The video records a Hindi devotional ceremony in which the organizers announce the new spiritual names for the deities that have just undergone Pran‑Pratishtha (consecration). The speaker invites Srila Gopal Krishna Goswami to bless the gathering and to pronounce the names. The talk then moves to a historical overview of the movement’s founding, the efforts of early teachers (referred to as ‘Baba ji’, ‘Papaji’, etc.) to spread Krishna‑bhakti across India and abroad, and the establishment of temples in Bombay, Gurgaon and other locations. Phase I of a new temple project is described as completed, with a promise that Phase II will follow, including plans for a larger complex and further community services. A large portion of the address is devoted to thanking donors, volunteers, and devotees for their material and spiritual support, and urging continued contributions, distribution of devotional literature, and participation in upcoming rituals such as Aarti and katha. The overall tone is reverent, celebratory, and forward‑looking, aiming to inspire gratitude and renewed commitment among the community.
Chapters
hrikusnaसोनow mharाgwillanouns, the name of the dts, becasstilnow dts were raधakृnatनomहाराज, विल, अनाउंस the new name to the डीटी राधा कृष्णा, अभी प्राण प्रतिष्ठा हुआ है। तो अब प्राण प्रतिष्ठा के बाद महाराज जी नाम अनाउंस करने जा रहे हैं।
आपके, दा का नाम है द
और
बोनेता का नाम है बोलता रि। आज से आप इन चीजों को नाम
से है, आज से महाराज कहरहे हैं, आज से हम भगवान को उनके आध्यात्मिक नाम से पुकार सकते हैं। श्री शिराजमोदर भगवान की, भगवान की। अब मैं रिक्वेस्ट करूँगा गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराज जी से की। हम सबको आशीर्वचन दे, सब बैठ जाए। अपनी जगह पर बैठ कर के सब आशीर्वचन सुनेंगे।
he krishna sri
की स्थापना हुई है। गाँव बाल बड़ी इच्छा थी, वासी भी संस्कृति नहीं बोले, जैसे आप जानते हो। बाबा जी ने पहले लगभग 40 साल के लिए प्रयास किया था। कृष्ण भक्ति के भारत में स्थापित करने के लिए, परत में गए। विदेश में, विदेशों में जाने के बाद बाबा जी के मन में ये हुआहै। भारत में भी यह संदेश का प्रचार होना चाहिए। और पापाजी भारत और उन्होंने प्रचार शुरू किया। प्रापा जी की बहुत इच्छा थी भक्ति का प्रचार हो। भारत में भी राजी को दुःख होता था। देखकर भारतीय लोग क तेजी के साथ अपनी संस्कृति को त्याग रहे हैं। पापा जी आये बॉम्बे मंदर खोला बम्बे मायापुर से विश्व भक्ति का प्रचार इस
देश के कोने कोने में पहुँच गए।
आज आप भारत के किसी कोने में जा सकते हो, आपको इस के केंद्र प्राप्त होगा।
तो
भाज्य की इच्छा थी कि हर
जगह के हरी राम का प्रचार हो।
तो गुडगाँव में हम भक्तों ने प्रचार शुरू किया था। अंदगामंजेसे ता ते थे, असे से प्रचार बढ़ता गया और गोपाल पर भेजा बर से खुले। तो प्रभाजी की इच्छा है, पूरी हुई है प्रभाजी की इच्छा से, क्या करें भक्ति का गंभीरता से। तो आप जानते हो ये केंद्र की स्थापना हुई है। आज रिपोर्ट केंद्र भी हैं। आपके गुर गाँव में, तो
हम सब
को इस मंदर का लाभ उठाना चाहे। आप सब के सहयोग से सुन्दर मंदर बन पाया है। सुदर्शन मा हमें मिले थे, कई साल पहले, उनकी इच्छा थी कि
कि
यहाँ
उन्होंने ये साल हमें दिया था। पहले कुछ सालों के लिए हम इसे तेजी से काम नहीं कर सके। आज गुरगाँव में अच्छी तरह फैल रही है। हमे इस साल का नाम उठाना चेके भक्ति का प्रचार कर। ये देखा गया है जहाँ भक्त प्रयास करते हैं, न आती है तो आप सब इसका उठाए मोबाली है कि कई सीन भक्त आये हैं यहाँ के लिए, इस समय वन को हो रहा है और 2 घंटे बाद आरती होगी तो सब उठा कथा सुनाएंगे। और आप सब का क्या प्रयास होने की जी के हम इन गंधों को पढ़ेंगे बड़े। परेश के साथ प्रोपर ने गंधों का अनुवाद किया। और प्रॉपर जी की जी पढा जाए। तो दिसम्बर के महीने में मैं भक्त से प्रयास करते हैं गंध को बाटने के लिए। और हमें गंध को बांटना है और पढना भी है।
तो
सुन्दर भक्तों का भार चाहता हूँ जिन्होंने परिश्रम किया। इस कार को सफल बनाने के लिए उनसे पहले या जूता
जूता ही थे, प्रचार कर रहे थे। उनका व्यवहार है आप सब भक्तों ने में सहायता की है। इस मंदिर को बनाने में आप सब का बहुत बहुत धन्यवाद। आज कल के व्यास का वास के साथ जुड़े रहे। 22 23 साल पहले और उनके मन में यह भाव रहता है किस भक्ति का प्रचार हो साथ में जुमना प्रिय प्रभु भी हैं, वो भी हैं, उनका भी भाव रहता है। वहाँ कोई सेवा जुड़े हैं बड़ी गहराई के साथ के सेवा में और राष्ट्रिय से मदद की है। आज आर्टिस्ट में आये हैं। यहाँ कई भक्त आये हैं, जिनके सहयोग से यह मदद आज बढ़ रहा है। और पापाजी पापाजी ने कहा भगवान ने कहा था 1 भक्त है बॉम्बे में, उनके सहयोग से मुम्बई के मंदर में बना था। पापाजी पापाजी ने कहा तुम भगवान का मकान यहाँ बना रहे हो, तुम्हारे घर में बुला रहे है। तो जो व्यक्ति मंदिर बनाता है, जो व्यक्ति मंद बनाने में सहयोग देता है, जो व्यक्ति भगवान की सेवा में धन का उपयोग करता है, उसको भगवान की ही कृपा प्राप्त होती। और ये भी कहना चाहिए पूरा प्रोजेक्ट कभी बना नहीं है। अभी जो रहे हो उसी को केवल फेज वन है। फेस टू भी बढेगा फेस टू के वेश मे सूचना देंगे बाद में तो आप का लाभ उठाइए। 1 बार फिर से सारे गुरु, भाई और भक्तों का भार जिनके सहयोग से