Haridwar Yatra || Day -2 || HG Mohanrupa Prabhu || 2023

In the second day of the Haridwar Yatra, the speakers discuss the nature of the guru‑disciple relationship, emphasizing that a true guru remains eternally present and continues to guide devotees across lifetimes. They stress the necessity of associating with sincere devotees (satsang) to stay on the guru’s path, and explain that initiation (diksha) is granted only after a rigorous, multi‑level interview process that balances the guru’s compassion with strict standards. The talk highlights the importance of regularly listening to the guru’s lectures, reading the many books being published, and using modern media (e.g., YouTube) wisely. Logistical details are given about the distribution of prasadam and the schedule of events, underscoring the need for orderly service. The speakers also reflect on the broader spiritual framework in which the guru’s instructions encompass many teachers, and they address challenges faced by seekers in contemporary life, urging disciplined practice, service, and devotion.
Chapters
ram ram harhhrksnahrrsnakrshna krna hari hari hari ram harr रमा राम राम हरे हरे हरे नाहरे कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे हरे कृष्ण कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम राम राम hrhrकरेकृषणहरharhre rama हरे राम राम राम हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम राम राम हरे हरे कृष्ण हरे कृष्णा हरे राम हरे राम राम हम राम हरे हरे हरे कृष रा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रा हरे रामा रामा रामा हरे हरे कृष्ण हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे ram hare rama rama rama nhrsahrarama ham rama hare hare hare hare ksa ksa ksa haahr rare ram ram ram hrहरकृष्णाहरे krsna krsna राम हरि कृणाृाकृणाकृहरह harda hrीबhraरर हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा रामा हरे हरे का कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे
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कृष्ण हरे
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हरे राम हरे
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हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा हरे रामा हरे हरे राम राम राम राम हमारे निताई गोरा गोरा ताई गोगो निताई गोरा गो ताई गोरंगो गोरहरीगोगोरहरीगोरं गो गोरहरीतईगोरगोगर सचिन गोरी सचिन गोरहरि गोहरी बोलो या सचिन गोलाहरिताईगोरागो ताई गोरा गोरा गोरा रा गोलहरीगोलहरीगोगोहरी गाय गोहरी हरे हरे हरे हरे राम हरे राम राम हरे
राम
हरे हरे हरे हरे राम हरे राम
हरे राम
राम राम राम राम
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राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे गौर हरि बोल गोल हरी बो गौर हरी बोल गौल हरी बोल हरी बोल गौर हरी हरी बोल हरी हरी हरी बोल हरी हरी बोल हरी हरी
हरी बोल
हरी बोल हरी बोल हरी बोल हरी हरी हो ही हरि हरि हरि हरि
हरि हर कण
हर राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे रे का हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे हरे हरे राम राम राम हरे कृष्णा रे किश्ना हरे राम हरे राम राम राम का ा हरी हरी बोल हरी बोल हरी बोल हरी बोल हरी बोल हरी बोल हरी हरी बोल हरी बोल हरी बोल हरी बोल गुरगुर गुरु गुरु सबपासपाबासासबपा गोर प्रे निताई गौर प्रेमललदेनिताईगोर प्रेम hरhरबोhre
maganadmrndasya gana janachlagyacsoro s m se gुdbenamaश्री चैतन्य मनोभिश्रम stabitmenbutleswim ruphkdamamdadati sवbdaधगmwncापतरु भ्या कृपासंधुभ्य बचा patita la babli wsbebonmonmj श्री कृष्ण चैतल्या प्रभु ने t्यालदश्रीअदवधगदाधर शिवा शादी गौर भक्त वrindaबोlेhरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा
हरे हरे हरे राम हरे राम राम
राम हरे हरे nw msubdssaudesremde sau d sremdebactivedan samiti namaste sarsudegoruani nivisesuadiasa to top hot अंध शेष गुणानुवाद करते रहते हैं अपने हजारों मुखों से, फिर भी वो गुणानुवाद है, अंत नहीं होता है इस कारण से भी उनका नाम अनंत है। जिनके अनंत मुखों से भगवान का गुणगान होता है, अनंत काल तक इस वर्षों का गुणगान ही है। वो गुणगान में कंजूसी नहीं करनी चाहिए। लेकिन क्या है, दुर्भाग्य वर्ष हमारी कोई रति है ही नहीं। गुरु में जब मैं प्रवचन देने वाला हूँ, तो सबसे पहले मैं आपको स्पष्ट बता देना चाहता हूं। अगर गुरु महाराज का गुणगान कर रहा हूँ या उनके मूड के बारे में बता रहा हूँ, तो इसका मतलब नहीं। मैं बहुत शर्नागत हूँ, इसलिए बता रहा हूँ। मुझे ये टॉपिक दिया है, इसलिए मैं बता रहा हूँ। और इसे बताने से मेरा शुद्धिकरण होगा। इस पर मुझे विश्वास है, मैं गुरु महाराज का गुणगान करूँ, उससे मेरी चेतना शुद्ध होगी। मैं गुणगान कर रहा हूँ, इसलिए मैं बहुत शरणागत हूँ। इस कारण से नहीं है। तो जो भी कुछ सुना है, मैंने जो कुछ मैंने देखा है, जो कि गुरु महाराज के सानिध्य में रहकर सीखा है, वो ही मैं बताने का प्रयास करूँगा। इसको अन्यथा मत लीजियेगा। ये मत सोचियेगा, ये भ्रम में मत रहिएगा। प्रवचन के दौरान, यह प्रवचन के बाद गुरु महाराज के लिए बहुत समर्पित है। ये, इसलिए इतना कुछ बोल पाए नहीं। वैसे तो हमारे पूरे देश में अनेक कथा वाचक हैं, अनेक कथा करने वाले लोग हैं, लेकिन हो सकता है कि वो समर्पित न हो। कथा बहुत अच्छा कर रहे हैं, इसलिए हाँ, लेकिन जो बोला सच बोलूंगा सच के लावा से महाराज के है, जो महाराज के बारे में और अधिक जानते हैं, उनके सारे मुसा दिख रहे हैं, और उनका जीवन और समर्पित है। बहुत सारे। वश मेरे सीनियर था। टॉपिक मिला मुरली के शू। तो मेर लगा ये टॉपिक मुझे क्यों दिया। के बहुत सारे सीनियर डिवोटीज हैं, और अधिक समय उन्होंने बताया, गुरु महाराज के साथ उनके पास और अधिक अनुभव होगा, साक्षात्कार होगा। लेकिन क्योंकि आज है मेरे लिए, और मुझे लगता है कि ऐसा बोल कर, मैं अपने आप को शुद्ध करूंगा, इसलिए मैं कह रहा। तो ये पहले से मैंने आपको क्लियर कर दिया है? प please dont be lusin कहने के लिए बहुत सारी बातें हैं। गुरु महाराज के बारे में, कुछ उनकी क्वालिटीज के बारे में है, कुछ उनकी एक्टिविटीज के बारे में है, कुछ उनकी शरणागति के बारे में है, और कुछ उनके मूड और मिशन में है। तो गुरु मार के बारे में आप सब जानते ही है। आप में से बहुत सारे भक्त हैं, जो महाराज को जानते हो, दिशा जरूर ले ली हो आपने। लेकिन व्यक्तिगत सम्बंध इतना नहीं बन पाया है। और इसलिए देखिये, हमारे शास्त्रों को 3 भागों में विभाजित किया गया। इसमे eco tora, sony, sony to वैदिक शास्त्रों को 3 भागों में बांटा गया है। संबंध, अभिदयऔर, प्रयोजन, सम्बन्ध के बारे में जानना कि मैं कौन हूँ, भगवान कौन है, मेरा भगवान के साथ सम्बन्ध क्या है? प्रकृति का भगवान से क्या सम्बन्ध है, जीव का प्रकृति से क्या सम्बन्ध है, जीव का भगवान से क्या सम्बन्ध है? तो ये सब सम्बन्ध जाता है। अभय का मतलब है ज्ञान प्राप्त करने पर हम कर क्या रहे हैं। फिर वो ने तो उनकी सेवा में लगना होता है। उस भगवत प्राप्ति को भगवत प्राप्ति के लिए जो विधि है, जो प्रोसेस है, वो है विधय यानि की सेवा। और ऐसी सेवा करने पर जो उसका फल प्राप्त होता है, उसको प्रयोजन कहते है। तो सम्बन्ध ज्ञान बहुत जरूरी है। बिना ज्ञान के भक्ति होती नहीं है। बिना सम्बन्ध ज्ञान के भक्ति करना कठिन है। इसलिए जानना जरूरी है। मैं कौन हूँ, भगवान कौन है? उसी तरह से अपना जो सम्बन्ध ज्ञान है, उसको और मजबूत करना बहुत जरूरी है। क्योंकि हमारी सेवाएं जो सम्बन्ध ज्ञान के पर आधारित है। देखिये, शास्त्र आधार है। गुरु साधु और शास्त्र आधार है। हमारी सेवाओं के लिए। हम जितनी भी सेवा कर रहे है, उसका 1 आधार है, उसका 1 फाउंडेशन है, उसका 1 बेसिस है। और वो गुरु के द्वारा निर्धारित है। गुरु, साधु और शास्त्र के द्वारा निर्धारित। हमारे आध्यतमजीवनमें गुरु का बड़ा महत्व है। शिलरुगुस्वामी ने 64 भक्ति अंकों का वर्णन करते हुए पहले जो अंग है, पहले जो अंग है, 5 यह लीजिये, उसमें शिलरुपगोस्वामी ने गुरु की ही चर्चा की है। भक्ति का शुभारम्भ जो है, उन्होंने गुरु से ही किया है। आद गुरुपाद, आश्रय आदव का मतलब सबसे पहले क्या करना है? गुरु का आश्रय लेना है। फिर क्या बोल रहे हैं श्री कृष्ण। दीक्षादि शिक्षण, उनसे, शिक्षा दीक्षा ग्रहण करना, शिक्षा ग्रहण करना, फिर दीक्षा ग्रहण करना, विश्रम भेन, गुरर सेवा और शिक्षा दीक्षा लेने के बाद बहुत ही क्या है। विश्रम भेन, गुरल सेवा, वित फेतनकॉन्फिडेंस और उसके बाद का बताया गया है। सद धर्म परीक्षा यानि की नहीं साधु मार्गाणुगमनम, साधु मारगाणुगमनम का मतलब होता है कि पूर्वी आचार्य का अनुगमन करना, प्रमाणिक गुरु के माध्यम से बताया गया। सद धर्म परीक्षा। तो इस तरह से चौसठ भक्ति के अंग है। तो सबसे पहले बताया की शुरुआत जो है, वो गुरु से ही होती है। शिक्षा गुरु, दीक्षा गुरु को 1 ही दर्जा दिया गया है। तो इसलिए हमारे शास्त्र जो है, बहुत इसपर जोर देते हैं। और हमारे इस संप्रदाय में श्री ब्रह्म। मध्य गौरिया सम्प्रदाय में गुरु गाद बहुत ही महत्व बताया गया है। और इसलिए उनके प्रति अटूट श्रद्धा, उनके प्रति शरणागत होना, आध्यात्मिक जीवन के लिए अतिआवश्यक है। तो इसलिए ये गुरु तत्व को जानना बहुत जरूरी है। उस दिन किसी ने बताया कि गुरु महाराज को सेवेंटी, जब व्यास पूजा दिल्ली में सेंट नाइन कैसे हो सकता है गुरु मारा स्कॉल में ज्वाइन किया, लेकिन नाइनटीन सिक्टी एट में दूर निश्चित रूप से ज्वाइन किया होगा। लेकिन गुरु तत्व जो है वो इंटरनल प्रिंसिपल है। गुरु तत्व जो है वो किसी काल और परिस्थिति के पर निर्भर नहीं है, टाइम और स्पेस से बाउंड नहीं है। गुरु तत्व की नाइनटीन सिक्स्टी एट में गुरु तत्व का शुभारम्भ हुआ। तो वो गुरु तत्व है, वो शाश्वत है। जिस दिन गुरुदेव प्रमाणिक गुरु जो है, इस धराधाम में, इस चरण रखते हैं बद जीवात्मा का उद्धार करने के लिए, वो ही दिन श्री व्यास पूजा का दिन है। ज्वाइन करने के बाद ही व्यास पूजा का दिन माना जाए या तिथि माना। इसलिए हम कहते हैं सेवेंटी नाinv्याsूjा गुरु 1 तत्व है। तो इसलिए इस बात को बड़े से समझना है, बहुत गहराई से समझा है। इसलिए भी है जन्म जन्म प्रभु से, प्रभु, से सेवेंटी नाइन। तो ये कहने वाली बात है जन्म जन्म तक संबंध हमारा, लेकिन अगर भरी दृष्टि से देखा जाए तो हमारे लिए जब से प्रकट हुए हैं वो, तब से तो व्यास पूजा ही है। हाँ हम मिले नहीं उनसे, ये हमारा दुर्भाग्य है। तो कहने का मतलब है। तो इसको बहुत अच्छे से समझना है। तो प्रमाणिक गुरु जो है, प्रमाणिक गुरु परम्परा में आते हैं। और गुरु परम्परा में आते हुए। प्रमाणिक गुरु जो है। परम्परा के जो शिक्षाएं हैं, उन शिक्षाओं को प्रस्तुत करते हैं। आने वाले भक्तों के लिए। परंपरा का अर्थ क्या है? समझेगा परम्परा का 1 अर्थ यह भी है कि जो गुरु को सेवाएं मिली है अपने गुरु से या गुरु परंपरा से, उन सेवाओं को जारी रखना। वो सेवाएं जो है नित्य सेवाएं हैं। ये प्रोग्राम है हमारा नित्य सेवा करके। लेकिन जो गुरु की सेवा है, वो भी नित्य सेवा ही है। तो कहने का अर्थ ये है शिलप्रहोपपाजके जाने के बाद जो जो सेवाएं शिलप्रवोपपाजी ने बताए अपने शिष्यों को, परंपरा से, उन शिक्षाओं को प्राप्त करते हुए एवं परम्परा प्राप्त राज रिष्यों। जो शिक्षाएं शिलप्रहोपपाज ने अपने शिष्यों को दी, शिष्यों ने क्या किया, उसको शिरोधार किया और शिक्षाओं को आगे बढ़ाया। यानि कहने का मतलब है। यह शिष्य का परम कर्तव्य है। जो शिक्षा गुरुदेव से प्राप्त होती है, वो सेवाएं, वो शिक्षाओं को आगे बढ़ाना बहुत जरूरी है। जीवन काल में जब तक वो जीवित है शिष्य, तब तक तो उसको स्वयं करना होगा। जो शिक्षाएं उसको प्राप्त हुई है, जो आगे उसको प्राप्त हुई है। लेकिन जाने से पूर्व, इ, इस संसार को छोड़ने से पूर्व, उस शिष्य की जिमेदारी बनती है। जो भी सेवा, जो भी शिक्षाएं, उस शिष्य को अपने गुरु से मिली है, उन सेवाओं को आगे बढ़ाया जाए। समझ के बारे में बहुत जोर दिया और उसके बाद मंत्रों का निर्माण किया, प्रचार के बहुत सारे कार्य किए। तो जो जो शीला परवाज किया, वो सब हमारे गुरु मारा ने किया। अब गुरु महाराज जो है, ऐसी व्यवस्था करने जा रहे हैं हमारे लिए की हम जो भक्त हैं, हमारे ऊपर जिमेदारी बनती है। जो जो सेवाएं, गुरु, महाराज ने हमारे निर्धारित किए हैं, उन सेवाओं को हम बनाये रखे और आगे बढ़ाये, उसको रोके नहीं, वो सेवा बंद नहीं हो सकती, हम रहे, न रहे, वो सेवा कभी बंद नहीं हो सकती। हम बीमार रहे, मर भी जाए, कुछ भी हो जाए। कृष की सेवा, गुरु की सेवा किसी भी काल, किसी परिस्तिथि में बंद नहीं हो सकती है, ये हमारी जिम्मेदारी है। परम्परा के लिए। तो परंपरा का मतलब यह है। यह बहुत बड़ी बात है। परंपरा की बड़ी जिम्मेदारी है। इसलिए और विशेष रूप से जो आचार्य हैं, गुरुजन हैं, उनके ऊपर बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है। तो इसलिए पूरे सम्प्रदाय की जिम्मेदारी खुशी, पूरे परम्परा की जिम्मेदारी है, उस परम्परा की शिक्षाओं को, उन आज्ञाओं को लेकर, उसको आगे बढ़ाना और भक्तों तक पहुंचाना तो ये बहुत बड़ा कार्य है। तो इसलिए जब मूड की बात करते हैं तो जो मूड हमारे गुरुदेव ने हमें दिया, यह गुरुदेव को शिलर दिया, वही मूड को हमें ट्रांसफर करना है। आगे हम अपनी नई परम्परा नहीं शुरू कर सकते हैं। अगर हम नई परम्परा शुरू करेंगे तो वह परम्परा नहीं है। तो वो कुछ और ही है। फिर इसलिए क्या है जो हमें बताया गया है, वो ही हमें आगे बताना है। भले ही अच्छा न लगे, हमारे अच्छा और बुरा लग रहा है, ऐसा कुछ नहीं होने वाला है। हमें वही करना है जो हमें बता रहे हैं। तो इसलिए बहुत महत्वूर्ण बात समझने के लिए गुरु महाराज है, उनके ऊपर बहुत बड़ी जिमेदार है। नाइनटीन सिक्स्टी नाइन में प्राजी ने चिट्ठी लिखी थी। grow maharaj your duties to temples in इंडिया टॉपिक वाइज को जो है कैटेगराइज किया के मैं रहा हूँ जैसे मुझे समय जो है मुझे अनुमति देगा उसके अनुसार मैं बोल रहा हूँ। तो सबसे पहले मंदिर निर्माण की बात कर हे है। तो ट्रिपल कंसटरc्tनग्रु महाराज के ऊपर 1 बहुत विशेष प्रोजेक्ट के गुरु महाराज को शिलप्रओपबाजी ने कनाडा से वहां से इंडिया भेजा था और 1 चिट्ठी मे लिखा था ड्यूटी शकंटरेplesininडिय आपकी जिम्मेदारी है भारत में मंदिर का निर्माण करने के लिए। तो नाइनटीन सिक्सटी नाइन में गुरु महाराज को ये रेस्पॉंसिबिलिटी दी थी और उस जारी आज तक निभा रहे हैं। जैसे शील guru get many print box जब धन मिले पुस्तकें छापना राधा कुंड के तट में कहा था, 1935 में शील प्रहुपबाजीमृत्यु के शैया में भी थे। जीवन के अंतकाल में तो ग्रंथों का प्रकाशन कर रहे थ। तो कहने का मतलब ये है कि इतनी बड़ी जिमेदारी प्रउपाजेनेउस सेवा को, जिम्मेदारी को, आगे आने वाले भक्तों को सौंप दिया है। और वह जिम्मेदारी और बहुत अच्छे से गुरु महाराज आज तक है। तो हम टेम्पल की बात कर रहे थे। सबसे पहले टेम्पल के बारे में बताएंगे तो ये टेम्पल जो है मार ने बनाना शुरू किया। नाइनटीन सिक्स्टी नाइन से देखले 2023 हो गए हैं, मंदिरों की बाढ़ आ गई है, मंदिरों की बाढ़ आ गई है। जैसे की हमने सुना है बहुत सारे आचार्यों से यह भविष्यवाणी की जा रही है। गोल्डन एज शुरू हो चुका है और वो गोल्डन एज का जो उच्चतम सीमा है। यानि की हाइट में पहुंचने वाला। वो समय आने वाला है जब आप देखेंगे। पूरे भारत वर्ष में प्रत्येक शहर में इस काल का 1 मंदिर होगा, यह भविष्यवाणी सच होगी। देखना आप, मैं नहीं कह रहा हूँ ये परंपरा की भविष्यवाणी है। और प्रत्येक शहर में आपको कॉल का टेम्पल मिलेगा, इसका मतलब प्रत्येक शहर में आपको कृष प्रसाद भी मिलेगा। तो फिर ये फ्रेंड में लम्बी यात्रा करने की जो समस्या है कि प्रसाद की व्यवस्था नहीं हो पाती है, इतना सारा प्रसाद ले जाते हैं, रास्ते में खराब हो जाता है। बहुत सारी बातें आती है वो टेंशन ही खत्म हो जाएगी। क्योंकि हर स्टेशन में आपको गरम गरम प्रसाद मिल जाएगा। इस गान के माध्यम से ये देखना अगले 10 साल में देखना चमत्कार देखना और ऐसा हो रहा है अभी 300 से अधिक केंद्र हो गए। हमारे तो इस्कॉन इंडिया के ऊपर बहुत बड़ी जिम्मेदारी पाद ने गुरु महाराज को दी और बहुत सारे कंट्री है महाराज की जिम्मेदारी है। लेकिन भारत में यहाँ पर मंदिरों का निर्माण भी जो महाराज ने कराया है 11 करके 11 शहर में 10, 10 मंदिर, 12, 12 मंदिर वाह प्रभाव कोई कल्पना भी नहीं कर सकता है, जैसे श्िलप्रोपबाजीने दिल्ली में शिषीराधबारशार्थी मंदिर जहाँ पर है तो ये प्रहपबाजीकीइच्छा थी दक्षिण दिल्ली में 1 भव्य मंदिर का निर्माण। ऐसे बेहर थाल में जहाँ वे लोग वहाँ पर मल मूत्र त्यागने आते थे। और पीछे की तरफ देखा जाए तो पूरा स्लम एरिया था ऊबड़ खाबड़ जगह, पहाड़ी इलाका। ऐसे स्थान में मंदिर बनाना तो कल्पना से परे था जो गुरु मारा ने करके दिखाया घंटो घंटो, डी डे के ऑफिस में जाना, सुबह से रात तक वहां पर बैठे रहना, 11 काम करवाना और स्टेपल के प्रोजेक्ट को क्लियर करना, लैंड को क्लियर करना, कंस्ट्रक्शन के लिए ये बहुत बड़ी बात थी उस दिन दोनों, क्योंकि जानते है उन दिनों लोग हमें इस्कॉन के नाम से नहीं जानते थे ज्यादा हरे कृष्णा के नाम से जानते थे। ये स्कॉन जो नाम है, ऐसा सोसाइटी बहुत ज्यादा जो है, पॉपुलर हुआ है बहुत बाद में, लेकिन शुरू के दिनों में हमने ज्वाइन किया उस समय भी जो है लोग हर 1 कृष्ण के नाम से अधिक जानते थे तो स्कॉन के बहुत पॉपुलर वार्ड नहीं था सरकार की दृष्टि में, जैसे की आज आज तो थोड़ी सी भी खबर आती है सारे मीडिया वाले, सारे प्रेस वाले कवर करते हैं 1 ही झटके में पूरा 1 नेशनल न्यूज बन जाता है। जब भी इस्कॉन की बात आती है इतना बड़ा न्यूज है ज्यादा चारों तरफ वो इस्कॉन का गुडविल हो गया। लेकिन उन दिनों नहीं था इसलिए उन दिनों बहुत कठिन, बहुत तपस्या थी कोई भी कार्य करने के लिए, कोई भी प्रोजेक्ट क्लियर करने के लिए, टेबल कंस्टक्शन के लिए लैंड लेना बहुत डिफिकल्ट जॉब था। और हमारे महाराज को इतनी कठोर तपस्या करने प, बड़ी घंटो घंटो, उस ऑफिसर में जाके मिलना आपको बताए ग्र्मेंट ऑफिस में किस तरह से मुश्किल होता है, डॉक्यूमेंट्स को पेपर्स को क्लियर करना 1 फाइल, 1 ऑफिसर, दूसरा ऑफिसर, दूसरा ऑफिसर, तीसरे ऑफिसर, वो फाइल मूव करता है, जाता कहीं फाइल रुक जाती है। its a वेरी job तो कहने का मतलब ये है वो सब कठनाइयों से गुजरते हुए, अपना श्वास का ध्यान न रखते हुए, दिन रात 1 करते हुए महाराज ने सपना पूरा किया, इतना सुन्दर मंदिर का निर्माण करा दिया। आज दिल्ली एन सी आर में देखिये आप 14 से अधिक मंदिर हो गए हैं। ये सारे गुरु महाराज की तपस्या, उनकी तपस्या का फल। तो कहने का मतलब यह है कि केवल दिल्ली एन सी आर की बात नहीं करूंगा मैं, क्योंकि आप सोचेंगे दिल्ली से इसलिए दिल्ली के बारे में बोल रहे हैं। पूरे भारत वर्ष में हर जगह जाइए आप और मुंबई में जाइए चमत्कार। देखिये, मंदिरों का निर्माण ना विशाल तरीके से किया है। यही चाहते थे कई स्थानों में, जहाँ पर लोग ये सोच रहे थे कि छोटा मंदिर ही पर्याप्त है। बड़े मंदिरों का संभालना बड़ा मुश्किल है। देखिये, अब सच बताओ कई लोग हैं। उनका विचार रहा कि बड़े मंदिर नहीं बनाने चाहिए, छोटे मंदिर ही होने चाहिए। हमारा फोकस केवल प्रीचिंग में होना चाहिए। लेकिन आपको सच बता दूं मैं गेट के लाश में जो हम थे 119 में, तो संडे के दिन मैक्सिमम 300 या 400 लोग आते थे। आज हमारे राजा प्रत्येक दिन 8 से 10 हजार लोग आ रहे हैं। और रविवार के दिन 25 से 30 हजार लोग रहे हैं। अभी रादस्मेकेदिन 28 हजार लोग आये थे। बेकाबू हो गया भीड़ को का, क्राउड को कंट्रोल करना मुश्किल हो गया। क्लास में 300 या 400 लोग मैक्सिमम एकोमोडेट हो पाते थे। संडे के दिन सोच कर देखे आप। तो कहने का मतलब है वाटर्स बिग टेंपल। बड़े मंदिर का मतलब क्या है? बड़े मंदिरों का मतलब है बड़ा विचार। और अधिक से अधिक भक्तों को सेवा का मौका दिया जा सकता है। और बहुत सारी सेवाएँ होती हैं। यह गुरु महाराज जो तुने बड़े बड़े मंदिर बना रहे, जानते क्यों जानते, क्यों ताकि हम सब सेवा में व्यस्त रहे, कोई खाली न घूमे, इतनी बड़ी जाएगी, इतने बड़े बड़े मंदिरों को संभालने की, तब हमारे पास समय नहीं होगा। शांत बैठने का, कहने का मतलब खूब सारी सेवाओं का मौका दे रहे हैं। तो आचार्य लोग जो है गुरु परंपरा के, जो आचार्य हैं, वो आने वाले भक्तों के लिए सेवा की व्यवस्था करते हैं। कैसे इन भक्तों को व्यस्त रखे? हम नहीं। तो खाली, घूमेंगे। ये सब पाया के चुंगल में फंसे रहेंगे। इसलिए इनको बड़े बड़े मंदिर दिया जाए, जहाँ पर दिन रात चिंता करते रहे। इन मंदिरों को कैसे संभाले? हम लोग प्रचार कैसे आगे बढ़ाएं, भक्त कैसे बनाये ने कहा कि angzityforksnayou know why soda is mother of krishna, soda is mdr of krishna, because s rs anit for कृष्णा, क्योंकि यशोदा ने कृष्ण के लिए चिंता को खरीद लिया है, इसलिए वो कृष्ण की माता है। हमारे गुरु बार सी चिंता को खरीदते हैं, वो चिंता को खरीदते हैं, उस सेवा से डरते नहीं हैं। उनके बाद जितनी सेवाएं उतने खुश होते हैं, जितनी उनको सेवा दी जाए, उतने प्रसन्न होते हैं। अब टेम्पल से में सेवा की तरफ जा रहा हूँ। गुरु महाराज ऐसे सेवा का कितना महत्व देते। 1 बार की घटना बताता हूँ। 3 भक्त थे, 23 भक्त थे, वो बीमार थे, स्वस्थ स्वास सुनकर ठीक नहीं था। तो उस समय गुरु महाराज आए उनसे पूछा कि क्या हुआ आप सब और भक्तों के साथ, अन्य भक्तों के साथ प्रसाद नहीं ले रहे हैं, अलग से क्यों ले रहे हैं? तो उन्होंने कहा कि गुरु महाराज हमारा श्वास ठीक नहीं है, इसलिए क्योंकि हम दवा ले रहे हैं। तो प्रसाद भी हमारा अलग बना है। तो गुरु महाराज ने अगला प्रश्न पूछा, आप की सेवा क्या है। आप सेवा करते हैं कि नहीं? अब भी आप क्या सेवा कर रहे हैं? तो गुरु महाराज, अभी तो कोई सेवा नहीं है, हम तो केवल इलाज करा रहे हैं। गुरु बार उनको डायरेक्टली कुछ नहीं बोला। गुरु बार ने 1 ही बात बताई। उनको। उन्होंने कहा कि अगर मेरे पास सेवा न होना तो मैं जीवित नहीं रहूँगा, गुरुबार 1 ही बात बोली, मेरे पास सेवा नहीं होगी तो मैं जीवित नहीं रहूँगा। मैं आपको 1 घटना बताता हूँ। 1 बार गुरु मारे वृंदावन जा रहे थे, ये मिड नाइन्टीज की बात होगी। और 1 भक्त भी साथ में जा रहे थे। उनके। उन्होंने बताया हमें ये घटना जो बताई। तो रस्ते में 1 व्यक्ति ने किसी ने पत्थर मारा है। गाड़ी में लोग रस्ते में कई बार पत्थर फेंकते फेंकते हैं, पत्थर फेंका गाड़ी में, गाड़ी में पर लगी। तो महाराज ने कहा गाड़ी जल्दी तेज भगाओ रोको, नहीं तो वो जो भक्त था वो थोड़ा कंफ्यूज हो गया। उसने गुरु महाराज से पूछा गुरु महाराज आपने गाड़ी रोकने के लिए नहीं कहा। आपने कहा गाड़ी जल्दी भगाओ, जल्दी भगाओ। लेकिन जो भगवान के भक्त होते हैं, शुद्ध भक्त होते हैं। कृष्ण के, वो तो किसी से डरते नहीं हैं। लेकिन ऐसा लगा महाराज मुझे की आप शायद थोड़े डर गए हैं। इसलिए आपने कहा कि गाड़ी तेजी से भगाओ। तो गुरु महार ने कहा जानते क्या बोला। गुरु महार ने कहा कि मैं कृष्ण से सेवा नहीं लेना चाहता, मैं कृष से सेवा नहीं लेना चाहता, मैं कृष्ण की सेवा करना चाहता हूं। वृंदावन जब पहुंचे तो वृंदावन के एंट्रेंस में आप जानते हैं, हमेशा जाम लगा रहता है। और आजकल तो और ज्यादा वहां पर जैम लगा रहता है। ट्रैफिक इतना बढ़ गया है, दिल्ली के लोग वहां बस गए हैं या सड़कों में ही रहते हैं, गाड़ियां लेकर खड़े रहते हैं, एंट्री नहीं हो पाती है। भक्ति विदान स्वामी द्वार जहाँ पर उससे पहले लंबी लाइन लगी रहती है। अब तो पार्किंग भी पीछे की तरफ हो गई है। तो वहां खड़े थे और गुरु महाराज को आरती करनी थी। 7 बजे की कृष बलराम की, गौरा की आरती जो भी गौर आरती करनी थी महाराज को महाराज की सेवा करने दे। इतनी लालसा है, लोलुपता देख सेवा। सब बैठे हुए गाड़ी में महाराज के हाथ में डी डी इस का बैग था, मार के शिलाएं भी है, उसमें आपने देखा बहुत सारी शिलाएँ हैं। 1 बार किसी ने बोला कि गुरु महाराज आप विदेश जा रहे हैं, ये तो बहुत बड़ा बोझ साथ में हैवी, है जाना कैसे ले जाये। गुरु ने क्या बोला? गुरु ने मारा कहा मैं इनको नहीं उठा रहा हूं, ये मुझे उठा रहे हैं, ये मुझे लेके जा रहे हैं, मैं इनको नहीं ले। तो वहाँ पहुँचे तो लगभग सब 6 साढ़े 6 बजे का टाइम हो गया, 7 बजे आरती करनी के स्नान भी करना है, तिलक भी लगाना है। तो हम ने सोचा की गुरु महाराज शायद आरती हो जाएगी, मिस हो जाएगी। महाराज की। तो हम सब चिंता में पड़े करें। क्या ट्रैफिक था। महराज ने बैग उठाया अपने शोल्डर में रखा। दरवाजा खोला। गुरु महाराज कहते हैं मैं जा रहूं, आप लोग बाद में आ जाना। महाराज नीचे उतरे और उस भीड़ के बीच में ऐसे तीर की तरह निकले महाराज। उन दोनो ने ही। आप ने कई गुरु महाराज को देखो। उस समय देखा नहीं जब महाराज स्ट्रॉन्ग बिल्ट थे और महाराज का शरीर बड़ा स्वस्थ लगता था। एक्टर देखने में वो आप में से कितने भक्तों ने देखा। महाराज को बहुत कम भक्त पुराने। सभी भक्तों ने देखा है। तो महाराज कुछ समय ऐसी एनर्जी होती थी, उनके साथ चलना बड़ा मुश्किल होता था। ऐसे स्पीड से चले भीड़ को चीरते हुए मंदिर में प्रवेश किए। हमने सोचा महाराज, आरती मिस हो जाएगी। अब कहा महाराज पहुँचेंगे। क्यूंकी 6 बजकर 40 मिनट हो गए थे और 7 बजे की आरती है। जैस ही 7 बजे हम टेम्पल में प्रवेश किए, महाराज आरती कर रहे थे। समय
ने।
ये उनकी लोलुतताहैये, उनकी लाल सा है। सेवा करने। क्या लालसा है? क्या सेवा से अमेजिंग? क्योंकि सेवा से जब अटैचमेंट की बात आती है। तो 1 बार भक्त ने बोला कि महाराज मुझे वहाँ पर जो कनगरगेशनमुझे जिम्मेदारी देने हैं, मुझे हेड बनाना चाहते हैं। उस एरिया का। तो गुरु महाराज ने कहा कि हमें पोस्ट से नहीं, सेवा से अटैच होना है। मा ने का। हमारा अटैचमेंट जो है, उस सेवा से होना चाहिए, पद से नहीं होना चाहिए। क्योंकि अगर पद छूट गया। अगर सेवा से अटैचमेंट ना हो तो पछताओगे बहुत, तो सेवा से अटैचमेंट होगा। तो कोई भी सेवा पकड़। लोगे कभी दुखी नहीं होगे। अगर अटैच रहोगे पोस्ट है, कल पोस्ट नहीं रहेगा, फिर क्या करोगे। इसलिए गुरु महाराज की सेवा से अटैचमेंट बनाओ। इस सेवा से अटैचमेंट। क्योंकि सेवा करने वाला व्यक्ति जो है वो तो चलना मृत बाट के भी खुश रहेगा। इसलिए गुरु महाराज से गुरु महाराज। बहुत सारे मंदिर हैं, बहुत सारे शिष्य है। जहाँ भी जाते हैं आपके पास गाड़ियाँ आती हैं, आपको रिसीव करने के लिए बहुत सारी सुविधाएं हैं, ये सब न हो तो गुरु महाराज आप सेवा कर पाएंगे। उस समय कुछ कर पाएंगे। गुरु महाराज ने कहा की मैं जंगल में भी रह सकता हूँ, अगर मेरे पास तो ये उनका दाता, सेवा के लिए आप उसका अंदाजा नहीं कर सकते। क्या स्प्रिट था उनका। उन दिनों। मुझे याद है कि गुरु महाराज जनमाशपीकीदनराजहस बिहारी की मंगल आरती कर रहे होते थे और शाम को आते थे। राजा परसारी गौर आरती करते थे और कुछ लोगों से मिलकर वृंदावन जाते थे और अर्ध रात्रि को अभिषेक करते थे। वहाँ पर जनमाश विषय वृंदावन धाम में करते थे। 1 ही दिन में 3 थान कवर करते थे। गुरु महाराज से कई सालों ने देखा है। रशिया से, अमेरिका से मारा जायेंगे। रात को 12 बजे भी आयेंगे, जेटलैग का कोई असर नहीं पड़ता था, जेल जाने है या होता। अमेरिका आएंगे तो हफ्ता भर लग जाता है। सीधा आपको बैलेंस होने में। दिन का पता नहीं चलता, रात का पता नहीं चलता है। दिन में आप जो है, जागते हैं। सोते हैं और रात को जागते हैं। लेकिन गुरु महाराज जब आते थे, वहां से कई दूर कंटरी दूर देर से आते थे। और रात को अगर 12 बजे की फ्लाइट आयेंगे का विश्राम दिखेगा देखने के लिए। और सुबह आरती करते। मंगल आरती करते है उनको। और उसके बाद active राज। ऐसे कितने सालो साल घंटो घंटो। सेवा करते हुए उन्होंने बताया है। महाराज ने कहा कि प्राजी को मैंने वचन दिया है। विल कीप मूविंग मैं 1 जगह रुकूंगा नहीं। और आज भी महाराज उस बात को सच कर रहे हैं, साबित कर रहे हैं। स्वाद सुनकर ठीक नहीं है। उनका, स्वाद बहुत खराब है। लेकिन आप इंटरनल बिल्कुल क्या है? यौवन है वो बिल्कुल वो अपने सिद्ध रूप में है। जैसा कोई यंग। तो उसके बाद महाराज मुंबई गए गए, मीरा रोड गए, कारगर गए, सूरत गए दिन पहले। महाराज 12 यार मैं सूरज जा रहा हूँ। गाड़ी में बैठा हूँ। मैं कल दिल्ली पहुँचा तो कहने का मतलब है। क्या टाइट शुरू रखा है। आप भी मीटिंग में हैं। आईसीसी की मीटिंग चल रही थी। मीटिंग से बिजी होने के कारण। आज शुरू थोड़ा सा बदल गया। इमरजेंसी कॉल आया तो मारा उसमें लग गए। कहने का मतलब ये है महाराज सेवा के लिए इतने सख्त हैं उनको। जहाँ सेवा मिलेगी, वहीं जायेंगे। वो उनके बाद घूमने भरने का समय नहीं है। जो भी उनका होता है, कार्यक्रम व सेवा से उदेश्य होता है, का भी करते हैं। तो सेवा का उद्देश्य है। उसके पीछे सेवा का भाव है। सेवा मुख होकर खता करते हैं। अब देखिये उ्ोंनदेखाइतने सारे, भक्त बेचारे दूर दूर से आए हैं। इन सब ने सोचा होगा कि सुबह में प्रवचन दूंगा। तो महार ने कहा हम सब को संतुष्ट करने के लिए थोड़ा भूल कर ही गए। इतनी चिंता करते हैं वो भक्तों के लिए, आप उसका अंदाजा नहीं लगा सकते। मैं केयर की बात बताता हूँ, बात बताता हूँ। उनका कंपन जो ऐसा है सीमा से परे इतनी करुणा। इतनी दया है जो क्षमा करने की भावना, उनके ह्रदय में, वो शायद आज तक हमने देखा नहीं किसी में इतना वो क्षमा कर देते हैं। भक्तों को बस कई बार तो हम पढ़ जाते है की ये तो कुछ कुछ तो होना चाहिए, मैनेजमेंट ऐसा है, उसमें दिमाग कई बार सही से च। उसमें अगर दया का थोड़ा सा भी होगा। गुरुवार की बात को नहीं समझ पाए तो क्या हुआ कि कंपन आ? तो 1 क्यू ने उसमें शील भक्ति और ठाकुर ने जाने क्या लिखा है। उन्होंने लिखा है कि अपराधी को दंड देना, ये सिद्धांत है, अपराधी को दंड देना, ये सिद्धांत है, उससे बड़ा सिद्धांत है, उसको माफ कर देना। शिला भक्त ठाकुर ने लिखा है। और फिर उदाहरण देते हैं जीसस क्राइस्ट का, प्रलाद महाराज का और लामा चारे हरिदास ठाकुर का। इस मशीन ने कहा कि ये नहीं जानते हैं, ये क्या कर रहे हैं, ये ईश्वर हे परमपदम क्या कर रहे हैं, आप इन्हें क्षमा कर दीजिये। सूली में चढाया रहा है और उनको कह रहे हैं किसको कह रहे हैं। परमपिता ईश्वर आप। उनको माफ कर दीजिये, प्रलाद महाराज के हैं यानि कि नरसिंह भगवान से कह रहे हैं आप मेरे पिता का उद्धार कर दीजिये, उन्हें क्षमा कर दीजिये। नामा चारी हरिदास ठाकुर ऐसी जैसी बोला। 2 ने हमारी पत्नियाँ विधवा हो जाएंगी अब मर क्यों नहीं रहे हो। 22 बाजार में कोड़ों से पीटा है हमने आपको। तो नामा चारी ने कहा की आप लोग चिंता न करो, अभी गंगा जी में छलाह तो ये श्रम का हृदय होता है। वास्तव में हमारे हमारे गुरु महाराज करते हैं, हमारे गुरु महाराज जो है के बाद महाराज जैसा डिटरमिनेशन है, डरता है और प्रलाद महाराज जैसी कंपैशन है, करूणा है, गुरु तत्व है कभी अलग हो ही नहीं सकता है, उसमें कोई भेद हो ही नहीं सकता है। गुरु तत्व जो है प्रिंसिपल 1 ही है इसलिए आप जितने भी वास देखेंगे भागवत में उन सब का गहरा अध्ययन करेंगे और फिर अपने गुरु महाराज का भी अध्ययन करेंगे उनके जीवन का तो उसमें कोई भेद नहीं मिलेगा। आपको बिल्कुल 1 ही जैसा मिलेगा भाव इस प्रकार क्षमा करने की भाव उनमें जो है म मैं आपको बताता हूँ जो व्यास पूजा के में बताने वाला था लेकिन बताया मैंने समय का भाव था वहाँ पर 1 बार 1 भक्त ने नियम तोड़ दिए जैसे कल ही सो महाराज भी कह रहे थे की काल में 4 नियमों का पालन करना बड़ा कठिन है इसलिए पूछ रहे थे कितने लोग से 4 नियम का पालन कर रहे हैं, 16 माला का जप कर रहे हैं रोज। तो 1 भक्त ने जो है नियम तोड़ दिया और बहुत ही हैवी तरीके से नियम तोड़ा तो सामान्य रूप से देखा जाए तो बहुत अच्छे से दंडित होना चाहिए था वो और हम लोगों ने फैसला भी कर लिया कि उनको कहीं और भेजा जाए ताकि जो है आसपास जो है भक्त लोग जो है उसको और डिस्क्रिट न करे और वो भक्त जो है और ज्यादा ज्यादा डिस्कस कर भागी जाय। तो इस प्रकार हम फैसला किए थे कि 3 महीने के लिए उसको कहीं भेजा जाए। 3 महीने भी बहुत लम्बी सजा नहीं दी लेकिन 3 महीने के ने भेजा जा हमने जाके गुरू महाराज को बताया मैंने जाके बताया हर तरह से उस भक्त ने किया है क्या कि gur तुरंत बला तो जो गुरु पूछा आपने ऐसा जैसे गुरु भक्त से वो रोने लग गया जैसे वो भक्त रोने लगा। उसी समय हमारे गुरु मारा की आँखों से आंसू निकलने लग गए। उसी समय और सुनिए बात ताली बात में बजाए गुरु महाराज की आँखों से आंसू निकलने लगे और गुरु मारा न जाते। 1 ही बात बोली सर और कुछ नहीं बोला उस भक्त को गुरु महरा ने कहा इसने अपनी गलती मान ली है चैप्टर वही क्लास हो गया इसने अपनी गलती मान ली है उसके बाद और कुछ आगे नहीं। मारा ने कहा नहीं में तुम्हें जो है परिक्षण मिलेगा कोई भी बात नहीं कि मारा केवल रो रहे थे। और मार ने केवल यह कहा इसने अपनी गलती मान ली है। और महाराज बोले बड़े प्रेम से मारा बोले बड़े। मीठे शब्दों में गुरु मार ने कहा, आप 3 महीना बन जाओ और जाकर 3 महीना में जाकर वापस आ जाना। फिर आप अपनी सेवा करना ठीक है। बस चैप्टर वहीं खत्म हो गया। हम लोग किस तरह से मारा माफ़ करते हैं, किस तरह से? कैश उनका हृदय इतना विशाल है, दया से भरा हुआ है। हम कल्पना भी नहीं कर सकते। अब ये निर्भर करता है की हम कितना उसको अपने लिए अनुकूल करना चाहते हैं। कहने का मतलब है वो गुण, वो भाव। अगर हमने अनुकूल कर लिया। देखिये, क्या है, बड़ा मुश्किल होता है। क्योंकि देखिये, गुरु जो है, बहुत हैवी, है। और जितना नजदीक रहेंगे, उतना खतरा ज्यादा है। फायर जो होता है और जो डी टी हैं, और गुरु है। इन से बहुत दूर रहना नहीं चाहिए। और बहुत नजदीक के मिलर होना चाहिए। समझ रहे गुरु के। बहुत जाने क्या। ऐसा लगेगा तो मेरे जैसा ही है। मेरे जैसे विश्राम कर रहे हैं, मेरे जैसे ही जब कर रहे हैं, ये भी माला है। मैं भी 16 माला कर रहा हूँ, ये 4 नियम का पालन कर रहे हैं। मैं भी 4 नियम पालन कर रहा हूँ। जिस तरह से ये प्रवचन देते हैं, मैं भी प्रवचन देता हूँ। जिस तरह से यह मंगल आरती कर रहे हैं, मैं भी कर रहा हूँ। ये हरि नाम ले रहे हैं, मैं भी ले रहा हूँ। तो भेद क्या हुआ? व्हाट इस डिफ्रेंस डिफरेंस यह है। जब आप जब कर रहे हैं, या हम जब कर रहे हैं, तो क्या होता है? हम यहीं हैं। जब वो जब कर रहे हैं, तो
वहाँ है
बहुत बड़ा अंतर है। एक्टर कुछ नजर, बाहर से कुछ नहीं दिखेगा, बाहर से, वो दिखाएंगे भी नहीं। इसलिए गोस्वामी भक्ति है। जो वास्तव में उन्नत वैषनव होते हैं। और विशेष गोस्वामी का है। वो एक्ट से 1 प्राकृतिक भक्त की तरह 1 साधक की तरह रहते हैं। and nटरnalyrsrving, the la वो अंतरिक रूप से है। निरंतर। भगवान का स्मरण कर रहेहै, उनकी सेवा में लगे हैं। एक्सटरनल 1 साधक की तरह 1 रेगुलेटेड भक्त तरह रहते हैं। तो इसलिए बड़ा मुश्किल है। सामान्य व्यक्ति के लिए जज करना। कम्पैशन ओवर फ्लो करता है, इतना ओवर फ्लो कम्पैशन करता है। उनका कि कठोरता का? व्यवहार जो है, वो थोडा सा भी वो नहीं सहना पारे। कोई भक्त किसी के लिए कठोर हो जाए, वो उनसे सहा नहीं जाता। कठोरता? तो उनकी शब्दावली में है नहीं, क्योंकि वो दया से, करुणा से, भरे हुए हैं। तो बड़ा मुश्किल है। देखिये, क्या है? हम लोग हैं प्राकृत अवस्था में, हमारे हृदय में इतनी कठोरता है? इतनी कठोरता है? इतनी कठोरता है? देखिये, शील रोग, गोस्वामी क्या बोलते हैं। भक्ति? रसामदसुंधुमें बोलते हैं कि विशुद्ध सत्व, शुद्ध सत्व की जो किरणे है, शुद्ध सब्त हमारे हृदय में कब प्रवेश करेगा? शुद्ध सत्व तभी हमारे हृदय में प्रवेश करेगा, जब हमारा हृदय निर्मल होकर बिल्कुल कोमल हो जायेगा। बिल्कुल सॉफ्ट जितना हम कठोर हृदय के होंगे। शुद्ध सत्व का जो, शुद्ध सत्व की जो करण हैं, हमारे हृदय में प्रवेश करेंगे। ही नहीं। तो हृदय को बड़ा ही जो है हमें क्या करना पड़ेगा, सॉफ्ट बनाना पड़ेगा मक्खन की तरह एकदम से। तब वो जो है शुद्ध सत्व, आध्यात्म की बातें जो है हृदय में प्रवेश करेंगे। और इसलिए क्या है इतना टोटली, जो है ना, इतनी करुणा के ह्रदय में भरी हुई है, यानि कहने का मतलब है आप सोचेंगे कि इतना भारी पहाड़ है, इतना कर दिया। क्या होगा गुरु महाराज? हमें क्या कहेंगे? क्या? कहेंगे कहीं हमें निकाल तो नहीं देंगे, सेवा से हटा तो नहीं देंगे। लेकिन गुरु महाराज के सामने। अब जायेंगे जो बताएंगे शरणागत हो कर के मेरे से, ये गलती होगी गुरू महाराज उसको ऐसा माफ करते हैं। इतने बड़े भोज को, जो है इतना हल्का, सुमेरू पर्वत है जैसा, जो भोज है आपका, उसको सरसों के बीच कितना कर देते हैं हल्का। a a a amazing quality, he she bat। सच, जब सच बोलने की बात आती है, ऐसा सच बोलते है। जेम्स को बोलने पर हम लोग सौ बार सोचें, 1 बार की घटना बताता हूँ, 1 व्यक्ति आया था, व्यापारी आया था। तो उसका जो है कंस्ट्रक्शन का काम है। bild। उसने बताया कि मार ने पूछा उससे कि आप बिल्डर हैं, कंस्टक्शन करते हैं? तो गुरु महार ने बोला कि आपके फास्टर होटल भी है क्या? उसने कहा माँ हम राज मेरे फाइसर होटल भी है, उसमे आप होंगे कहा महाराज जी क्या करें? बहुत सारे फॉर्मर्स भी आते हैं तो हम भी बेचते हैं फाइसर होटल में पूरा नर्क है। तो फिर गुरु महार जानते है क्या बोला स्ट्रेट फॉरवर्ड सीधा मुंह पर बोला। महाराज ने बोला लाली बहुत धीरे धीरे बोला, लेकिन सीधे बोला आप गो मांस भेजते हैं, बी भेजते हैं। इसके लिए तो आपको नर्क जाना पड़ेगा। सीधा मुह पे वो उसका चेहरा 12 बजेगा उसके चेहरे में पसीना पसीना हो गया। वो हो गया बड़ा ग्रेवली पोलाइटली बोला, इसके लिए तो आपको नर्क जाना पड़ेगा। तो सच बोलने से घबराते नहीं है महाराज ये मत सोचिए। गुरु महाराज कहते है कि भक्तों के बीच में मेमने की तरह रहते हैं, बाहर जाते है प्रचार के लिए तो शेर की तरह होते हैं। इसलिए आपने महाराज को देखा होगा जब महाराज कनवर्सेशन में वो डी डी प्रोग्रामर के साथ कनाडा में बंकर में किस तरह का क्या कन्वर्सेशन है महाराज लाइन की तरह है महाराज हमे 1 बार महाराज को हम ले में नाइनटी टू की बात है। जब कंस्ट्रक्शन स्टार्ट हो ही रहा था, लंड मिल गया था में तो 1 बहुत बड़े बिजनेस न थे का place a a marg to mhar गवर्मेंट के कोर्ट है और to any to h o से अंदर बुलाया तो क एक्सेंट में प्रीचिंग करना शुरू कर दिया। कनाडा का बैगरा साथ, उसमे कनाडा एक्सेंट है। उसी प्री थे प्रीचिंग। उसको मारा ने कहा। उसने कहा कि माँ ने पूछा कि आपकी विवरेज की कंपनी भी है ने कहा हाँ जी महाराज जी, मेरी विव्रिजेसकीकंपनी भी है क्या बोला। मार ने कहा जैन है जैन होकर शराब भेजे, इसमें क्या है ये तो से बोला। फिर मार सको डोज देना शुरू किया, आधा घंटा दिया और वापस नीचे तक आया छोड़ने गाड़ी में पूरा नीचे उतर या अगली बार दुबारा मिलने से उसने कहा थे उनकी बात कुछ अलग है, उनकी अलग ही तो कहने का मतलब ने मुझे बाहर आ कर बताया जब ऑफिस से 2 इस समय बरबाद करो, कुछ नहीं करेगा तो नाइनटी टू सी, उसके बाद हमने जाना छोड़ दिया, इसके बाद पहले, लेकिन ट्राई किया मैंने कुछ साल देखते या शायद हो जाए कुछ तो कुछ वर्षों तक मैं रहा, बता से 2023 हो गया कुछ। will not do aningsacrokऐसे कुछ बोले तो महाराज असेसमेंट महाराज का जो है, महाराज ने शार्प है के चेहरा तो पूरा माई कर देते हैं। वो ये महाराज से सुन लेगे लेगे, पूछ भी लेंगे, सब कुछ करेंगे जैसे उसको कुछ पता नहीं है। वो आपके रूम में एंटर करने से पहले सब कुछ पता हूँ, सब कुछ जानते हुए भी अनजान बनते हैं। वो सिर्फ आपको इनकरेज करने के लिए, हमें इनकरेज करने के लिए, ताकि हमें बोलने का मौका मिल जा है ये फैक्ट है हंड्रेड, परसेंट fact है, देता हूँ नेपाल से नेपाल से कहा और उसको मैं उसको कल्टि्यटकरहा तो उसने कहा कि डेवलप करते हैं ये जो है पेट नहीं है, बड़ा आउटडेटेड हो गया है, रोबोटिक भी आपका बड़ा आउटडेटेड है, उसका हम अपडेट कर देंगे। बड़ी बड़ी बातें करता रहा वो और हमारे भक्तों से लक्ष्मी लेता रहा, यह कहते हुए की मल्टीपल वीजा लगा देंगे आपके लिए 10 साल का, तो कई भक्तों ने उनको पासपोर्ट देना शुरू कर दिया और लक्ष्मी भी देना शुरू कर दिया। और बीच बीच में वो फीसवीस्पांसरकरता था जिससे हम उसको राधा कृष्ण का परसाद लामिनाशन माला प्रसाद देते थे। जैसे करते हैं लोग, डोनर्स के साथ धन्यवाद देते हैं सबके सामने सो should use to greet himan thank you तो इस तरह से चलता रहा 1 महीना, 2 महीना बलराम पूर्णिमा के दिन भी वैसे तो गुरु महाराज कभी नहीं अलाव करते मैं बलराम पूर्णिमा के लिए वृंदावन जाने के लिए, लेकिन मैंने कहा मारा इस तरह से कह रहा है। तो बलराम पूर्णिमा वृंदावन जाना चाहता है। तो कह रहा है मैं भी जाऊँ, हाँ ठीक है अगर इनके साथ 1 दिन के लिए। फिर मैं उनके साथ भी गया तो काफी समय तक कुछ हो नहीं रहा था, फिर लटमेटलगुरुमहाराज को सरेंडर कर दिया, सेnseगुरूमहाराज को कहा मैंने कहा महाराज ऐसा है समझ 2 महीने हो लगातार मैं इसके बस काफी समय बिता रहा हूँ, कुछ रिजल्ट क्या रहा है, बस लगाएगा करोड़ करोड़ thing is hapi मैं देख के सब बता लूगाैcटलीसबोला, महाराज ने उसको मुझसे मैं देख के बता दूंगा क्या है? तो मैं सो गया। मा ने कहा कि पहले कहा थे, उसी तरह मार ने इंग्लिश में बात करना शुरू किया, वो हिंदी में बात कर रहे हैं। उसने कहा मैं मोंटरिमथामहाराज पहले जन्मस्थान है, कान ज्वाइन की है। no eचnएवरीसटीटमoniल kis tit now each every stritomontiआपकिस ट्रीट की बात कर रहे हैं। तो उसे बता कंफ्यूज हो गया बोला अच्छा आप नेपाल है कहाँ पर कौन सी स्ट्रीट में है। वह तो कई सारी बातें हुई और उसके बाद फिर उससे बोला हा ये करूंगा, वो करूंगा या तो मैं उसको बाहर छोड़े। तो मुझे बुला dont vast is a frodmaratisafrod। समय खराब और कुछ समय बाद कुछ ही दिनों के बाद वो वहां से गायब हो गया। हमारे भक्तों का पासवर्ड गायब, वो लाल बत्ती वाली गाडी क्या थी, उसका कोई फ्रैंड था, वो ड्राइवर था स में, उससे वो गाड़ी लेकर आता था उधार में। अब समर मेरी बात तो लाल बत्ती से थोड़ा कोई आएगा तो फिर और मा ने कहा कि फ्रॉड है, वो पासवर्ड ले भाग गया। और वो जो फीस स्पांसर करता था, जो भक्तों से लक्ष्मी लेता था, उसी से स्पांसर करता था। तो खैर प्रसाद तो मिल रहा था अच्छा गला और वो बस वहाँ से गायब हो गया। फिर हमने पुलिस रिपोर्ट किया, कम्प्लेन किया, फिर उसे पासोर्डवापसभेदा न तो कहने का अर्थ ये बहुत महाराज चेहरा पहचान लेते है। तो इसलिए हम सबको बड़ा सावधान पड़ेगा झूठ बोलने से पहले उनको बदल जाता है की सच बोल रहा है, झूठ बोल रहा है। 1 भक्त आया महाराज से मिलने के लिए बहुत ज्यादा हताश थी और जैसे उसे एंटर की और धंडवकियागुरुमहाराज को और जैसे उठा मान ने कहा कमेटsuपसाइdअदरवiजe कम। उसने। अन्दर मन ही मन सोचा था कि मैं आत्महत्या कर लूं, किसी को बताया नहीं था उसने आत्महत्या मत करना, तुम भूत बन जाओगे। झटका लगा स बोले गुरु, आपको कैसे पता चला? तो इसलिए सावधान है। गुरु महाराज से कर रहा था। और बात नहीं जो कह रहे थे, अल्टीमेटली महाराज को स्ट्रॉंग, वर्ड बोलने पड़े i m so sharp, i can enter in your mind मान लेगा, मैं बहुत शार्प हूँ, तुम्हारे मन के अन्दर घुस सकता हूँ। जितना मैं तुम्हारे बारे में जानता हूँ, उतना तुम अपने बारे में नहीं जानते। ये गुरुवार के मुख से सुना मैंने म सो शार्प i can enter into your i। तो इसलिए कुछ भी नहीं छुपा। सके तो भ्रम है, महाराज को नहीं बताएंगे। अच्छा दूसरी बात कई भ्रम आता है, कई लोग सोचते है, इन्होने बताया होगा महाराज को इनके कहने पर गुरु महाराज ने हमारी दीक्षा रोक दी, हमारी दीक्षा रोक दी। तो यह हमारे आने रहे हैं। बीच में। महाराज तो देना चाहते हैं, ये बीच में आकर लोग देते हैं। हर बार ये महाराज को इन्फ्लुएंस कर रहे हैं। मैं आपको दे रहा हूँ। ब्लैक वाइट में पूरे ब्रह्माण में गुरु महाराज को कोई इन्फ्लेंस नहीं कर सकता है। पर केला दे सका। और इसका शास्त्र प्रमाण देता हूँ भरत जी, क्योंकि भगवान राम वन में चले गए थे, 14 साल का वनवास ले लिया था। और भरत जी बहुत दुखी थे क्यूँकी भरत नहीं चाहते थे, वो तो राज सिंहासन में बैठना नहीं चाहते थे। और चरण पादुका लाकर उन्होंने जो है राज सिंघासन में रख दिया और मैं अयोध्या में भी रहूंगा के नजदीक नंदी ग्राम में रहूंगा और वही चरण पादुका की पूजा करूँगा अर्चना करूँगा। और जब तक भगवान राम 14 साल जिस दिन पूरे होते हैं। उस दिन अगर वो नहीं आए। वापस तो मैं अग्नि में प्रवेश कर जाऊँगा। भरत जी का ऐसा संकल्प था। भरत जी बहुत प्रयास कर रहे थे कि भगवान को, राम को वापस लाया जाए। कभी वशिष्ट बुनी के बाद जा रहे हैं, माता कौशल्या के रहे हैं। और कई तो बहुत नाराज है। और इसके बाद फिर उन्होंने जनक महाराज के बाज भी गाए सोरी। माता सुनैना के बाद गए धर्म पत्नी थे। माता सुनैना के बाद भी गए मनाने के लिए। बोलिए। उसमे आप कहिए कि राम को कहें कि वापस आये राज सिंहासन संभाले, ये राज सिंहासन जो है, उन्ही के लिए है। अयोध्या का राज सिंहासन में उसमें बैठने नहीं वाला हूँ। हम सब जो है विरह के कारण, जो है मर जाएंगे। जीवित नहीं रह पाएंगे। कृपा करके उनको बोलिए न। आप कहेंगे तो जनक महाराज मान जाएंगे। क्या बोले। आप कहेंगे तो जनक महाराज मान जाएंगे। पति होते हैं, पत्नियों के कहने पर मान जाते हैं। होता आप सब के कहने पर। लेकिन ऐसा उनका विश्वास था। आप कहे तो जा जाने। सुनहला क्या बोले, माता सुनहला, क्या बोले, माता सुनैना बोले, जनक महाराज मुक्त पुरुष है। क्या बोले महाराज मुक्त पुरुष है। उनके ऊपर किसी का प्रभाव नहीं पड़ता है। बाकी आप कह रहे हैं। तो मैं कह दूंगी। बाकी फैसला उनके हाथ में है। तो कहने का मतलब है बिल्कुल वैसे ही है हमारे गुरु महाराज, उनके पर किसी का प्रभाव पड़ता नहीं है। वो तो केवल भक्तों को खुश करने के लिए कई बार मान जाते हैं। प्रभाव उनके पर नहीं पड़ता, किसी का किसी के कहने पर नहीं आते हैं। जैसे प्रोपज पालन कर कितना भी कह लो, गुरु राम कर लीजिये, टाइम पर प्रसाद ले लीजिये, टाइम पर रेस कर लीजिये। 1 बार बताता हूँ आपको ये घटना सेवा से अटेचमेंट की बात की, तो 1 बार गुरु मर गया। मैंने कहा को डायरेक्टली बोलने वाला हूँ, जो होगा देखा जाएगा। नहीं थोड़ा बोल ली और स्ट्रेट फॉर्म बोलना, पड़ेगा महाराज टाइम पर प्रसाद नहीं लेते, टाइम पर नहीं करते हैं। तो महाराज ऐसा कृति बता रहे थे, जो है टाइम के बड़े कड़क थे। 1 बजे फायर और प्रसाद गर्म होना चाहिए, 1 बजे, 1 बजे एंटर चाहिए, प्रसाद रूम और वो grm wo propar strict the he was so regulated so sadul समय समय पर, इस समय, ये करना है, ये करना है, इस समय, ये करना है, उस समय पर होना चाहिए। नहीं तो फायर तो शुतीगिरतिबुरने बताया था। 1 बजे मतलब, अगर लंच का टाइम है तो 1 बजे प्रसाद पहुँच जाएगा। प्रो पाजी के टेबल पे pro ganv me shedul to let pro, bot, have sad to sc, गुरु स pro but। तो मैंने कह दिया गुरू महाराज को राज, हम आपसे भी यही asha maharaj en la happy mere laga mahar उसके बाद फिर क्या हुआ, फिर 12 बता रहे थे भक्ति, अनुग्रह जना सामी महाराज बता रहे थे। बाहर को टाइम पर बसा लेना चाहिए, सब करना चाहिए। बाहर लोग के बैठ जाते हैं, वहाँ पर लॉबी में वेटिंग लगी रहती है। सुबह से रात तक। गुरु महाराज से मिलना कई बिना अपॉइटमेंट के पहुँच जाते हैं। बस महाराज के दर्शन करते हैं। भारत से पूछन कई माताएं बच्चों को लेकर आ जाती है। अन्न प्राशन का समय है तो महाराज के हाथों से ही वो अन्न महा प्रसाद दिलवाना है। तरह तरह के लोग आ रहे हैं वहाँ पर। गुरु महाराज से मिलने के लिए और 12 का प्रसाद का टाइम है। प्रसाद रेडी है। सब कुछ टेबल में रख दिया है। प्रसाद लेने के लिए जा रहे हैं। बाहर लोग बैठे हुए हैं, वेट कर रहे हैं। भारत ने देखिए, मा ने कहा लोग वेट कर रहे है। बहुत देर से लगता है। ऐसा करो। उनको बुला लो। प्रसाद डिले हो गया, बाद में ले। तो फिर गुरु महाराज को बोला। भक्तों ने कहा कि महाराज आप प्लीज प्रसाद ले लीजिये, लोग वेट कर सकते हैं। पंद्रह मिनट में कुछ नहीं हो। आप तो वैसे भी थोड़ा सा ही लेते हैं। 5, 10 मिल सकते हैं। आप बहुत बहुत बोलते रहे। बेचारे हाथ जोड़ते रहे। सर्वेंट्स के लिए तो बहुत तपस्या है। गुरु महाराज के साथ सेवा करना भैया बहुत काम है। अगर आपको थोड़ी सी सी है प्रसाद पाने में और सोने में तो पर्सनल सर्वेस मत लेना। गुरु महाराज यह क्लियरली बता रहा, कब क्या होगा कुछ पता नहीं है। जैसे दिया भक्तों को मैं भी दीक्षा दूंगा बुलालो। kl sub me ja dobara kb to fir guru mahar guru mahar, this is not the way i work bolाओthisisnotthe wark। प्रसाद बाद में लूंगा। भक्त पहले वेट कर रहे है, उनको बुलाएगा कहने का मतलब है। भक्तों को देखकर मारा इतने उत्साहित होते हैं। अभी आने से पहले मार का, दांत का कुछ ऑपरेशन हुआ था। दांत से बिल्ली निकल रही है। और क्यूंकि कुछ द्वारका के भक्तों को टाइम दे दिया महाराज ने मिलने के लिए और वो पहुंच गए। तो महाराज ने जो है माइक लिया। अपना बोलने में तकलीफ हो रही है। वैसी आवाज मार की धीमी चल रही है। उसके बावजूद भी मारा लेक्चर देने और बात कर रहे हैं। महाराज को रे महाराज दांत। अभी भी ठीक हुआ है। आपका अभी नहीं बोला। डॉक्टर ने बोला है 23 दिन रस्ट के लिए नहीं रुक रहे हैं, बोलते है, क्या है? देखिये, कुछ शरणागति ऐसी है जिसके कारण हमारा आंदोलन चल रहा है। सच बताए, मैं सच बात बताता हूँ। गुरु महाराज को 6 महीना लगना पड़ा मेरे ऊपर, तभी जाके। मैंने ट्रेलर स्वीकार किया, यह ओपन ली बता रहा हूं आपको। लेकिन फाइनली महाराज ने मुझे 1 बात बोल दी। महाराज जानते हैं महाराज बोले जानते हो। प्रहुपाजीक्यों सफल हुए। प्रभु पाजी 11 साल में क्यों सफल हुए? क्योंकि हम शर्नागत थे, हम p्रहpाजजबकहते थे। we never that दोबारा, कभी प्रपा तुरंत करते थे, इसलिए प्रहुपाजी सफल हुए। कहने का है कि इतना है प्रहुपाजीकेलिए। वो केवल बातों से नहीं, एक्स सी दिखती है, उनके व्यवहार से दिखती है। उनकी आषणऐसीदिखतीहै शिलपरबाजकअकल्पनी है। अभी पीछे गौरता की स्थापना कर रहे थे। पंशीलमजोगेस्टहाउस वहाँ सी की स्थापना की। उस समय गया था कहीं गोवर्धन गया था तो बता रहे थे, गौर अभिषेक चल रहा था। गुरुवार की आँखों से आंसू आ रहे हैं, आंसू आ रहे हैं, और वहाँ प्रवचन देते हुए, आंसू बहाते हुए प्रहुपाजीको याद कर रहे हैं की प्रहुपाजीका सपना सच हो रहा है। प्रहुपाजनेकहा था इसे मंदिर बनाने के लिए। देखिये इतने सारे भक्त, इतने सारे मंदिर बन रहे हैं, प्रुपाजकीसारीइच्छाए पूरी हो रो रहे है। महाराज सारा श्रेय शीला प्रहुपपाजीको दे रहे है इतनी सारी सफलताओं के बाद कितनी बड़ी बात है। देखिये रंच मात्र भी आसक्ति नहीं है अपनी सफलता में। जिस तरह से शिलरुमगोस्वामीशिला सनातन गोस्वामी, गोविंद देव जी का, मदन, मोहन जी का मंदिर बना कर वृंदावन में द्वादश वनों में भटकते रहते थे, किसी को सेवा देकर उसी मंदिर में रहकर सुविधा में नहीं रहे, शिलरुमगोस्वामीशिलह सनातन गोस्वामी उस मंदिर में रह कर आराम से नहीं रहे, मंदिर बना कर सेवा देकर। फिर निकल गए वन में ग्रंथों की रचना करने के लिए, भजन करने के लिए, तपस्या और वैरागी जीवन अपनाने के लिए। उसी तरह से हमारे गुरु महाराज भी है। 5 बज गए मुझे पता नही चला समय कैसे बीतता है, समय तो बहुत जल्दी नहीं, और 1 बात मैं बताना चाहूँगा बड़ी महतवपूर्ण बातें हैं पीछे भक्ति। 4 मार की क्लिपिंग आ रहे थे, छोटे छोटे क्लिपिंग और क्लिपिंग्स में से 1 क्लीपिंग जो है। बहुत अच्छा लगा मुझे जो की हमारे गुरु मारा टीचिंग से बिल्कुल हंडर गुरु वा। इसलिए आप किसी भी गुरु जन से सुनोगे वास्तव अगर प्रमाणिक गुरु है। आपको 1 ही सिद्धांत मिलेगा, कोई अलग इंस्ट्रक्शन नहीं मिलेगा। इसलिए आप जितने भी शिक्षा गुरु ने अपना दीक्षा गुरु देख सकते हैं। ये गुरु तत्व का एडवांस अंडरस्टैंडिग है। तो उनसे क्या सुना हमने to mhara वो विनम्रता की बात कर रहे थे। तृणादपि सुने चेन तो गुरु महाराज के हजारों हजार प्रवचनों में से अगर सबसे अधिक बार ने जोर दिया है किस शिक्षा को जोड़ दिया जाता है। इस शिक्षक तृणादपि सुने चेन तरोरेसहीसुना गुरु महाराज की शिक्षाओं का ये एसेंस है। सूत्र रूप मे सबसे महत्वूर्ण स्ट्रक्शन गुरु महाराज कर रहा है। वो बता रहे थे कि कौन में हमें बहुत बड़ा नहीं बनना है, हमें क्या बनना है, छोटा बनना है, छोटा जानते, क्यों बनना है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक जगत का जो दरवाजा है, गोलोक वृंदावन का जो दरवाजा है, वो बहुत छोटा है, बहुत बड़े बनोगे तो प्रवेश नहीं कर पाओगे, छोटे रहोगे तो घुस जाओगे, छोटे रहोगे तो घुस जाओगे। उन्होंने कहा जितना अपने आप को छोटा रखोगे, उतना कृष्ण आपको याद करेंगे। जितना बड़ा बनने की कोशिश करोगे और गुरु परम्परा को भूल जाओगे तो कृष्ण की नजर में आप भूल जाओगे। कहने का मतलब यह है कि उन्होंने बड़ा अच्छा बताया। कहने का मतलब ये है की हमें छोटे से छोटा बनने का प्रयास करना है। बड़ा सा बड़ा बनने का प्रयास नहीं करना। अगर छोटे से छोटा बनने का प्रयास करेंगे तो कृपा ऐसे बरसेगी। अगर आप पीछे बैठे गुरु क्या करेंगे उसको आगे ले आओ, वो क्यों पीछे बैठा है। तो ये है विनम्रता और सहनशीलता के प्रतीक हमारे गुरु महाराज हैं। जिनकी विनम्रता सहनशीलता इतनी है, सहज शक्ति इतनी है, उनकी इतनी, विपदाएं इतना, उनके अंदर जोर प्रेशर रहता है, पूरी संस्था को लेकर, पूरे वैश्य समाज को लेकर, शिष्यों को लेकर। 11 जो ऐसे उसको संभालते हैं, ऐसे, उसका सामना करते हैं, थ्रू महाराज की तरह, उनका संकल्प है, उनकी डरता है। तो इसलिए गुण महाराज के जीवन काल से, जीवन चरित्र से हम बहुत सारी शिक्षा ले सकते हैं। मुझे लगा कि 1 घंटा ऐसी बीत गया, क्योंकि आप में से कई लोग गंगा स्नान के लिए गए थे, इसलिए थोड़ा सा लेट शुरू किया हमने। लेकिन सच बताएं 1 घंटा तो बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं है। और जितना हम लोग शरणागत होने की कोशिश करेंगे, उनकी आज्ञा का पालन करेंगे, उनके जैसे भाव को स्वीकार करेंगे, हम लोग तो देखेगा। यही वैष्णव बनने का तरीका है और कोई बनने का तरीका नहीं है। अगर हम वैश्व बनना चाहते हैं तो हमें गुरु महाराज के इच्छाओं को और उनकी आज्ञा का पालन करना होगा। गुरु महाराज चाहते हैं कि हम अधिक से अधिक जिम्मेदारी लें, संस्था के लिए, अधिक से अधिक ग्रंथों का वितरण करें, शिप्राजी के ग्रंथों का अध्ययन करें। हमारी परािआप्राताकालीन साधना इतनी मजबूत रहे। जैसे हमारे गुरु महाराज की साधना है। गुरु महल कहा, म फैनेटिक, अबाउट मॉनिंग प्रोग्राम, गुरु कहा, अबाउट मॉर्निंग, गुरु महाराज, मॉर्निंग प्रोग्राम के फानेटिकहैकनेकाम प्राण जाय। पर छोड़े राज। आज भी आरती का लाभ उठाने में बड़ी दिक्कत होती है उनको, फिर भी उसको ऐसे घुमाते हैं बड़ी मुश्किल से, और पूरी आरती करते है। देखिये जरूर करते हैं महाराज ऐसी के बारे में लिखा मे किशिलरगुनादसगोस्वामी की साधना कैसी थी, जैसे कि पत्थर की लकीर, उस तरह की साधना, हमारे गुरु महाराज, ऐसी साधना, उनकी और ऐसी सेवा का भाव, ऐसा सेवा का भाव, प्राता काल कितने भी महाराज, कितने भी व्यस्त क्यों न हो, जब वो साधना करते हैं, जब करते हैं, उस समय किसी भी बात नहीं करते। महाराज मॉर्निंग वॉक में भी जाते हैं, प्रो पाजी की नकल नहीं करते हैं। गुरु मारा कहते हैं मैं जब करूंगा आय, लाइक टू चैंड, यहाँ से, लध्याना भी जायेंगे। दिल्ली से लुधियाना 6 घंटे के रस्ते में, कार में 6 घंटे लग जाते हैं, 6 घंटे लगातार जब करते रहेंगे, 1 बार बता रहे थे हमारे प्राजी कृष्ण गोपाल प्रभु बता रहे के साथ बस में, या रात को और भारत रात को सोये नहीं, पूरी रात जब करते रहे, पूरी रात माला करते रहे। महाराज ट्रैवलिंग। इसलिए भी जब करना अच्छा लगता है। मुझे जब करने का मौका है अरीना में इतनी रुचि उनकी है, इतना आकर्षण है, जहाँ भी समय निकलता है, हाथ बैग जाता है। इतना नाम में उनका आकर्षण है। कि लगता है जहाँ भी समय में लंबे नाम ले। तो इसलिए अभी अमेरिका भी गए, महाराज। 1 क्षण भी मार बता रहे, साढ़े 14 घंटे की फ्लाइट थी, 1 क्षण भी रुके नहीं, वहाँ भी 1 सेकंड भी लेते नहीं। 1 क्षण भी सोए नहीं लगातार माला फेरते रहे, ऐसा भजन में उनका मन है। सोच के देखिए, ऐसी शक्ति है गुरु की सेवा में राज के लिए, प्रवाज सेवा के लिए, प्रवाज के लिए, कुछ भी करने के लिए, वो तैयार हो जाते हैं। तो इसलिए हम लोग को बहुत सावधान रहना चाहिए। 1 समय ऐसा था, कई भक्त लोग जो छोड़ के गए थे, आंदोलन बड़े दुखी हुए थे, महाराज महाराज बहुत दुखी हुए थे, और महाराज नहीं चाहते थे कि कोई भी आ जाए और यही चाहते थे। नाइनटी नाइनटी फाई की बात है, जो पहली बार हार्ड ट्रोक हुआ था, वाशिंगटन में मार ने सर वहां से लेटर मैसेज भेजा था, गुरुवार ने मेसेज भेजा नाइनटी नाइनटी फाइव की बात बता रहा हूं। पहली बार जब हुआ था मार ने मेसेज भेजा मेरी यही इच्छा है, अगर मुझे मुझे कुछ हो जाए तो मैं यह चाहता हूं कि मेरे शिष्य जो है, जितने भी हैं वो संस्था छोड़ के न जाये। 1 साथ मिल जुल कर, सेवा करें, इस आंदोलन से जुड़े रहे। gurudev
मोहन गोपाल कृष्ण गोस्वामी गुरु महाराज की हरिद्वार यात्रा महा महोत्सव के जगत
गुरु शीला प्रबाद गी 23 वी थ्री
क्वें
1 क्वेश्चन प्रभु में से कोई पहले कम्प्लेन कर रहा था की पिछले सेशन में वो पीछे रह गई थी, सवाल पूछ नहीं पाई दोबारा पीछे रह गए, तो फिर आप भी की गलती भी आगे आना चाहिए था, आपको अभी आगे पूछ सकते हैं disprabandaft स्टार्ट कर हरे कृष्णा बोले थैंक यू फॉर शेयरिंग the goris is in the माइक जोर से बोलना है और धीरे बोलना है और माइक पर बोलना है। thank you for sharing the glories of is lines, goswami, i had won out that on guru ttwhiहोलिनeसगोपाल गोस्वामी महाराज गुरुदेव लिनेस गोपाल, राज गुदे
बताते थे कि
yadi dicerplsfailes to go back, home back to gardedansperucal master has to return again in the material, vel to picking so, but we say, if any speicial master release the body is departed to go locate, how can be understand that form? किसी और रूप में आ सकते हैं, या किसी लोकल वैसा से आपको डारन कर सकते हैं, हिस। इस्टर्न उनके आने का मतलब है कि उनकी शिक्षाएं उनके स्ट्रक्शन है, वो बंद नहीं होगा। आपके धाम से देखते रहेंगे छोड़ेंगे अगर आपने धाम ले जाने की है, जब तक आप धाम जाओगे नजर रहेगी, किसी भी ब्रह्माण में चले जाओ, किसी भी ब्रह्माण में चले जाओ, ना छोडे प्रूष मजाक है। दिक्षा लेने का मतलब ये है कि वो जन्म जन्मांतर तक नित्य सम्बन्ध है उनके साथ, इसलिए जब तक आप धाम नहीं तो वो आपको नहीं छोड़ने वाले हैं, किसी भी ब्रह्माण में चले में चले जाओ। हे probe morning का वो प्रोपीके पाव के आसपास घूम रहा था, प्रो पाजी के चरणों के आसपास घूम रहा था, prop ने कहा तमाल कृष्ण महाराज को, he s my follondisiplprwopa, he is my follindicaipl, तो इस तरह से गुरु जो है, छोड़ते नहीं, हम भले छोड़ने की कोशिश कर है, वो नहीं, enternal, principal, sme, या किसी वो के माध्यम से या स्वयं आकर किसी और रूप में वो आपको लेकर ही जाएंगे। छोड़ेंगे। नहीं आपको धन्यवाद। that माताजी शी रईस हैन हरी कृष्णा प्रोजी प्लीज हरे कृष्णा हरे कृष्णा जी प्रश्न था की जैसे आपने बत या कि गुरु महाराज जो थे वो गुरु महाराज जो है वो शीला प्रपात की टीचिंग्स को अपने हृदय में बसाए हुए हैं और उनको सक्सेस कर रहे हैं। तो प्रहजीजैसेमहाराज तो आपने बताया द्रूब जैसी दृणता है, महाराज के अन्दर द्रूब महाराज जैसी दृणता है और प्रलाद महाराज जैसी करुणा है महाराज के अंदर तो प्रोहुजीअभीजैसे कलयुग है और मैं अगर अपने अंदर देखूं उतना डर नहीं हो पाते हैं तो टीचिंग्स को और अच्छे से स्ट्रिकली कैसे फॉलो कर सकते हो और कैसे महाराज की जो सेवाएं मिलती है उनको अच्छे से मतलब स्टैब्लिश कर सकती हूँ और उसको कैसे अच्छे से रेगुलेट कर सकते हैं। गुरूजी देखिये साधु संग बहुत जरूरी है भक्तों का संग, भक्तों का, संग का मतलब होता है ऐसा संघ जो भक्ति के लिए बड़ा, अनुकू, अन्य निन्दा आदि शोणनियमहृदयमेदा जिसका हृदय अन्य निंदा से रहित है। ऐसे भक्त का संग करना चाहिए। ऐसे भक्तों का संग करो जो गुरु के लिए शरणागत है, जो गुरु के लिए समर्पित है। अगर हम ऐसे भक्तों का संग करेंगे जो गुरु के लिए शरणागत नहीं है तो हम भी वैसे हो जाएंगे और गुरु के जो समर्पित है, ऐसे भक्तों का संग करना बड़ा। कठिन guru ke bat, गुरु की बात को मना कर पाते है सीधे लेकिन ये है तो मना कर सकते है। याद रखियेगा गुरु को फॉलो करने का मतलब है ये बहुत ही ब्रॉड चैप्टर है इसमें वो सारे हमारे गुरु भाई भी आ जाते हैं जिनका सम्बंध गुरु से है जो गुरु को फॉलो कर रहे हैं वो सारे गुरु भाई हमारे लिए उतने ही महवपूर्ण है जितने के लिए जितना की हमारे लिए गुरु हैं। क्योंकि वो सारे गुरु भाई या करेंगे हमारी सहायता करेंगे, गुरु को फॉलो करने के लिए कुछ नहीं कर सकते हैं। माया जगत याद रखेगा अकेले हम कमजोर बढ़ जाएंगे हम शिलपरोपालनहींहै। इसलिए हमें भक्तों का संग चाहिए। ऐसे भक्तों का संग जहाँ पर भक्त गंभीर है। गुरु के बताए रास्ते पर चलने के लिए, गुरु ने साधना के लिए बोला है, सेवा के लिए बोला है। ये सब बातों को जो फॉलो कर रहे हैं, प्रचार कार्य में लगे हैं। गुरु की 1 ही बात को फॉलो करने का प्रयास कर।
हे है।
ऐसे भक्तों का संग करना पड़ेगा हमें, तब हम बोल सकते हैं, गुरु को फॉलो कर रहे हैं, नहीं तो बड़ा मुश्किल है। अकेले हम क्या कर सकते हैं डायरी से गुरु का संग को मिलेगा ही ऐसे भक्तों का संग करना है जो गुरु के इंस्ट्रक्शन को फॉलो कर रहे हैं और फॉलो करते करते समझ में आयेगा की क्चल गुरु को फॉलो कर रहे हैं। इसलिए गुरु के इंस्ट्रक्शन को अच्छे से पढ़ते रहना चाहिए। इसलिए बहुत सारी बुक्स पब्लिश किए जा रहे हैं, बहुत सारी बुक्स पब्लिश हो रही है, हम पढ़ नहीं रहे हैं उसको नाइनटी नाइन, नाइन परसेंट बुरा। गुरु महाराज के लेक्चर हम बहुत कम सुनते हैं, गुरु महाराज के लेक्चर्स हम बहुत बहुत कम सुनते हैं। हमारे पास अगर स्मार्ट भी है। यू ट्यूब में और और लोगो के सुनते हैं। गुरु बहुत कम सुनते हैं। हमारे डेली हेरिंग होना चाहिए। गुरु मार्ग के लेक्चर सुन और फाइव परसेंट मेरा लेक्चर सुना। तो ये क्या गुरु से बुक, पढ़े लक्ष् पे, जो बेस्ट है, रेगुलरली पड़े और ऐसे भक्तों का संग करें जो गुरु को फॉलो कर रहे हैं, हो जाएंगे। सुना ही नहीं होगा, उनके बारे में पढ़ा ही नहीं होगा, उनके लोरिस को सुना ही नहीं होगा। तो उनसे सम्बन्ध कैसे बनेगा? बनेगा ही नहीं प्रभु पारी बुक पढ़ है पारी की। गुरु पूजा में भी आ जाते हैं, वो हम नहीं कर पाते हैं। इसलिए हमें ये व्यवस्था करनी पड़ेगी। गुरु के प्रति श्रद्धा बनाने के लिए अदरवाइज बड़ा मुश्किल है, बहुत डिफिकल्ट है, अदरवाइज नहीं होगा। गुरु के प्रति फेद बढ़ेगा नहीं फेद। तभी बढ़ेगा जब गुरु के इंस्ट्रक्शन को रोज। हम लोग पढेंगे और गुरु के इन को रोज। हम लोग सुनेंगे और ऐसे भक्तों का संग करेंगे जो गुरु को फॉलो करने की कोशिश कर। we ko ho sakta, we take more questions or close last question okay one last question, somebody will take some body from behind okay prb behind with a can es to mobile phone to him sorry, what is a called mike ya speaking with mike please? अरे मेरा ये प्रश्न है कि कई बार गुरु महाराज को पता भी होता है कि मतलब ये जो आया है यह दीक्षा के लिए उतना मतलब क्वालिफाइड नहीं है। लेकिन फिर भी गुरु महाराज आउट ऑफ मर्सी, मतलब, इतने मर्सी फुल होकर भी दीक्षा देते हैं। तो मतलब कई बार देखते हैं कि जैसे और भी गुरु महाराज है, मतलब कई बार ये कोश्चन आता है। इसलिए मैं पूछ रहा हूं कि और भी जैसे गुरु महाराज से राधा स्वामी महाराज। वगैरह तो वो लोग दीक्षा देने के लिए के प्रति बहुत ही स्ट्रिक्ट होते हैं। लेकिन गुरु महाराज इतने करुणा में है। आउट ऑफ मर्सी दे देते हैं तो हमारे गुरु मारक भी स्ट्रिक्ट है। शायद आपको पता नहीं कि कितने लेवल में इंटरव्यू चलता है। आपको नहीं पता है। बहुत कड़क है गुरूर, इसमें, आपको नहीं पता है। हमें पता है हमारे पास तो लास्ट में आते है, उसके पीछे और 23 लेवल होते हैं। इंटरव्यू है अरे इस बार पूछी आप जिलों का इंटरव्यू तो हालत खराब हुई
उनकी तो,
लेकिन अल्टीमेटली जज कौन है, गुरु है क्यूंकी दिक्शा तो उनसे लेनी है। हमने भले किसी को रेकमेंड किया हो या न किया हो, दिक्षा तो महाराज को देनी है। और he is a best, जज हमने सारे लेबल्स में क्लियर कर दिया, गुरु महाराज ने लिया है मारने का वेट करो। अगली बार ऐसा नहीं
है कौन?
कितना है अगर मार कम्पैशन अगर दे भी दिया उस भक्त को रखने के लिए सेवा में, तो ये उनका अधिकार है। आर वी टू जज हम कौन है जज करने वाले बताए हमारा क्या अधिकार है, हम कौन होते है बोलने वाले है की उन्होंने क्यों दे दिया, क्यों नहीं दिया। वो स्टिक स्टिक नहीं है। आर वी टू से भक्त था समय में वो गैलरी में लेटा रहता था और सब उसको क्रेजी बोला करते थे। क्रेजी वो माला करता था और चांदी पालन करता था, सेवा को नहीं करता था। वो ऐसे लेटा रहता था। पूरे दिन प्रो पालेगा उनको कुछ मत कहो समय आने पर वो सब कुछ करेगा। शरीर छोड़ने से पहले उन्होंने 3000 से अधिक कविताएं लिखी हैं, ढाई हजार ऐसे ग्रंथ ऊपर जो है उन्होंने अनुवाद किया है इंग्लिश साइंस किट से और बंगाली से इंग्लिश में। और वृंदावन धाम उन्होंने शरीर छोड़ा लास्ट में। वो बहुत इमपोरटेंट पोसिशन में नहीं थे। लेकिन कृपा? तो हमें नहीं पता कि कौन क्या
है
को जज करने 2 बाकी उनके हाथ में छोड़ 2 अब आप ये नहीं कि मैंने जो बोला है, वह होना चाहिए। जिसको मैं कमेंट करूंगा उसी को दिक्षा मिलनी चाहिए बाकी सब को साइड में किया जाए। ये अहंकार है, ये है करता अहंकार मुड़ाजमाहमकेवलहमे प्रपोजल देने का अधिकार है, रेकमेंड करने का अधिकार है। वो हम भी क्या सकते हैं, नहीं बजा सकते हैं। इसके लिए हमें तैयार रहना पड़ेगा समझ रहे है। अरे थैंक यू थैंक यू वेरी मच मोहन रूप प्रभु वी गो हे रेस्ट प्रोग्राम अभी सबके लिए प्रसाद की व्यवस्था है। और उसके बाद ठीक 7 बजे जैसे आपने लेट किया आधा घंटा वैसा लेट मत करिए क्योंकि गुरु महाराज 7 बजे खुद पधारेंगे पंडाल में सो यहीं पर
होगी
यह सो सबको प्रसाद लेकर तुरंत यहां पर वापस आना है ठीक 7 बजे ही सो गोपाल कृष्ण गोसवामी गुरु महाराज वापस पंडाल में पधारेंगे और आप सबसे अनुरोध जल्द से जल्द प्रसाद पाएं और इतना प्रसाद पाए जितना कि लेक्चर
में नींद न आए।
और किसी ने अपनी जान खो दी है जिसको मोबाइल बोलते हैं। सामान्य भाषा में जिसको जिसको भी चाहिए तो हमसे संपर्क करें उचित पहचान बता कर प्राप्त कर लें।
शीला राहु बाद की ब
in near अलग अलग लेवल पर कम्बैट 10 साल होता है। कि लोग ज्यादा है अमेरिका में 1
साल में आज मेरे रे sansahvsarmayasikusna shashilpalksna sansar भvsarrmayaskृsn कुरुsलपा कृषण जय गुरुदेव जय गुरुदेव गुरु महाराज दे, गुरुदेव जय गुरदेव जयगुरुदेव गुरु महाराज tgurudesrelprbupdkishna kipamutirupad कrpmतiहैgududesrel prupsnaकpामुती प्रभुपाद कृपा मती है, गुरुजी जगुdेgdimhरजगुदिने जगुरुजेगुर महाराजुर गुरूजी प्रभु पा के बचनों के जीवन समर्पित जीवन का 1 लौता है ही है प्रभु पा के बचनों जीवन सम जीवन का 1 लौता है जिद है। कृष्ण ने लिकठिन गुरु क्रिपा से पाया विजय कृष्णा लिली कठिन परशागुप्रपासेपया विजय शिला प्रभूप्णा कpामुतीरभुपा कृपा मोती है गुरुdesrelrpsण क्रिपा मोती रुपा कृपा मोती है गुरुदेव ज गु दे, जरूर दे, गुरु महाराज रे गुरुदे जैगूदेवजगूरुदे गू महारा जी ले गुरु दे। ्रभूपाग्रंहोकयागतर भर भर पहुँचा त भागवत का ज्ञान प्रभुपाद ग्रंथों का किया हर घर जागता भागवत का गाअरशविगसेवालगाया हिदसिंभक्तोंकी जीवन का वाथा अरछा विग्रह सेवा लगाया विदेशी भक्तों की hasil कृपा मत पा का मत है। grudisrelaprupalisna kripa murti pa hagrudijdjgurdgu maharaj रेगुरुदेजभुदेजगूरु दे गुरु महारा, हे रे गुरु दे सुबह शाम रात दिन की परवा की संपूर्ण विश्व मे कि प्रचार सुबह शाम रात दिन की परवा की सम पूर्ण विश्व मे दिया प्रचार दिल्ली में खोली 18 भव्य मंद गौनितायसेवाका हुवा विस्तार दिल्ली में खोली 18 भव्य गौरता सेवा का स्थान श्रीला प्रभु कृ कृपा मूर्ति प्रभुपाद कृपा मूर्ति है रुदशरीला्रभुप kripa murti क्रपा है रुजगुदिजगुरुदगुरु महारझूरगुरुदजगुदे जबूरदेवदूरहमहारा गुरुदे राधाकृष्ण सेवा सेवा दी दुललदुल्लभयमनजीवनदी है राधाकृषण सेवा सेवा दी दुलल दुल्ल ये मानव जीवन भी है। k p s ये svahebanpरmsbag mera वाउdpaसयsavahebपरm मेरा हुवा उद श्रील
चेक हैलो हैलो चेक न टू हेलो हेलो हेलो हेलो हेलो चेक हेलो चेक न हेलो चेक वन टू हेलो चेक चेक चेक वन चेक हैलो हैलो हैलो हैलो चेक चेक वन चेक चेक चेक हैलो हैलो हैलो थोडा सा हैलो हैलो चेक वन हेलो ठीक है हैलो हैलो चेक चेक चेक a a a a a a a a a a a चेक चेक हेलो चेक न चेक हेलो हेलो हेलो हेलो चेक चेक हेलो हेलो चेक न hello हेलो ठी।
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