Haridwar Yatra || Day -2 || HH Gopal Krishna Goswami Maharaj || 2023

HH Gopal Krishna Goswami Maharaj addresses why devotion falters during rituals like Mangala Aarti and bhog offerings. He traces the problem from lack of faith through insufficient guru-grace, and recommends distributing the guru's books and performing 100 circumambulations of Tulsi Maharani to strengthen practice.
Chapters
हर राह हर राजा
बाला
हु बराहुबुदुलबा 1 बार हरी हो
रे कृष्णा थैंक यू वेरी मच सचननगौरपुपरभपु टीम कीर्तन थैंक यू वेरी मच बोले तो पूरा सन्नाटा किसी को अच्छा नहीं लगा चाहिए। भाई चान किर्तन किया आप सब को बुलाया बाहर भटक रहे थे बुलाया थैंक यू परम सौभाग्य अब हम श्रवण करेंगे। परम पूज्य भक्ति करुणा में माले स्वामी महाराज के मुखार ऐसे ही सोल भक्ति करुणा में महाराज की तो महाराज के मुखार ऐसी हम श्रवण करेंगे। विदुर मैत्रेय संवाद के कुछ महत्वपूर्ण बिंदु। बिटवीन विदुर मैत्रेय स वेरी इम्पोर्ट प प्वाइंट्स विदुर मैत्र संवाद के कुछ महत्वपूर्ण बिंदु। उससे हम श्रवण करेंगे। अपने अपने श्री मोबाइल बंद कर दे या वाइब्रेट मोड पर रखें। अपने अपने बच्चों को वाइबरेटर मोड पर न रखें और साइलेंट मोड पर रखें। खुद भी साइलेंट रहे। ध्यानपूर्वक श्रवण करे महाराज के मुखार विंद से, क्योंकि ये स्थान इस विशेष लीला से अनुबंधित है, तो महाराज के मुखार विंद से इसके बारे में श्रवण करेंगे। हमारा परम सौभाग्य ही सोल्स भक्ति करुणा। आ वनमाली स्वामी महाराज की सील गुरुदेव गोपाल कृष्ण गोस्वामी गुरु महाराज की जगत गुरीला
हरिद्वार यात्रा की निदाई निदाई और
सीतानाथ प्रेम नंदे
hare krishna hare krishna krishna krishna hare hare hare rama hare rama rama rama hare hare shilapropadka haridwar yatra twenty twenty the ke gorhripremannde
ज
रा धमा धब gunjabhारिजरा धमा जायरा दमा दाबा
र सभी हाथों से तालियों का सेवा कर
गया
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शोदा
जाना
न
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nara बना मन रा
रा
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कभी हाथों से तालियों का त्यौहार बन करे यह बहुत ही vैgञaniहैyouclab एंड मेंटली वेरी शॉप
ahasaaaaaaana भूत pयaraaaसजलकरकबासा री और भक्त हर कृष्णा कष्णा कृष्णा कृष्ण हरे हरे रामा रामा रामा रामा हरे हरे हरे राम हरे अछी तरह से हर बात को समझने लगे हरे कृष्णा हरे हरे राम राम राम
और
अगर आप नाचों की सारी बातें हमारे जीवन में उतर जाए हरे
राम हरे राम राम
इसीलिए बुद्धिमान लोग संकेतन में
नाचते हैं राम हरे
रे रे
रा
राम रे राम राम हरे हरे हरे राम राम राम राम राम हरे राम राम राम राम राम राम हरे हरे हर
बार
हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे राम राम राम हरे हरे हरे हरे राम हरे राम राम हरे हरे र राधा मा धारा
जरा
राधा
राधा
जगना बलदेव गोरान गोरा
गो रानी
रानी का गोरा गौरानी मा लखमन बता नुमा सीता राम लष्मनबतानुमा हनुमाल जया लक्मिणक्रिना जया लक्षना जया मा लकी लमिला गया प्रभु या प्रभु दुरलेरुल हरिबाहरिबाहरलधा भाई हरि बो हरी बो हरी
हर नाम संकेतन के हरे कृष्ण महा मंत्र
के श्री प्रभ पाद के ज विष्णु
पाद पर प्र काचार asus oterstisdmingres a
car narvintactividanto swami shilaprbupadke is can be
found cars the holboldthemost motfulaसbकतिविदान स्वामी शिलप्रभुपादके जय विष्णपादप्रमंसप्रका 4 शषटोतsथजingेस भक्ति सिद्धांत सरस्वती ठाकुर तरिरंडीगोस्वामी महराज के नाम चार्यशिलहरिदाश ठाकुर के अnntkotiwesnbrend pram श्री कृष्ण चैतन्य प्रभु नित्यानंद श्री गदाधरशवाशादीगौरभक्त वरिंद की गौरव भक्त वृंद की श्री श्रीराधा पार्तसाटिजीकि श्री श्री जगन्नाथ बलदेव सुभद्रा मैया की श्री श्री गोण्णितायकी ग्रंथ राज श्रीमद भागवत महापुराण की हरिद्वार धाम की। haridwar yatra two thousand and twenty three ka iso gopal krishna goswami a raja olbloristothsbl divots ol boris, the samba divots
al boris to the samba devotes l बoriजटशिलपरपाद shrilaprbubadage
nitaigorhipremannde कार्यक्रम को आगे बढ़ा हुए हम मंगला चरण की ओर प्रस्थान करेंगे। सभी कृपा करके दोनों हाथ जोड़कर हृदय करने लाए। मेरे बाद बोले
ओ
नमो भगवते
बासुदीवाया
ओ
नमो भगवति बासुरी बाया
nmagtvasudabaya
नारायण
नम sktiyamnरmjyva na rotmदevzरस्वते,
vazmmtatojjamdirynsta pray s्वbdresu नित्य भागवत से या भगवती उ्तमासलोगे भगत
रा बबटे नाएश्टकेभगतराभबते नइश्टरके भकतiराभvतेnesnकग्रंथ राज श्रीमद भागवत महापुराण स्कंद 3, अध्याय 5 और श्लोक श्रृंखला 2। इसका हम सेवा अर्पण करने का प्रयास करेंगे।
आप
जो स्क्रीन देख पा रहे हैं, स्क्रीन में यह श्लोक देख सकते हैं। बाकि आपके पास अगर भागवत है। मोबाइल में विदा बेस है तो ये स्लोकक्यौर जाकर प्रस्थान करके इसका सेवा अर्पण करने का प्रयास करेंगे। आइए इस लोक उच्चारण करने से पहले इस लोक में आए शब्दों का उच्चारण करते हुए इस लोक से परिचित होने का प्रयास करेंगे। तदंतर श्लोक उच्चारण शब्दार्थ अनुवाद एवं तात्पर्य प्रियता मति यता भक्ति दास द्वारा सेवार्पण किया जाएगा।
विदुर वाचा विदुर वाचा सुखाया
करमानी करोती। लोकहा
ना
थे सुगम वा अन्या उपा राम
वा
विंद विन देता
भुइया
तता एव दुकम या अतर युग तम भगवान वदे ना।
विदुर वाचा विदुरा वाचा सुखा या करमानी करो।
तिलो को
सुखा या गरमानी करोति। लोको नाथ सुगम बन याद उपर मम बा नता सुका बन्याधुपारममबा बिन्दे ता भुइया दताए बतो का बिन्दे तो भैया तताएबधोका यात्रा युक्तम भगवान बदे न नाम। yaadatrayugtam bagan bdenanaभिदुरावाचा सुखाय कर मानी करोति लोको nate सुकंबन्यादुपरममवa विनदेtaतताएबtuकाम यात्रा योग्तम भगवान बदेननaयदत्रयोग्तम भगवान बदे नाना
न
य द त्र योगदान भगवान वादे मन
न।
प्रभु जी मैं 1 और वैष्णव में 1 और वैष्णव में उच्चारण करें।
भिदरावजाविदुरावाजा खा या कार मणिकार को सुखा कर मानी करो। तिलो को नई सुखम्बान्यादुपारमम बानाते सुखमबन्यारपर बिन दे।
तब या ततय बदुकमयदत्रयुगतम भगवान देन। थैंक यू वैषणवी। maताजूमे krishna kis इसे बोलो मदाजी
ओके कर।
चोरस सौरी कोरस सुखाय का मान करो। किलो को नदेसुकमबनयादुपारा मरवा बिंदे तब या तता बदु कम युक्त भगवान बदेनायदात्रयुक्तम भगवान बदे नना। you like hot धnwayounmuglela on thank यू आए शर्क प्रस्थान करेंगे। मैं इंग्लिश में बट क्लास हिंदी में होगा। विदुरा बाजा विदुर ने कहा सुखाया खुशियाँ प्राप्त करने के लिए कर्माणि कर्म, भौतिक सकाम कर्म करोति। सब लोग करते हैं। लोकहा इस लोक में ना नहीं थे। उन कार्यों से सुकम कोई सुख वा या अन्या किसी और प्रकार के उपाराम भर जाता है। समृति वाह अतिरिक्त विन्देताप्राप्त करता है। भैया उल्टा इसके विपरीत तथा इन कार्यकलापों से निश्चित थे। धुककमदुखयह व अतर। ऐसी परिस्थिति में युक्तम सही, सही मार्ग भगवान है। वदे कृपा करके हमें ज्ञान दिलाइए ना। हम सबको अनुवाद एवं तात्पर्य कृष्ण कृपा श्री मूर्ति अभचरनारविंद्रभकति विधान स्वामी शिलप्रभुपाजीके द्वारा। srelprभुpाdkे hindi vidos मैं पहले अंग्रेजी में कहूँगा हे महान। संत। इस संसार में
हर कोई
भौतिक सकाम कारण कार्य में लगा है। सुख प्राप्त करने के लिए पर देखा जाता है, कि वे उस प्रकार के कार्यों से न तो सुख को प्राप्त करता है। न। तो दुख क कौन खत्म कर सकता है। उल्टा तो ऐसा हो जाता है, उनके कार्य बढ़ता जाता है और कर्म बंधनों में फंसता जाता है। कृपा करके। इसलिए इसलिए कृपा करके आप हमें मार्गदर्शन दीजिये, जिससे कि हमें परम सुख की प्राप्ति हो। अच्छा हिंदी में, शुद्ध हिंदी में ऐसा होगा है। विदुर ने कहा हे महारिशी। इस संसार का हर व्यक्ति सुख प्राप्त करने के लिए सकाम कर्मों में प्रवृत होता है, किन्तु उसे न तो तृप्ति मिलती है, ना ही उसके दुख कोई कमी, दुख में कोई कमी आती है। विपरीत इसके ऐसे कार्यों से उसके दुख में वृद्धि होती है। इसलिए कृपा करके हमें इसके विषय में हमारा मार्गदर्शन करें कि असली सुख के
लिए
कोई कैसे
रहे।
विदुर ने मैत्रे से कुछ सामान्य प्रश्न पूछे किन्तु उनका मूल अभिप्राय यह था। उद्धव ने विदुर से मयित्रेमुनि के पास जाकर भगवान के नाम यश, गुण, रुप, लीलाओं, पार्शद इत्यादि के सारे सत्यों के विषय में जिज्ञासा करने के लिए कहा था। जब विधुर मित्र के पास पहुंचा तो उन्हें केवल भगवान के विषय में पूछना चाहिए था, किन्तु स्वाभाविक विनयशीलता उन्होंने 1 दम भगवान के विषय में नहीं पूछा। प्रत्यु ऐसे विषय पर प्रश्न पूछा जो जनसामान्य के लिए अत्यधिक महत्व का हो सकता है। कोई सामान्य मनुष्य भगवान को नहीं समझ सकता। सर्वप्रथम उसे माया के वशिभूत अपने जीवन की असली स्थिति जाननी चाहिए। मोह में आकर मनुष्य सोचता है, कि वह मात्र सकाम कर्मों के द्वारा सुखी हो। सकत है। किन्तु होता यह है कि मनुष्य, कर्म तथा कर्म फल के जंजाल में और अधिक उलझता जाता है और जीवन की समस्या का कोई समाधान नहीं खोज पाता। इस संदर्भ में 1 सुन्दर गीत है। जीवन का सारा सुख प्राप्त करने की महती इच्छा के कारण मैंने यह घर बनाया किन्तु दुर्भाग्य व सारी योजना ध्वस्त हो गई, क्योंकि घर में अप्रिय ित रूप से आग लगा दी गई। प्रकृति के नियम ऐसा है कि हर व्यक्ति भौतिक जगत में योजना बना कर रहने से सुखी बनना चाहता है। किन्तु प्रकृति का नियम इतना क्रूर है कि यह उस योजना में आग लगा देता है। सकाम कर्मी अपनी योजनाओं से सुखी नहीं रहता, न ही सुख के लिए उसकी निरंतर दौड धूप से उसे कोई तृप्ति मिलती है। ओम ज्ञान तिमिर।
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10 में श्री गुरुवे नम, श्री चैतन्य मन आबस कम स्थापितमयनाभुतले स्वयम रुपकदामयम ददाति स्वपदाधिकम वन हम, श्री गुरु, श्रीयुत पद कमल, श्री गुरु वैश्णव,
श्री
रुपम सागर जा तम सह गना रगुनातामबिदाम ताम स जीवम सादबइतमम साबदुतम परिजना सहित कृष्णा चैतन्य देवम, श्री राधा कृष्ण बादाम सह गना ललिता, श्री विशाका वेतम च
हे कृष्णा करुणा दु दिन बंधु जगत
पते गोपेश गोपिका कान्ता राधा कांत नमस्तुते।
तब त कांचन गोरांगी राधे वृंदावनेश्वरी िश्
भानु सुते देवी प्रणमामि हरि प्रिये वांचा
कल पतरु व्यश कृपा सिंधु बे बज
पतिता नाम प बने ब्यो वैश्णवेब्योनमुन।
हम जय, श्री कृष्ण चैतन्य प्रभु नित्यानंद,
श्री अ्बतगदादरा, श्रीवा शादी गौरव भगत,
हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा, कृष्णा, हरे, हरे
हरे, रामा, हरे, रामा, रामा, रामा, हरे,
हरे
भूते महा दे या ma boरobebo निर्माया से तेयार बनते गुना सोना सा सोडा 7 का सोलान क्रस्ट भगवान वचन सिमे सोलान कृष्ण भगवान वचन सिमे सोलान
कृष्ट भगवान बचन सिमी अकेला जगत गुरु बचन से अमान अलंकित करि बार शमता तुमा तब कृपा हो मोराखाताशुतहोय सोनी यस बार शोक धुखजेगुचिबे। mokamkrotibacalam paglgaterinyadepa mambdeshregurund tarini mokeraagmnserullas dosamimodmakroni das hi krishna अंतरराष्ट्रीय कृष्ण भावना भावित संग इस कौन हरिद्वार यात्रा के द्वारा प्रस्तावित यह विशेष श्रीमद भागवत सत्र में आए आप सब भक्तों का, धर्म, प्रेमियों का, कथा, प्रेमियों का, श्रोताओं का, सोशल, मीडिया के माध्यम से सुनने वाले श्रोताओं का भी और भविष्य में रिकॉर्डिंग के माध्यम से सुनने वाले श्रोताओं का भी। हृदय की गहराई से प्रेम पूर्वक हार्दिक स्वागत करते हैं। कहते हैं कि जब संसार के लोग हमें चुनते हैं तो हमें संसद में स्थान मिलता है, लोकसभा में स्थान मिलता है, राज्यसभा में स्थान मिलता है। और जब भगवान हमें चुनते हैं तो हमें हरिद्वार में हरिदवार यात्रा, ट्वेंटी ट्वेंटी, थ्री में, दोपहर के सत्संग में स्थान मिलता है। इसलिए जो हरिद्वार यात्रा ऐसी करता है, प्यार वो सत्संग से कैसे करेगा इनका जो राधा पार्तसार्तीऐसी करे, प्यार वो सत्संग से कैसे करे। इनकार जो श्रील प्रभुपाद जी से करे, प्यार वो स सत्संग से कैसे करें इनका भक्तों हम सब अत्यंत भाग्यशाली है क्योंकि हम उस थान पर है जिस थान पर सत्संग पर, सत्संग सत्संग पर सत्संग सत्संग पे सत्संग हुआ करता है। इस पूरे ब्रह्मांड के सबसे बड़ा सत्संग भागवत कथा जो है 4 कुमार द्वारा अनुष्ठान किया गया था और ये हरिद्वार में हुआ था। बद्र आश्रम से 4 कुमार आये थे और नारद मुनि जो है। आप सब को पता है भक्ति देवी को साथ वृंदावन से लेकर आई थी। भक्ति देवी के साथ 2 वृद्ध सज्जन थे, पर वो वृद्ध दिखने में थे, उम्र में कम थे, वे थे ज्ञान और वैराग्य। भक्ति देवी से कहा आओ हरिद्वार छोडो गर्दवारआओ हरिद्वार। तो हरिदवार में जब भक्ति देवी आये तब 4 कुमार यहां पर जय राधा माधव कर रहे थे और पूरा जो है पंडाल तो पंडाल पूरा हरिद्वार भर चुका था। ये सत्संग दुनिया का रिकॉर्ड, वर्ल्ड रिकॉर्ड, गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड को भी तोड़ने वाला स संघ था। इसमें सुगदेव गोस्वामी महाराज थे, गणेश जी थे, कार्तिक थे, शिव जी सब उपस्थित थे। वन ऑफ द बिगस्ट बिगस्ट सत्संग। तो यहाँ ये धाम जो है इस दाम पर, वृंदइसदामपे जो है भक्ति देवी आई थी और ज्ञान और वैराग् जो है उनको अपना बल प्राप्त होता है। और यही स्थान से जो है भक्ति जो है भागवत का श्रवण करके, पूरा ज्ञान वैराग्य को हष्ट पुष्ट करके।
निकले।
तो हम उस स्थान पर है जहाँ पर सत्संग पे सत्संग सत्संग पर सत्संग हुआ करता है। हम उस स्थान पर है जहाँ पर विदुर मुनि मैत्र ऋषि से मिले और सत्संग पे सत्संग सत्संग पर स सत्संग से सत्संग हुआ। तो हम यहाँ पर ये आचार्यों के द्वारा देख रहे हैं। चाहे 4 कुमार हो ये भी आचार्य है। और अगर आप विदुर जी को ले, यह भी यमराज है, यह भी आचार्य है, ये हमें शिक्षा देते हैं। अगर हम रिद्वार आये तो हमें क्या करना होगा, सत्संग करना होगा। तो हम स्थान पर आए। और ये हमारा अहोभाग्य है। सौभाग्य है कि हम जो हैं स्थान पर, बैठे, पर स्थान का महत्व। विदुर जी हमें समझा रहे हैं। अगर हम आये तीर्थ में, तो हमें बड़े संतों से है। ज्ञान लेने का प्रयास करना चा। सत्संग में अपने आप को उपस्थित रखना चाहिए और उसका पूरा लाभ लेना चाहिए। विदुर जी कौन हैं और माथोरिशिकौन है। ये यहाँ पर कैसे आये? यह भागवत का 1 विषय है। श्रीमद भागवतम का आरम्भ होता है, जब परीक्षित महाराज को श्राप मिलता है। 7 दिन पश्चात तक शक आपको डस लेगा और परीक्षित महाराज जी दंड का मंडल लेकर लंगोट पहन कर अपने राज दरबार को छोड़कर पहुंच गए। सुखताल हरिद्वार गंगा के तट पर और यही स्थान पर जो है, सुखदेव गोस्वामी राज्य भी आते हैं। तो यह जो स्थान है, हरिद्वार सुखताल यहाँ पे भी सत्संग हुआ है। तो मैं बता रहा था कि विदुर जी और मित्र ऋषि का मिलन कैसे हुआ? यह भागवत का पहला प्रश्न जो है, अपने गुरुदेव से रखते हैं। जो व्यक्ति की मृत्यु निकट है, मेरे मान पुरुष उसका कर्तव्य है।
क्या
जितने भी संत आये थे, जितने भी ब्रह्म रिशि उपस्थित थे, जितने भी देव रशि उपस्थित थे, जितने भी महा रिशि उपस्थित थे, उन सब से 1 ही प्रश्न पूछा गया था। अब से लेकर सातवां दिन मेरा मृत्यु है। और जिस व्यक्ति का मृत्यु निकट है, उन्हें करना क्या है। इसका उत्तर किसी ने दिया नहीं। सुखदेव गोस्वामी महाराज जब आए, तब उन्होंने उसका उत्तर दिया और कहा कि जिस व्यक्ति की मृत्यु निकट है, उनको क्या करना है, श्रवण कीर्तन करना है। भगवान के विषय में तीव्रता से जानकारी लेने का प्रयास करना चाहिए। अकाम सर्वकाम वा मोक्ष काम उतार दी, तीव्र न भक्ति होगे। यह पुरुष परम तीव्रता से भक्ति करना चाहिए। चाहे काम न हो या कोई काम ना, काम, सर्व काम हुआ या बहुत सारे काम ना हो, तब यह प्रश्न का उत्तर मिलते ही दूसरा प्रश्न। यह था दुनिया बनाने वाले, दुनिया काहे को बनाए क्या। तेरे दिल में समा 2 मत्वपूर्ण प्रश्न जो है भागवत का पहला 2 प्रश्न। परिक्षित महाराज द्वारा पहला मैं। ये शरीर में क्यों हूँ? दूसरा मैं यह ब्रह्मांड में क्यों हूँ। यानि कि ये शरीर में मुझे करना क्या है? इस ब्रह्माण्ड में मुझे करना क्या है? इस शरीर में में रहते हुए मेरा कर्तव्य क्या है? इस ब्रह्मांड में रहते हुए म मेरा कर्तव्य क्या है? दूसरे शब्दों में इस शरीर में हमें करना क्या है? यह शरीर क्यों मिला है? ये ब्रह्माण्ड क्यों बनाया गया है? खास करके यह मनुष्य शरीर हमें मिला है। भगवान की भक्ति करने के लिए हमने हाल ही में आप सब वैष्णो की कृपा से, गुरुदेव के स, कृपा से, प्रपा जी की प्रेरणा से हमने ग्रंथ लिखा। उस ग्रंथ का नाम है मनुष्य शरीर। 1 विचार करने वाला यंत्र ह्यूमन। बॉडी इस थिंकिंग, मिशन थिंकिंग। अबाउट कृष्णा। ये मनुष्य शरीर जो है। 1 यंत्र है, जिसमें हम कृष्ण के बारे में निरंतर स्मरण कर सकते हैं। ये मनुष्य शरीर खाने के लिए नहीं है, यह मनुष्य शरीर सोने के लिए नहीं है।
न?
तो यह मनुष्य शरीर बच्चा उत्पन करने के लिए है, न तो यह शरीर रक्षा करने के लिए, लड़ाई झगड़ा करने के लिए है। यह मनुष्य शरीर जो है, कृष्ण के बारे में चिंतन करने के लिए है। और ये शरीर में हम कर सकते हैं। खाने के लिए। शरीर जो है वो हाथी का है, हाथी का शरीर जो है, खाने वाला यंत्र है। और मच्छर का शरीर जो है। बच्चा पैदा करने वाला यंत्र है। और पोलार बार बालू का शरीर सोने वाला यंत्र है। और रक्षा करने वाला यंत्र जो है वो कचवे का है। मनुष्य शरीर इतना फ्रजायल है। अन्दर से, बाहर से। हम अपना रक्षा नहीं कर सकते हैं। हमें कपड़ा चाहिए और खाने के लिए उबला हुआ चीज या कुक फुट चाहिए। बताइए है। कोई मनुष्य को छोड़ कर जो कपड़े पहनते हैं। हाथी, टीशर्ट शार्ट, स्पेन की जॉगिंग करते हुए देखा आपने, नहीं तो मनुष्य को कपड़े की आवश्यकता पड़ती है। और आपने देखा कि कोई बॉयल कुकिंग करके रोटी समोसा। ये सब बनाते हैं। नहीं, जो भी मिला प्रकृति से लिया, पर हम को कुक फुट चाहिए। पर मनुष्य शरीर जो है। ये इसमें 1 खूबी है। हम हर परिस्थिति में, हर स्थान पर और हर समय भगवान के बारे में चिंता कर सकते हैं। ये मनुष्य शरीर की खूबी है। तीव्रेंनाऔरभी, तीव्रता के साथ यह पहले प्रश्न का उत्तर मिल गया। सुखदेव गोस्वामी महाराज से बना ये ब्रह्मांड, यह भौतिक जगत, यह जगत किसने बनाई, क्यों बनाई, किसने बनाई? तो मनुष्य शरीर में मिला है भगवान की भक्ति करने के लिए। फिर यह भौतिक जगत का विचार जो प्रश्न पूछा गया था, उस प्रश्न के उत्तर देने से पहले सुखदेव गोस्वामी महाराज कहते हैं कि आपका ये जो प्रश्न था, पहला प्रश्न है। इतना। मुझे अच्छा लगा कि उसके उत्तर देते देते मैं मंगला चरण करना भूल गया। पर दूसरा प्रश्न का उत्तर देने से पहले मैं मंगला चरण करूँगा। पूरा मंगला चरण करने के बाद कहते हैं अब आपका प्रश्न का उत्तर मैं दूंगा। पर मैं। इस प्रकार, ऐसी दूंगा, यही प्रश्न, ये दुनिया बनाने वाले, ये दुनिया काहे को बनाया। क्या? तेरे दिल में समाया। ये प्रश्न नारद मुनि ने देव ऋषि नारद मुनि ने अपने पिता, अपने गुरुदेव ब्रह्मा जी से पूछा। और ब्रह्मा जी ने उत्तर देते हुए कहा यही प्रश्न जो है। विदुर जी ने मात्र ऋषि से पूछा, विदुर जी ने मात्र ऋषि से पूछा। विदुर जी ने मेरे मेरे, मेरे वो क्या लगते हैं, बड़े काका लगते हैं, मेरे ग्रैंड फादर के ग्रैंड ग्रैंड फादर लगते हैं। विदुर जी, विदूर जी, महात्मा माइत्ररिषि, महात्मा ये दोने के मिलन के बारे में बताइए। तब जो है। तीसरा सिकंद आरम्भ होता है। उद्धव जी और मैत्र ऋषि का मिलन कब बनाता है। पर ये मैत्रऋशिउद्धवजी मिलते हैं। तो उद्धव जी कहते हैं कि श्रीमद भगवत गीता के दशम स्कंद के बाल लीला, वृंदावन लीला, द्वारिका लीला, औ और मथुरा ले। तीनों सुनाते हैं, फिर आगे कहते हैं और कुछ मैं नहीं बता पाऊंगा। आप कृपा करके मात्र ऋषि हरिद्वार में है। गंगा के तट पर, उनसे जाकर मिलिए यमुना के तट पर उद्धव जी से कृष्ण के बाल लीला, इत्यादि श्रवन कि पर उद्धव। जी हाथ जोड़े संत। महात्मा विदुर जी से कहा कि मैं अब आगे आप से कृष्ण के बारे में कुछ नहीं कह पाऊंगा। 2 कारण थे। 1 तो उनको लग रहा था विदुर जी मेरे चाचा लगते हैं, रिश्ते में वो मेरे पिता के समान हैं। मैं उनको किस प्रकार से उपदेश दूं या किस प्रकार से उनके प्रश्न का उत्तर करूं। मैं उत्तर देने लायक नहीं हूँ। यद्यपि वो हैं, पर फिर भी इसे कहते हैं। 1 मर्यादा होता है मर्यादा, वैदिकम बोलते है, छोटे मुंह और बड़ी बात नहीं। और ये वैष्णव हैं। तो उन्होंने अपने शष्टाचार को और दूसरा कारण यह था, उनको पता था जब कृष्ण अपने अंतिम लीला कर रहे थे, तब उन्होंने कहा विदुर, विदुर, विदुर, विदुर, विदुर जी आएंगे, विदुर जी आएंगे। तब उन्हें जो है मैत्रोरषिके पास भेजना। तो विदुर जी वो महात्मा है जिन्हें अंत समय में भगवान स्मरण करते हैं। इस बात को सुनकर विदुर जी गदगद हो गए कृष्ण, कृष्ण, कृष्ण, अंत, काले, जमा, मेव, स्मरण, मुवा, कलेवर, अंत समय में सब कृष्ण का स्मरण करते हैं। पर भगवान कितने दयालु हैं, कृपालु हैं वो मुझे स्मरण किए और गदगद होने लगे। और के ठीक है मैं मात्र ऋषि से मिलने जाऊंगा। यमुना के तट पर उद्धव जी और मैत्री का संवाद। और अब जो है गंगा के तट पर आते हैं। और मात्र ऋिशिऐसीमिलते है। मैत्री रिषी से मिले गंगा के तट पर मैत्रऋिशिकेआश्रम में पहुँच गए। तो मैथ रिषी अपने आसन से उठे और विदुर जी को आलिंगन किए और विदुर जी ने दंडवत प्रणाम किए, मैथ्रऋशिनेदंडवत प्रणाम किए और दोनों 1 दूसरे को मिले और दोनों गदगद होने लगे। कहते हैं कि 4 मिले 64 खिले, 4 मिले, 64 खिले, 20 कर हाथ, जोड़ भक्तन से भक्त मिले खिले 7 करोड़। इसका अर्थ है 2 और 2। अंक मिलते है तो कितने हो जाते हैं। 4 मिले 32 और 32, 64 खिले, 4 मिले, 64 किले, 20 कर हाथ जोड़, 10 उंगली, 10 उंगली कितने हुए, 20 कर हाथ और 11 शरीर में कितने रोम है? एग्जैक्ट ली 3 करोड़, 50 लाख गिन लो तो 3 करोड़ और 3 करोड़ कितना, 7 करोड़ रोठे खड़े हो जाते। तो भक्त भक्त से मिलते तो बहुत प्रसन्न हो जाते है। और मिलते तो क्या करते हैं। ये जो है विदुर जी का भाव, हरिद्वार में आने के बाद भाव क्या होना चाहिए? मच्चितामदगताप्राना
भोदयंता परस्परम
कतयंतशमालेत्या तुश्यंतिचारमंतिचा? 1 दुसरे से प्रश्न पूछते हैं। विदुर जी को आसन दिया गया था। विदुर जी मैत्र ऋषि से को उनका गुणगान करते हैं। और ये जो प्रश्न है प्रश्न पे, प्रश्न प्रश्न पर प्रश्न पूछते हैं। तो पहला प्रश्न यह होता है। इस संसार में हर कोई जो है सुख प्राप्त करने का प्रयास कर रहा है। हर कोई इस सभा में जो कहता है कि बस बहुत खुशी हो गई
है,
बहुत खुशी हो गई है। कभी कभी बोलता है, बहुत मिठाई हो गया। थोड़ा मिर्ची लाओ, बस, बहुत खुशी हो गई है। थोडा सा टाइफाल्डहोजाए, थोड़ा सा जो है, जॉन्डिस हो जाए। हर कोई मायका लाल, हर कोई पहलवान है, कोई खतरे के खिलाडी, जो कहता है कि थोड़ा और कष्ट दे, पर धन्य है कुंती महारानी ये सब हिम्मत वाले हो या खतरे के खिलाड़ी हों। उन्होंने जो प्रार्थना किया है आज तक भूतों का भविष्य, किसी ने ऐसा प्रार्थना किया। उन्होंने सीधे भगवान से कहा, मुझे क्या चाहिए? कहा कि कष्ट पर कष्ट विपत्ति संत, आज तक ऐसा किसी ने प्रार्थना नहीं की। तो कहने के तौर पर ये विदुर जी कह रहे हैं कि देखा जाता है कि हर कोई कहता है कि हमें खुशियाँ चाहिए।
पर
हर कोई खुशियां प्राप्त करने के लिए प्रयास कर रहा है। पर दुख हाथ लग रहा है। आप कृपा करके हमें जो है बुद्धि दीजिए, ज्ञान दीजिये, जिससे कि हम परम सुख को प्राप्त कर सके। ये पहला प्रश्न, फिर उसके बाद भगवान के बारे में, भगवान के अवतारों के बारे में, भगवान के अलग अलग प्रकार के जो है, विस्तार के बारे में, प्रश्न करते हैं इन्ही प्रश्नो का। तार तो इन प्रश्नों को जैसे ही मैत्ररिशि सुनते हैं। तो कहते हैं कि वे 2 ये प्रश्न जो आप पूछ रहे हो। ऐसा नहीं है कि आपको इसका उत्तर पता नहीं है। ये प्रश्न आप इसलिए पूछ रहे हो भावी पीड़ी में इस संवाद को जो सुनेंगे, उन्हें भगवान, भगवान का, भक्ति, भक्तों का महिमा जो है, प्राप्त होगी। परीक्षित महाराज भी अगर प्रश्न पूछ रहे हैं। क्या उनको इतना भी पता नहीं है कि विदुर और नायतरषिकासंवाद हुआ है? या उनको भगवान के बारे में पता नहीं है। परीक्षित महाराज उस कोटि के महात्मा हैं जो मां के गर्भ में भगवान के दर्शन किए और बचपन में खेल। खेल में वे जगन्नाथ जी के साथ खेलते थे, जगना जी के विग्रह के साथ खेलते थे। और वो हर 1 व्यक्ति को देख कर ये कृष्ण जिन्होंने मेरा रक्षण किया, परखते थे, इसलिए उनका नाम क्या हो गया। पर वो सुनना चाहते थे। सुखदेव गोसाई महाराज किस प्रकार से इन बातों को समझाएंगे। इसी प्रकार से विदुर जी ये महात्मा है। तो कहा कि यह प्रश्न आपने पूछा, इससे यह पता लगता है कि आप कोई साधारण व्यक्ति नहीं हो। फिर बताते हैं आप जो हैं साक्षात यमराज हो और मांडव ऋषि के द्वारा आप स्थापित हो। क्यो न मिला यमराज को क्यो यमराज ने गलती किया? यमराज कैसे गलती कर सकते हैं? पर यह भगवान का यमराज यमराज कौन होते हैं? यम नियम को तोड़ते है, उनको यमराज जी तोड़ते है। तो यमराज जी बोले की मारो काटो पीटो यही करते करते थोड़ा तंग आगे भगवान से प्राथना मुझे। श्रवन कितन करना है? श्रवन किरन 1 बार ऐसा हो गया। मांडव ऋषि आ गए थे यमराज के दरबार में। यमराज जी से पूछा, जहाँ तक मैंने अपने होश को संभाला, मैंने कोई गलती नहीं की। यमराज जी आप बताइए मेरी क्या गलती है कि मैं यहाँ पर आया, जेत्रगुपजी सरकार फाइल निकाला जाए। इनके जीवन में तो कोई गलती है ही नहीं। यमराज। जी हां, जब ये 3 साल का था, हाँ हाँ कितने साल का, 3 साल का था। इन्होने कांटे को लेकर 1 चीटी के आर पार किया था। मानव रशि को आया गुस्सा, यमराज बच्चा कोई गलती करता है, उस गलती को गंभीरता से लिया नहीं जाता है। यमराज होकर। आपको पता नहीं 5 साल से कम अगर कोई बच्चा होता है, नादान होता है, वो कोई गलती करता है तो से दंड दिया नहीं जाता है। आप यम करने के लायक नहीं हो, अपना लायक हो। मैं श्राप देता हूँ, श्राप देता हूँ, श्राप देता हूँ। तो यमराज खुश हो गया। अच्छा अब आप यमराज नहीं आप, शूद्र के पुत्र हो गए तो शूद्र पुत्र बनते है। व्यास मुनि के पुत्र बनते हैं। और आपको पता है किस प्रकार से, विश्वदेव के कहने से और उनकी माता सत्यवती के कहने से व्यास मुनि आए थे। शुद्ध रानी के पुत्र के रूप में। विदुर तो ये था पर मानव रिषि ने उस सभा में कहा आज से मैं यह कानून और कठोर कर देता हूँ। 1 साल से 5 साल तक कोई कितना भी बड़ा गलती करे उसे कर्म का जो है नियम या फल नहीं लगेगा। यानि कि छोटे बच्चे कितने भी फाइटिंग करे मर्डर करे उसका सजा किसी को नहीं लगेगा। और 5 से लेकर पंद्रह तक जो भी गलती बच्चा करेगा उसका दंड उसके पिता जी को मिलेगा। इसीलिए चानक के पंडित बोलते हैं की बच्चा जब 5 साल से पंद्रह होता है उसे मारना चाहिए नहीं तो आप पिता जी को मार पड़ेगा। अगर बच्चा गलती करेगा तो पिताजी को गलती दंड पड़ेगा। आरोप। आज समय ऐसा चल रहा है कि बच्चों को अगर मार दे। त तो पैरेंट्स को ही जो है, दंड मिलता है। भारत में ये कानून लागू होने ही वाला है पर अमेरिका में लागू हो चुका है।
1 बार,
1 बच्चा, 1 पिता जी जो हैं अपने परिवार के सहित वापस इंडिया आ गया और जैसे ही डेल्ली में फ्लाइट लैंड किया यानि कि अमेरिका से आया था वो बच्चा 13 साल का था। जैसे ही फ्लाइट डेल्ही में जैसे ही लैंड हुआ सीटबेल्ट निकाला नहीं बेटे को मार, मार करके मारा, मार मार करके मारा, बेटा चिल्ला रहा था। क्यो रोस्टर बोला नहीं नहीं छोड़ो आप लोग बीच में मत पड़ो माँ भी बोला क्यों मार रहे हो नालायक। अमेरिका में। मैंने जब ये बात 10 साल का था मैंने गलती करने के लिए उसको मारा तो उन्होंने नंबर घुमाया पुलिस मुझे पकड़ा और मेरी पिटाई किया। अब मोबाइल ले जिसको बुला ना बुला मार मार के मारने लगा। देखिये 5 से लेकर पंद्रह तक अगर कोई बच्चा गलती करता है इसका दंड किस को मिलेगा माता पिता को तो इसलिए बच्चों को कभी कभी प्रेम से तो कभी कभी कटोरता से पर उनको गलती करने का मौका नहीं देना नहीं तो दंड हमें पड़ेगा। तो इसके बाद पंद्रह के बाद जो भी जो करता है उनको अपना दंड मिलता है। महेंद्र ऋषि। अब विदुर जी जो है, बहुत खुश हो गया। चलो बे मैनेजमेंट समय फ्री हो गया और बन गए वो त्ेतराष्ट्रके छोटे भाई और पांडू महाराज के छोटे भाई पर। मैत्र ऋषि और विदुर जी, ये 2 महात्मा हैं जिन्होंने दुर्योधन को भरी सभा में सबके सामने डाटा है। और इस ब्रह्मांड में और कोई नहीं जो दुर्योधन को डांटने वाला था। दुर्योधन का जो भय था, पूरे ब्रह्माण में छाया हुआ था। दुर्योधन का गुस्सा सबको पता था। पर माइक रिषि ने कहा, धृतराष्ट्र से अपने मूर्ख पुत्र को कहो कि वे जो है गलती पर गलती न करे, पांडों को अपन राज्य दे। ऐसे कहने वाला और कोई नहीं था। दुर्योधन को आया। गुस्सा बोला कि इसे तो मैं जान से मार डालूंगा, पर ये मेरे चाचा लगते हैं, छोटे चाचा ठीक है, राज्य से बाहर कर लेते है, महल से बाहर कर लेते है। विदुर जी को आया, बहुत खुश हो गया। बोला इस नालायक का मुंह देख देख के मैं तंग आ गया। बोला मैं तीर तियारा करूंगा इस पापी का संग करता रहा। मैं पवित्र हो जाऊंगा। वैसे विदुर जी को पवित्र होने की कोई सर्टिफिकेट नहीं था। वो पवित्र था। भ्रमण करते करते करते पहुँच गए। यमुना के तट पर। उद्धव। महाराज ने कहा, आप जाइए कहा हरिद्वार गंगा के तट पर आइए, तो गंगा के तट पर मैट्रो रिशि। मैत्र रिशि कौन है। वो वो महात्मा है जिन्होने दुर्योधन को डाटा था। उन्होंने। जब 5 पांडे वन वन भटक रहे थे। मैत्र रिशी से मिले मैत्री, महाराज, महाराज मैत्री का संवाद। मैत्र रिशी ने कहा, मैं जाऊंगा दुर्योधन को समझाऊंगा आये हस्तीना। दुर्योधन को खूब डांटने लगे। जब मै आये तो उनका पाद पक्षालन हुआ, उनका आसन दिया गया था और उनका स्तुति गाया गया था। और जब कहने के लिए मौका दिया गया था दुर्योधन को। उन्होंने डाटा 5 पांडव को अपना राज्य दीजिये। आप जो कर रहे हैं, वो गलत है, ये सही नहीं है। आप करो। पर दुर्योधन कुछ बोल नहीं रहा था, कुछ नहीं बोल रहा था। दुर्योधन अपने जांग के ऊपर हाथ फैला मार रहा था, ठप ठप रहा था, ठप ठप रहा था और पांव से जमीन को रोच रहा था। इतने बड़े संत का अपमान हो रहा है। मैं ने कहा, मुल्क दुर्योधन, मेरी बातों को अनादर करने के कारण, अपने जांग पे, हाथ मारने के कारण। यही जांग जो है, आपको 12 साल के बाद भी जो है अपने गदा से तोड़ेगा। ये 2 महात्मा है जिन्होने दुर्योधन को डाटा है, बाकी इनके अलावा और कोई इस ब्रह्माण्ड में विश्व पिता में कुछ बोल देगा। तो इस प्रकार से ये 2 महात्मा भगवान के द्वारा बहुत, बहुत, बहुत, बहुत पूजनीय हो गया। भगवान की नजरों में। वे आ गए। क्यूँकी? वो दुर्योधन जिन्होंने भक्तों को कष्ट दिया
है,
उसको कोई डांट भी नहीं रहा है। तो डांटे। तो इसलिए जब भगवान अंत लीला कर रहे थे, मइत्रऋिषि को साथ बुलाये थे, उद्धव साथ में थे और मैत्रऋिषिवहाँ पहुँच गए थे। भगवान ने बहुत बहुत सारे उपदेश्य दिए थे। और कहा बिदूर। बिदूर बिदूर, विदूर, बिदूर विधु, विधु रायेंगेविधुरायंगे, उनको उनको जो है। बताना मैंने याद किया था, मैंने याद किया था, फिर भगवान अपने धाम गमन की तो मैत्र रिशि विदुर जी मैत्री, विदुर जी बैठे हैं तो दोनो महात्मा हैं, विदुर जी जो हैं ऐसे महात्मा हैं जिनके घर में भगवान जो छिलका खाये थे। देखिये इतनी बड़ी संत हैं विदुर जी। माइत्रा रिषि के बारे में वर्णन आता है कि मात्र रिषि का नाम मात्र इसलिए बना क्युकी माँ का नाम मित्रा थी। वो बहुत बड़ी वैष्णवी थी मित्रा का पुत्र, इसलिए मात्र नाम पड़ा पर मात्र रिषि जो है। महात्मा बनने से पहले पिछले जन्म में वे 1 सूर्य देव के उपासक थे, उसके पिछले जीवन में वो कीड़े थे। बदिकाश्रम के नजदीक मंगल आरती के समय व्यास मुनि तेज गति से चल रहे हैं। मंगल आरती में पहुँचने के लिए, समसारा दावा गाने के लिए। तो देख रहे हैं कि 1 चीटी जो है बहुत तेज गति से रोड क्रॉस कर रहा है। बोला यह चीटी इतनी तेज गति से जा क्या रहा है, कहाँ कहाँ रहे हो? क्योंकि जैसे ही वेद व्यास मनी ने देखा चीटी को देखा की इसका तो मृत्यु भी है। तो चीटी से पूछे, अब देखिये वेदव्यास मनी चीटी से बात कर रहे हैं और चीटी वेदव्यास मनी से यानि चीटी मनुष्य के बा बा किया है या वेद व्यास मनी ने चीटी की भाषा में बात किया। ये 1 बहुत रिसर्च का तो जो भी है। तो वेद व्यास मनी ने चीटी ऐसी कहा कहाँ भाग रहे हो। चीटी ने कहा देखो वेद व्यास बनी क्या देख रही। यह चीठी का मृत्यु निकट है आरोप चीटी का। मेरे काम से मैं सुन रहा हूँ की थोड़ी देर में 1 बेल गाड़ी आई गई और वो बैल गाड़ी आने से पहले मैं आर पार कर लूं तो मैं सेफ रहूंगा बोला मुर्ख आपका मृत्यु तो लिखा हुआ है तो मृत्यु लिखा। तो मैं क्या करूँ? तो बोला भगवान का स्मरण करो। ये चीटी के शरीर में मैं क्या भगवान को स्मरण करूँ। तो बोला मृत्यु तो आपका है पर मैं आपको आशीर्वाद देता हूँ कि आप जो है तुरंत मृत्यु को प्राप्त क रो। अगले जन्म आपका मनुष्य होगा चीटी से, वो अगले जन्म में मनुष्य बना और वो व्यास मुनि के उपास व्यास मुनि के अन्याय बने और सूर्यदेव के उपासक बने, फिर से वो जन्म लिए और 1 महान वैष्णव के जो है पुत्र बने और इसमें वे पराशर मुनि उनके गुरुदेव बने, व्यास मुनि उनके मित्र बने। तो ऐसे महात्मा मित्र ऋषि अब जो है विदुर जी के पास बैठे हैं और भगवान महित्रशि को इसलिए याद करते हैं क्योंकि वे 1 ऐसे सज्जन थे जिन्होंने दुर्योधन को डांटा था और विदुरजी मैत्र ऋषि का संवाद यही हुआ। तो विदुर और मैत्र रिषि के संवाद से हमे ये शिक्षा लेना है कि जब भी हम दाम में आए तो हमें जिज्ञासा करना चाहिए, प्रश्न पूछना चाहिए और अपनी भक्ति को वर्दन करने का प्रयास करना है। मच्छितामदगताप्राना बोदयंतपरस्प हम कथैयंतशमामनित्यम तुष्यनटीचारमन टीचा विदुर जी के क्या क्या गुण है मैथरऋषिके क्या क्या गुण है। विदुर जी बड़े विनंब्रहैबड़े, शैंशिलहैऔर सब को आदर देते हैं। और इस प्रकार से अच्छे गुणों से युक्त थे। श्रवन में उनका अपार रुचि रहा। ऐसे विदुर जी जो है बार बार पांडवों की रक्षा करते रहे। विदुर जी 1 महात्मा थे। जब दृतराष्ट्वदुर्योदन ने कहा आपके लिए हमने रक्षा ग्रह बना के रखे हैं। आप यहाँ ये महल छोड़कर। उस महल पर जाइए। विदुर जी ने इंग्लिश में कहा। वह समनी लिखते हैं। मलेचभाषामें विदुर जी ने बात किया। bola, then when the house is an fir, what the rat will do? यानि कि जब घर में आग लग जाएगी तो चुआ क्या करेगा? तो युदिश्टमराज इंग्लिश में आंसर क्या? the rat will make a hole and गेट आउट फ्रॉम the other side ऑफ़ द हाउस, दोनों स्माइल के बाकी सब लोग संस्कृत जानते थे। 5000 वर्ष पहले अभी उल्टा हो गया, सबको इंग्लिश आता है और कुछ सीक्रेट बात करना है। तो संस्कृत में बात करना होगा। तो सच में मलिक भाषा में बात किया था। तो विदुर जी पग पग पर 5 पांडों का रक्षा किया था। इसलिए भगवान जो है जो भक्तों को हमेशा याद रखते हैं, उनकी रक्षा करते हैं, भगवान उनका उन्हें याद करते हैं और उनकी रक्षा करते हैं। तो इस प्रकार से विदुर जी को स्मरण किए थे। विदुर जी अनेक प्रश्न पूछे थे। और ये इस प्रश्न का उ में देते देते। सृष्टि का निर्माण का वर्णन आता है, भौतिक जगत का सर्ग विसर्ग आता है। और किस प्रकार से द्रु, महाराज और उत्तानपाद स्वयं मनु। इनका वंशज का वर्णन आता है। और इसके बाद पतु महाराज का वर्णन आता है, प्रचेतास का वर्णन आता है। प्र 50 का वर्णन करते करते प्रचेता का कथा कहते कहते महेंत्ररषि कहते हैं कि प्रचेतस के दरबार में नारद मुनि आये। और जिस दिन नारदमुनि प्रचेतस के दरबार में आये थे, उस दिन पूरे ब्रह्मांड में 1 खबर फैल गया। ध्रुव द्रुवा ध्रुव जो है अभी भगवत, धाम गमन कर रहे हैं। ध्रुव महाराज जो अपने जीवन को सफल कर दिया। ध्रुव महाराज जो है मृत्यु के ऊपर, मृत्यु के सर के ऊपर, पाँव रख कर। अब वाइकुंटकीऔर जा रहा है। वाइकुंटकीऔरजारहा है मृत्यु के ऊपर जय प्राप्त किया किसने ध्रुव महाराज और उस सभा में नाराज मनी, ना मेरा शिष्य प पास हो गया, एग्जाम पास कर दिया, फाइनल, एग्जाम पास कर दिया, गुरु नाचने लगे। तब यह भी वर्णन आता है कि मोबाइल में क्या बोलते हैं। आजकल वायरल होने लग गया कि द्रु वैकुंड धाम जाने से पहले उनकी मां वैकुंट चली गई। त ये कथा जब सुना मैत्र ऋषि से, तब विदुर जी को अपने बड़े भाई या भागवत में वर्णन आता है। भागवत का तीसरा स्कंद और चौथा स्कंद विदुर मैत्र सबसे बड़ा संवाद है यह। और यह संवाद बहुत जो है। भक्ति से लबालब भरा हुआ है और आध्यात्मिकता से लबा लब भरा हुआ है। ये प्रेम से लबालब भरा हुआ है। इसमें मारधाड़ और कॉमेडी भी है। मारधाड़ क्या है? वर भगवान का कता आता है? और वराह भगवान ने किस प्रकार से जो है किसको मारा हरणयाक्सको मारा यह था दुनिया का सबसे पहला झापड आप जो है उत्तर प्रदेश या डेली वासियों को पता नहीं पर महाराष्ट्र में ये बहुत ही फेमस है कान के नीचे पाट करके बजाना क्या बोलते हैं काना काली लागू क्या अगर कोई समझने में देरी करता है थोड़ा सा कम बुद्धि वाला बताए कान के नीचे लगाऊंगा 11 जाता है दुनिया का सबसे झापड़ जो है तप्पड ये वर भगवान ने किसको मारा था हिरणाक्ष को और भागवत में जैसे ही उसको झापड़ लगता है तो उनके 9 द्वार से जो है खून बहने लगा और 9 द्वार से सॉलिड लिक्विड और ग पास निकालने लगा और ऋिणैशहरिबलहोगयाये मैं नहीं कहता भागवत में लिखा हुआ है तो ये वो धाम है जहाँ पर ये सब कथाएं जो है मार भक्ति से रचा बचा हुआ है। ये बहुत जो है इसमें सुखदेव गोस महाराज कहते हैं कि यह संवाद में जो भी सुनेगा वे जो है सुख, शांति, समृद्धि और अपार भक्ति को प्राप्त करेगा। तो हम लोग क स थ पर है जहाँ पर विदुर और मैट्रो ऋषि का संवाद हुआ है। विदुर जी से हमें शिक्षा लेना है कि किस प्रकार से धाम में आए तो संतों के मुकारी से हमलोग कथा श्रवण करें। हम उस धाम पर है जहाँ पर गंगा बह रही है। यह गंगा और कुछ नहीं है कारणोदक सागर का जल है। और ये था दुनिया का सबसे पहला जो है चायल पहला जो कराटे किक ये जो था वामन भगवान ने 2 पांव में पूरे ब्रह्माण्ड को नाप लिया, तीसरा पाव कहा दूसरे ने 1 पाँव में जो है नीचे के जो है लोक को नाप लिया दूसरा पांव नापने के लिए उन्होंने पाँव ऊपर किया किया तो किया तो किया तो किया तो किया तो ब्रह्माण्ड का चित्र ही फट गया वो ऐसा टूट गया ऐसा टूट गया आज तक रिपेयरिंग नहीं हुआ अभी तक वहाँ से पानी आ रहा है। और भगवान ने जब पाँव ऊपर किया बी बी डी का फोटो है वो था दुनिया का सबसे पहला कराटे किक उसके बाद आया किया किया करके बहुत सारे कराटे कुंगफू ये सब जुड़ा या 1 बार प्रपात जी जो है बी बी टी का मीटिंग चल रहा था हांगकांग में पहले माले में था ये वीडियो भी है नीचे आवाज आ रहा था किया किया किया किया किया ये जो है कराटे जब करते हैं तो आवाज निकालना पड़ता किया किया तो प्रभाजी ने पूछा यह क्या आवाज आ रहा है बोला नीचे कराटे चल रहा है बोला किया किया करके क्या किया
फिर
से आवाज आ रही थी किया किया प्रभाजी ने बोला दुर्लभ मनुष्य जन्म को बर्बाद किया
हरी हरी बिफल जन म गो इन हरी हरी बेफ ल ज न म गो आ नो हरि हरि विफ ल ज न म गो आन
हरि हरि यह प्रऊपाजी का फेवरेट बना न ल ज न म गो न
मानुष जाना मा पाया राधा कृष्ण न बाजा
न
जानिया सुनिया खानू
हरी हरी
हरी हरी
गोलो केर प्रेमा धनाहरिनाबसन, हर ना सम
रतिना ज न, लो के ना, ताई, रातिन,
हरी, हरी,
जनम, गो,
हरि ही
मंत्र, ऋशि, लगभग 3 जन्म उनका वर्णन आता है। फिर जाके इस प्रकार का संवाद। भगवान ऐसी दर करते हैं। विदुर जी का भी यमराजजी, फिर विदुर जी बनकर इस प्रकार का संवाद त्यादि करते हैं। भले हमारे कितने भी अनेक जन्म हो, पर हम लोग बहुत ही भाग्यशाली है। प्राप्य जैसे महात्मा का हम आंदोलन के सदस्य बन चुके हैं। प्रौपाजी ब्रह्मा जी के सौ साल में 1 ऐसा व्यक्तित्व है न भूतो, न भविष्य जो कि राधा रानी के इतना कृपा प्राप्त किए हैं कि उनके आंदोलन में अगर कोई आये थोड़ी गंभीरता के साथ अगर वो भक्ति करे, थोड़ी गंभीरता के साथ। प्रपा जी बोलते हैं। इस कॉनमें 1 की तपस्या है। अपने जीवा को, जो है थोड़े समय के लिए भगवान के नाम का सेवा में लगा दीजिए। यानि की आज से लेकर 20, 30, 40 साल तक बस और जीवा में केवल प्रसाद लीजिए। बस यही तपस्या है बाकी और कोई तपस्या नहीं है। अब से लेके, हमें संकल्प लेना चाहिए। जिस प्रकार से बिजुरी और मैत्रशिजबभी कोई बात किए तो हरी हरी भगवान के बारे में चर्चा किए। इसी प्रकार से इस जीव से भगवान का नाम उच्चारण करें या कीर्तन करे या कथा करे। नहीं तो कथा श्रवण करते रहे। और इस जीवा से प्रसाद पात्र। ये 1 तपस्या किया। बाकी हमारा जीवन सफल, ये मनुष्य जीवन को सफल करने के लिए प्रहुपाजजी ने इतना सिंपल टेक्निक दिया, चैंटिंग, डांसिंग और फीस्टिंग प्रहुपाजजी ने नालायकों को लायक कर दिया, हिप्पियों को हैप्पी बना दिया, रूसियों को रिशि बना दिया, चीनियों को मुनी बना दिया, जापनीस को जापान में लगा दिया और दुखियों को सुखी बना दिया। इतना सिम्पल प्रोसेस है। अब से लेकर शरीर छूटने तक, हमें शरीर छूटने तक हमें संकल्प लेना चाहिए। इस जीवा से मैं भगवान का नाम लो, गा और प्रसाद पाऊंगा और कानों से कथा सुनूंगा। जिस प्रकार से विदुर जी मुनि ने श्रवण किया, इस संकल्प के साथ अगर हम जीवन में उतारेंगे तो गारंटी 10, 20, 30 साल, फिर भगवत, धाम बस, फिर आप बोलेंगे, अंत, काले, माम, स्मरण, मुक्ता कलेवर? ये कैसा तो बोलेगा अगर यह नहीं हुआ, प्रोपर जी बोलते है, अंतकाल में स्मरण नहीं हुआ तो भी कोई बात नहीं। अगर आप ईमानदार ऐसी स्कोन में रहोगे। 16 माला जब प्रचार नियम पालन करोगे और बाइक फ्लाइट नहीं आया, मैं गोलोक से फ्लाइट लेकर आऊंगा। ये 1 बार नहीं, 2 बार नहीं, 3 से 4 बार।
प्रो।
पाजी ने कहा, अब आप वेदा बेच देख सकते हो और इसे चेक कर सकते हो, रिसर्च कीजिये और इसका आनंद लीजिये। और इसलिए हमको जो है। अब यह संकल्प लेना होगा कि बस अब बहुत हो गया, मैं अब जीवन को और बर्बाद नहीं करूँगा या नहीं करूँगी। अब से लेकर शरीर छोड़ने तक में भगवान का नाम उ चरण करूँगा करुँगी या प्रसाद, पाऊँगा या पाऊंगी, इसके अलावा और कुछ नहीं करूंगा। या करूंगी। हरेक
रे, कृष्णा, महाराज जी ने जो भी सन्देश दिया, उसका पालन करेंगे तो सही उसका परिणाम ना मिलने का सवाल ही नहीं है। लेकिन आपके पास तो सवाल होगा न। कुछ 12 सवाल पबूसमेंसेमातमें से हू हज क्वेस्टन? anybody is a question okay okay mataji
sines shane behind the camera
mike, there mike there for mataji mataji us just stood up their okay, just past is।
हम लोग सुनते आ रहे हैं इस ग्रे श्रीराम प्रभु, इन्होंने भी हरि नाम पर जोर दिया। हिज्ोलिनस प्रबंधन सरस्वती स्वामी महाराज जी भी अजामिल के कता कहते हुए कहा कि हरि नाम पर जो दिया और आज सुबह भी गोपाल कृष्ण गोसमाश्रीउन्होंन हरिनाम पर जोर दिया और िजवलिजनदनदस्वामी महाराज भी हरिनाम पर जोर दिया। अगर समय मिले मौका मिले हरि नाम कि जब मेरे जीवन में नामाचार्य हरिदास ठाकुर की कृपा से कुछ जपा के सुधार लाने में मुझे कुछ लाभ प्राप्त हुआ है, वो मैं फिर कभी मौका मिला तो शेयर करूंगा। इससे पहले आपका प्रश्न थैंक यू, थैंक
यू, महाराज जी, हरे कृष्णा प्रणाम, महाराज इन अडवडेंटीiकमी सौरी फॉर दैट। अगर मुझसे कोई भी भूल हो जाए तो उसक माफी पहले से ही एडवांस में मांग रही हूँ। वैसे तो मेरे न 100 8 क्वेश्चन है मैंने 100 8 नंबर्स की बहुत वैल्यू मतलब जानी है मतलब समझने की कोशिश कर रही है कि वन जीरो 8 इज वेरी वेरी पावरफुल नंबर मतलब 100 8 जो नंबर है वो हुत पावरफुल है और मैं 100 8 ही क्वेश्चन करना चाहती हूं। लेकिन समय क अभाव है इसलिए मैं 3 या 9 करना चाहूंगी। तो उसमे से पहला है कि लॉ
101 सौ 8 में से 1 वाला आप कर लीजिये।
बस ठीक है ओके थैंक यू फॉर
द परमिशन 100 नहीं 100 11 वन
ऑनली
महा महाप्रभु जी ने जैसे बोला था कि बोर डाउन टू और न मेरी जो स्कूलिंग है वो खास स्कूल से हुई है तो उसमें मतलब बोला जाता है। इस बार डाउन आवर हैड इन फ्रंट ऑफ। इस रोग की भई स्कोन में संतों को हमने प्रणाम करना है। लेकिन हम कहीं और भी बाहर जा रहे हैं मतलब हमारे गुरुदेव ने, हमें ये सिख सबको ही सारे को प्रणाम करना चाहिए। लेकिन कहीं और भी जा रहे हैं तो वहाँ पर अगर परिणाम करते हैं। ये क्या रोग है। और इसके साथ ये है कि मतलब हलाल की कमाई खाओ, वर्ड के छ को मतलब कि हलाल सच्चाई की कमाई खाओ सबको खिला के उसके बाद खुद खाओ सर निवाते मत, ऊँची मतलब सर निवा रखोऔमतऊँची, मतलब दिमाग, अच्छा रखो और प्रभु इतना दीजिये जो 1 और है की प्रभु इतना दीजिये जा। मे कुटुम समाय तू भी भूखा न रहे, साधु भी भूखा न जाए और संत जहाँ भी मिले आशीर्वाद लेते चलो संग न करो राजा का न जाने कब सूली पर चढ़ा सवाल सवाल साल सवाल ये 1 मिनट नहीं संग करो तो संतों का न जाने कब हरी से मिला दे।
तो
कौन में जो करोड़ पति भी है वो भी यहाँ के जाते है तो यहाँ पर कोशिश कर के प्रणाम करने की कोशिश करूँ। तो ये क्या अगर मैं क किसी प्रभु जी को भी प्रणाम कर रही हूँ, माता जी को भी प्रणाम कर रही हूँ या फिर बाहर भी जा के यूनिवर्स लेवल। पर अगर मैं कुछ प्रणाम करना चाहती हूँ, क्या मैं गलत कर रही हूँ महाराज जी, ये मेरा केशन नहीं आप
गलत नहीं कर रहे है। सही हो थैंक यू,
थैंक यू, थैंक यू महाराज। इसी से पता चलता है कि लंबा सवाल है। इसका मतलब है कि जवाब भी लम्बा होना चाहिए आपका आपका सवाल
शिक्षा है, सुनी तो फिजिकली नहीं कर पाए। तो मनी मन सबको जरूर प्रणाम करना चाहिए। वी शुड डेफिनिटली क्योंकी हर जीव, भगवान का, भगवान ने सबको बनाया तो भगवान ने जो भी बनाया जरूर अच्छा बनाया, कुछ अच्छा जरूर होगा। तो वी शुड पे, संस्, ओके, थैंक
यू, हरे कृष्णा, हरे कृष्णा प्रणाम महाराज प्रणाम। महाराज जी आपके लिए 1 बहुत स्पायरिंग था और हमने बहुत कुछ सीखा पर महाराज मेरा 1 छोटा सा सवाल यह है कि जैसे कि आप बता रहे थे कि जो रूपा जी बोलते हैं कि स्कोर से जो जुड़ जायेगा वो द्वार से, पीछे से जायेगा। तो महाराज जी अगर बाहर के लोग,
कौन के जो, जो प्रपात जी को
फॉलो करेगा, कौन के 4 नियम 16 माला का जप करेगा, वो बैकुंठ जायेगा, भगवान के दाम जायेगा। तो महाराज जी मेरा ये सवाल है कि जो बाहर के लोग हैं वो अगर स कौन से नहीं जुड़ हुए हैं और भक्ति कर रहे हैं, अच्छे से सब कुछ कर रहे हैं तो क्या वो भगवान के धाम जाएंगे या नहीं जाएंगे।
जो भी जीव मनुष्य शरीर प्राप्त करके अगर 1 प्रामाणिक संप्रदाय से जुड़ जाता है और वो शुद्ध भक्ति में लग जाएगा, डेफिनेटली बाइकों को प्राप्त करेगा। पर हमारा सौभाग्य यह है कि हम ऐसे महात्मा के 1 ऐसे आंदोलन में जुड़ गए हैं जिनपर राधारानी की बहुत कृपा है। तो विशु फील, अव सल्फ, वेरी वेरी फोर्चुनेट, बाकी संस्था भी है, संप्रदाय भी है, वो अपनी जगह में ठीक है, हम उनको प्रणाम करते हैं और आदर करते हैं। पर हम अपने आप को भाग्यशाली समझना चाहिए। बट वी शुड नोट भी पप प और वी शुड नोट, बिकम एरोगेंट बट वी शुड, फील हैप्पी एंड बी हंबल क्रिश्ना, हस बीन काइंड टू स यानि कि हमें बहुत विनम्र होना रहना चाहिए। साथ ही साथ हमें 1 प्रकार का गर्व होना चाहिए पर वो अहंकार वाला गर्व नहीं। ये ये होना खुशी होनी चाहिए कि भगवान का बहुत कृपा है, हम लोग बहुत भाग्यशाली हैं। प्रपा जी जैसे संत मिले जिन्होंने, जिन्होंने वो 1 देखिये आज तक ऐसे कौन आचार्य है जो खुद कुकिंग करते हैं, बर्तन भी साफ करते हैं, परोसते भी हैं और जो खाने वाला है उनका थाली भी होते है, वो भी 70 साल की आयु में ह कल 1 प्रवचन सुन रहा था, उसमें बता रहा था कि जो लोग कुकिंग नहीं जानते है वो लोग आलसी हैं। प्रबोधन श्रीराम प्रभु सिंह जो कुकिंग नहीं जानते हैं, आलसी है। पर प्रोपज कितने कुकिंग भी करते थे, बर्तन भी साफ, क और परोसते थे और उसके बाद साफ़ सफाई भी करते थे। फिर 1 दिन प्राजी ने कहा भगवान मेरे हाथ पांव थोड़ा दुख रहे काश कोई मुझे हेल्प करने के लिए आये तब जाके पहला डिवोटी आया था फास्ट आईटी डे वी आर ईटिंग कैन वी डू सम help you बोला प्लीज वॉच दिस डिश यानि कि 80 दिन से वो लोग खा रहे थे, बोला कि हम लोग खा रहे है, कुछ सेवा कर सकते हैं। बोला ये बर्तन बर्तन साफ़ करो। तब उनको रियलाइज हुआ, वो भी 45 साल के बाद हम लोग प्रपा जी के हाथ के खा रहे थे, बर्तन वैसे ही छोड़ के जा रहे थे। ठीक है सो वी हार वेरी फोर्चुनेट that silapropादिरज वेरी स्प राधा रानी का 1 बहुत psd radharani के mnjnongroupscome to help us out। so we should feel very fortunate, but we should not be argent popup
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हरी कृष्ण महाराज प्रणाम महाराज, मेरा प्रश्न
है,
ean into the mike, speak in the mike।
हरी तो मेरा प्रश्न यह है की हम भगवान या गुरुदेव की शरण ग्रहण करने के लिए जो भी उनकी शिक्षा, उन का पालन करने की कोशिश करते हैं। तो जैसे मंगल आरती है या भोग लगाना है। या फिर आपने बताया कि जब धाम आते हैं तो 1 राइट मूड सेट होना चाहिए, 1 सही भाव होना चाहिए हमारे मन में। तो, लेकिन प्रॉब्लम ये है कि हम इतने अशुद्ध है कि ज्यादातर हमारा जो सही भाव होता है वो आता नहीं है। जैसे की मंगल आरती के समय कुछ न कुछ और मन में चल रहा होता है, विचलित हो रहे होते है और भोग लगाते समय भी मतलब वो प्रार्थना की जगह मन में। पता नहीं कई बार कुछ गलत कुछ भी ख्याल आता रहता है। तो क्या होता है कि उस समय पर हमे क्या करना चाहिए? यानि कि वो क्या कंटिन्यू करे? क्योंकि वो थोड़ा अजीब लगता है। मतलब मन में भाव तो सही नहीं है। तो क्या वो जो मैं साधना कर रहा हूँ वो सही सही जा रही है? या फिर रोक दूं उसको? और ऐसा भविष्य में मतलब कम हो? दिन प्रति दिन में मतलब ये चीजें कम हो मेरे साथ में, उसके लिए क्या करूँ?
टेक्निकल बात यह है कि हमारे भजन ठीक से नहीं हो रहे, सो अगर हम भक्ति रसामृत सिन्धु देखेंगे, प प्लीज बी सी तो बिरसा देखेंगे। रूप सही बात बड़े वैज्ञानिक रूप से बताते हैं। 2 श्रद्धा तथा साधु, संघ तथा भजन क्रिया निवृति। अब आप जो बोल रहे है, मेरे भजन ठीक से नहीं हो रहा है।
तो?
तो रूप गोसी बात बताते है कि अगर हम साइंटिफिक्ली थोडा सोचे अगर हम भक्ति कर रहे हैं तो अभी प्रेम भक्ति तक क्यों नहीं पहुंचे? क्योंकि हमारा भाव भक्ति में कोई प्रॉब्लम है। अच्छा भाव भक्ति तक क्यों नहीं पहुंचे? क्योंकि आसक्ति में कोई प्रॉब्लम है। आशक्ति तक में प्रॉब्लम क्यों है? क्योंकि रुचि ठीक नहीं है। रुचि में प्रॉब्लम क्यों है? क्योंकि निष्ठा ठीक नहीं है। निष्ठा में प्रॉब्लम क्यों है? क्योंकि अनर्थ निवृत्ति पार नहीं की है। अनर्थ निवृत्ति पर क्यों नहीं? क्योंकि भजन हमारा ठीक नहीं है। तो भजन हमारा ठीक नहीं है। तो इसका मतलब है साधु संग का। हमने ठीक से लाभ नहीं लिया। यानि प्रपज शिक्षा उनका ठीक लाभ नहीं लिया, उनके आगे, उनका ठीक से पालन नहीं किया। ठीक है साधु संघ का ठीक से लाभ भी इसलिए नहीं लिया क्योंकि हमारा श्रद्धा डामाडोल हो रहा है, श्रद्धा डामाडोल हो रहा है। क्योंकि श्रद्धा जिनसे मिलना चाहिए, उनका कृपा नहीं है हमारे पास। तो कृपा के अभाव के कारण श्रद्धा ठीक नहीं है। श्रद्धा के अभाव के कार जो है, साधु संघ का ठीक से लाभ नहीं हो रहा है। इसलिए भजन में प्रॉब्लम आ रहा है। तो ये सब की शुरुआत जो है कृपा से होता है। तो कृपा कहाँ से लेना है? कृष्ण कृपा, श्री मूर्ति अभय चरना रविंदर रीडशिलप्रवपातबुक्स प्रपा कृपा मिलेगा आपका भजन ठीक होगा, आपका श्रद्धा ठीक होगा, श्रद्धा ठीक होगा, साधु संग ठीक होगा, साधु संग ठीक होगा। तो भजन आपका ठीक होगा, प्रापा जी के ग्रंथ वितरण करो, अगर ग्रंथ वितरण करोगे तो प्रौपाजीका कृपा मिलेगा? श्रद्धा अच्छा होगा, साधु संघ का लाभ होगा और भजन अच्छा होगा। तो इस प्रकार से तुलसी महारानी की कृपा लीजिये। तुलसी मराणी के बारे में हम रोज क्या कहते हैं, यह ही निवेद द रोज नहीं तो पहले सेकेंड स्टांजा क्या है। ये तो मार शरनालोहतरबंचपुन कृपा करि, कौरोतारिवृंदावन सी कृपा करी, उनका कृपा चाहिए। तो तुलसी मरानी से भी खूब कृपा के लिए याचना कीजिए मैं ये रोज चार्जेज करता हूं क्योंकि मुझे जीवन में आगे बढ़ना है। कहीं अटकना नहीं, लटकना नहीं, भटकना नहीं, मैं यहां तक आया हूं यहां से आगे जाने के लिए और प्रपा जी की कृपा से, तुलसी महारानी की कृपा से मैं आगे जा रहा हूं। तो ये कृपा कैसे प्राप्त करें प्रपा जी का। तो उनके ग्रंथ अध्ययन करिये, उनके ग्रंथ वितरण कीजिये प्रउप लाइक्स लडडू को चो। प्रपा जी ने 1 बार ने अनेक
बार कहा,
1 बार कहा कि अगर आप मुझे लड्डू को चोरी दोगे तो मेरा आशीर्वाद आपको मिलेगा। तो ये बात जो है आप परोपा लीलामृत सेवंतवॉलियम पेज नंबर, फॉट्टी और फिफ्टी के बीच में देख सकते हैं चेक कर लेना है। और मैं ये 3 चीज रोज करता हूँ और तुलसी मराणी का 100 परिक्रमा करता हूँ क्योंकि मुझे कृपा चाहिए क्योंकि मुझे लटकना नहीं अटकना नहीं, कहीं भटकना नहीं, मैं यहाँ तक आया हूँ यहाँ से आगे जाने के लिए और मैं जा रहा हूँ ठीक है तो ये हर किसी के लिए है, आप भी कीजिए और आगे बढ़िए तो श्रद्धा में प्रॉब्लम है इसलिए भजन क्रिया में प्रॉब्लम है। ठीक है श्रद्धा को श्रद्धा जो देने वाले का जो है जो प्रपा जी उनकी कृपा के लिए आप याचना कीजिए जरूर श्रद्धा में वर्धन होगा। सो डिस्ट्रीब्यूट बुक्स रीड प्रोप बुक्स टेक मर्सी फ्रॉम तुलसी मारानी मेक योर श्रद्धा स्ट्रॉंग भजन ठीक हो जाएगा ओके हरे कृष्ण
कई his soलnasभक्तिकरण स्वामी महाराज की हिस सोलन गोपाल कृष्ण गो स्वामी गुरु महाराज गी हरिद्वार यात्रा महामहोत्सव गी जग
गुरु शीला प्रभु बाद की रिदाइनिदाईगौर सीताना
प्रेमानंद बहुत बहुत धन्यवाद महाराज जी की आपने थियरेटिकल भी बताया, प्रैक्टिकल भी बताया, ह्यूमरस भी बताया, एक्टिव भी बताया, ड्रामेटिक भी बताया, म्यूजिकल भी बताया, सो कम्प्लीट लेक्चर, फ्रॉम हिस होल्नेस। भक्ति करुणा में वनमाली स्वामी महाराज महाराज करुणा में है, और इसलिए महाराज ने वनमाली की कृपा हमें प्रदान करे। थैंक यू वेरी मच आप सब से। 1 विशेष अनुरोध है की अभी प्रस्थान करे, अपने अपने जहाँ से आये, मतलब दिल्ली नहीं अपने आश्रम में जा सकते हैं। और साढ़े 3 बजे ठीक यहाँ पर अगला प्रवचन प्रारंभ होगा, विशेष प्रवचन होगा। क्योंकि जिसमे हम श्रवण करेंगे। परमपुजशिलहगोपाल कृष्ण गोस्वामी गुरु महाराज के गुण शिष्यों के बारे में, उनके सेवा भाव के बारे में, और उनके विशेष क्वालिटीज के बारे में, और दोपहर के प्रवचन के प्रवक्ता होंगे। हिज ग्रेस मोहन ब्रुबबरबूतोआप सबसे अनुरोध है। अभी अपने अपने निवास थान में प्रस्थान करें, तत्कालीन निवासस्थान में प्रस्थान करे, और ठीक साढ़े 3 तक यहाँ आ जाए, कीर्तन का वेट न करें। साढ़े 3 को लेक्चर शुरू होगा, पहले आ जाए तो अच्छा है रहे। कृष्णा
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अंकित बा 1 माइक नहीं मिल रहा किस्म।
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