भक्तों का संग भक्ति का वरदान है | CC M 22.128 | Oct 11, 2021 | Śrīla Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī

In this devotional lecture, Śrīla Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī emphasizes that the company of devotees (satsang) is a divine gift that nurtures bhakti. He explains that chanting the holy names, studying Srimad‑Bhagavatam and other Vedic scriptures, and following the instructions of renounced devotees are essential means to receive Krishna’s grace. The speaker highlights the practice of distributing holy books as a concrete way to share that grace, likening it to pouring water from a full pot into empty vessels. Historical anecdotes of kings and great devotees illustrate how compassion from the Supreme Lord inspires selfless service. The lecture also addresses contemporary realities: during the pandemic many gatherings moved to Zoom, where only a fraction of participants are visible, yet the spirit of personal interaction remains valuable. He calls attention to the 125th anniversary of Srila Prabhupada, urging all devotees to contribute special efforts that please the guru‑parampara. Throughout, the talk balances practical advice—maintaining life‑balance through reading and distribution—with heartfelt encouragement for newcomers, while the speaker candidly mentions his own fatigue, underscoring sincere dedication despite personal weariness.
Chapters
हम भबतेवाजकुलिवार से भवतेवावामेहसेवा, हम मबतेवाजहसेa या श्ीनीकृशन
रेायेशहरेरावे।
आप सब भक्तों का हार्दिक स्वागत यह प्रोग्राम किया था इस शिक्षा के साथ छायगाीडबोडी इधर आए पर आज का दिन सबसे अच्छा दिन नहीं था। 1 तो बॉम्बे बंद बार वर्किंग में है आप आए और आपका हानि स्वागत आप सब कहा हम 1 बड़ा रस लोग देखे, हम सब ने सुना होगा यह मुझे नहीं लगा। hari tis sadusngaamkesn sonmधuरासन murti वाली मूर्ति श्रधा परिचित हो कोन कोन परिचित है। और कितने भक्तों से कंस किया मेरे पास किताब odisha न इसाई फेद ाnsanहाँकहाजारहा है हमें भक्तों की संग, भगवान के पुवितर नाम का उचारण, श्रीमन भगुतमगेशकावनम और मत्सामेलऔरभगवान के विग्रह की उपासना करो श्रद्धा के साथ और आधा देश कौन दे रहे है? कौन दे रहे हे कौन? किसे दे रहे हैं छेमाजातेहस्वयं भगवान श्री कृष्ण चेतना राधाकृष्ण राधा कृष्णा ने satngsवamiूभाई उस मे परसराजावहामशा राज्य का शासन करने थे। उनकी रुची नहीं थी, उनकी रूची थी वहाँ के साथ यात्रा करने। तो पहले स्वामी ने उपने नौकरी के आगे और आप लोगों के पास भी पहुंचे, क्योंकि मैं उन में थोड़ी देर बाद नौकरी पहले उन्होंने ुषणभेजीानको मैं बीमार हूँ, इसलिए ऑफिस में नहीं आता। और राजा ने 1 महीना रहा। रूस ने अपने ड्रॉप को भेज दिया। वो जाके देखो नाथन को बीमारी है। आजकल तो कई के घर आना। चाह ने प पूछते हो कौन है मेरा दरवाजा नहीं खोलना चाहे घडी नहीं बुझा उन्दिन में यह सुविधा नहीं थी सीधे अंदर चले आए है ने
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ब्राहमणों के साथ बैठकर क्या कर रहे थे, क्या कर रहे थे भागवत का अध्ययन? राजा को कहा देने आपको साधन ठीक है। वो तो ग्रामीणों के साथ बैठकर भागवत का अध्ययन कर रहा था। राजा ने कहा बुलाओ इसे सनातन गए राजा को प्रणाम किया। राजा ने कहा ला भाई लापरवाह था, अभी नौकरी त्या कर चले गया। तुम उसकी नकल कर। तुम दोनो जाओगे तुम्हें कैसे युद्ध करने जाऊंगा। दूसरे राज इन पर बड़ा डिपेंडेड था। e e रocीलीहैराजा ने हा दा दर से जेल में साधन बड़े मूलों से जेल से निकले के भाई ने नौकरी के आगे उनके बाद इतने सोने के से के थे ही नाम भर गई थी ने बाटा और कोई ढंग से साधन निकले धनाधन छोट होकर गाएगा पढ़ना। नाश्ते में 1 होटल जैसे स्थान में रुके थे। ये होल्डर का मालिक था। उनके पास 1 जोशी था वह नारा लगा लेता था। ये व्यक्ति यात्री की धनी है और धनी होता था। उसको लूटते थे। रात को तो खुल के मालिक को पता चला था। यह बड़ा धनी याद ली है। बड़े ध्यान से उनकी देखभाल कर रहा था। ना का राजनीतिक कार्यों में पूरा गहरा अभ्यास हो समझ गए जरूर उसे कुछ चाहिए मे कोई आकर आपकी हो तारीफ करे आप को शक होता है। तो नाथ ने पूछा उनके सेवक इशान से कितना धन तुमबाद इशान ने खाने साथ थे सना पहुंचे हम ना थे शेखर आगे जाकर भयोंको शिक्षा ली प्रयाग में और सार रूप में इस लुक में प्रस्तुत किया है। 5 आवश्यक की मैंने किया है। ताली संगत अभी 78 महीने के लिए आपके। मंदिर सब बंद थे और सब लॉन्ग डाउन था और ऑनलाइन में था। आपने भक्त ंगी संगत को मिस किया या नहीं? आपको लगा कि वक्त की थी। क्या लगा आपको इसके लिए सब तरसे कब खुलेगा हमारा मन ली। और ये जो संगत है यह आप 3 रूपों से प्राप्त कर सकते हो। 1 है उनकी संगत का से ज्यादा एडवांस है। 1 है उनकी संगत आपके बराबर है। तीसरा, उनकी संगत आप से हम ज्ञान रखते हैं। द मुनी इस विषय की चर्चा करते हैं कि श्रीमन चौदेसमेंनालुमनी कहते हैं। अगर आप सौभाग्य हो कि आप अपने से ज्यादा एडवांस भक्तों की संगत मिल है। आपको क्या करना चाहिए? क्या? ै we should be happy, then if you is so, she somadi as we क्या krna frenship frenship spent mean we walked together to preach mission। अगर आपको हे जिसे आप मकान हो, उसका क्या करते हो, दया करते हो। इसलिए हमलोग दया का भाव प्रगट कर देंगे से पुकार। आप जब हरी नाम में जाते हो, रसों को बांट ले, उसका मूल उद्देश्य क्या है? आप दूसरों को भी आगे शाली बनाना चाहते है। क्या साधना शास की माता देववती वहां तक को पता था मेरा बेटा हमारे गाबसारहैतोउन्होंने पूछा, यह बताओ कि मुझे कैसे बौधिक संघर्ष से का हो ली। जगत में क्या है संघर्ष संघर्ष las log a human life is a bad bargin भौतिक देह है बुरा सा सौदा है आप चाहते नहीं, रोग पीड़ा चाहते हो हम को बीमार होना ही पड़ा पराव पर जाते है पूरा होना। तो बेटे ने कहा कि माता साधु संगत की आवश्यकता है। काला ने आगे पूछा साधु के क्या लक्षण फिर लक्षण मत साधु में। इसलिए आप सब योगी सभा में कम्यूनिकेशन भक्त हो। क्यूंकि घर डाकर भगवान की सेवा करे। आप सब का अध्यन भाग या है? आ गया है। भगवान ने आपको सेवा को मंगा लिया। बाबा जी कहते थे you can come ispreslivnnesls by the lord। ये भगवान की asemkृpाहआपसबपर भगवान ने आपको भक्ति योग में जोड़ा है इसका लावा और आप लोग 4 भी करते हो फुकदिशिजमेकरते हो पर सहयोग देते हो। ये कहा जाता है जिस घर में भार का गुणगान होता है वह न की a का है जो गए थे bra kr्crmaababigo program at a a e a d, e arioudirkirtnisna s en in body जो हम गुलंगान करते हो माँ का वहाँ क्या होता है कोई कोई साल संघ में रहोगे, कोई साल संघ में रहने का प्रयास करना चाहिए। जो अंधाते वहाँ भी आपको साधु संग मिलता है में घर में असर घरते हो सभी सानस मिलता है वहां प्रचार में जाते हो कामयाब लोगों को संसद मिलता है तो साधन है भक्ति में जुड़ने के 1 है भक्त साधु दूसरा है क्या है रंज साधु का है तो सा साल है रंज साधु का निर्णय किया है। चैन होली नही वो बक्सालुकाक्या देश है चैन न होला अगर आपका भाग्य हो को ठीक से संगत मिले फिर हमको ठीक उद्देश्य मिलता है। वो क्या है धमाके नामा, गर्दन का नाम की महिमा inाभinाiणाएव भारत में अनेक मंच को सुना। आपने हम पले थे। इस वाद वातरणमेंक्याभगवान की है सामान जब आप इस फन में आते हो, कुछ और सुनते हो, eshrarmrihna उसी प्रकार में आते हो। आप क्या सुनते हो? canhrisanbehappy hzrmntelmntpurn केतन देव आमेर से कितने वक्त ने इस लोग को कॉन्स्ट की बताएगा दोषी दोष है। पर वन में हम चिंता कृष्ण के दिन राजा पूर्ण, शोधने नाथमाबनाबनाावान के नाम है। चिंतामन जैसे ग्यास ज्ञान से जो मिलेगा खतावउडाएगाये हरीनाम है, उपाय। यह हरयाना में हमें यूची बनानी चाहिए। हरी नाम का उचारण करना चाहि। जितने ध्यान से लोगे उस देख लाभ होगा। वह लगा में प्रकट होते हैं। कैसे अपने नामों के द्वारा खाली खाली नाम रा। इस ना। तो आप सब आराम करते हो वार लक्ष्य के। और है। हमारा लक्ष्य होना चाहिए। वरना में रूची बढ़ाए सजवा शास्त्र में रूची बढ़ाये सेवा का भाव भाव और मृत को बढाए भगवान किसे पैदल गॉड लाइक। या हम भगवान प्रसन्न होते हैं। जो वो देखते हैं कि भक्तों में ममता का भाव बढ़ रहा है। यह भगवान देखते हैं। ओह। हम कहाँ है? बढ़ते जा रहा ै दुखी होते है। जिसे मा बाबू ने कहा ना। हमारी नंबर तुम सदा हरी का नाम लेना चाहते। तो क्या करना चाहिए? हमारा प्रयास होना चाहिए भाव के सेवा का भाव सब के प्रति। यह नहीं, हमारा होकम चलेगा। सब मेरे इशारे से चलो। ये भाव है। दास रंदासदासआपसबके दास बनोगे तो ज्यादा कृपा मिलेगी। और हाँ गराफसूलसेोहमने मालिक बनना। पक्ति में आगे नहीं बढ़ सका तो हारी नाम का उचारण करना चाहिए। दस्ता अपराध है, उनसे बढ़ना चाहिए। पारिणाम का ध्यान से जॉब करेंगे क्या लगा हो? क्या लाभ होगा, क्या लाभ होगा मैं और आनंद बूदी आपको असली आनंदन मिलेगा बौधिक। समाज में युआन क्या है नकली। आनंद प्रधान कहते हैं जान हसनी आनंद कैसे बाप प्रयास करो हरिनाम में रूचि बढे नाम कोपसावधानीसेकरो और राम के प्रति हमेशा हरिनाम के विषय में जितना 2 उतना ही कम है। आपको ये नही लगेगा, हमने इतना ले लिया जो तना कम है। हमारे नाम रुचि पुरानी। आगे क्या कहते है भागवत भागवतम को सुना श्रीमद भागवत में क्या है? सब से उत्तम क्या योगी किसने दिया? प्याज देव ने रचना की थी। शासन के सार को प्रस्तुत किया था उन्हें। ने। कान में कुछ कमी रह गयी है। वो गए नारदमुनी के बाद उन्होंने क्या कहा? शुद्ध भक्ति भरबलदो। इसके बा में आग का गान दिया।
रो
साहित्य का का है। उस में पर्स पर रहा था। से प्र ने का वन srimad babdamanchatnita in every on home sem हम चाते हैं क्या रे को इस ग्रंथ में इतनी शर्तiहै अबकी का दर्शन रोल भी लाभ होगा। अगर पढ़ोगे तो हम से कितने भक्तों के भगुदमकीसेटहैबाद नहीं है। सर। तो आप जानते हो कि जब पुर मा हमने मेरा थान किया था, हमने किया था, मेरा थान है। सब ने कितने सेल बाटे कितने आपको जानकर खुशी होगी। पूरे। पूरे हिंदुस्तान में 25 हजार से भरे थे, 25 हजार लोगों के घर में श्रम पर भारत में कितने घर है। 25 हजार ज्यादा ज्यादा। तो मतलब ये कि अभी भी हमने बहुत प्रयास करना है। बाबा जी का उद्देश्य था pravrseeveryhous ev srीमलभaगtmsसबसे उत्तम ज्ञान है। आपको खुद भी पढ़ना चाहे आप कितने भगतो रोज घर में पढ़ते हो। यह 1 स्लो हो। लगता है कि माता ज्यादा पढ़ती है जो पढना या लाभ होगा। जिंदगी कितने लोग अगली भाव आप से के निर्णय कर लो। यह आपके घर वेबसाइट है। आप 1 श्लोक, कम से कम रूट पड़ोगे 1 स्लो। इसके साथ प्रिया के साथ पूरा नाम है। भगवत में 18 हजार श्लोक है। रेशमा भागोतम सुन रहे थे से में, कहते हैं हालांकि मैंने 1 हफ्ते से कुछ खाया नहीं पिया ने आनंद ला है। भागा सुनकर भूख प्यास क्या गया, फिर मिट गई है। व बोग है नहीं, क्योंकि भगत द्वारा है प्रयास करो पढने के लिए। और दूसरों को भी बार की बड़ी जिम्मेदारी है। आगे कहा है मतला में जागे रहो महंगा इसका मतलब क्या? इसका मतलब ये है उसका मतलब यह है कि जहाँ भी तुम रहो, उनसान को वृद्दावन बना। 2 जैसे कि प्रभा जी गए थे मेरे का। तो जब वो लौटे अपने विदेशी शो के साथ, तो ब्रज के मिराज मेयर ने बहुत बड़ा कार्यक्रम अरेंज किया और स्वागत करते हुए उन्होंने कहा भारतीय स्वामी अकिनस्वामीवश्मे वृंदावन को ले तो वृंदावन में मंसार क्या करो? लोग काम धंधा, छोड़कर े या बम्बे में ही रह सकते हो। केवल नाम बढ़ाओ में। आगे आगे मूर्ति मूर्ती पूजा, मूर्ती पूजा, मूर्ती पूजा। भगवान प्रकट होते हैं। अपने की बात है। देश में कई मायावादी है। कहीं समाज है। वो क्या कहते हैं भगवान रूप है ही नहीं। 1 बार व्यक्ति मुझे मिलने आया था। तुम भगवान का है लगा। स्वामी जी में आया समाज हूँ। मैं मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं करता। अगर आप सोचते हो मायावादी विदेश में। आपके देश में भी बहुत है। भगवान प्रगट है। आपने। आज जवगराकेरपइजिगरा भवान में अंतर है, है आपको श्रद्धा से, हादर से भगवान की उपासना करने। भान। उनके नाम में कोई अंतर नही। तो हमारे ने आरजिया में उपस्थित है। साल स में अनेक कथा है। साक्षी गोपाल की कथा आप देखते हो। देश पर गोपाल विरान ने अपने भक्त की बादंदपुरीकी कथा में देते हो कि भगवान ने अन पुरी कुख्या का सार। भगवान ने उसे आदेश दिया। वे गर्मी लगती है। चंदन चंदन भगवान, गा चंदन पांसरा तक मन ला या गोपी चुरा। क्यों उन दिन में मुसलमान चुंगी वाले थे। भगवान जाते नहीं थे, दिन हो जाए भगवान प्रगढ़ता हमें यह नहीं सोचना चाहिए। यह कल्पना है। तो चेतन बाद ने बड़े गहराई के साथ लादगसवामीकदीथी और फिर सार रूप में इन 5 विषयों की चर्चा की। आप सब इसका लाभ उठाइए। और आ आज के इस कार्यक्रम का 1 गो देश यह था कि आप में आपका भार चाहते थे। आप सब ने भागवत होंगे मै धन में सहयोग दिया, पर कइयों ने सहयोग नहीं पी दिया। सच बात है। और कइयों ने प। हा, हम और भी प्रचार कर सकते हैं। तो वो मौका अभी है। अगर आप सब बचा हो तो भागवत। हमसे अभी भी थोड़े बचे हैं। अपने गाँव में इस दान को लाइबरिडमेंपुचार सकते हो। क्या ख्याल है। अच्छा आइडिया है। हम सोचे कि मेरेतन हो गया वे 1 साथ कुछ नहीं करेंगे, वो ही जल्द 1 और मेरेतन आने वाला है। कौन सा मेतन। कई बार लोग कहते हैं आपके इस कर में बहुत काम करना पड़ता है। अभी भगवा, मेरता मेरितानमेरितन का मतलब क्या है? यह तो अंग्रेजी शब्द है। हम अंतराश्यशब्द ले लीपिंग ले ईडिंग्ि। तो मैं तो कहता हूं, प्रभाजी की कृपा है। हमें सेहमें जोड़कर रखते हैं idlbreniswhat आइडल ब्रीन, रखते, गल, बी चार्ज होते। यह प्रॉबाजी की कृपा है। हमें कुछ न कुछ सेवा में जोड़ दें। आप सब इस सेवा में जुडी और ग्रंथों को मार दिया। आप सब का शुकिया देवी कृष्णा
हरे का, जिसके पास हाथ हैं। 1 बार हाथ उठाओ जो सो रहा है, पता चलेगा। कम से कम बोलो हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे। बहुत बहुत धन्यवाद। परम पूज्य गोपाल कृष्ण स्वामी महाराज को जिन्होंने कम समय में भक्ति के सर को हम लोगों को बताया। और अंत में उन्होंने पुस्तक वितरण पर जोर दिया। प्रुप चाहते थे, इन पुस्तकों का वितरण हो। उन्होंने कहा कि जब तक से इन पुस्तकों का तुम वितरण करोगे, मैं जीवित रहूँगा तो कोई चाहता है, प्रोप मर जाए, प्रपा जीवित रहे न। तो इसका वितरण करो प्रऊपाजी। 4 चीज कहे थे, जैसे 4 एगलोडेप्रिंसिपल है, वैसे ही 4 चीज कहे थे, 1 कहे थे? books are the basis, प्यूरिटी फोर्स यूटिलिटी और प्रिंसिपल एंड पीसिंग एसेंस। तो उन्होंने कहा कि बok्सaरदeबेsis, ये जो आधार है, हमारे भक्ति का औय शास्त्र है। प्रोपज। बहुत कठिन। परिश्रम के इन पुस्तकों को लिखने में, रचना करने में मैं ज्यादा समय नहीं लूंगा। केवल 4 में से 1 ही बात पर बात करूँगा। और वह है भूख। तारली बेस्टेस, ये बिल्डिंग बना हुआ है। ऊपर सब कुछ दिखाई पड़ रहा है। लेकिन ये बिल्डिंग स्थिर है। क्योंकि इसका ने जो है, वह मजबूत है। यदि न्यू नहीं रहेगा तो क्या बिल्डिंग रहेगा? हा याना बोलो, ना कम से कम हैं, तो हूकारी भरो, कम से कम तो न्यू बहुत जरूरी है। वैसे ही ये पुस्तक जो हैं, इन न्य देते हैं। भक्तों के भक्ति के लिए। यदि हम इन ग्रंथों का जो जितनी मात्रा में अध्ययन करेगा, उसका भक्ति उतना ही प्रोड होगा, उतना ही स्ट्रॉंग होगा। और वह व्यक्ति भगवान की कृपा को आसानी से समझ सकता है। बरहपाली के ग्रंथों से तो बांटना बहुत अच्छा है, लेकिन उससे भी अच्छा है। उसका अध्ययन करना पढ़ना बहुत जरूरी है। यदि पढ़ेंगे और बांटेंगे, तब इसका आनंद कुछ और ही होगा। और कल बांटते जाएंगे। बाटदे अपने नहीं पढ़ेंगे। तो ऐसे से ही बिल्डिंग हमारा बनेगा। जिसमें न्यू न हो तो आज है। और कल गिर जाएगा तो नी बहुत जरूरी है। बिल्डिंग के नींव को मजबूत करना जरूरी है। पेड का जड़ दिखाई नहीं पड़ता है। और सब कुछ दिखाई पड़ता है। जिस पेड़ का जड़ जितना मजबूत होता है, वह पेड़ उतने समय तक जीवित रहता है। तो हम लोगों को चाहिए प्रभु पाजी, ग्रंथों का पठन करें और दूसरों को बढ़ाए, दूसरों को पढ़ाने के लिए उनको उपलब्ध कराए यानी बांटें। इस प्रकार से हमारी भक्ति प्रौढ़ होगी।
नहीं।
तो प्रभु पाजी कहते हैं कि डिवोशन विदाउट फिलोसॉफी सेंटिमेंट। यदि हम इन ग्रंथों का अध्ययन नहीं करेंगे, फिलोसॉफी को नहीं समझेंगे। तो हमारी भक्ति जो है वो सेंटिमेंट, पर बालू के न्यू पर बिल्डिंग बनाए है, हैं वो सेंटीमेंट है, डिवोशन विदाउट फिलोसॉफी, इस सेंटीमेंट और फिलोसॉफी विदाउट रोशन। सिम्प्ली मेंटल स्पेकुलेशन। तो भक्ति करना है। तो फिलोसॉफी को जानना चाहिए। मा प्रभु कहते हैं सिद्धांत बोलिया चिते ना करो, आलस सिद्धांत को समझना चाहिए। और आज कल प्रचार करना पहले से आसान है। जितना हम ग्रंथों का अध्ययन करेंगे उतना ही बल मिलेगा। हमको प्रभाग बुक, सार दिवसीस, प्यूरिटी फोर्स, पुस्तकों का अध्ययन करेंगे तो पता चलेगा हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। 4 नियम का पालन 16 मलाका जब अच्छा तरह से साधना भक्ति करना मंगलार्तियाना, क्लास ग्रुप हो जाय। सब ज बताया गया है तो उससे क्या होता है कि बल प्राप्त होता है। तो प्रचार में बल की आवश्यकता है। शारीरिक बल, मानसिक बल वाणी का बल जो शुद्ध भक्त होते है। यदि कुछ न भी बोलते हो, कुछ न बोल रहे हैं, बस पड़े हुए हैं, लेकिन वह शुद्ध भक्त हैं, कुछ न भी बोलते हो। लेकिन यदि वे बोल देते हैं
तो
वह जो उनके द्वारा कहा गया, जो बात है, वो भगवान उसको अपलोड कर देते हैं। तो शास्त्र हो जाता है। तो प्रभुपाद जी हम लोगों को बताते हैं। चाहे गोपाल केशव बता रहे थे, यह शास्त्र का बात है। और वह है इन पुस्तकों का। हम लोग वितरण करें। लेकिन उससे पहले अध्ययन भी कर ले। प्रभु पाज बड़े दुखी थे कि भक्त लोग बहुत पुस्तक वितरण कर रहे हैं, लेकिन पढ़ नहीं रहे हैं। तो बड़े दुखी थे। उन्होंने पत्र लिखा कि मैं इतना कठिन परिश्रम किया। इन पुस्तकों का रचना करने में तुम पढ़ नहीं रहे हो। जब पढेंगे तब वास्तव में भगवान के सब चीजों को समझ सकते हैं। और भगवान के समस्त चीजों में से 1 चीज है, वो है भगवान का कृपा कृपा। 1 ऐसा वस्तु है जो कि सबके हृदय को जीत लेता है। कृपा से पहले हम लोग जब प्रचार करते थे तो बतलाना पड़ता था कि ये भौतिक संसार जो है, दुखालय है। बहुतिक संसार में क्या क्या दुख है। बतलाना पड़ता था। अब यह बताने की जरूरत नहीं है, न करुणा बतला दिया है। दुख क्या है? ज्यादा बताने की जरुरत नहीं है। तो अभी फील्ड जो है, बड़ा फरटाइल है। अध्ययन करें और उसका हम प्रचार करें। भगवान की कृपा को लोगों में बाटे। 1 बार क्या हुआ, करुणा की हिस्ट्री है। इटली में 1 व्यक्ति को करुणा हो गया था, वो हॉस्पिटल लाई भी था, 1 हफ्ता हॉस्पिटल में था, 1 हफ्ते के अंत में जब डिस्चार्ज हुआ तो उसका 8 लाख रुपए का भी लाय तो 8 लाख रुपए के बिल में कुछ तो दवा का था और मैक्सिमम जो बिल था वो ऑक्सीजन का था तकलीफ ही दाना ऑक्सीजन का ज्यादा ऑक्सीजन का बिल था। तो अब बिल देखते ही लगा रोने बहुत रो रहा था। तो डॉक्टर लोग सब समझे कि शायद गरीब बेचारा है, इतना पैसा नहीं पे कर पाएगा। तो अपने जो हॉस्पिटल के मालिक थे उसको बुलाया और बद बात करने लगे। तो मालिक ने कहा कोई बात नहीं आप इतना नहीं पे कर सकते हो तो आप कितना पे कर सकते हो। अब बताओ और हम माफ कर देंगे। तो अब व्यक्ति कहा कि मैं पैसा देखकर नहीं रो रहा हूँ, यदि मैं चाहूं तो ऐसा कोई हॉस्पिटल बनवा सकता हूँ। इतना मुझमें क्षमता है यह 8 लाख रुपया से नहीं मैं रो रहा हूँ या मुझे दुख हो रहा है। मुझे दुख तो इसलिए हो रहा है। यह देखकर मैं 8 दिन तक आपके हॉस्पिटल में था आपने ऑक्सीजन दिया है और उसका बिल आपने थमा दिया। मैं नाइंटी फाइव ईयर का हो गया हूँ। भगवान नाइंटी फाइव ईयर तक ऑक्सीजन दिए लेकिन 1 ही बिल नहीं थमाया। भगवान कितने दयालु है भगवान सही में दयालु है और भगवान उन्हीं पर दया करते हैं। जो लोग इस दया का वितरण करते
हैं
तो ये पुस्तक वितरण और कुछ नहीं है भगवान के दया का वितरण है उनका यह दया है भगवान कृपा कर करके आये हैं इन ग्रंथों को देने के लिए माया मुग्ध जीवेर, नाईं, श्रोता, ज्ञान जीव, कृपा कृष्ण कोयला, बेदपुरा जीवों, पर कृपा करके भगवान ने इन वैदिक शास्त्रों का संरचना किय है या हम लोग को दिया है। भगवान व्यास करके। तो भगवान की कृपा को बांटना है। तो पहले तो हम लोग कृपा को लें और तब बाटे जब होगा कृपा का तभी तो बाटेंगे न जम नहीं तो क्या बाटेंगे। तो कृपा प्राप्त करने के लिए ग्रंथों का अध्ययन करें, साधुओं के आदेश का पालन करें और उसको बांटे जब लोटा खाली रहे तो पानी भर सकते हो। बरार कहाँ से भरोगे। तो बांटोगे तो खाली होगा। तो और पढोगे तो ये ही काम करना है। पुस्तकों का अध्ययन करना और वितरण करना, डिस्ट्रीब्यूट बुक, डिस्ट्रीब्यूट बुक, डिस्ट्रीब्यूट बुक, रीड, बुक रीड, बुक रेडबुक का अध्ययन करो और वितरण करो। लाइफ बैलेंस रहेगा। भगवान का कृपा बांटोगे। तो हमेशा हम सब लोग भगवान की कृपा के क्षेत्र साया में रहेंगे और ये भगवान की कृपा के क्षत्र छाया में है, उसके दोनों हाथ में लड्डू है उसके लिए कोई तकलीफ नहीं है। तो प्रभुपाद का 100 पचीसवा बरस गाट है। सब लोग कुछ न कुछ करना चाहते हैं प्रभु पाजी के लिए स्पेशल। तो इसका अंजू के समस्त भक्तों को कुछ न कुछ स्पेशल करना चाहिए जिससे पर उपाधि प्रसन्न हो जिससे समारा प्रसन या हमारे गुरु वर्ग लोग प्रसन्न हो। और इस कान के सब लोग प्रसन्न होते हैं जो इन पुस्तकों का भक्त लोग वितरण करते हैं। पुस्तक वितरण मतलब भगवान की कृपा का वितरण। तो अब तो सोने का समय हो गया है। 9 बज गया है तो मैं ज्यादा नहीं बोलूंगा फिर भी मैं कहना चाहूँगा अच्छा लगा। आप लोग बहुत दिन के बाद कथा के लिए है। आजकल जूम पर दिखाई पड़ता है। 200 ढाई सौ लोग ठीक हैं लेकिन चेहरा नहीं दिखाई पड़ता। वो जूम में भी इतना ही बड़ा है। 20 पचीस लोग दिखाई पड़ते हैं और सब लोग अंदर रहते हैं तो हम लोग पर्सन हैं। फेस फेस अच्छा लगता है तो अच्छा लगा। मन तो कर रहा और बोलने का लेकिन सोने का भी मन कर रहा है। धन्यवाद हर
लोग।
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