हरे कृष्ण वाले केवल पैसा कमाना चाहते हैं | #I2D |Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī

Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī addresses claims that Hare Krishna devotees care only about money. He explains that fundraising supports printing and distributing sacred texts worldwide, not personal profit. The movement's real work is devotional service and spreading the Hare Krishna mantra globally.
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तो क्या कारण है। हमारे चारों ने इस पर चाय की सेवा पर बल दिया है। कई बार लोग हमें आरोप लगाते हैं। यह हर वाली के वल पैसा कमाना चाहते है। जी कहते थे के जब वो बॉम्बे में प्रेम पुरी में निवास कर रहे थे तो के प्रथम स्कैम के पहले 2 भाग छाप दिए थे। वो चीज से चंदा इकट्ठा कर रहे थे, सम्बन्ध में खेले थे, वो जा कर किताब बगदम बांट रहे थे। अनेक लाइबरी वहाँ स्वामी थे। ये कैसा सियासी है किताबें किताबें बांट रहे थे बार प्रभाजी शीुश्मंत्रीमनाजी के दफ्तर में गए के तीसरे भाग पर छापने के लिए शी मंत्री जी के सेक्रीन शी इज वेरी बिजी बोबरीवियस्तहैसम प्राबाजीने सोचा की कुमार ने शाम को घर तो इसी रास्ते से जाना है। तो पापाजी सीडी में बैठ गए 5 घंटे जॉब कर ले थे। कुछ घर जानी थी, उसने पापाजी को देखा और पूछा कौन स्वामी जी और स ये 5 घंटे के सियासी यहाँ बैठा है। आपको मिलने के लिए। ने जी बनाया और चंदा दिया। तो हमारे अचारियों ने प्रचार की सेवा पर इसलिए है क्यूँकि के मन में यह भाव है तो दाल हो, पर दुख दुखी युवैक्शनोभक्त है। वो चाहता है की सबका हाल हो। जैसे साथ में कहा है मुझे अपनी मुक्ति की चिंता नहीं मुझे ऊँची चिंता है। जो दुख की स्थिति को सूखी स्थिति में बनाने का प्रयास करते हैं। तो ये जो की सेवा है। और यह सेवा सेवा आप लोग रैली में नहीं कर रहे, वो सारे विश्व में कर रहे हैं। गेली शब्द है, अंतर्राष्ट्रीय शब्द बन गया हर भाषा में लोग मेरा धन तो प्रॉपटी से किसने पूछा क्या? अर्थ तो तुम कब कम खाओगे। तुम सगेऔरपरसालकरोगे तो धन है। सारे विश्व में बहुत कर लेते हैं। इन ग्रंथों में है भगवान का सन्देश, साथ में है महान चारियों का तात्पर्य। जब हम इन ग्रंथों को पढ़ते हैं, तुमारे हृदय में ध्यान जागृती उत्पन होती है। आज अगर इस काम के लाखों सारे देश में का 1 मूल कारण है इन ग्रंथों का पोता। लोग इन ग्रंथों को पढ़ते हैं, शिक्षक को अपनाते हैं, फिर देखते हैं उनका जीवन कैसे सुधर रहा है। तो ये जो ग्रंथों के वेतन की सेवा है, ये सेवाओं में सबसे महत्वपूर्ण सेवा है। बाजी ने कहा जब तक इन पदों का वेतन होगा, मैं हमेशा जीवित रहूँगा, क्यूकी इन के माध्यम से प्रचार कर रहे है और करते रहेंगे। आज हम सब का क्या करतवबनताहैहमसबर करते हुए। ये बनता है के है। हमारे भगवान और चाय के शिक्षक प्राप्ती ने हमें 1 से नहीं दिया इसके विषय में और हमारे चारियन से और बहुत बहुत दिया। तो हमारे भी उत्साह होना चाहिए। बात जीवन में आप देखते हो, भी में बड़ा उत्साह रहता है, घंटो में उत्साह रहता है। भगवान की शिक्षा को विदेशों में लोगों का बहुत कम ज्ञान है। तो उस बात में भी हजारों की संख्या में लोग ग्रंथ को पढ़ा रहे हैं। बापाजी ने कहा अगर तुम मुझे प्रसन करना चाहते हो और कई स्थान विषों के, या कि इसी के पहुंचने से पहले ग्रंथ पहुँच जाते हैं तो इन ग्रंथ में बहुत सी है। बापाजी ने कहा है, अगले 10 हजार सालो के लिए रोगी को पढ़ेंगे तो 10 हजार सालो के बाद माया इतना 11 हो जाएगा कि अगर आप का उच्चारन करोगे लोग हासिल करेंगे। हरे कृष्ण हरे किशन कृष्ण हरे हरे हरे हरे हरे हरे।
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