भक्ति की कुंजी - विनम्रता | Humility | 2011 Vyasa Puja Evening | Delhi | Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Goswāmī

In this devotional discourse delivered by Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Goswāmī at a Vyasa Puja evening in Delhi, the speaker emphasizes humility (vinamrata) as the essential key to authentic bhakti. He explains how ego and mental agitation obstruct spiritual progress and how cultivating self‑less service, compassion, and surrender to the guru and Krishna dissolves these obstacles. Using vivid metaphors such as the humble tree that bears fruit without pride, he illustrates the qualities of a true devotee. Practical instructions are offered on chanting (japa), meditation, and living without attachment to fame, titles, or material gain. The talk repeatedly urges listeners to view themselves as servants of the divine, to prioritize the welfare of others, and to maintain a steady, humble heart in daily life.
Chapters
तो सुर देखे में मैंने शादी शंकर को बोल दिया था। हिसाब साथी को बोलते हैं, हमारी संप्रधामेमहामकाली भरती है। जिन्ना ने 1 ऐसी 80 दिसंबर स्थापित की। उन्होंने लगभग सौ दिन की रक्षा की। कई भजन हम बाते है, उनके लक्षना भी काफी पतली। तो सनाती में इस प्रकार का देश से मेरे सामने सुनवार बोलूंगा। शुर परावि माइंड इन टेंट टैनीकिशनथ्रोरी। तो सबसे कहते हैं कि हमें हमारा मान समाधान चाहिए किस लिए ध्यान से भगवान के नाम जिसने बिहार से ग्लास करोगे, उसी तेजी के साथ की मयाल परफॉर्मि कृष्ण कीर्तन यू इन माजी माइन। तो हम सब कहते हैं मन की समस्या है, मन सता रहा है मन का टेस्ट है। कहते हैं यह मन को वैश्व सकोगे। इस मात सिंह नाम के क्या भगवान किसान के काम से आप दूर करते हो। और की भावना बढ़ती है। इसके बाद मन बनता है, सलमान का बंधु बनता है। पर कह रहे हैं कृष्णा उसके द्वारा मनकरवा। dev olfolsp्rाइज जो भी हमारा जो हा अंकारी हमें छोड़ दे, अंक के कारण हम गुरु के उपदेश को नहीं सकारते, हांका के कारण सब के उपदेश से स्वीकार निकालते हैं अंक के हम हमेशा से खाए। इसलिए हम में है। ये जो झूठा है ये आप को पता है। क्या होना चाहिए इसे छोडो या we think your self बoltesesटीटूलo on? इंडस्ट्री तो थैंक यू भी कहते हैं हमेशा यह सोचो कि तुम बिल्कुल कम में हो। आजकल जो की आप फगानिस्तान थे, उन्होंने कहा यह मेरे इतने प्रोचै, अगर आप नाम ले लोगे तो आप ये सारे तो इससे आप अंदाजा लगा सकते हो। महावत मायावती ने कहा और इतने बड़े विद्वान हो, जब भी आप से नाचते हो जाते हो। शासनेप ने बड़े जन से कहा मैंने गुरु ने देखा और में कुछ योग्यता नहीं है। उन्होंने कहा कि वो मोल हो केवल हर नाम की, ये भगवान ऐसे कह रहे हैं। तो वो कहते हैं हमें अपने सोच की तुम निकले हो, घास के दिल्ली से भी ज्यादा प्रतीत हो, आप डांस के चलते हो घास कुछ कहा नहीं है। तो हमें अपने आप को सब का दास मानना है। समाज में हम अपने आप को दिखाने का प्रयास करते हैं। हम सेवक सेवक समझना चाहते है तो भी पत्नी कितने ही उन को सबसे प्रतीक समझ री। शमा की भावना होने के पेड़ के विषय में कहा गया है। पेड़ अत्यंत समशील होता है। पेड़ जो है अत्यंत सेंचिल होता है ने वहा लिए उधार दिया है। जैसे पेड़ सेम शील है। आपको भी सेम शील होना पड़ेगा। मेरे जी में रहेगा, सोता आज रहेगा कल नहीं रहेगा सेंचिल बनना है। और गीता ने भी साल के में का का वमन किया जाता है। ओ पी जी के प्रति भी इंसान ने सिवा मिल लिया है। भारत का किस प्रकार? 1 चीटी कशने चाहते थे तो है किसी को कैसी देना चाहता है और दूसरों की 1 बार ताई की। अपने पुरे जीवन में से कुछ खाने ले कर इसे अब दूसरों को चिंता है। कई बार वाले समान में हमें आंगन ता है। दूसरो को चिंता है, किसी को चिपका नहीं देना चाहता कि बनना चाहता। उन सब की सेवा आपको कश् भी दे रहा है, उसे भी सैम जी का व्यवहार गुड तो देन। मे हैप्पी के हैपी भाग सब के प्रति अच्छा खाया, ऐसा का दूसरा व्यक्ति संतोष है। और अपनी खुशी की चिंता मत करो। अक्सर हम सोचते हैं हमारे लिए क्या अच्छा है, लेकिन हम देखते हैं की हमारे स्वास्थ के लिए क्या अच्छा है, की में भी हम जुड़ जाते है, ये देखना चाहते हैं, हमारे स्वाद ले क्या अच्छा है, हमारे पद क्या, हमारे नाम के लिए क्या अच्छा है। अपनी खुशी की चिंता मत करो, दूसरों की खोज की चिंता मत करो, जी की चिंता करो, अपने पूछे मत करो। बस मेन कम god गुड खोल, शुगर जा वो कहते हैं जैसे तुम्हारे अच्छे, ये काम से आ रहा है, जैसे हमारे अच्छे और अनुकूल होंगे, ये जो भावनाएं हैं, शू हो जा, हूँ सब मुझे आदर दे, हा ने इतना, ये जो भावना है की कहा जा अच्छा जाओ ये भावना क्या लिए क्या सकोगे के मारे में आगे बढ़ पाते। तो ये जो हमारे मन में भावना होती है की सारी दुनिया हमें बचाने से बाहर, हमें हां ब, अपने हृदय में त का भाव है, प्रस्तुत कर और मन का भाव जान, ध्यान करने होगे। और जब प्रस्तुत करते हैं हमारे आंचल में, इसे भगवान होते है, गुरु प्रसन होते है और वो की सभा होती है। जब हम में अंक और अंक के भाव होते हैं, ब्लू होता है, भगवान सब होते है, हाँ समाज संतुष्ट होता है। नोंद साल रेस्पेक्ट इन नर है। जानते हैं कि हर पर वास कर, विचार में ये घुटाने, ये भगवान कृष्ण हरी के ुवातामेजरादवन है और इस कारण उसे हर किसी को भी किसी को करने के लिए यू विल टीम व जो विविंग हम्बर 1 बार फिर से छा लाइन के अंदर है, जो भर्ती में आगे बढ़ोगे। जब तुम विनम्रता का भाव प्रस्तुत करोगे को दया की भाव, दया की भावना का सबसे अच्छा उद्घालनहैविचारके काल में विचार धिकारी गे, तो यह सबसे ऊँचा माध्यम है। ये दिखाने की दया प्रस्तुत करते हो, हम विश्वास नहीं करते। देदिया ऑपरेशन का गिया ऑपरेशन है आपकी भावना को हर से निकालना noms न तो 1 बार फिर से 3 लाइन के जरिए दूसरी बात है रहे हैं। ये जो भावना है कि सब आपको जान, जान करें, कुशा मत करें। आपका आदर दे की जो भावना है इसको क्या सर्च स्टेट सी डी तो सुप्रीम अगर आप के नाम का उजागर करना चाहे। ये भावना रखो हमें आदर नहीं चाहिए, हमें नाम नहीं चाहिए, हमे उठा पद नहीं चाहिए, हम केवल सेवा करना चाहते हैं और दया की भावना और सबके सुख का सोचो अपने सुख व विन भारतीय नो सरिस लोड लोग रेल में सच कॉल की मान प्रणाम करते हुए मान से प्रार्थना करते हैं। यहाँ मुझे यह बहुत तो आप ही को हम 2 पर है और आप कह सकते हो आज आप ध्यान के डालती है और सुबह के में कई सुबह तो हम जैसे सुबह, ध्यान और आप लोग हर साल पिछले साल से इन भक्तों ने सेवा के दिया तो थोड़े महीनो में आने वाला है। आप सोचिए से व्यापार जी कहते थे की you want to please मुझे संतोष करना चाहते हो। हमने देखा है की हमारे भारत से बड़े इच्छा से इस काले में जलते हो जानते हो समझते हो कि जनता के माध्यम से लोगो को सहारा से है विशुरु आप सब विशरों जानते हो तो ध्यान से मुझे पता है आप बने आपके घर तो विश्व से बने। हमारे घर की दुनिया वाले तो ठंड ठंड काम है जो सी फेस तो हम लोग मैं और हम विद्या थे लेकिन जो सेशन में की और से आये थे हमारे े कृष्ण बुक मे लिया था, देवी भी हमारी व चूदी थी लेकिन हमने उसे तो किया करते मंदिर का पता कि मगन और इस तरह से कृष्ण भक्ति में हुआ उसके कुछ महीने के बाद मेरे भाई स्वास्थ्य से शायद कुछ दिन का उस समय का है जो महा था उसका चिलाविजप्राप्त हुआ कुछ और साथ रात हुए हमारा जी की सेवा के लिए बात यही है कि पाप की पुस्तकों के माध्यम से कुछ ना बढ़ते हुए हमारा परिक्रिय धन्य। 16 साल नाइंटी नाइनटी फाइन ने 6 बजे या जीने के लिए भगवत गीदन हाथ में आई भगवती और भाग कैसे से घर में आयी 1 बोरी वैसे कई उदार है तो आप सब भी दिखाए वो अभी लोग में रहते है बड़ा करते है तो आप सब माथियम बनिए और भमाजेगीतमेंकया है मेरा प्रचार करता है अकसर प्रचार करना बनना चाहते हो जाप करोगे ध्यान पूर्वक ध्यान करो जब का अर्थ क्या है? कौन जाएगा। 1 मना कौन समझाएगा ध्यान पूर्वक जब 16 करते हो और कुछ मत करो केवल जॉब करो सेल फोन को बंद कर। 2 क्या काम करना उसके विषय में मत सोचो जो हरे धान सी के द्वारा और लाभ उठा, साथ ही बड़ी कठिनाई से की है और आप प्राप्ति के छाते के संस के सारे भक्त लंदन को पढ़ें पढ़ने के बाद बुरी बनेबुीपनेगीतोबुधी। 1 होने से माता हर क्रिश, राम राम नाम।
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