Govardhan Yatra || Day -2 Evening Program || HH Gopal Krishna Goswami Maharaj || 2024

Evening program from the Govardhan Yatra pilgrimage featuring devotional chanting, dance, and discourses by senior devotees on bhakti and spiritual austerity. Speakers clarify that true tapasya performed for the Lord softens the heart, while self-serving austerities harden it. The session emphasizes guru's grace and studying sacred texts like the Bhagavad-Gita as essential to spiritual practice.
Chapters
बोलू बोलू अरे sra रे हरे
टीवी
आपको कैस माईको सी डी में
हेलो
लूट छोड़ो
इसको
े
1 भी नहीं
है
out botou
ल कल का
वाले
के तो ये वाले ये तो सेम ही हो गया सेम ही होगा रिवर्स
कर 2
के भाई कुछ देर हो
ऐसे होता
पीछे किधर तो हाथ बढ़ेगा
कोई बात नही बोल
रे बोल दे
बोल
बोल क्या अरे कृश्ना हरेक किशना
अरे
पड़ेगा
जा
भी बचेगा आवाज़ से
या
रमन लगे
fम i
हे इसे तो हो ले कोबरा
five
ठीक है
ये बायो
को दिक्कत होगी अच्छा िक
क
हरी हरी हरी हरी
ं हेलो
हम
आरिय
हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे हरे कृष्ण हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण रे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे अरे कृष्णा अरे अरे अरे थोड़ा पीछे कर 2 राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे अरे राम अरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे राम हरे राम राम राम
गोल रिबोलो रिबोलो
तुम पोजीशन चेंज
करोगी न
तुम पोजीशन चेंज करोगी पोजिशन चेंज करो कैसे करोगे
ये ऐसे करेंगे
आप
बैठेंगे hame
ha
अब तुम थोड़ा
यहाँ से कहा जायगा
रे
हरे कृष्णा
रि
अरे कृष्णा
लूट के टाइम पर
लूट के टाइम पर
लूट के टाइम
पर we
re
a
वनडे goीकरनाराहटाांदीगक शानअदींदभरsमंदे ocicontateखा धरी jamaat
का हाेगि तु प्रभो
या पिया है बताशा बंदे गुदा से
करना रगुरुवातुप्रभुय्ि बताशा बंदे गुराय
nasa prasad हम रसाना प्रसार यas्asanयश्ाझयमवम दश्यायaशश समय वन्दे
गुरानी डरना रहदाछुवसज्यायसमंदे रोशी
dot
संसार भवसागर maya सीकृषणमेरेआश्श्ि लग पाल कृष्ण संसार भव सागर या सी कृष्ण मेरे गुरु शील गोपाल कृष्ण जय गुरुदेव जय गुरुदेव गुरु महाराज में गुरुदेव जय गुरुदेव ज गुरुदेव गुरु महाराज मेरे गुरुदेव श्रील प्रभुपाद कृष्ण कृपा मूर्ति प्रभुपाद कृप पर मूर्ति है गुरुदेव श्रील प्रभुपाद कृष्ण कृपा मूर्ति प्रभु कृपा मूर्ति है गुरुदेव जगुरुदेजगुरुदे गुरु महाराज मेरे गुरूजी जेगुरजेजगुगुरूजि गुरू महाराज मेरे गुरुजी प्रभुपाद के बचनों के जीवन समर्पित जीवन का 1 लौता है ही धे प्रभुपाद के बचनों के जीवन सम जीवन का इकलौता है री कृष्ण ने लेकी कठिन परिक्षये कुरु क्रिपा से पाया भी जयकृष्ण ने ली गई कठिन परिचय गुरु क्रिपा से पाया विजय शीला प्रभु कृष्ण कृपा मूर्ति प्रभु कृपा मूर्ति है गुरुदेव श्रील भ कृष्ण कृपा मूर्ति प्रपा कृपा मूर्ति गुरुदेव जय गुरुदेव जय गुरुदेव गुरु महाराज में रे गुरुदेव गुरुदेव जय गुरुदेव गुरु महारा हमेरे गुरु दे प्रभु पाद ग्रंथों का किया वितरण, हर घर पहुँचा गीता भागवत का ज्ञान, प्रभुपाद ग्रंथों का किया वितरण, हर घर पहुँचा गीता भागवत का ज्ञान हर्शाविग्रह सेवा लगाया हृद सि भक्तों के जीवन का हुआ होता हरशाविग्रह सेवा लगाया हृदय से भक्तों के जीवन क हुआ उठा शीला प्रभु पद कृष्ण कृपा मूर्ति प्रभुपाद, क्रिपा मूर्ति है गुरुदेव शीला प्रभु कृष्ण कृपा मूर्ति प्रभुपाद, कि मूर्ति है गुरुजी जयगुरु
हम लोग अक्सर परेशान रहते हैं और सीनियर वेशन सी पूछते रहते है की मेरी साधना का क्या होगा? मेरी सेवा का क्या होगा? मेरे अनर्थों का क्या होगा? वे सारे प्रोसेस में हम 1 चीज भूल जाते है की मेरे बच्चों का क्या हुआ? आइये सुन ते हैं बच्चों की जबान से कि वो इस बारे में क्या सोचते हैं। परंतु घबराइएगा मत शिल्प हरे कृष्णा हम लोग अक्सर परेशान रहते हैं और सीनियर वेशन से ही पूछे रहते है की मेरी साधना का क्या होगा, मेरी सेवा का क्या होगा? मेरे अनर्थों का क्या होगा? सारे प्रोसेस में हम 1 चीज भूल जाते है की मेरे बच्चों का क्या होगा? आइये सुनते हैं बच्चों की जबान से की वो इस बारे में क्या सोचते हैं। परन्तु घबराइएगा मत छिल्पउपाद की प्रेरणा से बहुत सारी आशा की किरणें ज जग चुकी है hरेकृs्णa
मम्मी या पापा दोनो ही पे समय का मम्मी पापा दोनो ही पे समेकाजबीरेआबजद बंडा हिनका एकनौर करो मम्मी जरा अपना समय 2 दंगा करो ये फ़ोन नो ये मेरे पापा जीवन के दाता इन कान है मुझसे कोई नाता कहने को फ्रेंड्स हैं तो आने दिखावे की दुनिया में है सभी फेक ना मुझसे अफेक्शन पढू न पढूँ को क्या है टेंशन वर्ग है जबिन से मांगो समय नहीं है गूगल से पूछो क्या क्या फिर मैं गूगल करूँ यू ट्यूब पे जाके मूवी देखूँ क्या भगवान है, क्या है नहीं मिलते रहे 2 मुझे हर घडी फेसबुक पढाई करता रहूँ वॉट्सैप पे नोट्स शेयर करूँ चश्मे का नंबर बढ़ता गया कमर का साइज पता ना चला जीवन की मेरे न कोई दिशा छोटी उमर में में कता नशा गुस्से पर मेरा न कोई कंट्रोल ईशा ही दिखती मुझे चारो कंपेशन से मैं दत्ता रोज प्रेशर की मिलती मुझे हैवी डोज नंबर मेरे रोज़ करते गए ताने मुझे रोज पढ़ते रहे समझ म ये क्या रोंग है क्या राय मनकतमेराकिकरूं सुसाई ये मेरा ही जीवन संगीत कल भी कोई घबरायेगा चाल ऐसी हमको बचाने क्या कोई कभी आयेगा
a टेंशन क्यूँ लेनी है खुल तो गया है हमारा सारे के सारे मिल कर चले हम गोरंग भक्तों का संग है मस्ती भी खुले हैं मिल कर जब हम जाये सारे मिल कर चले हम गोरंग 4 बजे हम रोज उठते रहता जब दियारा धोती कुरता तिलक लगा के ध्यान से करते माला मंगल आरती रोज करते मिल कर नाचे गाये अ्चरिगरहसी से बात करते सुनती गोल कटाये लाल ला, ला, ला लल्ल लाला लाला लाला लाला उजवलोरहरीवनशिचाई सी मिली लाला लाला ला, ला, ला, ला, ला, ला, ला, ला, ला, ला भक्तों का संग है। मस्ती विकुल है मिकजपेहम सारे टेंशन को लेनी है खुल तो गया हमारा
हो
हैपातेहगाकरते खुद को सरस बनाते पढ़ते लिखते हो बात करते और प्रसाद पाते शाम को बैठ सब सदाचार की होती है कप शाह ला सके इस मन से हम बुरे विचार भगाए ला, ला, ला, ला, ला, ला, ला, ला, ला, ला, ला, ला, ला, ला, ला ला ला, ला, ला, ला जो रहा ऐसी मिली ला ला, ला, ला, ला, ला, ला, ला, ला, ला, ला, ला, ला, ला
ला
भक्तों का संग है। मस्ती विपुल है दिल पे हम सारे
अरे तुम गुरु कुल में खेलते क्या
हो
ते पड़ पड़ के बोर बजाते मृदंग शोर हर देखे घड़ी की ओर मचाते शोर जब होते पर पड़ के बोर बजाते मृदंग जोर फिर देखे खड़ी की जाए जब खेल मेलिहमतोचिल्लाय तब साथ मिले हाथ उठे और हाथ डॉक्टर बोले हटो आर अरे बोलो बोलो हरी
अरे
हर ह अरे
अरे तुम लोग मृदंग बजाते हो, मृदंग तो ओल्ड फैशंड है, आजकल मृदंग कौन बजाता है।
ठाकुर कहते थे कि 1 दिन सारे अमेरिकन यूरोपियन इंग्लिश मैन भारत में आयेंगे, हाथ में मृदंग और करताल लेकर सारे सड़कों पर नाचेंगे बट। ये क्या हमें लगता है कि मृदंग में वो रस नहीं जो बाकी वाद्य यंत्र में है। आज हम इस नाटिका के थ्रू आपको दिखाएंगे कैसे मृदंग से भी भगवान की सारी लीलाओं का रसास्वादन किया जा सकता है।
लावन रस माधुरी स हस्त्र गुण संयोग ताया नमो मृदंग नमो नमा नमो बलदेवा नमो नम
द गुरु गुरु द गुरु
गुरु द गुरु गुरु गुरु द गुरु गुरु दर
cahaaaa
छाया जा जा के
दे ते
त का का था केरते जा जा जा जा जा जा
ता
ता ता जा जा ता ता ता ता
ता के
जा जा जा के मेरे ा तथा देर करे रे रे रे ता ता चाचा तेरे तेरे चाचा के चाचा के चाचा तेरे तेरे तेरे बचा चाचा चाचा चाचा के चाचा के चाचा करे दाद देने, नक देने देने, नक देने देने, ददेने देने देने देने देने देने, तथे साथी ने देने, दातेनेेदतेदतेने दाते ने थेने तेरे ती धेरेतीदेरेदगी, तेरे तेरे दखुतेरेखेततेरे, तेरे तेरे साकी तेरे तेरे कु तेरे दिन तेरे तेरे तेरे दिन तेरे तेरे के तेरे दिन तेरे दिन तेरे दिन तेरे दिन तक तक के दिन तक दे नेता दिन तक तात्रिक तक a दिन तक दी थी कि ता गे गे ता दिन तक कीगतागगरदगड़सकतक का
गर
गत कलनतजातगड़तकलंतजा गड़
गड़ तक
तक तक जा गड़क घर तक तकलनतताकलनताझाझा ता ता ता जा जा ता ताजा तकनततलनतजानतजा के कोटा को तेरे खेताकोदीनेदया तेरे खेता गोदी tea
को
तेरे खेता गोदी की गुर गुर की दच्छा की धन देता खेती ता खेती को न दिन खेत दीता गो दीना
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teaeaeem ae
tea
tacteaaate anamat
रे aरegusnar
हरे कृष्णा आज किस किस को लगता है की आपने आपकी तालियों ने इस परफॉर्मेंस को जस्टीफाई किया और जोर से रियो सो बहुत ही सुन्दर परफॉर्मेंस बहुत ही सुंदर परफॉर्मेंस सो पहले तो मैसेज बहुत इम्पोर्टेंट दिया है उन्होने है कि किस प्रकार से कभी कभी पेरेंट्स जो वो डिवोटीज हैं तो इतने ज्यादा एब्जॉर्ब्ड हैं अपनी सर्विसेज में एक्टिविटीज में कि बच्चे अक्सर इग्नोर हो जाते हैं सो बच्चों को इगनोर भी नहीं करना है, वैकुंटा चिलरेन है दे आर वेरी वेरी स्पेशल चिलरेन तो इसलिए वो मैसेज भी था साथ साथ में वेरी वेरी स्टाइल मस्ती एजवलसपुलोनभक्ति सो यहाँ पर ये गौरांग गुरुकुल है जो की गाजियाबाद में है, वहाँ के बच्चे थे यहाँ इनका स्टाल है जाकर मिल सकते हैं वहाँ पर अगर आप चाहे आपका बच्चा वा रोल हो सके। so you can also do that से साथ साथ जो गोपियां थी छोटी छोटी प्यारी प्यारी, ये थी scoनगजियाबाद की cोंgratonमें सो दोनो मिल कर के दूर, यहाँ परफॉर्मेंस दी यहाँ मृदंगासाथमेंबासुरी साथ में singing in lila everytingwhas very beautiful so thank यू वेरी मच फॉर दिस नdरfuलndरफuल परफॉर्मेंस so a s con sundr performence ke bad now we are going to have very special session by isis mohan rupa prbujkayonemore das is here from iscan govind mohan prb he i thought those girls are also part of the same performence, so sorry sorry for the confusion one more performens। सो, ये इस कौन कासवाद के भक्त है जो की आकर हर बार डांस करते हैं और और डांस से मेसेज भी होता है सो वी welकमtmबाईचैंटिंग हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। तो इस डांस के बारे में आपको गोविंद मोहन बो पहले बताएंगे what is the team of the dans? so i invite him on the stage
revolt thank you so much amoglilaprbujy and nobody can entertain more, then what you say सोनमेर, हा मच और कितना ज्यादा परफॉर्मेंस कोई भी करे आपकी वाकपटुता और आपकी विट के आगे सब फेल एनीवेज वैसे तो हम में से जो भी व्यक्ति जब से गुरु महाराज से मिला है और जब तक गुरु महाराज को दोबारा मिल नहीं लेता, उनकी याद हृदय में रहेगी और वो याद दिन ब दिन बढ़ती चली जाएगी तो ये जो 1 आपके सामने परफॉर्मेंस आने वाली है ये उस याद को थोड़ा और स्वीट कर देगी, आपको थोड़ा और गंभीर कर देगी और गुरु महाराज से प्यार करने को आपको थोड़ा और मजबूर कर देगी तो मैं ज्यादा नहीं बोलूंगा सो प्रभु जी, माता जी, स प्रेजेंटिंग the gopis रे कृष्ण
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गुरु शेत्र युद्ध भूमि पर अर्जुन के हाथ ठेकपकपाए देने, उसको दिव्य ज्ञान श्री कृष्ण इस धरती पर स्वयं आए करुणा फ्ताननिमायनिताई ने किया। इस शाश्वज्ञान को पुन स्थापित देकर हम सबको भगवत नाम किया। उपकार उन पर जो थे माया से शापित पाश्चात देशों तक फैलाया हरि नाम कराया पतितों का कृष्ण से मिला उन्हें प्रभु पा जी के सेनापति बनकर आये। हमारे प्रिय परमपूज्य हिज होलीनेस गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराज
वंदे, गुरु शी चरनारविनदम वंदे
गुरुशीचरनरविंदम वंदे गुरुजी चरन विंदम हंदेउरोशिचलनरवंदम संसारी माया की अगली बुझा, जो करुणा की बारिश, बरसाई जो संसारी
बुझा
की बारिश।
कृपा मईसागरऐसेद्िभगुह जिन मे से गुरु को प्रणाम है। कृपा मईसादिगु
बचपन से ही धार्मिक आचरण और साधुओं के प्रति सम्मान को अपने जीवन का पथ बनाया। जैसे जैसे वो बड़े हुए, शिक्षा की राह उन्हें दिल्ली विश्वविद्यालय से फ्रां और फिर कैनाडा तक ली गई।
नाम जब जब भी मै तेरा नाम जब जब भी मै तेरा जाते हैं,
है मांगू मे तो इस जीवन में मंगू मे तो इस जीवन मेजूतिरियाददेलाते है
जू तिरिया
चरण।
1969 में मिली उन्हें दीक्षा और शुरू
हुई उनकी भक्ति की यात्रा हरकिश्नाहरकृशणाकश्न कृश्नाहरिहारी, हर नमरहाहरहारिश्ना।
1975 में श्रीला पभुपाद ने उन्हें भारत में इस्कॉन के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स की जिम्मेदारी सौंपी और हर बार उन्होंने सेवा का 1 भी अवसर नहीं छोड़ा।
कृपा बिंदु दिया करोदसत्रणका।
1981 में संन्यास ग्रहण कर। उन्होंने दुनिया भर में भक्तों को प्रेरित किया और अनेक मंदिरों का निर्माण किया। उनका नाम इस्कोन की नींव में सुनहरे अक्षरों से लिखा जाता है।
संसार भव, सागर माया से कृष्णा मेरे, शिलग गोपाल, कृष्ण। संसार भव सागर माया से कृष्ण मेरे, कुरु शील, गोपाल, कृष्ण जय गुरु दे जयगुरुदेव गुरु।
आपको देख कर पता लगता है कि कैसे होते हैं गुरु। गुरु महाराज वो हैं, जो अपने बारे में न सोच। हमेशा दूसरों के बारे में सोचते रहे, अपने आराम को छोड़कर सभी भक्तों की सेवा करते रहे। सबको भगवत धाम मिले, इसके लिए निरंतर प्रचार करते रहे। प्रभुपाद जी की इच्छा अनुसार कई मंदिरों का निर्माण किया। संयासियों से लेकर गृहस्थों का सभी का उद्धार किया। गुरु निष्ठा। हमें आपने स दिखाए, जीवन भर बन कर चलें। आप प्रभु पात जी की परछाईं
अर्च,
विग्रह की सेवा में रहे। हमेशा तत्पर प्रेरित किया। आपने हमें स्वप्न में मंगला आरती कर। विनम्रता की मूरत आप हैं, प्रेम की सच्ची सूरत आप हैं। जिनकी कृपा और आश्चर्य की। हम सभी को सख्त जरूरत है। जीवन के हर पल में वो आपकी, प्यारी सी। मुस्कान स्मरण करते ही आज आती है। हम सभी के अन्दर, जान, भगवत, गीता का गोहित ज्ञान जिनके कारण हम सबको मिल पाया है। उनकी आज्ञा से आपने इस ज्ञान को विश्व भर में फैलाया है। भक्तों की चिंता करते करते उनकी प्रगति के लिए सोचते रहे। हम जप ध्यान पूर्वक कर स, उसके लिए बस प्रेरणा देते ही चले गए। विश्व भर में कृष्ण नाम की महिमा है। इसके लिए बस परिश्रम करते रहे,
वो
प्रेम करते रहे, करुणा दिखाते रहे, श्रवन करते रहे, कृपा देते रहे, सिखाते रहे और उसके बाद संभालते भी रहे। गुरु महाराज वो है जो घड़ी के कांटों की तरह बस शास्त्र ज्ञान देते रहे। माया की धूप में हमें भक्ति की छाँव दिलाते रहे। हमारी गलतियों को क्षमा कर हमें प्रगतिशील बनाते रहे। दीक्षा के काबिल हम भले ही न हो, पर हमारे पापों को काट कर हमें शिष्य रूप में स्वीकारते रहे। हम उंगली पकड़ते हैं, गुरु हाथ पकड़ते हैं, हम मदद मांगते हैं। गुरु सब कुछ न्योछावर करते हैं। भौतिक रिश्ते तो अक्सर मुंह मोड़ लेते, लेकिन गुरु जिसका हाथ थाम लेते हैं, उसका साथ कभी नहीं छोड़ते। अपनी मर्जी से तो सभी जीवन जीते हैं, पर जो गुरु के वचनों के अनुसार जीवन जीते हैं, वो सबसे भाग्यशाली होत। आज हम 1 बात आप सभी भक्तों से कहना चाहते हैं कि कृष्ण कई मौके देंगे, पर दोबारा ऐसे गुरु नहीं। अंतिम समय में तो हर कोई रुलाता है, पर सिर्फ गुरु की कृपा से उस समय हरी नाम याद आ ता है।
अरे कृष्णा हरे, कृष्णा, कृष्णा, कृष्णा, हरे, राम हरे, राम, राम राम हरे हरे।
वे आज भी हम सब के साथ हैं। उनकी शिक्षाएं, उनकी प्रार्थना हैं, उनका प्रेम और उनकी करुणा, हम सभी पल पल महसूस कर सकते हैं। वे यही सोच रहे होंगे कि कब हम सभी 1 साथ मिलकर इस कृष्ण भावनामृत आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए और दृढ होंगे दिन में कम से कम 5 मिनट निकाले उनके लिए जिन्होंने अपनी पूर जिंदगी निकाल दी। हमे कृष्ण से मिलाने के लिए, उनकी अंतिम आज्ञाओं को अपना लक्ष्य बनाकर। हम सभी आज भी उनका दिव्य संग प्राप्त कर सकते हैं। और हमें पूरा यकीन है कि जब वो पुना हमसे मिलेंगे तो केवल 1
बात कहेंगे हम सबको प्रयास करना चाहिए कि आम हरी का नाम है
हरे
राम
हरे हरे जश्ाहरगा
hey krsna
रे
krsna अच्छा ऑनेस्टी बताइए किस किस को इस परफॉर्मेंस में आँखों में आंसू आये यस थैंक यू डिवोटीज वन्डरफुल प्रेजेंटेशन बहुत ही सुन्दर महाराज के जीवन को कवर किया जिसमें म्यूजिक भी था, डांस भी था, सुन्दर नरेशन भी थी, लाइफ की पूरी को की, कवरेज भी थी, वाज द ब्यटिफुल कोरोग्राफी बहुत ही सुंदर प्रेजेंटेशन थी। सो गोविंग मोहन बाबू और जितने जो टीम है कोरोग्राफर की जिन्होंने इसको प्रेजेंट किया और ये प्यारी प्यारी बच्चियों ने इसको किया। फ्रॉम स्कोन गाजियाबाद सो 1 स्टैंडिंग ऑफिशल बनती है हरी वो so one here कृषnamhamantr to ep्रीcिat them for their super duper। अमेजिंग परफॉर्मेंस as ऑफर टू आवर बरबर गुरु महाराज जी, हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा, हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे ह अरे ही होल्ड गोपाल कृष्ण को स्वयं महाराज की जाए, उनके अमृत में जीवन चरित्र की जाए, अमृत में जीवन चरित्र को इतने सुन्दर सी प्रेजेंट करने की जाए, कौन गाजियाबाद भक्त वृन्द की जाए, जगत गुरु श्रील बरबाद की जाए, थैंक यू थैंक यू डिवोटीज आपने महाराज के संदेश का में disple किया। was really amazing thank you, thank you, thank you here o okay now the next flavor of mercy con con kpa के अगले flavor के tayaro that would be there in the form of katamrt फ्रॉम दि सोर्स ऑफ इंसपिरेशन ऑफ बुक डिस्ट्रीब्यूशन इन स्कार्ड डेली दी प्रेजिडेंट ऑफ़ स्कार्ड डेली हिज ग्रेस मोहन रूप प्रभु
जी,
सो मोहन प्रभु जी, ऐशली देखा जाए। डेली के अन्दर जितने भी प्रीचर्स हैं उनके प्रीचर हैं प्रभु जी, तो जितने शिक्षक हैं, उनके शिक्षक हैं प्रभु जी। जितने लोग इंस्पायर कर रहे हैं उनकी इंस्पिरेशन हैं प्रभु जी, ग्रेस मोहन रुपा, प्रभु जी। सबसे लम्बा टेन्योर इन टर्म्स ऑफ बिंग प्रेजिडेंट ऑफ िस कॉन डेली इस लेट बाय हिसग्रेसमोहनरुबा प्रभुजी और हमारे यहाँ ट्वेंटी 20 साल ट्वेंटी यर्स फ्रॉम टू थाउजनफॉरसेट्वेंट ट्वेंटी फॉर हर प्रबुजीसकॉनडे्ली को कहां से कहां ले गए हैं माय गॉड उन्हीं की ही अध्यक्षता में कितने और मंदिर भी खुल गए, वो भी फ्लेरिस हो रहे हैं, आगे बढ़ रहे हैं बिकॉज ऑफ हिज ग्रेस मोहन। प्रभु जी। उनकी हेल्थ चाय जैसी मर्जी रहे, लेकिन सबकी स्परिचुअल हेल्थ को अपग्रेड करते हैं। हमारे हिज ग्रेस मोहन व प्रभु जी 1 समय नगेंद्र महाराज आये थे। उन्होंने कहा उन्होंने बोला जीता ने 1 बार कहा था अगर कोई व्यक्ति गौडिया वेश्नव दिल्ली में अगर क्लेम करता है। मैं गौडिय वैश्नव हूं तो बिना मोहन रूबा प्रभु जी को सुने वो वो क्लेम नहीं कर सकता। सो हमारे अन्दर जो मूड दिया है गौरेवैशनविजम का, शिक्षा का, आचार व्यवहार का, एटीकेट्स का, वो। हमारे अंदर इंस्टॉल किया है तो हिजग्रेस मोहन रुपा प्रभुजी ने इंस्टाल किया है। और प्रभु जी की वजह से दिल्ली कितने सालों तक नंबर वन ही रहा है। बुक डिस्ट्रीब्यूशन में। तो ये प्रभु जी की वजह से ही है। ईवन उन दिनों में जो प्रभु जी की आवाज नहीं निकलती थी। बिकाज सम एलमेंट। लेकिन उन दिनों में भी प्रभु जी इशारा कर कर के लेक्चर देते थे। उस साल भी स्कॉन डेली नंबर बनाया था बुक डिस्टीब्यूशन में, लेकिन बीच में कभी कभी औरों को मौका देते है नंबर बनाने का ताकि उनको भी उत्साह मिले। लेकिन वैसे प्रभु जी ही नंबर रखते हैं। स्कॉन डेली को सो निश्चित रूप से हमें होलीनेस गोपाल कृष्ण को स्वामी। महाराज जी का, जो बुक डिस्ट्रीब्यूशन का मूड है वो प्रभु जी के माध्यम से ही प्राप्त होता है। तो प्रभु जी का लेक्चर को सुन ले। बुक डिस्ट्रिब्यूशन पे तो मुर्दे के अन्दर भी जान भर देंगे। प्रभु जी इतनी शक्ति है प्रभु जी के अन्दर सो, ये प्रभु जी की खासियत है। प्राण आक्षययारसेतुप्रचार दोज हू हा लाइफ दे कैन प्रीच। और इसका ज्वलंत उदाहरण है हमारे हिस ग्रेस मोहन रूपा प्रभुजी, सो प्रभुजी का स्वागत करेंगे बाई चैंटिंग हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। हम सबकी सोर्स ऑफ इंस्पीरेशन हिस ग्रेस मोहन रूपा प्रभुजी की जाए, जगत गुरु श्रील प्रभुपाद की जाए। गिरिराज गोवर्धन जी महराज की जाए।
1 भजन है श्रील भक्ति नोट ठाकुर द्वारा, क्योंकि हम गोवर्धन में हैं तो उसी से सम्बंधित 1 भजन है शीला भक्त ठाकुर का लिखा हुआ अरे कृष्ण, तो मोनिटर में आवाज दे 2 और ये फ्लैट कर 2 बिल्कुल और थोडा गेन बढ़ा 2 बास थोड़ा कम कर 2। अरे पीसी आवाज सुनाई दे रही है।
यू कैन ही मी
रा ध कुल
तट
कुज
कुटी
गोबर धन पर बत। यमनाथ राधा कुंड तट कुरकुटी गोबर धन प बत। यम नाती कुस म सरोवर मान स गंगा।
सब लोग गाइए पीछे देखिये,
उस मै
सरोवर मानस गंगा ताली दी नंदिनी बे फुलाता रंगा काले दि न दिन वे फूल ता रंगा राधा कु कुंज कोटी गोबर धन प बत। यमोनातीी बट गो कुल थी रसमी बट गो कुल थी रसमी व्रिंदावन क रुलाती का बनी व्रिंदावन करोली का बानी राधा कुंड तक कुजकोटीकमरधनपरवत यमुनाथी मेगा कोला मलाया बतासा खुला मलाया बतासा मायरा भ्रम रा मोर लि बिलासा मायोराभरमारामोरलि बिलासा राधा कुंड का कुल कोटि गोमरभरपरवतयमोना के
वेणु सिंह
पद छिना मे गम ला, सिंगा पाता चिना मे गमाल वसंत शशांक शंका करता
ला
वसंत शशकाशंककरतालाराधा कुंड कोटी हनपबतयमुनथयोगलविला से अनुकूल जानी ला से अनुकुल योग विला से अनुकुल जानीिलासुललविला, दीपक माली पकमानीलीलाबिला सती पक मानी सी ऊटी पकानी राधा कुंड तक गोमरपतयम। ये सब छोड़ कहीं नहीं जा? सब छोड़ कहीं नहीं जाए, सब छोड़ कहीं नहीं जाओ, सब छोड़ ही नहीं जाए, सब छोड़, सब छोड़त कहीं नहीं जाओ सब छोड़ते, नहीं, नहीं जाओ सब छोड़ पराण हरा सब छोड़, हराए सब छोड़ पराण हराओ सब छोड़ रा राधा
कुंड तक
पर यम बिनोद कहे सुन कान है सुनो नोदा कहे सुनो कान, या दीपक हमारा पर
दीप
या दीपक हमारा पर दी हम राधा
को
पर्वत
बोलिए की
राधा को कुल कुट गोबर
यमुना थी
जा गिरी गोवर्धन जा गिरी गोबर गिरी गोबर्धन जाया गिरी गोबर्धाजयगीरी ग
लोग बोलिए टोसे
गो
गो जा गिरि गो वर्धन गिरि गो गिरी गोवर्धन जया गिरि गो वध गीरी गो
गो
गो
वर्धा राधा गिरी धारी राधा गिरी हरी राधे राधा राधा गिर हरीराधागिरीहरी राधे राधा
रा
बो हरी
गौर हरी हरी हरी
हरी
हरी बोहरी बो गौर हरि बो हरी बोल हरी बोल हरी बोल हरी जाय प्रभु पारपा जाय प्रभु पाया
भु
प्रभु प्रभु प्रभु पा
पर
हरी हरी ओम
व अभय सुनारिन भक्ति वेदान स्वामी शिल्पा की जाए जाए नेतलिलाप्रवेशहोम विश्व बाल परम भक्ति सिद्धांत ठाकुर की जाए अनंत कोटी वइसवदकीजाएलिताई गोर प्रेम न दे
l
cloristother somebody body has al claris to the somebody haal claris to sri गुरु गौरंगा टुंडी फोर ओम नम भगवते बaसुरेभaya जोर से बोलिए नम भगवते वा सुदेवा
या
ओ
नम भगवते व सुदेवा या narayan nmsktyanaramchi rotmademimsrswati basam ttojymdiranstapri suapadresoनiत्य भागवत से बया भगवती उत्तम श्लोके भgतiरभavtinisiकi श्रीमत भागत 2, अध्याय 9, श्लोक संख्या
टू
नाइन ट्वेंटी फोर दिख रहा है
शिजामी
तपस्वेदमग्रसामि तपसा पुनहा बिबर मी तपसा विश्वम वीर्य में दुष् चरम तपहाछुजामि तपसे बेदम ग्रसा मि तपसा पुनहा विबर मी तपसा
विश्वम
वीडिय में दुष्चरम तपहासिजामि तपस्या बेदम ग्रसनी तपसा पुनहा तपसा पुन तपसा विश्व मे तपसा विश्वम वीर्य में दुष्चरम तपहाभीर्यममें
दुष्ट रम तहा
बंद हो गया।
thank you
बोल sridaमी
उत्पन्न करता हूँ
तपस्या, तपस्या की उस शक्ति से, एव, निश्च ही इदामयहग्रसामि तपस्या
उसी शक्ति से
अपने में लीन करता हूँ। पुनह, फिर विधर्मी पालन करता हूं तपस्या। तब से विश्व, विश्व वीर्य शक्ति में मेरा अनुवाद और तातपोरेशिलप्रोपाद के द्वारा श्िलप्रोपाद की ज, आप दौराइए, अनुवाद कृपा करके
मैं ऐसे ही तब से इस विश्व
की रचना करता हूँ, इसी शक्ति से इसका पालन करता हूँ और इसी से इसको अपने में लीन करता हूँ। अतः तभी वास्तविक शक्ति है। सुनिए। केवल सुनिए दातरे तपस्या करते समय मनुष्य को भगवान के धाम लौट जाने का संकल्प करना चाहिए और इसके लिए सभी
प्रकार के कष्ट सहने के लिए तैयार रहना चाहिए।
तैयार है आप सब। भौतिक संपत्ति, भौतिक, संपत्ति, नाम तथा यश के लिए भी तो कठिन तपस्या करनी
पड़ती है, क्योंकि उसके बिना कोई भी भौतिक संसार में प्रसिद्ध नहीं हो सकता। तो फिर भक्ति की सिद्धि के लिए
कठिन तपस्या क्यों करनी होती है? सुविधा, संपन्न जीवन तथा दिब्बे साक्षात्कार के लिए सिद्धि की प्राप्ति दोनों साथ साथ सम्भव नहीं है।
भगवान जीवात्मा कैसे अधिक चतुर हैं, अतः वे देखना चाहते हैं। भक्तिमय सेवा के लिए भक्त कितना कष्ट उठाता है? तपस्या का आदेश भगवान से सीधे।
यह प्रमाणिक गुरु के माध्यम से प्राप्त होता है और यह आदेश आपको, चाहे
कितना ही कष्टप्रद क्यों न हो, इसका पालन करना ही कठिन तपस्या है।
जो इस नियम का दृढ़ता से पालन करता है, उसे निश्चित रूप से भगवान
की कृपा प्राप्त करने में सफलता प्राप्त होती है।
हरी हरी हरी हरी aganatimrndsagana jana chalacयasronmilta na tusmasigurbnama mnobistamstabit भutेस्यmरुपहगदा मैयम दाती स्बदांदिकम वnचाकलपतरुभ्यश् कृपा सिन धुभ्यबचापतितना बाबले
नमो नम
श्री कृष्ण चैतन्य प्रभु नित्या नंद
दार
शिवा
बोलिए जोर से हरे कृष्णा हरे
कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे छिजामी तपस्या वेदम ग्रास सामी तपस पुनाह विबरी तपस्या विश्वम वीरियम में दु्रम तपहामैंसहितबसे शष्य की रचना करता हूँ, इसी शक्ति से इसका पालन करता हूँ और इसी से इसको अपने में लीन करता हूँ। अतः तभी वास्तविक शक्ति है। तपस्या तपस्या का मतलब ये है स्व इच्छा से, अपनी इच्छा से कष्ट उठाना? किसके लिए? भगवान की प्रसन्नता के लिए? ब्रह्मा जी ने सृष्टि के प्रारंभ में तपस्या की। ब्रह्म सविता में वर्णन आता है ब्रह्माजी ने 2 अक्सर सुने, ता और पर। यह सुनकर उनको प्रेरणा, मिली, उनको ये बुद्धि मिली कि उनको तपस्या करनी होगी।
ब्रह्मा जी ने तपस्या की घोर तपस्या की। चारो तरफ अंधकार अंधकार था, अकेले कमल
के ऊपर बैठे हुए थे, नीचे कुछ नहीं दिख रहा था, ऊपर कुछ नहीं दिख रहा था। चारो तरफ अंधकार, अंधकार और वो सोचने पड़ गया की मैं कहाँ से आया, हूँ के मी, मैं कौन हूँ? ये 3 प्रकार के मुझे क्यों सता रहे हैं?
सबसे बुद्धिमान व्यक्ति सृष्टि का, लेकिन वो
ये नहीं जानता कि वो कौन है। इसलिए ब्रह्मा जी को तपस्या करनी पड़ी। खुद को जानने के लिए, खुद को जानने के लिए तपस्या करनी पड़ी ये है वास्तव में, सबसे महत्वपूर्ण बात, यह समझने के लिए कि ब्रह्मा जी खुद
को जानने के लिए उन्होंने क्या किया।
तपस्या की भगवान को प्रसन्न करने के लिए, भगवान विष्णु देव यही कह रहे हैं। तब दिव्य पुत्र का ये सत्तम शुद्धेदियस्माल ब्रह्म, शोखयमतोअनंतम, अनंत सुख, अगर आप चाहते हैं, आनंद अगर आप चाहते हैं, तो आपको तपस्या करनी होगी। ये तपस्या ब्रह्मा जी ने की।
और अब देखते हैं कि हमारे पूर्व
वर्ती आचार्यगण जितने भी महान भक्त हुए हैं, जैसे शिला प्रोप जी यहाँ लिख रहे हैं, प्रोप क्या लिख रहे हैं, हाँ पर, बहुत महत्वपूर्ण बात लिख रहे हैं। द आर्डर इस रिसीव्ड फ्रॉम, द लॉट,
der directly of the through the bonifidspetil master। और यहाँ है there for want to
see how pansakingthedivoti is in dimotialsurvic।
भक्त जो है भगवान की सेवा के लिए, कितना कश उठाने के लिए तैयार
है, भगवान ये देखना चाहते हैं, that is टेस्ट। यही भक्ति है। भगवान देखना चाहते हैं कि भक्त कितना प्रयास करने के लिए तैयार हैं।
इसलिए हमारे जितने भी महान आचार्य हुए
हैं, जितने भी महा भागवतों का वर्णन श्रीमद भागवत में हुआ है, उन सब ने तपस्या की। तो आइए हम लोग इस पर विचार करते हैं किसने क्या किया? जैसे की हम देखते हैं वृन्दावन के 6 गोस्वामी गण शिल, रुम गोस्वामी, सनातन गोस्वामी, रगुनाथ भट्ट गोस्वामी, रगुनादसगोस्वामी गोपाल, भट्ट गोस्वामी, जीव गोस्वामी।
इन्होंने घोर तपस्या की चेतन महाप्रुननकोब्रष में भेजा लीला। स्थलियों का पता लगाने के लिए, लुप्त लीला, स्थलियों को जागृत करने के लिए, विग्रहों की स्थापना करने के लिए, मंदिरों का निर्माण करने के लिए, ग्रंथों की
रचना करने के लिए, ये सब करने के लिए। चैतन्य महाप्रब ने इन 6 गोस्वामियों को ब्रज में भेजा। उस समय ब्रज में लोह बजार नहीं
था,
कोई गेस्ट हाउस नहीं था, कोई होटल नहीं था, कोई साइट सिंग नहीं था, केवल जंगल ही जंगल था। घना, घना, जंगल, घना, घना जंगल, चारों तरफ पेड़ ही पेड़ और जंगली जानवर।
रात के समय चारों तरफ अंधेरा खुकार
जानवर वन में घूम रहे हैं, चारों तरफ अंधकार है। और ये 6 गो स्वामी वृंदावन में आकर रुके हैं।
अलग अलग वृक्षों के नीचे रह कर
लकड़ी जो जल चुकी थी, उसके अग्नि के प्रकाश से ग्रंथों की रचना कर रहे थे। श्री निवास आचार्य ने लिखा है
लिदरहारबिहारकादि
बिज तो चात्यलतदिनाचयो
नित्रा और आहार के विजय प्राप्त कर ली।
इन 6 गोस्वामियों ने नित्रा और आहार के ऊपर 6 गोस्वामियों ने आहार कम कर दिया।
लगभग न के बराबर शिलगदगोस्ामीजराधा कुंड में रहे, जिन्होंने 42 साल भजन किया, केवल
2 दिन में 1 बार छाछ पीकर जीते थे, साढ़े 22 घंटे भजन करते
थे, 2022 नव को दंडवत करते थे,
1000 दंडवत करते थे। अपनी गोरधन शिला को।
संख्या पूर्वक नाम, गण, नति, संख्या पूर्वक नाम लेते थे, संख्या पूर्वक प्रार्थनायें करते
थे, संख्या पूर्वक, दंडवत प्रणाम करते थे। सब कुछ संख्या पूर्वक। और इस संख्या में क्या है ये संख्या पूर्वक। तो, ये तो वैद भक्ति में जो लगे हैं, उनके लिए है। और ये तो सिद्ध पुरुष हैं।
लेकिन गौर पार्षद होने के बावजूद भी
ये जो सिद्ध पुरुष हैं, इन्होंने 1 साधक की भांति जो है, दर्शाया है की 1 साधक को किस तरह की साधना करनी चाहिए। इसलिए कविराज गोस्वामी लिखते हैं कि रगुनादासगोस्वामी
की साधना कैसी थी? जैसे कि पत्थर की लकीर
स्टोन में लाइन खींचते हैं, लकीर अगर पत्थर में खींच दे, मिटाना बड़ा मुश्किल है, कठिन है, असंभव है, ऐसी तपस्या इन गोस्वामियों ने की है। 11 वृक्ष के नीचे रहकर ग्रंथों की रचना की। शिलरजी गोस्वामी ने।
4 लाख लोगों की रचना की है। शिलर गोस्वामी ने 1 लाख लोगो की रचना की। इन ग्रंथों की रचना की। घोर तपस्या, वृंदावन में रह कर, वनों
में रह कर, वृक्षों के नीचे रह कर, घोर तपस्या करते हुए, घने, घने, जंगल में रह कर इन्होंने ग्रंथों की रचना की है।
किसके लिए, लोक का नाम, हितकरिनौत्रिभुबने, मान्य, सरन्या, कर, नाना, शास्त्र विचार, नई कानि, पुन, सर, धर्म संस्थापकों,
तो ये शास्त्रों
की रचना करना, स धर्म की स्थापना की। इन 6 गोस्वामियों ने। ग्रंथों के माध्यम से कितना बड़ा योगदान
है इन गोस्वामियों का, कितनी तपस्या लोगों ने की है हमारे लिए। इसी कारण से आज हम लोग यहाँ विराजमान हैं।
गोवरनेस पंडाल में, ये इनकी तपस्या है, इन गोस्वामियों की तपस्या है। ये न होते तो हम नहीं होते, चेतने महा, ब्रो नहीं होते तो हम नहीं होते।
यदि गौर न हो तो तब की
हो तो के नो क्या है?
भूल गया,
जो भी है, चेतने महाबर। नहीं होते तो हम नहीं होते, ये छे गोस्वामी नहीं होते तो हम नहीं होते। प्रभु पा जी नहीं होते तो हम नहीं होते, गुरु महाराज नहीं होते तो हम नहीं होते। सुनिए बड़े ध्यान से। तो ये 6 गोस्वामी थे, जिन्होंने घोर
तपस्या की, इतना कष्ट उठाया, इतना कष्ट उठाया हमारे लिए।
और ऐसा कष्ट जो हैं देख कर जो है, पाषाण का, ह्रदय भी पिगल जाता है। ऐसा कष्ट उठाया लोगों ने।
और ऐसे महान आचार्य श्रीमद भागवत उठा के। देखिये आपको जितने उच्च कोटि के भक्त
मिलते हैं देखने को, पढने को, शास्त्रों में ऐसा कोई भक्त नहीं मिलेगा, जिन्होने कष्ट ना उठाया हो। भगवान की प्रसन्नता के लिए यह कष्ट उठाना, यही वास्तव में भक्ति है। इसलिए िलरुगोस्वामीभक्ति शाम संधु के 64 अंग का वर्णन करते हुए 1 अंग बता रहे हैं।
कृष्ण अखिल चेष्टा, कृष्णा थे। अखिल चेस्टा यानि की भगवान कृष्ण की
प्रसन्नता के लिए चेष्टा करने चाहिए, प्रयास करना चाहिए।
तो इन्होंने बहुत सारी चेष्टाएं की प्रात महाराज को देखिये, किस तरह से उनको सताया गया, किस तरह से उनको तड़पाया
गया, अग्नि में डाला गया, कुएं में डाला गया, जहाँ पर जहरीले सांप थे,
पर्वत से फेंका गया, समुन्द्र की गहराइयों
में,
राक्षसों ने मिलकर भालों से बड़े बड़े, शस्त्र अवसरों से मारने का प्रयास
किया गया, जहर दिया गया, उनको होलिका के साथ अग्नि में बिठा दिया गया,
जलाकर राख करने के लिए, प्रलाद महाराज को मारने के लिए। कितना प्रयास किया? हरण कजप, यह तपस्या प्रलाद महाराज की थी। लेकिन तपस्या तपस्या नहीं लग रही थी उनको, क्योंकि भगवान से प्रेम था तपस्या,
तब तक तपस्या लगती है जब हमारा प्रेम नहीं होता है भगवान से। तो हालांकि हमारे लिए तपस्या जरूर है।
देखने को सुनने में लगता है कि भारत ने तपस्या की धूं, मारा ने तपस्या की, धू मारा लगातार।
6 महीने 1 पाँव में खड़े रहे।
भगवान को प्रसन्न करने के लिए। ओम नमो भगवते वासुदेव या धू महाराज।
6 महीने लगातार और विश्व की वायु
को, यूनिवर्सल ब्रीदिंग को, उन्होंने इनहेल कर
लिया,
अंदर खींच लिया, वैक्यूम क्रिएट कर
दिया पूरे ब्रहमाण में, अपनी भावना से, अपनी चेतना से, पूरे विश्व को, पूरे
भ्रह्मा को प्रभावित कर दिया। ध्रुमहाराजने। ये उनका संकल्प था, यह उनका डिटेनशन था।
है कोई भक्त जो पी बी टी
का हो, जिसने 6 महीने के बाद भगवान का दर्शन किया हो और वो है ध्रू महाराज, ध्रू महाराज।
उन्होंने पी बी टी नहीं ज्वाइन किया,
उन्होंने बी बी टी भी ज्वाइन नहीं किया, उन्होंने सी पी डी भी ज्वाइन नहीं किया। वो तो केवल वन में गये और
वहाँ जाकर नारद जी की कृपा से
उन्होंने तपस्या की घोर तपस्या की।
ये संकल्प था उनका। ध्रूविनिक्षाथीउनकी। भगवान को प्राप्त करने के लिए 6 महीने के अन्दर भगवत प्राप्ति करनी है। मुझे
यह इस प्रकार का संकल्प, इस प्रकार की झड़ता हमारे अन्दर होने स है। यतनत्टढड़ाब्रतये श्याम तो जनाना पुण्य करना स्वदोनदोनिर्मुक्ता भजनतेमामढड़बरता ढड़ब्रतहोकर कौन भजन कर पाता है, जो समस्त पाप से छुटकारा पा चुका
है, जिसके संस्कार से, इसके बीज से
खत्म हो चूका है, वो भगवान का भजन ढरता पूर्वक कर पाते हैं। तो ध्रूमाराऐसा भजन कर रहे थे, ऐसा
ध्यान लगा रहे थे। भगवान के ऊपर के पूरे ब्रह्माण में। 1 वैक्यूम क्रिएट हो गया, श्वास लेना कठिन हो गया। देवताओं के लिए भी
सबके सब चिंतित हो गए, परेशान हो गए। भगवान के पास गए। ब्रह्मा जी, ब्रह्मा जी ने पूछा कि ये सब क्या हो रहा है? देवताओं को लेकर। ब्रह्मा जी गए। भगवान ने कहा चिंता की कोई आवश्यकता नहीं है, मेरा 1 भक्त है, व मधुबन में तपस्या कर रहा है।
1 भक्त तपस्या कर रहा है। मधुबन में, पूरे ब्रह्माण में वैक्यूम क्रिएट कर दिया।
इसी तरह से गोस्वामी ने ब्रज में रहकर जो भजन किया, लोकनाथ गोस्वामी, भूगण गोस्वामी, इन गोस्वामियों ने जो वृंदावन में
रह कर भजन किया, उनके भजन का ही प्रभाव है, जो आज हम यहाँ बैठे हैं। क्योंकि इनकी जो चेतना है, इनकी जो
कृष्ण भावना है, पूरे ब्रह्माण में फैल
गई,
पूरे ब्रह्माण में फैल गई। 1 जगह भजन करने मात्र से हरे
कृष्ण, हरे, कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे, हरे,
हरे, राम हरे, राम राम राम हरे हरे।
1 जगह भजन करने का प्रभाव यह हुआ। पूरे ब्रह्माण में, जितने असंख्य जीवित है, सबको अज्ञात अनजाने में सुकृति मिल गयी भक्ति करने के लिए। इसी कारण से यहाँ बैठे हैं
ये। ऐसे महा भागवतों की, ऐसे शुद्ध भक्तों के भजन का प्रभाव है, जिसके कारण आज हम यहाँ बैठे हैं
कीर्तन सुनेंगे ऐसा लगा कि ब्रज में आ गया, क्या किर्तन करते हैं, दिव्य कीर्तन हैं, जिन्होंने किर्तन नहीं सुना श्रीपाद इंदिरा पुर का मेरी, ये प्रार्थना रोज, उनका कीर्तन
सुनिए, आपके हृदय में परिवर्तन आया।
तो बताइए मुझे।
फिर आप श्रीपाद इंद्रापुर ने ये संकल्प लिया कि मैं छोड़ के जाऊंगा ही नहीं। लेकिन आज पूरे संसार भर में उनका कीर्तन सुनते हैं।
लोग। हम तो लाउड स्पीकर में चिल्लाते रहते हैं, पंडाल से बाहर भी नहीं जाती है। आज
ये हालत, पूरे ब्रह्मांड में, पूरे
सारी, पूरे संसार भर में भक्त सुन
रहे हो उनका, कीर्तन, ये भजन का प्रभाव है प्योरिटी फोर्स।
और इसलिए इन लोगों ने बड़ी कठोर तपस्या की। श्रीपाद रोज 128 माला करते थे, लगभग
5 घंटे, 1800 शिलाओं की सेवा करते थे।
रोज सोच सकते हैं।
तपस्या तपस्या का बल है।
यह।
यह तपस्या का इतना प्रभाव होता है की पाषाण हृदय भी पिघल जाता है। भगवान भी स्वयं पिघलने लगते हैं।
अपने भक्त की तपस्या को देखकर, ध्रू महाराज की तपस्या को देखकर, प्रलाल महाराज की तपस्या को देखकर, ये सब तपस्या किए हैं।
विश्व विदामा, जो बाणों की शैया में लेटे हुए थे, प्रत्येक दिन 10 हजार
योद्धाओं को मारते थे, महारथी थे रोज, 10 हजार योद्धाओं को मारते थे विश्व बिताना।
उनसे बड़ा योद्धा कोई नहीं हुआ इतिहास में।
लेकिन जो बाणों की शैया में लेटे हुए थे, उन्होंने संकल्प लिया था। इच्छा मृत्यु का। उनका वरदान था। 56 दिन के लिए बाणों की शैया
में लेटे रहे, संकल्प लिया था। जब तक भगवान श्री कृष्ण का दर्शन
नहीं कर, प्राण, नहीं त्यागूंगा, मैं
उनके शरीर से रक्त बहरा है। ऐसी कृपा है भगवत चेतना में भगवत भक्ति में भगवत प्रेम के कारण जो आनंद की अनुभूति कर रहे थे, उस
आनंद में वो अपने कष्ट को भूल गए।
इसलिए भक्ति में आनंद आना बहुत जरुरी है। वो आनंद तभी आएगा।
जब हम तपस्या करें तब दिव्य पुत्र का ये न सत्यम शुद्धे यस्मान ब्रह्म शोखयम्तोअनंतम। जब अनंत आनंद की वृद्धि होगी तो तपस्या तपस्या नहीं होती है।
तपस्या उसको कहा जाता है की हम
करना नहीं चाहते हैं, फिर भी करना पड़ रहा है। तब वो तपस्या है।
अन्यथा अगर प्रेम है। आपका गुरु से, अगर प्रेम है भगवान से, तो फिर क्या है? 7 समुन्दर पार करके अमेरिका, चले, जाओगे,
औ और बड़ी सी में जाकर।
आप।
वहाँ पर अंतरराष्ट्रीय श्री कृष्ण भावनामृत संघ की स्थापना कर।
दोगे, जैसा की हमारे संता बगाचरशिलपरुबाज ने किया। ये प्रेम के कारण है।
यह प्रेम की तपस्या है, तपस्या नहीं है। उनके लिए ये आनंद है।
ऐसी तपस्या मन को आनंद आता है,
भरपूर आनंद आता है।
तो प्रलाद महाराज हो गए, ध्रुव महाराज हो गए, भीष्म बिताना हो गए। ब्रह्मा जी अगर बताइए। आप शास्त्रों में अनेक अनेक उदाहरण है। पांडवों को 12 वर्ष वन में बिताना
पड़ा
युधिष्टर महाराज पूरे विश्व के सम्राट थे।
हस्तिनापुर का राज सिंहासन उनको मिलना था। लेकिन दुर्योधन ने अत्याचार किया। दुर्योधन ने ऐसा ऐसी चाल चली की कहा। 5 गाँव तो छोड़ो सुई की नोक
के बराबर खड़ी हुई। सुई के नोक के बराबर भी मैं
तुम्हे जमीन नहीं दूंगा।
का।
1 तो लेटी हुई सुई होती है। थोड़ा जगह ज्यादा गिर सकता है।
1 खड़ी हुई सुई, खड़ी हुई। सुई की नोक के बराबर भी तुम्हें जमीन नहीं दूंगा। 5 का तो दूर की बात है।
का 12 वर्ष वन में और 1 वर्ष अज्ञातवास। पांडवों को वन में रहना पड़ा। कुंती मारा साथ चली गई, त्रपतीजीसाथचले गई,
वन में भटक रहे हैं। 12 वर्षों के लिए। क्या क्या, कष्ट नहीं सहा गया। दुर्योधन अत्याचार करता रहा, फिर भी लाषाग्रहमेंआग लगा दी।
पांडवों को मारने के लिए।
जहर देकर मारा गया था।
उनको कई बार बचपन में भीम को भी, लेकिन भगवान कृष्ण ने उनकी रक्षा की। दुर्वासा मुनि के शाप से बचाया। भगवान श्री कृष्ण ने इतना कष्ट पांडवों ने सहा और मार का युद्ध समाप्त हुआ।
पानों की विजय हुई। भगवान कृष्ण प्रस्थान करने वाले थे। हस्तिनापुर से द्वारका में रखा, पर बैठने ही वाले थे।
कुंती महारानी ने प्रार्थनाये शुरू कर दी। विपदा संतहताशश्वततत्र तत्र जगत गुरु भवतोरदर्शनमश्याल, अपुनर्भव दर्शन।
हम तो आपका निरंतर दर्शन करते रहना
चाहते हैं, लेकिन आप द्वारका जा रहे हैं। में छोड़ कर कैसे रहेंगे? आपके बिना हम आप की विरह वेदना में हमारा हृदय तो द्रवित हो रहा है। हम आप के विरह को कैसे सहन पाएंगे? आप प्रस्थान कर रहे हैं द्वारका की ओर।
जब जब कष्ट आया, तब तक आप आये। हमारी रक्षा के लिए
लाक्षाग्रह समय कितने में थे। मैंने कहा कहीं 2 मीटर है, कैसे लाक्षाग्रह में आग लगाई गई। 12 वर्षों के लिए भेजा गया। राज सिंहासन छोड़ना पड़ा कितना सारा कष्ट
कितना सारा अत्याचार उनके साथ हुआ। जब जब हमारे ऊपर कष्ट आया, हमने
आपको याद किया, हमने आपको याद किया तो आपने हमें दर्शन दिया।
अब कष्ट सारे समाप्त हो गए हैं,
आप कठिनाई सारी खत्म हो गई हैं,
अब जा रहे हैं, द्वारका जा रहे हैं।
अब हमारा क्या होगा? विपदा संतता शश्वत तत्र तत्र जगत गुरु भवतो दर्शनम श्याल पुनर भवत दर्शन।
आप हमें कष्ट दीजिये, पुनः दुबारा कष्ट दीजिये, क्यूंकि कष्ट देंगे। अगर
आपको याद करेंगे, आपको याद करेंगे, आपका स्मरण करेंगे और आपका स्मरण करेंगे तो आप दर्शन देंगे। इसलिए कुंती मारने दे रहे। कह रहे हैं की आप कष्ट दीजिए,
कौन सा भक्त है। बताइए जो रोड राजा पर सारी राधा,
श्याम सुन्दर गिरिराज गोवर्धन के सामने प्रार्थना करता है।
हे गिरराज।
मुझे कष्ट दीजिये मुझे कष्ट दीजिये।
हम तो यही प्रार्थना करते, हम छुटकारा दिलाइए कष्ट को झेल नहीं पा रहे। कुंती मारा से जो महाभागवत है, वो
क्या प्रार्थना करनी है। और कष्ट दीजिये। इस कष्ट में बड़ा आनंद है, आपके लिए, कष्ट उठाना बड़ा आनंद आता है। प्रपात जी ने भी यह कहा, ये
जो पेज है मेरा कष्ट उठाने का, प्लीज मुझ से मत छीनिए। गा। शिष्यों ने कहा की प्रपात प्लीज, आपका श्वास ठीक नहीं है, आप विश्राम करिए। अब हमें करनी चाहिए। दिए। हम लोग जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार हैं। पर पाने प्लीज।
ये जो मेरा प्लेज है, कष्ट उठाने के लिए, कृपा करके मेरे हाथ से मत छीनिए प्लीज।
आपसे प्रार्थना है की इस कष्ट में भगवान के लिए जो कष्ट उठाया जाता है, से बड़ा आनंद आता है,
बहुत
आनंद आता है उसमे कष् उठा के। तो देखिये, पहले तालियां बजाने से पहले हमे कस उठाना होगा और अनुभूति करनी होगी तब तालियां बजाने का अधिकार है। तो हम क्या बता रहे थे?
पांडफगणयेपांडफगण जो है इन्होंने इतना कस उठाया
वन में चले गए। युधिष्टर मार, जो पूरे विश्व के सम्राट हैं, वो जंगल में घूम रहे हैं। पत्थर कंकड़ कैसे कैसे कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, कैसी कैसी तपस्याओं का सामना करना पड़ा।
और देखिये रामायण में स्वयं भगवान श्री
राम, महाराज दशरत ने जो बचन दे दिया, कई कई को, कई कहीं ने क्या, वचन, क्या, वरदान मांगा, उनसे क्या मांग की। उन्होंने के 1 तो भरत जी को आप रात सिंहासन दे दीजिये और राम को 14 वर्षों के लिए वनवास।
ये जाग तो दशरत महाराज, दशरथ द्रवित हो गए। ये क्या मांग लिया तुमने?
कहीं कहीं
राम को वन, वे 14 वर्षों के लिए
उनसे आगे बोला नहीं गया। 2 गया कंठ उनका गदगद हो गया। आँखों में से आंसू झर झर करके बहने लगे, शरीर में कंपन होने लगा, रोमांचित होने लगा, बाल खड़े हो गए, रोंगटे खड़े हो गए। ये क्या बोल रही है? ये क्या बोल रहे हो?
तुम?
राम को 14 वर्ष वनवास, मेरे 11 सास और राम है।
मेरी 11 आवाज में राम हैं, मेरे 11 चिंतन में राम हैं। दिन रात में राम का ही चिंतन करता हूँ।
बिना राम के कैसे जीवित रहूँगा मैं? बिना राम के तो मेरे जीवित करने
का जीवन जीवन ही बेकार है। जीवित रहने का मुझे कोई अधिकार नहीं है। और कई कई जो हैं। फिर भी निष्ठुर होकर कठोरता का पालन करने लगे और कठोर ह्रदय से बोलने लगी। ये तो आपने ही वचन दिया था। आपने ही कहा था कि 2 वरदान देंगे आप, मुझे समय आने पर और समय आ गया है वो। इसलिए मैं आपसे यह मांग कर रही हूँ। और रीत है रघुकुल रीत, सदा चली
आई, प्राण जाय, पर वचन न जाए।
अपने वचन से कैसे हट सकते हैं। बचन दिया। आप ने ही कहा था, महाराज तो बस। उसके बाद भगवान श्री राम के लिए संकेत ही, पर्याप्त महाराज दर्श के तर्क
भी तर्क नहीं किया भगवान राम ने। ये कैके के कहने पर आप मुझे वन भेज रहे हैं। ये कोई बात हुई बताई कल मेरा राज अभिषेक होने वाला है। और ये कई कई मंथरा के कहने पर मंथरा जो है कान भरती रहती है। सबका दिमाग खराब कर दिया है माता
से
और इसी के कहने पर वो है। ये सब जो है उसके बहकावे में आ रहे हैं।
कोई बात हुई। आप राजा हैं, शत्रिय हैं। आपने वचन दिया तो क्या हुआ। लेकिन ये धर्म है।
और इस धर्म को गलत साबित करने के लिए आप झूठ भी बोले तो क्या फर्क पड़ता है।
लेकिन आप मुझे जंगल भेज रहे है। 14 वर्षों के लिए। यह अन्याय है। मैं नहीं जाऊँगा जाना। तो ये कई के जाए बुलाओ सैनिकों को उठा के फेंक, उसको बाहर।
ऐसा भगवान श्री राम ने नहीं किया।
भगवान राम ने तो 1 शब्द नहीं बोला। वन का वेश पहन कर, 1 राख
का वेष धारण कर कर चुपचाप। निकलने की तैयारी की माता, सीता ने कहा, क्या मैं 1 क्षण इस महल में नहीं रह सकती। मैं भी आपके साथ चलूँ लक्ष्मण। जी भी तैयार हो गए। वर की तरह परेशान कर लिया भगवान श्री राम ने।
स्वयं दर्शाया की। तपस्या का जीवन बिताना आवश्यक है।
वन में 14 वर्ष भगवान श्री राम भटकते रहे, भटकते रहे।
तो इस प्रकार हम देखते हैं।
इस प्रकार का कष्ट सभी भक्तों ने उठाया है।
महान चारियों ने सबने
कल चर्चा हो। श्री पुरी का को क्यों पसंद करते थे। मैं आपको बताता हूँ, इसका कारण क्या है? गुरु महाराज बड़े तपस्वी हैं।
तपस्या जो भी करता है, उससे बड़े खुश होते थे।
जो भी तपस्या करता था, उससे बड़े खुश होते।
श्री कथा सुनाते थे। सुनाने का मिला था, मौका। मिलता था गोपाल जी की प्रसन्ता के लिए। श्री वृन्दावन से नीलाचल की ओर और गर्मी में चल कर गए। चन्दन लाने के लिए।
कितना किलोमीटर है? लगभग 1600 किलोमीटर होगा, वृन्दावन से जगनपुरी 1600 किलोमीटर। गर्मी के मौसम में, मई के महीने
में जब गर्म गर्म रहती है, उस समय ट्रेन नहीं, प्लेन नहीं, हवाई, जहाज नहीं। गोपाल जी की आज्ञा है।
जाओ और चन्दन लेकर आओ। कोई सोचता है तो विषय से भजन कर रहे हैं। लेकिन जब आज्ञा होती है, वही भजनानंदी जो हैं, गोष्ठानंदी बन जाते हैं, वही
भजनानंदी फिर गोष्ठा ंदी बन जाते है। अरे भगवान की आज्ञा चलो भैया प्रचार करते हैं।
अब अपने भजन का प्रभाव दिखाएंगे। पूरे संसार को इसलिए शिप्रा ने भी खूब भजन किया। लाइफ टाइम फॉर परेशन जहाँ मौका मिला प्रोपल प्रभुपाल जी निकल पड़े, उनके ये
भजन का ही प्रभाव है, उनकी तपस्या का ही प्रभाव है की आज हम
यहाँ पर बैठे हैं। श्रीपाद माध्यनद्रपोरी 1600 किलोमीटर चल के जा
रहे हैं, अकेले चंदन लाने के लिए,
गोपाल जी के लिए, कितना कश उठा है श्रीपाल मधवेनदरपुरीने। उस गर्मी के मौसम में भयानक गर्मी पड़ती है।
मई के महीने में
रेती गरम गरम रहती, उस रेती से गुजर कर जाना है, चलते जाना है, चलते जाना है। रस्ते में कोई होटल नहीं है, ढाबा नहीं है, गेस्ट हाउस नहीं है।
और नदी का तालाब का पानी है, आरोप पानी नहीं लगा है, फिल्टर वाटर
नहीं लगा है, कोई जूस की दुकान
नहीं है, कोई गन्ने का जूस नहीं
है, चलते जाना है, चलते जाना है, चलते जाना है, नीलाचल की और गोपाल जी के लिए, चंदन लेकर आना है। और तपस्या इसलिए जो भक्त होते हैं,
समर्पित होते है, भगवान की प्रसन्नता के लिए, कोई भी कष्ट उठाने के लिए तैयार हो जाते हैं। वो सोचते नहीं हैं कि मेरा क्या होगा,
जो होगा, मंजूरे खुदा होगा।
सर्व धर्म, सभी धर्मों को त्याग कर, मेरी जाओ। मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्त कर
दूंगा, डरो, मत, निकल, पड़ो, नीलाचल की और चन्दन लेकर आओ। हम सोचते रहते हैं, सोचते रहते हैं, मेरा क्या होगा, मेरा क्या होगा, मेरा क्या होगा, मेरा क्या होगा?
भाई, तेरा क्या होगा?
सबको शरीर छोड़ना ही यही होगा, प्राण
सब को त्यागना पड़ेगा। 1 दिन यही होगा और कुछ नहीं
होगा,
मेरा क्या होगा? अरे क्या होगा? भाई क्या कर लोगे, तुम इस संसार में रह कर लोगे, मकान खरीद लोगे, धन इकट्ठा कर लोगे, जमीन जायदात इकट्ठा कर लोगे, परिवार बना लोगे, सरकार बना लोगे, देश बना लोगे, क्या बना लोगे,
ब्रह्माण की सृष्टि कर लोगे, ब्रह्मा जी तक को भी शरीर छोड़ना पड़ता है। तो हम किस खेत के भक्त हैं। मूली शब्द अच्छा नहीं लगता, मूली से तो बेटर है। हम लोग
तो तपस्या का जीवन सबने किया। श्रीपाद माधवेन्द्र पुरी 1 बहुत बड़े उदाहरण हैं, इसलिए उनके बारे में बार बार
कथा सुनाई जाती है।
हम सब भक्तों को बार बार बनाने के लिए, समझाने के लिए आचार्यगण जो है।
खुद अपने आचरण के द्वारा। सिखाते है कि भक्ति करने का मतलब क्या है? भगवान को प्रसन्न करने का मतलब क्या होता है? इसलिए हमारे गुरु महर भी कहते थे
की भौतिक सुविधा 1 भक्त के लिए
कब्र के समान हैं। मेटल कफर्ट, ज लक, कॉफिन, कॉफी नहीं, कॉफिन, कॉ, फिन कब्र है? तो इसलिए अखिल चेस्टा, कृष्णा, श्रीपाद, पुरी, ध्रुव, महाराज, प्रलाद, महाराज, भीषण, विदामा, पांडव,
कुंती, मराणी, ब्रह्मा जी, वृंदावन के स्वामी शास्त्र भागवत पड़े हम लोग भागवत में देखिये, प्रचेताओं के बारे में।
सुनिए समुद्र के हजारों हजारों वर्ष तक भगवान को प्रसन्न करने के लिए घोर
तपस्या की
पर है।
भागवत में प्रचेताओं की कथा पढ़ी है। चेतावनी कितनी घोर तपस्या की। भगवान को प्रसन्न करने के लिए, जल में खड़े रहे हजारों वर्षों के लिए और दिसम्बर के महीने में ब्रज की जो कुमारियां हैं, जिनकी उम्र लगभग 5 साल की भी नहीं हुई थी। 5 साल से भी निचे की उम्र थी।
वो कात्यानी की पूजा करने लगी। ठंड के मौसम में, दिसम्बर के महीने में कात्यायनी व्रत रखा उन्होंने।
1 महीने और यमुना जी के भीतर जाकर खड़ी रहीं। उस ठंड में स्नान करते थे। प्रात काल सूर्य धोने से पहले यमुना जी में स्नान करना होता है कात्यानी व्रत दुर्गा जी को प्रसन्न करने के लिए। इसलिए क्योंकि गोपकुमारियाँ ये कुमारियाँ चाहती थी। भगवान कृष्ण को अपना पति बनाना।
भगवान कृष्ण को अपना पति बनाने के लिए। 1 महीने लगातार रोज में जाती और
ठंड में जो बर्फ का पानी होता है, वैसा यमुनाजी के भीतर खड़े होकर स्नान करती थी।
वो
कात्यायनी देवी की पूजा। ये गोपकुमारियाँ 5 साल की
तो बिना तपस्या के किसी को भी भगवान मिले नहीं। आज तक न कभी मिलेंगे।
ये तो शास्त्रों का निर्णय है। ब्रज की गोपकुमारियों ने ये साबित किया है।
कठोर? कठोर तपस्या दंड कारण के ऋषि गौर तपस्या करने लगे।
भगवान राम को अपना पाती के रूप में चाहते थे। इसलिए वो सब क्या बनी, ब्रज की
गोपियाँ बनी, तपस्या किया न्होंने वसुदेव देवकी ने तपस्या की हजारों हजारों वर्षों के लिए।
सूखे पत्ते खाए, कश्यप और आदि, पृष्णि और सुतपा, वसुदेव और देवकी
घोर तपस्या
भगवान को अपना बचा संतान बनाने के लिए कितनी तपस्या उन्होंने की।
ऐसे अनेक उदाहरण हैं।
शास्त्रों में अनेक उदाहरण हैं।
नामा चारे हरिदास ठाकुर, जिनको 22 बाजारों में पीटा गया, कोड़ों से जल्लादों ने पीटा।
हरिदास ठाकुर ने कहा कि मेरा शरीर खंड खंड कर। 2 लेकिन मेरे मैं हरि नाम लेना नहीं छोडूंगा।
192 माला रोज नामा चारे हरदास ठाकुर जल्लादों ने पीटा। माया देवी ने परीक्षा ली उनकी, लेकिन
हरिदास ठाकुर का मन उनके भजन में ही लगा रहा। वो हिले नहीं, गुरुननदनाहरदास ठाकुर का भजन ऐसे था।
22 हजार मे उनको पीटा गया, कोड़ो से जल्ला। 2 उन्हें और तुम मरते क्यों नहीं
हो, हमारी पत्नियां विधवा हो जाएगी, ये काजी छोड़ेगा नहीं मरो, आपके लिए, मर जाते, फूल गए गंगाजी में, फिर कुछ ही दिनों के बाद वापस निकल आया। हर दास ठाकुर की जाए तो इस
तरह से देखते हैं।
11 भक्त पढ़ेंगे हम शास्त्र पढ़ते हैं। इस शास्त्रों को पढ़े और ग्रंथों को पढे, भागवत पढे, चेतन, चरता, मत पड़े। और जब जब भक्तों का चरित्र आता है तो देखिये उन भक्तों ने कितना कष्ट उठाया है।
1 भी भक्त को मिलेगा पूरे शास्त्रों
में, जो बिना उठाए चला गया, कोई 1 होगा बिरला, जिसको मिल गया होगा। कृपा वो भी मैं बता नलकुबर मणि गरीब।
अब सराओ के साथ मंदाकनी नदी में
स्नान कर रहे थे। दोष थे, 2 मत थे, नशे में थे नारी। आए। नारजी ने देखा, अब सराओ ने तो अपना वस्त्र से अपना शरीर ढक लिया।
निर्लज
शरीर नहीं ढका, नारद जी देख रहे हैं, फिर भी बेशर्म होकर वो वैसे ही खड़े रहे। नारदजी ने शाप दे दिया की ठीक है, तुम्हे तो वसरीन होने का ही अच्छा लगता है। तुम्हें ऐसे खड़े होने का तो तुम्हें तो वृक्षों की योनी में जाना चाहिए। और न वृक्ष योनि में भेज दिया।
कहा भेजा नारद जी ने।
लंदमाराकेघरपर सौ दिव्य वर्षों के लिए, 36 हजार वर्षों के लिए, ल। नलकुँवर मणिगिरी नंद महाराज के घर पर खड़े रहे पेड़ के रूप में। और जब लीला संपन्न हुई, भगवान कृष्ण ने ऊखल को उठाया और वृक्षों के बीच में ले गए। और दोनों देव स्वरूप में प्रकट हो गए। देव स्वरूप में प्रकट हो गए। तो भगवान क्या कह रहे हैं? जानते है क्या कहा उन्होंने उन्होंने ये मत सोचना की। तुम्हारे भजन के प्रभाव से मैं तुम्हे दर्शन दे रहा हूँ।
तुमने बड़ा भजन किया है, इसलिए दर्शन दे रहा हूँ। ये मत सोचना।
मैं तुम्हें इसलिए दर्शन दे रहा हूँ कि नारद जी ने कहा था। इसलिए
नारद जी ने कहा था कि मैं दर्शन दूंगा और धार करूँगा। तुम्हारा। इसलिए मैं दर्शन दे रहा हूँ।
तुम्हारी क्या योग्यता भाई। तुम तो 36 हजार हजार साल जो है। इस विशुनी में, केवल रोते रहे हो। बस शाताबी तुमने किया है। ये भजन तो न किया है। अब जाओ देव लोग जाओ और वहाँ जा के भजन करो।
तो कष्ट उठा लिया इतना वृक्ष रूप में।
लेकिन उस कष्ट में, उस तपस्या में भगवान का भजन नहीं किया। तो ऐसी तपस्या का क्या फायदा। इसलिए उनको देव लोक भेजा गया।
इसी तरह देखते है कालिया को देखते हैं। कालिया ने यमुना जी में जहर भर
दिया, चारों तरफ हाहाकार मच गया।
गाय बछड़े वाले सब मूर्छित हो गए।
जहर उगल रहा था, वो बड़ा दुषित हो गया। और कालिया का मन करने के लिए भगवान कृष्ण कदम वृष्यं गए और वहाँ से छलांग मारी।
कालिया नाग के साथ युद्ध शुरू हो गया।
फलों में जकड़ने की कोशिश की कृष्ण को।
और कृष्ण जो है, उस कालिया नाक के चक्कर लगा रहे हैं, सर्कल में घूम रहे हैं।
और उसके बाद कालिया नाक के फलों के ऊपर जो है, नृत्य करने लगे। कालिया नाक के के फनों के ऊपर जो है। अपने चिर छोड़ दिए।
भगवान ने। सारे अनर्थों से छुटकारा मिल गया, मुंह
से खून निकलने लगा, सारे अनर्थ उसके समाप्त हो गए। भगवान के चरण पड़ते ही।
लेकिन ये सब होने के बावजूद भी भगवान कृष्ण ने कालिया को ब्रज में नहीं रखा।
बोला रमणदफिजलजाओवहाँ जाओ यहाँ, मत घूमना। ब्रज में
देखिये, सोच के देखिये आप। इतना कुछ होने के बावजूद भी ब्रज
में एंट्री दी, उनको बोलिये जाइए। रमणकदीप में जाइए।
तो कहने का मतलब ये है कि भजन करना है तपस्या।
अगर करनी है तो गुरु और भगवान की प्रसन्नता के लिए करनी है।
ऐसी तपस्या में करनी है। तो ऐसे अनेक उदाहरण हैं शास्त्रों में,
जिससे पता चलता है की हमें तपस्या करने अब 1 बार बताऊंगा मैं आपको तपस्या, हमारे गुरु महाराज की तपस्या प्रोपज,
तपस्या प्रहोपबाजी की तपस्या देखिये, आप पुरानी दिल्ली छिपिवाडा में अकेले रहते थे, प्रहोपबाजी वृंदावन से, दिल्ली आया करते थे, थर्ड क्लास कम्पार्टमेंट में, ट्रेन में, और अकेले
घूमते थे नई सड़क में, चांदनी चौक में, अखबार खरीदते थे, नई सड़क से, चावड़ी बाजार से। और भक्त दर्शन पत्रिका छापते थे, कनॉट प्लेस में, चांदनी, चौक में, कई बार धूप में सन स्ट्रोक के कारण गिर जाते थे। गाय ने, बैल ने, मारा, उनको, दर
दर भटक रहे थे।
उनको ये नहीं पता था की शाम को मैं क्या पाऊंगा। प्रसाद में ये शिला प्रोपज की घोर तपस्या थी हम सबको यहाँ पंडाल में इकट्ठा करने के लिए। इसलिए आज हम यहाँ बैठे हैं। और वो ही नहीं, यह समाप्त नहीं, ये तो शुरुआत थी। और प्रोपज सोचे मैं अमेरिका, कब, जाऊँगा, अमेरिका, कब, जाऊँगा में प्रचार कब होगा,
दिल का दौरा पड़ गया जहाज में 2 बार, लेकिन रुके नहीं, चलते रहे अमेरिका की ओर।
और वहाँ जाकर किसी कार्य लॉजिस, हार्ट सर्जन के पास नहीं गए, सीधे गए, न्यू यॉर्क में गए और बारी स्ट्रीट में कमरा ले लिया। और वहा जाकर भी तीसरी बार हार्ट
अटैक हुआ, तीसरी बार दिल का दौरा पड़ा शीलप्रबाजी को। लेकिन फिर भी रुके नहीं,
ये था उनका संकल्प। अपने गुरु की आज्ञा का पालन करने के लिए। अफकोर्स हम नकल नहीं कर सकते हैं। प्रवाल जी को 1 बार प्रपात से पूछा कि ने? propel want to preach in the nitकlbप्रwपाल यू कैन प्रीच इन द नाइट क्लब बट मेक शोर, यू कम बैक
तो
बारी सीट में अम्मी जाके, सोचे भी बनायेंगे वहां पर सेंटर खोलेंगे और ड्रग्स के बीच में। यह हमारे लिए शायद संभव न पाए।
लेकिन जो हमारी गुरु की आज्ञा है, हमारे लिए, जो हमें करना है, वो
तो हमें ही करना है। और कोई नहीं करेगा। तो शिलप्रोपालजी ने ऐसी तपस्या की, ऐसी तपस्या की की जीवन के अंत काल तक तपस्या को त्यागा नहीं। इसलिए भगवत गीता में भी बताया गया है।
यज्ञ दान, तपस्या क्या बोला है? यज्ञ दान, तपस्या, यज्ञ दान, तप कर्म,
त्याग, कार्य में वतद, यज्ञोदन तपश्या पावनानीमनिषिना,
यज्ञ दान, तपस्या कभी नहीं त्यागना चाहिए। ये महात्माओं को भी शुद्ध करता है। और जो महात्मा नहीं है, उनको भी शुद्ध करेगा।
बोले महात्मा को शुद्ध करता है। हम तो महात्मा है नहीं, हमारा क्या होगा?
अरे महात्मा जो नहीं हैं, उनको भी शुद्ध करेगा, जो महात्मा है, उनको भी शुद्ध करेगा।
और जो महात्मा है, उनको भी शुद्ध करेगा। यज्ञ दान और तपस्या। वैसे देखा जाए तो यज्ञ किसके लिए होता है? यज्ञ होता है, वास्तव में भर्मचिोकेलिए दान होता है, ग्रस्तों के लिए, तपस्या होती है सन्यासियों के।
लेकिन अगर भक्ति के बारे में चर्चा
होगी तो यज्ञ दान, तपस्या तीनों का तीनों करना पड़ता है। सबको थोड़ी, थोड़ी मात्रा में अपनी क्षमता के अनुसार।
यज्ञ दान और तपस्या, ये कभी नहीं त्यागना चाहिए। और हमारे गुरु मान जीवन के अंतकाल तक कभी नहीं त्यागा। तपस्या के मार्ग को कभी नहीं त्यागा। चलते रहे, चलते रहे।
गुरु मारा ने बोला मैंने प्रबालजी को वचन दिया था कि मैं कभी रुकूंगा नहीं आई। विल कीप ऑन मूविंग इसलिए अंत काल
तक वो चलते रहे, यात्रा करते रहे, भ्रमण करते रहे, प्रचार करते रहे। और ने फैसला कर लिया। अगर मैं प्राण त्यागूंगा तो युद्ध भूमि में ही प्राण त्यागूंगा। i will die on the bat, file
to please a लो। ये उनकी घोर तपस्या थी हमारे गुरु महाराज की और उनके प्रणाम मंत्र में सब कुछ पता चलता है। बोले मिला था कुछ और। लेकिन सीधा टॉपिक जाऊंगा तो इतना इंट्रस्टिंग नहीं लगेगा। इसलिए मैंने सोचा पहले इसकी रूप रेखा बनाई जाए। अब हम क्वाली अब असली सब्जेक्ट में आते हैं।
ठीक है न।
तो गुरु का प्रणाम मंत्र क्या है? प्रभु पाद, साहित्य, प्रचार कृत्वान साधु भगवत पादाय।
कुछ लोग उठ के जा रहे हैं। ऐसा रहा है कि आज प्लेजिंग हो जाए। कहीं पेज होगा, चिंता मत करिए, केवल श्रवण ही करे।
पास से साहित्य यह प्रकाश प्रचारण कृत्वान साधु भगवत बदाय ते नम। ये गुरु मार्ग प्रणाम मंत्र है। हम रोज इसका उच्चारण करते हैं। जी, गुरु महारा ने हमारे क्या किया,
प्रहुपाजीके साहित्य को प्रकाशित किया, उसका प्रचार
किया, उसका वितरण करवाया
तो उनको नमस्कार नहीं करेंगे। हम उनको नमस्कार करेंगे, उनको प्रणाम करेंगे।
ये प्रणाम मंत्र हमेशा याद रखना चाहिए। रोज प्रणाम मंत्र जोर जोर से बोलिए
और इसका अनुवाद पढ़िए और सोचिये मनन करिए की ये प्रणाम मंत्र अपने जीवन में कैसे उतारो।
यह प्रणाम मंत्र अपने जीवन में कैसे उतारा। जिस तरह से गुरु मारा ने दिन रात लगा दिया, इन ग्रंथों का प्रचार प्रसार करने के लिए, पूरे संसार भर
में ग्रंथों का वितरण करने के लिए मारा लगे रहे। लगे रहे। लगे सो जब गए मारा नाइनटीन सेवेंटी फॉर सेवंटी फाइव में प्राजी ने भेजा तो वहाँ के जी बी सी है। उस समय हरीगेशमारणतोउनको पता चला कि गुरु महार को भेजा जा रहा। शिप्रा भेजने वाले हैं तो उनको थोड़ा सा लगा इन को भेज रहे हैं। वहाँ तो बड़ा सेंसिटिव है रशिया में कम्युनिस्ट कंट्री है उनके प्राजी को बोला की प्रवाल रशिया में तो बहुत कड़क नियम है, कम्युनिस्ट हैं सर कम्युनिस्टम फैला हुआ है। तो वहाँ तो प्रचार करना तो बड़ा ही मुश्किल है। आप इनको भेज रहे हैं। तो प्रवाल ने कहा कान प्रीचिंग यू कंटिन्यू और प्रीचिंग लेटर टू द बusनesप्रोपपाल यू कंटिन्यू और प्रीचिंग लेटर टू द बिजनेस बिजनेस का मतलब बुक डिस्ट्रीब्यूशन इस और फैमिली बिजनेस तो गुरु महाराज वहाँ पर इसी मूल से गए रात को भेजा बी बी डी का रेप्रजेंटेटी बनाकर भक्ति वेदान बुक्स के करते हुए गुरु महाराज गए थे रशिया पहले सबसे पहले
और वह मॉस्को बुक फेयर में सबसे
पहले डिस्प्ले किया था हमारे बुक्स और वहाँ पे हजारों हजारों किताबें स्मगल की गई थी प्रैक्टिकली और वहाँ पर बेसमेंट में 1 प्रिंटिंग मशीन लगाया था उस प्रिंटिंग मशीन को देखा गुरु महाराज ने उस मशीन से इंक निकाला और माथे पर तिलक लगाया और उसको दंडवत किया उनहोंने हा गुरु महाराज मशीन को क्यों
दंडवत कर रहे हैं।
उन्होंने कहा ये मशीन धन्य है मशीन के द्वारा। प्रो पाजी के ग्रंथ छपने वाले हैं।
तो इतना खतरे में भी महाराज निकल
पड़े रशिया की और उन्होंने यही बताया 1 बार महाराज मुझे बता रहे थे
प्रो पाजी कुछ बोल देते थे।
हम दोबारा नहीं सोचते थे इसलिए उनको बोला रशिया जाओ तो रशिया चले गए तुरंत और रशिया जा के ऐसा धमाका मचाया उन्होंने की।
आज पुरे रशिया में हजारों हजारों भक्त
हैं,
जो गुरु मारा की प्रेरणा से अनेक अनेक ग्रंथों का वितरण कर रहे हैं।
ये है तपस्या तपस्या का जीवन, देखिये 1 बड़ी महत्वपूर्ण बात है, मैं आपको बताना चाहता हूँ। चेतन ने चन्द्रामृत में 1 बहुत सुंदर श्लोक आता है। और ये प्रबोधानंद सरसती ठाकुर ने लिखा है।
यथा यथा गौर पदार, विन्देविनदेत, भक्ति कृतपुण्य
राशि तथा तथो सरपती हृदियकस्माल राधा पादाम बोझ सुधा राशि।
जिस मात्रा में कोई व्यक्ति जिसने अनगणित पुण्य कर्मों का संचय किया है, गौरंग महापुर के चरण कमलों में भक्ति प्राप्त
करता है, उसी मात्रा में उसके ह्रदय
में स्वत ही श्री राधा रानी के
चरण कमलों के अमृत सागर की बाढ़ उमड़ने लगती है। यानी कि गौरंग महापुरी को शरण लेता है। संकीर्तन आंदोलन अपना कोई योगदान देता है तो राधा रानी की कृपा स्वत ही मिलती है। ऐसा बोल रहे है। प्रमोद ठाकुर अलग से प्रयास नहीं करना पड़ता। राधा कृपा के लिए, राधा रानी की
कृपा के लिए संकीर्तन में केवल भाग लेना पड़ेगा। आपको इस नाइटी सेवंटी फाइव में शिकार में कहा विश्वामित्र मुनि को जो तपस्या का फल 60 हजार साल के बाद मिला, वो ही तपस्या का बल कलयुग में कुछ लोग कुछ दिनों के संकीर्तन
में ही मिल जाता है। हा है नाइनटीन सेवंटी फाइव शिकागो में,
कुछ दिनों के संकीर्तन में ही अरे कुछ दिनों का संकीर्तन कर ले।
अगर हम 60 हजार साल तपत्यानहीकरसकते तो कुछ वर्षों के लिए ही कर ले।
तो।
इसलिए हम लोग जो है अगर आप
चाहें, इस विल, वे अगर आप चाहेंगे तो होगा, नहीं, चाहेंगे तो नहीं होगा।
इसलिए हमारे गुरु मार। हमेशा बड़ा सोचते थे, प्राजी हमेशा बड़ा सोचते थे। अरे शिकार करो तो गैडेकाशिकार करो हंटारायनोसरेस। इसलिए बड़ा सोचिये आप बड़ा सोचेंगे तो बड़ा होता है।
हमने देखा है, हमने इसका अनुभव किया है, यह करके देखा है।
हमने।
1 बार कदम उठाए बड़ा करना है,
वो हो जाता है।
जिन भक्तों ने बड़ा किया है।
पूछ वो बताएंगे आप जैसे महोत्स बहुत बड़े डिस्ट्रीब्यूटर है, वर्ल्ड के नंबर वन डिस्ट्रीब्यूटर हैं उनका। वीडियो में दिखा सकता था। आपको यहाँ उन्होंने बताया कैसे उन्होंने अमेरिका
में, अमेरिका में लोन इंडियन्स को, अमेरिकन
को भागत सेट दिया। 1 दिन में 55 भागत सेट वितरण किए उन्होंने।
1 दिन में फिफ्टी फाइव सेक्स और 1 वर्ष में वन, वन हंड्रेड सेवेंटी,
सिक्स भागत सेट्स उन्होंने अकेले वितरित किया, स्पोंसर नहीं। 11 करके 11 व्यक्ति के पास जाके और साथ में 18 हजार डॉलर का कलेक्शन भी किया उन्होंने। 1 दिन एटीन थाउजन्ड डॉलर्स, 1 दिन में कलेक्शन उनका फिफ्टी फाइव भाग तम सेट्स।
ये है चमत्कार शिल्पाजी का, यानी की क्या कह रहे है क्षेत्र में महा ब्रू की कृपा। ऐसी असम्भव कार्य भी सम्भव हो जाता है।
उनकी कृपा न हो तो सम्भव कार्य भी असम्भव हो जाता है।
इसलिए बड़ा सोचिए छोटा मत सोचो बैंक की तरह, चूहे की तरह, सोचो शेर
की तरह, हाथी की तरह और शिलर प्रपज जैसे बब्बर शेर की तरह। इसलिए प्राजी के बारे में 1 बार बताया।
1 ब्रजवासी ने जो भक्त 1 में जाकर भजन करना रहा था।
में उस ब्रजवासी ने कहा रजवासीनेपूछाअरे, आप वृंदावन में क्या कर रहे हैं? आप तो इस के भक्त हैं, आप तो प्रचार करते हैं न, बैठे क्या भजन कर रहे हैं? नहीं, दिल्ली में, बम्बई में बड़ी माया है, इसलिए मैं यहाँ के भजन करने आया हूँ। माया से मुझे बड़ा डर लगता है, माया से मुझे बड़ा डर लगता है, माया से मुझे डर लगता है। बड़ा
क्या बात करते हो? प्रभु जी, आपके दादा तो बब्बर शेर थे, अब गीदड़ कैसे निकले? आपके दादाजी बब्बर शेर थे, आपके पिता
शेर थे, और आप चूहे कैसे निकले? इसलिए अगर हम कहना चाहते हैं कि हम गुरु मारक शिष्य हैं, शिलप्रपाजीकेपोते हैं, तो उठाइए हथियार।
और ये हथियार हमारे ग्रंथ है, इससे बड़ा हथियार कोई नहीं है। ये हथियार उठाए और निकल पड़ी सड़क पर हलाल कर दिए। मैदाने जंग में युद्ध शुरू हो चुका है।
माया के खिलाफ बोलेंगे प्रवर, सफलता तो मिलती ही नहीं। मैं क्या करूँ, मैं क्या करूँ, मैं क्या करूँ, मैं क्या करूँ।
1 भजन 1 गजल गाया था, 1
बहुत बड़ा पुराना, उसका नाम क्या था, गुलाबी गुलाब ली, ने 1 और था
कोई
1 वो भी सी रोता रहता था। अभी तो मैं जवान हूँ, अभी तो मैं जवान हूँ, अरे जवान हो तो
जवान की तरह काम भी तो करना
पड़ेगा, गाने से थोड़ा जवान हो जाएगा कोई। इसलिए जो ग्रंथों का वितरण करते है,
संकीर्तन गवा संकीर्तन में जो भाग लेते
हैं, वो कभी भूरे होते ही नहीं है।
वो हमेशा जवान रहेंगे। सीधा प्रहपाजीइसलिप्रहपा जी कहते थे जब भी जब जब मैं ग्रंथों के वितरण का स्कोर सुनता हूँ की इतनी बड़ी तादाद में ग्रंथ का वितरण हो रहा है।
पूरे विश्व भर में
यंग
यंग मैं रोज कहते हूँ सारे ग्रंथों का वितरण हो रहा है। इतना एनर्जी मेर को मिलता है। और ग्रंथ कर बी बी टी और मेरे बीच में वो ग्रंथ बाट रहे
है, गर करता जा रहा हूँ।
द इसमें आनंद है। इसलिए की धरती के आंसू मत बहाओ
सड़क में, शोक सभा में हो, गीता में भगवान ने क्या बोला है ब्रह्म
भुतपनआत्मानशोचती कांगती समहसर्वेशुभुतेशु मद भक्ति
बड़े प्रश्न
होते थे, जो तपस्या करते थे, जो
कष्ट उठाते थे, मारा खुल के आशीर्वाद
देते थे, मुझे याद है वो फ़ोन
करते थे भक्तों को, या मुझे याद
है गोपी भाव को फ़ोन करेंगे कभी मधु सुन्दर परों को फ़ोन करेंगे बोलते थे। मैं आप लोगो से बहुत खुश हूँ, आप लोग ग्रंथों का वितरण कर रहे हैं। प्रा बहुत आशीर्वाद देंगे ऐसा करके फ़ोन करते थे।
मुझे नहीं लगता 7, 12 ने फ़ोन
करके ऐसा बोला और डायरेक्ट फ़ोन करके
मारा आशीर्वाद देते थे। क्योंकि ग्रंथों के वितरण से महाराज इतने
प्रसन्न होते थे की बस उनका हृदय खुल जाता था।
आशीर्वाद ऐसे बरसती थी की वो दूर
भक्त बाट रहा है, ग्रंथों का वितरण कर रहा है। और महाराज फ़ोन उठाते ही फ़ोन में सीधा बोलते थे। मेरी कृपा है प्राजी की कृपा है आपको प्रो, पाजी की कृपा। मिलेगी प्रपा जी, आप लोगों से बहुत खुश
तो ये केवल बाबू संघ नहीं है, वाणी का संग है। गुरु महाराज हमारे गई नहीं है। जब तक हम ग्रंथों का वेतन करते रहेंगे, तब तक हमारे गुरु महाराज जीवित रहेंगे, शिलप्रहुपाजीभी जीवित रहेंगे। प्रहुपाजनेयेकहा, आई, आई विल लिव फॉर सेंचुरी
कब तक, जब तक आप ग्रंथों का वेतन करते रहेंगे, आई विल लिव फॉर सेंचुरी शताब्दियों तक मैं जीवित रहूंगा। अगर आप ग्रंथों का वेतन करते है तो इस तरह से आप में से कितने लोग जाते हैं? हमारे गुरु मारा, हमारे साथ जीवित रहे हैं। हमेशा रहे हमारे साथ।
हम उनको कभी न भूलें। तो संकल्प लीजिये, संकल्प लीजिये। हम संकल्प लेते हैं। हाथ खड़ा करिए हम सब संकल्प लेते हैं। हम सब संकल्प लेते हैं। गुरु महाराज की प्रसन्नता के लिए, पारी की प्रसन्नता के लिए, गुरु परम्परा की प्रसन्नता के लिए, वषों की प्रसन्नता के लिए, गिर राज्य की प्रसन्नता के लिए, राधा रानी की प्रसन्नता के लिए। हम ग्रंथों का वेतन करते रहेंगे, करते रहेंगे, करते रहेंगे। लेकिन
और 12 बातें बताना चाहूँगा। बड़ा इम्पोर्टेंट है, इससे आपको और जो है, उस पड़ेगा क्यूंकि होल? आइडिया उत्साह बढ़ाया जाए। बना तो आप ही हैं। हम तो बाते नहीं, ऐसी बात नहीं। हम सब प्रयास करते हैं।
देखिये, कई बार भक्त बोलते हैं।
प्रभु जी, हम जाते हैं। आप तो पुराने प्रचारक हैं। हम सब बात नहीं जाता है। हम पाते हैं बाहर और माता खासकर। संघर्ष करती है। किससे पूछेगी, किससे बात करेंगे।
इस बेग स्ट्रगल। तो डिस्ट्रीब्यूट बॉक्स। आप बड़े बड़े प्लेजिंग करवा देते हैं। हजार गीता बांटो 2000 बांटो। अरे।
हमने तो किसी का मुंह नहीं देखा। और जिसको भी देखा, दरवाजा सामने बंद कर देता है। कुत्ते छोड़ देता हमारे पीछे? कुत्ते?
नहीं।
तो पिल्ले छोड़ देता है।
पिल्ले नहीं तो बिल्लियाँ छोड़ देता हमारे पीछे। हम वहीं से भाग जाते हैं।
हम।
कैसे यह कोई पिटाई कर देता है?
हमारी सड़क पे गालियाँ सुननी पड़ती है।
भिकारी बोलते यहाँ से आगे, हमारा धधा चौपट कर निकलो।
यहाँ से।
हमारे ऊपर कीचड़ फेंकते हैं। ऐसे बरमचारी
बहुत बुरा हाल होता है भक्तों का।
जो ग्रंथोंका वेतन करते हैं।
मान।
अपमान, जो सहता है, भगवान गीता कह रहे है, जो मान और मान को
सहता है, वो भक्त मुझे बहुत प्रिय है। भगवान गीता में कह रहे हैं। तो 1 बात सुनिए। किसी ने पूछा प्रश्न। भगवान ने गीता में कहा है। दूसरे के 47 लोक में कर्म नवाधिकार मा ले। आपको। कर्म करने का अधिकार है। फल के ऊपर कोई अधिकार नहीं है। लेकिन कौन देखता हूँ या रोज फल की बात होती। कभी मैंगो, कभी आप भी ना और कभी डिस्टियूशनका स्कोर, कभी लक्ष्मी का लक्शन, कभी मंदिर बनाना है, कभी कुछ करना है।
रिजल्ट रिजल्ट। भगवान गीता में कहा है? आपने तो गीता की शिक्षाओं को भी बदल दिया है।
वात। इस देस लानें नहीं है। तो क्या उत्तर है। ऐसा देखने में लगता है। अरे मूर्ख हो जो इस प्रकार सोच रहे हो। ये तो सच हो हो।
आप जो फल दे रहे हैं, हम खुद खा रहे है। अरे। वो तो ठाकुर जी को भोग लग रहा है। ग्रंथों का वितरण कर रहे हैं। किसके ग्रंथ है।
भगवान श्री कृष्ण की वाणी है। उसमें मैंने थोड़ा ग्रंथ लिखे है।
भगवान गीता, भगवान कृष्ण की वाणी है। ग्रंथ पढ़ रहे हैं, तो भगवान कृष्ण
की वाणी का ही वितरण हो रहा है।
गुरु महार प्रसन्न होंगे, प्रपात प्रसन्न होंगे।
अधिक से अधिक मात्रा में ग्रंथों का वितरण होगा।
यह तो उनकी प्रसन्नता के लिए कर रहे हैं। ये हैं फल देने का मतलब।
फल के लिए प्रयास इसलिए करते हैं
ताकि गुरु और कृष्ण को प्रसन्न कर सके, वषों का प्रश्न कर सके।
उस फल को अपने जेब में रख कर या जमा करके काला बाजारी करने के लिए नहीं, ब्लैक मार्केटिंग करने के लिए। हम फल इकट्ठा नहीं करते हैं, समझे है। और दूसरी बात, 1 बार हमने पूछा था, गुरु महाराज से महाराज, हम प्रयास तो कर रहे हैं, को रिजल्ट नहीं।
मार ने 1 बहुत अच्छी बात बताई। महाराज ने कहा, आप प्रयास कर रहे हो।
कृष्ण केवल यही चाहते हैं। क्योंकि रिजल्ट आपके हाथ में है।
नहीं।
आप समझ रहे हो, माली, बीज बोता है, उसके जैसे अंकुरित होता है, बीज
पौधा बनता है, वृक्ष उगने लगता है। उसमे से पत्ते निकलते हैं, उसमें से मछलियां निकलती है, उसमें से फूल निकलता है, उसमे से फल निकलता है।
फल खट्टा होगा, मीठा होगा, कड़वा होगा, कच्चा होगा, पक्का होगा, आपके हाथ में नहीं है। क्योंकि माँ फले शुकराना भगवान ने गीता में सलेहा है। दूसरी बात सुनिए बड़े ध्यान से हमारे शास्त्रों में 3 ऐसे महान भक्तों की चर्चा हो रही, जटाुलजटायुके बारे में रामायण में बड़ी महिमा बताई गई। जटायु जानता था, रावण बड़ा बलशाली है। और ये रावण है। मुझे कभी भी मार देगा माता सीता का वरण कर रहा है।
लेकिन यह सब जानते हुए भी जटायु
ने आक्रमण किया, अपने पंखों से मारने की कोशिश की। रावण को बार बार रावण ने तलवार उठा दिया। आक्रमण शुरू हो गया, युद्ध शुरू हो गया।
बड़ा भयानक, युद्ध शुरू हुआ, आकाश में
युद्ध शुरू हो गया। और रावण ने आखिर में क्या के अंत में क्या किया। जटायु के पंख काट दिए, जटायु मर गया। बताइए रावण को मारने में कितने लोग
नहीं हुआ।
लेकिन उसकी सफलता यह नहीं थी कि रावण को मारना। उसकी सफलता यह थी कि जटायु ने भगवान श्रीराम के लिए प्रयास किया और
भगवान इतने प्रसन्न हुए। अंतिम संस्कार किया स्वयं भगवान श्री राम ने।
इसलिए जटाओं की महिमा है, भले उसने रिजल्ट ना दिया हो।
उसने प्रयास किया।
दूसरा उदाहरण अभिमन्यु का है। अभिमन्यु तो माता के घर में ही उसने सीख लिया। चक्रो में कैसे प्रवेश करना है?
चक्र में में प्रवेश करना चाहता था, जानता था अभिमन्यु। लेकिन उस चक्र में उससे बाहर निकलना नहीं। जानता था।
उसके बावजूद भी उसने क्या किया, युद्ध किया, भगवान कृष्ण के कहने पर युद्ध किया।
बड़े बड़े महारथियों के छक्के छुड़ा दिए,
ऐसा युद्ध किया कि बस करो लोग चिंता पड़ गए। विश्व तामाथोणाचार्ामा कृपाचार्य करण? यह सब चर्चा करने लगे की क्या होगा? यह तो हजारों हजार युवाओं को मारा जा रहा है।
इसके साथ लडना तो सम्भव ही नहीं है। इसके सामने कोई नहीं लड़ पाएगा।
16 साल का बालक इतना पराक्रमी इतनी तेजी से युद्ध कर रहा है। सारे घबरा गए को, अब कैसे मारे तो देखा है। इसको तो हम सामने से कभी नहीं मार पाएंगे। 1 ही तरीका है और धर्म का साथ लेना पड़ेगा चारों तरफ से घेर लिया।
बड़े बड़े योद्धाओं ने पीछे से, आगे से, दायें से, बायें से तलवार पूरा
उसके शरीर में घुसा दिया। अभी मनु को मार डाला। अभी मनु मर गया या बहुत बड़ा हुआ।
अभी मनु सफल नहीं हो पाया।
अभी मन लेकिन फिर भी प्रयास किया। इसलिए अभी मनु की बड़ी चर्चा की गई है। महाभारत अभी मनु का।
गौरव की चर्चा आज भी की जाती है। जटायु की चर्चा और भी की जाती है।
उस गिलहरी की चर्चा आज भी की जाती है। हनुमान जी देख कर हंस दी है। गिलहरी को देख कर।
अरे तुम 11 कारण उठा रही हो। तुम क्या पुल बनाओगी।
गिलेरी बेचारा थोड़ी सी दुखी हो गयी। मैं प्रयास कर रही अपनी क्षमता के अनुसार 11 कर उठा के वो पुल बनाने में सहायता कर रही थी। भगवान राम ने 1 बात बताओ। हम ये पुल क्यों बना रहे हैं? हनुमान जी ने कहा पुलिस ने बना रहे है की समुद्र को सुखा समुन्द्र, पार कर सके, समुद्र को पार कर सके है। इसलिए पुल बना रहे हैं। समुन्द्र को पार करने के लिए पुल बना रहे हैं। मैं भी बार चलाता पूरे समुद्र को सुखा देता हूँ। तो पुल बनाने की क्या जरुरत है? हनुमान सोच पड़ गए।
प्रभु इसलिए पुल बना रहे हैं कि समुद्र पार करेंगे लंका जायेंगे।
रावण का वध होगा, माता से सीता को वापस लेकर आएंगे। इसलिए तो पुल बनाना जरूरी है न।
भवन।
राम ने कहा मैं सबके हृदय में बैठा हूँ, परमात्मा के रूप में। यहीं से रावण के हृदय में जो हाट है न, उसके बीट को मैं सुचॉप कर दूँगा। वहाँ जाने की जरुरत ही नहीं है। मैं रावण के हद में बैठा हूँ। तुम्हारे हृदय में बैठा हूँ। यहीं से बैठकर सुच कर दूंगा। वही रावण गिर जाएगा खत्म हो गई। कहानी? तो फिर समुद्र सुखा दूंगा, रावण मर जाएगा।
ये युद्ध की आवश्यकता ही क्या है?
तो हनुमान जी फिर सोच में पड़ गए। हनुमान जी ने कहा फिर इतना प्रयास क्यों, इतनी बड़ी बड़ी शिला, इतनी बड़ी बड़ी चट्टाने, इतने सारे पत्थर इकट्ठा कर
रहे हैं, पुल बनाने में इतना लम्बा
पुल बना रहे हैं, 800 योजन का
क्यों कर रहे है।
सब।
राम प्रभु प्रभु।
श्री राम आप ही बताएं। मैं तो कुछ नहीं समझ पा रहा हूँ। मेरे पास इतनी बुद्धि नहीं है।
देखो हनुमान।
ये पुल इसलिए बनवा रहा हूँ मैं क्योंकि मैं चाहता हूँ की आप सब सेवा में लगे रहे। आप सब को सेवा का मौका दे रहा हूँ।
ये कार्य तो हो चुका है, पुल तो बनना ही है। वहाँ तो मुझे जाना ही है। अगर आप सब सेवा कर लोगे तो
आप सबको कृपा मिल जाएगी, श्रेय मिल जाएगा। इसलिए मैं मौका दे रहा हूँ। ये मत सोचना की तुम पुल बना रहे हो। बड़े बड़े चट्टाने लेकर आ रहे हो। तुम्हारी मेहनत है, तुम्हारा प्रयास है, इसलिए पुल बनेगा। अरे तुम नहीं करोगे तो और कोई कर देगा। मैं खुद ही कर दूंगा।
यही बात भगवान कृष्ण ने अर्जुन को कहीं की देखो, इस विश्व रूप में 5 पांडवों के अतरिक्त सब के सब मारे जायेंगे।
अंडों की विजय होगी तो पहले से बता दिया भगवान ने। अर्जुन बोल सकते थे। भैया मैं लडू टाइम। जब जीत नहीं है तो हस्ीनाबोरमेंसोते है शाही पनीर। और क्या शाही पनीर है।
वहाँ जिले भी है।
गुलाब, जमनहैरसगुललाहै सब कुछ है। आराम से खायेंगे सो जायेंगे, यमुनाजी के किनारे लेट जायेंगे, सौरी हाँ के किनारे विश्राम कर लेंगे।
ये लड़ाई करने की क्या आवश्यकता है?
इतना जो है, बता दिया है भगवान ने। क्या बोला निमित। मात्र भव, सव्यसाचिन आपको बनना है।
भगवान अर्जुन को श्रेय देना चाहते थे। इसलिए भगवान ने युद्ध स्वयं किया ही नहीं। अर्जुन को युद्ध करने के लिए कहा
और स्वयं सार्थी बन गए भगवान।
आप बात को भगवान नहीं होते तो
अर्जुन युद्ध को नहीं जी पाते। युद्ध के बाद भगवान ने अर्जुन से पूछा कि 1 बात बताइए। मैं कैसे समझूं कि आप ही सब कुछ कर रहे थे, आपने ही सब कुछ किया। अर्जुन कम करो से नीचे उतर जाओ, उनका। रस से नीचे उतर जाओ। उतर पहले नहीं, नहीं। अर्जुन तुम पहले उतरो तो अर्जुन नीचे उतरे। हनुमान। जी भी प्रस्थान कर चुके हैं। क्योंकि युद्ध हो गया है। वो भी वापस चले गए अपने प्रभु के पास। तुम भी नीचे उतर गए हो। अब मैं भी नीचे उतरता हूँ।
जैसे ही भगवान कि रत से नीचे उतरे, रत में विस्फोट हुआ, लोशन हो गया। देखते ह रत में क्या हुआ?
अर्जुन, अगर मैं नहीं होता, हनुमान जी नहीं होते तो क्या होता? तुम्हारे साथ वही होता जो इस रथ के साथ हुआ है।
11 कदम में तुम्हारी सहायता करता रहा।
अर्जुन। तो इसलिए भगवान गीता में कहते हैं अहंकार भी मुड़ात्माकर्ताहमिती मान्य थे।
ये मत सोचो की मैंने ग्रंथ बाते हैं।
तो बन ही सकते है।
अगर भगवान के निमित्त बन जायेंगे, गुरु
के निमित बन जायेंगे। इन ग्रंथों को केवल बाहर लेके जायेंगे, प्रचार करेंगे। बाग की सफलता, सफलता सब भगवान के हाथ में है।
अगर कृष्ण को अपना सारथी बना लेंगे। जहाँ योगेश्वर कृष्ण हैं, जहाँ धनुर दर्जन है, वह विजय है, वह ऐश्वर्य है,
वह नीति है, वह अलौकिक शक्ति है। ऐसा संजय कह रहे हैं गीता के अंतिम। इसलिए बिल्कुल साहस बना के रखिये निडर होकर ग्रंथों को लेकर बाहर जाइए।
बड़ा सोचिये ऊँचा सोचिए करने वाले। भगवान है। वो साथ देंगे। अगर हमारा प्रयास जो है, वो क्या
होगा, हृदय से होगा। कृष्ण भगवान के लिए कष्ट उठाना जरूरी है।
अगर कष्ट उठाएंगे, प्रयास करेंगे, तपस्या करेंगे। अगर। 1 भी गीत नहीं, निकाली नो प्राबलम, सामने वाला व्यक्ति गीता न ले, सामने वाला व्यक्ति भक्त बने, न बने। ये तो निश्चित है। जो भी बाटने का प्रयास कर रहे हैं, गारंटी है, वो भक्त बनेंगे। और भगवान के धाम में जायेंगे और क्या चाहिए। और क्या चाहिए, बताइए आपको भगवान के धाम में जायेंगे। इसलिए कहा प्रभु पा जी ने, जो इन ग्रंथों का वितरण जीवन भर करेगा, जो इन ग्रंथों का वितरण जीवन भर
करेगा, चेतनय, महापर्व क्या करेंगे, भले ही आप अंतिम समय में भगवान के बारे में न सोच रहे हों। चेतन्य क्या करेंगे ही विल फोर्सफुली एंटर योर कांशसनस, आप की चेतना में फोर्सफुली
एंटर कर जायेंगे महाप्रभु आपको अपना सर कराएंगे, चेतनय महा प्रभु और आपको वापस
धाम ले के चले आए
ये हैं
संकीर्तन का प्रभाव, संकीर्तन का पावर इतना है। केवल इसलिए प्रहुपपाजी ने में यह कहकर मैं विराम देता हूँ। नाइनटीन सेवेंटी में एल टेम्पल में प्रहपाजइनलेरके, अंत में कहा इफ यू फॉलो फॉर रेगटे प्रिंसिपल and child sixteen land minimum widout offences sortewichnawas and sad the mission of chatane maha rabu i garanty you that you will see krishna face to face in this life time itself।
शिरोपा ने कहा, अगर आप 16 माला
जब करेंगे, अपराध रहित होकर 4 नियमों
का पालन करेंगे, क्षेत्र ने महापुकआंदोलनमें सहयोग
देंगे, कुछ करेंगे, इसके महापुर आंदोलन के लिए और वर्षों की सेवा करेंगे। तो मैं प्रो आश्वासन देता हूँ कि अंत काल में क्या होगा, इसी काल में, इसी जीवन काल में आप कृष्ण को देख पाओगे, भगवान का दर्शन कर पाओगे। ये शील प्रोपज शब्द है।
तो ये सोच मैं योग्य नहीं हूँ अरे को और मणि जी भगवान ने दर्शन दे दिया नहीं और मणि को भगवान दर्शन दे दिया।
तो में जो भक्त हैं, गुरु महाराज की, में जो भक्त हैं, उनको भगवान दर्शन क्यों नहीं देंगे बता। इसलिए हमें प्रयास करना है, प्रयास करना है, प्रयास करना है। फल की चिंता न करे करमणनेवादिकारस्ते, माह, फले, शुगदाचनाजटायु की तरह, गिलहरी की तरह, अभिमनु की तरह, चेष्टा करे, प्रयास करे, गुरु परंपरा में जितने आचार्य गण हैं, उन सब की तरह हम प्रयास करें, चेष्टा करें, हमारे गुरु बहार की तरह, प्रयास करें, चेष्टा करें, अपनी अपनी क्षमता के अनुसार हम देखेंगे। आज नहीं तो कहीं कल पक्का निश्चित हम लोग सफल होंगे की जाए गुरुदेव
की जाए बनाते, हरेक 2 प्रश्न लेंगे, 1 प्रभु जी और 1 माता जी,
उसके बाद टू के
ओके आगे आ जाइए। जिनका सवाल है ओके करुणा चन्द्र बाबू
हरे, कृष्णा हरे,
बहुत बहुत धन्यवाद। प्रभु जी, आपके स्पेन दायक कथा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद करता हूँ। आपका प्रभुजी, मेरा प्रश्न यह था की जैसे आपने शुरू किया की भगवान को पसंद करने के लिए तपस्या की आवश्यकता है। तो मेरा आपसे प्रश्न है कि तपस्या करते हुए हम यह भी पढ़ते हैं कि तपस्या करने से ऋदय कठोर भी होता है, हम भक्त सिन्धु में पड़ते हैं तो किस परसितवरागेऐसी हमारा हृदय कठोर भी बन जाता है। स्वामी कहते हैं भक्त सिन्धु में, तो कैसे तपस्या नियम आग्रह नहीं बने, भगवान की प्रसंता के लिए रहे थोड़ा अगर
भगवान की प्रसन्नता के लिए, गुरु की प्रसंता के लिए तपस्या करेंगे, तो कठोर हृदय हमारा कठोर नहीं होगा? ह्रदय हमारा बिल्कुल कोमल हो जायेगा, हृदय बिल्कुल निर्मल हो जायेगा, सॉफ्ट हो जायेगा। बटर की तरा, मक्खन की तरह। लेकिन हणकशबूकीतरहतपस्या करेंगे तो हृदय कठोर ही रहेगा। क्योंकि हृदय कशने भगवान की प्रसन्नता के लिए तपस्या नहीं की।
और 1 इसी के साथ प्रश्न कैसे हम जैसे हम तपस्या करते हैं तो हम देखते हैं कि कभी कभी स्वास्थ खराब हो जाता है या कि हम अनबैलेंस हो जाता है। तो कैसे उसको समझे की यह तपस्या मेरे लिए है?
या यह तपस्या देखिये, स्वास्थ ठीक होना न होना। 1 बात बता दू आपको मैं अगर भगवान को आपसे कुछ करना है याद रखिये फिर बोल रहा हू मैं भगवान को कुछ आपसे कराना है तो कितने भी बीमार हो आपसे करा ले।
अगर भगवान को आप से सेवा नहीं लेनी है।
आप दुनिया के सबसे स्वस्थ व्यक्ति होंगे, आप 1 भी सेवा नहीं कर पाऊंगा। इसको कहते हैं कृपा बिना गुरु वर्षों
की कृपा के हम सेवा कर ही नहीं सकते हैं। ये न सोचे मैं स्वस्थ हूँ तो
मैं बहुत सेवा कर पाऊंगा। यह बहुत बड़ा भ्रम है।
सेवा हम तभी कर पाते हैं।
जब गुरु और वर्षों की कृपा होती है। तभी भक्ति करने का हमें पावर मिलता है, एनर्जी मिलती है। तो इसलिए जो बीमार से बीमार व्यक्ति
है वो इतने कार्य कर जायेगा की
अंदाजा नहीं लगा सकते हैं।
दूसरी और स्वस्थ व्यक्ति।
लेकिन उसके बाद अगर गुरु की कृपा नहीं है तो वो छोटी छोटी सेवाएं नहीं कर पाएगा। समझहैआस इसका मतलब ये नहीं है कि हम बीमारी रहे। लेकिन यह भाव होना चाहिए, न की बात है। माता की तरफ से माता जी का प्रश्न और फिर विराम देते है। हम थैंक यू आगे आ जाइए। प्लीज यहाँ लास्ट क्वेश्चन है? अरे कृष्णा कृष्णा जी, परिणाम प्रभुजी प्रभु जी, मेरा क्ोशशनयेहैकी एज स्टूडेंट हमारा ग्रंथ विटेन में क्या कंट्रीब्यूशन होना चाहिए? ऐसे स्टूडेंट आपको क्या करना चाहिए? हां स्टूडेंट पढ़ना चाहिए। ग्रंथ वितं में जो आपको बुक्स मिली है उसको पढ़िए और क्या कर सकते है। जो भी पढ़ने के लिए है उसे पढ़िए, जो भी पढने के लिए है उसे पढ़िए। लेकिन भगवत गीता जरूर पढ़िए। भगवत गीता। तो पढना जरुरी है। पाल की, गोवर्धन की
हर isgasmonroपप्रभुजी की जाए। तो प्रभु जी ने हम सब की बैटरी 1 चार्ज कर दी है। हंड्रेड परसेंट नहीं, मेरी खाल ऐसी वन थाउजनटपरसेंटबैटरी। हमारी तपस्या की भावना भी है और तपस्या विशेष रूप से बुक डिस्टरिब्यूशन में करनी है और साथ ही बुक्स पढनी भी है। बाहर बुक स्टॉल है तो वहाँ उससे आप बुक्स खरीद भी सकते हैं। गोपाल कृष्ण को साय महाराज की बुक्स भी हैं, प्रभु बुक्स भी है। सर्वसाक्षी प्रभु जी और नंदगुवाजनबहुत कृपा कर रहे हैं? हम भक्तों के ऊपर तो आप बुक्स ले भी सकते हैं, पढ़ भी सकते हैं। निश्चित रूप से और पढ़ने के बाद श्री को बांटना भी है। दोनो प्रकार की हमें तपस्या करनी है। तो प्रबु का ह्रदय से बहुत बहुत धन्यवाद। सोवन ग्रैटिट्यूट के तौर पर हम 1 हरे कृष्ण महा, मंत्र बोलेंगे, हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे प्रभुजी की जाश्रोपारकी, जाए, सो, डिवोटिज, कल, सुबह, मंगल, आरती, रहेगी। 5 बजे प्लीज यहाँ पर उपस्थित हो जाएगा। सो कल सुबह मंगल आरती गायेंगे हिज होलीनेस भक्ति श्रेय वैश्णव स्वामी महाराज और मंगल आरती करेंगे यानी व यू करेंगे। हिस बेस रुकमणी कृष्ण प्रभु जी मोहन गौर चन्द्र प्रभु तो बाकी के नाउसमेंहमकल करेंगे बट यस कल यहाँ आएगा जरूर और कल मॉर्निंग प्रोग्राम में जो कथा होगी। 8 बजे उड माई हिस ग्रेज, दीनबंधू, प्रभुजी और प्रभुजी हम सुनाएंगे गोबर धन लीला। सो प्लीज काइली बी देयर ऑन टाइम कितने बजे 5 बजे अपना हाथ दिखाए, 5 बजे अगर पंच तत्व की कृपा चाहिए तो 5 बजे यहाँ पर आपको आना है बी देयर। फॉर मंगलहारी, हरे, कृष्णा, सम, श्रभक्तवरिदकी।
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