यह वीडियो एक भक्ति प्रवचन है जिसमें मुख्य वक्ता (Speaker A) श्रोताओं को दिसंबर महीने में कृष्ण भक्ति के ज्ञान को व्यापक रूप से फैलाने के लिए ग्रंथों का वितरण करने का आग्रह करता है। वह बताता है कि अठारहवें दिहा (श्लोक) में भगवान ने कहा है कि जो भक्त अपना ज्ञान दूसरों तक पहुँचाता है, वह शुद्ध भक्ति प्राप्त करता है। वक्ता इस कार्य को कठिन को सरल बनाने, सेवा के माध्यम से भगवान की बुद्धि प्राप्त करने और जीवन में सही व्यवहार सीखने के साधन के रूप में प्रस्तुत करता है। एक उपमा के रूप में वह बच्चे को ड्राइविंग सिखाने की तुलना करता है, जहाँ पिता मार्गदर्शन देता है। अंत में, सभी भक्तों से इस कार्य में सक्रिय भागीदारी और समर्पण की अपील की जाती है।
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आज आप देख रहे हो कि सारे विश्व में अनेक प्रकार के कष्ट है और अगर हम इन कष्टों से छुटकारा चाहते हैं तो 1 ही उपाय है वो उपाय क्या है यह कृष्ण भक्ति के ज्ञान का बेटा मैंने सुबह आप लोगो को समझाया था कि दिसम्बर के महीने में, तांती के समय हमारी संस्था के सारे भक्त जो मंडल में रहते हैं, जो घर में रहते हैं, आप जैसे सब ये जिम्मेदारी उठाते हैं, प्रयास करते हैं कि अधिक से अधिक मात्रा में इन ग्रंथों का वितरण करने का प्रयास करेंगे। तो आप सब से मैं निवेदन करना चाहता हूँ
की आप सब
प्रयास कीजियेगा इन ग्रंथों को बाटने के लिए भगवान कहते है अठारवें दिहार में सबसे वो भक्त है जो मेरा ज्ञान देता है, दूसरों को ठीक है न सब में वो है भगवान कहते वो व्यक्ति ये ज्ञान दूसरों तक को चाहता है उसे शुद्ध भक्ति हो जाती है तो
जो चीज कठिन है वो सरल बन जाती है। भगवान करे नौकरी करते हो, घर में हो प्रयास करो इन ग्रंथों को बाटने के लिए और भगवान आपके हृदय में विराज मान है परमात्मा के रूप में, तो जब आपकी इच्छा ये होगी की है, मैं भी भगवान के शिक्षा का प्रचार करना चाहता हूँ फिर भगवान आपके बुद्धि आपको बुद्धि देंगे किस प्रकार आपको चर्चा करनी चाहिए, किस प्रकार बर्ताव का नाच है, किस प्रकार आप दूसरों को प्रभावित कर सकोगे आप देखोगे की जब आप की निश्चित कर, लो के गुरु, भगवान के आदेश का पालन करना है सब भगवान आपको भगवान, आपके जीप के द्वारा, भगवान आपको बुद्धि देंगे। आपको ये बताएँगे क्या बोलना चाहिए, क्या नहीं बोलना चाहिए जैसे जब बच्चा ड्राइविंग करता है तो उसके पिता पास बैठकर स्टेरिंग पकड़ते हैं, सिखाते हैं गाड़ी चलाने। तो इस प्रकार जब हम ये भावना पकड़ करते हैं की हमें सेवा करनी है तो भगवान हमे बुद्धि देते हैं किस प्रकार से सेवा को हम से
हाय क्रृष्ण हारे क्रिशना क्रिष्णा, हारे हा हा हा र।