. Practical guidance is offered: surrender to Nityananda, pray for the removal of material obstacles, and actively propagate the name of the Lord worldwide, following the example of the avatars who disseminated the holy name like rain falling everywhere. The talk concludes with a call for universal, unbiased devotion and the promise that sincere surrender will lead to true Krishna love.
Chapters
तो आज बहुत ही शुभ दिन हैं। क्या है? भगवान ने कहा तो हम वैसे तो चेतन सरमिदमहै अनेक श्लोक हैं जिनमें आप भगवान निंदा में पढते हो। पर हम केवल 34 लोग पढेंगे जिनसे आपको ज्ञान प्राप्त होगा कि महनितनंदाजी कौन है? भगवान ने जिन्ना की कथाएं और लीलाएं। आप हजारों बार सुन सकते हो और सकोगे नहीं। तो सबसे पहले हम आदि लीला के पांचवें दिहाई का 1 लोग पढ़ेंगे जिसमें आपको बना उनके विषय में ज्ञान प्राप्त होता है। कृष्ण बोले कि चेतना से बरामसंगे श्री नित्य नंदा, भगवान नित्य नंदा बाल राम जी के अवतार माने जाते हैं और लक्ष्मण जी के अवतार माने जाते हैं। लक्ष्मण जी का 1 ही भाव था। राम की सेवा, ना वो सोते थे। रात को उनके 24 घंटे ध्यान है तथा भगवान राम की सुरक्षा। उसी प्रकार भगवान निदधंदरकाभाव रहता था। महाप्रभु की सेवा और लक्ष्मण जी के अवसर हैं और बलराम जी के अवसार अवसार माने जाते हैं। बलराम जी कई बार प्रकट होते हैं छोटे भाई के रूप में, बड़े भाई के रूप में। तो भगवान नीतियाँ नन्द, नित्य, सनातन आनंद ठाकुर। लोचा ठाकुर ने अपनी रचनाओं में यह स्थापित किया है कि चेतन महा प्रभु स्वयं भगवान है और न के बिना वहाँ प्रभु की कृपा प्राप्त नहीं होती। ठाकुर ने सील भजन में कहा है श्री कृष्णा। चेतन प्रभु दयकोरबोले समा, बिना के दयालु प्रभु आपके करके दया कीजिये मेरे पर आप सबसे दयालु हो। आप क्यों अपसारित हुए, परित भगवान। हेतु दावा मत आरा व समापदित प्रभु आप प्रकट हुए हो पृथ्वी पर पतितों का उद्धार करने के लिए। और सब पतित में सबसे पतित कौन है? मैं हूँ नेतेनंदा छोटी आयु में ही अपने मित्रों के साथ कृष्ण लीला रामलीला की चर्चा करते रहते थे। भगवान में अपने के साथ कृष्ण लीला करते थे की किस प्रकार पूछना नाक सुसी का वध हुआ, किस प्रकार कृष्ण मुहा ने अनेक लीलाएं प्रगट की, किस प्रकार उन्होंने छोटी आयु से ही असुरों का वध आराम कर दिया था। आप जब भागवत के दसवें स्कंक पड़ो तो पडो देखते हो कि भगवान ने छोटे आयु से ही सुरंग पुतसीपगसूराआगसूरा दिनों का सूरा का वध मरीज से हुआ तो भगवान यही करिष्टनीलायोगय हुई थी। 5 साल पूर्व। उसके वो लीला पकड़ कर देते हैं अपने साथ। और कृष्ण कृष्ण लीला नहीं। रामलीला भी बाहर जब बोलते थे तो लक्ष्मण की नकल करते थे। लक्ष्मण जैसे बोलते थे। तो जो साथी थे वो समझ नहीं पाये। उनको ये ज्ञान कहाँ से प्राप्त हो रहा है। हमने मा बाप कहते थे, हमने दर सिखाया ही नहीं, वे कहाँ से? यह लड़का ये सीख रहा है। सारी कृष्ण नीरा की नकल की किस देवता गए थे प्रार्थना करने के लिए कि भगवान प्रकट हो। साई लीलाओं की नकल हो ही थी और बचपन में साथ कृष्ण लीला की चर्चा करते थे और नाटक करते थे। तो उनके माँ बाप और दूसरे माँ बाप के भी तुम लीला सिखाई नी सूरा सूरा सूरा कहाँ से तुमने सीख लिया? वो कहते हमने तुम तुम्हें रामलीला सिखाई नहीं कहाँ से है। लक्ष्मण जैसे बोलना शुरू सीख लिया। तुमने भगवान से ना कहते थे, ये मेरे पूर्व जन्म के लिए लाये हैं और मुझे किसी से सीखने की आवश्यकता नहीं। दूसरे शब्दों में, शुरू से ही उन्होंने दिव्य लक्षण करना आराम कर दिया। पंद्रह हृदय में 1 ही भाव था। सदा बेटे की प्रशंसा 1 यात्री उनके घर में आया। लक्ष्मी, पली, सिरसा और ये और निदा के पिता। हाई पंडित ने उनकी बड़ी देखभाल की, जैसे आप पढ़ते हो। प्रापा के पिता घोर मुंडे बाद संतों की सेवा करते थे। हाई पंडित के घर में भी कैदा संताति थे। और 1 संत आया जिसका नाम था। ली ने उनकी देखभाल की और कहा, मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ? आपके घर में कोई आये तो आप पूछते हो न, हम आप की क्या सेवा कर सकते हैं? बोलिये क्या सेवा? तो उसी प्रकार राय ने अतीदेखाबड़ा सुन्दर रूप से स्वागत किया और उन्होंने कहा कि मैं तुम्हे क्या सेवा कर सकता हूँ? यासी ने कहा, मैं इस समय तीर्थयात्रा कर रहा हूँ और मैं अकेली हूँ। अगर मुझे कोई साथी मिल जाए तो बड़ा बहुत अच्छा होगा। इससे पहले हाई ने मेरे घर में जो भी है, सब तुम्हारा है, जो भी सुविधा है, तुम्हारी है। भागो मे से क्या सेवा में आपकी कर सकता हूँ? तो ये ने कहा, हे, मैं यात्रा कर रहा हूँ, 30 के स्थानों में जाता हूँ। और अकेला जाना जरा कठिन है। मुझे सहयोगी की आवश्यकता है। और अगर आप अपने बेटे को भेज सको मेरे सेवा के रूप में, तो बड़ा अच्छा होगा। तुझे भाई ने सुना यात्री कहता है उनका बेटा। उनके साथ जाय से ये बंद शोक में आ गए। तुरंत मेरा बेटा, जिसके दिन, बार दिन रात, हम चर्चा करते हैं, वो मुझे छोड़ कर जाएगा, यह तो ठीक नहीं होगा। और फिर उन्होंने कहा, ये मैंने तो बच्चन दे दिया है, वजन दे दिया है। है को जो भी तुम मांगोगे, मैं पूरा करूँगा। तब मैं पीछे नहीं हट सकता। पहले तो उन्होंने कह दिया जो मांगना है मांग, उन्होंने सपना देखा था, वो कहेगा अपने बेटे को। 2 तो मरा ने वचन दिया था। और कहा कि राम को बनवास भेजे, 10 साल तो शोक में आ गए थे, हों, वचन दिया था जिसको वो टाल नहीं सके। दूसरी प्रकार राय पंधे ने जब सुना कि ये यात्री कह रहा है अपने प्रिय पुत्र को मेरे साथ भेजो मेरा सहयोग करने के लिए, तो उनके पिता शोक में थे। पिता ने पद्मावती से पूछा क्या करें? पद्मवती ने कहा कि नदी तो पालन करें। तो भगवान दा घर छोड़कर लक्ष्मी, पति के साथ यात्रा करने लगे। भगवान नंदा लगभग 12 साल बड़े थे, चेतना महा प्रभु से। दूसरे शब्दों में, महाप्रभु के प्रकट होने से 12 साल पहले प्रकट हुए थे। तो फिर अगले 12 साल के लिए, अगले, 12 साल के लिए भगवान और लक्ष्मी पति सिरसा उन्होंने भारत के चीतों की यात्रा की। जैसे कि आप पढ़ते हो। अब पुरुषीय युद्ध हो रहा था। बाल राम की इच्छा नहीं थी। इस युद्ध में लड़ने के लिए। बाल राम ने जब देखा कि कोई भी उनके आदेश का पालन करने को तैयार नहीं है, बालाराम फिर तुर्क स्थानों की यात्रा करने लगे तो उनकी इच्छा थी न 30 के स्थानों में जाने के लिए। और उनका उद्देश्य ये था कि जब महा प्रभु जो महा पर अपनी संकृत आंदोलन को आरम्भ करेंगे, नव में या वो उनसे जा कर, मिले चेतन महा पर स्वयं भगवान थे जो प्रकट हुए भक्त के रूप में। और महा प्रभु ने बचपन में आपने असली उद्देश्य को नहीं प्रकट किया, बालभवन में की आरंभ किया। पर थोड़ी देर बाद तो भगवान नंदा बड़ी तीरता के साथ यात्रा। उन्होंने शुरू करी थी इस किसानों की और हो जाए और जायरासाहोऔरबारह। सालों के लिए। भगवान नंदा दक्षिण पदी तीर्था के साथ भारत के तेज के स्थानों की यात्रा कर रहे थे। जिस प्रकार बाल राम ने किया था, कूशगीयकेसमयजब वृंदावन पहुंचे को याद आ गया कृष्ण लीला की कहानियां। और जब वो 32 साल के थे, उन्हें पता लग गया था क्या महा प्रभु ने में अपना सम के दिन आंदोलन आरम्भ कर दिया है। चेतन महापुर ने कि सम के दिन आंदोलन आरम्भ किया। कइयों ने उनका विरोध भी किया जो हिंदू स्मार्ता ब्राहमण थे। उन्होंने कहा कि ये जमाइन जो कितना दोलन शुरू किया है, ये कहाँ है हमारे शास्त्र में, ये नकली धर्म है, इसे रोकना चाहिए। आप पूछोगे ब्रामणो ने को इस प्रकार कहा, क्यूंकि यज्ञ के द्वारा वो धन कमा रहे थे, वो है नाम, इसके लिए कोई यज्ञ की आवश्यकता नहीं। उनके आमदन काट रही थी और मुसलमानों ने भी विरोध किया। मुसलमानों ने कहा अगर हम धिमाएकेसमकदिनअंडोलन को नहीं रोकेंगे तो सारे मुसलमान हिंदू बन जायेंगे। उनमें 1 मुस्लिम था जो बार बार आकर काजी को कहता था माही के सब के को रोको नहीं तो हम सब हिंदू बन जायेंगे। काजी ने कहा तुम दिन रात आकर शिकायत करते हो, रोको रोको रोको पुछली, मैं तुम्हे देखता हूँ, देख रे नाम कर रहे हो। ये क्या नाटक है। उसने कहा यह बात सच है। जब से मैंने ये हाई नाम सुना है जमाई के द्वारा ये हाई नाम जीप से निकलता ही नहीं। तो नित्यनंद ब्रज की यात्रा, तीर्थ किसानों की यात्रा 12 साल की उन्होंने और जब 32 साल के थे वो आये कहाँ नमधिरमेंवरएक बड़े प्रसिद्ध भक्त थे नंदन चाय्या, उसके घर में रुके चाय का जो घर था वृंदावन धाम जैसा था। और उसका नाम था सोदिया। हमारे मायापुर मंदर के बिल्कुल निकट में तुम्हार को पता था महा प्रभु का स्वयं भगवान है, वह प्रभु को पता था। अब ले थे नंदन पहुच गए है में तो उन्होंने अपने 2 साथियों को भेजा जाओ घर घर। 2 शादी कौन थे श्रीवास और आया। वहाँ पर वो भक्तों के साथ थे। उन्होंने कहा 1 महान संत ने प्रवेश किया है न धाम में, तुम लोग जाओ घर घर जाओ और ढूंढो महान संत को मेरे पास लेकर आओ। तो शी वाज, हरी दास, शी वाज ना मुनी के अवसर है, हरी दास बामा जी के अवसर है। कोई साधारण पुरुष नहीं थे तो उनको भेजा शी वाज हरी दास घर घर गये। पूछा कोई महान संधियाँ प्रकट हुए हैं और वो ढूंढ नहीं पाए हों। माँ पापा को कहा हमने बहुत प्रयास किया, हम ढूँढ नही मान साद नहीं प्रकट हुआ। माँ प्रभु चाहते थे कि वो जाकर मिले किसे माँ ठीक है, मैं जाता हूँ माँ और माँ पर कहा सीधा कहाँ है में वहाँ जब आये तो को गले मिले को गले मे ले बड़े। प्रेम के साथ सारे भक्त आश्चर्य हो गए थे। यह देखकर कितने प्रेम के साथ भगवान इतननमेलेकैसेबड़ा सुन्दर वर्णन है, सुन ते नन्दा माह प्रभु हो गए और उनकी नितिन इच्छा क्या थी, जा लेने और महा प्रभु नितिन के द्वारा शासक माना जाता है। वो है जो गुरु है उसका प्रतिनिधि है। और महा प्रभु ये साबित करना चाहते थे। महा बबू नेता को ले गए शिवाज के घर में। शिवाज अंगन में महा प्रभु ने अपना संविधन आंदोलन आरंभ किया था। शिव अंगन में 8 हर, घंटे भर बाद घंटे, 1 साथ हर नाम होता था। और अंदर केवल जो गे प्रिय मित्र थे, प्रिय भक्त थे। उन्हें अंदर आने की इजाजत थी। सामने 1 ब्राहमण था जो बड़ा तपस्वी था, जिंदगी भर केवल दूध और फल पर जी रहा था। वो बार बार श्रीवास को कह रहा था। मुझे अंदर आकर वहाँ प्रभु की दिव्य लीला को देखने। 2 शिवाज कहते थे नहीं, नहीं, नहीं, वहाँ प्रभु ने मुझे इजाजत नहीं दी है। तुम अंदर आने के लिए महा प्रभु इन में दिवलक्पकरतेथे जो केवल शुद्ध बक समझ सकते थे। अच्छा वो दरवाजे में है कि 1 छोटा सा केक था। तुम्हें छोटे से चेक के पीछे खड़े होकर देख लेना। महाप्रभु की लीला महाप्रब लीला कर रहे थे। वे एकदम रुक गये। यहां कोई है जिसे नहीं होना चाहिए। और शिवा से घबराकर का 1 तपस्वी ब्राह्मण था। जो जिंदगी भर केवल दूध और फल पर जी रहा है। जिसने कई बार मुझे कहा वो दर्शन लेना चाहता है। आपके लिय। वहाँ प्रभु ने कहा केवल दूध और फल खाने से मुझे प्राप्त नहीं कर सकते, भक्ति होनी चाहिए। वहाँ प्रभु भक्त बन गया तो हा प्रभु नित्यनंद को लेकर शिव संगर में पहुंचे जहाँ की महा प्रभु क्या कर रहे थे। आरती का पूजा लाये थे नित्य। पूजा नंदा जो है वो लक्षण के अनुसार है। बलराम के अवसर और शासन में माने जाते हैं। पहले विस्तार गुरु महाप्रभु नितेंद की पूजा करने लगे थे। नितिन ने वही सामग्री लेकर महा की पूजा करे। निदिननंदा के मन में ही भाव था भगवान की सेवा अधवेदाचाया उन्होंने प्रार्थना माह विश्व के अवसार हैं। और कुछ दिन पहले कामीरबावुतीती हुई थी। अधवेदाचाया ने दा के साथ प्रार्थना की थी। हे भगवान, समाज की स्थिति इतनी बिगड़ गई है कि आप खुद प्रकट हो तो का उधार के। हालांकि वहां विष्णु के हैं। दिन रात क्या करते थे माँ बाप की अधवेदाछायाको पसंद नहीं आता था। प्रभु उन्हें इतना आदर दे रहे है। अधवेदाचायानेमायावाली सिद्धांत का प्रचार शुरू कर दिया। सूचना पहुँची अधवेदाचायायप्रचार कर रहा है ह हम सब भगवान हैं, हम हम तुम भगवान हम भगवान, सब भगवान। तो भगवान ने से पूछा ये सच है क्या? अधेरा मायावादी सिधान का प्रचार कर रहा है? मैंने भी ऐसे ही सुना है। माँ प्रभु बड़े गुस्से होकर अपने पाँव को माँ पर उन्हें डांट रहे हैं। अपने पांव को रखे। उनके पीठ में। न्होंने। बहुत बहुत शुक्रिया। यह नाटक किया था मैंने आप से दाल दिलवाने के लिए। माँ प्रभु आधवेदेचेरेको इतना आदर देते थे के नहीं भगवान। उसी प्रकार भगवान भगवान उन्हें पढ़ा था। महा प्रभु भगवान। तो महा प्रभु ले गए नितिनंदाकोशिवास। आंगन में उनकी गुरु पूजा करने के लए और शिवा ने नितिन कई सामग्री लेकर महाप्रभु की पूजा करे। तो चेतन महाप्रभू नितिनंदा प्रकट हुए हैं पति धोंखा बुधार के लिए। और इस कलियुग में हम सब पतित हैं भक्ति का खजाना, भक्ति का ज्ञान खजाने में बंद था। पर नितिन और हरिदास ने क्या किया? चेतना ने ताला तोड़कर बिना भेदभाव के इसके प्रचार किया। जब चेतन महाप्रभु ने प्रचार का आंदोलन आरंभ किया, तो उस समय भी पतित व्यक्ति थे। यह नहीं कि पतित व्यक्ति केवल आज है। जैसे महा प्रभु ने। 1 दिन, महाप्रभु ने है दास और भगवान ने को बुलाया। और उन्होंने कहा घर घर जाओ और लोगों को कहो क्या? बोलो? कृष्णा, बाजो कृष्णा, खोड़ो कृष्णा, शिक्षा, कृष्णा का नाम लो, उसकी उपासना करो, उसकी शिक्षा को अपनाओ। तो महाप्रभु के आदेश पर हयदसऔरनितिनदने प्रचार करना आरम्भ कर दिया। यह बड़ी प्रसिद्ध ही राय। आप लाखों बार सुन बैठे हो। पर इस लीला की चर्चा के बिना नदी के अनेक गुणों को आप समझ नहीं पाओगे। तो महाप्रभु के देश के अनुसार नितिन हरिदास ठाकुर ने घर घर जाकर प्रचार आराम कर दिया। कई स्थानों में गए लोगों ने बड़े आदर से स्वागत किया, संत महान आ गए है। बोलो क्या है तुम्हारा? आदेश हमारे लिए वो कह देते हैं? कृष्ण का नाम लो, कृष्ण की पूजा करो। वो कहते थे बहुत बहुत शुक्रिया। हमें सन्देश का पालन जरूर करेंगे। कई स्थानों में गये। लोगों ने दरवाजा भी नहीं खोला। देख लेते थे, कौन हैं। और कहते थे हम ने जो प्रयास किया था तुम्हारे कितिनमडलीमें उपस्थित होने के लिए। तुम ने हमें रोक दिया। और अब हम तुम्हे अंदर आने देंगे। निमाही पागल हो गया है। और तुम्हें भेजा हमें पागल बनाने के लिए कई स्थानों में हो गए। लोगों ने कहा, ये सन्यासी थोड़ी है। ये तो ढोगी सन्यासी हैं, यह हैं सन्यासी के कपड़ो में। और ये देखना चाहते हैं हमारे घर में। क्या है? फिर बाद में आएंगे चुराने के लिए। तो हरिदा सुनते थे, तो आज हो जाते थे। मैं भक्तों को याद दिलाता हूँ। नितिन। हरिदास ने भी जब प्रचार शुरू किया, यही नहीं कि सबने उनका साथ दिया, कहीं ने दिया, कइयों ने किया। उसी प्रकार जब आप प्रचार करते हो, आज के भक्त प्रचार में जाते हैं, क्या अनुभव करते हो वही अनुभव जो हानि ने अनुभव किया। कहीं आपका स्वागत करते हैं? हा स्वामी जी आ गए, बोले क्या हैं आदेश? कहीं आपको गाली देते हैं? क्या है, से में काम धंधा नहीं है। क्या कहते हैं। जा फैक्ट्री में काम करो। क्या किताब बेचते बार बार इसी प्रकार से वार नितिन। हरिदास को पता था कि छेतिनहैमहाप्रबु स्वयं भगवान हैं, तो वो सोच रहे थे और भगवान हैं, वो प्रकट हुए हैं। परिदों के उधार तो हरिदास सोचते थे। अगर हम इस शहर के सबसे पतितों का उद्धार कर दें तो महा प्रभु की महिमा बहुत बढ़ जाएगी। तू ने लोगों से पूछा इस शेयर में सबसे पतित कौन है जो वो बुरी आदत में बुरी संगत है। तो लोगों ने कहा यहाँ 2 भाई हैं, जिनका जन्म होता ब्राह्मण खानदान में, पर हर प्रकार की बुरी आदत है। उनका खानदान का बड़ा उच्छा नाम है। पूरे खानदान में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है जिसके ऊपर थोड़ा भी कलंक हो। पर ये 2 भाई इतने बुरे निकले के माँ बाप ने उन्हें घर से निकाल दिया। कहा, तुम तो हमारे सदस्य नहीं हो। तो फिर हरिदास और न देखा है। ये 2 भाई 1 दूसरे के बाल खींच रहे हैं। शराब जब वो किर्तन सूझ सुनते थे तो नाचने लग जाते थे। तो लोगों से उन्होंने सलाह इन 2 भाइयों का उद्धार करें। तो लोगों ने कहा अरे इनके पास भी मत जाना, इनके लेकर जाओगे तो जिंदा नहीं रहोगे इन के पास जाना है। उन्होंने कहो का, कहों को कतल कर दिया है। तो हरिदास हो, जो नहीं हमें पतियों को उधार करना जाए। हरिदास और निधन गए बड़ी विनम्र के साथ, जगाई मलाई को विचार करने के लिए आप अपने जीवन को व्यस्त क्यों बना रहे हो? हरेकृष्ण? जगाई मदाई ने देखा, ये हमें उपदेश देने आया है, सिखाने आया है। तुम्हारी यह है। बस, हमारे सामने कोई आता नही है। तुम हमें शिक्षा दे रे हो। उन्हें क्या करने के लिए आये, वो मारने के लिए आये। देखा तो दोनों भागे तेजी के साथ भागे जाए। जगा म आई, क्योकि दी, शराब पीते थे, तो उनको पकड़ नहीं पाये। और जब दोनों भागे थे ने कहा, तुम्हे तो पीटा गया था। 22 बाजारों में जब अपना भजन करे थे। काजी ने कहा, मुसलमान खूल में तुम्हारा जन्म हुआ है। क्या ये हरी का नाम दे रहे हो? अलग का नाम लो माँ। हरिदास ने शिक्षा दी। ये भगवान है। तो हरिदास को 22 बाजारों में घसीट कर पीते थे। काजी के प्रतिनिधि लगला पीटे गए, पीटे गए, पीटे गए। हे। जब भी हम बोल गए, अभ्यास ये था कि जब तक पीटने वाले दूसरे यती से बाजार में लौटे पहुँचे थे, आदमी मर जाता था। महा प्रभु ने हरिदास की पूरी सुरक्षा की। और 22 बाजारों तक घसीटा ने पीटे गए, पीटे गए। हिदाज के पूरे शरीर में कोई निशाना नहीं था, कोई दाग नहीं था। और क्या सोचते थे, मुझे बाइक बाजार में घसीटा है। और अभी तक कुछ नहीं हुआ। जो मुझे पीट रहे हैं, उनको काली जिंदा नहीं छोड़ेंगे। तो उनकी सुरक्षा का सोचते हुए। क्या? क्या दास ने ऐसा व्यवहार किया जैसे उनकी मृत्यु हो गई है। जो पीते थे, बड़े खुश हुए, खा जी को संदेश दिया। अब हरिदास की मृत्यु हो गई है। तो हम उनके अंतिम संस्कार होने चाहए। काजी ने कहा इसको मुसलमान नीतियों का संस्कार नहीं देना चाहिए। तो महा पापी था मुसलमान होते हुए में जन्म लेते हुए या फेंक 2 इसे गंगा में तो के उनका अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। तो हरिदाजको उन्होंने फेंक दिया, हरिदास थे तैर कर दूसरी तरफ आ गए और भजन शुरू कर दिया। जब राजा को सूचना पहुंची, यही हिदाज जैसे 22 बाजारों में पीटा था। और फिर कहा कि मर गया है, जिंदा है कोई समझ गई, कोई मान। तो नितिन ने उसे लगा स्मरण किया। जाय है हरिदास पहुंचे भगवान के बाद चे तेरे महा पर बने को कहा जाओ रोज घर घर प्रचार कर निकले उस शाम को लौट कर मुझे सूचना 2 कितने लोगो को जोड़ा है। तो जैसे प्रभार समय भी प्राभार पूछते थे। तो आज क्या प्रचार हुआ कितने प्रचार कितने लोगो को जोड़ा। तो आप देखते हो इस कारबंद में हम रोज सुबह पढ़ते हैं। पिछले दिन क्या प्रचार की सेवा जी, तो के हरिदा जाओ और मुझे रोज शाम को आगे बोलो क्या प्रचार किया। जब महा प्रभु ने सुना किस प्रकार इन 2 भाइयों ने किया, इनसे संबंध की किस प्रकार उन्होंने अपराध किया? तो महा प्रभु ने कहा फिर से जाओ वापस। और जब वो वापस लौटे, और मनाई ने देखा ओह फिर से आ गई ये लोग, ये हिम्मत। हमने तो भगा दिया था ने, उन्होंने क्या किया? पत्थर उठाकर, माथे खून बहने लगा। और मदाई कौर पत्थर फेंकने वाले थे। पर जगाई ने रोक दिया नहीं क्या है देखो खून बहता है, तुम दूसरा पत्थर क्यों फेंकना चाहते हो? माई ने रोक दिया, वहाँ पहुँचे द्वारा इनका वध करना चाहते थे। बधाई का ने क्या कहा रोकिए। ये 1 उदाहरण है। कलयुग की प्रजा लगभग इस प्रकार की है। और जब मदाई ने देखा कितना हतयचार किया जी नीति इस प्रकार बोल रहे हैं। भगवान ने जगाये का भार पकड़ किया, जगाई ने क्या किया था? मदाई को दूसरे पत्थर फेंकने से रोक दिया था, तो भगवान प्रसन्न थे गाय मदाई ने जब देखा वितेदरनकाबरवार उन्होंने क्या किया, तुरंत प्रणाम किया और ये स्वीकार किया कि मुझे माफ कर 2 मुझे कोई आदेश हो हाँ भरने का, वहाँ 1 घाट हैं यहां के तीर्थ यात्री आते हैं उस घाट में स्नान करने के लिए। और मलाई को सेवा दी गयी। वो घाट साफ करो स्वीकार किया। क्या 1 लाख बार दिन में जाब करने गए। माँ प्रबु ने देखा कि दोनो शरणागत हो रहे हैं, माँ प्रबु, मैं तुम्हारे पापा को ले लूंगा अपने ऊपर अगर तुम करो। माँ प्रभु का शरीर क्योंकि सुनार के रंग का था, वो क्या बन गया, खाले रंग का चित्र गुप्त जो यमराज के सहयोगी हैं वो हिसाब किताब कर रहे थे? मलाई और जगाई ने कितने पाप किए? जब उन्होंने देखा तो वो बेहोश हो गए। कितने पाप किए थे को हिंदी भी नहीं कर सके। तो शिलर प्रभुपाल जब पश्चिम देशों में गए, जब पापाजी ने प्रचार शुरू किया तो लगभग पूरी प्रजा जिनको प्रापा जी मिले लगाएं मलाई के समान थे हर के बुरा जब महा बबु जाला जंगल से गुजर रहे थे। तो ने पशुओं के द्वारा भी नाम किया। हाथी शेर टाइगर नाम करते गए। जब विदेश में गए उन्होंने प्रचार शुरू किया तो जो भक्त थे लगभग जगह बनाई जैसे थे आज की प्रजा जगाई मनाये जैसे। पापा जी ने सब को उदार किया किस माध्यम से आई नाम के द्वारा पिछले हफ्ते हमारे प्रधानमंत्री मुझे बताया मारे प्रधान मंत्री उस बंगाल के इलाके में 1 लेक्चर दे रहे थे। उन्होंने अपने लक्ष में कहा हमारी पार्टी को वोट दोगे तो दूंगा मोदी ने वोट 2 हम सब जगाय मदाई का उदार कर देंगे, कम से कम जगाई बदाई का नाम लिया। तो ये जगाई मलाई बन गए। तो महा प्रभु सन्यास लेकर जा रहे थे जगत पुरी मंदिर की ओर और महा प्रभु शिव जी के मंदिर का दर्शन लेना चाहते थे। तो उन्होंने अपना सन्यास दंड इतना जी को दिया संभालने के लिए। और कहा मैं स्नान करके आता हूँ। अंडा को पकड़े रखा और क्या गया ने को 3 भागों में तोड़ दिया और दरिया में फेंक दिया ने कहा का मेरा डंडा मैंने मैंने तोड़ कर फेंक दिया उस नदी में, और बताया जैसे वो बिजली गुस्से हो। प्रभु। ने ने गन्ना क्यों फेंका सोचा माँ स्वयं भगवान है, उन्हें इन नियमों की देखभाल करने की कोई आवश्यकता ही भगवान है। फिर दूसरा कारण था यह संन्यास लिया था उन्होंने। मायावादी से, गुरु से जो मायावादी हैं वो 1 डंडा उठाते हैं। हम भगवान 1 ही हैं ये उनका सिधान और जो वैष्टवाहैं सन्यासी वो क्या उठाते हैं कि दन्दामनबुद्धि इंदियों के द्वारा हम इन पर वह रखते हैं भगवान की सेवा करने के लिए। ये था दूसरा कारण। दूसरा कारण यह था की माँ माँ प्रभु ने सन्यास लिया। 1 डंडा है 1 डंडा शोबानी देता डंडा होना चाहिए। उन्होंने छोड़ दिया 1 और कारण था मा प्रभु चाहते थे कि ऐसी कोई घटना बीते जिसके द्वारा वो क्रोधित होकर वो तुरंत वो माजी का दर्शन देना चाहते थे, वह अकेले में लेना चाहते थे। तो जब नितिन डंडा तोड़ दिया तो भगवान ने देखा डंडा 3 भागों में तोड़ दिया, नदी में फेंक दिया। तो प्रभु ने क्रोध प्रकट किया। माह बाबू तेजी से आगे गये। जगी तो नितनननदाजीकोतो हमेशा पता था चेतन बाबू कौन है स्वयं भगवान भगवान न रगुनादास से मिले रगुनादासमुससमय के सबसे धनी खानदान के इकलौते तो रगुणादाज को क्या का, क्या का पानी आती उत्सव शुरू किया, कहा कि तुम्हरा जो धन है धन से क्या करो सारे, ब्रिज, बस, सारे, भैसों, को, क्या, क्या, क्या, खिलाऊँ, चूरा और रगुणादासने। भगवान ने तेना के कहने पर छूरा और विधेय का उत्सव किया। इसमें हजारों लोग ये खाने के लिए और सारे उन्होंने क्या किया, छूड़ाऔरधई का उत्सव करवाया, ये पानी हदी उत्सव स्कान के कई मंत्रों में मनाया कई मंत्रों में मनाया जाता है। ये शुरू हुआ था जी की प्रेरणा से। 1 और ब्राह्मण था जो कि था ब्राहमण था, छोड़ लगता है उन दिन में काफी ब्राहमण छोड ब्रामण का व्यवहार था, ब्राहमण का पर था डाकू छोड़ भी नहीं डाकू था तो नेतेनन्दाभगवान तो आवाज दूध से और वो अपने आप को उनका शरीर जो था पुरा सजावा था गहनों के साथ, तो इस आव दूध चोर ने देखा इतने महंगे गहने हैं ये वो दूध खाना पहन रहा है। तो उसने अपने साथियों को बुलाया देखो छोटी छोटी चोरी के दिन समाप्त हो जाएंगे जल्द ये दूध के शरीर में इतने महंगे गहने हैं की अगर हम किसी प्रकार से चोरी कर ले इन गहनों को हम सब रिटायर हो सकते हैं चोरी के धंधे से छोटी छोटी चोरी करने की आवश्यकता नहीं रहेगी। तो सब चोरों ने कहा ये इरादा है उनहोने ये चर्चा की अच्छा आवोगी चूडिया मलूंगा। हार मैलूंगातउन्ोंने इस प्रकार की योजना बना ली कि क्या किसको मिलेगा। तो ये जो ब्राह्मण था इनका गुरु वो नेतन के साथ घूम रहा था कई दिन उनके आचरण को देखने के लिए क्या करता है चोर भी चोरी करने आते हैं पहले स्टडी करते हैं कब साफ घर के बाहर जायेंगे हो? तो चोर ने कहा चलो फिर आज रात को हम जाएंगे भगवान थे 1 धनी व्यक्ति के घर में आई तो चोरी तैयार थे डाका मारने के हैं और उनका भाव था न हो जाए अंधेरा होगा जम जाएंगे तो उनने अपने 1 साथी को भेजा देकर आओ क्या कर रहा है वो लेकर आया उसने कहा अभी वो भोजन खा रहे हैं के बाद सोने जायेंगे। तो जो चोर थे वो घर से थोड़ी दूरी पर बैठ कर देख रहे थे, कब घर की बत्ती बुझेगी हम जाएंगे पर वो सब देख रहे थे ध्यान से सब को नींद आ गई। इतने दिन की कृपा से सबको नींद आ गई और चोरी करने की वजह सब सो गए। फिर सुबह के समय जब उन्होंने चिड़ियों की आवाज सुनी की सब होने, हमे तो काल को डाका मारना था सबको नींद कैसे आ गई तो सब 1 दूसरे को दोष देने लगे है तुम पहले सो गए थे तो फिर हम सो सब झगड़ा करने लगे। तो चोरो के नेता नेता ने कहा अच्छा झगड़ा करने की जरूरत नहीं है, हमने दुर्गा जी की पूजा ठीक नहीं की थी, दुर्गा जी की पूजा करके जायेंगे मे सफलता मिलेगी। तो सब गए दुर्गाजी के सेवा की और सारे चोर अगली रात को फिर पहुंच गये इस राजा के साथ की वो नेतन के गहनों को चुरायेंगे पर दूसरी राह जब वह पहुंचे उन्होंने देखा वहां तो बड़े बड़े सिपाही खड़े नितिन के घर के सामने बड़े सिपाही खड़े थे, बड़े बड़े हथियारों के साथ छोड़ना नीति सूचना कैसे पहुँच गई की हम आज रात को आयेंगे उन्हें लूटने के लिए ये सिपाही क्यों खड़े हैं उधर। तो किसी ने कहा कोई बड़ा व्यक्ति आया वो दुध को मिलने के लिए अपने साथ अपनी फौज लाया है। तो दूसरी रात उनका प्लान था चोरी करने का। बड़े बड़े चौकीदारों को देखा तो सब डर गए और कहा चोरी नहीं कर सकते। तो सब वापस चले गए। फिर उन्होंने गुजुर्ग जी की और पूजा की और फिर तीसरी दिन रात को फिर आये तीसरी रात के लिए चोरी करने आये तो इतनी तेजी के साथ आंधी तूफान आ रहा था कि सारे चोर अंधे बन गए, सब अंधे बन गए और कोई कोई खड्डे में गिर गया। कई लोग मच्छर, काटने, लगे, सब खड़े में गए। इंदर ने इतनी तेजी से बारिश बरसने लगी ये कुछ कर नहीं पाए। जब तीसरी रात में इनकी योजना असफल रही तो चोरों का जब ब्राहमण था, गुरु उसे समझ आ गए। यह नीति कोई साधारण व्यक्ति नहीं है। इसके बाद जरूर कोई दिव्य शक्ति है जिसके कारण 3 रात हमारी योजना सफल नहीं हो। तो ये चोरों का गुरु भगवान नितेनंदाकेपास गये और उन्हों नंदा से कहा मैं हूँ ब्राह्मण नाम का धन्धा है चोरी करना। मैं अपने साथियों के साथ तुम्हारे गहनों को चोरी करने वाला था। पहली रात जब हम गए चोरी करने के लिए हम ने आपके डाका, हमें नींद आ गई। दूसरी रात जब हम गये आपके घर में चोरी करने के लिए, तो हमें बड़े बड़े सिपाई दिखे जिन्हें देखकर हम डर गए। और तीसरी रात जब हम गए चोरी करने के लिए, तो इतनी तेजी से आंधी आई कि हम सब अंधे बन गए। बंदे बनकर हम सब खड्डे में गिर गए। तो हमने अपराध किया है। हम आपकी शरणगत होना चाहते हैं, हमें माफ कर। 2 जब उन्होंने माफी मांगी, ने ने कहा, मैं तुम्हारे सब पापों को स्वीकार करने को तैयार हूँ। पर 1 शर्त पर तुम फिर से पाप करना बंद कर। 2 तो फिर सब छोड़ क्या बन गये? क्या बन गए, हम भक्त बन गए। भगवान नीतिनं्दा बड़े दयालु हैं और उनकी कृपा से असली सफलता प्राप्त हो सकती है। पापाजी ने नीतिनंदाजी के अविभावसीटीकेदिवस में ये 1 भजन गाया था जिसकी रचना लोचनदा ठाकुर ने की है। लोचनदाजठाकुर और और भगवान लोचा ठाकुर और निरोतंदाजसेअमीर रचना में यही स्वीकार किया क्या चेतन वा हो, कौन है, भगवान है वानी, दिन कौन है? उनके साथी तो पापा जी ने ही दिन के दिल पर इसकी व्याख्या दी। पर करना बहुत दूर जाना। सारा सारा श्रोमनी कहते हैं आप अत्यंत दयालु हो करूणा खोलना का मतलब क्या होता है? आप अत्यंत दयालु हो और नेता गोरचन्द्र दोनो ही दयालु हो, सब अवतारों में आप ही हो। सबसे दयालु और आपकी शहर केवल आनंद कांदा मतलब की। आपकी शरण जो लेगा वो क्या अनुभव करेगा आनंद आनंद तो आपको असली आनंद चाहिए। तो ये है मार, ये है कलयुग का उपाय करें। 2 से राजन का महागुना दोष दोष है माँ और भगवान किस लिए उधार ले, इसके लिए सारे इस कर। बंदरों में हम बोने ताय की पूजा करते हैं। चेतन विश्चास मेरे भाई, चेतन गुणगान करो और अगर आप महा प्रभु की शरण लेना चाहते हो, अगर आप निरदंद शरण लेना चाहते हो। विषयाचार्य ये जो भौतिक आकर्षण हैं वो हमें त्यागना पड़ेगा। कई बार हम कहते हैं गुरूजी दया करो। तो पापाजी ने कहा गुरु साधु शासा आपको उपाय दे सकता है, पर उपाय का पालन करोगे तो फिर लाभ मिलेगा। जैसे कि 1 कुएं के नीचे आदमी गिर गया है तो आप रस्सी नीचे फेंक सकते। हो, अगर वो व्यक्ति रस्सी को पकड़ेगा नहीं तो ऊपर कैसे आएगा? तो चेतन माप व नितिन ने हमें उपाय दिया है, विषय है चारिया अगर हम उनकी शरण लें, ये जो विष है, जो भौतिक आकर्षण है, जो भौतिक कार्य है, उसे हमें बचना चाहे, यह नहीं महा प्रभु, नीति नंदा इतने दयालु है हमारे घर काम करने जाए। विशा चारिया हृदय को हमने शूल बनाना है। देखो अरे भाई ही ना पाश बाकी जुड़े विदारे सुने कदम आपने पशुओं का भी उदार या चेतन मा पभु झारखण्ड जंगल से जा रहे थे, उन्होंने पशुयों को नचाया और भाग्य बनाया। तो आप जो हो पशु प्रकार की बुद्धि के लोगों को भी उधार कर सकते हो। और प्रापा ने क्या किया यही किया पशु प्रकार की बुद्धि के लोगों का उधार गया। पापा कहते थे लोगों को कृष्ण भक्ति में जोड़ना इतना आसान काम नहीं है की विषया कहा है। पापा ने 1 उदाहरण दिया अगर आपने घोड़े को दवाई खिलानी है को पता 6 आदमियों की आवश्यकता रहती है आपने कभी सोचा घोड़े को अगर दवाई खिलानी है। 4 तो आदमी चाहिए आपको, 1 आदमी, उसके 1 पैर को पकड़े घोड़ा नेता पं से मारा गा, 4 आदमी तो 4 पैरों को पकड़ते हैं, पांचवा आदमी मुंह को पकड़ता है और छठे आदमी मुँह में दवाई डालता है, तो 1 घोड़े को दवाई देने के लिए 6 आदमियों की जरूरत है साधारण मुनेश के लिए, तो 1 आदमी चलेगा। प्रापर जी ने उदाहरण दिया यह कहने के लिए कि आज कलियुग में लोगों को कृष्ण भक्त बनाना बहुत कठिन है, इतना खून जाता है, पर हमें करना है, चेतन महाप्रभु और नित्यनंद वो प्रकट हुए है, इसलिए इसलिए कि लोगों का उधार हो, उन्हें सब अवतारों में सबसे दयालु अवतार माना जाता है। तो भगवान नीति नंदा स्वयं भगवान है, बहरामजी के अवतार हैं, लक्ष्मण जी के अवतार हैं और चेतन मा परपुनितिनंदा दोनों पकड़ हुए थे। सो का उदार करने के लिए हमें आज के शुभ अवसर पर क्या करना चाहिए भगवान नितिन के शरणागत होकर उनसे यह प्रार्थना करनी चाहिए हे हृदय की मैया दूर हो जाए और नितिन करे, विषय या बोधिआकर्त्यागोगे तो असली कृष्ण प्रेम प्राप्त होगा। तो चेतन महपूरनितनंदा की कृपा से पापा जी ने हमें सन्देश दिया है और सारे विश्व में लोग भगवान नीतननंदाकी उपासना कर ले। महा प्रभु की विश्वनी थी, फिर भी उसे आज विश्व में हरिनाम पहुंचा तो नित्यनंद और हरिदास भगवान चेतन ये नहीं देखा कि किसे देना चाहिए, किसे नहीं देना चाहिए जो लोग हमने आपको पढ़ा, उसमें क्या कहा था कि चाहे उन्होंने ये नहीं देखा कौन की उन्होंने सबको बिना भेदभाव के हरी नाम का परिचय करवाया जैसे बारिश जब बरसती है, सागर में भी बरसती है, पृथ्वी पर भी भगवान चेतना अत्यंत यादव है, बिना भेद भाव के उन्होंने नाम का प्रचार क्या हमें सीखा करना चाहिए और आगे प्रचार करना चाहिए आप लोगों ने क्या कहा यारेदाकोसायको ये होना चाहिए हमारा भाव, हाय, कृष्णा, रामा, रामा, रे।
More from PRASAD

Rare Pastimes & Timeless Lessons of Guru Mahārāja | Stories Every Disciple Should Hear

ISKCON Legends- pure devotees meet-HH Jayapataka Swami, HH Gopal Krishna Goswami, HH Radhanath Swami

Jagannātha Ratha-yātrā Through Śrīla Prabhupāda's Mercy | 29 April 2006 | Nairobi, Kenya

Lord Jagannātha's Appearance Pastime | 21.07.2019 | ISKCON Calgary | Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

The Ācārya Teaches by His Own ExampleGuṇḍicā Mārjana by Guru Mahārāja #shorts

Guṇḍicā Mārjana – Lord Jagannātha's Pastime | 21.7.2019 | ISKCON Calgary |Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

H.H. Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī Mahārāja - Exemplary Sādhana and Deity Worship # shorts

भगवान की कृपा कैसे प्राप्त होगी ? | 11 Jan 2014 | Punjabi Bagh | Srila Gopal Krishna Goswami

Material Education vs Spiritual Education | Srila Gopal Krishna Goswami #shorts

