Glories of Srimad Bhagvatam | SB 1.3.40 | 23.08.2020 | ISKCON Delhi | Srila Gopal Krishna Goswami

The video presents a devotional lecture by Srila Gopal Krishna Goswami on the supreme glory of the Srimad Bhagavatam, focusing on chapter 1.3.40. The speaker explains the divine authorship of the text by Vyasa and his son Shukadeva, emphasizing that the Bhagavatam contains the highest spiritual knowledge and serves as the most effective means to develop bhakti (devotion) to Krishna. Historical anecdotes illustrate how saints and kings have propagated the Bhagavatam throughout ages. The session transitions into an interactive Q&A where devotees ask about practical challenges in spiritual practice, the relevance of the Bhagavatam to modern life, and how to disseminate its teachings via online platforms and courses. The speaker encourages sincere study, collective distribution, and living the teachings in daily conduct, stressing that true devotion requires dedication beyond material comforts.
Chapters
होम नमो भगवते वासुदेवाय भगवते वासुदेवाय हम्म भगते वासुदेवा तुम जैसे आप जानते हो पूर्णिमा के उपलक्ष में ये भक्त भगसमवितनकयामेरसन आरम्भ करते है। तो आज हमने भागवतम के प्रथम स्तर के सीसे का छू के पूर्ति कर रही है। okay i mind that go का बोर्ड पर है दम शो नहीं है भाग 1, 3, 40 है। बोर्ड ठीक है उतमामcकcजमकारा भगवान या
म
श्वास माना बाहर उतमनोकचरीतमाभगवान श्या चहतमकभगवानशीश्या उमा भगवान शिव
या
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हम
मेस
लोग
कायल हो बस
सौरी पहले 2 पेज में है मेरे देखे नहीं थे
माता
जी शब्दद उदम इस
नामों का
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में मां समस्त
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भारी रा सभी 2 अरससुनलहोगे संजय पूर्ण रूप से सफल
दोस्ती
सीवर भाग सही कहा गया सन
के बाद वे से
लोगों के धन भगवान श्री के घोषित किया है श्रीमद भागवत समस्त, ध्यान तथा इतिहास की निर्मल उसने भगवान के निवाले के चुने हुए दिए गए है। श्रीमद भागवत भगवान कृष्ण का हालिया अपील है, कुल से है। अगर श्रीमत भागती खोजा उसी सम्मान से करना चाहिए जिस तरह भगवान भी करे जिस अध्यन के भगवान का आशीर्वाद कर सकते है। जिस प्रकार भगवान गोलणपदासहो गुल आनंद सरलता पर है उसी तरह है श्रीमंत भारत श्रीमंत करने से हो सकता है। ऐसी बार दर्शी गुलों के माध्यम से करें पुरी में भगवान जैन जितने लोग उनसे जी सर। मेरी कहा है की किसी भाग से भाग करना चाहिए। भागवत शुरू मानिक 2 है और मंच रात करने के लिए 19 ऐसी शिक्षा क करनी चाहिए? ऐसी ये सारे नाम रात हो सकते हैं जो भगवान के साक्षात् ऐसी होती है। यह भगवान विश्व के भी वालों को प्रदान करने वाला है जो भगवान के साक्षात संपर्क से मिल सकती है।
ओमेगा राजिया yanjnasaganas मनोज सबामनमूतलेा band ham
चेतन
भगवान ह मे जी भागवत का करते है। यहाँ कहा गया है भगवान का साहित्य अवतार है सोचो न पहले भगवान का सना से साहित्य अवतार की भी व्यास दे और ये जो व्यास देव कौन है, ये भी भगवान के अवतार हैं। श्रीमत भगवत है साहित्य अवतार और व्यास देव है साहित्य और ये जो श्रीमत भगवत का संदेश है, यह समाज के लाभ के लिए है। जो व्यक्ति इसे पढ़ेगा वो सफल होगा, आनंद में और जीवन के लक्ष को प्राप्त कर लेगा। शी ज्ञान सबसे उत्तम ज्ञान है और भागवत ज्ञान में कहा गया है
कि
यह सबसे ऊँचा ज्ञान है। तो ये ज्ञान की रचना किसने की है और इन शोकों में इस ध्यान के अनेक शोक है जिनके द्वारा भागवतम की प्रशंसा की गई है। तो भागवतम जो है सबसे ऊँचा ग्रंथ है और अगर हम इसे लाभ उठाना चाहे तो हमें तो माने गुरु द्वारा इस शिक्षा को प्राप्त करना चाहिए। व्यास देव ने अनेक सासों की रचना की थी और वो स्पारसवरी नदी के सर पर बैठ कर चिंतन कर रहे थे, सोच रहे थे। मैंने इतनी रचनाएं की हैं, उनके सार को भी प्रस्तुत किया है। अब भी मुझे लगता है मेरे कार्य में कोई कमी रह गई और जब वो विचार कर रहे थे तो उस समय है कौन पहुँच गए कौन गुरु से और मार मोली ने कहा तुमने केवल शुद्ध भक्ति पर बल नहीं दिया, पर भगवान के अनेक गुणों का वर्णन नहीं किया। और इसके पश्चात उन्होंने हमें श्रीमद भागवत का ज्ञान दिया। वैसे तो पुराणों में 4 लाख से अधिक शोक है जिसमें 18 जार शोक है। श्रीमद भागवत के श्रीमद भागवत सबसे तुम ज्ञान है। और प्यास ने यह ज्ञान हमें दिया है। और रावजी ने और हमारे चारों ने हमें प्रभानिकसंदेशभी सुन्द मुनि से को कहा। क्या कभी उनकी रचना में 1 भेज के उन्होंने 6 भाग भी बना दिए थे और मुनि पूर्व जन्म में 1 संतों के घर में सेवा करती थी। संत महात्वा जो है अक्सर यात्रा करते रहते हैं, और वर्षा के 4 महीने वही की हर में रुकते थे और मुली उनका भाग्य था। क्यू ने माता के कारण इन संतों की सेवा करने का मौका मिला सेवा मिले की जो देश वो वो भी। और जब उनकी माता का हाल तो उनकी माता गई थी दूर गई गाय से दूर ले में वापसी पर। 1 सामने का मे छोटे थे। और इस घटना के साथ सौ प्रतिशत दिरभर हो गए वन के प और मोदी ने हादसा करते गए और स्मरण करते गए। तो श्री भगत श्री स्वामी ने राज को श्राप प्राप्त हुआ था श्रृंगी के द्वारा ऋृशिमरासेधरमिक भाग के राजा थे और जब उन्हें श्राप प्राप्त हुई उन्हें इसका विरोध नहीं किया। धार्मिक राजा थे राज, ऋषि थे, राजा भी और ऋिशिभी। और 1 समय जब जंगल में थे, मुझे प्यास लगी देख रहे थे का जल प्राप्त हो सकता है साल में उन्हें 1 कुटिया देखी जिसमें थोड़ी सी रोशनी थी, तो गए उस कुटिया में इस समीर के साथ जल प्राप्त होगा। और संत थे उन्होंने उनकी तरफ देखा भी नही राजा ने इसे अपराध मसूरिया और राजा ने गुस्से में भरा शाम सवा उसे हार के रूप में चढ़ा दिया। शाम में कहा गया है, अगर शत्रु भी आपके घर में आये तो आपको इसका स्वागत करना चाहिए। सबसे बेहतर है अगर आप उसे स्वागत करो 7 के साथ प्रसाद के द्वारा नहीं कर सकते तो कम से कम जल तो 2 जल्द भी नहीं दे सकते। मीठे शब्दों से स्वागत करो। बैठने का स्थान 2 किसी न दिया गया तो वो कूदे थे? और जब वो बाहर निकले उन्होंने उस मरे शाम को हार के रूप में पिला दिया। और जब उस ब्राहमण लड़के ने देखा होंगे मेरे पिता को गले में ये सब हार के रूप में चढ़ा दिया है। बड़ा क्रोध आया और शराब जैसे ही शराब प्राप्त हुई उस समय के सारे उपस्थित संतों को और 1 ही व्यक्ति आने वाला है उसे क्या करना है। तो शुकदेव स्वामी ने ज्ञान प्राप्त किया था। किसके द्वारा देव के द्वारा। स्वामी ने भागोतम का उपदेश किया। और उस सभा में हजारों संत पढते थे जिनमे 1 थे सूत्र और उस समय जब शरिया में यज्ञ हो रहा था, बहुत बड़ा यज्ञ संत महात्मा है वो भविष्य के लक्षणों को देख सकते हैं। और इन्हें पता था इन संतों को कलयुग आ रहा है। तो उन्होंने जो थे स्वामी निवेदन किया। आप हमें दीजिये स्वामी ने हुई भागवत साहब जो कि उन्होंने सुना था सुगदेस्वामीके द्वारा 1 बार सुनने में ही 18 हजार सोको को क्या किया कंटेस्ट कर लिया। और में तो ये जो श्रीमत भगवत है सबसे उत्तम ज्ञान है। और भागवत में कहा गया है आगे भगवान प्रकट हो गए हैं अपनी वाणी को छोड़ कर ये कहा और इस तार पर में पापा जी कह रहे हैं ये जो श्री का ज्ञान है, सबसे उत्तम ज्ञान है। और यह ज्ञान है भगवान का साहित्य। जैसे हम भगवान की पूजा करते हैं उसी प्रकार हमें भागवत की पूजा करे। भागवत की पूजा का असली संदेश ये है हमें भागवत को पढ़ना चाहिए भागवत की महिमा का प्रचार कर रहे थे। तो क्यूँ? क्या कारण है? क्यूँकि भागवत के द्वारा आपको ये सन्देश मिलता है जीवन का लक्ष्य क्या होना चाहिए? प्रथम में प्रथम अध्याय में कहते हैं सर वे पूर्ण परो धर्म ह बकती धर्म क्या है जिस का भाव से जो किया जाए। और शुरू से अंत तक यही सदेश दिया जा रहा है। और भागवत में भगवान के अनेक संतो की का उदेश्य है और परम भगवान की अद्भुत विधाओं का भी वंदन है। और सारे संतों का क्या है उपदेश मनुषी जीवन का उपयोग करो किसलिए तो श्रीमत भगुतम के द्वारा आप ये समझ सकते हो की पूरा समाज कैसे सुखी बने। क्या कहते है लोग ये नहीं जानते कि असली शोक कैसे प्राप्त होगा, आप बहुत वाले प्रयास करते रहते हैं, यह चीज में सफल हैं। तो सोचते हैं अगले कदम में सफलता प्राप्त होगी। प्रंत में क्या अनुभव होता है? भागवत में अनेक लीलाओं का मन है क्यूँ लीलाओं के द्वारा हमें संदेश मिला परीक्षा मराज ने पूछा
सी
असी धर्म कैसे प्राप्त होगा? और छूल भक्ति के द्वारा भक्ति यह 1 साधन है। और आगे जाकर उन्होंने कहा कि पुराणों में 1 कथा है और उन्होंने आज की कथा सुनाई। आज मेर का जन्म हुआ था आध्यात्मिक वातावरण में, और भाई राम की महिमा ज्ञान भी था वह 1 समय जंगल में गया था भगवान की पूजा के लिए, फूल फल लाने के लिए, रास्ते में, उसने देखा 1 वैश्या अपने प्रेमी के साथ। इस घटना के प्रति वो आकर्षित हो गये, और उन्होंने उस मस्य को नौकरानी के रूप में रखा, फिर पत्नी के रूप में, और उनके अनेक बच्चे हुए। और सबसे छोटे बेटे का नाम क्या था? तो आज में जिसका जो पला था ध्यान दे वतन में उसका भी पतन हो गया, केवल क्योंकि उसने बन के द्वारा ये घटना जो देखी थी उसका इसलिए कहा गया है मन में करोगे। तो क्या लाभ होगा। तो ये अवश्य है किया मन के द्वारा तिहासिक विषों की स्मरण करे। तो आज हम को हर प्रकार के पाप के कार्य में जोड़ना पड़ा पत्नी माता पिता को छोड़ दिया। और उसको पाप का भोजा इतना बढ़ गया था कि यमराज ने कहा, चलो अब से और यमराज ने 3 को भेजा आज को उनके पास जाने के लिए दे। 33 साधन हैं जिनके द्वारा भगवान की सेवा कर सकते हैं। जिनके द्वारा आप भगवान को भूल भी सकते हो। क्या ये 3 साधन बंद वाला और bani और इनका आप शुद्ध योग करोगे तो भगवान की सेवा में उपयोग हो। दुरुपयोग करोगे तो परिणाम भोगना पड़ा। ये भ्यामदूतआय आज मिल को जाने के लिए यमराज के पास जमीन घबरा गया या क्या किया उसने भगवान अपने छोटे बेटे का नाम पुकारा और इतने किराए के साथ पुकारा। और आज छोटे बेटे के प्रति इतना आकर्षित था कि हमेशा यह दिन में 50 बार छोटे बेटे को बुलाता था। दराराऊ ना नरायण 1 मिनट में रहना और जब उन्होंने नारायण शब्द को पुकारा तो तुरंत ही वहाँ विष्णु दूत पहुँच गए। उन्होंने कहा कि तुम इसे नहीं ले जा सकते। और ये कहा की तुम्हारा अधिकार केवल उन थानों में है जहाँ के लोग हरी नाम का उच्चारन नहीं करते। ध्यान से, ज्ञान से, योगी, हरी नाम का उच्चारन करेगा। जीवन के लक्ष्य को तो। ये है शिव भगत का ने शुक्र को स्वामी ने पूछा बताओ कलियुग में लोगो का उधार कैसे होगा? तुम्हे क्या कहा हे राजा, का में 2 दोष है पर गुण है या वो क्या है? तो ये है भागवद। जैसे भागवत हा गया है। भागवतम के द्वारा आपको सबसे उत्तम ज्ञान प्राप्त होता है और ये भी आप पढ़ते हो। अनेक कथाओं द्वारा के इंदियकइंद्ियों को आप कभी भी संतोष नहीं कर सकते। अमिशमनाजका उदाहरण पढ़ते हो। किस प्रकार उन्होंने मन बुद्धि इन्द्रियों का उपयोग किया। भगवान की सेवा में श्रीमत भगवत में शुरू से अंत तक केवल शुद्ध भक्ति का ज्ञान मिल रहा है। भागवत के दसवें स्कन्द में पहुँच कर प्यास रे ने भगवान की रीराम का मण्डन किया। इस इन श्लोकों में पापा जी कहते है की अगर हमने भागवतम को सुनना है। सो हमें मालिक प्रतिनिधियों द्वारा सुनना चाहिए। यही नहीं जो की भगवदम की रचना करते हैं। धन कमाने के लिए राज को जब शराब प्राप्त हुई, उन्होने निर्णय कर लिया था। मैंने खाना नहीं, कुछ पीना नहीं, कुछ और सुना भी नहीं। 7 दिन ना वो उन्होंने विश्राम किया, न 1 बूँद पानी का पिया कुछ उन्हें। भागवत सुनने से शुगर गुसवामीकेकवन मुख्य से इतना आनंद आ रहा था कि पृथ्वी में कहते है की मुझे किसी भी प्रकार की भूख नहीं लगी प्यासी। लगी ठकावट महसूस की इतना आनंद आ रहा था। भागवत सुनने से सो दसवे स्कर में जाकर भगवान के अबूतविलाओंकापढते हो और इन बूत विलाओं के चर्चा के पश्चात आगे जाकर रासलीला के पते हो। और व्यक्ति जब रासलीला तक पहुँचता है तो उसके मन में कोई शंका नहीं रहती। ये परम भगवान कौन है। श्री भगवान का सहित्य बता है और शास्त्र में कहा गया है कि जो भी भगवान हमको पड़ेगा सुनिएगा उसका जीवन सफल हो जाएगा। तो श्रीमत भगत के बारहवे सन में श्रीमद भगोजमके भार्वे स्कन के तेरे स्लो अध्याय शोकुवरतेरायकहा गया है की अगर पूर्णिमा के दिन बद महीने में श्रीमद भागवत हम को सोने के सिंगासन में जाकर बिठा कर किसी को दोगे गिप्स के रूप में तो क्या प्राप्त कर लेगा प्राप्त करेगा। भगवान श्री मद भागवत दाम सबसे उत्तम ग्रंथ है और खास कर के बदल पुर्णिमा के अवसर पर अगर कोई व्यक्ति भाग को पढ़े दे बाटे तो उसका क्या सफल होगा, जीवन सफल होगा। और कोई 34 साल पहले हमारे भक्तों ने सोचा कि हम भगत के द्वारा, पूर्णिमा के द्वारा इन घंटों को बाँट सकते हैं। और सबसे प्यारा पूर्णिमा का हुआ था। वो 4 साल पहले तो दिन पर दिन देख रहे हैं। हम सारे विश्व में लोगों की रुचि इस ग्रंथ में बढ़ती जा रही है। ये है शुद्ध संदेश भगवान का और पापाजी ने यथा रूप प्रस्तुत किया है। और पापाजी ने तो अंग्रेजी भाषा में किया था अनुवाद पर। आज अब श्रीमत भगवत को विश्व के हर परिसर भाषा में प्राप्त कर सकते हैं। वो सारे विश्व में लोग भागवत को पढ रहे हैं, क्यूँ? क्यूँकि इसमें दिव्य संदेश है। तो ये जो पूर्णिमा है उसका उद्देश्य यही है की लोग भागवतम को पढ़े और पिछले साल पिछले साल हमारे भक्त सारे विश्व में कोई 6007 हजार भागवतम बांटे थे। आप मानोगे नहीं हमारा 1 मंदर है होलसम है जिसके लीडर है का। वो लोग सारा साल भगवतम का मेरिकन करते हैं और कई सालों से उनका बढ़ते जा रहे है। ये साल पूरे विश्व में इस संस्था ने निर्णय किया है। हम 10 हजार भागवत, हमसे बात भागवत को बड़ा महत्व दिया। वृंदावन में थे मंदिर में बड़ी कठिनाई के साथ उन्होंने प्रथम स्तर को प्रकाशित किया किया था और प्रकाशित छापा, उसके बाद प्रो चंदा चाहिए था। भगवदम के सेकेंड होलियम को छापने के लिए पापाजी के समय वन मैन वो 1 व्यक्ति से सब काम करना पड़ता था। अनुवाद पहले टाइप और फिर दिल्ली आना थर्ड क्लास डब्बे में चीपीवाड़ातक जाना और बड़ी ही कठिनाई के साथ उन्होंने सेकेंड वोलियम को भी छापा सेकेंड वोलियम छापा था दालिया जी के सहयोग से थे जो दान काम करते थे। तो दालमेरजीकाबड़ा विश्वास था पोदा जी के ऊपर जो की उस समय गोरखपुर में रहते थे। गए ने कहा मैने से परे पोधा को दिखाओ उन्हें पसंद आयेगा हम छपाई के पैसे दे रहे है और प्रपाती लखनऊ गये लखनऊ से गोर और जो पौधा नहीं है मैंने सिर्फ देखा उन्हें इतना अच्छा लगा। उन्होंने कहा जालमे आप को जरूर इसको प्रकाशित करने में सहयोग देना चाहिए के क्या बच गया तीसरा होल तीसरा वोल छापने के लिए पापाजी के पास कोई धन नहीं था तो किसी ने पापाजी से कहा बॉम्बे में 1 औरत है धार्मिक विचार की उस शेदा सहयोग दे दे। पापा जी बॉम्बे आये और राज के दफ्तर में गए में गए ने कहा नहीं बड़ी ब्यास नहीं मिल सकते। तो प्रभा जी ने सोचा उसे नीचे तो यही रास्ता यही रास्ते से जादा है। तो प्रबा जी सीढ़ियों में बैठकर 5 घंटे जॉब कर रहे थे राह देख रहे थे कब शिवी जायेंगे जो जारी दी शाम को पापाजी ने फैक्टरी से पूछे कौन है? तो उन्होंने कहा की ये वृंदावन के बाबा जी हैं आये हैं आपका सहयोग मांगने के लिए श्रीमद भागवत के तीसरे भाग को उसने अगले दिन प्रॉपर्टी को बुलाया और बन गयी के खर्च को तो। इस प्रकार प्रभा ने को 3 वोलिमेंऔरजबयेभगतम प्रकाशित हो गया। पहला सन इन भागों में, फिर प्रपा ने सोचा आज मेरे पास हथियार है लोगो को प्रचार करने का उनका हथियार क्या था। श्री भागवत और प्रपा जी ने 200 सेट दूसरे जहाज में डाले और दोनों सर के साथ पापा जी अमेरिका में पहुँचे। जब प्रभा जी अमेरिका में पहुँचे अकेले थे, कोई शेष नहीं, कोई सहयोगी नहीं। तो प्रभा जी को हर काम खुद करना पड़ता था। तो नवम्बर 25 नाइनटीन सेवंटी फाइव वाले दिन के गोल सोसाइटी न्यू यॉर्क प्रपात पर निमंत्रण अगर लेक्चर देने के लिए। तो प्रपात कभी भी भगवद के बिना, ग्रंथों के बिना नहीं जाते थे। और प्रापा जी का भाव था जो लाइफ मेंबर हम बनाते हैं उन्हें भी ग्रंथ देकर से बंक बनाने। तो प्रापा जी के गोल सोसाइटी न्यूयॉर्क में लेक्चर देने के लिए गए थे। इस बार के दिन अपने साथ कोई 10 12 भागोतम के सेट भी ले गए थे बेचने के लिए। जब प्रापर्टी झांस में आ रहे थे अमेरिका, तो उन्होंने 1 सेट भागोतम का बेच दिया था झा के कैप्टन को गांधी जी, पापा जी कभी मौके को नहीं मेस करते थे भगवद को बाँटने के लिए। और जब विदेश जाने से पहले प्रपाजीदेलीकीलइ में गए, कई प्रसिद्ध व्यक्ति के घर गए और हर जगह उन्होंने क्या किया भगवदम करने का प्रयास कि कुछ प्रापा जी जब टैगोर सोसाइटी में गए, लेक्चर देने तो अपने साथ 89 गो ले गए। प्रपात के पास कोई व्यक्ति नहीं था उनका सेक्टर या योग देने के लिए। पापाजी बैठे थे। उस हाल में पहले वो 1 युवक मुसलमान टैगोर सोसाइटी में आया था। स्वामी जी के लेक्चर को सुनने के लिए। तो ये प्रभाजी अकेले बैठे थे। हॉल के पीछे। प्रोग्राम शुरू होने से पहले तो यह व्यक्ति आया और प्रॉपर े पास बैठकर। प्रफर जी ने उसे बुलाया इधर बैठो। पापा ने उससे पूछा तुम क्या इंडिया से हो? उसने कहा नहीं, मैं अमेरिकन हूँ, तुम क्या हिंदू हो? नहीं मैं मुसलमान हूँ वेरी गुड इंडिया। मैंने कई बच्चों को देखा है। कुराल पड़ते ह। यह बड़ा अच्छा है। वे प्रॉपाजीस्टीज पर गए और लेक्चर देने गए। उनके साथ भुदम किताबें भी थी और प्रॉपाजीकेबासकोई योगी नहीं हो। ये जो नया व्यक्ति मित्र बना था, प्राप पापा ने उनसे कहा कैन आस्की और फेवर में तुम से 1 फेवर मांग सकता हूँ। मैं स्टेज पर जा रहा हूँ, तुम इन किताबों को संभालना। तो ये व्यक्ति जो पापा जी को पहली बार मिला जिंदगी में प्रोजी डू मी फेवर में लेक्चर देने जा रहा हूँ। तुम्हें किताबों की देखभाल करना। परबजीलेक्चरमें यही साबित किया और प्रबजीनेलेक्चरकी समाप्ति आरोप कहा मैं श्रीमत भगवत भाया हूँ। भारत से इन भागों में जो लेना चाहे वो चल कर देख सकते हैं के बाद कई लोग आये भगवत देखने के लिए। उनका कोई अंदाजा नहीं था। भागो दम के विषय में तो पापाजी के पास काफी लड़के लड़के आ गए हैं। जो प्रश्न पूछ रहे थे तो जरूर थी को फिर से उनके ग्रंथो की देखभाल कर प्राजी देवि को कहा। मैं लोगो के प्रश्न का उत्तर देता हूँ, तुम मेरे भगवत देखभाल कर सकते हो। ये लोग खरीदने के लिए। तुम बेचो ने नया व्यक्ति पहली बार प्राजी से मिला, पपाजी ने उसे सेवा में जोड़ दिया और अंत में सेवा दी। तुम संभालो दूसरे में 12 सेल बेच दिया वो 1 सेल खुद भी खरीद लिया। तो इस प्रकार अब देखो प्रभाजी ने दिमाग लगा कर लोगो को जोड़ा सेवा दे। तो ये सब निर्भर है हमारे उत्साह के ऊपर, अगर हम उत्साहित होगे। लोग भागो दम पड़े गए। प्रति इच्छा पहले दिए थे की 60 वालियों में भागो छापा जाए। सिटी वोलियम तो हा दिस इज इंडिया मेसेज ऑफ़ पीस टू, द वर्ल्ड और प्रभाजी तात्परिय। उन्होंने लिखा जब चाइना के साथ भारत का युद्ध हो रहा था, वो पहला यु लोक पैदा भी नहीं हुए थे। 3 सिटी वन में, प्रभाजी तात्पर में कहते हैं ये 2 पड़ोसी जो हजारों साल से मित्रता के भाव में रहते थे, अब लड़ रहे हैं, युद्ध कर रहे हैं। पर वो श्रीमद भागवत के संदेश को पढ़ेंगे फिर भावना बढ़ जाए। श्रीमद भागवत में हर प्रश्न का उत्तर है और हर समस्या का है। तो यहाँ जो कहा जा रहा है सीमा भागोतम भगवान का सहित्य वतार है। और यह कहा जा रहा है जो भागवत को पढेगा वो सुखी भी बनेगा। और जो भाग को पड़ेगा बाटेगा उसके द्वारा भगवान के पी सी भागोतम सबसे उत्तम ग्रंथ है, उसको उसके वेतन करने का प्रयास करे। और हमारी बीबीजी ने 1 खास छूट देती है भागवतम क्यूँकी हम चाहते है भागवत गीता हरी के घर में है, उसी प्रकार यह भागवत हर के घर में पहुँचे। और आप नई नहीं, नहीं, बहुत कठिन है, असम्भव नहीं आप आश्चर्य हो गए। अमेरिका जैसी जगह में है। हमारे भक्त ऑनलाइन ने, साधनों के द्वारा भगवतम को बाँट रहे हैं और लोग खरीद रहे है। तो ये श्रीमन भागवतम का जो है। इसका मूल उद्देश्य यह है प्रापर भागवतम को हर घर में पहुंचाना और यह सम्भव है। इस साल हमारा गोल है 10 हजार भागवतम बाँट देंगे फूल। तो अगर हम प्रयास करेंगे तो अवश्य ही सफलता भी प्राप्त करेंगे। और भगवत अगर समाज में किसी चीज की कमी है, भागवतम के ज्ञान की कमी है। तो ये जो भगवत के पोइंट्स है, चाहती है कि लोग और ऊँचा से जुड़े इस सेवा में तक आपको जो पॉइंट्स मिलेंगे वो दुगने होंगे। और वो चिंता थी। हमने गीता बाटनी है, बड़ी अच्छी चिंता है। और आज के वाता देखते हुए इच्छा नही थी की आप सड़को में जाओ क्यूँ की हम चाहते नहीं की किसी को ये बीमारी हो जाए। तो उनके लिए क्या है श्री मत भागो तुम का भाग, तुम
को
को पा सकते हो, आप मित्रों के पास है तो उनको जोड़ सकते हो, मित्रों को जोड़ो तो प्रयास करें तो अवश्य ही संभव हो पायेगा। तो यहाँ कहा गया है जो व्यक्ति वदपुरी माँ के उपलक्ष भगत किसी भाषा में ये जो 10 हजार सेट की योजना है, ये सब भाषा में है, केवल अंग्रेजी में। और ये बद पूर्णिमा का जो है। ये एक्सटेन कर दिया है कब तक दिसम्बर। तो ये जो पोइंट्स हैं डेढ़ गुना, ज्यादा मिलेंगे। और ये प्वाइंट्स आपके के महीने में गिने जाए। शो ये भागवतम श्रीमद भागवत को हमे पढ़ना चाहिए और बाटना चाहिए। सपा जी कहते हैं अनेक समय ये जो भागवतम है, हमें रमनिक भक्तों द्वारा स्वीकार करना चाहिए। यह नहीं कि जो कथा कर रहे हैं, धन कमाने के लिए के लिए श्री भागवत सबसे उत्तम ज्ञान है, जिसमें शुद्ध भक्ति का वर्णन है, निष्काम भाव से सेवा करने का ज्ञान है। और अगर हम भगवन को पढ़े और शिक्षा का लाभ उठाये। जीवन को भगवद के पांचवे स्थान में जी क्या है। प्रमा क्रुतेवकर्मा अनेक भक्तों की विला है। भगवान ऋष्णुदेवअपने पुत्रों को उपस्थित थे, उपदेश दे रहे थे। उन्होंने क्या कहा? दुरुपयोग करना चाहिए? उसका हमें कैसे इस्तेमाल करना चाहिए? तपोरदेव्पुत्रका इसका उपयोग तपस्या से किसी की खुशी जैसे हो। बॉम्बे में 1 यू, 1 समय जंगल जैसा था। और जब और प्रॉपर के को पता लगा, झूमें प्रोपरली मंदिर बनाना चाहते हैं। को ने किया ने कहा, वह तो कोई सुविधा नहीं, दी रहने की चूहे थे। और रहना बहुत कठिन, तपस्या करना बहुत मुश्किल हो जाता। अगर तुम्हे भगवान के धाम जाना है तो तपस्या करनी पड़ेगी सो फोलो क्या चाहिए। यात्मिक जीवन में वर्दी करने के लिए तपस्या का बड़ा महत्व है। और प्या उन कार्यों का त्याग ना जो की 7 है। और पापा जी कहते थे आप 1 कदम उठाओगे भगवान 10 कदम उठायेंगे आपको। तो श्रीमाल भागोतम हमें रोज पढना भी चाहिए, ये नहीं की केवल हम बाटने पर दे रहे है पढना भी। और इस विषय में क्या कहा गया है? नमस्ते प्रशा, नीति भगवत, सेवा भगवत के भक्त भागवत। हमें नियमित रूप से भाग को पढ़ना चाहिए, सुनना चाहिए। और इसलिए पापा जी ने नियम बनाया। इस के केंद्र में हर भक्त भागोतम सुनना चाहिए और ध्यान से सुनना चाहिए, केवल सुनना नहीं। और ध्यान से सुनेंगे तो क्या लाभ होगा। शिव भक्तो द्वारा ये संदेश दिया जा रहा है। बार बार और रे लोगो के द्वारा सादुल दिया जाता है कि ध्यान में ने पूछा कि किस प्रकार यह भक्ति प्राप्त होगी। बेटे ने कहा साधु संघ के द्वारा और साधु संघ में रहने से
आप
भक्ति के विडियो का ज्यादा सरलता से कर सकते हैं। शिव भगत पढना है और बांटना है। और जैसे मैंने कहा विदेशों में भी लोग अब भागवतम को पड़ते है। और अगर आप प्रयास करेंगे तो अवश्य ही मेरे बाद सकेंगे आप सब से निवेदन है। भागवत का मैराथन आप सूचना दोगी कल जिसके विषय में बोली बाबा को सूचना देंगे। आप सब बड़े ऊँचा से जुडिये पिछले साल तो सब नहीं जुड़े थे। ये साल सारे को जुड़ना चाहिए। और अधिक से अधिक मात्रा में। पापाजी ने हमें उदाहरण दिया। कैसी थी नाई में आते थे बता की दिल्ली इन गंध को प्रकाशित कर तो सीमा गनतम द्वारा हमें शरजनतश्धभक्तधान दे रहे हैं और सबसे उत्तम पुरान मानी जाती है तो ये सीमा भागवत उसका ध्यान करना है और 7 विसक में रहेंगे उसका पालन भी ज्यादा सरल हो जाता है। 7 दशक में रहोगे तो भक्ति की विधियों का पालन ज्यादा सरल हो जाता है। इसलिए भगवान ने कहा की शादविसखमेंहमेरहना गा तो भागता का यही सन्देश है। आज सीता ठाकुरानी उनका अमीर भाव सीता, उनकी पत्नी अवेदा और अवेदा छाया महा विष्णु के अवतार हैं।
वे
शांतिपुर में सारा दिन रोज भागवत पढ़ते थे। और उनकी यही इच्छा थी के परम भगवान प्रकट हो तों का उद्धार करने के लिए। और उनकी पुकार का ये परिणाम है की परम बल प्रकट हुए कहा। गाँव में पिता का नाम था जगलाल मिश्रा और माता का नाम था द, जग बडे खुश थे भगवान हुए व सीता ठाकुर आनी, उनका अच्छा अभ्यास था बच्चों की देखभाल करने में, और सीता ठाकुर आनी लगभग माता जैसे भगवान की देखभाल कर रहे थे। भगवान के प्रगट होने से पहले उनके खानदान में अनेक स् का हुआ था। तो सीता रानी बड़े ध्यान से भगवान की देखभाल करती थी। और उन्होंने सच्ची माता को शिक्षा से कैसे बवाल देखा। जब वो शांतिपुर में थी, जब उन्हें पता लगा की बवाल प्रगट हो गए है भोज, वस्त्र सीता ठाकवानी ने भगवान को 1 नाम दिया दवा। बंगाल में ये सोचा जाता है कि वीं के, नीम के, पेड़ नीम के और जन्मी नीम के पेड़ के नीचे, तो उन्होंने नाम दिया था निरमा और सच्ची माता को योगमाया का अवतार माना जाता है। सी बात के 3 बेटे थे
और
चाय की पत्ती थी चाय महाविष् के अवतार है और न उनके हृदय में और सच्ची माता के हृदय में 24 घंटे केवल के विचार था, क्या था वो हिमाएकीसेवातोहिमाए सच्ची माता को माह का आदर देते थे वो याद जो वो देते थे सची माताको कहते थे मेरे जो बात है। और जब भगवान सन्यास लेकर जगनतुईीमें पहुँचे देवास कर रहे थे तो सीधा ठाकुर और दोनो आते थे वहाँ भगवान मंद ने भगवान भोजन बनाने के लिए। आज उनका ये और हम सीधा ठाकुर रानी से भी मांग सकते है की हमारे मे भी उसी प्रकार का आकर्षक हो। उसके पति इतने के पति आज बड़ा शुभ दिन है सविता ठाकुर आनी का, तो हमें इसका लाभ उठाना चाहिए और गहराई से भगवान की सेवा में जोड़े तो संक्षेप में आज के लोग। मूल सन्देश यह है शशि गोतम, जो है सुधारण ग्रस्त नहीं है, यह है भगवान का सहित्य अवतार। भगवान भगवत में कहा गया है जो व्यक्ति भगवत को बकायदा सुनेगा, वो आनंद जीवन में बिताएगा और सुखी, असली और श्री भागवत ने जो अनेक जिला है, कथाएँ हैं। इन सब का मूल सन्देश की है। चाहे आप ऋषदेव शिक्षा परो, चाहे आपके पीला देव की शिक्षा परो, चाहे आप की कथा परो। मूल सन्देश क्या है? और अमिशमराजकीकथा में आप क्या देखते हो? विवासन में श्राप था की और गए थे, महल में दिया और और तोड़ने का समय आ गया था ब्रह्म के सिवा नी सीधे क्या करूँ हम ने उन्हें बुलाया और सब को पता था दुर्वा मुनी सरलता से पूरित होते है, सरलता से प्रसन होते है। दर्वासेबुनीको पता लगा की उन्होंने ब्रामण की सुधा लेकर जल्द पी लिया है। जल्द पीने से 1 रूप दे और टूटता है और 1 रूप दे नहीं टूटा। उन्होंने एशा के कारण 1 राक्षस पैदा कर दिया क्या करने के लिए। 1 बंद द्वारा भगवान का चिंतन कर रहे थे लगा बिल्कुल नहीं और भगवान के चक्कर में पीछे किया भागे भागे पीछे और अंत में भगवान के पास पहुँचे। भगवान ने क्या कहा मैं कुछ नहीं कर सकता। तुम जाओ और मांगे। तो इस प्रकार कई उदहारण है इस विषय को स्थापना करने के लिए कि एशिया द्वेश से हमें बचना चाहिए, एशिया और द्वेश के कारण भक्ति में अर्चना और अनेक कथा है। सदा युवा सगुनी 1 समय गए के घर में। और ने उनका स्वागत किया और दिया प्रसाद खाओ के आता हूँ जब जंगल में जा रहे थे उन्हें 1 खास पतभेरकीरूपमें दिया था सूर्य के देवता जिसके द्वारा जितने भक्तों का भोजन बनाना चाहो उस अक्षय पात्र द्वारा प्राप्त होता था। और जब जो बड़े खा ले उसके पश्चात कुछ नहीं प्राप्त बड़ी स्वागत किया निकलते मैं कुछ कर सकता हूँ आपके लिए। तो े जिस प्रकार आपने मेरे घर पवित्र बनाया है मेरे भाई के के आप उनके घर जाना। जब दोपहर पर तो उन्हें पता था कि परी के भोजन खाने के पश्चात जायेंगे तो कुछ नहीं बदल। यूदेशनेतोस्वागत किया प्रशाद। तो जब युदेशनेदोपतीसी कहा याद करो क्या अब तो घर में कुछ नहीं है। और खा चुकी हूँ द्वारा। लोग घबरा गए उन्हें पता था उस सरलता हो जायेंगे। और उसी समय कौन पहुँच गए गी घर में। भगवान। भगवान ने कहा भूख लग रही है, परचा दीजिये खाने के लिए। और मैं खा चुकी हूँ घर में कुछ भी नहीं है ने कहा मुझे अपनी आँखों से देखना चाहता हूँ। भगवान जब गए रसोई में, तो न्होंने क्या देखा 1 चावल का दाना दबा हुआ था। 1 सब्जी के। भगवान ने कहा तुम के खुश नहीं है। तो जब भगवान ने खाया
जो सारे
ब्राहमणों का पेट एकदम भर गया सबको आने लगे तो भगवान ने कहा जाओ बलाल आओ युवा से मुनी को, उनके साथियों को नहीं यात्रा करते थे 10 हजार सीटों के साथ। तो दवा ने अनुभव किया कि हम तो भी कुछ समय पहले हमें भूख लग रही थी, जबरदस्त अब भर गया है कि खाने की योजना नहीं है खाने की, कुंचायशनहींहैतो हम जाएंगे कुछ खाएंगे नहीं लोग। अपराध मानेंगे आगे हो गया था सो कहने पर सब से बुरी प्रशा त्यार है घर में
लोग।
वहाँ के संतो ने कहा अरे वो तो भाग गए वो लोग भाग गए। वो तो है भगवान अपने भक्तों की सुरक्षा करे। इस को आप पढ़ते हो के श्रीमाल भागोतम सारे पके फलों का सबसे पक्का कर रहा है। और ये फल कहाँ से आ रहा है? चोटी से लोग बैठे हैं उनके द्वारा, कहते कहते हैं कि अगर आप किसी फल को पेड़ की ऊँचाई से फेंकोगे तो। नीचे कैसे पहुँचेगा टुकड़े टुकड़े में, अगर वो ही फल नीचे पहुंचाया जाए अलग अलग वक्तों के द्वारा जो अलग अलग संखाय में बैठे हैं, रूप पहुँचेगा। तो उदाहरण देते हैं यह स्थापित करने के लिए की शिवा भागवतम को हमें प्रामानिक प्रतिविधि दौर सुनना चाहिए और साइट द्वारा में वो नहीं जो की भागवत को 4 के धन कमाने के लिए, तो हमने सोचा की आज भगुधमकीमहिवा की चर्चा की जाए, भगुधमीमहिमाऔर सोचते हो। और इस समय बड़ी गहराई से प्रयास कर रही है भगुधमकोहरजगह पहुँचाने के लिए बीज में। और और ये किस पर हमने 1 बॉम्बे के 1 बहुत बड़े स्टोर था, इंटरनेशनल बुक को डिस्प्ले में डाला था तो 1 महीने के बाद इतनी किताबें नहीं के पास गया और कहा की प्रभागी हमने इतना बड़ा प्रमोशन किया book the box or distributed modi? सो उत्साह से प्रचार करेंगे तो अच्छा नतीजा भी प्राप्त हुआ आप सब जुड़िये भागवद की सेवा में। और ये भी निश्चित कीजिये भागवान को रोज पढ़ना है, जो मंदिर में रहते हैं उन्हें यह भी नहीं करना चाहिए भागवत के द्वारा, श्रीमद भागवद के question on we see something merit भाग से काम योजना बना रहे हैं, क्या आप इंस्टॉलमेंट में मिल रहे हैं स अगर की केजरी वाल है आगे, ऐसे अमेरिका
में
बहुत
है और हो गया है 300 अड़तालीस
दिल्ली इनके पीछे कैसे आ
सकती है
आगे न
बजी तो क्यूकी सामने और ये समुद्र पार कर जा सकते हैं
आप लोग आप के वो बॉम्बे है और बॉम्बे की चर्चा कर रहे हो, आपको पूरा से कॉम्पिटिशन करना
पड़ा,
पूरा पूरा शो आप विश्वास नहीं करोगे। जब आया था कुछ दिन पहले और मैंने ने कहा की अभी हम सब प्रमोट हो रहे है डीटर से, हम जा रहे हैं भगवत ऊपर भगवत तो कांटेक्ट की कांटेक्ट दे दिए है, हम चर्चा कर रहे थे तो हमने बिठाया फिर उसी दिन जाकर उन्होंने 4 सेट कर दिए, तो ये निर्मल है आपके उत्साह के ऊपर, अगर हमारा यह लक्ष्य यहाँ अधिक से अधिक मात्रा में भुदम देना चाहते हैं, क्यूंकि सबसे उत्तम ज्ञान है तो भगवान अवश्य के सहयोग में ले
हर साल होने का जी करते है इस साल की सभी ऑनलाइन लीजिंग के बारे में ऑनलाइन पहुँच पाए और 11 भाग काफी फाइल नहीं है दिमाग के बीच काफी बड़ा है और काले सर और उसके बाद जो
ा तो
उसमे आपको और भी ज्यादा कम राशी बने और इस तरह से सुपर भाव से हम पहुँच सकता है तो ये प्रयास कर डालेंगे अगर हम ऑप्शन चलेंगे और सोचेंगे की होस निकला है तो फिर सब लोग का अगर पहले नहीं हो सकता है तो होगा पहले तो सादा रखे और जो जो हमारे टेक्स में उसको आपने शुरू करे पानी से अपने से और आप देखेगे मिल रहा है सवाल है तो आप उस रखा होगा ना।
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क्लास के लिए महाराज मेरा 1 क्वेश्चन था की आपने बहुत से कठिन परिस्थिति को देखा और उसको हम लोग मतलब बहुत छोटे से भी चीज से विचलित हो जाते हैं। भक्ति में। तो कैसे आपने बिकॉज, आरटीफिसियल किसी भी चीज को टॉयलेट नहीं कर सकते है, यमलिटीआरटीफिसियली डेवलप नहीं कर सकते है।
क्या आपको यह निर्णय आपको यह निर्णय करना चाहिए। अगर आपने भगवान के धाम जाना है, भगवान को करना, तो तपस्या का पा करना ही पड़ेगा। उत्तर प्रदेश के भगवान की कृपा प्राप्त नहीं होगी। अगर आपको भौतिक जन्म बड़ा अच्छा लगता है। अगर आपको यह वायरस अच्छी लगती है और फिर आप भौतिक जन्म हो, आपको लगता है नहीं। यहाँ, तो क्लेश है? वो असली आनंद है, भगवान की सेवा में उसकी कीमत है, तो कुछ भी फ्री नहीं मिलता। भगवान बोलते हैं हम तुम मत कर, ना मैं तुम्हारी सुरक्षा करूँगा। 1 ही कंडीशन पर मन न मेरी सेवा करो, भगवान के आ सकते हो और 1 ही आरोप मेरा भक्त बन। मेरी सेवा भगवान ही नही कहते, नोकर न करो। जो भी ओके, ओके, ओके,
अमेरिका,
वो
सब भक्तों को प्रेरणा देते हैं। वितरण करने की, उन्होंने अभी लॉट। डाउन के टाइम में बहुत सारे यहाँ हम देखते हैं भारत में महाराज आपके नेतृत्व के अंतर्गत सब जगह जो लोग है, वो पुस्तक से, भारत में जो कोर्स है, वो आपके नेतृत्व के अंतर्गत आता है। महाराज मेरा प्रश्न यह था कि ये जो प्रेरणा है, जो पुस्तक की तरण करने का, उसको हम लगातार हमारे जीवन में कैसे उसको लिखे हैं।
अच्छी साधना रखो ग्राफ के पत्तों को पढ़ते रहो, जिसमें इस विषय पर दिया जाता है, और आपके पास पूना में बड़े अच्छे लीडर हैं। राधे श्याम, प्रभु वो अच्छा उदाहरण देते हैं, राधे श्याम, वो खुद बाहर जाते हैं, वो अच्छी प्रेरणा देते हैं आप को तो lisamokayhrykishna
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