
The video is a Hindi devotional discussion centered on Srila Gopal Krishna Goswami (referred to as ‘Maharaj’). The speakers recount personal memories of serving the guru, highlighting his straightforward demeanor, his insistence on collective service, and his practice of immediate forgiveness. Anecdotes illustrate Maharaj’s interactions with doctors, his concern for temple affairs in Delhi, Jhuhu, Vrindavan, Hyderabad, and his emphasis on a single guiding principle: ‘take everyone together and serve.’ The dialogue also touches on the guru’s attitude toward mistakes, the importance of not holding grudges, and the experience of devotees who, even after leaving a temple, retain their devotion. The speakers ask the guru’s long‑time disciple about his realizations after years of service, probing the guru’s mood, his approach to separation (separation of service from personal attachment), and the practical aspects of temple administration. Overall, the content glorifies the guru’s humility, compassion, and organizational vision while offering practical lessons for devotees.
Chapters
हाँ हाँ 1 नहीं तो आपने आप ही रख ले। 1 वैश्नव भजन गाएंगे छोटा सा से शुरुआत करेंगे नरोतमदास ठाकुर द्वारा लिखा गया ठीक है। अरे कृष्ण आप लोग को सब सुनाई सुनाई दे। हे पीछे तक
ह बारे करुना करो रश्णवागुसहबर करुना करो वश्णवगोसापतपवना बिना
ना पति
ता पा बना तुम बिन ने न
बने
जहाँ रा नि कटे गले पाप दूर जा
तू
जहाँ रा नि काटे गे केले पाप दुरेजा आप मना दयालु प्रभु बता पा
हम
मन दयाल प्रभु के बगुठापादगं अंगारा पर श हले बसते पावा गंगरा पर हले पस ते पा।
हे
दशन पवित्र करे
तुम परेरा दर्शने
पवित्रा कर तुमार गु
दर्शने अधेरा
हर स्थान अपराधी तारे हरी ना
रे हर
थाने आप राधे तारे हरीना आहरयतोमस्थाने आप राधे नही परीतााधेतोमस्थाने आप राधे नहीं परित्र
तोहार हे
तुम्हारा। हदय सदा गोविन्द विश्रा गोविंदा रातुमारा हिलाया सदा गोविंदा विश्रा
तमारा गोविंदा विश्रा
गोविन्द कहेना वृशणवबरगोहदहnा गोविन्दा कहेना कृष्ण व पर
गहन कहना
प्रतिजन में गोरी आशा चरणी रधूलीरहईश प्रतिजन में करी आशा चरने धूल रूनरोतमेपरदयापनर ल नरतमेगरोदयापनरबनर बर सुना करो वैश्णव को स प ना तुम
ना हरे
राम हरे कृष्ण हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
कृष्ण कृष्ण हरे हरे राम
हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण या कृष्ण के रह हरे
हरी कृष्णा। तो बहुत सुन्दर विश्णु भजन है। मृतमदास ठाकुर जी के द्वारा। इसका हम अनुवाद पढ़ेंगे। हमारे पर, हमारे हिसाब से। हे वैश्णव गोसाईं गुरु महाराज कृपा इस बार मुझ पर करुणा करे। गुरु महाराज आपके बिना पतित जीव को पावन करने वाला और कौन है। ऐसे परम दयालु कोई कहाँ प्राप्त कर सकते हैं। आप जैसे गुरु महाराज जिसके निकट जाने मात्र से पाप दूर चले जाते हैं। गंगाजल में अनेकों बार स्नान करने के बाद ही कोई शुद्ध हो पाता है। किन्तु गुरु महाराज आपके तो केवल दर्शन करने मात्र से पतित जीवात्माएं पवित्र हो जाती है। यही आपका महान गुण है। गुरु महाराज भगवान श्रीहरि के प्रति किए गए अपराधों से मुक्ति हरिणाम के द्वारा मिलती है। किन्तु यदि कोई आपके गुरुमाराज चरणों में अपराध करे तो उस अपराध से कदापि ही निस्तार, संभव नहीं। गुरुमाराज आपके हृदय में भगवान गोविंद सदेव विराजमान होते हैं और भगवान गोविंद कहते हैं। वैश्णोगन मेरे प्राण है। अत मैं जन्म जन् मांतरों में गुरु महाराज आपकी चरण धूली की कामना करता हूँ। कृपया दशाउत्तरदास को अपने अपना समझकर कृपा कीजिए तो ये मेरा परपर था। वैसे नरुतमदास ठाकुर ने लिखा है प्रयास करूँगा कुछ बोलने का भक्तों की प्रसन्नता के लिए। सबसे पहले तो मैं धन्यवाद करना चाहूँगा। चक्रवर्ती प्रभुका, अनिरुध प्रभुका, आप सब भक्तों का, आप सब का प्रेम है, जो आप लोगों ने मुझे आमंत्रित किया है। गुरु महाराज का गुणगान बोलने के लिए, सुनने के लिए, इससे हम सब का शुद्धिकरण होता है। बोलने से मेरा शुद्धिकरण होगा, सुनने से आप सब का शुद्धिकरण होगा। तो ये बहुत अच्छी बात है। मैं चकरोड की प्रूफ़ को स्पेशल धन्यवाद देना चाहता हूँ। ऐक्चवली गुरुमाराज के साथ तो बहुत समय हो गया, 12 वर्ष से भी अधिक समय हो गया। महाराज के साथ पर्सनल सेवा करते हैं। ऐसे सेक्रेटरी के रूप में तो बहुत सारी चीजें हैं जो याद नहीं रहती एकदम बट। अब धीरे धीरे मैंने कुछ याद किया है करने की कोशिश की है महाराज के ब्लूरिज और जो भी महाराज के साथ हमारा इंटरेक्शन हुआ रियलाइजेशन। तो मैंने कुछ लिखने का लिखा है थोड़ा तो हो सकता है ऊपर नीचे हो तो जैसे जैसे मेरे को याद आएगा मैं आपसे शेयर करूँगा। तो अगर कोई भूल चूक हो त्रुटि हो तो प्लीज क्षमा कीजिएगा। आम नोट 1 गुड स्पीकर अभी आप अगर मैं आपको पहली रेलाइजेशन तो यह बोलूंगा कि शायद आज मैंने गुरु पूजा गाई थी, टेंपल हॉल में आई थिंक 12 साल बाद पहले हम सेवा करते थे, आईएफ में आईवाएफप्रीचिंग तो सब कुछ होता था। बट जब गुरु महाराज की सेवा में आए तो सब कुछ छूट गया। बहुत बहुत सारी चीजें हैं वो इतना आसान नहीं होता बोलना बट मैं प्रयास करूँगा। अभी जैसे आप लोगो ने मेरी शायद ऑफरिंग सुनी थी, वृंदावन में उस टाइम भी बहुत मुश्किल था मेरे लिए। बोलना बट प्रोपर डिसाइपल थे, सब लोग रिस्पेक्ट रिक्वेस्ट कर रहे थे। तो फिर मैं ना नहीं बोल पाया। तो मैंने लास्ट में जो बोला बहुत मुश्किल था मेरे लिए, बोलना बट मैंने जैसा भी जितना भी था मैंने बोला तो आज कुछ शेयर करने का प्रयास करूंगा आप सब के साथ, क्योंकि जैसे हम व्यास पूजा में गुरु महाराज को गुणगान करते हैं। जब गुरु महाराज हमारे साथ थे तो हम गुणगान करते थे। तो 1 अलग ही अलग ही मतलब माहौल था। वो हम बहुत एंजॉय करते थे हम कभी कभी कमरे में बैठ के घंटो महाराज के बारे में सुनना बोलना हंसना, फनी, पास, टाइम और वो सब अच्छा लगता था। बट अभी गुरू महाराज चले गए हैं तो वही चीज बोलना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। तो मैं प्रयास करूंगा क्योंकि वह फनी चीजें उस तरीके से नहीं बोल पाएंगे, उस तरीके से नहीं कर पाएंगे जैसे हम पहले उसको रैलिश करते थे, इंजॉय करते थे। बट है प्रयास करता हूँ जितना भी हो सके मुझ पर कृपा कीजिए। आप सब लोगों से कृपा की याचना करता हूँ। मेरा 1 चीज था, मैं सोच रहा था कि इस सेशन को हम इंटरेक्शन इंटरेक्टिव सेशन रखे या फिर जस्ट मैं बोलता जाऊँ और आप सुनते जाएं। अब जैसे महाराज की अगर गुनगान करना शुरू करें तो यह 1 डेढ़ घंटे में तो खत्म नहीं होने वाला। तो पता नहीं जैसे भागवत सप्ताह होता है वैसे फिर करना पड़ेगा उसके लिए गुणगान बट। हमारे पास समय की भी कमी है। तो हम प्रयास करेंगे। तो मैं चाह रहा था कि अगर कुछ देर मैं बोलूंगा फिर आप लोग भी कुछ पूछना चाहते हैं, मन में किसी की कोई इच्छा है पूछना चाहते हैं तो फिर वो पूछ सकते हैं। तो इससे थोड़ा सा इंटरेक्टिव और थोड़ा सा थोड़ा कम्फरटेबल इनवायरमेंट हो जाएगा मेरे लिए स्पेशली अभी मैं पहली चीज तो अपने से शुरू करूँगा की मैं कैसे गुरु महाराज की सेवा में आया। हमारे वाइफ में प्रीचिंग करते थे, सुन्दर बाल प्रुक, अंडर में, प्रबल के अंडर में, तो डेली टेंपल प्रेजिडेंट, सुंदरपाल पु। आइबर्ट डायरेक्टर हैं। तो गुरु महाराज को सेक्रेटरी की जरूरत थी और उनको 1 सर्वेंट की भी जरूरत थी। बहुत से नाम सजेस्ट किए गए, तो कुछ दिन के लिए सेवा किये भक्तों ने और हाथ खड़े कर लिए
कि
नहीं कर सकते, 2 दिन गए, तीसरे दिन वापस आगे नहीं कर सकते। तो फिर 23 डिओटिसके। साथ ऐसा हुआ। तो फिर सुंदर पालपुर भी परेशान हो गए, मोर परेशान हो गए कि महाराज इतने सारे महाराज के डिसायपल्सहै, बट सब हेजिटेट कर रहे हैं, क्योंकि सेवा बहुत कठिन थी। अभी फिर मेरा नाम ऐसे आया कि वो भक्ति माधुरी, गोविंद महाराज की सेवा मैंने की थी, उनका हार्ट सर्जरी हुआ था, तो बहुत हैवी, सेवा थी उनकी 3 महीने की, जब तक उनका बाइपास सर्जरी हुआ, उस टाइम उनके साथ 3 महीने, 1 साथ रहना, हॉस्पिटल में रहना, साथ में सोना, बे हॉस्पिटल में सोना, फिर उनके डीटीसी की सेवा, उनकी सेवा बहुत सारी चीजें थीं। तो समा वो ठीक हुए और उन्होंने आशीर्वाद दिया कि मैं गुरमार से तुम्हारी सिफारिश करूंगा कि तुमको ब्राहमण दीक्षा, दे दे, तो तो वो बात, वो वैष्णों का आशीर्वाद है। तो कहीं न कहीं से कुछ न कुछ होता है। तो फिर वो बात खत्म हो गई। फिर मोहन बाबू को वो बात याद आई कि दशावतार का नाम प्रपोज करते हैं, महाराज को तो इतना ज्यादा डिटेल में नहीं जाऊंगा, बट। 1 जो प्वाइंट में मेंशन करना चाह रहा था, वो ये था सुंदर पाल प्रूफ मेरे को ले गए, गुरु महाराज के पास ही महाराज कल से दशावतार आपकी सेवा में रहेंगे। तो महाराज बोले थैंक्यू वेरी मच। तो उन्होंने 1 लाइन ऐड कर दी कि महाराज देश दरपुर थोड़ा स्लो है। तो महाराज बोले कोई बात नहीं, आइब्लमैनेजतो मैं, वो चीज मेरे लिए आज तक थी। ऐसा नहीं है कि उसी दिन बोला खत्म हो गया। तो आप यह सोचिए कि ये जो 12 साल है, मेरा जो यह रियलाइजेशन है महाराज के साथ कि किस तरीके से 1 फास्टेस्ट मल्टी टास्किंग, स्पीच्ल मास्टर के साथ। 1 स्लोवेस्टसाइपल कैसे, तालमेल बैठाएंगे। मैं अभी खुला बोल रहा हूं कि सच में मैं अपने आप को मतलब। मैं उतना, उतना स्लो नहीं हूं, बट महाराज जैसा फास्ट भी नहीं महाराज। मल्टी टास्किंग मल्टी टास्क करते थे। 1 साथ, 1 साथ डीटीवरशिप करेंगे, साथ में ही बुक रीडिंग करेंगे, साथ में ही किसी को बुला लेंगे और उनसे बात करेंगे। तो बहुत सारी चीजें 1 साथ होती थी, पर महाराज को तो वही है। इसलिए फिर मेरे लिए मैं कभी कभी बहुत परेशान भी हो जाता था कि मतलब मैं कैसे मैनेज करूंगा। यह सब। क्योंकि 1 चीज और देख रहा था कि 23 डिवोटीज ने ऑलरेडी क्विट कर दिया था, छोड़ दिया था, तो मुझे अच्छा नहीं लग रहा था। मैंने कहा गुरु महाराज के आशीर्वाद से हो जायेगा, प्रयास करते हैं। तो वही प्रयास किया। तो गुरु महाराज का ही आशीर्वाद था कि महाराज की हम सेवा कर पाए। और जैसे जब तक भगवान कृष्ण थे तो अर्जुन गांधी उठा पा रहा था, भगवान कृष्ण के नहीं होने पर वो गांड भी नहीं उठा पा रहे थे। मतलब वो शक्ति भगवान खुद ही देते हैं, वैसे ही गुरु गुरु की सेवा करने के लिए भी गुरु ही शक्ति प्रदान करते हैं। तो इस चीज से मैं सीखा हूँ कि अगर महाराज गुरु महाराज को इंस्ट्रक्शन हमको दिए है तो उसको आपको लगता है कि अगर आप उस लाइक नहीं भी है तब भी अपना पूरा प्रयास करना चाहिए क्योंकि गुरु महाराज इंस्ट्रक्शन के साथ साथ आपको शक्ति भी प्रदान करते हैं, आशीर्वाद भी देते हैं। तो हमें जो सेवा मिले बिल्कुल उसको निसंकोच उसको ले लेना चाहिए, हमारी लाइकिंग और डिस्लाइकिंग नहीं देखनी चाहिए, हम सोचते हैं कि ये सेवा मैं आराम से कर लूंगा तो मैं ये ले लेता हूँ, वो नहीं इस टाइप से नहीं सोचना चाहिए जो मैंने अपना रियलाइज किया है। तो क्योंकि फिर उस सेवा के साथ साथ हमको भगवान गुरु मारा, गुरु शक्ति भी देते हैं, प्रदान करते हैं। फिर दूसरा प्वाइंट यह था कि अब मैं थोड़ा सा शायर टाइप का हूँ, थोड़ा सा मतलब पीछे बैकग्राउंड में रहना ज्यादा पसंद लगता है, मेरे को फ्रंट में मैं नहीं आता जाता। तो मेरे को 1 चीज वो भी था और तुम्हें सीनियर डियुटी से पूछा था कि मैंने कहा कि गुरु महाराज की सेवा करने में नया नया था, ऐसा नहीं है कि 2 साल 3 साल हुए थे, मुझे भक्ति में आए ब्रह्मचारी आश्रम ज्वाइन किया है, भक्ति इतना आसान नहीं है। तो फिर जस्ट धीरे, धीरे सब चीजें हम सीख रहे थे। तो मैंने सीनियर डिवोटी से पूछा था कि मैं गुरु महाराज की सेवा करने जा रहा हूँ। तो हमें कैसा हमारा भाव होना चाहिए, क्या करना चाहिए, किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, किन बातों का ध्यान नहीं रखना चाहिए, मतलब किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? वो चीज तो बहुत सुन्दर उन्होंने 1 एग्जाम्पल दिया कि दीपक के समान है गुरु जो हमारे गुरु हैं, दीपक के समान है। दीपक के अगर बहुत पास जाओगे तो जल जाओगे और ज्यादा दूर चले जाओगे तो अंधकार में आ जाओगे तो 1 डिस्टेंस मेंटेन करना पड़ेगा जिससे आप जलो भी न और आपको ज्ञान का प्रकाश मिलता रहे। तो ज्यादा पास आ जाते है तो हम अपराध करने लगते हैं मुझसे न 10 नाम अपराध में है कि गुरु को साधारण व्यक्ति समझना तो ज्यादा पास आ जाने से अपराध करने की संभावना बनी रहती है इसलिए प्रयास करना है कि ज्यादा पास भी न आए और ज्यादा दूर भी न चले जाएं कि वो हमको इंस्ट्रक्शन न दे पाए या हम उनके ज्ञान से वंचित रह जाएं। तो ये चीज थी। तो मैं इस चीज को बस बांध लिया, अपने अपने साथ इस चीज को रख लिया कि बस अब यही इसी टाइप से करना है। तो बस ऐसे ही फिर गुरु महाराज आशीर्वाद देते रहे, शक्ति देते रहे, महाराज की सेवा में 12 साल निकल गए पता भी नहीं लगा बिल्कुल फोकस थे, कुछ और कुछ नहीं सोचना। कभी कभी तो ऐसी सिचुएशन होती थी कि हम दिन का सूरज नहीं देख पाते थे। कभी कभी ऐसी सिचुएशन होती थी कि ये 4 दिवारी से बाहर नहीं निकल पाए जैसे महाराज का रूम है उससे बाहर नहीं निकल पाए। पूरे 24 घंटे। तो ऐसी ऐसी भी सेवा सिचुएशन होती थी जिसमें हम सारा दिन सेवा में लगे रहते थे। न दिन देखा, न रात देखा। तो इसी तरीके से अगर हम गुरु गुरु की सेवा करेंगे, न दिल देखेंगे, न रात देखेंगे तो गुरु की कृपा प्राप्त होगी। तो यही आप सब क्योंकि मैं बीच बीच में कुछ बोलूंगा जैसे मां जैसे जैसे मुझे याद आता रहेगा बट साथ में जो मैंने से सीखा है मैं वो भी आपसे शेयर करूंगा। साथ में तो शायद जैसे मुझे फायदा हुआ तो आप लोगो को भी फायदा हो भी आप। जब गुरु महाराज गए तब से 2 महीने हो गए। अब सब लोग तबसे ग्लोरिफिकेशन सुन ही रहे हैं। अब तो यू ट्यूब की इतनी फैसिलिटी है कि सब जगह का ग्लोरिफिकेशन सुनने को मिल जाता है, आई थिंक यहां से लाइव भी चला जाएगा, बट उसमें यह भी होता है कि वो वो चीज रिपीट भी हो जाती है। तो वही मैं स सोच रहा था कि इतने 2 महीने से भगत लोग रिफिकेशन सुन रहे हैं। तो बहुत तो वक्तों को बहुत तो पता ही होगा, बहुत तो जान गए हैं गुरु महाराज की हर चीज के बारे में, लगभग सब जान गया। तो पहले मैं कोशिश करूंगा अपनी पर्सनल जो जो रियलाइजेशन हैं वो बोलने के लिए तो कुछ प्वॉइंट्स मैंने लिखे थे, मैं उसमें से देख के फिर बताता हूँ जैसे महाराज टाइम का बहुत बहुत ध्यान रखते थे, टाइम का उनके लिए सबसे ज्यादा इम्पोर्टेंट टाइम था क्योंकि वो 1 क्षण भी वेस्ट नहीं करना चाहते बिल्कुल व्यर्थ नहीं गवाना चाहते थे। 1 पल भी किसी ने ऐसा पूछ लिया था गुरु महाराज से कि महाराज आपके अन्दर इतना उत्साह कहाँ से आता है? आप प्रपात की सेवा के लिए इतना उत्साह कैसे आ जाता है? हम तो थोड़ी देर सेवा करते हैं, थक जाते हैं। तो गुरु मारा ने उनको उत्तर दिया
कि
मैंने कितने ही जन्म लिया है उनको उसके लेवल पे आके समझाने का प्रयास किया कि मैंने कितने ही जन्म लिए है उसमे हम किस किस उनको समझाया कि कैसे कैसे हम योनियो में आगे बढ़े हैं। और अब 1 ये जो लाइफ है अगर मैं 1 लाइफ ट्रवाद को दे देता हूँ हंड्रेड परसेंट तो मेरा कोई नुकसान तो होगा ही कि कितने ही जन्म ली है बट 1 लाइफ देने से प्रपात की कृपा से हमारा उद्धार हो जाएगा। तो सिंपल लैंग्वेज में गुरु महाराज ने इतने हंबल हैं कि गुरु महाराज इस लेवल पे। आके उनको समझाने का प्रयास किया। तो वो वही बताना चाह रहे थे कि टाइम जो है हम बिल्कुल 1 क्षण भी वेस्ट नहीं करना चाहिए। तो मेरे को जो मेरे केस में था कि मैं थोड़ा स्लो हूँ स्पेशली रेडी होने में, उसी में ज्यादा अदरवाइज तो ज्यादा नहीं बट। तो ऐसे ही हम मायापुर में गए। तो जी बी सी मीटिंग में। तो गुरु महाराज क्या करते थे कि वो बहुत बड़ा रूम है महाराज का मायापुर में, तो वहाँ पर 23 बैठ थे, तो महाराज बोलते थे इस कोने में, मैं सो रहा हूँ। तो इस कोने में तुम सो जाओ। तो, क्योंकि कुछ न कुछ जरुरत पड़ती रहती थी। अभी मैं अगर शंख भवन चाहे उधर चला जाऊं। तो बहुत दूर पड़ता था आने में, तो महाराज ने अपने रूम में ही रखा। 45 साल पुरानी बात है। तो अब डी, डी वर्षिप के लिए मुझे रेडी होना होता था। तो महाराज बोलते थे कि जल्दी तैयार हो जाओ और फिर डीडी वर्शिप करना है। फिर मुझे मीटिंग में जाना है। तो गुरु महाराज मेरे को बोलते थे। आप पहले स्नान कर लो, फिर मैं जाऊंगा स्नान करना। अब मैं कम से कम पंद्रह 20 मिनट। तो इतना तो लगेगा पूरा रेडी तैयार होने में, कपड़े वगैरह पहन के रेडी होने में, डीटीस का सब सेट करने में। तो मैं जब रेडी हुआ तो महाराज बोलते हैं ब्रह्मचारी शुड, गेट, रेडी, इन, फाइव मिनट और बोल के आंखें चुरा के साइड। इधर। इस तरफ देखिया, मतलब लाइट देखिए, मेरी तरफ नहीं देखा, बोल के आंखें चुरा लिया कि मतलब ये कुछ रिप्लाई न करे सुन ले बस तो वो चीज मुझे हमेशा याद रहे। अच्छा लगता है कि महाराज जब कुछ बोलना होता, बड़े प्रेम से बोल देते थे। र्मचारी शुड, गेट, रेडी, फाइव मिनट। मैंने बहुत प्रयास किया पर मैं नहीं हो पाता। 5 मिनट में रेडी आप लोग मैंने सुना है, शायद पूना में हो जाते
हैं, लोग
टूना में, ब्रमचारी आश्रम में लोग शायद 10 मिनट में तैयार होगी, मंगल रद पहुंच जाते हैं ही न। हा, ऐसे ही 1 बार महाराज का। कुछ कुछ साल पहले कैटरैक का ऑपरेशन हुआ था। तो डॉक्टर ने हमको बोला था कि महाराज को ज्यादा से ज्यादा रेस्ट करवाना है और हर आधे घंटे बाद फोर्टी फाइव मिनट पर ड्रॉप डालना है ड्रॉप डाल के आँख में ड्रॉप डाल के रेस्ट करना। अब हमारे पास मौका मिल गया। महाराज को बोलने की महाराज। डॉक्टर ने बोला रेस्ट करने को, तो महाराज दवाई डालने का टाइम हो गया, आप लेट जाइए तो महाराज लेट गए, अब दवाई डाल दिए और फिर महाराज के मार उठना नहीं है। अभी डॉक्टर ने कहा आधा घंटा तो फिर नहीं नहीं ठीक है तुम उसको फोन लगाओ, मैं आँखें बंद करके रखता हूँ काम कर लेंगे। तो तो ऐसे बीच बीच में होता था, कभी फोन कॉल्स लगवा देते थे, बात कर लेते थे, फिर कभी कभी। अभी सारा दिन उनका इतना हेटिक सिड्यूल रहता था कि उनकी आंख लग जाती थी। कभी कभी अब आँख बंद किया है आपने, तो कभी कभी आँख लग जाती थी और सो जाते थे। तो 1 दम उनको आंख आंख खुलती थी तो 1 घंटा हो जाता था। तो महाराज बोलते हैं अरे वो तुमने मुझे उठाया नहीं महाराज आप रेस्ट कर रहे थे। डॉक्टर ने भी आपको रेस्ट करने को बोला है। कहते हैं मैंने अपने 40 साल की लाइफ में जितना तुम मुझे सुला रही हो, कभी नही सोया। ऐसे बोले मेरे को की इतना मैं जितना तुम लोग मुझको सुला रहे हो। जबरदस्ती में अपनी 40 साल 40 साल की लाइफ में नहीं सुना, क्योंकि गुरु महाराज दोपहर में कभी रेस्ट नहीं करते थे। अभी जब से उनको हार्ट की प्रॉब्लम हुई और डॉक्टर ने बहुत ज्यादा पीछे, पड़ गए कि अगर आप रेस्ट नहीं करोगे दोपहर को तो फिर दिक्कत है। तो फिर महाराज धीरे धीरे दोपहर को रेस्ट करना शुरू किया। आधा घंटा 1 घंटा और वो आधा घंटा 1 घंटा। रेस्ट भी न के बराबर होता था, सीधे लेट जाते थे, बोलते थे, उसको फोन लगाओ, उससे बात करते थे। यह बात करते करते आधा घंटा आधा घंटा हो गया। ना चलो मैं अब उठ रहा हूँ। इस टाइप से महराज अपना हर 1 क्षण जो मैं यहां से सीखा हूँ। कि जैसे महाराज ने भक्त को उदाहरण दिया कि हमें कम से कम 1 अपना पूरा जीवन प्रभुपाद को समर्पित कर देना चाहिए। तो जरूर हम पर कृपा होगी। तो वही गुरु महाराज लाइव एग्जाम्पल है। और वो हमें भी यही बताना चाह रहे हैं कि अगर आप भक्ति में सीरियस होना चाहते हैं तो अपना 1 क्षण भी बिल्कुल वेस्ट मत कीजिए है न। तो ये 1 प्वाइंट में मेंशन करना चाह रहा था महाराज का और पैसे को लेकर भी महाराज बहुत ही ज्यादा केयरफुल थे। आपने महाराज की वेल में भी पढ़ा होगा। महाराज का कोई बैंक अकाउंट नहीं, महाराज का कुछ पैसा नहीं है। महाराज के पास। कुछ महाराज पैसे को टच नहीं करते थे। महाराज बिल्कुल पैसे को नहीं टच करते थे, मुझको बोलते थे उठाओ। इसको जब महाराज बैठते थे, वे सासन पर भक्त लोग दर्शन करने के लिए आते थे। और कभी कोई महाराज को ऑफरिंग दे देता था, कभी 1 एनवलप दे दिया, कोई आते रहते थे, तो भक्त लोग एनवलप देते थे, कोई बड़ा एनवलप होता था, कोई छोटा एनवलप होता था। महाराज तुरंत बोलते थे, दशावतार को बुलाओ, कोई भी जो सामने होता था, डिवटी उनको बोलते थे। और फिर मेरे को बोलते थे। यह एनवलप उठा लो। इसको रख 2 सेफ महाराज कभी भी नहीं पूछते थे उसके अन्दर कितनी लक्ष्मी है, बोलते थे उसको सेफ में। रख 2 और ऐसे ही हम जब महाराज ध्यान नहीं देते थे, उसमें क्या है, हम भी ध्यान नहीं देते थे। उसके अन्दर क्या है, उसको रख दिया। अभी ऐसी इतनी ट्रैवलिंग और यह सब होता रहता था, तो फिर टाइम का पता नहीं लगता था। निकाला रखा, निकाला रखा, निकाला रखा। अभी महाराज ने फिर कभी क्या होता था। कुछ दिन दिल्ली में रुकने के बाद फिर महाराज बोलते थे। अभी बॉम्बे जाना है, इधर जाना है। 23 महीने हो गए, हा मच लक्ष्मी i have। मैंने कहा महाराज 23 महीने, मैंने भी काउंट नहीं किया। तो मैं सेफ से निकाल। महाराज कहते है कि सेव से निकाल के काउंट करो। अब ये बताने वाली चीजें नहीं होती, बट जस्ट 1 लर्निंग है कि फिर लक्ष्मी में ज्यादा निकल आती। तुम्हारा डर जाते थे, कहते इतनी लक्ष्मी कहाँ से आई? मैंने भक्त, आपके डिसाइपल देखे जाते हैं, आप बोलते हो रख देते हैं तुरंत इसको हटाओ यहाँ से और अपने दिल्ली टेम्पल अकाउंट में तुरंत तुरंत कहते नहीं तो मेरे मेरे रूम पे रेड पर जाएगी। इतने मतलब डरते थे, मैं डरना तो नहीं कहूंगा केयरफुल थे इतने इतने। क्योंकि महाराज की पूरी जो लाइफ है, न स्पॉटलेस है, बिल्कुल। 1 जैसे न जान, पे भी दाग है। पर महाराज के चरित्र पर बिल्कुल बिल्कुल टच नहीं करते थे। और फिर फिर 1 तो ऐसे बोलते थे कि इनकम टैक्स की बहुत बार बोले 12 साल में हर बार बोलते थे, जितनी बार सेफ खोलते थे, उसे तुरंत में फिर दे देते थे, कहते कुरुक्षेत्र में भेज 2 मायापुर भेज 2 खारगर दे, 2 ऐसे तुरंत तुरंत करवा देते थे, खत्म कर देते, फिर उनको शांति मिलती थी। फिर 1 बार ऐसे ही करते करते, फिर बोले वाई डोंट यू ओपन बैंक अकाउंट थोड़ा सा उसमें ट्रांसफर कर लेना। मैंने कहा महाराज, मेरे पास भी बैंक अकाउंट नहीं है, मैं आपके पास नहीं है। तो फिर हम किस लिए रखा? हमारे पास बैंक अकाउंट नहीं है। तो फिर महाराज ने उसको जस जस उसको साइड का मतलब बाल इग्नोर कर दिया। बट महाराज ने बोल दिया था 1 बार कि तुम ही बैंक अकाउंट रख उसमें थोड़ा सा लक्ष्मी रखो, क्योंकि महाराज को समझ में आ रहा था कि कहाँ लक्ष्मी दे, कहाँ कहाँ रखे, क्योंकि लक्ष्मी रखना भी बड़ा मुश्किल हो जाता है। तो 1 यह था मनी को लेके बहुत केयरफुल थे और उन्होंने अपने लिए अपने तो फिल्म में देखा है। उन्होंने उनके 2 ही सेट्स थे, 1 प्रभुपाद की दी हुई उनकी जपमाला और उनके डीडी और कुछ भी उन्होंने अपने लिए नहीं रखा। कुछ भी तो ये हम इससे हम ये शिक्षा ले सकते हैं कि अगर वो एग्जाम्पल से वो हमको टीच कर रहे है। सिखाना चाहते है कि अगर आप भक्ति में आगे बढ़ना चाहते हो तो इससे बिल्कुल इसको पास मत आने। 2 माया को बिल्कुल टच मत करो क्योंकि नहीं तो हम इसमें फंस जायेंगे। सिम्पल लैग्वेज में बोले तो ब्रहमचारी की लाइफ अलग है, सब ग्रस्तों के भी डीलिंग बहुत होती है। लक्ष्मी से तो फंसने के चांस रहते है। इसलिए महाराज यह सिखाना चाह रहे हैं कि वो टच नहीं करते थे। लक्ष्मी को माया के नाम पे माया की 1 और चीज याद आ रही है मेरे को कम्प्यूटर और मोबाइल उसको भी बोलते थे। यह माया है मतलब, वैसे वो सबसे बात करते थे। तो हर चीज पर वो अपडेट रखते थे। ये आईफोन फिफ्टीन है। जब रस्ते से जा रहे होते तो बिल बोड दिखता था। वो कहते है अच्छा यह नया आईफोन है क्या? फिर पूछते थे मेरा वाला कौनसा है? मैंने का मारे आईफोन फोर्टीन है, अच्छा फोर्टीन है नहीं है तो फिफ्टीन इसमें कुछ नए वो आये है क्या? मैंने का मारा अभी तो सेम है इसलिए मैं अभी चेंज नहीं कर रहे है तो अच्छा है। तो वे अपटूडेट टेक्नोलॉजी में अपटूडेट थे, बट उनका बिल्कुल उसमें इंटरेस्ट नहीं था, फोन में उनके पास उनको सिर्फ 1 ही बटन पता था, स्विच ऑफ उसके सिवा कुछ नहीं। हम फोन लगा के देते थे, महाराज बोलते थे, बीमा प्रूव को फोन लगाओ, ब्रजहरीप्रूवको फोन लगाओ हम फोन कनेक्ट करके देते थे और वो बात करते थे। और बाद में कट कर देना, डिस्कनेक्ट कर देना बस कोई बटन उनको पता थे डिस्कनेक्ट वाली और फोन में उनको कुछ नहीं बताता। और लैपटॉप में भी ऐसे थे। चक्रवर्ती को भी याद होगा कितनी बार महाराज ने हमको बोला है, मैं लैपटॉप न सीखना चाहता हूँ। जब से ये धूम आया, जब से जूम आया और मीटिंग में जाना पड़ता था और जूम पर ऑपरेट करना पड़ता था। तो महाराज को ऐसा लगता था कि मुझे खुद करना चाहिए। तो महाराज बोलते थे, कभी मुझे बुला लेते थे, कभी चकरवर्ती हो वो, कभी बहुत डीगोटी को बोला कि मैं सीखना चाहता हूँ, फिर महाराज को बताते थे महाराज यह ऐसे होता है रहने। 2 ये सब बेकार हैं, सब माया ये सब माया है। तो लैपटॉप में भी उनकी 2 फेवरेट बटन्स थी। 1 ईमेल पढने के लिए अपडाउन लेफ्ट, राइट, अप डाउन, पेज, अपडाउन करने वाली बटंस और राइट कॉर्नर पर लेफ्ट कॉर्नर पर स्केप की बटन बस ये 2 बटनों उनको पता थी। तो जब भी उनको ईमेल पढ़ना होता था, महाराज बोलते थे ईमेल डाउनलोड कर लो करके दे। 2 मैं ईमेल पढ़नी है। और फिर वो उसको बस ये अप डाउन वाली बटन यूज करते थे। और तो मतलब उनको उनको क्लियरली पता था कि ये सब माया के अस्त्र शस्त्र हैं। तो अगर हम लोग तो वो एग्जाम्पल बता रहे हैं, हमको खुद टीज कर रहे हैं कि इससे जितना दूर अभी तो इतना ज्यादा हम उसके साथ मतलब। इसके बिना हमारा काम ही नहीं चलता। पर महाराज बताना चाह रहे हैं कि जितना जरूरत है उतना ही यूज करो, उससे ज्यादा यूज करो। क्योंकि बिल्कुल अगर सिर्फ लैपटॉप के साथ है। तो आप समझ लो कि आप माया के साथ बैठे हो, फोन के साथ बैठे हो, माया के साथ बैठे हो। माया को लेकर 1 और 1 प्वॉइंट था। तो अब न महाराज इन्टरनेट देखते, न कुछ देखते, न टीवी, सुन टीवी भी देखते, कुछ नहीं देखते। तो फिर महाराज अप टू डेट कैसे रहते थे, न्यूज पेपर पढ़ते थे, न्यूज पेपर पढ़ने का उनका 1 फिक्स टाइम था, प्रसाद पाने के बाद कुछ कुछ 5, 10 मिनट और इतनी फास्ट न्यूज पेपर पढ़ते थे। उनको पता चलता तो कौनसी कहा, क्या कौन सी खबर कहाँ है। और बिल्कुल अपटूडेट रहते थे। और अगर कोई नया बन्दा आगे कभी हम भी अगर देखें, ध्यान से देखने लगे न। तो वो कि हम कुछ गलत न सोचें, महाराज बोलते हैं मैं इसमें सिफ प्रीचिंग मटीरियल ढूंढ रहा हूँ महाराज मतलब हम कुछ और न सोच बैठे। तो महाराज ऐसे बोलते हैं कोई हम तो चलो 12 बार हमको बोल दिया पर अगर नया नया कोई डिवोटी आ के देख देख ले कि महाराज न्यूज पेपर पढ़ रहे हैं। तो महाराज उसको भी बड़े। मतलब छोटे से बच्चे की तरह भाव में बोलते थे कि आम जस्ट लुकिंग फॉर सम प्रीचिंग। मटेरियल तो इस टाइप से थे, महाराज बहुत और 5 मिनट में उसको खत्म करके ऐसे निचोड़ देते थे और फेंक देते थे। बिल्कुल उसको दुबारा कोई यूज नहीं कर पाता था। बड़ी मुश्किल से किसी से मांग लाते थे। तो मैंने कहा महाराज कहते है इसको वापस कर। 2, मैंने कहा कैसे वापस करो इसका की ऐसे फटाफट फटाफट पेज पलटते थे। और बस खत्म कर दे। तो वह इतना कंट्रोल था उनका कि अपने ऊपर, ये तो जैसे न्यूज पेपर टी, वी तो बिल्कुल ही नहीं। अभी जब से ये जूम आया है तो फिर किसी डीओटी ने महाराज को टीवी गिफ्ट किया था महाराज के रूप में। आपने देखा होगा किसी वीडियो में, तो बस। अभी, तो महाराज का हेल्थ भी थोड़ा डाउन हो गया था। तो तो नहीं जा पाते थे। तो महाराज हमेशा बोलते थे। ऊपर की गौर आरती लगा, 2, दर्शनार्थी लगा, 2, आज कौन क्लास दे रहा है, क्लास लगा 2। तो इतना ही अभी उनके साथ टीवी का था, रिलेशन इससे पहले तो बिल्कुल ही नहीं था। टीवी क्या थी वो पता ही नहीं। और जूम की बहुत तारीफ करते थे। जब से यह कोबिड आ गया कैसे जैसी वो रशियन डिवोटिज के साथ जूम कॉल पे मिलते थे। और क्योंकि जब से कोविडहुआ महाराज रशिया नहीं गया तो इतना सेपरेशन है मतलब भक्तों से कि जब भी वो जून पे दर्शन मिलता था, गुरु महाराज को भक्तों का महाराज इतने खुश हो जाते थे। और बोलते है कि जूम तो 1 चमत्कार की तरह है। महाराज बहुत खुश हुआ, बहुत बार तारीफ करते थे जूम से। देखो मैं कैसे भक्तों से मिल पा रहा हूँ, बात कर पा रहा हूँ। तो ऐसे बात करते करते बोलते थे। देखो मैं तुम्हारे घर भी आ गया हूँ। जब वो भक्त लोग क्या करते थे, अपने घर के डीटीसी के दर्शन कराते थे महाराज, ये गौरीताई हैं, ये राधा कृष्ण हैं। कहते देखो मैं तुम्हारे घर भी आ गया। तो इस टाइप से महाराज का इंटरेक्शन था डिवोटीज के साथ।
तो
आगे बढ़ते हैं। है प्रउपात के लिए उनका जो प्रेम था वो तो आप सब जानते हैं। इसको तो बताने की जरुरत नहीं, बट 2 चीजें हैं, उनमें से 1 चीज। आपको पता ही है रिंग वाला रिंग तो पता ही है जो महाराज गुरु महाराज अपने हाथ में पहनते राइट हैंड। में उसमें प्रहपात की फोटो है। मतलब प्रहुपात को वो डी टी सी की तरह पूछते थे। जब डी डी वर्षिप करते थे तो मैंने देखा है मतलब लिटरली पहले प्रो पात को बड़े प्रेम से ड्रेसिंग कराएंगे और जब ड्रेसिंग करते टाइम कोई फोटो खींचेगा। कहते हैं फोटो मच खींचो। मैं प्रोपात को ड्रेस ड्रेस अप कर रहा हूँ या कोई लाइफ कर रहा होगा तो मना कर देते थे अजय को। राग को बोल तो लाइव मत करो। गौर्नीताईको जब ड्रेसिंग करते थे या प्रपात को ड्रेसिंग करते थे। कहते हैं कि फोटो। मत खींचो तो प्रपात को जब ड्रेसिंग करते थे ड्रेसिंग करने के बाद कितनी बार चरम दर्ज करते थे मतलब मैं देख के वो जो वो मोमेंट होता था न देखे ऐसे करें बहुत बार, बहुत देर तक उसको इतना रेसिप लोकेशन था। महाराज का गुरु अपने मतलब प्रउपात के प्रति इतना प्रेम था। तो वो प्रपात को डीटीसी की तरह ही ट्रीट करते थे। तो ईवन उनकी फोटो आप सोचो फोटो को भी डी टी सी की तरह ट्रीट कर रहे हैं। जैसे हम वाशरूम यूज करने जाते है तो कोई नर्सिंग पवित्र पहना हो या गारलैंड पहना हो या बीड बैक हो, हम बाहर निकाल के रख देते हैं। गुरु मारा अपना रिंग बाहर निकाल के रखते थे। वाशरूम यूज करने जायेंगे तो रिंग किसी को पकड़ा देंगे बोलेंगे मैं बाद में आके पहनता हूँ तो इतना मतलब बड़ा मतलब समझना बहुत मुश्किल है जिस तरीके से महाराज प्रपात के साथ रेसीप्रोकेट करते थे। और ये तो चलो थोड़ा समझना आसान है क्योंकि फोटो है हम 1 मतलब समझ पाते कि प्रपात की फोटो है। थोड़ा 1 रिलेशन बना पाते हैं प्रो। पाद के नाम से भी वैसा ही था। 1 बार बुक मैराथॉन में स कॉल डेली ने जैकेट बुक मैराथॉन के विंटर जैकेट्स भी बनाते हैं, उस पर लिखा होता है प्रपात बुक। मैराथॉन तो ऐसे ही 1 दिल्ली टेंपल ने बनाई थी जैकेट सब भक्तों के लिए, तो उस पर पीछे लिखा था। स्लेपरहपातअभी उन्होंने प्लान किया था कि महाराज के लिए भी 1 जैकेट देंगे। महाराज को पहना के 1 फोटो खींचेंगे तो वो ले आये महाराज के पास गिफ्ट करने के लिए कि महाराज आपके लिए गिफ्ट है। तो अब महाराज ने कहा ठीक है। महाराज खुश हो गए कि जैकेट भक्तों को दे रहे। विंटर में महाराज ने सडन ली, देखा कि उसके बैक पर लिखा हुआ श्लप्रउपाततो गुरु। महाराज कहते हैं कि मैं ये जैकेट नहीं पहन सकता। हमने महाराज क्यों क्या हुआ बैक पे नाम प्र हम। तो मैं तो स्पेशल एकदम शौक रह गया मतलब किस लेवल का डिवोशन है और रिलेशन है प्रूपातकेसाथकि आप सिर्फ नाम है, फोटो भी नहीं है वो प्रपात। वो बैक आ जायेगा। तो मैं बैक में कैसे पहन सकता हूँ ही जैकेट। और इसको पहन के आप लोग वाशुमजाओगे मतलब, इतना डेडिकेशन और इतना प्रोप के नाम को, फोटो को, डीटीस को तो है ही। मतलब साक्षात था हरिते वैसे समझते थे। तो वहीं हमको भी थोड़ा, हमें भी अपने डे टू डे लाइफ में ये जो सेंस्टिविटी होती है उसका ध्यान रखना चाहिए। जैसे प्रात फोटोज होती हैं, जिसमें भगवान की फोटोज होती है, उसका ध्यान रखना चाहिए, नर्माले में डालना चाहिए, डस्रिटमेंनहीं डालना चाहिए, उतना ध्यान में रखना चाहिए। तो यह था मेरे लिए तो उस टाइम बहुत एकदम ही मतलब। हम सोच ही नहीं सकते कि किस लेवल पर महाराज जाकर सोचते हैं प्रपात का उनके साथ क्या रिलेशन है। तो 1 ये प्वॉइंट था में मेंशन करना चाह रहा था 1 और वैसे तो बहुत है पर जैसे जैसे मैंने इसमें सीक्वेंस नहीं कोई बट जैसे जैसे मुझे याद आता गया तो मैंने लिखे थे। तो 1 प्वाइंट था हम्बल निस्का महाराज के, हम जी बी सी मीटिंग में गए थे। तिरुपति तो आप सब को पता ही है कि महाराज का मॉर्निंग प्रोग्राम मंगल आरती कितना फिक्स है कभी मिस नहीं करते है। तो जी बी सी मीटिंग में हम गए थे तिरुपति और वहां पर जी बी सी मीटिंग में सारे रोपार्ट साइकल्स आते हैं। सब। मैं फर्स्ट टाइम गया था, उस टाइम आई थिंक हो गया। 78 साल पहले की बात है, 2 बार हुई थी तिरुपति में जी बी सी मीटिंग। अभी तक मेरे मेरे प्रेजेंस जब मैं था तो मैंने देखा कि महाराज सुबह तैयार हो गया, बिल्कुल टाइम पे और फिर जा रहे हैं मैं भी महाराज के साथ जा रहा हूँ। तुम्हारा जा वो भक्तों के साथ मतलब प्रोपर साइकल। जहाँ खड़े वहाँ जा कर खड़े थे और ऑल्टर में नहीं जा रहे थे। मैंने कहा ये कैसे तो मैं सोचा कि महाराज ड्रेस प तो वैसे हुए थे, कुडतानीपहनाथाउतरी पहन के जा रहे हैं तो ऑल्टर में नहीं जा है। 1 दिन हो गया, 2 दिन हो गया, 3 दिन हो गया मैं। अब मैं मैं इतना ऊपर नहीं था, थोड़ा डरता था। तो मैं 1 दिन हिम्मत करके पूछ लिया मैंने। मैंने कहा महाराज आपको डी टी से सिर्फ इतना अच्छा लगता है मंगल आरती, आप कभी मिस नहीं करते और आप आरती करने के लिए नहीं जा रहे। ऊपर कहते हैं कि यहाँ पर 1 ही ऑल्टर है, राधा, कृष्ण और अष्टसखी का 1 ही ऑल्टर है और इतने सारे प्रूपाडसाइपल्स हैं। अगर मैं चला गया आरती करने, अगर किसी और की इच्छा हुई आरती करने के लिए, तो वो मुझे बोल नहीं, मना नहीं कर पाएंगे। तो मैं उनको चांस देना चाहता हूँ। मैंने कहा कितना अपना जो, उनका रेगुलर, उनका जो साधना वाला शेड्यूल है, उसको भी अपने गॉड प्रदर्श के लिए सेक्रिफाइज करने को रेडी रहता है। तो सेम चीज रेवती। रमन प्रूव ने भी ग्लोरिफिकेशन में बोली थी, 23 बार बोली थी महाराज की, व्यास पूजा बोली थी और उधर वृंदावन में भी बोली थी। बट उसमें सेम चीज। रेबतिरमनपुर ने भी गुरु महाराज को पूछा तो उनको उन्होंने अलग जवाब दिया था। कहते कहते हैं कि मैं ऑल्टर में इसलिए नहीं जा रहा बिकॉज गोबीजआरदेयर। ये, ये आंसर गुरु महाराज ने रेतिरमनप्रूव को दिया, उनका लेवल था उनके लेवल के हिसाब से, उनको जवाब दिया मेरे लेवल के हिसाब से मेरे को जवाब दिया। तो मैं वही सोच रहा था कि मुझे महाराज ने ऐसा जवाब दिया था कि वहां सब प्रोपर्टी साइकल्स हैं। मैं चाहता हूं कि वो जाए। मैं उनको मौका देना चाहता हूं आरती करने का, क्योंकि 1 ही ऑल्टर है वहाँ पर, तो 1, ये महाराज की जो विनम्रता है अपना मतलब, उसको भी सेक्रिफाइज कर देते हैं पोपर्डसाइपलडिवोटी केयर के लिए। और 1 और जो कुछ टाइम से मैं ऑब्जर्व किया हूँ। आप लोगों ने भी शायद ऑब्जर्व किया हो। अभी महाराज कुछ सालों से न थोड़े वीक हो गए थे तो थोड़े से इमोशनल भी हो गए थे। मतलब कोई रोता था न, तो महाराज को भी, महाराज भी, उनकी भी आंखें भर आती थीं। तो ऐसे 23 इंसीडेंट हुआ हमारे बिल्कुल पब्लिक में, जैसे आमने सामने तो होते ही रहते थे, पर पब्लिक में भी हुआ हमने संत नगर दिल्ली में ही मंदिर के पास ही 1 बिल्डिंग ली थी, उसको रिनोवेट किया, उसका इनॉग्रेशन किया था उसको आई वाइफ के लिए, सेंटर में डेवलप किया था। तो महाराज वहां पर गए, इनॉगरेशन किया। फिर महाराज सुंदर बाल पू बोले कि महाराज आप आशीर्वचन दीजिए, तो महाराज कुछ बोले और बोलते बोलते रो पड़े। तो मतलब आँखें भर आई उनकी, क्योंकि वो जब भी वो देखते हैं कि भगवान कितनी हमें फैसिलिटी प्रोवाइड कर रहे हैं। और उस फैसिलिटी के लिए प्रवाद ने कितना स्ट्रगल किया, उस चीज को, वो देखते हैं। और 1 दम। फिर वो बोले कि हमको भगवान कितनी फैसिलिटी दे रहे हैं भक्ति में आगे बढ़ने के लिए, प्रीचिंग के लिए। और प्रभुपाद अकेले लगे हुए थे, अकेले कोई नहीं था उनके साथ, तो वो चीज उनको याद आती है प्रुपाद की। और फिर उसी टाइम रो पड़ते है यह सेम चीज पंशील में हुई, दिल्ली में 1 और सेंटर है पंशील। वहां पे ओपनिंग स्पीच में भी महाराज रो पड़े सेम चीज। यही इसी पे टेम्पल उसमें ऑडिटोरियम में, दिल्ली में भागवतम क्लास में प्रपात मेमरीज बोलते बोलते रो पड़े। और वो ही जब वो मतलब अपने आप को प्रपात के साथ कनेक्ट करते हैं और देखते हैं कि इतना प्रपात ने स्ट्रगल किया है हम लोगों के लिए, बज्जी आत्माओं के लिए, तो उ को देख के, उन सबकी आंखें भर आती हैं। तो अगर अब हम देखे गुरु महाराज की लाइफ में उन्होंने कितना स्ट्रगल किया हमको देखिये, अब बने बनाये, सब कुछ बना बनाया, मिल रहा है सब कुछ, रेडी मेड है हमारे लिए। अब इस इस टेम्पल के लिए प्पाद ने स्ट्रगल किया, फिर हैवन ऑफ हवन नर्थ के लिए। गुरु महाराज ने स्ट्रगल किया बहुत मतलब बहुत है, अभी हमें सब कुछ बिल्कुल रेडिमेट करना है। सिर्फ क्या गुरू महाराज बोले कि बस अपनी 4 नियम वीरता पूर्वक पालन करो, सो 16 माला ध्यान पूर्वक करो वही हम उसी में हम मतलब फिक्स नहीं हो पा रहे ै तो वही चीज अपने आचरण से सिखा रहे हैं। तो वही है कि उसी के इतना स्ट्रगल किया है प्रपात ने, तो गुरु महाराज ने भी उतना स्ट्रगल किया। तो उनको 11 चीज की इम्पोर्टेंस पता, 11 चीज की कमरे में पंखा नहीं, यूज करते हैं सब। ये सब तो सुना होगा आपने। बट ये वही कॉन्टैक्ट था? तो बोला कि कमरे में पंखा न यूज करते है, इसी ने यूज करते। पूरा कुर्ता भीग जाता है गर्मियों में, महाराज के कमरे में कम से कम 5 से 6 खिड़कियां हैं। और महाराज कहते हैं कि खिडकियां खोल 2 फ्रेश हवा, आएगी पंखा बंद कर 2 हे है और कब बोलते हैं जब 40 डिग्री 45 डिग्री टेम्प्रेचर होता है। बाहर से दोपहर को बोल मैंने कहा महाराज लू चल रही है बाहर आप खिड़की खोलोगे तो गर्म हवा आएगी आपकी, तबियत खराब हो जाएगी, डी हाइड्रेशन हो जाएगा। नहीं, नहीं, नहीं खिड़की खोल। 2 पंखा बंद कर। 2 ऐसी तो बिल्कुल नहीं, फिर खुद का पूरा मतलब कुरता गीला पसीना न देखिए पूरा आपका कुर्ता गीला हो गया। कहते हैं नहीं, ठीक है रहने। 2 मतलब लक्ष्मी का लक्ष्मी जाएगी इसमें। और हम लोग तो आपको बताइए महाराज कहीं पे भी टेम्पल में जायेंगे, कैम्पस में कोई बटन न औन होगी तो उसको ऑफ करेंगे हम। क्योंकि उन्होंने 11 पैसा इकट्ठा किया प्रपात की सेवा के। अब हमको सब कुछ बना बनाया मिलता है। इसलिए हम उतना इमपोर्टंट समझ नहीं पाते। तो हमें प्रयास करना चाहिए इस चीज के लिए कि हम कुछ अपने आप को सुधार पाएं। इसके लिए तो आगे बढ़ते हुए हैं। और महाराज इतने विनम्र हैं। कोई भी सेवा करनी हो, महाराज ये नहीं बोलते, डू दिस, डू दैट, ये कर। 2 मेरे लिए वो कर। 2 क्या तुम मेरे लिए ये सेवा कर सकते हो? इतने प्रेम से बोले इतने मतलब सामने वाला मतलब। वो कहते हैं का क्लीन बोल्ड हो जाता है। इस टाइप से कह सकते हैं आप मेरको और भी शब्द नजर नहीं याद आ रहा था। मैंने भूल दिया। तो इस टाइप से है कि इतने प्रेम से बोलते हैं। और मिलियन डॉलर स्माइल होती है उनके फेस पे। जब वो बोलते हैं तो सबका मन वो इसी से जीत लेते थे। और महाराज की टीचिंग तो इसलिए महाराज इसमें बता रहे हैं कि हमको अगर हम किसी भी पोस्ट पोजीशन पर हों तो हमें विनम्र बने रहना पड़ेगा। हमें ऑर्डर नहीं देना क्योंकि ये ये जो, हमारी स्कोल संस्था, ये वॉलेंटरी सेवा है। हम किसी को फोर्स नहीं करना चाहिए। सेवा के दोनों हाथ जोड़ के महाराज जैसे रिक्वेस्ट करते थे, वैसे हमें भी रिक्वेस्ट करना चाहिए। तो सामने वाला होल हार्ड ट्रेड न पूरे मन से सेवा देने का प्रयास करेगा। उसको ये नहीं लगना चाहिए कि हम पे कंट्रोल किया जा रहा है। तो मतलब महाराज अपने एग्जाम्पल से। हमें सिखाते थे किस तरीके से वो वनंबर हो के भक्तों को प्रउपादकीऔरकृष्णा की सेवा में लगाते थे। हम 1 बार उड़ पी गए थे, महाराज की कुछ ट्रीटमेंट था तो उड़ भी गए थे। तो हम 1 आयुर्वेदिक सेंटर में रुके थे। छोटा सा कॉर्टेज था, वहा पे स्पेस बहुत कम थी, छोटे छोटे 2 कॉर्टेज थे, 1 और 1 में रूप में महाराज के डीटीज रखे थे और दूसरे में महाराज को रेस्ट कर कराते थे। बैड लगा था। तो महाराज सुबह ही वही मंगल आरती रेडीहोनाऔरडीटीवर्शिप करना। 1 दिन महाराज बोल दिया। अभी ऐसी पद 10 पंद्रह दिन हो गये थे। तो महाराज बोले तुमने इतने बड़े बड़े बाल और दाढ़ी उगा रखी है किसलिए मैंने कहा महाराज दूर दूर तक कोई नहीं है। हाँ, कोई उडपी में बिल्कुल हम सेंटर में थे, वो आयुर्वेदिक सेंटर है। मैंने कहा महाराज रोज हैडशेवऔररोज, शेप कौन करे, ऐसी चल रहा है। तो चलने दिया। कहते नहीं वे शुड बी फॉलो क्लीनीनेस। तो ये सब करना चाहिए। तो बहुत क्लीननेस। महाराज के हेडशेप से की। महाराज कहते थे मेरा हेडशेप कर 2, मैंने कहा महाराज कल ही तो किया है, कहते नहीं मुझे आज मीटिंग में जाना है, मुझे बड़े लोगों से मिलने के लिए जाना है। तो क्लीनीनेस का बहुत ध्यान रखते थे कि प्रेजेंटेबल होना चाहिए। और उसी वहीं पे उडपी में क्या हुआ कि महाराज बोलते थे कि गेट रेडी एंड पूजा के लिए रेडी कर। 2 तो मैंने जल्दी जल्दी में मैं इतनी सारी चीजें 1 साथ नहीं कर पाता तो स्लो स्लो तो फटाफट महाराज कहते हैं जल्दी जल्दी मैं लेट हो रहा हूँ। मैंने कहा ठीक है महाराज कर किया फिर मैं आकर महाराज को क्योंकि फोकस उधर था डी डी डी टी का टेबल सेटअप करने में, तो मैंने गुरु महाराज को प्रणाम नहीं किया जैसे हम पहले गुरु को देखते है सबसे पहले प्रणाम करना चाहिए। तुम्हें जैसे रेडी हुआ थोड़ा सा लेट चल रहे थे तो महाराज बैठ गए थे, गायत्री कर रहे थे। जब महाराज गायत्री कर रहे होते तब तक आपको डी टी टेबल सेट अप करना होता तुम्हें फटाफट नहा कर आया रेडी हो के और फिर डी टी टेबल सेट अप करने लगा प्रणाम नहीं किया महाराज ने गायत्री करने के बाद मैंने उन्होंने बोला सबसे पहले गुरु को आते ही सबसे पहले प्रणाम करना चाहिए मतलब मेरी तो पैरों तले जमीन खुस मतलब हम एकदम वह मैंने बताया था न, वी हैव टू बी वेरी केयरफुल गुरु की सेवा करते टाइम बहुत सावधान रहना पड़ता है। तो वो चीजें साथ में रहते रहते रहते फैमिलियरिटी आ जाती है। तो महाराज बीच बीच में हमें सिखाते रहते कि मैं एकदम ही। फिर मुझे याद आया कि सही में मतलब मैं करता था पर आज नहीं किया। तो महाराज ने उसको तुरंत नोटिस कर लिया। यह भी मैं माइंड में आया था मेरे को याद मे लिख लिया अभी ऐसी हम जब ट्रेवल करते थे तो अजय गोरांग महाराज के, मैं आज सेक्रेटरी और अजय गोरांग ऐज सर्वर हम 2 थे महाराज की सेवा में, पर अभी रीसेंट यर्स में बहुत सारे डिवोटीज आयद क्योंकि महाराज को ज्यादा डिवोटीज की जरुरत थी। तो महाराज आगे बैठे थे, माला कर रहे थे गाड़ी में बैठते तो जमा करते रहते हैं। तो अजय गौरांग के फोन पर कॉल्स पर कॉल आ रही थी। तो महाराज कहते हैं कम बात गया करो कहते महाराज अमेरिका से कॉल है, अमेरिका से कॉल है तुमको क्यों कर रहे हैं महाराज वह आपको डिस्टर्ब नहीं करना चाहते इसलिए वो हमको कॉल करते हैं और आपका सिड्यूल चेक करते हैं। कहते अच्छा तो मतलब तुमने सबको अपना नंबर दे रखा है मतलब कभी कभी महाराज इतने ही अच्छे मूड में होते है कि फिर ऐसी हम गाड़ी में जा रहे होते तो फोन आ जाता है की प्रोपर डिसाइपल का हे महाराज मैं आपको 2 दिन से फोन कर रहा हूँ, कोई रिप्लाई नहीं आ रहा। अब होता क्या था कि महाराज इतने बिजी रहते थे हम फोन लेकर जाए कैसे महाराज इनका फोन है। जब मौका मिलता है तभी हम बता पाएंगे कि उनका फोन आया महाराज आप मैसेज देना है या कॉल अटेंड करनी है तो तो महाराज बोले उसी टाइम वैसे गाड़ी में थे हम लोग तो महाराज बोले मेरे पास 22 सेक्रेटरी है पर किसी काम के महाराज सारा 2 पे थे सारा वैसे ईमेल का भी होता था ईमेल्स में भी अगर कुछ लोग थोड़े फास्ट होते हैं वो क्या करते हैं महाराज ईमेल तुरंत नहीं देखते थे पर कुछ लोग इतने फास्ट होते हैं तुरंत ईमेल शूट किया और फोन कर दिया महाराज मैंने आपको ईमेल भेजा है आपने चेक किया तो अब महाराज को थोड़ा सा एम्बैरेस फील होता था कि किसी ने ईमेल भेजा और मैं इतना फास्ट नहीं हूँ मैंने अभी तक चेक नहीं किया महाराज बोले मेरे को पीछे तुमने मुझे ईमेल बताया नहीं मैंने कहा महाराज अभी भी है तो आज के फिर भी मुझे बताना चाहिए अच्छा थोड़ी लगता है कि कोई वहां से फ़ोन करे और बोले की मैंने आपको ईमेल लिखा है और आप पढ़ लीजिए तो बड़ा मतलब महाराज का इतना बड़ा। अच्छा सा स्वीट सा एक्सचेंज रहता था तो इसमें ऐसे ईमेल पे मेरे को 1 और चीज याद आ रही थी। अभी क्या हुआ कि भी कुछ साल से महाराज को थोड़ा उठने बैठने में दिक्कत हो रहा था तो महाराज सोच रहे थे कि मैं जीबीसी मीटिंग्स में कैसे जाऊं। महाराज ने तो कसम खा रखी थी मैं वीलचेयर पर नहीं बैठूंगा मतलब हम। तो मैं तो लड़के थक गया बोल बोल के थक गया कि महाराज आप बिल्कुल सही है सिर्फ वीलचेयर यूज कर लीजिये बहुत हमें कोई चिंता नहीं होगी। तो वो चीज बोल बोल के हम थक गए। डॉक्टर बोल बोल के मैं जी मैं वीलचेयर बिल्कुल नहीं मैं तो उसको लेकर था। तो महाराज फिर जीबी सी इसको लेटर लिखना चाहते थे क्योंकि जीबी सी मीटिंग बहुत कॉन्फिडेंशियल होती है तो इसमें सबको सब नहीं जा सकते। तो महाराज जी बी सी चेयरमैन को महाराज ने ईमेल किया कि मैं अपने सेक्रेटरी को अपने साथ लाना चाहता हूँ कि आई हैव सम हेल्थ शूज तो मेरको ज्यादा डीटेल में नहीं बोला बस थोड़ी मुझे हेल्प चाहिए होती है तो मुझे उसको उसको मैं जी बी सी मीटिंग्स में लाना चाहता हूं। तो प्लीज अलाव हम। तो महाराज ने उसके नीचे लिखा मेरा इंटरोडक्शन लिखा कि दशावतार इज वेरी ऑनेस्ट डेवटी ही सर्विंग मी फ्रॉम लास्ट मोर दैन ट्वेलविर्स सो एवरीबडी लाइक हिम सो प्लीज अलाव हिम जस्ट में भी शायद इंटोडक्शन के नाम पर लिखा पर लिख दिया हमारा नाम माता मंगला माता जी हैं। 1 महाराज की सेक्रेटरी वहाँ डेली में बैठती है तो कभी शाम को ईमेल से जब लिखना होता तो गुरु महाराज जूम को भी बुलाते हैं। तो बाद में मैंने ईमेल देखी तो मेरे को लगा कि मेरी लाइफ की यही कमाई है। जब मैंने महाराज महाराज ने अपने मुंह से 1 बार बोल दिया आशीर्वाद दे दिया तो मैंने कहा यही हमारी लाइफ की पूंजी है। मतलब ईमेल के नाम पर आया तो मैंने शेयर कर दिया नेक्स्ट। अब जैसे मैं आपको बताया था कि मैं थोड़ा स्लो इसको मैं पब्लिकली एक्सेप्ट कर रहा हूँ। ऐसा नहीं है कि बहुत स्लो बर, थोडा सा महाराज, सुपर फास्ट है। तब उनकी स्पीड के हिसाब से तो चलना बहुत मुश्किल है। तो हमने टीम वर्क बना रखा था, हम 1 टीम बना रखी थी कि महाराज के सामने हम 2 लोग जायेंगे बैकअप में आप। सब लोग सेवा करना, नहीं तो फिर हो नहीं पाएगा। तो इस टाइप से हमने बॉम्बे में भी टीम वर्क बना रखा था, डेली में भी टीम बनाई थी। तो कभी कभी महाराज हम जाते थे, गाड़ी में लोकली जाते थे। जैसे डेली से चंडीगढ़ चले गए। तो हम 2 लोग बैठ जायेंगे। मैं और अजय गोरान। अजय गोरान 34 लोगों को और बिठा देता था। महाराज के महाराज महाराज बोलते हैं, इनको किसने बिठाया है, महाराज आपको जरुरत नहीं है, हमें जरूरत है। महाराज बोलते थे इन लोगों को अपनी सेवा करवाने के लिए। मतलब 22 डिवोटी साथ में लेके चलने। नहीं नह ह, सच में बहुत टफ है, सेवा, बहुत टफ है, सेवा महाराज की। महाराज 1 साथ 45 सेवाएं दे देंगे, 1 साथ 1 साथ फ़ोन कॉल्स में भी ऐसे करते थे, इसको फ़ोन लगा 2 इसको फ़ोन लगा, 2 को फ़ोन लगा, 2, इसको फ़ोन लगा 2। मैं बोलता हूँ। महाराज पहले किसको लगा मतलब वो, क्योंकि उनके माइंड में वो चलता रहता था, न सेवा चलती रहती थी। तो जैसे जैसे उनको याद आता था, तुरंत तुरंत बोल देते थे कि वो माइंड से स्किप मिस न हो जाए। तो बोल देते थे। तो इस टाइप से होता था। ऐसे 1 बार डीडी वर्शिप कर रहे थे। महाराज बोले मैं डीटीवर्शिपमहाराज को असिस्ट कर रहा था। महाराज अजय राम को बोले नीचे से मोहन रूबाब बुला ले आओ, मेरे उनसे बात करनी है। अब भाई साब उसने महाराज के सामने फोन लगा दिया और फोन करने लगा। महाराज बोलते हैं 2 सीडियां नीचे उतर के, मोहन बाबू का कमरा है। और तुम यहाँ से फ़ोन कर रहे हो। 1 रुपया वेस्ट होगा। तो फिर हम मैंने कहा महाराज आजकल इनकमिंग आउटगोइंग स। महाराज कुछ बोले नहीं। तो। तो ऐसे होता था। अभी हम क्या करते थे जब महाराज उसका उसका रीजन है। हम क्यों टीम बनाते थे। क्योंकि महाराज के पास 2 डीबूटी रहने रहने चाहिए, 1 या 2 डीबूटी। अगर वो इसको उस काम के लिए भेज देंगे, इसको उस काम के लिए, उसको तो महाराज के पास कोई नहीं रह पायेगा। तो ऐसे ही हुआ। महाराज ने महाराज हमेशा बोलते थे, तुम लोग प्रसाद कमरे में ला पाते हो। मैंने कहा, महाराज नीचे जायेंगे तो कम से कम आधा घंटा फोर्टीफाइव मिनट चला जाता है। यहाँ पे। फिर कैसे हम सेवा में करे, नई, नई, नई, नई नहीं। भक्तों को भक्तों के साथ बैठ के प्रसाद पाना चाहिए। ये वो हमेशा बोलते थे। हमेशा और ईवन। आप लोगों ने देखा भी होगा। जब भी मीटिंग होती थी और गोविंदास में प्रोपर्डेसाइपलस्या, उन सब का प्रसाद होता था। महाराज वो प्रसाद नहीं खाते थे, पर उन लोगों के साथ जा के बैठते थे। कुछ सैलेट ले लेंगे और बैठे रहेंगे, खाएंगे भी नहीं। ऐसे दिखाएंगे कि मैं खा रहा हूँ, खाएंगे भी नहीं, पूरी प्लेट भरी होगी खाएंगे। क्योंकि वो खाते नहीं थे, वो शायद ही बता रहे थे। सुना होगा आप लोगो ने कि मैं गोविंदा का कभी प्रसाद खाया ही नहीं। गौरांग बोल रहे थे, वृंदावन में, ग्लोरिफिकेशन में बोल रहे थे। तो इस से तो उसमें मैं क्या बता रहा था कि हा हा हमको बोलते थे कि प्रसादम हॉल में जा के प्रसाद लिया करो। अभी मैंने अजय बरान 1 बार ट्राई कर ही लेते हैं, देखते है महाराज को, महाराज को थोड़ा प्रैक्टिकल चीजें दिखाते हैं। अभी अजय राम को भेज दिया मैंने महाराज डीटीवरशिप कर रहे थे, शायद उस टाइम थोड़ा लेट डीटिवर्शिप कर रहे थे। तो मैंने कहा अजयगोरामतुम नीचे जाके प्रसाद भाग के आओ तो और महाराज 1 और चीज बोलते है मुझे इतने डिबटिजकीमुझे, इतने डिबूटिज की जरुरत नहीं है। आपने देखा होगा वॉक के टाइम पे मना करते हैं हर चीज के लिए, कमरे के बाहर, अगर आप कोई डिवोटिज बैठे ने तो मुझे इतने डिवोटिज की जरुरत नहीं है, 1 डिवोटी काफी है, 2 डिवोटी काफी है। ठीक है अभी अजय गोरान को भेज दिया। अभी महाराज अपनी नेचर से कैसे बदलेंगे मल्टी टास्किंग, अब वो डीटी वर्शिप कर रहे हैं, आवाज लगा रहे है। अजय गौरांग, अजय गौराण। मैंने कहा महाराज अब वो फोट्टी फाइव मिनट तक नहीं आने वाला। प्रसाद पानी गया, अच्छा प्रसाद पानी किसी को तो होना चाहिए यहाँ पर। मैंने कहा महाराज जो भी होता आप उनको भगा देते हो। तो कैसे कोई रहेगा। तो उस दिन के बाद महाराज ने नहीं बोला कि अब तुम लोग नीचे जाओ प्रसाद पानी बट। हम फिर हमने ही थोड़ा चेंज कर दिया कि महाराज के साथ वाले रूम में नहीं पाते थे, हम कहीं इधर उधर हो गए। थोड़ा साइड वाले रूम में जाके पा लेते थे, बट महाराज के सामने नहीं पाते थे क्योंकि हम किसी को बोलते थे। अभी प्रसाद क्या आप जाओ ईवन प्लेट बनाके ला सकते हो तो उसमें भी फ्रैक्शन कुछ टाइम लगेगा, उसमें महाराज को पीछे कोई नही होगा। तो हम 1 बैकअप टीम रखते थे कि भैया तुम जाओ प्रसाद की प्लेट लाके रख। 2 फिर हमें जोर जब टाइम मिलेगा हम खा लेंगे और उसमे भी क्या जब हम प्रसाद लेंगे थोड़ी देर खाया, हरी बोल, फिर उठ के जाओ, फिर आओ, फिर खाने लगे, फिर हरी बोल उठे कितनी बार हाथ धो के, कितनी बार। हम प्रसाद की प्लेट से छोड़ उठ के महाराज के पास जाते थे और जल्दी से, जल्दी से महाराज जैसे दरवाजा खोल के देख लेते थे और बलग प्रसाद पा रहे होते थे। तुम लोग सारा दिन प्रसाद पाते सारा। जिद मतलब थोड़ा है, सारा दिन तो कोई प्रसाद नहीं पा सकता। बट महाराज का मतलब बड़ा स्माइल स्वीट एक्सचेंज है। महाराज जैसे बोलते थे और बोलते थे अजय को रांगा कोई हो कहते थे दशाउतारकोबुलाके लेके आओ, वो अपने कमरे में सो रहा होगा हमेशा जब भी वो साथ साथ वाले की जब बुलाना बोला देखो, जो सो रहा होगा। तो कहते नहीं महाराज नहीं सो रहा होगा, नहीं नहीं, वो सो रहा होगा। वो हमेशा उनका। 1 बढ़िया सा हमेशा था कि हमेशा ऐसी बोलते अच्छा लगता था, महाराज प्रेम से बोलते थे इस टाइप से आगे कब तक एक्सटेंड कर सकते। ब्लू 8 तो बज गए है। 1 बार गुरु महाराज के पास कोई ड्यूटी आये और बहुत रिपेंटकरने लगे, मतलब बहुत माफी मांगने लगे। बहुत दिनों बाद मिलने आये थे। तो महाराज बोले कि तुम बहुत टाइम के बाद मिलने आये हो, तो वो रोने लगे। महाराज को बोले कि महाराज मैं आपके प्रति बहुत अपराध किए हैं, मुझे क्षमा कर दीजिये, महाराज ने जो लाइन बोली न, मतलब चारों खाने चित्त कर दिया। महाराज कहते हैं आज तक जो तुमने अपराध किया है और फ्यूचर में जो अपराध करोगे, मैं तुमको सबके लिए क्षमा करता हूँ, पर तुम प्रपद की सेवा में लगे हो। मतलब महाराज महाराज का इतना इतना मतलब साइकल्स के लिए इतना प्रेम है कि वो जाते वो चाहते थे कि ऐन केन प्रकार है न, वो प्रपात की सेवा में लगे रहे, वो यही चाहते थे। और कितना ही मतलब बड़े से बड़ा अगर ह्यूमन, टेंडेंसी है, कोई न कोई गलतियां होती रहती है, कोई बड़ी गलती कर देता है, कोई छोटी गलती कर देता है। महाराज सबको माफ़ कर देते थे, सबको मार बोलते थे, अब हो गया न, ठीक है अभी इस आगे से नहीं करना और प्रपात की सेवा में लगे रहो बट सेम चीज। अगर इस कौम के प्रति किसी ने कुछ बुरा बोला है, इस्कॉन के प्रति, किसी ने कुछ बुरा किया है, उनकी शकल भी नहीं देखते थे, इतना मतलब स्ट्रिक थे, अगर बड़े से बड़ा अपराध किया, उसे माफ कर देंगे। बट इस्कॉन के प्रति। अगर किसी ने कुछ इस्कॉन को किसी भी तरीके से कुछ नुकसान पहुंचाया, उसकी शकल भी नहीं देखते थे। और बिल्कुल मतलब घृणा की दृष्टि से देखते थे मतलब इतना क्योंकि प्रोपर बोलते थे, स्कोन इज माई बॉडी तो उस तरीके से उनके लिए प्रोपर साक्षा डिजीज है। तो उनको इस टाइप से वो ट्रीट करते थे। तो ये मेरे को याद आया था। तो मैं मेंशन करना चाह रहा था, ह अभी रथयात्रा का सीजन चल रहा था तो मुझे उसका भी याद आ रहा था। महाराज कभी भी रथयात्रा मिस नहीं करते थे। अभी तो सिस्टम ऐसा बन गया कि 7 दिन में सारी रथयात्राएं निकाली है तो फिर थोड़ा दिक्कत हो जाता, 1 ही जगह पर सब जगह नहीं महाराज प्रेजेंट रह सकत नहीं। तो महाराज बॉम्बे की रथयात्रा, लुधियाना की रथयात्रा, दिल्ली की रथयात्रा, चंडीगढ़ की रथयात्रा, हर जगह की रथयात्रा की कोशिश करते थे क्योंकि अलग अलग डेट्स में होती थी। तो महाराज भी एंजॉय करते थे। रथयात्रा और आप लोगों ने शायद सुना होगा या देखा भी होगा। महाराज हमेशा पूरी रथयात्रा में शुरू से एंड तक रहते थे और जहाँ पे रॉक बैंड का शो चल रहा होता था। महाराज पूछते भी थे कि कहाँ है वो जो ट्रॉलियां नही होती है। 11 ट्रेलर कहते हैं 1 के पीछे 1 कहीं पर झाकी लगी होती है, कहीं पर रॉक बैंड होता है, कहीं पर कीर्तन होता है, कहीं 45, ऐसे चल रहे होते हैं। तो 1 पे रॉक बैंड का था। तो महाराज बोलते कहाँ है? तो ढूंढ बताओ, आगे है पीछे। तो महाराज कहते है कि मैं भी आना चाहता हूँ। तो महाराज हमेशा इंजॉय करते थे, वो रॉक बैंड और गिटार कोई गिटार बजा महाराज अपनी स्वीट मेलडी में हरे कृष्ण महा, मंत्र बोलते थे। तो फिर महाराज शुरू से एंड तक रथयात्रा में रहते थे। और फिर उसके बाद सबको देखते भी थे, कौन कौन रत यात्रा में है। और अगले दिन बोलते थे, तुम रथयात्रा में नहीं थे, सबको तुम रथयात्रा में दिखे मेरे को मतलब। इसलिए कुछ कुछ लोग तो मतलब महाराज के लिए रुके रहे, थक जाते, कुछ लोग सेवा में होते थे, तो आ जाते थे, बट महाराज बोलते थे मैं। तो रथयात्र मतलब बिल्कुल बेबी सा क्यूट सा फेस बना के। मैं तो एंड तक भारत यात्रा पर मैंने तुमको नहीं देखा, वैसे मंगल आरती में करते थे, मंगल आरती में ही महाराज। जब मंगल आरती जाते है न और आरती करते। और जब मुडते है और वो जब दीप दिखाते है और या फिर वो वो है पानी, जब सबको देते हैं न, एकदम स्कैन कर लेते हैं, सबको कौन कहा खडा है, पूरा स्कैन कर लेगा। और फिर जब वो दिल में वो डिवोटी आते है, जनरली सीनियर डिवोटीज को टोकते थे। तो जैसे ही कोई डिवोटी मिलने आये थे, तुम आज मंगल आरती में नहीं आए थे। मंगल आरती में आना चाहिए। तो इस टाइप से महाराज स्कैनिंग बहुत स्ट्रॉंग का बुक डिस्ट्रीब्यूशन। तो आप सब जानते हैं बुक डिस्ट्रीब्यूशन का, पर मेरा तो बड़ा हैवी, क्रियंस है डिस्ट्रीब्यूशन का, महाराज मेंटली कैसे अपने आप को प्रीपेयर करते थे डेढ़ महीना पूरा डेढ़ महिना बुक डिस्ट्रीब्यूशन का दिसंबर नवंबर के मेड से दिसम्बर तक और जनवरी में भी थोड़ा एक्सटेंड कर जाता था नॉन स्टॉप ट्रैवल करना और ट्रैवलिंग कैसे आज ट्रैवलिंग दोपहर को निकालना। अगले दिन पहुंचना। तीसरे दिन वहां से निकालना दोपहर को ट्रैवलिंग करते थे, क्योंकि मॉर्निंग में उनका मॉर्निंग प्रोग्राम चलता था, डीटी वर्शिप, मॉर्निंग, वॉक, वो सब चलता था। और मैं थक जाता था। रोज डी, टी पैक, अनपैक पैक, अनपैक पैक, अनपैक करके रोज, आप डीटी वर्शिप करो, महाराज बोलते डीटी वर्शिप करके पैकिंग कर देना। हर दोपहर को फिर निकाल लिए, फिर उसके बाद फिर जहां जाओ वहां शाम को बुक डिस्ट्रीब्यूशन का लेक्चर, फिर सुबह भागवतम क्लास में डिस्ट्रीब्यूशन का लेक्चर, फिर शाम को बुक डिस्ट्रिबिशनरा, फिर तीसरे दिन फिर निकलना इतना कोंस्टेंट मतलब। हालत खराब हो जाती थी तो और उनका तो बुक डिस्ट्रिब्यूशन का। तो नो डाउट। तो आपको बताने की जरुरत नहीं है। तो उसमें 1 इंसिडेंट हुआ, हम महाराज का हमेशा 1 फिक्स रूट हुआ करता था, हमेशा जैसे गौर पूर्णिमा जुहू राधाष्टमी जुहु बॉम्बे। तो इस टाइप से महाराज के सारे फिक्स थे, अभी थोड़ा चेंज हुआ। पहले बिल्कुल फिक्स था, तो महाराज के रूट्स भी फिक्स थे। अभी सूरज सूरज से अहमदाबाद बड़ोदा और फिर सूरज। तो महाराज बाइकर जा रहे थे। तो महाराज। ने बड़ोदा बड़ोदा में स्टॉप लिया। महाराज ने और रात को रुकना था और अगले दिन सूरज के लिए निकलना था। तो महाराज महाराज कहते हैं कि मैं थोड़ा सीधा कम सी कमर सीधी कर लेता हूँ, तुम जरा वृंदावनदास पुर को फोन करो, वो सूरत के टेम्पल प्रेजिडेंट है। तो मैंने कहा महाराज ठीक है, मैं आप लेटिये फोन लगा देता हूँ। तो मैंने फोन लगाया, वृंदावनदास मैं सूरत आ रहा हूँ, कल ये एस महाराज आप, आइए, आपको सूरत बहुत फेवरेट है वहाँ पर, बिल्कुल आपके कमरे के आप यहाँ बहुत पसंद करते हैं। सूरज में रुकना आपके कमरे के बाहर तापी नदी है, आपको अच्छा लगता है यहाँ रुकना, तो आप कुछ दिन आके रुकिए। ये वृनाउदासप्रू बोले महाराज को फोन पर। तो मतलब रिक्वेस्ट कर रहे थे कि आप यहाँ रुकना चाहते हैं, हर बार आते बोलते हैं। आई लाइक सूरत, आई लाइक दिस रूम 10, तापी नदी महाराज हमेशा, वो हमेशा रिमाइंड ते हैं, महाराज हमेशा बोलते हैं, मैं रुकना चाहता हूँ। तो आप कुछ दिन निकाल के रूकिए अच्छा लगेगा, आपको महाराज लेटे लेटे। बोलते हैं बिल्कुल, वो तो मुझे फिल्म वो फिल्म का डायलॉग याद आता है, वो हमेशा आनंद मूवी का कहते हैं। वृंदा बंदाज ऐसी यही है न डायलॉग। तो मैं उनका नाम लेकर बोल रहा हूँ। वो बोलते हैं वृंदावनदास मेरी किस्मत में रेस्ट नहीं है, ये लाइन महाराज उनको बोलते हैं, यह मेरी किस्मत में रेस्ट नहीं है, बहुतों को बोला है। शायद आपको बोला महाराज ने क्यूंकि जो रिस्पोन्सिबिलिटी प्रवाद ने गुरु महाराज को दी है, उसको वो दिन रात सपने में सोचते हैं और दिन रात मतलब उसी के पीछे लगे रहते हैं। नहीं तो इतना आसान नहीं है। प्रभु इतने सारे टेम्पल्स बनाना, 1 टेम्पल बना के इंसान थक जाता है। दिन रात। अभी महाराज की तबियत ठीक नहीं थी, महाराज दिन रात 1 ही चीज के लिए सोचते रहते थे। मैं महाराज को मैं झगड़ता था। इन चीजों के लिए महाराज आप क्यों टेंशन ले रहे हैं, हो जाएगा न खारगर के लिए, कुरुक्षेत्र के लिए हमेशा हमेशा खारगर गुरु क्षेत्र, दिन में रात में सोते जागते। 1 ही चीज बोले गुरु क्षेत्र कैसे कंप्लीट होगा, गुरु क्षेत्र कैसे कंपलीट होगा, खारगर कैसे कम्पलीट होगा। और फिर जब कुछ कुछ अच्छे डोनर्स मिल जाते हैं तो फिर महाराज मतलब जैसे रोने जैसी हालत हो जाती है। कि महाराज बोलते थे कि कृष्णा सैंड समबडी तो हेल्प गुरु क्षेत्र प्रोजेक्ट। तो ऐसे मतलब वो बहुत ग्रैटिट्यूड फील करते थे और हमेशा चिंता करते रहते। थ कारगर और कुरु क्षेत्र तो बहुत ही ज्यादा चिंता है। क्योंकि कुरुक्षेत्र प्रोजेक्ट प्रपात का ड्रीम प्रोजेक्ट है। और उसको महाराज ने कितना कितने टाइम। तो 10 पंद्रह साल तो कोर्ट केस में ही जमीन के चक्कर में नहीं हुआ। फिर उसके बाद जमीन दूसरी ली और उसपर भी बनाया। तो महाराज का। वो इच्छा थी न कि महाराज प्रोप ने इंस्ट्रक्शन दी थी कि कुरुक्षेत्र में भी वो प्रोजेक्ट होना चाहिए। महाराज बार बार बोलते थे कि अम्बरीश प्रो को भी बोला था। ये जो चीज है अम्बरीश प्रो को और मेरे को बोला था कुरुक्षेत्र में प्रोजेक्ट का बट अम्बरीश प्रो तो टीवी में लग गया पूरा, तो मेरे को, अब प्रोप की इंस्ट्रक्शन है तो अब वो नहीं कर रहे तो फिर समबडी शुड डू दैट तो हैव टू डू दैट तो वो इतना टेंशन लेते थे उस प्रोजेक्ट में, तो इसी से कनेक्टेड अब भी जस्ट मेरे को क्लिक किया 1 बार अम्बरीश प्रभु कोई गुरु महाराज कुरुक्षेत्र का प्रोजेक्ट दिखाने के लिए ले जा रहे थे दिल्ली से गुरु क्षेत्र 4 घंटे का रास्ता है तो मैं नहीं था उस गाडी में, क्योंकि महाराज को उसी दिन जाना था और उसी दिन वापस आना था तो मेरा कोई ज्यादा जरूरत नहीं थी तो अजय को रंग गया था महाराज की तबियत खराब हो गई रास्ते में बिल्कुल बहुत हेवी बुखार हो गया और तबियत बिलकुल खराब हो गई और फिर भी उन्होंने मतलब बिल्कुल शो नहीं किया वह गए और अम्बरीश को को पूरा प्रोजेक्ट दिखा के वापस ले आये नहीं तो मतलब प्रपात के लिए बहुत बहुत दिखाना नहीं चाहते थे कि मतलब मैं बीमार हूँ अम्बरीश पर ट्रिप कैंसल कर दें ज सन को मोटिवेट करना चाहते थे कि आप भी रूप पद का प्रोजेक्ट है, ड्रीम प्रोजेक्ट है इसको करें प्रयास करें इसके लिए। तो ये था 1 चीज और मैं शेयर करना चाह रहा था विवेक बिंद्रा ब्रूस से लेके मैं अभी कल फ्लाइट से आ रहा था तो मैं मतलब इतना मुझे ऐसा फील हो रहा था कि मतलब बहुत मिस कर रहा था महाराज को गुरू महाराज को क्योंकि मैं 12 साल महाराज के साथ ट्रेवल किया फ्लाइट में, हमेशा महाराज के साथ मैं कभी फ्लाइट में कभी जरूरत नहीं पड़ी गए नहीं गुरु महाराज की कृपा से अपने साथ वो फ्लाइट में लेके जाते थे तो मतलब 1 हमेशा था कि मैं मतलब मैं अगर फ्लाइट में बैठा हूं तो मेरे साथ गुरु महाराज हैं और मेरे साथ 6 बैग होते थे और महाराज डी डी गौरीताई का बैक, डी डी शालीग्राम शिला का बैग, लैपटॉप का बैग, पीछे कैमरा बैग महाराज मेरे को देखते थे 6 बैग तुम उठा लोगे मैंने कहा महाराज हाँ हाँ मैं उठा लो क्यों? क्योंकि मैं अकेला महाराज के साथ ट्रैवल करुंगा मैं यह थोड़ी बोलूंगा महाराज आप उठा लो। 1 महाराज बोलते है नहीं नहीं नहीं तुम दे 2 कौन वाला बैग हल्का है तुम वो मुझको दे। 2 मैंने कहा नहीं महाराज कोई दिक्कत नही है क्यूंकि महाराज को अपना बैलेंस करके चलने में थोड़ा दिक्कत होता तो मैंने कहा महाराज आई विल हैंडल तो मैं मैनेज कर। तो वो चीजें याद आ रही थी कि मेरे पास मैं खाली हूं महाराज भी नहीं है मेरे साथ, अभी जो 2 दिन पहले मैं आ रहा था तो मतलब बहुत ऐसा खालीपन लग रहा था तो मुझे वो सारी चीजें याद आने लगी जब कि मतलब महाराज फ्लाइट में जाते थे क्या क्या करते थे मैं तो जब भी महाराज की फ्लाइट में आते मुझे तो भैया रेस्टिंग टाइम मिल जाता था। मैंने कहा महाराज मुझे कुछ नहीं बोलने वाले फोन लगाओ कुछ नहीं बोलेंगे कि इसको फोन लगा लगा। महाराज फिक्स था उनका, जैसे फ्लाइट में बैठते थे, चैटिंग करना शुरू कर देते थे। और मैं साथ वाली सीट पर होता था। तो मैं थोड़ा सो जाता था, फिर महाराज उठाते नहीं थे, फिर लास्ट में बोलते थे, सोते को महाराज नहीं उठाते। इतने मतलब लिंग तो बाद में सारी फ्लाइट में सो रहे थे। मैं सारी रात मैं सारे टाइप चैटिंग रहा, सारी फ्लाइट में सो रहे थे। मैंने कहा बा आज कुछ करने को है नहीं, अभी तो बस तो रेस्ट करना है न, वो ठीक रहेगा, आप तो रेस्ट करते हीं आपके हिस्से का रेस्ट हमको करना पड़ता है। तो ऐसी उसमें 1 बार हम क्या हुआ कि फ्लाइट में जा रहे थे। एयर इंडिया से ही जनरल ट्रैवल करते हैं। डल्ली से बॉम्बे तो डेल्ली के एयरपोर्ट पर विवेक बिंद्रा प्रूफ मिल गए। वेणु माधव प्रूव आप सब जानते ही है गुरू महाराज की डिसाइपल है। वेनुमाधुप्रुव। तो वो तो महाराज तो हमेशा ऑन टाइम पहुंचते हैं। 2 मिनट पहले तो वो पहले से पहुंचे हुए थे, जैसे ही गुरु महाराज को देखा, बोर्डिंग गेट के पास ही दंडवत प्रणाम किया, उनके 4234 लोग थे सेक्रेटरी और 434 सेक्रेटरी थे, उनके साथ दंडवत प्रणाम किया। पूरा एकदम लेट के सब लोग देख रहे हैं मतलब जो लोग फ्लाइट में मतलब, जो लोग सब वेट कर रहे है, वहां पर बोर्डिंग गेट पर सब लोग देख रहे हैं कि कौन कौन है और कौन दंडवत कर रहा है। तो मतलब अच्छी क्वालिटी है। तुरंत। फिर महाराज से बात करने लगे की महाराज मैं अभी बॉम्बे जा रहा था। तो फिर मेरे को पूछने लगे की महाराज की कौन सी सीट है। मैंने कहा इकॉनमिक क्लास क्यों, महाराज बिजनेस क्लास में नहीं ट्रेवल करते। मैंने कहा नहीं प्रबु महाराज तो हम लोग बोल बोल के थक गए हैं, कुछ स्पोन्सर्स भी है, डिवोटीज भी है, वो बोलते है हम पैसे दे देंगे महाराज को बिजनेस क्लास में भेजो मैं महाराज जाते ही नही है। बिजनेस क्लास में, तो इकोनॉमिक क्लास में सीट है। कहते अच्छा कहते है मेरी बिजनेस क्लास में, मैं महाराज को अपनी सीट पर बैठा दूंगा। तो मैंने कहा पर आप ट्राई आप बात करें, मैं तो बात नहीं कर सकता। अभी हम चले गए फ्लाइट में। अन्दर अभी महाराज वो बिजनेस क्लास वालों को पहले एंट्री होती है। तो वो पहले जाके बैठ गया। जब महाराज आये महाराज को वहीं पर रोक लिया, महाराज वो खड़े हो गए। महाराज आप इधर बैठिए मैं दशावतार के साथ बैठूंगा। तो कहते है महाराज तो इतने विनम्र न न, बिल्कुल छोटे बच्चे के। नहीं, नहीं नहीं मैं, ऐसे नहीं बैठ सक, ये प्रॉपर नी है, ये, ये रूल्स के खिलाफ है, ये सही नहीं है, नहीं, नहीं, नहीं, महाराज, नहीं नहीं आप, बैठिए कुछ नहीं ये प्रभु जी के और महाराज के। जो एक्सचेंज हो रहा था, सारे लोग ऐसे देख रहे थे। और जो एयरहोस्टेस थीं वो खड़ी हो गई, वो पीछे ट्रैफिक जाम। इधर सब जा मतलब। महाराज बैठने को रेडी नहीं है। और तो कहते नहीं मैं प्लेन के रूल्स एंड रेगुलेशन को नहीं तोडूंगा। तो महाराज रिक्वेस्ट किया, बहुत बार, पर नहीं माने महाराज, वे जिद्दी थे तो नहीं माने। और वो आके बैठ गए अपनी सीट पर विद्रप डायरेक्ट और एयर होस्टेस का जो जो चीफ एयर होस्टेस होती है और जो पायलट होता है, उनसे जाकर। मिले बात किया, बोला कि मैं मेरे स्यूचर मास्टर आये हुए है, मैं बिजनेस क्लास में कैसे बैठ सकता हूँ। मेरे स्यूचुलमास्टर इकनॉमी क्लास में बैठे हैं, मैं नहीं बैठ सकता। मेरे को या तो उतार 2 या फिर उनको इधर ला के बैठाओ। फिर वो पायलट। और जो सीनियर एयर होस्टेस है, वो दोनों पायलट और एयर होस्टेस दोनों आये। महाराज को रिक्वेस्ट किया कि महाराज आप प्लीज आगे वाली सीट पर बैठिए, नहीं तो वो फ्लाइट में नहीं, वो कह रहे, वो नीचे उतरने की बात कर है। तो महाराज कह रहे अच्छा। तो फिर जब उधर से हाँ बोल दिया तो फिर महाराज बैठ गया। तो ये 1 स्वीट एक्सचेंज है, महाराज हमेशा अपनी विनम्रता दिखाते है, महाराज चाहते ही नहीं कि मैं लग्जरी लाइफ जी हूं, बिल्कुल नहीं चाहते। महाराज का, जो दिल्ली का रूम है, छोटा सा रूम था, बिल्कुल छोटा सा रूम, वो। अभी 45 साल पहले वो बेड पर सोना शुरू किया। 45 साल पहले, जब से उनको उठने में दिक्कत होने लगी नीचे पर जब हम सोते है, नीचे सो, वहाँ से नीचे से उठने में ताकत लगती है। बॉडी को उठाने तो उनको दिक्कत होने लगी। तो उन्होंने कहा कि अब मैं बेड पे सोऊंगा। पहले नीचे बैठ के प्रसाद लेते थे, नीचे बैठ के सोते थे, सोफे पर सोते थे यहाँ पर, तो मेरे को कितना बुरा लगता था। महाराज यहाँ पे अपने रूप में सोफे पर सो जाते थे, थोड़ी 5 मिनट के लिए, 10 मिनट के लिए, क्योंकि बैठ तो होता नहीं था, अगर उनको 5 मिनट के लिए लेटना है, कमर सीधी करने है। तो वो सोफे पर लेट जाते थे। क्योंकि जितनी देर में आप लोग बैठ लाओगे लगाओगे, उतनी देर में, तो मैं उड़ जाऊंगा। तो ऐसा था। वैसे दिल्ली टेम्पल में महाराज को छोटा सा रूम था, अभी उसकी हालत खराब हो रही थी, फॉल्स पार्टीशन, वगैरह लगाए थे, सब दिमाग वगैरह लग गया था। तो अब उसको थोड़ा चेंज करना था। तो भक्ति रक्षक महाराज, जो पहले रागो पढने, ब महाराज के अभी सन्यासी डिसाइपल है, हिजऑलमेसनभर्दादा। गोलोक महाराज तो बहुत ध्यान रखते थे, गुरू महाराज का, तो वो कमरे का, क्योंकि वो बिल्कुल लग्जरी लाइफ बिल्कुल नहीं जीना चाहते थे। बिल्कुल तो वो जितना सिंपल, क्योंकि वो नहीं चाहते थे कि कोई मुझको प्वाइंट आउट करे, प्वाइंट आउट करे। तो वैसे ही अभी। महाराज को बोले कि गुरु महाराज को बोले कि महाराज आपके कमरे की हालत बहुत खराब हो गई है, इतनी आपके, वीआईपी गेस्ट आते हैं, आपसे मिलने आते हैं। ये देखिये, सब लकड़ियों में दीमक लग गया है। ये सब चेंज करना पड़ेगा। गुरु महाराज कहते अच्छा महाराज कहते हैं 20 30 हजार रुपए से ज्यादा खर्च मत करना, 20 30 हजार में क्या होता है। तो उन्होंने कहा ये महाराज हम कर लेंगे। अभी भक्ति रक्षक महाराज ने महाराज गए। अमेरिका 2 महीने के लिए जाते हैं, 1 महिना अमेरिका 1 महिना रशिया जो गर्मी में समर मैकश समर महाराज उधर बिताते थे मैक्सिमम। तो अब 2 महीने के लिए हमारे पास टाइम था, मैं तो नहीं था, भक्ति रक्षक महाराज थे, ये 12 साल पहले पहले की बात है, पंद्रह साल पहले तो भक्ति रक्षक महाराज बताते थे, ऐसा अब उन्होंने प्लान किया फ्यूचर के हिसाब से कि महाराज अभी धीरे धीरे एज एज हो रही है, महाराज को 1 बेड बैड भी चाहिए, नीचे बैठ नहीं सकते। तो महाराज के लिए 1 बेड रूम बनाया, नीचे बैठ के खान पहले वो नीचे बैठ के प्रसाद लेते थे, तो अभी नीचे नहीं बैठ पाएंगे। तो डायनिंग टेबल लिया, वो रखा पुराना सो सारा फर्नीचर चेंज कर दिया। यह सब कमरा बड़ा 1 बहुत बड़ा कर दिया, इधर उधर साइड वालों से भी कमरे से जगह निकाल के जोड़ दिया वेटिंग रूम बना दिया, सब कुछ बना दिया। तो फिर अब बन गया। जैसे तैसे उन्होंने महाराज के आने से पहले खत्म कर दिया। सब लोग गायब हो गए। जिन जो लोग भी बनाने वाली टीम में थे, सब के सब लोग गायब हो गए। क्यों? क्योंकि जैसे ही महाराज को लेने के लिए जो रिसीव करने के लिए गए कृष्ण प्रिया पर और ये जो 23 लोग थे उन्होंने वही पर महाराज को बोल दिया कि महाराज राग पंडित का सारा तोड़ के बहुत पैसा खर्च किया और गांव कमरा चेंज कर दिया। बट वो सारा पैसा मंदिर का बिल्कुल नहीं लगा था, कहीं से उन्होंने स्पांसर कराया था। बट अब महाराज को पूरा महाराज पूरे मूड में थे कि अभी मैं जैसे ही मंदिर जाऊंगा, इन लोगों की क्लास लेनी है। पर अभी कोई दिख नहीं रहा। उस टाइम सुका प्रिया प्रभु थे और वक्तिरक्ाजकोईनहीं दिख रहा और सूखा प्रिया प्रभु सो गए, किसी फ़ोन से चौक करे किसी कोने में जाके सो गए। वकतिर्दिखेीमाराज सबको भी लगा दिया। पूरे मंदिर में। ढूंढो कहा ये दोनों अब सुबह फेस तो करना ही है। फिर दोनों आए फेस किया महाराज के जो महाराज ने सुनाया लो इतना सुनाया तुम मेरा नाम खराब करोगे मैं। मैं ऐसा कहता हूँ मैं ये इतना इतना ने फास्टर होटल बना दिया है। आप देखोगे किसी ने महाराज का दिल्ली का रूम देखा है। ऐसा नहीं है, कुछ नहीं है, सिम है, ज्यादा नहीं है बट बट उनके लिए। उनको लगता है कि यही हाईफाई है। तो फिर भक्ति अक्षर मार बोले महाराज अभी आपको बेड की जरुरत है, डायनिंग टेबल की जरुरत है। थोड़ा सा ही तो किया है इतना इसको आपको ज्यादा मजा यह आपके फ्यूचर के हिसाब से प्लान किया है। कहते नहीं तो मेरा नाम खराब करोगे। तो कहते हैं भक्ति चारू महाराज महाराज का 1 स्टाइल है। जब भी कोई आता है डेली में तो महाराज उनको हम लंच के लिए इन्वाइट करते हैं। कोई भी पार्ट साइट पर आये हैं, हमेशा सेवा भाव रहता है तो महाराज मिस नहीं करते। ऑपार्चिनिटी अपने गॉडब्रदर से असोसिएशन का उनको इसी बहाने से लंच बुलाना और फि तो महाराज जी आते थे। तो बुलाते भी चारों महाराज को बुलाया महाराज आये लंच। अब महाराज ने देखा पुराना वाला कमरा भी देखा था मार ने महाराज भक्ति 4 बोलते है की महाराज अब ये अब आपके स्टैंड का लग रहा है कमरा। तो तब महाराज थोड़े से मतलब थोड़ा सा मतलब पेसिफाई हुए, शांत हुए कि ठीक है। तो इस टाइप से 1 और बार आई, थिंक शिवराम महाराज आये थे, कोई आये थे, उन्होंने भी बोला कि उन्होंने मेरे को बोला। महाराज बोलते हैं कि इनको मेरा वॉशरूम दिखा 2 तो यूज करेंगे वहां पर टॉवेल वगैरह रख देना, उस करेंगे आप महाराज शिव राम महाराज गये प्रसाद पाने के बाद हाथ धोने के लिए और मेरे को बोले ये लाइन मेरे को बोली बोले कि महाराज का रूम तो इतना अच्छा है, बाथरूम अच्छा नहीं है क्योंकि वो नाइनटी सेवन का था। ओल्ड मॉडल तो रूम अच्छा है, बातरूम अच्छा नहीं है। तो अब 2 महीने में बेचारे उतना ही रिनोवेट कर पाया न इतना टाइम नहीं था कि बाथरूम रिनोवेट करे। तो मैंने महाराज को बोला। मैंने कहा महाराज देखिये शिवराम महाराज जैसे बोल रहे थे, मैंने कहा महराज इस बार आप जायेंगे न इस बार अमेरिका जायेंगे तो करे। तो फिर वो बात मैंने रिनोवेट करवाया था, मंदिर से पैसा नहीं लिया मंदिर महाराज नहीं चाहते, बिल्कुल नहीं चाहते कि वो 1 रुपया भी मंदिर से बिल्कुल नहीं महाराज की ईवन मेडिसिन की सेवा भी महाराज किसी भक्त को दे देते है की डिसाइपल मेडिसिन की सेवा करना चाहते हो तो तुम यह कर तुम कर लो और इस टाइप से कुछ पैसे नहीं लेते महाराज मंदिर से कोई ईवन अपने जितना भी ट्रैवलिंग एक्सपेंस है महाराज खुद बियर करते हैं, अपनी सेक्रेटरी असिस्टेंट का भी पेयर करते हैं और खुद का भी करते हैं। तो पैसा तो उल्टा देते है। जितना मैंने बताया था न आपको मनी वाला बाज में वो सारा दे 2 दे 2 मंदिर वो दे 2 सहारा दे 2 तो इस टाइप से रहता है, ये था 1 यह फ्लाइट वाला 1 पास टाइम था युद्ध प्रीचिंग का। तो आपको पता है महाराज कितने फेवरेट है, युध प्रीचिंग महाराज कितने भी थके, कितने भी महाराज जैसे बोलेंगे न कि महाराज आईवाफालेडिब्युटीज आये हैं, रिक्वेस्ट कर रहे हैं क्लास के लिए हा हा म रेडी और उस सिचुएशन में क्या सुबह से बोलेंगे अम टायर्ड आई, वॉंट टू टेक रेस्ट, म टायड ये, ये मंत्रा मंत्रा, ये मंत्रा टायड आई, वांट टू टेक रेस्ट, ये सुबह से शाम तक चलेगा। जब भी मैं सामने जाऊंगा, i, m, tाiडआई वं टू टेक रेस्ट, मै करिए रेस्ट, वो रेस्ट नहीं करेंगे, आम टायर्ड टेक रेस्ट। और जैसे ही बोलेंगे महाराज युद्ध की क्लास तुरंत रेडी हो जाए। आप हमको सच में लिटरली, हम देखते थे कि महाराज इतने थके हुए हैं, बट वो रेस्ट नहीं कर रहे है। तो वो क्या क्या करते थे, कहते है बहुत थका है पर मेरे पास बहुत सेवाएं हैं, जाते थे शावर लेके आ जाते थे। और फिर से सेवा बोले। अब दोपहर को चलो ठीक है। चलो थोड़ी देर रेस्ट करते थे। नहीं, मैं 1 काम करता हूँ। मारे जैसे बोलते थे। मैं काम करता हूँ, शौवर ले लेता हूँ। तो मैं थोड़ा फ्रेश फील कर रेस्ट नहीं करते थे। तो मतलब इतना था। दोपहर को बिल्कुल भी रेशमी करते थे। तो उस टाइप से होता था आव एफ की प्रीचिंग के लिए। तो मतलब हमेशा रेडी रहते थे। और उनकी आइवएफकेलेक्चर इतने स्वीट होते थे न। महाराज इतना जोक्स उसमें करते थे और इतना हंसाते थे। भक्तों को पता नही कहाँ से एनर्जी आ जाती थी। जैसी आइवएफकेडिवूटिस को देखते थे, बिल्कुल टोटल बुरा एनर्जी हो जाती थी। गाँव से वो रहता था। और और ब्रह्मचारी इसके साथ तो 1 जैसे 1 याद आ रहा था। मैंने तो नोट कर लिया, मैंने ये र्मचारी कहीं पर भी मिल जाए। आपको अगर दिल्ली के ब्रह्मचारी बॉम्बे में मिल जाए, बॉम्बे के कर्मचारी, दिल्ली में जाए, वृंदावन मिल जाए। सबसे पहले 1 ही चीज पूछते थे कि तुम कब वापस कब जा रहे हो? महाराज नहीं चाहते थे कि 1 दिन भी वेस्ट करें, इधर उधर सीधा, पहला केशन तुम वापस कब जा रहे हो? क्यों आये हो? और वापस कब जब वो सेटिस्फाई हो जाते थे उनके अंसर से, तो तो होके बोलते थे। नहीं। तो फिर सुना देते थे नहीं, नहीं, अच्छा नहीं है। ब्रह्मचारी, इसको वैसे इतने दिन बाहर नहीं रहना चाहिए। ये उनका बहुत बढ़िया था। हमेशा ब्रह्मचारी को बरारी, गोइंग, बैक और महाराज का 1 बहुत अच्छा न। क्यूटनेस कह सकते हैं, हंबलनेस कह सकते हैं? या इम्पोर्टेंस देते थे भक्तों को। महाराज कोई भी डिसीजन लेते थे न। तो सबको इन्वॉल्व करते थे, सबको अकेले, इतनी मतलब बड़ी पोस्ट पर होते हुए भी मतलब खुद डिसीजन नहीं लेते थे, सब का इनपुट लेते थे। इसलिए महाराज इतने ज्यादा मतलब सब प्रोपर डिसाइपल सब लाइक करते थे। गारलैंड स्पेशलिस्ट थे न। हमारे मंदिर के महाराज के लिए इतने सुंदर गारलैंड बनाते थे। और ऐसा ही सुबह 1 गारलैंड, दोपहर को 1 गारलैंड, शाम को 1 गारलैंड महाराज बोलते थे। मत पहना हो गया, हो गया, बस पर पडा फट जाके, पहना देना तुरंत इतना महाराज को। मतलब बहुत प्रेम से गारलैंड देखा मैंने। और ऐसा ही आते थे प्रभु सुबह रखे प्रभु। अभी महाराज आयेंगे न। मीटिंग में जायेंगे, यह बहुत सुन्दर हल्की। महाराज ये भारी गारलैंड नहीं पहन पहन। पाते। न तो छोटे छोटे फूल की बहुत सुंदर और अपने हाथों से बनाते थे। ऐसा नहीं कि किसी माता जी को बोला कि बना के रख। 2 और मैं अपने हाथों से बनाते थे। सुन्दर सुन्दर छोटे छोटे फूल के गारलैंड बना के रख देते थ। कैसे दामुदरकूमराकु बोलते थे, बोलते थे। महाराज जैसे ही आयेंगे, न कोई गाले बना। इतना। मतलब बहुत प्रेम भाव है। मैं जब बता रहा था, मैं सो गया हूँ, हा
हा
हा हा हा। इसलिए महाराज के सारे अपने गो्डब्र्दलके साथ इतना मतलब स्ट्रॉंग रिलेशन है। वो अजात शत्रु है। बिल्कुल उनका मतलब पुरे स्कॉन में अगर कोई भी प्रॉब्लम हो, गुरु महाराज कोई भी सॉलूशन चाहिए, गुरु महाराज, सारी कमेटीज में, सारे मीटिंग में, सब में वो चेयरमैन होते थे, या महाराज तो थक गए थे, बोलते हो भैया, मुझे अभी थोड़ा कम रखा करो, मीटिंग में बट नहीं महाराज, हर मीटिंग में, उनका, हर कमेटी में उनका नाम होता था। तो महाराज उनकी ये नेचर थी कि सबको साथ में लेकर चलने की, इसलिए महाराज को सब लाइक करते थे सब। तो वही उनकी इतनी हम्बल नस थी कि अगर महाराज को कुछ छोटी सी छोटी चीज भी पूछनी है तो आप जैसे बड़ी चीज है। तो तो सबको बड़े लोगों के साथ डिस्कस करेंगे कोड डिसीजन कभी नहीं लेंगे। ये लीडर, उनकी लीडरशिप क्वॉलिटी थी, ऐसे नहीं है है मैं यह चाहता हूं, ये कर लो नहीं, सब से बैठेंगे बात करेंगे, सबका क्या वन ओपिनियन रहेगा, उसको करते वैसे छोटे छोटे भक्त होते थे न, उनसे पूछते थे कि मैं हमसे पूछते रहते हैं, मैं क्लास दूं या नहीं दूं, मैं बॉम्बे जाऊँ या नहीं। मैंने कहा महाराज आप डिसाइड कीजिए, तो इसमें भी 1 हम ट्रिक कर लेते थे, अभी महाराज के साथ रहते थे तो हमें थोड़ा सा आइडिया हो गया था अभी महाराज, अब जब हम अपना काम करवाना होता था तो हम उसके अपोजिट बोल देते थे। मैंने बहुत बार ट्राई किया, महाराज कहते है मैं क्लास नहीं देना चाहता, बट ये लोग मुझे पुश कर रहे हैं, ठीक है महाराज मत दीजिये, क्लास मत दीजिए, आप रेस्ट कीजिये क्लास मत दीजिए, तो फिर क्लास देंगे हम जो हमें करवाना है की क्लास दिलवानी है। तो महाराज मत प्लीज म case तो वो वो तो पता लग गया था हमको न महाराज, अगर हम ऐसे बोले तो महाराज ऐसे करते थे। बड़ा बॉलफीडएक्चेमथा प्रसाद और रेस्ट क के लिए बिल्कुल फोकस नहीं था, आप सबको ही पता है न, उनके पास 2 चीज के लिए टाइम नहीं है, रेस्ट के लिए और प्रसाद के लिए। 1 बार क्या हुआ कि महाराज के कुछ टेस्ट कराने थे, शायद अमेरिका जाना था, तो सारे टेस्ट कराने थे। तो सुबह से एमटी स्टमक सुबह 8 बजे से लग गए हुए हैं, बाहर डॉक्टर के पास, ए 1 डॉक्टर, फिर दूसरा डॉक्टर, कभी डेंटिस्ट के पास, कभी एन टी वाले के पास, फिर कभी हार्ट के पास, कभी ऐसे सारे चक्कर लगा लगा के वो आते आते, उनको शाम हो गई। अभी न ब्रेकफास्ट किया, न लंच किया, अभी डिनर का टाइम हो गया, अभी डीनर का टाइम हो गया। और जैसे आये वेटिंग रूम में इतने भक्त लोग बैठे हुए हैं। अभी अजय ग्राम तो लड़ पड़ा उनसे, अभी महाराज ने सुबह ही प्रसाद नहीं पाया, दोपहर को भी प्रसाद नहीं पाया। अभी महाराज का, प्रसाद का टाइम है, महाराज किसी से नहीं मिल सकते। थके हुए। तो महाराज जैसे ही महाराज ने सुना बोला है, बुलाया तुम कौन होते हो? मेरी सेवा को रोकने वाले, वो लोग मिलने आये हैं, मैं उनसे मिलूंगा, महाराज ठीक है बट आप प्रसाद नहीं पाया, नहीं वो बहुत देर से वेट कर रहे हैं। मैं पहले उनसे मिलूंगा, अजय राज बोलता है महाराज, आप अपनी सेवा कर रहे हैं, पर हम आपकी सेवा कर रहे हैं। तो हम अपने हिसाब से, तो मतलब बोला नहीं। उसने बट, मन में उसके चलता था की आप अच्छी बात है, आप रात की सेवा कर रहे हैं, लगे हुए हैं। तो हामिद, हमें तो आपकी सेवा में ध्यान देना पड़ेगा न, आपका खाना, पीना, सब ध्यान रखना पड़ेगा। नहीं तो डॉक्टर और डॉक्टर के साथ जब हम पूरी जब जब डॉक्टर महाराज के साथ मिलने आते थे, महाराज का हाल पूछने पूछते थे, कैसे हैं महाराज? फिर हमको देखकर बोलते थे, महाराज टाइम पे रेस्ट कर रहे हैं। मैंने कहा नहीं टाइम पर खा रहे हैं, नहीं महाराज बोले, ये सब झूठ बोल रहे हैं। महाराज सीधा बोलते थे, ये सब, लोग झूठ बोल रहे हैं, इनकी इनकी बात पर ध्यान मत 2 और डॉक्टर भी हंस रहे हैं, हम भी हस रहे। मतलब डॉक्टर को भी नहीं छोड़ते थे, और डॉक्टर बोलता था कि ये ये करना है। हाँ हाँ मैं सब करूँगा, डॉक्टर बोलते रहेंगे। ये सब थोड़े करना। मुझे पता है मुझे क्या करना है। वो इस टाइप से बोलते थे, उनके सामने नोनी बोलेंगे, बस, पीछे, बोलेंगे सब नहीं चलेगा, मैं अपने हिसाब से कर। मुझे लगता है कि अभी स्टॉप कर देना चाहिए, ये तो भागवत सप्ताह की तरह है, किसी या कुछ कुछ कोई जानना चाहता है तो फिर 12 चीज ले सकते है, नहीं तो ये तो वाइस वो हैबजट, मैने मैने कोई सीक्वेंस भी नहीं। जैसे जैसे मेरको याद आया मैंने लिखा किसी को कुछ पूछना है, किसी चीज महाराज का कुछ पूछना चाहते हैं, महाराज के बारे में या तो कुछ शेयर कर सकते है। ठीक है, हर हर 1 तो हमारा दिल्ली मंदिर ओपनिंग होने के पहले तो महाराज दिल्ली तो हमेशा नाइटी जब से लैंड मिला था, और लाइन मिलने के पहले महाराज जाते रहते थे। और उसके पहले गुरमार का बेस तो जूहू था नाइंटी सिक्स के बाद में जब दिल्ली मंदिर खुला तो गुरुमाराज का बेज वहां शिफ्ट हो गया। मगर फिर भी गुरुमाराज बिजी बहुत बार बोलते थे कि दिस, इस, द, मोस्ट, इमपोर्टंट, टेंपल और सब जगह भी बोलते थे। ऐसा मायापुर वृंदावन और हैदराबाद जू के बारे में। और जहाँ तक मेरा अनुभव था, दिल्ली के बाद में महाराज जू के बारे में बहुत चिंतित रहते थे। और पता नहीं दिल्ली से ज्यादा मुझे पता नहीं आप के अनुभों से कुछ शेयर कीजिये जू के विषय में महाराज का स्मरण रे कुश? महाराज का तो चिंतित तो रहते ही थे, वो तो रोपा ऑफिस है, बॉम्बे ऑफिस बोलते थे, महाराज का 1 ही 1 ही मंत्र है। 1 ही मंत्र है कि हमको सबको साथ लेके चलना और कोपरेट करके सेवा करना। महाराज अगर वो नहीं कर पाते थे। फिर महाराज अपने आप को पीछे हटा, मेरा प्रिंसिपल यह है। मतलब गुरु महाराज बोलते थे, मेरा प्रिंसिपल है सबको 1 साथ लेकर चलो, 1 साथ ले के चलो और पद की प्रसन्नता के लिए सब मिल के सेवा करो। तो यही 1 था। और महाराज यही चाहते थे कि जुहू में सब लोग साथ मिल के सेवा करे। यही था और कोई उनका और अगर कुछ था तो फिर महाराज कभी उस पर ध्यान नहीं देते थे। महाराज का यही था कि सब 1 साथ मिल के सेवा करें प्रोपर ऑफिस को ऑफिस में प्रोपर के मूमेंट को आगे बढ़ाए। य आप कुछ पूछना चाह रहे थे, पीछे अरे कृष्ण थैंक यू वेरी मच में 1 वक्त वक्त के बारे में सुना था, गोवर्धन परिक्रमण करते समय। धनयवाद। महाराज ने उनको पहले बोला था पुरुष, उन्होंने मना करके मतलब गुरु, आज्ञा, उल्लंघन करके धन्यवाद। ऐसा सो महाराज का जो फॉलिंडानडिसपसमतलब जो 4 नियम फॉलो नहीं कर रहा है या जब्त नहीं कर रहा है, छोड़ दिया इन लोगों के बारे में। महाराज का क्या सोचता हूं। हमने डिस्कस किया था न। महाराज बोल रहे थे कि अगर किसी ने कोई बड़ी से बड़ी ग़लती की है तो महाराज उसको तुरंत बोलते थे कि मैं माफ़ करता हूँ आगे से मत कर। महाराज दोबारा से सबने जो महाराज के करीब है सबने शायद इस चीज को महसूस किया है, रियलाइज किया है। महाराज तुरंत बात कर, फॉरगेट forgieforgेt मन में भी नहीं रखते थे और सेवा करो। तो अगर आपको ऐसा लगता है कि वो भक्त तो कोई नई शुरुआत कर सकते। ये इनिशिशनहींहै अभी हम सभी विशेष प्रोसेस में है। तो ऐसा नहीं है कि मन में जरजिस होते हैं। मैंने देखा है भक्तों को, कुछ लोग मंदिर छोड़ के चले जाते हैं, पर वो भक्ति, भक्ति, टेम्पल तो छोड़ देते हैं पर भक्ति को नहीं छोड़ पाते। और फिर वो मंदिर भी नहीं आ पाते। थोड़ा सा उनको शर्म सी महसूस होती है। तो ऐसा नहीं है। महाराज तो बोला टेटली सब को एक्सेप्ट कर लेते थे, माफ कर दे दी। 1 ही था जो मैंने बताया था न आपको महाराज इस्कॉन के खिलाफ अगर कोई कुछ बोल दे या सकॉन के खिलाफ। अगर कोई एक्टिविटी कोई करता है तो फिर उसकी शकल भी बाकी। कोई भी बड़े से बड़ा अपराध किया हो, महाराज के प्रति भी किया और महाराज ने बताया था महाराज के प्रति भी किया हो। तो महाराज रोते हुए मैंने माफ कर
वा,
हा सो वामंdiprbुहरी, सो वामंदीप्रहैनजलंदर से वो पूछ रहे हैं कि आपने इतने साल महाराज का सेवा किया तो आपका क्या रियलाइजेशन है महाराज सर्विंग प्रपा देन सेपरेशन, क्योंकि प्रहोपाभगोतदाम लौट गए 1977 में और गुरु महाराज ने इतने साल सेवा किया उनसे विरह में। तो क्या महाराज का मूड था। क्योंकि अब भक्तों को वही करना है। तो वही जानना चाहते हैं कि आपने क्या देखा था महाराज में, आपने क्या देखा आपने इतने साल सेवा की तो महाराज को देखा होगा। विरह में बहुपाद की सेवा करी रहे सर्विस सेपरेशन जिसको बोलते हैं तो उसके बारे में कुछ जानना चाहते हैं। मुझे तो नहीं लगता है कि महाराज ने कभी अपने आप को रोपा से अलग फील किया। मैंने तो देखा तो हमेशा देखा कि महाराज प्रपात के प्रोप को अपने साथ ही जीते थे। प्रपात के साथ ही जिए अब सेपरेशन क्या, अभी वो ट्वेंटी, फोर। बाय सेवन व मेडिटेट करते हैं। प्रोउपाद के इंस्ट्रक्शन पर हमेशा प्रूपादऔरप्रोपाद और प्रोपल तो सेपरेशन कहा हुआ? फिजिकल असोसिएशन तो आई थिंक ज्यादा था भी नहीं। प्रहपादकेसाथ गुरु महाराज का महाराज तो अपनी जॉब में बिजी थे, अपनी सेवाओं में बिजी थे। ज्यादा फिजिकल असोसिएशन था, नहीं तो उन्होंने प्रहपादकीलाइफैन इंस्ट्रक्शन को, अपने कोई इंस्ट्रक्शन को, अपनी लाइफेंस होल मान लिया। तो सेपरेशन का आरथिक कोई सवाल नहीं पैदा होता। तो हमको भी वही चीज करना है। अगर हमको फील हो रहा है महाराज से विरह, तो उनके इंस्ट्रक्शन को अपना लाइसेंस सोल मान लोगे। तो आप आप समझ लो कि उठते बैठते आपको गुरुमाराज नजर आयेंगे। हर 1 किस्मे खलिग्रुपमराजी की ह।
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Lord Jagannātha's Appearance Pastime | 21.07.2019 | ISKCON Calgary | Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

The Ācārya Teaches by His Own ExampleGuṇḍicā Mārjana by Guru Mahārāja #shorts

Guṇḍicā Mārjana – Lord Jagannātha's Pastime | 21.7.2019 | ISKCON Calgary |Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

H.H. Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī Mahārāja - Exemplary Sādhana and Deity Worship # shorts

भगवान की कृपा कैसे प्राप्त होगी ? | 11 Jan 2014 | Punjabi Bagh | Srila Gopal Krishna Goswami

Material Education vs Spiritual Education | Srila Gopal Krishna Goswami #shorts

