भगवान अपने भक्तों की किस तरह रक्षा करते हैं? | Damodar Lila | 21 Oct 2005 | Gopal Krishna Goswami

In this extensive Hindi devotional lecture, Gopal Krishna Goswami expounds on the Damodara Lila, illustrating how Lord Krishna, the supreme deity, controls even the highest gods—Brahma, Shiva, and Indra. He recounts several childhood pastimes (Bal‑Lilas) such as the Putana episode, the Kansa‑plot, the butter‑stealing antics of the Gopīs, and the divine rescue of Yashodā’s child, emphasizing that all divine powers ultimately submit to Krishna’s will. The speaker stresses that true protection for devotees comes from continuous remembrance of Krishna through the Maha‑Mantra (the 16‑mala chanting) and from sincere bhakti. He interprets the symbolic “two‑finger” teaching: one finger represents personal effort, the other divine grace, both required for spiritual realization. The discourse also links scriptural references (Bhagavata‑Skandha, Gita) to practical guidance—daily chanting, singing of Krishna’s pastimes, and service in temples—as the path to attract Krishna’s mercy. Throughout, the tone is reverent, enthusiastic, and persuasive, urging listeners to adopt relentless devotion to experience Krishna’s protection.
Chapters
ओम नमो भगवते वासुदेवाय, ओम नमो भगवते वासुदेवाय नम भागते बस देवाय, हे महाराज, भगवान शिव, भगवान ब्रह्मा, भगवान इन्द्र जैसे महान एवं ऊंचे देवता समेत। ये सम्पूर्ण भवन भगवान के वश में है। फिर भी भगवान का 1 दिव्य गुण यह है के वे अपने भक्त के वर्ष में रहते हैं। यही बात इस लीला में द्वारा दिखाई गई है। तो इस लीला का अर्थ क्या हैं? ये दामद लीला और कार्य के महीने में हम दाम प्रार्थना का उच्चालन करते हैं। हरी भक्ति विलास में सनातन को स्वामी जी कहते हैं की अगर इस दाम और कार्य के महीने में हम रोज इस दाम का उच्चारण करेंगे जिसके द्वारा हमारा आकर्षण भगवान दामोदर के प्रति बढ़ेगा। भगवान के अनेक नाम हैं जिनमें 1 नाम है दामोदर और इस दामोदर लीला का वर्णन भागवत स्कंद के नौवे हाय में प्राप्त होता है। इस लोक में प्रेशर क्या कह रहे हैं? कह रहे हैं, शुक्रदेव को, स्वामी जी कह रहे हैं, भगवान शिव, ब्रह्मा तथा भगवान इंद्र। इन्हें ऊँचे देवता माना बताया गया है। इस लोक में कितने देवता और देवियां हैं? तेतीस करोड़ पर सब ऊँचे नहीं है। ब्रह्मा जी, शिव जी, इन्द्रा जी, इनको, इन अनेक देवताओं में ऊँचा देवता कहा गया है। खासकर के इस लोक में और कहा गया है कि जो ऊँचे देवता हैं वो भी इस ब्रह्मण के भगवान के वश में है। दूसरे शब्दों में जो ऊंचे देवता हैं वो भी भगवान श्री कृष्ण के वश्व है और इसका प्रमाण आपको भागवत के दसवें स्कंध में प्राप्त होता है। जैसे कि ब्रह्मा जी, ब्रह्मा जी ने 1 समय गोपी वालों को और बच्छड़ों को छुपा दिया था, वो देखना चाहते थे इस बालक में कैसी कितनी सीम शक्ति है और भगवान को पता था कि ब्रह्माजी की चापलूसी है इन ग्वालों को और बच्छड़ों को उन्होंने छुपाया है किडनैप कर दिया था वो ब्रह्मा जी ने ने सुला दिया जैसे ऑपरेशन के समय डॉक्टर जी आपको क्लोरफार्म देते हैं तो ब्रह्माजी ने क्लोरफार्म देकर उन्हें सुला दिया 1 साल के लिए और भगवान ने क्या किया, अपना विस्तार किया और विस्तार करके ब्रह्मा जी समझ पाये की उनकी जो योजना थी वो सफल नहीं हुई। फिर ब्रह्मा जी ने भगवान से माफी मांगी और बड़ी सुन्दर स्तुतियों द्वारा भगवान का गुणगान किया और भगवान से प्रार्थना की क्या मुझे भविष्य में जन्म मिले 1 बड़े निमृत रूप में वो जन्म न्हें प्राप्त हुआ किस रूप में हरिराज ठाकुर के रूप में? फिर इंद्र जी, इंद्र जी भी कई बार घमंड हो जाते हैं जब उन्हें पता लगा कि भगवान के प्रया प्रणाम प्रभाव से बृजवास इंद्र यज्ञ रोक दिया है तो ब्रह्मा जी भी क्रोधित हो कर इंदिरा जी बी क्रोधित होकर उन्होंने बड़ी बड़ी तेजी के साथ वर्षा, भेजी और पानी का हर बूंद जो था 1 खम्बे जितना भारी था और भगवान ने बिजवासन की सुरक्षा कैसे की, कैसे की गोद पर्वत को उठा कर थोड़े ही हफ्तों में आप गोदान पूजा बनाओगे और फिर इंद्र जी ने भी स्वीकार किया इंद्र जी ने देखा की उनका को जो था वो सफल नहीं हुआ। फिर इंद्र जी भी भगवान के गत होकर उनसे सवा मांगे। शिव जी, शिव जी के 1 नाम है जिनमें 1 नाम है। आशुतोष आशुतोष का अर्थ है जो कि बड़ी सरलता से प्रसन्न होते हैं और बड़ी सरलता से क्रोधित हो जाते हैं। तो शिव जी ने राक्षस को 1 बार दे दिया था कि जहाँ भी वो अपना हाथ रखेंगे, उसके नीचे जो भी होगा वो फट जायेगा। और बेकसूर को जैसे ही वर प्राप्त हुआ, उसने अपना हाथ फैलाया कहा शिव जी के माथे के ऊपर रखने के लिए। और शिव जी को दौड़ना पड़ा, जहाँ वो दौरे का सुरके पीछे पहुँच गया था। अंत में वो श्वेत में पहुँचे। यहाँ के भगवान ने 1 ब्रह्माचारी का रूप धारण किया था। और जब वहाँ ये कसूर पहुँचा ने कहा भाई, तुम किसका पीछा कर रहे हो? इतनी तेजी से भाग रहे हो? क्या कह रहा? मैं शिव जी का पीछा कर रहा हूँ, क्यों? क्यों? क्यों, क्यों पीछा कर रहे हो? उन्होंने मुझे वर दिया है, जहाँ भी मैं हाथ रखूंगा, उसके निचे जो भी है वो फट जाएगा। और मैं अपना हाथ रखना चाहता हूँ। ने सिर। पर भगवान ने कहा अरे भाई, तुम जानती नहीं, जब से शिव जी का झगड़ा होता, दशा के साथ उनके बडों में इतनी ताकत नहीं है। तुम पहले आजमा के देखो। तो सही की वर्ड झूठा है या सच्चा झूठा है। तो फिर तुम्हें मारने का अधिकार है। बिना कारण मारोगे तो पाप कमाओगे। तो विकास का। यह बात तो ठीक है। जैसे ही सर ने अपना हाथ फैलाया, अपने सिर पर अभ्यास करने के लिए, वर्ड सच्चा था, झूठा था, क्या हुआ? उनका जो सिर है वो फट गया। तो इस प्रकार शिव जी भी भगवान के गत है। तो ये जो ऊँचे देवता हैं,
ये
सब कुछ भगवान के वश हैं। तो उस उचित भगवान, वो भगवान जिसके वर्ष में पूरा है, वो क्या किस के वर्ष में आ सकता है? क्या आ सकता है? आ सकता है किसके वर्ष में, आपके वर्ष में हाँ किसके शुद्ध भक्त के वर्ष में और वो प्रकट होता है इस दाम लीला के द्वारा। तो ये दामद लीला क्या है। दाम लीला प्रकट करने से पहले भगवान अनेक और लीला को प्रकट कर चुके थे। जैसे की पूतना राक्षसी जब आई थी, फिर अगर सुरा का विवाद हो गया था। फिर शकल सूर को भी भगवान ने देके नीचे गिरा दिया था, चिनार था। कंस के आदेश के अनुसार भगवान को भगवान का वध करने के लिए माता रसोई बना रही थी और अपने बेटे को उन्होंने पास रखा था। तो जैसे ही रसोई बना रही थी, वह तेजी से नदी अन्दर तूफ़ान आया। क्या आप 1 दूसरे को देख भी नहीं सको? और तूफान जैसे ही आया, इतना इतनी धूप थी कमरे में कितना वतन है? उस में भगवान को उठा लिया हवा से। और पहले तो माता को पता नहीं लगा। फिर जब माता ने धूल में अपने हाथ को, फैलाया ने बेटे को छूने के लिए देखा, वहाँ तो बेटा है ही नहीं, वे माता निराश हो गये, बेचैन हो गयी, रोने लगी,
क्या किया
भगवान को उठाकर बोले जैसे ऊपर, ऊपर हवाई ऊपर जाता है। और क्या विचार था ऊपर से फेंक देंगे नीचे, और भगवान ने पहले तो उसे उठाने दिया, फिर जैसे वो ऊपर उठा ले गया, भगवान ने अपना वजन बढ़ाया, इतना वजन बढ़ाया के अंत में ही गिर गया। तो जब ये अद्भुत घटनाएँ बीत गई थी, कभी अगुत घटना बीत गयी थी, तो माता सोचती थी मेरा कोई देवता तो नहीं है। ये वो छोटे से ही थे, पूतना राक्षसी आई थी, अपने स्तन में झर था, इस विचार के साथ आई थी कि जहर पिला कर उनका वध हो जाए। और जब पूतना की ये देखिये लीला सुरा की ना, तो सोचने लगे की मेरा बेटा दिखता तो नहीं है, नारायण का रूप तो नहीं है ये भगवान की योग माया शक्ति के द्वारा, उनके भाग जो है, ये नहीं समझ सकते की वो सोयम भगवान है क्यूँकी? अगर वो समझ जाए की ये सोयम भगवान है, फिर वो रास चिंता ही समाप्त हो जाएगी। माता को सदा चिंता थी मेरे भी हो तो नहीं, अगर मैं खाऊंगी तो भूखा रह पता स्वयं भगवान है, भगवान का भूखा रहने का प्रश्न ही नहीं उठता। तो भगवान की योग माया शक्ति के द्वारा माता पिता का रूप धारण करते हैं, ये नहीं समझ पाते कि स्वयं भगवान हैं तो ये श्रोता माता है। ध मथुरी थी और बताने की रस्सी के साथ मक्खन निकाल रही थी। है जो उन दिनों में, हम तो आजकल बड़ा गमन रखते हैं की हमारी टेक्नोलॉजी बहुत ऊँची हो गई है। उन दिनों में जो घास थाना घास वो भी अलग अलग सुगंध का मिलता
था
में चले जाओ। आपको 1 ही सुगंध का घास मिलता है, चाहे अमेरिकन घास हो या इंडियन घास हो उसमे कोई सुगंध है ही नहीं। आरोप 5000 साल पूर्व जब भगवान कृष्ण पृथ्वी पर थे, अलग अलग सुगंध का घास मिलता था, जैसे आजकल लेते अलग अलग सुगन्ध की चंदन वो क्या क्या सुगंध है औरतें फ्रेगनेंस लेती है अलग अलग परफ्यूम अलग अलग फ्रेगरेंस के, तो घास भी होता था अलग अलग सुगंध का और जिस सुगंध का घास गाय खाती थी उसी सुगंध का दूध भी निकलता था, देखो आपको आज कल तो दूध भी निकालता है सारे विश्व में 1 ही सुगंध का है
जिस सुगंध
का घास खाती थी गाय उसी सुगंध का दूध भी निकलता था, दूध में भी सुगंध होती थी, यह नहीं की आपको चीनी डालना कुछ शरम डालना नहीं दूध जो निकालता था, गाय सी सुगन्ध दूध निकालता था। तो यशोदा माता को बकायदा ये शिकायत आ रही थी। क्या आपका बेटा जो है हमारे घर में आकर क्या चुराता है और मक्खन के साथ क्या है? तोयुषोदामाता कहती थी क्या मेरे घर में मक्खन की कमी है? क्या आपके घर में आएगा आपके पास कोई है क्या? क्या खाते हुए, चोरी करते हुए, फिर तो तुम छुपा क्यों नहीं देते। तो कहती थी गोपियां हम छुपाते है और वो वहाँ भी पहुँच जाते है, हम ऊपर छुपाते हैं, सेल्फ मे के कोने में, वहाँ भी पहुँच जाते हैं, अंधेरे में भी पहुँच जाते हैं, अंधेरे में कैसे पहुँच जाते हैं। उनके शरीर में
जो गिने हैं,
उनमे से इतनी रोशनी निकलती है। रात के समय के किसी कोने में भी हम छुपाएंगे वो देख लेते है। यशोदा माता कहती थी, ठीक है, शरीर नहीं देख सकेंगे। रात के समय का छुपाया है। पर गोपियों का इतना आकर्षण था, भगवान के प्रति उन्होने नहीं चोरी करने। 2 पर उनके गहने मत निकालना, तो युशोदामाता के मन में 1 और भ्रम पैदा हो गया था। वो सोच रही थी की मेरे घर में जो मैं मक्खन और दूध बना रही हूँ, वो शायद इतना अच्छा नहीं है। और पड़ोस के घर में जो मक्खन बन रहा है और वो ज्यादा सुंगंधित हैं। इसलिए शयन मेरा बेटा वहाँ जाता है चोरी करने के लिए। कई बार बच्चे किसी और के घर में ज्यादा खाते हैं, कम खाते हैं। तो माता पिता को लगता है कि हम खाना ठीक नहीं बन रहा। तो माता के मन में ये आ गया था की पड़ोस की गोपियों के घर में 1 जो दूध है और दही है, वो ज्यादा सुंगंधित है। और मेरा मेरे घर का दूध और दही इतना सुगंधित नहीं है। इसलिए मेरा बालक पड़ोस के घर में शायद चुराना। तो बड़े ध्यान पूर्वक हो कर।
मखनी की रस्सी से
मक्खन निकाल रही थी और साथ में कड़ाई में दूध उबल रहा था। माता के घर में हर का जो किया जा रहा था,
कृष्ण की सेवा के लिए। 1 तरफ ऐसी मथानी की रस्सी से भी निकाल रही थी, दूसरी तरफ ऐसी
पड़ोस की आग में कड़ाई में दूध उबल रहा था, दूध भी भावना से दूध से पहले, बाद में दही बनायेंगे। तो हर कार्य जो है किसके लिए हो रहा था। कृष्णा, क्ले और साथ साथ
ये सौदा
माता उन्होंने गीत की रचना की थी। शी, कम्पोज, पोयम, वो गीत की रचना में उन्होंने भगवान श्री कृष्ण की बाल लीला, जो बीत गई थी, उसका वर्णन किया था। अब समझे न, पूतना की लीला बीत गयी थी, अगर की लीला की लीला बीत गयी थी, 3 वर्ष की लीला बीत गई। तो माता ने इन 4 घटनाओं को
लेकर 1 गीत बना दिया था। मथनी की रस्सी से
मक्खन निकाल रही
थी,
आग में में दूध उबल रहा था और साथ में क्या कर रही थी, क्या कर रही थी है वो लोग? गीत गाड़ी थी, वो गीत में क्या था, भगवान की लीलाओं का वर्णन भगवान करे तो हम भगवान का स्मरन भी कर पाएंगे। प्रलाद पूछा गया कि भगवान के शरण कदम कैसे हो सकते है? तो भक्ति का उपदेश दिया जो इस प्रकार से है। श्रम नाम कृत्राम विष्णु स्मरणम कि आप सन कितना करोगे? फिर विष्णु स्मरण कर पाओगे पूजा भगवान चैतन्य महा प्रभु अपने साथियों के साथ गुंडिचा मंदिर को साफ कर रहे थे और उसमें अनेक भाग जुड़े हुए थे, पानी ला रहे थे, झाड़ू से मैं थे और ये सारे के सारे ये प्रयास करे क्या करे थे।
हम भक्तों से क्या सीखना चाहिए। क्यो
क्या करना चोरी महा मंत्र का उच्चारण हमे भगवान की बाल लीला के गीत करने की नही हम महा मंत्र का उच्चारन करे निरंतर तो हम भगवान का स्मरण कर पाएंगे। हम सोचते है की 16 माला का जाप करो उसके बाद उच्चारण करना पाप है। पर हमारा प्रयास होना चाहिए की हम सदा दिन रात उच्चारन करते रहे और दिन रात उच्चारण करते रहोगे तो भगवान का स्मरण भी कर पाओगे, स्मरण नहीं कर पाते क्यूँ? क्यूँकि हम स्मरण नहीं कर पाते क्यूँ क्यूँ की हम भगवान का उच्चारण जो है बहुत कम मात्रा में कर रहे हैं।
1 तरह से माता को शिकायतें आ रही थी पड़ोस की गोपियों से की आप अपने बेटे को संभालो क्यूँ नहीं संभालते हमारे घर में आ के कर पाए। दूसरी तरफ ऐसी माता को लगा की ये कहीं कोई घर से भाग न जाए। तो माता ने कहा निर्णय किया मुझे अपने बेटे को बाप के साथ बहन के रखोगे तो साथियों के साथ मिलकर शैतानी निकाल सकेगा, बाहर के रखोगे तो घर छोड़कर भागेगा नहीं, बाहर की रखेंगे तो पड़ोस के गोपियों के घर से मक्खन नी चलाएगा हमारी इज्जत बची रहेगी तुमादेइनविचारो के साथ। 1 घर में थे भगवान को बांधने के लिए और उन्होंने देखा की 1 सी बांधने गए, हालांकि सी काफी बड़ी
थी,
वह रस्सी 1 रे से बांध नहीं पाए, इतनी बड़ी रस्सी क्यूँ।
2 उंगली छोटी निकल रही है,
घर मे जितनी रस्सियां थी ह उसे वैसे में जोड़ने के साथ ही ये रस्सी है। 2 ऊँगली छोटी निकाले जो नाटक कर रही थी बेटे को बांधने के लिए, इस समय जो पड़ोस की गोपियाँ थी वो सब नाटक देख रही थी। और जब वो देख रहे थे की यशोदा माता सफल नहीं हो रहे बेटे को बांधने के लिए, तो हंसने लगे ये देखो ये सौदा कितने बेकार की है। 1 छोटे बच्चे को भी बांध नहीं सकती। और माता 1 सी थी उनके शरीर से पसीना निकल रहा था, उनका से सर में बार सजे थे, फूलों के साथ फूल भी नीचे गिरे थे,
वो
दूसरे से सुना था, आनन्द उठा रहे थे, उन्होंने भगवान की असीम शक्तियों का
प्रदर्शन तो देख लिया था।
जब भगवान ने पूतना राक्षसी को मारा, चिनार को मारा, अगर सूरा को मारा, भगवान ने अपनी अद्भुत शक्ति का प्रकशन प्रद दे दिया था। 1 प्रदर्शन देख रही है भगवान की
असीम शक्ति का, फिर माता ने के जितनी रसिया।
2 सब महंगाई पहले तो अपने घर की रस्सियों को जोड़ा और वो सारी की सारी रसी देंगी कम निकली।
फिर माता ने ब्रज के दूसरे गोपियों
के घरों से भी रस्सी मंगाए आप रस्सी, 2 आप भी री, 2 आप भी रस्सी, 2 घर में गोपियों सबने री दे दी की
वो भगवान को नहीं बन पाए। इस से हमें क्या सन्देश मिलता है। इससे हमें यह सन्देश मिलता है
की
अगर आप भगवान को जोड़ना चाहो, भगवान को समझना चाहो तो केवल अपने प्रयास से ही समझ सकते। भगवान की इच्छा बिना आप उनको नहीं समझ सकोगे, यह आप धनी हो बुद्धिमान हो, ज्ञानी हो, आप सोचो की आप भगवान को आकर्षित कर सकते हो। तो भगवान ने देखा की सदा माता ने सब घरों की रस्सियों को जोड़ दिया है, जब भी वो बांध नहीं पा रही, भगवान ने देखा की पड़ोस की गोपियों उन पर हँस रहे हैं। भगवान ने यह भी देखा की सदा माता निराश हो रही, ह, बेचैन हो रही है, उनके पसीने निकल रहे हैं। तो भगवान ने दया ली अपनी माँ के ऊपर, और भगवान ने क्या उन्हें बांध ने दिया। तो ये है वो दाम लिला। 2 उंगलियां छोटी का अर्थ है महान। संत ने इसकी व्याख्या देते हुए कहा है की 2 उंगलियां छोटे छोटे कम होने का यह अर्थ हैं। 1 अर्थ यह है की अगर आप भगवान को समझने के लिए प्रयास करोगे तो ही भगवान को समझ सकोगे दूसरा है। दूसरी उँगली का अर्थ है की भगवान को समझने के लिए भगवान की कृपा चाहिए। तुम ही आप भगवान को समझ सकोगे। यह नहीं कि आप धनी व्यक्ति हो, प्रसिद्ध व्यक्ति हो, संस्कृत के विद्वान हो तो आवश्यक भगवान की असीम शक्तियों का प्रदर्शन कर सकोगे। तो भगवान गीता में क्या कहते हैं? यह ध्यान दे। जितनी श्रद्धा से कोई मेरे शरणागत होगा, उतनी मात्रा में मैं उसे बुद्धि दूंगा किसलिए मुझे समझने के लिए 2 छोटे। 1 उंगली का अर्थ है मेहनत करोगे, प्रयास करोगे तो ही भगवान को आप समझ पाओगे। और दूसरी उंगली का है। भगवान को समझने के लिए हमें भगवान की असीम कृपा की आवश्यकता है। और भगवान की असीम कृपा कैसे प्राप्त होगी? अगर हम प्रयास करेंगे। जैसे शास्त्र में वेदी भक्ति का नियम है, वही भक्ति का वर्णन है, तो वेदी भक्ति के नियमों का पालन करोगे तो ही आप भगवान को समझ पाओगे। अगर हम वेदी भक्ति के नियमों का पालन नहीं करेंगे, फिर आप भगवान को नहीं आकर्षित कर सकोगे। तो ये जो मिला है, उसे हम क्या देखते हैं? भगवान जो उँची देते हैं, ये भगवान
के वर्ष में हैं, भगवान किस के वर्ष में, किसे अपने भक्तों के वर्ष में है? भगवान जैसे की चप्पल भी उठाते हैं,
अपने सिर में, इस लोक के
उदाहरण देते हैं कि किस प्रकार बच्चों ने कहा है, मेरे रात को कहा, इन
2 सेनाओं के बीच में क्यूँ मैं देखना चाहता हूँ की कौन कौन उपस्थित है ये युद्ध के मैदान में, मेरे से लड़ने के लिए। तो दूसरे शब्दों में भगवान अपने भक्त के आदेश के अनुसार उसके ड्राइवर बन गये। पर सारथी भगवान के अनेक नाम हैं, जिनमें 1 नाम है। क्या नाम है शादी का, क्या कि अपने भाग के रथ को चला रहे थे। आप भौतिक दुनिया में देख सकते हो, क्या? कभी बड़ा आदमी ड्राइवर कर रहा है? और ड्राइवर साहब पीछे, बैठे, मालिक पीछे, मालिक ड्राइवरी कर रहा है? और नौकर पीछे बैठे हैं? नहीं तो भगवान अपने अर्जुन के कहने पर उन्होंने क्या किया?
अर्जुन के रथ को ले चला कर कहा।
2 सेनाओं के बीच में तो भगवान को आप जीत सकते हो। कैसे भक्ति के माध्यम के द्वारा और
कोई चारा नहीं है? भगवान को आकश करने के लिए अगर
आप भगवान को आकर्षत करना चाहते हो तो ये भक्ति 1 माध्यम है
कार्ति
के महीने में हमारा प्रयास रहना चाहिए कि हम सदा 24 घंटे इस दमदार लीला का वर्णन स्मरण करे और हमारा प्रयास होना चाहिए की हम दिन रात जितना भी हो सके भगवान की माला करे, भगवान का गुणगान करे, भगवान की लीलाओं का वर्णन करे इस प्रकार से हम करेंगे तो फिर हमारा आकर्षण पर भगवान के प्रति बहुत दया घटेगा
और
हमें जैसे 1
रस्सी से
मुँह से भगवान के लीला का वर्णन करनी थी तो इसी प्रकार हमे भी अपने सेवा के साथ जीव के साथ भगवान के गुणों का अनेक गुणों का गुणगान करना चाहिए जो कि हम कर सकते हैं किस माध्यम से इस हरिकृष्ण महा मंत्र के माध्यम से जैसे चैतन्य, महाप्रभु, जी, गुणित, मंदिर की सफाई करते हुए जीप के साथ भक्तों के साथ सदा हरी नाम का उच्चार हमें भी उदाहरण लेकर प्रयास करना चाहिए हमारी सेवा के साथ दिन रात महामंत्र का जाप करेंगे और अगर आप जॉब करोगे तो फिर अच्छे भक्ति में आगे बढ़ोगे। प्रापा जी उदाहरण देते थे के जब वो स्कॉटिश कॉलेज कैलकटा में पढाई करते थे तो उनका 1 प्रोफेसर था जो ये कहता था कि अगर आप सोचोगे कि जो पास के लिए मार्क चाहिए उतने नंबर आये तो फेल भी हो जाओगे जैसे भारत में पास होने के लिए कितने नंबर चाहिए होते 40 पर्सेंट या 33 है थर्टी फाइब तो समझो आपको पास होने के लिए थर्टी फाइव परसेंट मार्क चाहिए तो आप सोचो बस हमको तो थर्टी फाइव परसेंट चाहिए हमने तो खाली पास होने का सर्टिफिकेट चाहिए दिखाने के लिए दुनिया को तो फिर 4 थर्टी फाइव परसेंट भी नहीं मिले पर अगर आप सोचो की मुझे 80 पर्सेंट मार्क चाहिए तो थर्टी फाइब 40 परसेंट मिलने की सम्भावना है। तो पापा जी कहते थे की हम अगर सोचेंगे हमने खाली 16 माला करना है और फिर माला को छुपा देना है तो आप 16 माला भी ठीक नहीं करोगे और अगर आपका प्रयास है की आप दिन रात निरंतर जॉब करो फिर आप 16 माला भी अच्छी तरह करोगे हमारा प्रयास का रहना चाहिए कि हम दिन रात भगवान का गुणगान करे और इस दमनलीला का हमें स्मरण करना चाहिए हरे कृष्ण हाल kृsnhकशणहारेहाह।
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