Haridwar Yatra || Day -4 || HH Gopal Krishna Goswami Maharaj || 2023

The fourth day of the Haridwar Yatra, recorded on October 2, 2023, features a live devotional gathering led by His Holiness Gopal Krishna Goswami Maharaj. The program opens with guru‑puja, kirtan chanting (Hare Krishna/Hare Ram), and a collective aarti. Throughout the session, devotees ask a series of practical and theological questions. The answers cover ritual details (e.g., whether the Tulsi aarti should invoke Krishna or Vishnu), educational guidance (sending children to a traditional gurukul versus modern schools), and mantra preferences (Gayatri versus Krishna mantra). The discourse also highlights revered devotional figures such as Pralad Maharaj and Durv Maharaj, explaining their mythic status as half‑man/half‑animal incarnations and emphasizing the authenticity of their teachings against colonial claims that Indian scriptures are mere mythology. The speaker attributes Pralad Maharaj’s knowledge to the grace of Narada Muni. Interspersed are light‑hearted remarks about personal appearance (beard symbolism) and the role of devotional heroes. The session concludes with blessings, encouragement to continue bhakti practice, and an invitation to future yatra events.
Chapters
हैलो चेक हैलो चेक hello sir
se
al, hello hello se, ha cha,
he
he a e
a
हरे कृश्णा
जग
जाओ भक्तों 2 घंटा दिया आपको रेस्ट करने के लिए हमने हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ओके तो अभी हमारे बीच में अभी गुरु पूजा होगी सो गुरु पूजा करने के लिए गोपेशर परभु हैं और कीर्तन करने के लिए आउट रिक्वेस्ट हे होलिनेस भक्ति अनुग्रह जनार्दन स्वामी महाराज गुरु पूजा गुरु पूजा कीर्तन के बाद हमारे बीच में आ रहे है हर कथा के लिए हम सब को आशीर्वाद देने के लिए गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराज श्री गुरदेव की। उसके बाद प्रसाद है और कार्यक्रम को बता चुके हैं पर फिर से बतायेंगे अरे कृ
हर बोली पर चेक कर
लीजिये
हरे कृष्ण हरे कृष्ण
जीत
निकाल स्कोल
i नोट ब्लो
गुरु चरनाबाकेबलाबाबमा गर carana pदaकवलाग गेबलाबाकबबाूजरा ना पदमा के बल पदमा बन्दा मूशबवग मदमुसनामगा जहर से रे बाबा को
भा ले भागा
भा
रा
य
यहा दे बा र भाव को या हमारा पचादेभृषनप्री हो गा
पराती हो
ृष्णा प्राति हो जहा हतेगोलमखाया आय का
क्या
कोरिया को ह माने आर ना कौरी राज ऐसे ने राज से त बतयसधेपूरेसरा आस से पूरे सवा आक चाकधलौजेजपगसेलकधान
लोगे
विज्ञान परकाटोाका ज्ञान हद
क
गा
गा
गा
मजार लोक र जीवाना देराजीबजबनबन्रब र रागरगजकुरकरन का
कारा दायाहमदाताया
प्रभु
य
a
a da बाबा
ने थोड़ा सा
अंदर चाहिए
ब
गया गया प्रभु रह गया प्रभु
भ
2 ग कई गो
ही
दुरपूजके
नामा ओ देश पधायाकृष्नापरसआया स्वामी ने ना मस्ते गौर सेsाकार bjaadaरिवाशदगो गककिरगा जशनाजtन्ायजकगधधा रeबासदेकोt यस्तौमतिननददगगब गोकूलरदगकाग यसमतिरानडगजगगुनरं जगा ना पी परना दना मदन मनाहारागोपी परन दना दना दना बल गली दबाना बधालगलीदमाला
माला हरि ला ला माला हरि
बसेबानदबाजा
न
कर पा हनसीबताचा रजा जना पालन सूरपुललासदारजजन पालन दादा 2 ददागतलदगगग
गो विद बिनदनादम
सुनदndokaसुन्दरद का यमुना ताताचार गोपी बस नहर यमुना टाटा चारा गोपी रा
ा
beरaदblaaददल गोपी बनना दाना ददन मानारा विदा
न
आ
हरे हरे रामार रामा रामा रामा
हरे
हर किनारे का हर हरे हरे राम रा रा रा हर हरे बोल
ना रे किशन
हरे हरे हरे राम हम रा हरे हह रे हर किस्
म राह
हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृषनाकृाहरेहरेहर रा हरे रामा रामा राम हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे
हरे
राम हरे हरे बोलो बोलो
हर
किशन हरे कृषना कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम रे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण कृष्णा को रंगा रामा चोइ कृष्ण हरे आ रे आ रे राम रे रामा रामा बोलो बोलो
कृष्णा राम हरे राम राम
हरे कृष्णा कृष्णा राम हरे राम राम राम रे
हे
राम रे राम राम राम रे हरे रामा रे सब लोग पुलिए जोर से जोर सी हरे राम हरे राम राम राम हरे
हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा
कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम
राम राम हरे हरे कृष्णा कृष्णा हरे
हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे राम हरे राम राम
र
का कि आरे हरे हरे राम हरे राम राम राम अरे किस रे
राम हरे राम राम राम हरे राम
हर कशनहरेश्नाकिश्ना केश रे हरे रामा रामा रामा रामा हरे हरे श्नरेकजोइनत हर किशन कृषणा कृष्णा कृष्णा हरे हरे राम हरे राम राम हरे कृष्णा कृष्णा हरे हरे रामा रामा रामा रे
हर कृष्णा कृषना
कृष्णा कृष्णा हरे हरे रामा रामा रामा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे राम राम राम राम हरे हरे का कृष्णा कृष्णा हरे राम हरे राम राम राम हरे बोलोरे कृष्णा कृष्णा
हरे राम रे
राम राम राम हरे हरे किसा हरे कुसुनाकिशनाकिशना हरे रे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा
कृष्णा
हरे हरे हरे राम हरे राम
राम
राम हरे हरे हरे किशन हरे किसिना किशन हरे हरे
हरे
राम हरे हरे हरे हरे राम हरे राम
राम
नीता गोरांग नीता गोरांगनीताये गो रांगा नीता गोरांग रंगा रीता गोरांग गो रार गोरा हरी गौरा हरी ती गौरा हारी
जाय सचिन
दना जाए सचिन दना जाय सचिन दना जाय सचिना दाना जाय सचिनन्दन जाय सचिन
दा ना
जाए सचिन दल गौर रिजाय सचिनन्दन गौरहरि गौर हरी गौरहरी पाबंद गौरहरि रजानंद राम जाया नीचा नंद राम
रिचा
नंद राम जाया नीचा नंदा रामरिचानंदराम जाया रिच नंद रा राम राम हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे हरे राम राम राम हरे हरे हरे हरे हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे
हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम रे अरे अरे अरे राम रे राम राम
राम
गोविन्द जय जय गोपाल जय जय गोविंद गोपाल या गोविंद जय गोपाल लगाया जाया गोबिंद गो बा
किषराधारमनारी गो बिंदा जाया नारी गो
िश्णाकृशना किनारे हरे हरे राम राम राम हरे जोर से जोर से कि कृष्णा हरे हरे राम हरे राम हरे कृष्णा कृष्णा हरेहरे हरे रामा रामा रामा हरे हरे कृष्णा हरे राम हरे राम राम रा सब लोग सब लोग खुलिए hare krishna krishna
all of
haridwar can heres कृष्ण
कारे
हरे रामा रामा रामा रामा
रे
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1 मोर टाइम
हरे कृष्णा जोर से हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा
हरे
हरे रामा हरे रामा रामा रामा गौर हरी हरी हरी
हरी
हरी हरी हरी हरी हरी या गुरु महाराज गुरु महाराज गुरु महाराज गुरु महाराज गुरु महाराज गुरु या गुरु महाराज गुरु महाराज गुरु महाराज गुरु जाया जाय प्रबु बु प्रबु प्रभु जय प्रबु प्रबु पाट प्रबु भा जाय प्रभु पा
swami j
is
the vingrasilabkisidt goswami is an grasilgorgsor महाराज की जाए then bisuparisngasil sachin ke ji the is save s
got
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su गोपाल 10 गुना सद गोस्वामी प्रभु की जाए की जा remsosikrisnoiannd kisna go go श्याम कुंड कु गिरी गोवर दान की जाए, सी ब्रज भूमि वृंदावन दाम की जाए, मधुर दाम की जाए, सिन्हा बदवीमायपुरनाम की जाए, गंगवा की जाए, ये मनमा की जाए तो देवी की जाए, भक्ति देवी की जाए, श्री हरिनाम संकीर्तन की जाए संकीर्तन या की जाए, शिलापा की जाए, haridwar dham yatra twenty twenty
tri ki ja
ki jai goris goris goris gorissgurnsigornga
iscesoud
hre krsna शoकलाबाशूn सब बैठ जाइए तु सी ने हो। i m re kisna are bec me as krishna goswami maharaj
है।
हमारे बीच में 2 महाराज holes वाले स्वामी महाराज के भक्त महाराज रे बीच मे पा चुके हैं। हरी वो सो प्रभु महाराज का स्वागत करना चाहेंगे। हम भाई चैटिंग हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे okay so dewat menvाilयूकैनस् क्वेशचंस और हमारे पास जब इतनी महान भूतिया है जो भक्ति से संचालित है। गुरु पूरी तरह से आश्रित है, समर्पित है सो उनसे हम प्रश्न पूछ सकते हैं। मीन श्री गुरुदेव यहाँ पधारते हैं। so if anybody s n quesion यू कैन रेजहैnऔरसाथ ही आप नाम बता सकते है। आप किन से सवाल पूछना चाहेंगे ठीक जी, सो दिस टाइम लेट्स। स्टार्ट वितमातेजीज है माताजी। आइए तो इनको प्रश्न पूछने आगे आ जाइये क्योंकि माइक आ गई है। सिर इसलिए
हरी कृष्ण महाराज धन्यवाद प्रणाम महाराज मेरा प्रश्न था। जैसे हम तुलसी आरती में करते हैं कि कभी हम कहते हैं कृष्ण भक्ति प्रदे क, अभी विष्णु भक्ति। वो मेरा प्रश्न था। कंफ्यूजन था कि हम कृष्ण या विष्णु क्या उच्चारण करें। जब मंत्र पढ़ते हैं तुलसी आरती का किसे जायेंगे। किसी से भी
हरे।
हम तो आरती करते है की प्रणाम करते हैं। कुछ मंदिर में नमो ने रनदातुरसीलेवा विष्णु भक्ति, कुछ मंदिर में कहते है क्यूंकि ओरिजिनल शो जो है पदमपुराण का, वो विष्णु भक्ति लखा गया। लेकिन प्रभुपाजीहमेकृषण कृष्ण भक्ति कहना भी कोई गलत नहीं है। इसलिए चाहे आप विष्णु भक्ति कीजिये कहिए या कृष्ण भक्ति कहिये दोनों ही सही है। आपको जो अच्छा लगता है आप बोल सकते है।
ओके नो लेट से न क्वेशन फरम प्रबुजीजआपका नाम बताइए और किन से आप ऐसा करते हैं, करते है। महाराज ने जवाब दिया महाराज हरे कृष्णा महाराजजी धनवाद प्रणाम मेरा महाराज जी। मेरा सवाल है कि बच्चों को गुरुकुल में भेजने का पहले सिस्टम होता था, पहले सिद्धांत होता था तो अब वो सब चीजे खत्म हो गई है। आज के समय में अगर माँ बाप भक्ति में है और वो माहौल अगर घर पर देना चाहते हैं।
वो माहौल।
तो क्या बच्चों को गुरुकुल भेजना चाहिए या उन उन पैरेंट्स को भेजना चाहिए जहाँ पर भक्ति नही
गुरु क्या प्रश्न है।
गुरुकुल गुरुकुल ट्रेनिंग बहुत जरूरी है
जो
हमारे संस्कृति के अनुसार वैदिक संस्कृति के अनुसार गुरुकुल में बच्चों को भेजा जाता था। 5 साल के ऊपर बच्चे वहाँ पर शिक्षा लेते हैं, प्रशिक्षण लेते हैं। यह बहुत जरुरी है ताकि आगे का जीवन, उनका कृष्ण भावना भावित रहे, चाहे वो कोई भी आश्रम में रहे। जीवन का लक्ष्य प्राप्त करें। तो ये ट्रेनिंग अगर गुरुकुल में नहीं है तो माता पिता को पूरा ट्रेनिंग लेना है और अपने घर को गुरुकुल के अनुसार। जैसे हम लोग बोलते हैं कि धाम वास तो अपने घर को धाम बनाए ताकि बच्चों को माँ के गर्भ में चना मृत मिले और मां के गर्भ में ही उनका प्रशाद प्राप्त हो और जैसे जन्म लेते हैं तो कीर्तन और प्रवचन का लाभ भी लें। अगर बच्चों को घर में ट्रेनिंग नहीं मिला। आज के समय पर तो बाहर जैसे कि शिलप्रोपाजी कहते हैं कि वातावरण ऐसा है कि बच्चे की जो खुशी है, यहाँ है उसे नाश किया जाएगा स्लॉटर। हाउस आत्मा को तो नाश नहीं किया जा सकता है, पर आत्मा से जो आनंद का अनुभव हम कर रहे हैं, इस मन में उसे नाश किया जाएगा। चाहे स्कूल हो, कॉलेज हो, कोई भी रिलेटिव के घर हो, कहीं पर भी जाए वो बच्चा भ्रष्ट हो जाएगा। उस बच्चे को बचाने के लिए भगवान ने आपके पास भेजा है। तो आपका कर्तव्य है कि आपके बच्चे को वो वातावरण दे, कृष्ण भक्ति की शिक्षा दे ताकि बच्चा अपने जीवन का लक्ष्य प्राप्त करें, अपने गुरु का नाम रोशन करें, प्रपी का नाम रोशन करे, अपने कूल का, माता पिता का नाम रोशन करे। ये माता पिता का जिम्मेवारी है तो पैरेंट्स का जिम्मेवारी है की वो अच्छा ट्रेनिंग ले और घर को कृष्ण भावना बाबा धाम बनाये, हर हरे कृष्णा और
डिबोडसलिबताना चाहूँगा मैं वी हार भक्ति विधान गुरुकुल इंटरनेशनल स्कूल जिसमें ट्रेडिशनल गुरुकुल भी है, सिर्फ विधवा गुरुकुल और आई सी एस ई बोर्ड वाला गुरुकुल भी है तो वहाँ पर भी चाहे बच्चों को डाल सकते हैं। बहुत ही अच्छा गुरुकुल है व हर पर्सनल विजिट गुरुकुल दूसरा मायापुर में भी है जो प्रीति वर्धन महाराज जिसको देख रहे हैं वहाँ पर वो aबसोल्टलीवेदि गुरुकुल। तो निश्चित रूप से यहाँ बच्चों को अगला सवाल सो नेक्ट केशन भक्ति अनुग्रह है जनार्दन swami mharाजosiohnmaराज plese accept my
mbl hobisेnsoसव, my question is in one of the popat courts, it was riten that hrikishnamahamantra is like a father and
the gaytri mantra is like a mother,
so i wanted to know that how gaytri mantra is ever mother and what should be ever meditation during gaitryherykृshna?
इसी स
हरे कृष्ण तो आप गायत्री मंत्र ले चुके हैं, तो फिर आप माताजी को प्राप्त कर चुके हैं। पिताजी थे पहले माता जी आ गए, दोनो की सेवा कीजिए माता पिता दोनों की सेवा से आपका कल्याण होगा?
तो दोनो की सेवा करनी है। herold नाव अगला सवाल होल्स प्रबोधन सरस्वती महाराज जी के लिए सो, prbujisyes के आगे आइए
हर 1 कृष्णा महाराज जी, महाराज जी, मेरा प्रश्न है कि जैसे आजकल के सो कॉल्ड, आजकल के सो कॉल्ड सोसाइटी के लीडर्स हैं, वो बेसलेस ली, बिना किसी, बिना किसी एविडेंस के, बिना मतलब के, फिर फिर के जो है वो उल्टा पुल्टा वैश्नव के प्रयासों का निंदा करते है। तो जैसे हम देखते हैं कि रामचन्द्र खान थे, वो तो मुसलमान थे तो उनका तो कुछ ऑव्यस समझ में भी आता है। अभी तो पता नहीं चलता है ये लोग हिंदु है कि मुसलमान है कि वर्ण संघ करेगी क्या है को उनके पास रीजन भी नहीं है। इस प्रकार का वो करने का। तो मैं ये पूछना चाह रहा था कि जैसे वैन निंदा करी तो नाम अपराध भी किया। लेकिन निंदा के दौरान अगर ऐसे लोगों के मुंह से हरे राम, हरे कृष्ण निकल जाता है तो उनको नाम आभास का लाभ मिलेगा और यह कुछ इनको गौरांग भाबर कृपा प्राप्त होगी या धोबी का, कुत्ता, ना घर का, ना घाट का। इनकी ऐसी स्थिति हो जाएगी क्योंकि ये अपनी जिस दल से जुड़े हैं, उसकी आइडियोलॉजी को भी फॉलो नहीं करते। तो इनकी क्या स्थिति होगी।
पहले प्रभु जी, आप जो बताया है कि रामचंद्र खान मुस्लिम थे, रामचन्द्र गाँव मुस्लिम नहीं थे, वो मुस्लिम नहीं, खान टाइटल है। क्यूँकि खान, वो मुसलमान नवाब के अंडर में सेवा करते थे। लेकिन वो हिंदू ही थे। इसके बाद आप जो बोल रहे हैं की लीडर लोग ऐसे होते हैं जो होते हैं। नीचे, तोरो रोपी सिसोना अमा नीना मान देना किर्तनिया सदाहरी और कौन क्या कर रहा है। उसको पहले अपने अंदर को देखिए। आप किसी को 1 अंगुली देखने से आपकी तरफ कितना अंगुली आता है। 3 अंग अपनी गलतियों को देखिए, अपने अन्दर को साफ़ कीजिये, जिसको अंगुली देखा न बोलना। यह वैष्टरों का लक्षण नहीं है। जो अधिकारी है वो उसकी विचार करेंगे। लेकिन हमे तो सहन करना ही वषों का सबसे पहला गुण है। तितिखेवतितिखेव करुणिका सरहद, सर्वदे नाम जात सत्र व संत साध व साधु भूषण। तो इसलिए वन के पास में उनके पास ये साधु का भूषण है की नहीं। वो देखने के पहले हम आपको अपने इस अलंकार से सज्जित करें। सहना सीखें जानना चाहे कि कृष्ण सब समय याद रखे। कृष्ण जो कुछ करते हैं, प्राणी के मंगल के लिए करते। ऐसी भावना रखकर जो हमें फिर विचार करेंगे। रामचन्द्र खान तो अपमानित किया है, वह बच्चे को अपमानित करने के लिए प्रयास किया। हरिदास हरि कुछ बोले नहीं, बोले, कुछ कुछ नहीं बोले हम को देखना है। अचार जो हरिदास ठाकुर नामा आचार। जब आप नाम ले रहे तो आचारज उदाहरण को देखना है। और बाद में इसकी शास्त्री कौन विधान किया, नित्यानंद पर हुआ कर। उसके एक्शन लिए उनको अपमानित किया तो अपने कृष्ण मे वरसा रखे। भगवान के चरण में समर्पित रहे। प्रभु हमारा काम, हम क्या, इसमें उठाये, कौन क्या कर रहा है? वो हमारा क्या है? बनने का हमारा काम है, वष्मबननेकेलिएप्रयास
के
अपमान दिया जाता है। प्रभु अमर, गुरु, महाराज कितनी टोलरेट करते
है,
कौन क्या किस नाम नाम जो हम वष्टकवस्टरक्िामुद्रा बुझाए, विचार हमारे पास नही ो। इसलिए हमारा केवल हमारे वैश्नो बनने के लिए हम स्वयं को प्रयास करे। हरे कृष्ण
के अगला प्रश्न वन वाली महाराज जी के लिए सो माता कोई सवाल ले लेते हैं। ओके
हरे कृष्णा प्रभु जी, धन्यवाद प्रणाम, हरे कृष्णा महाराज जी, धन्यवाद प्रणाम महाराज जी। मेरा कोश्चन यह था कि मैं बहुत ज्यादा नई हूँ, मतलब नई डिवोटी हूँ और बहुत ज्यादा नई हूँ। भक्ति में तो जैसे हम अपनी लाइफ से आते हैं तो हमें बहुत ज्यादा आदत होती है हर चीज को सस्पेशन करने की। मतलब हर हर किसी एक्शन को ऐसे देखते हैं। ऐसा क्यों हुआ, ऐसा क्यों हुआ? तो हम जब डिवोटीज के बीच में आते हैं। महाराज जी, तो डिवोटीज में बहुत सारे क्वालिटीज रहती है। पर हमें न ऐसी आदत होती है सस्पेशन की। अच्छा हर 1 एक्शन को की। ऐसा क्यों, ऐसा क्यों तो उसकी वजह से मतलब जो अच्छी क्वालिटीज होती है न, वो थोड़ा टाइम लिए छुप जाती है और फिर हम सस्पेशन करता है। तो फिर ऐसा लगता है की गलत क्वालिटी दिखती है। फिर बाद में ही पता चलता है की वो हमारी सोच में था, तो फिर न महाराजजी मतलब ऐसे में डियूटी से डिस्टेंस हो जाता है। तो फिर हम कैसे इस हैबिट को चेंज करते हैं? प्रणाम
बहुत दर्द बड़ा सवाल
ये स्वाभाविक है कि हम जिस वातावरण से
हम
जन्म लिए हैं और हर चीज को हम देखते हैं कि कहीं और धोखा तो नहीं दे रहा है, कहीं वो धोखा तो नहीं रहे? और जब हम भक्ति में आते है तो भी हम वो जो है विचार को लेके आते है, कहीं हम धोखा तो नहीं खा रहे हैं। फिर ऐसा लगता है कि भक्ति में सब अच्छे हैं, फिर सबके अन्दर अच्छे गुण भी देखते हैं, तब तक सब कुछ अच्छा चलता है। फिर 1 दिन लगता है कि अरे ये भक्त ने ऐसा क्यूँ किया? हमे बहुत सावधान होना चाहिए जैसे पर्पज प्रबंधन सरस्वती महाराज जी ने बताया वैष्णव व क्रिया, मुद्रा विज्ञ न बुझाए, कौन वैष्णव किस वक्त क्या कर रहा है? अगर हमारी समझ के बाहर है तो हमें जो है क्या बोलते हैं। वा यु वी गिव दम दा बेनिफिट ऑफ़ डॉट थैंक यू। तो ये बेनिफिट डाउट दे देना चाहिए। बात यह है बात ये है हमारे जीवन में समय बहुत कम है और हमें वो लक्ष्य प्राप्त करना है और हम प्राप्त करेंगे हम अपने गुरु महाराज के जीवन में देखेंगे। जब प्रभा जी, प्रपा जी का 1 कोर्ट है जो जो बेहद भागत स्वामी महाराज जी अपने वैश्नव एटिकेट कोर्स में 1 बुकलेट निकालते थे, पहले तो उस बुकलेट के ऊपर प्रपा जी का कोट आता है गोपाल कृष्ण, गोस्वामी महाराज जी हमारे लिए गोपाल आप वैष्णों के अंदर बुरे गुण देखने से डरते हो और उससे बचते रहते हो, वैष्णव निंदा से बचते रहते हो, वैष्णव अपराध करने से बचते हो तो यह बहुत अच्छा गुण है। यह आपको आगे लेकर जाएगा। तो हमारे जीवन में हमे यह अभ्यास करना होगा कि सबके अन्दर अच्छे गुणों को देखे। सब भगवान से आ रहे हैं, हम सब भगवान से आ रहे है। तो भगवान ने कोई खराब चीज नहीं बनाया। सब के अन्दर कुछ न कुछ अच्छा गुण होगा। वो अच्छे गुण को देख कर उस वैष्णो का नाम, उस वैष्णवी का नाम लिखे और उनके अच्छे गुणों को साइड में लिखे रोज उसे पढ़े बाई दी, वे मान लो कि उन वैष्णों में कुछ हमारी नजरों से कुछ गलत बात दिख गया। तो जो हमने रोज प्रैक्टिस किया कि अच्छा मिरदंग बजाता है या अच्छा करताल बजाता है या अच्छ कीर्तन करते हैं या अच्छा, जो है प्रवचन देते हैं या अच्छा है, मैनेजमेंट करते हैं, वो बात याद आएगा और वो दोष तुरंत हमारे अंदर प्रवेश नहीं करेगा तो हमें यह अभ्यास करना होगा कि सबके नाम लेके और खास करके हमारे जीवन में पाकिस्तान हमारा दुश्मन नहीं है, अगर वो दुश्मन भी है, हमको कुछ लेना देना नही हम अपने जीवन में दुश्मन किसको बनाते है? हमारी माँ, पिताजी, भाई, बहन, बच्चे उनसे ही हमारा जो है इन्होंने ऐसा क्यों डाटा? मुझे इन्होंने ऐसा क्यों किया? पिताजी ने मुझे यह क्यों नहीं दिया? तो वो हमारे दुश्मन बन जाते है। तो यह दोष देने की प्रवृत्ति हमारे अंदर है। हम जिनके साथ ऊपर रोज उठते बैठते हैं उन भक्तों का नाम हमें लिखना चाहिए और उनके अच्छे गुणों को लिखना चाहिए सुबह 1 टाइम पढ़ना चाहिए, रात को 1 टाइम पढ़ना चाहिए। बाई दी वे पिताजी ने डाट भी दिया। तो हमें जो है बुरा नहीं लगना चाहिए। उनके अच्छे गुणों को देखे उन्होंने मेरे लिए क्या अच्छा किया वो याद रखे और इन छोटी बातों को दूर करे। ठीक है न फरजू एन फरगेट क्योंकि हमें आगे बढ़ना है। तो इस प्रकार से अच्छे गुणों को देखने का अभ्यास हमारे गुरु महाराज से हमें सीखना चाहिए। थैंक यू वैरी मच
के री वोट वन गुड न्यूज सबके लिए की आज प्रसाद में आप सब के लिए 80 तुसी पीती, लस्सी लस्सी की व्यवस्था की गई है। आप लोगो के लिए सो जो स्पोंसर की है उनका नाम है अजय गुप्ता जी हिज बिजनेस फ्रॉम सहारणपुर सो, हम क्रतज्ञता व्यक्त कर सकते हैं? फॉर हिज लस्सी, स्पांसरशिप बाय, चैंटिंग, हरे कृष्णा, हरे कृष्णा, कृष्णा, कृष्णा, हरे, हरे, हरे राम, हरे राम। ram ram are here woca next question to baki nogrjnaasemharag so maharaj as we know among the five subject matters of bagudgeta god living entity time and प्रकृति ar eternal but karma is not eternal? what should be do to make kurma eternal
do you want to have your karma eternal
नो?
who wants karma to be internal
raserhendwno,
we want to get rid of karma of course? we came here on our own choice and we want to stay here and our own choice bu lord krishna would like to and everything he likes us to go back home back to god head by chanting harikishnamahamuntri and get rid of this karma, we dont want any more karma
सो महाराज ने बताया कि कर्मा कौन नित्य बनाना चाहेगा? कर्मों के बंधन में तो हम फंसे हुए हैं। कृष्ण नहीं चाहते कि हमारे कर्मों का बंधन नित्य रहे। कर्मों का बंधन तो कट जाना चाहिए। तो इसलिए हमें बहुत श्री कृष्ण का नाम लेना चाहिए और कर्मों के बंधन से मुक्त हो जाना चाहिए के अगला सवाल प्रबोधन महाराज जी के लिए तुम्हारा प्रश्न है। हमारी हरिनाम दीक्षा हुई है, पर गायत्री मंत्र अभी गुरु महाराज से नहीं मिला। कई बार पब्लिक में लोग बोलते हैं गायत्री बोलने को तो हमें बोलना चाहिए या नहीं,
क्या नहीं हुआ गायत्री हरे, हरे नाम, हरे नाम, हरे नाम के करो, नाश्ते, नास्ते, नास्ते गति। अन्यथा ये जो गायत्री मंत्र है, मंत्र पहले चरण की जाती है। इसलिए जब तक हम गुरु से दिखा प्राप्त नहीं की तो गायत्री क्यों जमा करे। गायत्री केवल मन त्रायत मंत्र जो मन को शुद्ध करता है, वो मंत्र है। लेकिन अल्टिमेट जो हमको भगवत्धाम लेने के लेने के लिए जो सहायता करेगा वो क्या है। कोली काल नाम और उप कृष्ण। बता। इस कड़ी का नाम के रूप में भगवान आये। इसलिए शुद्ध भाव से, जितने से प्रयास कर रहे है। नाम नाम उच्चारण की जो 3 स्तर हैं अपराधका, आभास और शुद्ध। नाम। हमारा क्या गोल हैं, शुद्ध नाम लेना तो इसलिए हरिनाम कुश कैसे सही उच्चारण करेंगे। मोहन को संजित करने के लिए केवल गायत्री यम जपते हैं। लेकिन अल्टीमेटली नाम मझे हरे कृष्णा, हरे कृष्णा, कृष्णा, कृष्णा, हरे, हरे, हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे जो
पूछना की बोले बोलिए।
ओम।
तो हमे बोलना चाहिए ही ना।
हि
मंत्र को जोर से उच्चारण करने के लिए मना किया। र, यह मंत्र नहीं है। इसके पहले आम उच्चारण नहीं करते। भगवान के नाम कभी भी खाते, सुते, किसी समय भी भगवान के नाम ले सकते हैं। लेकिन जो मंत्र है उसको शुद्ध शुद्ध भाव से, पवित्र काया, शुद्ध, स्नान आदि करके फिर पवित्र भाव से उच्चारण की जाती है। साथ साथ गुरु के आदेश पर मनमानी से नहीं। और कोई बोलता मैं स्कू उच्चारण कर दिया। जरुरत नहीं
तो मना कर सकते हैं, प्यार से मना कर सकते हैं। ओके महाराज जी, प्रणाम। मेरा प्रश्न है कि मोस्ट ऑफ टाइम। हम लोग इक्वल्स के बीच में रहते हैं। और ये कहा हम लोगों ने सुना है कि फैमिली रिटी ब्रीड्स कन्टेम्ट तो इक्वल्स के लिए अपने 1 लेक्चर में आया था। इसी बीच में की फ्रेंडशिप बहुत इम्पोर्टेंट है। तो कैसे हम अपने इन सिग्निफिकेंस को कल्टीवेट करें और उनके लिए हाई एस टीम अपने हाथ में कल्टीवेट करे। क्या क्या प्वॉइंट्स होना चाहिए हम रेगुलर बेसिस पर कर सकते हैं। हरे कृष्ण,
हरे कृष्ण। आप कहते हैं कि हम हमेशा एक्युअल बीच में रहते हैं, तो आप किसी को आप से सिस्टर नहीं मानते हैं। क्या? तो फिर क्यो बोलते है के पीछे रहते हैं हमेशा। हमेशा हम तीनों आदमी से डील करते हैं। हमसे बड़े, हमसे छोटे तो हम से सामान तो तीनों के साथ हम अगर और उचित प्रकार से व्यवहार करें। तब हमारा कल्याण होगा हमेशा जो हमसे बड़े हैं हर क से, उनको सम्मान भाव से और जो हमसे इक्वल है उनसे फ्रेंडशिप करे। और जो हमसे निचे है तो उनके प्रति कृपा दृष्टि करे, उनको मदद करे। इस प्रकार के मन भाव रखने से हमारा कल्याण है।
अरे
वरी ओके अगला सवाल ही भक्ति करुणा। मैं वाली महाराज जी के लिए। इस बीइंग टू टेन years i हैव। बीन सर्चिंग फॉर राइट प्रेनेंसिएशन ऑफ हरे कृष्ण महामंत्र एंड आलमोस्ट आल दी महाराज बोनिफाइसीनियरस गिव डिफरेंट रिप्लाiजतो, हरे कृष्ण महा मंत्र की प्रमाणिक उच्चारण भला क्या है। 8 10 साल हो गए ढूंढते ढूंढते, लेकिन आज तक प्याज नहीं बुझे महाराज
हरे कृष्ण थे गोलो केर प्रेमधन हरिनाम संकीर्तन, ये जो महामंत्र है, श्रीमती राधारानी द्वारा उच्चारित है। तब जब वे कृष्ण के विरह में ऊँचे प्रकार का, उनको तड़प आती है। तो हरे कृष्ण, हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण, हरे, हरे, हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे। तो ये कृष्ण, हरे, हरे का और रे में ज्यादा डिफिकल्ट नहीं, ये सबसे आसान है। उच्चारण करने में हरे ठीक है। और कृष्ण का जो क्री है वो क्री कहने में थोड़ा डिफिकल्टी है राम और कृष्ण में उच्चारण में राम उच्चारण करने में बड़ी आसानी हो जाता है, जल्दी से उच्चारण हो जाता है। क्री जो है थोड़ा मुश्किल होता है। तो ये कृष्ण का क्री श न कृष्ण कृष्ण का यह जो है, थोड़ा छोटा है कृष्ण का न के बाद जो लास्ट में जो कि न, किषन बोलते हैं वो थोड़ा छोटा है। अगर ये थोडा लम्बा हो जाता है तो द्रौपदी का नाम हो जाता है कृष्णा यानि कि कृष्ण का बहन
ठीक हैं।
तो कृष्ण उच्चारण जो है वो क्रि कहने में थोडा मुश्किल है। पर कर कृष्ण करके उच्चारण कर सकते हैं। और कृष ना अगर बोल देते है तो वो द्रौपदी को संबोंधित किया जा रहा है। पर भगवान के बारे में हम बताते हैं कि वो भाव को ग्रहण कर लेते हैं। भावग्राही जनार्दन तो भाव को देखते हैं। पर फिर भी आपको अच्छा प्रेशन चाहिए कृष? और न राम का राम क्लियर है, ये राम मां होना चाहिए। राम राम में भी है, ठीक है। तो राम उच्चारण करें और रामा अगर बोलेंगे को, यानि कि रामा का 1 यह भी है कि वो लक्ष्मी देवी को संबोधित किया जाता है। रामा, यह रामा जो शब्द है वो श्रीमती राधारानी को भी संबोधित करता है। क्योंकि राम के जो प्रिय है वो रामा हो जाता है। तो राम में भी आ जाता है। तो हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। अगर संस्कृत में देखे तो हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे। तो ये अह जो है, स्पष्ट है। पर यह जो है थोड़ा छोटा है, ज्यादा लंबा नहीं होना चाहिए। तो ये कहने के लिए बहुत कुछ है स्पष्ट उच्चारण के विषय में। पर ये सब तब होगा जब हमारे ऊपर गुरु वैष्णव प्रपा, नामाचार, हरदास ठाकुर का कृपा होगा। तो ये सब जो है अपने अपने समय पर सही हम कर पाएंगे। तो मेन चीज है भाव, क्योंकि भगवान हमने 1 बार नवदीप मंडल, परिक्रमा के समय पर 1 भक्त इस प्रकार से उच्चारण करता खरे कृष्ण करे कृष्ण कृष्ण कृष्ण खरे खरे खरे राम खरे राम राम राम खरे खरे। तो जयपताका स्वामी महाराज जी आगे चल रहे थे, तो हम लोग देख रहे थे कि महाराज जी क्या कर रहे हैं? और यह उत्साह की सच्चाई स्पिन था की उठाली से ता पता नहीं खरे कृष्ण खड़े कृष्ण कृष्ण कृष्ण खरे खरे खरे राम, खरे राम राम राम खरे खरे वो है। उच्चारण नहीं कर पा रहा था, महाराज जी ने किसी को उन्हें टोकने से मना किया, बोला कि करने 2 तो कहने का तात्पर्य यह है कि उच्चारण हम लोग करते हैं। पर भाव सही है तो ठीक है, पर अगर उच्चारण कर रहे हैं। भाव ठीक नहीं है तो सुधार लाना बहुत जरूरी है। ये सब तब सम्भव होगा जब जो है हमारे ऊपर व का, गुरु का कृपा होगा? ओश्फादखीा,
हमारे बीच में आ चुके हैं। हिज होलनेस गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराज की
जा
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम रे राम राम राम हरे कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे कृष्ण हरे राम रे राम राम राम हरे हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे हरे हरे हरे राम राम राम राम हरे हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
राम
राम रे हे प्रभु पद रु ब रभु प्रभु पर रभुपराप्रभुपदा प्रभु प्रभु रुपा प्रभु की जय प्रभु प्रभु पदा परभु दा ग रहु दा दा जय प्रभु गुरु महाराज गुरु महारा गुरु महाराज गुरु महाराज गुरु महाराज प्रभु
गुरु पर
प्रभु पत्रका मोती जाए जाए गुरु दे गुरु दे गुरदे जाए जय गुरु गुरु गुरु जाए गुरुदे से हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम हरे हरे हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा रामा रामा रा मा हरे हरे हरे कृष्णा कृष्णा हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे कृष्णा कृष्णा सभी मोटी हरी राम कब तक हमारा स्टे में राम हरे हरे हार किशना किष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा किशना हरे हरे हरे रामा हरे रामा हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम हरे हरे
हरे
राम हरे हरे
हरे हरे हरे रामा
हरे
हरे अरे रे रे रे रे
रे रे हरे
हरे रामा हरे रामा रामा हरे कृष्णा हरे हरे हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा वा हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा रे रे कृष्णा कृष्णा हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे हरे जितना र राम रे राम राम राम हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे कृष् हरि किशन का का रे अरे अरे राम रे राम राम राम हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे हरे
हरे राम हरे राम
राम राम हरे हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे रामा रे राम राम हरे
हरे
कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे कृष्ण हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कितना रे अरे अरे राम अरे राम
राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे goswami mहाराजशरीgुरुदे सो महाराज की हम बहुत ऋणी है की महाराज इतना समय हमें देते है और महाराज से जितना हम श्रवण करे उतना ही अच्छा है 1 समय किसने जब पूछा कि शक्ति भला कहाँ से प्राप्त होती है तो गुरुदेव के। चरणों में यदि आसक्ति होगी तो हमें शक्ति प्राप्त होगी तो इस तरह से हमें जितना ज्यादा हमारा भजन मे, हमको शक्ति चाहिए वो शक्ति मिलेगी हमें सोलन गोपाल कृष्ण को स्वामी महाराज जी के चरण चरणों से आ सकत होकर के और साथ ही हम देखा महाराज ने पूरा जीवन प्रखरतापूर्वक प्रचार में लगाया है। 1 बार राधानाथ महाराज कह रहे थे इन माई लाइफ द ग्रेटेस् silapa होलीनेस, गोपाल कृष्ण, गोस्वामी महाराज, स्वामी महाराज 1 समय कह रहे थे, maharaj is so very serious in cti, mere pas fnistorishotी about difrent devotees, but about gopal, ma, i have no so grेvnभकतiमहाराज बहुत है महाराज शेयर कर हे थे कि बिग जितनी भी तस्वीरें होती हैं भगवान की, उनको भी प्रणाम करते थे। और अगर कोई विग्रह, अगर, प्रॉपर, इंस्टॉल, डेमी, ईवन देन ही महाराज प्रणाम करते हैं, झुकना जानते हैं क्योंकि महाराज विनम्रता से पूरी तरह से भरे हुए हैं। इस गोभी प्रांधन कहा करते थे कि महाराज की जो सहिषणुता है वो इतनी बड़ी है कि ब्रह्मांड के परे चले जाए इतनी ज्यादा सश्रोताएंऐसेएक और महाराज भी कह रहे थे कि मैंने देखा गोपाल कृष्ण महाराज जी के 80 प्रतिशत जो डिसाइपल हैं बहुत बदमाश है लेकिन गोपाल कृष्ण महाराज की कृपा ही उनको तर सकती है। तो ये सन्यासी जो है बड़े बड़े दिग्गज भक्त हैं, उनका कहना है वास्तव है 1 और डिूडनेकहाकीवास्तव गोपाल कृष्ण महाराज जी ही रक्षा कर रहे हैं इस कौन की बाहर से भी और अंदर से जो थोड़े बहुत शरारती तत्व होते है उनसे भी, लेकिन हाँ, इस कौन आगे बढ़ रहा है, कुछ नहीं हो सकता है इस कान को, क्योंकि रक्षा हो रही है तो 1 बहुत ही पवित्र शुद्ध महाभागवत शिरोमणि गोपाल कृष्ण गोसाई हाराज जी के द्वारा, इसीलिए हमने देखा है महाराज रात को भले कितने थके हो, लेकिन नर्सिंग कवच पढ़ के सोते हैं किसके लिए इस कान के लिए ताकि इस कॉल में डिवोटीज, जीवन भर प्रहार शरणागत रहे और जीवन भर भक्ति करते रहे। तो महाराज विदाउट फेल रात को नर्सिंग कवच पढ़कर सोतेहै खुद देखा महाराज को मसाज करने, जा कर महाराज की कितने थके हो, लेकिन महाराज करते हम सबका न सोचते महाराज इनफाइनाइट कम्पैशन है महाराज का, तो इस प्रकार से इनफाइनाइटली मर्सीफुल, हमारे श्री गुरुदेव हमारे बीच में है, हमें समय दे रहे हैं, डिस्पाइट हिज हेल्थ हाल देखने है महाराज जी की, हेल्थ की सी है ईवन दन महाराज उत्साह पूर्वक आते हैं आप भक्तों के लिए, कि भक्तों को प्रेरणा मिलेगी सो महाराज का हृदय कितना बड़ा है, वो अचिन्तय है अगर अपनी गर्दन को ऊंचा करते रहे, करते रहे, करते रहे, करते रहे, करते रहे, हमारी गर्दन टूट जाएगी लेकिन उन महानता की ऊँचाई को हम नहीं देख सकते। सो ऐसे प्रेमी भक्त महाभागवत pm हमारे गुरुदेव हमारे बीच में है, हमारा बहुत बड़ा sohag gopal krna go the things to say about marg आज के मुखार सुने थोड़ा महाराज के बारे में और ढेर सारा महाराज से हम लोग सवार करेंगे। अरे कृष्णा
महाराज कह रहे हैं कि मैं महा भागवत नहीं हूँ, मैं भगवान का सेवक हूँ
महा भागवत यही कहते हैं
अरे।
आप यात्रा का आखिरी दिन है, आपकी
यात्रा का आखिरी दिन है। आज
चले गए।
बहुत से भक्त सुबह चले भी गए। हम प्रधुमन, प्रिया और पुरजन, प्रभु और बाकी सब भक्तों का आभार प्रकट करते हैं। जिन्होंने यहाँ सुविधा जिन्होंने इतना मेहनत करके सब किया। आप सब लोगो की सुविधा के लिए।
वह आज का विषय है, क्या है?
आज का विषय है। क्या प्रीचिंग इस संस पीचिंग, इस सेंस प्रचार सबसे आवश्यक है, प्रचार सबसे ज्यादा आवश्यक है।
तो
इसको हम प्रारंभ करेंगे। भागवतम के सातवें स्कन के प्रथम प्रथम
अध्याय का नहीं
है तो सातवां स्कंध है। उसका छठा अध्याय है और चौबीसवां लोक है। उसको पढ़ के हम प्रारंभ करेंगे। इसकी चर्चा प्रलाद महाराज का प्रलाद महाराज का उच्चारण है।
यह 1 बार फिर से 7 वर्ष कन छटा 24 वर्ष लोग तसमातसर्वेशुभूते शु djamkorutsohrdambav masurmnptcaयया दुश्यत अधोशजा शब्दार्थ, तस्मात अतेव, सर्वेशु समस्त भूतेशू जीवों पर जयम दया कुरुत दिखलाओ सौर, दम मैत्री भाव भाव प्रवृति। आसुराम असुरों का। जो मित्रों तथा शत्रुओं को प्रथक करते हैं, उन मोच त्याग कर। यया जिससे तुष्यति प्रसन्न होता है। अधोक्षज भगवान जो इंद्रीय अनुभूति के परे
हैं,
अनुवाद अतएव, हे असुरों। अतएव, हे असुरों से उत्पन्न मेरे प्यारे तरुण मित्रों। तुम सब ऐसा करो कि भगवान जो भौतिक ज्ञान से की धारणा से परे हैं, वे तुम पर प्रसन्न हो। तुम अपनी आसुरी प्रकृति छोड़ 2 और सत्ता या द्वैत रहित होकर कर्म करो। सभी जीव सभी जीवों में भक्ति जगा कर, उन पर दया प्रदर्शित करो और इस प्रकार उनके हिताशी बनो। तात्पर बाहस्टवाइnग्रेस। इसी वक्त दान पर स्वामी शलपालop्रोपदकी भगवत गीता 18 पा
hi ये जो 7 बजे है, पापाजी के द्वारा बहुत ही महत्वपूर्ण है। आप ध्यान से सुनिएगा। महतपूर्ण
गुरु महाराज कह हे हैं। सब ध्यान से सुनिएगा। तात पर है। यह तात्पर बहुत महत्वपूर्ण प्रो दिया हुआ तात्पर बहुत ही महत्वपूर्ण है। तातपरभगवतगीता 18, 55 में भगवान कहते हैं भक्त्यमामभिजानाति या वान या चश्मितत्वता। मनुष्य केवल भक्ति से परमेश्वर को यथा रूप समझ सकता हैं। प्रलाद महाराज ने अंततः अपने असुर सैपाटियों को शिक्षा दी कि वे प्रत्येक व्यक्ति को कृष्ण भावनामृत भावनामृत विज्ञान का उपदेश देकर, भक्ति की विधि स्वीकार करें, उपदेश देना, प्रचार करना भगवान की सर्वोत्तम सेवा है। जो व्यक्ति कृष्ण भावनामृत के उपदेश कार्य की इस सेवा में लग जाता हैं, उससे भगवान तुरंत ही अतीव प्रसन्न होते हैं। इसकी पुष्टि स्वयं भगवान ने भगवत गीता 18, सिक्स्टी नाइन में की है। नच तस्मान मनुष्य शुकष्चिमननयप्रियक्र। इस संसार में न तो उससे बढ़कर प्रिय मेरा दास है, न भविष्य में कभी इससे बढ़कर प्रिय होगा। यदि कोई भगवान के यश तथा उनकी श्रेष्ठता का उपदेश करके कृष्ण भावना को फैलाने का प्रयास निष्ठा पूर्वक करता है तो भले ही वह रूप से शिक्षित पूर्ण रूप से शिक्षित न हो। वह भगवान का सर्व प्रिय भक्त बन जाता है, दास बन जाता है। यह भक्ति है। जो ही शत्रु तथा मित्र का भेदभाव किए बिना मानवता के लिए वह सेवा करता है। क्यों की भगवान प्रसन्न होते है और उसके जीवन का उद्देश्य पूरा हो जाता है। अत श्री चतर महाप्रभु ने प्रत्येक व्यक्ति को उपदेश दिया है कि वह गुरु भक्त बने और कृष्ण भावनामृत का प्रचार करें। यारे देखे। तारे कहे। कृष्ण उपदेश भगवान की अनुभूति करने का यह सरलतम उपाय है। ऐसा उपदेश कार्य से उपदेशक तुष्ट होता है और जिन्हें उपदेश दिया जाता है, वह भी तुष्ट हो जाते। संपूर्ण विश्व में शांति लाने की विधि यही है भोक्ता राम यज्ञ तप सौ। सर्वलोक महेश्वर सुह्रद। सर्वभूतानाम ज्ञात्वा माम शांति क्षति। प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वह परमेश्वर संबंधी इन तीनों सूत्रों को समझे कि वे परमभोक्ता हैं, कि वे प्रत्येक वस्तु के स्वामी हैं तथा वे सबों के श्रेष्ठ, सूरत तथा सखा हैं। उपदेशक को ये सत्य स्वयं समझना चाहिए और सबको इन्हीं का उपदेश देना चाहिए। तब सारे विश्व में शांति रहेगी। इस श्लोक में सौह्लदम शब्द अत्यंत महत्वपूर्ण है। सामान्तया लोग कृष्ण भावनामृत से अनजान हैं। अत उनका हितैषी बनने के लिए मनुष्य को चाहिए कि वह उन्हें बिना भेदभाव के कृष्ण भावना मृत की शिक्षा दें चूंकि। भगवान विष्णु हर 1 के अंतस्थल में विद्यमान है। अत प्रत्येक शरीर विष्णु का मंदिर है। मनुष्य को चाहिए के इस ज्ञान का दुरुपयोग दरिद्र, नारायण जैसे शब्दों के बहाने से न करें। यदि नारायण दरिद्र अर्थात गरीब मनुष्य के घर में वास करते हैं तो इसका अर्थ यह भी नहीं होता कि वे दरिद्र हो गए। वे सर्वत्र रहते हैं दरिद्र के घर में और धनी के घर में भी। किन्तु परिस्थितियों में वे नारायण बने रहते हैं। यह सोचना चाहिए कि वे निर्धन या धनी हो जाते हैं। भौतिक अनुमान हैं। वे सदैव, शड, ऐश्वर्य पूर्ण अर्थात सदा, चहु इश्वर से पूर्ण रहते हैं। अतएव ples अतएव हे असुरों से उत्पन्न। मेरे प्यारे तरुण। मित्रों। तुम सब ऐसा करो कि ऐसे भगवान जो भौतिक ज्ञान की धारणा से परे हैं, वे तुम पर प्रसन्न हूं। तुम अपनी आसुरी प्रकृति छोड़ 2 और शत्रुता या द्वैत रहित होकर कर्म करो। सभी जीवों में भक्ति जगाकर उन पर दया प्रदर्शित करो और इस प्रकार उनके हितैसी बनो
चलागया। तस्मै श्री गुरुवे नम। चैतन्या मनोभीष्ट साबित स्वयम रुप दातीसपदातचैतन्या प्रभु नित्यानद। श्री यद्वैतगदाधरशिवा स हरी गौरव हरि हरि कृष्णा हरि कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।
आप सबका हार्दिक स्वागत।
आप सबका हार्दिक स्वागत।
कल रात को बहुत देर को दर्शन दे रहे थे।
कल
गला
कल रात को गुरु आज बहुत देर तक भक्तों को दर्शन दे रहे थे। इसलिए उनका गला जो है, बैठा हुआ है।
ये श्लोक भागवत के सातवें स्कन्द में प्राप्त होता है।
ये श्लोक हमें भागवतम के सातवें स्कंध में प्राप्त होता है।
सातवें में पढते हो वान
सातवें स्कंध में पढते हो। भगवान नरसिंह देव की लीला और प्रलाद महाराज के विषय में विषय में
थे के साथ राज देश की चर्चा करते थे।
चैतन्य महाप्रभु जब पृथ्वी पर थे तो अक्सर वो अपने अपने भक्तों के साथ जो हैं प्रलाद महाराज और दुर्व महाराज के लीलाओं की चर्चा किया करते थे। रास लीला की नहीं खास कर के रास लीला की नहीं रास लीला की नहीं, रास लीला की नहीं और चर्चा करते थे प्रहलाद और द्रव की भौतिक
समाज में लोग हीरो बनाते हैं और
भौतिक समाज में लोग हीरो बनना चाहते
हैं
फिल्म हो, कोई स्पोर्ट्स में हो तो क्रिकेट बनाओ, वो कोई किसी में स्वीकार कर द
तो जो कोई फिल्म स्टार हो, कोई स्पोर्ट्स में हो और कोई इस तरह के भौतिक जो हीरो हैं उनको उनको लोग है हीरो मानते
हैं
कई लोग जो हैं फिल्म स्टार के भक्त होते हैं ब्रूसली ब्रूसली जो था उसका वो भी कई लोगों का हीरो था
ो
कइयों के घर में गरमा ने देखा ब्रूसली की फोटो से
ये कोहली
जो
है विराट कोहली, कोहली, कोहली के भी वहां पर उनके भी पोस्टर लगे होते हैं घर में घर, कईयों के घरों में उनके भी पोस्टर लगे होते हैं
दाड़ीमुस्टाजक्यो
गुर्मा ने किसी प्रसिद्ध व्यक्ति से पूछा कि दाड़ी और मुस्तार क्यों रखते हो तुम बिना दाड़ी
ज्यादा लिया मैंने कहा कि दाढ़ी के बिना तुम ज्यादा खूबसूरत दिखते हो
तो
उन्होंने आपने कहा कि दाडी के बिना आप ज्यादा खूबसूरत दिखते हो
हम बाँध दाढ़ी रख रहे हैं ये कूल ने दाढ़ी रखी है
क्योंकि हम हम दाड़ी रखते हैं क्योंकी कोहली ने दाड़ी रखी
है तो अनेक प्रकार के हो के लिए हीरो कौन है लाल राज
तो कई प्रकार के हीरो हैं लेकिन भक्तों के हीरो कौन है प्रलाद महाराज, दुर्व महाराज
इनकी शिक्षा को ज्यादा आदर देते
हैं तो इनकी शिक्षा को हमें ज्यादा आदर देना है, हम देते हैं, हम हम आदर देते हैं, हम आदर देते
हैं वक्त लोग प्रधान उन्होंने ज्ञान प्राप्त किया था माता के प्रलाद महाराज ने
देवी ज्ञान प्राप्त किया था जब वो माता के गर्भ में थे किसके पुत्र थे प्रलाद महाराज नरसिंगा भगवान हैं, भगवान के अवतार हैं प्रकट हुए आधे पुरुष,
आधे पशु के रूप में, प्रकट हुए
आधे पशु और आधे पुरुष के रूप
में जो भक्त नहीं है, वो क्या कहते हैं यह असंभव है जो भक्त
नहीं है, वो क्या कहते हैं कि ये असम्भव है कैसे सम्भव है कैसे सम्भव है कि 1 व्यक्ति, आधा पुरुष और आधा पशु हो mitologythiस is maitologीअसलिय नहीं है मतलब इसमें की असलियत नहीं
है अंग्रेज
जो अंग्रेज जब भारत में थे तो उनका यही प्रोपेगंडा था कि जो स्क्रिप्चर्स है, ये सब माइथोलॉजी है तो प्रलाद महाराज की शिक्षा जो है, उसे हमें मुझसे, हमें लेना चाहिए उन्होंने
शिक्षा प्राप्त की किसके द्वारा, मुनि की
कृपा के द्वारा, उन्होंने शिक्षा प्राप्त किसके द्वारा, नारद मुनि की कृपा के द्वारा,
गर्भ में थे नानी के में, जब
वो गर्भ में थे तो उनकी प्रलाद महाराज की जो मा।
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