भक्तों के बीच का व्यवहार | प्रभुपाद लीलामृत | ISKCON Rohini | 19 Apr 2024 | Gopal Krishna Goswami

The video records a devotional discussion among several participants (Speakers A‑H) at ISKCON Rohini, focusing on the dynamics of behavior among devotees. The conversation explores how personal conflicts arise when devotees with differing personalities work together, and offers practical guidance for resolving such issues. Key recommendations include seeking advice from senior devotees, accepting constructive suggestions, and maintaining humility without fearing exploitation. The speakers examine the temple’s management structure—president, VCs, and other roles—and discuss the transition of responsibilities when a temple’s construction is completed, especially concerning fund‑collection duties. They introduce the concept of “organization capital,” emphasizing that financial contributions should serve Krishna’s service rather than personal gain. Throughout, the dialogue stresses the importance of recognizing each other’s qualities, respecting all participants, and aligning personal ego with the singular goal of Krishna’s service. The tone is devotional, instructional, and reflective, aiming to guide devotees in harmonious service and effective community management.
Chapters
अरे राम रे राम राम राम रहले hare krishna in krishna krishna हर rama rama रामा रामा आरे आरे
आरे
के कृष्णा के शान हमारे मारे राम रे रामा रामा रामा र ना माने राम राम
ा
हरे कुछ
रे हरे राम रे राम नाम रा मा ये कesाकेsा कार हरे रामा रामा रामा रामा रे आरा रे हरे रामा रामा रामा राम आर आर र म मा मा हय हय राम ma हमाम हय ह हर हर हरे रामा हरे रामा रामा रामा हाय हाय रे हाय कृष्ण हरे हरे रामा हरे रामा हम आये है या सब पर सब बॉल बाई बॉल हाई बो ई बोल ब हर बो हर बहाई बो हर बोल हर बो आय बो हर बोल हर बोल हर बो हर बो हाई बोहयबोहाब
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महाराज के माइक को बंद कर दीजिए पूरा अगर कई गलती से है पीछे साउंड इंजीनियर को बोल दीजिए
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है
ली मैंने क्या बोला इसलिए क्या बोला गांगे बोल रहा हूँ आपको सुनाई
देगा आपको सुनाई दे रहा है समझ आ रहा
आपको सुनाई देगा आपको सुनाई
दे रहा है समझ आ रहा है
omg कृष्णा े
jan locaonobejanthe location
तो
महाराज कह रहे हैं की 11 चीज है की पोजीशन चेंज करे उस तरफ आवाज के लिए, महाराज कह रहे हैं की 1 ठीक है पोजिशन चेंज करे कल वहाँ लोकनाथ महारज ने वहाँ बैठ के क्लास दिया तो बेटर समझ आ रहा था ठीक है कल वहाँ लोकनाथ के क्लास दिया तो बेटर समझ आ
रहा था इधर करेंगे उधर करे करे उधर करे ओके ठीक है सो आई का देसी है ठीक है हम क्या
करते हैं सो आज एकादशी है काशी के दिन क्या करते हैं के दिन क्या करते हैं
जीवन के विषय में
इससे प्रपात द्वारा लीलामृत के द्वारा प्रपात के जीवन के विषय में ज्ञान प्राप्त कर सकते है और प्रपात के जीवन से सम्बंधित लीलाओं के विषय में ज्ञान प्राप्त कर।
भा जी ने संदेश कियाजीप्रहुपाजी ने वो
संदेश दिया जिसके द्वारा भक्ति में आगे बढ़ सकते
ने वो सन्देश दिया बढ़ क
प्रपात के गुरु महाराज ने, पहली
में
चेतन ने, देश को गुरु महाराज ने में महाराज ने
भविष्यवाणी है
भक्ति सिद्धांत महाराज को पूर्ण विश्वास था कि जो चैतन्य महा प्रूव की भविष्यवाणी है वह पूर्ण सत्य निकलेगी
न्यू यॉर्क कांटी े।
तो प्रापा जी ने अथक प्रयास किया और वो पहुंचे न्यू यॉर्क में नाइनटीन सिक्टी फाइव में 1965 में
न्यू यॉर्क में पहुँचे और कैसे पहुँचे उनके अमेरिका में। बाबा जी ने 1 दिन कहा मुझे निमंत्रण में सहयोग हो।
तो उस समय प्रपात के 1 जानकार थे जिनका पुत्र अमेरिका में रहता था तो प्रापा जी ने उनको कहा कि वहाँ से मुझे निमंत्रण प्राप्त पत्र प्राप्त करने में सहायता करे
में प्रचार करने
प्रौपाजीकोसेवीजा मिला और प्रोप जी अमेरिका पहुँचे और प्रोप बटलर पेंसिलवेनिया में प्रचार किया
bar
butlaemaswor
san ma
बटलर मशहूर था क्योंकि वहाँ पे जीप बनती थी तो
न्यूयॉक में गये उन्होंने पहला केंद्र खोला।
प्रॉपर जब न्यूयॉर्क में गए उन्होंने वहाँ पर पहला केंद्र खोला।
हो।
टॉम स्कवायर पार्क में अब प्रापा जी
कीर्तन करते थे टोमसन स्क्वायर पार्क में
कोई
जात
करने के लिए तो प्रोपज उस समय वहाँ कीर्तन करते थे। प्रपात के पास कोई भक्त नहीं थे और भी कोई सुविधा प्राप्त नहीं थी
तो प्रभाजी को कोई भक्त मिले।
उसके बाद प्रोपज को कुछ भक्त मिले और प्रापा ने इस्कॉन की स्थापना की।
यह चर्चा हुई थी संस्था को क्या नाम दिया जाए तो वहाँ पर बाद
में चर्चा हुई थी कि संस्था को क्या नाम दिया जाए।
कई ने कहा को इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर
गॉड कांशेस ने तो कइयों ने कहा इसका नाम रखते हैं, इंटरनेशनल सोसाइटी गोड कांशस भगवत चेतना नो गो हाजी। तो प्रापा ने कहा नहीं हमें बिल्कुल स्पेसिक होना चाहिए। प्रापा जी ने कहा कृष्ण कोशिस कृष्ण भाव। तो प्रापा जी वहाँ पार्क में 1 दिन पहुंचे तो वहाँ बेंच पर बैठे थे। तो उस बेंच पर 1 अमेरिकन व्यक्ति भी प्रपात के पड़ोस में बैठ गया। प्रापा ने उससे पूछा आप क्या करते हो?
बस
बस ड्राइवर
और बोल न
आप क्या करते हो?
तो उस व्यक्ति ने पूछा आप क्या करते हो?
पेश है में मनों का निर्माण करूँगा।
तो प्रौपाजी ने कहा मंदिर है, भक्त हैं लेकिन समय परिस्थिति है। हमे हमे परिस्थिति के समय परिस्थिति आएगा तो मंदिरों का निर्माण करूँगा।
यह अंतरराष्ट्रीय संस्था होगी।
तो प्रापाजीको पूर्ण विश्वास था कि 1 अंतरराष्ट्रीय संस्था होगी।
तो प्रौपाजी ने पहला केंद्र स्थापित किया न्यू यॉर्क में
आप जो पढ़ रहे हो वहाँ पढ रहे हो, न्यू यॉर्क से जा रहे हैं।
तो अभी जो आप नीला मृत में पढ़ोगे तो उसमें पढ़ोगे कि प्रोप जी अब न्यूयॉर्क से सेंस हो जा रहे
हैं हम पढ़ेंगे हम वहाँ से पढेंगे ओके।
तो प्रौपर लीलामे। अध्याय 22 स्वामी जी हितियों को आमंत्रित करते है। प्रभुपात के विचारशील अन्यायों की धारणा थी कि दिक्षा के आकांक्षी कुछ अभ्यार्थियों का इरादा, अपने गुरु के प्रति जीवन पर्यंत एकांत प्रतिबद्धता निभाने का नहीं था। वे कहते स्वामी जी, कुछ लोग केवल दीक्षा के लिए आते हैं, हमने उन्हें पहले कभी नहीं देखा और दिक्षा के बाद हम उन्हें फिर कभी नहीं देखते। प्रपा ने उत्तर दिया कि ऐसा खतरा तो लेना ही होगा। 1 दिन मंदिर में, 1 व्याख्यान में उन्होंने बताया कि यद्यपि 1 शिष्य के पीछे के पिछले पापों के फल दीक्षा के समय समाप्त हो जाते हैं, लेकिन दिक्षा गुरु का दायित्व तब तक बना रहता है जब तक शिष्य को भौतिक संसार से मुक्ति नहीं मिल जाती। इसलिए उन्होंने कहा कि भगवान चेतन्य ने चेतावनी दी है कि किसी गुरु को बहुत से शिष्य स्वीकार नहीं करने चाहिए। 1 रात 1 रात को जब मंदिर में प्रश्नोतर सत्र चल रहा था। 1 भारी भरकम दाढ़ी वाले व्यक्ति ने अपना हाथ उठाया और प्रभा से पूछा क्या मैं दिक्षा ग्रहण कर सकता हूँ? उसकी इस दृष्ट खुलेआम प्रार्थना पर प्रभुपाद के कुछ भक्तों को खीज हुई पर प्रोपर शांत गंभीर बने रहे। हाँ उन्होंने उत्तर दिया। लेकिन पहले तुम 2 प्रश्नों के उत्तर 2 कृष्ण कौन है? उस लड़के ने कुछ देर सोचा और कहा कृष्ण भगवान हैं। हां प्रोप ने उत्तर दिया और फिर पूछा तुम कौन हो? लड़के ने फिर कुछ देर सोचा और उत्तर दिया मैं भगवान का सेवक हूँ बहुत अच्छा।
तो पाजी न्यू यॉर्क से चले यूनाइटेड एयरलाइन्स तो प्रौपाजीन्संफरेंसिस को के लिए प्रौपाजी
न्यू यॉर्क से सेनफ्रेंसिस को गए यूनाइटेड एयरलाइन्स के जहाज से।
तो उस समय सैन फ्रेंसिस को अमेरिका का सबसे हिप्पी हिप्पी थान माना जाता
था तो उस समय सैन फ्रांसिस को अमेरिका का सबसे प्रसिद्ध हिप्पी स्थान माना जाता था।
हिप्पी क्या मतलब है?
hipपीऐसीसमझते क्या मतलब है?
परपज ने कहा i making happy in
to happy american hippie no propar said,
i making happy in to happy prॉपामaड
hippi happy प्रोप
प्रापा ने बोला मैं हिप्पी को हैप्पी बना रहा हूँ, प्रापा
ने कहा की मैंने हिप्पियों को हैप्पी बना दिया है।
1 समय किसी ने भारत में पापा से पूछा आप कुछ जादू कर सकते
हो, तो 1 बार प्रोपज को भारत में किसी ने पूछा की आप कोई जादू कर सकते हो, प्रपने नहीं।
1 जादू मैंने किया है प्रोप 1
जादू मैंने किया है
क्या जादू किया
है, हा कुछ जज्ञासा क्या जादू किया
है
ने कहा हजारों मलिक ब्राह्मण बना दिया है।
और जो आपके खाइयों में जुड़े हुए हैं उसे कहते हैं इसके कोई नहीं है वो पाप के कार्य में जुड़े हुए हैं।
मलेशा उसको कहते हैं जिसका चरित्र पाप कार्यों में लगा रहता है।
ब्राह्मण कहते हैं जो कि सार शिक्षा के आधार पर जी रहा है।
और ब्राह्मण उसे कहते हैं जो शास्त्रों के आधार पर जी रहा है।
तो बाबूजी को है। वो वहाँ पक्षों ने प्रबंध किया था जी की है प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के लिए।
तो जो प्रपा जी सेन्फ्रेंसिसको आते हैं। तो वहाँ पर भक्तों ने प्रपज के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस रखा था।
आप सब ने मुकुनदास वामी का नाम सुना है।
आपने सबने मुकुंद स्वामी का नाम सुना है।
उनका नाम था माइकल ग्रांड,
उनका नाम था माइकल ग्रांड।
मुकुल माइकल ग्रांड ने बड़ा अच्छा प्रबंध किया था। प्रभा जी का स्वागत किया।
माइकल ग्रांड ने बहुत अच्छा प्रबंध किया था। प्रपा जी का स्वागत किया था।
1 रिपोर्ट फेस को कहा आया प्रॉपर का इंटरव्यू लेने के लिए तो वहाँ
1 सेन फ्रेंसिस्को का रिपोर्टर आया प्रापा जी का इंटरव्यू लेने के लिए।
प्रापा में भगवान का सन्देश दे रहा हूँ, सुविधा
परोपाजीनेकहामै भगवान का संदेश दे
रहा हूँ समाज के सुधार के लिए
इंग्लैंड गए थे।
तो 1 बार प्रपा जी इंग्लैंड गए थे
रपट में प्रेस कॉन्फ्रेंस की और
प्रोपज ने लंदन के एयरपोर्ट पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
swami वा है ब्रॉड for us तो
1 ब्रिटिश रिपोर्टर ने पूछा स्वामी जी आप हमारे लिए क्या लेकर आये हैं?
वो चीज लाया हूँ इंडिया से तुम लाना भूल गए थे।
तो
प्राजी ने कहा मैं वो चीज लाया हूँ जो तुम इंडिया से लाना भूल गए थे।
वो रिपोर्टर सोचने लगा क्या भूल गए?
हम तो रिपोर्टर सोचने लगा ऐसा क्या भूल गए हम लाना हम कोई नूर
भी ले आये, लाना आसान नहीं था,
तो हम तो कोई नूर भी ले
आये, ऐसा क्या रह गया जो लाना आसान नहीं था, 2 लाना सान नहीं था।
you for go to bring it come to give vedic noleg।
तो पापाजी ने कहा की आप वैदिक जो वैदिक शास्त्रों का ज्ञान है, भगवद गीता का ज्ञान, वो लाना भूल गए हो, मैं वही वैदिक ज्ञान लेकर आया हूँ।
और भक्तों ने दीक्षा समारोह का प्रबंध किया।
तो प्राजी सैन फ्रेंसिस को आये तो भक्त लोगों ने दीक्षा समारोह का आयोजन किया,
लोग दिक्षा सी पहले लिखते हैं,
लिखते तो यहाँ पर वो चल रहा है की उसे बताया जा रहा है की दीक्षा से पहले कुछ लोग दिखते हैं, उसके बाद दिखते नहीं है, ये सच्चाई आज
ग अब जाने का, तो
कुछ लोग दीक्षा से पहले तो बहुत अच्छी हाजरी लगाते हैं, दिक्षा हो जाती है, सो दिक्षा तो अब हो गयी, अब मंदिर जाने की जरुरत नहीं है,
केवल शुरुआत, अंत ही दिक्षा, 1 शुरुआत
है, अंत नहीं है।
तो दिक्षा का प्रोग्राम हो रहा था, और बक्सर ने पूछा शिक्षा लेते है और आना भी दिक्षा ली जाए।
तो ये दीक्षा समारोह में ही प्रश्न कर रहे हैं, बक्सों की जो दिक्षा लेकर आना बंद कर देते हैं ऐसे लोगो को दिक्षा देनी चाहिए।
21 व्यक्ति प्रोपज पूछा, मुझे दिखा दोगे।
तो 1 व्यक्ति प्राजी पूछ रहा है कि मुझे दिक्षा दोगे क्या? प्राजी ने कहा सो टू थिंग, 2 चीजें,
2 केन का आंसर, 22 प्रश्नों
का उत्तर, 2 परवाज ने कहा woiskrisnaकृष्ण कौन है? तो उसने कहा पूर्ण पुषोत्तम भगवान
con
a
ने गोविंदा 1 ईश्वर है तो
आप ब्रम्स्वमितपढते हो ईश्वर परम कृष्ण, सचिदानंद, विग्रह, बहुत सारे ईश्वर हैं, लेकिन 1 ही परम ईश्वर है सो। तो प्रापा से पूछा कृष्ण कौन है? तो उसने जवाब दिया पूर्ण पुरषोत्तम भगवान
पापा बड़े खुश हुए, प्रपात खुश हुए,
प्रपज दूसरा प्रश्न पूछा हुआ यू हुआ, तुम कौन हो? तो उसने कहा मैं भगवान का सेवक हूँ।
जब उसने उत्तर सुना, प्रपात ने उत्तर सुना, उन्होंने कहा कि आप दीक्षा ले सकते हो,
पूछे, आज दीक्षा लेना हो और 50 को का उत्तर देना पड़ता है।
तो आप कहोगे की उस समय तो प्रौपर 2 प्रश्न पूछे और आज के समय में अगर दीक्षा लेना हो तो पचासों प्रश्न पूछे जाते।
कई कोर्सेस करने पड़ते है, कई सारे
कोर्स करने पड़ते हैं।
आप कहोगे पुराना रिवाइज करना चाहिए।
तो आप कहोगे की पुराना स्टैंडर रिवाइज करना चाहिए।
स्कॉन के फॉर्मेशन का समय तो वो
था, इस्कॉन के संस्थापक का समय
ले।
तो उस समय जो स्टैंडर्स थे बहुत निम्न स्तर के
हिप्पी
कहाँ प्रचार कर रहे थे।
हिप्पी लैंड हिप्पो को कुछ जीवन का क्या उद्देश्य है।
हिप्पिओं को नहीं पता था कि जीवन का क्या उद्देश्य है।
है।
कहते हैं स्वामी जी अमेरिका गए, क्या किया उन्होंने कोई केवल हिप्पी लोगों को भक्त बनाया तो हिप्पी लोगों को नहीं बनाना चाहते।
तो कई बार लोग कहते हैं की स्वामी ने क्या किया, अमेरिका गए और हिप्पी लोगों को भक्त बनाया।
तो हिप्पियों को भग से बनाना चाहते हैं।
हम तो हिप्पियों को भक्त नहीं बनाना चाहते है। वो पतित हैं।
तो ये दोलन जो है परसों के उद्धार के लिए है।
ये आंदोलन जो है वो पतितों के उधार के लिए है।
आपके इस मंदिर में प की मूर्तियां की स्थापना हुई है।
आपके इस मंदिर में पंच तत्त्व के विग्रह की स्थापना हुई है।
बंगाल के बाहर की स्थापना हुई है।
पहली बार ऐसे बंगाल के बाहर पंच तत्व की स्थापना हुई है।
बंगाल के बाहर, अमेरिका में, हमारे हवाई के मंदिर में है।
अमेरिका में हमारा जो हवाई का मंदिर है उसमें पंच तत्व है
कहा? भारत में, बंगाल के बाहर,
भारत में, बेंगौल के बाहर पहली बार पंच की स्थापना हुई है।
तो मैं सोच रहा था कि हमें मायापुर को को डुप्लिकेट करना चाहिए,
तो
मैं सोच रहा था कि हमें मायापुर को डुप्लिकेट करना चाहिए। दिल्ली में
मुर्ति है औ भगवान का
सुन्दर मंदिर है और मायापुर में पंच तत्व के विग्रह हैं, वहाँ पर 1 सुन्दर मंदिर है।
और होंगे।
तो पहले डिसाइड हुआ था कि आपके रोहिनी के मंदिर में 5 तत्व भी होंगे और प्रहलाद नरसिंह देव भी होंगे।
पर हमारे डी डी ने हा यह
नहीं कर सकते तो, लेकिन हमारी डी टी मिनिस्ट्री ने कहा ऐसा नहीं कर सकते।
यूँ मूर्ति स्थापना होती है क्योंकि एस
कॉल में शास्त्रों के आधार पर मूर्ति की स्थापना होती है।
उन्होंने कहा कि यह स्थापना कर सकते हो और न।
उन्होंने कहा कि पंचतत्व की स्थापना कर सकते है। नरसिंह भगवान की नहीं।
भगवान के लिए अलग मंदिर बनाना पड़ता है।
क्यूंकि इसके लिए भगवान का अलग मंदिर बनाना पड़ता है।
इन्दर सिंह भगवान का अलग से मंदिर बनाना पड़ता।
जैसे मायापुर में आपने देखा होगा नरसिंह भगवान का अलग मंदिर है।
जैसे आपने मायापुर में देखा होगा नरसिंह देव जी का अलग मंदिर है।
हम
सामना करेंगे करेंगे।
तो फिर हमने कहा कि नरसिंह देव की स्थापना करेंगे संत नगर में और पंच तत्व की स्थापना करेंगे यहाँ पर। इसलिए यहाँ पर आपके 5 तत्व की स्थापना हुई।
पंच कौन है पंच तत्व?
कौन है चैतन्य महाप्रऔरउनके साथी
ने क्या किया में हिप्पी लोगों को भक्त बनाया
तो कई लोग कहते थे स्वामी जी ये क्या किया, हिप्पी लोगों को भक्त
बनाया तो ये बात सच है, बनेगा बनेगा।
यह बात सत्य है।
भक्त बनाया। क्या है प्रजा का रूप, कलयुग में क्या है प्रजा का रूप।
तो कलयुग में क्या है प्रचार का रूप, प्रजा का रूप, प्रजा का रूप वो अत्यंत पतित हैं।
प्रमुख कौन है
पंच तत्व में प्रमुख कौन है?
श्री चेतन महा, प्रभु ठाकुर कहते हैं कृष्ण प्रभु दया कोर मोरे बिना दयालु,
नोतनदास ठाकुर कहते हैं श्री कृष्ण चेतना प्रभु दया करो मोरे। तो वहाँ बिना के दयालु
कौन।
तो कहते है की चेतना पर आप कौन हो आप का उद्धार करने के लिए।
जैसे की चेतना बहू ने जगाई मदाई
का उद्धार किया, देखते है की चेतन ने जगाई दाई का उद्धार किया।
माई
ब्राह्मण खानदान में जगाई मदाई पैदा तो हुए थे, ब्राह्मण खानदान में
जुड़ गए थे हर पाप के कार्यो में,
लेकिन जुड़ गए थे हर प्रकार के
पाप कार्यों में, पिछले इलेक्शन में, आपके प्रधान मंत्री कृष्ण नगर बंगाल में लेक्चर दे रहे थे।
तो तो पिछले इलेक्शन में, आपके प्रधान मंत्री बंगाल में, कृष्णनगर में लेक्चर दे रहे थे।
उन्होंने कहा हम 2, हम सब जगह भुलाई को सुधार देंगे।
तो उन्होंने कहा की यदि आप मुझे वोट दोगे तो हम सारे जगह मदाई को भगा देंगे। ये
उधार का
अवतरण हुआ पति, तो का उद्धार करने के लिए पति पवन प्रभु मौसम ब आप प्रगट हुए किस लिए?
पैसो के उद्धार के लिए, तो आप
किस लिए हुए है?
वाट्स में मैं हूँ सबसे ज्यादा और
सब पतितों में मैं सबसे ज्यादा पतित
हूँ, इसलिए मुझे अधिकार है।
इसलिए मेरा कृपा का पहला अधिकार है।
तो हम ज्ञान सोते हैं, हम सबसे
उत्तम भक्त हैं, लेकिन हम क्या सोचते हैं? हम सबसे उत्तम भक्त हैं, उत्तम भक्त हैं।
उत्तम भक्त हम सबसे उत्तम भक्त है,
हम सबसे उत्तम भक्त है, दूसरे जो
है सब सेकंड क्लास है और जो
दूसरे हैं सबसे न्यूनतम सेकंड क्लास में सबसे थर्ड क्लास टेंथ क्ल
जो जो दूसरे हैं वो सब घटिया हैं।
का उधार नरोतमदास ठाकुर कहते हैं चेतना प्रकट हुए हैं पतितों का उद्धार करने के लिए।
तो कृष्णदास कविराज कैसे है मेरे में कोई गुण भी नहीं है, मेरा नाम ही मत लो, नाम लोगे तो सारे गुण मिल जायेंगे।
तो कृष्णदास कविराज गोस्वामी चैतन्य लिखते हैं की मेरे में कोई गुण नहीं है, अगर मेरा नाम लोगे तो सारे पुण्य
खत्म हो जायेंगे, जो उत्तम कोटि की वैश्णव वो कभी यह नहीं सोचते।
तो जो उत्तम कोटि के वैश्नव कभी नहीं सोचते की मेरे अन्दर कुछ कोई गुण है। हाँ हाँ प्रभु नित्यानंद प्रेमानंद सुखी कृपावलोकन करो आमी बड़ा दुखी
निेंदा की शरण लो, तेदा की शरण हो हमेशा आनंद
में रहोगे, यदि आप नित्यानंद की शरण लोगे तो हमेशा आनंद में रहोगे।
तो 4 खड़े थे सो, who is krishna our duty?
तो प्रपा जी जब सैन फ्रेंसिस्को में प्रचार करे तो उन्होंने 2 प्रश्नों से परीक्षा ली कि who is na हो are you
o? कृष्ण भगवान परम भगवान स्वीकार करना चाहिए,
कृष्ण परम भगवान है में जुड़ने से
पहले हम सब विचार में थे, सारे भगवान 1 ही है, कोई नाम होगा।
तो इस काल में जुड़ने से पहले हम सभी इसी विचार धारा में थे, सब भगवान हैं, किसी को भी मान लो सब 1 हैं।
pm have got।
तो यहाँ इस में क्या देखते हो? कृष्ण से पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान है।
सो सेन फ्रंसिस 1 मंदिर खोला।
तो फिर प्रोपज ने सैन फ्रेंसिस्को में फेडरिक, स्वीट में 1 मंदिर खोला, वह
भगत से जायनेनप्रभू, वहाँ पर टेम्पल प्रेजिडेंट
वहाँ थे जयान
अमेरिकन से टैक्सी चलाते
थे, वो अमेरिकन भक्त थे और टैक्सी
चलाते थे, टैक्सी चलाते थे और जो आमदन होती थी उसे मंदिर किराया दे।
तो पूरी रात वो टैक्सी चलाते थे और जो उससे आमदन होती थी उससे वो मंदिर का किराया देते थे। तो उस समय मंदिर के पास बहुत कम
चाइना को कैंसर हो गया।
तो जयानंद प्रभु को कैंसर हो गया था।
ओह ये जायननाबबजकैहोअमरक में आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, तो सरकार आपको फ्री दवाई देती है।
तो अमेरिका में क्या सिस्टम है? अगर आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है तो अमेरिकन गवरनमेंट आपको फ्री दवाई देती है।
जायना जो है जो कैंसर की सेवा के पैसे मिलते थे, वो भी इस्तेमाल करता था मंदिर की सेवा में, तो
जयानंद प्रभु को जो उनकी कैंसर की दवाई के पैसे मिलते थे, वो पैसे भी वो मंदिर की सेवा में लगा देते थे।
24 घंटे जुड़ा था भगवान की,
वो,
भगवान की सेवा में लगा देते थे।
पापा जी ने कहा जय s going back to god।
तो जब जयानंद प्रभु आ प्रकट हुए तो प्roपाजी he is gone back come back to god head
गुरु जो है शिष्य के कर्मों का परिणाम भुगता है।
तो आपने जैसे पढ़ा उसमें पूछा शिष्य की जो गुरु है वो शिष्य के कर्म फलों का परिणाम भुगतता है
का गुरु से जब तक शिष्य गुरु के आदेश का पालन कर रहा है, तो
गुरु का जो सम्बन्ध है शिष्य के साथ, तब तक है जब तक शिष्य गुरु के आदेश का पालन करे।
तो वह कठिनाई के साथ न।
तो प्रपज ने बहुत कठिनाई के साथ इस कोन की स्थापना की।
पहले उन्होंने संघर्ष किया भारत में,
तो
पहले प्रोपज ने भारत में संघर्ष किया,
फिर पश्चिम देशो में जाकर और फिर
पश्चिम देशो में जाकर।
तो दूसरा मंदिर खुला था, सैनफिसकोमेसीधा मंदिर खुला था मोन्ट्रियल कैनाडा में, तो दूसरा
मंदिर खुला था सैन फ्रांसिस् को में, और तीसरा मंदिर खुला था मोंट्रियल कैनाडा
में, और उन की संख्या बढ़ती गई।
इस तरह से मंदिरों की संख्या बढ़ती गई।
जी को उनके गुरु ने 1 और आदेश दिया था कि तुम को प्रकाशित करना।
तो शिलप्रौपादके गुरु ने उनको 1 और आदेश दिया था कि तुम ग्रंथों को प्रकाशित करना।
रूप और सनातन को स्वामी के विषय में पढ, ते हो।
तो चरित्र में रूप और ग्रुप को स्वामी, सनातन को स्वामी के विषय में पढ़ते हैं।
तो 1 राज्य के
तो वो नवाबुसैंशाराजा के प्रसिद्ध मंत्री थे, रूची नहीं थी राजनीतिक कार्य, उनकी कोई रूचि नहीं थी। ऐसे कोई भौतिक कार्य में राजनीति कायम
राजनीतिक कार्य कार्य में
नौकरी मिले तो
उन्होंने नौकरी त्यागी और फिर महाप्रभु से
मिले वो महापवुनेकहा वृंदावन जाओ 3 का पालन करना।
तो। तो उन्होंने कहा महापहुने हा वृंदावन जाओ भक्ति के कार्यों का पालन करना।
को क्या।
1
ग्रंथ की रचना करो।
पहला क्या था ग्रंथों की रचना करो।
ओ पर सनातन को स्वामी ने जो ज्ञान दिया है।
तो जो स्वामी स्वामी ने जो भी हमें ज्ञान दिया, वो शिक्षा,
उन सान को खोजो की
और दूसरा आदेश दिया कि उन स्थानों को खोजो जहाँ पर भगवान ने दिव्य लीला प्रकट की है।
इसलिए
आज की डेट में जब वृंदावन जाते हो तो बड़ी सरलता से बता देते हो। यहाँ पर ये लीला हुई वो लीला
हुई मंदिरों का निर्माण करो और तीसरा
देश दिया मंदिरों का निर्माण करो।
बाबा कहते हैं अंतरराष्ट्रीय कृषसंभावनादोमूल उद्देश्य है।
तो प्रौपाजी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत के 2 मुख्य उद्देश्य हैं 1
रचना करना, ग्रंथों का वितरण करना और मंदिरों का निर्माण।
1 ग्रंथों का रचना करना, उसका वितरण करना और मंदिरों का निर्माण करना।
तो मुन्ना का निर्माण आवश्यक है, मंदिरों
का निर्माण बहुत आवश्यक है।
पर जी ने कहा मैं तो किसी वृक्ष के नीचे जा सकता हूँ।
पापाजी ने कहा मैं तो किसी भी वृक्ष के नीचे रह सकता हूँ।
जो गोस्वामी थे वो बड़े मन में कभी नहीं रहे।
तो प्राचीन समय में जो गोस्वामी थे वो कभी मंदिर के अंदर नहीं रहे।
अलग अलग पेड़ के नीचे रहते थे,
अलग अलग पेड़ों के नीचे रहते थे
वो और वो संतुष्ट थे। तो पापा ने कहा मैं तो पेड़ के नीचे भी रह सकता हूँ के नीचे रहूँगा कोई आयेगा नहीं।
तो प्रापा ने कहा मैं तो पेड़ के नीचे भी रह सकता हूँ लेकिन अगर मैं पेड़ के निचे रहूँगा तो कोई आयेगा नहीं मैं मंदिर बनाऊंगा,
लाखों
लोग आयेंगे तो मैं सुन्दर मंदिर बनाऊंगा। तो लाखों लोग आयेंगे।
to
a
a e a a, उनका नाम जो देश है उन पर ध्यान
कर रहे थे तो 1 बार पापाजी लॉस एंजलेस में जहाँ जो मंदिर है विरह का नाम है रुक्मिणी द्वारकाधीश तो वहाँ पर ध्यान कर रहे थे तुम
भगवान उनके में कहा भारत में लौट।
तो भगवान ने कहा अबे बाबू अब तुमने पश्चिम देशों में कृष्ण भावनामृत की स्थापना कर ली है अब तुम लौटो भारत देश में,
भारत में लौटे, प्रपा
जी भारत में लौटे नहीं भारत में
विदेश जाने से पहले मैंने प्रयास जलीैमेंभी अध्ययन प्रयास किया था ज्यादा सफलता प्राप्त नहीं है।
तो प्रवपाजी ने विदेश जाने से पहले भारत में बहुत प्रयास किया था और स्पेशली आपके दिल्ली में भी बहुत प्रयास किया था लेकिन कोई सफलता प्राप्त नहीं
हुई थी पर लौटे इंडिया में सौ विदेशी भक्तों के साथ प्रोप जी लौटे
भारत में सौ विदेशी भक्तों के साथ
भाई यान में का क्रांति फैल गयी
तो वो प्रॉपर लौटे तो हर जगह क्रांति फैल गई।
तो वही पुरुष शहरों में मंदोगमाप्पज प्रापा
जी की इच्छा थी कि सारे प्रसिद्ध शहरों में मंदिरों का निर्माण हो।
तो प्रापा जी की इच्छा थी जो दिल्ली जो इनपर का स्थान है इन्द्र जहां पर भी मंदिर की स्थापना हो।
तो क्या से आप ने सुना है दिल्ली में पहला केंद्र था आनंद निकेतन
में, तो आप देख सकते हैं दिल्ली में जो पहला केंद्र था इसको न का वो था आनंद निकेतन में ओम
जी सारी मुर्गियों की स्थापना हुई थी
उस में तो वहाँ पर राधा पारी की स्थापना हुई थी
या सुन्दर बना
है रोहिणी में तो उसके बाद प्रचार बढ़ता गया और आप देख सकते हैं के प्रयास से रोनी में सुंदर मंदिर बना है।
तो
हमें
यह नहीं सोचना चाहिए सुंदर मंदिर बंदर बन गया हमारा काम खत्म
तो हमें यह नहीं सोचना चाहिए अब सुंदर मंदिर बन गया हमारा काम खत्म।
भक्तों का व्यवहार भी बहुत सुन्दर होना
चाहिए, भक्तों का व्यवहार भी बहुत सुंदर होना चाहिए।
असली पनमेंटगेहना क्या है वैना के गुण?
तो अब जैसे शास्त्रों में पढ़ते हो। किसी वैष्णव का असली कहना क्या है? वैष्णवता के गुण
को जाना चाहिए।
हमें अपने आप को आध्यातिक रूप से सजाना चाहिए, गुणों से, गुणों से सजाना चाहिए।
तो हम सब में विनता का भाव होना चाहिए।
इसका अर्थ है कि हम सब में विनम्रता का भाव होना चाहिए।
हम एकता के साथ कर करे, 1 दुसरे के साथ, तो हम एकता के
साथ कार्य करें, 1 दुसरे के साथ
हो, हम नए भक्तों को मिलते हैं,
कई बार हम नए भक्तों को मिलते हैं।
हमारा उदेश्य क्या है?
भक्त बनाये, हमारा उद्देश्य क्या है कि
हम सबको भक्त बनाए में होना चाहै। शास्त्र आधारित रखे।
तो हमारा यह भाव होना चाहिए कि हमारा जो आचरण है वो शास्त्रों पर आधारित रहे।
और 1 दुसरे के साथ क्या होना चाहिए? 1 साथ काम करने की इच्छा होना चाहए।
1 दुसरे के साथ काम करने की
इच्छा होनी चाहिए, काम करने की इच्छा होनी चाहिए।
l for me will be soon हा व you कorprेtwitतो प्रवपाद ने कहा योर
लव फॉर मी विल बी शो हाव
यू कॉरपोरेट विदिचदरतुमकितना प्रेम कैसे मान होगा आपके के द्वारा?
तो प्रापा जी कहते है की मेरे प्रति आपका कितना प्रेम है, यह कैसे प्रकट होगा आपके आचरण से?
पापाजी ने कहा वेरी इमपोर्टंट वी work टुगेदर।
तो प्रापा ने कहा इस वेरी इम्पोर्ट दैट वी वर्क टुगैदर, यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हम साथ मिलकर काम करें।
इंग्लिश में कहा होता है यूनाइटेड स्टैंड
वाइड फॉर, इंग्लिश में कहा होता है? यूनाइटेड स्टैंड डिवाइडेड वी फॉल ले पहले सुनाइए
अनुवाद क्या है?
इसका अनुवाद क्या है?
सकोगे नहीं तो झगड़ा करोगे, सख्या आगे बढ़ी।
तो अगर आप 1 दुसरे से जुड़े रहोगे तो आप आगे बढ़ते रहो, लेकिन अगर आप 1 दुसरे से अलग हो जाओगे तो आप आगे नहीं बढ़ सकते।
कहा है, कॉरपोरेशन शुरू होता है?
तो 1 प्रसिद्ध व्यक्ति ने कहा कि जब हम मिलते हैं 1 दूसरे से, तब हमारा कॉरपोरेशन शुरू होता है?
1 से काम करेंगे तो आगे बढ़ पाएंगे।
वे कहते हैं कि यदि हम साथ में काम करेंगे तो आगे बढ़, पाएंगे
और कर, सेवा करेंगे तो 1 साथ
रहेंगे और जब आप साथ में सेवा करेंगे तो 1 साथ रहेंगे।
शुरू में हम मिलते हैं 1 दूसरे
को, शुरू में हम मिलते हैं, 1 दूसरे को,
1 दूसरे को साथ मिलते हैं, कर रहे हैं। वो प्रोग्रेस है।
जब हम फिर सब साथ में आते हैं और सेवा करते हैं, तो प्रोग्रेस करते हैं।
ये है सफलता, और जब हम साथ
में सब सेवा करने लगते हैं, तो ये है असली सफलता, ये है सफलता, ये है सफलता
को जोड़ते हो, उनसे अच्छा संभल नहीं हो। क्या होगा? जो है वो छोड़ देतेहैं आपकी संग,
जब आप दूसरों से मिलते हैं, उनको जोड़ते हैं। और यदि आपका उनके साथ में अच्छा संबंध नहीं होता, तो फिर क्या होता
है,
क्या होता है, क्या होता है,
हो जाता है, युद्ध हो जाते, जो
हो जाता है, अदा अलग अलग हो जाते है।
कॉरपरेट टुगेदर इसे कहते हैं कॉरपोरट
कॉरपरेट
टुगेदर, getting together is a begning of corporation, getting together, is a binging of
corporation, staying together, is a begning of cooperation,
the progress, you walk together, many
progress, if you work together, the progress is, if you walk together and
not
fiting success, and if you solve together, widout fit, that is success
to। इकटठे हमारे पास आना चाय की मृत, ऐसे करें, सेवा करें और 1 साथ
की 2 दिन के लिए हम इकट्ठे रहे और तीसरे दिन अलग हो जाना है, हमारा प्रयास होना चाहिए इकट्ठे मिलकर, सेवा करे और आगे बढे।
तो हम चाहते है की ऐसा चाहते है की हम रहे, हमारा क्या।
तो अगर आप चाहते है की ऐसा हो तो आपके अन्दर क्या भाव होना चाहिए, विनम्रता का भाव होना चाहिए।
उदारण दिया पिता के 4 बेटे थे,
तो प्रापा जी ने 1 उदाहरण दिया कि 1 पिता के 4 बेटे थे
औ
झगड़ा होते रहता था, इन चारों
का झगड़ा होता रहता था।
पिता ने 1 दिन चारों बेटों को
बुलाया तो पिताजी ने 1 दिन सभी
पुत्रों को बुलाया और 1 छोटी लकड़ी का 11 बेटों को दे दी तो
11 लकड़ी की छड़ी सब बेटों को दे दी। तोड़ो इसे तो बोला तोड़ो इसे तो
चलो भाईयो ने आसानी से तोड़ दिया
और सबने आसानी से उस छड़ी को तोड़ दिया
को बांध दिया।
अब इसे तोड़ो तो फिर पिताजी ने कुछ गट्ठे बांध दिया और बोला अब
इसे तोड़ो कोई भी तोड़ नहीं पाया
पर कोई तोड़ नहीं पाया।
फिर यूनिटी।
तो प्रपज ने कहा यूनिटी इस स्ट्रेंथ एकता में बल है।
तो बना लिया। असल में हमें सुन्दर मंदिर, सुंदर आचरण के द्वारा लोगों को आकर्षित करना है, सेवा में लगा है। और यह देखना है कि वो इकट्ठा राये।
तो हमें यह नहीं कि अभी सुंदर मंदिर बना दी। और बस हमें सुंदर आचरण भी रखना है। ताकि लोगों को जो लोग जुड़े है वो भी सुंदर आचरण के माध्यम से आगे आकर्षित हो और सेवा में लगे। तो ये है असली उद्देश्य
क्या
चेतन्य। मारू ने कहा था तरणासनीच।
तो अगर ये भाव होगा, यह तो बड़ा प्रसि श्लोक है जिसे आप का परिचित हो,
ये बड़ा ही प्रसिद्ध श्लोक है जिससे आप परिचित हो,
आपको रोना जाए।
तो चेतना आप वो बता रहे हैं, आपको अत्यंत सहनशील होना चाहिए और और घास से भी ज्यादा पतित होना चाहिए। और दूसरों को आदर 2
उम्मीद मत
रखो और आपको बदले में आदर की उम्मीद मत रखो।
तो इस भावना से कार्य करोगे तो क्या लाभ होगा? आप सदा आयेगा, नाम कर सकोगे तो
इस इस भावना से जब आप कार्य करोगे तो आपको क्या लाभ होगा?
सदा हरिनाम कर सकोगे।
तो हम बक्सों के व्यवहार में हमें 1 दूसरे के गुणों को देखना चाहिए।
प्रपात कहते थे हमें भक्तों के व्यवहार में 1 दूसरे के गुणों को देखना
चाहिए, अब गुणों को नहीं, अब गुणों को नहीं, गुणों को देखते हुए हमें भाव होगा आदर का, यदि आप गुणों
को देखोगे तो आपके अन्दर भाव होगा। आदर का।
तो ये आवश्यक। है। गुणों को अनुकूल करें,
ये आवश्यक हैं।
आप गुणों को अनुकूल करें में रुचि
बढ़ाए हरी नाम में रुचि, बढ़ाएं
में मुझे पूरा विश्वास है जो आयंगे उनकी संख्या बढ़ती जाएगी।
तो मुझे आपके। इस मंदिर में मुझे पूर्ण विश्वास है कि जो लोग आयेंगे, भक्त आयेंगे उनकी संख्या बढ़ती जाएगी और
वो मंदिर आये, उनका स्वागत करना चाहिए।
तो आपके जो मंदिर में आये, हमें उनका स्वागत करना चाहिए, मेरे शब्दों से चर्चा करनी चाहिए, मीठे शब्दों से चर्चा करनी चाहिए।
वो कहेंगे बड़े प्रेम से स्वागत किया।
तो फिर वो लोग कहेंगे की हाँ हम मिस कौन रोहिनी मंदिर में गए थे, उन्होंने बड़े प्रेम से हमारा स्वागत किया,
हम मंदिर गए, भाग गए,
ऐसा हुआ कि वो कहें कि हम मंदिर गए। लेकिन भक्त तो भाग ही गया, किसी
ने हमारा स्वागत नहीं किया, किसी ने
हमारा स्वागत नहीं किया।
तो आप लोगों को आकर्षित नहीं कर सकोगे, लोगो को आकर्षित है, लोगों को
आकर्षित नहीं कर पाएंगे।
सो हम जुड़ते है लोगो के साथ, पर हमें मिलकर सेवा करना है, हम
जुड़ते हैं लोगों के साथ, लेकिन हमें मिलकर सेवा करना है, वो है असली कॉरपोरेशन वो है।
असली कोपरेशन प्रपा का भक्ति भक्ति।
तो प्रौपर ने कहा भक्ति इस भक्ति, वेन्यू टुगेदर सर्वकृष्ण।
प्रभा ने कहा अलग अलग भक्तों का अलग अलग विचार हो सकता है।
तो प्रपज ने कहा अलग अलग भक्तों का अलग अलग विचार हो सकता है।
आपका उद्देश्य क्या होना चाहिए?
सबका उद्देश्य क्या होना चाहिए, कृष्ण की सेवा चाहिए।
आप मन के फुल टाइम भक्त हो या कांग्रिगेशन को चाप मंदिर के फुल
टाइम भक्तों या कांग्रिगेशन भक्तों, वहाँ हम भाव होना चाहिए।
हम सेवा में जुड़े, हमारा भाव होना चाहिए कि हम सेवा में जुड़े हैं
ा सेवा कर सकते हैं।
और जो ब्राह्मण दिक्षित भक्त हैं उनके पास ये सुविधा है की भगवान के अर्चा विग्रह की सेवा कर सकते हैं।
बाबा जी की महिमा बढ़ती जा रही
है, प्रापा जी की महिमा बढ़ती जा रही है।
कल शाम को मैं इटरफेतमीटिंग हुई थी,
तो कल हमारे मंदिर में शाम को इंटरफेस के प्रोग्राम हुआ था। प्रीचिंग का
अलग अलग धर्मों के प्रतिनिधि,
इंटरफेज का मतलब की अलग अलग धर्मों के प्रतिनिधि। वहाँ आए थे।
स
थिंक शीशगंज गुरद्वारा के जो हेड थे, सरदारजी उन्होंने वो भी सेवा, वो भी वहाँ पर थे।
बोला मैं हूँ रेडलाइट में किताब बेच रहे हैं, सोच रहा हूँ बड़े
तो कहते है। उन्होंने बोला कि जब मैं इस कोड के भक्तों को रेड लाइट पर पुस्तक बांटते देखता हूँ तो मैं बहुत सोचता हूँ की बहुत उत्तम कोटि के भक्त हैं।
कई बार हम तुम रेड लाइट में रेडलाइट
तो कई बार लोग बोलते हैं कि आप रेड लाइट पे प्रीचिंग क्यों करते हो,
मर विराक लाभ उठाते हैं। भगवान का संदेश आगे बचाने के लिए,
तो हम हर हर सुविधा का लाभ उठाते हैं। भगवान के संदेश को आगे बढाने के लिए।
जब हम आचनकरेतोप्रपाकी महिमा भी बढ़ती है,
जब आप अच्छी तरह आचरण करेंगे तो प्रौपत की महिमा भी बढ़ती है।
वो कहते है प्रभाव की शब्द क्या देखो दिन दिन बड़ी जा रही है।
वो कहेंगे कि देखिये प्रोपज भक्तों को देखो इनकी संख्या दिन पर दिन बढ़ती जाती जा रही है।
हमें संख्या बढ़ाना है भक्तों की संख्या है क्योकि? क्या होता
हमे भक्तों की संख्या को बढ़ाना है क्यों? क्योंकि जा रहे हो जा रे, देखो तारे कहो कृष्ण उपदेश तो
जीवन के विषय में चर्चा की जाती है हमारे
कार को जैसे की प्रपात के जीवन के विषय में चर्चा की जाती है।
हर एकादशी को प्रो जी जिला है जो प्रयास उन्होंने किया जो ग्रंथों की रचना की, नो पढेंगे की 10 हजार सालों तक
प्रऊपाजीने, जो प्रयास किया जो प्रपाजीनेग्रंथ लिखे है उसका जो हम पढेंगे
तो 10 हजार वर्षों तक पढेंगे, उसको
10 हजार वर्षों तक पढेंगे।
यह नही सोचना चाहिए ये जो है उनका कोई स्थान नहीं तो हम में
यह नहीं सोचना चाहिए कि ये जो ग्रंथ है इनका आधुनिक जीवन में कोई
स्थान नहीं है, जो है हमारी
में
महत्वपूर्ण शिक्षा प्राप्त हो रही है।
इन ग्रंथों से हमें महत्वपूर्ण शिक्षा प्राप्त
होती है को बकायदा पढना चाहिए तो
इन ग्रंथों को बाकायदा पढ़ना चाहिए और
पढ़ोगे अनुकूल यदि आप इन्हें पढोगे तो
मित्रता का भाव भी अनुकूल कर पाओगे
और कृष्ण में हमारी रूचि होनी तो
इन ग्रंथों के पढने के प्रति हमारी रुचि होनी चाहिए में हमारी रुचि होनी चाहिए।
आप सब को बहुत शुक्रिया और प्रयास
हे
जो
बनाने के प्रयास से या
तो आपका बहुत बहुत शुक्रिया तो आप सभी भक्तों के प्रयास से उन्होंने बहुत इसमें सहायता दी है हमारे राष्ट्र, प्रिय, प्रभु और उनके और भी आप सबका सहयोग जो और मेंबर हैं उन सभी के प्रयास से सुंदर मंदिर बन गया
है जी उदाहरण उदाहरण व्यक्ति लंगड़े व्यक्ति
को मिला तो प्रापा जी को उदाहरण देते थे कि जब 1 अंधा व्यक्ति 1 लंगड़े व्यक्ति को मिला व्यक्ति ने
कहा मैं देख नहीं सकता, लंगड़े ने कहा मैं न तो अंधे ने कहा
मैं देख नहीं सकता और लंगड़े ने कहा मैं चल नहीं सकता
ने कहा मेरे पास उपाय हैं।
तो लंगड़े व्यक्ति ने कहा मेरे पास 1 उपाय है उपाय क्या है उपाय
मेरी आँखें, तुम्हारे पैर, मेरी आँखें और तुम्हारे पैर मुझे अपने कंधे में उठाओ
तुम मुझे अपने कंधे पे बिठाओ दोनो
आगे बढ़े
दोनों इस तरह आगे बढे
तो हम कोई योग्यता है कोई और
योग्यता है तो हम भक्तों में भी किसी में 1 योग्यता है किसी और
में दूसरी योग्यता है मिलकर करेंगे भगवान का संदेश दूर दूर तक फैलेगा तो
हम मिलकर काम करेंगे तो भगवान का संदेश दूर दूर तक फैलेगा। मानते हो मानते हो
hi krishna re
krishna किसी का कोई प्रश्न है समीक्षा
सबको सुनाई दिया आपको उसको सुनाई दे
रहा था, आपको उस तरफ सुनाई दे रहा था माता जी के उस सेक्शन
में
समझ भी आना चाहिए, सुनाई के
समझ भी आना चाहिए
बोलिए हरे किशना गुरु महाराज आपने अपने मीठे बच्चों के द्वारा, भगवत शब्दों के द्वारा सबका उत्साह बढ़ाया इसके लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद थैंक यू वेरी मच और गुरु महाराज मेरे को बहुत प्रसनता हो रही है की मेरे को आप पसंद कर 1 मौका मिल रहा है और आप उसका आंसर दे रहे हैं गुरु महाराज मेरे 2 प्रश्न है 1 शिष्य के लिए अपने गुरु के प्रति मोस्ट मोस्ट इम्पोर्टेंट क्या कर्तव्य है जिसको कभी भी वो अपने जीवन में न भूलें जो आप
ने
समय है उसका पालन करो तो
जो दीक्षा के समय शिष्य जो बचन आपने दिया है उसका पालन करना उसका पालन करो।
दूसरा प्रश्न यह महाराज जैसा की शास्त्र बताया गया आपने यह बताया की गुरु का अपने शिष्य के प्रति जो संबंध बना रहता है जो जब तक शिष्य गुरु के वचनों के प्रति सचेत रहता है जब शिष्य अपने गुरु के वचनों को तोड़ देता है तो संबंध टूट जाता है वो जैसा कि हम देखते हैं कि हमारे पिता भगवान श्री कृष्ण है और इस जगत में भी जो हमारे पिता होते हैं तो पुत्र अपना सम्बन्ध तोड़ देता है अपने पिता से फिर भी उनका सम्बन्ध बना रहता है। और जब की बताया गया कि गुरु और शिष्य का सम्बन्ध पिता के भी सम्बन्ध से ज्यादा है फिर इसको हम कैसे समझे
केशन गुरु शिष्य सम्बंध तब तक बना रहता है जब जब तक पालन करता है गुरु के वचनों का और पिता पुत्र का सम्बन्ध अगर पुत्र, पिता तोड़ भी देता लेकिन सम्बन्ध बना रहता है लेकिन गुरु शिक्षय का सम्बन्ध तो उससे भी ऊपर गिना गया है तो इसको कैसे समझे को कैसे बना
रहता
चाहिए
गुरु हमारे
तो गुरु शिष्य का सम्बन्ध ऐसा है कि यह नहीं सोचना चाहिए की हम कुछ भी करेंगे और गुरु हमारी सुरक्षा करेंगे।
भगवान कहते है
तो भगवान भी भगवत गीता में कहते हैं कि सभी धर्मो का परित्याग करके जब तुम मेरी शरण में आओगे तब मैं तुम्हारी रक्षा करूंगा मोर cosine
गुरु
मेरा प्रश्न था जैसा की आप कहते हैं कि जो स
सबसे इम्पोर्टेंट जो इंस्ट्रक्शन होता है गुरु
का सी सी के प्रति की अच्छे से नाम जप करें और कैसे अच्छे से नाम रूचि डेवलप कर सकते हैं। यह गुरु मेरा प्रश्न था
और कैसे अच्छे से नाम में रूचि डेवलप कर सकता है और कैसे बढ़ाए रूचि अनुकूल करोगे जॉब करना है रूचि अनुकूल करोगे,
जप करने से जप करोगे तो रूचि बढ़ेगी, जब करोगे तो पढ़ोगे तो रूची
बढ़ेगी, जब करोगे, ग्रंथों को पढोगे तो
रूचि बढ़ेगी, सेवा करोगे तो रूची बढ़ेगी,
सेवा करोगे तो रूचि बढ़ेगी
हरे कृष्ण
गुरु
हरी कृष्णा गुरु गुरु थैंक यू सो मच फॉर द वnडfुललेक्रमहाराज मेरा प्रश्न
है कि भक्तों में सिर्फ और सिर्फ
गुणों को कैसे देख सकते हैं गुणों
को टू सी ओनली गुड क्वालिटीज इन
प्रयास करने से
ट्राइन ट्राई अगेन तो
इंग्लिश में कहावत है ट्राई ट्राई अगेन यू सक्सीड इन द लास्ट या करते जाओ, प्रयास करते जाओ।
भगवान कहते है की भी हो मैं उसे दूर कर देता हूँ।
तो भगवान कहते हैं की भक्त में अगर कोई कमी भी हो तो मैं उसको दूर कर सकता हूँ, दूर कर देता हूँ, दूर कर देता हूँ।
hari krishna yeh guru dnb please accept myhambisensis please for give me, if i say anything rong और i do any फेंस, this is not my question बहुत सरे डिवोटीज है हमें बहुत खुशी है कि बहुत बड़ा मंदिर बना बट हम जिन जगना जिसे सुबह रात दिन रात प्रार्थना करते थे वो विटनेस नहीं बन सके इतने बड़े महोत्सव की आज जब हम यहाँ पर सब के सामने है, जगना जी अकेले हैं तो क्या इतने बड़े ऑल्टर में हम जगना जी को नहीं ला सकते
को लोग प्रार्थना करते है मंदिर बनाने के लिए, उनकी कृपा
से बना है द डिसीजन इस टोटली
मिनट 1 मिनट तो क्या उनको ऊपर नहीं ला सकते
जी प्रकट है
और
जगननाथ जी यहाँ प्रकट हैं कृष्ण के रूप में और चेतन्य महाप्रभ के रूप
में
कृष्णा से गोरा जगना
कई बार ओल्टर में देखना पड़ता है कितनी जगह
है तो कई बार हमें ये देखना पड़ता है कि ओल्टर में कितनी जगह है।
आपके इस मद में राधा माधव ललिता
विशाखा भी है तो आप देख सकते है की हमारे दिल्ली मंदिर में यहाँ पर राधा माधव ललिता विशाखा भी है
और गोरे होते है है
तो जनरली गौर नेता होते हैं लेकिन यहाँ पर पंच तत्व देख सकते हैं आप
पर लगाने की देखभाल होती जाएगी पर जग
नाजी की देखभाल होती जाएगी।
गी रेशा ये प्रणाम गुरु महाराज जी, मैं लगभग कौन से सन 2020 से जुड़ा हूँ और कई कथाएं सुनी हैं। लेकिन मैं पहली बार आप मतलब पहली बार लाइव आपकी कथा देखी है और पहली बार आपको ऐसे बोलते हुए देखा सज ग्रेड इंस्पिरेशन। अब मुझे पता लगा कि बाकी डिवोटिज क्यों आपकी वीडियो वगैरह इतना पोस्ट करते हुए मुझे उसका पीछे कारण नहीं समझ जाता था। सज हूज ग्रेड इंस्पे महाराज जी, महाराज जी, मेरा ये सवाल है। जब हम एसोसिएशन में होते हैं भक्तों के साथ और एसोसिएशन में, हम इसी लिए रहते हैं ताकि हम भक्ति में आगे बढ़ पाए। लेकिन उस एसोसिएशन में जो हमारे मित्र हैं कहीं वो भक्ति में गिर ना जाएं। उन उन गुणों की वजह से जो उनको ले डूबेगी जो उनकी भक्ति खराब कर देगी। और अगर हम अगर वो बातें उनको बता रहे हैं इसके बावजूद भी वो अपनी बात को नहीं मानते और वो पर्सनल लड़ाई पर आ जाता है। इस चीज को लेकर जहा पे हम शीला प्रपात जी के द्वारा उनके मिशन को आगे बढ़ाएं, इस पर चर्चा करें अपनी भक्ति आगे बढ़ाएं, इस पर फोकस करने के लड़ाई पर्सनल लेवल पर हो जाए तो उसको कैसे शॉट आउट करें इसके बारे में अवश्य बताएं।
हम भक्तों के संग में आते आगे बढ़ रहे होते हैं। लेकिन कई बार हमारे जो मित्र में उनके कुछ होते है पॉइंटउटकरतेहैतो लग जाते है, इसको कैसे देखे पर्सन हो जाते है पर्सनल लड़ाई में आ जाते हैं। आगे बढ़ने की वजह
व्यक्ति आपके सुधार के लिए कोई सजेशन देता है। हमें स्वीकार कर लेना चाहिए तो अगर
कोई व्यक्ति आपको अच्छा अच्छा सजेशन दे आपके उधार की बात करें तो तो स्वीकार कर लेना चाहिए ये नहीं की उसे इशा इसलिए मुझे ऐसा बोल रहा है।
आप सीनियर भक्त का सहयोग ले सकते हो, आपके मन में कोई डाउट हो
तो आप किसी सीनियर भक्त का सहयोग ले सकते हो। अगर आपके मन में कोई डाउट है
तो
हरे कृष्णा प्रणाम महज मेरा प्रश्न आया, मुझे क्षमा कीजिये अगर मैंने मेरा प्रश्न आपको गलत लगे लेकिन मैं आपसे समाधान चाहता था। महाराज तो महाराज जैसे अगर हम 1 परिस्थिति में देखते हैं कि 2 भक्त, 2 लीडर्स हैं और इन जनरल 2 भक्त हैं और उनका सुभाव नहीं मिलता है। दोनों भक्त अपने अपने अच्छी भक्ति कर रहे हैं लेकिन उनका स्वभाव नहीं मिलता है। जब भी वो साथ में आते हैं तो केमिस्ट्री में मैच हो जाता है और उसके कारण क्या होता है कि सेवाओं में और वातावरण में 1 हेल्दियटमॉस्फे नहीं रहता है। दरसा आप बताये थे महाराज कि हम सब को 1 दूसरे के गुण देखने चाहिए और हम सबको सैंशीलहोना चाहिए। लेकिन महाराज कभी कभी मन में आता है कि क्या ऐसा उपाय ज्यादा सरल नहीं है कि दोनों भक्त अच्छे भक्त हैं लेकिन दोनों भक्त अपनी अपनी जगह सेवा करे और इकट्ठे सेवा न करे तो शायद समाधान जो है वो आसानी से मिल जाएगा। मनाज आपसे प्रश्न पूछ रहा था,
कई बार लीडर्स होते हैं सबका अपना, अपना आप मे उनका कमेस्ट्री मैच नहीं करता। तो आप में सेवा इकट्ठे ऐसी करनी पड़ती है। आपने जैसे कहा 1 दुसरे के गुण देखने चाहिए वो नहीं देखना चाहिए। लेकिन कई बार हमें ये लगता है कि 2 वेटर इकट्ठे न सेवा करे। एटलीस्ट अलग अलग सेवा करने
की
अलग
अलग भक्तों के अलग अलग भाव हो सकता है। पर हम सब का क्या है, कार है कृष्णा की सेवा के लिए।
प्रपा जी कहते थे कि भक्त का अलग अलग भक्तों का अलग अलग भाव हो सकता है। लेकिन सबका उद्देश्य 1 ही होना चाहिए। कृष्ण की सेवा
अभी उम्मीद नहीं कर सकते। अगर इस मंदिर में होती है। सब हर प्वाइंट में 1 ही सोचेंगे है।
यहाँ पर भी मंदिर में इतने सारे भक्त हैं तो सब 1 ही तरीके से नहीं सोचेंगे।
यह सम्भव है। उनके अलग अलग विचार हो।
यह बहुत सम्भव है कि सबके अलग अलग विचार हो।
पर टेस्ट है। यह कृष्ण के सेवा के लिए अच्छा है या बुरा?
हमें ये देखना कृष्ण की सेवा के लिए अच्छा है या बुरा?
हम केवल हमारे अहंकार की सेवा कर रहे हैं, त्याग देना चाहे।
यदि हम केवल अहंकार की सेवा कर रहे हैं तो हमें उसे त्याग देना चाहि।
is really god for krishna?
what is really good for krishna के
लिए क्या
बहुत बहुत धन्यवाद। महाराज बहुत सुन्दर अपने आशी 1 दुसरे से को ओपरेट करना है। तो हमें विनम्र होना पड़ेगा, विनम्र बनना पड़ेगा, हम्बल बनना पड़ेगा नहीं। कई बार मन में ऐसा विचार होता है। अगर मैंने ज्यादा विनम्रता का पालन किया तो लोग मुझे मूर्ख बना देंगे। मेरा फायदा उठायेंगे तो उसको ज्यादा लाभ हो जाएगा। मैं मूर्ख बना रहूंगा तो वैसे ही बहुत विनम्र हूँ। तो ये विचार आते हैं। तो इसलिए लोग बोलते हैं कॉरपोरेशन केवल 1 थेरेटिकल रह जाता है। हर कोई अपने में हमारा उद्देश्य कुछ और हो जाता है। तो कैसे इस भावना से ऊपर उठे
तो प्रश्न है की कई बार आपने, कई बार मन में आता है की ज्यादा विनम्र हो जाऊँगा तो लोग मेरा फायदा लेंगे और मुझे मूर्ख बना लेंगे।
हमें सोचना चाहिए की भक्ति के मार्ग में मानो किसी ने चापलूसी घर सेवा सेवा करवाई है तो कृष्ण सेवा हुई थी। आप कभी एम्प्लॉयड नहीं हो सकते
अगर देखते हो भक्ति के मार्ग में किसी ने चापलूसी से कोई सेवा करवाई है
सो
उसमें भी कोई हानि नहीं है वो कृष्ण की सेवा हो रही है।
ये जो इसका 1 मैनेजमेंट स्ट्रक्चर है
इस समय जो 1 मैनेजमेंट स्ट्रक्चर है जो स्कोर में जो मैनेजमेंट स्ट्रक्चर है
प्रेजिडेंट वी सी
जैसे टेंपल,
टेम्पल जैसे स्कॉलर मैनेजमेंट स्ट्रक्चर है टेम्पल प्रेसिडेंट, जी, बी, सी और बाकी हो उसमें
को रिस्पेक्ट करना चाहिए तो उन सबको हमें
रिस्पेक्ट करना चाहिए यही नहीं की कोई सिस्टम नहीं है, यह नहीं कि कोई मैनेजमेंट सिस्टम नहीं है
प्रश्न अगर बने
तो
एडवांटेज ले लेता है
तो वो
भी ठीक नहीं है तो वो भी ठीक नहीं है।
हमें राम अधिकारी हैं, हमें ये देखना चाहिए दूसरा व्यक्ति क्या सेवा कर सकता है कैसे करना चाह?
तो यदि हम अधिकारी हैं तो हमें देखना चाहिए कि दूसरा व्यक्ति क्या सेवा कर सकता है, क्या करना है या करना चाहता है।
ये
थैंक यू गुरबाज सबसे पहले तो आपका बहुत बहुत धन्यवाद इतना सुन्दर मंदिर और इतनी सुन्दर डीटीस देने के लिए और हमें सेवा में लगाने के लिए महाराज मेरा प्रश्न यह है की अभी तक में विशेष रूप से फंड कलेक्शन की सेवा में था तो अभी जैसे मंदिर का निर्माण हो गया ओपन हो गयी तो मेरा क्या कर्तव्य होना चाहिए की फंड कलेक्शन बंद कर 2 या आगे क्या सेवा करूँ प्लीज जरा बताइए महाराज और मेरे और भी बहुत सारे है जो फंड कलेक्शन की सेवा में थे तो उन सब के लिए आपका क्या इंस्ट्रक्शन है प्लीज पहले तो थैंक
यू के है पहले मैं फण्ड कलेक्शन कर रहा था मंदिर बन गया मंदिर तो अब मैं क्या सेवा करूँ, फंड कलेक्शन बंद कर 2 और सेवा करूँ बाकी जो फंड कलेक्शन कर रहे थे उनके लिए क्या इंस्ट्रक्शन है?
फंड कलेक्शन कभी बंद नहीं होगा,
फंड कलेक्शन कभी बंद नहीं होगा की 44
चीजो की आवश्यकता रहेगी mitahathenlevr cैp्टल ऑgेniजaशion
pet
ऑर्गेनाइजेशन कैपिटल मतलब पैसा और इसके द्वारा लोगो को भगवान की सेवा में जोड़ रहे हो। हमारा उदेश्य ha पहले man frend, resig than frendrezing हम लोगो से पैसा नही देना चाहते को का मित्र भी बनाना चाहते हैं
के लिए देते थे तो अभी थोड़ा मुश्किल रहेगा तो आप आशीर्वाद दीजिये को आसानी से कर पाए के
मंदिर मे मार भी पूरा हुआ नहीं
है,
आपके मंदिर में म्यूजियम भी बनाया
है
मंदिर में
मंदिर क कई कोनों में भी स्थान काम बाकी है
अरे कृष्णा महाराज थैंक यू सो मच महाराज कुछ डोनर्स से भी हमने नवैठकिहैआजके लेक्चर में आपके जिन्होंने कॉन्ट्रीब्ूशन किया बहुत से कर रहे हैं लेकिन फिर भी हल्का सा डाउट रहता है की कोन को तो हम दे रहे हैं लेकिन ऐसी
इस कौन सभी भक्तों की देखभाल करता
नहीं नहीं हम उनसे बात नहीं करते,
ये नहीं कि कोई धन नहीं देता तो म बात नहीं करते
हम सबको
आदर देते हैं, हम सबको आदर देते
हैं
हम सबको आदर देना चाहिए हमे
सबको आदर देना ए ye he की कोई धन data to bat करते
को
dr है हम सबको adr
सबको आदर
देना चाहिए हमे so dr
hellen hadsel
was able to win any competition, she took part in, she was notes contest queen
cnoodeahed।
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