हम ISKCON की ही गीता क्यों बाटे? | SB 7.7.18 | 25 Dec 2023 | Ludhiana | Srila Gopal Krishna Goswami

Srila Gopal Krishna Goswami discusses why ISKCON distributes the Bhagavad-Gita and the importance of spreading its teachings. He addresses rising printing costs, the need for enthusiasm in book distribution, and ISKCON's growth in Punjab through media and outreach. The core message: true service means propagating the Gita and devotional chanting with sincere devotion.
Chapters
शिव भाव संसार अासामहाराजनेगर् जो संख्या 18
तो इस समय भागुदमकासालर स्वर पर रहे हैं। श्रीमद भागोतम की रचना राजदेव जी की थी। राजदेव जी ने नए ग्रंथों प्रकाशित किया था की रचना की थी। मुझे भी उन्हें लग रहा था मैंने कार में कुछ कमी रह गई है सो गए। उन्होंने कहा कि मैंने इतने सार का वर्णन के सार को प्रस्तुत किया है। भाग भी मुझे लगता है कि मेरे में कुछ अधूरापन है। वो भगवान शुगर क्या का शूल भक्ति पर बल नहीं दिया तो शिव में से भक्ति का ज्ञान है और आ गया है पर भगवान से चाहिए में रूप से अध्यन करना वर्धन करने से क्या लाभ होगा क्या लाभ होगा तो हृदय में मैल है। वो तो यहाँ लालमहेश दे रहे है लाजमराजने वि ज्ञान प्राप्त किया था। वो अपनी मादरी में थे। समाज में आप अनेक हीरो बनाते हैं। कोई फिर आपको पसंद हो पी का हीरो बन जाता है, कोई क्रिकेट आपको पसंद हो आप के लिए हीरो बन जाता है, कोई ब्लैक बेल्ट हीरो हीरो बोल जाता है। इसी प्रकार जो भक्ति में जुड़ते हैं भक्त हैं उनके भी हीरोज है हीरोज में 1 हीरो कौन है। राज राज हमारे ही रोज है और इन्होंने हमें का ज्ञान दिया है। उन के पिता उन के पिता का नाम बहुत ही तपस्या कर रे थे पर्वत में गए
वहाँ
1 शो देव के वर्षों के लिए हाथ ऊपर रखकर अपने टोल में अंगूठे के अंगूठे पर खड़े थे उनकी में आखो चीटिया
वो
जान नहीं सके वो परचा नहीं सके और भवानी आये थे खोजने के लिए वो ढूंढ नहीं पाये पड़ोस में खड़े थे समझ आगे चुचिया रहती है पचाना क्या कर रहे हो के वो हिलाने बन के और अगर अपने टोल में खड़े हो। वो किसी नहीं खड़ा हो। पायेगा सौ 6 महीने तो बाने वि ज्ञान प्राप्त किया और माता के घर में तपस्या उठाने गए थे उनकी मांग अकेली थी देवता थे वो सोचते थे बचाव माता के घर में कर देना चा पैदा हो नारमुनि नादम बुनी का कौन सी जाते है। वो ठीक समय पर पहुंचे। उन्होंने कहा के को को इस औरत के घर में है मानस कोई सुर नहीं है ने छोड़ दिया ने अपने आश्रम में ज्ञान लिया था सुनने से और माँ भूल गयी थी। अब शुरू सपा हाना खुश नहीं था कि बेटे का आकर्षण तो हानाशिपुरनेअनेक से यह प्रयास किया कि बार के 4 बदल जाए संदर अमेरिका प्लान के 2 अध्यापक थे। और तुम लोग सावधानी से काम नहीं करते पेश बदलकर मेरे दिमाग को घुमा कर वो के खुद नहीं पता जान कौन और दिमाग को बदल देंगे
देने
का प्रयास किया और मिस्र और तुम कैसे होता मेरे इस में कोई रूचि नहीं है। ज्ञान बड़ी शिक्षा है। वो कहते हैं मैं 5 साल की आयु से ज्ञान आराम में ट्रांजीशन लूंगा की हुई हर की हो रही है तो फिलहाल में लोग क्या कह रहे है? पर संदेश जिस प्रकार जिस प्रकार 1 पेड़ में है फूल होते हैं, फूल होते हैं। फूल पेड़ के छे अवस्थाओं से गुजर जाते हैं।
फूल पेड़ की 6 अवस्थाओं से गुजर जाते हैं।
पहले उनका जनम, पहले उनका जन्म पर
ट्रांसफार्मेशन, फिर उसका बदलाव लिंग, फिर वो उसका होता है।
अंत में
और अंत में मृत्यु को प्राप्त होता है।
और आत्मा में क्या अंतर है?
शरीर और आत्मा में क्या अंतर है?
क्या अंतर है? वो ज्ञान श्लोक में प्राप्त हो
तो
शरीर और आत्मा में क्या अंतर है? वो ज्ञान श्लोक में प्राप्त हो रहा है।
भगवत गीता का उपदेश
है।
दूसरे अध्याय से भगवत गीता का उपदेश आरम्भ होता है।
दूसरे अध्याय से भगवान समझाते हैं। आत्मा का रूप है जिसमे भगवान समझाते
हैं कि आत्मा का क्या रूप है।
आत्मा के विषय में ज्ञान बात करना बहुत महत्वपूर्ण है।
आत्मा के विषय में ज्ञान प्राप्त करना बहुत महत्वपूर्ण है।
कहते है पूरी गीता में सब पर है।
ठाकुर जी कहते है की पूरी गीता में सबसे महत्वपूर्ण संदेश है, आत्मा का
ज्ञान है,
हमारा है, यह नश्वर है,
ये वो नश्वर है, क्या हिंदू और
मुसलमान
चाहे आप हिंदु और मुसलमान हो,
इस हो यह बहुत ही श्री, ये
बहुत ही श्री नश्वर है,
पर आत्मा जो है वो सुनाता है आप देखते में जिसके द्वारा 1 राजा दे के
तू आत्मा सनातन है। हमारे भागवत में अनेक शास्त्र है, अनेक ग्रंथ है, जिसमें इस ज्ञान को दिया जाता है। ठाकुर बकोराजाेत्केतुकी महाराज कथा बता रहे हैं। ठाकुर जी ने कहा की सभी अध्यायों में से दूसरा अध्याय सबसे महत्वपूर्ण है, महाराज राजा तो राजा चित्र के महान
राजा थे, और उनके अनेक पति थे,
उनके अनेक पत्नियाँ थी,
किसी भी थे,
पर किसी से भी 1 संतान नहीं
थी, सदा दुखी रहते थे, सदा दुखी रहते थे, राजा थे, पर आगे संतान नहीं।
राजा बड़ा आगे संतान नहीं है।
तो 1 साल के पास आये, 1
सनद न के पास आये।
गीत
चेहरे से दिखता है।
उन्होंने कहा यह राजा तुम्हारे चेहरे से दुख दिखता है कि तुम दुखी हो
और क्या कहा है, क्या कारण है। राजा ने कहा मेरे चेहरे को देख कर पचाने दे हो, आप से क्या छुपा।
राजा ने कहा की आप मेरे चेहरे से देख बचाने तो मैं आपसे क्या छुपा हूँ,
मेरी कोई संतान नहीं है।
राजा ने कहा मेरी कोई संतान नहीं
है, जानता था चिंता यही है, आसान संतान नहीं है।
तो संत जानते थे की इस बात की, यही चिंता है की कोई संतान नहीं है।
उन्हें आशीर्वाद दिया
तो उन्होंने आशीर्वाद दिया कि तुम्हारे घर में 1 पुत्र पैदा
होगा, यह पुत्र खुशी देगा और दुख
भी देगा, तो ये पुत्र उन्हें खुशी भी देगा और दुख भी देगा।
गहराई से सोच रहा था संतान के लाज नहीं दिखा, सके बनेगा।
तो राजा इतनी गहराई से सोच रहा था अपनी संतान के बारे में की वो इस बात का अंदाजा ला सके की उनका उनका जो पुत्र है वो शो का कारण भी बन सकता है।
थोड़े समय के बाद पत्नी ने पुत्र को जन्म दिया।
थोड़े समय के बाद उनकी पत्नी 1 पत्नी ने 1 पुत्र को जन्म दिया
और पुरे शहर में को सुझा दिया।
प्यारे राजा इतना प्रसन्न था कि उसने पूरे शहर को सुधारा ब्राह्मणों को ध्यान दिया और काली काली
पत्निया थी हो गई।
जो दूसरी पत्नियां थी उनको उस पत्नी से इर्षा हो गयी।
राजा
वो सोच रही थी की ये राजा अपना सारा समय उस लड़के की
मां पत्नी को देता है को क्या नाम दिया था लड़के को क्या नाम दिया था।
हर्ष
खुशी का कारण है
जो खुशी के कारण और शोक दुःख का कारण
भी
कार्य सुख देता है देता है।
हम देखते हैं कि भौतिक संसार में हर कार्य सुख देता है और बाद में दुख भी देता है।
उन्होंने इस बच्चे को को जहर खिला
दिया, क्यूंकी उन स्त्रियों में हर्षा थी। तो उस बच्चे को उन्होंने जहर खिला
दिया और मृत हो गई और उसकी मृत्य हो गई। माँ को कोई अंदाजा नहीं था, माँ बेटा सोया हुआ है, उसकी माँ को
कोई अंदाजा नहीं था। जब 2 ने सोचा की बेटा सोया
हुआ है,
जब वो काफी समय तक जागा नहीं तो बेटे के निकट गयी,
देखा मर गया है और रोने लगे,
अब से देखा की वो मर गया है, तो वो रोने लगी।
राजा को पता लगा वो भी अत्यंत दुखी हुआ, राजा को पता चला वो भी अत्यंत दुखी हुआ, थोड़ी देर बाद
तो थोड़ी देर बाद 1 मुनी आये। राजा के महल में
मुनी
मुनी के साथ 1 और मुनी आये।
राजा पिछले समय हमारे बड़े दुखी दिखते हो।
मुन्नी ने कहा राजा पिछले समय जब आये थे तो तुम बड़े खुश थे, अभी तुम बड़े दुखी दिख रहे हो
तो राजा ने देहांत हो गया।
राजा ने कहा मेरे पुत्र का ध्यान
हो गया है और ध्यान हो गया
उन का ध्यान हो गया है। नारद मुनी और अंगीरा मुनी की कृपा से वो बच्चा हर्ष शो का थोड़े समय के लिए फिर जीवित हो गया।
हे आशोक तुम अपने माता पिता को
बोला की तुम अपने माता पिता को दुखी स्थिति में क्यों छोड़ कर चले गए, इतनी जल्दी क्यों चली जा।
समान कितना पुराना था।
पर शोक ने कहा इनका हमारा सम्बन्ध कितना पुराना है।
तो 1 साल, उन्होंने कहा की 1 साल पुराना है, 1 साल से पहले
जानते थे, तो ने 1 साल पहले तुम इस को चित्र के उनके को जानते थे,
का नहीं तो हमारा जवान जुड़ा है, केवल 1 साल पहले हमारा
मन जुड़ा है, केवल 1 साल पहले।
बेटे ने उपदेश दिया और फिर बेटे
ने अपने माता पिता को उपदेश दिया और उसको सुनकर महाराज के संतुष्ट हुई।
तो
तो हम सुनते है की आत्मा बहुत शरीर बदलता रहता है, जैसे की श्लोक बताया गया है वो छ अवस्थाओं से गुजरता है।
हम लेते हैं, हम जन्म लेते हैं। भगवत गीता यूनिवर्सल नॉलेज दी कहा करते
थे कि भगवत गीता का जो ज्ञान है वो पूरे विश्व के लिए है,
पूरे संसार के लिए, केवल हिंदुओं के
ले, केवल हिंदुओं के।
निर ने कहा यह उधार
प्रॉपर ने कई उदाहरण देकर कहा की हमारा शरीर से वर्ता से बदलता है, चाहे वो हिंदु हो, चाहे मुसलमान हो, सबका शरीर बदलता है।
मिट्टी और मिट्टी बन जाओगे।
तो बाइबल में क्राइस कहते हैं कि तुम मिट्टी के हो और बाद में मिट्टी में बदल जाओगे।
बाबाजी ने समझाया इसका क्या अर्थ है?
बाजी ने समझाया इसका क्या अर्थ है?
प्राइस है।
तो जैसा कि बाइबल में कहा है कि हमारा शरीर मिटटी का बना और हम मिटटी मिल जायेंगे। तो आज इसका जन्मदिन भी है।
तो उनका
उनका उद्देश्य पढ़े और प्रचार करें
े।
तो जैसे सुना हमने हम मिट्टी से बने और मिट्टी बदल जायेंगी।
हिंदु है, शरीर पर जलाते है,
जो हिंदु है वो शरीर को देहांत पर चलाते हैं, जो कि राख में बदल जाता है।
फिर मुसलमान हो क्या करते हैं?
जो मुसलमान और पिश्चम है वो शरीर को, वो बची मंत्री को दबा देते हैं।
अमेरिका में, अमेरिका में अंतिम संस्कार में बड़े महंगे हैं,
अमेरिका में अंतिम संस्कार भी बहुत महंगा है। बहुत कीमती। जो बक्से होते हैं, उनमें उनका शरीर दबाया जाता है,
थोड़े समय के बाद मिट्टी बन जाता है लेकिन थोड़े समय
के बाद यह शरीर मिट्टी बन जाता है।
ये शरीर से जाने की क्या जाता है।
तो ये शरीर जिसको हम इतना सुझाने की कोशिश करते वो अंत में क्या बन जाता है।
जो पार्टी है, शरीर को, कोई भी
फेकते है जो भारती व शरीर को को देखते हैं।
और जो बात होती है वह आकर बड़ी, तेज, आंखें होती है, केवल शरीर
को खाते हैं और जो बात होती है वो आकर उस शरीर को खा
लेती है, वापस मिटटी बन जाता है,
फिर वापस मिटटी बन जाता है।
क्या
हो
क्या आत्मा का
भवन में ज्ञान इसलिए दे रहे हैं जिससे की आत्मा और शरीर का ज्ञान समझ में आये
े मृत्यु भी होती है,
हमारा जन्म होता है अज्ञानता में, हम पलते हैं ज्ञानता में और जो हमारी मृत्यु होती है तब भी हम ज्ञान में रहे।
भाग्यशाली व्यक्ति है वो वक्त के, जो
भाग्यशाली व्यक्ति है वो संपर्क में, आ के आध्यात्मिक जीवन में स्वीकार करते हैं।
प्रभु लम्बा खेदन करते थे,
लम्बा गीत करते थे, शिवा ठाकुर के आंगन में,
शिवा मालूम है, आपको कहाँ है,
कहाँ है,
पूरी रात केतन करते थे,
बुरी रात करते थे।
1 दिन भक्तों को किन करने के परेशान भूख लगी थी, 1 दिन कीर्तन
के बचात भक्तों को भूख लगी थी
भूख लग रही है।
भक्तों ने कहा हमें भूख लग रही
है आम के पेड़ का बीज, बोया
ने आम के पेड़ का बीज बोया
और मेडमें बड़ा पेड़ बन गया और
कुछ दिनों में वो बीच 1 बड़ा
पेड़ बन गया जिसमें 200 पक्के आम
थे जिसमे 200 पक्के आम थे, 1
आम पेड़ और 1 आम सी आपका
पूरा पेट भर सकता था
और भक्तों ने 1 साल का आनंद उठाया और
भक्तों ने 1 साल के लिए आनंद
उठाया 1 दिन मा प्रभु भक्तों के साथ किस में जुड़े हुए थे,
1 दिन जब महापुरुष शिवा ठाकुर के घर में चित में जुड़े हुए थे तो उनके पुत्र का ध्यान तो गया तो
पत्नी दुखी थे शिवा की पत्नी अत्यंत दुखी थी, उन्होंने पति को नहीं कहा, पति जुड़े हुए थे, कुछ ने
अपने पति श्रीवास ठाकुर को जो की में जुड़े थे, उनको कुछ नहीं कहा, और स्वयं चुपचाप रो रही थी।
कोई दुर्घटना भी गयी है, कि को
लगा की यहाँ पर कोई घटना है या उन्होंने कीर्तन रोका
क्या है? मुझे लगता है कोई दुर्घटना हाँ बीतती
है, क्या है यहाँ पर कोई दुर्घटना गड्डी है।
बड़े ने कहा। मेरे बेटे का ध्यान बड़े हिलते हुए
श्रीवास ठाकुर ने कहा की मेरे बेटे का ध्यान तो गया है, कैसे
बेटे
के पास आ गए, उस बेटे के
पास, मरे बेटे के पास, मरे हुए बेटे के पास, व जीवित हो गया,
थोड़े समय और वो थोड़ी देर में जीवित हो गया।
बेटे ने माँ बाप को कहा तुम रोये क्यों हो?
उस बेटे ने कहा तुम रो क्यों
रहे हो, मैं आप से कितना पुराना
सम्मान था, मेरा आपसे कितना पुराना सम्बन्ध
है, कुछ समय के लिए, कुछ समय के लिए, म माता और मेरे अनेक
माता पिता रह चुके हैं। उन्होंने दिव्य ज्ञान दिया के द्वारा
माता का शोक कम हो गया, जिसके द्वारा
जिस ज्ञान के दौरा उनके माता का
शोक कम हो गया, तो है यह सत्य है।
आत्मा जो है वो सत्य है, वो
बहुत 1 वादी व्यक्ति हैं, वो गया से डूबी हुई है। जब आत्मा सनातन है, ज्ञान 2 क्या कहते हैं? क्या प्रभाव है?
आपके पास क्या आत्मा है जो बहुत कार्य में डूबे हुए हैं। जब हम ज्ञान देते है की आत्मा के सनातन ज्ञान का क्या प्रमाण है? आपके पास क्या आत्मा है तुम साधु
लोग हमें डराते हो, साधु लोग हमें डराते हो। क्या प्रमाण है?
प्रमाण है की आत्मा है
क्या है, क्या है? चेतना चेतना आत्मा है में चेतना रहती है। जब तक आत्मा श्री को त्याग दे,
जब तक आत्मा है तब तक शरीर चेतन और जैसे आत्मा से त्यागती है और चेतन हो जाता है।
बहुत जोर से जागो आप किसी बड़े
व्यक्ति को बोलो जोर से जागो।
सुरती क्या है। आत्मा शरीर को सुझाते रहते हैं, हम
बहुत ही शरीर को सुझाते रहते हैं।
आजकल कोने कोने में ब्यूटी पार्लर से,
आज पूरे भारत वर्ष में अनेक जगह ब्यूटी पार्लर से
हम शरीर को सुझाना
चाहते हैं, वहाँ 1 ही कार्य करें हम शरीर को सजाना चाहते हैं।
दिल में 10 बार आईने के सामने जाते है, ये देखे कितनी खुबसूरती है,
दिन में 10 बार हम शीशे के सामने देखने जाते हैं कि हमारी कितनी खुबसूरती है।
अमेरिका में 1 बड़ा कंजूस मानक मकान
था, अमेरिका में बहुत कंजूस मकान
थे,
उसकी लिफ्ट बहुत धीरे धीरे जो आपके
मंदिर में थी
वो किराया राज है, वो कही नहीं लोड, किराया नहीं लिफकलोनहींलिफ्लो,
कंजूस बड़ा कंजूस था वो
नहीं,
वो नहीं चाहता था की कुछ पैसे करे,
कैसे
कैसे बच के सामने खड़े हो
जाते
देख मैं क्या समझता हूँ।
तो हम सब चाहते हैं, सुन्दर बने,
हम सब चाहते है की श्री बड़ा
सुन्दर बने, हम कैसे बनना चाहिए?
जैसे बदसूरत में सुन्दर बनाना चाहता है।
क्या है, असली खूबसूरती है, मिस हो गए, आत्मा ने त्याग दिया है, कोई देखेगा अगर सारी, आत्मा ने छोड़ दिया है, वो नही देखे,
बहुत खूबसूरत भी हो। आत्मा जब छोड़ी थी तो कोई आपकी
तरफ देखेगा भी बाबा जी, जब में जाने से पहले वो 1 पेपर खाते थे, बैक टू गॉडेज, पश्चिम देशों में
जाने से पहले पेपर पे बैक टू
गोडेडबैकटूगॉर, आज के बैक टू गॉड जैसे नहीं था, 4 पेज का पेपर था,
और वो पहले जो पेपर था, जो बैक की तरह नहीं, केवल 4 पन्नों का पेपर था,
लिक्विड ब्यूटी और ने
लेख लिखा था, जिसका नाम था लिक्विड ब्यूटी। आप ने सुनी है। किसी में 1 बहुत खूबसूरत औरत थी
राजकुमार, जिसके प्रति 1 राजकुमार आकर्षित हो गया था होगा। मैं माँ से विवाह करना चाहता हूँ,
उसने उस औरत को कहा की मैं तुमसे विवाह करना चाहता हूँ।
लड़की धार्मिक थी, वो जानती थी का आकर्षण बहुत शरीर के प्रति है, तो
लड़की धार्मिक थी, जानती थी, उसका जो आकर्षण है वो बहुत शरीर के प्रति है।
अच्छा 2 हफ्ते बाद मिलेंगे।
उन्होंने कहा, 2 हफ्ते बाद मिलेंगे
दवाई ले के द्वारा पेट
थोड़ा ने कुछ दवाई लेना शुरू कर दी, जिससे उसका पेट खराब हो गया, और 2 हफ्ते बाद वह उसी स्थान पर पहुँची,
राज
कर वही था
खूबसूरत
और राज कुमार खूबसूरत लड़की को मिलने के लिए वहाँ
पहुँचा, लड़की सूरत तो वो लड़की वहीं
खड़ी थी, लेकिन वो बदसूरत बन गई
थी से पूछा देखा था।
राजा ने पूछा खूब तो लड़की को तुमने कहीं देखा है,
मैं ही हूँ। उसने कहा मैं ही हूँ, तुम कैसे है? तो आज मान को होश आया की ऐसी या नहीं, राज कुमार को होश
आया की असली आकर्षण यह शरीर नहीं है,
इसके पीछे हम इतना पैसा करते
तो ये जो शरीर है जिसकी हम इतना पैसा खर्चते हैं, कुसुगा को यह वास्तविक में नश्वर है। तुम ये नहीं कह रही की बच्चे
बन जाओ हो, आत्मा का
खूबसूरत हो, लेकिन आत्मा को जो वामिक स्थान है,
उसको समझे आत्मा जो है, सनातन है,
आत्मा सनातन है,
इस कारण इसको स्वीकार कर दे। क्यूँकि वो सोचते है? अगर आत्मा सनातन है तो सम्भव हमें
सुझा मिलेगा भौतिकवादी इस बात का नहीं कर देगी। वो समझते है की यदि आत्मा सनातन है तो हमें इसकी सजा मिलेगी और
सोचेंगे, हम पापों की सजा मिलेगी।
वो सोचते है की फिर हमें पापों की सजा मिलेगी
और है।
तो वो कहते हैं कि तुम्हारा यह प्रचार है कि नर का स्वर्ग है, वो सब गलत है,
मृत्यु के साथ
हो जाता है, मृत्यु के साथ सब कुछ समा जाता है,
मृत्यु के बाद त्याग भी है,
तो मृत्यु के बाद। जब आत्मा शरीर को त्यागती है तो शरीर में कोई छेद नहीं रह जाती। यहाँ पर प्रात महाराज जी अपने मित्रों को शिक्षा दे रहे हैं।
मित्र थे, वो भी अमीर घराने के
थे, क्यूँकी मित्र थे, वो भी अमीर
घराने के थे, पर ज्ञान नहीं था,
पर आज याद में ज्ञान नहीं था
के अध्यापक कई बार परदा को पकड़ा रहा है, देख लेते और कहा आगे से देख करोगे पिता के ले जायेंगे।
तो लात। अध्यापकों ने कई बार पकड़ा और बोला था, यदि आगे से तुम ऐसा करोगे, तुम्हारे पिताजी के बाद पाक को कोई भय नहीं था।
1 पेड़ के फुल के
मार, जिस प्रकार 1 पेड़ के फूल 6 अवस्थाओं
से गुजरते हैं, इसी प्रकार मनुष्य जीवन पर
6 अवस्था, इसी प्रकार जो हमारा मनुष्य जीवन का शरीर है, वो भी 6 वस्था से गुजरता है।
पहला है जन्म का है। जन्म मेंटेनेंस का कैसे लाभ उठा?
बुधिया नदी को लोग कैसे लाभ उठा सकता है?
देखेगा मेरा शरीर भी नष्ट हो जायेगा,
देखेगा की मेरा शरीर भी नष्ट हो जायेगा।
प्रयास अब बुढ़ापे हम कितना मर्जी प्रयास
बुढ़ापे बन को छुपा सकते है। आ
एंटी एजिंग शॉप्स हैं।
आज कल भारत में भी एंटी एजिंग शॉप्स हैं?
क्या मतलब एंटी जी, का मतलब से आप बड़ाबे छुपा सकते हो?
वो जी जिसे आप अपने बुढ़ापे को छुपा सकते हो।
मेकअप करते हैं, मेकअप करते हैं, मेकअप
करते है,
मेकअप करते हैं, प्लास्टिक सर्जरी कराते हैं।
और क्या हम बाप को
और क्या हम ब्ड़ापेबंदको हमेशा के लिए रोक सकते हैं?
भगवान कहते है
गीता में कह रहे हैं आत्मा का जन्म होता है नमरजीहोतीोहमें
सोचे और थोड़े है। क्या? कहताह?
तो समझेंगे कि यह शरीर थोड़ी देर के लिए है और समय के बुद्धिवान व्यक्ति है।
वो क्या करेगा, ज्ञान जीवन प्राप्त हुआ है।
आप सबको मनुष्य जीवन प्राप्त हुआ है।
उसका सदुपयोग करो की कमी है। इस समाज में, आध्यात्मिक ज्ञान की है। समाज में इस ग्रंथों भाटो।
इसलिए ब्राहमण ने कहा के ग्रंथों को
भाटो, हम लोग सब से जुड़े हो,
आप सब लोग
जुड़े हो, जुड़े हो।
मुझे जो वक्त मिल रही है, कहर इस साल हमने दुगना घोटा किया,
छोटे
छोटे छोटे मंदिर हैं, वो भी कहते है की हम 20 से।
आगीताबलेगेरा इस विषय पर क्यों बोल दिया है। उनके गुरु ने कहा, भगवान को सुविधा दे।
गुरु जी ने कहा था कि यदि कोई तुम्हें सुविधा मिले का प्रकाशन करना और वितरण करना क्यों किया, उन्होंने ऐसा क्यों किया?
ठाकुर
क्यूँकी, ठाकुर, विनोज ने इस विषय पर बल दिया है।
प्रिसिपल थे। ग्रंथों का प्रकाशन शुरू हुआ।
जब जी पृथ्वी पर थे, तब ग्रंथों का प्रकाशन शुरू हुआ।
1 ग्रंथ के जीवन के ऊपर भेजा, विश्व के माया।
1 ग्रंथ महा भूके, जीवन भर का सारे, विश्व के विश्व, ध्यान, मन,
ठाकुर उपासक।
कृष्ण का नाम लोग कृष्ण की उपासना करो, शिक्षा को बंद करो।
जब वो घर घर जा रहे थे, सब घरों ने स्वागत है।
क्या?
जब वो घर घर जा रहे थे, सब घरों ने उनका स्वागत नहीं किया।
कईयों ने स्वागत किया, बोलिये क्या है
आपका आदेश, कईयों ने स्वागत किया, बोले बोला उन्हें क्या है आपका आदेश
का है। ो की उपासना करो और कृष्णा के।
उन्होंने कहा की महापुर ने कहा है कि कृष्ण नाम लोग कृष्ण की उपासना करो और उनकी शिक्षा का पालन करो।
और कई उन्होंने कहा, नहीं, नहीं चाहिए आपको।
और कई लोगों ने बोला, नहीं, हमें ये सन्देश नहीं चाहिए।
कई का जासूस है।
और ने बोला, ये तो जादू है
फंड के कपड़ो में, फंड के कपड़ो
में, साधू के कपड़ो में आये है।
डाकू चोर आये है।
डाकू, डाकू चोर के रूप हैं।
ये है डाकू के रूप में आये है। साधू के रूप में है।
हस रहे थे, नितिन ठाकुर हंस रहे
थे
तो मर नहीं सकते, बोल सकते है। प्रयास कैसे कर रहे थे। उनके प्रिय को सुविधा दीजिये।
शिवा ठाकुर के आंगन में केवल उनके प्रिय निकट भक्तों की सुविधा दी। ज्ञान क्रिया को नहीं समझ सकते।
े आ गयी। स्वामी जी हर साल आते हैं। आपका स्वागत
बार स्वागत। आगे स्वामी जी हर साल हमें
और
कोई काम नहीं बोलते है।
और कोई काम नहीं है।
सब से उत्तम काम दल रहा है। भगवान का प्रचार करना सबसे उत्तम काम है। भगवान का प्रचार है या समाज में है। मूल कारण क्या है? जीवन से दूर हो रहे समाज में
जो क्लेश उसका मूल कारण है। आध्यात्मिक। जीवन से दूर होना है।
बहुत महंगी है।
कहते गीत बहुत महंगी है।
हम कैसे क्या बढ़ता जाता।
हम को बता दे की क्योंकी मार्केट में इसका प्राइस बढ़ता जा रहा है।
इसलिए
छुपा कागज और छपाई का जो कीमत बढ़ता जा रहा है।
तो भगवान प्रसन्न होते हैं। आपके।
उत्साह, भगवान प्रसन्न होते हैं।
आपके उत्साह से कहते हैं उत्साह प्राप्त करेंगे, उत्साहित होना चाहिए।
गोस्वामी कहते हैं उत्साह भक्ति में सफलता प्राप्त करने के लिए उत्साहित होना चाहिए।
कई बार पूछते हैं उत्साह कैसे पैदा करे।
कई बार पूछते हैं ये उत्साह कैसे पैदा करें?
स्वामी के भजन क्रिया के द्वारा।
थ्रू स्वामी कहते भजनिया द्वारा। आध्यात्मिक नियमों का पालन भजनिया, आध्यात्मिक नियमों का पालन
न करो।
जैसे हम कहते हैं की हरी नाम का उच्चारण करो।
2
शास्त्र में काले दोष दोष ही दोष है। जिन ही महत्वपूर्ण बात है।
जहाँ देखो वहाँ
जहाँ देखो वहाँ इन्द्रिय का
बुद्धिमान व्यक्ति है। शिक्षा को स्वीकार कर।
जो बुद्धिमान व्यक्ति है को स्वीकार कर।
जनता की शास्त्र है।
भगवान की माने जानता है की शास्त्र है भगवान की। भगवान में क्या पढ़ते हैं श्री भगवान।
भगवान ने कहा शास्त्रों के ज्ञान हो, मानो भगवान का संदेश
है।
छात्रों के ज्ञान में हमारी श्रद्धा होगी। तो हम समझेंगे की भागवत जो ज्ञान है, हर समस्या का हल है।
ये जो बलि जगत है। इसे कहा गया है कौन।
सा जगत बलिक जगत है।
इसको कुंठा जगत बोला गया है या क्लेश है।
कुंड का अर्थ है जहाँ कलेश क्लेश
है और भगवान का ै क्या कैसे। कुल भगवान के धाम कहते भगवान आपको निमंत्रण दे रहे हैं। हम सब को, मेरे कुल
भगवान को
निमंत्रण देने आओ मेरे धाम के नहीं है।
कोई क्लेश नहीं है।
हम क्या कहते हैं नहीं रहने 2,
हम दे में यही रहने 2
भागते है निकलो। यहाँ से, बहुत
के भागते हैं। तो निकलो यहाँ से, ये बहुत ही है।
कई बार लोग कहते हैं गीता के कारण, गीता रखेंगे हमारे घर में युद्ध हो जाएगा।
कई बार लोग कहते हैं गीता रखेंगे हमारे घर में तो युद्ध हो जाएगा।
जिला रखोगे पढ़ोगे का जीवन निराशा से
तो वो मूर्ख है। वो गीता पड़ेंगे तुम्हारा जीवन निराशा और चिंता से मुक्त हो जायेगा।
मेरा मन चिंता से भरे हुए हो
तो कभी ने कहा है जो मेरे मन तो हमेशा चिंता से भरे हुए हो।
अनेक प्रकार की चिंता आपके लिए लगे चाहे। आप कितने भी धनी हो लिए लाये हैं, उनकी सुरक्षा के लिए चौकीदार दिए जाते हैं।
जो बड़े नेता उनकी सुरक्षा के लिए चौकीदार दिए जाते हैं, उनकी चिंता की कोई दुर्घटना न हो जाए।
1 व्यापारी व्यापारी,
1 व्यापारी की चिंता की दूसरा व्यापारी, उनका विसनसनछीनले।
1 देश को चिंता है दूसरा देश सामना कर।
1 देश को चिंता है कि उनका दूसरा देश सामना न करे तो
केवल निराशा नाश भौतिक।
जीवन में केवल निराशा ही निराशा है।
जागो जीप, जागो जीव, जागो गोरा बोले,
जागो, जागो, जागो जीव, जागो
क्या कहते है, जागो, जागो गोर बुला है, जागो करे से जुड़े
जीव, जागो जीव, जागो, जागो मतलब आध्यात्मिक कार्यो में जुडो है, जगे हुए है, आध्यात्मिक ज्ञान में है। बड़ी बड़ी गहरी नींद में है।
तुम हमें धन लाभ उठाना, हमें साधु संग का लाभ उठाना है और साधु में रहोगे क्या उपदेश प्राप्त करोगे, साधु
संग में रहोगे तो क्या उपदेश प्राप्त करोगे। अध्यात्म मूल नाम का विचार विश्व में
वाली है और आज सारे विश्व में
आप की भविष्य वाणी सत्य हो रही है। क्या की भविष्य वाणी पृथ्वी से नगर
ालीग्रामजगक्या मेरा नाम का प्रचार में चले जाओ। आपको सुनाई देगा आज आप विश्व किसी
भी कोने में चले जाओ, वहाँ पर आपको हर 1 सुनाई देगा
साबित हुई थी और इंग्लैंड में हमारे मंदिर खोल रहा था वो भी भक्त बन गए थे। इंग्लैंड ने 4 शुरू किया में
विचार शुरू किया तो उसमें इंग्लैंड में 1 बहुत इंग्लैंड में विचार शुरू किया तो उसमें 1 बहुत बड़ा बैन था बीटल्स के नाम से
देवता मानते थे लोग देवता मानते थे। जहाँ
जहाँ भी हो जाते थे लाखों
लोग उनके पीछे 1 बना था उनमें
से 1 भक्त बना था जो उसने
1 रिकॉर्ड बनाया था
उसने 1 रिकॉर्ड बनाया था।
हर 1 वो रिकॉर्ड यूरोप के चार्ट में नंबर वन बन गया।
सारे यूरोप में सेल्स में नंबर वन बन गया।
प्रॉपर भारत में आए थे फिर भी लोग आकर्षित हो गए थे। पहली बार देखा था कि विदेशी लोग गोदी गुरता
प्रॉपर भारत में आये थे तो काफी लोग आकर्षित हो गए थे कैसे विदेशी लोग धोती कुर्ता में थे
तो उन्होंने उसे फिल्म बनाई
फिल्म ने
फिल्म बनायी थी हरे राम, हरे हरे
रामा, हरे कृष्णा के नाम।
ऐसे गुण यह था कि पूरी फिल्म में बैकग्रा गुण क्या था की पूरी
फिल्म में बैगराम
कमजोरी क्या थी कमजोरी
क्या कमजोरी क्या थी। 2 किया था की दिखाया गया
को
लोग भगवान का नाम सुन रहे हैं और उनको लाभ प्राप्त होगा तो हमें
अनेक भक्त मिले जिन्होंने हरी का आरम्भ किया। यह फिल्म देखने के बाद और हमें
कई वक्त मिले जिन्होंने हरी कृष्णा की न सुनना किया। इस फिल्म को देखने के बाद ही
राम है सबके लिए लाभधारी, जोहरी नाम
है, सबके लिए लाभकारी है।
मा।
भगवान की सेवा हमारा लक्ष्य होना चाहिए। भगवान की सेवा। पढ़ते हो के चौतीस में हम प्रचेती
कदा सुनते हैं पढ़ते हो राजा के पुत्र थे, 10 भाई थे।
हम सुनते हैं कि राजा के पुत्र थे और 10 भाई थे।
और वो प्रसन्न हो गए।
भगवान उनकी भक्ति से बड़े प्रसन्न हुए।
भगवान ने कहा हे पर, मैं तुम भाइयों से बहुत प्रसन्न हूँ।
भगवान ने कहा भजेतरमैंतुमसभाइयों से बहुत प्रसन्न हूँ।
क्यूँ? क्योंकि तुम सब में 1 ही भाव है।
क्योंकि तुम सब में 1 ही भाव
है, 1 ही उद्देश्य है, 1 ही उद्देश्य है। भक्ति भक्ति हो। मां को मेरे से क्या वर चाहिए?
माँ को मुझसे क्या वर चाहिए?
भगवान को पसंद करना हमारा उत्तम उद्देश्य,
भगवान को पसंद करना हमारा उत्तम उद्देश्य है।
और प्रसन होते है, देते है।
भगवान मुझे प्रसन्न होते है तो में
वर देते हैं, भक्त हैं, वर्ग की अच्छा लगता है।
और जो भक्त है वो आध्यात्मिक वर्ग की इच्छा रखते है।
जैसे की बड़ी गहरी तपस्या की।
जैसे की धुन बहुत गहरी तपस्या की थी।
भगवान प्रसन्न हो गए। भगवान ने मांगे मुझे क्या चाहिए?
तो भगवान बोला ध्रुव मांगो, मुझसे क्या चाहिए।
घर से निकले थे, साथ बड़ा महान राज्य प्राप्त धुआ घर से निकले थे।
भाव के साथ की मुझे 1 महान राज्य चाहिए।
बड़ा ने बहुत गहरी तपस्या की थी। भगवान ने कहा
मेरे लिए।
भगवान ने कहा तुमने मेरे लि ने
तपस्या की है, क्या चाहिए।
आपको क्या चाहिए?
अगर आप मुझे कोई वर्ड देना चाहते हो, ये वर दीजिये।
यदि आप मुझे कोई देना चाहते है तो दीजिये मुझे उन्नत भक्तों की संगति में क्यूँकि।
उनकी मुझे दिव्य ज्ञान प्राप्त होगा।
समिति में मुझे दिव्य ज्ञान प्राप्त हुआ।
पालन ऐसी
जिसके पालन से मैं असली सुख प्राप्त कर सकता हूँ।
सो ज्ञान बहुत आवश्यक है।
ये दिव्य ज्ञान बहुत आवश्यक है। कि ा हमारे मंदिरों में सुबह होता
है, मंदिर से ज्यादा दूर नहीं रहते, उसका लाभ उठाना चाहिए।
आप लोग ज्यादा मंदिर से दूर नहीं रहते हैं। इस सब का लाभ उठाना चाहिए।
कितने भगत जो की क्लास में आते हैं, अपने शहर में, अपने अपने शहर
में, कितने लोग भागवतम क्लास में आते हैं?
कितने पढते है?
और पढ़ते है,
पर किया है। और 7 बार में प्राप्त है। और से प्राप्त किए भागदमखोड़िएइसको बांटिए।
और इस संदेश को प्राप्त कीजिए।
हे कृष्ण। जो नई सेवा करे, उनको प्रयास करना चाहिए, प्रयास करे। बाटे की सेवा में सेवा महत्वपूर्ण है। जितने
जो भग हदयमें जुड़े नहीं हुए हैं, उनसे प्राथना की भी प्रयास करें। जितने ग्रंथ बटेंगे बड़ी महत्वपूर्ण सेवा है। जितने ग्रंथ बनेंगे, उतने अधिक भक्त बनेंगे।
कल सब जायेंगे वश्यक नहीं।
अगर आपने। आज सौगीदाबाडीतो कल भी सवा बढ़ जाएंगी
से जुड़े उनका मूल कारण है।
आज देखे। आज लाखों लोग संसद से जुड़े है। हर 1 कीर्तन कर रहे तो इसका मूल कारण है पुस्तकों का वितरण।
आय विश्व में है में भी जाते हैं।
सारे विश्व में लोग इस पर वितरण कर रहे हैं। पर देशों। में 10, 10 इंच बर्फ है फिर भी भक्त लोग जाते है। इन ग्रंथों का वितरण करने के लिए आप सब जुड़िये को अपनाइए, अपने जीवन को सफल बनाए।
कृष्णा अरे कोई
आत्मा नश्वर है, आत्मा नश्वर नहीं है।
श्री नश्वर शरीर, नश्वर आत्मा
जनसंख्या कैसे बढ़ रही है।
अनेक प्रेट, अनेक ग्रह है और कर्मों के अनुसार प्राप्त होता और कर्मों के
अनुसार हमें अलग अलग से प्राप्त होता है।
आपका पाप की मात्रा बढ़ जाती है, उनकी संख्या बढ़ती है।
तो जो हमारे पाप की बढ़ जाते हैं, पाप तो देखते हैं की बदलियों की संख्या बढ़ जाती है और कई
लोग पास होकर भगवान के धाम जाते हैं। कई लोग काम में जुड़ कर जाते
हैं, कई लोग अच्छे भक्त घर के भवन के धाम जाते है और कई लोग इस शरीर में ही पड़े रहते है।
कई लोग पास होते हैं,
पास होते
है कही फेल होते, पांचवी क्लास में मानो लड़के हो गए और 30 नीचे वाली क्या
पांचवी क्लास में 23 बच्चे फेल हो गए और चौथी क्लास में प्रमोट हो गए। 30 बच्चा है तो ने 5 बार की।
मुक्त जाते है,
जो पास हो जाते हैं वो मुक्त हो जाते हैं और जो फेल हो जाते है। इसी संस्थान में ने
तो इसी संस्था के
भगवान का संदेश प्रस्तुत किया है।
यहाँ समाज में 600 से अधिक भाषाएं हैं। भक्त।
तो आज समाज में 600 से अधिक एडिशन से बी के यथा रूप को बढ़कर सबसे अधिक मात्रा में बन रहे
को जोड़ा।
कई लोगों ने इन अनुवादों में अपने भाव को जोड़ा है।
वो क
बोली बोली अरे कुछ
महाराज जी, मुझे पूछना है कि जैसे हमने यह जान लिया कि आत्मा जो नश्वर नहीं है, भगवान का है और हमें आत्मा के सुधार के लिए प्रयास करना है। और जैसे हम अपने परिवार के पालन के लिए शरीर के पालन किए जॉब या बिजनेस में जाते हैं तो हमें यह स्थान तो रहता है की हम यह व्यर्थ का कार्य कर रहे हैं। लेकिन उसे करते करते उसमे इतना लिख हो जाता है की हम भूल जाते हैं कि हम ये जो व्यर्थ का कार्य कर रहे हैं, ये हमारे अध्यातमिक जीवन के लिए रुकावट का कार्य है।
हम नही कहते है, लोग हमारी कहते है। जिस प्रकार कमल का फूल जल में जल को नहीं छूता, हम में से
बचना चाहिए, जिस प्रकार हम ये नहीं कह रहे की बहुत ही संसार को त्यागना है, और जिस प्रकार कमल का फूल जल में रहकर भी जल्द फुल स्पर्श नहीं करता, उसी प्रकार हमें इस संसार में रहकर करना है।
क्या काम और इनकार
कर करे में लड़ने से तो भवन ने क्या काम भवन सर्वेश गालेशुमास्मयुदधजा। तो मेरा आक्रमण करते हुए अपना कार्य कर, युद्ध करो,
सेवा नहीं करना चाहता।
रूप को स्वामी माँ न्होंने भी यही कहा की मैं मुसलमान राजा के यहाँ
सेवा नहीं करना चाहता चाहती थे, वापस काम करे, मा चाहते थे की वो
वही वापस काम करे।
मिलने वाले
को मिलने वाले बाद में
प्रयाग में मा इस प्रकार पति हो। मोबाइल ध्यान से अपने प्रेमी प्रेमी कल्यान कर दी है पर काम कर दिया
ने उदाहरण दिया कि जिस प्रकार विवाहित स्त्री कोई प्रेमी हो तो अपना काम बड़े ध्यान से करती है। अपने प्रेमी के साथ ध्यान करते हुए नौकरी
करो।
भगवान का तो आप व्यापार कर रहे, नौकरी करो करो लेकिन अपने हृदय में
आप भगवान का है उसका उपयोग करो
और जो व्यापार का परिणाम है उसका उपयोग करो। भगवान की सेवा में
मेरे बचने की किसी काम को करने में वीरता है
बाकी में सफलता चाहिए। आपको क्या होना पड़ेगा उत्तर दे दे साल सबसे पहले
तो महाराज कह रहे हैं की आदेश श्रद्धा के रूप में सबसे पहले हमारे सदी में भाव ये होना चाहिए की हम भगवान ये भाव
रहेगा बात
यह भाव रहेगा सौरी
तो
किसी संत की संगति को प्राप्त करेंगे
ये प्राप्त हो सकता है के द्वारा
प्राप् त 2 माध्यम से के माध्यम से
और उनके व्यक्तिगत संघ से हजारों लोग भी पालन करना चाहिए।
आज हजारों लोगों ने पहले भी पढ़ा और को सुन कर निश्चय किया कि हमें इस संदेश का पालन करना चाह।
पानी करोगे प्राप्त करोगे तो अगर हम
भजन करेंगे, जपा करेंगे, साधना पालन करेंगे तो दृढ़ता प्राप्त होगी।
इससे
बनोगे दृढ़ बनोगे आप
करते हो आपका उत्सा उचा।
यदि हम जब करते तो हमारा जो उत्साह और नही तो
लव
हम सादा में ढीले बन जाते है तो हमारा उसका नीचे जाता है
हरी किशन माराज पना राज मेरा प्रश्न है कि जैसे हम अपने साथ की बात कर के साथ का लाभ होना चाहिए। तो जब हम साल सं करते हैं, अस्तित्व में रहते हैं तो कुछ नए पत्तों के साथ भी करना पड़ता तो भी नही आये है। बिलकुल तो कभी उनके प्रति उसका वो बात नहीं सुनते हैं या नहीं करते
हैं तो
उनके प्रति कम्पेशनेट कैसे पुस्तक वितरण करते हैं। तब कंपेशनेट भागों में उस पर अगर किसी वक्ती के पास जाएगी उसका जीवन मिलेगा
या भाला का या
वैष्णों के ने गुणों में गुण है तितिक्षा कारण करुण।
ठीक है दया की दया की भावना और सबका उधार और सबका उधार है मेरे दल में है,
ये नहीं सोचा की ये मेरे दल में और ये
मेरा शत्रु है है। अत्यंत
नए व्यक्ति जुड़ते है तो हमें अत्यंत सेंसी होना चाहिए।
बच्चा
जैसे बच्चा शरारत करता है तो माता उसको सैन लेती है और प्रेम से समझाती है।
बच्चे जैसा जो नए लोग हैं वो
बच्चे के जैसे है।
वो कल आपको
बता कर जीव की तपस्या है की बड़े मिठा से बोलो
यह भाव होना चाहिए, यह भाव होना चाहिए। मुकर जाते है और मान लो, कोई नही लगेगा यह नहीं की उनको बात करोगे गुस्सा में जाते है।
तो अगर कोई हमारे से पुस्तक ही लेता तो ये नहीं की हम गुस्से से या
करोगे प्रभाव जैसे
सचिन मिले तो मैं पीता नहीं मुझे नही। तो ऐसे सच कैसे समाज के लिए की आप इसको पढ़िए
वो कई घर में गए, कई घर में लोग सिनकारा बताओ, क्या हमने कई जगह विरोध किया तो आप ये उम्मीद कर सकते हैं मुझे 2 इच्छा तो यह है की हम बाहर निकाले टेबल बनाए लाइन हो जाए। शराब की दुकान मेरा ये है की कई बार हमारे में कुछ ऐसे होते
है बहुत इमपोटंटहोतेहमारी
कुछ उसकी वजह से
हो जाते है।
उनका क्या कैसे करना चाहिए की आप अभी इसका भाग्य होगा, बहुत ही ऊँचे हो। वो कहता है बकरी छोडो छोडो कह
रहे है की हमें अपने आचरण में पवित्र होना चाहिए। और वो कह रहे की अगर कोई पूर्व जन्म के हमारे अच्छे संस्कार होते है तो हमें भक्तों का मिलता है
कर रखना चाहिए। ये कोई साथ दे न दे तो
हमें कृष्ण भक्ति में भाव रखना चाहिए। चाहे हमारा कोई साथ दे या न
दे हम उसका पालन करना है। ऐसी अंतिम क्वेशन गुरु के प्रति गुरु स्वीकार करना चाहिए। केवल जो हम तैयार हैं उन का पालन करने के आधार होना चाहिए।
तो गुरु स्वीकार करने के लिए उनकी आज्ञा पालन करने को तैयार है। आध्यात्मिक में अनुसार होना चाहिए।
अगर हम नाम के लिए गुरु है उसका कोई लाभ नहीं।
अगर हम नाम के लिए गुरु स्वीकार करते है तो सा कोई लाभ नहीं
चाहिए कम से कम 2 साल से
तो कम से कम 2 साल इंतजार करना पड़ता है
न समझे
लोग पहले
सिद्धांत समझे दीक्षा से पहले, दीक्षा से
पहले, हम जो
भी देखते हैं कि भारत के वे भागने में और पंजाब में भी देख रहे हैं की यहाँ भारी मात्रा में आ रही है। कल सरप्राइज ध्यान मे चल रहा है तो इस साइट में हम प्रचार करने का प्रयास कर रहे हैं जो कि जेलवेदमेसेजदेरहे है और दूसरी साइट में कई सारे आर्थिक फायदों इन सभी प्रलोभन के द्वारा भारी परिवर्तन परिवर्तन हो जा रहा है। तो जलवे चीज ऑफर करना पसंद नही ही है। परंतु जब इस प्रकार से प्रलोभन से बचा होगा जो की प्रचार के लिए आगे हमारे घर प्रचार के लिए सेक्शन क्रिएट करेगा तो हमारा क्या होना चाहिए हम इस पर स्थिति से कैसे।
सबसे पहले यह कार न करोगे सदा प्राप्त हो।
सबसे पहले स्वीकार हम सत्य संदेश का प्रचार करेंगे सफलता प्राप्त होगा।
बाजी अमेरिका मे स्वामी जी धोती कुरता मत पहनो पर मत करो वह आपको फॉलो करेगा पापाजी अमेरिका।
कई लोगो ने बोला की धोती को वैदिक नियमों का पालन नहीं करे प्रोब, प्रोब ने कोई कॉम्प्रमाइज नहीं किया इसका की साधना कुछ न बोला। अंतरराष्ट्रीय कृष्ण भगवान भावना प्रॉपर नहीं कृष्ण कांशस हमें बड़ा स्टेसिक होना चाहिए।
तो हम हमारा प्रचार करते रहेंगे,
हमें प्रचार करते रहना चाहिए।
भारतीय लोग
आलसी बन, हमारे भारतीय लोग आध्यात्मिक सी आलसी बन गए है।
बोलकर मोल हो रहा है
े भारत में बहुत कनवर्जन हो हा है खासकर पंजाब में
लगभग लगभग नहीं था,
नहीं था, नहीं था ये
साउथ इंडिया
तो पहले दक्षिण भारत और पश्चिम भारत में था।
काफी तेज आ रहा है, पंजाब में
काफी तेज आ रहा है।
इंडिया टुडे ने
इंडिया, टूडे मैग्जीन ने ये न्यूज कवर की थी। किस तरह से पंजाब में परिवर्तन ला
2 की बात है। हिंदू में जाग्रति होती वो को रोकने
का प्रयास दुख की बात है यदि हिंदू में जाग्रति होती तो वो इसको
रोकने का या हम मिस्कार में प्रयास कर रहे है, हम अकेले कितना कर
सकते हैं, मुस्कान में प्रयास कर रहे हैं, हम अकेले कितना कर सकते हैं
तो आप लोगो को जो की केवल समाज में
हम सब लोगो को प्रचार
में जोड़ना चाहिए सहयोग दीजिये सहयोग दीजिए क्यूंकी संख्या घटती जा रही है, क्यूंकि
बेली धर्मों के बालों की संख्या घटती जा रही है।
ऑन द होल
स्टे लास
मारा तो मेरा प्रश्न है की करके आये है तो हमारा स्वरुप जो है सत्यनारायण होता
है
कैसे
जैसे की हम हम सब को संभावना है बोले अक्सर नाइनटी नाइन परसेंट नहीं बोल रे जो बोले जगह की पता है वो थोडा पोजिडेडहै हम
सब के अंदर संभावना है, अधिकतर लोग नही है पर 1 छोटा सा पर जा रहा है जो में जो मुख्य संख्या है वो करियों की संख्या से
काफी अधिक है हजार 2000 ै तो
कैदी जो है वो 2000 रुपए बाकी
संख्या लाखों में है जो लोग भगवान
तो पूरी संख्या में, जो लोग भगवान से करते है उनकी संख्या बहुत कम
है
ठीक है लास्ट में
माया से बचे के टिके रहने के लिए, साथ ही सेवा करने के लिए, पर जब यही काम हो जाता है तो फिर हम कर पाते है 10 के लिए क्या किया
का प्रश्न है की जैसे
भक्ती में टिकर आने के लिए और कंटिन्यू ली सेवा करने के लिए हमें 3 चीजों की जरूरत होती है साहस, निश्चय और और जब यह कम हो जाता है तो नाइट कंसिस्टेंट की सेवा करते हैं और भक्ति में भी करते हैं।
अगर आप निरंतर जब करे ग्रंथों का अध्यन करे तो उत्साह कम नहीं होगा। बहुत बहुत धन्यवाद करते हैं महाराज का।
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