
A devotional program honoring the Guru's life and mission, from his book-distribution work starting in 1900 to establishing mandals and temples across India and abroad. Speakers share stories of his disciplined practices and urge listeners to join upcoming book-distribution events and support the mandals.
Chapters
37 के पश्चात अमेरिका पहुंचे अमेरिका पोंजी 2 महीने के भेजे के साथ 2 महीने का वीजा प्रॉपर्टी को सुल्तान ने 2 महीने के वीजा दिया था जी ये भाव था 2 महीने के अंदर इस संस् की स्थापना करने। पहला महीना बीत गया बच्चा पंसमेियमे तो 1 ही महीना बचा था जिसे प्रॉपर्टी इस पर विचार न कर पाए। प्रॉपर जी 4 शुरू किया कि रहने का कोई ठिकाना नहीं था सोने का कोई ठिकाना नहीं था जब भी उन्होंने अपना प्रयास नहीं छोड़ा 1 न्यबकमकसर्जनमिला था जिसने प्रॉपर जी से पूछा कि आप क्या करती रही अमेरिका में प्रॉपर जी के काल में प्रचार करने आया हूँ मेरे बंदर हैं भागते हैं केवल सबने हाँ घर है। प्रौपर्जी ने प्रपरजीकबादकपदाता रहने का की कनात
कुछ भी सुविधा नहीं थी।
हमने पूरा विश्वास था कि छीदिमहातोलीिशवन
के पश्चात
खोला
में
से संस बढ़ते आज प्राजी से इस कम संसा के साढ़े 600 मंडल शियारी कोन है विश्व का नाम किया के मध्य करोगे कल मंसीजीआरकेमजेमिल ने बंसी का बड़ा सनादनधलमेंबहुत बड़ी शुदा थी त्रू्चर्चाकरलेते हम धर्म का प्रचार करने। मैंने उनसे कहा कि आप से जानते नहीं परिसपनसंसथाका प्रचार विश्व के कोने कोने में है चाहे व्यक्ति व समाज समाज के हो सभी समाज के हर जगह पर क्या हो रहा है सच मैंने तुम्हारे यहाँ मजलभगथेजूकिमुस्लम देश के सदस्य हैं उन्हें बुलाया है। जब उन्होंने देखा इन बातों को धोती बच्चों को भीतर के लोगों का उचाननकरतेतोवआश्र्
के हो गए थे
से लाखों उदार है तो अभी जमकर दिखाया जब उन्हे कहा गया वे बचुाचार बजे जाते ै बहुत कम मंदर कि रशिया के समुन्द्र में मंगल आती सवा 4 बजे होती है साढ़े 4 बजे बाकी बंदर में साढ़े 4 होती है और रशिया में मंगल आदि समुंद्र में सवा 4 बजे होती है। तो जब यह सुनते हैं कि सौ 4 की जान का पालन कर विजोरसजनआईथेकहा गया की हमारे से हो गए थे तो प्रॉपर्टी ने हमें शुभ सन्देश दिया है बरही सन्देश नहीं यह प्रॉपर्टी अमेरिका पहुंचे थे करियर ने उनसे कहा था स्वामीजी या संदेश लाए हो हर कोई स्वीकार नहीं करेगा पर प्रोपज ने यतरुआजतीसं्देश प्रस्तुत किया तो आज साढ़े 600 के गए हैं सारे विशु में प्रॉपर्टी ने लगभग 90 बाद किया था की बात में ले जाने से पहले प्रॉपर्टी ने शिव धवोदनकेरकोपस्तन 3 भागों में प्रकाशित किया था और विदेश जाने के पश्चात यह साल के अंदर कपाली ने 14 दाता विश्व का भ्रमण किया और दूसरे स्तंभ से जिस के अंदर भगवत का अनुमान किया केतमेचरदवीत गीता इतियादी कुनिका किया तो आज आपको कुछ ही होगी जानकर। नुवान 80 से अधिक भाषा में हुआ है और 500 से ज्यादा करोड़ किताबें ने भाषा में है बढ़ती है सारे में लगभग 120 है कोई 70 बोझ रहा है इस संख्या के सारे में। इस समय हमारे लक्ष्य देश में बदला भोशराखोगयीहैजिन देश के लोग देश में 2 लोग मांस के खाते ही कोने कोने में भारत को चला खोला तो प्रॉपटी ने हमें शोर सु देश दिया है और प्रॉपाकीच्छाती सब गंभीरता के साथ इस शिक्षा को अपनायें के को कहते हैं। कमांडर। भवीलेकौनभगवानजी गुणुकृष्णवअनेक जन्म के पश्चात भाग्यशाली व्यक्ति है। जिससे भक्ति का बीज प्राप्त होता है। भक्ति का बीज कर्ज है। भक्ति का ग्यान। भर्ती का महत्व संबंध में आता है। ये जो भर्ती का बीज है। ये रगेगा केवल अगर, हम ये पत्ती बीज है। ये रगेगा अगर हम सब करेंगे कर। कई लोग सोचते हैं।
शिक्षा हो गई।
रात में किसी जी की आवश्यकता नहीं। न गुरु की सास, यह भूल है। रक्षा केवल का कद। अगर हम आगे साथ में इस शिक्षा का पालन करेंगे। मेरा को शिक्षा का लाभ होगा। इसलिए छेतिनमहापबुने सागर संग पर बहुत महत्व दिया है। धुरणोमनाजसे। भगवान बड़े प्रसन्न थे। भगवान ने मन से कहा धान मा से तपस्या चाहिए। भगवान को प्राप्त करने की धुन बनाने हैं। बड़ी गंभीर तपस्या का पालन किया। पहले महीने 3 दिन में 1 बार खाते है। क्या फारसूखागवफलछहदिन में 1 बार फल सेव नहीं, जो साल खाते हैं। तीसरे महीने उन्होंने कुछ खाना, सब बंद कर दिया। फिर वो जल्द 1 बार पीते थे। 9 दिन के बाद तो भगवान की तपस्या से बड़े प्रकाशित हुए थे। अगर भगवान पसंद करना चाहते हैं, हमें तपस्या का पालन करना पड़ेगा। वह कुछ दिन पहले आप भगधनेयनमस्िकुछ बनाया था। वासुदेव देवकी। जो भगवान की माता पिता जाते हैं, उन्होने बार हजार देवथंकेवर्षणमिल। बड़ी। के के खाने के लिए सूखे पत्ते
गिरते हैं।
वही स्वीकार किया 12 हजार सालों के देवता के।
अगर।
आज हम आपको सूखे पत्र के लिए पथकीखुखुडानेरामचन मंडल आना बंद कर है। तो वह परेरूउनकी तपस्या की माग किया था। सारा चिंदी भगवान प्रात को पर के
रूप में तो
तपस्या से भगवान प्रसन्न थे। और धोराज को भगवान के देंगे दर्शन में प्राप्त होगा। जब भगवान ने उनसे पूछा मांगों में से क्या वर चाहिए। धवन ने कहा कि आप मुझे वर देना चाहते हो, तो ऐसा हुआ। यह दीजिए कि मैं हमेशा उत्तम संधी संगत। इसलिए आदेश में कहा है। साधन सं सबसे आवश्यक है। तो हम भक्तों को इस प्रकार की योजना बनानी चाहिए कि हमें बकयादा भक्तों संग विप्रा। आज शिनपुरापाजेकी असीम के बाद से प्रयाण से की दिल्ली पंजाब, हरियाणा में, खुले कोने में केंद्र है की दिल्ली सियाणा में, जिसका मंदर है नोएडा में मंडल, गाजियाबाद में है, सकाबाद में है, गुडगाव में है, गुर्गा में दूर 2 मंडल ने वाले है बरिलाबादमेंहैं पंिशीलमेंहैं और है बाग में भाग, शिव और छत्तरपुर। तो देखा जा, से मां की ऐसी पूरे गोले में मंडल है। इसका लाभ उठाइए लविव कार्यक्रम में जा है और भक्ति पनामा के द्वारा यहाँ को परतों संबलता है। और भक्तों के संग में रहोगे तो यह सोचोगे कि हरीराम सबसे महत्वपूर्ण सेवा है।
हरिया राम केवल अगर हम भगवान को
प्रश्न करना चाहत, हम भगवान की कृपा चाहते हैं तो हमें जीव के साथ सदा महामंत्री को जोड़ के रखता है। दूसरे शब्दों में जो इस रवाना की जिम्मेदारी है, उसका हमें पालन करना चाहिए। महाकजाबकालाख तो हर स्थिति में है, पर प्रयास ही रहना चाहिए। अपराधों से बचे लोग जन्म करे। अभी शव पाया कि
दिन में ना बोले जाओ।
तो जब तक अपना मौका हासिल नहीं बचेंगे, पूरा लाभ नहीं मिलेगा। तुम्हारे नाम पर ध्यान दीजिए। और कई बार लोग पूछते हैं क्या सेवा कर सकते हैं? तो हम कहते हैं कि सबसे प्रथम रुतम सेवा है। हरी ना नोट रूची बड़ाला। इस वही रूची महीना में है या नहीं है, ज्यादा है या कम है, बहुत कम है। जब मौका मिले निंदा जाती है तो परेशान खाने में 3 दिन आती। तो प्रशा अच्छी बात है। परेशान में रुची है तो हरी नाम में हमें रुची बनानी चाहिए। पानी ना रूची बढ़ेगी। अगर अपने नाम का जाप करोगे। जब नहीं करोगे तो बहुत केशन बढ़ता जाएगा, बोधि आकश बढ़ता जाएगा। आपके मन में ये भाव आएगा आधारित की क्या जल्दी आप देख सकते हो। मालिक समाज में
अगर कोई व्यक्ति ये
सोचे, ये मेरे पास ऐसी योजना है। रिकाडिग समाज में सुख बहुत बड़ी भूल है। तो सारे जग में लाओगे। तो रीना की महिमा का ज्ञान सुनोगे हमें बड़े ध्यान से करना चाहे। ये है शास
आगे के तरह मेरिका
श्रीमद भागवत का उच्चारण करो अध्ययन कर। पापाजी ने श्रीवर भगमदकानवाद किया। प्रथम सकन के पश्चात प्रपरजीअमेरिका के थे।
200 सेट साथ लेकर
अमेरिका 5 डपरबनीनेपणमपुरशोधन श्रीकृषण योगी के दससकरणकासाय है। उस को प्रकाशित किया। कथा के रूप में कह रहे थे, उन्हें पता नहीं था पृथ्वी पर करत रहेंगे। वो चाहते थे कि प्रमाणिक कर्ता दी जाए। जिसके द्वारा हम ठीक रूप से सुन सके हैं। भगवान श्री कृष्ण को तो हमें भगवत में सुनना चाहिए। जैसे भगवत में कहा गया है शोवशुनीतिभगवत से भगवती के है। अगर लोग ध्यान से भागवत को पढ़ेंगे सुनेंगे। तो गिरने में जो है आपके हृदय में मेल है या नहीं, जवाब नहीं दे रहा, थोड़ी है जाना कोई नहीं
है,
सबके ही मैन है। सुले को ना कहना है बगदम सुनने से, पढने से, आप में से कितने भक्तों के सभा में जिनके पास अपने घर में भगतनबदसेटहै चाहे अंग्रेजी हो या हिंदी हो या मराठी हो, से लगता है। लगभग सबके घर में अगला प्रश्न
आप।
जे किसी पर हो, भगवतनकोरोजपढते हो या सुनते हो, की इंटरनेट में भी
ऐसी
के बाद भगत का सेट है। और पढ़ नहीं पाते। हम क्यों नहीं पढ़ पाते क्या है, क्यों नहीं पढ़ पाते थे वेरी बिजी समय नहीं है।
यह बात सच हो।
20 हो सकती है।
अगर प्रयास करें तो पढने में सब मिल जा। भगवान कहते हैं गीता में प्रयास करते मुझे समझने के लिए उनके कुछ कमी भी हो तो उसे में दूर कर देता हूँ। तो भवदोंकोपढिएगीता को पढ़िए और भगवान के आँच विगरा की उपासना की। जे भगवान प्रगट होते हैं आँचल विग्रा के रूप में आपके भक्त होते के घरों में गोलटाईयारालपेशकी मुर्तिया हैं तो मूर्ती रखना आवश्यक नहीं है। आप चाहो तो बड़ी सुन्दर तस्वीरें भी रख सकते हो। भगवान के मिला अगर आप मूर्ति रखना चाहो तो वो भी रख सकते हो। और घर में अच्छा ऑर्डर होना चाहिए। अगर मच्छर साढ़े 4 बजे बंगाल की नहीं कर सकते।
5 बजे कीजिए।
पर हमें महा प्रयास होना चाहिए। मंगल देव प्राथना बोलते हैं। संश्रद्धावसतुसीपुजा इन सब चरण में रोज करना चाहिए। पर हावी होना खाएंगे तो केवल पिता प्रचार खाएंगे। भीतर के तीसरे या में भगवान कहते हैं मुझे भोग लगाए खाए, वो केवल पाप खा रहे हैं। तो आप सब यहाँ उपस्थित हो। क्यूंकि आपकी अध्यानिकजनरूची है। और ध्यान रूचिकर आप का महत्व समझते हो। पर भौतिक सुनसान में माया का बड़ा
तेज प्रभाव रहता है।
सच है झूठ और आजकल टेक्नोलोजी कृपा ऐसी माया का प्रभाव और भी तेज हो गया है। पर टेक्नोलॉजी का योग कर सकते हो। आप में से कितने भर? तो मुंगेर स्मार्टफोन है। आप पूछ रहे होगे यह प्रश्न क्यों पूछा? अगर चाह तो आपके स्मार्टफोन में प्रॉपरजिकेसब नंबर डाल सकते हो। आप में से कितने भर कर देंगे। स्मार्ट फोन्स में प्रॉपर्टी के सारे ग्रंथ हैं। बस आप लोग टेक्नोलॉजी पर ज्यादा विश्वास नहीं करते। सारे गर नहीं तो कम से कम कई दाल सकते हो। और जब मोका आप पढ़ो आजकल जब हम क्लास के विदेशों में, बोर्ड में कोई रिस्क्लोकलिगता है, सब के जे में स्मार्टफोन है, जो भी रोपरदेशदेैवलोर में निकाल देते है तो ये स्मार्टफोन का दुरुपयोग भी हो सकता है। और कई लोग ने तो केन के को है टेक्नोलॉजी का उपयोग हमें करना चाहिए भगवान के लिए तो भगवान के आज के पास न करो और खाओ तो केवल कृष्ण प्रसाद। भगवान कहते गीता में यह भूख लगार खाए क्या कर रहे हैं, क्या कर
रहे हैं
कितने भक्तों जो रोज पाप खाते हो, के पते हो, रोज प्रसाद
खाते हो
ये प्रसाद प्रसाद का। यह नहीं 1 दूसरी का पता रखी प्रसाद बन गया। परशालयजबनतहै जब आप तैयार कर रहे हो
ये बात न रखो।
ये वो भगवान के लिए बन रहा है। फिर मंत्र से कुमार के जन बंद करो गुरु मंत्र 3 बार, मंत्र 3 बार, के मन मंत्र 3 बार, भगवान बारा 3 बार। पर जा ना प्रशाद ता है। अगर प्रचार खाओगे तो केवल प्रचार खाने
से ही तो
युव्यांतपूजाका उसरह
1 लूप
से बहुत भारी उत्सव है क्यूंकि कोई भी मैच ये नहीं चाहता अपनी फसल सुनने के लिए।
पर
इस उत्सव बनाते हैं इस लिए फिर शिक्षण को मौका मिले और गंभीरता के साथ भगवान के संगत होने के लिए। यह हम सब का देश है। भगवान क्या कहते हैं में
आम
वो
मेरी शरण में आओ तो मेरी शरण में आने का है उस शिक्षा का पालन करना और वे शिक्षा का पालन करेंगे भर्ती में आगे बढाएंगे तो साधन संग बहुत ही आवश्यक है। के कहा गया है सदसंमतयागसनचा और बगल की संगत उतना ही रखो दिखना भी आवश्यक है और उसे दे नहीं तो ये आपका भाव रहेगा। तो आप भक्ति में आगे बढ़ है। वह भगवान किशन पठार दिया में कहते हैं सब पत्र में सबसे प्रिय कौन है, कौन है सबसे प्रिय जन प्रचार करता है उसे जादा हुआ है न। तो प्रिय बनना चाहते हो तो 4 भी करते। ऐसे में बक्सर का पता रहता है और ये सब भी कुछ महीनों में आने वाली है पिछले साल में किन किन बदलने से रोक दिया जा है ये सब पर अपने मायापुर मंदिर के वेश में ही सूचना सुने। हमारे महान अचारियों की इच्छा थी कि मायापुरम यहाँ की क्षेत्रीय महाप्रवजीप्रकट हुए थे। श्री कृष्ण चेतना, राधा कृष्ण,
भगवान प्रकट
हुए, राधा कृष्ण प्रकट हुए के रूप में जो हमारे अचानक इच्छा थी कि वे अदभुत मंदिर वहाँ बने जिसकी तुलना कोई और मंदिर नहीं कर पाए। जैसे क्रिकिट क्रिस्टियान ली का सबसे प्रसिद्ध मंदिर के दर है। मेडिकल से मायापुर बक्स मेडिकल है, पर सारे विश्व से लोग मायापुर धाम में आये है। भगवान का दर्शन प्राप्त करने के लिए।
है।
मायापुर धान में कई साल पहले भक्तों के सहयोग से, राम प्रभु के सहयोग से ये विशाल अदभुत मंदर का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। और पिछले साल हमारे भरता मायापुर से हाँ भक्तों सेवा में जोड़ने के लिए राम में से लगभग साढ़े 600 भक्तों ने 12 करोड़ की जिम्मेदारी उठाई थी। यहाँ सयोग देंगे इस मामले को सुना करने में भक्तों निवेदन है। जिन भक्तों ने जिम्मेदारी उठाई, उस जिम्मेदारी को निभाए सारे छेत्र जिमेदारी तो ली थी, पर मुझे सूचना मिली है, उनमें से से ढाई सौ में आना चंदा ले जाए। या ने फॉर्म भरा था, खान उठाया विक सेवा शुरू ली थी। आप में से कितने भक्तों जिन्होंने सेवा
की जिम्मेदारी ली थी?
प्रवित सेवा शुमेनेकीवैसेतो इस कांड में 2 जा से निवेदन किया जाता है। सेवा के लिए मेरा यह रिक्वेस्ट था, जिन्होंने जिम्मेदारी ली है व जिम्मेदारी को निभाने और भगवान की कृपा है। यहाँ को सेवा में जोड़ा जा रहा है। भगवान छोटे थे, रिकॉर्ड फल बेच ले,
जि
कैरी जी खरीद खरीदना चाहता है। तो भगवान में सुबह छोटे थे। 2 ढाई साल के हाथों में थोड़ा अन लेकर फल लेने जा रहे थे, पर वहाँ पहुँचने तक लगभग सारे हाथ से गिर। या जब उस लत ने भगवान को सिर दे दिए, बिना किसी लाभ के, जो उसने बोर्ड के देखा तो क्या देखा,
क्या देखा
दूरी बढ़ गई थी सोने के फल के साथ छेजेेमातोकोसुनयास लेकर जन पूरी जारहे थे दर्शन लेने के लिए, उन्हें रास्ते में वुटप्यास लगी। गर्मी का मौसम सा तो रास्ते में 1 की लस्सी बेच रहा था। और भगवान ने पूरी ली भी दी। जो व्यक्ति ने कहा पैसे ने कहा मेरे पास पैसा नहीं है। तो मेरे पीछे अभी वो पैसा ले गए। थोड़ी देर बाद भगवान ने जिन्दा पहुँचे वहाँ तो व्यक्ति ने कहा तुम्हारे 1
सन्यासी आए थे जिन्होंने मेरी सभी लसी
पी ली और कहा कि तुम पैसा भरोगे। तो नंदा ने कहा हमारे पास कुछ पैसा मिल है, चलो सुना क्या देना मेरे दान में दिया और मैं घर जाता हूँ। तो वो अपना मटका उठा कर घर जाने जाने का प्रयास कर रहा था। तो मटका जब उठाने गया तो इतना भारी था कि वो हरा हो गया, उसे लगा मटका तो खाली हो गया था, सन्यासी पूरी ली, इतना भारी क्यों हो गया है, उसे देखा अंदर क्या है अंदर क्या मिला पूरा मत करना हीरे मोती से भर गया था। आप सोच है ये तो अच्छा सौदा
है,
हम भी जाएंगे बंद सौ रुपे चला देंगे। और ये उम्मीद रखेंगे। ये हमारे बैंक गंभीर है। ना बढ़ जाना चाहिए। खैर दूसरे सदर वान की सेवा करते हैं, किसी नुकसान नहीं होता। अगर आपने जिम्मेदारी ली है तुम पे का पालन कीजियेगा। अगर आप जल्दी की जिम्मेदारी लेना चाहते हो तो वो भी आप कर सकते हो। आपको उस पे ध्यान दे सकते हैं और ये अद्भुत मंजर बनेगा। इसके द्वारा आपके धर्म की महिमा बढ़ेगी। जितने माह। अत्यंत याद है। राज की शिक्षा विश्व के कोने में पहुँच गयी है। उनके भविष्य होनी थी, कोने में पहुँचेगा परम की भविष्य वाली थी। कि दिन आएगा जब कि सारे विश्व के लोग मायापुर धाम में आगे आयेंगे तो नाचेगी और गाएंगे आप सब मायापुर गए हो। कि भी भर के मायापुर कोई बात क्यों नहीं गया। भक्त बहुत को छुते है, श्याम को कार्यक्रम आगे बढेगा। आप से निवेदन है की वचरमचाबआनाचाहि की बढ़ती है, प्रचार से देते हो। आज सारे भारत में, विश्व में लोग समझ रहे हैं कि जो का यह प्रॉपर्टी ने किया, इतिहास में कोई नहीं कर पा रहा है।
तो
पापा जी कहते थे कि गुरु के प्रति जो भाव है, कोई उसे उठा नहीं सकता, पर प्रयास कर सकता है। प्रयास करके। तो प्रॉपर्टी ने हमें शुद्ध सन्देश दिया। 70 साल की आयु में विदेश की, उनमें यह भाव की पूर्ण समाज सुखी बने और समाज शुकीमांसताहैसभरती के द्वारा स गंभीर रहते हैं। इसी को पनाह और अपने जीवन बच्चों को बनाइये।
बोलिए
ना, हारे,
रेकृश्रबुजगोबाल। कि, माराजकी, काम सब ने सुना। बहुत सरल और सिम्पल उपदेश्य। महाराज ने दिया अपना ध्यान को लोग जल्द कीजिए, यह मौका का जल कीजिए। और 1 प्रश्न महाराज ने पूछा कि आप में से कितने भक्तों के पास भादुदमका सेट है? तो आप में से कुछ भक्तों ने हाथ नहीं उठाया था। आपके लिए अच्छा अनाउंसमेंट है, बहादुर पुरनका स्टार्ट हो चुका है। डिस्काउंट पर कृपा अवेलेबल है।
तो आप लोग ले लीजिए।
जिस मंदिर से जुड़े आप जहां से जुड़े हैं वहां से आप बाद ले लीजिये। ये अच्छा मौका है। महाराज ने वही कहा है और लेने के बाद उसको सिर्फ डेकोरेट। मत कीजिये उसको पढिए। तो महाराज बहुत एंफरसाइज किया है जो जाला है की हम शास्त्रों को कहा और हम सुनेंगे। महाराज के जो मारक का मूल क्या है भीषण क्या है, महाराज के स्ट्रक्शन क्या है? कैसे हम महाराज से संपर्क में रह सकते हैं? अभी भी तो हम यहाँ पर, हमारे बीच में वरिष् हफ्ते ले बैठे हैं। मार के सीने सैक्स है तो हम हमसे किस करेंगे? हम सबसे पहले बुलाना चाहेंगे इस ग्रेस रुपड़ीकेशुरूरुपणी के प्रो आप कितने भक्त जानते हैं।
पुल शुरू हो,
रोगी संदेश मिल रहा है कि आप निडर थोड़ा। आए। यहाँ पर कथा कीजिए। लोग सुने आपको। रुकने को लगभग 2 दशकों से टेम्पल प्रेसिडेंट है। बजाय बाद मंदिर के आपने सुना होगा। पंजाब बाग मंदिर कितने पिछले कई सालों से मीडियम साइज स्कंपलमेनंबरवनही रहा। हर साल भारखंड में प्रभुजी के नेतृत्व में ढाई लाख बुत गीता वितरण होगा। महीने में मंदिर को छोटा है। ढाई लाख गीता हर साल वितरण करते हैं। प्रभु जी जोर से परवाजरकेहैदिल्ली में और महाराज ने उत्तर भारत का आर एस वी बनाया था। बहुत सारी सेवाएं हैं, विदेश भी प्रावि करते रहते। सवेरा के लिए बहुत फेमस है, नक्स के लिए जॉब भी सुनेगे। और हमारा सौभाग्य है कि इसी दिन आया।
आज रात को यहाँ से क
तो कितना सुन्दर हो रहा हो है। और अभी हम सुनेंगे
हरे कृष्ण
ओम,
ज्ञान, मरंदसयज्ञानंजनशला, चक्शु, नमो, विष्णु पाद, कृष्ण भ्रष्ट, श्री गोपाल कृष्ण प्रवाद से। साहित्य में प्रकाश प्रचार, विद्वंस, नमस्ते, सालसे, जय, श्री कृष्ण चैतन्य, प्रभु, नित्य, शिव, हरे, कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा, हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे वांछा कल, पत्र, कृपा, सिंधु पतिता, राम पाने हर 1 कृष्णा तुम्हे 1 बहुत बड़ा सरप्राइज दिया मुझे, पहले मुझे बुला लिया तो मैं आशा कर रहा था कि महाराज पहले तो मेरा परम सौभाग्य है की आज के दिन मुझे बहुत ही सुंदर प्रोग्राम में भाग लेने का अवसर प्राप्त हो रहा है। कि संडे को ऐसा मैंने इसी ढंग से बोला था। तो वैसे ही मैंने अपना टिकट सेड्यूल किया, सो थैंक यू वेरी मच कमल चंगू, बहुत धन्यवाद, इतना सुंदर प्रोग्राम ऑर्गनाइज किया। और मुझे प्रेरणा मिलती है कि दिल्ली जाकर। हम भी दिल्ली एनसीआर के लिए ऐसे प्रोग्राम का आयोजन निमित से करेंगे तो यह बहुत आवश्यक है। हम शिशुओं का जीवन पूर्ण रूप से। शिला प्रोप जी श्रीमद भागवतम के पहले स् के तहत लिखते हैं कि भक्ति पूर्ण रूप से और 1 मात्र कृपा पर ही निर्भर है। उस कृपा को आकर्षित करने के लिए हम अच्छी साधना करने का प्रयास करते हैं। और हम सबके जीवन में 1 प्रमाणिक गुरु का कहते है। उन्ही पर उन्ही की कृपा भी हमारा जीवन निर्भर है। और जिस प्रकार से भगवान और जीव का सम्बंध सनातन है, उसी प्रकार से जो प्रमाणिक गुरु है, जो भगवान के 1 ट्रांसपेरेंट पारदर्शक माध्यम है, उनका और 1 शिष्य का सम्बंध भी सनातन है। अगर वो हमारी दृष्टि से उ ओझल भी हो जाते हैं, हमारे सामने उपस्थित नहीं भी है। लेकिन जो ये सम्बन्ध है, गुरु और शिष्य का जो सम्बन्ध है, ये समय और स्थान की परिधि से परे है। बयान स्पेस एंड टाइम। क्योंकि यह सनातन है, ये संसार के दूसरे सम्बंधों की तरह नहीं है। तो और विशेष कर आप सब भी अनुभव कर रहे होंगे। मैं तो अनुभव कर रहा हूँ कि गुरु महाराज के जाने के बाद मुझे लगा की मेरा सम्बंध उनसे और प्रगाढ़ हो गया है, कितने भक्तों का ऐसा महसूस हो रहा है। वास्तव में बहुत से भक्त से मैंने शेयर किया, उनका भी यह साक्षात्कार है कि पहले क्या होता था, क कुछ भी करते है जी, गुरु महाराज, सभालेंगे, महाराज से बात करे, महाराज से बात कर, ने। अब कुछ भी करना होता है, कुछ भी बोलना होता है। तो याद आता है। अगर इस परिस्थिति में गुरु महाराज होते तो वो क्या करते? कैसा सोचते, क्या बोलते, क्या एक्शन लेते तो 1 जिम्मेदारी महसूस करता है। शिष्य तो मैं भागवतम का तहेसकंदकापंद्रहा आधार पढ़ रहा था उसमें जब भगवान श्रीकृष्ण पृथ्वी से प्रकट हो जाते हैं और अर्जुन द्वारिका से वापिस आते हैं। हस्तिनापुर और युधिष्टर महाराज भी बहुत घबराये हुए हैं। चारों तरफ। अशुभ लक्षण दिखाई दे रहे हैं और अर्जुन की स्थिति को देखकर िष्टहमाराजऔरघबरा जाते हैं, ऑफिस अर्जुन रो रहे हैं, उनका पूरा शरीर पीला पड़ गया है। तो अर्जुन बहुत घबराये हुए हैं। लेकिन उस समय अर्जुन क्या करते हैं? अर्जुन याद करते हैं, क्या याद करते हैं बहुत सुन्दर सुनदष्टलोगहैं और 3 चीजें। मुख्यता याद करते हैं कि जब भगवान कृष्ण इस धरा धाम पर थे तो उन्होंने मुझ पर क्या क्या कृपा की थी? क्या क्या मुझे फेवर्स किए थे? याद करते है गुरु क्षेत्र युद्धभूमि में बड़े बड़े योद्धा विश्व पिता, मा दरोणाचारय कर्म जैदृतकेआगेमैं कुछ भी नहीं था कि आसानी से मुझे विजय दिला दी, याद किया, उन्हे किस प्रकार मेरे घोडे को प्यास लगी थी। मैं बिल्कुल निहत्था खड़ा था रत के नीचे। तब भी कैसे भगवान ने मेरी रक्षा की, किस प्रकार से भगवान ने मुझे इतना मैं इन्द्र के साथ उनके पद पर बैठ गया था। तरह तरह की जो कृपा समय समय भगवान ने ही उन सब को याद करते हैं। फिर याद करते है किस प्रकार से मैंने कृष्ण के साथ बहुत अंतरंग समय बिताया था। मैंने कृष्ण के से साथ कुछ परिहास किया था, इकट्ठे उठे थे, बैठे थे, खाया था, पिया था, उन बातों को याद करते हैं, इंटिमेट मोमेंट्स को याद करते हैं और अंतत याद करते हैं भगवान के सुन्दर उपदेशों को कि भगवान ने मुझे क्या क्या उद्देश दिए थे। जब तीनों को याद करते हैं कि भगवान ने मुझ पर क्या क्या कृपा की थी? भगवान के साथ साथ मैंने कितने सुन्दर क्षण बिताए थे? औ क्या मेरे भगवान ने मुझे शिक्षाएं दी थी। उन तीनों को याद करके अर्जुन का आत्मविश्वास वापिस आता है। अर्जुन बहुत सुन्दर लोग बोलते हैं। ये पंद्रह ध्याय का 31 नंबर है। अर्जुन कहते हैं शोको ब्रह्म संपत्, संछिनद्यतसंशलीन, प्रकृति नैरगुणयादअवअसंभव विशो को ब्रह्म संपतिया। अब मेरा जो शोक है, पूरा दूर हो गया है। ब्रह्म संपतिया, क्यूंकि, ये जो है मेरी जो असली संपत्ति है, मेरा एसेट, प्रचल एसेट है, क्या स्प्रिचुवल एसेट है मेरा कृष्ण के साथ सम्बन्ध। यह मेरा असली, असली धन है। असली संप। उसी प्रकार से 1 शिष्य का कृष्ण के गुरु के साथ जो सम्बन्ध है, वो हमारी असली संपत्ति है। इस सम्बन्ध में कोई छीन नहीं सकता। लेकिन सम्पत्ति को हमने बना कर भी रखना है और बढ़ाना भी है। तो हमेशा हम क्या याद करते रहे? ये जो पूरा सभा का समारोह का आयोजन किया गया है, इसका मुख्य उद्देश्य यही है कि हम याद करें गुरु महाराज में हम पर क्या क्या, कृपा के क्या क्या। हमारे कुछ भक्तों को निश्चित रूप से ऐसे मौके मिले होंगे कि महाराज के साथ हमारे बहुत अंतरंग क्षण बीते होंगे, इंटिमेट वोमेन्स होंगे। और ये 2 बातें हमें प्रेरणा देंगी कि महाराज के उपदेशों का हम उत्साह से पालन करें हेलो। तो जैसे कि आप मेसे कितने भक्तों को लगता है कि गुरु महाराज ने हम पर बहुत कृपा की है। सबसे बड़ी कृपा क्या की है, क्या की है, सबसे बड़ी कृपा शिक्षा के शिष्य रूप में स्वीकार की है। किसी बद्ध जीव में बुरा मत माने इतनी योग्यता नहीं है कि हम प्रमाणिक गुरु परम्परा से जुड़ जाए। शीररफाआजएकजगह तात्पर्य में लिखते हैं कृष्ण ज्यादा उत्सुक हैं वधजीवको भगवत धाम लाने के लिए। भगवत भक्ति अपनी कोई इच्छा नहीं है भगवत धाम जाने की, कृष्ण को ज्यादा चिंता लाने के लिए। इसी प्रकार से भगवान के प्रमाणिक प्रतिनिधि है। गुरु जन हैं, उनको ज्यादा चिंता रहती है। वधजीवोंकेऊ तो गुरु महाराज तो 1 पक्के मूर्ति कार थे। जैसे अच्छा मूर्ति का क्या होता है, पत्थर देखते ही उसको पत्थर नजर नही आता, उसे पत्थर से उभरी 1 मूर्ति नजर आती है। तो गुरु महाराज किसी भी बजी को देखते थे, वो बहुत सेवक है क्या सेवा कर सकता है। अब मूर्ति कार के लिए पत्थर से मूर्ति बनाना इतना मुश्किल नहीं है को खाली ठोका पीटी करनी है। लेकिन 1 बदजीवजोबड़ा जिद्दी है जो थोड़ी सेवा 2 भाग जाता है उसको पकड़ के आंदोलन में सीमा में लगाना बहुत कठिन कार्य है। तो गुरुवार ने ये किया, मेरे साथ किया, मुझे याद है पहली बार मुझे गुणवान क्या सेवा दी। ये बात है पंद्रह नवम्बर 2000 सन 2000 के तो मैंने दीक्षा नहीं ली थी मैं दिक्षा के लिए बड़ा कंफ्यूज था किससे दिक्शालुनसेलूसेल तो मैं बहुत प्रार्थना था, 4 साल हो गए थे मैं दिक्षा के लिए कुछ निर्धारित नहीं कर पा रहा था। तो उस दिन मेरा जन्मदिन था तो मैं अपने ऑफिस से आया, पंजाब मंदिर में आया तो मेरा जन्मदिन था तो व्यक्ति अपने राजा मानता है। घर में पूरी पार्टी वार्टी रेंज हो रखी थी, फोन किया बस अभी फटाफट दर्शन करके आ ही तो थोडा सा फॉर्मलिटी है भगवान को प्रणाम करना चाहिए असली सेलिब्रेशन तो घर में आराम से, मित्रों के साथ, सम्बंधियों के साथ करेंगे तो बस आने ही वाला हूँ। बस जैसे ही पहुंचा गुरु महाराज आये है अच्छी को प्रणाम कर देते हैं। अच्छी बात है तो मैंने प्रणाम किया। तो उस समय ऐसा आता था मंदिर बहुत छोटा सा था, 1 ही कमरा था तो साथ में किसी हाउस प्रोग्राम था तो सारे भक्त वैसे मंदिर में भक्त कम थे तो सारे के सारे भक्त वहाँ गये हुए थे और महाराज को भी वहां जाना था। तो डिस्कशन चल रही थी, मैने पीछे प्रणाम कर दिया, थोड़ी देर से बैठ गया, ये चर्चा चल रही थी कि हम जायेंगे पीछे महाराज के डीटीज रखेंगे गोरे तो उसकी केयर कौन करेगा, कौन केयर कर कोई भी करेगा
बैठा हुआ
था, बस भी जाता ही हूँ निकलने वाला था तो प्रेजिडेंट करेंगे यह भी नहीं है, वो भी नहीं है, मैं भी चलूंगा यह भी कोई है नहीं तो महाराज करेगा। और डीटीस मझे नजर भी नही थी, डीटीस बंद थे, महाराज अपने डीडी से इतने आशक थे कि जो डीटीज बंद थे बॉक्स में उसको भी अकेला छोड़ कर नहीं जाना चाहता कि कमरा लॉक कर दे नहीं। अगर डीटीस भी बॉक्स में बंद है, कमरा भी लॉक, अन्दर कोई व्यक्ति होना चाहिए तो, तो मुझे कोई लॉजिक समझ में नहीं आ रही। अरे डीटीज हैं, बंद है, बॉक्स बंद है, कमरा बंद है, क्या जरुरत है किसी व्यक्ति के। फिर भी बैठा हुआ था, कौन रोक सकता है? तो बार बार महाराज मुझे देख रहे थे, मैं तो देख ही रहा, मैं तो रह नही सकता जन्मदिन, फिर महाराज कौन रोक सकता है। मेरी आँखें यहाँ पर, आँखें तो ऐसे बहुत बड़ी हु। तो मैं इतना बोला रुक सकता हूँ। मालूम था कि महाराज चाह रहे है, कोई है ही नहीं, रुकने के लिए जा सकते है। क्या? मेरी बिल्कुल इच्छा नहीं है, न हाँ बोलो, ना बोलो। मैं चले गए और साढ़े 7 के आसपास का समय था और मैं 10 बजे तक बैठा रहा, कोई इंडिया है और वहाँ से घर से फ़ोन आ रहे हैं। क्या हो गया, क्या रहा हूँ क्या बता 10 बजे से मुझे पहली बार महसूस हुआ कि कैसे महाराज ने मुझे गौरनेताय की सेवा में लगा दिया। गौरनेतायकीआपकलो आप सुरक्षा का मुझे इतना अच्छा लगा। और तब मुझे लगा कि ये नित्य बग आपके गुरु है। सोच रहा था तो ये महाराज ने मेरी कोई इच्छा नहीं थी। सेवा करने के। ये मुझे बहु बहुत बड़ी कृपा की जो महाराज के विग्रह थे उनकी सेवाएं मुझे लगाया। तो ये महाराज के अगर हम इस ढंग से फेवर्स कृपा याद करें तो हम देखेंगे कई बार क्या होता है हमे जो चीज नहीं चाहिए और जबरदस्ती हमें दी जा रही तो हम उसकी कदर नहीं करते, हम इसको ग्रांटेड ले लेते हैं। लेकिन अब जिस प्रकार से जुन याद कर रहा था हमें याद करना चाहिए। हमें देखेंगे इस तरह से देखेंगे तो हमें लगा की महाराज ने कितनी कृपा किया हमने इन फैक्ट, हमारा पूरा जीवन उनके हेतु की कृपा से ही बना हुआ है। कितनी गलतिया महाराज ने माफ किए, इतनी गलतियाँ महाराज ने हमेशा मुझे सपोर्ट किया। महाराज का इतना अच्छा गुण था कि म महाराज देखते थे किसी जी में थोड़ा सा भी, कुछ भी भक्ति है, उसको जाने नहीं देते थे, उसको पकड़ के रखते थे, सो हर प्रकार से फेसिलिटेट करते थे, उसको पूरा हिम्मत बढ़ाते थे, एंड करेज करते थे। तो ये हम कृपा याद करें। बहुत से हैं मुसीकोगिनने लगेंगे तो पूरा समय निकल जायेगा। फिर क्या अर्जुन ने याद किया था, दूसरा क्या याद किया था? अनरक्षण इंटिमेंट मोमेंट तो मुझे निश्चित रूप से विश्वास है। आप में से बहुत से भक्तों को ऐसे कुछ मोमेंट होंगी जो महाराज ने मारे साथ बहुत इंटीमेंट मोमेंट्स बिताए हैं तो वो हमे याद कर सकते हैं। जिस प्रकार से बहुत छोटी छोटी बातें होती थी, महाराज के महाराज बोलते थे, मेरा गला खराब है, मैं लक्चर ज्यादा नहीं दूंगा तो फिर लक्षर देते थे और लक्षर देने के बाद व्यास से उठते थे। से क्या बोले अच्छा यह बहुत अच्छा लक्षर है। 1 बार क्या हुआ महाराज पुरंजन की कथा पर लक्षर देते थे। तो महाराज हिंदी कईबार इतना अच्छा नहीं तो। एलोगेरिकल स्टोरी है। इसको क्या बोलते हैं हिंदी में रूपक रूपक अच्छा इसको लिख के दे 2 रूपक छोटा सा लिख दिया, रूपक लिख के दे दिया तो बोलने लगे महाराज पंखा चल रहा था तो ये वास्तव में पुरंजन के अलेगॉरिकलतोऐसे बहुत छोटी री चीजें होती थी महाराज की बहुत ही इनोसेंस उनका मासूम नजर आता था महाराज बिल्कुल 1 छोटे बच्चे की तरह मासूम होते थे और बहुत सी ऐसी बातें हैं जैसे कि 1 बार महाराज के साथ पिलानी में गया था तभी मैंने ज्वाइन नहीं किया था तो माँ ने बोला पिलाने से पास आउट में मेरे साथ का प्रचार पर जा रहे हैं सेक्टर नंबर टू थाउजनथ्री की बात है तो वापिस आ रहे थे पिलाने से बहादुर का 1 मंदिर था वहाँ भी रुके तो बहुत हेक्टिक शुरू था महाराज का। उसके बाद महाराज को बड़े मंदिर में स्टॉप क्रास स्टीरिंग कमिटी की मीटिंग थी तो रास्ते में मैं पेरेंट्स का घर था मैं वहीं रहता था तो मैंने महाराज से निवेदन किया महाराज मेरे माताजी बहुत बीमार हैं हैं आप थोड़ा दर्शन दे दीजिये, उनपर कृपा हो गई तुम्हारा ने क्या बोला मैंने अभी कोई नया न भक्ता दीक्षा भी ली थी बस तुम्हारा क्या बोला है तो स द वेस्ट पानी या फिर महाराज घर में आये जैसे माता जी मेरी बीमार माता पिता ने जैसे नॉर्मल होता है कंपलेंट करना शुरू कर दिया घ घर में नहीं आता, मंदिर में ही रहता है, रात को लेट आता है, ये होता है होता सब रुटीन में शुरू होने की सुबह में विवाह करे। ये करे वो करे तुम्हारा सब सुनते बड़े प्रेम से। फिर महाराज ने 1 बात बोली गुरु तो ये चाहता है कि उसका हर शिष्य सन्यासी बने। लेकिन आजकल के शिष्य ने नालायक का गुरु की सुनते ही कहा है। तुझे बोला न मुझे समझ में आया न माता पिता को समझ में आया क्या बोल दिया। लेकिन अब देख रहा है उनके शब्द शायद सच हो जाए। तो उसके बाद महाराज चले गए घर छोड़ गए तो फिर फरवरी टू थाउजंड फोर में जब पंच तत्व इंस्टॉल हुए उसमे मेरे माता जी ने शरीर छोड़ा तो महाराज किसी काम से दिल्ली में आए थे फरवरी में ही मैं उनको महाराज को एअरपोर्ट में मिलने गया तो महाराज ने मुझसे पूछा मुझे दुख हुआ आपकी माता ही चलेगी लेकिन कोई बात नहीं यह संसार का नियम है। फिर महाराज मुझसे 1 बात पूछा क्या आप उनको मंदिर ले गए थे। क्योंकि जब महाराज घर में आए थे तो महाराज ने आदेश दिया था मुझे किसी न किसी ढंग से माता जी को मंदिर में दर्शन करने के ले जाना। लेकिन मैं इतना मूर्ख था मैं कौन मैं भूल गया में माताजी का शरीर थोड़ा भारी था, वो बेडरिडन कौन इनको उठाएगा कैसे ले जाएंगे इस कर भूल गया। मैं भूल गया मेरी माँ के लिए मुझे क्या करना है। महाराज को याद था कि मैंने 6 महीने पहले उसको क्या आदेश दिया था आप सोचिए कितना मतलब कि कितना कितना सोचते होंगे, कितना प्रेम करते हैं सोचिए मैं भूल गया मुझे जो आदेश मिला, मेरी माँ के लिए, मुझे जो आदेश दिया वो याद है 6 महीने बाद, 6 महीने बाद याद है ये घटना सितम्बर में फरवरी में बोल रहे हैं। आपने किया था वो मेरी आंखों में आ बिल्कुल, हाँ आपने बोला महाराज किया ही नहीं, नहीं कोई बात नहीं, कोई बात अच्छी भक्ति कर रहे है कोई बात, तो महाराज तो ऐसे बहुत से छोटी छोटी 1 बार महाराज के पास बैठे थे, महाराज जब भी जाते थे, हेवी मीटिंग खत्म हुई, मैं निकल गया बाहर साथ में 23 पाक थे, अब यहाँ गाड़ी में बैठकर निकल ही रहा था। गेट से महाराज का फ़ोन आ गया। आप निकल गए, नहीं, वापिस आ सकते हो।
हाँ
क्या कहा है? वापस, क्यों लिया?
मैं
महाराज के 1 रिश् से बहुत स्पेशल डिश बनाया है, इसको खा के जाओ मारा स्पेशल के खिलाया। तो ये बहुत इंटीमेट मोमेंट्स, कुछ न कुछ हमारे जीवन में खड़े होंगे, उनको हम याद करें। तुझे हम याद करने की कितनी कृपा किया गुरुमाराज ने? हमे क्या क्या, हमने अंतत कुछ क्षण बिताए तो हमें प्रेरणा मिलेगी कि यस वो हमारे हमारे कुछ सम्बन्ध है और वो सम्बन्ध सनातन है। और फिर हम उनकी आज्ञाओं का और साहा पूर्वक पालन कर सकते हैं। गुरु का कृपा, गुरु की कृपा हमेशा हमारे साथ बनी रहेगी, अगर हम उनके आदेशों के साथ जीवन जिएंगे। गुरु मराक्ष बोल रहे थे कि पापा ने कैसे लिया? जिस प्रकार से शरीर से प्राण अलग नहीं हो सकते। 1 अच्छे शिष्य अपने गुरु के आदेशों से कभी अलग नहीं हो सकता। तो मैंने याद किया के क्या क्या आदेश महाराज के जो इंस्ट्रक्शन है, जरूरी नहीं है कि सबको व्यक्तिगत रूप से दिए गए हो महाराज के इंस्ट्रक्शंस। 1 बार गुरु महाराज हमारे यात्रा में थे, तो किसी भक्त से प्रश्न पूछा कि गुरु महाराज, आप जो लरसमइंस्ट्रक्शन देते हैं या प्रस् देते है, दोनों में कुछ अंतर होता है, गुरू महाराज बोले नहीं, दोनों में कोई अंतर नहीं है, कई बार शेर से समझते हैं, जब तक गुरु मेरे कान में कुछ नहीं बोलेगा तो वो इंस्ट्रक्शन मानी जाएगी। लेक्चर में तो बोलते ही रहते हैं। ध्यान, जब को, ये सब तो आम बातें जो लेक्चर में भग महाराज बोल रहे हैं वो हमारे लिए पर्सनल इंस्ट्रक्शंस है नहीं, कुछ इंस्ट्रक्शन फार, व्यक्तिगत रूप से भी दे तो उनको हम याद करते हैं। तो मैं उनको याद करता हूँ। तो मुझे बहुत सहायता मिलती है, बहुत शक्ति मिलती है। और मैं अपने आप को बहुत कनेक्टेड महसूस करता हूँ। और मैं देख रहा हूँ कि जब से गुरु महाराज का तिरोभाव हुआ है तो कुछ ऐसी ऐसी विकट परिस्थितियां आ रही है। तो मुझे लगता है कि महाराज शायद मुझे एम्पॉवर करना चाहते, ट्रेन कर रहे हैं इन पर। अब देखो आप कैसे निकलोगे आपके पास सारे मैंने दे दिया, मसाला दिया हुआ है। अब इस मसाले को कैसे उपयोग करना है? मसाला क्या क्या है, महाराज के इंस्ट्रक्शन्स है, महाराज के एग्जाम्पल्स है और महाराज के किस प्रकार से महाराज ने करके दिखाया वो हम देख सकते हैं तो कुछ इंस्ट्रक्शंस जो मुझे बहुत हेल्प करते हैं महाराज की जैसे की 1 बार में महाराज के बाद बहुत दुखी होकर गया। मैं न्याय को प्रेजिडेंट बना था, इन फैक्ट मेरी एंट्रेंसी स्कॉल में फुल टाइम। मैंने ज्वाइन नहीं किया था को प्रेजिडंट के रूप में मेरा बड़ा अजीब सी परिस्थित मैं जिन भक्तों से जिन भक्तों ने मुझे लाइफ मेंबर बनाया था। मैं उनके उपर को प्रेजिडेंट बनके चला गया। बड़ा अजीब सा था तो उनके लिए भी बड़ा अटपटा था मेरे लिए।
बड़ा
तालिय मुझे डोनर के रूप में देखते थे और वो कैसे प्रेसीडेंट के रूप। मैं उनको लिफाफा पकड़ता था। मैं उनको घर में खाना भोजन के लिए बुलाता था। गाड़ी में छोड़ गया, प्रेजिडेंट बन गया तो बड़ी विकट स्थिति थी। लेकिन महाराज ने पूरा सपोर्ट किया, बहुत परेशान हो के महाराज के पास गया कि महाराज यह है, वो है, ऐसा है, बोलता गया। महाराज प्रसाद थे महाराज का सॉलूशन क्या है? सुनी जन। मैं तो इतना गुस्से में भरा हुआ था। मैं महाराज डिस्ट समथिंग प्रैक्टिकल, कुछ प्रैक्टिकल बताई बातें बोलते, सुने चयन क्या है, तुम्हारा प्रसाद खाते का रुक गए कृष्ण अगर इस लोग अपने जीवन में नहीं उतारोगे। इस संसार में हमेशा सड़ते रहोगे बहुत हैवी था। मैंने बहुत कम देखा। महाराज को जब भी जाता था, महाराज के पास, मैं किसी भक्त की बुराई करता था। महाराज उसकी अच्छाई करना शुरू कर देते थे। महाराज इससे ये समस्या हो जाएगी। 2 महाभागवत ऐसा बोलते फिर बोलते हैं महाराज अपने आप को हमेशा क्या मानो दसों का दास मानो। महाराज कहते है जब 1 चीज को बहुत बार धोढायाजाताहै तो हम लोग कई बार तो सुनी हुई है, महाराज बार बार दोहरा रहे है। इसका मतलब सबसे है। तो इन बातों को हम केवल चोरी न लेकर इस को अपने जीवन में लाने का प्रयास करे। तो गुरु महाराज प्रसन्न होंगे। और महाराज ने बताया महाराज कुछ वक्त मुझसे नाराज रहते हैं, परेशान रहते हैं, होता ही है मैनेजमेंट करे। कुछ लोग तो नाराज होंगे। तो मारा आदेश दिया ऐसे भक्तों के साथ ज्यादा कम्युनिकशन कर वो वक्त नाराज क्यों है। आपका ज्यादा अटेंशन जाते हैं, आप उनको 1 नो मत करो, आप उनको ज्यादा उनसे कम्यूनिकेट कर। तो इस से मुझे बहुत हेल्प। मिली फिर से बताते हैं महाराज जी की जब मेरा आखिरी मीटिंग मैंने गुरु महाराज से की थी, 27 अप्रैल को शनिवार था, 27 अप्रैल थी। तो 1 अच्छी बात है। मैं महाराज के लिए प्रसाद लेकर गया था। पंडाबाग से तो हमारे जो पंजाई बाग में हम प्रसाद बनाते हैं, मंगल आर्थी की जो रबडी होती है, जैसे राधा रमण की छोटी मटकी में। वो तो महाराज को बहुत अच्छा लगता है कि हम उस मटकी में ने मटकी ले जाता था। महाराज के तो कई बार तो महाराज काटते थे, कुछ थोड़ा सा उंगली डाल के खुद खा लेते थे। तो उस दिन क्या हुआ? बाईचांस चम्मच मिल गया। मुझे तो मैंने चम्मच से महाराज को खिलाया मुझे मेरा आखिरी वो होगा। लेकिन मुझे बहुत याद आता है। ऐसे कम होता था कि महाराज खुद ही उस दिन ऐसा कुछ हुआ तो महाराज ने हमे खुद लगा चम्मच उठाया। महाराज को मैंने खुद खिलाया तो उसमे कुछ ऐसी बातचीत चल रही थी कि 1 ही नगर में 2 केंद्र, 1 ही हफ्ते में 2 रथ यात्रा निकाल रहे थे। तो डिस्प्यूट चला बोले हम निकाल लेंगे, हम निकाल लेंगे। दोनों इसी समय निकालेंगे। तो महाराज कह रहे थे, ठीक नहीं है। आप आपस में एडजस्ट कीजिए मारा। बहुत इम्पोर्टेंट बात बोले। महार ने बोला यूनिटी इज मोर, इम्पोर्टेंट दैन पर्सनल एड पेशेंस, हम आपस में 1 रहे व्यक्तिगत कई बार आ आध्यात्मिक जीव में बहुत महत्वकांशी हो जाते हैं, बहुत एम्बीशस हो जाते हैं, लेकिन महाराज बता रहे हैं। यूनिटी इज मोर, इम्पॉर्टेंट देन पर्सनल शंस। और उसके बाद महाराज ने बोला वो ये बाइचांस सब आखिरी दिन की बात। 27 अप्रैल जो आखिरी में। फिर महाराज ने बोला हम जो भी कार्य करे, कार्य करने से पहले ये सोचना चाहिए कै इसे गुरु और कृष्ण प्रसन्न होंगे तो यह संजोग की बात है। यह महाराज की इच्छा थी। तो ये बोला फिर महाराज बोला 3 बातें बोली थी कि जितने भी हमारे कन्फ्लिक्ट हो रहे हैं, भक्तों के बीच में उसका मुख्य कारण है। हमारा अहंकार फॉल सी गो। तो यह आखिरी 3 इंस्ट्रक्शनस मजा। उस दिन मिले और हम देख रहे थे पिछले काफी लेक्चर से महाराज, हर बात में महाराज जो भी टॉपिक लेते थे, वो परिचेता का उदाहरण देते थे, लेक्चर लेते थे कि कैसे पिता उसके बीच में आपस में भाई चारा था, सहयोग था और गुरु महाराज। हमसे अपेक्षा करते हैं कि उन्होंने इतना सुन्दर, हमें वातावरण दिया, इतने सुन्दर मंदिर दिए, भक्तों का संग दिया कि हम सब आपस में मिल कर रहे। गुरुवात कहानी भी सुनाते थे कि गुरु ने बच्चों को लकड़ी दी, जब इकट्ठी लकड़ी को तोड़ नहीं पाया, टुगेदर, विज, यूनाइटेड, स्टैंड, महाराज, ये बोलते थे और भगवान की इच्छा थी। यह संजोग की बात है कि गुरु महाराज का तिरोभाव में जिस हॉस्पिटल में नाम हुआ, उस हॉस्पिटल के नाम क्या था? सिनर्जी सिनर्जी का मतलब क्या है? आपस में मिल के रह, इकट्ठे मिल के रहेंगे। तो सिनर्जी रहेंगे। तो जाते जाते भी महाराज। हमे ये स संदेश देंगे कि हम आपस में मिल के रहे। और आपस में मिल के। रहने का सबसे अच्छा तरीका क्या है कि हम गुरु महाराज के इंस्ट्रक्शंस को हमेशा याद करते रहे। इसीलिए बार बार ऐसे समारोह का आयोजन करना अति आवश्यक है। यह हमारे भक्ति के जीवन का पोषण करेगा, क्योंकि हम हमेशा फोकस रहेंगे, क्योंकि ये संसार माया बहुत दिक्कत है, बहुत सूक्ष्म रूप से हमें प्रभावित कर सकती है कि हम धीरे धीरे धीरे अलग हो सकते हैं। तो क्या करें हमेशा हम यूनाइटेड रहे। और गुरु महाराज अपने अंतिम बिल में लिख कर गए हैं कि किस प्रकार से हम हमेशा जी। बी सी की क्षत्र छाया में रहना है, प्रपात के आंदोलन को आगे बढ़ाना है और एकजुट होकर रहना है। सो जोनस भोपाल साई महाराज की
श
और सबके लिए बता दे कि जब गुरु महाराज दुपणीकृषगोरनकी मदद से जब मिले थे। और कहे की गुरु की इच्छा तो है कि सारे शिक्षक संन्यास ले। तो जी ऑलरेडी संन्यास रेट है
तो
बहुत सुन्दर है। संक्षेप में कुछ 3 चीजें जो अर्जुन
को
बहुत बहुत धन्यवाद देते हैं।
अभी हम रिक्वेस्ट करेंगे जेसदशदारआपलोगजते दर्शक को
कम
अभी वो शास्त्रों में कहा गया, भक्त बता रहे है कि शास्त्रों में कोई भी आपको कला सीखनी है तो 12 साल उसका अभ्यास करना होता है। मदन सीखना है तो 12 साल अभ्यास करेंगे। तब अच्छा वेदन सीख पाएंगे दसौदरपोगुरमहरज के 12 साल सिकरेटरी रहे। पढाई पूरी करने के बाद जब जुड़े कागज की सेवा लिए और वहाँ से फिर महाराज के सेक्टर है। 2012 से 2024, तो अभी तक आपने दशकों को देखा है भारत के से सेवा करते हुए। आज हम सब का सौभाग्य है कि उनके मुख से सुनेंगे महाराज के बारे में कल आप लोगों ने सुना था। वो रिकॉर्डिंग महाराज के चैनल में आए जाए तो कभी प्यार सुन सकते हैं। अरे
हरे कृष्णा ओम ज्ञान तिविरांधस्य ज्ञान जनशन जक्शुलवितममनतसमै, श्री गुरुवे नम नम विष्णु पदाय कृष्ण पृष्ठा भूतले, श्रीमते गोपाल कृष्ण गुरु स्वामी इतना नमस्ते सरस्वती देवी गौर वाणी परचार निर्विशेष सु। basतयदisतारने मेरे लिए बोलना कभी कभी बहुत डिफिकल्ट हो जाता है। मैं तो बहुत समय से, कभी स्टेज पर बोला भी नहीं। और अभी अभी तो आज क कल तो थोड़ा माहौल अच्छा था, मैं अकेला ही था कमरे में भक्तों के साथ। पर अभी तो इतने वरिष्ठ भक्त है मेरे सामने, और प्रधान महाराज है, वणी कृष्ण रू है, कमल लोचन रू है। तो मेरे लिए थोड़ा सा थोड़ा टफ हो जाएगा। बट मैं प्रयास करूंगा कल हम कल भी मैं प्रयास किया था, बोलने का, महाराज की याद करने का प्रयास किया था, जो मैंने रियलाइजेशन हुई हैं मेरे साथ, गुरु महाराज के लिए, गुरमाजके साथ। तो बट आज आज बिल्कुल 1, डिफ्रेंट 1 अलग ही अवसर है गुरु पूर्णिमा का। तो मैं सोच रहा था कि फिर आज और कल में क्या फर्क है। तो मैं सोच रहा था कि आज शायद हम कुछ डिस्कस कर सकते हैं महाराज के गुरु तत्व के ऊपर, महाराज की कुछ ऐसी लीलायें जो महाराज हम कुछ शिक्षा प्रद हो और जिसको हम अपने जीवन में उतार सके। तो जैसे आज हम गरमा लेक्चर सुन रहे थे। आप सब ने भी सुना, जिसमें महाराज बोले कि ब्रह्माण्ड ब्रह्म, को, भाग्यवान, जीव, गुरु, कृष्ण, प्रसाद, पाये, भक्ति, लता, बीज। तो मैंने तो इस को अपने जीवन में महसूस किया है कि हम किस तरीके से मैंने, कैसे ग गुरु मिले, मुझे हम बहुत मतलब, हम सब लोग, आप लोगों ने भी रियलाइज किया होगा कि सब लोग कुछ न कुछ, कोई खुशी के लिए, कोई खुशी ढूंढ खुशी को ढूंढ रहा है, कोई शांति को ढूंढ रहा है, तो सब लोग अपनी अपनी लाइफ में कुछ स्प्रीचुअल एडवांसमेंट के लिए कुछ ढूंढने का प्रयास कर देते हैं। वैसे अगर हम सेंसियर है और अगर हमारा प्रयास सेंसियर हैं तो फिर भगवान की कृपा से हमको गुरु मिलते हैं। और अगर हम गुरु के प्रति पूरे शरणागत हैं। तो हमको भ भगवान की प्राप्ति होती है। तो वो मैंने रियलाइज किया कि
मैं
भगवान से बहुत प्रार्थना करता था, तो की कोई मार्गदर्शन करने वाला होना चाहिए। लाइफ में, तो भगवान की कृपा से गुरु महाराज मिले अब सेकंड स्टेप है गुरु भगवान की कृपा से गुरु तो मिल गया है, अभी सेकेंड है कि गुरु की कृपा से हमको भगवान मिलेंगे। तो उसके लिए गुरु महाराज ने पूरी इंस्ट्रक्शंस हमको दी हुई है। आप सबने प्रपद की बुक्स में भी पड़ा है गुरु महाराज के लेक्चर्स, गुरु महाराज के इंस्ट्रक्शंस में भी आपने सब सुना है कि अगर हमको कृष्ण की प्राप्ति करनी है तो हमें क्या क्या करना चाहिए। ये मैं दोहराऊंगा नहीं बट मैं सिर्फ यही बात को बार बार बोलूंगा कि गुरु महाराज ने जो इंस्ट्रक्शंस हमको दी है अपने क्लासेज में, अपने इंस्ट्रक्शन में, अगर हम उसको जीवन में उतारें तो हम भगवान के और करीब जा सकते हैं, भगवान को प्राप्त कर सकते हैं। तो ये गुरु महाराज भी आज के लेक्चर में बोल रहे थे और मैं उसी को रिमाइंड करा रहा हूँ। क्योंकि महाराज लेक्चर में बोलते भी थे कि मैं वही चीज, दुबारा, दुबारा दोहरा रहा हूँ कि हम सब लोगों को भूलने की बीमारी है, आप लोगों ने सुना होगा लेक्चर में, तो महाराज तो वह हम लोगों को भूलने की बीमारी है। तो मैं अपने प्यूरिफिकेशन के लिए उसी चीज को दोहरा रहा हूँ कि जो इंस्ट्रक्शंस प्रहपाद ने हमारे लिए छोडी है, गुरु महाराज ने इतना स्ट्रगल किया है, प्रहपात को एज टिस फॉलो किया है, जो इंस्ट्रक्शन उन्होंने अपने लाइव एग्जाम्पल से दिया है वो हम अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें और अपने जीवन को सफल बनाएं। तो ये मेरा फ फर्स्ट लर्निंग है। जो मैं आज गुरु पूर्णिमा में आपके साथ शेयर करना चाह रहा था, पास टाइम्स भी महाराज के बहुत हैं, पंद्रह 20 मिनट में तो होंगे नहीं, खत्म कल तो 2 घंटे से हम कल 2 मुझे भी टाइम का पता नहीं लगा, कल 2 घंटे हम डिस्कस कर रहे थे भगवान गुरु महाराज की, मैरीज पास टाइम्स। तो आज मैं ये पहली 1, पहली टीचिंग है गुरु महाराज की, जो गुरु महाराज बताना चाहते हैं और आज इतना अच्छा मौका है गुरु पूर्णिमा का हो तो हम इसको मनन कर सकते हैं। अब सेकेंड स्टेप जो है मुझे चीजें ज्यादा याद नहीं रहती तो मैं लिख के रख लेता हूँ। ईवन कल पास टाइम से मैंने। जब मुझे जैसे जैसे याद आते थे, क्योंकि 12 साल का समय महाराज के साथ मैंने सेवा में दिया है तो बहुत सारी चीजें 12 साल की छोटी छोटी चीजें याद करना, ऐसे याद नहीं आती मेरे को भक्त लोग बोलते थे कि आप लोग आप रिकॉर्ड कर लिया करो, लिखा करो महाराज के साथ जैसे प्रपात के सेक्रेटरी लिखा करते थे। आप भी लिखा करो। मैं कहता था प्रभु हमको प्रसाद पाने का टाइम नहीं मिलता तो ये करने का कहाँ से टाइम मिलेगा। तो वो चीजें थीं। बट सम, अभी हम अभी महाराज के जाने के बाद भी समय थोड़ा मिल जाता है। तो हम मेडिटेट करते हैं। अपने तो बहुत सारी चीजें, बहुत सारे रिलाेजेशंस, जो महाराज के साथ हूं याद आते हैं। तो में जब भी कोई चीज याद आती है, मैं लिख लेता हूँ तो उसमें से कुछ मैं आपके साथ शेयर करूँगा। जैसे हम बात कर रहे थे गुरु पूर्णिमा पर, गुरु तत्व पर, तो जैसे यस्से प्रसाद भगवत, प्रसाद प्रसाद गति। तो होगी। तो जैसे हम रोज गुरु वंदना में गाते हैं। तो ए इसमें जैसे मैं उसको रियलाइज कर रहा था कि जैसे अभी हमको जैसे सेवा मिलती है, हम हैं भक्ति में आगे बढ़ना है। तो हमको सेवा, सेवा के माध्यम से ही हम भक्ति में आगे बढ़ सकते हैं। तो हमें सेवा मिलती है, हम उसको करते हैं, बस उसको उसको करने की जो शक्ति है, वो गुरु से ही मिलती। हमारे में तो कोई योग्यता नहीं है। मैं। तो मैं अपनी बात कर रहा हूँ कि सच में मेरे में कोई योग्यता नहीं है। मैं तो ईवन आई, थिंक मुझे लगा, मैं शायद आप लोगों ने सुना या नहीं सुना। मुझे लगा कि आज मैंने गुरु महाराज का प्रणाम मंत्री भी गलत बोल दिया, शायद शायद गुरु महाराज का प्रणाम मंत्री और प्रपद प्रणाम मंत्री मैंने मिक्स कर दिय। अब देखो मतलब मैं इस यहाँ पर बैठा हूँ। अब ऐसा नहीं, हम तो सो सपने में भी कोई पूछेगा तो हमको याद है गुरु महाराज का प्रणाम मंत्री, प्रपात का प्रणाम मंत्र। पर बाद में बोलने के बाद मुझे लगा कि मैंने शायद गलत बोल दिया, गुरु महाराज का प्रणाम मंत्र और प्रपात कर पड़ा मंत्री मैंने मिक्स कर दिया। इ इतना, हमारे अंदर घबराहट है, हम बोलना इतना आसान नहीं है, मैं कभी 12 साल से कभी मैं शासन पर न बैठा, कल मेरे को कल बैठा, कल मैं बोल रहा था कि कल मैं फर्स्ट टाइम बैठा हूँ और कल मैंने फर्स्ट टाइम गुरु पूजा कीर्तन किया। क्योंकि हम गुरु महाराज की सेवा में इतने बिजी रहते थे कि हम अपने बारे में कभी सोचने का टाइम नहीं होता था, कभी नहीं। उससे पहले हमने 23 साल सब कुछ किया। तो वो थोड़ा बहुत है, याद है, वैसे, वो थोड़ा बहुत कर लेता है। तो वो चीज दोबारा करने की कोशिश किया। तो इतना बहुत मुश्किल लग रहा था, टफ लग रहा था, बैठ नहीं पा रहे थे हम भक्त भक्तों के सामने, तो वही है कि वी आर नॉट क्वालीफाइड वही चीज मैं बताना चाह रहा था कि मैं भी कोई क्वालीफाइड नहीं, मैं तो बोलते बोलते ही भूल जाता हूँ। अभी भी शायद कुछ चीजें बोलते, बोलते मैं मिस कर गया हूँ। बट मैं यही चीज बताना चाह रहा हूँ कि हम योग्य नहीं हैं, बट अगर हम गुरु की पूरी तरीके से शरणागत हो जाते हैं। भगवान स्पेशली गुरु के तो हमें वो शक्ति प्रदान होती है जिससे हम वो सेवा कर पाए। मैंने ये फील किया है अपनी लाइफ में, इसलिए मैं आपसे शेयर कर रहा हूँ। मैं वही चीजें आपको शेयर करूँगा जो मैंने अपनी लाइफ में फील किया है, जो रिलेट कर पाओगे आप, क्योंकि हम सब 1 जैसे ही है, मैं कोई बहुत उन्नत भक्त में से नहीं हूँ। तो शायद आप रिलेट कर पाए। तो वह चीज है। जैसे इसमें 1 एग्जाम्पल आता था कि जैसे हम बचपन में बच्चे को खिलौना देते हैं और उसमें चाबी भरते हैं। जब तक चाबी भरी है, जब तक उसमें है और वो खिलौना चलता है। आज बैटरी आज तो बैटरी का जमाना है। तो जब तक बैटरी चलेगी वो खिलौना चलेगा तो वैसे ही है। जब तक हम गुरु परंपरा के साथ, गुरु महाराज के साथ कनेक्टेड है तो हम भगवान के साथ कनेक्टेड है? हम हमें वो कृपा प्राप्त होगी? और हम वो सेवा कर पाएंगे और सेवा करे करने के माध्यम से ही हम ब भगवान को प्राप्त कर सकते हैं। तो यह रियलाइजेशन है। अब हमने सुन तो लिया महाराज के लेक्चर्स में, प्रपात के लेक्चर्स में, बट। अब इसको प्रयास करना पड़ेगा। हमको इतना आसान नहीं है। ये जो सेवा मैंने गुरु महाराज किए, यह इतनी आसान सेवा नहीं थी। जब मेरे को बोला गया था यह सेवा करने के लिए, उससे पहले 23 भक्त छोड़ चुके थे, 22 दिन करके वो कह रहे थे नहीं होगा हमसे 24 घंटे सुबह आप 3 बजे से रात को 12 बजे तक नॉन स्टॉप आपको मतलब सेवा करनी है। वेरी डिफिकल्ट। अब वो तो गुरु महाराज तो 1 अलग ही धरातल पर हैं। वो तो स्प्रिचुल है उनको तो कितने दिन 24 घंटे सेवा करा लो। प्रपात की सेवा करते थे भगवान की सेवा, हम तो बज्जी हैं, हम नहीं कर पाते थे। बट कैसे कैसे। जब मैं सेवा में आया तो मेरे को हमारे काउंसलर ने ये इंटरड्यूस किया था कि प्रभु जी थोड़े से स्ल। तो मैंने शायद कल भी बताया था। महाराज बोले आ ल। मैनेज तो मेरा गुरु महाराज के साथ ये रिलेशन है कि कल भी मैंने बोला था कि फास्टेस्ट मल्टी टास्किंग जो स्परिचुअल मास्टर है, उसके साथ लोवेस्ट सर्वेंट असिस्टेंट का कॉम्बिनेशन आप सोचो कैसा होगा? बट महाराज की कृपा थी, कल भी। मैंने बोला कि जैसे जब तक भगवान कृष्ण अर्जुन के साथ थे, वो गांधी उठा पा रहे थे, वैसे ही मेरा मेरा भी वही स्थित है। जब तक मैं महाराज की सेवा कर रहा था, 24 घंटे आप कह लीजिए तो महाराज जी आशीर्वाद दे रहे थे, महाराज जी शक्ति प्रदान कर रहे थे। तो यही इसके माध्यम से मैं यही आपको बताना चाहता हूं कि जब तक आप गुरु महाराज से, गुरु परंपरा से कनेक्टेड रहेंगे तो हम अच्छी तरह सेवा कर पाएंगे और भक्ति में आगे बढ़ पाएंगे। तो ये आपसे मैं शेयर करना चाह रहा था नेक्स्ट प्वॉइंट मैंने नोट किया था। कुछ बट सेवा करते टाइम हमे 1 चीज का ध्यान रखना पड़ेगा। जैसे हम गुरु पूजा में गाते हैं, गुरु वंदना में श्री गुरु चरण पद्म है, न उसमें गाते हैं, न सावधान मतें आता है तो उसमें हमको सावधान रहना पड़ेगा। क्योंकि सेवा करते टाइम माया का भी प्रकोप रहता है। पूजा लाभ प्रतिष्ठा मिलती रहती है। तो हमें बहुत सावधान रहना पड़ेगा इसमें 1 कोई भक्त बहुत सुन्दर उदाहरण दे रहा था कि जैसे मधुमक्खी होती है वो रस निकालने के लिए फूलों में जाती है और शाम तक वो रस निकालने में बिजी रहती बिजी रहती है और जैसे ही सूर्यास्त होता है वो अगर सावधान नहीं है तो वो फुल के अंदर कैद हो जाती है तो वो हमारे साथ भी है अगर हमारे को इतनी फेसिलिटीज मिल रही है कल मैं वो कल भी मुझे याद आ रहा था कि प्रभुपाद ने गुरु महाराज ने इतना स्ट्रगल करके ये एम्पायर खड़ा करके दिया इस कौन हमें कुछ नहीं करना, ध्यान पूर्वक जब करना है। 4 नियमों का पालन करना बट उसी के लिए हमको सावधान रहना पड़ेगा चारों तरफ से माया का प्रकोप रहेगा तो फिर नहीं तो फिर हम वो मधुमक्खी की तरह फंस जायेंगे माया में तो अगर गुरु की कृपा प्राप्त करनी है तो फिर माया से भी बचना पड़ेगा नहीं तो हम गुरु की कृपा प्राप्त नहीं करेंगे और कर पाएंगे और न भगवान की कृपा प्राप्त कर पाएंगे तो ये मैं थोड़ा रियलाइजेशन था वो मैं आपसे शेयर किया 1 और प्वाइंट था जो मैं आपसे शेयर करना चाह रहा था जैसे मैंने कल भी बताया था
कि
गुरु दीपक के समान है वैसे किसी 1 सीनियर ड्यूटी बता रहे थे लेक्चर में कि हमको 3 चीजों से बहुत सावधान रहना चाहिए, अग्नि विग्रह, अर्च विग्रह और गुरु 3 चीजों से बहुत सावधान रहना चाहिए इनसे हमेशा डिस्टेंस बना के रखना चाहिए थोड़ा दूरी बना के रखनी चाहिए क्योंकि अपराध होने के बहुत चांसेस रहते है तो वैसे ही जब मैं सेवा में आया तो मेरे को भी किसी सीनियर सीनियर से पूछा मैंने कहा मेरे को तो ए बी सी डी भी नहीं आती भक्ति थी और मैं महाराज की सेवा में जा रहा हूँ तो मुझे क्या किन बातों का ध्यान रखना चाहिए क्योंकि हम जब मंदिर ज्वाइन किया था उसके 2 साल बाद ही मेरे को गुरु महाराज की सेवा मिल गयी आप सोचिए न मैं वही अभी मैंने आपको बोला की 3 चीजों से सावधान रहना है अग्नि और अर्चिविग्रहऔर गुरु तो कैसे सावधान रहना तो उन्होंने मुझे समझाया कि जैसे दीपक है अगर दीपक के आप बिल्कुल बहुत पास चले जाएंगे तो भी आप जल जाएंगे और अगर दूर चले जाएंगे तो अंधकार में आ जायेंगे तो आपको 11 डिस्टेंस दूरी बना कर रखनी पड़ेगी जिससे गुरु आप पर दृष्टि रख सके, गुरु आप पर कृपा कर सके, गुरु आपको इंस्ट्रक्शन दे सके आपको हमेशा आपको चेक करते चेक करते रहे कि आप सही कर रहे हो, गलत कर रहे हैं तो 1 दूरी बना कर रखनी चाहिए जिससे हम गुरु की कृपा प्राप्त करें और हम कोई अपराध भी न हो गुरु के प्रति तो ये मैं आपसे शेयर करना चाह रहा था कि हमें अभी महाराज कल भी मैंने बोला था कि गुरु महाराज के पास कोई आया था और महाराज बोले थे कि महाराज बोले तुम मुझसे बहुत टाइम से मिले नहीं हो और वो रोने लगेगी डीओटी बोले कि महाराज मैंने आपके प्रति बहुत अपराध किया तो महाराज बोले की तुम चिंता मत करो, मैंने तुम्हारे आज तक के की हुए अपराध और फ्यूचर में जो अपराध करने वाले सबको माफ कर दिया। तो हमारे गुरुदेव इतने दयालु हैं, आप मतलब इमेजिन भी नहीं कर सकते, इतने दयालु हैं, सिम्पल तो है ही, हम्बल तो है ही, वो तो आपने देखा ही है, इतना सुना है, आपने इतने हंबल हैं, इतने सिम्पल है, दयालु भी इतने हैं कि उन्होंने ये मतलब एक्स्ट्रीम लेवल का आशीर्वाद दे दिया। आप बस तुम प्रपात की सेवा में लगे रहो, मैंने तुम्हे सारे अपराधों से पहले के आगे के सब माफ कर दिया। तो हमें इतने दयालु हैं गुरुदेव। तो हमें उनके इंस्ट्रक्शंस को हमें थोड़ा सीरियस होना चाहिए। अभी जैसे रुक्मणि कृष्ण प्रूफ बता रहे थे कि गुरु महाराज के जाने के बाद हमको ज्यादा मतलब एहसास हो रहा है, गुरु महाराज का मतलब ज्यादा महसूस हो रहा है कि गुरु महाराज हमारे साथ है क्योंकि हम 24 घंटे तक उन्हीं को ही मेडिटेट कर पा रहे हैं। पहले तो हम सेवा में बिजी रहते थे, मार प्रोजी बताते थे कि हम कोई भी चीज होती थी, महाराज के पास चले जाते थे, कोई कोई इशू होता था बट अब हमको उनके इंस्ट्रक्शन में मेडिटेट करना है कि ये सिचुएशन में कैसे करना है, कैसे करना है, अपने आप को भक्ति में आगे बढ़ाना है। तो हम जब ज्यादा मनन चिंतन करेंगे तो ऑटो वही सेम चीज महाराज के इंस्ट्रक्शंस मतलब सेम थी, प्रपात के इंस्ट्रक्शंस तो जैसे हम जैसे जैसे गुरु महाराज प्रूउपातके इंस्ट्रक्शंस को मेडिटेट करेंगे डेफिनिटली, हमारा न चेतो दरपण जन्म होगा और भक्ति हम आगे बढ़ेंगे। तो ये मेरा अनुभव था, तो मैं आपसे शेयर कर रहा था। 1 आप सब मेरे से पहले भी बहुत डिवोटीज आय है जो गुरु महाराज की सेवा में सेवा दिया है। तो मैंने बहुत लोगो से मिलने का प्रयास किया है। तो कुछ भक्तों से कहा मुझसे मुझको संग मिला था, तो उन्होंने बड़ा सुंदर महाराज के लिए 1 मंगलाचरण लिखा था सूखा प्रिया प्रुम तो में आपको गुरु पुर्णिमा का भी दिन है। तो मैंने सोचा कि ये मंगलाचरण बहुत सुंदर है, तो इसको पढना चाहिए है तो इंग्लिश में मत मैं उसको जस्ट बीच में, बीच बीच में थोड़ा रिपीट करूंगा हिंदी में जैसे गुरुमाराज हैव चाइल्ड लाइक इनोसेंस गुरुमाराज मतलब। 1 छोटे से बच्चे की तरह उनका सरलता है, उनके अंदर लोटस लाइक हैंड्स, उनके कमल बिल्कुल उनके हाथ कमल की तरह हैं, स्माइल लाइक क्युपिड कामदेव की तरह उनकी मुस्कान है, विगन लाइक लायन शेर की तरह, शक्तिशाली डिटर्मिनेशन लाइक, प्रलाद महाराज प्रलाद महाराज से की तरह दृढ़ हैं, भक्ती में एं्थुजियाजमलाइक न्यू डिवोटी है न आप देखेंगे गुरु महाराज को कभी भी वो एंतुजियाजमतो इतना ज्यादा है प्रोपर की सेवा के लिए, भक्ति के लिए, तो इसके लिए तो कितने ही एग्जांपल है। 1 डी डी ने पूछ लिया महाराज से कि महाराज आपके अन्दर इतना इं्तुजियाजम कहाँ से है? तो कल मैंने बताया था सेम चीज आज भी रिपीट कर देता हूँ। मार ने बोला देखो उनको अभी किसी को। समझाना है तो उसके लेवल पे आके समझाना पड़ता है, गुरुवार तो परम भागवत है तो वो उनके लेवल पे आके समझाते हमने कितने ही जन्म लिए है और हम कितने जन्मों में भटकते रहे हैं। अब हमको हम अगर 1 जन्म प्रपात की सेवा में दे दें पूरी तरीके से। तो मुझे कोई फर्क तो मतलब, हमारे इतने जन्मों से कोई फर्क तो पड़ेगा ही, 1 जन्म अगर दे दिया पर उससे हमको भगवान की प्राप्ति हो जाएगी, भगवत प्राप्ति हो जाएगी। तो इतने सुंदर तरीके से महाराज ने और उसको सिम्पल लैंग्वेज में समझाया कि एंथुजियाजमक्यों कैश क्यों होना चाहिए तो हमको हमेशा एन्थएंथुजस्टिक रहना चाहिए, हमेशा उत्साहित रहना चाहिए। तो अगला है पेशेंस, लाइक, सबरी धैर्य रखना चाहिए सबरी की तरह सब्री की कहानी तो आप सबको पता है ह्यूमिलिटी एंड टॉलरेंस, शिक्षा, शिक्षा, सिस्टम जैपनिसिस्टस्टकम का तीसरा वर्ष है सबको पता है, है न, ह चना सुनी न सुना न, आने देना कितनी श्रद्धा री। तो ये प्रभुजी में हम कभी कभी बैठते थे तो महाराज की ग्लोरी को याद करते थे तो प्रभुजी ने मुझे बताया था कि यह बड़ा सुन्दर मंगलाचरण है गुरु महाराज का। तो मैंने कहा आज गुरु शेयर करूंगा तो सबको अच्छा लगेगा। 1 और चीज आज की डेट में मैं बताना चाहूँगा मैं जितने भी पासटाइम्स बोल रहा हूँ कोशिश कर किया है मैंने कि आज से रिलेटेड हूं नहीं तो पास टाइम तो बहुत है, 2 घंटे भी कम पड़ेंगे। तो महाराज 1 चीज बहुत पसंद करते थे और वो थी साधना रिपोर्ट महाराज हमेशा भक्तों से मिलते थे तो महाराज बोलते थे कि तुम मुझको अपनी साधना रिपोर्ट भेजा करो साथ में बोलते थे कि मेरे पास टाइम नहीं है ईमेल पढ़ने का बट, फिर भी तुम भूल। तो आज मैं इस चीज को इसलिए दोहरा रहा हूँ क्योंकि अब गुरु महाराज हमारे साथ नहीं है, उनकी इंस्ट्रक्शन हमारे साथ हैं, है न उनकी इंस्ट्रक्शन, कोई हमको अपना लाइसेंस होल मानना है। तो अगर आप ये सोचेंगे कि गुरु महाराज हमेशा हमारे साथ हैं और उनको हमेशा हमें देख रहे हैं, महसूस करना है और हमेशा अपनी साधना स्ट्रोंग रखनी है और गुरु महाराज को उसको रिपोर्ट देना है गुरु महाराज को रिपोर्टिंग करने की। आप लिख सकते हैं, पेपर पर लिख सकते हैं, रख सकते हैं, गुरु महाराज के ऑल्टर ऑल्टर में सामने रख सकते हैं अपनी साधना रिपोर्ट क्योंकि जब आप साधना रिपोर्ट ऐक्चवली हमें पता नहीं लगता है हम सारे दिन में कितना टाइम वेस्ट करते हैं बट अगर आप उसको लिखना शुरू करेंगे तो आपको प पता चलेगा कि हम कितना टाइम वेस्ट कर रहे हैं दिन में। तो आज आप अगर लगता है कि आपने 5 घंटे वेस्ट कर दिए कल आपको उस चीज का रियलाइज होगा कल 4 घंटे पे आ जाओगे, फिर 3 घंटे पर आ जाओगे, 2 घंटे पे आ जाओगे। 11 समय आएगा कि आप बिल्कुल टाइम वेस्ट नहीं करेंगे और पूरी तरीके से भक्ति में लगे रहेंगे तो साधना में लगे रहेंगे तो इस तरीके से यह 1 दिन में नहीं होने वाला पर इसकी शुरुआत कैसे होगी जब आप गुरु के साथ अपना रिलेशन बनाएंगे और साधना रिपोर्ट बना के गुरु महाराज के ऑर्डर में भी रखेंगे तो आप उनसे अपने आप को कनेक्शन फील कर पाएंगे है न कनेक्शन फील कर पाएंगे। तो अभी इसलिए अभी क्या है। गुरु महाराज ने अपने बिल में भी बोला है कि मेरे जाने के बाद आप सब जितने भी सीनियर डिवोटीज हैं उनका आश्रय लीजिए। तो आप बिल्कुल मत ये सोचिए कि मतलब गुरु महाराज चले गए, महाराज ने अपने रिप्रेजेंटेटिव ह हमारे बीच में छोड़े हैं। जैसे हेज होलिनेस, प्रधान, सर, सर महाराज अपने हिजहोलिनेस भक्ति, वेशर स्वामी, महाराज, रुकमणी, कृष्ण प्रूफ हैं, कमल लोचन प्रूफ है, इतने प्रहुपातकेइतने मतलब डेडिकेटेड डिसाइपल थे। तो महाराज ने भी इतना परिश्रम किया है, इतना समय दिया भक्तों को, उनको भी इतना मतलब। अब देयर लाइक के रिप्रेजेंटेटिव, गुरु महाराज के। तो हमको कोशिश करना चाहिए कि उनका संग प्राप्त करें, जितने जितने से, ज्यादा से ज्यादा हो सके उनका संग प्राप्त करें और तभी हम गुरु महाराज का संग फील कर पाएंगे और उनके इंस्ट्रक्शन को जीवन में उतार पाएंग। तो ये चीज मैं अनुभव महसूस कर रहा था। तो मैं आपसे शेयर करूँ, मेरे पास टाइम कितना है मैं वो मैं देखूंगा। मेरे पास बोलने के लिए तो बहुत कुछ है पर कुछ और बोलना चाहूँगा मैं
है।
अभी आज गुरु पूर्णिमा का दिन है तो मेरे को व्यास पूजा का दिन याद महाराज के। तो अभी महाराज जब तक थे गुरु महाराज तो महाराज बोलते थे, मेरी व्यास पूजा 1 ही जगह बनाओ। मतलब भगत भ तो महाराज के बडे वाले दिन भी केक काटते थे, वो अभी हम बाल्टीमोर में गए थे तो वहाँ पर महाराज इतना मतलब मना किया कि नहीं नहीं बनानी फोर्टीन अगस्त, नाइनटीन, फोर्टी, फोर, उनका क्रिश्चियन कैलेंडर से डेटा बर्थ है। तो हमने प्लान किया था कि महाराज उस टाइम अमेरिका में होते हैं। तो वहाँ पे अमेरिकन डिवोटिज, सो कॉल्ड व्यास पूजा, उसका नाम उन्होंने दिया था गुरु पूजा। तो वो भी महाराज का बर्डे था, उसको भी ऐसे व्यास पूजा सेलिब्रेट करना, व्यास पूजा वाले दिन भी व्यास पूजा, गुरु पुरना। अभी तो आपके पास मौका ही मौका है, कोई मना नहीं करने वाला। ऐसे आप जितने मर्जी फंक्शन करो आप और करने चाहिए, करने चाहिए। इससे क्या होगा कि हमको भक्तों का संग मिलेगा। गुरु महाराज के जितने भी सीनियर डिसाइपल हैं, महाराज के रिप्रेजेंटेट, उनका संग मिलेगा। तो हम 1 फैमिली की तरह 1 साथ रह पाएंगे। और महाराज ने जो इतना प्रयास किया है, इतने टेम्पल्स खुले हैं। अभी आप देखिये, बॉम्बे में ही जुहू हो गया, फिर मीरा रोड हो गया, उधर खारगर हो गया। इधर थ खाने में भी है और बहुत सारे विराट, छोटे छोटे, बहुत सारे सेंटर्स हैं। तो भक्तों का महाराज बहुत खुश होते थे। जब भी कोई प्रीचिंग की न्यूज सुनते थे तो महाराज बहुत खुश होते थे। तो यही मैं कहूँगा कि अभी आपके पास मौका है किसी न किसी बहाने से आप प्रोग्राम कीजिए और भक्तों को इनवाइट कीजिए, भक्तों का संग लीजिए। महाराज के डिसाइपल, आप सब 1 साथ बैठ के महाराज का गुणगान कीजिए तो हमारा शुद्धिकरण होगा। बोलने से मेरा शुद्धिकरण हो रहा है, सुनने से आप लोगों का शुद्धिकरण हो रहा है तो इससे हम लोगों को फायदा होगा। तो इसका इनिशिएटिव इस बार कमल लोचन प्रो ने, चक्रवर्ती प्रूव, अनिरुद्ध प्रूव ने। इस बार उन्होंने इनिशिएटिव लिया। वैसे रुकमणी कृष्ण भी बोल रहे थे कि हम ऐसे ही दिल्ली में भी करेंगे तो दिल्ली में क्यों। हर जगह ऐसा होना चाहिए। हरे ये 1 चीज। और मैं शेयर करना चाहूँगा कि इंस्ट्रक्शंस पे है। तो जो जो मुझे इंस्ट्रक्शंस पे आज के दिन का याद आ रहा है। अब जैसे आपको पता ही है कि महाराज का शेड्यूल इतना बिजी रहता था। ट्वेंटी फोर बाई सेवन अपने आप को बिजी रखते थे। शुरू से उनका दिन भर का मॉर्निंग प्रोग्राम मॉर्निंग, साधना, डीटी, वर्शिप, जपा, वॉक, मीटिंग, फोन, कॉल्स 1 के बाद 1 बैक टू बैक होता था। सारा टाइम सारा दिन सोते भी नहीं थे दोपहर को अभी तो जबरदस्ती 23 साल पहले डॉक्टरों ने बोल बोल सुलाना शुरू किया दोपहर को, नहीं तो दिन में भी नहीं सोते थे। और पूरा दिन उनका शेड्यूल बिजी रहता था। पर किसी दिन महाराज को अगर शाम को समय मिले गुरु सुबह तो महाराज बोलते थे गुरु पूजा में, तो कहते थे कंपलसरी कंपलसरी जाना चाहिए बट अगर शाम को उनको थोड़ा सा टाइम मिल जाता था कि आज है थोड़ा टाइम। तो महाराज कभी भी शाम की संध्या आरती मिस नहीं करते थे। दामोदर प्रो यहां बैठे हैं यहां पर जितने भी जू के भक्त हैं उनको उनको भी इसका रियलाइजेशन होगा दिल्ली में भी महाराज जब भी उनको संध्या आरती के टाइम वो आधे घंटे का जो स्लॉट है अगर उनको लगता है कि वो फ्री है। उ वो तुरंत बोलते थे कि आज मैं संध्या आरती गाऊँगा आप सोचिए। हम मतलब कितना अपने आप को बिजी रखते थे। यही है हम लोगो को भी ऐसे ही करना है। इस इंस्ट्रक्शन से सीखना है। हम यहाँ निचे संध्या आरती हो रही होती है, हम कमरे में बैठे होते हैं, गुरु पूजा अटेंड कर लेते हैं। सुबह जैसे तैसे 1 मॉर्निंग प्रोग्राम के 1 सीक्वेंस में, पर हम संध्यार्ती नहीं आते। महाराज मैं बहुत फील करता था, महाराज मेरे को बोलते थे तुम आज गुरु पूजा में गए हो। भक्तों को भी पूछते थे तुम मंगल आरती में हो क्योंकि महाराज पूरा वाच रखते थे हम ऊपर, हमारे ऊपर, पूरा, तो महाराज बोलते थे कि मैं बोलता था, महाराज हाँ मैं गया था, पर पूरा मॉर्निंग प्रोग्राम आपने अटेंड किया है। मैंने कहा महाराज हाँ मंगल आरती अटेंड नहीं, पूरा मॉर्निंग प्रोग्राम, पूरा मॉर्निंग प्रोग्राम क्या है। मैं आपको बताना चाहूँगा यार मेरा फोन बार बार बन गया है। मेरे को याद नहीं रहता इसलिए मैं लिख के रखता हूँ। मॉर्निंग प्रोग्राम महाराज बताते थे की मंगल आरती ट्वेंटी परसेंट आप ये सोचते हो कि मंगल आरती अटेंड कर लिया और बहुत बड़ा तीर मार लिया, बहुत बड़ा काम कर लिया तो नहीं मंगल आरती सिर्फ 20 परसेंट है, महाराज हंड्रेड पर् में से महाराज कैसे समझाया उन्होंने मंगल आरती 20 पर्सेंट है चैंटिंग फोर्टी परसेंट कितने हो गये सिक्टी। तो आप सोच रहे हो जिस मॉर्निंग प्रोग्राम मतलब मंगल आरती 4 सिटी मैंने देखा है भक्त लोग मंगल आरती करके गायब हो जाते है। कुछ लोग चैटिंग में गायब हो जाते हैं। तो आप देखिये ट्वेंटी परसेंट, फिर फोर्टी सिक्टी पर्सेंट हुआ है। फिर उसके बाद महाराज गुरु पूजा महाराज ने टेन परसेंट दिया गुरु प्रोजेट, गुरु पूजा टेन पर्सेंट और भागवतम क्लास थर्टी परसेंट। तो ये है हंड्रेड परसेंट का महाराज का, मॉर्निंग प्रोग्राम का परसेंट शिड्यूल। तो आप देखिए अगर कोई महाराज महाराज का कहना महाराज यही सिखाना चाहते थे मुझको कि अगर आपको हंड्रेड परसेंट मॉर्निंग प्रोग्राम करना है तो फिर इस टाइप से मंगल आरती से लेकर भागवतम क्लास तक आपको वहां रहना है। आजकल तो लोग भागवतम क्लास यूट्यूब पर सुनना शुरू कर दिया। अच्छी बात नहीं है सामने, व्यास सन पर बैठे हैं स्पीकर तो हमें भी कोशिश करना चाहिए, किसी की हेल्थ इशूज हैं तो अलग बात है। बट हमें प्रयास करना चाहिए कि पूरा मॉर्निंग प्रोग्राम हंड्रेड परसेंट हो। तो उसी चीज को मैं आपसे शेयर करना चाह रहा था। महाराज के इंस्ट्रक्शन को तो 1 और इंस्ट्रक्शन थी ही लॉयल to his con हिज वेरी लॉयल टो स्कॉन 1 तरफ आप महाराज के डिसाइपल से रख 2 तराजू में और 1 तरफ मतलब तराजू नहीं 1 तरफ महाराज के डिसाइपल से रख 2 और 1 तरफ इस्कॉन रख 2 महाराज इस्कॉन को प्रेफर करेंगे महाराज महाराज क्यों क्यों? क्योंकि इस्कॉन प्रपात की बॉडी थी महाराज प्रपात क्या बोलते थे इस्कॉन इज माई बॉडी तो महाराज मतलब अपने डिसबल्स को नोट आउट, वो पूरा ध्यान रखते थे, बट अगर आपको दोनों में से कुछ चुनना है तो महाराज इस्कॉन चुन चूस करते। मेरे मन में यह संभावा ऐसा था ऐसा महाराज सोचते सोचते है कि स्कॉन ज्यादा इम्पोर्टेंट है र साइकल्स, क्योंकि वो प्रोपर से कनेक्टेड तो हमको भी महाराज ने महाराज की फिल् में भी लिखा है। महाराज ने बोला है कि आप स्कोन में ही रहिए स्कॉन को कभी मत छोड़िए तो ये इस इस इंस्ट्रक्शन को भी हमें अपने जीव गांठ माननी पड़ेगी 1 बार, क्योंकि ऐसा नहीं है, इतनी बड़ी संस्था है कुछ न कुछ तो इशु आएंगे ऐसा नहीं ै सब। क्योंकि जितने जितने लोग होंगे उतना उतने ओपिनियंस होंगे, उतने सुझाव होंगे तो सुझाव होंगे। तो मतभेद भी आएगा। 1 दिन कोई डिवोटी महाराज के पास आये, महाराज महाराज के पास बैठा था वृंदावन में और कोई मिला रहा था भक्तों को तो 1 डिवोटी आए महाराज के कहते है महाराज सुनाने लगे पूरा अपना महाराज ये ये हो गया वो कम्प्लेन पर कम्पलेन 1 के बाद 1 कम्पलेन महाराज सुने जा रहे, वो सुना रहे हैं पूरा महाराज ऐसे चुपचाप शांति से सुन रहे है। अब वो सीनियर डिवोटी थे इसलिए महाराज के चलो तुम बोलो जनरली कोई हम में से कोई होता तो महाराज इतना टाइम पर सीनियर डिवोटी तो टाइम दिया। महाराज कहते है ठीक है बोलो बोलते रहे, बोलते रहे। 10 पंद्रह मी जब वो थक गए। बोल बोल के। महाराज सोचा कि महाराज तो कुछ जवाब ही नहीं दे रहे। फिर वो वो अभी उसको एकदम क्लिक हुआ। माइंड में की महाराज ने तो कुछ बोला ही नहीं। तो फिर सब शांत हो गया। महाराज बोले बस महाराज कहते हैं यह तो कुछ भी नहीं है। मैंने अपनी लाइफ में जितना सहाय, उसके मुकाबले तो यह कुछ भी नहीं है। हमको हायर गोल अपने सामने रखना पड़ेगा। तो उसको अगर हम अपने सामने रखेंगे तो ये छोटी मोटी चीजें अपने आप टाइम के साथ ठीक हो जाती है। हमको हायर गोल अपने सामने रखना पड़ेगा। महाराज ने ऐसी इसी चीज को कोई किसी ने अलग तरीके से पूछा था, तो महाराज उसके लेवल पर उसको समझाते थे। मजाक में कहते हैं थोड़ी मोटी चमड़ी वाला होना चाहि है, त्रीणादपी सुनी चयन वाला जो श्लोक है, उसको गले में बांध लो। और थोड़ी मोटी चमड़ी होनी चाहिए कि थोड़ा अच्छी तरह टॉलरेट कर सको। कोई दिक्कत नहीं बट। वो इसलिए बोलते थे कि इस्कॉन के अंदर में रहकर आपको भक्ति करके आगे बढ़ने का मौका है। बाहर तो वो है ही नहीं, बिल्कुल नहीं है। इसीलिए आप डिस्काउंट के अंदर ही रह के टोल रेट करो भगवान से प्रार्थना करो। सब कुछ ठीक हो जाएगा। क्योंकि सब कुछ तो अल्टीमेटली तो भगवान के कंट्रोल में ही है। अगर आपकी प्रार्थना सिंसियर है तो सोलूशन निकलेगा। तो महाराज ये चीज उनको समझाना चाह रहे थे कि इस्कॉन नहीं छोड़ना। महाराज ने लास्ट अपने इंस्ट्रक्शन में भी यही बोला है कि इस्कॉन नहीं छोड़ना तो गुरु पुर्णिमा। पर आप हम इसको याद कर सकते। दोबारा, इसी चीज को हमें हमेशा याद करना चाहिए। बट, आज मैं शेयर कर रहा हूँ आपके साथ, तो इसी के साथ मैं धन्यवाद करूंगा। सबका आप लोगों ने ध्यानपूर्वक सुना, गोरिस तो बहुत है, बट समय का भी अभाव है। और भी भक्त सीनियर डिवोटीज हैं। बोलेंगे मुझे कभी और मौका मिला तो मैं और बोलेंगे गरमास की ग्लोरी हरे कृष्णा
बहुत बहुत धन्यवाद। और इनके पास इतना बड़ा संबंध है कि अभी मैंने को बोला कि अभी आप और थोड़ा समय लीजिये और फिर ट्रैवल कर के आप को समुंदर से बोल के सब सेंटर पर क्या कीजिए जा कर डालते रहेंगे। अभी प्रोजेक्ट बंद कर दीजिये तो भक्त लोग थोड़ा और आगे आगे उस पर बहार खड़े अभी हम रिक्वेस्ट करेंगे। इसके लक्षण रूप से सर्वेक्षण प्रभु। बहुत सारा प्रचार करने के बाद महाराज को मैनेजमेंट सेवा दिया और पिछले कई सालों से पूर्ण मंदिर के वाइस प्रेसि भी हैं। और अभी आपने देखा होगा पिछले कुछ सालों में टूर्नामंट बहुत ज्यादा बुत डिस्ट्रीब्यूशन, 2 साल, रैंक वन भी आया, 4 साल बैंक बनाया, लेक्शन दे रहे है
तो
पिछले साल जो हुआ है तो सर्विस का बहुत बड़ा योगदान है। उदा मंदिर में 1 लाइन मार्ग बना। सु किशन तना उन्होंने करवाया तो बहुत प्रिय सेवा है डिस्ट्यूशन महाराज को। अब सब बहुत अच्छे से किया और हम लोकस करेंगे उनको
हरे कृष्ण ने माशदाकृष्णृष्शीमत, गोपाल, कृष्ण संतरा बाद साहित्य
प्रचार
साधु
तो इस ग्रेस कम लोचन। पुणे में आये थे तो प्रभु जी बता रहे थे कि अगर कोई करोड़पति व्यक्ति है और उसके 2 बेटे हैं और अचानक वो करोड़पति व्यक्ति चला जाता है तो उन बच्चों के ऊपर पूरी जिम्मेदारी सड़कों पर आ जाता है। पहले तो बहुत एंजॉय कर रहे थे लेकिन अभी वो एंजॉय नहीं कर सकते है। उसी प्रकार हम जब गुरु महाराज शरीर छोड़ के चले गए तो हमारे ऊपर भी बहुत बड़ा 1 जिम्मेदारी आया है। तो हम अभी पहले जैसे एंजॉय नहीं कर सकते हैं क्योंकि अभी जिम्मेदारी हमारे ऊपर है तो गुरू महाराज पहले हम जब भी गुरु महाराज कहीं भी होते तो जाते थे, जब बॉम्बे में भी महाराज जाते थे तो हम भाग के आ जाते थे। मेरे 1 बार के 1 जू में आया था, गोर पुर्णिमा का दिन था और गुरू महाराज लेकर दे रहे थे तो मुझे भी लगा कि गुरु महाराज का लेक्चर सुनने के लिए बॉम्बे में आ जाओ। तो बॉम्बे में आया था गौर पुर्णीमा लेच्चर खत्म हो गया। तो महाराज जा रहे थे। तो महाराज बोले आप यहाँ क्या कर रहे हो? टूर्नामेंट कुछ सेवा क्या आपका आप कब जा रहे हो? तो ये सवाल हमेशा होता था। तो मुझे इतना डर लग गया, मैं पहले नया नया था तो तुरंत नेक्स्ट डे, अर्ली मॉर्निंग चला गया तो महाराज बाद में दूसरे 1 भक्त थे, उनको पूछ रहे हैं वो सर्व लक्षण कि वो चला गया, पूर्ना में उन्होंने प्रसाद नहीं लिया क्या? तो ऐसे महाराज बहुत बार ऐसे ख्याल करते थे, 1 बार मैं दिल्ली में भी गया था, व्यास पूजा में हम हर साल जाते थे। तो व्यास पूजा में महाराज के पास हम फ्लवर देने के लिए गए। महाराज बोले यहाँ क्यों आये हो, पूर्ण में आप को सेवा नहीं है क्या? तो बार बार डांटते थे तो इसलिए मैं क्या करता था हर साल पुणे में सेलिब्रेशन कर के, फिर फ्लाइट पकड़ के, फिर शाम का प्रोग्राम डेली मेटन करते थे। तो महाराज पूछने से पहले ही बोलता था कि महाराज पूणे में मना के
आया हूँ
नहीं तो डांट पड़ती थी और लास्ट र ऐसा हुआ कि मैं गया था पुणे में, मनाया था मनाया की फ्लाइट पकड़ के जब दिल्ली में गया तब पता चला कि महाराज शाम के समय में नहीं आ रहा है। तो मुझे बहुत दुख लगा कि गुरु महाराज का व्यास पूजा है और मुझे दर्शन भी नहीं मिल रहा है कितना बड़ा भाग है। और मैं वहाँ पर गया था। तो चंडीगढ़ के 1 भक्त थे, वो महाराज का वहां पर सिक्योरिटी गार्ड के जैसे खड़े थे, किसी को भी अलाउड नहीं है अंदर जा नहीं सकते है। तो समा और मैं पर मुझे महाराज के रूम के अंदर जाने का मौका मिला और महाराज हमको दर्शन दिए और महाराज इस बार पुणे में लास्ट विजिट ऑफ पुणे बहुत विशेष रहा इस बार जी बी सी मीटिंग पूने में रहा था तो जी बी सी मीटिंग में बहुत सारे सन्यासी लोग और सीनियर डिवो डिजायर थे और हमने हिजोलिनेसरादनद स्वामी महाराज को रिक्वेस्ट किए थे कि आप 1 सत्संग दे दीजिये राधानाथ स्वामी महाराज मना किए कि मैं नहीं दे सकता तो फिर हमने गुरु गौरांग प्रभु को पूछा तो गौरांग प्रभु ने बताया कि सीक्रेट ये है कि जब तक गोपाल कृष्ण महाराज 1 प्रवचन नहीं देंगे तब तक राधानाथ महाराज प्रवोचन नहीं देने वाले इसलिए आप लोग पहले गोपाल कृष्ण महाराज का प्रवचन ऑर्गेनाइज करो अगर गोपाल कृष्ण महाराज देंगे तो फिर राजन हमारा जरूर देंगे तो इसे प्रभु जी ने गवर्न प्रभु जी ने बताए थे तो फिर मैं रादीशमप्रभुाएक प्रोग्राम बनाये गोपाल कृष्ण महाराज का बुक डिस्ट्रब्यूशन का इनॉगरेशन प्रोग्राम पुणे में और इसके बाद हमने महाराज को रिक्वेस्ट किया महाराज रेडी हो गए और महाराज रेडी होने के बाद फिर हमने राजाना स्वामी महाराज के पास गए तो राधानाथ स्वामी महाराज ने महाराज को मैंने बताया महाराज ऐसा से हम लोग बुगडिशननॉगरेशन प्रोग्राम कर रहे हैं तो आप आ जाइए तो महाराज गोपाल कृष्ण महाराज इस गिविंग प्रोग्राम न आई विल डेफिनेटली कम एंड मैं उसमें केवल गोपाल कृष्ण महाराज का ग्लोरिफिकेशन करूंगा और मैं केवल 10 मिनट पहले बोलूंगा इसके बाद महाराज बोलेंगे तो फिर ये हुआ था प्रोग्राम का नक्की हो गया था दोपहर को 2 बजे के समय में और शाम को प्रोग्राम था 7 बजे हमारे पास 2 बजे से केवल 45 घंटे था और उतने में यह ऐसा प्रोग्राम हमने कभी इतना बड़ा प्रोग्राम ऑर्गनाइज नहीं किया था करीबन 7 8000 लोग आए थे उस प्रोग्राम में और उसमें प्रशादन भी हमने कम से कम बहुत बड़ा मतलब 10 12 आइटम का बहुत बड़ा फीस रेंज किए थे और उसमें गुरु महाराज आये थे गुरु महाराज राधानाथ स्वामी माली ने आप लोग इसमें यू ट्यूब में अवेलेबल है कैसे राधानाथ स्वामी महाराज और गोपाल कृष्ण महाराज कभी 11 साथ एनसीसी में कभी प्रोग्राम दिए ने यह पहली बार ऐसा हुआ कि दोनो जी बी सी साथ में बैठे हैं और राधानाथ स्वामी महाराज गोपाल कृष्ण महाराज का गुणगान कर रहे हैं और उनके बाद गुरु महाराज लेक्चर दे रहे थे गुरु महाराज का वाइस थोड़ा सबको समझ में नहीं आ रहा था लास्ट लास्ट मोमेंट में तो हमने कदम कृष्ण को रिक्वेस्ट किया था कदम कृष्ण उसको ट्रांसलेट करने के बताने वाले थे लेकिन ऐसा हुआ कि थोड़ी देर के बाद गुरु महाराज का वाइस इतना क्लियर हो गया कि सब लोग को समझ में आ रहा था फिर रिपीट करने की जरुरत नहीं था ऐसा लग रहा था इतना महाराज क्लियर और महाराज इतना उत्साह से ऐसा प्रेरणा दे रहे थे और सभी भक्त इतने इतने खुश हो गए और महाराज का हर चीज एकदम फिक्स महाराज जाने से पहले हर चीज मतलब उनका समाधि कहाँ होना है उनको यह पता है और बी बी टी का ट्रस्टी उन्होंने बना के गए हर प्रकार और ये हमको लग रहा था कि महाराज को पता था कि ये लास्ट विजिट है और राधा तरफ से महाराज का ये महाराज के लिए 1 सेंडऑफ जैसा था इतना भव्य दिव्य प्रोग्राम हो गया हमको नहीं पता था कि यह महाराज का लास्ट प्रोग्राम होगा तो समहारधरगुरुमाराज की कृपा से और यह पुणे में बुकडीशविशनऔर पुणे का जो टेम्पल भी हमारा यह प्रोजेक्ट था केवल 45 करोड़ रुपए का लेकिन गुरुमाराज ने उसको इतना बड़ा प्रोजेक्ट बना दिए जिस समय में हमारा जन्मास्टमी में केवल 5 लाख रुपए कलेक्शन होता था पूरे जन्मास्टमी में 5 लाख रुपए कनेक्शन होता था और उसको उस समय में हमने 1 मंदिर बनाने का ये प्लान बनाया और पंद्रह 10, 5, 10 पहले शुरुआत में हमने 5 करोड़ में रखा था तो गुरु महाराज को जब हमने प्रेजेंट किया और 5 करोड़ भी बहुत मुश्किल से वो बना था लेकिन गुरु महाराज जब आये है नेक्स्ट टाइम महाराज को हमने प्रेजेंट किया महाराज ने बोला कि आपको कम से कम 5 प 50 करोड़ का मंदिर बनाना है अभी कम्पलीट होते कम से कम सौ करोड़ का मंदिर बन गया हो और कैसे हो गया यह गुरु महाराज की ही कृपा से और कोई इतना बड़ा एंडेवर नहीं हुआ बहुत ही आसानी से हुआ है और महाराज ने बोला कि मैं प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया को लेकर आऊंगा इनॉगरेशन के लिए और महाराज बोले ये मेरे तरफ से यह सेवा है और महाराज ने महाराज की कृपा से और वहां पर जो लैंड है पूना का यह न्यू सीसी का जो लैंड है वो महाराज के द्वारा ही हुआ है क्योंकि वहां पर बाला जी का जो विग्रह है वो विग्रह 1 व्यक्ति के घर में था और उसको वो व्यक्ति ने बहुत अलग अलग व्यक्ति के लोगों के लिए दिए थे लेकिन फाइनली महाराज को मिलने के लिए आये थे राधा कुंजेर मंदिर में तो वहाँ पर महाराज को जब बताए फिर महाराज ने कुछ भक्तों को उनके घर में सेवा के लिए भेज दिए फिर इतना खुश हो गया अपना जगह बंगला दे दिया और डी टी को दिया वो डी टी जो बंगलो का जब हम भेज दिए उससे 1 करोड़ 25 लाख रुपए मिला था उसे पूरा छे कर मंदिर गुरु महाराज ने वो बाला जी का डी टी और बालाजी का बंगला बेचने से आया हुआ मनी है और पूरा महाराज की कृपा से और बुक ड्यूशन महाराज पहले हम बहुत ही कम बुक डिश हो रहा था लेकिन गुरु महाराज हर साल 2 बार आते थे पहली बार जनमाष्ट में आएंगे और फिर दुबारा मैराथान का इनोग्रेशन मैराथन के लिए 2 बार आते थे पहले इनोग्रेशन के लिए और फिर प्राइज डिस्ट्र्यूशन के लिए इसलिए महाराज की कृपा से ही यह बुक डिस्टशणपूर्णामें हो रहा था तो अभी हम गुरु महाराज के चरण में ही प्रार्थना करते हैं कि गुरु महाराज ऐसे इंस्पीरेशन देते रहे और कल हम पुणे में 1 ऐसे काउंसिलर गुरु महाराज का डिसाइपल्सकाएककौउंसिलर ग्रुप है और वहाँ पर हम डिस्कशन कर रहे थे। तो जैसे अर्जुन है वो अपना गुरु द्रोणाचार्य के प्रति वो कैसे प्रणाम करता है वो अपने धनुष और तीर ले के वो तीर से प्रणाम करके वो नमन करते है। उसी प्रकार हम जलिज गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराज का शिष्य है और गुरु महाराज आज गुरु पूर्णिमा है गुरु पूर्णिमा को हमको दक्षिणा देना है। आप में से कितने लोग गुरु दक्षिणा देने के लिए तैयार हो। हाथ उठा ले वेरी गुड तो सब लोग हाथ उठाएं। अभी देखिये गुरु महाराज प्रसन्न होते है हम गुरु महाराज की प्रणति मंत्र में बोलते हैं प्रभोपाआदश्यसाहित्य या प्रकाश विधि तो इसलिए शिलोप्रवोपाजी को बहुत ही प्रिय यह सेवा था ग्रंथ वितरण है गुरु महाराज बी बी टी का ट्रस्टी थे और इस कांड के जी बी सी थे और प्रपात जी अमेरिका जाते समय ट्रंक भर के भागोतम लेके गए पूरा विश्वास था नए लोगों के लिए तभी गुरु महाराज अपने प्रवचन में भी बताए कितना सेट भागवतम लेके गया प्रपात जी 200 सेट कितना 200 सेट वो भी अमेरिका जाते समय तो हम यहाँ पर भारत में है तो यहाँ पर जो भी भक्त गुरुमाराज के शिष्य है तो उनसे रिक्वेस्ट करते हैं कम से कम 10 सेट भागोतम साथ में लेके अपने रखिये साल भर स 10 सेट ईजीली आप निकाल सकते हैं तो भागोतम सेट के द्वारा इस साल का जो भागोतम का वितरण है और पूरा मरता इस साल का पूरा डिशन गुरु मार्ज के नाम से किया जा रहा है तो हम सब का 1 कर्तव्य है गुरु मार्ज
का गुण गाना है और यह ऐसा
नहीं है कि केवल हम कुछ बोल रहे हैं कुछ करना भी चाहिए गुरु महाराज को बहुत प्रिय सीता ग्रंथ वितरण इसलिए गुरु महाराज पूरे मंदिर में ट्रैवलिंग करते थे इसलिए हर 1 भक्त से प्रार्थना करते हैं इस साल के ग्रंथ वितरण में भाग लीजिये और गुरु महाराज का आज गुरु पूर्णिमा में गुरु महाराज के चरण में प्रार्थना कीजिये वो भी हमको शक्ति देंगे और वो ही हमको भक्ति देने वाले है और सब कुछ गुरु महाराज की कृपा से ही हम कर पाते हैं इस गोपाल कृष्ण कुश
महाराज की शीलप्रोपादकीरबहुत बहुत धन्यवाद आपने बिल्कुल जैसे पुस्तक के बारे में बताया तो 1 बार गुरु भारज ने जू में भाग ग्लास दिया को पहले की बात है 7 बार और भाग क्लास लेने के बाद महाराज अपने रूप में अपना डीजोएसिकररहे थे सवेरे 11 बजे की बात है तो मे गया महाराज के पास मिले के तो मैंने कहा महाराज आज आपने जो भागवत में बताया कि प्रभु वाजी ने बैक टू वर्ड वैक्सिन 1900 चौवालीस में चालू किया था सो महाराज बरसी कर रहे थे अपने डिजीज बोले हाँ प्रवाल जी ने भक्ति सिद्धांत से छात्रों के अभिभाव दिवस से ये चालू किया था। तो मैंने कहा महाराज जो 1900 चौवालिस तो आपका पता के साल है तो महाराज पूरा भी स्टेटमेंट नहीं सुने और तुरंत बहुत देर नहीं इसमें कोई कनेक्शन
नहीं है
उहोंने बोला महाराज तो दिख रहा है आप स्तर कारण आपका प्राण है, आपके प्रणाम पुत्र पुस्तक की तरह है रहुबाद के लिए आपने यह सेवा सबसे ज्यादा की मार नहीं, ऐसा कोई कनेक्शन नहीं है। तो मैंने कहा महाराज कुछ कनेक्शन तो होगा आप नहीं बता रहे ी लेकिन 1900 चौवालीस का कुछ कनेक्शन है तो फिर महाराज मुस्करा रहे और बोले जाओ और तुम इस भक्त को हम देख सकते हैं कि 1900 चौवालिस जिस साल महाराज प्रकट हुए उसी साल रॉ का पहला अपना पुस्तक वितरण चालू किया। अब पूरा जीवन आप देखिये, महाराज का बुक डिस्ट्रीब्यूशन कुछ बोलने की जरूरत नहीं पड़ता है। इस बात का जैसे भातररोरनिमाभी है वो
भी
महाराज के नाम पर समर्पित है। इस बार तो भारत हम भी महाराज के नाम पर समर्पित है। और हर बार कुछ न कुछ नया न करते थे। महाराज ने प्रपा से कहा कि हम लोग बेटी के पास फलोरमाउडेलहै, वहाँ पे। हमलोग 1 दुकानें हैं, उन दुकानों के थ्रू डिस्ट्रीब्यूशन करेंगे तो प्रोफ राव तो अलग अलग तरीकों से बुक डिस्टबशनकाट्राइ करते है। लेकिन फिर प्रॉपर ने कहा मैं बुक सोल्ड। वाललथुजजेटनोटिस। उस तक का वितरण तब होगा जब भक्त उत्साहित हो गए। उसके बाद देखिये हर साल महाराज व्यास पूजा से लेकर जनवरी तक आप जितने भी लेक्चर महाराज की किसी भी साल में उठा लीजिये, उस पर वितरण केंद्र होगा। अभी भी व्यास पूजा के सा अभी मेरा मन आने वाला है, व्यास पूजा से चालू कर मेरा ने वाला है जरूरी। तो इसी के साथ हम अभी रिक्वेस्ट करेंगे। इस दामोदर 2 रेप्रो दामदरदवररिपरो महाराज के साउथ और वेस्ट इंडिया के सर्वेंट रावली सर्वे चाहे मौके में हो, मीरा रोड खारगर होना जाए, चाहे गुजरात जाए, महाराज उरी ट्रीटमेंट के लि साउथ हिना। कभी कभी माया भूल भी जाते थे। ये पूरा क्षेत्र जो है दर्शक लोगों के साथ महाराज की सेवा में रत रहे हरेश पिछले कितने महीने।
लगभग
डेढ़ साल तो लगभग अंतिम का जो डेढ़ साल था। महाराज ने तो दिल्ली ही बुला लिया। तो दिल्ली में महाराज के साथ सेवा करते थे और राज महाराज के भी थे।
तो
1 बार बता देता हूँ 2012 में 2011। तो मैंने गुरुवार से कहा कि महाराज जयपुर में प्रचार करते और आप जयपुर में आने वाले हैं। तो महाराज रिक्शा लेने आए थे जयपुर में और हम कॉलेज पीसी मेरे साथ 22 रिपोर्ट लागू जाते थे। तो 1 दिन हम सवेरे उठे महाराज के पास। जब पहुंचे दोहरता समय था तो दोनों
के पास स्वेटर नहीं था।
जब मेरे पास था 1 रोज ट पहनते नहीं। तुम्हारा ने मुझे कहा कि इसके पास स्वेटर नहीं है। और जनवरी का मौसम था इसको स्वेटर खरीदते हो, देश माराज बोले, आज खरीदते तो अभी खरीदे तो पैसा दे देता। तो भारत नहीं है, इसको स्वेटर खरीदते हो। तुम्हारा शुरू से मैं देख रहा हूँ। और कई बार अभी कुछ फैनेक बोले कि दामोदर ज नाइस बॉय को डेडिकेट की सर्विंग में। तो महाराज बहुत प्रेम करते थे, बहुत सेवा भी किया जोड़े और हम सुनेंगे उनके बुक से महाराज के कुछ दिन
है, बहुत सारे सीनेट डिवोटीज है तो मैं ज्यादा नहीं बोलूंगा मैं 1 चीज ऑबजर्व जैसे आप शब्द देखे हैं कि महाराज हमेशा मंगलटी के लिए बहुत ही इगरनेस रहते थे कि जैसे ऐसे टाइम मिलेगा वो जहाँ पर भी जाते थे, महाराज फर्स्ट प्राइवेट देते थे। मंगल हारती में ऑल्टर मे डीटीएस का सेवा करना तो लास्ट लार्ज। कुछ समय से महाराज के हेल्थ डाउन होने के कारण महाराज अंदर से चाहते थे कि ऑल्टर जाय सेवा करे लेकिन हेल्थ साथ ना देने के। कारण डॉक्टर और हेल्थ यीशु होता था कि महाराज जब मंगला के लिए प्लान करके सोचते थे तो रात भर घड़ी देखते थे, पास में 1 अलराम घड़ी होता था, उसमें लाइट भी होता था। तो महाराज को जब टाइम देखना होता तो अपने आप को घड़ी ऑन करके लाइट देखते थे और टाइम देख के फिर उसके अकॉर्डिंग लोग कितना रेस्ट करना है विचार करते थे। तो लास्ट महाराज सालों से ही घड़ी को साथ में लेकर रेस्ट करते हैं, चाहे डेरेस्ट हो या नाइट, रेस्ट हो तो लास्ट लार। कुछ समय से महाराज जी हेल्थ साथ ना देने के कारण डॉक्टर और टेम्पल सीनियर लीडर्स, सब लोग फोर्स के महाराज को महाराज मंगला र्ती स्किप करिए अगर आपको आरती जाना है तो दर्शन आरती जाइए लेकिन मंगलाआरती मत जाइए क्योंकि मंगल आरती प्लान करे सोते है तो पूरा रात भर महाराज सो नहीं पाते थे हर आधे घंटे में महाराज घड़ी देखते थे तो उसमें महाराज का नींद भी नहीं होता था और दिन में भी महाराज प्रयास करते थे कि कम सोए और अपना आपको बहुत बिजी रखते थे तो उसमें बहुत हेल्थ इशू होता था। तो महाराज बहुत बार ऐसा हुआ कि साथ न हेल्थ साहब में न देने के कारण भी महाराज उड़ जाते थे और बिफोर फोर थर्टी रेडियो के रूम से निकल जायेंगे आरती करने के लिए लेकिन ऑल्टर तक नहीं पहुंच पाते थे तो स्लो चलने के कारण मार्ज लेट हो जाते थे, कभी कभी थोड़ा विकनेस के कारण वापस आ जाते थे। रूम में बोलते थे कि मैं ऑनलाइन देखूंगा, टीवी, टीवी, टीवी देखूंगा तो महाराज हमेशा प्रयास करते थे मंगलाआरती डीटीएस का सेवा करना। तो आप आप लोग सब देखते रहेंगे कि 1 महाराज होने के बाद 1 वीडियो आया था कि महाराज लेटे हुए आरती कर रहे तो वो दिसंबर महीना था डेली टेंपल में महाराज हेल्थ इशू के कारण हम लोग 1 टीम था कि कोई न कोई महाराज रेश करते थे, कोई महाराज जी के साथ कोई न कोई रहेगा डियूटी क्योंकि महाराज डिवोटिज से हेल्प लेना अच्छा नहीं लगता था उनको वो वो खुद अपने आप उठने का प्रयास करते थे। कुछ भी उनको रिक्वार्डमेंट होगा तो खुद उठ जाएंगे लेने के लिए तो थोड़ा सा दिक्कत होता था। तो हम लोग 1 रूटीन बनाये थे, कोई न कोई महाराज चाहे रूम में लेटे बैठे किसी भी तरीके से महाराज के साथ कोई होना चाहिए। तो उस दिन ऐसा हुआ था कि महाराज 1 दिन मेरा सेवा था, मैं बैठा था महाराज जी के साथ महाराज रेस कर रहे थे तो डे डे रेस था वो हालांकि वो डेरे उनको वो नीचे रहे थे लेकिन हेल्तसूके कारण थोड़ा सा रेस्ट करते थे और सोने जाने से पहले बोले कि मैं भी बहुत थक गया हूँ, मैं 2 घंटा रेश करूंगा तो हमने रेस करी और थर्टी फोर्टी मिनट में महाराज एकदम उड़ जाते थे। बोले मेरा रेस्ट हो गया तो 1 बार हमारा ऐसे रेस्ट करने गए और मैं जब महाराज देश मोबाइल को सालनकर रख देता हूँ या तो साथ में नहीं रखता हूँ मोबाइल को तो सडनली
महाराज
आरती करने के पोज में से हाथ हिलाना चालू किया। तुम्हें 1 दिन ऐसे ऑबजर्व क्या मैं ध्यान से देख रहा था, महाराज कर क्या रहे। तो देखा महाराज पूरा आरती कम कम समय में पूरा आरती के ऑफर के लिए सब कुछ डीटीस को तो लेकिन मेरे पास मोबाइल नहीं था उस टाइम तो हमने सोचा कि अरे मैं रिकॉर्ड कर लूंगा किसी को दिखाऊंगा नहीं लेकिन एटलीस्ट मेरे लिए 1 प्रेरणा का स्रोत है कि हम लोग सेवा से भागते हैं और गुरु रेस करते करते भवन का सेवा करना चाहते हैं। ये इंटीमेंट वीडियो था तो में सोचा किसी को दिखाऊंगा नहीं लेकिन मैं उसको रिकॉर्ड नहीं कर पाया, फिर सेकेंड डे फिर और 1 दिन में देखा कि महाराज सेम रेश्कनेटाइमऐसे आरती कर रहे थे। तो फिर मैं सोचा इसको मुझे रिकॉर्ड कर लेना चाहिए। तो मैं मोबाइल लेकर बैठा हूँ, चाहे आज महाराज ऐसा कुछ एक्टिविटी करे न करे, मोबाइल तो साथ साथ में रहे। मेरे तो मोबाइल लेकर बैठा और फॉरॉर्चुनेटली महाराज जैसे मोमेंट स्टार्ट किए तो तुरंत वो फिफ्टी सिक्स सेकेंड का वीडियो था, वो टोटल तुम्हारा से धीरे धीरे चालू किए तो तुरंत वीडियो ऑन कर लिया। उसमें महाराज अगरवत्ती भी दिखाती है, लैम भी दिखा दिए। इवेंट उनको ये रुमाल ऑफर करना था तो उनको ऐसे ऐसे धुंधके देखे देंगे वीडियो में जो कपड़ा ब्लांकेट उड़ाया गया था उसको ही पकड़ के महाराज रुमाल की तरह ऑफर कर लिया भगवान को और चामर भी कर लिए, सारे मूवमेंट कर लिए ये देख के मैं वीडियो बना रहा था और मेरे आंखों में आंसू आ रहा था। उस टाइम इतना इमोशन था साथ में कि मैं सोचा कि किसी को दिखाऊंगा नई वीडियो में यह मैं रोज वीडियो को देख रहा था सिर्फ 1 रीसेंट मायापुर जीबी सी मीटिंग में 1 सीनियर रिव्यू को दिखाया था। ऐसे ही कुछ मंगलार रिलेटेड कुछ बातचीत हो रहा था आपस में, तो मैंने सोचा कि वो डेबू डी बहुत रिक्वेस्ट की कि वीडियो मुझे भेज दीजिए, बोला नहीं दिए, वीडियो नहीं भेजूंगा मैं। फिर अगर घूम फिर के अगर महाराज के पास कोई आ गया दिखा दिया। तो मुझे मुझे डांटेंगे तो मैं दिया नहीं था लेकिन महाराज सारी छोड़ने के बाद फिर मैं वीडियो दिल्ली मंदिर में ऋषि भेज दिया। फिर वो चारों तरफ डिवोटीस के पास आ गया तो उसमें में बहुत 1 लेसन मुझे भी मिला और उस वीडियो के माध्यम से बहुत सारे भक्त भी 1 प्रेरणा है कि महाराज हमेशा डीटीस का, हम सोचते हैं कि ये मारबल की मूर्ति है, एटलीस्ट मेरे मन में है, ऑल्टर खुलता है तो रोबोट की तरह प्रणाम करके उठ जाते निकल जाते। फिर टेम्पल ऑल से मार्स का डीटीसकसाथतैता रिलेशन था कि वह सोचते थे कि साक्षात कृष्णा सामने खड़े हैं जो डिवोटी मारस के साथ ऑल्टर में जाते थे सेवा करने के लिए ऑबजर्व किए रहेंगे। मंगलाआरती के बाद ऑल्टर बंद होता है। महाराज हर 1 डीटी के चरण छूते थे, चाहे छोटी, डीटी हो, बरी डीटी हो, सब का चरण छुएंगे और स्पेसिफिकली महाराज हनुमान जी के चरण को बार बार छूते थे। तो बहुत पेरना है। तो महाराज के एटलीस्ट मेरे लिए मेरा तो साधना इतना स्ट्रांग नहीं है लेकिन महाराज मेरा इतना रेडिंग केयरिंग ठीक नहीं है। लेकिन महाराज अपने जीवन में ऐसे आचरण करके शास्त्रों के जो सिद्धांत हैं वो सिखा देते हैं। तो अगर महाराज के जीवन को जितना ज्यादा ऑबजर्व करेंगे उतना हमें भक्ति में टिके रहने के लिए हमें 1
हेल्प
मिलेगा हरे कृष्ण
हरे कृष्ण बहुत बहन दामोदर कर रही हो। तो कई बार हम लोग इनको दामोदर वो बोलते हैं। रामोदर 1 बार महाराज ने टीवी के बाद पूरा नाम क्या है दामोदर गौरी इतना सुन्दर नाम है तुम लोग आज क्यों नहीं महाराज कैन के साथ विशेष रस्हैऔर जो बता रहा था आरती का सो गुरु महाराज रेस्ट करते हुए भी सेवा कर रहे है और हम सेवा करते हुए सो जाते हैं, सेवा छोड़कर के हो जाते हैं, सेवा करते करते ही सो जाते है। ये देखे हमको कहाँ पहुँचना। तो उत्साह जो बताया इतना उत्साह ये तो अभी कोविद के पास थोड़ा मारकर, थोड़ा डाउन हुआ नहीं तो कोविद के पहले प्रति को बता 1 बार महाराज का 1 सफल होता है जो बाहर बैंक कहीं भी ट्रेवल करेगी तो सफल करे तो 1 सफल रहता तो ऑर्डर की तरह जाते तो बैठे रहते है तो 1 बार जल्दी से तैयार हो के महाराज नहा धो के, पूरा तैयार हो के और कुछ मिनट बचे के मंगला और जल्दी से पैर महाराज ने उस चप्पल में डाल दिया जो बाहर
थे
हमारा होगा तुरंत के अंदर फिर से आए नए कपड़े में है। फिर वो ऑर्डर वाला जोसफल के पास कितना का डेडिकेशन था। मुझे तो बताया था कि उनके साथ असिस्ट करने के लिए जा रहे थे और ऑल्टरपेजानाथाबंगलाज के महाराज को सिस्ट कर रहे आ रहे थे। उन्होंने कुछ बर्तन चालू कर दिया, कुछ जादू किया महाराज तुम तो लगा जितना उनका जो क्लेमिस इतना उत्साह था सेवा के और इतना सफाई से सेवा करेंगे आप इसको थोड़ा पढ़ सकते हैं। राहो पंडित जो वो जब कुछ ऑफर करते थे भगवान को तो आप उनका सफाई का सैंडल देख लीजिये, महाराज 1 बार उन्होंने बोला है अपने को किनारे।
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