रूप गोस्वामी और सनातन गोस्वामी का जीवन चरित्र | CC M1.184 | 5 Oct 2020 | Srila Gopal Krishna Goswami

यह भाग एक समूह चर्चा या व्याख्यान का है जिसमें भक्तों के बीच सेवा (सेवा) को परिणाम‑रहित रूप में करने, नए भक्तों के प्रशिक्षण एवं मेंटरशिप, अत्यधिक अपेक्षाओं से उत्पन्न अवसाद, आध्यात्मिक साहित्य (किताबों) का वितरण, नेतृत्व के गुण, और मन‑शरीर के संतुलन के लिए बाहरी अभ्यास (शो, एक्टिंग) की महत्ता पर बात की गई है। वक्ता यह रेखांकित करते हैं कि भगवान की कृपा के लिये प्रयास करना चाहिए, परिणाम की चिंता नहीं करनी चाहिए, और यदि अपेक्षा पूरी नहीं होती तो निराशा से बचने के लिये आत्म‑निरीक्षण और क़िर्तन जैसे साधन अपनाने चाहिए। साथ ही, प्रशिक्षण कार्यक्रमों की अवधि, लीडर‑शिप की भूमिका, और संसाधनों (किताबें, नकद) के न्यायसंगत वितरण के बारे में व्यावहारिक सुझाव दिए गए। अंत में, व्यक्तिगत विकास के लिये व्यस्त रहना, मन को माया से बचाना, और निरंतर अभ्यास के माध्यम से आध्यात्मिक प्रगति पर बल दिया गया।
Chapters
ओम नमो भगते वा, सुवा भगते वासुदेव, हम न भगते वाह। सुदेवा मजे लीला अध्याय 1 श्लोक न टी, टू न टी for me in
हिंदी के सौ 82 स
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कभी पास तथा उनके भारी और यह विचार विमर्श के बाद वहाँ से देश पतन ने छोटी किया 100 तिरासी के आयल रूसका लीला का ना से अनुवाद इस प्रकार सभी खास तथा शासन दोनों भाई आधी रात को वेश बदलकर सीजकरमहकरदर्शन फारोप्रथवकधरिक स्थापित से मिले। अब श्लोक संख्या 184
सारा दोई जाना जान ला
बुरा
गोचरे रूप चकारा भले का आरा तुमारे के बारे जन्म जल प्रभुरा गोचा रे रे जाना जिन पहुरा पुचा रहे तो हम देख पा रहे बुरा पुचारा रूप शक मरीका हरा चोमालेकीदिवारे के बारे में
नमस्कार ज
गुवा माताजी रहते शबदरजकdवेवीज
सूचना पी लोग महा गोचरे उपस्थिति है दोस्ती का आज सुना दोस्तो
आईटाआई है
आपके
यह स्टेशन पर पोर्ट
अनुवाद कहा की श्री हू तथा हरिदास ठाकुर ने श्री चंद लोगो को बताया
की
2 भक्त श्री तथा समान उनका दर्शन करने के लिए आये हैं। अब के सागर मलिंद नाम का, सनातन गोस्वामी का और अभी फास्ट नाम का रूप गोस्वामी का। वे मुसलमान राजा की नौकरी ने इसी नाम से जाने लगे थे। अगर ये मुस्लिम नाम के सरकारी अधिकारी होने के कारण इन दोनों भाइयों ने विभिन्न मुसलमानी लीप रिवाज अपना।
निय everybody s wearing om mask everybody here, but i see everybody here, weding mask okay oh my gan sa gaand। चेतन मन s सविता मेन भूत ले स्वयं पकदममरधिहुबनदे हम श्री गुरु श्रीवतापदकमन स देव sदवेtmsduspakna हे कृष्णा करना 2 दिन बंदू जगत से हो पैसा हो गया गो शा बचा परिजन sreksnacatlan shri हरे कृष्ण हरे कृष्ण जा लगा तो चेतन के मजे लीरा के पहले अध्याय का अध्ययन कर रहे हैं। क्षेत्र चरदनविताउसीन भागों में बांटा हुआ है। लीला मजेलीलाऔरऔरक्ेत्र विला ग भवगान के शिक्षा लीलाओं का वर्णन है। वधलीला शुरू होती है 24 साल के बाद और पहले 6 साल जो भगवान लीलाएं की मध्यरीगामें आती है और फिर आगे जाकर बाकी के 8 साल क्या करता है। वो कहते हैं। तो इस अध्याय में हम देख रहे हैं कि चेतना वह वृंदावन की तरफ जा रहे हैं और हजारों व्यक्ति उनके साथ चल रहे हैं और उन्होंने स्वीकार की थी मुसलमान राजा की राजा नंदा हुसेन शाह राजा ने देखा कि जो आबादी है लगभग हिंदू है और वो मुसलमान राजा ने देखा ये जो खानदान है रूप सनातन का लोगो की बड़ी श्रद्धा है उनमें ये सारा दिन ये भाई भागवत का अध्ययन करते रहते थे। और 4 भाई थे बैंक। तो राजा ने पहले सूचना भेजी कि मैं चाहता हूँ कि तुम 2 भाई आकर में राज्य का शासन करो। और इन 2 भाइयों की रूचि बिल्कुल
नहीं थी,
उन्होंने इनकार कर दिया। राजा ने जबरदस्ती उन्हें जोड़ा उनके राज्य के साथ, तुम यहाँ देखे हो कि कितने केवी में के लिए आ रहे हैं, किस लिए हिंदू भाइयों को मिलने के लिए। 2 भाई थे उनके सनातन भगत और जुड़े हुए थे राजा की सेवा में। बाबू खुद ही राम के ले, जो बांग्लादेश में हैं, इन 2 भाइयों को मिले। तो राजा ने पूछा हिन 2 भाइयों से ये जो सन्यासी यात्रा कर रहा है, जिसके साथ हजारों लोग साथ में चल रहे हैं। ये कोई भगवान तो नहीं है? कोई खास अवतार तो नहीं है। तो 2 भाइयों को पता था राजा की बुद्धि और उन्हें डर था किसी प्रकार का अर्थ नहीं कर दे। तुम हो ने कहा नहीं नहीं, वो इतना व्यक्ति नहीं है और साथ थोड़े ही लोग जा रहे हैं। तो यहाँ हो। दास ने चेतन से कहा की 2 प्रसिद्ध भक्त हैं आपको मिलने के लिए, वो, उनका नाम क्या है? रूप और माँ को मिलने गए थे, वो की इच्छा नहीं थी सरकारी नौकरी करने में, तो वो महाप्रभु से पूछने गये। इससे पहले उन्होंने महाप्रभु को अनेक पत्र भी लिखे थे। महाप्रभु ने उनका जवाब नहीं दे। तो रूप और सनातन जैसे हमने कहा जबरदस्ती जुड़े थे राजा की सेवा में, जो रूप सनातन प्रणाम किया महाप्रभू को बड़े विनम्र भाव से मुँह में घास का पता रख कर उन्होंने पूछा हमारा क्या कर्तव्य होना चाहिए? माँ प्रभु ने 1 उदाहरण दिया भूमिका में उपयोग करते हैं। माँ ने कहा जिस प्रकार 1 विवाहित बड़ी सावधानी से पति की सेवा करती है और अंदर से सोचती है, कब मैं प्रेमी को जाकर मिलूंगी मिलूंगी तो उसी प्रकार तुम्हें कार्य करते जाओ जो नौकरी दी सरकार के, तो समझ गए की माँ आप लोगो की इच्छा है थोड़ी देर और उनकी सेवा की जाए नौकरी में रहे रूप गुस्सा ज्यादा देर नहीं रहे उनकी नौकरी में। रूपा नौकरी की आगे और अपने धन को बाटा किस रूप से धन की कभी नहीं थी उन्हें। क्योंकि राजा ने राजा इतना प्रसन्न था हिंदू भाइयों की सेवा में की उन्होंने, जितना धन चाहिए था उतना देते थे उन्हें। रूपगोस्वामी ने 50 प्रतिशत सम्पत्ति बाटी किससे ब्राहमण को 25 प्रतिशत, सम्पति पार्टी को 25 प्रतिशत रखा की आवश्यकता के लिए। तो रूप सनातन बड़े विनम् भाव से महा प्रभु को मिले और प्रणाम किया और कहा हम जो है जगह मदाई सी भी ज्यादा पतित हैं। आप भाषण सिद्धांत में देखते हो कि हर भक्त ये सोचता है, मैं सबसे विनम्र हूँ में से ज्यादा परसीद कोई है ही नहीं। भौतिक समाज में हम प्रयास करते हैं यह स्थापित करने के लिए। आम द, बेस्ट ऑन द ग्रेटेस्ट, आम नंबर न क्षेत्र में हम क्या सोचते हैं? हम तो सबसे ज्यादा है यह रूप और सनातन क्या कह रहे हैं? इस अध्याय में कह रहे है। हम जगह मलाई से भी ज्यादा प्रतीत है। बाई से ज्यादा प्रतीत कौन। तो ये था उनका भाव। तो जितने महाप्रभु ने समीर को वृंदावन भेजा था और उनके उनका भाग गया था। वृंदावन में जाकर उन स्थानों को खोजो। यहाँ के महा बापु ने अपने दि नीरा पकड़ते थे। और माँ बाबू ने 10 दिन के लिए प्रयाग में अध्यात्मिक शिक्षा दी थी। और ये कहा ग्रंथों की रक्षा करने के लिए और उन स्थानों को ढूंढो जहाँ के भगवान ने देवलीला और 1 और आदेश है मनो का निर्माण करो जो वृंदावन के मंदिर हैं। इन सब का निर्माण गो द्वारा होगा। तो स्वामी ज्यादा देर नहीं रुके। ये राजा की नौकरी में और वृंदावन गए। वहाँ प्रबु से उन्होंने शिक्षा प्राप्त की। माँ प्रभु ने कहा प्रबन्ध भगवान जी गुरु कृष्ण कप पाय होने में गुजरने के पश्चात उभाग्यशाली व्यक्ति है। इसे भक्ति का ज्ञान प्राप्त हो। महा ने इस प्रकार विधिक शिक्षा रेडी और न चले। वहाँ प्रभु के आदेश उनके जो भाई थे, सनातन उन्हें थोड़ी देर और नौकरी करनी। पड़ेगी क्यूंकि दोनों भाइयों ने सोचा हम दोनों नौकरी त्यागेंगे। तो राजा अवश्य ही क्रोधित होगा। तो पहले रूप सभी ने नौकरी त्याग। रूपा स्वामी सनातन के छोटे भाई थे और महा प्रभु के आदेश के अनुसार हो गए बंदानमेंाँउन्होंने ग्रंथो की रक्षा की और बंधों का निर्माण। तो सनातन गोस्वामी। थोड़ी देर बाद उन्होंने नौकरी तो नहीं थे आगे और राजा को सूचना भेजने भेजा कि मैं बीमार हूँ और ठीक होने पर मैं लौटूंगा नौकरी खेल रहे है। तो लगभग 1 महीना बीत गया था और राजा आगे जाना पढ़ना चाहता था उरिसा राजा से युद्ध करने के लिए। उस समय भारत के कई इलाकों का शासन मुसलमान राजा कर रहे थे और कई थाना हिंदू राजा जो सेनशा की इच्छा थी और ओडिशा को जाकर कंट्रोल में लाइन। तो मुकेशा आगे ही दुखी था, नौकरी त्याग दी थी। तो फिर उन्होंने कहा अपने डॉक्टर से जाओ देखो सनातन कितना बीमार है, सच्ची बीमार है या पाखंड कर रहा है। कभी मंदिर में भी भक्त होते है, जो करते है फिर शावी होकर ठीक हो जाते हैं। सेवा के समय बीमार हो जाते हैं। कहते हैं सेवा छोड़ सेवा। बसिंग। डॉक्टर जी आये सीधा कमरे में घुस गए। आजकल तो अगर आप किसी के घर जाना चाहो तो पहले घंटी बहाना पड़ता है। वो पूछे आप कौन हो? और फिर नहीं चाहिए आप, अन्दर आओ घंटी नहीं जाते। खैर, उन दिन में सुविधा नहीं थी। राजा डॉक्टर ने देखा बिल्कुल ठीक है, पूरा घर भगवत से भरा हुआ था। 30 ब्राहमणों के साथ दिन रात भगवत का अध्ययन हो रहा था। सो डॉक्टर ने बोला राजा से आपका सनातन तो बिल्कुल ठीक है। और वो तो दूसरे भक्तों के साथ बैठकर भागवत का अध्ययन कर रहा था। राजा ने कहा बुलाओ उसे मेरा। तो। सना ने राजा को आदेश दिया, प्रणाम किया। और राजा ने कहा तुम्हारा बड़ा छोटा भाई निकम्मा निकला है, तुम भी उसके जैसा बंद रहे हो। मैं अभी जाना, युद्ध करने। तुम लौटो अपनी नौकरी का अपनी जिम्मेदारी उठाओ। 1 भाई थे रेविन्यू सेकेटरी, व 1 भाई थे। प्रधानमंत्री जैसे दोनों की बड़ी ऊँची की सेवा थी। तो राजा ने कहा तुम जेल में जाओ, मेरा कहना मानने को तैयार नहीं हो होगा। इस जेल में। स्नान का अभ्यास था राजनीतिक कार्यों में जो सनातन ने। उसी समय सनातन को 1 पत्र मिला था उनके भाई से। स्वामी ने जब अपनी सम्पति बाटी तो उन्होंने लगभग 10 हजार सोने के इससे के रखा था, किसके साथ 1 बनिए के साथ, 1 व्यापारी के साथ लगता। कि उन दिनों में बैंक नहीं थे। वह पारी पैसा रखे तो रूप की छुट्टी आई, बिल्कुल ठीक से मेर मैंने 10 हजार सोने के सिक्के रखे हैं, उसे पानी के साथ तुम वो लेल तुम का उपयोग कर सकते हो। तो सुनात 10 हजार सिक्के प्राप्त हो गए। तो सनातन ने जेलर से कहा मैं मैं का जाना चाहता हूँ और तुम मुझे छोड़। 2 और ये लो 7000 से के बक्शी। जेलर ने कहा तुम तो बड़े प्रसिद्ध कैदी हो, अगर तुम्हे मैं छोडूंगा तो राजा मुझे नहीं छोड़ेगा और और मुझे सब पहचानेंगे रास्ते में हो। सनातन समझ गए है, ठीक है 10 हजार, तुम कह देना कि सुबह के समय मैं गया था, पर मैंने गंगा में छलांग मार दी। सो सनद को 10 हजार से बाहर निकले, नाद के साथ 1 नौकर, 1 नौकर, कौन इशान इशान ने अपने जेब में 8 सोने के सिक्के रखे थे। और उन्होंने ये ज्ञान, यह सूचना राजा के पास नहीं थी, स्नान के पास नहीं भी। तो रास्ते में वो रुके। 1 साल में जो होटल जैसे और सनातन ने देखा की यहाँ जो होटल का मालिक है बहुत ही सावधानी से, उस से उनकी सेवा कर रहा है। तो सनातन का भ्यास था राजनीतिक कार्यों में। तुम्हे शक हुआ की शेर इस होटल के मालिक का कोई महत्व है, इतने ध्यान से हमारी सेवा कर रहा है। कोई व्यक्ति आपकी बहुत खुश मत करे, सेवा करे। कई बार आपको शक हो जाता है, इसे कुछ चाहिए तो नहीं। मेरे से आप जब बुक डिस्टब्यूशन में जाते हो तो कई बार लोगों की तारीफ करते हो। हमारे भक्त है। अमेरिका में जिसे भी देखते देखते थे
डॉक्टर
व्यक्ति एकदम खुश होकर पूछता था लुक लाइक डॉक्टर ये। तो सुरा ने अपने नौकर ईशान से पूछा तुम्हारे जेब में कोई धन तो नहीं है? हजकतेहुइशार ने कहा मेरे पास 7 होने के पहले तो रखा था, 1 साथ सोने के सिक्के लेकर खा लो, ये तुम्हारी सम्पत्ति है। के मालिक ने कहा, मुझे तो सूचना मिली थी की तुम्हार 8 सोने के सिक्के है और वो जो होटल का मालिक था उनके पास 1 स्टोलजरथाक्योंकि चान लेता था। कितनी संपत्ति है इस अतिथि के पास। फिर अगर ज्यादा धन हो तो उनको लूटते थे। सनाता ने कहा आप ये धन ले लो होडल के मारे अब मैं तुम से नहीं ले सकता। आज रात को मैं तुम्हे मार कर लेने वाला था, पर अब मैं नहीं लूंगा। सुनाता ने कहा आप नहीं लोगे तुम्हे और मार मार कर ले लेगा। सनातन को सहयोग दिया और सनातन चले बनारस की। और वह प्रमुख को मिलने के लिए, सनातन के श्रीकांत को मिलने के लिए। श्री कान कौन था उनका बदन ला। शरीका ने देखा लम्बे भाव पड़े कपड़े लगभग प्रधान मंत्री था, आज जैसा दिख रहा है। सना ने कहा क्या कर रहे हो तो वो भंगी जैसे देख रहे हो। श्रीकांत भी बड़ा धनी था। 3, 300, 6000 सोने के से लेकर 3 लाख सोने के से लेकर घोड़े खरीदने आया था उस राजा के श्रीकांत ने चादर दे दी और सदन चले आगे कहा बनारस की। और उन्हें पता था कि बनारस में महा प्रभु चन्द्र शेखर के घर में रहते हैं। चन्द्रशेखर सपन मिश्रा महा प्रभु के से थे, निची जाति के महा प्रभु उनके घर में निवास कर रहे थे नीचे जाती के व्यक्ति में क्यूँकि वैष्णो सिद्धांत के अनुसार जो भगवान की भक्ति में है वो ही जाते और जो भक्ति में नहीं है वो क्या है भारत में यह निर्णय चर्चा होती है लोग का जायका और हमारा सिधांत बड़ा सिम्पल है जो भगवान के भक्त हैं
है।
तो महा प्रभु चंद्र शेखर के घर में थे और उन्होंने कहा चंद्र शेखर से भर 1 संत खड़ा है और इस संत को अंदर ले आओ। सेना जंग स्वामी लंबे बाल हो गए थे, दाढ़ी और फटे कपड़े थे, तो चंद्र शेकर उन्हें पहचान नहीं पाया। चंद्रशेकर ने आगे कहा कोई साधु मुझे तो नहीं दिखता। 1 मोला है बड़ी दाड़ी के साथ खड़ा। वहाँ बाबू ने कहा वो मोला नहीं पसंद है। उसे फिर अंदर ले के आये और माँ ने उन्हें गले लगाया। जब दूसरे बक्सों ने देखा ह फटे कपड़े हैं, दाड़ी है माँ प्रभु गले लगा रहे हैं, वो समझ पाये कि कोई भक्त होगा। मा प्रभु ने देखा 7 बड़े त्याग की भावना है। ना वहाँ पहुँचे तो उन्हें नए कपड़े पहनाना चाहते थे। चंद्र शेखर उस सनातन ने इनकार कर दिया। और सनातन ने देखा की महा प्रभु उनके महंगी चादर पर बार बार देख रहे हैं। न के कपड़े तो सादे थे, चाले बड़ी महंगी थी, कुशिका ने भी भी वो माँ प्रभु ने माँ प्रभु ने कुछ कहा नहीं पर स्नान समझ गए तो स्नान अगले दिन गए थे गंगा के तट पर। वहाँ उन्होंने देखा 1 बंगाली यात्री के पास 1 बड़ी फटीहुईफटीहुई चादर थी। नाथ ने जाकर कहा आप की चादर ले लो, मेरी बदले में मुझे आपकी चादर दे 2 और सी बंगाल तुम खोल कर, क्या तुम अपनी महंगी चादर दोगे, इस फटी चादर के लिए, नहीं, नहीं, नहीं, मैं सचमुच से चाहता हूँ। तुझे माँ ने देखा सुनाता ने 1 चादर उड़ी हुई है, ना पहना हुआ है। तो बड़े खुश हुए। वह बहू ने कहा कि जो जब कोई त्यागता है भौतिक जीवन को, तो इसको सारे कपड़े भी पहनने चाहिए साला जीवन बिताना। और उन्होंने 1 उदाहरण दिया 1 डॉक्टर जो है जब मरीज का इलाज करता है तो बीमारी का कारण क्या है? वही रहने देता तो मा प्रभु हुए थे। माँ प्रभु के आदेश के नुसार सनातन निकल गये वृंदावन की ओर गए और वृंदावन में जाकर उन्होंने माप का आदेश पूर्वक किया। आदेश का सा, मन का निर्माण और उन स्थानों को स्थापना करना। भगवान ने अपनी लीला, पकडे और ग्रंथों का अध्ययन। सनातनगस्वामी ने कई प्रसिद्ध ग्रंथ दिए हैं। प्रपी ने, रूप, गोस्वामी ने कई प्रसिद्ध ग्रंथ दिए हैं। प्राजी ने उन 2 ग्रंथों का अनुवाद किया। रूप स्वामी ने भी अनेक ग्रंथो की रचना की, 1 लाख शोकों से भी ज्यादा और
इनमें।
इन ग्रंथों में 2 बड़े प्रसिद्ध ग्रंथ है। उनका नाम है भक्ति, रस, सिंधू, और और सना को स्वामी नहीं। मिली। अनेक गंधों की रचना की और बंधों का निर्माण किया। अनेक मंद में उन्होंने राधा मदन मंदिर का निर्माण किया। और राधा रूप कुसमी। प्रेरणा से तो यहाँ देखे हो कि रूप सनातन दोनों आय। चेत्री महाप्रभु को मिलने क्यूँकि मुसलमान राजा के राज्य में कार्य कर रहे थे। उन्हें भी मुसलमान नाम स्वीकार करना पड़ा। उन्हें भी मुसलमान रिवाज कस्टम जो है उसके आधार पर चलना पड़ा और क्यूंकि मान राज्य के पास तो रूप और सनातन रूप सनातन वहाँ पर नाम दिया था। दिक्षा के पश्चात रिक्शा के पश्चात अध्यात्मिक नाम दिया जाता है तो रूपा और सनातन वृंदावन में थे और रोज अलग अलग स्थान में सोते थे, अलग अलग बिक्री सोते थे और खाने के लिए क्या मधुकरी करते थे। मधुर की मधुकरी मतलब घर घर जाकर थोड़ी, भीग भी भागे थे। बंदूगरी करते समय 1 घर में आये, यहाँ की 1 बहुत सूरत मूर्ति थी, मदन मोहन के तो सनातन की इच्छा
थी
की ये मूव बिगड़ा है मुझे प्राप्त हो जाए सेवा के लिए। इस व्यक्ति का नाम था चोबे। ये मूर्ति के लिए छो नहीं नहीं। 2 और 1 ने फिर इसी चौबे को सपना आया जिसमें उसने आदेश दिया। भगवान ने आदेश दिया ये जो मेरा बिगड़ा है तुम्हारे घर में, मैं अब चाहता हूँ क्यों जो स सनातन को शो में आये थे तुम्हारे पास उनको दे। 2 मेरी सेवा करने के लिए डायरेक्ट ऑर्डर आ गया। तो फिर जो भी नहीं है बिगड़ा सनातन को लिया। सनातन मधुकरी करके रह रहे थे। सादर ने गंगा के दर पर 1 छोटा सा मंदिर बनाया था इसमें बंद मुलक सेवा करते हे। और 1 दिन 1 वह पारी था नमक का वो पारी आगरा ज्यादा था वो रास्ते में उनकी नाव फँस गई, अंधेरा हो रहा था और वह बाल डर में था कहीं डाकू लोग नहीं आ जाए। और उसने देखा की सामने 1 कुटिया है जिसमें थोड़ी रोशनी है। तो वहाँ वो पहुँचे और बिग से प्रार्थना की कि हम कठिन स्थिति में है और उनकी कृपा से बिगड़ा की कृपा से नाम जो है चलने लगे आगे और जाकर। इस व्यपार ने बहुत पैसे कमाए और ये पैसे लेकर वापस लौटे जिनके पास सुनाता के पास आपके बिग की कृपा से मुझे धन प्राप्त हुआ है। आप दीजिये। सुनाता ने कहा हाँ भगवान का बंदर बना। 2 इसे। फिर उन्होंने बहुत खुबसूरत बंदर बनाया। स्वामी 1 समय था जब बहुत सुविधा थी जब उन्होंने सब कुछ त्याग कर के रह रहे थे कहा वृंदावन में रूप की इच्छा थी की उनके विधा को 1 खीर खिलाई जाए। और उन के पास कोई सुविधा तो थी नहीं, न कुछ खास तो रा 1 सूरत लड़की का रूप ग्रहण करके उनके काम, मे, चीनी, दूध, इत्यादि सब सुविधा ले आये थे। तो जब राजरानी ने ये सब छोड़कर चले गए और कहा मैं बाद में आऊंगा सभी ने बड़ी अच्छी खीर बनाई। जब भाई आए उधर तो भाई ने देखा इतना अच्छा टेस्ट तो भाई ने पूछा ये खीर कैसे बनाई तूने हम तो रोज सूखी चपाती खाते है, खाते है आज ये खीर कैसे बनाई? 1 बहुत खुबसूरत जवान लड़की आई थी इन सब सुविधाओं के साथ, और उसने कहा आप इन का उपयोग करके ही बुला साधन। एकदम समझ गए सूरत लड़की कौन थी ने डाटा तुमने धराली से सेवा ले ली, ये महान अपराध है, धान से सीखते है। हमारी इच्छा होनी चाहिए केवल सेवा करने में। पर जब उन्हें पता लगा की वो वाला जो दूध लेकर आया था, सो भगवान थे, तो वो शर्मिंदा हो गया और उनके भगवान
जिस
भाव होना चाहिए केवल सेवा करे। रूप और सनातन हम भक्तों को, वैश्यों को क्या बुलाते हैं। शिक्षा के आधार पर जोड़ते है। तो रूप और सनातन ने हमें वेद ज्ञान दिया है, अनेक ग्रंथों की रचना की है। ओ विंदावन में। आज आप जो देखते हो, उन्हें के तीर के साथ इन सब को पहचाना गया था। योग तो पर उनके साथ में विदा 6 गुसो में है, उनका बड़ा आभार है क्यूंकि उन्होंने विधि साथ को बड़े सरल रूप में प्रस्तुत किया। तो यहाँ का नीति हरीदास और 7 को स्वामी। कभी जगनपुर मंदर के अंदर नहीं गए, वो चाहते नहीं थे की किसी प्रकार का मेसटनहोजाजगनपु ये प्राचीन रिवाज था कि जिसने हिंदू धर्म में जन्म नहीं दिया तो चीन कभी जगनपुरी के अंदर नहीं गए। जितने महा प्रभु इतने दयालु है की वो रो जाते थे उनसे चर्चा करने के लिए और इन भक्तों का दर्शन करने के लिए स्वामी जा रहे थे जगनपुरी की तरफ रास्ते में, उन्हें कोर की बीमारी हो गई, पूरा शरीर भर गया था बस के साथ, और सामी सोच रहे थे। अब मेरे शरीर का क्या फायदा? अब पूरा शरीर भर गया है बस के साथ। मैं रथ यात्रा के समय पहिये के नीचे अपने आप को दूंगा और आत्म हत्या करूंगा। चेतन। मा स्वयं भगवान है। ईश्वर से, वो समझ गए। क्या था सनातन? माँ? बाबू ने कहा सनातन, ये जो दे है, ये तुम्हारा नहीं है, ये मेरा है, मैंने इसका इस्तेमाल करना है। धर्म की स्थापना के लिए। अगर आत्म हत्या करने से भगवत प्राप्ति होती तो कई लोग भगत इस स्वामी को माँ प्रभु ने डाटा और आज मा हत्या का भाव है। ये दे तुम्हारा नहीं है, मेरा है। मैंने इसका उपयोग करना है कि लिए धर्म की। तो इसी प्रकार हम भक्तों को ये सोचना चाहिए। ये देह हमारा नहीं है किसका है, कौन है? मालिक गुरु हो, भगवान का है। हमें देह का सदा उपयोग करना चाहिए। किस लिए? भगवान की सेवा में। भगवान ने कई बार हम सोचते हैं। ये हमें अच्छा नहीं लगता है, ये अच्छा नहीं लगता है, ये अच्छा नहीं लगता है। हमें ये देखना है की भगवान की सेवा के लिए क्या महत्वपूर्ण सोचते थे, आत्महत्या कर लेंगे क्यूँ? क्यूंकि उनको बीमारी हो गई थी और वो बेकार का हो गया। तो माँ बाबू ने यह स्थापित किया कि दे का उपयोग होना चाहिए किस लिए? भगवान सेवा, दे मेरा है, तुम्हारा दिल। तो उसी प्रकार हम भक्तों को सोचना चाहिए। ये तो भगवान की सेवा के लिए है। जब कहते है गुरु की सेवा, गुरु, क्या कहता है आखिर गुरु, यही कहता है, भगवान की सेवा करो गुरु। यही कहता है चेन क्रिश्ना, क्यूँ निर्णय है? नाम के लिए क्या स्थापित किया? क्रिश्ना सुप्रीम गॉड आपको का? ये नहीं मिलेगा पापाजी करे म द सुप्रीम और प्रापा से किसी ने पूछा 1 समय और यू गॉड ने कहा god, तो जब हम कहते है प्रपाकपढो, तो इन ग्रंथों में है क्या ज्ञान जिसके द्वारा सुप्रीम गुरु, इस बॉडी गुरु केवल 1 मीडियम बनता है। तो हम कहते है क्यूँ? क्यूँकि इन ग्रंथो में क्या है, ज्ञान है। और ये ज्ञान किसके द्वारा प्राप्त हुए? और हम भगवान के द्वारा, तो ये नहीं की हम कहते है गुरू की प्रशंसा। गुरु प्रसन्न होता है। जब वो देखता है की हर व्यक्ति जुड़ा है भगवान की सेवा में, तो हर राज ठाकुर की चर्चा, यहाँ हर राज ठाकुर का अचार भी था और प्रचार भी कहा उन्हें कहीं को 4 है पर प्रचार नहीं। कहीं का प्रचार है। और पर आप में धूल गुल है। चुप हो असल में समाज के, तो भक्तों का अचार भी होना चाहिए और प्रचार भी होना चाहिए। ये नहीं प्रचार करते बड़े उत्साह से बड़ा 4 भी है, ये भी नहीं कि आचार है वहाँ पर 4 हुए बजीलनन्दीगोनदी बजीर दी भग जो है वो केवल अपने स्वाद का ही सोचते हैं और अपनी भलाई का ही सोचते हैं। गोषनंदी भग जो है वो ये सोचता है। मुझे भगवान का संदेश आगे पहुँचाना है। सबको जोड़ना है। तो अचार और प्रचार दोनों की आवश्यकता है। और इसमें सबसे प्रसिद्ध उधारण है आहा साकु। और हम भक्तों को अचार भी रखना चाहिए। अगर अचार भी रहेगा। क्यों की प्रचार का ज्यादा असर पड़ेगा। और अगर अचार कमजोर हो तो प्रचार भी कमजोर हो। लोग कहेंगे देखो बोलता है, कुछ करता है कोच मुँह में राम राम तो मुँह में राम राम हमारा सिद्धांत नहीं है, हमारा सिद्धांत है जो की हद ठाकुर गया अचार भी। और प्रचार मे, ये बहुत आवश्यक है। क्यूँकि जब लोग जुड़ते हैं भक्ति में, वो देखते है। इस व्यक्ति में अचार और प्रचार दोनों है। या के प्रचार का उत्साह है तो इसे हरचारभीहोना चाहिए, प्रचार भी होना चाहिए। सुनीति नंदा भगवान नितेंदर जी हमेशा सोचते थे कि चेतन भगवान है वहा प्रभु। हमेशा नितिन को अपने बड़े भाई जैसे मानते थे और हमेशा जानते थे। ये कौन है स्वयं भगवान है। तो माँ प्रभू ने हैदास को बुला कर कहा जाओ? घर घर प्रचार करने के लिए और माँ के आदेश के अनुसार हैदास। और भगवान ने जिंदा घर घर गये जो घर घर जा रहे थे। कइयों ने तो उनको उनका बड़ा अच्छा स्वागत किया, परसाद खाओ। और कइयों ने उनकी बेचती भी की। और कैयो ने ये भी कहा ये शायद जासूस है, ये आये हैं साधु के वस्त में, पर क्या करे, हमारे घर में क्या है? फिर आएंगे रात को के लिए। और जब वहाँ पर ने शिवा संगन में अपना नाम प्रारंभ किया तो वहाँ सब लोगों को अंदर आने की इजाजत नहीं थी। वह उस घर में पहुँचे जहाँ की जहाँ के किसी सदस्य को शिव शंकर में अंदर आने से रोका था। तो वो क्या कह रहे थे मारो इन्हें पीटो हमने जो प्रयास किया था उनके में उपस्थित होने के लिए, उन्होंने हमें अंदर आने दिया। मारो पीटो। तो देखिये ऐसा व्यवहार हो रहा था किसके साथ, तो उनके साथ ऐसा व्यवहार हो सकता है। हम लोग प्रचार में जाते हैं, हम जूते खाने चाहे है क्यूंकि माँ पर वो आदेश के पूरा करने के लिए हर घर तो उसी प्रकार हमें भी चिंता किए बिना आदर मिलेगा अपमान होगा। हमें प्रचार में जाना चाहिए यह नहीं सोचना चाहिए लोग हवाई बस्ती कर देंगे, लोग कहेंगे हसेंगे हमार पर चाहे आदर हो या अपमान, हमारा कर्तव्य क्या है जारेदार मध्य लीला के प्रथम अध्याय में मा प्रभु लीलाओं के में पढ़ रहे हो और पढ़ रहे हो की किस प्रकार माँ पर बुने भक्तों का उद्धार किया और किस प्रकार रूप और सनातन शिक्षक प्राप्त के के सी और कितने महा। आदेश क्या है जाये देखो का उत्साह सब में होना चाहिए। यह नहीं की यह जरूर है की आज के में थोड़ी थोड़ी तकलीफें हैं जैसे बॉम्बे जैसे शहर में, पूरा मंदिर अभी भी बंद है का अच्छा भाग्य है कि 3 महीने से मंदिर खुले है और भारत के कई स्थानों में, राजस्थान में, मुम्बई में, वगैरह ये मंदिर आज भी बंद है और ये जो करुणा वायरस है वो फैलते जा रहे है तो करुणा वायरस असली करुणा है लोगों को ध्यान में ज्ञान देना तो ये करना वायरस काफी तेज है और कुछ पता नहीं कहाँ से आ जाता है जैसे आप लोगो को ये सूचना होगी की जो अमेरिका के राष्ट्रपति हैं उनसे भी वायरस होगी, उसकी पत्नी को भी वायरस हो और उसके कैबिनरकेकईआठनौ मंत्री थे सबको वायरस हो गया 1 प्रोग्राम में गये और उस प्रोग्राम में 1 औरत थी जिससे यह वायरस था उससे सबको हो गया। तो आप देख सकते हो चाहे आपके पास कितनी भी सुविधा हो, कितनी भी योग्यता हो, कितनी भी अमेरिका के राष्ट्रपति आप सोच सकते हो उन्होंने पूरी प्रिकॉशन लिया होगा, विश्वास नहीं करते की वो अनजान थे या पता नही क्या नियम हैं मंत्री होंगे सब डॉक्टर भी साथ होगा जब भी तो ये है भौतिक समाज का दुख, हम चाहे आप रिसर्च करो अपने आप को कम नहीं है। प्रचार का बड़ा अच्छा समय है आप। आज के बदन में चारो तरफ से लोग दुखी हैं, पढ़े लिखे हैं नौजवान और 9 पी रहे है और पारी ने बड़ी फैक्टरी लगाई है। पर कोई गिरा नहीं है, दुकानें खोलते हैं सारा दिन पर कोई गिरा नहीं आता। तो चाहे देखा जाए। बौद्धिक समाज बिगड़े तो ये प्रचार का बड़ा अच्छा समय है और बता सकते हो। लोगो को देखो जब हम कहते थे तो का हम शा तुम हँसते थे। करुना वायरस ने अच्छी शिक्षा दी, जो शिक्षा आप दे, पाये करना वायरस दे। हम लोगो को ये बता रहे हो की किस प्रकार बौद्धिक संसार में कशी कर रहे प्रचार का हमें पूरा लाभ उठाना चाह। ये जो स्थिति है समाज में उसका उसका हम लाभ उठा सकते हैं। हम खुश नहीं हैं की करना वायरस फैल रही है और फैल रही है। और आप देख सकते हो और बारों में नई कुल कितने नए लोगों को यह बीमारी हुई तो असली उपाय है। हम सब में प्रचार को उत्सा होना चाहिए और सोचना चाहिए। 6 महीने 1 साल की लम्बी छुट्टी मिल गयी, मे प्रचार के लिए कोई छुट्टी नहीं मिल का उपयोग करना चाहता है। ये है चेतना महा का। आंदोलन जाने हमें तो शासन के आधार पता है की समाज में क्या तो असली उपाय क्या है। विज्ञान आज लोग सोच रहे हैं और कुछ महीनों में वैसे वैस्िनेशनआजायेगा, एवरीथिंग, विल बी, वैस्िनेशन आएगा में जायेगा क्या और वेस्टिनेशन क्या रिस्क भी होता है। अगर ठीक वेनेशन नहीं हो तो उसके साइड इफेक्ट बहुत भोले है। तो ये ये सोचना की थोड़े महीने में सब ठीक हो जाएगा, ये जेल खाना है, यहाँ कोई हर चीज कभी ठीक नहीं होगी। और सबसे उपाय क्या है भगवान के आप सब को आज की सीधी का लाभ उठाना जाए। बढ़ाने के लिए। तो संक्षेप में इस अध्याय में भी दास माँ प्रभु के पास ले गये। रूपर सनातन, रूप सनातन, जो आए थे रामा केले में मिलने के लिए, वो बेश बदल कर आए थे, क्योंकि उन्हें तो पूरा राज्य बंगाल का जानता था। बंगाल के मंत्री थे, वो अपने देश को बदल कर आधी रात को आये, क्योंकि वो चाहते थे कि किसी को पता नहीं लगे कि वो आये हैं। वहाँ बाबू को मिलने। और वहाँ बाबू ने यह आदेश दिया। क्या ठीक समय पर प्रचार करना और और मैं रूप और सुना सर में इतनी विनम्रता थी? उन्होंने कहा, अंदर जगाई मलाई से भी ज्यादा प्रतीत है, हम वक्त में यह भाव होना चाहिए। हम हैं सबसे प्रतीत। और इस विनम्रता के भाव ने चले गये, तो भारी कृपा भी मिलेगी और भगवान प्रसन्न होंगे। अगर हम यही सोचते रहे, शो ग्रेट, शो, सक्सेस फुल, तो भक्त क्या होगा, आगे नहीं बढ़ सकोगे। इसलिए ो बहुत महत्वपूर्ण है। और अगर हम इस लोक के हर शब्द का पालन करे तो बिना शंका के आप भगवान के भक्ति के रास्ते में आगे बढ़ सकते है। हरे कृष्ण कोई comment in requestion ya de
कैसे
कई बार हम देखते हैं, ये बहुत ही सुविधा है। जैसे बड़े मदद में किर्तन होता है सुन्दर बिगड़ा और प्रसाद भी अच्छा है। क्यूँकी बड़े जरा ज्यादा ट्रेनिंग सो हम सोचते है। यहाँ। जाकर, हम सेवा करेंगे और और किसी में नहीं, भेज में वहाँ नहीं जहाँ थोड़ी कठिनाई हो। भक्त को यह सोचना चाहिए। आवश्यकता के अनुसार हम सेवा करेंगे। जैसे फौज में फौज में अगर सरकार के ले जाओ, चाइना बॉर्डर पर अब भी थोड़ी कह सकते हो? चायना नहीं जायेंगे। हम तो दिल्ली में जायेंगे, दिल्ली, दिल्ली, बॉर्डर में जाके। हरियाणा से जो बॉर्डर है, वो वहाँ वहाँ चल जाएगा। फौज में भगवान आम भेजे वहाँ जाना पड़ता है। तो हमारा वो ही भाव होना चाहिए। और यह भाव होना चाहिए कठिन? सेवा में ज्यादा कृपा भी प्राप्त होती है। भगवान देखते है ये भगत मेरी खुशी के लिए, मैं, मेरी शिक्षा को स्थापित करने के लिए, ये कठिनाई में अनुभव कर रहा है। तो भगवान मुझे प्रसन्न होते है। और कई बार हम देखते हैं भगत कहते हैं सेवा करेंगे आरोप। हमारी इच्छा के अनुसार भगवान से कहोगे, हमारी इच्छा के अनुसार सेवा होगी। तो फिर भगवान की इच्छा के अनुसार उसका लाभ भी उसी मात्रा में होगा। ऑल द मेसन कॉर्डिंग, भगवान स्पष्ट कर रहे हैं, हाई ही वार देम। an proposiontothe degryosenawasalia question a yes
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और 8 बगत रो जाते है कितने जाने नंबर 8 और भी चाहिए,
आपको
कह रहा था संभल जाओ तो अब कह रहे हैं की 8 भक्त मिल जाते है, आपका क्या अभ्यास है लोग बात करते हैं या बेसी करते हैं या क्या कोई ऐसा
यहाँ कुछ से बनी है हमारे 2 सी है संडे को भी कुछ नहीं हो रहा, बहुत बहुत बाते है लोग तैयार है हम सी तो बोला की आप लोग को ग्राफ में सब
हमारी हमारे हमें सावधान रहना है, यही नहीं की पहले जैसे बिना देखिये से हमें सावधान रहना है सब नियमों का पालन करना है और पूरा प्रयास करना है की बीमारी का असर नहीं हो और जो मंदिर में आते है उनको भी आप कर सकते हैं
नंबर लिया है और जहाँ जो
ग्राम nlnhewhoquestion
यहाँ पर बहुत बड़ा हमरे छोड़ने वाले लोगों को बस ने बातचीत करते हैं तो डेली लगभग 10 लोग को सेंटर के हैं चाहे गर्मी हमारे अगर लोग कुछ और लोग उस से बातचीत कर लो बातचीत करना चाहती है जाते है तो हम लोग यहाँ पर की तो कही जाने की तो काफी लोग है और सब कोस बल है आपको जनम
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जिसे हम करना चाहिए
रिजल्ट की हमें चिंता नहीं करनी चाहिए, आप प्रयास करो एंपुररिजल्डबलकृण जैसे आप मान लो प्रचार के जाते हो, आपने 6 घंटे प्रचार किया, इताजतीजानहीमिला भगवान खुश है वो आपको क्रेडिट देंगे 6 घंटे में 6 घंटे से हो या चाहे रिजोल् इतना अच्छा
न हो
भूख डिस्ट्रिब्यूशन में 1 डिवोटी 25 किताब बाँट देता है दूसरा रिवोली 23 बाट रहा है तो जो 2 और 3 बाट रहा है उससे भी लो प्लीज सो नोट भी सो रिजर्व, विश भी कैश भी फर्ट okay it s grey tata
बहुत गुस्सा आ है बाली कर रहे हैं कर रहे हैं अंदर से, तो
अंदर से दर लगता है उसको बार बार से। अब मैंने कहा अगर एक्सटीरीयर प्रैक्टिस शोज व एक्टर प्रैक्टिस करोगे तो मेंटली भी वो भाव अनुकूल हो जाएगा। और it all real work you and your practice set you will get it। आप ये उम्मीद मत रखो, हर व्यक्ति मेरी तारीफ करेगा। अब ये उम्मीद मत रखो मैं हूँ बेस्ट और मुझे हमेशा नंबर वन आना
है,
हम इतनी बड़ी बड़ी उम्मीद बना लेते हैं, हमें ये मिलना चाहिए, ये मिलना चाहिए नहीं मिलता तो हम डिप्रेशन में आ जाते हैं बलिक माज लोग डिप्रेशन पर की वो आते है उन्हे बड़ी बेस प्लैन्स बनाये थे, हम भी मुकेश बानी बनेंगे ये वाला जब देखते है की ये सब प्राप्त नहीं हो then they going depression so dont expect, i will be number one, i should get all the onerओकई stop। no yes yea yes the
2 किसान
हम यह तो नहीं कहते, पहले दिन आये बंधन में प्रचार के ले जाओ, पहले ट्रेनिंग देते हैं 6 महीने 1 साल के लिए है उसके बाद आपको प्रचार में भेजते हैं कि नहीं। और अगर आपको लगे की मुझे और ट्रेनिंग की आवश्यकता है तो वो प्रबंध हो सकता है जब आपके लीडर्स देखेंगे की डेरी का वो आपको भेजेंगे अगर आपको लगे नहीं आम 9 डेरी तो आप मेरे जो इंचार्ज हैं, एडवाइजर हैं उनसे आप डिस्कस कर सकते हो हिरदे में कोई बात मत रखो कहते है 6 प्रकार के समान भक्त होना जाए
ओके
वो
इसे सी तो उसमें कोशिश साफ़ करे तो तो ऐसी शुरू कर रहे है और 11 बजे मोबाइल और किसी की बात तो आप भारतीय प्रभार के मा मौजूद होगे, बीबीडी साथी को हो रहा है आदि के भागते मौजूद रही है ऐसे हालात सब नोट करते है वावारा क्लास और अपने पर्स साइकिल आप भी तो नेक
today the leader and not her गोंड गोंड तो बस
हम अपने है आप
हमे 1 में में बेकार नहीं रहना चाहिए alle busy कोर्स डिजाइन हो रहे हैं से लाभ उठा होगा और अगर आप व्यस्त रहोगे हमेशा प्रिचन एडवांस मे अच्छी ै
and
an english frase and i brain is devils work show and devile means maya माया देक डिफ्रेंट ग्रुप सो आप व्यस्त नहीं हो आप को मन भटकेगा गलत काम हो के तरफ पर अगर आप व्यस्त रहोगे अगर कोई सेवा नहीं है तो बंद में बैठकर कीर्तन करो ी ye hi krishna krishna hare krirिsणा हाल हहहरलहहलरमाराहल हर।
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