मन और इन्द्रियों का क्या है कर्तव्य ||Duty of mind and senses || SB 10.80.3 || 14.08.2017

In this devotional lecture Prasad Raval interprets Srimad Bhagavatam 10.80.3, explaining the spiritual duty of the mind (manas) and the senses (indriyas). He emphasizes that the primary purpose of the mind and senses is to hear and repeat the holy name of Krishna, thereby purifying the heart and attaining devotion. The speaker weaves scriptural exposition with illustrative stories such as King Parikshit’s listening to the Bhagavatam, Sudama’s humble visit to Krishna, and other mythic examples that demonstrate how sincere hearing (shravan) and chanting (kirtan) transform a person’s character. Practical guidance is offered on how to focus the mind, control the senses, and engage in regular chanting, while also warning against attachment to material pursuits. Throughout, the tone remains reverent and instructional, aiming to inspire listeners to adopt a disciplined devotional practice centered on the name of the Lord.
Chapters
10, धाय 70 और शोक ंख्या
seventy
three to साह वाह वाह वाह यहा हस्या गुणा गिडीते कर चा चा कर करो मन चाह अरे सत फिर जंग में शु चुनौती का पुरा था सह कर स ग त स या
स
गोला गोला ते करो चतकबकरोमशमरबसंतम दिल जनमे शो शो चुनौती कतपोड्याथाहसकलभा स मैडी
iजनitn
सह वही है वह बोलने की शक्ति, पानी या जिससे सदस्य उसके गुण गुणों को गुण से वर्णन करती है, करा 2 हाथ तथा उसके हर कार्य को करते हुए बना बट च तथा मरे स्वर्ण करता है वसंत निवास करते हुए, फिर जड़ जमा बेशु चेतन के भीतर चुनौती सुनता है। तब उसके पुण्य पवित्र करने वाली कथा कथाएं सहा वही हैं करना का अनवाद अथवा असली बाड़ी वही है जो हवा के गुणों का वर्णन करती है। असली हाथ वे हैं जो उनके लिए कार्य करते हैं। असली पल वह है जो प्रत्येक जड़ चेतन के भीतर निवास करने वाले उन भगवान का सदैव स्वर्ण करता है। और असली काम वे है जो निरंतर उनकी पुण्य कथाओं का श्रवण करते हैं। तात पिछले शो में भगवान को समर्पित श्वणेंलियाकी प्रशंसा कर। चुकने के बाद राजा परीक्षित अन्य दियों का भी उल्लेख करते हैं, जिसमें हमें कष्ट भावनामृत का पूरा चित्र प्राप्त हो सकेगा। यहाँ वे बताते हैं कि शरीर सारे अंग नष्ट हो जाते हैं, यदि उनका सफल कृष से नहीं रहता। द्वितीय गंध के तीसरे अध्याय में लोग 20 से 24 में शौरगृषिद्वारा ऐसा ही असर दिया गया है। श्रील विश्वनाथ को ले करते हैं कि कृष्ण भावना में सारे इद्रियों को मिल जुलकर कार्य करना चाहिए। दूसरे शब्दों में, आँखें या आज चाहे जो भी अनुभव करें, मत कोसो एकमात्र अंतरयामी कृष्ण का ही स्मरण करना चाहिए के लिए शो सक्या धन्यवाद असली वाली वही है असली, जो बवाल के गुणों का करती है। असली हाथ भी है, असली है जो उनके लिए कार्य करते हैं। असली मन वह है जो प्रत्येक जल केंद्र के भीतर विभास करने वाले उन हवाज का सदैव सरल करता है और असली काल भी है जो निरंतर उनकी पुण्य कर्ताओं का शोर करते है। यह शोक सा क्या 4 है। अनवादइसकापढेंगे केवल वास्तविक सब वही है, तो क्या वास्तविक सब वही है जो जल केडर के बीच भगवान की अभी व्यक्तियों को नमन करता है? असली आग हुए हैं, जो 1 मात्र हाल प्रदर्शन करती है और असली अंग वे हैं जो भगवान या उनके भक्तों के सर्गों को खाने से 7 जल का निमित रूप से आदम करते हैं।
जे कय रजेतयास जायसी हाय हाय हे सब सुंदर प्रयास ना कि धान रोजी बोले रेस में से लाल। पहले तो शो में प्रशन मा ने पूछा कि उन्हें और बताने ही देखते हो। प्रश्न का प्रश निवेदन था और सुनाइए आई। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति की रुचि नहीं है, उेनावानकेसेरसुने में बड़ा महत्वपूर्ण संदेश है। हमें यह साबित करने के पश्चात की अब सुना नहीं में महत्वपूर्ण र क्या न करो। देश के असली वाली वो है जो भगवान के करे गुलों का बंधन। दूसरे शब्दों में, भगवान का नाम कृष्ण आगे कहते हैं असली रात वो है जो कि भगवान की सेवा में लगे। जीवन क्या है। जीवन क्या है की भगवान का न करे जी कान क्या है गंगा पलितिकाज्ानप्राप्त हो रहा है। और आगे कहते हैं है तो है। 2 शोकों द्वारा हमें बड़ा महत्वपूर्ण संदेश दे रहे हैं और आगे जाकर। इसी में ग सुना सुना है। प्रश्न क्या है उनका न सुना और बहुत कुछ सुन लिया है। यह चालेगी से वा परीक्षा स्थान दिया है की जिस व्यक्ति की इंडिया के नहीं हैं वो बार बार सुने। तो ी में ने कथा सुनाते हैं, कथा सुनाते हैं। शिव भवतामेशुरूसेंर सलाम ग्राम 80 प्राबलम है में आज नाम गुल होने चाहिए। वो हमारे अछाइयो ने यह साबित किया है की बनता है गुल पर सिधाममन केवल पूरा घर मिले
और
बहुत ही किसी से है अली से, तो जो ब्राह्मण है वह है सिटी में। यह नहीं कि इस गाँव के पास से गरीब थे वे सहित का पूरा किया गाँव के पास और वो थे। क्या कारण है? मैं हूँ दिन जिंदगी पत्नी थी, जो भी बची थी लोग बहुत गरीब है उन्हें कठिनाई से शादी थी और पत्नी के मन से पत्नी को पता था कि उनके पति का 1 मित्र है पती बहुत धनी है भगवान और जो दिवास करते हैं। तो पति ने कई दवा पी से कहा सोना 1 बचपन का दोस्त है न, जो राजा है, जो बहुत धनी हुई है, जो धान बहुल डाली हुई है तुम ये वाली क्यों नहीं करते है ये जान पी और पति का भाग यह था। अगर मैं दबा कर जाऊँगा तो मेरा
गला
है दोनों बचपन में 1 साथ अच्छे मिक्स है, दोनों गुरु के आशू मिलते है। गुरु नाम क्या था। तो कई बार पी ने परी से कहा क्या वो बड़ा दानी ही है। कई बार पती को परिशान रूस के लोगों से भी मांगनी पड़ती हुई, फिर जब पति ने ने समय कहा जाओ जाओ जाओ पती ने मा मेरा पहले पति ने कहा कोई पेड है क्या जो मैं दे सकता मेरे को खाली जाना अच्छा परी है। पुरे घर में देगा कुछ भी नही था जो दे सके के रूप में परोसी से माना और चाय बठी जूडी इकट्ठा कर दिया रोज करे फटे कपड़े में ये चूड़ा बैठ दिया पत्नी को सुधारन चलें जान कर दिया। रास्ते में सोचते थे कैसे मैं अपने मित्र से बात करूंगा। उनके मन में यह भाव था कि मैं भगवान को मिलने जा रहा हूँ हूँ और ब्राहमण द्वारका पंेइनदोनसेरिपों में यहाँ के भगवान बीमार कर रहे थे के साथ द्वारका समय 16 हज़ार से अधिक मन से, और कुछ साल पहले मैंने बाद में पढ़ा था कि your ैंकयूीा उन्होंने स्थापित किया था कि 1 संविधान ने तो सुना ग्रामीण को जब भगवान ने जब भगवान बैठे सार के साथ साथ जब भगवान ने देखा कि सिलामाब्रामण में आया है ने तुरंत ने पर चाल लिया, बिचारे दावा बचपन छोड़ कर नाम कर। दरों ने बैठकर बचपन में या का इस्तेमाल खास कर के तुम्हें याद सुधा एवं गुरु के सर में थे। गुरु ने हमें भेजा था बड़ा कठिन कार्य कर निकले की पत्नी ने कहा था, ऐसे में तूफान आ गया भाई तूफान और वो अपना रास्ता ही भूल गए ने किसी को भेजा बचपन की दिल का वर्णन और जब प्रिय मित्र है वो मन जो मन की सेवा कौन फटी हुई धोती बनी हुई है गन्दी धोती पहने हुए है और भगवान से कलेर गाए हैं। जैसे वो बड़ा बुरा हो। सवाल को सेवा के चरण धोए छरनदहोगरजलको। तुम्हारा नाम ने यह बताया किस प्रकार ब्रामण का आधार होना समाज में ब्रामण का होना आवश्यक है जी कहते है अपने ग्रंथों में ब्राह्मण के बिना समाज अधूरा माना जाता है। ब्राहमण की तुलना की जाती है किसके साथ और हे की तुलना गाँव के साथ वरशोकेपेडकेसाथ की। आज तक हमारा राम है जुदा तो भगवान में बडे आंगन के साथ राम्रामणकीदीतो चर्चा करने के बाद राम राम लौटने वाले है। भगवान ने पूछा सिदाोसविधी दूर से आये हो मैंने कुछ देखे भी आये हो। ईश्वर का नाम भगवान आने की हिंदी में है, समझ है, समझ है ना छुरा ही चकरा दे देते और खजुरा फटे कपड़े। मे भगवान को पता था चकरेहेभवाननेपूछा खुश े तो बड़ा इससे शर्माते हुए नाम राम सोते कई भगवान देखेंगे बेड को फेंक भी रहे तो बड़े ही ते हुए। उन्हे चूड़े को बाहर लेकर 1 मुठी छुडा दिया। करे 1 बड़े आनंद से पत्र तो फेर भर्ती के साथ अगर कोई जल्द भी आपन करेगा। मैं क भारत के साथ तो इसी पेमनभकतकीआवशरहै मा कहते हैं में अवसान कुछ भी प्राप्त हो स्वीकार नहीं करूंगा और तुलसी का पता भी स्वीकार करूंगा। इसलिए सारे साथ ने किया है भारत भारती के माध्यम से ही भगवान जान। भगवान कुछ गारा। जब मोटी खुला देने लगे तो बस बस है। मन खाने का काम घर घर की ओर रास्ते में सोच रहे थे। मैं था जो देश के साथ के अपने मित्र से मैं दान। मागूंगा मैं मांगा परती कर क्या करूँगा? कई बार कहा जा यार मित्र को बुलाओ नानी है मांग भगवान क्या है, अंतरयामी है और ऐसा भी समझ लेते हैं, बनते है। और सुदामा यही सोच रहे थे मेरा है। मैंने कुछ माना और जब वो वापस लौटे उन्होंने क्या लेगा भगवान की सेवा से बहुत ही प्रसन्न थे ना ग्रामीण में मारा है। उन्होंने े मैं तो पापी ब्रामण पर भगवान भगवान को पता था कि सुनाम की क्या शादी वान ने कहा मैं सुरावरम ऐसा सुख लूंगा कोई देर भी काम नहीं कर पाएगा। ससुराल मे जो लौटे अपने स्थान पर उन्होंने क्या देखा। मैंने देखा कि उनकी जो शादी कुटिया थी, क्या बन रही थी। बहुत सुन्दर अनेक हमे थे। जी प्रो पत्नी जो, कि पुरानी, सारी, सारी और सलाम राम ने ये सब देखा। समझ पाए क्या यह सब सम्भव हुआ है? किसी का अगर यह पूछो कि हम भी उम्मीद कर सकते हैं कि हाँ, जब आज घर लौटेंगे हमारे हमारे घर मे यह भी कर सकते हैं। यहाँ हम थोड़ी करे, हमे भी चुनाव राजा राम पर रह सकते हैं।
है
नहीं। क्यूँ भगवान को पता है हमें ये सुविधा देंगे बड़ी। पर क्या ग्रामीण पुरी पद सितारामन? अगर उसे ये सुविधा दी जाए तो किसी हालत में माया के मन पसंद रोमांस देते हैं। जितने की तो ने पूछा था क्या के और भी लंबे चुनाव कहा गया है जो कि बिहार देश का क्या हम प्रेम प्राप्त होता है। पर क्या कह रहे हैं आज भी वो है जो भगवान के गुना का दान करे। तो यह जीव जल से ही ऊपर हम सब को यह निर्णय करना चाहे। हमने 1 श्लोक के अनुसार हम पूरी का उपयोग करना है। किसी सेवा में जीव दवा। ये उद्देश्य है। भगवान के इसी भाव को आप भाग हमारी नशे में थे। क ा दिया के साथ 1 वर्ल्ड वीडिया के dsनprापभगवानdशन प्राप्त हुआ। से को समझ गए थे। क्यूँ उन्हें शाप दिया गया था उन्होंने बड़े सुन्दर, अब से हमारी वाणी सलाह आप। तो जीव बहुत आवश्यक है। जीव द्वारा। क्या करन है हमारे नाम का चालन और कृष्ण यह होना चाहिए। कहते है पृजपरनिरमाणकरना अगर आप जीव द्वारा प्रजल्प करेंगे चर्चा करेंगे तो माना जायेगा समय का नजारा है। और जीव द्वारा अगर भगवान के धाम को चालन करेगे। तो ये है सुंदर। तो यह भगवान के गुरों का चालन और भगवान के गुणों के विषय में, भगवान के नामों के विषय में, हमारे वीजा के विषय में जितना करो, उतना कम है। 7 रोज नाम देते थे, कितनी बार दिन में, दिन के नाम पर, दिन में रोज देते थे। और के लिए रुपसमीपेशकहते है भगवान के जो नाम है चीनी जैसे मीठे हैं, भगवान की लीलाएं हैं, कौन है? वो भी चीनी जैसे बेटे है। और क्या कारण है क्या में यह सज नहीं होता। कारण है अविद्या की बीमारी, अविद्या की बीमारी का है का क्रोध, 2 मोह मन मन से। इस कारण हम बिना नहीं कर सकते। तो कोई उपाय है क्या? अविद्या की बीमारी को दूर करने का उपाय है? है? नहीं। क्या है समझ यानपूर्वक न जान करोगे बीमारी दूर हो जाएगी। और आप आगे नाम का जिला पर महसूस कर सकेंगे। यहाँ पर है वहाँ के गुणों का। तो अभिजन के कारण वही रूची नहीं रहती। इस कथा में विजय के कारण रूची नहीं है, अभिधा के कारण रूची नहीं है। कि कृष्ण का है। तो ये रोग पीड़ा दूर कैसे होगी? सुनने से श्याम ये सारी भक्तियों का क्या? भक्तियों का अर्थ है मनमुनीनियमकासदा मान से हमें उपयोग करना। और परी। हमें आज के 2 लोगो में स्पष्ट शिक्षा दे रहे हैं। किस प्रकार हम योग में आगे बढ़ गए? हमारे जो हाथ हैं, सदा भगवान की सेवा में रहे हैं, हाल है उनका उपयोग करना चाहिए। ि आप जितने से पढते हो कि जितने महाप्रभु गुलिका सफाई कर रहे थे और सारे बाल अपने हाथों से न कर रहे थे। छत को, पंजो को क्या निकालने के लिए, मैं निकालने के लिए। और जेपी ने मारो स्वयं सारी पार्टी के बाद जा रहे थे देखने के लिए। मैं ठीक निकाल ही नहीं। तो जेतीनेवागोने उदाहरण से बताया कि केशव का उपयोग करना चाहिए। मान की सेवा में के वह न्होंने देखा कि महाराज पता पुरुष राजा होते हुए रतयादाआरमभ होने से पहले कोई राज से पर बोल रहे है, जान दे रहे हैं। बहुत ही प्रसन्न होकर उन्होंने ने खास दर्शन दर्शन किया था। वहाँ पर उन्होंने अपना विस्तार किया था। आज के तरमनियोंने और केवल उन्हें दर्शन। और ये सुविधा पर है। तो हाथ है। जो आप लोग मंडल में आते हो, हमारा प्रयास करना चाहिए या थोड़ी फिर सेवा करो। आगे कहते है, आगे कहते हैं जो असली मन है। असली मन क्या है, असली मन हुआ है। भगवान भी भीगा ये असली मन नकली मन तो इस पिशेपरबर्फ अनेक साल में दिया गया है। भागवत में, भाग में भगवान क्या कहते हैं? क्या कहते हैं यह तो भगवान कहते हैं कि मन द्वारा मेरा चिंतन कर। गीता में भगवान क्या कहते हैं कांसे लोग वाली 1 हिस्सा नहीं। इस नेक शोक है। जिनका मूल संदेश है और छपे छतेाहबिशरक्या है। बिहानी भगवान कहते हैं मन को बंधू बनाओ, शत्र नहीं। जिस व्यक्ति ने मन पर वर्ष कर कर लिया है, वह स्थिति में संत जाएगा। जिसने मन को वश नहीं किया, वो कभी भी संत नहीं। जिसने मन को विश किया है। सु आज की हर छेतिनाबादउोंने रामनंद राय से पूछा, हमें किस विषय का स्मरण करना चाहिए? राम रॉय मद्रास के राजपाल से प्रभोद, यह शुरू करने से पहले सर की इजाज़त दी। उनसे आशीर्वाद मानूंगा सर दक्षिण भारत में जा प्रशि्बर्तमिलेगा नाम है। वो मिले थे। खुदा पर प्रश्न पूछे। भगवान अपने भक्त की महिमा बनाना चाहते हैं। भगवान भगवान के उमीदवार बनाना चाहते हैं। प्रश्न में 1 प्रश्न किया था। हमें कैसा चिंतन चाहता हूँ भगवान के नामों के वाइवा गौन वा। जिस व्यक्ति ने मन को कर लिया उसे भी बन जाएगा। और इतना आवश्यक है। इसी कारण बार बार इस और भाग में। इसलिए इस विषय पर मारिया जा रहा है। पर यह संदेश स्थान बार बार हमें याद दिलाया जा रहा है की आगे का काम है। क्या करने से जाप। कई बार भक्त पूछते हैं, ये सब कैसे कर? पाएंगे धानी को वर्ष, मिलाना, वो इत्यादि कैसे करेंगे? ये सब निरभर है, आगे का है। ये जो सेल है, उसे सदा नहीं तो तुम्हारा क्या करना चाहिए? क्या करना चाहिए? मन के सुन्दर विगाहकदर्शनभागत आ गया है। जो नेत्र का, जिसने उपयोग नहीं होता। भगवान के सुन्दर रूप का दर्शन देने में, भगवान की तस्वीरों को देखने के लिए उनमें की तुलना कैसे की गई है। वो पंखी आंखें हैं, उनसे आप देख नहीं सकते। तो हमें कुछ लाभ नहीं। आंखों द्वारा भगवान बने। और संक्षेप में इन लोगों में हमे मान का उपयोग करना चाह। स इस कार्य के लिए हमारी सेवा और इस विषय में अमरीश मनाना बड़ा सुंदर है। अमरीश क्या उधार लिया, मैंने हमें शिक्षा दी। कैसे शरीर आम मार सेवा में ला सकता है? उन्होंने अपने पैर का उपयोग किया, भागे मंदिर, चल के जाने ले आज का उपयोग किया, सलिए मंडल साहब ले, खाना का उपयोग किया, हमारे बना सुनने ले, जीन का उपयोग किया। नाम हो जाए।
और
तो भक्ति योग का अर्थ है मन बुली का उपयोग हम सारे गुन मंगू कर पाओगे। अगर आप शाम के दम पर बल। 2 इसलिए ध्यानी परिवर्तन में शरण को इतना बड़ा आवश्यक है और शर्म के जनम की महिमा का ज्ञान प्राप्त होता। कैसे साल सन के माध्यम से जिस चीज, मारोगे, सनातन स्वामी को, अनेक नियमों का देश, इन सब नियमों में ये पान पीएम सबसे महत्वपूर्ण है। सबसे पहले उन्होंने कहा साधु संग, साध संग, साधन। सर ने सर्वस्र पर आज करो की आप बच्चों की सेवा। तो भगवान ने कहा भागो में से क्या वर्ड चाहिए? जो ने कहा कि अगर कोई वर देना चाहते हो तो उसका मन की सं संगत से मिले ज्ञान प्राप्त होगा। इसके उपयोग से मैं। परलाकबनाजसेभीवान ने कहा, हम क्या वर्ल्ड चाहिए? मेरे ने कहा, मेरे कारण तुम्हें इतना कर भुगतना पड़ा था। क्या कैमरा लेना चाहते हैं तो ऐसा वर दीजिये कि मैं हमेशा बंसोकीसमतोशादीसम आवश्यक है और खास कर के घर में रहते हैं। मन होना चाहिए और वन ागे क्लास सुनोगे प्रवचन सुनोगे। फिर से याद दिलाया जाएगा की नावश्यक सारे जग में होगे। आप को शुद्ध संदेश मिलेगा। शुद्ध संदेश क्या है। आयनाओहिनावहिना। प्रवाली ने हमें शुद्ध संदेश दिया। कुछ दिन पहले हमने एनिवर्सी बनाई थी। गिरफ्तारी को किसी एनिवर्सरी राबजी जब चले थे, भारत से जल जहाज में कम थे 13 गेस, 1965 में वह पापाजी क्या दिया, 6 जिले, वह भविष्य वाणी थी। विश्व के हर कोने में हर नाम तो आज ये अनुभव है कि हरी नाम विश्व के हर पल ने 5 किया है। हर व्यक्ति, हरी राम का उचारण करते। कई बार लोग पुछते है। हरी नावा के लाभ ना विचार के लाभ है। संक्षेप में चेतना ने कहा क्ेततरपन यह हाई नाम क्रीसर करथा करने से क्या लाभ है? ये हिलने की मैल ही दूर होगी। मे है या नहीं रोशन का,
काम का।
और ये मेल दिल बढ़ते जा रही है। बगैर नहीं, काम करेंगे, जीलेंगे चेत न हो और सारी जाओगे। नई नाम की महिमा समझे जाओगे। वह नाम प्रचार का। 1 और लाभ क्या है। आनंद बूदी आनंद प्राप्त होगा। तो इसके साथ ने आगे क्या था, फादलधनकानामआकिरत भागवद सुनाओ इसको हर केंद्र में भाग का होती है। धरीकलासहतभमदमसुना अगर सुना क्या राज है thats इस से शोक भरी सुनोगे दूर होगी और भारती भावना अगर हम चाहते हैं, भरती में हम आगे बढ़े, हमें प्रयास करना पड़ेगा, कुछ त्यागना पड़ेगा। चेतने। मा ने कहा जो भक्ति अनुकूल है, स्वीकार करो और जो प्रतिरोध है उसे क्या करो। हे मेरे पीएम मित्र जो केवल भरने पड़े भरो कृष्ण भक्ति को आज से सोने। 2 ये होना चाहिए हम सब का भाव कि चाहे यहाँ पे कुछ भी त्याग न पड़े। हम त्याग में पर है। और कृष्णा भर्ती हमें चाहिए। आप सब के सब आ गया है कि रावजी कृष्णा भर्ती का संदेश प्रा हो। तब हमारा प्रयास होना चाहिए। तो भर्ती में आगे बढ़े, पीछे नहीं। और यह संभव होगा अगर आप साधु सी करोगे वगैरा करोगे पढ़ोगे। यह सुनोगे जो मजे में रहते, उनके पास सुनना चाहे घर में बनने प्रयास करना चाहिए। क्यूं मंडरआएऔअगरबंदन नहीं आ सकते तो पढ़ सकते हैं। कई बार जिन्होने बा जी सारे स्मार्टफ़ोन है और स्मार्टफोन में पढ़ तो प्राप्ती की शादी गलत पढें। ये केवल बातें, वह जितना पढोगे उतना जान। पड़ेगा आ ने क्या कहा भगवान ने आज मेगा की उपासना सरदार के साथ, दर के साथ यह विश्वास होना चाहिए। हज पर रोते हैं आज विधा के रूप में जीना भगवान में कोई हनी विदेही। शहर में अनेक मदर हैं और अलग अलग मूर्तियाँ हैं। यहाँ है राजा पाल के शांती राम और विभाग में है और मां है। वादा तो क्या है, कारण है अनेक मंगल है और भगवान की दया है। तो माँ बोली जा के वाद में पड़े हो। किस प्रकार भगवान ने का प्याला भी जुड़ा था किस लिए अनुबल की पसंद का सब से यही निवेदन है कि जो संदेश है प्रॉपर जी ने ग्रंथ में बड़े पेश रूप दिया है। प्रॉपर ने कुछ बाधा दी, लोगों को आर्थिक जब प्रोपर्जीअमेरिका गए थे। किया ने कहा संदेश को कोई नीमा प्रोपटी, संदेश को पता नही। हमें संदेश दी आप सब से यही निवेदन है, हम गंभीरता से है। इस शिक्षा को अपनाइए और फिर सन्देश है। बहुत ही महत्वपूर्ण है। क्या संदेश है वानी द्वारा, क्या करें, वही द्वारा, क्या करे भगवान भी गुन और आगे द्वारा, मन द्वारा। फिर ये होना चाहिए हम सबका और ये सब लेबल है भाई नाम के ऊपर, शव नाम के बिना मेटरांसपनाफादर से मिला। आज जो मजे प्रधान नाराज के पिता दुखी थे के बेटे का उनके शब्द के प्रति तुमने संदा जो प्रधान अध्यापक थे उनसे कहा कौन आ के मेरे बेटे को भी ध्यान दे रहा है और सर नाम का नहीं कहा अरे दोस्त तो अभी ग्रामीण हैं, मैं खुद ही पता कौन आपके बेटे को दिमाग बदल देंगे। तो 1 थोड़ी देर बाद उन्होंने हीरा ने कहा से कहा हमने आपके बेटे दिवान पड़े आपने बेटे से पूछा तो बताओ क्या सीखा है ने सोचा था की बेटा कहेगा आप सबसे पसंद थी उन्होने नदारती का ज्ञान सुना तो अपने बेटे को और ये ज्ञान कला ने कहा प्राप्त किया था जो माता के गर्भ में थे। किसके माध्यम से शुभा गया है कि जो ज्ञान ना मुझे ने दिया वह ने दिया। सब ज्ञान हमें राव द्वारा प्राप्त हो पढ़ना चाहिए और निर्णय करना चाहिए की हमने इस जीवन में, आती मन में आगे बढ़ना है और प्रयास करेंगे तो अवश्य ही सफलता प्राप्त की। बाबा जी कहते थे अब 1 कदम लोग भगवान की तरफ। 10 कदम ने ये निवेदन से की संपत्ति को गंभीरता से ले जाएगा। दिस, इज, मोस्ट, इंपोर्ट कुली और अगर। आप प्रयास करोगे। आवश्यक भी सपा प्राप्त प्रापाजीने हमें सारी सुविधाएं दी हैं, हथियार दिए हैं जिसके द्वारा आप भयानक मत कर सकते हो। केवल देव होकर इस बार को कहते हैं। उत्सव करना संगत है। अगर आप भक्ति में आगे बढ़ना चाहते हो तो में क्या कर रहे है। उत्साह उत्साह से हमें भगवान की सेवा करनी चाहिए। आप सधाना सेवा पूरी कर। भगवान की देर, धोकर, सा और भोतीमनीसंघवतारखो की अवश्य हो और संत शिक्षा के अनुसार अगर हम इस के आधार पर चलेंगे तो हम सही कर पाएंगे। आप सबसे यही निवेदन है शिक्षा का लाभ उठाइए प्रचार कीजिये। जिस प्रकार प्रापा जी ने करके सबको जोड़ा, हम प्रचार करते जाए और लोगो को जोड़ पाएंगे तो भगवान क्या कहते हैं सब भक्त में सबसे कौन है, प्रचार करता है, उसे हुआ है न। आप सब से ये निवेदन है सब दिवस स्वीकार कीजिये, संदेश को आगे चाहिए हरे कृष्ण अरे आप के जो की करते krishna thank you for hartinglectr man my महज के
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उत्साह
छूने के समने सान सब जान है, ज्यादा दोष भी देखते हैं,
यहाँ
श्री में आते हैं। 10 साल बाद माईकल कल की गरीब दिवार में लगता है कि करे तो गाजुरी हैं। सुचेता से कई बार आप बीमारी का इलाज करा रहे हो, आप ठीक हो रहे हो, दवाई लेना बंद कर देते हो, सो बिकम लैक, सा पी a lack, the the many, the report and ok।
अरे
जी, धयानपूर्वक जेट के लिए क्या क्या करना चाहिए?
जा
ध्यान द लो जब के लिए क्या क्या ज्यादा ध्यान को जो। कम से कम इस समय कम से कम जब जाप करने बैठे 1 ही कार्य पर ध्यान 2 डी और 10 और प्रकार के काम भी कर दे। और कम से कम ध्यान से जब करोगे। तो जब कोई जाता तो वह सिmपलtoचूटेक to prestiptioनइसका ज्यादा प्रभाव पड़ेगा और भगवान के नाम में किसी भगवान के नाम ले, भगवान नाम तो आदर दिखाने से हर 11 माला है। god have thank you धन्यवाद गुरु महाराज कृष्ण कथा के लिए मेरा प्रश्न था। महाराज की जब हम भक्ति में जुड़ते हैं तो धीरे धीरे विशुद्धता का कुछ अन्वय होता है। लेकिन जो हमारे बचपन के जो गन्दे
संस्कार होते हैं, जैसे काम, क्रोध लोग
और जो बहुत छुपे होते हैं, बहुत
भारी मात्रा में
बचपन से उनसे कैसे
मुक्त हुआ जाए,
हमारी यह कामयाब दूर हो जाएगे। ध्यान से जाप करेंगे कि अब सारी अमीर को दूर कर सकते हो। इस संस्था में हर प्रकार के भक्त हैं, कई के, कई का बैकग्राउं इतना बुरा था कि आप वह कर सकते है। हिना के माध्यम से। वैसे हमे ना पूरी शक्ति है, वे ध्यान से लेना चाहिए। साथ में शा ी ो a a a a a in fine question anses mo productid। हर महाराज ने जितना भी आपने सन्देश दिया, क्यूं नहीं करता की आपके ही सारी चीजों को के जीवन में स्वीकार करना शुरू करो। जितना भी सन्देश आपने दिया तो क्यूं नहीं होता की आप से ही सारी की सारी जो चीजें हैं अपने जीवन को खास करके का प्रयास शुरू करे। क्यूँकि हमारे हृदय में बहुत भारी माया है जो कैटरैककोआपकोठीक दिखता नहीं बुखार हो में सा आएगा में। इसमें आपको दूर करना है तो भर्तियों का संदेश जो आज इस लोक में पर ने दिया, इस संदेश का पालन करोगे। ये बैन तेजी के साथ ले। हमें इसका लाभ उठाना है। समस्या यह है कि हमें शिक्षा का लाभ नहीं मिला। लोग बड़ा महत्वपूर्ण है बहुत धन्यवाद बताने के लिए कि मप्तियोकामतलबहै द्रियों को भगवान की सेवा में लगाना। मेरा प्रश्न यह है कि शिला बताया कि ग्रंथों का पढ़ना भी जरूरी है वितरण करना नहीं तो क्या हमारे कैंपल प्रोग्राम्स में क्यूँ? इस प्रकार इसको 1 इंटर पार्ट डि के लिए भी 1 टाइम फिक्स का मॉर्निंग प्रोग्राम है। जैसे आदि के तन के लिए है गुरु पुजा है भावनक्लासहैलेकिन ऐसे कुछ फिक्स टाइम रेटिंग तो बतला डिस्प्ले भी नाइस पैदा नहीं खाना चाह। क्या इसका है पुलिस सुविधा है यह lte व्यास पूजा शिष्य को कैसे सही रूप से बनी? spifomserecegas noleg thrutetisipic succession call as puja, because is the giving से मsv्यासेमारकी संप्रदाय में ग्रुप होल्डिंग हो होती है जैसे इसके गुरु है, सब 1 ही सन्देश दे रहे है, ये का दसवा 1 ही सन्देश दे रहे है के किसी केंद्र में चले जाओ। दुनिया के आम को लगभग सीमषेत्रोदेेक्यूकी। हम सब वो ही संदेश दे रहे हैं जो प्रॉपर जी ने हमें देगा, प्रॉपर जी ने वो ही दिया, उनके गुण जी ने भी 1 सी जोड़ा so this we face back to to guru ke prsnsameans on the guru, telinyouchaprishna krishna is his nteehn गीता भागवत गीता भागवत में संदेश प्रसाद प्रसाद प्रसाद किस को हो बुलाते पीटिंग के हैं हारे, क्रिष्णा हर शना क्रिष्णा हारे हारे हारे।
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