The video records a devotional gathering where several disciples recount personal experiences and teachings received from HH Gopal Krishna Goswami concerning the conduct of brahmacharis (celibate disciples). Speaker A narrates an incident where the guru was summoned by a group of women; the guru’s interaction with them serves as a cautionary example that brahmacharis must never converse with women alone. Speaker B describes his initiation process, emphasizing the requirement of shaving as a sign of brahmacharya, the timing of the ceremony, and later instances where the guru reprimanded a brahmachari for drinking alcohol during a gathering. Speaker C provides brief temporal markers and reinforces the narrative of the guru’s disciplinary style. Across the accounts, the central themes are the strict observance of celibacy, avoidance of solitary female contact, ritual purity (shaving), and adherence to the guru’s instructions, illustrated through real‑time anecdotes from the ashram environment.
Chapters
1 दफा कोई वी आई पी स लेडीज 45 महराज से मिलने के लिए आ गये। उस समय लगभग साढ़े 9 10 का टाइम था। रात का। मुझे फ़ोन किया महाराज ने। श्री धाम जी, आप आ सकते हैं कि हाँ जी, यह नहीं मैंने पूछा क्या काम है? क्या नहीं है मैंने समझा कोई काम होगा रात को, पर क्या होगा काम? कभी कभी जब विदेश में जाते थे तब भी मुझे बुलाते थे कि मैं जा रहा हूँ, अभी बाहर जा रहा हूँ तो आप पीछे से देखना क्या करना। जो भी इंस्ट्रक्शन दे देते थे तो मैं गया यहाँ पर ही कमरे में जब पहुँचा तो कुछ लेडीज वहाँ पर बैठी थी। वो बातचीत चलती रही, महाराज ने उनसे बातें की। वो लगभग आधा घंटा घंटा, बात हुई उनकी। उसके बाद जब वो लेडीज चलेगी तो मैंने महाराज से पूछा महाराज जी, मेरे साथ क्या काम था, आपको? आपने बुलाया मुझे नहीं नहीं, मैंने इनसे बात करनी थी। इससे शिक्षा मिलती है कि कर्मचारी और सन्यासी को अकेले में स्त्रियों के साथ बात नहीं करनी चाहिए, दूर होना चाहिए। पर यह कहते थे कि स्त्री जो है मन के साथ तुलना की गई है, सौरी आदमी की तुलना, मखन के साथ, स्त्री की, आग के साथ तुलना की गई है। तो दोनों का मेल नहीं होना चाहिए। ये खास कर के हमारे कर्मचारी को जो हमारे अभी महाराज के शिष्य हैं, उनको ये ध्यान रखना है। इस चीज का। कभी भी अकेले में बात न की। और बहुत सारी बातें हैं जो महाराज के जीवन से हम सीख सकते हैं
कि जब मैं शुरुआत में मंदिर में सेवा कर रहा था तो गुरु महाराज के इनिशिएशन का वन डे बिफोर महाराज आस्टमी क्या आप ब्रह्मचारी बनना चाहते हो या ग्रस्त बनना चाहते हो तो मैं गुरु महाराज के गुरु महाराज। अगर आप की कृपा हो तो ब्रह्मचारी रहना चाहता हूँ। तो नेक्स्ट डे इनिशिएशन था तो मंदिर में बिजली सेवा था और मैं शेविंग नहीं किया था तो गुरु महाराज ने इनिशिएशन अरे आप ब्रह्मचारी बनना चाहते है ना शेव्ड योर हैंड। तो मुझे इतना ज्यादा पता नहीं था। तो राधे श्याम, राधे श्याम, यू नोट टोल्ड गोइंग। तो बिकम ब्रह्मचारी। तो महाराज उसी समय राजेश बोल रहे थे। तो फिर इनिशिएशन सम इनिशिएशन हो गया। तो शाम को गुरु महाराज फिर से मुझे देखे। अभी तक आपने सेविंग नहीं किया तो उस दिन सेविंग नहीं हुआ। तो फिर 6 महीने के बाद फिर मैं और जुगल किशोर को एंड लंग ट्वेंटी फाइव अदर बॉइस हम जू मंदिर में गए गुरु माराज का प्रवचन सुनने के लिए तो प्रवचन सुनने के बाद मॉर्निंग भागोतम क्लास हो गया। उसके बाद जुगल किशोर मुझे बोले चलो हम गुरु महाराज का रूम में, पर्सनल मीटिंग के लिए जाते हैं। तो मैं आऊंगा क्यूँ अभी तक शेविंग नहीं हुआ है। तो जुगल नहीं भागोतम क्लास हो गया। अभी चलते हैं महाराज को 6 महीना हो गया अभी याद नहीं रहेगा तो चलते है। तो हमने गए महाराज का रूम के अन्दर हम पचीस लोग साथ में थे और मैं पीछे छुप रहा था तो गुरु हमारा सब जगह देख रहे हैं मुझे अरे आपने सेविंग नहीं किया क्या प्रैक्टिकली मुझे 11 बाल 11 क्विंटल लग रहा था अभी मैं राधे, श्याम रोग, वापस आके बोला प्रभु जी अभी कुछ भी हो जाए में सेविंग करना चाहता हूँ तो तो कुछ
दिन फिर
शेविंग
हो गया महाराज सवा सौरी 8 साढ़े 7 से 8 बजे के आस पास महाराज टू रोपे जाते हैं हमेशा हर स्टोर पर बुक स्टोर, न इधर और ब्रह्मचारी सम जो भी है सबके पास जाते हैं तो 1 दिन जैसे कैपिटल में थे 24 लोग भक्त लोग जो है लिमका स्प्राइट स्प्राइट पी रहे थे और 1 ब्रह्मचारी भी उनके साथ भी स्प्राइट पी रहा था तो महाराज ने एक्च्वालली ब्रह्मचारी को डाटा से मतलब महाराज के डाँटने का भी तरीका है तो आप क्यों पी रहे बाकी हम लोग भी पी रहे थे महाराज किसी को नहीं बोला मतलब कॉरपोरेट में काम करते हैं तो ये ओके है इसलिए हमने रखा है कि उन लोगों के लिए कि वो आये और टेम्पल में कमी महसूस न करे लेकिन इसका मतलब तुम उसका उपयोग करो तो उसी टाइम महाराज का जो है वही बोला हूँ।