अंधकार से प्रकाश की ओर || from darkness to light || | 20.11.2017 || ISKCON Panchkula

In this devotional discourse delivered at ISKCON Panchkula on 20 November 2017, the speaker (identified only as Speaker A) expounds the Bhagavad‑Gita’s central teaching that true knowledge (jñāna) dispels ignorance (avidyā) and leads the soul from darkness to light. He distinguishes two kinds of knowledge—intellectual (vidyā) and experiential (bhāvanā)—and argues that both are lacking in modern education, urging the establishment of institutions that teach the Gita from early childhood. The talk repeatedly references the Krishna‑Arjuna dialogue, emphasizing the importance of listening attentively to the Gita’s message, performing one’s dharma, and understanding the fleeting nature of time. The speaker connects these spiritual principles to everyday life, urging listeners to cultivate devotion, self‑discipline, and service, and to pass the Gita’s teachings to the next generation. Throughout, he stresses that the Gita offers a universal, timeless solution to personal and societal suffering, and that sincere practice can transform individuals and communities.
Chapters
श्री किशन हरे हरे हरे कृश्ण की मान समाज भगवान के हम भी क्या प्रतापिता मैं हूँ। आपको जान कर खुशी होगी की भगवान के जरूर आप सबके पास है कॉफी इसका ना वो की अच्छी सी हो और सारे वि में गीता को है। ये गीता बने है। 2 प्रकार के ज्ञान होते हैं बहुत ही ज्ञान और भान। बहुत ही ज्ञान की कुछ कमी है खोलने को नही में इंस्टीट्यूट खोल सब अच्छा है। konनाwganकीकमी महा विद्यालय पर धातेज्ञानकी कमी है अमेरिका वहाँ विद्या हमारी टीम में है। प्रॉपर विद्यार्थियों से पूछा आपके प्रेस महाविध्याला में कोई ऐसा है जो हमें शिक्षा देता है की विधि वाले जाता है, कोई बोल नहीं पाया। la ma step for universty stem, universit, universit universit ten a department department beti तो भारत की बडी रची खास कर के भारत में गीता का सी छोटी आयु के दिया जा तो शिव सादिसकरम लाल प्राजी शिक्षा प्राप्त होती है। कहते है कॉमन आं्चरपरगिावजार आयु से हमें ज्ञान अनुकूल करना है। आनंद कर देना चाहिए। गीता के संदेश के द्वारा अज्ञानता दूर होती है। जैसे की में अर्जुन भगवान को कर मेने किया, हम के दूसरे में जुन ने स्वीकार किया मैने ये नहीं समझा। उनका क्या करते बना। मने उपरी ने पूछा हे युन। तुम्हारी अज्ञानता का दूर हो गई है। क्या ध्यान से इस संदेश को सुना है? देश सुने ध्यान से सुनना चाहती हूँ। कई बार कहते है जब गीता को से जमीन को सोने की तैयारी कर बताओ जवाब के ध्यान से पढ़ सको। आगे गीता होजागभगवानकीवाने वानी। और ये है सबसे पराचीन चौथे। ध्यान में ही लगाएगी। वैसे अब किसी प्रधानमंत्री से पूछो कि ज्ञान कितना बड़ा जीव है? वो क्या कहेगा जीवन क्या कहते है? आज में कौन जाएगा ज्ञान भगवान कैसे। 1 से भगवान ने कहा तुम इस बिहार के वीर से अनेक व्यक्ति में गीता का निवास किया है। जब से गीता जरूर प्रकाशित हुई है लाखों लोग जुड़े हैं। गीता के सुने क्यूँ की आप को मानक संदेश दिया जा रहा है। तो भगवान ने अर्जुन को भेज दिया। 1 रूप से। आप कह सकते हो अर्जुन को गीत में डाला था कि मान चाहते हैं की गीता को बे किया जाए। जैसे भगवत में देखते हो करेशबनाजपिधिव सम्राज जंगल में थे, प्याज से पानी की क्रोध में 1 कुटिया में पहुँचे और रोशनी है तो पानी साफ करने की कामना से या 1 बार में चिंतन कर रहा था। राजा की तरफ देखा श्रधा राजरिशी राजा और शांति से है मैं राजीव मिशा राजधानी से। आज ना तो देखा का विफ्रंसहैउनीतरफ देखा भी नहीं है। ऐसे कहा जाता है शक में अगर आपके घर में आए उनका स्वागत करो। दादाजी के से में सबसे बेटस आनंद है जो आए उसे पसारकर जैसे आप देखते हो। युवानो में मंगल होता है और बाबुजी के चलते मार मंद शाद ने तो शादी दे सकते हो पानी 2 पीनेके पानी भी दे सके तो दे बैठे फान 2 तो कपड़े के बाद देखा कि रिशी ने उनकी तरफ देखा। मुझे बस में निकले ने बड़ा सा है। और उसे हार के रूप में। और ऋषि के बेटे ने देखा क्या कि अमित शाह अगर भरी चाहे तो इस शाम में विरोध कर सकते थे को पता है कि जब वो माता के घर में भगवान की भगवान चाहतेे भगोदमपस्नदेदिया जाए मना के इसी प्रकार अर्जुन जो है वान के सनातन साथी है तो ये सोचना कि अर्जुन को पता नहीं लगा कि क्या जिम्मेदारी है 1 है अर्जुन ने प्रश्न भी पूछे वहाँ पर हम भगवान ने उद्देश दिया गीता के देश के विशय बने वे 1 महत्वपूर्ण है। जैसे कि दूसरे ध्यान में मन आत्मा के विषय में यह आत्मा का ज्ञान बहुत आवश्यक है। अनेक शोक के द्वारा यह साबित किया जा रहा है। या मारे जिस प्रकार हम हमारे पुराने बस, आकर नए बस उसी प्रकार 1 आत्मा 1 देवता कर क्या करती है और आत्मा भगवान नहीं कहा और आत्मा का माफ क्या है? बल का वा और आसमान है तो चेतन रहेगी आत्मा स्वीर त्याग दी है चेतना रहती है पर ज्ञान में जान दे नहीं बन में भी इस विषय पर what you do get the home lotto? तो सारे विश्व के हल को प्राप्त कर लोगे। रातमखोलिक्याप्रापत ये बला मध्पूर्णसंदेश है। क्यूँकी हम उस पार में पाती है? क्या सीखा मिलती है तुम भी शुरीहो सच ह म सब आईने आईने के सामने कितनी बार जाते आप देखने जा रहे हो कितने हो? और जो है वो क्या है? गुरू जी का छात्र से बैक उसमें उन्होंने 1 हुआ था लिक्विड ब्यूटी हो। इसके प्रति। राजकुमार ने कहा कि धन्यवाद तो ी राज, शिक्षा मिले के एंटी सूती क्या है, उसे दवाई जाने पर अब बस बना ले तो ऐसी बसूरती है सनातन। फिर भगवान ये साबित किया जाता है भगवान का श्री, भगवान का छा क्या वन बोलते है, भगवान बोल रहे है ये सन्देश, ये साबित किया जाता है। भगवान है कौन व्यक्ति गीता की चर्चा करेंगे। उर्जा ऑपरेशन भगवान का प्रश्न आता है। कुछ और ही संदेश दे रहे। इस में स्वयं भगवान ने दिया ये जीत के द्वारा हमें समय के विषय में भी ध्यान मिलता है। समय का क्या प्रभाव है? समय जो है हर चीज को नश कर देती है। आज आप बड़े खुबसूरत हो। उस समय क्या करेगा? यह देखेगा कि समय के साथ आपकी खूबसूरती नहीं है। भगवान हो राजपास, समय ही देखेगा। किसाब के साथ ये बीमार है समय जी को नेशनल समय के विषय में लगे पोने कहते हैं। दबाया सामको 1 पल का भी दुरुपयोग करोगे तो सारे विश्व के धन से उसे वापस प्राप्त नहीं कर सकते। इसलिए संतों का कहना है कि समय में बड़े सावधानी से उपयोग ना जाए। कथा पढ़ते हो। वन में 1 में राजा नाम राज उन्होंने देखा बस योग दिया था। भारी हम बिल क्या सेवा कर सकते हैं? ये बताइए कितना समय बच में जीने ले? और तू तो सर्वे का हमें बड़े ध्यान से उपयोग करना चाहिए। हम बचाने के लिए है। और समय का में चर्चा जीवन में, जीवन में, प्रकृति के विषय में कहा गया है प्रकृति किसके भगवान के। तो इस प्रकार की धन हमे बड़ा महत्वपूर्ण जान साफ होता है। और भगवान भी कहते हैं। समास वे भगवान मन बुधि को मुझे अपन करते। और गीता का निर्णय क्या है? याद करो जी कौन का स हमारे ये नहीं कहते। तुम कुछ काम मत करो। तुम्हारे आज से क्या कहा? तुम्हे अपना कर्तव्य देना चाहिए। कर्तव्य। तो भगवान के यह जो भी तुम करो, जो भी दान। 2 तो भगवान ने अर्जुन से पूछा हे अर्जुन, तुम्हे ध्यान से यह संदेश सुना है। क्या तब ज्ञानता अब दूर हो गयी है। भगवान के अनेक नाम है। अब भी हमारे नाम हो गया। हमे ना गम क्या है? फेलर कभी गलती नहीं करता। आ कर हम कभी करते हैं, न गलती करते हैं। पर कोई और मुझे सन्देश है। क्या? कहते है ये नहीं, हम कह सकते। गीता का आज आधुनिक में कोई स्थान नहीं। सारे विश्व में कृष्ण भक्ति का संदेश पा छे दिन अब महा बगूजेधोएभगवान है। उनकी भविष्य वाली थी। क्या? इसी को दुनिया के हर घोले में क्या यह नाम पहुँचा? परावादी में नाम को तो पहुचाया। दुनिया के हर टूर्नामेंट साल में गीता के सदेश को पूछा सारे। आज पिता का विश्व के अनेक के 3000 से अधिक वह पश्चिम देशों में का किया जाता है और लोग ईद क्यू पढ रहे हैं। इसे पर यूरेका चुरा नहीं है। बिहार का अब दूर होगे तो उसी प्रकार हम सब ज्ञान था कि नहीं पैदा होती है। पैदा हुए थे, देखना पढ़ना जानते थे, जब जानते थे ज के अपने 10 के हम 1 बंदर का चालन करते हैं। ज्ञान जीवन जन्म हुआ था, ज्ञान का, ज्ञान दूर हुई है। हमें ज्ञान है तो उसी प्रकार हम सब को ईदा का ध्यान भी प्राप्त करने का प्रयास नहीं है। नियमित रूप से ईजा की शिक्षा दे दीजिये और गीता को सलमान। खानदान में बच्चों को 4 साल की उम्र से अमान की शिक्षा देना आरम्भ करते हैं। आपको अपने बच्चों को 4 साल की उम्र से भारी बल की शिक्षा देना पसंद है। हमारे पास पूरे भारत में गीता कांट्रेस्ट करते है। जिसमे हम लोगो को इनाम देते हैं। हे की वो गीता पढ़े में कई बार मुसलमान नेसाए साल पहले दक्षिण भारत में 1 मुसलमान फोर्स तो नाम लेना था स्टेज पर कहा कि आप कुछ शब्द बोलना चाहते हैं, उसने क्या किया था उसे मैं देखता हूँ। जब मुसलमान लड़का नाम मच जाता है, गुलाम को साथ लेकर जाता है। देखता हूँ की जब कोई क्रिस्टिन लड़का बच्चा जाता है, वाइवलकेहा बच्चे ना जाते, तुम्हें हाथ में कुछ नहीं होता। अच्छा तो हम गीता के महत्व को नहीं समझते। इसलिए सिखा देना सीख कम्प्यूटर वह भारत में कोनेपनेटॉनरसखूल हम बच्चों को लाई भी। तो इसी प्रकार जीता का संदेश बहुत मानपूर। 1 ज्ञान से अब दूर हो गयी है। राम के पा से मैं समझ पाया हूँ, क्या है, मै करता है। और अब मैं मुक्त होकर होकर आपके आदेश का पालन करना चाहता हूँ। ये होना चाहिए। हम सब का भाव है या भगवान के देश का पालन कर तो जिस प्रकार अर्जुन ने कहा हमें ज्ञान दूंगी। मैं आपके संदेश के आधार पर कार्य करना चाहता हूँ। क्या सर्वाधार मे हम तुम बा गीता पढोगे तो ज्ञानता दूर होगी और पढ़ोगे नहीं तो दूर होगी। तो इस शो के साथ साथ पढना बहुत आवश्यक सेवा। हमारे पढ़ने से काम नहीं चलता। साथ पढने से महान संसर की व्याख्या में हमें समझा तो प्रॉपटी में क्या कह रहे हैं। यह जीव आत्मा का कर्तव्य है की सेवा में रहे। हम भगवान के सेवक में तो भगवान का जो सन्देश है, की का ये सुख शान्ति का उद्देश आज समाज में क्या देखते हैं, क्या देखते हैं, ट्रे हा हा के, बढ़ते जा रहे हैं, बढ़ते जा रहा है चिंता पर niनsaबेcaनी एंटी डिप्रेशन फिल्म लेते हैं ना जिंदा, बढ़ जाती है की डिप्रेशन हिंदी डिप्रेशन गीता पर ध्यान से पढ़ोगे तो हर कठिन पूरी स्थिति का भी सामना कर के चेतन में पढते हो। चेतना बबूल भारत की हा करने से भारत के रकुरप्रसिमंडरशीरंग में पहुंचे तो वहाँ रोज 1 अनपर ब्राहमण 1 खम्बे के पीछे बैठकर इधर के 18 ध्यानों का उच्चालन करता था और ग्राम था odi शो के ठीक होता था और जो पडोस लोग थे वो जानते थे, दिखावा कर कोड बन गया। वे हंसे थे क्योंकि वे ठीक 4 नहीं कर पाते। और गीता सामने लगी हुई थी। और गोल बरामनइससानम ताकि है उनका, वहाँ गए के जो लक्षण प्रकट होते हैं, शुभ लक्षण है किसी स्धाननव्यक्तिके नहीं। वहाँ प्लग ने पूछा हे ग्रामीण, इस गीत में क्या है? जिसके अध्ययन से तुम लक्षण को पकड़ कर ले हो? तो ग्रामीण ने कथा सुनाई मेरे गुरु का देश था रोज 18 को पढो और मैं अनपढ़ हूँ। क लोग स गुरु का जो मैं देखता हूँ, भगवान श्री कृष्ण अपने भक्त के पर्दे सारथी बन गये हैं। देखता हूँ भगवान की विनम्रता भक्त के आदेश पर परदशारथीबनगएहै। तो मैं नम्रता देखता हूँ। और आंसू बैठे है मेरे यहा कौन से महाधरने गले लगाया तुम गीता के संदेश को समझ हो। भगुनमुझसेअपेसाजान मेने लगा गीता कर गया सुना। तो गे कहते है की यहाँ ब्रा मे गुरु किया, देश का पालन किया, इसके क्या परिराम हुआ हमारे स्व मारे उन्हें की। तो 2 पर तो अर्जुन ने कहा की अब ये ज्ञान दूर हो गयी। दीर्ध होकर आपकी सेवा में जो भक्ति के मार्ग में जुड़ते हैं, हमें दीर्ध होना चाहिए। इस पेशे की चर्चा वहारसमसामीकरते हैं। अनेक ग्रंथो में ासतरकेदेशहैउदेसमे 1 छोटा ग्रंथ है जिससे केवल ज्ञान श्लोक है। आप में से कितने बकरे? जिनके पास सी देश घर में है, कितना पढ़ी तो यह भी मानने से होता चाहते हो कि लक्षण की आवश्यकता है। उस ऊछ उछा से भगवान की सेवा करने चे। 1 गाँव में 1 पिता व इसकी छाती गाँव के सबसे प्रसिद्ध व्यक्ति के पास उन को और देखा उस गाँव में जो व्यापारी है उसे सब सलाम करते है। गाँव में। फिर तुम से पूछा मैं सेवा कर सकता हूँ, यह कर सकते हैं। फिर उसने देखा थोड़ी देर बाद वो दुकान का मालिक है, उडाने के खजांची पर सवाल करता है, सबसे बड़ा आदर देता है, कर देता है। समझ गया। ये जो मेरा मालिक है, उसको इतनी राजा पिलानी क से चाहता हूँ, बिना जीका से। इसने देखा की जान की भी किसी और को समान करता है। राजा को। उसने पूछा, मैं राजा का सेवक बन कर। मुझे लगता है कि सबसे ऊँचा राजा की सेवा शुरू कर दी। मैंने राजा की सेवा की। उसने देखा कि राजा भी झुकता है, किसके सामने, शांत के सामने। उसने समझ, यह संघ का पास राजा से पूछा है। उसने राजा से पूछा, मैं इस संघ की सेवा कर सकता हूँ। मुझे लगता है कि आपसे ऊँचा है तो संत की सेवा। शुरका वो भी झुकता है। किसी के सर में भवन के साथ, तो हम जो भर्ती में जुड़ते हैं, क्या, वसाहत और जैसे हो कर। यह नहीं कि आप बत्ती में जुड़ोगे कोई कठिनाई न, कोई दूर नहीं पिटेगी। कुछ प्रेस खुशी देश की प्रार्थना है। भगुदमकेखतमनबढते। हे भगवान। आज मेरे कर्जों को बुलाओ। जितना बढाते, उसने जितना मेरा स्मरण करूंगी। गीता का सन्देश भगवान से कोई अंदर नहीं। शिव भगवान प्रकट हुए, उन सारी। अर्जुन अर्जुन ने मंजिला बुत संभव थी। सभता प्राप्त कर सके मन के कारण। अर्जुन दुखी दे। हम भक्तों के लिए यह ज्यादा करना कितने दुखी है। बड़ा कठिन है, जैसे आप सुनते हो। गोपियों के लिए। 1 पास भी रहेगा। गोपियों ने ब्रह्माजी को दोष दिया, क्या दोषी के ब्रेक करते देख समझ नहीं सकता। मुझे उदास का इस प्रकार भायोको, इसके पश्चात रंजन ने भगवान के गीता के संदेश जब गीता के से जैसे की हर भगवान स्वयं ही उपस्थित है। रिया समझाते है की जैसे अंजू ने गीता के सन्देश का स्मरन किया, इस प्रकार हम सबको क्या करना जाए, जब कर पाओगे, अध्ययन करोगे करोगे। मेरा भरण सी निवेश है की कितने सभा में अगर मैं पूछूँ कितने अखबार रोज से उपर उठा तो ये हमारे सो। 1 आप जानते हो गीता हमारे लिस्टोन के बाद सारे वि में क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते है, क्या करे? ये जो गंदा के वजन की सेवा है, यह मानव समाज के सुधार के ल हम रहे थे, लोग दुखी हैं, पीर थे। किस का हमारे पर मूल कहर? अगर इन विषयों में किसी सी की कमी है तो और जैसे आप जानते हो में वहाँ क्या कहते है, कौन है, सबसे प्रिय, कौन है, सबसे प्रिय, यह मेरा विचार करता है। तो ये जो की सेवा है, ये बड़ी महत्वपूर्ण सेवा है। बाबा जी को बहुत ही प्रिय थी के आप देखे प्रापा लगभग 70 साल के में पाना छोड़कर 1 कार को पानी के जहाज में काम मेरा देखने घूमने के लिए e cos program आपके wives प्रधानमंत्री वा उन्होंने कहा कि जो कार्य पाती है, वह भारत की हार तो अब सारे 1 हमारे गुरु या द्वारा उन्होंने फिल्म बनाएंगे, जेल जिंदगी यहाँ से देख पाओगे और सारे है हो रही है परिवार में चिपट ग आप सब जाइए देख रही। ठीक है पीना, उसे आप देखोगे तो बराबर के ये भाव था। to probatiengland prensipodनेpuछa swamiji what to give us? स्वामी जी हम क्या लेने आये हो swami i god for go ा report bra astre bring the minister is on तो ये जो वेदों के ज्ञान का सार का है, तो यह ज्ञान की बहुत आवश्यकता है। और जब प्रयास करते हैं, वे ज्ञान को आगे बढ़ाने के लिए भगवान प्रसन्न। वह हर साल हमारे भर प्रयास करते हैं, अधिक से अधिक मात्रा में वजन करने ले। पिछले साल ने मिल कर सभी गपनकेलेबताईथाकी बाजी की 26 उसे पिछले सब बद हो और आपके पड़ोस में पंजाबी बाग पंजाबी। बाग के लगभग नगर के मन भी भरते रहे है। नगर का मंदिर देखा तो उसका क्या केवल मंदिर के ही आप जैसे प्रिय भक्त जो घरों में रहते हैं, धंधा करते हैं, पार करते हैं, नौकरी करते हैं, घर की देखभाल करते हैं। ऐसे संत ने कहा हमे भी सबको चाहिए बनवाने पर क्या आपको लगता है मिल गई और भगवान कहते हैं मैं सो जाता हूँ सब से निवेदन है हम। 1 तो गीता के संदेश पढ़ी है, कितने भक्त हो। 1 गीता का रोग को रोल पड़ोगे सर आप भी मान देते। तो चहा हम पढेंगे 1 तरीके से पढ़ने में नुकसान नहीं है, बाल है बोले सब जुडिए इस था कौन कौन जुड़ेंगे महथा। जिस प्रकार अर्जुन ने कहा, हे भगवान, वे ज्ञान सा दूर हो गयी है। अब मैं आपके आदेश के अनुसार कार्य करने को तैयार हूँ। तो वो होना चाहिए। हम सब का भाव क्या होना चाहिए? हम सब का भाव। और जी क्या कहा श्लोक में जाएगा? अजी क्या कहा दूर हो गए? और मैं फिर होकर आपके आदेश के अनुसार चलने या वो इधर पड़ोगे शांति में रहूंगी शो के कहते है, जिसका भाव से कार्य करो। जिस प्रकार कमर का फूल जल में होता, इसी प्रकार मे रहते हुए श्रद्धा के शादी है। तो केवाकगे इधर पढी है। तो बाल किशन किशन हाई क्रिश्ना हाई, क्रिष्ण, किशन हाले हारे हारे हाल।
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