Exclusive interview by HG Amogh Lila Prabhu | 20.10.2023 | Govardhan | Srila Gopal Krishna Goswami

In this Hindi-language interview, Srila Gopal Krishna Goswami discusses how a devotee can sustain enthusiasm for Krishna consciousness despite advancing age, health challenges, and societal pressures. He explains that true vigor comes from the grace of the Guru and Krishna, not from personal strength, and cites historic examples such as Rupa Goswami, Baba, and other senior acharyas who continued preaching until the end of their lives. The conversation moves to practical guidance: regular chanting, adherence to scriptural rules, and control of the senses as means to retain enthusiasm. A significant portion addresses the dilemma faced by young devotees who wish to become full‑time practitioners while their parents expect marriage and conventional life; Goswami offers ways to convince parents, emphasizing the ultimate goal of serving Krishna. He also reflects on modern challenges to preaching, such as the internet and changing youth attitudes, urging perseverance. Throughout, the tone remains devotional, conversational, and encouraging, with a supportive sentiment toward seekers.
Chapters
हरे कृष्णा, हरे कृष्णा सबको आना आ
रहा है, फेस्टिवल को एक्सटेंड कर दिया
जाए, यस महाराज आ लोग चाहते हैं फेस्टिवल एक्सटेंड हो जाए और ओके महाराज सबसे पहला सवाल महाराज थोड़ा निजी सवाल है, और वो है आपके उत्साह को लेकर के अदर वाइज, अगर आम देखे महाराज की एज महाराज की हेल्थ, आप सब देख ही सकते हैं। इस उम्र में कोई भी व्यक्ति अपना रिटायरमेंट लेकर के होना लुलू चला जाए। लेकिन महाराज प्रचार में लगे हुए हैं, दुनिया भर में भक्तों से मिल रहे हैं, आशीर्वाद दे रहे हैं, प्रवचन दे रहे हैं, गाइडेंस दे रहे हैं, काउंसलिंग कर रहे हैं। महाराज इतनी शक्ति आपके अन्दर कैसे आती
है महाराज, सबसे पहले मैं यह करना चाहता हूँ, बुला उमर का कौन है
सबसे पहले मैं यह सन्देश देना चाहता
हूँ की हम सब बुरे हैं, हम
हम सब बूढ़े हो रहे हैं।
1 समय अमेरिका में, 1 सन्यास दे
तो 1 समय प्रोप अमेरिका में, 1 यूथ ने पूछा था उन्होंने सन्यास लेना था
सन्यास फरवरी के बाद इंडियन पापा को मिलने आया।
तो संन्यास लेने के बाद वो जो इंडियन है वो प्रोपर जी को मिलने आया।
प्रभा ने पूछा उसने कहा स्वामी जी मारे शास्र में लिखा है की संन्यास बूरी उम्र में देना चाहिए, जान दे रहे हो।
तो उसने कहा हमारे शास्त्र में, तो लिखा है कि सन्यास जो है बूढ़ी उम्र में देना चाहिए
वाला कोई नहीं
है और आप को दे रहे हैं।
या उसने कहा की में है की युवक को सन्यास नहीं लेना चाहिए है।
तो उसमे उन्होंने कहा कि शास्त्र में लिखा है कि लूत को संन्यास नहीं लेना चाहिए,
बुरा कॉल है? तो बुरा
बुरा ने पूछा कि बुरा कौन है? उसने कहा कि वही व्यक्ति जो मृत्यु के नजदीक है।
बाबा ने कहा ये कोई 30 साल
का, ये रिपोर्टर था साल का रौब
से, लगभग 80 साल के प्रोबा जी
80 साल के थे,
उसने कहा बुरा 20 25 साल की उम्र का।
उन्होंने कहा कि बूढ़ा व्यक्ति जो मृत्यु के निकट तो जवान व्यक्ति जो है वो भी मृत्यु को प्राप्त हो सकता है।
पापा ने उनसे पूछा तुम गारंटी दे सकते हो कि तुम से पहले नहीं होगे।
उन्होंने प्रोबा ने उससे पूछा 30 साल के व्यक्ति से की आप गारंटी ले सकते हो की आप मेरे पीछे पहले मृत्यु को प्राप्त नहीं होगे,
नो आई कान्ट गारंटी।
उसने कहा नो आई का गारंटी, दिस
प्रोबा जे old, आल जो, ओल्ड you
आर, आलसो old
कहा कि बोलों को चाहिए जवानो को,
bod you mean by
old,
do you mean by old
₹1 देखा जा रहा है हम सब बूढ़े
हैं, तो अगर हम ध्यान से देखे तो हम सब बूढ़े हैं
ना पड़ेगा
तो हम सब लोग जो है ये हम इन चीजों से ग्रसित हैं। 4 चीजों से।
तो ये पूछे क्यूँ उत्साह है?
तो आपने पूछा है कि क्या उत्साह
है जो उत्साह आवश्यक है हर कार्य
में, उत्साह आवश्यक है हर कार्य में
और बहुत से कार्यों में और आध्यात्मिक
कार्यों में और भौतिक कार्यों में और
आध्यात्मिक कार्यों में भी और अगर खास करके भगवान की सेवा में हो तो आपको सदा उत्साहिस होना चाहिए।
आप को आप भगवान की सेवा में जुड़े हो तो आपको उत्साहित रहना चाहिए।
असली भाग्यशाली व्यक्ति वो है, भगवान है।
असली भाग्यशाली व्यक्ति वो है जो भगवान को शरणागत है और वो
और हो रहे तो सेवा कर सकते हैं।
तो अगर हम उत्साहित रहेंगे तो हम प्रचार सब प्रचार कर सकते हैं।
प्रॉपर उदाहरण है पापाजी ने 17 साल की आयु में मेर
बा जी 1 बहुत सशक्त उदाहरण है
जीवन के उत्साह के साथ।
बाबा जी जीवन के अंत तक वो उत्साह के साथ जो है उन्होंने।
बाबा के प्रबल बहुत बीमार थे, तो उस स्थिति में भी उन्होंने किया। श्रीमद भागवत सब जानते हो। बाबा जी ने बड़ा ध्यान दिया है, क्या उपाय है।
रोपा जी इतने बूढ़े थे लेकिन अंत समय तक उन्होंने प्रचार कार्य नहीं छोड़ा।
भागवत सब करे थे 6 साल और उन्होंने पूछा
भगत का वो अनुवाद कर रहे थे सुबह 3 बजे उठ के,
तो सारी शक्ति प्रात करते थे बनाने के लिए
बाजी के। इससे हम शक्ति प्राप्त करते हैं। हमें भी मृत्यु के मृत्यु तक हमें उत्साहित रहना चाहिए।
सदा उत्साहित हैं इंडिया से की प्राप्ति के लिए।
भौतिक व्यक्ति भी जो है वो उत्साहित रहता है। अपने भौतिक कार्य के लिए
यह उत्साह करना चाहिए।
सेवा में यही उत्साह हमें इस्तेमाल करना चाहिए। भगवान की सेवा में थे महान संत
थे रूप गोस्वामी उस समय पृथ्वी पर सबसे परे राजा थे बंगाल में, उस
समय इस पृथ्वी और बंगाल में मुसलमान
राजा थे प्रजा हिंदु राजा था हिंद
द हिंदू जो है है ना कि हिंदु मुसलमान राजा थे समय बंगाल में
मुसलमान राजा ने सोचा मुझे इन व्यक्तियों को सुविधाएं देनी चाहिए वो लोग चाहते हैं और उन्होंने पूछा लोगों से है।
तो उन्होंने ये सोचा मुसलमान राजा सोचा की किस तरह से हम हिंदुओं के ऊपर कैसे शासन करे।
तो उनको पता लगा ये 2 भाई उनकी है को जोड़ा
को पता लगा की ये 2 भाई हैं जो बहुत बहुत विद्वान है और ये सारी ये 2 भाई हैं।
और उनको
उनको उन्होंने दरबार में रखा प्रधानमंत्री के पोस्ट पर, पर उनकी रुची
नहीं थी स्वामी ने सरकारी नौकरी त्यागी और वृंदावन में गए हों हमें दिए हैं।
तो उन्होंने इसको नहीं सवीकार किया और वो वृंदावन में गए और उन्होंने स्वामी सारी
चैतन्य माहोने, जाओ वृंदावन मनों का निर्माण करो।
उन्होंने चेतन्य महापबमेंउनको कहा की जाओ वृंदावन जाओ और मंदिरों का निर्माण करो और
भगवान लीलाओं का
और भगवान की लीलाओं का स्थान ढूंढो।
तो कई ग्रंथ लिए तो रूप गोस्वामी
जो है उन्होंने कई मंत्रों का निर्माण
किया,
कई ग्रंथ लिखे लिखे तो उनमे
से 1 छोटा सा छोटी सी किताब है,
उसमे से 1 छोटी सी किताब है। श्री उपदेश्य अमृत पढ़ी ये किताब आपने पढ़ी है, ये किताब
किताबें पढ़ते हो,
रेगुलर ली, आप रेगुलरली किताबें पढते हो?
वो कहते हैं धार्मिक विधि के लिए
हो रूपगोस्वामी उपदेशामृत कहते हैं उत्साह निश्चय धैर्य कर्म, परिवर्तन उत्साह जो है आध्यात्मिक जीवन के लिए, बहुत जरुरी है।
तो ये उत्साह में अंतर घटना।
तो ये जो उत्साह है हमें अंत तक रखना है।
जैसे की आप ये अगर आप गुस्सा रखोगे, रोपे, बक्सी को आले सावधानी से
कर सकोगे तो अगर आप अंत तक उत्साह रखोगे तो आप भक्ति का पालन जो है, आसानी से कर सकोगे सच बात है, सच बात है।
पर उत्साह कैसे आये? कोई तो नहीं है जो
उत्साह जो
है ये कैसे अनुकूल करे, कैसे करना
है, कैसे अनुकूल करना,
कैसे प्राप्त कर सकते हो, कैसे प्राप्त कर सकते हो,
कैसे प्राप्त कर सकते हो?
कोई फॉर्मूला की दवाई तो नहीं है,
कोई फॉर्मूला या दवाई तो नहीं है।
पर 1 है वह भगवान के राम का चाल और नियमों का पालन करना, उसके द्वारा
नामो का उच्चारण और जो नियमों का पालन है उसको हम नियमित रूप से करते हैं।
तो फिर आपका यह उत्साह जायेगा, फिर
आपका यह उत्साह जो बना रहेगा।
अगर सोचे की सोचे की दूसरे कार्य द्वारा समझने में क्या है की हो साल 2 का असली कारण है प्रौपर की कृपा और भगवान की कृपा। पावर की कृपा के बिना आधार क्षेत्र में संभलता प्राप्त नहीं होगी सो।
ब्रोवा जी की कृपा और भगवान की कृपा, बाजी की कृपा के बिना हमें भक्ति प्राप्त नहीं होगी।
बाबा जी ने कहा की मेरे गुरु आई नेवर गॉट हिम में कभी उनको भूला नहीं।
ोबाजी ने कहा की मैं अपने गुरु
को कभी भूला नहीं हूँ, मतलब गुरु की शिक्षा, गुरु की शिक्षा कभी भुला नहीं हूँ, इसलिए मैं अभी भी उत्साहित
हूँ, इसीलिए मैं अभी भी उत्साहित हूँ।
कई बार हम कहते थे आप आज विश्राम करो दानंग।
तो प्रोबा जी का स्वास्थ्य जब ठीक नहीं होता था तो हम प्रोबा जी को कहते थे रोपा आप विश्राम करो, आप
न्यू में थे, पर प्लीज
1 बार प्रोबा जी न्यूयॉर्क में थे प otis probe please
plese please dont take a way
struglefocrisna रोपा ने रीवा दिया प्लीज डोंट टेक वे माई प्रीविलेज टू सगलफारक्रिष्णा
आज के बाजार में हम जवान हैं,
असली बात यह है की हम जब जवान हैं तो हम सोचते हैं, सोचते हैं की
जीवन लक्ष्य कुछ और है,
जीवन का संघर्ष कुछ और है,
खाओ पियो, जियो ये है उनका सिर, खाओ पियो जियो है
खाओ पियो और जियो जमक जवान है।
सा कहा है अर्थात
शास्त्र कहते है। अथातो ब्रह्म जिज्ञासा
बड़ी कठिनाई से प्राप्त
होता है तो हमें ये संदेश भक्ति से प्राप्त होता है।
फैशन का यह भी भाव रहता है कि चीजोंका उद्धार करे।
तो वैष्णवों का यह भी भाव रहता है कि जीवों का उद्धार करना, पति जीवों का उद्धार करना और इस काल क्या है। इस समय सबसे बड़ा प्रॉब्लम क्या है?
पापा कोई और कैसे तो क्या करना है।
तो प्रोबा जी कहते थे कि अगर हमें असली सुख चाहिए तो क्या करना चाहिए?
तो उत्साह से भगवान की सेवा करोगे। तो पाओगे इस काया के द्वारा।
अगर आप उत्साह से भगवान की सेवा करोगे तो आप प्रसन्नता भी पाओगे।
जो आप सब से निवेदन है आप उस से भगवान की सेवा करो।
तो आप सब से निवेदन है की आप उत्साह से भगवान की सेवा करोगे।
ये नहीं की भाई बोला ज्यादा बोल रहे हो,
हरी बोल, हरी बोल ज्यादा।
तो मेरे उस का कारण यही है रबर की कृपा और भगवान की कृपा।
तो गुरु माता ने जवाब दिया मेरे उत्साह का कारण है बाजी की कृपा और भगवान की कृपा और
कृपा सबको प्राप्त हो सकती है।
उनकी कृपा सबको प्राप्त हो सकती है।
जैसे हम ये नहीं कहते 1 शुद्ध,
तो हम ये नहीं कहते की 1 ही शुद्ध भक्त हैं। प्रोपज ने कहा ऑल यू बिकम प्योर डिबोटीजरिवोी
चाहे आप जवान हो या बूढ़े हो, हमारा लक्ष्य होना है।
भगवान की सेवा, तो आप जवान हो या बूढ़े हो, तो हमारा जो लक्ष्य उद्देश्य होना चाहिए।
भगवान की सेवा आजकल बहुत ही बड़ी व्यक्ति की है, नया है। हमें जीवन के अंत तक नहीं छोड़ना चाहिए।
आजकल जो घोती वादी व्यक्ति है वो कहते है की हमे जीवन के अंत तक इंद्र दिप्ति को नहीं छोड़ना चाहिए।
सारे में फैल गया है,
विश्व में ये फैलती जा रही है। यह जो का लक्ष्य है, इद्रतिप्टिही जीवन का लक्ष्य है। अंत तक तो
ये ज्ञान जीवन का लक्ष्य है और इस प्रकार का है।
प्रोजी कहते थे कि जीवन का लक्ष्य है भगवान की प्राप्ति और इस तरह के कार्य करने चाहिए जिससे हमें भगवान का प्रेम प्राप्त हो।
थैंक यू सो, मच महाराज सच वंडरफुल एलेबरेटसिरहरबोल मेरा दूसरा सवाल यह है। महाराज कई ऐसे डिवोटी हैं, वो चाहते तो हैं कि वो भक्त बने, फुल टाइम बने। लेकिन घर वाले चाहते हैं कि वो किसी को लाल जोड़ा पहना करके घर में लेकर आये। लेकिन ये डिवोटी खुद लाल जोड़ा पहनना चाहता है। सो महाराज कश्मकश रहती है। माता पिता बोलते हैं कि वो किसी के हाथ पीले करके घर लेकर आये। लेकिन वे खुद पीले, कपड़े पहन करके फुल टाइम ज्वाइन करना चाहता है। तो महाराज माता पिता को कैसे कन्विंस करें कि किसी के हाथ पीले करने से बढ़िया है, खुद पीले पीले हो जाएं। ठाकुर जी की सेवा में टू, कनविन्स, पेरेंट्स, सो, दैट, पेरेंट, blesinthtमीयूबि जॉinfultime लगभग
हर स्थिति में मा बाप की यह इच्छा रहती है कि मेरा बेटा पैसे कमाए शादी कर ले, शादी जरूर कर दे, हमारा धरम शादी करे।
सभी माता पिता की यह इच्छा रहती है। हमारा बेटा जो है शादी करें, धन कमाए,
बच्चे पैदा करे, हाँ बच्चे पैदा
करें, वो तो होनी रह
जाता है। शा समय कहा जाता है। बाल ने कहा पिता नहीं बनना चाहिए, माता नहीं बनना चाहिए, गुरु नहीं बनना चाहिए।
शास्त्रों में कहा गया है की किसी को माता पिता नहीं बनना चाहिए, पाती नहीं बनना चाहिए, गुरु नहीं बनना चाहिए। अगर अपने आश्रित को वो भगवान के धाम नहीं ले जा सकता।
यह ज्ञान आप पांचवे सुर में प्राप्त करते है।
तो ये जो ज्ञान है हमें भागवत के पांचवे स्कंद में प्राप्त होता है।
कई माँ बाप हैं जो खुशी से अपने बेटे को देते है।
कई माँ बाप हैं जो खुशी से अपने बेटे को भेजते हैं।
पिछले 23 माह माताओं को मेरा बड़े प्रसन्न है, क्यूकी बच्चे ठीक
करेगी मैं कई माता पिता से मिला जो बहुत प्रसन्न है उनके बच्चे जो है प्रचार कर रहे हैं।
धर्म का ये में आपको कहूँगा नाइंटी पर्सेंट दुखी हो जाते हैं।
लेकिन ये मैं आपको कहूँगा की नाइंटी परसेंट जो पर है वो दुखी हो जाते हैं।
बच्चों को जाने 2 कॉलेज में वो ज्यादा अच्छा है भग बन गयी तो
वो कह रहे है की बच्चों को जाने 2 जाए बाहर जाए जो करना करने 2 लेकिन भक्त नहीं बने हो,
अगर 1 विकी बन जाए तो तेरा
1 अगर किसी परिवार में भक्त बन जाए, शुद्ध भक्त, शुद्ध भक्त 1 शुद्ध भक्त बन जाए तो 13 पीडी तक भगवान कृष्ण जो हैं 13 पीढ़ियों का उद्धार करते है।
और इस प्रकार अगर 1 शुधंधतगचाहैो ल के खुशबू पूरे बगीचे में फैल जाती है।
जैसे 1 अगर खुशबू दार होता है तो उसकी खुशबू जो है पूरे बगीचे में फैल जाती है उसी प्रकार 1
भक्त हो जाए आपके में लोग दूसरों को भी प्रभावित कर सकता है।
उसी प्रकार अगर 1 भक्त है आपके परिवार में तो वो दूसरों का भी उद्धार कर सकता है।
आप देखते होगे तो यह नहीं की सारे माता पिता 1 प्रकार के और 90 पर्सेंट है।
तो आप देखते हो की कई सारी
के कई परिवारों में बेटी के पीछे आगे का प्रभाव हो।
तो आप देखते हो की कई परिवार में बच्चे जो हैं वो
सुधर जाते
हैं, सो बिगड़ जाते हैं
तो माता पिता करते हैं, देखते हैं बच्चे का कैसा प्रशन है वो फिर चुप जाते
है, है तो पहले वो देखते है लेकिन देखते है उनके बच्चे जो है वो ठीक रास्ते पर चल रहे हैं। तो फिर वो खुश होते है।
तो वो कहता हूँ माता पिता ये कहता हूँ की उनको आदर 2 पूरा मारा माँ बाप को ये डिटरेबिनेशनरखो नहीं छोड़ने, वैसे सबको आदर 2 तो गुरु
माल कहते हैं अपने भक्तों को यही कहता हूँ माता पिता को पूरा सम्मान 2 उनका अपमान नहीं करो लेकिन भक्ति में आप दृ होके, थैंक यू, थैंक
यू सो मच गुरुवार गुरुवार, ये तो हो गया पैरेंट्स का, लेकिन हमारी खुद की डिटर्मिनेशन भी लीक हो जाती है। अगर हमने किसी माता जी को देखा, गोपी ड्रेस में लगा कि शादी कर लेता हूँ। ग्रस्त जीवन वाले गृह जीवन ही पूजनी है। लेकिन गृह में देख कर के मन करता है, शादी करते हैं, घर बसाते हैं। रात को सोने से पहले हल्दी वाला दूध पियेंगे पूछना बुख पड़ेंगे क्या जरूरत है ये ब्रह्मचारी बनने की तो इसके महाराज रिजर्व है। ब्रह्मचारी जीवन का वो कमजोर हो जाता है। किसी भी 1 कृष्ण कोंशेस सुंदर गोपी ड्रेस में किसी माता जी को देखने का मन पिघल जाता है। महाराज क्या करें महाराज? how to mind this resolve, despite seeing somebody very samvisicishnaconses girl, who mi can imagine as my happy?
जैसे मैंने पहले कहा कि प्रजा का यह भाव रहता है कि वा भाव रहता है, कि बच्चे जो हैं वो जुड़े बहुत से कार्य होते है।
जैसे गुरु। मान ने पहले भी कहा, माँ बाप का भाव रहता है। उनके बच्चे जुड़े बहुत ही कार्यों में,
महाराज यहाँ पेरेंट सपोर्टिव है। लेकिन मेरी इंद्रिय सपोर्टिव नहीं है। अब क्या करे?
महाराज में उपाय दिया गया है, कैसे
मैदान शास्त्रों में उपाय दिया गया है की कैसे हम इंद्रियों को वश में करे?
स्वामी? कौन है?
हमारे इंद्रियो का स्वामी कौन है? कृष्ण?
तो ये हैं शास्रों का निर्णय,
ये है शास्रों का निर्णय।
तो माँ को संतोष करने का यह उपाय है। दरसल सुख लेना चाहते हो, हमें क्या करना जेमे। भगवान के शरीर में न बोलने का प्रयास करना चाहिए।
तो हमें इससे संतुष्ट रहना चाहिए। शास्त्रों ने हमें कहा है कि हम भगवान की शरण में जाए।
महाराज, आपने पी
का उपयोग ठीक रूप से करना चाहिए। जी आपकी वाणी है, पानी का, पानी का उपयोग करना चाहिए। वान के नामों के उच्चारण करने के लिए है।
तो हमें जो अपनी इंट्री का प्रयोग है, वो भगवान की सेवा में करना चाहिए। जैसे हमारी वाणी है, उसका उपयोग करना चाहिए। भगवान के नामों का उच्चारण करने के
लिए, पैरों का उपयोग करना चाहे। वहाँ के मंदिर ले जाने के लिए,
पैरों का उपयोग करना चाहिए। भगवान के मंदिर जाने के लिए।
आपके पास अमेश बराज का उदाहरण है।
अम्बरीश महाराज, इस चीज का उदाहरण है।
राजा थे तपस्वी
महाराज, हालांकि वो राजा से सारी, पृथ्वी के, लेकिन बड़े तपस्वी थे।
और मैंने में उदाहरण दिया है। ऐसे हिंदियों का उपयोग करना चाहिए।
उन्होंने हमें उदाहरण दिया है कि कैसे हमें इन्द्रियों का प्रयोग करना चाहिए।
जीव का उपयोग किया। भगवान के नाम है, उनके लीलाओं का
नमन करने के लिए, जीव का प्रयोग करें। भगवान के नामों का उच्चारण करने के लिए और उनका गुणगान करने के लिए।
सो
इस तरह और अगर करते हैं। तो हम संतुष्ट रहेंगे
और मारा आखिरी संदेश को देना चाहे। प्रीचर्स के लिए विकास। आज युद्ध प्रीचिंग इतनी कठिन होती जा रही है, क्योंकि इंटरनेट की वजह से ग्लेंबर बढ रहा है। कलयुग का उसी सी युध प्रीचिंग हैज। बिकम वन मोर चैलेंजिंग तो हमारी युद्ध प्रीचर्स और प्यूटिंग मोर। एफर्ट्स पर कहीं न कहीं थोड़ी सी डिस्कर्जमेंट भी हो जाती है। सो हमारे यूथ प्रीचर्स हैं। कठिन परिस्थितियों में भी अपना उत्साह बनाए रखें। तो ऐसे महाराज ही थ्री टिप्स फॉर
the udpecrspuitin
कोर्स बुक्स आर द
तो आप पढते शासन
कृश्लिकेपुशलिके शरनागत होना चाहिए।
कुछ त्यागोगे बदले मे सुख प्राप्त होगा।
अगर हम प्रयास करेंगे सौरी महाराज अगर
हम गॉड हेल्फ लोल हेल्प तो उनका सहयोग से स्वयम प्रयास करे।
god हel्pलोोhel्p गोड हeल्फदोजहल्फदेर सेल्फ
yes marg thank you, thank you, so much maharaj for giving and who reply e marg ya realizations a ser get call the you asians for the precrsrरशास्तर। क्वेशन सर चाहे बगूदीताहोभागवतं हो आल वन्डरफुल मिली फॉर, सब्स्टेंस गेटिंग पॉवरिंग कॉनवरसेशन क्वेशन आंसर सो। आज हमने कुछ प्रश्न पूछे और महाराज जी ने यहाँ पर बड़े सुन्दर जवाब दिए। सो महाराज का हृदय से बहुत धन्यवाद देना चाहेंगे आटिट्यूड बाई हरे कृष्णा, हरे
कृष्णा,
हरे हरे अरे अरे अरे सवाल पूछना चाहते थे, पर क्यों टाइम हो चुका है। हर हरि महाराज का गला खराब लगी। फिर भी यहाँ पर आप भक्तों को आशीर्वाद देने खिलाए।
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