Haridwar Yatra || Day -4 || HH Gopal Krishna Goswami Maharaj || 2023

HH Gopal Krishna Goswami Maharaj answers devotees' questions about staying sincere in spiritual practice, avoiding pride that comes from years of service, and balancing divine grace with active effort. He offers concrete guidance on maintaining consistency, handling conflict in community, and using gratitude to counter complacency.
Chapters
भक्ति की शुरुआत कहाँ से आती है? भक्ति का बीज कहाँ से प्राप्त होता है, कैसे प्राप्त होता है? छिलरुपगुस्वामीजी को जो शिक्षा दिया श्री चेतन महाप्रभु ने, प्रयाग राज्य में, उस शिक्षा
में
ये जो प्यार है। अभी इससे पहले जो बातें बताई उसमें ये बता रहे हैं कि कितने अवस्थाओं को, कितने सीढ़ियों को पार करके। तब व्यक्ति जब अत्यंत भाग्यवान होता है तो उसे भक्ति प्राप्त होता है। भक्ति कोई साधारण चीज नहीं है। भक्ति प्राप्त करना कोई साधारण चीज नहीं है। यह बहुत ही दुर्लभ है। अत्यंत दुर्लभ किसी की लॉटरी लग जाती है, बहुत मुश्किल है। लॉटरी लगना है कि नहीं? आप लोगो में से किसी ने लौटरी खेला कभी नहीं खेले। जो लौटरी खेले हैं वो समझ सकते हैं कि भक्ति का महत्व जिसकी लौटरी लग जाती है वो कितना खुश रहता होता है। है न? कभी लगा आपका खेल प्रभु में, लेकिन लगा नहीं है न। तो लौटरी लगने पर कितनी खुशी मिलनी चाहिए। लेकिन जो लॉटरी लॉटरी लग जाती है मैं कितना भाग्यशाली हूँ। जिसकी लौटरी लग गई वो बहुत भाग्यशाली है,
है।
लेकिन जिसकी लौटरी लगने के बाद बाद में पता चला कि उसने उसका फायदा नहीं उठाया, किसी को लॉटरी नहीं लगा तो अभागा है। लेकिन जिसने लौटरी लग गई और उसने उसका लाभ नहीं उठाया वो महा अभागा
है,
है कि नहीं। तो जिसको भक्ति नहीं मिला वो क्या है अभागा। लेकिन जिसको भक्ति मिली और उसने उसका लाभ नहीं उठाया वो महा अभागा चलो नौतम। दास ठाकुर जी ने 1 बहुत सुन्दर गीत गाया गौरा पा हूँ
न भजिया मैनू, प्रेम रतन धन हिलायो रैनु
गौरव
हूँ
न भजिया मैनु
नरमदा ठाकुर जी कहते हैं कि मैं गौरांग महाप्रभ के चरणों को भजन नहीं किया। प्रेम रतन धन, प्रेम रत्न धन मुझे मिला। लेकिन मैंने उसको पाकर भी गंवा दिया,
पाया।
और फिर खोया 1 डिपार्टमेंट होता है, खोया पाया
है,
यात्रा में भी होता है। अभी सुबह सुबह भग स्मार्टफोन खो गया
था,
है किसी का किसी का अगर स्मार्टफोन खो जाए तो कितना व्याकुल हो जाता है। है हो जाते कि नहीं? क्यों क्यों व्याकुल हो जाती है। क्योंकि उसमें सब कुछ है हमारा ह। लेकिन अगर हमारी भक्ति खो जाए तो हम व्याकुल होते हैं, नहीं होते। इतना व्याकुल मुझे लगता है स्मार्टफोन खो जाए तो जितना व्याकुल होते हैं उतना तो नहीं होते। थोड़ा बहुत हो सकता है टेंशन हो भी जाए लेकिन इतना नहीं। लेकिन र्धमदास ठाकुर जी इस बात को लेकर प्रताप कर रहे हैं।
हरि हरि विफल जाना माग वाईनो मनुस्या जनमा प्या राधा कृष्ण न भजिया जानिया सुनिया विशाखैनू, हरि हरि विफल जाना न ग।
वैनू ये जो प्रार्थना है, यह भक्ति का आधार है। जिसे कहते हैं गंभीरता। हमको इतना अनमोल चीज मिली है। भक्ति प्रेम रतन धन, प्रेम रतन धन। कितना अनमोल चीज मिला है इसको समझने के लिए। जैसे मान लीजिये 1 बहुत बड़ी कंपनी का मालिक है उसी कंपनी में 1 मैनेजिंग डायरेक्टर संभालता है उसकी कंपनी को उसको सैलरी मिलती है 5 लाख रुपए। हर महीने तो 1 दिन मैनेजिंग डायरेक्टर
जो है
अपनी कंपनी के मालिक के पास आता है, बात कर रहा होता है। और तभी उसका बेटा आता है। मालिक का बेटा और कहता है पापा। क्या कहता है? पापा बोलिए पापा, पापा, पापा। इस शब्द में कुछ हैं स्पेशल। और जैसे पापा जैसे बोलता है। तो मालिक बोलते हैं। हाँ बेटा पापा, हमको न 2 करोड़ रुपए की गाड़ी चाहिए। पापा तुरंत साइन करते हैं, चेक, पे दे देते हैं। मैनेजिंग डायरेक्टर हैरान पूरे, महीने मेहनत करता हूँ। मेरे को 5 लाख देते है। और ये कुछ नहीं किया कि केवल क्या बोला पापा।
बस
ये 1 अलग विज्ञान है, है न? इसी को भक्ति कहते है। क्या? इसी को भक्ति कहते है। और मार्ग जो है ज्ञान मार्ग है कर्मकांड, ध्यान का अंड। और भक्ति मेरे अंतर है भगवान से। 1 संबंध जोड़ना संबंध का विज्ञान है। भक्ति, उसने क्या किया? मैनेजिंग डायरेक्टर सोच रहा, मैं इतना मेहनत कर रहा हूँ, मेरे को 5 लाख मिलता है। वो भी अगर 12 घंटे नहीं आता हो तो कट जाता है। और ये बच्चा कुछ नहीं किया। केवल आग के बोल दिया। पापा। ऐसा क्या किया? इसने इसको हते हैं संबंध। क्या कहते हैं? संबंध। इस कहते हैं।
प्रेम।
1 प्रेम जब बन जाता है भगवान
से,
तो फिर उसमें कैलकुलेशन नहीं होता है? कितना दिया, कितना लिया? कहते न? मेरा सब तो आप तुम्हारा है। दूसरा उदाहरण शिलभप्रहुपाजीदते है। 1 लड़की का। लड़की के मान लीजिये हसबैंड है, उसके बहुत धनी आदमी है। और जिस दिन उस लड़की से उसका विवाह हो जाता है, लड़की उसके घर आती है। उसका घर बहुत बड़ा है। बोलती है किसका घर है, बोलती है, मेरा घर है। क्या? कहती है मेरा हमारा घर है।
यह
है कैसे। तुम्हारा हो गया, शादी हो गया। बस उस दिन हमारा हो गया। जिस दिन शादी हो जाती है। उस दिन के बाद से पति का हर वस्तु किस का हो जाता है। पत्नी का हो जाता है। है ना? उसी तरह से भगवान से जब संबंध जुड़ जाता है। भगवान जब हमको अपना लेते हैं, सम्बन्ध हमारा जुड़ जाता है। तो फिर भगवान कुछ अलग नहीं है। भगवान का ये। और ये हमारा तो इतना दुर्लभ वस्तु हमको मिला प्रेम। रतन। धन कहते हैं कि भगवान जो भगवान से प्रेम करते हैं, जो भगवान जिनसे प्रेम करते हैं। तो भगवान अपने भक्तों के बस में हो जाते हैं। भक्त बोलते हैं नाचो। तो नाचते हैं भक्त। बोले भक्त के इशारे भक्तों की खुशी के लिए नाचते हैं। भक्तों की प्रसन्नता के लिए। तो ये जो विज्ञान है, यह, इसी को कहते हैं भक्ति अहम भक्त पराधीन। श्रीमद भागवत में पहले श्लोक श्रीमद भागवत का है। वो क्या है ओम नमो भगवते वासुदेव आय जनमध्सतनवयात तेने हृदय आदि मुहयंतियतसूरतेजोवारि मृदा जथा विनिमय तरिसरगुमरसाधामनस्व निरस्त कोकम सत्यम परम धीमहि। इसमें स्लव्यासजी भगवान की परिभाषा देते हैं। भगवान को परिभाषित करने का प्रयास करते हैं। तो कहते हैं भगवान क्या है? स्वराट, क्या कहते हैं? स्वराट स्वराट का मतलब सुप्रीम ली। इंडेपेंडेंट। यहाँ श्रीमद भागवत की शुरुआत। व्यास जी लिखते हैं कि भगवान स्वराट हैं। लेकिन भगवान आगे उसी श्रीमत भागवत में जब दुर्वासा जी का प्रसंग आता है किसका दुर्वासा और महाराज अम्बरीश का प्रसंग आता है। और जब सुदर्शन चक्र जो है, दुर्वासा जी के पीछे भागता है। अम्बरीश महाराज के प्रति अपराध के कारण, जो भागते भागते ब्रह्मा जी के पास जाते हैं, ब्रह्मा जी से कुछ नहीं होता है। तो शिव जी के पास जाते हैं। शिव जी भी उनको मना कर देते हैं कि आम वेरी सौरी। इसमें आपका कोई सहायता नहीं कर सकता। क्योंकि आपने 1 भक्त के चरणों में अपराध किया है। इसलिए क्या होगा? आपको कोई सहायता नहीं कर सकता।
मैं
पहले पापा के पास गए, ब्रह्माजी के पास, ब्रह्मा जी ने हाथ खड़े कर दिए। बेटा, ये सुदर्शन अभी किसी को नहीं सुनने वाला है। शिव जी के पास गए। शिव जी भाई हैं।
भैया
भैया बचाइए, वो भी हाथ खड़ा कर दिया। अभी। तो सुदर्शन। फिर बोले तुम बचना चाहते हो। तो भगवान विष्णु के पास ही जाओ भगवान विष्णु के पास। वो वो भी हाथ खड़े कर दिए। अभी, ये मेरे हाथ में नहीं है। सुदर्शन, वैसे तो मेरे हाथ में ही रहता है। लेकिन अभी मेरे हाथ से बाहर है। तो दुर्वासा बोलते हैं कि ऐसा क्यों प्रभु आप ही का सुदर्शन चक्र है। तो भगवान स्वयं बोलते हैं कि दुर्वासा जी को कहा? दुर्वासा जी। अहम भक्त पराधीन अस्वतंत्र, इव द्विज, अस्वतंत्र हूँ। मैं क्या बोल रहे हैं? अस्वतंत्र भक्त पराधीन हूँ। मैं भक्तों के पराधीन रहता हूँ।
मैं।
तो भागवत की शुरुआत में व्यास जी कहते हैं, स्वराट हैं। और भगवान कहते हैं गलत, मैं स्वराट
नहीं हूँ,
मैं स्वराट नहीं हूँ। मैं क्या हूँ भक्तों के पराधीन हूँ। ये है प्रेम। भक्तों का प्रेम, जो है वह भगवान को इतना प्यारा है। और वो प्रेम देने के लिये कौन आये हैं? श्री चेतन महावर, श्री कृष्ण चैतन्य प्रभु
जीव दया का री सपर सदस्र धमा सहयावतारी सपर सदस्। य धामा सहाय बातारी। अत्यंत दुर्लभ प्रेमा करि बारे दाना सिखाए सरणागती भग तेरा प्रणाम।
श्री चेत ने महा प्रूव अपने पार्षदों के साथ उतार लिए किसलिए जीव दया करी। अत्यंत दुर्लभ प्रेम कौरिबारे दान। अत्यंत दुर्लभ प्रेम बांटने के लिए। आए चैतन्य, महाप्रभु और प्रेम दे रहे हैं, बाँट रहे हैं, क्या बाँट रहे हैं? प्रेम बांट रहे हैं कितने लोग लेना चाहेंगे। सब लेना चाहते हैं। है कि नहीं? तुम भगवान बोले ठीक है चलो मैं, आप लोगो को प्रेम रुम। अमृत दूंगा सब लोग आ जाये। अपना अपना बर्तन लेकर क्या बर्तन लेके आये है? कहाँ लेंगे प्रेम? कोई बोलता है? ठीक है। प्रभु जी, हमारे इसी में दे दीजिए। तो प्रेम अमृत को धारण करने के लिए सुयोग्य बर्तन होना चाहिए। हर जगह नहीं ले सकते ना। तो इसलिए प्रेम को धारण करने के लिए उचित चेतना होनी चाहिए। क्या होनी चाहिए? उचित चेतना शरणागति क्या शरणागति। तो चेतन महापुर प्रेम बांटे। अरे कैसे दूंगा? कोई तो पात्र है ही नहीं। पत्र क्या? पात्र का क्या अर्थ हैं? 1 अर्थ है बर्तन और दूसरा अर्थ है। योग्य तो बर्तन हैं। तभी तो आप उसमें लेंगे प्रेम और योग्य हैं। तभी तो प्रेम मिलेगा तो पात्रता क्या पात्रता देखिये कोई पात्र है ही नहीं, कोई पात्र नहीं है। प्रेम प्राप्त करने के। मैं आ तो गया बांटने के लिए, लेकिन कोई लेने वाला तैयार नहीं। क्वालिफिकेशन नहीं है, योग्यता नहीं है। कैसे बांटू, कैसे बांटू, कैसे दूं। तो फिर चेतन ने महा, प्रभु ने क्या किया, चेतन ने, महाप्रभु ने 1 कॉलेज खोला, क्या खोला कॉलेज जहाँ पर सिखाया जायेगा, क्या सिखाया जाएगा, शरणागति क्या सिखाया जायेगा, शरणागति और पात्र बनाया जाएगा, शरणागति पहले सिखाया जायेगा, उसके बाद प्रेम दिया जाएगा।
अत्यंत दुर्लभ प्रेमा करि, बारदा, न सिखाये, सरणागती,
भकतेरप्रण सिखाई, शरणागति, शरणागति क्या सिखा रहे हैं, शरणागति सिखाने के लिए कॉलेज खोला जिसका नाम है इस्कॉन पहले शरणागति फर्स्ट स्टेप। क्या है, शरणागति, शरणागतम मा, मे कम, शरणं ब्रज, मेरी शरण में आओ शरणागति सारे वैदिक शास्त्रों का जो संबंध ज्ञान है, उसका निष्कर्ष है शरणागति जेतने महापुरु ने शरणागति सिखाया। लेकिन शरणागति कॉलेज में एडमिशन ही नहीं हो पा रहा है। पहले तो कॉलेज में एडमिशन होना चाहिए न। और कोई एडमिशन ही नहीं ले रहा है। क्योंकि एडमिशन लेंगे तब तो पढ़ाई होगी है कि नहीं। तो एडमिशन का क्या योग्यता है, कोई योग्यता नहीं है। इस कॉलेज में एडमिशन की, कोई योग्यता नहीं है, केवल 1 चीज चाहिए। लेकिन क्या बस मान लीजिये कि हम अयोग्य हैं, यही योग्यता चाहिए क्या? कौन सी योग्यता चाहिए, हम अयोग्य हैं, यही योग्यता है जो मानता है कि हम क्या है, अयोग्य है। 1 बार सिलप्रहुपाजी, 1 मंदिर में गए तो वहां पर 1 बहुत बदमाश जिबोटी
था
तो वहाँ के प्रेसिडेंट बहुत परेशान थे, उससे बहुत परेशान थे, उन्होंने ठान लिया था कि इस बार प्रपा जी आयेंगे तो इसको बाहर निकाल दूंगा। प्रौपाजी आये तो प्रेसिडेंट ने कहा पापा जी ये भक्त बहुत बदमाश है, ये तो किसी भी कीमत पर इसको नहीं रखना है। मुझे बहुत पतित है। तो प्रोपज बोले ठीक है, ठीक है, पति है। पर प्रयास करो सुधारने का रख लो। उसको परोपा जी बोले वो बोला नहीं, कोई चांस नहीं है प्रोपाजी इसके सुधरने का यह नहीं सुधर सकता। हमने बहुत प्रयास कर लिया, बहुत पतित है, बहुत पतित है। प्रुपाजजी बोले कि ठीक है, बहुत पतित हैं। तो आप पतित हैं कि नहीं है। बोल मैं हूँ लेकिन इतना नहीं
मैं हूं।
लेकिन इतना नहीं हूँ। तो प्रभा जी बोले तो ठीक है। तो आप बाहर चले जाओ। बोला क्यों बोले? क्योंकि ये जो इंस्टिट्यूशन इस कौन है, यह पतित पावन चैतन्य महापुरु ने बनाया है, पतितों का उद्धार करने के लिए बनाये। और चूंकि आप पतित नहीं या आप पतित से ऊपर उठ चुके हैं इसलिए अब आपको जरुरत क्या है इसकी यहाँ पे वो लोग होने चाहिए। हॉस्पिटल में कौन एडमिट होता है जो बीमार है, जो ठीक हो चुका हो तो बाहर भी अपना काम कर लेगा है कि नहीं बात तो सही है। तो भक्त बोले ठीक है। समझ में आ गया। आप है न। तो 1 भक्त 1 बार प्रहुपाजीएक मंदिर में गए, वहाँ भक्त बोला प्रहुपाजी इस भक्त के साथ में नहीं रहा। या तो ये या मैं या तो ये रहेगा या मैं रहूँगा। दोनों 1 साथ नहीं रह सकते, यह संभव नहीं है। 2 गोलोक बनाना पड़ेगा आपको या तो ये रहेगा या मैं रहूँगा टॉलरेट नहीं कर सकते। प्रो टॉलरेट करो, कैसे टॉलरेट करे, प्रोपाजीप्रोपाजी बोले, जैसे मैं तुमको कर रहा हूँ, इतनी देर से वैसे करो
है,
तो पतित हैं। लेकिन चैतन्य महा प्रूफ पतित पावन है,
पति ताप व ना हेतु, तवायबतारा मौसम पतिता प्रभु नापाईबेयार।
अच्छा थोड़ा मृदंग में बच रहा है, तो बहुत बढ़िया है, नींद? नहीं आएगी। तो इसलिए पतित पावन पतितों का उद्धार करते हैं, लेकिन 1 व्यक्ति का उद्धार नहीं करते हैं। चेतन महावर पतित पावन है। क्योंकि जो मानता ही नहीं कि मैं पतित हूँ, महाबर आपका उद्धार कर दूं। कैसे करेंगे, आप क्या करेंगे, आप पतित है, पतित पावन है।
मैं।
और पति दिमाग खराब हो गया। आपका किसी ने आपको गलत सूचना दिया है। मैं तो यहाँ आया हूँ दूसरों का उद्धार करने के लिए। इस काम में मैं दूसरों का उद्धार करूँगा। अच्छा आप दूसरों का उद्धार करना है।
हाँ,
फिर ठीक है। आप दूसरो का कीजिए। तो पतित पावन चेतन्य महाप्रभु है। लेकिन जो व्यक्ति अपने को पतित मानता
है,
ये योग्यता है। और फिर चहितन्यमहापुर इस कॉलेज में, उसका एडमिशन तभी होगा जब अपने को क्या
मानेगा, पतित मानी, अनादि का रमा पाले पड़ी भाव जाले खाई को चो ला, संतरी सतरी जाय, सिंधु, अंत नहीं पाय भव सिंधु। अनंत विशाला, निमग ना हइनुजाबेडकिनूकात, र रब के हो, मोरे कर, उधारा,
अनादि काल से अनादि इस भवसागर में पड़े हुए हैं। हम। ये सबसे इम्पोर्टेंट चीज है रियलाइज करना कि हम कितने सालों से पड़े हैं। इस भवसागर में। अनादि काल, अनादि क्रम फले, पड़ी भवारणवजले, हाबुडुबु खाई को। तो काल, अपराध, शस्त्र भाजन पतितं भीम भवारणवोदरेअगतिम सरणागत। हरे कृपया केवल आत्म। 7 पुरु और कभी डूबते हैं, कभी ऊपर आते हैं, कभी नीचे, कभी ऊपर, कभी नीचे। हाबू दुब, हाबुदुबहाबुदुब खाई तैर रहे। सातरी सातरी जाए, सिन्धु, अंत नहीं पाए। क्योंकि भोसागर इतना विशाल है, उसको तैर कर, पार करना संभव नहीं है। बहुत दुखी हो गया, चिल्लाने लगा, रोने लगा।
कोई है,
कोई है, कोई है, बचाओ, बचाओ, बचाओ
निमग्न हो।
इन जबे
डाकिनि, कतर रोबे।
कातर भाव से रोने लगा। मैं कोई व्यक्ति पानी में डूबता तो कैसे चिल्लाता है। से चिल्लाया ऐसे चिल्लाना है जिसको कहते हैं जॉब करना। जब आप पानी में डूबने लगे, तो उस भाव में जब जब करेंगे। जैसे गजेंद्र ने किया, गजेंद्र ने पुकारा, जैसे द्रौपदी ने पुकारा, असहाय है। तो कातर भाव से जब रोने लगे कि कोई मेरा उद्धार करो, कोई मुझे बचाओ बचाओ, मैं डूब रहा हूँ, डूब रहा हूँ। से काले आयला। तुमी उसी समय समय जब ऐसा कोई पुकारता है, उस समय भगवान उस पर दयालु होकर के पास भेजते है किसको 1 कैप्टेन को भेजते हैं, गुरु को भेजते हैं। तो गुरु जी आते हैं। चलो चलो बाहर निकलो आ जाओ। पकड़ो हाथ पकड़ो मेरा क्या, आप कौन
है,
तुम डूब रहे थे, अभी मैं डूब रहा था,
मैं
आपको कोई कंफ्यूजन हो गया होगा, मैं नहीं डुबरहा हूँ। मैं बहुत खुश हूँ। बहुत सुखी हूँ हो गई। श्वर्य प्रसक्त नाम तया परिचित साम, बेवसयात्मिका बुद्धि समाधनविधियतेभोगऐ श्वर्य में जिसकी बुद्धि लगी हुई हैं, उसके अन्दर कभी भी आत्मिक बुद्धि नहीं आ सकता। बेवस्यआत्मिका बुद्धि। 1 कुरुणंदनवनप्ॉइंटड फोकस। तो जब इसको कहते हैं, जब तप तप जाता है, व्यक्ति है न, तब जाके उसको गुरु प्राप्त होते हैं। उसको गुरु का लाभ उठा पाएगा, गुरु का लाभ उठा पाएगा। और नहीं तो बहुत लोग गुरु स्वीकार करते हैं। गुरु बहुत सारे हैं, गुरु स्वीकार भी करने वाले हैं, लेकिन उसका लाभ नहीं उठा पाते। बीज मिल जाता है। और बीज जो है सड़ जाता है, है न। तो बीज को लगाना पड़ता है। तो गुरु क्या देते हैं? आकर हमें बाहर निकालने के लिए इंस्ट्रक्शन देते हैं, क्या देते हैं इंस्ट्रक्शन। लेकिन कुस इंस्ट्रक्शन को फॉलो करने की जिम्मेदारी किसकी है? गुरू की, शिष्य की जिम्मेदारी है।
मलिहा कोरे से विजया रोपण,
श्रवण किरत
न, जले कर से ना
माली हैया। गुरु जो है बीज देते हैं, किस चीज का बीज देते हैं, कर्म का बीज देते हैं, ज्ञान का बीज देते हैं, या ध्यान योग का बीज देते हैं। नहीं भक्ति का बीज। इसलिए बहुत भक्ति में 1 बहुत बड़ा फायदा है। और 1 बहुत बड़ा नुकसान भी है। जो नोर्तमदास ठाकुर जी भी कहते हैं।
कि सतसंग छाड़ी कईनुअसतयबिलासौ
ते क रने लगी, लोज कर्म बंध फ आशा है। मैं क्या किया, सत्संग मिला मैंने छोड़ दिया। और किस ने विलास किया। असत संग में, मजा लेता हूँ किस में, असत संग में सतसंग, तो हम लोगो को सत्संग भी मिलता है। असत संग मिलता है। ज्यादातर समय हमारा ज्यादातर आकर्षण, 1 साधक का सत्संग अगर असत में रहेगा, तो उसको इतना महान उपहार, अनुपम उपहार मिला है, उसका लाभ नहीं उठा पाएगा, सत्संग सत्संग का लाभ उठाना चाहिए। तो हमारे पास हमेशा 2 चौइस है, 1 रास्ता सत्संग का दूसरा असत का रास्ता है। हम कौन सा चुनते हैं, वो हमारे ऊपर निर्भर करता है। हर जगह, यहाँ तक कि हम भक्तों के संग में भी आ जाते हैं। वहाँ भी हमें सावधान रहना है। क्योंकि जैसे कोई हम लोग बोलते हैं, हजारों भक्त बन गए हैं, हजारों की संख्या में भक्त बन रहे हैं, हजारों की संख्या में भक्त आ रहे हैं। हजारों की संख्या में। तो भक्त का मतलब क्या है? 5000 भक्त हैं तो 5000 काम, 5000 क्रोध, 5000 इगो, 5000 इर्श्या, 5000 द्वेश, 5000 लड़ाई फर्मुलशनकॉम्बिनेशन, 5000 का बनाइए। देखिये, कितना हो जाएगा। मेतमेटिसिनअगर कोई है तो कितनी लड़ाई होगी गो। जब टकराएगा, 5000 इगो टकराएंगे, 5000 ईरशा टकराएगा क्या हल होगा, समुद्र मंथन होगा। जहर निकलेगा। तो केवल बसन आभूषण, वेशभूषा धारण करने से हम बैन नहीं, भक्त नहीं बनते। समय हो गया है। तो मैं बस। 5 समाप्त कर। दूंगा के वैष्णव भेसभुसा से भक्त नहीं बनते, भक्त कैसे बनते हैं? भक्त का अर्थ है जो अपने अन्दर भक्त के गुणों को प्रकाशित करे, भक्त का आचरण भी विकसित करे। तो हम लोग भक्त बने। नहीं, हम लोग भक्त बनने का प्रयास कर रहे हैं। भक्त बनने का प्रयास कर रहे हैं। अभी। तो इसमें बहुत महत्त्वपूर्ण बात है कि कैसे हम इन अनर्थों को बाहर निकाले। इसके लिए चरित्र महाप्राण का सत्संग। तो हम आपस में जब बैठते हैं,
तो
हमारे अंदर अनर्थ है, क्या है? हमारे अन्दर?
क्या है?
अनर्थ है, भक्त भी हैं, अनर्थ भी है। अनर्थों का भूत कभी हावी हो जाता है। तो फिर इसलिए जो श्रमण हम करते हैं, क्या करते हैं? श्रवण? ये श्रवण के माध्यम से भक्ति का बीज जाता है। अंदर हम क्वालिटी आफ हियरिंग, श्रवण की, जो क्वालिटी है, जितनी बढ़िया होगी, किस की क्वालिटी, श्रवणम की क्वालिटी? क्योंकि यहीं से इनपुट जा रहा है, क्या जा रहा है इनपुट, जो हमारी चेतना में परिवर्तन लाएगा, गुरु मुख पद्म, वाक्य, चितित कोरिया के अरना करिह बने। आशा। तो जब हम सुनते हैं, उसमें बहुत सावधान रहना चाहिए। और जब हम बोलते हैं, तो भी हमें बहुत सावधान रहना चाहिए। क्योंकि जब हम बोलते हैं तो बोलते समय में ध्यान रखना चाहिए कि मैं परंपरा की शिक्षा को ही बोलूं। और जब हम सुनते हैं तो हमें सावधान रहना चाहिए कि हम परंपरा की शिक्षा को ही लें, कुछ और ना ले। क्योंकि अगर कर्म का बीज जाएगा, अंदर ज्ञान का बिज जाएगा, अन्दर कर्म का भी जाएगा। अंदर। तो भक्ति के नाम पे, हम भोग विलाश करेंगे, क्या करेंगे? भक्ति के नाम पर, भोग विलाश करेंगे, नाम रहेगा, भक्ति का ऊपर से पैकेज। लेकिन अंदर क्या रहेगा? भोग विलाश। और कुछ लोग भक्त बोलेंगे। हाँ हाँ। इस शो 1 कोई बात नहीं, भोग विलास करो, भक्ति भी करो, सब ठीक है। बढ़िया है। प्रपा जी, पार लगा देंगे है।
न।
ज्ञान का बिज जायेगा। तो मोक्ष की कामना कर, भक्ति करेंगे, ध्यान कब जाएगा। तो हम लोग कोई भक्त बाद में तांत्रिक हो जाते हैं, तंत्र साधना में लग जाते हैं। कई सिद्धियों को प्राप्त करने के पीछे भागने लगते हैं। भक्ति से साइड लाइन हो जाते हैं। शुद्ध भक्ति शुद्ध भक्ति के बीच है। शुद्ध भक्तों के मुख से श्रवण करने से हमें प्राप्त होता है। इसलिए प्रपजीततपरमेंयहाँ आगे बताते हैं कि अच्छे विष्यों का संग करना चाहिए किस का, गुड एसोसिएशन, प्रपा जी शब्द यूज कर रहे हैं।
क्या?
गुड एसोसिएशन ऑफ डिवोटीज से हमें भक्त जो बीज प्राप्त होता है, वो बहुत ही पोटेंट बीज प्राप्त होता है। पोटेंट बीज जितना पोटेंट होगा और खेत जितना उपजाऊ होगा, पौधा उतना ही हेल्दी होगा। तो हमें ध्यान रखना चाहिए कि शरणम की क्वालिटी को इसलिशलपरोपाजीजो है। यह तो पक्का है कि हमारी संस्था में, हमारी संस्था, उनके प्रवचन, हमें जरूर सुनना चाहिए, उनके प्रवचन हमें जरूर सुनना चाहिए, प्रति दिन सुनना चाहिए। उनके प्रवचन सुनने से क्या होगा? भक्ति का बीज हम को हमको नियमित रूप से प्राप्त रहेगा। और फिर श्रवण कितन जल से उसको सीखना भी है और माली भी। हमे ही बनना है। उस बीज को आरोपण करना है और आरोपण करके सींचना है। सीखने की जिम्मेदारी किसकी है? मालिक है। और मालिक कौन बनता है। साधक शिष्य को मालिक बनना है, गुरु माली नहीं बनता है, गुरु नहीं करेगा। यह जिम्मेदारी होती है। कि सावधानी पूर्वक श्रवण करे, गंभीरता से उसको अपने जीवन में उतारें तो सुनना चाहिए, ध्यान पूर्वक नोट्स बनाने चाहिए। है। मान लीजिए किसी को ऐसे पैसा फेंक दिया अपने आप 12 पॉकेट में से अटक गया तो ठीक है, है कि नहीं, नहीं, पर प्रयास नहीं करता। और जो स्किल जिसको पकड़ना होता है, उसे लपक लपक के पकड़ता है। और पॉकेट में भरता है। और कुछ लोग ऐसे हां बोलते जाइए। 12 तो फंस ही जाएगा। इधर उधर कहीं? तो ध्यान पूर्वक श्रोण का मतलब क्या है? गुरु मो पदवार के चितित को रि चितित तो होता नहीं, कम से कम किताबें नोट में नोट बुक कर लेना चाहिए, बार बार बार बार सुनना चाहिए। और उसको अपने जीवन में क्या करना है, उतारना है भक्तों के साथ चर्चा करनी चाहिए। गुरु महाराज ने ये प्रवचन में बोला है। इसको कैसे समझें, कैसे उतारें। अपने जीवन में आप कैसे करते हो? मैं कैसे कर सकता हूँ? चर्चा करना चाहिए, उसको अपने जीवन में आचरण में लेके आना चाहिए। और फिर जो है जब आचरण में लेकर आयेंगे तो क्या होगा? उससे हमारा हृदय शुद्ध हो जाएगा, शरणागति प्रकट हो जाएगी। और फिर प्रेम रूपी अमृत चेतन। महाप्रोडालेंगे तो गुरु के गुरु मुख्य कोरिया है। इस पर बहुत ध्यान देना चाहिए। 11 इंस्ट्रक्शन गुरु का याद रहना चाहिए। कब? गुरु महाराज से मिला क्या बोला, उनके लेक्चर में क्या बोला? तो ध्यान से बार बार बार बार उसपर ध्यान लगाना चाहिए। इसका बार बार क्यों बोलते हैं? गुरु महाराज ये बार बार क्यों बोलते हैं? मैं करता हूँ क्या इसको क्या कैसे इसको इम्प्रूव कर सकता हूँ? मैं इस चीज को कैसे डेवलप कर सकता हूँ इस ची को। और जितना ध्यान पूर्वक हम उसको अपने आचरण में लेकर आयेंगे, उतना ही ज्यादा हम गुरु के महत्व को समझ पाएंगे। यह बात समझ ना तुम्हें यहीं विराम दूंगा। बहुत बहुत धन्यवाद। हरे कृष्ण,
हरे हरे हिज ग्रे सुंदर बाल बाबुजी की जाए, प्रबु अच्छा बताया कि गुरु का तत्व क्या होता है? और गुरु का हमारे जीवन में क्या महत्व है? धन्यवाद। पाबूजी हिजरे सुंदर बाल बाबूजी की जाय की जाय। नाव फॉर चेरी ऑन द किक और आइसिंग ऑन द किक वो देने के लिए हमारे बीच में आते हैं। isis rुkनiksणप्रभुझी बस 1 साल और है। फिर प्रभु जी को आप स्टेज में आते देखेंगे, लेकिन 1 सन्यास डंडा के साथ देखेंगे। लेकिन प्रभु जी को कि बहुत ही ज्यादा दुबले पतले हैं। शक्ति परज स्पिरिचलपोटेसी तो बहुत ज्यादा है। सो। 1 समय प्रभु जी गए थे, मोहन प्रभु जी के पास की। प्रभु जी मैं सन्यास लेने के लिए। भक्तों ने बोला तो मैंने अप्लाई तो कर दिया है। तो मेरे लिए कोई सजेशन। प्रभुजी ने कहा, थोड़ी सी हेल्थ बनाओ। ताकि भक्त पहचान सके कि सन्यासी कौन है? और डंडा कौन सा है? क्योंकि पर जी बहुत ज्यादा प्रभुजी, बहुत तपस्या करते हैं। बहुत तपस्वी जीवन है प्रभुजी का पर, लेकिन यह है कि प्रभुजी ने अपना जीवन दिया है। गुरु महाराज की सेवा में। आज इस्कॉन पंजाबी बाग पूरे डेली एनसीआर का नंबर वन टेम्पल है निश्चित, बहुत उसमें सहयोग दिया है। लेकिन उसमें जो सेनापति रहे हैं वो रुकमणी कृष्ण प्रभु जी रहे हैं। सो इटम्स ऑफ़ कल्चर प्रीचिंग सब तरह से नंबर वन डे और कहते हमें बड़ा गर्व होता है। इस को पंजाबी बाग के बारे में बट या राधा राधग्रमणजी की सेवा इतनी सुन्दर तरीके से कर रहे है। प्रभु। हालांकि रुकमणी द्वारा दी द्वारका में है लेकिन रुकमणी कृष्ण प्रभु जी। पंजाबी भाग में है। पर। लेकिन प्रभु जी जहाँ होंगे चंदन को जहां रखे खुशबू तो वहाँ पर फैलेगी फैलेगी। तो इस प्रभु जी जहां जहां भी जाते हैं वहाँ उन्हीं खुशबू फैलती फैलती है। और इस समय जी बी सी ने प्रभु जी को भेजा है। भक्ति की खुशबू फैलाने के लिए। साउथ अमेरिका और साउथ अमेरिका। प्रभु जी की इतनी प्रभावशाली प्रीचिंग थी कि लोगों ने वहां पर छुट्टी लेकर के सोचिए लिव, विदाउट पे कोई हमेशा, कोई करेगा, इतना छुट्टी नहीं, ली नहीं आ पाऊँगा। पर। साउथ अमेरिका में। प्रभु जी के लोग इतने दीवाने हो गए कि लीव विदाउट पे करके प्रवचन सुनने के लिए आये। 1 बंदा था, उसने ढाई घंटे लेक्चर सुना प्रभु जी का। उसने अपनी गर्लफ्रेंड को फोन किया। उसने फिर गर्लफ्रेंड को लेके आये, गर्लफ्रेंड के साथ ढाई घंटा और सुना। उसने शाम को फिर से बैठा तो इतने गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड एडवांस तो हमारे देश में भी नहीं है जितने साउथ अमेरिका में है। सो इसलिए अगर आपको सुनने में आये भविष्य में, साउथ अमेरिका में बहुत सारे शुद्ध निकल के आ रहे हैं और आप उनसे पूछेंगे आपके गुरु महाराज कौन? तो फिर सब जानते हैं जवाब क्या होने वाला है। सो that you ve fur। पर पहले प्रभु थे पंजाबी बाग में, फिर उनको पूरा पंजाब दे देगा। कहते है तुम बाग मे क्या कर ह रा पंजाब ले लो तो पंजाबी बाग से प्रमोट कर देगा उनको पूरा पंजाब। इस वक्त पंजाब में भी कई सारे डिवोटीज हैं sis पंजाब, लेकिन वहाँ पर लीडर चाहिए था 1 दमदार that regodरीकृषप्रभुज सो गुरु महाराज के बारे में बताएंगे, उनके पास टाइम से क्या सीख सकते हैं महाराज चरित्र से प्रभु जी हम बतायेंगे सो प्रमोदी का आय मिल करके स्वागत करें बाई चैंटे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे रबुजीकीजा
रे कृष्ण इतना हैवी इंटोडक्शन की बात बोलना बड़ा मुश्किल हो जाता है।
जय राधा माधव कुंज बिहारी गोपी जाना
व लभगेरिवरधारी या शोदाननदनब्रजजदरजनa याम नaतरaबनaचारiयरजगन यायमनादेराबनाजाया शो द ननदनरजजनदनजना याम नातीराबनजारियशोदना ब्रज
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बधारीहषणार nasnahahriharama ra m a m a m हर हर कृष्ण knahhरहरhहर क्षणा हरे क्रिष्णा, isnaisnaharehare hare rama rama rama rama रे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे राम हरे राम राम राम रे
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राम रे राम राम राम हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे राम हरे रा रा रा हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम रे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे राम राम प्रभु पदाुपा गौर हरी गो हारी
हारी
जय मिश्रा पर
विदास्वामीशिलप्रपाद की को
फाउंडर चार्य
स्वामी जा मिष्णुपपर मध्य जीवन सिद्धांत से ठाकुर महाराज अनंत कोटी नामाचार्य
शिला हरिदास ठाकुर की प्रेम से हो,
श्री कृष्ण चैतन्य प्रपूर्ण त्यशीयद्वयदगदाद शिवादि गोर
भक्त, श्री राधा प्रसवती भगवान की गरमनजीकीज haridwar atra की shri
g
l loris to the assembl dimotislgloris goris otis ll
goris to isi guru and go dana की भाग वते वासुदेवा
या
ओम नमो
भगवते वासुदेवाय, ओम नमो भगवते वासुदेवाय नारायण नमस्कृत्य नरम चैव नरोतम देवि सरस्वती व्यास ततोजयमोदेरनष्णप्राय श्वभद्रशुनित्यं भागवत सेवया भगवती उत्तम श्लोक भक्ति भवति नश्ठिकिृष्णायवा सु देवाय देवकी नंदन यच नंद गोप कुमाराय गोविंदाय नमो नम ओम ज्ञानथमिरंधस्य जान जन शनकयकुरमितमयनसम श्री गुरुवे नमhशीचतनमनविष्टम स्तापित नभूतलेस्वयं रूप दा मय ददाति स्व पदातिक वन दे हम, श्री गुरु, श्री युता पद कमल, श्री गुरु वैष्णव, श्री रुपम सागर जात सहगण रगुनाथ वित तम सजीव सादवेतम साब 2 तम परिजन सहित कृष्ण चैतन्य देव श्री राधा कृष्ण पादान सहगण ललिता, श्री विषा खान विदांश कृष्ण करुणा सिंधु दी नबंधु जगत पते गोपेश गोपिका कांत राधा कांत नमस्तुते तब कांचन गौरांग राधे वृंदा बनेश्वर रिश् भानु सुते देवी प्रणमामि हरि प्रिय वांचकलपतरुभ्यश्च कृपा सिंधु भयवचमपतितानामपवनभ्य वैशनवेभ्यनमोनमा जै, श्री कृष्ण चैतन्य प्रभु नित्या नंद शियद्वइत गदाधर शिवा सादि गौर भक्त वृंदा हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे नम विष्णु पादाय कृष्णा कृष्णा भूतले, श्रीमति भक्ति वेदांत स्वामी नितिन मिने नमस्ते सरस्वति देवे गौर वाणी प्रचारण निरविशेष शुण्यवादि पश्चात यदेश्तारिणेहरे कृष्णा
तो हरिद्वार यात्रा का यह अंतिम सत्र। आज गुरुमाराज पूछे थे किस पंडाल कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जाए। कुछ दिन और तो धन्यवाद देना चाहूँगा सुन्दर गोपाल जी का। बहुत सुन्दर तरीके से उन्होंने बताया भक्ति लता बीज के विषय में और किस प्रकार चेतन्य? महाप्रभु अति दुर्लभ प्रेम देने आये हैं और उसके लिए वो कॉलेज खोलते हैं। जिसमे शरणागति सिखाई जाती है और वो कॉलेज है। इस्कॉन और कॉलेज में पढाई होती है और क्या पढ़ाया जाता है? किस आधार पर शरणागति सिखाई जाती है। वो है श्रीमद भागवत ग्रंथ रा श्रीमद भागवतम की।
तो
कुछ सीमित समय में मैं प्रयास करूँगा ग्रंथराशि मन भागवतम की कुछ महिमा और मैं सोच रहा था।
भागवत की महिमा अनंत है।
तो क्या प्रस्तुत किया जाए? इतने कम समय में तो महिमा ज्यादा न करके कुछ कैसे। हम भागवतम को प्रति दिन अपने जीवन में उतारने का प्रयास कर सकते हैं। अपने आचार्यों के जीवन से सीख के इसमें कुछ चर्चा करने का प्रयास करेंगे। आप सब से आशीर्वाद की कामना है। तो श्रीमत भागोतम कृष्ण से अभिन्न हैं। हम सब जानते हैं।
जब भगवान श्री कृष्ण किसी पशु के
रूप में अवतार लेते हैं तो वराह भगवान कहलाते हैं? नर अवतार लेते हैं तो राम और कृष्ण कहलाते हैं? आधे, नर आदि पशु तो नर नर सिंह कहलाते हैं? और जब किसी शास्त्र के रूप में अवतार लेते है तो श्रीमत भागोतम कहलाते हैं? तो श्रीमत भागोतम कृष्ण से अभिन्न है।
ये बात हमें समझनी है। श्रीमत भागवतम। कोई साधारण इस संसार की पुष्टि नहीं है। जब नैमिशारण में एकत्र संतों ने
सुध
गोस्वामी से पूछा कि कृष्ण के अपने
धाम जाने के बाद धर्म और ज्ञान
ने किसका आश्रय स्वीकार किया, तो सुध गोस्वामी जी ने किया और दिया कृष्ण धर्म ज्ञान को पुराण देता।
जब भगवान श्री कृष्ण पर धाम में
चले गए धर्म और ज्ञान को लेकर,
तो कली के इस अंधकार में, जीवन
में इसको दृष्टि प्रदान करने के लिए
सूर्य के समान जो पुराण उदय हुआ
वो है श्रीमद भागवतम।
तो श्रीमद भागवतम की महिमा अनंत है। भागवतम में ही भागवत की बहुत सी
महिमा सुनाई गई है।
अन्य पुराणों में भी भागवत की महिमा बताई गई है। लेकिन अन्य पुराणों भागवतम का गुणगान करेंगे वो उसके समान है। जैसे कि सूर्य को दी दिखाने के
समान है, ग्रंथ राज है। श्रीमद भागवतम।
तो देखते हैं कि भागवत का पहला
श्लोक जन्मादि, 80, अन्य तितरअतेुपज्ञा स्वराट।
पहला ही श्लोक परम सत्य के विषय
में बताता है कि परम सत्य को
वो परिभाषित करता है कितना महान ग्रंथ है। आप सोचिए इतने अनेक शास्त्र है विश्व में और कोई भी बहुत कम शास्त्र परम सत्य के विषय में 1 डेफिनेट
कनक्लूजन नहीं दे पाते।
लेकिन श्रीमत भागवत की शुरुआत ही प्रारंभ से है की परम सत्य क्या है?
ओम नमो भगवते वासुदेव।
उनके पूरे के पूरे, लक्षण, बताए और दूसरे श्लोक में बता रहे है। व्यास देव जी की इस ग्रंथ में क्या है? क्या नहीं ग्रंथ के प्रारंभ में व्यास देव जी ने बता दिया धर्म प्रोजुतकेटवतप्रमो निर्मत सराणामसताब। इस ग्रंथ में कोई भी दोखेबाजीवाला धर्म
नहीं है, कोई कैसे के धर्म में धोखेबाजी वाले होते है। हां धर्म भी धोखेबाजी वाले होते हैं।
ऐसे धर्म जो हमें झूठा वायदा दिलाते हैं कि संसार में आप सुखी रह सकते हैं।
वो धोखेबाजी वाले धर्म है।
चीटर्स चीटेड। तो धर्म पूजित के परमो निर्मित सराणा सता और इस ग्रंथ को कौन समझ सकता है। जो द्वेश रहित है वैद्य वास्तव मात्र वस्तु शिवदमत्रापरअनमूल नम। और इसमें वास्तव वस्तु के विषय में
चर्चा की गई है।
वो वास्तविकता क्या है? वो वास्तविकता है।
इस भागवतम का जो विषय है प्रेम प्रेम भक्ति भागवत।
हमें सिखाती है कि प्रेम भक्ति वास्तविक वस्तु है जो कि संसार के मोह और भ्रम से बिल्कुल परे है। और भागवतम अ बुक ऑफ केस स्टडीज भागवतम में हर प्रकार की केस स्टडीज
उपलब्ध है जो हमें सिखाती है कि
संसार का कोई भी बहाना नहीं चलेगा। अगर हम वास्तव में प्रेम चाहते हैं
तो प्रेम जरूर मिलेगा कमी किसकी है? हमारी इच्छा के कई बार हम अपनी
परिस्थितियों को ब्लेम देते है।
रहु जी, मेरी परिस्थिति कुछ अलग है इस संसार का।
बध जीव हर तरह से ये सोचता
है कि मैं कुछ स्पेशली बधजीवहूँ जितने
अनर्थ मेरे है जो मेरी समस्या है
बड़ी स्पेसिफिक है, शायद मेरा उधार नहीं हो सकता।
तो भागोतम में हमें हर ऐसी परिस्थिति
मिल जाएगी और उस परिस्थिति में जो भक्त है, भक्ति करके दिखाता है कि कैसे वो कृष्ण प्रेम को प्राप्त कर सकता है। यह भारत की विशेषता है। ये अक्सर हम कांग्रिगेशन में डील करते हैं। तो कोई माता जी कहती है, मैं
तो भक्ति में जुड़ गई।
प्रभु जी नहीं जुड़े। प्रभु जी बहुत तंग करते हैं। तो भागवत में कौन सी स्टोरी है जिसमें माता जी जुड़े है। प्रभु जी नहीं जुड़े हुए न मुझे ही लगता है। कालिया जैसा होगा।
अगर किसी का पति कालिया जैसा भी
है, तब भी भक्ति की जा सकती है।
और उनकी भक्ति से कालिया का भी
उद्धार हो गया था। और कैसे कोई बोले?
प्रभु जी बोले, मैं तो आता हूँ।
मंदिर में माताजी बहुत तंग करती है। कौन सी केस स्टडी है, भागवत में
कौन सा। आम
भागवत में पति जी हैं, भक्ति
कर रहे हैं, पत्नी उनको तंग कर रही है। पत्नी इतनी सपोर्टिव नहीं है, उसको कैसे लाइन में लाते हैं। वो कश्यप और दीदी दीदी।
कह री।
मैंने ऐसे संतान चाहिए जो इन्द्र का वध कर दे। करने तो बहुत ही गलत इच्छा है। कैसे उसको डाउटी किया जाए। कृष्णा कांशेस में तो उसको पयोव्रत बताते है, कैसे उसको लगना है, धीरे धीरे उसका शुद्धिकरण है, सतोगुण में आती है, बड़ा फेमस है, अगर बच्चा लगा है,
पिताजी नहीं आने देते।
मंदिर में पहला महाराज और पिता जी भक्त है। बच्चा बड़ा शरारती है, बड़ा गुंडा बच्चा
है,
कौन सी सके स्टडी है। राजा। वे अंक बहुत सुधारने का प्रयास किया,
भाड़ में जाए अपने स्वार्थ को क्यों भूलो। कई बार इतने आसक्त होते, अपने बच्चे
को भक्त बना कर ही छोड़ना। उसने भी बहुत ट्राई किया, नहीं बना, कोई बात नहीं। मैं अपना उद्धार करूँ। तो भागवतम में हम देखेंगे हर प्रकार की केस स्टडी है। और जो वास्तविक वस्तु है वो है भक्ति। और वो हमने बचा के रखनी है, उसको आगे बढ़ाना है। भागवतम इतना सुन्दर ग्रंथ है जो हमें न केवल जीवन का लक्ष्य बताता है।
इस लक्ष्य को कैसे प्राप्त करना है,
यह भी समझाता है।
ये दिखाता और साथ साथ अगर हमारे जीवन का लक्ष्य बीच बीच में दुषित हो जाता है। असत संघ के कारण या फिर हमारी लापरवाही के कारण।
2 भी भागवत स्टडीज है। यहीं पर हम बैठे हैं। कौन सा ऐसा के स्टडी है कि 1 भक्त अपने पद से भ्रष्ट हो गया, फिर भी भगवान ने उसकी रक्षा की। जल यही हरद्वार में पोषण। भागवत में 10 विषय है, 1 विषय है पोषण। पोषण का मतलब है की भगवान हमेशा भक्तो का पोषण करते हैं, उनकी हमेशा रक्षा करते हैं।
तो वैद्यवस्अतरवस्तु शिवम, तापत्रय, अन्मूलन, ये जो भाग बहुत शिवम है, सब क के लिए मंगलकारी है। ताप त्रय अन्मूलन जड़ से 3 तापों
को खत्म कर देती है। और श्रीमन महामोनीकृतेकमवा पररेश्वर।
और इस भागवत की रचना व्यास देव
जी ने अपनी परिपक्व अवस्था में की।
इस संसार में बहुत सी ऐसी कंपनीज
हैं जो कुछ समय के बाद नाइन मॉडल सपने निकालते हैं, प्रोडक्ट के नई गाड़ियों के मॉडल आते हैं।
लेकिन कोई भी कंपनी ऐसी कंपनी ये नहीं बोलेगी की मेरे जितने पिछले, मॉडल
से सब बिल्कुल बेकार है। कोई कंपनी ऐसी बोलती है नहीं।
व्यासदेवजी बड़ी ईमानदारी से कह रहे हैं। इससे पहले मैं जितने शास्त्र लिखे हो, सब बेकार है। बस भागवती महान कितनी ईमानदारी से बता रहे है? पर मेरे द्वारा लिखे और किसने शास्त्र लिखे है, व्यास देव जी ने लिखे हैं। लेकिन ये जो मैंने लिखा है, ये कनक्लूजन है?
ये सबसे महत्वपूर्ण है। बाकी सब बेकार है।
और कितना महत्वपूर्ण शास्त्र है? सद्य हृदय अवरुद्रअत्र इसको पढने से, कृतविशुशुभिततषणात? इसको सही ढंग से, इसका श्रवण करने से तुरंत कृष्ण अपने हृदय में हम
कैद कर लेते हैं। ये श्रीमद भागवतम की विशेषता।
तो दूसरे श्लोक में व्याज देव जी बता रहे हैं क्या इसमें है, क्या नहीं है? इसकी क्या विशेषता है? यह सबके लिए मंगल कार्य है। 3 तापों को जड़ से खत्म कर देता है। तो बोलेंगे ऐसे तो बहुत से शास्त्र हैं। श्रीमत भगवत गीता भी ऐसे है, भगरीता मंगल कारी है, भगवदगीता भी हम पढेंगे भगवान कह रहे है।
मेरी शरण में आओ जन्म के चक्र
से मुक्त हो जाओगे। तो इस भागवत ने क्या ऐसी विशेषता है? भागवतम शिवम भी है, ताप अमूल भी है, लेकिन रस से भरा है।
पिवत भागवतम रस माल्या निगम कल पत्र
गलिदमफलमशुखमुखाद संयुत पिवत भागवत रस बाल्य मुह
रहो भूमिका रसिक भागों का की जो
भागवतम रस से भरा है, कैसे जो अगर वैदिक शास्त्रों का पका हुआ, फल है, आम पका हुआ है, उसमें से
रस टपक रहा है।
उस आम को खाना नहीं है, पीना है और कैसे पीना है। उसमे न गुठली है, न छिलका है। गुठली और छिल का मतलब भागवत ऐसी
शुद्ध भक्ति बताते हैं जिसमें कर्म और ज्ञान का मिश्रण नहीं है। इसको पीना है।
तो इसको समझने के लिए क्या होना पड़ेगा।
हमें रसिक बनना पड़ेगा। रस्सी लोग इसको इसको रैलिश कर सकते है। और रस्सी बनाने की हमें ट्रेनिंग देनी पड़ेगी। तो जो कॉलेज है शिला प्रोपर जी का, ये हमें रस्सी भक्त बनाने के लिए अक्सर लोग रस्सी का मतलब उल्टा ले लेते हैं।
रसिक मतलब जो राधा कृष्ण के लिए
लांग विषय में चर्चा ज्यादा करे। राज शिला से नीचे कम बाती न करे। मंजरी भाव की चर्चा करे, उसको हम रसिक कहते हैं।
न केवल वो लोग रसिक नहीं है। उसके लिए पहले क्या होना पड़ेगा। भावुक भावुक, हम तो बहुत भावुक है। एक्सपर्ट एंड थॉटफुल बहुत ही कुशल और थॉटफुल क्या बोलेंगे, विचारवान, विचार करने वाला व्यक्ति। वो जब प्रशिक्षण लेगा, ऐसे व्यक्ति से
हम प्रशिक्षण लेंगे, तब हम रसिक बन पाएंगे। 1 बार मैं और कनचपहुकहीगीतामेर में गए थे तो उनके पिता बेटे मिले पूछा
आप क्या करते हैं?
से बोला मैं वाइन टेस्टर हूँ याद करना। 4 वाइन टेस्टर होते हैं, रसिक है,
वाइन का रसिक है, वो ये भी 1 साइंस है। कई जो टी कंपनी होती हैं वो टी टेस्टर रखते हैं। कि चाय उसका टेस्ट 1 किक चाहिए,
1 वो आना चाहिए।
इसी से जो वाइन टेस्टर है वो उसको मालूम है। इस वाइन का क्या ट और उस टेस्ट को वो नाम देते है। टेक्निकल साइंस है। इस प्रकार से गो स्वामी जी ने भी रस तत् विज्ञान लिखा हर 1 रस को 1 नाम दिया है। तो ये पूरी साइंस है। जिस प्रकार से अगर कोई शात्रीय संगीत नहीं जानता, जैसे बचपन टीवी देखते थे, संगीत
क्या बोल रहे, सिर हिला रहा, कर रहा है।
लेकिन जिसको संगीत के राग और ताल की ज्ञान है, उसको बड़ा आनंद आता
था, वो बहुत अच्छा लग रहा है।
लेकिन जिसको नहीं आना है, उसके लिए बहुत बोरिंग है। इसी ढंग से भक्ति की सट्लिटी को
जानने के लिए हमें प्रशिक्षण लेना है।
हमारा उद्देश्य क्या है?
1 रसिक भक्त बनना है, थॉर्टफुलडिवोटी से, शिलापा से प्रशिक्षण प्राप्त करना है। ताकि इस भक्ति की गहराइयों को हम समझ सके। ये भागवतम हमें, उसका भागवतम, उसका आधार है। श्रीमद भागवतम को हमने 1 साधारण पुस्तक की तरह नहीं लेना। कृष्ण लीला में स सनातन गोस्वामी जी बहुत सुंदर भागवत का गुणगान करते हैं। 1 श्लोक बहुत सुन्दर। मुझे लगा आप मेरे पीछे पीछे बोलिए
मत 1 बंधो मत, संगिन मद, गुरो मन, महा, धना
मय स्तरक मत, भाग्य
मद।
आनन्न ms्तoतेस्नातनगो स्वामी जी कह रहे है
मद 1 बंधू मेरा 1 मात्र मित्र है।
श्रीमत भागोतम बोले, हमारे तो बहुत से मित्र हैं बचपन में, स्कूल में
माई
बेस्ट फ्रेंड पर ऐसा लिखा हुआ, सब ने उसकी शुरुआत कैसे करते थे, आई हैव मैनी फ्रेंड्स, बट दीपक इस माई बेस्ट फ्रेंड
दूसरी ढंग से। we have many friends, but simadभagtmismy, best frend, mt bndu frend in need, is
a friend in dit। और हम देखेंगे, हमारे जीवन में जब ऐसी परिस्थितियां आएंगी, जब कोई हमारे साथ नहीं होगा, तो श्रीमत भागवतम हमारे हमेशा साथ होगे। शिला भक्ति सीधा कहते हैं अगर इस
संसार में महा प्रलय आ जाए, सब कुछ डूब जाए, केवल भागवत ग्रंथ बन जाए।
तो बस सृष्टि आगे चलती रहेगी, सब कुछ ठीक हो जाएगा।
1 भागवतम चाहिए, हमे भागवतम में, पूरी श्रद्धा होनी चाहिए। मेक बंधु, मत संग, यही मेरा 1 संगी है, फिर मत गुरु, यह मेरा गुरु है, मन महाधन, यह मेरा असली धन है, मत निस्तारक मत भाग्य, ये
मेरा निस्तारक है, ये मेरा सौभाग्य है,
मत आनंद, ये मेरा आनंद है।
नमस्ते। जो लोग रसिक भक्त है, वो भागवत को उनको एडिक्शन होता है। और बिना भागवतम पड़े रह नहीं सकते है। पर स्वामी महाराज, जब वे अपने पाठशाला में भी जाते थे, खेत में बैठ जाते थे। भागवत
1 एडिक्शन चेतन ने दिखाया कितना एडिक्शन है। प्रति दिन चेतन महा प्रूफ दोपहर में
तो गोपी रात में जाते थे, गदाधर पंडित। ऐसी भागवतम सुनते थे। ध्रुव चरित।
पहला सौ सौ बार, 1 ही वक्ता, 1 ही श्रोता, 1 ही कथा, हमारे को, ऐसा सुनने को मिल जाए। रोज भागवतम क्लास में 1 ही श्लोक
की चर्चा होगी, 1 ही वक्ता होगा, बोर हो जायेंगे।
1 बार ने सौ बार सुना। और ऐसा सुना जब गदाधर पंडित बोलते थे, आँखों से आंसू बैठे थे, पूरी भागवत उसमे है। पुरी इसकी इंक स्याही बह गई। ऐसा उनको बोलने में आनंद आ रहा है, बार बार वही कथा।
और ऐसा उनको बार बार सुनने में आनंद आ रहा है। तो यह एडिक्शन है। तो मत 1 बंधु देखिये। शिला प्रोपी विदेश जा रहे थे, तो
उनके गुरु भाई ने पूछा, स्वामी जी, क्या आप विदेश जा रहे हैं?
प्रोप ने क्या उत्तर दिया, मैं, नई श्रीमद भागवतम विदेश जा रही है? प्रपात पूरे स्पष्ट थे सपा में और प्रपात ने? क्या हम जानते हैं? पदम पुराण बताया गया है।
भागवतम का पहला और दूसरा भगवान श्री
कृष्ण के चरण कमल है।
पर
अपने सर पर रख के विदेश में गए। और जब प्रात में थोड़ी देर के लिए रुकी और पापा ने बस्तर में बाहर जाके देखा, यहाँ के नागरिकों की दशा को इतने रजगुण में डूबे हुए प्रोप चिंतित हो गए। कैसे ये भागवत के संदेश को स्वीकार करेंगे? तब प्रपा ने, मार्क ने भागवत कविता लिखी। और कविता के बीच में प्रपात को
अचानक विश्वास आता है भागवत के संदेश में, किस भागवत के संदेश में इतनी शक्ति है?
निश्चित रूप से इसको बदलेगा श्रमणता शधयाक्याहैशणतम स्व था। कृष्णा पुण्य श्रवण कीर्तन हृदयं स्वय बद्राणी विनति नष्ट प्राय शुबदश्ुनित्यम भागवत सेवया पूरी
की पूरी सीक्वेंस, पोपा ने गाय के कैसे 1 व्यक्ति अधम सधम वस्था से
प्रेम को प्राप्त कर सकता है। अगर वो भागवतम का सही ढंग से श्रमण करें। प्रपात को भागवतम पर इतना भरोसा था।
जिस प्रकार से 1 क्षेत्रीय मैदान में
उतरने से पहले अपनी तलवार को सर पर लगता है, चूमता है, उसी प्रकार से प्रपात अमेरिका की रण भूमि में उतरने से पहले मत भागवत को अपने सर पर रखा। इसके संदेश को। पूरा विश्वास था प्रपात को। और इसी लिए देखिये परोपा ने इसी भागवतम के संदेश से पूरे विश्व में क्रांति लाई, ये क्रांति आई है।
इस क्रांति की घोषणा भागवतम में नारद मुनि ने की। तत्वागविसरवोजनताग जस्मिन पति लोग, ये जो संदेश है, यह पूरे विश्व में क्रांति ले आएगा? जो दिशा हीन लोग हैं, उनको दिशा दिखाएगा। हालांकि ये श्लोक 5000 वर्ष पूर्व व्यास दिए, जिसने भागवत में लिखा, शिला प्रोपज
ने इसको सार्थक किया।
इसका मतलब क्या है कि ये श्लोक
शिला प्रोप जी के अवतरण की घोषणा करता है।
भागवतम में शिला परोपाजीप्रकट होंगे, इस भागवत से पूरे संसार में क्रांति लाएंगे, इसकी घोषणा है।
शिला प्रोप की इतना विशेष।
इसी ढंग से आप कह सकते हैं
कि प्रपा जी तो नित्य सिद्ध हैं, उनको तो भागवतम में विश्वास है। हम लोगों के जीवन में ऐसी परिस्थितियां आती हैं। तो हम भागवत की शरण ग्रहण नहीं करते, ऐसा नहीं है। हम आपको घटना सुनाते हैं। 2021 की बात है जब करुणा की सेकेंड वे चल रहे थे। और आप जानते है कितनी खतरनाक वेब थी, करुणा की वो सेकेंड वे हर जगह मायूसियत मायूसियत थी, हॉस्पिटल में बैंड नहीं मिल रहे थे, लोग शरीर छोड़ रहे थे, ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं मिल रहा था, कितनी बुरी हालत थी। तो हम ऐसे भक्त को जानते हैं, जिनका पूरा परिवार करुणा से डाउन हो गया। और जो प्रभु जी, माता जी, 2 बच्चे सब करुणा से डाउन और बाबू जी का ऑक्सीजन लेवल गिरता जा रहा है, हॉस्पिटल में कहीं एडमिशन नहीं मिल रहा है। 1 छोटे नर्सिंग होम में एडमिशन कराया। मे, मेरे पास वेंटिलेटर नहीं है, ऑक्सीजन नहीं है। बड़ी मार धार कर रहे हैं, कुछ नहीं मिल रहा है। और उनका जो बेटा है वो भी 16 माला जप करता है और परेशान है वो 1 हफ्ते से नहाया धोया नहीं खाया पिया नहीं हॉस्पिटल्स के चक्कर काट रहा है।
फिर कहीं जाके दिल्ली से बाहर किसी हॉस्पिटल में जगह मिलती है।
1 बेड मिलता है 56 घंटे की जर्नी। एम्बुलेंस बड़ी मुश्किल से मिली बड़ी हाई कॉस्ट लेकर गए और बाइचांस मैक कार में उनके पीछे था, वो लड़का अपने पिताजी के साथ एम्बुलेंस में था।
और ऐसी बुरी हालत आप कल्पना नहीं
कर सकते कि कितनी
डिप्रेसिंग सिचुएशन है,
कितनी कठिनाई भरी सिचुएशन है। तो ऐसे में जब वो भक्त बाहर आया और अपने पिताजी को भी ले जा रहे है और मैं भी गाड़ी से बाहर निकाला। सबसे पहला प्रश्न उसने मुझसे ये किया,
मैं भी बड़ा परेशान था, वो भी बहुत परेशान था।
उसने बोला प्रभु जी कहीं से भागवतम का फर्स्ट कैंटो आप ला दोगे तुम्हे बड़ा हैरान हो गया क्या बात है। ऐसे समय में इनको भागवतम की याद आ रही है। हालांकि वो सोला वाला में जप कर हा है निश्चित रूप से। तो मैं वहाँ के मंदिर में गया, उनको भागवत का कैंट दिया तो बोला मैं काफी दिनों से महसूस कर रहा हूँ, मैं सिचुएशन हैंडल नहीं कर भागवतम पढ़ के मुझे शायद स्ट्रेंथ सने भागवतम की शरण ली।
मत 1 बंधो भागवतम वास्तव में हमारा मित्र है, ये कृष्ण कह रहे हैं सुहृद सरु भूतानाम मैं सबका हितेशी हूँ तो हमने भागवतम को कृष्ण के समान देखना है। हालांकि कृष्ण की शरण ग्रहण करना और शुक्र की सेवा करने के लिए आपको पहले ब्राह्मण होना पड़ेगा। लेकिन भागवतम किसी के लिए भी उपलब्ध है। हर समय सेवा के लिए कुछ नियम हैं उनका। भगवान शयन कर रहे हैं।
अभी नहीं उठा सकते नहीं भागवत आप भी उठाए पढ़िए।
भागवत की शरण ग्रहण कीजिये कृष्ण तुरंत उपलब्ध है हमारी सहायता करने के लिए।
तो उसने भागवतम पढ़ना शुरू क किया और अपने पिता जी जैसी भी हालत
के सुना रहे थे भीष्म पितमा पासिंग भीष्म पितमा।
इस प्रसंग पर वो पहुँचा और मैं उनके साथ बैठ के पढ़ रहा था।
तो 1 परपर लाइन आती है। प्रपा लिखते हैं वन द सिचुएशंस आर बियोंड कंट्रोल देर नो पॉइंट लेमिटेशन।
इस वाक्य से उसको बहुत शक्ति मिली।
जब परिस्थितियां हमारे वश में नहीं है
तो शो करने से क्या लाभ? तो परिस्थितियां वश में थी नहीं, अपना भरसक प्रयास कर रहे हैं। कुछ हो नहीं रहा क्या करें इस में शो करने से कोई लाभ नहीं है। हालांकि उनके पिता जी ने शरीर छोड़ दिया लेकिन उन्होंने बोला की मुझे इस पूरे प्रसंग में जब मैंने भागवत की शरण ग मेरी श्रद्धा प्रोपज के तात्पर्य में इतनी बढ़ गई है। अब मैं चाहता हूँ हर किसी से मैं एक्सपी शेयर करूँ और हर किसी को मैं भागवत पहुँचा। उसको बातो को ये प्रैक्टिकल है, ये
कोई थेरेटिकल बात नहीं है ऐसी परिस्थितियों
में विषम परिस्थितियों में मत 1 बंद हो। 1 ही हमारे मित्र है कृष्ण जो है श्रीमत भागवतम के रूप में श्रीमद
भागवतम का निष्कर्ष क्या है?
हजार लोक है, निष्कर्ष। क्या है नाम संकीरतन यस्य सरवपापपरशणमप्रणामो दुख शमनम तम नमामि हरि।
पर ये श्रीमत भागवत का अंतिम श्लोक है कि पहला श्लोक में क्या बताया, स सत्यम परम धीमहि परम सत्य को हम कैसे जान सकते हैं। उनपर ध्यान लगाये।
परम सत्य के ये गुण बताए गए।
और अंतिम श्लोक के नाम संकीरतन यस्य सर्व पाप प्रशन प्रणाम दुख शमनमतनमामीहरीपरम। जिसके नाम संकेतन करने मात्र से हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। जिसके नाम संकीर्तन करने मात्र से सारे पापों से मुक्ति मिल जाएगी। जिसको प्रणाम करने मात्र से सारे दुख
समाप्त हो जायेंगे, उस हरी को मैं प्रणाम करता हूँ।
तो यानि कि भागवतम का निष्कर्ष है नाम। संकीर्तन लि का नाम संकीरतन कैसे प्रणाम के साथ भागवतम का निष्कर्ष है नाम और प्रणाम। आप बोलेंगे ये तो बड़ा अच्छा बता दिया। तो हरी नाम तो हम लेते ही है। फिर भागवत पढ़ने की क्या जरुरत है? सारे वैदिक शास्त्रों का फल है। यह निष्कर्ष है। श्रीमत भगवत श्रीमत भागवतम का निष्कर्ष है हरि नाम। मैं हरि नाम कर रहा हूँ।
तो भागवत में पढ़ने की क्या आवश्यकता है? मैं तो बहुत ही मैं।
तो सार सार सार ग्राही हूँ। मैं तो सार ग्राही नहीं, मैं अल्टीमेट सार ग्राही हूँ। अल्टीमेट ही मालूम चल गया। शॉट टेस्ट शॉट कट मालूम चल गया। तो हरी नाम ले रहा हूँ। सब कुछ प्राप्त हो गया।
मुझे सारे वैदिक शास्त्रों का फल प्राप्त हो गया। नहीं हरि नाम की।
जब तक हम महिमा को अच्छे ढंग
से नहीं समझेंगे, हम हरि नाम का जब भी सही ढंग से नहीं कर पाएंगे, वक्ति सिधार स्व ठाकुर मार बताते हैं।
हरि नाम की जो स्वरूप शक्ति है,
वो हरी कथा जितना अच्छे ढंग से
हम हरी कथा का श्रवण कीर्तन करेंगे, उतना।
अच्छा हम हरी नाम का जप कर पाएंगे।
ईश्वर पर पाच जी ने जब चेतन ने महा पर्व को दीक्षा दी तो न्होंने चेतन ने महाप्रब आदेश दिया की आप प्रति दिन श्रीमद भागवतम को बहुत ध्यान पूर्वक पढ़िए। क्योंकि जितना ध्यान पूर्वक हम भागवतम को पढेंगे उतना हरिनाम के प्रति हमारा आकर्षण बढ़ेगा। इसलिए भागवत को पढना बहुत आवश्यक है। सुनना बहुत आवश्यक है। हरि नाम के प्रति हमारी रूचि बढ़ेगी, आकर्षण बढ़ेगा और जितना हम भागवत को अच्छे ढंग से पढ़ेंगे। सुनेंगे गुरु के महत्व को जानेंगे, भक्तों के महत्व को जानेंगे, उतना हमारा प्रभावशाली प्रणाम होगा। नाम और प्रणाम। यानि कि हरि नाम को बड़ी विनम्रता के भाव में करना है। विनम्रता कब आएगी। जब हम भक्तों की और भगवान की महानता को जानेंगे और अपनी वार्षिक स्थिति को समझेंगे। भागवतम नहीं पढ़ते हैं तो अपने बारे में बहुत गलत फैमियां रहती हैं। मुझसे कोई शुद्ध भक्त नहीं है। भागवतम पढ़ते हैं तो अपना आईना देखते हैं।
अरे भैया अभी बहुत गन्दगी है, बहुत सफाई करनी है।
इसलिए फाइन ट्यूनिंग होती है। चेतना की गर हम सही ढंग से श्रमण करते है।
जैसे की सुंदर गोपाल थे।
बहुत अच्छे ढंग से सुनना है। ये भव औषधी है। ये जो औषधि है, कानों के माध्यम से डालनी है। और समय समय पर हम अपने जीवन के लक्ष्य से भटक जाते हैं। हमें मालूम है जीवन का लक्ष्य कृष्ण प्रेम है, फिर भी संसारी कृष्ण में उलझ जाते हैं। इसलिए नित्य भागवत सेवया पुरुष भागवत की भी सेवा करनी है, ग्रंथ भागवतम की
भी सेवा करनी है।
भागवतम के तीसरे स्कंद में वर्णन आता है कि ब्रह्मा जी ने सुबह उठे 1 बार हर दिन जब सुबह ब्रह्मा
जी उठते हैं तो उनको दोबारा से सृष्टि करनी पड़ती है।
और सृष्टि की रचना की। और 1 सुबह उन्होंने ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की तो वो इतने विमोहित हो गए। उन्होंने अपनी पुत्री को जन्म दिया।
वाक सरस्वती उसी के पीछे भाग गए, उस के पति आकर्षित हो गए।
सारी सृष्टि में हाहाकार मच गई बड़े बड़े रिशि गन बोले, ब्रह्मा जी क्या हो गया?
आपको क्या हो गया?
सबने भगवान से प्रार्थना की। ब्रह्मा जी को बुद्धि दीजिये। तो भगवान भक्तों की प्रार्थना से ब्रह्मा
जी को बुद्धि प्राप्त हुई।
ब्रह्मा जी ने गलत मानसिकता छोड़ी और
फिर उनको बुद्धि ने गलत काम किया।
तो प्रौपाजी इसके ततपर में लिख रहे हैं। ब्रह्मा जी इतने महान व्यक्ति हुए। ब्रह्मा जी सी गलती क्यों हुई कि
वो अपनी ही पुत्री से आकर्षित हो गए।
कितना गलत काम है।
ये तो प्रोपाजी इसका उत्तर दे रहे
है कि ब्रह्मा जी से गलती इसलिए हुई उस दिन सुबह ब्रह्मा जी ने
गर्भोदक विष्णु से भागोतम नहीं सुने थे। देखो कितनी गहरी बात है।
ब्रह्मा जी के साथ यह हो सकता है।
तो क्या कहते है? हम किस खेत की मूली हैं। तो हमें रिस्क नहीं लेना चाहिए।
तो ब्रह्मा जी कह रहे हैं भैया तो प्रति दिन भागवत को बहुत गंभीरता
से सुनना है, पढना है।
तब हम भक्तों के महत्व को भी
समझ पाएंगे और गुरु के महत्व को भी समझ पाएंगे।
हमे क्या प्राप्त है भक्ति रूपी जो अनमोल धन हमें प्राप्त हुआ है, उसको
हम वैल्यू कर पाएंगे, उसको संभाल कर रख पाएंगे।
अंत में हम देखते हैं कि भागवतम हमें कैसे रिवील करेगी। बोले, हम तो पढ़ते हैं, हमें लगता नहीं, भागवत साक्षात कृष्ण है जो भागवतम अपने आप को प्रकट करेगी।
जब हमारे पर पुरुष भागवतम की कृपा
होगी और पुरुष भागवतम की कृपा कैसे
होगी, जब हम उनकी सेवा में जुड़ेंगे,
उनकी सेवा के लिए कैसे उत्साहित होंगे,
उनको हम देखेंगे कि वो कैसे दूसरे भागवतम की सेवा में जुड़े हुए हैं। 1 बार जब यही करुणा की कथा कथा सुनाते हैं, आपको टू थाउजन्ड। ट्वेंटी में जब हिज ग्रेस पंकनजागरीबभु का तिरोभाव हुआ तो पंकनजागनीपहु के शरीर को मायापुर में लाया गया। कलकत्ता से और मायापुर से अंतिम संस्कार में बाहर ले जा रहे थे तो परमपुजनेगोपालक्ष स्वामी महाराज अपने रूम में बैठ के लाइव देख रहे थे और महाराज की आंखों से आंसू निकल रहे थे और महाराज आवाज आ रही थी। सिसक सिसक के रो रहे हैं और महाराज अपनी कुर्सी पर बैठे हैं। और जैसे पंकनजागीप्रभू का जो शव बाहर आया, महाराज अपनी कुर्सी से उठे और महाराज ने प्रणाम किया बड़ी मुश्किल से प्रणाम किया, फिर उठे, फिर बैठे ऑफिन महाराज रो रहे हैं। और कुछ समय के बाद देखते है कि सामने जो लोट्स बिल्डिंग है, उसके फर्स्ट फ्लोर पर फनमपोंजनेजैपताका स्वाइन मारे जाते हैं, कुर्सी पर बैठे हुए हैं, महाराज
लाइव देख रहे हैं, टीवी पर देख रहे हैं। जैसे ही महाराज ने टीवी में देखा,
जैपताकास्वाइम महाराज को महाराज फिर से अपने सोफे से उठे, फिर से प्रणाम किया। ये देखिये, ये कोई दिखावा नहीं है,
लाइव है, वो मायापुर में है, ये दिल्ली में है। कितना आदर है, कितना प्रेम है अपने
गुरु भाइयों के लिए। ये है नाम और प्रणाम। ये वास्तविक विनम्रता है, यह वास्तविक वैषणव सदाचार है। ये भागवतम को अपने जीवन में व उतारना है।
तो हमारे सामने ज्वलंत उदाहरण है। इसलिए महाराज क्या कहते हैं हमेशा अटेंटिव
चैटिंग एंड अटेंटिव डीलिंग। 1 बार हमारे मंदिर में हेजल केशो भारतीय स्वाह महाराज है। मैंने केशव भारती स्वाह हाराज से पूछा महाराज मैं मैनेजमेंट करता हूँ, तो बड़े अपराध हो जाते हैं। कैसे अपराधों से बचें? तो उन्होंने बोला आप लोग अटेंटिव चैंटिंग का सेमिनार करते हो, अटेंटिव हेरिंग का सेमिनार करते हो। आपको अटेंटिव मैनेजमेंट भी सीखनी चाहिए। मैं यस महाराज वो तो पूछ रहा हूँ, कैसे सीखे बोले लर्न, फॉर्म, यू और गुरु महाराज अपने गुरु महाराज से सीखे, कैसे अटेंटिव मैनेजमेंट करते हो?
और महाराज इतनी बड़ी संस्थ को संभाल रहे हैं, इतने सारे भक्तों से डील
कर रहे हैं, कितने अटेंटिव रहते हैं महाराज से। 1 बार किसी ने पूछा मायापुर में आज से पंद्रह साल पहले की बात
है, महाराज आपको इस संस्था में 35
वर्ष हो गए है, आपकी सफलता का रहस्य क्या है? तो गुरु महाराज ने उत्तर दिया स्ट्रॉन्ग
मॉर्निंग प्रोग्राम एंड वाइडिंग।
वैश्नव। अपराध पूरा पक्का मॉर्निंग प्रोग्राम और वैश्नव अपराधों से बचना। तो अगर हम भागवतम के संदेश को जानते हैं, भागवत का निष्कर्ष है नाम,
संकीर्तन, नाम और प्रणाम प्रणाम। कब करेंगे? प्रभावशाली प्रणाम।
कब होगा जब भक्तों के गुरु के महत्व को समझें ग वो कैसे समझेंगे अगर अच्छे ढंग से हम भागवतम का श्रवण और अध्ययन करेंगे।
और एग्जाम्पल क्या है?
महाराज डिवाइस ऐसी भक्ति स्वामी, शिला, प्रपात
और प्रपा जी के शिष्य।
हम देखते है की कैसे अपने जीवन में भागवत को उतार रहे हैं।
तो हमें बहुत को सौभाग्यशाली मानना चाहिए कि प्रोप जी ने ये कॉलेज खोला
है, हमें ट्रेन करने के लिए, उसका
आधार, ये भागोतम है, उसके लिए हम इतने सुन्दर तात्पर्य है, हमारे सामने लिविंग
एग्जाम्पल्स है तो क्या करना है, हमने बस इसका फायदा उठाना है। और हम भी भागवतम को अपने जीवन में उतार सके तो हरिद्वार यात्रा में हम ये आज प्रार्थना करें गंगा मैया से। और इस धाम में यहाँ पे अजामिल का उद्धार हुआ और इसी ढंग से हम भी यहाँ से कुछ लेकर जाए कि अपने जीवन में हम भागवतम को अच्छे ढंग से पढे सुने और ये प्रेरणा लेकर जाए कि भागवतम क अपने जीवन में उतारना है। 1 बार हमारे मंदिर में इस गेस हरी लीला प्रभु आये थे, भक्ति व्यव पढाने, उन्होंने बहुत सुन्दर 1 वाक्य बोला था। उन्होंने कहा था कि भागवतम इस फॉर, लिविंग एंड लाइफ इज फॉर प्रीचिंग राउंड लाइफ इज फॉर लिविंग एंड भागवतम इस फॉर प्रीचिंग मैं खाली प्रचार के लिए
भागवतम बोलूंगा लाइफ अपने स्टाइल में जीतूंगा
किंग साइज लाइफ इस फ भागवतम इस
फॉर अगर भागवत को अपने जीवन में उतारेंगे दैन। लाइफ विल बी फॉर।
तो ये हम जीवन मे उतारने का प्रयास करे। हरी कृष्ण ग्रंथ राज, श्रीमाल भागवतम की
ज, जगत गुरु श्रील प्रउप की जय, कृष्ण गोस्वामी महाराज की जय,
हरे कृष्णा के क्वेश्चन ले ले, ओके माता जी, पूछे जी,
हरे कृष्णा प्रभु जी, प्रभु जी। 1 प्रश्न मुझे बहुत कचोटता रहता है कि जब हम जैसे हम सुनते हैं कि हम आध्यात्मिक जगत में ही थे, सब है तो हमने भगवान से इर्ष्या की और हम इस भौतिक जगत में आ गए। भगवान ने भौतिक जगत बनाया और हम फिर कर्मों के उसमे बनते बनते। अब भक्ति के सिवा कुछ नहीं है, यह तो समझ में आता है। लेकिन जब हम वहां थे तो कहते हैं स्वयं प्रकाशित था। और हम नित्य दास थे। भगवान के सब ऐश्वर्य था, सब कुछ था। फिर यह बुद्धि इतनी क्या भगवान से हीरा कर बैठे जो सब कुछ दे रहे थे, ये क्यूँ किया? क्यूँ से? इस संसार में क्यूँ प्रयास करते हैं? फिर अर्थ, फिर अनर्थ, फिर गलतियां, फिर अपराध छुटने के तरीके रोज सुनते हैं। लेकिन बहुत मेरे को क्यूँ आये, क्यूँ आए अब नहीं चाहिए, अब नहीं चाहिए।
वह वेरी गुड बहुत अच्छा
आपकी, यही डिटरमिनेशन आपको वापस ले जाएगी।
बस
अब यही सोचते रहे में क्यो आई?
यहाँ पर बस बहुत है, दोबारा नहीं आना है।
तो किस दिन ऐसा हुआ? कब मैं भ्रमित हो।
वह यह क्या हुआ, कब हुआ, कैसे हुआ? ये छोड़ो बेकार की बातों को, तो ये बेकार की बातें हैं। भगवत गीता के तेरहवें अध्याय के बीसवेशलोकेतरमें लिख रहे हैं। ये सब केवल भगवान जानते हैं।
तो हम नहीं जान पायेंगे।
हम केवल यह जानते है कि कैसे बाहर निकाल रहा है तो बाहर निकल जाइए।
बस वहाँ जाकर।
भगवान बता दें कि ये गलती की थी।
आप
बस ये भय बहुत अच्छा है कि मैं भक्ति में गिर ना जाऊँ। ये भय हमेशा बने रहना चाहिए की भक्ती हाथ से छूट न जाए। positive fear okay
have a sin
माता जी ने जो पूछा, हमारे पी बी टी में सुन्दर गोप पर लेक्चर देते थे, मुझे आप भी याद आ गया हो। सामने बैठे हैं। तो रोबिजीने बोला था कि जो दूध पी के भी जिसको जल जल गया जीव, वो छाज की फू
ग्रेड, ओके
और हाँ जी है। आइये आगे आइए।
रे कृष्णा बहूजी।
दरद प्रणाम जी, मेरा 1 प्रश्न था जब के ऊपर कि जैसे हमारा कल जैसे बता रहे थे। प्रभु जी कि हमेशा साधना और सेवा को हमेशा बैलेंस बनाकर रखना है कि दोनों चीजों पर फोकस करना है। पर जैसे हमारे पास जनमाष्टमी का एग्जांपल लेते हैं कि जनवाष्टमींइतनी सारी सेवाएं और पता है। अगर अभी मॉर्निंग में माला नहीं हुई तो फिर बाद में कभी नहीं होगी। तो फिर। हमें साधना पर फोकस करना चाहिए या सेवा पर फोकस करना चाहिए।
देखिये नॉर्मल दिनों में क्या शुरू लेना चाहिए, नॉर्मल दिनों हम जल्दी उठिये। सबसे पहले अपना माला आराम से खींच पपराजी।
कई बार, कई बार नहीं हो पाता है। जैसे कि सुबह के टाइम माला नहीं हो पाता है तो फिर वो नहीं हो पाते। तो फिर हम क्या करें? मतलब प्राइरिटी किसको करना चाहिए?
प्राय टी तो माला कोई है।
प्रोप जी बता रहे हैं सबसे महत्वपूर्ण सेवा है 16 माला का ध्यान पूर्वक जब इसको आप अच्छे ढंग से कर लेंगे, बाकी सब कुछ ठीक हो जाएगा।
ये अच्छे ढंग से नहीं करेंगे तो
सेवा भी हम सही चेतना में नहीं कर पायेंगे।
इमरजेंसी सिचुएशन है, वो अलग बात है। नार्मल।
कंडीशन में दिस इज अ रूल बाकी एक्सेप्शन सबसे पहले 16 वाला ध्यान पूर्वक, उसके बाद आप सेवा अच्छे ढंग से कर पाएंगे। भक्तों से अच्छे ढंग से आदान प्रदान कर पाएंगे।
ये नहीं किया तो हमेशा बैक माइडवेलिडेशन चलता रहेगा।
माला करनी है, माला करनी है तो आप सही ढंग से डिलिंग नहीं कर पायेंगे।
थैंक यू
हरे कृष्णा प्रभुजी दंडवत प्रणाम प्रभुजी मेरा प्रश्न, यह है जैसा।
अभी।
प्रभु जी ने भी बताया कि हमें भगवान से कोई सम्बंध जोड़ लेना चाहिए। अगर हमारा सम्बंध हो जाता है तो उसकी हर वस्तु हमारी हो जाती है। तो मेरा यही प्रश्न था प्रभु की हमें भगवान से सम्बन्ध किस रूप में जोड़ना चाहिए। हमें उनको अपना प्रेमी समझे, अपना पिता समझे, अपना पुत्र समझे, अपना सखा समझे। हम क्या समझे प्रभु उन्हें? और उसको कोई सम्बंध जोड़ने का रास्ता क्या है?
प्रभु यस ये बताएंगे सुन्दर गोवाल प्रभु बताई सुंदर गोबालप्रुचले गये।
कहाँ गया
आइये आइये?
आप बताइए, आप संबंध स्पेशलिस्ट हैं।
आप
रे कृष्ण सम्बन्ध। हमें प्रारंभ अवस्था में अपने को सेवक और स्वामी के संबंध में रखना है। अपना, हम सेवक हैं भगवान के और भगवान हमारे स्वामी है, यहाँ से हमें प्रारंभ करना चाहिए। प्रपात जी ने कहा। और फिर जैसे जैसे प्रगाड़ता हमारी हम भक्ति में आगे बढ़ेंगे। श्रद्धा साधु संग भजन क्रिया अनर्थ निवृत्ति निष्ठा रुचि। फिर आसक्ति भाव के स्टेज पर जाते हैं साधक। तो फिर वहाँ पर स्वरूप सिद्धि उसको अपने प्राप्त होती है कि? और फिर प्रेम की अवस्था में स्पष्ट रूप से अपने स्वरूप में स्थित हो जाता है। लेकिन उससे पहले ही अवस्था में हमें बस अपने को सेवक और भगवान को स्वामी के रूप में संबंध बना कर सेवा करनी चाहिए। हरे कृष्ण
1 सवाल या w how to come out of self aplication world in mind? we are always considringrsels best slfgoiaonnoing that we are not?
तो कैसे हमारा हृदय अपनी प्रशंसा से
भरा रहता है की म द बेस्ट तो कैसे से बाहर आये? सबसे अच्छा तरीका है हमेशा भक्तों के संग में रहे। व न चाहते हुए भी आप कितनी सुन्दर सेवा करेंगे की आपकी फॉल सिंग, वो हमेशा काटते रहेंगे। तो भक्तों के संग में रहिए। हमेशा और और अच्छा बनना है तो किसी डिपार्टमेंट का इंचार्ज बन जाइए, कोई सेवा संभाल लीजिये तो और शुद्धिकरण हो जायेगा तो ये गलत फैमी दूर हो जायेगी। मैं बहुत अच्छा हूँ।
ओके धन्यवाद प्रणाम प्रभुजी। मेरे क्वेश्चन है कि हम भागवतम पढ़ते हैं। क्या संस्कृत के श्लोक पढ़ना जरुरी है, सिर्फ हिंदी या इंग्लिश, उसके भाववाद पढ़ के गुजारा होगा।
हाँ धन्यवाद माता जी, मैं टच नहीं कर पाया, टाइम कम था तो हमने
भागवत की महिमा सुनी है।
तो भागवत प्रति दिन पढ़नी है। और कैसे पढना है। हमें श्लोक पढ़ना है। शब्द शब्द का अनुवाद भी पढ़ा है, 11 शब्द का अर्थ भी पढ़ना है, अनुवाद भी पढ़ना है, तात पर भी पढ़ना है। और जितना आप श्लोक पर ध्यान देंगे। सूष् में का हमें श्लोक समझ में ना, लेकिन उनका वर्ड बाई वर्ड मीनिंग देखेंगे तो धीरे धीरे समझ में आएगा आप। उसको 1 दिन ऐसा आ उसको रैलिश करना शुरू कर देंगे।
11 शब्द में भागवत का 11 शब्द
प्रेम की वर्षा करता है, ऐसा बताते हैं। तो हम उस वर्षा को उस प्रेम से वंचित हो जायेंगे।
और यह प्रति दिन पढ़ने है।
हमारे बीच में इसके सचिव पति बैठे है। तो मैं कल बात कर रहा था। इन्होंने जब से इन्होंने दीक्षा ली, पिछले 22 सालो से इनका 1 नियम रहा
है कि प्रति दिन कम से कम 12 पेज पढ़ने हैं। और ऐसा करके उन्होंने 4 बारी कीमत, भागोतम 3 बारी चेतने चरता, 2 बारी
चेतन्य, भागवत, 1 बारी महाभारत, 1 बारी रामायण और अनगिनित समय भगवत गीता पढ़ चुके हैं, अद्भुत और खूब प्रचार कर रहे हैं।
इसके बाद इसके वाला और पता नहीं क कौन कौन से पुराने पड़ चुके हैं।
तो गिनती नहीं है।
तो क्या है? कंसिस्टेंसी नित्य भागवत से या प्रति दिन पढना है। प्रतिदिन पढेंगे। जैसे गुरु महाराज भी कह रहे थे, प्रतिदिन पढेंगे तो रुचि अपने आप आ जाएगी। आपको संस्कृत श्लोक लग रहे है। पढने में।
प्रतिदिन पढ़िए धीरे धीरे ये भागवत की
कृपा से यहाँ भागवत सम में आएगी, अपनी बुद्धि से नहीं, भक्ति के भाव
से पढेंगे प्रार्थना करके पढेंगे की। मैं भगवान आपको जानना चाहती हूँ। तो भगवान अपने आप को भागवत के माध्यम से प्रकट करेंगे। पति दिन
और और किस सवाल जी,
हरे कृष्ण, धन्यवाद ब्रहुजीप्रभुजी जैसे आपने भी बताया के डेली मॉर्निंग प्रोग्राम और साधना जो अपना स्ट्रोंग होना चाहिए। माला बाकी, सारी चीजें मॉर्निंग प्रोग्राम तो हम अच्छी तरह से कर लेते हैं। और भागवत हम क्लास सेवा या किसी कारण की वजह से हम नहीं क्योंकि उस टाइम हमारा निकालना होता है। संकीर्तन के लिए। सुबह सुबह 8 बजे तो हम भागवत का लास अटेंड नहीं कर पाते। और उसके बाद फिर दिन भर भी वैसे लेक्चर सुन लेते हैं। पर जो डेली अपना जो रूटीन चलता है, स्लोक बाई स्लोक वो नहीं है। अटेंड कर पाते तो फिर क्या कर
सकते हैं उसके लिए 8 वह संकेतन में जाते है।
कैसे है डेली, डेली, डेली सुबह।
8 से 10 संकेतन बाहर जाते हैं। हां, बाहर कहां से है। आप अहमदाबाद अच्छा तो क्लास के बाद नहीं जा सकते है।
तो वो हमारा टाइमिंग ऐसा रहता है कि उस टाइम जेंस घर पे होते हैं। ज्यादातर तो प्रचार के लिए जो हम निकालते हैं तो 8 से 10 का
टाइमिंग हमारा ये आपकी डीटेल्स हैं, लेकिन आधार जब तक बुक्स द बेसिस जब तक आपके शास्त्रिक आधार नहीं होगा, आपका फाउंडेशन स्ट्रांग नहीं होगा तो फाउंडेशन स्ट्रांग होगा। तो प्रचार और शक्तिशाली हो जाएगा। कुछ भी कीजिए टाइम को जैसे भी अडजस्ट कीजिए भागवत जरूर सुनिए। अगर आप डेली नही कर सकते तो हफ्ते में 23 बार क्लास जरूर सुनिए।
उसमें प्रभुजी बात यह है कि जैसा सेवा मिला हुआ है मुझे मुझे जो वरिष्ठ वक्त जो जाते है मेरको मृदंग में, उनके साथ मृदंग बजाने के लिए जाता हूँ। तो मुझे यही सेवा के उनके साथ मेरे को निकालना है। और वो बहुत ज्यादा ही वरिष्ठ है। तो मैं उनकी बात भी नहीं कर सकता। तो वो स टाइम सेटलमेंट हो फि हमारा सुबह निकल ही जाना है, कुछ भी हो जाए मतलब में अगर 5 मिट भी लेट हो गया तो वो निकल जाते।
ठीक है ये डिटेल्स की बात है। आप प्रिंसिपल को पकड़े फिर आप कैसे भी करिए बाद में आके सुनिए प्रतिदिन भागवत को रोना वो सुनना आवश्यक मंदिर का।
फिर नहीं सुना। मतलब कैसे सुन सके वो आप बात
कीजिए, मंदिर के अध्यक्ष से बात कीजिए, कुछ कीजिये। लेकिन सिद्धांत यही है ओके हरे कृष्ण,
थैंकयू गुरूजी के
ओके माता जी, हां जी,
हरे कृष्ण प्रभु जी, धनवाद प्रणाम, मेरा भी यही प्रश्न था प्रभु जी के मॉर्निंग प्रोग्राम को मैं स्ट्रोंग कैसे करूँ। क्योंकि मैं जॉब करती हूँ सिंगल मदर हूँ। तो सारी रेस्पोंसिबिलिटी मेरे ऊपर है। बच्चे को स्कूल छोड़ना ऑफिस जाना तो सुबह मैं कोशिश करती हूं कि मैं मंगला भी करूं, चैटिंग भी कंप्लीट करूं, बट नहीं हो पाता प्रभु जी तो माला मेरी सुबह 8, 10 माला या 12 कभी कभी और मंगला आरती में सिर्फ में दिया जला देती हूँ बस और कुछ नहीं कर पाती और बाकी की माला है बाद में करती हूँ और भागवतम क्लास वगैरह ये कुछ भी नहीं हो पाता।
प्रभु जी
कोशिश कीजिए ट्राई योर बेस्ट देखिये अपनी भक्ति की गाड़ी को सही चलाना है। तो ये कुछ सिद्धांत है जितना आप बेस्ट ट्राई कर सकते हैं करिए। अगर आप भागवत छुट्टी के दिन होते हैं तो से मंदिर में जाकर सुनिए या फिर आखिर में बाकी दिनों में आते जा। कुछ सुनिए जितना बेस्ट प्रयास कर सकते हैं करिए और हम सबको प्रयास करना चाहिए अपनी लाइफ को जितना हम सरल बना सके उतना अच्छा है।
थैंक यू प्रभु जी, हरी कृष्णा दन्यवाद प्रभु जी, ये 1 प्रश्न इसको दे सकते हैं।
प्रबुजीदजियेपांच सौ रुपया कृष् कृष्ण प्रभु जी, ड्रंवप्रणाम 1 प्रश्न है मेरा जो पाप
होते है वो कैसे हटते है
पाप
प्रभु जी, पाप कैसे हटते है प्रभु जी, ये नाम जब पर मतलब फोकस मैं चाहती हूँ। यह नाम जब भी करे तो मैं इसको थोड़ा सा डर दिखा के काली माता आएगी नाम जप कर लो। तो प्रभु जी गलत तो नहीं है। कभी कभी ऐसा लगता है कहीं इसके मन में डर न बैठ जाए। बट मुझे लगता है कि कृष्ण का नाम इतना शक्तिशाली है तो वो इस डर से भी बाहर निकाल देंगे। तो मुझे इसके लिए थोड़ा सा गाइड कर दीजिए।
जैसे पाप होते हैं। पाप को अगर आप अवर में डालेंगे तो वो पाप कान बन जायेंगे। अगर पाप को अवन में डाल देंगे तो पाप कौन बन जायेंगे? पाप क जान, देना पाप तो वो अवन है। हरि नाम, हरि नाम के अवन है। पाप को डालिए तो पाप कौन, पाप कौन? कौन कौन है? आप पाप कौन, पाप कौन? कोई नहीं बस प्यार दीजिये। प्रसाद खिलाइए उसको अभी ज्यादा मगजमारी करने का नहीं बड़ा समझायेंगे सके बाद में जी। और हां श्वेता जी
500 रूपए हरे कृष्ण प्रभु जी। 1 बात सोच, बहुत बार मन में आता है। धर्म वही है जो राम ने किया, कृष्ण ने किया। और अगर हम सिर्फ भजन में लगे रहे तो भगवान भगवान कृष्ण ने बचपन से ही दुष्टों को मरते रहे, मरते रहे। मे अंत में महाभारत 86 की उम्र में महाभारत युद्ध भी लड़ा और इतना दुष्टों का विनाश ही किया। पूरा जीवन तो उनका विनाश कौन करेगा? इनसे डिबेट कौन करेगा? धर्म की फैली हुई बातों को कौन मिटाएगा? इन दुष्टों से साफ कौन करेगा? इन दुष्टों का विनाश कैसे होगा? भगवान राम ने तो वही किया, भगवान कृष्ण ने वही किया है। कौन करेगा? अगर हम सिर्फ इसी में लगे रहे।
तो है ये हरिराम संकेतन, ऐसी ही
दुष्टों की प्रवृत्ति का विनाश होगा।
भगवान तपस्या कर न बैठ गए, जब सीता हरी गई, दुष्टों का विनाश कैसे किया, संगठन बनाया, सेना के गी और फिर दुष्टो का विनाश किया।
वो त्रेता से हमला किया।
फुलफोरऐसीहमलाकिया
ये कलयुग है कलयुग में चेतन्य महापूर्ण ने किसी का वध नहीं किया, उनके आसुरी प्रवृत्ति का नाश किया, हरिनाम संगीत से रे कृष्णा अरे तो हरिनाम
का जप कीजिये ये अपने में बहुत बड़ा युद्ध है, ये महाभारत से भी बड़ा युद्ध है। ध्यान पूर्वक जप करना, माहमारा से बड़ा युद्ध है।
वो तो कुछ न कुछ तो करना ही सो, नही, पड़ेगा डिबेट भी करनी पड़ेगी इन लोगो से। इन्हें धर्म कौन सी? कैसे डिबेट में हारेंगे संसार फॉलो कैसे करेगा, इन्हीं को फॉलो कर लेगा, मान
लेगा, ठीक कह रहे आप। तो पहले आप इस्लाम को मानने
से धर्म का
अहम दिला।
gay mikehrkshnaprbujy the not pram, so prbi, thank you very much for the lining words, it was really inside, ful, very well presented। we will try to implement that 1 कोश्चन प्रभु जी थोड़ा सा ऑफ टॉपिक है। पर जैसे की भगवान गीता में बता रहे है कि दिव्य ज्ञान से जो पाप है उनका नाश हो जाता है या फिर जैसे नेक डिवोशन में भी शिला रूप गोस्वामी बता रहे हैं कि जब हम डिवोशनल सर्विस करते हैं तो पहले अप्रारंभ कर्म और स सीक्वेंशली मतलब फिर अल्टीमेटली पाप करने की प्रवृत्ति जो है उसी का नाश हो जाता है। परन्तु हम देखते हैं कि कुछ मतलब कई बार हम देखते हैं वरिष्ठ वैश्नव को सफरिंग्स फिर भी झेलनी पड़ती है। तो उसको किस तरह से समझना चाहिए, उसको कैसे समझ सकते हैं? या कोई पूछे तो उसको कैसे एक्सप्लेन कर सकते हैं।
जो शुद्ध भक्तों के जीवन में सफरिंग आती है वो उनको ग्लोरिफाई करने के लिए आते हैं। जो हमारे जीवन में सफरिंग आती है, हमें प्यूरीफाई करने के लिए आते हैं
न।
आज देखिये परमपोजरीजयपताकसपा महाराज पर पोज गोपाल स्वामी महाराज इनकी महिमा और बढ़ रही है। ऐसी परिस्थिति में भी कितना उत्साह है, कितना समर्पण है परोपा जी के प्रति
अगर इनका स्वास्थ्य ठीक होता फिर भी करे हां ठीक है, स्वास्थ्य ठीक है
तो कर ही रहे हैं, स्वास्थ्य खराब है फिर भी उत्साह और बढ़ता जा रहा है। तो उनकी महिमा और निखर के आ रही है।
तो शुद्ध भक्तों के जीवन में जो
सफरिंग है उनसे उनकी महिमा और बढ़ती है।
हम हमारे जीवन में सफरिंग है वो
हमें शुद्ध करने के लिए।
हरी कृष्णा रोजी प्रणाम थैंक यू the लेक्चर मेरा क्वेश्चन है कि प्रोजी जैसे 23 दिन साधना अच्छी होगी, हेरिंग रीडिंग चैटिंग सेवा मॉर्निंग, प्रोग्राम भी हो जाएगा। बट फिर 1 दिन ब, बिल्कुल कुछ भी नहीं होगा तो उसे फिर अगले दिन गिल्ट आएगा, फिर वो रिवाइव करना होगा तो रिवाइव करने में ही सारा फोर्ट चला जाता है। तो इसे कंसिस्टेंट कैसे बनाया कोई बात
नहीं करते रहिए आप पेन डाउन रहेगा क्योंकि अब हम प्रकृति के 3 गुणों में है, कभी सतोगुण, कभी रजोगुण, कभी तमोगुण हावी होता रहेगा।
तो हम जब भक्तों के स होते
हैं उसका लाभ क्या होता है की
अगर मैं डाउन चल रहा हूँ तो
हो सकता है 7 वाला भक्त ऊपर हो मुझे खींच लेगा, दूसरे दिन मैं
आप हूँ, वो डाउन है तो मैं
उसको पिक कर लूंगा।
इसलिए भक्तों के संग में रहकर हम
साधना में लगे रहेंगे तो धीरे धीरे जब निष्ठा के स्तर पर आ जायेंगे तो स्टडीस जाएगा नहीं तब तक हम लगे रहेगे।
हरे कृष्ण जी परामरभजीमेराकोश्शन यह है कि हम देखते हैं कि हम जो हम चैटिंग कर रहे हैं, हम सब कुछ साधना कर रहे हैं, हम डिवोटी ठीक इन चीजों को एक्सेप्ट करते हैं। ब जब हमारी फैमिली की बात आती है, कुछ हमारे रिलेटिव हैं, हम जब ये चीजें उनको बताते हैं तो वो लोग हमारे को उन अलग अलग संस्थानों में जो बाबा हैं चाहे वो गौडिया मठ से ही आते हैं, बट उनका एग्जाम्पल देते हैं और हर को बोलते हैं कि वहाँ पर सब चीजें सेम है। बट किसी चीज का रिस्ट्रिक्शन नहीं है, न ल्सनब्याज की रिस्ट्रिक्शन है, वो से, सिनारियो सेम बताते हैं मैं किसी को नेम नहीं कर रहा, आई होप आप समझ जाओगे। तो वो लोग सब कुछ सेम बोलते हैं। बट वो बस ये बोलते हैं कि आपको लस्सन ब्याज की कोई रिस्ट्रिक्शन नहीं है, वो रिस्ट्रिक्शन तो हमारे लिए है जो साधना कर रहे है, जो येलो कपड़े औरेंज कपड़ो में उनके लिए है, बाकियों के लिए है। और वो इस बेसिस पर हमारे को तो निकल कर देते हैं। तुम तो रिस्ट्रिक्शन पड़े रहते हो, बाकी सब चीजें तो वहाँ सरल चल रही है। तो हमें इतनी इतनी रिक्वायरमेंट क्या ऐसी चीजों को अप्लाई करने का तो उनके
साथ क्या ऐसे डील करें, कैसे डील
करें,
आपको क्या लगता है, कैसे डील
करना चाहिए
और क्या दे आर नॉट, सो, फोर्चुनेट हमे जो प्राप्त हो रहा
है, प्रपाती कृपा से खालिस प्रोडक्ट मिल
रहा है, प्योर प्रोडक्ट, एज, इट, इज मिल रहा है। अब बाकी अपने कन्वीनियंस के लिए, अपनी
सुविधा के लिए की हमे कोई दिक्कत भी न हो, हमें सब कुछ प्राप्त हो जाए तो वी आर चीटिंग ऑवर सेल्स तो धोखेबाज में नहीं फंसना प्रपात की कृपा से हमे हर चीज यथा रूप प्राप्त हो रही है। अपने अपने को बहुत ही सौभाग्यशाली मानना चाहिए कि जो हम सेवा कर रहे हैं, सीधा राधा कृष्ण के चरणों में जा रही है और सीधा राधाराणी की कृपा गुरु परंपरा से हमें प्राप्त हो रही है।
तो हमारा कितना डायरेक्ट कनेक्शन है?
श्री राधा कृष्ण से तो हमें बहुत
भाग्यशाली मानना चाहिए और इधर उधर की
बातों में ध्यान देना चाहिए।
अगर वो आना चाहे मोस्ट, वेलकम अदर वाइज उसमे खुश हैं तो आप खुश
रहिये कोई दिक्कत नही है, हमें डिस्ट्रेक्ट होने की आवश्यकता नहीं है। प्रोजी थैंक यू स।
rogi, my question was just like you said that mata ka bndu bagwat is a real westren, but, because we are so lusnwelevethat, monaco, bndu, we believe are mind to be a westren, even in we are eding bagmweritointeprated in or on favor so, how to be कम to that कॉंशेसnेंस from man? बंदू मtेकोबंदू
तो मन मन, हमारा बंधु तब बनेगा जब भागवतम को अपना बंधु मानेंगे, तो अभी तो मन हमारा शत्रु है और उसको हम गलत मत मान रहे हैं। तो इसलिए डेली भागवतम को पढ़िए और सुनिए। तो धीरे धीरे यह बात स्पष्ट हो जाएगी की मुझे अपने माइंड को फॉलो नहीं करना।
फिर मैं देख पाऊँगा कि मैं अपने
मन से ऐसे अलग हो की ये जो विचार आ रहे हैं, प्रपोजल्स आ रहे हैं, मन की तरफ से आ रहे हैं। और मेरे में इतनी आध्यात्मिक शक्ति है कि मैं इन प्रपोजल्स को रिजेक्ट कर सकता हूँ।
अभी तो हमें लगता ही नहीं कि मैं लगता है प्रपोजल में हूँ, मन के आइडियाज ही मैं अपने आडेटआडेंटअपने मन
से करता हूँ, भागत से पढ़ेंगे सुनेंगे अच्छा जब कर पाएंगे तो हम अपने आपको, अपने अप, अपने मन से अलग देख पाऊँगा। और फिर मैं देख पाऊँगा की मेरा मन वास्तव में मित्र नहीं, शत्रु है।
हरिकृष्ण जी, हरी कृष्ण जी, आपको सभी, प्रभु जी, मेरा कुशन, जो भक्ति में ढीला विला होता हूँ, कभी गलती कर दी, कभी अपराध कर दिया, कभी किसी भक्तों को गुस्सा कर दिया, तो उसका मेरे पास बहुत बड़ा बहाना होता है कि ये तो मेरे पिछले जन्म के संस्कार हैं। तो प्रभु जी इसको कैसे, इम्प्रूव, उसकी वजह से काफी चीजे इम्प्रूव नहीं कर पाता, कभी किसी को गुस्से में बोल दिया या कभी कोई सेवा अच्छे से नहीं हुई। तो फिर मन से आता है, कोई नहीं। ये तो पिछले जन्म के संस्कार हैं, लेक्चर में सुना है तो प्रभु जी उसको कैसे मतलब इम्प्रूव कर,
हमेशा
देखिये, प्रवृत्ति तो हम सब के अन्दर है ही है। ठीक है जी, अब प्रवृत्तियों को ठीक करना है, उसके लिए मेहनत करनी पड़ती है। सो पाप के फलों से मुक्ति तो आसान होती है। पाप करने की। प्रवृत्ति से मुक्ति हो जाए। यह बहुत मुश्किल होता है। पर यह मुश्किल कार्य भी सम्भव हो जाता है। और यह सम्भव होता है भक्ति की कृपा से। भक्ति जो है न, इतनी शक्तिशाली है कि आपके संस्कार को चेंज करते है। इसलिए देखते हैं जो डिवोटी कई बार डिवोटी पूछते हैं। प्रभु जी, कभी कभी न नियम टूट जाता है। क्या बोला क्या, कभी कभी ये भी अच्छा बताया आपने, कभी कभी, कभी, कभी मेरे दिल में ख्याल आता है। पहले खयाल था अभी, कभी कभी। हम तो इसीलिए धीरे धीरे करके भक्ति का प्रभाव से जैसे इस समय क्या हुआ था, वो क्रॉस करा था। रेड लाइट तो रेड लाइट ही। तो हल्की सी उसकी मोटर बाइक आगे निकल गई। तो पुलिसवाला हो। do क्रॉस लाइन? तो ये भी उतर अपनी बाइक से दे इस ने बातचीत शुरू कर दिया। ऐसा करके तो पुलिस वाले बोले ऐसे तुम उंगली दिखा दिखा के बातें कर रहे हो। यही सीखा तुमने हरे कृष्णा करके, ऐसे उंगली दिखा दिखा के बातें करना। तो व्यक्ति बोला अगर तुम उसे 6 महीने पहले तो मैं तेरे पहले पीटा, फिर से बात करता, पर क्योंकि मैं हर 1 कृष्णा कर रहा हूँ, तो मैं इस लेवल पर आ गया हूँ कि उंगली दिखा बात करता। 6 महीने बाद। ये भी नहीं करूंगा सो प्रवृत्तियां जो है होले, होले करके चेंज होती है। अपकी कंडीशनिंग है सौ साल, सौ करोड़ साल, सौ खरब साल, ये सिंस टाइम mamoरियलयेअनादि काल की अगर प्रवृत्तियों को। 1 जन्म ग्राम निपटा, 2 भाई तो ऐसी भक्ति की जय हो। 1 जन्म में इलाज इस और 60 हजार साल तपस्या करते थे हम साल देश कितना भारी डिस्काउंट है, कितना पर्सेंट डिस्काउंट हो गया है वैसे 60 हजार साल और 60 साल कितना डिस्काउंट नाइन्टी नाइन पाइन, नाइन, नाइन, नाइन परसेंट डिस्काउंट, इसमें भी हम बेचना होता है। क्या प्रभु, हम तो चेंज नहीं हो रहे थे कि हमारे तो प्रवत्ति चेंज ना री, आज भी वैसी वैसी आदतें हैं, आज भी हम ऐसी हरकतें कर देते हैं। अरे सर 60 साल तो प्रा सो मिनी मिलियंस ऑफ़ लाइफ तो माया जस्ट गिव वन लाइफ टू कृष्णा 1 जीवन दे दे दे कृष्ण को। हम तो इसलिए चलते चलो मंगल आरती, प्रपानेकहातुममंगल आरती नहीं आते, क्यों नहीं आते तुम? ropa actually im in maya thats why b्रोपाज ने कहा ब्रिंग माया with you बट यू मस्ट कमफोrमंगलउसको बोल हैं दूर पीछे बैठ आज चल चले मंगला but yes gradualy chenges happen तो पहले हमसे रोज नियम टूटते थे अभी, कभी कभी टूटते हैं, फिर फोर्ट नाइन्टी टूटते हैं, फिर मंथली टूटते हैं, फिर हा, फिरली टूटते हैं, फिर उन से न यर टूटते हैं, फिर कभी नहीं टूटते हैं तो हलेहलेकरके सब सेट हो जाते हैं। डोंट get set आखिरी सवाल okay ओके, यहाँ 4 माताओं ने हाथ की है जी, आप पूछिए मत किसी से माइक कलाल mata माइक बंद कर दिए गए हैं। और प्रोग्राम और हो चुका है। तो इसलिए हरे कृष्णा चालू दिया दिया।
हरे कृष्णा प्रब्जीधरापरबजी। मेरे क्वेश्चन प्रयास को लेकर है। प्रयास और प्रचार और साहस, इन तीनों में न मैं अपनी मनोवृत्ति डिसाइड नहीं कर पा रही कि अगर जैसे भगीता बताया गया है। वो ये भगवान कृष्ण ने कहा कि हमें प्रचार करना चाहिए। वही जो प्रचार करेगा वह मुझे प्रिय है, सबसे प्रिय है।
मैं।
आप लोगों ने भी कहा कि हमारा आंदोलन प्रचार का आंदोलन है। लेकिन प्रचार करने के लिए हमको प्र प्यास करना होगा और प्रयास करने के लिए साहस चाहिए। तो न साहस है न। प्रयास करने का बल भी नहीं है। मतलब साहस नहीं है। तो अब 1 प्रचारक की तो बनना। तो फिर क्वेश्चन में ही नहीं आएगा। और फिर इस इस आंदोलन में हम प्रचारक तो नहीं बन सकते लेकिन जो प्रचारक हैं उनकी सिर्फ सेवा कर सकता है। तो क्या ये मन रति सेटल्ड है या इसे अभी उठना जल्दी उठना चाहिए? नहीं उठना चाहिए। अभी यहीं तक की सेटलमेंट दिखती है।
आपने बहुत ज्यादा एनालिस क्या करते हैं, परलिसिस बाई एनालिसिस प्रचार प्रयास साहस। फिर साहस कहाँ से आयेगा? इतना कम्पलिट हमने क्या करना है? केवल गुरु के इंस्ट्रक्शन को फॉलो करना है। गुरु से, इंस्ट्रक्शन से साहस भी आ जायेगा, प्रयास भी आ जायेगा, प्रचार भी हो जायेगा। नोट। जो कम्प्लीटेड रिमेन सिम्पल बताया गया, जैसे वरिष्ठ भक्त बता रहे हैं, उसको चुपचाप करिए बस शुरू हो जाइए और आपको सब कुछ आ जाएगा। इंस्ट्रक्शंस पर फेल रखिये। अपने अच्छी साधना कीजिये 16 माला से कीजिये। प्रति दिन पति ग्रंथों को पढ़िए और जो हमें वरिष्ठ भक्तों से आदेश प्राप्त होते हैं, उसका पालन करने का प्रयास करें। अगर आपको वह भी रखते हैं कि आप प्रचारों को एसिस्ट कीजिए तो वो ही कीजिये, वो बोले नहीं। आप।
फ्रंट लाइन के प्रचार, फ्रंट लाइन में
कीजिए वाटएवर, इंस्ट्रक्ट इंस्ट्रक्शंस में पूरी शक्ति होती है।
तो इसे में जितना विश्वास रखेंगे, हमें
साहस भी मिल जायेगा, हमारे प्रयासों में भी शक्ति आ जाएगी और हमारा प्रचार भी सफल होगा।
जी जैसे प्रभु जी फ्रंट लाइन में आने के लिए साहस से है तो वो फ्रंट लाइन में नहीं आना चाहते।
आपने अपना सोचना ही नहीं है।
अगर वरिष्ठ भक्तों की इच्छा तो आ जाइए, उनकी इच्छा नहीं। तो मत आइए थैंक यू जैसे वो इंस्ट्रक्ट करें वैसा करने का प्रयास कीजिए।
आप देखेंगे कि आप अपने लिमिटेशंस को
भी क्रॉस कर जाएंगे। इंस्ट्रक्शंस में इतनी शक्ति है। we can go beyond or limits thank you miracles will happen।
हरे कृष्ण प्रो जी, देर प्रणाम थैंक यू फॉर दिस वन्डरफुल लेक्चर प्रोजी। मेरा प्रश्न है कि श्रीमत भागवत को अपने जीवन में पूर्णता कैसे उतारें और दूसरा। जैसे कि प्रोप जी ने मतलब पहले स्कंद भी पढ़ रहा था तो उसमें प्रोप जी ने अलग अलग ऋषियों के बारे में दे रखा है। रिपीटेडली मतलब ऋिश्योमुनियों के बारे में देर रखा। सो व स द रीजन बिहाइंड देर
अपने जीवन में कैसे उतारें।
यह वन लाइफ ने मैनी लाइफ प्रोजेक्ट है। कंटिन्यूस प्रोजेक्ट कंटिन्यूस प्रयास चलते रहेंगे, भागवत अपने जीवन में उतारना तो कैसे उतारे
पढें सुने पर कोन्टेम्पलेट करें और उसको
उतारने में जीवन उतारने के लिए प्रयास करे और साथ में प्रार्थना करे खो सकते है।
पूरा न उतर पाये फिर से प्रयास
करें, प्राथना करे, यह चलता रहेगा और दूसरा प्रश्न याद रिश्यों के बारे में क्यों बताया, क्या उससे क्या ओब्जेक्शन है
आपको
ऑब्जेक्शन नहीं है। प्र मतलब जैसे प्राजी अलग अलग ज रशिया वशिष्ट मुनि है। इन सबके बारे में सो हाव कैन लिक वी कनेक्ट टू दिस उन ऋषियों
के नाम भागवतम में आते हैं।
तो प्रबाद इंटोडक्शन देने की ऋषि कोई साधारण व्यक्ति नहीं है।
महान महान ऋषि गण उस स्थान पर
एकत्रित हो गए थे जहाँ परीक्षित महाराज अपना शरीर छोड़ने वाले हैं। तो कितनी विशेष बात है।
उनकी, बता रहे हैं की भागवतम कितना महान ग्रंथ है। भागवत को सुनने के लिए बड़े बड़े
रिशि गन पूरे ब्रह्माण से इकट्ठे हो
रहे हैं,
थैंक यू सो मच के नो गोइंग। तो stop आप 11 सवाल के ₹2000 लगेंगे। आप पूछो
हरी कृष्णा महाराजी धनबाद प्रणाम तो अभी। जैसे की हम यहाँ भक्तों के संग
में,
भक्तों के संग में आये हैं, तो हमारी भक्ति अच्छे से होती है, हमारा कांशेसनेस अच्छा होता है बट। फिर कुछ टाइम बाद जो कम्पलेसेंसी होता है न कम्पलेसेंसी लाइक, चीजों को लाइटली लेना। इन डिसिप्लिन बिहेवियर। जैसे प्रपात कहते है की डिसाइपल वो होता है कि जो डिसिप्लिन में रहता है। त तो ये हम इससे कैसे बचे। हम दिन में 2233 लेक्चर सुनते हैं, माला भी करते है, सारी चीजें। फिर कुछ टाइम बाद कम्पलेसेंसी से भक्ति खराब हो जाती। तो हम उससे कैसे बचे ही सवाल
पूछा जा चुका है, आलरेडी रिपीटिशन है ये दूसरा सवाल हा जी माताजी देखो भक्त। जब दूसरे भक्त सवाल पूछे है, थोड़ा सुनना चाहिए उसको कंसिस्टेंसी अभी माता जी
ने पूछा था complisinsygheri comples
कom्plीसिंसी आप ही उतर दी।
देखिये ये नैचुरल स्वभाव है हमारा। हम जब कुछ करते हैं तो धीरे धीरे कंडीशन सोल में प्राइड आना शुरू होता है। और जहाँ प्राइड आते है, सके कम्पलेसेंसी शुरू हो जाती है। और जब हम जो जो चीज हमारे पास नहीं है, हम समझतेहैं मेरे पास नहीं है, उसको पाने के लिए हम बड़े आतुर रहते हैं, वो आ जाती
है, फिर सटल प्राइड आते है, फिर
उसके लिए कॉम्प्लीसेंट हो जाते है। तो कैसे ये जायेगा अच्छे ढंग से, श्रमण क से, अच्छे ढंग से, जप करने से हमेशा रियलाइज कर रहे हैं कि मेरी कितनी बड़ी कृपा है? बाय द एटिट्यूट ऑफ ग्रैटिच्यूट कृतज्ञता रखे जो मुझे प्राप्त हुआ है, यह कोई साधारण वस्तु नहीं है, यह भक्त साधारण नहीं है, परपज के तात्पर्य साधारण नहीं है, हरीराम साधारण नहीं है। तो वह कृतज्ञता की भावना रखेंगे तो कोम्प्लीसेंसी न? नहीं, नहीं आएगी। और दूसरा हमेशा हम भक्तों के संघ में वेसनर सदाचार का पालन करें। ए दिया, गोपाल स्वा हाराज का लाइव रहे। फिर भी पूरे वेष्टन सदाचार का पालन कर रहे हैं। और दूर से भी ऐसा कर सकते थे। नहीं, पूरा जोक के उतर के प्रणाम कर रहे है तो हर्ष थिति में रेशनल सदाचार का पालन करना और 1 कृतग्यता की भावना रखना। इससे हम इस ढीले पन से अपने जीवन में ढीला पंचो आता, उससे बच सकते है।
complicnsyimokaylast question माइक 2 माता जी,
हरी कृष्णा, हरी कृष्णा प्रभु जी, प्रभु जी। जैसे अभी तक सुना है कि फॉल्ट फाइंड नहीं करना चाहिए। हमे भक्तों में, किसी में भी नहीं इनफैक्ट। लेकिन प्रभु जी, फोर्ट दिख रहा है, कन्विंस हो रहा है। मन इस बात से कनविंस हो गया पूरा कि हाँ फॉल्ट है, फेलो डिवोटीज आर, आल्सो ग्रीं कि हां, ये सच सच डिबोटीकाफोल्ट है, कैसे नहीं देखें दिख रहा है? नहीं देखे कैसे
अच्छी बात है। फॉल्ट दिखाई दे रहा है तो क
कैसे न देखे दिखाई दे रहे है
तो है तो कोई दिक्कत नहीं है। फोल्ड्स होंगे, सब में होंगे। लेकिन हमें उससे क्या लेना देना। आपको क्या फर्क पड़ रहा है। इससे
जी मे भी इमोशनली हर है।
नहीं किसी में फोर्स हैं, होने दीजिये।
उसके अच्छे गुण भी है।
उसको देखिये जी अगर आपको फोर्ट्स डिस्टर्ब कर रहे हैं, क्यूँ डिस्टर् प्रयास कीजिए। उसने आपके साथ सही व्यवहार नहीं किया। उसने आपका अपमान किया। अगर ऐसी बातें हैं तो उसको सहन कीजिए कि मेरे कर्म हो सकते हैं। हम आपको आदर्श बात ब रहे है।
अन्यथा उसके अन्दर फॉल्स वो नियम पालन
नहीं कर रहा है।
यह नहीं कर है तो मुझे क्या
दिक्कत है उसे हम अगर उसके बारे में वास्तव में कंसर्न है तो उसकी अथॉरिटीज को जा के बता दे कि हमने उसके अंदर यह फोल्ड देखे है। वो नियम तोड़ रहा है। उसको आप सुधार लीजिए।
हर परिस्थिति में हमें यह देखना है
कि इस बात का क्या मैं भला कर सकते हो। हाऊ कैन आई सेल्फ दिस डे डे फोल्सम में होंगे। इस स्थिति में मैं इसकी कैसे सेवा कर सकती हूँ। हमें देखना है।
क्योंकि इससे इसका भी नुकसान हो सकता है, मिशन का भी नुकसान हो सकता है।
तो कैसे मिशन को बचाए, कैसे को बचाए।
अगर व्यक्तिगत रूप से मुझे कुछ नुकसान
पहुंचा रहा है तो मैं इसको चुपचाप सहन कर।
सहन नहीं कर सकते। तो किसी वरिष्ठ भाग के सामने जा
के अपने हृदय को हम खोल सकते हैं। वो हमें शक्ति देंगे को हम सहन करे या शोकेस रिस्पोंड करे।
इधर उधर चर्चा करने से, लोगो से प्रमाणित कराने। से।
हाँ जी, इसमें फाल्ट फाल्ट है, फॉल्ट से क्या फर्क पड़ेगा हम भक्ति में नीचे ही करेंगे।
सत्य बात है। लेकिन औ और बहुत से सत्य है। भागवतम के 18 वर्ष लोग सत्य है उसकी चर्चा करें। किसी का फॉल्ट है, सत्य है। लेकिन उसकी चर्चा करने से सबका नुकसान है।
थैंक यू अरे कृष्णा ब्रभु जी, दनबाद प्रणाम, प्रभु जी। जैसे हमने वरिष्ठ भक्तों से सु सुनते हैं। हम और पूर्ववृत्ति आचार्यों के बारे में भी सुनते हैं कि भगवान से हमें सेवा नहीं लेनी चाहिए कभी भी। लेकिन दूसरी तरफ हम यह सुनते हैं कि हमें पूरी तरह से भगवान की कृपा पर ही आश्रित रहना चाहिए। तो कृपा में और सेवा। में क्या डिफरेंस।
कृपा पर आश्रित रहने का मतलब यह है।
कहते है की हमे पैरासाइट नहीं बन रहा, भगवान हम आप ही करो कर रहा है। कृपा पर रहने का मतलब यह है कि पूरे प्रयास पूरी शक्ति से मैं करूँगा। लेकिन परिणाम मेरे हाथ में नहीं है। परिणाम आपके हाथ में ठाकुर।
जी।
तो आप जो कृपा करेंगे, मुझे स्वीकार
है
अगला सवाल सेवा में जी।
फिर जैसे कहते हैं भगवान से सेवा
नहीं लेना चाहे, भगवान से सेवा नहीं लेना, अपने लिए कुछ नहीं मांगना,
अपनी
सेवा नहीं करवाने, भगवान की सेवा करनी है, भगवान से सेवा लेने नहीं है।
थैंक यू प्लीज
हरे कृष्ण प्रभु जी, दंडोत्रणामबहुत सुन्दर क्लास आज का था। तो प्रभु जी, मेरा 1 प्रश्न है कि जो हम विभिन्न प्रकार की सेवाएं कर हैं तो वो एकदम सही मूड के साथ हो रही है कि नहीं हो रही है, उसका हम कैसे जजमेंट कर सकते हैं। क्योंकि कई बार ऐसा होता है कि सेवाएं तो कर रहे हैं लेकिन कई बार हम सहम को फ्रंट में लाने के लिए भी करने लगते हैं। कई बार गुरु कृष्ण को प्रसन्न करने के लिए भी करते हैं। तो एकदम सही प्रॉपर मूड में कैसे करे ताकि हमसे अपराध ना और आध्यात्मिक उन्नति हो।
हमारी कोई बात नहीं। हो सकता है आप हमारी सेवाओं के पीछे दोनों ही उद्देश्यों का मिश्रण हो। गुरु और कृष्ण की पसंदा भी हो। अपने लिए कुछ पूजा, ला, प्रतिष्ठा की इच्छा भी मिक्स हो। हो सकता है ये हो कोई बात नहीं। आप सेवा करते रहिये और सेवा से पहले प्रार्थना कीजिये कि मैं इसको पूर्णतया शुद्ध भाव से कर सकूँ और अपना बेस्ट प्रयास कीजिए और ऐसा हम प्रयास करते रहेंगे। भक्ति में इतनी शक्ति है कि हमारी चेतना में कुछ कल मच भी है। वो शुद्ध होता जाएगा और सेवा करते रहिये। प्रार्थनाओं के साथ अपने व्यस्त से जितनी
उत्तम से उतनी चेतना में जा के
हम प्रयास कर सकते है। उतना कीजिए। फिर भी थोड़ा बहुत कलमश जरूर रहेगा, क्योंकि हमारा बैकग्राउंड अभी तक कैसा रहा है। लेकिन भक्ति में इतनी शक्ति है कि वो सारा कलमश धीरे धीरे खत्म होता जायेगा और हम शुद्ध अवस्था में आ जाएगा।
जी जैसे साधना करते हैं तो वो सही हो रही है कि नहीं है। उसका भी हम कैसे जान सकते हैं
कि साधना अच्छी हो रही है। इससे हमारा परिणाम यह होगा की हमारी और साधना करने की इच्छा होगी। 16 माला समाप्त होंगे ही और थोड़ी माला बढ़ा दे, रीडिंग, थोड़ी और करने की इच्छा होगी। प्रति दिन साधना करने के लिए हम उत्साहित होंगे। इसका हम साधना अच्छा करे।
हरे कृष्ण धन्यवाद ओके बेटिया दे।
2 आखिरी सवाल हरीकृषण प्रभुजी प्रणाम आई हैव टू कवेstioंस पहला यह है कि अच्छा स्टूडेंट कैसे बने? एंड हाऊ टू कल्टिेटडिजायर ऑफ प्रॉपरकेटिंग, दिस मूवमेंट की कभी लेजीनेस या फिर इतना, सब कुछ सुनते हैं बींग फीसिंग ऑफिस? sponsibilities in future so how can i mentin that consistency this is one question and second? can i ask?
कंसिसटेंसी माती ने पूछा था यू आर कंसिस्टेंटली? asking the same केन
विंग दे गुड
स्टूडेंट विंग गुड स्टूडेंट व अच्छा विद्यार्थी कैसे बने।
बहुत अच्छा है सो जस्ट लाइक यू आर गुड स्टूडेंट सो गुड स्टूडेंट के लक्षण भगवान बताते हैं तत विधि पी पाते हैं। पर प्रश्न से या गुड गुड स्टूडेंट जो होगा अच्छे ढंग से सुनेगा सेवा करेगा और इंक्वायरी करेगा तो ये करते रहेंगे। तो आप अच्छे स्टूडेंट है अच्छे शिष्य रहेंगे। और जब अच्छे शिष्य बन जायेंगे तो गुरु की कृपा से सब कुछ सम्भव होगा। बस हमारे जीवन का लक्ष्य है 1 अच्छा शिष्य बनना, 1 प्रमाणिक शिष्य हम बन गए तो हम भगवत धाम पहुँच
गए
प्रभु जी शो। esencialyi was from pnjabibag temple, or have got in everything? if you are if i am doing anything, but later on i got associated with teradonandi⁇mserving their full time, so do i have any responsibilities to atspnjabibag temple, because this is what i m to from my enters, what i have very limited time, but i really want to। व इस ऑथोराइज वाच हर ई बी
डोइंग, देखिये 1 ही परिवार है इस कौन का, इस वन बिग फैमिली, इसमें पंजाबी बाग 1 कमरा है, देर धुन अलग कमरा है, द्वार अलग कमरा है, द्वारका सब अलग अलग कमरे हैं। बट बिल्डिंग 1 ही है तो हम सब 1 कान में ही है। कमरा बदलता रहता है कोई दिक्कत वाली बात नहीं है तो आप जिस कमरे में वहाँ अच्छे ढंग से सेवा कीजिए
थैंक यू र कभी कभी दुसरे कमरे
में भी चले जाये।
हर महीने 51 हजार चाहिए
ं यू
कमरा धन्यवाद शिल्पो हरिद्वार धाम की,
कृष्ण
प्रभु जी की जो मेला प्रभु की जावा धन्यवाद सभी भक्तों का अभी तक बने रहे। देखिये अभी तक जो बने हुए है तो स्पेशल सैल्यूट है सभी भक्तों को भी ओवर हो चुका प्रोग्राम इसे अभी प्रसाधन की और प्रस्थान करेंगे और प्रसाधन पा करके अपने कत्सानपरप्रसथान करेंगे सो न हरे कृष्ण महा मंत्र फॉर आल ऑफ़ हूँ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे आप सभी भक्तों की जाय कृष्ण प्रसादम की जाय।
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