Gopal Krishna Goswami Maharaja & Radhanath Swami Maharaja encouraging Pune devotees for Marathon2023

In this Hindi devotional gathering recorded on YouTube, senior ISKCON leaders Gopal Krishna Goswami Maharaj and Radhanath Swami address the Pune community to launch the 2023 Marathon Book Distribution campaign. They set an ambitious target of distributing over seven lakh copies of sacred texts (Bhagavata, Gita, etc.) across India, outlining the logistical plan, challenges such as rising paper and printing costs, and strategies for mobilising volunteers, family networks, and local temples. The speakers interweave kirtan chanting, scriptural references, and personal anecdotes about past successful distribution drives, emphasizing the spiritual merit of sharing the scriptures. They also highlight ongoing temple projects, a large‑scale cultural drama to raise funds for the Pandurpur temple, and compare ISKCON’s free‑distribution model with Christian Bible distribution. Throughout, the leaders encourage devotion, collective effort, and gratitude, urging devotees to meet the target through enthusiasm, sacrifice, and divine blessing.
Chapters
देशना देश हर हरे राम हर राम देशना हर देश हर र रमरेरराररमहरर राम हरे राम हर राम ररराहरेराआर हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे राम राम राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम
अरे
हरे कृष्ण हरे हरे हरे रकरृशहरमहररामराम हरे हरे हरे कृष्ण हरे के हरे हरे रामा हरे रामा रामा र रामा हरे हरे कृषन हरे कृषना कृष्ण कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे रामा रामा रामा हरे
रे कृष्ण
हरे कृष्णा
रे
क्रिश्ना
हरेरारारा रामा हरे कृष्ण हरे कृषना कृष्णा कृष्णा रे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे राम हरे राम हरे राम हरे रामा रामा रामा हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे राम राम राम हरे हरे के हरे राम राम राम हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम रे हरे कृष्णा हरे हरे रावरे राम रामा रामा हरे हरे कृष्णा कशना हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम
हरे
हरे कृष्ण हरे हरे राम राम राम हरे देश हरे राम राम
राम
हरे ह राम रहगया बदाग प्रभु लभूपाररा ्रभुप्रभपाप्रभुपा रभुप्रहुपा सपा ज गहरी रोहरी रो हरी बोल गौरहरि हरी रो
yes
हरे कृष्णा। आज हमारा परम सौभाग्य है हमारे बीच में हमारे पूना के दोनो जी बी सी ने गोपाल कृष्ण, गोस्वामी महाराज और स्वामी महाराज दोनो पद रहे हैं मुझे याद बहुत सालो के पहले श्री श्री राधा कुंज बिहारी मंदिर में ऐसे अद्भुत दीक्षा का समारोह हुई उधर जिसमें परम महाराज महाराज राजा महाराज तीनों लगभग 5 सौ 600 को दीक्षा दी। बहुत सालों के पहले। इस तरह आज हमारे बीच में दोनो जी 20 उपलब्ध है। मैं परम गोपाल से महाराज के बारे में 2 शब्द बोलना चाहता हूँ। नाइनटीन सिक्स्टी फोर में महाराज दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ते थे। उसके आगे फ्रांस और जर्मनी ऐसे प्रदेशों में जाकर बिजनेस मैनेजमेंट मैकगिल यूनिवर्सिटी में कर रहे थे। और वो 1 वैष्णव परिवार से उनका जन्म हुआ है पंजाब में तो बचपन से उनको भगवान कृष्ण की ओर आकर्षण थी और 7 महात्माओं की ओर श्रद्धा थी। ऐसे वो ढूंढ रहे थे मुझे 1 वैष्णव गुरु मिले जिनका आश्रय में ले सकता हूँ। इस तरह ढूंढते गए। तो जब कनाडा में में तब सिटी सेवन में वो कनाडा के इस खान मंदिर से परिचित हुए भक्तों को मिला महाराज को बहुत अच्छा लगा। दोपहर को संडे फीस प्रोग्राम में जाते थे और रात तक जब ब्रह्माचारी लोग दूध पीते थे। सोने के पहले कुछ समय तक ठहरते थे, अनेक सेवाएं करते थे। तो 1 बार नाइनटीन सिटी सिटी सेवन में भक्तों ने बोला की शेरप्रोपाजी आने वाले है कुस मंदिर में और उनको 1 सेवा दी प्रॉपर जी के कमरे को सफाई करके देने की 1 सेवा दी थी उन्होंने की थी। और प्रॉपाजीकोपहली बार मुलाकात हुई उनकी प्रो जी बहुत प्रसन्न हुए महाराज को मिलकर उन दिनों में ज्यादातर लोग पश्चात देश के लोग ही जुड़ते थे। ये भारत को सी लड़का आया है और जो बहुत श्रद्धापूर्वक जुड़ा है। प्राजी ने अध्यक्ष और बाकी लोगों को बोला की। इसके ऊपर ध्यान देना तो नाइन सिक्टी में उसके बाद महाराज जी को प्रॉपर जी से दीक्षा हुई और प्रॉपाजी अनेक सेवाएं दी। महाराज जी को खास करके उन्होंने बी बी डी के ट्रस्टी बनाया उनको और भारत में उन दिनों में परमपूजय गोपाल, क्ष महाराज और परमपुज्य जयपुर स्वामी महाराज। ये दोनों बहुत वरिष्ठ भक्तों के बड़ी जिम्मेदारी थी सारे भारत का जिम्मेदारी थी जैसे महाराज जी कानपुर दिल्ली, मुंबई, गुजरात मायापुर से मद्रास हैदराबाद के सारे स्थानों का देखभाल करना, उसके जीबीसी थे महाराज जैसे और साथ साथ रशिया में प्रपज ने जब सोचा की किताबें जाना चाहिए तो उनको ही नियुक्त किया। सोवियत यूनियन में जाकर इन किताबों को छाप कर इनका वितरण करने की जिम्मेदारी। तो प्रभा जी ने इनको इनको बोला था कि तुम अलग अलग भाषाओं में इसको अनुवादित करके छापो। तो इस जिम्मेदारी को महाराज ने हृदय पूर्वक स्वीकार करके अनेक भाषाओं में प्रोप की किताबों को छाप कर उसका वितरण करने के काम चालू की प्रचुर मात्रा में की किताबें वितरण हुए। ये सब प्रोपज के समय में हुई। आगे जाकर महाराज जी दिल्ली में ग्लोरिया इंडिया प्राजेकट आप लोग जानते हो गुदरी चालू की आजकल लगभग 20 मंदिर है दिल्ली में और पूना के महाराज जी जी बी सी नाइनटीन गेइटी टू से तो महाराज जी इस मंदिर को शुरुआत से लेकर इसको डेवलप करने में महाराज का बहुत बड़ा हाथ है। तो नाइनटीन नाइंटी टू नाइंटी थ्री में महाराज ने परपज राजनाथ स्वामी महाराज के साथ बातचीत करके कुछ भक्तों को बुलाते थे। क्योंकि पूना का मंदिर उन दिनों में जुहू मंदिर के वक्त लोगी आते थे इधर बस पार्टी में आते थे और लक्ष्मी नारायण मंदिर में प्रोग्राम चालू की थी इस तरह उसके बाद क्या का मंदिर आया तो इस तरह गोपरक्शमहाराजऔर राजनाथ महाराज दोनो कोलाबरेटिव ली नाइनटी नाइन नाइंटी थ्री सी चालू किया। अनेक वक्त लोगों ने इसे योग्यता दी है। और पुनः के जिस मंदिर में हमलोग इधर अभी गार्डन में बैठकर सम्मिलित हुए है यह मंदिर लगभग 5 साढ़े 561 का है इसको लाने में बड़ा हाथ है। 1 बनर्जी नाम के 11 वृद्ध व्यक्ति था कैंप मंदिर के निकट उसको महाराज ने पर्सनली कल्टीवेट की प्रेरणा दी उसको उसके पास 1 बड़ा बालाजी का डेडी था। तो महाराज से प्रेरित होकर उन्होंने महाराज को बोला की आप बालाजी के डेडी को भी ले लीजिये साथ साथ मेरे घर को भी मैं दान में दे देता हूँ। तो उनके बाद में उनके देहांत होने के बाद उसमें से जो डेढ़ करोड़ मिला बनाया। कैसे मंदिर का गोपरमकैसेहोनीचाहिए डेटस क्या होना चाहिए, किस तरह का मंदिर हमें बनाना चाहिए, क्या क्या डेटिसहोनी चाहिए। 1 बार दोनो मारे जी बी सी साथ में बैठकर उन्होंने प्लानिंग की तो इतना सुन्दर मंदिर के कंस्ट्रक्शन में, इसके फंडरेजिंग में, प्रेजिडेंट को लाने में और इस मंदिर को चलाने में गोपाल क्ष महाराज का बहुत बड़ा हाथ है साल में लगभग 4 बार 5 बार आते हैं पूरना में। इस तरह आकर रन देकर पूना में पूना के बारे में ज्यादा बोल रहा हू क्यूंकी पूना में महाराज बहुत बड़ा डेवलपमेंट का हात है। इसी तरह महाराज रशिया में ही नहीं लेकिन दुनिया के कोने कोने में जाकर प्रचार करते है। अभी लुधियाना में तीसरा मंदिर खोला है। बहुत बड़ा मंदिर और कुरु क्षेत्र में, गुरु क्षेत्र में, ज्योतिसर नाम के जो स्थान है, कृष्ण भगवान ने अर्जुन को आत्मबोध दी, उधर बहुत बड़ा मंदिर भी बन रहा है। इस तरह हर 1 चीज हम बोल सकते है। गवर्निंग बॉडी कमिशन में। वरिष्ठ हमारा जी। बहुत हर मीटिंग से अभी 1 हफ्ते का मीटिंग हुआ। महाराज अपनी तबियत की परवाह न करते हुए आकर मीटिंग में भाग लिया। उन्होंने। और सबसे महत्वपूर्ण चीज यह है कि परमजेगोपालक्ष महाराज के लिए, परपज के किताबों को छापना, उसका वितरण करना उनके लिए सबसे प्रिय सेवा है। पिछले 45 सालों से महाराज जी हर बार मरता के पहले आते थे। इस तरह के प्रवचन देकर हमलोग को प्रेरणा देते थे। मरतन होने के बाद भेंट, पुरस्कार सब भक्तों को देने के लिए वापस आते थे। जनवरी में ऐसे ऐसे जब से इनकी बुना आगमन, चालू हुई, मरतन के टाइम भक्तों की पेरणा दुगुना 3 गुना बढ़ गया। और इस तरह हर बार हमारे जिला डेपार्टंटवर्ल्ड, फर्स्ट ट्रैंक लाते हुए। लगभग 4 बार ऐसा हुआ है। तो महाराज की बहुत बड़ी करुणा कृपा है पूर्ण के भक्तों के ऊपर अभी महाराज की तबियत ठीक न होने के बावजूद भी महाराज जी आज हमारे बीच में पद आ रहे हैं और हमको प्रेरणा देने के लिए और महाराज अनेक हज़ारों लाखों भक्तों के लिए प्रेरणा दायक है सारी दुनिया में और हमारे परम सौभाग्य है कि हम इनके साथ संग कर पा रहे हैं, इनका प्राप्त कर रहे हैं और इनका ध्यान हमारे पूना मंदिर के ऊपर है, भक्तों के ऊपर है। यह हमारा बहुत बड़ा सौभाग्य है। आइये का स्वागत करते हैं। राम चंदमंदहरेकृषणमहामंत्रा, हरे, कृष्णा, कृष्णा, कृष्णा, हरे, हरे, हरे, राम, हरे राह। मैं महाराज से करूँगा महाराज को प्रेरणादायक शब्द बोलेंगे। उसके बाद स्वामी की इंटरोडक्शन देंगे तो परम, राजना सभी महाराज। अमेरिका में उनका जन्म हुआ और 19, 22 में अमेरिका छोड़कर भारत की ओर निकल चले। सत्य की कोच में भगवान के कोच में से उन्होंने 1 जर्नी होम करके 1 किताब लिखा है, जो बहुत अडवेंचरस किताबी है। साथ साथ उसमे वो आध्यात्मिक किताब भी है। अलग अलग अनेक गुरुओं को मिला उन्होंने अनेक संस्थाओं में गए। उनका अनुभव इत्यादि लिखा है। लेकिन अंत में भारत में आकर जब वृंदावन में वृंदावन का वास प्राप्त हुई। इनको उधर के भक्तों को देख कर उधर की भूमि, वृंदावन की भूमि, वृंदावन की भक्ति, उससे प्रेरणा लेकर उधर ही रखने की योजना की उन्होंने। उस समय प्रपा जी और प्रोप जी के शिक्षा के साथ मुलाकात हुई। उसके बाद नाइनटीन सेवेंटी वन में उधर। मुंबई में 1 क्रॉस मैदान फेस्टिवल हो रहा था। मुंबई में बहुत बड़ी मात्र में लोग आये थे, 20 हजार लोग रोज जाते थे, 10 दिन के लिए है और प्रपा जी 10 दिन प्रक्षण दिया और उसमें परम्परा महाराज कुछ समय योगी थे उनके। बहुत लम्बे बाल लंबे। जारी प्रॉपर जी ने उनको देख कर में उनको बुलाया कर बैठने के लिए बोला अच्छा 10 दिन अपने पास बिठा लिया उन्होंने। पुरातन करके। उसके बाद वापस चले गये और इस तरह पर उसके बाद नाइनटीन सेवेंटी थ्री में प्रॉपर जी से दीक्षा ली। उन्होंने। प्रोपज ने बोला तुमको वृंदावन बहुत प्रिय है। लेकिन मेरी इच्छा है कि तुम अमेरिका में कुछ खास काम तुमको करना है। इसलिए न्यू वृंदावन में तुमको बेचता हूँ। ऐसे न्यू ब्रन्दावन में भेजा उनको सेवेंटी थ्री सी सेवंटी नाइन तक वो पुजारी की सेवा करते रहे। उन दिनों में हार्न बजाते हुए रात भर उनको हरिनाम संकीर्तन करने की सेवा दी गई थी। दिन में पूजा आराधना करते थे। महाराज जी बोलते थे, उनकी पढाई भी हुआ। प्रबल की किताब दूध दूध, दुहते हुए साथ साथ पढ़ते थे। प्रवास की किताब अनेक तपस्या की है। उसके बाद महाराज जी को कॉलेज के प्रचार में सेवा दी गई। उधर अनेक कॉलेज में प्रचार की आगे जाकर नाइनटीन आइटी सिक्स। उसमें संन्यास लेकर महाराज जी को भारत भेजा गया तो भारत आने के बाद मुंबई में आने के बाद श्री श्री राधा गोपीनाथ मंदिर के ग्रांट रोड डाउन में उसी महाराज जी की खास प्रेरणा है। कम्युनिटी, बिल्डिंग, डिवोटी, कैर, अनम, तो, तूम, ट्रेनिंग, एन, एजुकेशन ऑफ डिवोटीज, अन, कैरिंग, फॉर डिवोटी। ये महाराज के लिए खास जरिया है। भक्तों का ख्याल रखना और बच्चों से लेकर अंतिम सांस लेने तक, हर 1 को कृष्ण और भगवान कृष्ण के भक्तों की सान्यदिताऔर, उनके संग प्राप्त होना चाहिए और उनकी देखभाल सही ढंग से होना चाहिए। महाराज की ये सोच है, यह उनके विजन है। तो उधर से उन्होंने डेवलप करके गोपा स्कूल डवलप की भक्ति हॉस्पिटल के भक्तों के लिए खास कर चालू किया गया है। इसे और अनेक कम्युनिटी प्रोजेक्ट्स महाराज कर रहे हैं। जैसे गोबर को ले करके प्रोपर के स्वप्न की 7 मंदिर, 7 पहाड़ों के ऊपर बनाया जाए न्यू वृंदावन में। लेकिन वो उतना बड़ा प्रोजेक्त कोई कर नहीं पाया। लेकिन उसी प्रोजेक्ट को लेकर महाराज जी उस मैप को लेकर गोवरदनकोलेजमें डेवलप किए उन्होंने। इस तरह पुना में जब महाराज ने भक्तों को भेजा जाना, माताजी जय देव प्रभु, सत्त्य माताजी और माता जी। इस तरह अनेक लोगों ने चालू की प्रोग्राम पहले, उसके बाद ब्रह्माचारी कुछ लोग आये। तो इस तरह महाराज की प्रेरणा से अनेक तरह के प्रचार का कार्यक्रम चालू हुई है। और डेवलप हुए पुन और महाराज जिस तरह आजकल कुछ समय अमेरिका में, कुछ समय भारत में और टाली में इस तरह बताते है प्रवास करते हैं और हर साल बड़े यात्रा निकालते है कार्तिक महीने में जैसे 5010 हजार भक्तों को लेके जाकर महाराज के खास प्रेरणा है कम्युनिटी बिल्डिंग। तो इस तरह पुन मंदिर की बड़ा सौभाग है की हमें ये 2 महात्मा पुरुषों के आश्चर्य हम लोगों को प्राप्त हुआ है। प्रॉपर जी बोला करते थे की इस कान मेरा शरीर है और इस कान की जो लक्ष्मी है शरीर में खून है और शरीर में हृदय क्या है। बी बी टी है बुक
बुक ट्रेस
को सौंपा दिया गोपाल कृष्ण महाराज को, इस हार तो गोपाल कृष्ण महाराज गोपक शो महाराज इस बी पी टी को डेवलप करके सारी दुनिया में अभी 60 करोड़ से भी ज्यादा किताबें वितरण हुए है। उसमें महाराज जी का बहुत बड़ा हाथ
है
और उसी किताब को पढ़ कर हम लोग आध्यात्मिक जीवन चालू करते हैं और उस हृदय को पोषण भी चाहिए तो उस पोषण के ऊपर जोर देने वाले होते हैं। solnasradnatsamy mharाghenariss the hard with krisnakataandkrishna lila, krishna kirtan, that is his hard, so we got to best leaders for puning and staying under the sad of the lotus feet of this टू ग्रेड सोल्स pnascomunityहas ben booming शिंग सैंडिंग many places in india and a br। पहले गोप महाराज बोलेंगे, उसके बाद हम महाराज को करते है साथ साथ आज इसी बड़े सभा में अनेक महात्मा लोग हुए है इस निरंजन स्वामी है इस तरह आप लोगों ने देखा है जो भी लोग 1 हफ्ते के लिए आये थे उनमें से कुछ लोग कह रहे हैं आज भी कृष्ण स्वामी महाराज हैं और जिनका नाम is as baktiपुरsतamarाg ही ट्राइ, फ्लाई बैक तो बॉम्बे। तो इन सबको भी हम स्वागत करते हैं। हरी बोल
लीजिंग थोड़ी खराब है और का की मैं थोड़ी देर बोलूंगा राधेश्याम
थोड़े समय महाराज की तबियत और गला गले की वजह से वो थोड़ी देर बोलेंगे और उसके बाद ब्रह्म पूजा राधानाथ सवाई महाराज बोलेंगे है कृष्णा
आवाज बहुत हल्की है तो इसलिए बोलूंगा ठीक है,
महाराज करे उनकी आवाज हल्की है इसलिए जो वो बोलेंगे उसको रिपीट किया जायेगा। ओम नमो भगवते वासुदेव, नमो भगवते वासुदेवाय, ओम नमो भगवते वा।
सुदेव आया है जैसा आप जानते हो शुभ अवसर है। आज क्या है कार्तिक महीने का पहला
दिन, आप जैसे जानते हो, आज बहुत ही शुभ अवसर है। आज कार्तिक महीने का पहला दिवस है
और कार्तिक के महीने में भक्तों का भाव होता है।
वह भक्ति बढ़ाये और कार्तिक महीने में भक्तों का भाव होता है कि वो भक्ति बढ़ाए।
कार्तिक के महीने में हमें प्रयास करना चाहिए की हम श्रम के जनम बढ़ाये।
कार्तिक के महीने में हमें प्रयास करना चाहिए की हम श्रवण कृत्रम में लगे।
कहा जाता है कि 12 महीनों में कार्तिक महीना सबसे उत्तम है।
ऐसा कहा जाता है कि 12 महीनों में यह कार्तिक महीना सबसे उत्तम है
और महीने में थोड़ी भी सेवा करोगे।
मिलेगा और कार्तिक महीने में आप थोड़ी भी सेवा करोगे तो उसका हजार गुना लाभ। मिलेगा।
कार्तिक महीने में कई दिव्य लिलाये हुई है, भगवान ने भक्तों भक्त की और
कार्तिक महीने में भगवान की और उनके भक्तों की कई दिव्य लिलाएं हुई है।
कार्तिक महीने में दिवाली मनाते हैं, जैसे
कार्तिक महीने में दिवाली मनाते हैं, हमारे
गुरु और प्रकट हो गए कार्तिक के
महीने में और उनके गुरु महाराज ने शिलप्रवपाजजी अप्रकट हुए, वो भी कार्तिक के
महीने में, कार्ति के महीने में थोड़ी भी भक्ति करो, उसका लाभ है।
कार्तिक के महीने में थोड़ी भी भक्ति
करेंगे तो उसका लाभ है, वैश्य भक्त हैं, वो प्रयास करते है की कार्तिक के महीने में हम
बढ़ा जो वैष्णव भक्त है, वो प्रयास करते हैं कि कार्तिक के महीने में हम हमारा चैंटिंग
और हेरिंग बढ़ाये, हमें यह नहीं सोचना चाहिए, 16 माला मैक्सिमम, हमे ये नहीं
सोचना चाहिए कि 16 माला मैक्सिमम है।
बाबाजी ने जब संस्था की स्थापना की, उन्होने का न्यू यॉर्क में चौसठ माला करोड़ दिन है।
जब भक्तजन सरल ठाकुर ने संस्था की स्थापना की तो उन्होंने 64 माला जप करने का विदान दिया था, भक्त हुए
है, उस समय केवल अमेरिकन भक्त है, उस समय केवल अमेरिकन भक्त थे, उस
समय केवल अमेरिकन भक्त थे। तो उन्होंने कहा कि स्वामी जी ये बहुत मुश्किल है।
पापा ने कहा 20 माला करो।
तो प्रवुपाशजी ने कहा कि 64 नहीं तो फिर 32 माला करो।
उन्होंने कहा यह कठिन है?
तो उन्होंने कहा कि यह भी कठिन है। तो प्रवुपाशजी ने कहा कि सिक्स्टीन और
9 ले जो कार्ती के महीने में कई भगत प्रयास करते हैं, चौसठ माला करना 32 माला, 16 से अधिक।
तो कार्तिक महीने में कई भक् तो प्रयास करते हैं कि 64 माला करे या 32 माला करे, लेकिन 16 से आगे करे।
कार्ती के महीने में सेवा भी हजारों
ै और कार्तिक महीने में जो भी सेवा करेंगे उसका हजार गुना लाभ है
भगवान लीला, कार्तिक महीने में हुई, भगवान
की, दामोदर लीला भी कार्तिक के महीने
में हुई थी, दाम लीला हुई, दिवाली के दिन,
दामोदर लीला, ये दिवाली के दिन हुई थी,
शीला भक्तों प्रिय है
और दामोदर लीला भक्तों के लिए बड़ी प्रिय है।
शोध मासा, खूब बकाला कम्पलेन, शो मासा, यशोदा माता को कई लोग ने कम्प्लेन
किया, यशोदा माता को गोपियों ने कम्प्लेन
किया कि आपका बेटा हमारे घर में आता है
कि आपका बेटा ने के लिए, आपका बेटा हमारे घर में आता है। माखन चुराने के लिए।
माता ने कहा बेटा तुम्हारे घर क्यों आये, हमारे पास 9 लाख गाय है।
तो यशोदा माता ने कहा की मेरा बेटा आपके घर क्यूँ आये, हमारे पास 9 लाख गाय है,
व्यक्ति की सम्पति थी गाय और खेती।
तो उस समय व्यक्ति की संपत्ति हुआ करती थी, गाय और खेती ना अंदाजा
लगाओ 9 लाख,
जरा अंदाजा लगाइए 9
लाख गाय है उन 20 गायें थी जिनके फ्लेवर्ड दूध देती थी तो उनमे
से 20 गाय थी जिनका दूध सुगंधित हुआ करता था, फ्लेवर हुआ करता जैसे जैसे आप वनीला डालते हो आपके तो उसी प्रकार से वो 20 गाय जो थी उनसे फ्लेवर दूध मिलता था,
भगवान शरारती थे, भगवान शरारती थे
और भगवान और भगवान बड़े शरारती थे।
सो मन में पिया मन चुराता है भगवान का चोर।
तो ये श्रोता माता के पास अनेक कम्पलेंट आती थी कि आपका बेटा जो है, माखन चुराता है भगवान अनेक नामों में 1 नाम है, माखन चोर आप
कभी आपको कोई चोर बुलाए तो आप
सह लोगे, तो आपको कोई चोर बुलाए तो आप सह लोगे
बड़ा आनंद लेते
है तो आपको बड़ा गुस्सा आएगा, लेकिन भगवान को अगर माखन चोर बुलाते है तो भगवान को बड़ा आनंद आता है।
तो
इस प्रकार यशोदा माता नहीं दही दही मत दीदी। तो उनका भाव था कि ये जो है मन में, मेरे बेटे को खिलाऊं
भगवान प्रयास किया बांधने के लिए, तो
ये श्रोता माता ने प्रयास किया भगवान
को बांधने के लिए माता भगवान को ही सजा देना चाहती।
श्रोता माता भगवान को अच्छी शिक्षा दिलाना
चाहती थी और शोध माता ने सोचा मरना तो नहीं है बाँध लेते है।
तो यशोदा माता ने सोचा कि इसको मारना ठीक नहीं है लेकिन इसको बांध
के रखते हैं तो वो घर नहीं छोड़ दे, मालूम तो घर नहीं छोड़ दे।
तो उनको डर था कि अगर मैं इनको मारुंगी तो घर न छोड़ दे
भगवान।
तो उन्होंने रस्सी ली और रस्सी से प्रयास किया भगवान को बांधने के लिए उखल के 1 उखल के साथ भगवान को बाँधने की चेष्टा थी
बड़ा प्रयास किया माता ने हमेशा,
तो माता ने बड़ा प्रयास किया लेकिन हमेशा वो डोरी जो हुआ करती थी वो 2 ऊँगली
छोटी हुआ करती, 1 दूरी सी 2357 दूरिया थी सबको
दिया पहले 1 डोरी से बांधने का प्रयास किया लेकिन वो 2 ऊँगली छोटी हुई तो फिर 234-5678 शहर में जितनी भी डोरिया थी उसको जोड़ को बांधने का प्रयास किया तो फिर भी वो 2 ऊँगली छोटी हुआ करती थी।
तो भगवान ने देखा ये मेरी माँ जो है उसके ऊपर बाकी गोपिया हँस ही है देखो यशोदा माता में इतनी शक्ति नहीं है के लिए।
तो भगवान ने देखा कि बाकी गोपियाँ जो है मेरे माँ पर हँस रही है और कह रही है कि देखो यशोदा माता में इतनी भी शक्ति नहीं है कि वो अपने बेटे को बांध सके बांध लो तो भगवान ने स्वीकार किया और कहा कि आप बांध लो
मुझे दाम लीला के गुनगान करते है
ये संक्षेप में दामोदर लीला थी और जो वैष्णव भक्त है उनके लिए ये बड़ी महत्वपूर्ण और प्रिय लीला है।
हे में 1 मंदिर था जिसमें 1
चूहा था कार्तिक के महीने में 1 मंदिर था जिसमें 1 चूहा था
क्या ज्यादा मंदिर चखने के लिए, तो चूहा
जो है वो मंदिर जाता था भगवान के गर्भ गृह में घी चाटने के लिए दिए का इसकी आदत थी उसकी आदत थी
ये जुआ ने देखा की 1 में थोड़ी सी बत्ती जल रही है कोने मंदिर के कोने में, तो
चोर ने देखा कि 1 बत्ती में घी है और उसकी जो बत्ती है वो बड़ी धीमी जल रही है।
उसने सोचा
तो उसने सोचा की मैं जाकर उस घी को चक हूँ, उसकी
रूई जो थी
जो मूंज जो थी रुई वो वो रुई जो थी वो दांत में चिपक गयी, प्रयास किया
हटाने
के लिए तो उसने प्रयास किया कि वो रुई को हटा सके हटाने के लिए प्रयास किया
प्रयास कर रहा था
तो वो जल्दे जल्ते रूई लगी थी और वो प्रयास कर रहा था निकालने के लिए, लेकिन वो जैसे भगवान को दिया ऑफर कर रहा था उस प्रकार
से भगवान ज्यादा भगवान का दर्शन दे सके प्रयास किया आप को निकालने के लिए उस बड़बड़ा दिया था जिसके द्वारा लोग भगवान का दर्शन ले सके।
तो वो प्रयास कर रहा था की रूई जो फंसी उससे निकाले लेकिन वो धस गयी थी जो जल रही थी उसके प्रकाश से लोगों को भगवान का दर्शन लेने में सहायता हुई है।
और सेवा मुक्ति प्राप्त हुई और इस
तुच्छ सेवा के लिए उसे मुक्ति प्राप्त हुई।
यह कथा पद्म पुराण में है।
तो ये कथा जो है पदम पुराण में है और ये कार्तिक के महीने में घटी थी।
तो आज के प्रो का मूल सन्देश क्या है? कौन बताएगा?
तो आज के इस पर्व का मूल सन्देश क्या है? कौन बताएगा?
आज का विषय क्या है?
आज का विषय क्या है?
आज का विषय है,
आज का विषय है ग्रंथों का वितरण, ग्रंथों का वितरण।
आप जैसे जानते हो पापा जी ने वो ही बल दिया है इस सेवा
के ऊपर, तो जैसे आप जानते हो की प्रौपाजी ने बहुत बल दिया है इस सेवा के ऊपर, मैं अक्सर भक्तों
को कहता हूँ की सबसे पहले बुक डिस्ट्रीब्यूटर से ठाकुर विनोद।
तो मैं भक्तों को हमेशा कहता हूँ की सबसे पहले बुक डिस्ट्रीब्यूटर जो थे वो थे ठाकुर भक्त विनोद
पहले प्रिंटिंग हुई थी, छाप नहीं सकते थे।
तो ठाकुर भक्त विनोद के पहले प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी नहीं थी तो वो छाप नहीं सकते थे ग्रंथों को,
ठाकुर 4 थे
ठाकुर भक्तिनों जो थे वो बड़े ही महान आचार्य थे और उन्होंने चेतन्य महाप्रभु की शुद्ध शिक्षा की स्थापना की, उन्होंने
ग्रंथ लिखा था चेतन महा प्रभु के
जीवन के ऊपर, तो उन्होंने 1 ग्रंथ लिखा था चेतन महाप्रभु जी के जीवन
के ऊपर और उन्होंने विश्व के अनेक प्रसिद्ध में 11 कॉपी भेजी और उन्होंने
विश्व के अनेक प्रसिद्ध महाविद्यालयों में और पाठशालाओं में उसकी 11 कॉपी भेजी थी
मुझे यह कैसे पता मॉन्ट्रियल कनाडा में
मैकगिल यूनिवर्सिटी है मोंट्रियल कैनाडा में मैगिल
यूनिवर्सिटी और मैगिल यूनिवर्सिटी की लाइबरेमेंप्रापाजी का 1 शिष्य रिसर्च कर रहा था मैगिल
यूनिवर्सिटी के लाइबरी में प्रापा जी के 1 शिष्य जो हैं वो रिसर्च कर रहे थे ओह, तो वो
देख रहा था क्या किताबें हैं लाइबरेरी में, तो
वो देख रहे थे की लाइब्रेरी में क्या क्या किताबें हैं और
वहाँ उसको
पुस्तक मिली और वहाँ उनको वक्त ठाकुर की ये पुस्तक मिली अंदाजा लगाओ, एई
टीन नाइनटी नाइनटीन नाइनटीन सिस्ट से तक,
तो अंदाजा लगाइए एटीन नाइन टी सिक्स में प्रोप जी प्रकट हुए थे, और वो किताब नाइनटीन सिक्टी सेवन तक उस लाइब्रेरी में पड़ी थी ये जो किताब
है भारत से पोस्ट पता किस रूप से भेजा वो भेजा था एटीन नाइंटी
सिक्स में, तो ये किताब जो है भारत ऐसे पोस्ट से या फिर किस तरीके से भेजा था पता नहीं लेकिन वो एटीन नाइंटी सिक्स में भेजी थी,
सौरी ठाकुर ने मैगी यूनिवर्सिट को भेजा
था ये किताब, तो भक्तिन ठाकुर ने मैगी यूनिवर्सिटी भेजी थी ये किताब इससे
अंदाजा लगा सकते हो की किताबों का
कितना प्रभाव है तो इससे अंदाजा लगा सकते है की किताबों का कितना प्रभाव
है तो भक्ति के परम गुरु थे, उन्होंने भी इस सेवा पर बल दिया।
तो भक्ति सिद्धांत है सर्वत ठाकुर जो की प्रोप के परम गुरु है, प्रोप जी के गुरु महाराज है, उन्होंने भी
इसके ऊपर बल दिया में अनेक लोग हैं जिनके द्वारा कुछ की सेवा महिमा बताते हैं।
तो शास्त्रों में ऐसे अनेक श्लोक हैं जिनके द्वारा प्रचार की महिमा को उजागर किया गया है। उसकी महिमा पता चलती है।
4 की सेवा को बहुत बल दिया।
क्षेत्र महापूजन प्रचार की सेवा पर बहुत बड़ा बल दिया है।
क्या कहा उन्होंने सह को उपदेश, उन्होंने
कहा जारे देखो तारे कहो कृष्ण उपदेश,
कृष्ण का उपदेश 2 आप जिससे भी
मिली है उसको कृष्ण का उपदेश 2
तो कृष्ण का उपदेश का अर्थ क्या है?
तो कृष्ण उपदेश का अर्थ क्या है?
गीता भागवत का सन्देश, गीता भागवत का सन्देश। तो भगवान गीता के वे कहते हैं सब भक्तों में सबसे प्रिय कौन है? जो मेरा प्रचार करता है।
तो भगवान गीता के अठारहवें अध्याय में कहते हैं कि सब भक्तों में सबसे प्रिय कौन है?
जो मेरा प्रचार करता है, हर भक्त प्रयास करता है।
तो हर वक्त प्रयास करता है कि की हम कोई प्रसिद्ध व्यक्ति के प्रिय बने है।
तो भगवान कहते है वो है जो की प्रचार करता है।
तो भगवान कहते हैं की सब भक्तों में वो प्रिय है जो की प्रचार करता है
को कहा भगवान को प्रसन्न करना चाहते हो कर दिया है।
तो भागवत के चौथे सिकंदर में नारद मुनी जी ने प्रचेता कहा की दया सर्वभूतेशु संतुष्ट या न केनवा अगर आप भगवान को प्रसन्न करना चाहते हो तो आपको प्रचार करना चाहिए।
दया दया की भावना होनी चाहिए, दया
दया की भावना होनी चाहिए।
यह बहुत आवश्यक है, यह बहुत आवश्यक है। वैष्णव भक्त हैं वो इसके ऊपर बहुत आदर देता है।
जो वैष्णव भक्त है वो इसके ऊपर बहुत ज्यादा बल देते हैं।
हमें दया की प्रयास चाहिए।
तो दया की भावना हमें विकसित करने के लिए प्रयास करना चाहिए।
तो भगवान को पीड़ा देव भी कहते हैं दया की भावना।
तो कपिल मुनि भी कहते हैं कि जो भक्त हैं उनका 1 लक्षण है उनमें दया की भावना हो।
ठाकुर ने इस सेवा को बहुत बहुत बल दिया।
तो भक्तजन ठाकुर जी ने भी इस सेवा पर बहुत बड़ा बल दिया। उन्होंने प्रिंटिंग प्रेस खोली, उन्होंने प्रिंटिंग प्रेस खोली और
जाते थे के लिए होते है।
तो जब उनके भक्त जाते थे कलकत्ता में ग्रंथों को बाटने के लिए, तो बक्से अंसर ठाकुर बड़े प्रसन्न होते थे।
1 बाबा जी के साथ थे, पर भक्ति से दादा जी के साथ थे। राजा कुल में 1935 में
तो प्रवपजजीबकसेनस ठाकुर के साथ, राधा कुंड में 1935 में
दादा जी 1 बड़ी यात्रा को लाये थे। ब्रज में दादा जी बड़ी यात्रा को लेकर आये थे।
तो उस समय बक्सेयंशजीबड़ी यात्रा को लेकर आये थे।
राधा कुंड में जो भी दादा जी ने 1 मृदंग की तस्वीर बनाई तो
बक्से सदी ठाकुर ने 1 मृदंग की तस्वीर बनाई
कुछ दे सुविधा दे को अनुवाद करो प्रकाशित करो।
तो उन्होंने कहा कि अगर आपको भगवान सुविधा दे तो ग्रंथों को प्रकाशित करो और उसको वितरित करो सबकी सिधांत।
1922 में पापा जी के 1 मित्र थे इसने कहा चलो यहाँ 1 बड़ा प्रसिद्ध संन्यासी है।
तो 1922 में प्रोप जी के 1 मित्र थे, उन्होंने प्रोप जी से कहा की चलो यहाँ पर 1 बहुत प्रसिद्ध
संन्यासी आये है, पापा अनेक संतो को मिल चुके थे।
तो प्रोप अनेक संतों को मिल चुके
थे, उनके े हर प्रकार के साधु की देखभाल करते थे, तो उनके पिता
गौर मोहन डे हर प्रकार के साधु की देखभाल करते थे।
और परिचय हुआ था अनेक संतों के
साथ, तो प्रपा जी का अनेक संतों के साथ परिचय हुआ था, किसी से
प्रभावित नहीं हुए, लेकिन प्रपात किसी से
भी प्रभावित नहीं हुए।
साधु है म, पा जी ने कहा बहुत साधुओं को मिला हूँ।
तो जब उनके मित्र ने कहा कि 1 साधु आये हैं, चलो मिल लो, तो प्रोपज ने कहा की मैं बहुत साधुओं से मिल चूका हूँ,
चाहता तुम्हें
मिलना नहीं चाहता हूँ,
बोला फिर से प्रॉपर जी मिले भक्त।
तो उनके जो मित्र थे उन्होंने बड़ा आग्रह किया। तो फिर प्रोपज मिले भक्ष्य ठाकुर से
उस पहली मुलाकात में भी जी समझ गए। ये है वो युवक जो की हवा के सन्देश को, संदेश को।
तो पहली मुलाकात में प्रोपाजी समझ गए कि ये है वो युवक जो चेतन महाप्रभु के संदेश को सम्पूर्ण पृथ्वी पर प्रचार करेगा पर
रहता है।
तो प्रपात जी के हृदय में सदा ये भाव रहता था कि मैं मेरे गुरुमाराज जी के आदेश का पालन करूँ।
पापा जी कहते थे गुरु को कहते है स्ट्रक सदा गुरु के आदेश का पालन करने का प्रयास किया।
तो प्रोप जी ने भागवत का पहला स्कन्द जो है अपने गुरु महाराज को समर्पित किया है और उन्होंने सदा अपने गुरु के आदेश का पालन करने का प्रयास किया है।
जैसे
तू जैसे स्कोर संस्था, जैसे इस्कॉन संस्था बढ़ रही है, वैसे पुस्तक वितरण
भी बढ़ रहा, जैसे संस्था थी।
तो जैसे ही इस्कॉन संस्था बढ़ती गई वैसे ग्रंथों का वितरण भी बढ़ता गया,
क्यूकी किया
क्यूंकि प्रोपाजी को उनके गुरु महाराज का ये आदेश था।
तो पापा जी विदेशों में जाने से पहले भी उन्होंने ग्रंथों का आम कर दिया था।
तो प्रोपाजी विदेश जाने से पहले उन्होंने ग्रंथों का अनुवाद जो है वो प्रारंभ किया था।
प्रापा जी रहते थे, राधा में, आते थे अपनी किताबों को,
तो प्रोप जी राधा दामोदर मंदिर, वृंदावन में रहते थे, पर दिल्ली आते थे अपने किताबों को छापने के लिए और वितरित करने के लिए। तो प्रोप जी फिर आ गए छिपी वाड़ा में, जहाँ पर वो रहते थे,
आज उसका सुन्दर मंदिर है, उस साल
में, आज इस कौन का 1 बहुत ही सुन्दर मंदिर है, उस स्थान पर
कोई धन नहीं था, डा लेते थे, क्लास में आते थे, साइकिल पहुँचते थे।
तो प्रोपर जी तांगे से आते थे, वृंदावन से मथुरा और मथुरा से दिल्ली ट्रेन के थर्ड क्लास डिब्बे में प्रवास करते थे, और दिल्ली आकर अपने स्थान पर पहुँचते थे और
के लिए।
तो दिल्ली में, दिल्ली में प्रोपाजी ने बहुत समय बिताया क्योंकि वो प्रथम स्कंध का अनुवाद करना चाहते थे और उसको छापना चाहते थे। 3 भागों में प्रकिप्रोपाजी ने फर्स्ट कैंडो जो है, भागवत 3 भागों में प्रकाशित।
किया इस।
तो उससे पहले प्रपा जी बैकटोगोर्डेड मैगजीन
छापते थे, वो बैक्टूगॉडेडआजकी बैक्टूगॉरडेड के लिए मान नहीं था, 1 टेबल था, वो
बैक्टोगॉडेडआजकी गोडे की तरह नहीं था लेकिन 1 सिम्पल पेपर हुआ करता उन्होंने लिखा में नो टाइम 1 लेख, उन्होंने लिखा था बैकटोगोर्डेड में जिसका शीर्षक था सौरी
नो टाइम बताया प्रोप कहते हैं मैं इस व्यक्ति को मिलने गया था और उसने स्वामी जी अब जानते है।
तो उस आर्टिकल में प्रोपर जी लिखते हैं कि मैं 1 बड़े प्रसिद्ध व्यक्ति को मिलने गया था। लेकिन उसने कहा कि स्वामी जी आप जानते हो मैं कितना व्यस्त हूँ आई हैव नो टाइम फॉर ऑल दीज थिंग।
अगले दिन उसका हार्ड हो गया और
अगले दिन उनको हार्ट अटैक हुआ। तो प्रपा जी ने ये आर्टिकल लिखा और उसको शिर्षक दिया सौरी नो टाइम में। तो प्रोपज इस प्रकार ऐसे इशूज पर लिखते थे।
तो पापा जी ने जब भारत से
गए थे तो प्रहपाजीजब भारत से निकाले जलदूत जहाज में तो अपने साथ भागवतम का प्रथम स्कंद लेकर गए, पापाजीने जहाज
में डिस्ट्रीब्यूशन किया तो प्रऊपाजी ने उस
जहाज पर भी बुक डिस्ट्रिब्यूशन किया। तो इस प्रकार रोपा जी के मन में सदा होता था की वो अपने गुरु के आदेश का पालन करे। रोपा जी पहले बैक टू गोर्डे छोटी पत्रिका छापते थे
मोटी किताब में छापो तो प्रोप जी का अनुवाद करो।
तो प्रोप जी को 1 व्यक्ति ने कहा कि आप ये छोटी छोटी पत्रिका को छापते हो आप बड़े ग्रंथों का अनुवाद करो और उसको
आप 400 रू।
तो प्रउप जी ने भागवत का अनुवाद करके उसका प्रचार शुरू किया।
तो you want to please बोडडू डिस्ट्रीब्यूट करना चाहते हो क्या करो?
तो प्रौपाजी ने हमेशा ये कहा है अगर आप मुझे प्रसन्न करना चाहते हो तो आप ग्रंथों का वितरण करो क्या कारण है? तो क्या कारण है कि प्रोप जी ने ग्रंथों की महिमा को इतना अधोरखित
किया क्यूँ की इन ग्रंथों में दिव्य ज्ञान जो की परम भगवान दे रहे है हमारे भलाई के लिए, क्यूँकि ये
ग्रंथों में दिव्य ज्ञान है जो कि परम भगवान दे रहे हैं हमारी भलाई के लिए।
आज के समाज में अनेक पुस्तक प्रकाशन हुआ, दुख बात है केवल भौतिक विषय
में तो आज के समाज में अनेक पुस्तकों का प्रकाशन हो रहा है। लेकिन ये बड़े दुख की बात है कि उसमें केवल इंद्र तृप्ति के विषय ही लिखते हैं।
सो प्रा जैसे स्कॉल बड़ा, कम्पन
बो तो जैसे ये इस्कॉन संस्था बढ़ती गई वैसे ये ग्रंथ वितरण भी बढ़ता गया। और फिर प्रपा जी ने 1 ट्रांस कॉम्पिटिशन का बीज बोया तो प्रपा जी कहते थे की डिस्टंस कॉम्पिटिशन विल लीव मेल आती थी।
सबसे पहले वो कहते थे
तो प्रपा जी को कभी भी कोई मेल आती थी तो सबसे पहले वो कहते थे कि
बाबा छुट्टिया देते थे जो पोस्ट
आई है तो उस समय ये ईमेल वगैरह नहीं था तो प्रोपर जी को जो भी कम्यनिकेशन होता था वो बाय पोस्ट आता था।
सबसे पहले वो कहते थे रीड बुक
कोल् तो जब भी कोई रिपोर्ट आता था तो सबसे पहले कहते थे कि रीड बुक डिस्ट्रीब्यूशन, कोर्स
की सेवा पर बहुत बल दिया।
प्रोपर जी ने ग्रंथों के वितरण की सेवा पर बहुत बल दिया।
हर भक्त को ज्ञान है, हर भक्त का, यह ज्ञान है,
इस काल में, हर भक्त के पास का है, ये ज्ञान है व ग्रंथों के वितरण के महिमा का।
तो आपका पूरा मंजर भारत में बड़ा कॉम्पिटिशन होता है?
मंदिरों के, तो भारत में कई मंदिरों के बीच में बड़ा कॉम्पिटिशन होता है,
मायापुर है बहुत बड़ी सेना के साथ
सौ से भी ज्यादा तो मायापुर है और अनेक ऐसे सौ से भी ज्यादा। मंदिरों के बीच में ये कॉम्पिटिशन होता
है, आपका पूरा मंदिर वो भी पहले 3 या 4 में आये।
तो आपका पूना मंदिर जो है ये पहले 3 या 4 में आता है,
मंदिर है, प्रयास करते है।
तो जो बड़े मंदिर है वो सब प्रयास करते हैं। जैसे बॉम्बे है, प्रयास करते हैं कि ग्रंथों को अधिक से अधिक बांटा जाए।
तो पिछले साल आपके मंदिर में प्रयास से 6 लाख महा बुक किया था।
तो पिछले साल जो है आपके मंदिर ने प्रयास करके 6 लाख महा बुक्स का वितरण किया था,
5 लाख
सो, उससे उसके पहले साल जो है 5 लाख महा बुक्स का वितरण हुआ,
ये साल का क्या कोटा करे।
तो मैं सब से पूछ रहा था कि ये साल का क्या, आपका टारगेट और कोटा हैं।
भक्त से पूछ रहे थे, क्या है?
तो मुझसे पूछ रहे थे भक्त की इस साल हमारे लिए क्या टारगेट है,
पिछले साल किया था उसे पिछले साल 5 लाख 1, 1 लाख से बढ़ा
रहे हो, हर साल तो पिछले साल 6 लाख किया, उससे पहले 5 लाख किया, आप हर साल 1 1 लाख से अपना टारगेट बढ़ा रहे हो।
तो उन्होंने कहा की 7 लाख होना चाहिए, सर तो
इस साल 7 लाख का टारगेट होना चाहिए।
हर साल समय चिंता में आ जाते हैं।
तो हर साल मरतन के समय भक्त जो है वो चिंता में आते हैं।
वो कहते हैं हम लोग सब व्यक्ति को मिल लिया, सब कंपनियों को मिल लिया साल को,
तो उनमे चिंता होती है की हम सब व्यक्तियों को मिला, हमारे जो की पहचान के हैं। हर को हर 1 को पुस्तक वितरण किया। इस साल किसको करे पर आप मानोगे
नहीं, भगवान कोई न कोई नया साधन
देते हैं, तो आप मानोगे नहीं, लेकिन भगवान कोई न कोई नया साधन दे देते हैं।
मैंने देखा है आज जो में बड़ा उत्साह है, आप फुल, टाइम, बह्चारी, दोनो मिलकर करते हैं, आपके पुना के भक्तों
में बड़ा उत्साह है, आपके ब्रह्मचारी भक्त और कांग्रिगेशन दोनों मिलकर बुक डिस्टीब्यूशन करते
हैं, ये लगभग भारत के हर मे हो रहे है, भारत के हर मंदिर में इसी प्रकार से बुक डिस्ट्रीब्यूशन हो रहा है।
और भारत के हर मंदिर में इसी प्रकार से बुक डिस्ट्रीब्यूशन हो रहा है।
और आपको प्रकार
आप जब प्रचार करते हो तो 3 प्रकार से इसे करना संभव है।
क्लास में जाओ, घर घर भा, घर जाकर निवेदन करो, इसका नाम शिक्षा को स्वीकार करो। तो हरिदास ने वहाँ प्रभु के आदेश का पालन किया, वो क्या सा अनुभव
तो चेतन महा प्रभु जो है वो हरिदास ठाकुर और नित्यानंद प्रभु को उपदेश दिए कि जाओ घर घर और कृष्ण की शिक्षा का प्रचार करो और नित्यानंद प्रभु। हरिदास ठाकुर ने उसका पालन किया।
1 साधु जी क्या है आपका आदेश?
तो 1 घर में गए तो उनका स्वागत हुआ और कहा गया कि आओ साधु जी क्या है आपका आदेश बताइए। तो वो कहते थे कि बोलो कृष्ण, भजो कृष्ण करो कृष्ण शिक्षा पर, कई
घरों में उन्होंने कहा क्यूँ हमारा टाइम वेस्ट कर रहे हो तो कई कोई
रुचि नहीं है, तो कई घरों में उनको उत्तर मिला कि क्यों हमारा समय बर्बाद कर रहे हो, हमें कोई रुचि नहीं है,
लोगों ने कहा हम जब आये थे तुम्हारे का दर्शन लेने के लिए
दिया, तो कई घरों में गए, तो लोगों ने कहा की हम जब आये थे महाप्रभु जी के संकीर्तन का दर्शन करने के लिए, तो आपने हमें रोका था, या तो महा गुरुजी ने श्रीवास आंगन में 1 साल तक नित्य कीर्तन किया,
और जब वो घर जाने थे, किसी ने कहा ये तो चोर है साधु के कपड़े, ये है देखने के लिए, हमारे घर में क्या है?
तो नित्यानंद प्रभु और हरिदास ठाकुर जब जाते थे तो कुछ लोग कहते थे की ये जरूर चोर है साधु के वेश में आये हमारे घर में देखने के लिए कि घर में क्या क्या
है, फिर रात को आयेंगे चोरी करने
के लिए, फिर रात को आयेंगे ये चोरी करने के लिए, वो से कहते
थे वो हरिदास और हँसते थे, ऐसा
कहते थे तो हरिदास और नित्यानंद हंसते
थे, तो इसी प्रकार हमारा भी अनुभव
है, तो इसी प्रकार हमारा भी अनुभव
है, कई में आ जाओगे लोकेंगे ओह थैंक यू गए
तो कई स्थानों पर जाओगे तो लोग कहेंगे बहुत बहुत धन्यवाद आप आये नि ग्रंतों को देने के
लिए, कई घरो में आओगे लोकेंगे क्या है क्या?
तो कई घरों में जाओगे तो लोग कहेंगे कि आपको और कोई धंधा नहीं
है क्या हमारा टाइम वेस्ट कर रहे
हो, हमारा टाइम वेस्ट नहीं करो, कर रहे हो, वेस्ट कर रहे हो तो
हमे डिस्करेज नहीं होना चाहिए तो हमे
इससे डिस्करेज नहीं होना चाहिए, हम प्रचार
करते हैं शुभ एक्सपेक्टेड एक्सपेक्ट एनीथिंग प्रचार करते कुछ भी नतीजा प्राप्त हो सकता है।
तो जब आप प्रचार करते हो तो ये सबकी अपेक्षा करनी चाहिए कि लोग आपको इस प्रकार से दुत्कार दे तो
आपके द्वारा गीता लेंगे और कहीं नहीं
लेंगे, कहीं आपके द्वारा गीता लेंगे और कहीं नहीं लेंगे?
भगवान देखते है हमारे प्रयास को, भगवान
देखते, हमारे प्रयास को और
उत्साह बहुत
आवश्यक है और ग्रंथ वितरण के लिए
उत्साह बहुत आवश्यक है चाहे आप हो या हो, हमें उत्साहित होना चाहिए तो
आप ब्रह्मचारी हो या ग्रहस्त हो, हमें
उत्साह होना चाहिए ज्यादा सफलता प्राप्त नहीं हुई तो डिस्करेज नहीं होना चाहिए और
अगर सफलता प्राप्त नहीं हुई तो हमें डिस्करेज नहीं होना चाहिए।
1 समय बॉम्बे में 1 बड़ी दुकान है इंटरनेशनल बुक हाउस तो बॉम्बे में
1 नेशनल बुक हाउस करके 1 दुकान
है बुखार सो उसके मालिक हमारे मेम्बर
थे तो उसके मालिक आये थे हमारे मेम्बर से मालिक हमारे मेम्बर हैं सो
मैंने उनके द्वारा पापा जी के ग्रंथों
को बहुत डिस्प्ले किया तो मैंने उनके द्वारा प्रापा जी के ग्रंथों को डिस्प्ले
किया में और 1 महीने के बाद मैंने जाना किताबें नहीं बिकी तो काफी
सारा डिस्प्ले उनके दुकान में हो लेकिन 1 महीने के बाद देखा तो ज्यादा किताबें वितरित नहीं हुई थी मैं प्रापाजीकेपास
गया बोला वी हैड द बेस्ट डिस्प्ले एवरीथिंग मेरी बुक सोल तो मैं प्रोपाजी
के पास गया और मैंने कहा की हमारा बहुत अच्छा डिस्प्ले था लेकिन हमें
इतनी सफलता नहीं मिली कहा बोक्स सो
तो प्रोपाजी ने कहा की मेरे ग्रंतवितरित होते हैं मेरे भक्तों के उत्साह की वजह से
स्वामी कहते हैं तो हमें उत्साहित होना चाहिए जब हम इन ग्रंथों को
तो रूपों को स्वामी भी कहते हैं उत्साह निश्चय तो हमें उत्साही होना चाहिए जब हम इन ग्रंथों को बाटने
जाए असल में हमें उत्साहित होना चाहिए हर प्रकार की सेवा के लिए, तो
असल में हमें उत्साहित होना चाहिए हर प्रकार की सेवा के लिए, खास कर
के जब आप बुक में जाते हो आपको हमें उत्साहित होना चाहिए लेकिन खास
कर के जब आप बुक डिस्ट्रीब्यूशन पर जाते हो तो हमें विशेष रूप से उत्साहित होना चाहिए।
तो हमारा लक्ष्य है ग्रंथों को बात है समाज के उधार के लिए, तो
हमारा उद्देश्य यह होना चाहिए की हम ग्रंथों को बाट रहे हैं।
दूसरों के उद्धार के लिए स कितनी गिर गई है।
तो आज आप देखते हैं कि समाज की स्थिति कितनी गिर गई है। सब दुखी है, सब दुखी हैं महा
प्रभु की 1 वक्ती था दुखी दासी महाप्रभु के महा प्रभु के 1 भक्त से
दुखी दासी तो महाप्रभु के 1 भक्त थे जिनका नाम था दुखी दास,
क्या है तुम्हारा नाम दुखी दासी।
तो लोगों ने उनको पूछा की क्या है तुम्हारा नाम? तोउन्होंने कहा दुखी दासी,
दुखी दासी नहीं।
तो लोगों ने उनसे कहा कि दुखी दासी नहीं आज से आपका नाम है सुखी दासी।
सो ये है हमारा प्रयास दुखी, दास और दासियों को सूखी दास और दासी।
तो ये हमारा प्रयास है दुखी दास और दासियों को सुखी दास और दासियाँ
बनाना आप सब 1 समेत दुखी बात
दासी से आप भी 1 समय शायद दुखी दास और दासी थे।
आज आप सब बन गए हो
और आज आप बन गए हो सुखी दास और सुखी दासी।
लोगों की अज्ञानता को दूर करना हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य है तो लोगों की
अज्ञानता को दूर करना ये हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य।
पूना के भक्तों को, सब को जुड़ना चाहिए। इस मैराथन के प्रयास में, तो आप
पूना के भक्तों को, सब को जुड़ना चाहिए। इस मैराथन के प्रयास में
े 1 मनसब दिया डबल की पिछले साल जितने ग्रंत बाते हैं, ये साल उसका करो।
तो प्रोप जी ने अमेरिका में ये भक्तों को ये निर्देश दिया था कि डबल इसका अर्थ है कि पिछले साल जितने ग्रं बाटे है उससे दुगना इस
साल ग्रंतबाटोगरमे आपको कहूँ डबल का कोटा बन जाएगा 12 लाख।
तो अगर मैं आपको कहूँ की डबल ट तो आपका कोटा बन जायेगा 12 लाख।
तो इसलिए हम आपको मरे इनक्रीज बता रहे हैं नोमिनलइंक्रीज।
तो इतना तो हम आपके ऊपर नहीं करेंगे लेकिन हम आपको मार्जिनल इनक्रीज करने के लिए कह रहे हैं।
6 लाख की बजाय 7 लाख, 6
लाख के बजाय 7 लाख हो, सकेगा हो सकेगा
राधा स्वामी की कृपा हो
तो जरूर हो जाएगा राधा स्वामी महाराज की कृपा हो तो जरूर होगा
डिस्ट्रीब्यूटर
है वे भी बड़े बुक डिस्ट्रीब्यूटर है
सो e book distibutinmaraton 11 भक्त ने पूछा
तो ये बुक डिस्ट्रीब्यूशन मैरेथॉन 1 समय प्राजी को 1 भक्त ने प्रश्न पूछा की what इस द मीनिंग ऑफ़ maरaथoन मैरेथोन का अर्थ क्या है? तो प्रोपज ने उत्तर दिया लेस ईटिंग लेस स्लीपिंग एंड मोर प्रीचिंग जो
आज से कल से कल से पोस्ट नवम्बर
से शुरू होगा तो ये मैरेथोन जो है 1 नवंबर से शुरू होगा और
आप सब की सफलता के पीछे राजेश
बड़ा हाथ है तो आप सब की सफलता के पीछे राधेश्याम प्रभु जी का
बहुत बड़ा हाथ है स्वयम जाते हैं स्वयं जाते हैं भागवत के सेट्स को
बाटने के लिए, वे स्वयं जाते हैं भागवतम के सेट्स को बाटने के लिए
और महीने में कम से कम सारे भक्तों का भाव होता है यह योग
तो मैरेथोन के महीने में कम से कम भक्तों का भाव होता है कि
आलसी व भी उत्साहित हो जाते हैं
तो मेरे तौन के समय जो आलसी भक्त हैं वो भी उत्साहित हो जाते
हैं तो ये अध्यात में गुस्सा है बोधि वादों में भक्त का भाव है को सुखी बना माल क्या है
तो ये आध्यात्मिक उत्साह है और भक्तों का भाव होता है कि हम दुखी को सुखी बनाए और इसका माध्यम क्या है प्रपा जी के ग्रंथों का वितरण जैसे
कि लोग उनका 1 उनके प्रचार का बहुत गुस्सा रहता है वो 1 भाव ऐसा है कि हम लोग सब को
किशन बनाये तो जो ईसाई लोग होते हैं क्रिस्टन लोग होते उनका भाव होता है कि हम सबको इसाई बनाये क्रिस्टन
बनाये जो घर घर जाकर बाइबल दे
देते हैं तो वो घर घर जाकर बाइबल देते है तो
हम में भी
उत्साह होना चाहिए तो हम वैष्णवों में भी उत्साह होना चाहिए और ये सम्भव
है अगर आपकी साधना ठीक है और माला का जॉब कर रहे हो और
ये सम्भव है अगर आपकी साधना ठीक है और आप माला का जॉब कर
रहे हो तो आप सब से निवेदन है अपने हर साल मसान करते हो हमने प्रयास किया है यह साल भी
प्रयास कीजियेगा तो आप सब से निवेदन है कि आप हर साल मैराथॉन में पुस्तक वितरण का प्रयास करते हो तो इस साल भी प्रयास कीजिएगा मेरे खयाल
से आप 7 लाख से भी ज्यादा कर दोगे
तो मेरे ख्याल से आप 7 लाख से भी ज्यादा ग्रंथ वितरण करोगे लेकिन हम टारगेट के लिए 7 लाख जो है इसको मान कर चलते हैं
मायापुर।
तो इस साल मैरेथोन का कॉम्पिटिशन होगा? मायापुर और पूना के बीच में
दें
मायापुरी, दिल्ली और पूना के बीच में।
तो चाहे फोर्ट लास्ट आये। भाव होना चाहिए किताबों को बाते।
तो जो कुछ भी हम चाय लास्ट। हाय लेकिन हमारा भाव होना चाहिए कि हम किताब जो लोगों तक पहुँचा।
कई बार लोग कहते हैं आप फ्री की नहीं बाते। जैसे बाइबल बाटते है, लोग फ्री।
तो कई बार लोग ऐसा पूछते हैं कि आप इन किताबों को फ्री क्यों नहीं बांटते है। जैसे बाइबल को फ्री बांटा जाता है, पूछते हैं, पूछते हैं।
ऐसे लोग कहते है, देते है
ल।
तो हम कहते है की क्रिस्टियन लोगों को विदेशी लोग धन देते हैं बाइबल को छापने के लिए। अगर आप धन दोगे तो हम फ्री
बाटेंगे
और 4 लोग कर सकते हैं। यह साल तुम्हारा ग्रंथ बहुत महंगा है।
तो ऐसा 1 और शंका प्रकट हो सकती है कि ये ग्रंथ जो है ये बड़े बैंक हैं।
इतना भाव क्यों बढ़ गया, इतना भाव
क्यों बढ़ गया है?
तो क्या है? उपाय तो क्या है। इसका उत्तर बड़ा है की पेपर का भाव बहुत बढ़ गया है तो ये
बड़ा है क्योंकि बाजार में पेपर का भाव बहुत बढ़ गया है।
छपाई का, छपाई का भाव बढ़ गया। हम क्या करे?
तो आप क्या कर सकते हैं।
जो लोग मेरे पास है ऑलरेडी हैवी
बुक्स तो लोग और 1 ऐसा ऑब्जेक्शन आ सकता है कि लोग कहेंगे कि हमारे पास ये ग्रंथ हैं,
आइडिया दे सकते हो, आप इसे बाट सकते हो तो आप अपने रिश्तेदारों को,
तो आप उनसे कहिए कि आप इसको लीजिये और आप इसको बाट सकते हो अपने रिश्तेदारों को, मित्रों को दे सकते हैं।
मैंने देखा है की जो भक्त चिंता में होते है के भगवान यानी है कुछ न कुछ उपाय देते है।
तो मैंने ऐसा देखा है की जब भक्त चिंता में होते है की हम इसको कैसे वितरित करे तो भगवान कुछ न कुछ उपाय जरूर देते हैं।
सो बुक
बुक मन।
तो हम ये बुक मैरेथोन को 1
नवम्बर से प्रारंभ करेंगे और किसलिए कर रहे हैं।
मैराथोन किसलिए करते है तो ये मैरेथोन किसलिए करते है।
4 को करने के लिए, शील प्रपद
और आचार्यों को प्रसन्न करने के लिए
और परम भगवान श्री कृष्ण को और
परम भगवान श्री कृष्ण को प्रसन्न भगवान
ने लोगो में कहते हैं प्रचार करो
तो भगवान अनेक श्लोकों में कहते हैं कि प्रचार करो, प्रचार करो। ये है असली दया, ये है असली दया।
तो ये उम्मीद है की स्वामी की ऐसी जी के आशीर्वाद से सब प्रयास करोगे 7 लाख भी पॉसिबल।
तो मेरी अपेक्षा है की परम कृपा से और प्रोपाजीकी कृपा से, अगर आप सब प्रयास करोगे त 7 लाख एकदम सम्भव है।
हे कृष्ण हरे कृष्ण
गोपाल कृष्ण को महाराज की महाराज की कथा चालू हुई आज बीच में जब से ग्रंथ वितरण के बाद चालू हो गयी महाराज के आवाज भी बढ़ गया ने अच्छे अच्छे उदाहरण को दिया महाराज ने कैसे अलग अलग लोग बहाना बताते हैं उन लोगों के हाथ में कैसे ग्रंथों को पहुँचाना
है
और बहुत प्रेणादायक रहा। महाराज के सुन्दर प्रवचन मैंने सुना कुछ कुछ लोग पूछते हैं की अरे किताब वितरण करने से वक्त कैसे बनते हैं। लेकिन जैसे 11 बर्तन में अगर पानी रखते हैं, पानी ऐसे ही दिखता है। लेकिन उसके नीचे आग जलाओ धीरे धीरे बुद बुद निकालते हैं और तेजी से निकलते हैं। उसके बाद बुरा उबल जाता है। ब इस तरह जब भारत में भी किताब चालू हुए, इधर उधर लोगो को गीता मिलता था, अभी गीता और भागवत लाखों करोड़ो लोगो तक पहुँच गया। इसके कारण समाज में बड़ा क्रांति मचा दिया है इन किताबों ने। इस तरह देखेंगे जब मैं बाहर जाता हूँ, अनेक लोगों को तिलक के साथ देखता हूँ और हाथ में जप माला पकड़े है। इसी तरह उधर भी मेरा रोड मंदिर के निकट जायेंगे, अनेक लोगो को आप देखेंगे लोग को। इस तरह अगर हम लोग किताब करते जायेंगे, जब लोगो को पहुँच जाता है, किताब उधर पहुँच सकता है, हम लोग पहुँच नहीं सकते तो महाराज के सत्र बहुत प्रेरणा दायक रहा और महाराज ने टार्गेट क्रकेट दे दिया। 7 ला कर के हम लोग इसको याद रखे,
वे बोल रहे।
मगिलयूवस्टमें महाराज पढ़े जिधर बच्चों ने ठाकुर की किताब एटी नाइनटी सिक्स में पहुंच गया।
ये होय
हरे कृष्णा परंपरा से महाराज के लेक्चर हिंदी में अनुवाद एफ में आपको मिलेगा नंबर क्या है,
हरे क्रिश्ना
सो लेक्चर विल बी ट्रांसलेट इन हिंदी और वो 100 2 एफ एम चैनल पर उपलब्ध रहेगा।
हरे कृष्णा
सौरी फ्रीक्वेंसी चेंज्ड एईटी नाइनeपnvnओमज्ञान
मेरनदस्याज्ञानजना छल खाया चक्सुरुनमिलीधमजेना हसन स्त्री कुरबे नमहा नमा ओम विष्णु पदाया कृष्ण प्रिष्टा या भूतले श्रीमते भक्ति वेदना स्वामिन इठिनामिने नमस्ते सरस्वती देवे गौरवानी प्रचारि ने निरविशेष सुरवारी हस्ते सकारने बंशकलपतरुब्यस्चा kripa सिन्धु ब्यएबचापतिथानाम भाबनेब्यभषणवेबयो न मो नमहा श्री कृषण
तान्या
रभुनित्यानंडा श्रियदरशिभासको बंडा हरे कृष्ण हरि कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरि हरि हरि राम हरे राम राम राम हरी हरी am sincerlyonerd grateful and feel very les to be among the assemble do votes in the presence of is aldinesshitegopal krishna goswami merge i cannot properly express my grैटिटuड तो यou shilicopalkrishnago swamy marge has been inspiring us in incurgingusto fine cru happinusinto share to happiness through sharing site, propos compassion with the people of purna maharastra, india and the whole world through the distribution of shilepropasbox how is it that when he comes here every year to puna he invest in all of your hearts with the potency to perform merical of hundred and hundreds and thousands of books distributed he speaks with realization in the history of our movement, shila gopalkrishna goswami maharage has distributed the maximum number of book through his inspriation and miraculously through his compassion, whoever he a fec distributes more and more books every year so the gopalkrishna goswami maharage has built and opened more temples, then any one in the history of ormofnet and practically every temple is magnificent with driving congregations driving ashrams se le gopal krishna goswami and the history of our movement has distributed more place of krishna प्रसारण it is only possible, because he as intimately empowered by srilapropuds devine grace and that empowerment has coming because of his true love and surrender to please shilerproeais life is example is teach s what bagovagitar declares to be the most secret of all secrets to know krishna and to love krishna s the problem par the efforts the sacrifices that he maid to provide these books to us
is one of
the greatest jesters of love of guard this world has ever seen because chilagopaulcrishna goswami maarige has taken so seriously shrethepropus mission of compation hes given his entire life to share with the world his age, his health, how was it even possible for him to come here all the way to poona simply to request us to receive srileproperdmurcy by giving that mercy to others his sitting on this asana is thousands of times a greater sacrifice then all of us together going out every day and making sacrifices to distribute these books hes living and is willing to didate moment to show compassion to the fomin sols and give happiness to the people who are sugery not just happines, but the happiness of the
soul
in per devotional service krishna prema love for krishna i only request one thing and its my home message please the community of pune and all of the community of the devotees through out the world letusrecipricate was she le gopal krishna goswamis comparsion is mersianus by making this month a sacrificial offering of devotion to please him by to strip ting show the prowpasbupsmaratan she the brolpat i think chose that work आई डो नो but the word marathon indicates really struggling to reach agol agains talod untiring maharaj is an example of this i m a stund, because i have seen the community of guna over the decks
how
he has transform to you and am how red you from a little simple hot in the military area antantement whatever to becoming the largest center for book distribution in the world mharage were going a try our best to make you happy
happy
gods how we could make site profit happy by mercado happy
thank
you very much so a probe par cej and i think all of you in this wonderful community radisamtrabuand all of the devotees for creating the spiritual world eranpunahacris
तो सब मेहनत न करोगे टारगेट
हो जायेगा, 7 लाख का टार्गेट हो
जायेगा
ke
hare krishna is one raanatmargwassending me to punantheybackin nine in five the first meeting as about to come to pune maharaj was टेलिंग द his gopakgosamaharag is my senior gordbroterand is very close to shilpa and i have de respect for him and he said if you please him you will please me marge alvast contes gopaksommharag ल god vater and very respectable god vater as you heard from him just now how beautifully he glorified is on gopaksomaragand his contribution his sacorifisehis dedication and also he prtuatedallsalसो take a very active part in this maraton and then bring up record that gopasomargespeld out three times today, which is even lack book this year so, thank you very much mars is very cindupyouthat, you state back and after the meeting n botafyouseeing you together on the das and hearing from both of you are so necterianandso energy giving for allefustiamsure, everyone is getting a very great special, boost by both of you are divine present। thank you
i read it by swami is being in to some leading pesar of a moment and he is inspire lac people to come to krishna, and is very great petr so thank you in was hama, i dont deserve any, or that is
now we have is a son, who is heading of bibesiandepartment, and the last so many years, along with is time of a miamasudentalmost twenty others right twenty twenty m s department temple, we have a gas problem, very powerful tem, very well organised tem, so you would like to make some manan regarding the फoर्tcमिंgmarten to thousand and twenty थ्री, दिसम्बर नवम्बर, दिसम्बर हरे कृष्णा
जोर से बोले अरे करिश्णा, अरे हरे कृष्णा, कृष्णा कृष्णा, हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम अरे हरे हरे बहुत बहुत धन्यवाद सो हम ये प्रोग्राम इमेजिन भी नहीं कर सकते थे कि ऐसा कुछ होगा की जलने गोपाल कृष्णा स्वामी महाराज एंड जलने स्वामी महाराज दोनों साथ में इस साल का मैराथन का इनॉग्रेशन प्रोग्राम करेंगे तो हमारा यह परम सौभाग्य था के आज इस साल जी बी सी मीटिंग भी हुआ और इसके बाद इमीडिएटली ये बुक डिस्ट्रीब्यूशन का इनॉग्रेशन प्रोग्राम हुआ और ये कोई भी प्रोग्राम
हमें
पता नहीं था कल रात तक भी पता नहीं था आज भी पता नहीं था, आज दोपहर तक भी पता नहीं था और लास्ट मोमेंट में ये डिसाइड हो गया की आज दोनों ये जी बी सी यहाँ पर नागेश कर रहे हैं। पिछले 4 साल से हमने बुक डिसिशन किया था 4 साल से हमारा पूरा नंबर वन आया रहा था और इस साल 5 साल हमको करना है तो इन दोनो जी बी सी सी और सारे शिल्पा जी का विशेष कृपा हमारे इसलिए ग्रंथ वितरण करके हमने इन जी बी सी को करने के लिए प्रयास किए हैं और इस साल भी हम प्रयास करेंगे और हमारा हर साल का जैसे ही इस साल भी ऐसे ही प्राइस डिस्ट्रेशन रहेगा हम शिल्प रोपा जी का ऑन ट्वेंटी 8 जन्म दिन मना रहे हैं इसलिए जो भी भक्त ऑन ट्वेंटी 8 बगुद गीता डिस्ट्रिब्युशन करेंगे उनके लिए भी प्राइज रहेगा और फाइव हंड्रेड एंड वन थाउजेंड एंड फाइव थाउजेंड एंड टेन थाउजेंड जैसे लास्ट यर हम कर रहे थे वैसे ही प्राइज इस साल भी रहेगा और फिर से हम रिक्वेस्ट करते हैं बुक डिस्ट्य्ूशन करेंगे तो इसका प्राइज डिस्ट्रीब्यूशन के लिए इससे डबल बड़ा प्रोग्राम हम करेंगे हरी तो इस के लिए आप सब को प्रयास करना पड़ेगा ताकि आप सब को ऐसे ही दुबारा प्रोग्राम का 1 विशेष लाभ प्राप्त होगा। तो मैं कुछ भक्तों का नाम लेना चाहता हूँ क्योंकि इन भक्तों ने साल भर बुक रिश्यूशनकरते है जैसे मैराथन बुक रिश्यूशनहमलोग साल में 12 महीना करते हैं। लेकिन इस में ऐसी कुछ वक्त है। साल भर जैसे मैराथन में इनका कुछ नाम डिस्प्ले होगा। तो रोज इसको थोड़ा सा साइड में रखेंगे ये थोड़ा सा पीछे
थोड़ा सा
साइड में यहाँ पर पीछे पी पी टी दिखेगा। आपको इसमें मैं नाम लूंगा
नहीं करने
थोड़ा सा थोड़ा सा दिखना चाहिए। हमारे पास। ऐसे 3 बस हैं तो अलग अलग भक्त जाते हैं। स ग्रेस सचिनन्दन बगौनप्रबु हिस ग्रेस सुन्दर प्रभु इस ग्रेस कृष्ण लोक पर, सुन्दर विषम बर्प, बोला, सुन्दर विश्मबर्पसौरीइस ग्रेस, सुन्दर विशम बर्प, हिस ग्रेस कृष्ण लोक प्रभु इस ग्रेस भागवत कथा प्रभु इस ग्रेस मधु किरण प्रभु, ग्रेस गोविन प्रभु एंड इस ग्रेस सनक सनातन प्रभु हरि बोल। तो इसके बाद ये 1 छोटा सा प्रोग्राम हो रहा है तो यहाँ पर 1 शेर प्रभु यहाँ पर आये है। इसके इनका 1 प्रोग्राम इससे पहले छोटा सा में अनाउंसमेंट करता हूँ। जैसे लास्ट ईयर हमने पंडाल प्रोग्राम किया था तो इस साल लास्ट शॉर्ट नोटिस में ये हमने आयोजन किया है। तो इसके बारे में थोड़ा सा ये नेक्स्ट अनाउंसमेंट करूंगा। इससे पहले शे दिप्रव को में अनाउंसमेंट करने के लिए थोड़ा रिक्वेस्ट करता हूँ। थोड़ा
हरे कृष्णा हमारे पूर्णा मंदिर की अलग अलग खासियत है। जैसा की हम सबको पता है कि अपने आप में यह एन बी सी सी मंदिर पूणा का सेकेंड बिगेस्ट फुटबॉल वाला मंदिर बना है साथ साथ राधे श्याम प्रभु जो के माध्यम से प्रचार करते हैं। मंदिर में फूड फॉर लाइफ का फ्री प्रसाधन दिया जाता है। अन्ना मृत फाउंडेशन से 50 हजार बच्चों से खाना दिलाया जाता है। भक्तिविदांत रिसर्च सेंटर के माध्यम से अलग अलग कॉलेजेस में फॉर्मल एजुकेशन दिया जाता है। ऐसे विविध मार्ग से हम लोग संस्था में पूरे शहर में कृष्ण भावना का प्रचार कर रहे हैं। और वही उसी प्रकार का 1 साधन हमने अपना नया मंदिर बनाते समय अपनाया था, वो है सांस्कृतिक कार्यक्रम और 1 महा नाट्य। हम सबको पता है की इस मंदिर का निर्माण हो गया। तब हमने संभवानी युगे युगे और संत श्रेष्ठ तुकाराम महाराज के जीवन के ऊपर जऊदेवायगवाइस प्रकार के 2 महा नाट्य सादर किए थे। आज हम सबको पता है की परम पुंज लोकनाथ स्वामी महाराज पंडरपुर में 1 बहुत ही बड़ा 100 पचीस करोड़ रुपए का 1 भव्य निर्माण मंदिर करने जा रहा है। इस मंदिर को सपोर्ट देने के लिए हमारे मंदिर के अध्यक्ष श्रीमान राधेश्याम प्रभु इन्होंने कहा है कि क्यूंकि पंडरपुर जो है महाराष्ट्र का वृंदावन है, जिस प्रकार दिल्ली ने वृंदावन मंदिर को सपोर्ट किया है, कलकत्ता ने मायापुर मंदिर को सपोर्ट किया है उसी प्रकार पुना मुंबई ने पंडरपुर मंदिर को सपोर्ट करना है और हमारे मंदिर के अध्यक्ष श्रीमान राधे श्याम प्रभु। इनकी बहुत इच्छा है की हमें सब ने मिल कर पंडरपुर मंदिर को सपोर्ट करना है। इस मंदिरपर पंडरपुर मंदिर के सपोर्ट के लिए हम बहुत 2 सुन्दर महानाट्य वापिस लेकर आ रहे हैं। उसी में से 1 महा नाट्य श्री बाला जी भगवान के ऊपर होने जा रहा है। श्री बाला जी महानाट्य, श्री बाला जी महानाट्य। ये जो नाटक के बारे में थोड़ा मैं 2 मिनट में बताना चाहता हूँ की इसका स्टेज जो है। भारत के सबसे बड़े आज तक इतना बड़ा स्टेज, कौन सी भी ड्रामा के लिए नहीं किया। वन आई टी फाइव फुट का फीट का ये स्टेज है और 5 मंजिल ऊंचा सिक्स्टी फाइव टू सेवेंटी फीट ऊँचा उसकी हिट है और करीब करीब हंड्रेड फीट इसकी विरत है। इस प्रकार भव्य स्टेज के ऊपर हमारे सी सी, राधा, कुंज, बिहारी राधा, वृंदावन चन्द्र और विशाल नगर ये तीनों मंदिर के भक्त करीब। करीब ढाई सौ भक्त मिलाकर। ये सुन्दर ड्रामा प्रस्तुत करने जा रहा है। इस सुन्दर महानाटय का लेखन दर्शन जो किया है वो हमारे विश्व में हमारे 2 भक्त सुन्दर कनाई प्रभु और वृंदावन चन्द्र प्रभु। ये 2 भक्तों द्वारा उसका दिग्दर्शन किया गया है। यह महानाट्य हम सादर करेंगे। 8, 9, 10, 11 फरवरी को मंदिर के सामने ही 8 एकर लैंड है। इस लैंड के ऊपर हम ये महानाट्य प्रस्तुत करेंगे। 4 दिन के लिए महा नाट्य होगा। कोशिश करेंगे कि इस महानाट्य से 3 करोड़ रूपए की मतलब इकट्ठा हो और उसमे से 1 करोड़ रूपए हम पंदिरपुरमंदिर को डोनेशन देंगे सो। इस महानाट्य के सहवाग के लिए आप सब लोगों का सहयोग चाहिए। हमे उसका टिकट बिक्री भी करना है क्योंकि बड़ा टास्क है। लेकिन नाटक बहुत सुन्दर है। देवेंद्र फरदीजीऐसी मैंने बात की है, देवेंद्र फरदी, चंद्रकांत दादा पाटिल, ऐसे कई सारे लोग महाराष्ट्र के अलग अलग पक्ष के और अलग अलग नेता वहाँ आयेंगे। तिरुपति बालाजी मंदिर के ट्रस्टी यहाँ आयेंगे। कई सारे लोगो को हम यह उपस्थित कर रहे हैं। और साथ साथ हमारे परम पूज् गोपाल कृष्ण महाराज, परम पूज्य राधानाथ स्वामी महाराज गौरांग प्रभु और रेवती रमण प्रभु। हमारे राधे श्याम प्रभु भी उसमें है। इस प्रकार का महान सादर होगा। आज में ज्यादा समय नहीं लूंगा पर पुजगोपालकृगोस्वामी महाराज और परम राधानाथ स्वामी महाराज। इनको मैं नंबर निवेदन करूँगा की इस महानाट्य का 1 मॉडल यहाँ बनाया है। ये मॉडल का इनॉगरेशन करने के लिए मैं दोनों महाराज को यहाँ विनती करता हूँ कि आप यहाँ आकर इसका ओपनिंग करना है। इस मॉडल का उसके साथ
जय श्री
निवास जाय, पिंकिश श्रीपद यो, जय युवा, जय दयोरिदवजयवसदेव राम पजयमत्सधूपजयसरू परमेश्वर श्रायपुर तबू, जदयू श्री चंद्र ेशबायदीपिक्रमाय, जय माधवाय, जयनंदन जयूजयदयुजयाजय जय जयु कननररिदनरिदनरिदरू रि त
न द
न रिदनूकररिदम
अरे वो
वेंकटरमणा गो बिंदा गो बिंदा। हम 3 बार महा मंत्र बोल कर इसको प्रार्थना करेंगे। इस नाटक के सक्सेस के लिए हरे कृष्णा, हरे कृष्णा कृष्णा, कृष्णा, हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे
हरे
हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण, हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे कृष्णा, हरे कृष्णा कृष्ण कृष्ण, हरे हरे हरे राम हरे हरे कृष्णा ये लास्ट मोमेंट में हमको ये पता चला। इस लास्ट मोमेंट में कुछ भक्तों ने साथ में आके ये सत्संग का ये सक्सेस के लिए प्रयास किया है। सबसे पहले हम धन्यवाद देते हैं हिस ग्रेस राधे श्याम प्रभु की। राधे श्याम प्रभु जी का।
hershnaicually this balaji drama for doing it the team s, you know sundr praband, many others, they wedon lot of research from all the technical details of the drama, and they have how long you been doing it to rler। there was a small rama, here right, this is a more bigger version of that they have no distotanlybigg investment of money and also to fifty acters are acting, so my request all of ou is kindly spread the word around to other dwartsgomabevafit viral get more details about
so we request all the devotees to kindly less is this drama, this drama is purely done only by the mercy of lord balaji, everything happening in this drama all all the participent coming the fund flow all the dancers coriograpers, and the seid designers, and everyone is participating in such as if lotbalagaspersnally send send them from the border and i mean, we are not able to faden these things that all that you know how such miraculis tasks are happening you now every day, some new developed is going on this drama is mainly dnnhagidens of can takur proband hisgasadisrprbu so, we request all the ortis there has been extensive research on so this drama has mainly three modules, which is there in this book, it is call itihas lila and samarpan that means the history, the story and the sacrifice so, we are having about towel teams, which we will be covering in this drama and this drama is extremely entertaining extremely spiritually motivating, it has a lot of historical baground, it has a lot of cultural bagground and we hope to induce deosinineveryon hearts and at the same time as फंड फॉर the pndrpur प्रोजेक्ट सो, we request all the devotes to कnlीblesblेस less than यू
सो मच लास्ट अनौंसमेंट अबाउट दिस पंडलरजहरीकृष्ण
सबसे पहले हम धन्यवाद करते हैं इस ग्रेस राधे श्याम प्रभु का राधे, श्याम प्रभु की वजह से ये इन दोनों जीबीसी को साथ में लेके आके। य प्रोग्राम को ऑर्गेनाइज किए हैं 1 बार हरे कृष्ण महामंत्र बोल के हरे कृष्ण, हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे, हरे, हरे, राम, हरे, राम, राम राम हरे हरे साथ साथ में ये पंडाल और स्टेज का सेट अप किए हैं। इस ग्रेस दाऊ जीनित प्रभु एंड अजय गोपाल प्रभु और स्टेज डेकोरेशन किए हैं। स्टेज डेकोरेशन के गौरांग प्राण प्रभु एंड कोस्ट प्रभु, एल, डी, एल, ई, डी लाइट्स के हैं काम्यवन प्रभु एंड श्री निकेतन प्रभु, साउंड सिस्टम, श्री भागवत सेवा, प्रभु एंड अभिषेक प्रभु कीर्तन दया सिन्धु प्रभु एंड मुरली, गोविंद प्रभु प्रसाद, कुकिंग एंड प्रसादम डिस्ट्रीब्यूशन। इस ग्रेश श्री कुमार कृष्ण, प्रभु एंड शंकर पंडित, प्रहुएंडटीम और सेक्युरिटी एंड क्राउड कंट्रोल, सत्यप्रिय प्रभु एंड टीम, अरे कृष्ण थैंक यू वेरी मच अरे कृष्ण। आज जो भी भक्त बी टी जी का सब्स्क्रिप्शन, ईयरली सब्रिन करेंगे उनके लिए हंड्रेड रुपीस का डिस्काउंट रहेगा। जो भी भक्त आज का स्पेशल डिस्काउंट है आपके पास अगर बी टी जी नहीं है तो आप कर सकते हैं। आज हंड्रेड रूपी डिस्काउंट के साथ ये बी टी जी ऑफिस खुला है
तो
इसके साथ ओवरॉल कोर्डिनेशन है पूरा ग्रेस रेवती शिव भाग सेव हरी बो और इसके बाद सभी भक्तों के लिए प्रसादम हैं। स्पेशल फीस्ट प्रसादम आपके लिए इंतजार कर रहा है। हरे कृष्ण
जनता गीली तो
माओ मिशन
पदाया कृष्ण प्रष्ठाया भूतले, श्री मति भक्ति वेदांत स्वामी इतना मे, श्री मत भक्ति वेदान्त स्वामी इतना मि ने ना मस्ती सरस्वति देरे गौर, वाणी प्रचार ने, निर्विशेष शुन्य भारी पहश्यतदेशतारने ना मस्त सरस्वत देवे गौर, वाणी प्रचार ने, निर्विशेष शुन्य वादी पाच देश तार ने।
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