Initiation Lecture || Kanpur || 8 Dec 2021 || Śrīla Gopāl Kṛṣṇa Goswāmi

Śrīla Gopāl Kṛṣṇa Goswāmi explains nama diksha, the initiation into chanting divine names. Initiates must complete two years of practice, chant sixteen malas daily, and commit for four years. The lecture warns against ten nama aparadh, or name crimes, including criticizing other devotees and neglecting the guru's instructions.
Chapters
जो बुरी मार लगती है उससे की दे जाना हो तो a o sa दूसरा जन्म प्राप्त होता है क्या हम प्रमाण गुरु से हई नाम दीक्षा ग्रहण करते हैं और इस फिल्म को कहते हैं और हमारे सकल संस्था में हाई नाम दीक्षा जब जी जाती है तब किसी ने कम से कम 2 साल के लिए 16 माला किया हो और 4 का पालन किया है और करने की जिम्मेदारी लेता है। ये चारिम क्या है किसी प्रकार का मास नामचीन, किसी प्रकार का नशे की चीज जो नहीं और जो क्रिया सा आश्रम में है वो किया सास में रहे। सांसों के शिक्षा नियम के आधार पर पर्शिया। तो ये है दूसरा शर्मा और दूसरे जन्म के प्रसार सेवा करता है औ और तीसरे जन्म प्राप्त होता है जब उन्हें ब्राहमी दीक्षा प्राप्त होती है और ये दीक्षा जब दी जाती है जब किसी ने अच्छा अखबार रखा हो, शासी, शासी, ज्ञान, हु और कई साल को हो गया हो तो नाम माध्यम है कलयुग में भगत पर चेतन चेत्र प्रीत में कहा गया है बहुत जल में करें यदि a हम नाम जाब कर सकते हैं दिन रात, सालों साल पर अगर हम अपराधों से नहीं बचेंगे तो नाम का पूरा लाभ नहीं उठा सके तो हमारे संतों ने कहा है के 10 नाम अपराध है जिससे हमें बचना चाहिए और कोल के मंडल में इन अपराधों की चर्चा की जाती है रोज इसलिए ये बड़ा महत्वपूर्ण है हम इन अपराधों से बचे तो 10 नाम अपराध है। अपराध है उन भक्तों की निंदा करना जिन्होंने अपने जीवन अर्पण किया है। भगवान की सेवा में तो एशिया द्वेश से हमें बचना है और रशिया द्वेश के प्रभाव में आकर हम किसी वैश्या की निंदा करें यह माना है तो हमें ये शर्त वे से बचना है। और महा े कहा जिस प्रकार 1 सुंदर बगीचा उसमें हाथी आए तो क्या होता है बगीचा खराब हो जाता है। इसी प्रकार भक्ति का सुंदर बगीचा nsजएगarasयbgवan or log बड़े पर भक्तों ने अनुभव किया कभी वो अपनी माता से खुश नहीं है तो आप सब पर दया कर रहे हो अपनी माँ को दया क्यों नहीं उन्होंने अपराध किया है। क्या अपराध था उनका, उनके मन में थोड़ा दुख था। मेरे बड़े बेटे ने सन्यास लिया है, व छोड़े बेटा में सन्यास ले। और वो सोचती थी यह देता है कि मेरे दोनों बेटों को नेहा की तरह लिया तो भाग्य है। कहते थे माता भगवान की माँ है, वो अपराध कैसे कर सकती है। और 1 दिन जब मे छाया प्रणाम कर रहे थे, सी माता पीछे से आई, उनके चरणों की धूल लेकर अपने माथे पर लगाया और महाप्रोम ने कहा आप में माता को भगवत प्रेम प्राप्त होगा। क्या बोले पता लिया पाल के तो ये उदाहरण दिया जाता है। यह बताने के लिए महाब इतना गहरा महत्व दिया कि बोला माताजी का उदाहरण दिखाया। भक्तों से हमें बचना 1 ब्राहमण थे जिनके मन में हो शिव के प्रति चीजें रोज, समपृदनकरतेथेशिरवाज के घर में, तो बरामनेक्ागयाशिववाज के घर के सामने, दरवाजे के सामने, शराब और दुर्गा जी की पूजा का सम्मानक दिया। मात हो गया ा तो गो अगले दिन सुबह जब शी वाज से घर का दरवाजा खोल लगा। शराब की बोटल मास दुर्गा जी देखो पडोसी में दुर्गा का भक्त हूँ कृष्ण का भक्त है। किस ने विश्वास नहीं किया। परिणाम इस ब्राह्मण को कोर की बीमारी हो गयी और ये बीमारी ब्राहमण को तो देवताओं को हर भगवान के समान समझना या के बराबर हमारे गया है। हमने अभी ब्रह्म संविदा का उच्चारन किया था। esraprmakshna राधे राधे को इस कॉलम के आने से पहले हम सब का क्या था विचार सारे देवता देवी और बिजी 1 ही होगा। और जब हम इस कॉल में आते हो तो हम देखते हो। यहाँ तो कहा जा केवल कृष्ण, कृष्ण और देवधकोइतनाआदरही दिया जाता को पूरा आदर दिया जाता है जो देवता देवी वो भी स्वीकार करते हैं। krishna भगवान s to krishn bagan कौन है उनके den n o to पढ़ते हो कार पेड़ के जड़ में पानी डालो तो पूरे विक्षपे उनका प्रभाव आ जाता है। तो इसलिए हमें यह नहीं सोचना चाहिए भगवान व मन में यह विश्वास होना चाहिए कि कृष्ण भक्ति के द्वारा हम सारे देव देवियों को भी परेशान कर रहे है। तो ये बहुत आवश्यक है। तो हम सब पले हैं इस वातल में कि सब भगवान ae तो हम सब पहले इस वaतlमेyusbag तीसरा अपराध है गुरु हो गया। यह गुरु के आदेश का पालन न करना। शास में कहा जाता है कि हमें माने गुरु की वाले गुरु के विषय में रूपगामेकहतेहैं कर वाली गुरु है। गुण की इच्छा का है की ruchi rucisaसबे r to do e a, e a e a bra। श्रीमद भागता में प्रवाह कहते हैं कि 3 प्रकार के शिष्य होते हैं। यह 1 शिष्य है जो जानता है। गुरु की क्या, इच्छा और बोले फिगर वो नियमों का पालन करता है। दूसरी श्रेणी का शिष्य है जो कि जिसे गुरु आदेश देता है, उपदेश देता है, छोलमालाकरोयेगरव और उसका पालन वो करता है। और तीसरे सीन है चाहे आप कितना भी बोलो करेगा, वही जो मन में है। तो प्रभाजी कहते हैं यह हमारे ऊपर निर्भर है। आप कौन सी श्रेली में जाना हो? और गुरु की इच्छा शादसोंकाप्रचार। तो शिष्य को यह नही सोचना सोचना कि गुरु जी हमारी सब बात माने गये, गुरु जी कोई समझ नहीं आया। क्या हूँ। इस प्रकार से नुक्स निकालना अपराध है। प्रापर दौड़ता हुआ, घोड़ा, घास नहीं गा सकता। दौर। तो हम सोचेंगे गुरु के संदेश को हम समझ गए हैं। मनमानी कार्य करें तो उसे आराम का लाभ नहीं पहुंचेगा चौथा। नाम अपराध है। वेदिक शासकों में पूरा विश्वास करना। ये जो वेदिक शास, उनकी रचना किसने की है। परम भगवान ने किया ये जो वेदिक शास्र है, ये भगवान की मारी, सनातन धर्म, सनातन शिक्षा और हम अगर सोचे। अब हम आधुनिक युग में आ गए है कि हाँ वेदिक शास्त्रो में कोई साल, कोई साली, वेदिक शाधना संदेश, सनातन है। परवाज ये साबित किया कि इस आधुनिक युग में भी इस ज्ञान का लाभ उठा सकते हैं। आज विश्व के हर कोल में लोग इन ग्रंथों को पढ़ रहे हैं। फिर यह सोचा कि यह नाम की जो महिमा है, यह कल्पना है? हम सोचें आई, नाम इतनी शक्ति नहीं हो सकती। हमें दूसरे मंत्रों की भी आवश्यकता है। यह महान अपराध है। हम कहते हैं सोहा माना करो। जब प्रॉपर ने पैदा केंद्र खोला था, न्यू यॉर्क में भक्तों को चौसठ मना करने के आदेश दिया, उन दिन में को 24 मना नहीं। तो फिर प्रबल का शोला तो हम भी न सोचे। bhagwat gita oudated bagwat, udit a pure chalti hai na का हरकारा तो हमें यह नहीं सोचना चाहिए। यह हरी राम इतनी शक्ति नहीं है। हमे शहर दूसरे बंदर का भी उच्चारन करता है। दिखावा के लिए हरीराम करेंगे डी, जो दूसरे बंद, हरी राम की महिमा का वर्णन है। ये प्रामानिक है और यह के आधार पर है। अररामगिजाकेबलपर अपराध करना हम सोचते है। वही दिशा हो गई, दीक्षा हो गई। और अब हम अपराध भी करेंगे। भगवान को माफ करना ही पड़ेगा। भाग का भाव यह रहता है कि हम किसी भी पकार का अपराध नहीं करें। 1 समय परावाक् दीक्षा देते हुए जब मादा देते हुए उन्होंने कहा आप और कोई अपराध नहीं है, तो दीक्षा का लाभ जब होगा तो हम अपराधों से भी बचे। और इसलिए इस कान संस्था में आपको 2345 साल देनी पढ़ती है। शिक्षा पर क्यों प्रावबाजीचाहते थे, चाहते हैं कि आप पूरे सिद्धांत को हम शिक्षा का महत्व क्या है? और हरि नाम के जाप के बल पर यह नहीं सोच रहा हूँ। वही शिक्षा किसी रात माधव के स max हुई थी। और हम अपराध करेंगे भी भगवान को माफ करना पड़ेगा। यह बड़ा अपराध है, इसे अपराध नहीं करे। ये बुदिमान व्यक्ति का अगला, ये जो शास्तिक ज्ञान है, ये कोई इसी प्रकार का कर्माकर नहीं है। और हमें यही सोचना चाहिए। इसका आज को साल रही। हमें अपराधों से बचने का प्रयास करे। मा होने का है या उसे क्या करो? कृष्ण का उपदेश। 2 तो हम हम आराम से सब को सुना दे। नाम में जाते हजारों लोग सुनते हैं अर्थ हमें सिखाना चाहिए कि में ये विश्वास हो, जबकि मारा ध्यारविज्ञान, बढ़ जाए और बौधिक उनका भक्ति में आते हैं। हमें यह सूचना मिलती है, यह अनुकूल है, यह प्रतिकुल है। हम शिक्षा के पश्चात। यह सोचें ठीक है। रिक्शा ले ली। और जो बौद्धिक आकर्षण, हम रखेंगे क्या परिणाम होगा। पूरा लाभ नहीं उठा सकोगे। आप दिक्षा हो गई। हमने कभी कभी फिल्म में भी जाना है, कभी कभी क्रिकेट मैच भी देख रहा है। यह वैसे की काट आई। महाभ्रम ने कहा, सदा स्वामी को शिक्षा देते हुए पहला नियम है भक्ति के लिए जो अनुकूल है, उसे स्वीकार करना। भक्ति के लिए जो प्रतिकूल है या और रूपा को। स्वामी ने कहा, हे मेरे मित्र, जो कीमत भी तुम्हे भरना पड़े भर। पर कृष्ण भक्ति को हाल से मन। तो के पश्चात में यह भक्ति का बीज प्राप्त होता है। परम कुल, कृष्ण, पाल, भक्ति, लता, बीज, भक्ति, ज्ञान और महिमा, ये ज्ञान मिलता है। तो हमें बकैदा शाह अध्ययन करना चाहिए। दसवीं अपराध का 1 और अर्थ है ध्यान पूर्वक आय नाम का जाब करना, भगवान के नाम में राम जीरामकृष्ण दिन पूर्ण नीति मुक्त तो भगवान अपने नाम से तो आप 16 मना का कोटा करते हो। हमारा क्या प्रयास है ा यह प्रयास पूरे आदर के साथ इसका उ्चालनकरेयहनहीं की। 1 तरफ से माना करें दूसरी तरफ से हम और कार्य करे। जितने ध्यान से आप माना का जॉब करोगे, उतनी तेजी के साथ हृदय की मैल दूर होगी और तेजी के साथ भक्ति के मार्ग में आगे बढ़ पाओगे। तो हमें नियमित रूप से क्या करना चाहिए, जान प्रभाग जॉब करना चाहिए। ध्यान से करोगे जब तो हृदय की मैल जल्दी निकलेगी साथ में शासन का अध्ययन। जैसे कि आप कई बार सुन बैठे हो। बजेगा हमारा यह कर केवल नहीं है। हम ग्रंथों को वाले हमें इनका अध्यन करना अध्ययन करोगे तो क्या परिणाम होगा? भगवान देखते हैं ये भक्त मुझे बजने के लिए देश का ध्यान कर रहा है। भगवान आपको बुद्धि देते हैं, इसके द्वारा आपकी बुद्धि और तेज हो जाए। तो भक्ति के मार्ग में हमें अनेक नियमों का पालन करना पड़ पड़ता है। और यह है वही भलाई के लिए तो यह उम्मीद है कि आप सब जो आज नाम रिक्शा ले रहे हो, इसे बड़ी गंभीरता से स्वीकार करोगे और जितनी गंभीरता से कार्य करोगे। नहीं लाभ होगा। तो शिशिर प्रभु जी की शादी के भारतवासी ने संस्कृति को या क्या क्यों कि भारत भूमि जन्म ले, उसे क्या करना चाहिए? धान। और तो इस अंदोलन की बड़ी जिम्मेदारी है। सबको दिव्य ज्ञान दिया जाए। हमें कैदा शासकों को पढ़ना चाहिए और प्रचार के कार्य में जोड़ना चाहिए। और ये जो भक्ति के नियम हैं, उनका पालन करना चाहेगा रूपगसमीकहते हैं। भक्तों के बीच में 6 प्रकार के संबंध हो सकते। 1 दादी जो आपके मन में विचार है, उसे ज्यादा उत्तम। भक्त के सुनाओ, उसका लाभ है तो हम उसके देश का पालन करोगे। कई बार हमारे मन में डाउट आ जाता है, ये कही नहीं करे। वह हम किसी से पूछते नहीं है। क्या परिणाम होता है से हमारी भर्ती कम हो जाती है। हमारा प्रयास होना चाहिए, हम भक्तों की संगत में रहे। जीत से श्लोक में क्या कहा गया? शादी संघर्ष शादी, सर्वे शाधुलावामात्र संघर्ष लावा। मात्र 1 सेकंड का बारबार हिस्सा के लिए भी अगर आपको किसी वक्त की संगत मिले, शुरुआती आपका जीवन आगे बढ़ सकता है। तो प्रभा जी ने हमें शुद्ध संदेश दिया है, इसका हमें लाभ उठाना है, ना चाहिए और आप प्रयास करोगे। भगवान से युद्ध के रापद crisnaisnेnsेp आप 1 कदम उठाओ, न होने के लिए भगवान 10 कदम उठायेंगे। तो हमें गंभीरता के साथ इस शिक्षा को स्वीकार करना चाहिए। कई संस्था में आपको 1 मिनट में शिक्षा मिल जाती है। अंदर जाओ जाओ और आप देखते हो। कई परीक्षाओ बैठना पड़ता है। हमें सिधार संभलना चाहिए और सिला समझेंगे ज्यादा से ली इसका पालन करे है। और बैठना 3 प्रकार के भक्त होते हैं आप से उत्तम, भक्त संगन रावण की और आप से हम याद रखते हैं। उत्तम कोटी की भक्ति, उनकी संगन मिले व शन बन जाते है। बराबर की संगत मिले। तो हम क्या करते हैं? क्या करते हैं विचा का भाव, विजेता का भाव 1 साथ मिलकर वान की सेवा करते हैं और आप से हम ज्ञान का व्यक्ति मिले। तो क्या करते हैं? हम क्या करते हैं? दया की भावना को प्रकट करते हैं। तो शासन का अध्यन और जो घर में रहते हैं उन्हें ऑल्टर बनाना चाहिए। आप तस्वीर रखी, मर्जी की वजह और हमें मंगलाजी जैज मंदरमें होती है। सारे 4 बजे तक आप सारे जनवरी नहीं कर सकते तो आप 5 भी कर सकते है। ये जो प्राथना है सम सरदाबनाललोगाथुलसी पूजा के आर्थिक हमे रोज करना चाहिए। और अगर हम इन भक्ति की विधियों का पालन करेंगे, क्या लाभ होगा हम भक्ति के मार्ग में आगे बढ़े होंगे। चीन के प्रमाण दे की जमा, यह दूर हो जाएगी। सब लगनोयासासे और 1 साल से आई हो। आप सब से निवेदन है कि इस शिक्षा को गंभीरता से स्वीकार कीजिए। on all of them, as to me i o को यदि मात्रा में कोई फिशर में आता है, उसी मास सुरक्षा करता। आप 5 पर्सेंट सिलेंडर करोगे भगवान को वो आपको 5 पर्सेंट प्रोडक्शन रहेगा, अब 80 पर्सेंट करोगे, 80 पर्सेंट प्रोडक्शन मिलेगा। तो ये नहीं सोचना कुछ भी करेंगे, भगवान सुरक्षा करेंगे, वन सुरक्षा करेंगे। भगवान क्या कह रहे है सर्व धर्म परित्या आम समसा। तो आप सब से यह निवेदन है। भक्ति की पिधीवनकापालन की ब्रह्म दीक्षा दी जाती है। जहा किसी ने भक्ति शासी का कोर्स किया और जिसे प्रकट किया है उनका अच्छा व्यवहार ब्राह्मण के विषय में बाबर। अंधेरा योग चा, रमण में गुण हो ले चतुर। महणामयािस्टम गुणों के आधार पर यह निर्णय किया जाता है। क्या क्या ब्राहमण नहीं ब्राहमण कुल में जन्म लिया है। हम ये सोचें कि हम भी बुरा मन। ब्राहमण के गोल भगत गीता में ग्रामों के गुरु का वर्णन है। उन्हें शांत होना चाहिए, तपस्या का पालन होना चाहिए, ज्ञान होना चाहिए, ज्ञान का पालन की होना चाहि। और ग्रामीण को तीसरा तीसरा जन माना जाता है। और तीसरे जन्म में जो पुरुष है उन्हें जेनू दिया जा रहा है। तो जो ग्रामीण शिक्षा ले रहे हैं, उन्हें असली ब्राह्मण बनना चाहिए। हमारे परम गुरु का तीसरे पहले महान चाडिया थे, जिन्होंने शासन के आधार पर समाज में स्थापित किया। व्यक्तिगत ब्राहमण मंत्र, वेज क्वालिफिकेशन तो ब्रावर ली, बराबर बने राम ब्राह्मण और जो ब्राह्मण शिक्षा लेते हैं उन्हें ये सुविधा प्राप्त होती है। भगवान के आज विग्रह की पूजा कर सकते हैं, श्रंगार कर सकते हैं। तो जो ग्राम शिक्षा दे रहे हैं, उन्हें इसका उपयोग करने से हमारी सेवा में कैदा। शासन का अध्ययन भी आज कल के गर्म योग्यता है। ने शासन की। श्री साधनों का ज्ञान भी बढ़ाते जाना चाहि। आज इस गन में अधिक एजुकेशन प्रोग्राम चल रहे हैं ुडीिसकॉलऑलवरwor सो मेनी एजुकेशनल प्रोग्राम and we can subscribe to this program ऑनलाइन and i। तो आप सब से निवेदन है क्या इस ज्ञान को अनुकूल कीजिये और इसका पालन कीजिए वो ज्ञान बढ़ेगा मेरा क्या भी कुछ पसंद ये उम्मीद की जा रही है जो ब्राहमण दीक्षा ले रहे हैं नवल टेक सीरियसली नाम के ब्राह्मण नहीं हमें ब्राह्मण बना है गुणों के आधाार पर, तो जो ब्राहमण बन चुके हैं ब्राहमण दिशा देने की उम्मीद करते हैं डुक्शोरलेरहेहै उनसे अपने निवेदन है हमें असली ब्राह्मण बन जाए तो ये उम्मीद है आप सब अवसर पर शिक्षा ले रहे हो अपने अपनी जिम्मेदारी समझ ये जो 4 नियम है यह है भक्ति के खम्बे जब हम इनका पालन करते हैं, इसके द्वारा हम बकती में आगे बढ़ते हैं और कई बार खुले में आता है कार में तो बहुत सारे बंधन है नियम, नियम है, नियम है, शाह बढ़ता है। so we hope that to taking niciaintodawill take the responsible, ty seriously and a a a a a devotion preserve a make a a an, जो baci कुछ a door so please take island widen। थोड़ी सी कमी i we thaklefo home you the story on the sparrow and tried dri want me he cut bakicolas। तियारोचानिमउनका पालन होगा दीक्षा का लाभ उठाओगे, जब मना ध्यान पूर्वक हो सकता है, शासक पढोगे लक्ष्य है विनम्रा a a a a a a a देश का दाग बाबा प्रकट करो को, अगर हम प्रयास करेंगे और ना तो भी हम।
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