Disappearance day of Rupa Goswami & Gauri Das Pandit || ISKCON Surat || 19.08.2021

The video records a devotional lecture delivered at ISKCON Surat on the disappearance (samadhi) day of the Gaudiya Vaishnava saints Rupa Goswami and Gauri Das Pandit. The speaker commemorates their historical contributions, recounts the challenges they faced under Muslim rule, and highlights their role in preserving and systematizing bhakti‑theology. The discourse then moves to universal spiritual themes: the nature of true happiness, described as the fruit of bhakti yoga, illustrated with the seed‑and‑watering analogy; the indispensable role of the guru and the importance of associating (sangati) with advanced devotees; moral conduct, service, and the scriptural guidance for living a life free from crime and attachment. Frequent citations from the Srimad‑Bhagavatam, Bhagavad‑Gita and other Gaudiya texts are used to substantiate points. The overall tone is reverent, instructional, and encouraging, aiming to inspire listeners to deepen their devotional practice and adopt scripturally‑based ethical behavior.
Chapters
दमाhaala dlawelaba हरदा जब जरा जब ह गा गोला झोलाललचा यमगादीराबललगा l सोल सिवा शरहोबच aa सिवान
के
प्यार करेगा
रामा बा ला हम मारा हर बार
के
कार हरे हरे लंबा रमा राम
हा
र रे राम राम हे हे
रा
हर राह हाल रहे मो रसो मादिनदनरगबलगरा गोगुल रांजनकार मtेरदो बजवेगागा गया गा
ल
गा को को गो ब हो
रखेगा
ह
ह
go कृष्ण
सब भक्तों का
हार्दिक स्वागत तो आज 2 महान संतों का तिरवा उनके विषय में थोड़ी चर्चा करेंगे उनके पश्चात भागवत व देवा देवा ओम नम बग देवास देवाय
हम
तो आज conti santo tea
on
on me
an a
c
a fire बंदे हम फीगड़फिबक बैठ हम सफिपमसगजददहगरतमदम दम लेव बेखम स चे देवम धा कृष्णा पदान करुणा सिंधु दीन बंधू चता काजन
राधे
वायु sa सिंधु norma j srीकृषणचेतयa so go a he कि संशील भाषा में 2 शब प्राप्त होता है, 1 है अविर्भाव और दूसरा है भाव और वश्राम भरते हैं। दोनों ही उमर को मन मनाते है अमीर अमीर बावकरतेहजबकोईमहान सा प्रकट होता है जब उनके प्रकट होने के विषय में पढ़ते हैं तो साथ में उनकी दी जा चर्चा करते है और त्योरभावकाअर्थ है या वो अप्रकट होता है। तो आप पूछोगे जब प्रगट होता है जब कोई आदमी किसी का ध्यान होता है उसका तिरोभाव क्यों करते हो? क्योंकि जो संत है वो अभिभाव त्रुभाव करते हैं हमारी क a के लिए a दोनों ही का आप सब वैष्णव कैलेंडर है उसमें लिखा होता है आप उसे ना उसका पालन to har सब rog pricet भागते है go सिद्धांत के अनुसार चलते हैं उन्हें रूप रोग कहा जाता है। आपने सुना है रूप क्या है जो कि रूप स्वामी की शिक्षा के आधार पर चलते हैं। तो हम क्यों भी उपदेश दे रहे हैं। पापा ने जो भी उद्देश दिया वो है रूपक कुस्वामी की शिक्षा के आधार पर। और रुपकगुस्वामी ने क्या शिक्षा दी उन्होंने कोई नया धर्म पैदा किया उन्होंने वो ही शिक्षा दी कि उन्होंने केतन प्राप्त की थी। और इस प्रकार परंपरा को आप 5 साल पुराना राजी ले जा। rubaगsminऔपांच भाई है अनुपम गुस्वे, भाई, सनातन और कौन अनुपम और 2 से 3 बाल 33 की चर्चा होती है बाकी जो बिलकुल चर्चा नहीं होती। तो ये इनका जन्म हुआ था ब्राहमण खानदान व कर्नाटक में जो कर्नाटक में जन्म हुआ था और आ गए थे बाद में तो 7 दिन भगवत करता करते थे और समाज में उनका इतना आदर था कि दूर दूर से लोग आते थे उनसे शिक्षा स्वीकार करने के ले और सब उन्हें आदर्श देते थे। तो उन दिनों में बंगाल में मुसलमान राजा आ गया जिसका नाम था tense bra greb राजनीकि में a to wisansaनेsा अब बाली तो हमारी नाइंटी नाइन प्वॉइंट, नाइन परसेंट हिंदु है और मैं राजा हूँ मुसलमान तो मुझे कोई ऐसा व्यक्ति चुनना चाहिए राज्य के लिए इसे पूरा समाज चाहता है। तो उसने लोगों से पूछा आप के समाज में कौन है? फिर सब मानते हैं। और हम ने कहा ये 2 भाई, उनको समाज बहुत आदर देता है क्यों? क्योंकि ये 2 भाई हमेशा समाज के सुधार का कार्य करते हैं। और दिन भर बोल दे भागवत के ध्यान में, तो राजा ने सोचा अगर मैं इन 2 व्यक्तियों को छोड़ लो अपनी सरकार में, कि मेरा काम आसान हो जाएगा। आज सूचना मिली कि मैं चाहता हूं तो मेरे राज्य में विकास शासन। उन्होंने कहा भाई तो इसमें कोई रुचि नहीं है, हम तो सारे ब्राहमण है, रुचि है केवल भजन में भग, तो आ गा, तुम लोग जिम्मेदारी नहीं स्वीकार करोगे ब्राहमणो को बहुत कष्ट होगा। तो मुसलमान तो ब्राहमण की सुरक्षा के लिए i tear राजा की नौकरी
का
बहुत ऊचा पर था और रकम भी मिली मुसलमान नाम दिए और राजा जाता था दूसरे राज्यों से करने के लिए to ruk jude नौकरी में uc नहीं और महाप्रभु क्योंकि स्वयं भगवान है
है।
वो जानते थे कि मेरे 2 प्रिय भक्त राम केली के आज बांग्लादेश में है, बांग्लादेश में है, उन्हें मुझे मिला तुम ब्लू सूचना मिली कि log
अकेली
में तो raतकise अब मैं असली पेज को सब उनको जान देते हैं, तो बहुत देर कपड़ो उन्हों strowdtemountstro by उन्होंने कहा कि आप जो हो सबसे djaluotorpagusmy की, मैं ये नौकरी छोडकर आपके साथ चलना चाहता हूँ। भगवान मा बहु ने कहा आपने थोडी देर और उन्होंने 1 उदारण दिया oगrापाजीइसका उपयोग करते है की भूमिका में किसे पता उधारण था। मैंने कई बार क्लास god बिल्कुल ठीक उन्होंने उदाहरण दिया कोई प्रेमी हो थोड़ा ध्यान से घर में कार्य करेगी और मन में क्या सोचेगी में जाकर अपने प्रेमी तो उदहारण दिया जा, रूप समझ गए, आप चाहते हो, मैं थोड़ी देर और जाओ क्या लगेगा, थोड़ी देर के
बाद
फिर गए और और सरकारी नौकरी से आगे उनके पास इतने सोने के सिक्के थे, ये पूरी न गए थे, पूरा भर गई थी किसके साथ
के
साथ सोने को तो पूरी नाक भर गई थी। तो उन्होंने कैसे बांटा उन्होंने 50 ti badi किसे गुलाल राम सारी genes हर ब्रामणो ने स्वीकार किया और और फिर लौटा लि। उन्होंने कहा आपके कृपा के कारण हम ध्यन सूची आज आगरा ब्रह्मण चंदा लोग है। as to rub पचीस परसेंट खा िश्तेदारों परसेंट usa nasi prayag pragea त्याग दी हो। थोड़ी देर बाद उनके भाई 7 ने भी त्याग दिया। और जब राजा को पता लगा कि संसाधन 1 महीने से बीर खान और सार कर मरेगा तो उनको पता लगा कि 1 महीने से दफ्तर तो हाजा ने अपने डॉक्टर को भेजा देखो क्या इसके बीमारी डॉ वाय दिया। रात के घर में ब to कया tea fis bram उनके साथ बैठकर भागवत का भाग राजा है राधा ने हा हा aa gya tha
wo to bilkul
take a man babai well to koi ruchi राजा क्या थोड़ी देर बाद सनातन को 1 पत्र प्राप्त और ने कहा कि मैं तुम्हारी आवश्यकताओं के लिए 10
हजार
सोने के सिक्के chura बन bad to सुनत ptr म मैं मुझे छोड़ 2 राजा कहना कि गया था पेट साफ करने और डूब गया हा, तुम तो इतनी प्रसिद्ध काली कैसे छोड़ छोड़ दिया 10 जार सोने के सेके sanatan mhtvpurn और रूप को वृंदावन भेजा कि उन स्थानों को खोज क्या है कि परम भगवान ने अपने वे वृंदावन जाते वो तुरंत आपके गाय के देते है ये रिनाया या ये सब रिसर्च किसने किया था? और भक्ति सम्बंधित की और मंदो का निर्माण, बंधों का निर्माण। विश्व में सुने 10 mene कितने ग्रंथ हैं जो आप देखते हो सब निर्बल है। उस की मे next of debosionomn, drama और डिवोशन को हिंदी में प्रकाशित हुई थी। भक्ति के नाम पर को release कर उन्होंने a this is a la of of the krishna count moment everybody s। हमारे भक्ति के जो कानून है काम प्राप्त होते हैं, इसलिए सबको पढना तो चेमे बहुत गहरी। उन्होंने कहा बंद भगवान, अनेक योनियों में गुजरने के पश्चात भाग्यशाली व्यक्ति है जिसे भगिबीजापह भक्ति के बीच प्राप्त होने का अर्थ है ये ज्ञान। भक्ति योग सबसे आवश्यक है। यह ज्ञान कि परंपरा है। तो अनेक योनियों में पूजन के पश्चात भक्ति का ज्ञान मिलता है। और यह ज्ञान कैसे मिलता है। 1 है भक्त साधु के दवा आप भरत को मिलते हो। जो कि जैसे आप सूचना ज्ञान या ग्रंथ दोना आप ग्रंथ बाद से हो पढ़ कर। यह ध्यान में जारी होती है। तो आने के लि, पश्चात भाग्यशाली व्रती जैसे क्या प्राप्त होता है भागती हमें अब भाग दिया, बीज उपयोग कर दिया। जीव बीज का फैला कैसे होगा वह जो अब क्या करोगे पानी पर जैसे ने बगीचा बगीचे में फूल कब पानी बुलाते। तो उन्होंने कहा मां को भक्ति का ज्ञान तो तुमने प्राप्त कर लिया पर इसका आपने पूरा लाभ नहीं उठाया, बगदीाबीजको उगना चाहिए। और कब होगा? जब तुम उसे पानी पिला तो पानी पिलाने की तुलना की जाती है। इसके साथ राज महाराज के पिता उन्होंने लाल के अध्यापक थे, उन्हें बहुत डाँटा मेरे बेटे को कौन विsणुकाज्ञान जो दुश्मन है, तुम ठीक से कार्य नहीं कर रहे। तो सदा हमारा ने कहा हम लोग ब्राहमण है, हमें ऐसा दोष मत हम दोस्त हैं और घबराओ मत हम बेटे को सुधार लेंगे। तो सदा ने कहा दिमाग हमने को बदल लिया है। branach e o o gol rita schul me कौनसी se ja srmmisaa भक्ति का ज्ञान। तो चेतन ने कहा ये जो भक्ति का बीज है, ये उगेगा केवल जवाब सोनम करोगे, सोनम के तरफ नहीं करोगे तो बीज नहीं होगा। वहाँ अगर आप करोगे, ध्यान से करोगे तो जो पूरा लाभ इतना आवश्यक है। अगर आप चाहते हो भक्ति कभी लोगे फिर आगे। उन्होंने कहा भक्ति अभी तुम पानी बुलाओ, अपने आप को भक्तों के संग में रहो। उन्हे दाहरण दिया। जैसे कोठी बाते तो आप फेंसिंग दीवार बनाते, आपके बंद को क्यों गलत व्यक्ति अन्दर ही आ जाए। और जितनी बड़ी कोठी जितनी बड़ी दीवार, धनी उतरी दीवार बना धनी है उन्हें ज्यादा चिंता रहती है, है कि नहीं उनको दीवार क्या? इले्रीनक्पेंसिं। तो मा ने कहा कि हमें भक्तों के संग में रहना चाहिए। क्यूं यून के संघ में रहोगे तो आप ज्ञान सुनते रहो, साधु, साधु
लावा
मदर साधु इस देश पर दिया। आगे उन्होंने रूप मुसल कि ये जो सुन्दर बगीचा है, भक्ति का, यह नष्ट हो जाएगा। अगर क्या पागल हाथी को आप बड़ा सुंदर बगीचा बनाते हो तो पागल हाथी क्या करता है? तो उन्होंने यह उदाहरण दिया। ये साबित करने। या भक्त भक्ति के रास्ते में हो तुम कितना अगर तुम अपराध भी कर रहे हो। क्या होगा आपका भक्त? इसलिए आप सांसो में पढ़ते हो। कई साल में ये कहा जाता है ब्रा से बचो, ब्रा से बचो और हाभुवनेथोड़ा गहरा उदाहरण दिया। माता के साथ मापुपकीमाता थी सचि माता, उनके मन में थोड़ा क्रोध रहता था किसके प्रति विद है। वो सोचती थी यह दुविधा छाया जो है रुपरीकेआदमीहै खेला, कुछ 1 बेटे को भगा दिया गा। अब सब पर दया पर अपराध किया। क्या था अपराध यह बात तो 1 दिन जब भगवान को प्रणाम कर रहे थे और चाहे महिमा की चर्चा हुई थी, प्रणाम कर रहे थे जी बताने क्या क्या पीछे से आकर लेकर सामने सिर में लगा रहे। महा ने देखा कि माता ने माफी मांग है। तो फिर उन का अब ने कृष्ण भी तो ये उद्धरण दिया जाता है कई बार और अनेक और उदाहरण है। तो हमें भक्ति के मुहर में किससे बचना चाहिए हमेशा बढ़ा क्योंकि भगवान तो हर चीज के वारसे बचेंगे। फिर क्या होगा भक्ति? तो रूपा कुस्वामी ने अनेक ग्रंथ लिखे और ड्रामा और राज, 2 किताबों का वाला कौन, 2 किताबें देश मे और बी चेतन आदेश दिया था बंधू का irmaणतोrupकosami ruपकस्वामीवृंदावन में आये तो उन्हें 1 बालक मिला जिसने कहा संत मे क्या कर कहा मैं उतार को ढूंढ रहा हूँ यहाँ मैं भगवान का मंदिर बना। तो उस बालक ने यहाँ 1 पहाड़ी की चोटी पर 1 स्थान है रोज, 1 गाय आदि पिला दी है। rog ak exact spot prभावiतहअखुdआए देखने के लिए उन्हें देखा, वह गाय, उसी 1 साल में आती थी रोज और उस साल को के ऊपर पहुंचकर गाय मत करती थी रोज रूप मे ने कहा इस साल के पीछे पूरा ध्यानिक इतिहास होगा। खोद कर देखते है। अंदर क्या है जब उन्होंने खोदा क्या देखा बहुत सुन्दर है 500 साल 600 साल पूर्व उत्तर भारत में मुसलमानों का राज्य शुरू हो गया था। और जो मुसलमान थे हां, उन्होंने सारे हिंदू को या कार दिया। या पुजारी ने क्या क्या क्या क्या कई पुजारी तो vिgraकोलेकर जयपुर चले गए जयपुर में, उस समय हिंदू राज्य का खुद कर छुपा लिया। जैसे पुरी की कथा पढ़ते वो उन्होंने गोपाल को क्या किया था। cuba as sal me को बहुत sun गoinकमू और फिर जागा इसकी कामना raदगोवindकआप सब morti जयपुर में, जयपुर में और पापाजी ने कहा है जयपुर के राजा गोजी का मंदर है। यह 1 ऐतिहासिक है, उसके ड्राइंग है आरके, बड़ी यूनिक है। तो रूपस्वी प्रेरणा से यह राधा गोविंजीमंदलका उसकी स्थापना हुई थी। पहले तो इसकी स्थापना बिंदाल में हुई थी और पहले वो 7 मंजिल का मंदिर अकबर ने कहा जाता है। अब केदार स्वामी शिक्षा लेने लगे तो अगर मूल दिया राजा गठबंधन बनाने के लिए। उसकी साल हुई। राजा बना हिंदू मन को प्रयास किया तोड़े राजा गोमजी का मंदिर 7 मंजिल का था ने तुडवा दिया अब 1 मंजर का है। तो फिर जब पुजाइयो ने दे दिया तो रिलीज होने का रूप और सनातन जब राजा के शासन का राज्य कर रहे थे उनके बाद हर प्रकार की सुविधा थी, जैसे का स्वामी के जब उन्होंने सुलतान नौकरी त्यागी, उनके पास पूरी ना भरी हुई थी सोने के तो उनके पास किसी चीज की कमी नहीं थी। जब वो वृंदावन गए मधुकरी करके मधुकरी मधु की फूल फूल पर जाती है। थोड़ा सा मधु त्यागी है सेना घर घर जाता है किसे अब यहाँ पूरा करे। यही नहीं इतना मांगो की घर में ट्रंक भरते जाओ मांगो जितना आपके पेट में ये तो थम to rupo
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e gen murga आता था। संडे में कामच तो स्वामी के क्या किया जाए ना तो जैसे वो निकले घर से 1 बहुत खूबसूरत लड़की आ गयी। चीनी लेकर दूध देकर। मेरे ख्याल से तुम अपने विग्रह को बहुत अच्छा भोजन, खिलाना चाहते हो तो बड़ी खुशी के साथ ker banakr थोड़ी to a ker ke bagan दना
अलग
अलग साल में car pucारकesmepar का bayan यह कोई साधारण व्यक्ति के हाथ की नहीं है। रूप सुना की मेरी इच्छा थी कि विग्रह e पर वहाँ से कभी सेवा मन राधारानी छाप रूसी करके तुम्हें ये प्रसाद बिल्कुल नहीं माना, उसके पचात
कभी
नहीं, कभी कभी नहीं माना। मानव पुरी को जब पता लगा कि वो वाला जो इन्हें दूध दे, भगवान से पुरी पुरी तो जो भक्त है खास करके जिस काम भाव से जुड़े हैं, उनकी क्या इच्छा रहती है कि वो कुछ नहीं मानते। वो आज रूप हुए बादीदीहैउन्होंने अनेक की रचना की। अपरा 2 ग्रंथों का वार किया की भ तो आप सब को आप सब का दूसरा नाम क्या है? gusaमीकीकरमस क्या है को पंद्रह के साथी थे और उनका बड़ा स्नेह था। रूपकसामीउनका बड़ा स्नेह था और महापरब सन्यास लेने जा रहे थे। तो सन्यास लेने से पहले कई प्रसिद्ध भक्तों को मिले जिनमें 1 थे मडीलाजबदतुमापवो आये ऊूडीलासकोसूछना नही रहे थे। मैं आप सन्यास लेने जा रहा हूँ, मूरीराजनेहा नहीं। अब सन्यास कैसे लोगे? सन्यास लोगे तो हम जी नहीं पाएंगे उन्हें में गोल ना है। कि मूर्ती थी गुदा ये मूर्ति की पूजा करना। मूर्ति मेरे में कोई अंतर नहीं है। उनका मूर्ति मेरे में कोई अंतर नहीं है। और मेरे नाम में मेरे में कोई अंतर नहीं है। इस प्रकार गोली दास को उपदेश लिया और गोडिदाहैफोनसल भगत थे।
और
भगवान जिसिजंदाके साथियों में gorilasi she, shin gban hindi है some pre pre
का संवाददाता के द्वारा शुरू के बाद भी अनुवाद इस प्रकार है। आप से बोले भगवान की अनुभूति उन्शुतभक्तोंको होती है जो भक्ति योग की स्थिति में रहकर। वे अक्रषित सुख के दाता और दीवी लोग के स्वामी है। अत एव मैं उन्हें नमस्कार करता हूँ रजीनगरकेसमजस्थुति के द्वारा। आठवां स्कंद और दी इस अध्याय का 11 वर्ष कान है, ताकपरीयइस्प्रकार है। जैसा कि भगवद्गीता में कहा गया है कि भगवान केवल भक्ति से जाने जा सकते हैं। भक्तिमान अभी यस चास। यदि कोई सचमुच भगवान को जानना चाहता है तो उसे भक्ति के कार्य में जुट जाना चाहिए। यह कार्य सत्व या शुद्ध सत्व बहलाते है। भौतिक जगत में सत्वगुणी कार्यों की प्रशंसा की जाती है, क्योंकि यह शुद्ध ब्रामण के लक्षण है किन्तु भक्ति के कार्य शुद्ध स है। दूसरे शब्दों में वे दिव्य पद पर होते हैं। केवल भक्ति से परमेश्वर को समझा जा सकता है। भक्ति को नैश कर्म कहा जाता है किन्तु मात्र भौतिक कार्यों के निचे से काम नहीं चलता है। नैश कर्म अपील चर्चित भाव वर्जित। जब तक कृष्ण भावना के लिए कार्य नहीं किया जाता, तब तक भौतिक कार्यों को बंद करना लाभ प्रद नहीं होगा। नए कर्म प्राप्त करने की आशा से अनेक उच्च सन्यासियों ने अपने कार्य का लाभ बंद कर दिए। फिर भी वे असफल रहे और उन पर लौट रहे किन्तु 1 बार भक्तियों के आत्यात्मिक कार्यों में संलग्न हो जाने पर मनुष्य नीचे नहीं गिरता। अतएव हमारा कृष्ण भावना और जातुल हरएक वितीय आध्यात्मिक कार्य में लगाने का 1 प्रयास है, जिससे मनुष्य बहुत ही करणों से छुट जाता है। भक्ति मार्ग के आध्यात्मिक कार्य में सवर्ण कितन विश्णु, स्मरण पाग से, जिनमें से भगवान को समझा जा सकता। अतएव जैसा कि यहां पर कहा गया है कि सत्वेन प्रति ल्याय निश् कर्मणी। विपश्चिता उन शुद्ध भक्तों को भगवान की अनुभूति होती है, जो दिव्य भक्ति युग में रहकर कर्म करते हैं। गोपाल कापनीपरिषणपंद्र का कथन है कि भक्ति रसश्यवजनमतदहकल, पादि, नेरम, अश्चेनिवाउस्मीन, मनुष्य, कल्मन, एतद एवं निश् कर्म। यह निष्कर्म की परिभाषा है। कोई मनुष्य तभी निशपर्ममेंकर्म करता है जब वह जीवन में या हावी जीवन में। इस लोकनेयास्वरलोक के निशा भाव से कृष्ण भावना कार्यों में पूरी तरह लगा रहता है। अन्य अभिलाशिकासुन जब मनुष्य सारे कल्प से मुक्त हो जाता है और गुरु के निर्देश में भक्ति में रहकर कर्म करता है तो वह कर्म के पद पर होता है। ऐसे दिव्य भक्ति से भगवान की सेवा होती है। मैं उन्हें नमस्कार करता हूँ। शुक्रोभाआदही
ये शोक आपको आज में प्राप्त होता है और इस शो का उचारण हाथी कर रहा है, हाथी की है, हाथी कर रहा है। पर भगवान जो हैं उनके कई वीर है विस में और शाम सो गजल te शराब प्राप्त हुआ था, जिसके कारण उन्हें आदि का रूप ग्रहण करना हो तो जो देह प्राप्त होता है, कोई भी प्रकार की बुद्धि प्राप्त हो जाती है। तो विजेंद्र पहाड़ो में गए। tुकतaharजहाँगे बहुत अच्छी सुविधा है, आप स की कल्पना भी नहीं कर सकते बड़ा ऊंचा पर्वत
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magma socaerg hati को राज का क्या, हादी के पाव को पकड लिया और the
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bar that ह में हाती है जानवर कि किधर पृथ्वी का मगर, जानवर किधर का पानी का, तो मगर आज दिन पे दिन काला परवान बन गया और जो हाथी है दिन पर दिन कमजोर होने तो प्रॉपर जी इस विषय में चर्चा करते हैं कि उसी प्रकार अगर हम, हम सब का स्वाभाविक कर्तव्य क्या
है,
हम भगवान के साथ है तो अगर आप दास बनो आध्यात्मिक मार्ग को अपनाओ फिर आनंद आनंद है। पर अगर आप किसी और मार्ग से प्रयास करोगे, फिर मछली को आप जल्द के बाहर रखोगे, तो मछली जी पाएगी नहीं। उसी प्रकार हाथी वो जल का जानवर है, सारी पृथ्वी का जानवर है, वो था जल में, तो क्या परिणाम हुआ, वो दिन पर दिन कमजोर होते गया। और जो मंगर्मजहैवो दिन, पे दिन, तो उसी प्रकार अगर हम आध्यात्मिक कार्य में जुड़े और हम शास्त्र के आधार पर करे।
अब कान
कहते है लोग ये नहीं जानते कि असली सुख कैसे प्राप्त करता है। तो शास्त्र में जो ज्ञान है, वह आपको असली सुख पहुंचाने में ब्रह्म भूत सोच थी। जो व्यक्ति आध्यात्मिक मार्ग में जुड़े हैं, उन का क्या होता है? सर वो आनंद में ही होगा। चेतन मा सीप में 8 लोगों में पूरी विधि सहित की कथा से और पहली लाइन में क्या कहते हैं आनंद बुरी पे है नाम को क्या मिलेगा? आनंद मिलेगा बढ़ता ही जाएगा समाज में
who
ना अडानी बजा तो जो धन गंवा रहे हो, जो खुशी हैं, वो बढ़ते जाएंगे न सुन हर व्यक्ति को, संपत्ति को, आना पड़ेगा हर जी फाइन तो उ। इसी लिए शास्तव में क्या कहना है ये लोग ये नहीं जानते है। असली सुख के पुरा पावर होगा ये प्रधान राज का जो आध्यात्मिक मारी और जानते क्या असली सुख चाहिए। क्या हैं उपाय हम भगवान के,
ये
है सासु की शिक्षा। कई बार जब आप सुनते हैं, हम क्या कर रहे हैं हाँ पर इसका क्या परवान है? पर कल करेंगे और कल आता नहीं। और कल से पहले का आजादी है तो शो को पढने का 1 लाभ है आपके जो की मैन है होती है और आप ध्यान में ज्ञान के विषय में ज्ञान को बढ़ाते है। रावपाजीनेहमारहाँ चाइयों ने ग्रंथ की सेवा पर बदल दिया है। क्यों? क्योंकि इसमें ज्ञान है अध्यान वे ज्ञान। और इस अध्याय में ज्ञान के बिना हमारा जीवन अधूरा रहता है। इसलिए ध्यालवीज्ञान को अनुकूल करना बहुत ही महत्वपूर्ण है। और सासों का निर्णय क्या है। भक्ति योग 1 माध्यम है जिसके द्वारा आप सी खुशी प्राप्त कर सकते हो। तो ध्यान में ज्ञान सबसे महत्वपूर्ण है। फैसले में सारे मेरी सासों की रचना की थी। जब संतोष ने पूछा और अपने गुरु से क्या है कारण क्या का शुल् भक्ति ज्ञान नीला तो ये शो भक्ति ज्ञान है। उसके द्वारा हमें शिक्षा मंत्री क्या ज्ञान को करना कमजोर हाथी पूर्व जन्म में ागेभरेतोहातीने स्थिति उन श्लोकों का स्मरण किया क्योंकि उन्होंने पूर्व जन्म में और है ह के लिए वो सब सूडियों का उच्चारण करे। शासु में लिखा गया है मधु का उच्चारन करो। अगर आप लोगो को लोग है उनका उच्चारण करना इतना आसान नहीं है। और जे दिन ने क्या किया सारे मनों चोर हमें दे दिया है। इसमें विरेंद्र ने उन लोगों का उच्चारण किया जो कि उन्होंने पूरे। जन ने इन सोना जान किया। जो देवता थे वो देख रहे थे, खेर को देवता देख रहे थे। जिन किस प्रकार अपने पैरों को मगर मच के मुंह से निकालने का प्रयास कर रहा है और देवता सोच रहे थे। sad vijendra हमारे मदद चाहेगा वो थे, कैसे उन्हें मैं। अंत में भगवान ने विजेंदर की रचनाओं से भगवान आय के बीच में बैठ। लोग अत्यंत दर्द में था जार साल का मगज के मुह में था औ और उस कठिन स्थिति में भी उसने फूल। तो भगुर गीता में भगवान कहते हैं
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लोग, मेरे छात्र, जो दुखी है दूसरा। o n sur me an चारू क्या है, पुरियाता कम से कम है और समय के साथ सभी भाव शुरू। तो श्रीमद भागवतम के द्वारा हमें यह ज्ञान प्राप्त होता है कि अगर हम जीव में सुख प्राप्त करना है, कि क्या करना चाहिए, तो इस ध्यान है। आप देखते होंगे किस प्रकार गुजिक सुरक्षा की कर्म मंगवाना है। और हम इसे ये शिक्षा भी पाप करते हैं कि आपको असली सुख चाहिए, क्या है। पर फिर तो हमें अल्प लाभ उठाना चाहिए और शासकों का लाभ उठाना चाह। शास्त्र में क्या है भगवान यानी और शासकों को पढना भी चाहिए। sa padega to na ka jaoge san round folloforprincip तो हमें गंभीरता से को अपनाना to in question to टाइम
कलियुग में पकती पति दम इजी लगता है। लेकिन जब नाम अपना, सेवा, पर, वैसा
सुनता है तो इतना ही करने लगता है। छुट्टी हो a cost make chand, उसके लिए कोई टिकट नहीं लेनी पड़ती, कोई डिग्री नहीं चाहिए आपको आपको पान बड़े हो तो भी आप चैन बरालुमकबचमेपढे, क्योंकि भक्ति करनी चाहिए। अपराधों से रहे। और अगर अपराधों से करोगे तो उसका पूरा लाभ मिलेगा। और हर व्यक्ति का प्रयास करे तो कर सकता है। जो अपराध है, इतने भारी थोड़ी है, जैसे कि नाम, उसमें क्या भारी है। मैं आदत है, अपराध की कठिन देखते है। अगर आप जापान शुरू करूँ तो भगवान आपको दिव्य शक्ति देते हैं, जिसके द्वारा आप अपराधों से बच सकते हो। शास्र में हर समस्या का हल है, हर प्रश्न का उतर है। अगर आप जानना चाहो अपराधों से कैसे बचना हो गया। मे दूसरे भक्तों के गुणों को देखो। अक्सर हमें आदत है कि लोगों के लुक्स को देखते हैं और और क्या हम सबसे अच्छे हैं। सबसे के कॉल उस भाव से निकालो। और चना के बंदे ने क्या कहा, कैसे व्यवहार होना चाहिए आपको दूसरों के साथ? चुन के बंदे ने कहा, दूसरों के साथ ऐसा व्यवहार करो जैसे आप चाहते हो। दूसरे आपके साथ व्यवहार करे, आप क्या चाहते हो? जब आपके साथ इजत से बात करे तो आप से बात करो, आप चाहते हो की चापलूसी नहीं करे तो तुम चापलूसी मत करो। अगर आप चाहते से मिठाई के साथ बात करें तो आप लोगों के साथ मिठाई। आप चाहते हो कि सब ईमानदारी से बोले, वैसा करो के साथ जैसा तुम चाहते हो वो तुम्हारे साथ करे। अब ये सीधा मान आपके आज सफल
हो
भी सुने सैन चीन होगा। बोल आवश्यक है। क्योंकि मां लोगों को पता था कि हम लोग अपराध करेंगे और अरे अपराध करेंगे और बोलेंगे और सेंसी होना पड़ता है। पेड़ से जा, अगर आप सेंसीलबनना शुरू हो जाओ। मानलो किसने आपकी बेटी कर ली फैला, उसमें क्या मान लो किसने आप फैल नहीं ले।
in
a sad sad, sad quo, yes pucapresonanis time to prashno am sorry
आपने
कतरनी
का जी तो हमारे भक्त के जीवन में शिक्षा गुरु का कितना महत्व होता है? किस तरह से
शिक्षा गुरु बहुत भारी शब्द है। चेतन में कहा गया है कि शिक्षक बराबर। तो वहा जब शासन शिक्षा गुरु का वर्णन होता है, उसका अर्थ है बुत, वेरी, एडवांस। आज कोई बग आपको बर्फ के लाल में सहयोग देता है, आपको गाइडेंस देता है तो शिक्षा को नहीं बन जाता और शिक्षा मॉनिटर क्लास में कोई मॉनिटर होता है गर आप शिक्षक गुरु बुलाओगे के च, stand put a monitor इस में आजकल की भाषा में a o, sea
a
word or gas
सीकर
कुशन बुलाते है?
maikli मारा
शास्त्र में हम देखते हैं कि विश्व की श्रेणी सविधिकारीमध्यधिकारी मतलब कि हमारे जज करना है कि हमें इसका सम करना, इसका सन नहीं
तो उसके
ऊपर पड़ा कि हमें जर्ज करना भी है, किसी पर्स को और जज नहीं भी करना है।
जज करेंगे तो खराब होगा।
मगर खुद की रक्षा केलिए जज भी करना है। तो इसको बैलेंस कैसे?
श्रीमद भगवद चौतीस में नागनी कहते हैं यह हम 3 प्रकार की संग प्राप्त कर सकते हैं। 1 है जो आप से अधिक ज्ञान रखते हैं। जब आप उनको मिला तो आपको प्रसन्न हो जाना चाहिए। जिस प्रकार वर्षा के मौसम में मोर नाचता है, वो बादल को पहली बार देखता है। अगर आप से तुम भत्तों को मिलो तो चाहे 1 पल के लिए हो। आपको प्रसन्न हो जाना चाहिए कि आप ज्ञान प्राप्त करोगे। जिसके पालन से लक्ष्य प्राप्त हो। दूसरी प्रकार की संगत है उनकी बराबर मित्रता से श्रीमद भगलमलौतेसेकडमें की कृपा है। कुछ भाई थे तो से उठाई थी। भगवान ने आज भाइयों से बहुत खुश हूँ। भाइयों में 1 ही प्रकार की इच्छा है भगवत सेवा। इसलिए मैं खुश हूँ। तो प्रापा देशो के साथ। वे कहते हैं उसी प्रकार इस कौन संस्था के हर केंद्र में हर व्यक्ति का भाव ले कि हम वही कार्य करें जो भगवान के प्रति शरनघजावकापरबढा सकें। तो दूसरी संगत है उनसे मिला जा के बराबर है। और उनसे मिला। तो क्या प्रसन्न होना चाहिए। क्योंकि हम उनकी संगत में मिलकर माल की सेवा, बढ़ा। और तीसरे प्रकार का संगत है उनके साथ ना, कम, भाव रख रखे, उनके प्रति क्या
दया। जब हम कर है उनकी रक्षा के लिए, तो उस अपराध का निडर
आप सब के को देखो। अवगुन को बाद में देखा है। वही 1 समय से यही है। हम पहले अवगुण को देखते हैं और गुणों को छुपा दे देंगे। गलीचे के नीचे हम सो रहे है। सारे गुल हवा में ही है। सारे दोष, जब तक आपका मन ऐसे कहेगा सारे गुण तुम्हार में है, तुम वो भगवान की खास कृपा और उसमें से 2 जब तक तो उस व्यवहार से आप शांति का वादा नहीं पैदा कर सकते। पर गुणों को देखे और फॉर गिविंग श्रीमान भंगवा हो। जब देश मे महज ने कितना बड़ा महल दिया कि हर विधा में प्याज में मरने के लिए in wasna सा ला ज्यादा प्राप तो भक्तों के गुणों को देखो और प्रयास करो। सबके प्रति सेवा भाव रखने का सेवा भाव पर भाग न हो। सेवा ने आगे बढ़े आप सब बुकेतीकररे merizonकेमहीने मे आगे ya chut तो हमें लगा गंदगी वेतन के बहने में खुश हू i e है vidur वैदaपोo शासशीमभगवतलताहै जो व्यक्ति भला पूर्णिमा के समे ग्रंथ भगवान को बाहर पड़ता है, देता है भारत है वो हम जाने के yog हमारे fans to try ma
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बोिस्िशनमेआपसब जाइए वान कहते है जो पुरस्कार करते है वो सब
हरे कुशनागरेरशीनशीकुश हमारा कि सौभाग्य है।
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