
Speakers share Guru Maharaj's teachings on service in Vrindavan and daily devotion, then announce upcoming events: ATS Vyas Puja on July 21, Janmashtami on August 26, and other observances via Zoom with opening ceremonies and a marathon planned.
Chapters
जो जितना अच्छा सिला आपने ही दिया मुझे मैंने बोला महाराज आप तो जग के शोर से सोख लिया है, बोले नहीं नहीं गिरा सिला आपने दिया दामोदर शिला आपने दिया। कृष्णा तो कई लोगों से संगर बोले नहीं ठीक है और पूजा ठीक चल रहा है, सेवा ठीक चल रहा है की नहीं। अच्छा सेवा बोले है, भगवान की सेवा ठीक चल रहा है। जो बातचीत है पूरे बच्चे की कुछ जानते नहीं है, इमोशंस जानते हैं लेकिन फिर भी इमोशंस की तरफ बात करते है। अच्छा तो अभी इस प्रकार उस दिन बात लास्ट, मीटिंग में इतना ही बातचीत हुआ था। भले तुम ने के मासु वापस दिया। मेरे पास साढ़े 300 मा था, 300 मरा जो हुआ था, फिर 300 बड़ा लास्ट में लास्ट में जो 300 बड़ा दिया था। अभी तो 50 मा मेरे पास पड़ा है जब क्या हुआ। लेकिन गुरुवार ने कभी मुझे कोई दूसरा सेवा कुछ नहीं कहा, वो चले जाओ उस मंदिर में, कभी कभी कैसी पीचिंग। लेकिन लेकिन मैनेजमेंट ने गुरुवा कभी भी मुझे किसी मीटिंग करने के लिए नही कभी मीटिंग करना। गुरु महराज के लगते लगते थे, कम है गुरु महाराज ने कभी मुझे तो इसलिए उन के उद्देश्य अभी अभी मुझे ये सुंदर गोपाल लेटर भेजे थे। डी सी सी मीटिंग में आप पूरा सभी को सुपर भेज कर के आप आपकी मीटिंग होगा। गुरु महाराज ने कभी भी मुझे मीटिंग के लिए नहीं कहा है। मैं कभी किसी मीटिंग अटेंड नहीं करता हूँ की हमारे मेब सो अथॉरिटी लोग थे की कुछ सेवा तो होना अच्छी सेवा सेवा नहीं है,
बोले
अच्छा है। गुरु महाराज की जब मेरे ऊपर ऐसा इम्प्रेशन है और क्या करना है, वजन करना है, ठीक है और कभी मुझे वृंदावन छोडिए की वृंदावन मंदिर को छोड़कर किसी दूसरे सत्र में चला ये आदेश भी कभी नहीं दिया जा, पा जाओ जाओ लेकिन कोई पर्मानेंट वृंदावन छोड़ के चले जाना से कोई भी नहीं मैं। शुरू से ही कोई गुरु महाराज कृपा ऐसी ही नाइनटीन टी थ्री से अभी तक मैं वृंदावन में वास करता हूँ। वृन्दावन वास गुण की कता से होता है। क्यूंकि वृंदावन वास करने के लिए हम प्रत्येक दिन पर किसको कृष्ण, बोला, राम, राधे, श्याम को हम डेली प्राथना करते है। हमको यहाँ से निकलना भी उनका जो इच्छा परम्परा से आ जाता है। गुरु अल्टीमेट कन्ट्रोलर कौन है कृष्ण ये सब ध्यान रखना। अल्टीमेट कन्ट्रोलर कृष्णा है, आप उनके शरणागत पूरा हो, कैसे आपको आपको सभी संवाद से सब से निपट लेंगे। आपको आप भी सोच नहीं पाओगे कैसे ऐसा हुआ कैसा होता है। लेकिन कृष्ण सब के पीछे है और अपना प्रतिनिधि सदगुरु के माध्यम से इसको करा तो ऐसे गुरु मारा हमारे पास कोई योग्यता न होने पर भी योग्यता विचारे की छुनाहीपाईतुमार करुणा सार करुणा कांदिया कंदिया प्राण राखी। तो इसलिए गुरु महाराज की जो कृपा अंतिम दर्शन को मे मे लगभग 12 12 बज गए। इसके बाद तो तो उस समय बस अंतिम दर्शन में महाराज के साथ थोड़ा सा से बातचीत, कोई कुछ सूचना भी नहीं मिलता था कि महाराज चले जायेंगे लेकिन महाराज ने बहुत अंतिम दर्शन भी मुझे दिए और अंतिम आदेश भी दिए है की ये है दिख्या गुरु के रूप में तुम्हारा नाम डाल दिया हूँ और ये सेवा तुम करते है रहना और कहे थे भी 2 महीने में 2 ढाई महीना 3 महीना क्लियर हो जायेगा क्लियर हो गया कृष्ण कृष्ण की इच्छा न अपने शुद्ध भक्त की इच्छा को कृष्ण कभी टालते नहीं है इसलिए आप सभी वरिष्ठ लोक भी है हमें आशीर्वाद दे सेवा जैसे गुरु महाराज के आदेश को हम ठीक ठीक से पालन कर पाए हैं आगे तो इसलिए गुरु महाराज ने ये आदेश सबके प्रति है सूरमा सबसे जो इम्पोटहैंसेवा ये क्या करना है प्रत्येक दिन सूर राज इस से बचा है तो कैसे रहेगा ये सबसे निर्देशन है गुरु इसके बाद अन्य अन्य आदेश है गुरु जी का आदेश सब के लिए गुरु का आदेश समान रहता है विशेष अध्यातिक साधना के बारे में कोई कॉम्प्रवाज नहीं है गुरु को देख सकते है महाराज मंगला आरती न आना रात को 12 बजे साढ़े 12 1 बजे आये वृंदावन लेकिन सुबह पता भी होगा महाराज आई हुई है लेकिन सुबह देखेंगे इनको किसकी आरती करते हुए कृष्ण की आरती करते हुए पूछा कि कभी कभी राजेश भी करना चाहिए तो महाराज ने कहा की कृष्ण बलराम भेरी कृष्ण बलराम मंदिर ओपनिंग में प्रहुपाजनेकौनसा आरती किया बोल रहा तो गुरुवार से कृष्ण बलराम
को
कभी कभी करते है मंदिर है कृष्ण बलराम जो बहु ने उसी को फॉलो करते हैं। तो इसलिए गुण महाराज के गुण कर 1 बार मुझे कल या थे मैं कई बार महाराज महाराज आपको भी जगरनाथ मंदिर जाते नही आपको जगरनाथ दर्शन करना चाहिए तो ये लगभग नाइनटी नाइंटी सिक्स पहले नाइनटी सेंटर पहले नाइनटी टू नाइंटी थ्री में बोला महाराज बोले आप मेरे लिए फ्लाइट टिकट ले के आ जाओ कलकत्ता आ जाएगी बुकिंग करके। फिर मैं कलकत्ता आया और फ्लाइट टिकट बुकिंग करके ले गया लेकिन बाद में महाराज रिजेक्ट कर दे बोले नहीं जाना नही ये मीटिंग करना इतना सा रह गया मैं नहीं जा पाऊँगा तो मैं पूरा दुखी हो गया तो देखे मैं दुखी हो गया मैं पूरा नीचे खड़ा था तो वो गया उसको दूसरे भक्त दिया को कैच करने का तो फिर मैं आ गया लेकिन में जगरनाथ मंदिर में आकर दर्शन करके गोरु सामने खड़ा है दर्शन कर रहा भगवान को पीछे महा पर ने गुरु महाराज के पीछे आकर पीठ में पीठ में आकर कौन है कुछ ओडिशा के गुरमा पंच रत्न प्रभु, शियम जुन राम खड़े है, गुरु महाराज खड़ा है और सीधे पीछे ऐसी समझ गए डिस्टर हो गया है। तो इसलिए गुरु महाराज के लेल विशेष में आप देखे पिलाते। इनको बहुत समय इच्छा था और पूरी यात्रा में गए और माधवन्दरपूरीकी कथा महाराज को बड़ा प्रिय है बार बार किसी लेक्चर में है और गुरमार गए थे मंदिर में और समय में पहुँचे शाम के समय को कोई क्या खीर का पात्र उसे महाराज जब पूछ रहे थे कोई पुजारी के हिस्से महाराज को दिया खरलाकेखिरपातप्रदान किया गोपी राज्य के बड़े कृपा था किनके प्रति, गुरु महाराज के प्रति और इसलिए उनके आकर्षण था जगरनाथ के दर्शन किए और 20 रूपये। गुरु महाराज ने उड़िया को कई बार देखा हूँ ओडिशा ओडिशा ओडिशा के लोग अच्छे भक्त होते तो इसलिए महाराज के गुण गान क्या करें। मुझे भी आदेश मारन को भी होता। मारना तुम जा रहे, नही मारा बस जब मैं बात न छोड़ा। 1 साल बहुत तबियत खराब न हो रहा था, नहीं जा नहीं जा रहे
हो
नही जा पाऊँगा बोले ठीक है ओके, लेकिन प्रीचिंग करना छोड़ना नहीं, तुम जा रहे तो दूसरों को प्रेरणा 2 वो भी करे, क्या बुदीशुसनकरते रहे, जब तक ये किताब भीतर रहेगा प्रहुपाजी खुश रहेंगे। मैं भी खुश रहूंगा प्रहुपाजीके प्रिय सेवा है इसलिए हमें सेवा करते रहना चाहिए। गुरु महाराज के दर्शन, उनके वाणी के माध्यम से भी जब तक कोई वाणी है महाराज की वाणी हमारे पास साथ है। हम गुरु राम मगर महाराज के ऐसे सेशन वाणी के माध्यम से करते है। आप अपने अनुभव गुरमार साथ आपको आदान प्रदान किए है तो आदेश गुरु राज के सेम है। सोड़माड़ा जॉब है नियमित रूप से जॉब करना, चाह रेगुलेट, प्रिसिपल फॉलो करना, मॉर्निंग प्रोग्राम में आना जैसे मोर्निंग प्रोग्राम, बोले गुरु सभी मोर्निंग प्रग्राम जब तक सुस्त रहते कोई भी प्रोग्राम प्रोग्राम करते थे। लेकिन छोटे से भी सेवा कोई महाराज की क्या है महाराज को याद कभी में कहा कितने साल पहले महाराज के साथ थोड़ा महाराज के रूम भी सफाई, महाराज को ये सेवा करना कपड़ा। धोना कपड़ा को आयरन करके ला के रखना, महाराज की बेड बिछाना मेसेज करना। प्रारंभ दिन शुभ सेवा भी की है। लगभग 5 साल तक था यह ऐसा सेवा महाराज इसको बोलते नहीं है। थोड़े भी सेवा कोई करता है याद रखे है। कभी कई बार में महाराज के चलन में कई अपराध भी हो जाता है कि इंस्ट्रक्शन नहीं फॉलो करना। जो किर्तन में जयन के हिंद किर्तन पार्टी में थोड़ा किर्तन भी सीखूंगा बाहर में प्रचार में जाते है की हाउस प्रोग्राम में है, पार्टी में किसी को दम है तो क्या है। इसलिए मैं कितना दिन सिखोगी। मेरा बा 1 साल कम से कम 1 साल तक सीखना है। बोले ठीक है, 1 साल जैंत कर लिया, 1 साल चला गया, 2 साल चला गया, तीसरे साल चला गया, चौथे साल आधा हो गया, लेकिन महाराज ने 1 दिन मुझे बोला है, बोले यू चीटिंग गुरु राज, तुम गुरु गुरु के साथ खेल रहे हो। तुम बताया 1 साल मुझे बना था किर्तन करेगा 3 साल कम्पट चौथा साल चल रहा है, क्या तुम्हारा प्लान है। मैं उसी दिन गया, दूसरे दिन में कहा की इंटरव्य मेरे कितन नहीं करना छोड़ दिया, न सका तुम मैं कितने प्लान किया, हूँ, तुमको छोड़ दिया, महाराज इसको सेवा डिवसनलसर्विसअपने, इच्छा ऐसी डिवसनलसर्विस किया इच्छा ऐसी। तो फिर मैं और अखंड छोड़ दिया, महाराज बड़े खुश हो आया, रूम में छोड़ दी, वे ठीक है तुम तो
भी
मारा हर साल में कभी मिस नहीं किया, दिसम्बर लगभग पचीस साल कंटिन् किया हूँ। इसके बाद उन्होंने महाराज की तो भक्त लोग का देखभाल करो ट्रेनिंग भक्तों को क्लास क्लास दिया करो, बस फिर भक्त, फिर ब्रह्म का देखभाल किया करो। और इसके बाद महाराज ने फिर संन्यास दिए 2000 8 में, इसके 5 साल के बाद 2013 में फिर जनार्दन महाराज विष्णु महाराज का सन्यास अभी भी गुरु महाराज की कृपा व उनकी करुणा कृपा तो करुणा है। कृपा तो महंगा मांगने से मिलता है, करुणा और हेतु की होता है, नहीं मांगने से मिलता है। चलो गुरु महाराज ने आपने जैसे जैसे इच्छा व्यक्त किए थे, सब भगवा कृष्ण उसको फुलफिल निश्चित रूप में करेंगे। महाराज की जो इच्छा है शुद्ध भक्त की इच्छा कभी भी कृष्ण टालते नहीं, शरणागत हमारे पास शरणागत की कमी है, नहीं तो गुरु महाराज अपने जैसे ही उनकी शरणागति है। कृष्ण के प्रति प्रभु किसने सरेंडर है, पढ़े है वो सब लोग पड़े है की नहीं। अभी पुना में गया था तो वो लोग मुझे वो क्या गुरु इंस्ट्रक्शन जो अंतिम इंस्ट्रक्शन, इसके दोनो यहाँ 5 इंस्ट्रक्शन दूसरे कुंजी में हरित 5 इस्टर्न लाज दिया था। तो गुरमाला कितने सरेंडर है? कुछ भी नहीं, सब कुछ किसके लिए है, प्रभु पाजी के लिए, प्रभु पाट की प्रसन्ता, सब कुछ उनकी प्रसन्नता है, वो कुछ आपने के लिए नहीं रहे, यहाँ तक की बोलते है। 1 स्टेप में कविया स्किन के बाहर नहीं रखा हूँ प्रभु। 1 पैर में किसी के नहीं हूँ कितने लोग घर बना बना के महाराज को डपट कर रहे थे। सूरदास प्रभु का प्लाट सस्ता प्रभु घर बना के अपने कितने लोग। बहुत लोग किसी के घर मे प्रभु महाराज है, वह छोटा सा कमरा है गेस्ट हाउस के अंदर पंद्रह नंबर रूम और वो ही रूम में बस बोले साटिस्फेडहैबड़ा खुश रहते थे। प्रभु पाजी मुझे पूछा की मुझे प्रभु पर जी के घर में रहना और प्रभु पाजी की सेवा करते रहना मुझे और कहीं जाना है इससे मुझे तुर्ती मिलता है, इससे तपती दूसरे के बीच पैलेस बिल्डिंग में रहने मुझे नहीं मिलने वाला। तो इसलिए देखे कैसे शरणागत अंतिम समाधि थोड़ा सा लैंड के बाजू मे साइड में लोग कुछ लोग सूरदास से कुछ ट्रस्ट बना के रखे थे, लैंड यहाँ पर बात में 1 मुझे स्तरपर बोला, यहाँ समाधि बनायेंगे, गुरु महाराज का समाधि थोड़ा बड़ा करके बनायेंगे, सुरदा राधाको महाराज का समाधि थोड़ा बड़ा करके हम बनायेंगे, हाँ छोटे जगा देंगे करके बड़ा समाधि बनायेंगे और समाज के साथ गुरु महाराज के मिविजियमभीबनायेंगे पूरा महाराज का पूरा जीवन का ये पता चला। गुरू महाराज को तुरंत ही वो लैंड को दे दिए, किसको इल में लैंड कृष्णबलराम मंदिर को दे दिया
की
महाराज क्या कहने लैंड मंदिर को दे दिया। कुछ मेरे लिए नहीं, सब कुछ प्रभु पाजी के लिए। प्रभुपाद जी गोली फाई होंगे ने टेन थाउजेंड वो चेतन्य महाप्रभु के संत संकृत आंदोलन के मुख्य सेनापति है, तो उनके पास गुरु महाराज यह भावना में रहते कभी भी सब कुछ प्रहुपाजी के लिए। तो हम देखे कितनी सरेंडर है, कितनी शरणागत हैं। 1 उनके नाम से कोई बैक अकाउंट में नहीं आप जो पढ़ सकते हो, कोई बैक अकाउंट भी नहीं है, गाडी भी चला था तो गाड़ी किस का है इस्कॉन की गाडी है वो गाड़ी स्कोन के नाम से हुआ है पास गाड़ी नहीं है की उनका नाम पर्सनल अकाउंट नहीं है। सब कुछ सब हंड्रेड पर्सेंट वो केवल शरणागत हुए, ऐसा नहीं जब ग्रस्त थे तो अभी भी शरणागत थे किसके चरण में जब से वो दिख्या लिए हुए मिले है ज सी कोला कंपनी मे मार्केट जो मैनेजिंग डायरेक्टर थे तो उस समय भी 1 बार भक्त स्वामी भक्ति शस्त्र पढते थे, वो पढ़ाते थे, क्लास लेते थे भगवत गीता उन्होंने भगवत गीता के क्लास दे रहे थे। स्टार् कार्यं कर्म करोति स जुगा सन्यासी नरगी महाराज ने कहा कि ये शो का एग्जाम है गोपाल कृष्ण महाराज जैसे देखे ये जब ग्रस्त है तब से न्यूयॉर्क में बोले सन्यासी तो गोपाल महाराज को दिन गोपाल तो पेमेंट मिला था और सारे पेमेंट ले दे दे। सोचते हो ये नौकरी कृष्ण के लिए काम लेकिन कार्मा जितने पेमेंट मिलेगा तुमको सब मुझे दे देना। इसलिए नौकरी करता था। लेकिन पेमेंट सारे पेमेंट फुल एस जी टी लाइक पकड़ा देते थे किसको रहुबाजकोरहबज 23 बार रास्ता बना पर चले
क्लास
बंद कर बोला रूपा की रियल सन्यासी, दंड लेकर संन्यासी बने हो, दंड धारण करके सन्यासी। लेकिन ये दीजिये रियल सन्यासी जगी आपके सामने खड़ा है, ग्रहस्त भी है लेकिन इसको कोई भी किसी भी टाचमेंट नहीं है ये नौकरी करना नहीं चाहता। वो तो आप लोगो के तरफ भी सन्यासी बन सकता था लेकिन केवल में कहने पर अपनी नौकरी कर रहा है क्यूकी उसके पास इतनी बड़ी डिग्री है और स्किन के लिए इतने सारे पैसे लाकर दे रहा है। सब कुछ मेरे पास। 1 पैसा और उसके बाद त्रोबाजीभरेउनके जो ग्रस्त पत्नी को बुलाते थे उसको बुलाकर लगभग $6000 से $500 देते थे उनको रूपाजी लो, महीने भर का खर्चा चलाना और महीने के दोबारा पूरा हिसाब लेते थे। 1 प्रभु क्या क्या खर्चा किया तभी दूसरा महिना का खर्चा मिलेगा। इसलिए उनकी पत्नी चिढ़ जाती थी किस के महाराज झगड़ा भी। लेकिन वो कभी प्रभु पाजी के सरेंडर से 11 कर इधर उधर नहीं हुए। सब समय प्रभु पाज पूर्व नसर्वांगतरहे इसी लिए प्रभु पाज ने इनको इतनी जमींदारी दिया है। भारत 1975 में भारत का पूरे भारत के जीबी सी बना कर उनको भेज दिए थे। प्रहुपाजनेउससमय से थे, उन्ही के अंडर में गिरिराज महाराज, बॉम्बे के जू के प्रेसिडेंट जय महाराज लेकिन वो पूरा जमींदारी उनको भेज दिए। विश्वास था सब कुछ समर्पित सम्पूर्ण रूप में समर्पित थे। आज भी आज भी अंतिम समय तक जो कुछ करते थे इस कल के लिए और शिव प्रभु प्रसन्नता के लिए अपने के लिए कुछ भी नहीं किया। इसी आदर्श में महाराज की यह भी इच्छा थी की उनके शिष्य लोग भी इसी आदर्श को अपने जीवन में उतारे समपूर्सरणाकृष्ण के चरण में होता है। तो कभी कृष्ण को किसी प्रकार की कमी रही। इस बार उसको पूर्ण विश्वास होना चाहिए। कृष्ण ही मेरा रक्षक है, कृष्ण ही मेरा है। जो लेख गीत आमार तुम्हारे चरण बिना ऐसा निज बोलो चेस्टा प्रति भरोसा छाडिया तुम्हारी इच्छा रे अच्छी निर्भर करिया। सब से ध्यान रखना चाहिए की अब जो कुछ कुछ भी प्लान करें, जब तक कृष्ण नहीं चाहेंगे, गुरु की इच्छा नही होगा, वो कभी सफल नहीं हो सकता। आप जितनी भी प्लान कर लीजिये, कुछ भी कि, सब कुछ उनकी, वहाँ ऐसी कंट्रोल कंट्रोलर है, वो सब कुछ उनके गीत में चलता है। इसलिए गुरु महाराज के जैसे शरणागति है, कृष्ण गुरु अन्य देखना चाहिए। आदर्श सम्पूर्ण रूप में शरणागत है। और सी होने के नाते ऐसे शरणागत होना जरुरी है। गुरु महाराज को है जब वो प्रसन्न होंगे, जब हम सब कुछ इस कल के लिए, प्रभुपाद, जी के लिए, गुरु महाराज जी की प्रसन्नता के लिए सब कुछ समर्पित करेंगे। इसमें कुछ पर जो जितनी पर भगवान की दुनिया में चेटिंग कर सकते है। कृष्ण को प्रत्य जान। आपके हृदय में क्या चलता है? आप क्या सोचते हो, क्या प्लान बनाते हो? आपके अभी क्या स्थिति है? पहले क्या था, भविष्य में क्या होने वाला है, यह सब कुछ किस को पता है, कृष्ण को पता है, उनके प्रतिनिधि सद्गुरु को भी पता है। देख देख कर स्टडी कर लेते हैं। व्यक्ति क्या है, गुरु महाराज के देख स्टडी कर लेंगे, ये क्या चल रहा है? इनके अंदर, अंदर, स्मितिरज्ञान ज्ञान में, प्रकार गुरु महाराज के जीवन के चरण में और कृष्ण के चरण तो यह शरणागति ही जीवन का लख्य है। शरणागति हुई हार प्राथना, सुन, नन्द कुमार, नंद कुमार, किसने उसका प्राथना वो जानते है। कौन? व्यक्ति कितना कहा, क्या करना चाहता है? तो उसी भावना को पोषण करते हुए, जानते हुए हमें गुरु महाराज की चलना चाहिए, अनुसरण करना चाहिए। जब उनको अनुसरण करेंगे नहीं जीते। जो कुछ करने से कुछ फायदा नहीं है, बाय रूप से कुछ भी कर सकते हो। लेकिन गुरु महाराज के चरण में शरणागत होना जरूरी है। कृष्ण की शरणागति का है। गुरु के चरण में, शरणागति गुरु के माध्यम से कृष्ण में शरणागति होता है। अल्टीमेटली सब कुछ सब कुछ ठीक हो जाता है। जब हम गुरु के चरण में, कृष्ण के चरण, उन सब कुछ उन चस्टाप्रतिभरोसा, छाडिया, तुम्हारा, इच्छा अच्छी, निर्भर, पुरे, दिल से शरणागत हो जाता है। तो उसके सब कुछ जो खेमा, वह महम, तभी, कृष्ण योग, वह कृष्ण का बच्चन कभी झूठा थोड़ी है। कृष्ण जैसे पूर्ण भरोसा रखना चाहिए। इसी प्रकार उनके सच्चे प्रतिनिधि का वचन कभी झूठा नहीं और सब पूर्ण शरणागत है। आप किसी भी भी चीटिंग नहीं कर सकते। सब जानते है गुरु क्या चलता है। तो इसलिए हमें गुरु महाराज को करना, बेसिक इंस्ट्रक्शन को जॉब करना ही है। इसे नही करना। गुरुर बहुत बिजी रहता हूँ, दूसरा सेवा करता इतना बिजी रहने की आवश्यकता नहीं है। तो सबसे पहले 16 आपके जो नियमित जप का जो कोटा है, कम्पलीट करना है, प्रभु किताब को नियमित रूप से क्या करना है। पढ़ना है प्रीचिंग इस सेंस प्यूरिटी, इस फोर्स, हमारे गुरु महाराज जो प्रचार करते थे, इतने लोग आकर्षण करते थे किसके आधार पर प्यूरिटी इनकी शुद्धता, सिम्प्लिसिटी और प्यूरिटी इतने सर्व है। और इनके जो शुद्धता था, यही लोग को आकर्षण करता था। ये नहीं कि कोई 50 आचार दिन टीका को महाराज जानते थे यह कोई विसनाचककमेंटरी, उसकी कमेंटरी, उसकी कमेंटरी, गुरु महाराज को जितनी बस उसी को पढ़ते थे, उसको बोलते थे। कभी बाहर बार कुछ नया बुक निकाला था। अक्षय किताब तो मिला के महाराज महाराज। ये किताब बहुत अच्छा है महाराज और थोड़ा मुस्कान मुस्करा। then prhupatbokbtevhin me thing is in is book सिम्पली रीडिंग प्रहुपाद ऐसे प्रपा पूरा समर्पण था। प्रहुपाजीकेबचन में पूर्ण विश्वास था। प्रहुपाजीजो बोले निश्चित रूप से सत्य बचन है। प्रहुपाजी को भी किसी को झूठ नहीं कहा सकता, चीटिंग नहीं कर सकते। इसलिए प्रपा आधार पर उनके सारे लेक्चर है। लेकिन इतने के तिराहा में कितने लोग आये थे। कभी वृंदावन में इतने लोग आय नहीं।
सर
से कार्तिक में भी इससे भी अधिक लोग थे। उस दिन कि हो गए उनकी शुद्धता प्यूरिटी समर्पण गुरु में कृष् किशन जिसको कृतिमान बनता है, सबसे बड़ा करती क्या है। संसार में कृष्ण भक्त बोली जहार है। ख्याति, जिसकी ख्याति संसार में कृष्ण भक्त हुआ है, वही सबसे कृतिमान पुरुष है। अभी देखिये कितने आकर्षित महाराज जिन जो आकर्षण करते थे, उन को केवल उनका प्यूरिटी के कारण शुद्धता और सरलता सिम्पुल। गुरु के आदेश प्रभुपाजीकेचरण में पूर्ण शरणागति और सिम्प्लिसिटी बस सिम्पलीसिटी और प्यूरिटी शुद्धता। उनके अंतर में इंद्रिय इंद्रिय की बारबार, कोई बासला, कोई किसी प्रकार की
वो
स्वामी केवल कहने से नहीं होता है। इसको प्रैक्टिकल जो उतार लेता है, जीवन में है। आप देख सकते है। उदाहरण कैसे गुरु महाराज ने अपने जीवन को कैसे निभाया सादा। जीवन विचार, सिखा, प्रहुपाजीकावही माध्यम से सभी प्रकार के सफलता को मिला और महाराज यही चाहते थे उनके सारे सरल रहे। सिम्पल प्रहुपाजीकिताब को पढ़े ना करे प्रभु। पाजी जो प्रिंसिपल दिए है इसको करे। इसका न कोई नया कुछ नहीं बनता है। सब कुछ फर्नाटबंदगीप्रहुपाजी ने दिया, मंगला सिस्टम कौन दिया है।
प्रभु
सारे 4 बजे मंगला आरती होगा। गुरु पूजा से। सारे गोडिअन्यगोडियपरम्परा के स्टेट मंगला आरती करते तो गुणगान करते। बा गोरा लोग गुणगान करते हैं। भाले गोरा चांदेरनिसीपुहाई लेकिन इस्के नहीं सारा सिद्धि का रहस्य यही है जस् प्रसाद भगवत प्रसाद है जस् प्रसाद प्रभुपाद ने इसी को सिखाने के लिए दिए। सिस्टम प्रत्येक दिन आरती होता होगा। राधा कृष्ण के अमर गार है। क्या गुरु दिए परफेक्ट फेर इसको याद रखना मंगलार थोड़ा जप करो। माला जपने के बाद फेर तुरंत आ गया। गुरु पूजा, श्री गुरु चरण पद्म के भगत सत् तू सावधान गुरु मुख आशा श्री गुरु चरण। इसलिए प्रभु है गुरु परम्परा का कृपा दूसरे किसी प्रकार की कृपा प्राप्त नहीं कर पाओगे। प्रपा सिस्टम बांधे और गुरु महाराज कुछ नया इनमें दिया। वही सिस्टम से फॉलो जैसे जीवन में उतारे और देश दिए है का पालन करते रहना तो भी निश्चित रूप 1 दिन अवश्य जीवन के लख्य जो गुरु कृष्ण के चरण कमल को प्राप्त करना। यह अवश्य प्राप्त हो जायेगा। जन में जन्मे प्रभु से 1 जन्म का सम्बन्ध नहीं है। गुरु के साथ शिष्य का अभी, गुरु का चले नितल सी है। शिष्य लोग क्या कर रहे हैं, चिंता है मेरे शिष्य लोग कहाँ भगवद्धाम पहुचेगी नहीं, मार्ग में चल रहा है की नहीं? ये सारे गुरु का जमींदारी है। 1 बार पूछा महाराज क्या जब जब गुरु सदगुरु होता है, शिष्य का क्या सारे करमि्य। इसी भौतिक जगत में जो नहीं बन पाया तो गुरु क्या उसके लिए आना पड़ेगा। उसको तो महाराज के शास्त्र के आधार पर ही सही होना चाहिए। गुरु जो शिष्य स्वीकार करता है, शिष्य जो भगत नहीं पहुँचता। फिर गुरु को बार बार उनको ले जाना, ले जाना चाहे। वो स्वयं माध्यम से इसकी जमीदार है। लेकिन फिर भी कहेगी? लेकिन कृष्ण बहुत दया है, कृष्ण उनके शुद्ध वक्त सफरिंग करे, आप चीटिंग करोगे, चीटिंग प्रयास करोगे, आप खुशी थक जाओगे। क्यूंकि गुरु आपको ऐसा दिखा दिया है। गुरु कहा कि आपको 4 रेलवे डी प्रिंसिपल फॉलो करना और उसमे ब्रेकिंग गौरत गुरु का आपका साथ जमींदारी का पैसे मांग रहे है। वो जमींदार को उठेगा। लेकिन आप प्रभु पाजी के दृष्टांत से देखे है की प्रभु पाजी में कई शिष्य बहुत पतित हो चुके थे। लेकिन फिर भी प्रभु पाजी त्यागा नहीं। वो चाहे प्रभु पाजी को त्याग सके लेकिन त्यागा नहीं। अंतिम समय तक मैं अमेरिका में था तो लॉस एंजेल्स में गया, लॉस एं मंदिर में गया था तो वहाँ पर 1 ब्रह्म रहा था, थोड़ा ही वहाँ पर 1 माताजी आई थी। माता परवीमाथीआकरपाजी के सामने बार बार पागल दिस मैन दीस। दीस क्या बोल रही है से पकड़े से पूछे। वो 1 फोटो निकाली और फोटो प्रहुपाजीकाही फोटो था। बोला कि मेरे हज़बेंड जब शरीर त्याग रहा था, वो अपने जो उसको बिजनेस करता था, लेकिन इस को छोड़ दिया था, कर्मी बन गया था। लेकिन वो अपने बेड के पास रखा था। प्रत्येक दिन सजा से उठकर प्रणाम करता था। प्रभु पाजी को फिर काम में जो आता था। रात को सोने का समय प्रभु पाजी पर प्रणाम करके कुछ बोल के फिर सोता था। और अंतिम समय में जो उसको कैंसर हो गया। जो मर रहा था। तो प्रभुपाद जी का फाटक लाया प्रभुपाद कैन यू कैन प्रभायन शरीर त्याग दिया बोले अंतिम समय में। इसलिए यह व्यक्ति का नाम, उन्होंने व्यक्ति कौन है। आज यहाँ पर मिल गया। मुझे ये व्यक्ति है अर्थात गुरु कितने उसको भी ले गए। कहा है भगत धाम। गुरु अपने शिष्य को त्याग नहीं है। लेकिन शिष्य का भी कर्तव्य कुछ होता है। सब समय सिंसियर ली। गुरु के आदेश को पालन करते रहना चाहिए। कुछ नया आदेश नहीं है। जो प्रभु पाजी, इंस्ट्रक्शन पारा परम्परा से आई है, वही आदेश ही हमारे गुरु महाराज की है। प्र करना, प्रहुपाजीकिताब को पढ़ना, प्रहुपाजी, किताब को वितरण करना, बस कुछ न्यू इंस्ट्रक्शन नहीं है। तो इसी के माध्यम से भी गुरु महाराज को प्रसन्न कर सकते हैं। और गुरु प्रसन्न होने से कृष्ण प्रसन्न हो जायेंगे इसमें कोई शंका नहीं है। प्रत्येक दिन 1 माल रखने के लिए हम गुरु रास्टर गाते हैं। जश्यप्रसादद भगवत प्रसाद, जश्या, प्रसाद नगरी, कुत, ी, ध्यायंगस्तुबनदस्य जशस्तरीसंध्यंग, वंदे गुरु। श्री गुरु महाराज को प्रारंभ गुरु 3 बार कहते थे, वो सुबह दोपहर, फिर शाम को कहते। मैं ट्रैवलिंग में रहता हूँ मुझे कहे की मैं ट्रैवलिंग ही जाता हूँ, फ्लाइट में भी कहीं भी रहता हूँ, मैंने ये गुरु वास्टर गाना को भी बंद नहीं किया, गायत्री इतना टाइम लग जाता लोग इतना टाइम क्यों लगते है महाराज ने पूरा परंपरा की प्रणाम मंत्र पढेंगे गुरुवास्टरगायगे गायत्री करेंगे तो आपको पूरा ऐसे शरणागत रहना चाहिए गुरु के आदर्श को देख सकते हैं और उसी आधार पर हमें आगे बढ़ने के लिए प्रयास करना चाहिए। इसी से सभी प्रकार की सिद्धि को प्राप्त हो सकता है। हरे कृष्ण, हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे
हरे हरे राम हरे राम राम राम
हरे हरे ही झोली ने गोपाल कृष्ण को स्वामी गुरु महाराज की दिन की समानता वैस्ट भक्त ने की जा नेताओं
को नंदहरि
बहुत बहुत धन्यवाद महा अपने 45 मिनट में बहुत सुन्दर उद्देश्य ही है। और जीवन भर ये लेसर सुन सुन के हम अपने आप को कैसे से हमेशा कनेक्टेड रहें हैं। वो आपने दिखाया है महारज की शुद्धता के ऊपर। जब चाइना लेते महाराज के साथ में चाइना गया तो रोड में चल रहे। कानून तो चाइनीज लोग के महाराज को प्रणाम भी कर रहे है और दर्शन भी दे रहे। कोई कनेक्शन नहीं डॉक्टर नहीं खुश नहीं तो महाराज बोले मुझे के तो हम देख सकते हैं महाराज की शुद्धता से दूसरे लोग भी जो भर्ती को जानते भी नहीं, दूसरे विदेशों के भी महाराज से आकर्ष। तो अभी हम आज के लास्ट स्पीकर को हम नाइट करेंगे। आप सब जानते हैं डिस्प्ले समनलोजनभसोनवाो का बहुत उत्साह था ये प्रोग्राम और जैसे ही हमने मीटिंग करना चालू किया, डिस्कशन किया तो बोला मेरा बताएगा हम शो सेलेब कहाँ करेंगे तुरंत बोले मिला रुपये करेंगे सब हो जाएगा। कभी भी कोई युद्ध रिलेटेड हो चाहे यात्रा हो चाहे केशन देखा की हमेशा आपको पोत्साहन देते हैं, का हो जाएगा के
रेृ्णरेकृषणकृष्ण कृष्णा रे रे रे राम
हरे राम राम राम हरे में सू प्रोग्राम कपूर नहोती के हिसाब से
खास
करके कार वाई गुरुस् कार के पीछे 1 बहुत महत्वपूर्ण उद्देश्य है। उद्देश्य से
मे
गुरु के अनुपस्थिति में उनकी उपस्थिति की महसूस ज्यादा होती है। हमारा दोरीरेजकरसिद्धांत है कि विरह में हमारा जो सांगत्य है, सम्भव है, उस पर अनुभव करना। भोग के विरह बडियशसिदधांतहै, अभी महाराज की उपस्थिति में हमने उतना भी भोग किया, उतना मतलब उनसे मिलना मुश्किल होता था। और वो है तो भी ठीक है। कभी कभी ऐसा महसूस हो के बाद मिल रही है। लेकिन अभी उनकी अनुपस्थिति में, उनके विरह में उनकी उपस्थिति महसूस ज्यादा हो रही
है
तो उस अनुपस्थिति में महाराज जी को उपस्थिति का अनुभव करने के लिए
हमें योजना हो रहा ह।
चक्कर तो
मीट किए थे तो मैंने में प्रकार आया कि वैसे महाराज जी की अनुपस्थिती में सारे 1 कैसे हो सकते हैं। खासकर के यूजर्स जो है वो कैसे 1 हो सकते हैं। महाराज का जो मूड है, उसको आगे तक, अनेको सालों तक, अनेकों स्तर मार करता है। हजारों साल तक इसको आगे बढ़ाना है। वो तभी संभव होगा जब हम साथ में आएंगे। हमने इससे सोचा कि कम से कम व्यस्त द ऐसी कार्यक्रम हो खासकर के बिना मुंबई और गुजरात सूरत हम दवा दी है तो नगर पड़ता है तो 1 कार्यक्रम शुरू करते हैं। और ऐसा जो कार्यक्रम है गुरुशरण कार्यक्रम में, हर 3 महीने, 4 महीने में हर काम में उसे किसी ने बात आई कि रोज तो व्यास पूजा तो होता ही है। व्यास पूजा के साथ साथ में महाराज उसके काम के बहुत सारे स्पीकर्स आयेंगे। 55 मिनट होता है बाद में अन
े
तो वो असा सदर नहीं होता जो वे सीनियर वक्ता महाराज जी बिल्कुल साथ में हो चुके हैं। ऐसे वक्ताओं के मुझसे कम से कम आधा करना का शो पसंद प्राप्त होती है। तो इस बार विशेष रूप में इतने श्वुआए रहे थे। मैं दिल्ली का स्थान रहा था सच सच सलाना कराची दिल्ली के भक्तों को
बड़े भाव है।
महाराज जी को अपने प्राण से विचार कर रहा था कि महाराज जी दिल्ली को देख भाल करते है, मुंबई को भी देख भाल करते हैं। दिल्ली में 17 मंदिर बन गए लेकिन मुंबई इलाके में कारगर भी उनकी उपस्थिति में पूरा धन्यवाद तुम्हें विचार कर रहा था कि महाराज हमेशा मिशन में से खासकर के मुंबई के बत्तों में बड़ी बड़ी जिम्मेदारी है। उनकी अनुभव स्थिति में महाराज जी की उपस्थिति को अनुभव करना है तो मुंबई में भी सत्र बंद होना चाहिए। ये कार ये लगता है कि तो हमारे और विजू सहर होते हैं, होते हैं ना, कि ते है
तो जभी
भी न हार से ऐसे इंटरैक करता था। मार ली बांडे यू हर तो स क्योंकि वे छोटे मोटे पोज बड़ा बड़ा काम होता करना वैसा करना। तो कहा 1 बार दादाजी को भारी हो वे सभी टी टेबल। तो ऐसा लगता है कि ये जो पुरुष का कार्यक्रम में खासकर के 10 दिन का कार्यक्रम में इसका 1 बड़ा सुन्दर दायित्व है दिल्ली के जो भाव है महाराज के 17 मंदिर निर्माण का फॉर्मेंट वही चीज मुंबई में करने की दायित्व हमारे तो खास कर के अगली बार भी हम दिल्ली से कुछ वरिष्ठ सी बुलाएंगे जो कि साथ में ताकि महाराज जो संसद जो दिल्ली के भक्तों के लिए विशेष है, उनका प्रेम बड़ा विशेष है। तो दुसरे हमारे दशा जानते ही हमारे विशेष। राज ने कहा कि दशा आये जिस दिन वो आएगी उस दिन गाय
के
12 साल महाराजी का ऐसा सेवा किया जैसे कि आये हम लोग आम का सेवा करता है ऐसा सेवा किया। पशाकरबढाने से पहले बहुत सारे उनके असिस्टेंट थे, सिकटी थे तो 1 बार या था कि जुनूने उनके 2 सिकेटीजथेमातो किसी कारण व छोड़ दिए का सीक्रेट सेवा कोर्ट में उपस्थित था। तो मुझे क्या महाराज जी ने कहा की फाइन सम सेक्रेटरी फॉर मी तो मैने कहा की तो ल
यू डोंट
नो कंप्यूटरस
तो
प्रॉब्लम नो
यू फाइन
सममन आसान काम नहीं है। जैसे रोजी ने कहा
24 घंटा थैंक
यू फॉर सान देने तक का समय नहीं है ने कहा कि पहली बार प्रवचन किया गुरु पूजा गया के वचन देना आस्तध्यनकरनाऔर किर्तन करना मुश्किल ही है, 1 ही कि 1 ही भगवान है महाराज। रामानुज चारी के शिष्य हुए
नाम है
ंदरपूलराजेवीदशाकार, उन का प्रश्न होता है, 10 होता है। तो वह 1 बार सारी में जा रहे थे, सर सर का, तो से सामान पार के अगले डेलीनेशन में गए तो किसी का हाथ कहीं और अपना तो सामान निकाला जिसके अंदर उनको अपने स्वयं पर्सनल डे जैसे परसा मिला। 4 जिस के अन्दर ये डेविस जैसे वर्षा देखा की मार। 4 उनकी पाली का अंदर है, उसको दिखा उसके नीचे क्या है, देवराज कलमा? तो जैसे जाए उनको डांटने लगे, बड़ा
क्या किया तुम्हे मेरा जूता तुम्हे इसकी है।
चंदर ने कहा देखो ये जो विग्रह है वो आपके भगवान है, आपके चरपुरलोकीजोपाली उन में भगवान है। यह दोनों तो है क्या ऐसे भाव वाले जो अंदरपूर्डहैऐसा शरण होता है। हमारा आज का कार्यक्रम तक हो गया।
समझता
महाराज जी है जैसे 34 दिन पहले हुआ था वो विदाव में महाराज जी वोट दे रहे थे, रंग दे रहे थे, का कैसे में इस्कॉन जोडूंगा दे रहे थे।
तो
इतना अद्भुत बात है कि दीक्षा पढ़ लिए और महाराज जी गिरा हुआ
है,
ऐसा मेरा अनुभव है की अनुभव हो रहा है। मुझे की साक्षात उपा, महाराज
तो
चक्र के थ्रू पूछ रहे थे की करोली महाराज का बोल रहा तुरंत अभी हफ्ते का है तो क्या हुआ? कल की बात है कल सुबे देश रोजी महाराज की प्रधान है, पर है तो तो कोई दूसरा किला
ने विद्या
के
रहा था,
तुरंत 1 बंदर बनने
आया है,
ू गर महाराज जी को पसंद है तो फिर उनको पसंद है तो आगे बड़ा, वैसे तो सर स्वभाव है महाराज जी और लगता है की उनका निष्ठा हाल, तानपुरे तो हमारा जो ये जो गुरु महाराज का जो तरीके से बताया जाए, जो नूर है उपाजनिष्ठाडिस्ट्रिब्यूशन और बड़े बड़े पोजिट्स लेना सुना और साथ साथ साधना ने भी निष्ठा आवादन ये जो वो हमेशा कायम करे रहे, इसके लिए ये जो कार्यक्रम है पुरुष हर 34 महीने में होगा। तो इसके लिए आप सबको टाइम पे
आना
और सूरत सूरत न। तो साल में अगर हम 4 भी करें तो 1 बार मुंबई में अभी हुआ है, दूसरी बार 2 नाम हो सकता है, दूसरी बार शुरू हो सकता है और मुंबई के 1 हो तो 1 रीजन हो गया तो हिसाब से अभी अगले बार जब मुंबई तो स का हो सकता है तो इतने लोग तैयार है की रूस पर प्रोग्रा खाये तो टेस्टिकल के तो अभी बात भी हम अस्पताल के करते रहे। कास्टर विशेष रूप में मैं कहना चाहता हूँ कि इस बात का जो का जो प्रसार पांसरशिप है, शीराजा ब्रह्मचारी की
ओर से
किया है, न कीजियेगा ने वाद और जो ग्मचारीकसालहै वो पीछे बात और है में पस्त हो रहे हैं। तो बाकी साल है और र्मचारी स्पेशल गेस्ट सी पोटिस आए हैं, उनको ऊपर पाकिसतान
बहुत बहुत धन्यवाद तो कुछ अनाउंसमेंट है। अभी आज 21 जुलाई हो गया और इस साल ए टी एस व्यास पूजा है जो दुबई सुगलस्वामीगुरमहाराज का और महाराज हमेशा चाहते थे बॉम्बे के भक्त जो है वो बॉम्बे नहीं करे और जो में आये सारे बंदे को भक्त लीडर से चाहे खानगर और व्यास पूजा के 23 दिन बाद बोन के पूछते भी थे। अमीर बहुत से कि कितने बनता है नीर से कितने आ है, झार घर से कितने आए। तो हम आपको इसी लिए पहले ही इनवाइट भी कर रहे हैं, पृथवी बता रहे हैं 26 अगस्त की जनमास्टभीहै, 27 अगस्त को प्रोप पूजा है और 19 अगस्त अंददाएकादशी जीवन भर अन्न चाहिए तो अंददाएकादशी तो 19 अगस्त को जललुबलससमहाराज का जो व्यास पूजा होगा वो हम जूम में सेलिब्रेट करेंगे सारे। मि ले के भक्त वहाँ पर आएंगे महाराज की सन के अरे जो 10 नही आ पाय। उन्होंने कहा कि सभी वर्ष तों को सभी बातों से माफी मांगेगा, क्योंकि वे पिछले 8, 10 दिन जो हुए थे तो उनका वहां पर सेवा रुका हुआ। अब वो मंदिर बनाना हमको नहीं करना है। तो मैंने कहा तो ओपनिंग कीजिये और कार्तिक के एंड में मैराथन चालू करने से पहले हम 1 और 2 प्रोग्राम करेंगे और वो कारगर में करेंगे। तो ्र आप सबका स्वागत है मैने ऑलरेडी वाइट किया है मारिया डिस्कस करेंगे की कैसे करेंगे तो नममबनभारथमके जस्ट जैसे सर्वे का महाराज भारम लॉन्च के ले आते हैं। तो ये 2 पर प्रोग्राम जो होगा वमारातलमसुरेअच्छा होगा अरे प्रश्न तो अभी हम यहाँ पर आरती करेंगे, इन होगा आगे जो होगा सबको प्रसाद किये जाएंगे तो आरती के लिए निवेदन करेंगे मो
क्या
जल
का
गाया गा गोरे का
संसार
का
रोका
महान नहाया सरगार
ग
आगगोगेजकजका रे गाया ह
जी
मंडेगेजना नदुरिदाजेबला वनडे
दे
ा का ज ये जो हाल ये कि है रेगागा
हे
ढेगजेरे चकागाधाा ा द गुगे कहु
विश्न बाना किशन
के सा हो कराया इसके कायदले ले गागबरा मत खाया हो जाले बोल वही बचा से बेटा ले मेरे से जा हो। हानि आककासार हम ना हो ह हरे हरे राम हरे राम हम त हाल रामाराम दिशा रेरगुहलेरारमररेरा आड़े हर राग हर राह हर हर राग जिला जिला ना हर हर राह राह राह ल हर राह ा
स्वामी जगत महाराज की काउंट
महाराज की
भक्ति सिद्धांत के कोपा महाराज की समाज ठाकुर की सिंह जैसी किश्त गौर भक्त की श्री शीरा की हरिनाम सिंह की की महामंत्री गोपाल कृष्ण महाराज स्मरण गाविभदवसकीरे gas ngrasngaongras on gras oncirstusegru go raga।
More from PRASAD

Rare Pastimes & Timeless Lessons of Guru Mahārāja | Stories Every Disciple Should Hear

ISKCON Legends- pure devotees meet-HH Jayapataka Swami, HH Gopal Krishna Goswami, HH Radhanath Swami

Jagannātha Ratha-yātrā Through Śrīla Prabhupāda's Mercy | 29 April 2006 | Nairobi, Kenya

Lord Jagannātha's Appearance Pastime | 21.07.2019 | ISKCON Calgary | Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

The Ācārya Teaches by His Own ExampleGuṇḍicā Mārjana by Guru Mahārāja #shorts

Guṇḍicā Mārjana – Lord Jagannātha's Pastime | 21.7.2019 | ISKCON Calgary |Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

H.H. Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī Mahārāja - Exemplary Sādhana and Deity Worship # shorts

भगवान की कृपा कैसे प्राप्त होगी ? | 11 Jan 2014 | Punjabi Bagh | Srila Gopal Krishna Goswami

Material Education vs Spiritual Education | Srila Gopal Krishna Goswami #shorts

