इस व्याख्यान में गोपाला कृष्ण गोस्वामी यह स्पष्ट करते हैं कि सभी जीवों को भगवान की दया और अनुग्रह से अपने वर्तमान आश्रम में ही सफल जीवन जीने का अवसर मिलता है। वे भय की भावना को संबोधित करते हैं—कि भक्ति के मार्ग पर चलने के लिये संसार को त्यागना कठिन लग सकता है, परन्तु एक बार प्रयास करने पर यह सरल हो जाता है। वक्ता स्मरण और भूलने की दोहरी बुद्धि की बात करते हैं: भगवान ने मनुष्य को स्मरण करने की शक्ति दी है जिससे वह भक्तों के संग जुड़ सके, तथा भूलने की शक्ति भी दी है जिससे वह भगवान को भूलने की इच्छा रखने वाले को अलग कर सके। वे भगवान की सर्वव्यापी उपस्थिति को रेखांकित करते हैं—एक ही समय में कई स्थानों में उपस्थित रहना, और इस बात को उदाहरणों से स्पष्ट करते हैं, जैसे कि कृष्ण ने एक पहाड़ को एक छोटी उंगली की शक्ति से उठाया। अंत में वे भगवद् गीता के वास्तविक उद्देश्य को बताते हैं—वह ज्ञान जो भौतिक कर्मों के फल को नष्ट कर आत्मा को मुक्त करता है, और इस ज्ञान को प्राप्त करने के लिये चार नियमों का पालन, जप, और सतत स्मरण आवश्यक है।
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चाहे आप जारी हो या ग्रिहास्ता हो, आप चेतना महान प्रभु जी की दया के कारण जिस आश्रम में हो उस आश्रम में रहते हुए अपने जीवन को सफल बना सकते है। कई बार लोगों के मन में भय रहता है क्या की अगर हम शब्दों की संगत प्राप्त करेंगे, अगर हम हार्दिक भाग में प्रवेश करेंगे तो हमें उनके समान संसार त्यागना पड़ेगा और फिर यह तो बहुत ही कठिन मार्ग है। दूर से कठिन दिखता है और 1 बार आप निकल जाओ तो सरल बन जाता है दूर से जब पहली बार सुनते हो या माला का जाप करना है। 4 नियम का पालन करना वगैरह ये विचार आता है कि इन चीजों के बिग हम रहेंगे कैसे बचपन से 10 कब चाय पीते आये हो बचपन से ये सब चीजे करते आये तो आपको जब देश दिया जाता है इन चीजों से बचना चाहिए। मन कहता है हम कैसे बचे इन चीजों से विचार तो आता है पर जब आप प्रयास करते हो भगवान की शिक्षा का पालन करने के लिए तो भगवान जो आपके हृदय में विराजमान है ये आपको नहीं भूलना चाहिए की भगवान हर व्यक्ति हर प्राणी मात्र के हृदय में विराजमान है किस रूप में, परमात्मा के रूप में और पल महात्मा के रूप में भगवान क्या कर रहे हैं साल बच्चे, चाहे, हिरदीसारीविष, स्मृति, ज्ञान, अपभानमचाहअपानस्मिति वो हमें स्मिति की शक्ति भी दे रहे हैं और अपान उनको भूलने की शक्ति भी दे रहे हैं। जो व्यक्ति भगवान को भूलना चाहे तो भगवान ने ऐसी बुद्धि देते हैं की वो बड़ी आसानी से भूल जाए और जो उनका स्मरण करना चाहे तो उनको ऐसी बुद्धि देते हैं की वो स्मरण कर पाए। जो स्मरण करना चाहे उनको तो बुद्धि देते हैं की वो भक्तों के संग में आ जाए, किसी न किसी प्रकार से उनका परिचय हो जाए गीता के असली उद्देश्य के साथ और जो भूलना चाहिए भगवान को उनको भगवान वैसे संगम में भेज देते हैं। यहाँ के केवल सबकी दिलचस्पी करो लोग मतसरत्याधिकारियो में है काम तो हृदय में क्योंकि भगवान विराजमान हैं वो हम सबकी इच्छाओं को समझ लेते हैं। भगवान के लिए कोई कार्य सम्भव नहीं है। आप 1 जगह, 1 स्थान नहीं रह सकते हो और भगवान 1 ही समय हर स्थान में रह सकते हैं। जब भगवान श्री कृष्ण इस पृथ्वी पर थे हाँ सदर जिला थोड़ी प्रकट की उन्होंने धीरे ली क्यूँकि उन्हें पता था कि भविष्य में अनेक व्यक्ति दावा करेंगे क्या हम भगवान क्या बता रहे है तो उनकी परीक्षा लेंगे कैसे? 1 सरल प्रश्न पूछ कर बस प्रश्न आप इंडिया में बैठते हो तो आपको लंबा क्वेस्टन वगैरह मिलता है 20 क्वेश्चन 25 क्वेश्चन सिर और 1 क्वेश्चन आप क्या भगवान की दिव्य लीला जो उन्होंने प्रकट की उसकी तुलना कर सकते हो पर जो हम गोदान का परिक्रम करते मोटर में तो मोटर में ही परिक्रम करते करते है में लग गया कितना समय कोई 40 मिनट 50 मिनट मोटर में पैदल जाओ तो 6 घंटे 7, 22 किलोमीटर और भगवान ने उठाया उसे बड़ी सरलता के साथ बाएं हाथ की छोटी उमर के नाखून की शक्ती पर और जब भगवान ने गोलदार उठाया, इंदल देवता बहुत पूरित थे। 1 दम देवियों में कई बार क्रोध आ जाता है भगवान में कभी किसी प्रकार का दोष प्रकट भी होता भगवान श्री कृष्ण ने की भगवान को साधारण पुरुष भगवान तो उनके द्वारा जो हमें ज्ञान प्राप्त होता है उस ज्ञान कौन में बड़ी सावधानी के साथ और ये असली ज्ञान है यह ज्ञान जैसा की इस लोक में बताया गया है यह ज्ञान के द्वारा ही भौतिक कर्मों के समस्त फलो को हम जला सकते है।