ईर्ष्या द्वेष से कैसे बचे | How to avoid envy & jealousy | BG 12.13-14 08.11.2017 | ISKCON Ghaziabad

A devotional lecture on overcoming envy and jealousy through bhakti practice. The speakers cite the Bhagavad-Gita and Bhagavata Purana to show how qualities like compassion, humility, and surrender to Krishna naturally neutralize these destructive emotions. Regular chanting, service, and seeing all creatures as friends are the practical tools offered.
Chapters
है। कृष्णा जी स्वागत
ह
न हो, बड़े बदुरिया न हो, बबदेबधुरेवायाभूल आपने कितने मत? 2 ये घर में धरबरमिलायस। मुझे पता कि भगत जी हो, पढते हो, जीता है पढते 10 से 20 प्रतिशत हो रोज पढने का प्रयास, तो यहाँ आपको 2 शो पर ये बार मिला सो। ऐसे में का है व ह, ज चा में कराए
टेस्टा इरशाद हिम सर्वभूतानाम समस्त, जीवों के प्रति मित्र, मैत्री भाव वाला, करुण, दयालु एवं नि ही निर्मम स्वामी की भावना से रहित, निरहंकार मुखिया, अहंकार से रहित, सम, समवाय, दुख, दुख, सुख तथा सुख में कमी, छमा, वान, संतुष्ट, प्रसन्न, संतुष्ट, प्रसन्न, तु्तुष्टसततम, निरंतर, जोकी, भक्ति में निरत, यत, आत्मा, आत्मसम, यह जिंदगी, यह संकल्प सहित मई मुझ में अर्पित, सनरगमनमनकोबुद्धि तथा बुद्धि को यह जो मत भकत मेरा भक्त सह, वह मे मेरा यार अनुवाद की धनवाद, जो किसी से देश नहीं पड़ता, लेकिन सभी जीवों का दयालु मित्र है। जो अपने को स्वामी नहीं मानता है और नित्या अहंकार से मुक्त है, जो सुख दुःख में समभाव रहता है, सहिस्रुहै सदैव आत्म दुष्ट रहता है, आप की संजनी है तथा जो निश्चय के साथ मुझ में मंत्रका बुद्धि को स्थिर करके भक्ति में लगा रहता है, ऐसा भक्त मुझे अत्यंत प्रिय है। शुद्ध भक्ति पर पुन आकर भगवान इन दोनों लोकों में शुद्ध भक्त के विधि का वर्णन कर रहे हैं। शुद्ध भक्त किसी भी परिस्थिति में विचलित नहीं होता है, नहीं, वह किसी के प्रति चालू होता है, न वह अपने शत्रु का शत्रु बनता है, वह तो सोचता है। यह व्यक्ति मेरे विगत दुष्कर्मों के कारण मेरा शत्रु बना हुआ है। अतएव विरोध करने की अपेक्षा कष्ट करना अच्छा है। श्रीमद भागवत में 10 व 14 वें अध्याय का आठवां श्लोक कहा गया है। ततेबंपामसुष्यमछमाण भूल जाओ। जब भी कोई भक्त मुसीबत में पड़ता है, तो वह सोचता है, तो भगवान की मेरे पर कृपा ही मुझे। अपने कर्मों के अनुसार इससे कहीं अधिक कष्ट होना चाहिए। यह तो भगवत कृपा है कि मुझे मिलने वाला पूरा दंड नहीं मिल रहा है। भगवत कृपा से थोड़ा ही दर्द मिल रहा है। अत अनेक कष्टपूर्ण परिस्थितियों में भी वह सदैव शांत और ही बना रहता है। भक्त सदैव प्रत्येक प्राणी पर, यहाँ तक कि अपने शत्रु पर भी दयालु होता
है
का अर्थ यह है कि भक्त शारीरिक वस्तुओं को प्रधानता नहीं प्रदान करता, क्योंकि वह अच्छी तरह जानता है कि वह भौतिक शरीर नहीं है, वह अपने को शरीर नहीं मानता है और वह मिका अहंकार के बोझ से मुक्त रहता है और सुख तथा दुःख में समभाव रहता है। वह सही होता है और बहुत कृपा से जो कुछ प्राप्त होता है, उसी से संतुष्ट रहता है। वह ऐसी वस्तु को प्राप्त करने का प्रयास नहीं करता। जो कठिनाई से अत वह सदैव प्रसन्नचित रहता है, वह पूर्ण योगी होता है कि वह अपने गुरु के आदेशों पर अदम रहता है और चूँकि उसकी इंडिया बस में रहती है। अत वह द नेचर होता है, वह झूठे तर्कों से विचलित नहीं होता। क्यूँकि कोई उसे भक्ति के दृ संकल्प से हटा नहीं सकता। वह पूर्णतया अवगत रहता है की कृष्ण उसके सास प्रभु है। अत कोई भी उसे विचलित नहीं कर सकता। इन समस्त गुणों के पक्ष रूप वह अपने तथा बुद्धि को पूर्णतया पर विश्व परिचित करने में समर्थ होता है। भक्ति का ऐसा आदर्श सत्या की जरुर है। लेकिन भक्त भक्ति के विजित धनम का पालन करते हुए उसी अवस्था में रहता है। और फिर भगवान कहते है कैसा भक्त है? क्यूंकि भगवान उसकी कृष्ण भावना के कार्य कलापों से सदैव प्रसन्न रहते है।
मै हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे े अरे अरे जनवाद या ऐसी सुना सुना नहीं। यहाँ से इतना महत्वपूर्ण संदेश है क? गुलों का? तो ब्रा करोगे कितने भगत भगवान के मानना चाहते है। भगपरगीकेद्वारा हमें हर प्रश्न को प्राप्त होता है। फिल्म में में था, उसका कौन से कोई सम्मन नी था। प्रोफेसर के ा i ke bgwatelatomy s्tूdent में ता सी खाता हूँ ने विद्यार्थियों को जीत का दिया है और जीत का है मिल रहे हैं हत्या मा हम ऐसी े एश रईस फिर बचो कतर पढ़ते रहो 1 भरपेेसनामकामो है तुम उनकी हिदी में ै सर देश रहता था किसके प्रति तो सो जाएगा ने माँ को अपने घर में परेशान खाने का मंचन किया था आजकल महा यात्रा करते थे की में में खाना मौत को 2 दिन से जारी है तो मन में 2 काले का प्रयास करता तो 1 समय जब बना उनकी पत्नी लोगों को भोजन सुनाने की अक्सर दलवाले में दे दे का भी है और 1 हें जाना पड़ा पत्ती से अंदर दे इसलिए देखो किस प्रकार का सनीआतीहैा और खाता है क्या परिणाम हुआ उनका 4 की आवाज पकड़ ले थोड़ी देर बाद में बड़ी गहरी बीमारी हो गई और े जो लोगो को पता है तो गया नहीं दे सुने माँ तुम ने अपने हाथ को उनके हिरदे में रखा जब तक रहेगा जब तक क्या भवन में राजधानी होगी। मन की हमारे सांस में चर्चा बार बार की गई है या इस का कारण क्या है बारिश बन जाते है से सब दीवारों के प्रती का ये है नशा सबके प्रति बजे अगर कोई अभी देना भी करे तो दम के इस स्तर से भगवान में सब के रचना का वर्णन किया है। शो
हर
साल जो भर उस सब को मि ला माना जा लिया जाता है यहाँ प्रकार तैयार किया था पर बंद हुआ लेकिन हारने की आपा तो वैसा भक्त वह है जो कि सब को अपना मित्र मानता है। इससे कोई शर्त न थी मेरे लिए और बच्चों के बच्चे जी के स्वामी मत मानो भर कर क्या बता है की स्वामी कौन है कौन है धन्यवाद बहुत सार मेया ध्यान का में लोग सुनते हैं ये सब हमारे परिजन से प्राप्त हुआ है। हमारी संपति क्या होता है इसको क्यों किया जाए। ज्ञान का है तो एसपी ज्ञान वो है जो एसपी मामले कौन है भगवान
क्या करे है
तुम्हारा क्या का 1 हम कई बार इस देश फारस। अब देखे किसी में कुछ योग्यता है उन्हें मिल रही है। इसके बाद कोई खुश होने की। वजह जी गए थे। के साथ और सारे विश्व में तो पहले भी जो जुड़े जो बैकग्राउंड का मेरा क्या गया क्या किया है ा तो कुछ होना चाहिए परीक्षा से बचो सबके प्रति विदरताकाभाव यह बहुत ही आवश्यक है सबके प्रति और ये सोचो की के लिए सुने हमारा भाव है पर भगवान ही है अगर हमारे कुछ योग्यता हो हर व्यक्ति में कुछ न कुछ योग्यता रहती है तो आप योग पर मेरे में पकाशन जब उन्हें पता लगा है जिसमें बेटी की कला है इस कला का मारे और क से अहंकार के कारण हम क्या सुनते है की तुम्हारा वजन होता है 4 किलो बड़ा उनसे बढ़ सकते हैं बाबा जी के साथ में क्या कहते है भारतीय की विडियो के पालन के द्वारा आदि गुरु को अनुकूल कर सकते हैं। 26 गुलों के वेश में पढते है बहु ने इनादविसनकेनाकी चर्चा करते है हम लोग करके इसमें कोई सासनसाआजाता है कई बार लोग कहते हैं ने अपने प्रति मीडिया को कहा बाकी सब को देखने स्वयंको केवल हमें आज लोग छोड़ दे आप ध्यान से देखो आज लोगों में भूले साहित्य का साथ प्राप्त होता है कोई है ना भर है अपने आप ये कैसे हम दोनो इच्छा तो रहती है श्रोता बचियों विडियो के पानी से काफी बल को तो कैसे भी अहंकार से बचे हंकार बचने विजमनेतकाभाग हो पानी में जा so what i संसार में सो कर। 2 सो क्या गा है इस क करते है कैसे है वो बेटी इतना परिषा मत करो तुम उतना ही सुख मिलेगा जितना होता है कोई ज्यादा नहीं मिला राम भक्तों को े लोग के हमारे लिए अच्छा है उसे कहते है इसे मौसम आते जाते हैं शुभी भार का क्या व्यवहार होता है शोध प्राप्त हो अरे वा पाजी और यहाँ पे किया तो गेट से कभी यह नहीं था गुरु मन सुख प्राप्त हो भर का यह भाव रहता है भगवान जी के में दुख प्राप्त हो फिर हम किस को 2 मे हम बत बने क्यूँ हमें ये सब समस् रही है हो तो हम भी हैं है कोटा कम हो गया है आगे सेंशन यह बहुत ही महत्वपूर्ण है भी दिन बाद हो ले में क्या सा से इसका वर्णन अनेक शो को मिले के शो चर्चा सुन्दर प्यार है और ध्यान जीवन में हमें अत्यंत सेंचिल होना चाहिए
महा
सेंशल सरलता से भगवान के नामों का उच्चारण करता है और इस विषय में कहते हैं पेड़ से वे ज्यादा है देखा जाए और प्रपाती समय सेशन है बारिश आती है और छाता खोल देते हो पर विचार ही झंडी ती है और कूलर सर्दी होती है और इसी के उदाहरण है से ज्यादा दूसरों को आदर। 2 बिना किसी आदत की मे the santos कोई भी संतोष नहीं है हम जानते मान चिंता तनाव बढ़ते जा रहा है करते जा रहा है बढ़ते जा रहा है भी कोई संतोष नहीं क्या चाहिए क्या चाहिए और दे और और कोई कभी भी भारत के पारी कोई धंधा छोड़ ला fresh कोई camon जो कोई भी संतोष नहीं है गुल ने कहा भगवान को प्रसन्न करना चाहते हो और 3 जन की आवश्यकता है। हाय हजीवादनबरक्यारे संत ो यहाँ भगवान कह रहे हैं, अगर वे मेरे प्रिय बन जाते तो क्या करो? ये सब तो होगा, नहीं तो हम और पाप को और प्राप्त करने से सुख प्राप्त हो सकता है। मैं मुझसे पूछा था आप को दीदी में क्या चाहिए जो धन की बात नहीं कर सकते। ये जो मेरा का राष्ट्रपति क, धन धन से आप प्राप्त कर सकते हैं। पापा जी उदाहरण देते थे ये लो भाई 1 समय उस समय के सबसे से धनी राजा के राज्य थे, उनकी रूचि नहीं थी। जबरदस्ती के सेवा में जोड़ा गया था नौकीकेआगेनौकीतेआगी पूरा नाम कोई न होने के सिकंजे को 50 रिजल्ट बाद प्राब्लम हो था शक को जेल में दिया। 1 महीने में 10 है डॉक्टर देखो क्या बीमारी है, न तो रा भाई आप बोल, ना कोई से बड़े बजकर 1 हर प्रकार की सुविधा थी। जब वो मायापुर प्रधान है मधु करके, मदद करके पापाजी ने लिया। गांधी जी 4 थे योगी ने मुझे ध्यान देते हो, मुझे चाहिए कि तुम मदद करो तो वो 1 महीने समाज जाना पड़ा। इसे होते तो जो 1 समय लगभग राजा जैसी सुविधा। जब वृंदावन गए तो मधु जी है। संत थे क्यूँ के। उन्होंने क्या अपनाया था। अगर आप भाई नाम अपनाओगे तो हर सीधी मे संतोष रहोगे। आज े जो व्यक्ति है, नाम अपना है, भारती का ना है भरतिया को सुविधा व ो चाहे आप की नीमच रात, सुना शाम कर राज होगे। चिंतित दवाई सबसे ज्यादा दिखती है। अब ध्यान से दवाई सबसे ज्यादा की है। एंटी डेप्रेशन एंड डेप्रेशन एंटी डिप्रेशन कम से सम को चिंता का नाम है। और मल खाने चिंता कम हो जाएगी। भाई नाम को बनाओ सेल्फ कंट्रोल मन? ये कह सकते हो
ये जो गुल
हैं इधर शुरभरतकेलेकेलिए हर भारतीय को अनुकूल
कर सकता है
का प्रयास करना है। इसलिए यहाँ का
आप कैसे
ने पांचवे भधाइननेशोदेजीकी कथा प्राप्त होती है। कौन है ये मेरे पुत्र को मन तो मन बुद्धि को करते हो। क्या करो सर्वोपारी विजय मुक्तम भगवान का 1 नाम है कि देना भगवान का 1 नाम है मक्खन जो आपका कोई छोर बुलाए क्या करे? क्या कर रहे है। हमे चोर बुला रहे हो। भगवान में चोर बुलाते हैं, कोई कुछ नहीं। भगवान ऐसी चोरी कर देते, कोई पकड़ नहीं पाए हमारे। वक्त अमेरिका में रोज के घर से 2 थे, जबकि अमेरिका में गायब हो जाती है। देखा बताते हैं चने को चोरी करनी है तो चोरी मत करो। न का नाम डाल का है और जहाँ अब सब महिना में मा की दांतरनीलामेंआप क्या देखते हैं। माता ने कर लिया था जन्म देने क्या उनका पीछा जब बांधने की में क्या न हुआ कितनी छोटी सी 1 पहले से लोग भी छोड़ी उसी
3
साल के बच्चे थे, 3 साल का है। और सब को जोड़कर क्या वाले 4 ने कहा है आपको प्रयास करना पड़ेगा भगवान और समझे। अगर आप इन गुणों को न करना चाहते हो, प्रयास करना पड़ेगा। आपको राज करोगे फिर भगवान की कृपा से वन के स्वामी उपयोग मानपुर जो है प्लेसिंग क्स जो भक्त है वो है इसने सोचा था के के मानपुर में की किताब तो जो बात है उस मानबूजकाउपयोगकरते है क्या मान की तस्वीर भगवान के आदत है तो बडी क हर, क्रिष्णा हार ना क्रिष्णा हर हे नहलरमरहलेहाले।
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