वास्तविक आध्यात्मिक गुरु को कैसे पहचाने ?|| ISKCON Ahmedabad || Śrīla Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī Maharaja

In this extensive devotional discourse, Śrīla Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī Maharaja (recorded at ISKCON Ahmedabad) explains how to recognize a genuine spiritual guru and outlines the proper attitude and conduct of a disciple. He emphasizes that a true guru is identified by humility, selfless service (seva), adherence to scriptural teachings, and the ability to guide disciples toward surrender and spiritual progress. The lecture weaves together concepts of three types of births (shokar, sadharana, and divine birth), the importance of chanting the holy names, and the necessity of following the guru’s instructions without blind superstition. He warns against false gurus who seek personal gain, describing signs such as lack of humility, emphasis on material benefits, and deviation from Vedic principles. Practical guidance is given on how disciples should approach the guru: first respect the guru, then serve, then receive instruction, and finally ask what sacrifices are needed for advancement. The talk also touches on the role of community (sangha), the significance of maintaining purity in conduct, and the need for continuous study of scriptures. Throughout, the speaker uses a devotional, persuasive tone, urging listeners to cultivate reverence, humility, and sincere devotion to the divine.
Chapters
होम ज्ञान तुम्हें दासु ज्ञान जना चलक्या। चक्षिन दन्येन अस्माई श्री ग्रावेनमाः। श्री चेतान्या मनो वेस्तां तावदामेन भूत्वे अजम्रुपाखला। جائے شیخ کریشنا، شیخ کریشنا، اولیاء کریشنا، اولیاء کریشنا، ہلے کریشنا، ہلے کریشنا، ہلے کریشنا، ہلے کریشنا، अभी यस्मादी लेना ब्रह्मों ने कहा ये महाज का function है ये मिरा function नहीं है ये इस कौन का function है और इस में हम सब सेवा करते हैं कोई सेवा करता है किस position में कोई किसे और position में कोई present जीविसी नहीं हो सके और कोई गुरु के कितारें सिर्था करता है पर इस संथा में सब का मून भाव होना चाहिए कि जो सिख्षा प्रापा जी लिये है उसका उपनान उसके आग्या पुराद है हम कहते हैं अच्छर गुरु की प्रस्थितिस्था ध्यान से देखा जाये یہ ہیں بھگوان کی پسند. ہم کہتے ہیں گروہ کو خوش کرنا, گروہ کو پسند کرنا. اوہ ادھارنے کے لئے پاپا جی نے کیا کہا? ہر کار یہ پاپا جی کا تھا کشنہ کی خوشکی کے لئے. جیسے کی ہمیں اس خوشک پر بھال لیتے ہیں گرانتال آدھیاں اور گرانتال آباد سے. ہم کہتے ہیں, Prabha's books. प्रावेद की कताओं में हैं क्या? किष्ण मगवाण की प्रसंसा हैं की नहीं? आम या में देखोंगे, प्रावेद जी आपकी प्रसंसा करते हैं. प्रावेद जी कहते हैं, सर्वकृष्ण, जी गंध में हैं क्या? कि کیونکہ जानसी दुल्या वो यही चाता है। तो प्रिशल भमान की शनंद में उनका नाम लें, उनके उपदेश का द्यान करें, उनके उपदेश पर आजिव बड़ा। तो इस, इस कहन संस्तान का मूलभाव यही है। शात में कहा जाता है, کہ ادھیارنے کو ننٹی کے لیے ہمیں ہماری گروہ کی شرن نہیں دیجائے. تو اِس بشیر میں جو پاکستان میں کہتے ہیں وہاں چو بیگا منسا کرودہ بیگا جیوہ بیگا مدارت پتہ بیگا. وہ بیگتی ہے جو ناری نبات سکتا ہے. جس نے منا پدی پھر پھر پھرش کیا. اور گروہ کا پھرش کیا پہنچا. جیسے ایک پوچھ میں آپ کے گھر میں چھٹی پوچھا دیتا ہے آپ نے بھاہوں میں جھوڑے پناہ اسی پرکار جو بھگوان کا سندش ہے جو پھر پھر میں آنا ہے اسی کو واپس دیں گا۔ مدھارن کے لیے شیف پروپا جی نے ہمیں ایسا کوئی امدیش نہیں دیا तो शास्थ चेतने माँखों ने कहा सुनाति प्रस्वामि से, पहले कदम में गुरू की शरल लो, दूसे कदम में गुरू की सेवा करो, तीसे कदम में दिक्षा लो, और आगे پوچھو गुरू से हमें क्या त्यागना चाहिए अध्यादिक उनुति करने के लिए जैसे की महानद्वाक और मीटी चीज़ों का टेस्ट है आपका डाइबीदी नहीं पजाएगी मीटी चीज़ों चोड़ने पड़ेगी तो पूछो गुरू से क्या त्यागना वेर आराग वच्चोना भी पड़े। विच्चोना भी पड़े। श्रीमन धागवतन को चौते स्कल्म में नाद हमोनी ने प्रचेदस को भक्ति के विशे का ज्यान दिया। और नाद हमोनी को प्रचेदस पर सिख्ष लेते हुए, नाद हमोनी सब को सनाई दे रहा है प ہاں؟ سمجھ بھی آرہا ہے؟ کئی بار سُنائی دیتا ہے اور کیلئے بھی سمجھ نہیں آتا ہے۔ سمجھ آرہا ہے؟ آرہا ہے۔ दनद मुणी ने प्रचीत्र سے कहा कि सुभाविक व्यक्ति के तीन प्रकार के जनव होते हैं या तीन जनव होते हैं. फेला जनव प्राप्त होता है जब आप माता के दर्व से जनम देते हैं और इस जनम को शोक्र जनम कहा जाता है शोक्र का अर्थ है वीर्य स्की में और शोक्र जनम पशुभी प्राख करते हैं और मनुष्वी पशुभी जनम प्राख करके जीवन समाम्चरना कोई बड़ी चीज़ नहीं दूसर जनम प्राप्त होता है आपको, चाहो हरी नाम दिक्षा गरहें करते हों। और आच्छे दिक्षा प्रोग्रम में नहीं अपना दूसर जनम प्राप्त करने हैं। और ये दूसर जनम कहा जाता है सवित्र जनम। क्योंकि आपको दूसर जनम है, اِس افصل پر آپ کو اتنی آدمی نام بھی ملتا ہے جس کے ساتھ داس اور داسی جوڑا جاتا ہے جس کا یہ ارض رہتا ہے ہم بھگوان کے سیوک ہیں وہ سیوک رہیں گے یہاں سیوک ہیں کہاں ہم بھگوان پڑھنے چاہیے وہ तीसा जनम प्रात होता है जब हम ब्राणे दिख्षा या ग्याति मंद्ध के दिख्षा शुकार करते हैं और इस दिख्षा को कहा जाता है जिव्गी का जिख्षा बच्चों को भार करो तो तीसा जनम प्रात होता है जब हम ब्राणे का दिख्षा लेते हैं तीसे जनन को कहा जाता है यगी का जन्म और तीसे जनन की प्राप्ति के पच्चार आप ठाकु जी का शिंघा कर सकते हो आन्थी कर सकते हो भोग बना सकते हो ये त्यादी इसको संसा में हर नाम दिख्षा दिजाती है तो क्याम से कम दो साल के लिए ہم نے سولہ مالہ کا جاک کیا ہو ساتھ میں ہم جمع داری اٹھاتے ہیں چانڈیوں کے پالن یہ چانڈیوں کا پالن جب ہو پھر بھکتی کے کھمبے بن جاتے ہیں جب ہم پالن نہیں کریں تو وہ پاپ کی کھمبے بن جاتے ہیں چانڈیوں کیا ہیں کسی طرح کا ماشاں نہ مچھلیں پیانچ نسل میں نہیں. ان سے کام سے گھاہ پڑتا ہے. کسی وقت کا جوہ نہیں. نشے کے چیز نہیں. شراب، چائے کافی بھی نہیں. ہمارے بھائی بھائی میں ملتے ہیں کہتے ہیں. چائے بھی نہیں پیتے تو لوگ. پھر جیتے کیسے ہو؟ پڑھیں احسان ہی چکیتے ہیں. چائے کافی میں بھی. اور اگر آپ ریاستہ آشنا میں ہو پتی پتی رہتے ہو تو ہمیں شاستہ کے سکھشہ کے نصرہ ریاستہ آشنا میں رہنا چاہئے نہیں تو اپنی ہبیلی میں مستیدی بن جاتی ہے ساتھ میں ہمیں نام امراضوں سے بچنا چاہئے بھاو جنما کھڑے یدی شہوڑا کتنا प्रभुतन पल रे पाए। कृष्ण जीवन जनन। आप अनीक चन्मों में हैं। हैं नाम ले दे जाओ। अगर आप जस नाम पालं से नहीं बचोगे, तो हैं नाम को पुरा लाव भी मिलेगा। हैं नाम को लाव तो मिलेगा है। एक स्रावी भी है। एक स्रावी भी � ہمیں نام چاہئے جس کی دوارہ آپ اتحادی موجودی کر سکو اور اس کے لیے آپ کو اپرادوں سے بچنا چاہئے۔ دس نام اپراد ہیں یہ اپراد بڑے مہتر پون ہیں اس لیے اسکون کے ہر کیندھر میں روز صبح آراتی کے پسچا ان اپرادوں کا اچاند ہوتا ہے۔ हरा नामप्राद है।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।। کہ विश्णा प्राथ प्राभ्यांदर परिजाओं होता हैं। सरी जिन्दिमान्तोगों ने कहा, जिस पकार एक पागल हाथी के आने से सुन्दर बगी करने सुझाता हैं। विश्णा प्राथ से बगी का बगी करने सुझाता हैं। हमें इरिशा और अलोजना से बजना चाहिए� अगर हम कोई कमी देखते हैं तो आधर और भुलुम्न सत्व के साथ सुना सकते हैं. पर इश्वाद वेश से बचना हैं. दूसरे नाम अपरत क्या है? माँ पताएगा? यह सोचता है कि देव सब भर मह्वान एक समान है. ہندو سماج میں ہم سب پھلتے ہیں ایک سکھشا کے ساتھ سب بھگوان ایک ہیں جس کیوں بھی تو عباس نہ کرنا چاہتے رہو یہ نہیں کی پریداب ہوگا آپ نے اگر یہاں سے ممبے جانا ہے تھیک ہائیوے پہ جاؤگے تو وہ پہنچ سکے یہ نہیں کی کوئی بھی سرک پکڑ لو وہ پہ پہنچ جاؤگے वो जब आप इस खर में आते हो तो सुनते हो अरे कृषिन महमान परमहमान है आगी सब देवता देवी का है शास्थ में कहा क्या है 36 क्रोर देवता देवी हैं तो देवता वो देवी को है भगवान के आधिहीन हैं मुझे सोतन्त नहीं उनके समझ में ही ये हमें नह اگر ہمیں بند میں یہ شکہ ہو کہیں دیر سا ہمارے پیروزیں تو نہیں ہو رہے. ہم نے اُپاسنا ہمارے پیروزیں. اس وقت کی چندہ کی آبشکت نہیں ہے. جہاں دہونی کہتے ہیں. جس وقت پیڑ کے جڑڑے پانی ناندے سے پورے بڑھچ میں اُس کا پھربھاپ پھیل جاتا ہے. کریشنگ کی بھکتی سوالہ आप सब देवताव देवियों, सब के प्रतीज आपका अभार चुका रहे हो. तो हमें बिना हिच्के होए, फूरी शर्दा के साथ पिष्ण मुमान किये, शर्ण का थुनना चाहिए. आगे ईसा नाम अभ्राद, गुरु की अवग्या कर रहे हैं, असे सदाने में किसी मुझें जैसे हमने कहा गुरु केवड़े का दिखाते हैं कोई जादुगर्ण नहीं है और कोई चबतकार वगरा नहीं दिखाते हैं और गुरु का करते हैं क्या मनता है आचन सुर्दर्खे और यतरू संदेश खाके पुरचार करें गुरु के इच्छा क्या है ये इच्छा है ये सिश्य का भाव और स्वर्धा कृष्ण के पती बड़े हैंना में रूची बड़े शास्त में रूची बड़े विनम्रत का भाव अनुपूल हो ये नहीं कि सिश्यों को पेड़ना दें अब अनुपूल नहीं है सिश्यों में विनम्रत का भाव विनम्रत का भाव मतलब है सब भक्तों के दास ये नहीं जेवल हम गुरु की सेवा करेंगे बागियों मेशनों की हमें तलरी नहीं हैं. ये हम प्रहाद हैं. हमें सब सुभाईशनों के प्रती सेवा भाव होना चाहें. और विनुनता का भाव होना चाहें. इसकार में कही सीना प्रचार र सब को हमें आंदर दे रचे हैं सब के प्रती शेवा भाव हो रचे हैं और गुरु का भाव क्या है सब शननत होकर बगवान के धाम को लगें बगवान के अंदर उनको आगे पढ़ा रहे हैं कभी-कभी प्रिस्थिश्य में ये भाव आता है अब सब मुझे किसी प्र प्राभाजी ने इस विश्ये पार एक उधारन दिया था प्राभाजी ने कहा गोड़ा जो दोड़ रहा है वो धास नहीं खा सकता तो है न हम सोचे गी अब हमने सब कुछ सीख लिया है और कुछ स्वियों की अपशर्च नहीं ने महान प्राभाजी और अनेंग व्यक्तिया को सिख्षा देते हैं। कई दिक्षा और सिख्षा जोड़ों देते हैं। सब को प्रदियादना जमभाव हैं। यहाँ समधी नना प्रभुवाप गुर्गात के चार्च में हैं। 30-45 सालों से वह बहुत सबको सिख्षा दे रहे हैं। उनको भी पु जब महराज चेति में महा पभुले देखा महराज पता पुरुद्रा राजा हो दे हुए सडग में जाडू दे रहे हैं सडग को साक तर रहे हैं लाग पाने के साथ तो ये विदम्रता विदम्रता देखते हैं और ये प्रसन हो रहे हैं तो भगवान प्रसन होते हैं जो वो वि जो भिवन देखते हैं जर्मान तो आप कुछ नहीं कर सकते हैं. और भाईनंबर्दिर्भुज्जात सच्यावच्छत से होगा है. आगे चौता नामका. ये सोचना की ये वेडिक शास्तों का जब ज्ञान है इसका इस अदरिंग में कोई स्थान नहीं अब दामां धुने की उम्हें हैं हमें western culture चाहिए ये प्राथीन वेदिक शास्थम हैं कुछ आज की उद्धानी की उम्हें हैं उनका कोई स्थान नहीं प्रापा जी ने सापिल करके दिखाया की वेदिक शास्थम का संदेश हर समाज में उप्लोग किया जा सकता है हाँ जिसको دنیا کے کھولے کھولے میں ہر جگہ لوگ گیتہ پڑھ رہے ہیں. और इनां उका अपना रहे हैं. तो हमें आणा हमाने पुरा विश्वास मलचे वेडिक सासर कोई अपूरता नहीं कोई दोश नहीं और ये सनातन संदेश है मानो समाज की भळाई के लिए अगला प یہ سوچنا کی ہائی نام میں اتنی سکتی نہیں ہے۔ یہ جو ہائے کرشنا والے کہتے ہیں ہائے نام کے ماہرین سے بھگر پاک نہیں ہوگا۔ ये कल्पना है हमें और मंत्रों की आवच्छत हैं बहारे साथ हम दिखावा करें कि हम हरी कृष्य मंतर करनें चोड़ी चोड़ी दूसरे मंतर भी करें हमारे साथ पूरा बिश्वास उगच्चें हरी नाम हरी नाम हरी नामेव केवलं खलो नस्तेव नस्तेव हरी का नाम जब प इस संसा की स्थापना की उन्हें भक्तों को कहा था छो सिक माना दिन में करने के लिए पर मेरिकन भक्त थे नहीं कहर पाए पिर प्राभा जी ने 32 माना का कोटा दिया पिर भक्त उन्हें कहा स्वावी जी 32 माना भी बहुत मुझ्कल है पिर प्राभा जी ने कहा 16 माना नो लेट् تو اگر آپ کے پاس زیادہ سمیں ہیں تو آپ سولہ سے زیادہ کر سکتے ہو اور کوئی منطق اچھانا کرنے کی ہمشک نہیں سولہ سے کم نہیں کر سکتے زیادہ کی کوئی sealing نہیں ہے آپ دو سو راول بھی کر سکتے ہو کم نہیں کر سکتے ہمارے میں پورا بیشوار ہونا چاہئے کہ ہینہ میں ہی ساری شکتی ہے کل युग का माध्यम है वहाई नाम का जाप जितना कर रहो उतना ही काम है और हम अपना भावज देने की आवस्थव करेंगे वहाई नाम के द्वारा भगवाण से प्राथना करते हैं सेवा जीजे सेवा जीजे साथवा नर्मप्रात क्या है रावभाद अक्सर कह रहे थ یہ سب سے بھاری اور بھیانکر اپراد ہے۔ یہ سوچنا کی ہی۔ ابتہ میں دکھشت ہوں۔ رانہ گووین جی کے سابق میں دکھشت ہوئی۔ ابتہ میں اپراد بھی کروں گا۔ بھگوان کو معاف کرنا ہی پڑے گا۔ میں بھرامین ہوں۔ میں اتنی اوچھے پد میں ہوں۔ میں اپراد کروں گا بھگوان کو۔ معاف کرنا ہی پڑے گا۔ یہ مہان اپراد ہے۔ آج ہمیں نے نیک اپراد کیے، پرید بھاو سے نہیں. उनने ननन का नाम लिया, ये अप्राद, अप्रादन को परिणामी में बनना परेगा. तो हमें सावधान रहना चाहिए. एक समय प्रापजी, एक कसाई को दिक्षा दे रहे थे. ये व्यक्ति पहले कसाई था. प्रावाजी ने दिक्षा दे देवे कहा लाव लोग और सिनने आप पाप हैं जीवन नहीं आगे आप बन जाते हैं तो हमें साधान हैना चाहिए अनेक संस्थाओं में अनेक वैश्मा संस्थाओं में भी आपको दिक्षा एक मिनट में मिल जाती हैं एक या दो दिन में पार पर इस खल में हाइनान दिक्षा लेने के लिए आपको दो तीन, चार साथ लग जाते हैं. ब्राह्मन दिक्षा लेने में और दो तीन और सिन्यान दिक्षा लेने में आदी जिन्दी चले जाती हैं. तो क्या कान है? प्रापा जी चाहते थे कि दिक्षा लेने से पहले भा� अभी अध्यात्मिक जिम्मिदारी को समझे और इसलिए आपको पड़िक्षा में मैठना पड़ता है, disciple course करना पड़ता है, test लेना पड़ता है, interview लेना पड़ता है, कई जगहाँ चार-चार interview होते हैं, क्योंकि हम देखना चाहते हैं, पूर्थिश्या, गंभीर है या नाम के � یہ نہیں سوچے کہ فیشن ہے کُٹوں کو پالنے کا تو ہم ڈکشا بھی لیتے ہیں فیشن ڈکشا ڈکشا ڈکشا ڈکشا ڈکشا ڈکشا ڈکشا ڈکشا ڈکشا ڈکشا ڈکشا ڈکشا ڈکشا ڈکشا ڈکشا ڈکشا ڈکشا ڈکشا ڈکشا ڈکشا ڈکشا ڈکشا ڈکشا سوڈا یا ویپار ہوتا ہے بھگوڑ کے ساتھ ہم یہ کریں گے پھر بدنا ہمیں یہ چھئے ہم سُدھ بھکتی کے مار پر چُڑے ہیں بھگوڑتا میں بیان سے رہتے ہیں ہمیں سُدھ بھکتی کا کیاں دیا ہے نشکام بھاو سے سیوہ کرنی چاہئے اِس بھاو سے نہیں ہم ڈکشہ لے رہے ہیں ہی نہ لے رہے ہیں ہمیں یہ لام ہونا چاہتے ہیں کبھی کبھی بھاگت پوچھتے ہیں کہتے ہیں ہم نے ڈکشہ لی بعد میں وہاں دھندا خراب ہو گیا یہ ہو گیا وہ کئی کروڑ پتہ بھی بڑھ جاتے ہیں ڈکشہ کے بعد تو یہ کیوں ہوا ہم سب اپنے کرما کا پرینام بھگت رہے ہیں ये हम दिक्षा इस भावना से नहीं लेते कि जिस चीज़ को भी हम चुईनें वो सोला बन जाएगा हम दिक्षा ले रहे हैं अध्याने कुननती के लिए अध्यानाम अपराद क्या है? हाँ? महाप्रगुणे कहा जाये दाकताये काओ कृष्णे उपदेश جسے بھی تھوڑے ہوئے تھے کیا کہو؟ کشنا کا عبدیت. تو آپ جو پرچار میں جاتے ہو آپ کو یہ تو نہیں پتا. یہی بھگتی سردالو ہے, یہ سردالو. آپ جو گیتہ باٹنے جاتے ہو آپ پہلے یہ تو نہیں دیکھ رہے. ہاں ہاں, سردالو ہے یا نہیں? ہاں, یہ سردالو ہے. اس کو گیتہ نہیں پیچھیں گے. آپ سٹاپ لائٹ میں تو ایک منٹ کھڑا رہتے ہو. एक मिनल में दो गीता दिखा भी हैं। आप कहां देख पाओगे येश्व दालोय है, येश्व दालोय है। चेतने महां प्रभुगी खास पिपा है। और प्रचार के समन में हम सबको प्रचार करते हैं। कई हमें भग्त जो दफ्सल में काम करते हैं, वो गुड़ मौनिंग وہ अपदेश हम जब दें जब दूसरे व्यक्ति में थोड़ी इश्वाता हो, तो फिर वो ध्यान से सुनेगा और पानन करने का प्रयाज करगा। That's what I am about. That's all. हाँ? हाँ. महाँ के लिए हमें पूर विश्वास नहीं रखने. और इदनी मात सुनने के बाद भी आ गया है. हम शास्तल में पढ़ते हैं, लेक्शर में सुनते हैं, काम क्रोज हो, मोम मनमसरय से अभी हम बचना हैं. यह हमारे हर नर्थ हैं. और हम दिक्षा ले भी, पर इन चीजों को हम छोड़ना भी नहीं चाहते हैं. हमें भकती भी चाहिए और माया भी चाहिए हैं. संभव है क्य ہاں! دونوں چیزوں کا سمب نہیں ہے. ہم دکھشت ہو گئے ہم نے فلمیں بھی دیکھنے ہیں. ہاں! چار فلم ہم نے دیکھیں گے. रोज एक भी हम देखने हैं. आम जब भक्ति में जुड़ते हो तो चीतिर महाप्रभुने क्या कहा सनाधन विष्वामि को? जो भक्ति के लिए अनुकूल है सुखार करो जो प्रतिकूल है एह मेरे प्रियमेत्र जो भी कीमत महनी पड़े भलो और कृष्णा भगती को आज से महत पेसन देने दो। तो कीमत का ये अर्थ नहीं, आप एक लाग पुरे देते होते दिक्षा के समें और तो होगेगा भी पुरी चूर देते हो जो करना है कीमत का अर्थ है अगर आपको प् آگے ہی دس نام پرات کا دوسرا بھاگیا ہے. دھیان پروگ جاپت نہیں کرنا. ہمیں بھونا نہیں چاہیے کہ مہا منطر بھگوان سے افحین ہیں. تو جب ہم بیٹھتے ہیں بھگوان کے ناموں کا اچھارن کرنے کے لیے ہمیں پریاس لینا چاہیے کہ ہم دھیان سے لیں, دھیان سے سنیں. یہ نہیں कि जाप वरा है, साथ में स्मार्ट पोर में बात करने हैं, साथ में आजबार पढ़ने हैं, साथ में किसी और से कुछ प्रचा करने हैं. नहीं. आपको भूलना नहीं चाहिए. जितने ध्यान से आप जाप वरा करोगे, उठी जानके पाप प्राप्त होगी, उठी द अभी कभी भग पूछते हैं, कहते हैं, हम इतने सानों हो गए दिख्षल लेते हैं, अभी भी बहुती काकशन नहीं जा रहा, क्या कारण है? दवाई में कोई कमी नहीं, नहीं आपके डॉक्टर में कमी नहीं हैं, कमी है मरीज में, वो दवाई ठीक दे रहा नहीं है, तो ज माना नहीं होना चाहिए। और जितने ध्यान से जाप करोगे उदी तेजी के साथ सिद्धे की मया निकलेगी। और साथ में हमें शास्तों को भी पढ़ना चाहिए। खासर के जिन भक्तों में पढ़ने की योगेता है उन्हें इन प्रतों को भी पढ़ना चाहिए। ایک گھنٹے کو ہم باٹھتے ہیں تو اِن کا عدید بھی ہونا چاہیے۔ ساتھ میں جو بھگت دھر میں رہتے ہیں اُنہیں دھر میں آلٹر بنانا چاہیے۔ کئی بھگت گوڑھ دائی کی مورتی رکھتے ہیں۔ اگر ہم مورتی نہیں رکھنا چاہتے تو ایک آلٹر جرور بناوں تصویروں کے ساتھ۔ جو کھاؤ ہوان کو بھوک لگاؤ केवल तुर्थी रख देना प्रशाद में उससे प्रशाद नहीं बनता प्रशाद बनाना है तो मंतों को चानन रहो प्रापा का मंतर, गुरू का मंतर तीन बाह हाँ प्रभु का मंतर, केश्ण महमाण का मंतर फिर हाइं केश्ण, फिर महमाण जाके सुदाध रहे امان گیتا میں کہتے ہیں جو بھی جو بھوک لگائے گا کھائیں کیا کھا رہے ہیں آپ کھا رہے ہیں ساتھ میں ہمیں سادل سنگت میں رہنا چاہئے یہ نہیں کہ کبھی کبھی ہم دیکھتے ہیں ڈکشا کے بعد بھک چھو منتر ہو جاتے ہیں ڈکشا سے پہلے ہر امیبار مندل آئیں گے سیوہ کریں گے दिख्षा के कुछ महीने बाद छु मंदर साने एक दफ़ा आते हैं. तो ऐसी दिख्षा का कुछ लाव नहीं है. हम जब मंदर में आते हैं, वहाँ भाव होना चाहिए सेवा का. तुछ सेवा. ये नहीं की साप की सेवा. कभी-कभी, जैसे सल्दारों में एक बहुत बड़ा ग جب وہ قدوارہ جاتے ہیں تو سیوہ کی بھی مانگتے ہیں. دھنی سردار ہیں. اُن کی لائن لگی ہوئی ہے. کہے اُن کی باری دو دو سال بعد آتی ہے. آکر نکلیں. جوتے کی سیوہ. پانی کی سیوہ. جھاڑو ماننے کی سیوہ. ہمارے ہندو بھائیوں کو یہ سیوہ دی جائے وہ کہتے ہیں ہم کیا بھگی بننے آئے تھے आकी सनसमें करगे हम भगवाईं के लिए भगगी बन रहे हो तो बड़ी अच्छी बात हैं जब बनदने आए हैं सेवा भावना होनी चाहिए ये नहीं आए पिशार खाए और पूरे घट चलेगा स आणे में भावना चेहें। मंदन में आके हम कोई सेवा करें। कुछ सेवा। जाड़ो मारना। अतीतें का स्वागत करना। सोई बढ़ना। हम जब हरे कृष्ण मंदन का जाप करते हैं। भवान से प्रातना करते हैं। हमें सेवा दीजे। जब सेवा मिलती हैं तो हम भाग � It's only the beginning, not the end. ये केवल अध्यानिल जीवन की शुरुवात है। समाथी नहीं। आप Medical College में दाक्षा ले लो। ये नहीं कि Doctor जुरूर बनोगे। अगर पढ़ोगे, पास करोगे फिर Doctor बनोगे। तो दिख्षा केवल शुरुवात है। अगर मियों का पानन करोगे इत्यादी پھر भक्ति के माई में आगे प्रती कर पाओगे. तो आगे बढ़ना या पीछे हगना ये निर्बर है आपके प्रयास के ओपर. गुरु, सादु, शास्त हमें उपदेश देते हैं क्या अनुकुल है, क्या पतिकुल है. आकी आ गया हमारे हाथ में. अने एक भक्त आज ब्रामिन दिक्षा भी ले रहे हैं ब्रामिन की गुनों के विशे में भवगीत में कहा गया है सभो धमत पर सोचं शाति रज्यो निवचा ज्यानन विज्यानन महसिक्यों भवगीत में सुधात हो जाओ हमें अच्छी ब्रामिन मनना है नाम का ब्रामिन नहीं जिनू ह ब्रामन बस ज्ञान होना चाहिए सेंचील होना चाहिए मन और बुद्धी पर वश्व होना चाहिए तो हमें अस्ली गुन असली ब्रामन बनना चाहिए और ब्रामन बनने के पश्चार हमें ठाकुजी की सेवा में जोड़ना चाहिए आरती करो भोग बनाओ कुछ न कुछ कुछ न कोई सेवा होने जोई है। प्रचार की सेवा है। इस हाथ में प्रभुबंदर की सेवा होगी। तो हम ये हुमीद कर रहे हैं कि आप सब जो आज हरीना दिक्षा ले रहे हों जो भी तरसे भागती की विदियों का पालन करोगे और प्रापाजी के अधोलतों आगे ब� वो भी अच्छी ब्राह्मन बढ़ने का प्रयास करेंगे और साथ में अध्याद्य ज्ञान को मिलने कुर करेंगे। आप सब इस सिख्षा का आउठाये अबने जीवन बरसा को मनाये। हाई कृष्णा। हाई कृष्णा हाई कृष्णा कृष्णा कृष्णा हारे हारे हारे रामा हारे रामा रामा हारे हारे
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