भक्ति में अनुकूल और प्रतिकूल अवस्था || CC Mad 22.100 || 4 March 2018 || ISKCON JUHU

Prasad Raval discusses favorable and unfavorable mental states for bhakti, or devotional service to Krishna. The talk emphasizes complete trust in Krishna's protective grace, the necessity of sincere surrender and chanting, and uses stories about kings and saints to illustrate how maya affects the soul's relationship with the divine.
Chapters
جیسے ہمارے پاس ہمارے پاس ہمارے پاس ہمارے پاس ہمارے پاس ہمارے پاس ہمارے
پاس ہمارے ہمارے پاس ہمارے پاس ہمارے
پاس ہمارے ہمارے پاس ہمارے پاس ہمارے پاس ہمارے پاس ہمارے پاس ہمارے پاس
ہمارے پاس ہمارے پاس ہمارے پاس ہمارے
پاس ہمارے
پاس ہمارے پاس हरे
कृष्या
हरे कृष्या हरे कृष्या हरे कृष्या हरे कृष्या हरे कृष्या हरे कृष्या हरे कृष्या हरे कृष्या हरे कृष्या हरे कृष्या हरे कृष्या हरे कृष्या हरे कृष्या हरे कृष्या
हरे कृष्या हरे कृष्या हरे ہمارے कृष्या हरे कृष्या हरे कृष्य
بہترین بہترین بہترین
بہترین بہترین بہترین بہترین بہترین بہترین
अनुत्रोभ्यास्या
अनुत्रोभ्यास्या अनुत्रोभ्यास्या अनुत्रोभ्यास्या अनुत्रोभ्यास्या अनुत्रोभ्यास्या अनुत्रोभ्यास्या अनुत्रोभ्यास्या अनुत्रोभ्यास्या अनुत्रोभ्यास्या अनुत्रोभ्यास्या
अनुत्र
तरपणे सर्विदा सर्णागती अनुभुले से संगलता तीकुले से बरजनं रचिष्यति धिश्मासो गोतने परमजमता आत्मन्यशेखार्णे सर्विदा सर्णाकति अननुपुलश्यसंकल्बा प्रद्रिकुलश्यवजन प्रक्षितितितिष्वास्तो भोपतित्वेरणंकता नुपोल रश्यसं करवा रदीकू रश्यवरजनम् रश्यश्रितिष्मासों भोपत्रिद्वेवर्णवं तथा आत्मतिक्षेत प्रसाथपन्ने अनुपूलैस्यसंकल्पा प्रतिकूलैस्यवजनम् रश्यिस्यति विशासो ओपत्वेरणन्दा द्रख्षिति दिनिष्वासो भोगत पे रख्षिता आत्मनिष्वेक तार्फन में श्रभृता सर्णामनी प्रसिश्री सारो भोपत्रित्रेवनंता आपनी सेवतापन्य सर्विदाच्रणाथी कोपत्ते वर्णान्तता आत्मनिष्येवागातन्ये
सर्ग्रिणासर्णात्रि अनुभूलस्या
बगवान्ती सेवा के بھلی بہت جناب प्रतिकुल बातों का भहिष्कार कर पिश्ण द्वार संग्रक्षन पर पूर्ण विश्वास होने भगवान को संग्रख्षन ये स्वामि के रूप तो स्विगार करना पूर्ण आत्मसमद्व तथा दीखता करता है। पूर्ण शार्णांगर प्यक्ति में लिम्दलिक्ये छे लक्षन पाये जा रहे हैं। बक्त भगवान की सेवा के अनुपुल हर बात को सुईकार करता है� भक्त को द्रविश्वास होना चाहिए कि कृष्ण उसकी पुरी तरह से रख्षा करेंगे। उनके अतिरेक वास्तों में अन्य कोई सुरख्षा प्रदान नहीं कर सकता। इस तरह से आश्युत होना शद्धा कहला पार है। यह शद्धा उस निर्विशेष्वाली की शद्धा इस तरह कृष्णा अपने भक्तों पर द्यार हो होते हैं और भक्ति के मान पर आने वाली बादाव से उनकी रक्षा नहीं होते हैं. चौना भक्त को चाहिए कि कृष्णा को अपने परमालक तत्र स्वामी के रूप में स्विधार चाहिए हैं. उससे यह नहीं सोचना चाहिए वक्त को यह अदरिड विश्वास होना चाहिए कि इन तीनों लोकों में क्रिष्ण के अंधिले उसका अंग्या रख्षब या पालक नहीं है। आत्म समर्फर्त अर्थ या समर्ण अर्थना की मदुश्य चुकर्व तखा इच्छाएं खतल तरख नहीं है। वक्त पूर्ण त भगवान कृष्ण भगवनीता में कहते हैं सर्वस्त चाम जली संदी मिष्टो मत्तिस्त विति ज्यान पोहनं जो विदेश्टि सर्वित अहं विववेद्यो विदान फुक्त वेदो विदो और चाम मैं हर एक के रिदा में आशीम हूँ और मुझसे ही स्विति ज कृष्ण जीव की इस्तिती की अतुसार भिर्ण
भिर्ण आच्रण करते हैं.
जीव की इस्तिती या है कि उसे या तो माया के संग्रक्षण में रहना होगा या कृष्ण के निजी संग्रक्षण के अंतरदत रहना होगा. भवत के भवतिक कार्यों को भुड़वा देते हैं और माया के मांध्यम दोरा अभवतों की भगवत भक्ति को बुला लेते हैं. यही भगवत भगवत के लाथा हैं.
अर्वाल दुड़ाये हैं शर्णादती के छे विभाग
ये हैं भक्ति के अनुपूल बातों को स्विकार कर भगवान को संरक्षत्यस्वामी के रूप में स्विकार करना पूर्ण आत्म समर्फण नधदीनता
श्री
गुरों
प्रश्चान्स श्रीदूभं सावजातं सहगनारदमादादुनभंसनेवं साध्वेतं सावदूधं पडिजनासरितं धुष्णचेदन्यदेवं श्रिया कृष्णा वार्धान सहगनानलिता श्रिजिष्णातानुपिताम्ष्टा एकृष्णा कर्मासिंदो धीनानतो जगतते ओवेशा ओविकाकन्ता नाथाकन्तमस्ते तप्यवां जन्यववरंभी राधेरिंदामदेश्वरी विष्णमानु सुदेव देवी निर्भानी हरिवे। पुर्प्यासल्पतर्णुप्रश्या लिपासिंदुविदेवच्या तमिदानां पाव्रिव्यो कैश्णविव्योनुमोन्मवा अगर
उखली आईसाथ से करता प्रति के लिए ऐसे होगा इतना प्रति के लिए एवरिश्वात रहो प्रेश्ट प्रेश्ट प्रेश्ट प्रेश्ट प्रेश्च प्रेश्च प्रेश्च प्रेश्च प्रेश्च प्रेश्च प्रेश्च
प्रेश्च प्रेश्च और
प्र जहाँ सेट्रे महानो नाधी भुतां दूसर सिख्षा देते हैं। यही पेस परकार हम भगवान के श्रेह नगत होते हैं। हम सबकी इच्छद है कि हम श्रेह नगत होते हैं पर हम अपने अंधे की चारों के लिए शर्णगत होने का अज क्या? शर्णगत कैसे होते हैं? शर्णगत पे छेंद भावों का मनदू होते हैं. तो सबसे पहले क्या कहां गया है? कि जो भती के लिए क्या है? उसे स्विकार करों जो भती के लिए तक्तूल है ये संदेश आप लगवल रोज सुरुते हैं, वध्ति के लिए अनुपूर है, प्रिकार करों, वध्ति को लेते हैं, वध्ति के लिए क्या अनुपूर है, ये है भग्यत प्राप्ति अप्पार अले काले नाम लुपा प्राप्ति अप्पार प्राप्ति अप्पार अले काले नाम लुपा प्राप्ति अप्पार अले काले नाम लुपा प्राप्ति अप्पार अले काले नाम लुपा प्राप्ति
अप्पार
अले काले नाम लुपा प् एक फिलम बनाई थी हरे राभा थारे के
फिलम मैंने फिलम देखी हुए हुए सुना
है कि पूरी फिलम के प्राइग्राव में
हरे के नंस मुना आता है और
उन्होंने एक सुनेश कर दिया कि लोग भंग पीते हैं और पिर हरे नाम
पर जाप हैं तो हम सुनेश प्राभा
से � अपने लिए नहीं तो आजान सुने करता हूँ। एक बात अमेडिका में प्रिश्वे सारु प्रिश्वे सारु प्रिश्वे सारु प्रिश्वे सारु प्रिश्वे सारु प्रिश्वे सारु प्रिश्वे सारु प्रिश्वे सारु प्रिश्वे सारु प्रिश् और सब जगह ही है हाई किश्णस धून को बचा रहे हैं तो इतना आगर्शित हो गया था कि मैं घर से भाँच जाता था कि हाई किश्णस धून फिलने के लिए भाँच जाता था हाई किश्णस धून بھگواں
کے
ناموں میں پوری شکریہ ہے۔ یہ ایک ملک ہے اور کیا بھگواں کے شاستوں کا خریدہ ہے۔ कैसے ہم آگے پڑھ سکتے ہیں और जो भाग्या है और भाग्या करकते हैं मेरे पहने दा या नहीं पहने पहने पहने पहने पहने पहने पहने पहने पहने पहने पहने प� और वहाँ गीती दीलां का पढ़न हैं। तो शास्त्म में गुच्ची देते हैं। और और क्या? सादव संग्वेर हैं। यह बहुती आभवशक है। अगतों में संग्वेर हैं। अब यह सारे मिष्यों में केतु की स्थापना की हैं। वो चाहिए तो बहुती सरवधा से अग पाव लगी और प्रशार पाव। पाव लगी और प्रशार पाव। पाव लगी और प्रशार पाव। पाव लगी और प्रशार पाव।
पाव लगी और प्रशार पाव।
पाव लगी और प्रशार पाव। पाव लगी और प्रशार पाव। جہاں पाव लगी और प्रशार पाव। ہوا تھا براہمین خاندان میں پھول ہوئے تھے تو جبردستیوں نے جھوڑا گیا تھا حسین شاہ کی طرف کیوں کہ روچی رہی تھی وہ نے دو براہمین کو رکھا سمجھا دی اور کہا تم خاص ملکوں کو کھونچا کرو کہ ہم جلدی سے ملک ہو سکے शुरूगो के स्वामी जब उन्हें नाव के क्या गी उनके पास इतना धान सा पूरी नाव भर गेगी उनके सोने के से कुरुण का और प्रचास पढिश्चन को उन्हें बाता इसे ब्राम्यों को पढिश्चन पढिश्चन उन्हें रखा ہوڑشے کی آبشاہیوں نے پتا تھا کہ ہوڑشے میں ہم سے ان کی جوڑت ہوئی ہے اور اسلام نے کہا کہ آج ہم پہ پیار کر رہے ہمارے پہنچنے کے لئے جوڑیں گے اُن کے بھائی سیدھا دن کی کوئی روچی نہیں تھی کہ ہمیں سیوہ پہ جوڑیں گے اسلام نے کہا کہ उन्हें अपने जवाब को सूचना भी नहीं कि मेरा स्वास खराब
है तो मेरे साथ पर नहीं होगा
तो 20-30 ब्रावनों में साथ पैट कर स्नाथिकों से क्या कर रहे थे? भागवत कार्जिया राजारी विक्वस स्नाथिकों
पर बड़ा
निर्बर था और पांज़द साल पूरों वर विश्व की सबसे दनी राजधानी मंगा आ गया था और विश्व की राजधानी का निर्देशन कौन कर रहे था ये लोगा हैं तो राजा दुखी था कि राजधानी पभुछों में प्याग नहीं आओगी तो राज ناظر اللہ صلی اللہ علیہ وسلم آیا
اور ناظر اللہ صلی اللہ علیہ وسلم
نے ایک ڈاکٹر بھیجا تھا ڈاکٹر نے کہا حمیدہ سے ناظر اللہ صلی اللہ علیہ وسلم مجھے کوئی ٹھیک نہیں ہے کہ آپ کو سوچنے دی رہا ہے کہ مہر ہیں مہر میں سے مجھے کوئی ٹھیک نہیں ہے کہ راجہ کھو جایا اپنی سیوہ کے ساتھ ناظر اللہ صلی اللہ علیہ وسلم کی کھوڑیوں پر
اور جیسے
राजा आजा राजा ये सिनाते ने राजा को प्रनाम दिया बुरा आदर दिया वो राजा था और राजा ने कहा तुम घर के बैट रहे हो اب میری اس کاری میں کوئی ڈھونٹی ہے راجہ تیہا ہی کرنا تھا تو
پھولیسا کے راجہ سے ڈھونٹ کر گئے
تھے اس راجہ کے کہنے پر بھی سناتھر نے انکار کر دیا راجہ کے ساتھ ڈھونٹ گئی جس سے کیا پرینا ہوا भाजाने नाथन को किस्तरा करा के कहा पेर में थाल थे। नाथन ये में थे। उस नाथन को एक पत्रा आया भाई का रुपा का जिसमें उन्होंने कहा, मैंने समारी सुमिला के बिए ब्रस जार सुरे के सिखे एक बलिये के रुपान में ठोड़ा था। लाइक
تو تُو یہ سمجھے جاتا ہے۔ تو سلاطنہ نے جیلر کی کہو کہ
جیلر صاحب، جیلر کو کہا کہ یہ لوگ پانچ لار سوڑے کے سکے میں جانا چاہتا ہوں مکہ لے तुमें
मैं
चोड़ूगा राजा मेरे द्रिना नहीं चोड़ेगा। तुमें मैं चोड़ूगा राजा मेरे द्रिना नहीं चोड़ेगा। तुमें मैं चोड़ूगा राजा मेरे द्रिना नहीं चोड़ेगा।
तुमें मैं चोड़ूगा राजा मेरे द्रिना नहीं चोड़े�
تو سنادھن نے دیکھا جو جیلہ ہے کیا ہے اس کے واقعے کے
لئے اور اس کو تھوڑا اور پچھلی
سی جو ہے اس سے سنادھن نے
مجھے سات ہیلاڑ سونے کے سی جیلے
دے جو جیلے سے مجھے سیوک دیا
مینگا پاٹی पढ़डे थे आगे वर्णाशी मौन पिकले। क्योंकि पुले पत्र प्राप्त हो गया था कि थी थिने मां को वर्णाशी मौन के।
आच्छा दो आप।
पहले कोई पुले विश्व कंदा जाओ रहा थे। पुले दिल में ना चर्मोंती ना तार्य करें। तो व्यक्ति जे जा तो सिनातन को सोंका लक्ष था महां तुम्हों का दर्श। इससे पहले सिनातन के भाई महां तुम्हों मिल जुगे थे और प्रयाज में उन्हें सिक्ष रहे थे। कुछ सिनातन चोडड चोडड जाने थे
और
जो जहने का थिखाना लगे जाते हैं।
आज मुझे मोटल होते हैं। मोटल के बड़ाबर। तो सनाथ में एक राज बहुत आजुगे।
ये जो मोटल का पालिक था बड़ा उश्यान था। उसने एक जूशी को रखा था। तो वो दाना लगा लेता था किन्दा
धरी ह
अगर थानी हो तो उन दिना में येव के स्थालों में जोरों
का काफी थोड़ा होते हैं।
तो इस मालिक मुचान को सोचना बीड़ी है इस स्थालों के बाद आड़ सोने के सिखे
वो जिन मनाने के लिए।
इस नाथे ने देगी प्रीपी पर खास
सेवा कर रहा है।
श्यारे से कुछ चाहिए हुआ। एक प्रेवियर क्या की बोर्ड सेवा करें। कोई शक हो जाते था। इस नाथे ने जिन नौकर में पूछा है इशाम। तुम्हारे बाद धांतर नह ہاں میرے پاس ساتھ سوڑھ گے سکھے تھے کہ آگے پتہ کے ساتھ تو موت کو اپنے ساتھ کیوں رکھ رہے ہو چھوڑ چھوڑ پہ جا رہے تھے اور ڈھلڈ نہاں آگے ساتھ سوڑھ گے سکھے دے کر اُس مالک کو आज मेरा सियोग दीचेगा पहाडों के पार जाते के लिए क्योंकि मैं चाहना नहीं हूँ कि कोई मुझे देखा। क्योंकि सिनादु लोग सर जान देते हैं।
तो वो दुनिया माली में गाता हूँ।
मैं सब भी शिर्मिंदा हूँ। मैं इस माड़ से एधा कम नहीं
ले
بھگواں نے مجھے پاپ سے پچھا دیا کہ میں سناتھر نے کہا آپ نہیں لوں گے گھوڑ گھوڑ مجھے مار کر دے دیں گا اس نے بتایا آپ نہیں لوں گے تو سناتھر کہو اس عورتوں کے مالکے ایک لوگ بھگ جو میں دیدے لگے ہیں آگے بڑھوں گے ہاروز پہاڑ جائیں گے پہاڑ جائیں گے راستے میں وہ رکھے सुनाधर के एहनके पती के घर उस दिन नाम था श्रीकाद आये दे तीन लाग सोने के सिक्र में साथ राजा के लिए घोड़े करें थे और श्रीकाद दे देखा सुनाधर बड़ी बड़ी लाड़ी अले बड़ी गंदे कपड़े तो उन्हें करा ये क्या कर लिए संद्या अपने आपका। तो मेंने पड़ी पत पर थे तो मेंने कपड़े, पड़े कपड़े हो जा रहा था। इदार रहो मेंने साथ, मैं तो वो सब सुभिगार दो रहा था। मैं तो तो मेंने इदी मुझे नाथी भी प्यार देते। नहीं कोई उच्छी � उड़ने के लिए उसनातर में की चातो चोड़ने के लिए उड़ता है आगे बड़े कहा जाने के लिए। जब वो माननासी बोलते हैं तो गये हो वसीरा संदर्शेकर गेता हैं संदर्शेकर की
चट्टा में गीते हैं तो वो जीजी
जादी के जेवर महाप्रमोरती ने मेरे वा جب سنادھم کے گھر میں پہنچا تو چیتنِ مہا مہمی رسول امہمان ہے وہ نے پناہ ذہا دہایا اور وہ نے چند سے گھر سے کہا جاؤ دیکھو پھار ایک سانتھ آیا ہے उसे अंदर ले दो. शर्देशी के जब आया बढ़ाने में देखने के लिए कोई बहिश्मसन्त खड़ा गे रहे थे. उन्होंने देखा एक आने बड़ी बड़ी दाड़ी के साथ. उन्होंने देखा सोचे ये तो कोई मॉला हो रहे कहा. तो आज तो कोई बहिश्मसन वो मौना नहीं है वो जो मुझे कुड़ी कर सनते हैं सनापुर्वन अभी जो अंदर आये वो जो पूरा श्रीर इन्ना कंदा था वो पहारों से चुक चुक कर आ रहे थे मिठी पुर्थी पिछे मेरे महापवल ने घरे लगा लिया तो महापवल मेरे ने घरे लगाया کہ کیا کر رہے ہو؟ میرا شریف اتنا گندہ ہے. پیٹی کل سے بھڑا باہ ہے. میرے شریفیں پلسیاں ہیں. آپ مجھے کلے کیوں لکھا رہے ہو؟ तमना तमने क्या रहा है? मैं تمہیں کلے لکھا رہا ہوں. अपने आतमों को मुझे बनाने के. अपने आत्मों को मुझे बनाने के मैं
तमें कले लगा रहा ह�
तुम्हारी
जैसे
जो सांथ हैं वो थिर्थ के स्थाल हैं ये श्रोखा आज बताने पढ़ते हो ये दूरा हैं गुर्शली यूर्पे नहीं रहे हैं थिर्थ के स्थाल की आत्रा की جو سنت ہیں اکثر ہم جاتے ہیں تیر کے اسطان میں پاک کے بوجھے کو چھوڑنے کے لئے جو سنت ہیں تیر کے اسطانوں کا نیرنے اپنے ہندے پر گھڑاتے ہیں جہاں جاتے ہیں لوگوں کو پربابند کرتے ہیں کس کے ساتھ؟ روائے کے سنتے کے ساتھ چھے دنوں باہر پر پھر پھر پھر پھر پھر پھر پھر پھر پھر پھر پھر پھر پھر پھر پھر پھر پھ अदने आग को परतपना लेंगे। और फिर चेतने मुझे सनाधर में देखा, सनाधर को ताफ़र मिर्चा ने कहा, मैं तुम्हें नए कपड़े लेता हूँ प्रीकार, तो नए कपड़े पहना। तुम्हें कपड़े सब बन लेते हैं, पहारों तो सनातन के आगे आद मुझे कोई देला चाहते हैं तो कोई पुराने कपड़े दो, नए कपड़े दे. महा प्रभू बड़े प्रसेन होई थे, कि त्याँ पड़े दे. महा प्रभू भी देखा की, सनातन ने देखा की, महा प्रभू उसके नेंगे कंबल पर शौ कोड़का द तो सुनासन समझ गए, कि महागव खुश नहीं है, कि मैं संत्यागी हूँ, और मैं इसे महंगे चादर को होड़ लाओ। तो सुनासन भर्मा के तरपर गए, जहांके एक बुड़ा, बंगाली संग, पढ़े कंबल पहने करे, मیں कमबन देना चाहता हूँ इसके
बाद मुझे फटवा कमबन देना चाहता हूँ।
मुझे मेरा पागा देना रहता हूँ। मुझे फटवा कमबन देना चाहता हूँ। मुझे फटवा कमबन देना चाहता हूँ। پہنچیں، کس کے سمجھ؟ مہا پبھو نے یہ دیکھا، سنانا نے کوئی قطعہ سنائی، مہا پبھو بڑھے پڑھتے ہیں، مہا پبھو نے کہا تھا ایک اچھا ڈاکٹر، بیماراں جیسے جب علاج کرتا ہے تو علاج کا بیماری کا قارن ہے اس کو energy دیتا ہے، اس کو بھی تھی کرو مانلا آپ کو پہ بیماری ہے بیماری کا کارن تھا آپ بہت میتھا کھا رہے ہو اتنی ڈائیبیٹیز ہو گئی تھی. مہاجرد نہیں آپ کو انژیکشن دے گا. کوئی ڈاکٹر نہیں. ساتھ میں یہ بھی کہے گا میتھا مات کھاؤ. اگر آپ کو میتھا کھانے دے گا تو دوائی کا کیا تھا. तभजेत नے مہاجرد نے کہا भी भुती मान डाक्टर مہاں اور منیج کا ایرانش کر جائے بیماری کا جو کارن ہے وہیں لے جائیں۔ تو مہا پھر وہ بڑے پرسنز ہوئے
سنادھوں کے یہاں کے پاس ہوئے تھے۔
کہنے کا طاقت بھی یہ تھا سنادھوں نے سنیہاں شکار کیا، ستیار کا جیوز
ہوئے تھے، سالہ جیوز ہوئے تھے۔
تو اس وقت ان گھرندوں میں भगवान की और उनके भगवं की अनेक लीलां को पढ़ना हैं येन हम धारण होए अनुकुल काये करते हैं अतिकुल की क्यार क्यार हैं ध्यान रोगते हैं आप देखा ना पज्यालपा में रहना हैं बहुत एक इच्छाओं को पढ़ाये रहे हैं जन संगर्ष्ट लोग योग चार सभी पक्ति तुनिर्श्ट लोग योग चार सभी पक्ति तुनिर्श्ट लोग योग चार सभी पक्ति तुनिर्श्ट लोग योग चार सभी पक्ति तुनिर्श्ट लोग योग चार सभी पक्ति तुनिर्श्ट लोग योग चार सभी पक्ति � پھر बगवाई इस दिधारे मेट्री की सेवा पुरी देंगे एक समय एक भक्षा उसकी इंशा थी कि जो हमारे शेहर का सबसे प्रसित ब्याक्ती है उसकी सेवा मुझे करने का मुक्षा थी समय बड़ा खो जा लोगों को पुछो क
उन्हों
लोगों ने कहा वो जो बड़ा सेट है न सब आते उनके पास सालाफ कर देते हैं। उन्होंने उस सेट से कहा, मैं तुम्हारे हैं, सेवा कर सकता हूँ तुम्हारे? तुम्हारे सेवा कर सकता हूँ। पिर वो सेट ने देखा, यह सेट
है,
वो भी सरकार के खयजान जी सरको सलाम करता है खयजान जी आता है और जो मालिक है उसको नमत से सलाम करता है तो समझ गया ये जो सीट है खयजान जी इसका पाद उन से जादा होता है फिर उसने देखा ये जो सरकार के खयजान
जी है वो
प्रणानत्मन्दी की सेवा में जोड रहता हूँ।
प्रणानत्मन्दी की सेवा में जोड रहता हूँ।
फिर उसने देखा प्रणानत्मन्दी की सेवा में जोड रहता हूँ। फिर उसने देखा प्रणानत्मन्दी की सेवा में जोड रहता हूँ। फिर उसने देखा प्रणा वो भी किसी
और के साँगे देते हैं। वो भी किसी और के साँगे देते हैं।
वो भी किसी साँगे देते हैं। वो भी किसी और के साँगे देते हैं। वो भी किसी और के साँगे देते हैं। کیوں کہ اچھا دے چاہتا ہے کہ اُس سب سے پریشید اوچھا بیوٹی ہے۔ تو اُنسائی ہونا چاہیے۔ کیوں؟ اپنی ستارین بیوٹی کے سیوہ کھڑی کریں۔ اِس کی سیوہ کر رہے ہو؟ تو اُنسائی کریں۔ پھر آگے کیا کہاں؟ ڈھکھھھھھھھھ۔ असी रक्षक कौन हैं कौंत या पंचा नहीं नहीं पंचा पंचा पंचा पंचा पंचा
पंचा पंचा पंचा पंचा पंचा पंचा पंचा
पंचा पंचा पंचा पंचा पंचा पंचा पंचा पंचा पंचा प प्रिवासुन के प्रिवासुन
के
प्रिवासुन के प्रिवासुन के प्रिवासुन के प्रिवासुन
के प्रिवासुन प्रिवासुन के प्रिवासुन के प्रिवासुन
के प्रिवासुन के प्रिवासुन के प्रिवासुन के प्रिवासुन के प्रिवासुन के प्रिवासुन
तो के
देवयोदा ते कहा यहाँ से आपने मेरे घहर को पगुँतर वनाया हैं। मेरे भाई के घहर को पगुंतर वनाया हैं। पर उनके आपको पहुँचना सुप्रया कैसे हैं। तो जिवी वाल तो उनके साथ क्यों देते हैं। हाल रूँ सुप्रयाज किया था पांद भायों गुर्वासमो जी अपने अजारों सीछों को देकर पोंच करें कहा हम प्रिजिक्सी के लिए स्वागती हैं और कहा आये भोजन थाई शास्त में तो आ गया है शत्रु बिया के घहर में आए प्रिशान
नहीं
खा सकते तो जल देते तो जल भी दे सकते तो बैड़े का अस्थान ही देते तो कम से कर मिझे शब्द उनस पिकार कर। उनकी गवादीती आयें हुआ मंगें और उन्हें बिठाकर जहरम प्रिशाद करें।
इसलिए यही होने हैं कि प्रिशाद करें।
तो युदेशिन ने इसलिए कहा था आओ प्रिशाद करें। युदेशिन ने जत्योपरी से कहा था तो से जान लोगों में प्रिशाद कर प्रिशात थाने के लिए کہاں کوئی سمیدہ نہیں ہے تو اُن کے مند میں और चिंचा हो गए। कहें ज़्वासा को मुझे धोका रहा हूँ, मुझे श्राप नहीं दे। ज़्वासा मुझे कहें कहने कहने करते हैं सरसर परसुन होते हैं सर� جیسے ہماری فیصلہ ہے مہمہ نے کہا برتل دکھاؤ جس میں تمہارا فوکس بناتے ہیں تو مہمہ نے دیکھا ایک چھوٹی سی سبجی کا ٹکڑا کھا سوا تھا ایک برتل
کی کونے میں مہمہ نے اُٹھا تُن
کے لئے کچھ نہیں ہے جیسے اُنہوں نے کھایا تو مہمہ صاحب مہنی اور اُن کے ساتھی تھے سب کو ہی ڈھنڈ پچھتی ہیں अच्छी आती है तो गुर्वासांपुरी समझ गए अपना ये पुरी जीदा लेती है तो जब मिहारा साथ कहतों अम्गेशांपुरी जीदा लेती है जिवराईशांपुरी के पतकी सत्य भाव नहीं आती है तो सान अच्छी आने लगे तो जब अच्छी आने مجھ سے گھر میں اُنہوں نے بڑا بھندارہ پیار کیا ہوگا ہم کچھ کھائیں گے نہیں ۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔ तुम्हारे तुम्हारे पाक्तों की खाई में भोजन तिया आ रहे हैं। बहुत जुन्दी से पुरोथी थे शान महाल में बैट करें। वो तो भाग के चले गयें। हमें इस वकर हमारे शास्म में लाकों धारण हैं। हमारे में एक विश्वास देना चाहिए कि कौन है प्रापरी सात्रों में क्या कहते हैं अन्ते मंते मुझे प्रापर प्रापर प्रापर प्रापर प्रापर प्रापर प्रापर प्रापर प्रापर प्रापर प्रापर प्रापर प्रापर प्रापर प्रापर प्रापर प्रापर प्रापर प्रापर प् जिस पकर आज पेड़ के जर में पाली दालते हो तो
जब वहाँ पुरे पेड़ में आ जाते हैं.
पेड़ में भोड़े दालते हो श्रीग के साने अंगों में उसका प्रभाव होते हैं. इसी पकार जिसकों पक्ती द्वादा क्या लाव होता है? पेड़ से म� کہ आपने देपं की पूछा करनी हैं तो धी देच करो देच से देपं की तस्वीले काम कारा पड़ा है। आपको बुला पांगरी के लिए देना पड़ा है। बड़ा सर्वाइग विश्विन को बाड़ा है। बाजवा अध्याविभाग क्या है? अध्याविश्विन क ہماری اچھا کو بھگوان کی اچھا ہونا چاہے جو ہم چاہتے ہیں وہ ہی ہونا چاہے بھگوان کی اچھا وہ ہماری اچھا اور بھگوان کی کیا اچھا ہے ہم سب جڑے کس میں سیوہ گی سیوہ دھماں پیٹھا جاں مہمیگم سیوہ دھماں پیٹھا جاں مہمیگم سیوہ دھماں پیٹھا جاں مہمیگم سیوہ دھماں پیٹھا جاں مہمیگم سیوہ دھماں پیٹھا جاں مہمیگم سیوہ دھماں پیٹھا ج सब धर्मों को छोड़कर किस जीज़ नहीं करो. तो आप अमरिशनार्ण को धारण देखते हों कि इसको क्या बात है अमरिशनार्ण है. अपने हिसानी इंजियों लोग के होगे हैं कि इसलिए इंजियों लोग के होगे हैं कि इसलिए आजका सब के पास स्मार्फूर اگر سمار فوند ہیں گلسنگ بھی ہے کرس بھی ہے اگر تھا آپ نے بھائو بھائی کے بھڑا ضرور رکھنا ہے وہاں کی گھنٹوں کی تصویر رکھنی ہے پھر تو ایک گلسنگ ہے اگر آپ سمار فوند دوارہ سلمہ رکھنا چاہتے ہیں وہاں پھر رکھنا چاہتے ہیں یہ سمار فوند کیا ہیں यहाई से माया में करते हैं। मैंने कहा एक बोह पड़ा खड़ी करती हैं।
पूफट।
पूफट से खड़ी करती हैं।
पिल्केट करता हैं।
तो उस लिए उसने कहा, फेस्बो के लिए स्मार्ट्वोन के लिए स्मार्ट्वोन के लिए
स्मार्ट्वो
وہ رول کیوں کر رہی ہے؟ کیوں کہ ہم اُس کا رول کر رہے ہیں۔ اگر آپ اُن کا صورتیوں کرو، روپے دے دو، تو فقروں کا بھاہ رہ لے لکھے۔ نیتو دوارہ دماؤں پیدا شروع ہانو دوارہ دماؤں پیدا شروع، جی دوارہ نام دوارہ دماؤں پیدا شروع، پیانو دوارہ نام دوارہ دماؤں پیدا شروع، پیانو دوارہ دماؤں پیدا شروع، پیانو دوارہ دماؤں پیدا شروع، پیانو
دوارہ دماؤں پیدا شروع، پیانو अपने
सिश्यों को अदेश दिया भारती समंदर ग्रह्तु की रच्षण के लिए। पर स्वाइवों के वाल आश लोग दे गए जेने अपने इस नाम से जाने के लिए। پہلے ناشت لوگوں میں پورے مہیدی ساہی
کے قابل سمجھ پراتے ہیں سمجھتے ہیں
ہم اوپر کیا کام ہے نا نبی سلی جی نتیارہ اوپر کی سمجھ پراتے ہیں تو یہ ہاں ہم سب کو ایک بھول گئے ہیں بہت ایک سپانچ میں ہم سوچتے ہیں अगर हम मिलंबर रहेंगे लोग होना खाइदा उठाएंगे। Everybody is going to walk over me. सब मेरे मुफ़े चला किया होगा। तो मिलंबरता को भौतिक समाल में क्या? हमें मानी जाती हैं। पर अन्धात्मिक शेवतमें मिलंबरता एक गुन है। पिरिशनात कामराज कहते हैं اگر ہم یہ نہیں سوچتے اگر ہم نمبر لیں گے کہاں ہو لو کھڑا ہو اسی محبوب ہے کہاں ہم نمبر لیں گے کہاں
ہو لو کھڑا ہو اسی محبوب ہے کہاں ہم نمبر لیں گے کہاں ہو
لو کھڑا پھر ہم اس بھاو میں ہری کا نام سدا لے سکیں پھر ہری کا نام لے رہا ہے اتنا سدا لیں گے پھر ہم پیاس کریں کہ ہری کا نام سدا لے سکیں پھر ہری کا نام لے رہا ہے اتنا سدا لیں گے पिरा जादा सर्वधा के साथ क्या कर सकते हैं जो कि हम सब को होते हैं तो इस लोग में चेतने महा परभूर को हमें उपदेश देते हैं कि इस पकार
हमारे के शर्णगत हो सकते हैं और
शर्णगत होने के विपारों का में जियां देते हैं और साद्व सर्वित है
तो
हम सब को प्रयास करना चाहिए, आप मेंने किते भक्तों का एक सभाव है, कि आप हमारे विशयनगर को न करते हैं। आपका विशयनगर आपके लिए हैं। विशयनगर नहीं होना चाहिए, नाम के लिए होना चाहिए। कई बार हम नाम के लिए विशयनगर होना � प्रापा ने कहते थे आप प्रियास करेंगे भगवाद नहीं समझने के लिए एक एदम उड़ाओगे तो भगवाद 10 एदम उड़ाओगे तो इन ग्रहन्तों में आपके योगे महिमा का ज्यान है प्रियास करने हैं परमपरमारा नमच्छते हैं अगर प्रियास
करते हैं
अगर प्रियास करते हैं परमपरमारा नमच्छते हैं अगर प्रियास करते हैं अगर प्रियास करते
हैं अगर प्रियास करते हैं परमपरमारा नमच्छते
हैं अ�
तो तीन कोडों का प्रभाग बहुत जादा होता हैं।
जब प्रतिकुल सिच्वेशन्स होती हैं तो तीन
कोडों का प्रभाग बहुत जादा होता हैं।
तो ऐसे समय में एक सिरोफाई डेवोटी
पीछिंग साथ प्रभाग से पहना है। जब प्रतिकुल सिच्वेशन्स ज्यान पर पुछाप करें जिसे बहुमान कहते हैं देवेजे गुणमायू बहुमाया के लिए इस माया का प्रोल करना बहुत मुश्कल है तो आप कहोंगे बहुमान कुछ कहते हैं मुश्कल है आप क्यों कहते हैं मुझे शनकर करते हैं आगे बहुम अगर तुम देरी शर्ण में आओगे तो इंदु की काई जो कठे रहे हैं सर्वनता है। तो ओधिक समाल में ओधिक जगत के तीम गुणों का प्रभाव दो रहेगा। अगर हम सावधान रहेंगे तो इंदु के प्रभाव से बच सकेंगे। आप बहुमें चाहिए जो गाड़ी चिला रहे हो, एक मिनत बिस चैक बजाओंगे, एक
बिस चैक बजाओंगे, एक बिस चैक बजाओंगे,
एक बिस चैक बजाओंगे, एक बिस चैक बजाओंगे, एक बिस चैक बजाओंगे, एक बिस चैक बजाओंगे, एक बिस चैक ब आदत देते हैं कार्जार पुरा अंकार लगेते हैं तो इसे कैसे होते हैं? च्राइ, च्राइ अभी यहीं बोल सकते हैं तो आप हमें हरती च्राइ होते हैं हम यहों भी नहीं करते हैं कि एक जुनिया तब स्वर्भाद पर जाओगें पर अगर हम आपकी कुछ जब पालब करते वहाँ देना के क्या किया है। जो प्रयास करते करें शिर्णकत होने के लिए उन्हें कुछ कवें भी होता है, मैं दूर। हम सबने कहीं टूटिया हैं। हम सबने कहीं क्या है कि यहाँ
ही नहीं प्रावा है।
तो अगर हम इस सिक्षा के प्रावान देती हैं, तो प्राव अगर आप करते हैं, आप करते करते करते करते करते
करते करते करते क�
हम प्योर देवोडी नहीं होते हैं जब हम प्योर पाथ करते हैं हम प्योर देवोडी के लिए इंस्ट्रक्षिन करते हैं हम प्योर देवोडी नहीं होते हैं हम प्योर देवोडी नहीं होते हैं हम प्योर देवोडी नहीं होते हैं
हम प्योर �
आपको अपने शास्ट्रों के लिए नहीं होते हैं, प्रापा शास्ट्रों के लिए नहीं होते हैं, सादुला शास्ट्रों के
लिए नहीं होते हैं।
आपको अपने शास्ट्रों के लिए नहीं होते हैं, प्रापा शास्ट्रों के लिए नहीं होते
हैं, सादुला शास्ट्रो
प्रटेक्ट के लिए भूल नहीं होता है। आपको बहुत प्रटेक्ट के लिए भूल नहीं होता है। यह नहीं है। वो बहुत बहुत कहते हैं हमारी स्वच्च होगी तुम्हें बिमाड नहीं होगी। मैं स्टॉक मार्के में खाता किया हूँगा।
पर
मुझे पड़ी नाम ह ہمارے
ساتھ ڈالنے کا مطلب ہے کہ ہمارے ساتھ ڈالنے کا مطلب ہے کہ ہمارے ساتھ
अपने प्रास्था प्रास्था प्रास्था प्रास्था प्रास्था प्रास्था प्रास्था प्रास्था प्रास्था प्रास्था प्रास्था प्रास्था प्रास्था प्रास्था प्रास्था ہمارے پاس ایک بہت प्रास्था بڑا محفوظہ ہے۔
More from PRASAD

Rare Pastimes & Timeless Lessons of Guru Mahārāja | Stories Every Disciple Should Hear

ISKCON Legends- pure devotees meet-HH Jayapataka Swami, HH Gopal Krishna Goswami, HH Radhanath Swami

Jagannātha Ratha-yātrā Through Śrīla Prabhupāda's Mercy | 29 April 2006 | Nairobi, Kenya

Lord Jagannātha's Appearance Pastime | 21.07.2019 | ISKCON Calgary | Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

The Ācārya Teaches by His Own ExampleGuṇḍicā Mārjana by Guru Mahārāja #shorts

Guṇḍicā Mārjana – Lord Jagannātha's Pastime | 21.7.2019 | ISKCON Calgary |Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

H.H. Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī Mahārāja - Exemplary Sādhana and Deity Worship # shorts

भगवान की कृपा कैसे प्राप्त होगी ? | 11 Jan 2014 | Punjabi Bagh | Srila Gopal Krishna Goswami

Material Education vs Spiritual Education | Srila Gopal Krishna Goswami #shorts

