नामचार्य हरिदास ठाकुर | Jagannath Puri Yatra | 21 Jan 2018 | Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Goswāmī Maharaja

In this segment of the Jagannath Puri Yatra discourse, Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Goswāmī Maharaja emphasizes the necessity of chanting the authentic divine name (Hari/Krishna) and condemns the use of false or altered names. He narrates the severe persecution faced by the saint Haridasa Thakur—beatings, threats of death, and attempts to force him to abandon name‑chanting—yet Haridasa remains unharmed, displaying miraculous protection and yogic powers such as controlling his breath. The discussion also covers the controversy over his funeral rites, highlighting tensions between Hindu and Muslim customs. The talk then shifts to a question‑and‑answer format where devotees inquire about how to gauge progress in bhakti, the balance between nama‑japa, scriptural study, and service, and practical matters such as idol installation, responsibilities of service, and the encouragement to visit temples abroad. Additionally, the speaker explains the purpose of the three‑day festival, stressing the importance of repeatedly hearing the divine message so that the name settles deeply in the heart. He uses modern analogies—advertising billboards, phone promotions—to illustrate how repetition conditions the mind, and addresses practical life questions about marriage and life goals, affirming that devotion can coexist with worldly responsibilities. Throughout, the speaker stresses sincere devotion, humility, and the transformative power of the holy name, drawing on references to the Bhagavata, Gita, and traditional teachings.
Chapters
हाई कृष्णा ओम भगते वासु भगत वासुleवan होते हाई कृष्ण भगत का फिर से स्वागत तो आज प्रश्न उत्तर होने वाला है। मुझे को किशोन कहा था के चांदी से ज्यादा प्रश्न लोगों ने लिख कर दी हुई है और 1 बड़ा सुन्दर नाटक भी प्रस्तुत किया जायेगा बॉलीवुड के कलाकार द्वारा। और सिजी में हरिदास ठाकुर की चर्चा भी करेंगे। ठीक है तो हरी दास सब परिचित
हो,
वजन कोटर में हुआ हो से समाने में भी हरी दास कारण है। यू हरी का भक्त हो, आप कह सकते हो आप सब हरी दास हो, हरी दास ही हो तो हरी के भगत hila ओरिजनल हरदा im तो वैसे शास्र में कहा गया है कि हरीदास ब्रह्मा जी के आवा 1 था। भगभग के दसवे स्थन में पढ़ते हो और ब्रह्माजी ने भगवान की परीक्षा ली थी। वह बच्चों को छिपा कर उन्होंने देखा कि वो असफल थे। उन्होंने बड़े सुंदर स्टूदय से परम भगवान का गुणगान किया और प्रार्थना की थी। मैं फिर से जन्म लोग। 1 बड़े विनम्र वातान में उनका जन्म हुआ था किस खानदान में, सलमानों के खानदान में हरीराज ठाकुर महा प्रभु के प्रकट होने से लगभग 35 साल पहले प्रकट हो चुके थे और अदवेदाछायाक्योंकि वहां विशु के अवसान हैं और हरीलाजठाकुर 1 साथ जॉब करते थे भागवत की चर्चा और उन्होंने प्रार्थना की थी समाज को देखते हुए कि आप स्वयं प्रकट हो जाओ पर तो हार करने पर छाया हारीला प्रार्थना के तल में मान किस रूप में, कितने महा बाबों के रूप में, तो हर लाज ठाकुर ने कितनी बार जॉब करते थे। हा 3 लाख बार। बाबाजी इस लीला के कहते हैं कि हमें हरदा की नकल करने की आवश्यकता नहीं, अब हमें 3 लाख बार जॉब करने की वजह सोवाकर जॉब करे और ध्यान से करे तो वो 3 लाख बार दिन में जॉब करते थे। और जब समाज के बिना न कुछ खाते थे, न पीते थे, ना किसी से बोलते थे। हमारे इस काल में भी मैं देखता हूँ। कई भर्ती नियम मनाते हैं। सोना माला जाप, समान करने से पहले उन्हें कुछ नहीं करना। आप में कितने भक्तों का भाव है। अरे सोना माला करोगे फिर किसी से बात करोगे तो नाम हैदर। ठाकुर दिनरात जॉब करते थे। और उस समय भारत में मुसलमानों का राज्य था और 1 जमींदार था। इसका नाम क्या था रामचन्द्र खान। रामचन्द्र खान के मन में शा का भाव था। यह हरीदाजकोइतना आदर मिल रहा है। दूर दूर से हजारों की संख्या में लोग ते हैं। हरिदास के मिलने और मैं जो बड़ा जमींदार हो, मुझे कोई पूछता ही नहीं। 2 रामजाने सोचा, मुझे ऐसी स्थिति बनानी चाहिए जिसे हरिदास की बस्ती हो। तो ने अपने शेयर की खबसूरत वैश्म को बुलाया कहा कि हमने किसी प्रकार से है, राज का नाम खराब करना है। तुम में से कौन हो जो उसको विचलित कर सकते हो। साइन वैश्य डर गई समय का, हम तो नहीं कर सकते। las ऊँचे कूटी का संत है, हम ये इस योजना में नहीं जुड़ सकते हैं। 1 खुबसूरत सबसे थी, ठीक है, रामचन्द्र खान। रामचंद्र खान ने कहा था जो कीमत मांगोगे मैं दूंगा किसी प्रकार से राज का अच्छा नाम खराब करो। सब ने इनकार कर दिया
है।
मैंने जिम्मेदारी उठा ली। हरदा ने कहा रामचंद्र कहा ने कहा ठीक है तो तुम जाओ हरिदास के पास और मेरा मेरे सिपाही भी तुम्हारे साथ चलेंगे जैसे तुम उन्हें आकर्षित करोगे सिपाही उसे गिरफ्तार कर लेंगे। ढोंगी साधु के रूप में वसा ने हा आ सिपाहियों को मत भेजो मुझे पहले अकेले उसे रिश्ता जोड़ने 2 रखे दे सिपाहियों को भेजा। भगवान के शुद्ध भागते हैं जी के का। तो जब ये वैश्या आए उनकी कुटिया में तो द्वार में खड़े होकर बड़े खबसूरत रूप से उन्हें आकर्षित करने का प्रयास कर रही थी। राज को पता था किस ने इस वैश्या को भेजा है तो क्या है उस को दे हरिदास के मन में कोई शुद्ध भार था जो कि हर वैश्ना के मन में होना जाए पति। 2 का उधार भारी दास ने कहा मैं तुम्हें संतोष करूंगा मुझे में जॉब समाप्त करने। 2 बैठो ध्यान से सुनो जो जॉब में कर रहा हूँ। पूरी रात मिल गयी। हरिराज ने कहा आज मैंने जब समाप्त ही किया कल आना कल से संतोष करूँगा तुम्हे वो एशिया पंची। अगले दिन सुबह रामचंद्र खान के पास। उसे कहा कि आज मुझे प्रोमिस किया है, वादा दिया है पहले 10 मुझे संतोष करेगा, आज मैं फिर से जा रही हूँ उससे आके तुम दूसरे दिन आए। हरदा से यही कहा मैंने इतने बार मरे के नाम लेने की जिम्मेदारी उठाई है तुझे जाब समात करने। 2 इस प्रकार श्या सुन रही थी बड़े ध्यान से हाई नाम का उचारण। कहा जाता है कि शुध भग द्वारा का नाम सुना तो उसका बड़ा यह रहा प्रभाव पड़ता। और तीसरे दिन जब लौटी हरी लाल के साथ जाप करने लगी और उसने हरदा से कहा मुझे माफ कर 2 मैं क्यों आईं और बुरी नीयत के साथ आई थी और पूरी नीयत के साथ आई थी तो उसने पूरा योजना खान की योजना थी ये सूचना दे दी। हरदा से कहा ये रामचंद्र खान मूर्त है मैं तो ये सान छोड़कर 3 दिन पहले जाने वाला था तो जब मैंने देखा कि तुम आई हो रामचंद्र खान की तरफ से रुक गया तुम्हारा उधार करने के लिए, तो वैसे ने पूछा वह मुझे क्या करना चाहिए। इन प्राधा के परिणाम से बचने के लिए। हरी दास ने कहा जो संपत्ति है तुम्हारी उ ब्रामणो को बाट। 2 संबंधि बनाई थी कल कामों से और से। ये प्रार्थना की मुझे शिक्षा 2 में बहुत ऊँचे कोडी की भंग बन गई दिन रात वो भी 3 3 लाख बार जॉब करती थी और जॉब समाप्त के बिना और कोई कार्य न हिला कुटिया में बैठकर जॉब करते थे और खाने के लिए ग्रामीणों के घर से थोड़ा सा मधुकरी के भाव से प्रशांत विकार कर देते। तो जिस प्रकार है दास ने इस वैश्य को हर नाम के चालन से प्रभावित किया और भाग्य बनाया उसी प्रकार श्लप्राबभीजी जब अमेरिका गए उन्होंने कोई जादू नहीं किया केवल हर 1 कृष्ण मंत्र द्वारा किर्तन किया। लोग आय सुनने के लिए असर से जुड़े और भाग गए। 1 और समय माया देवी ने खसूरसत्रीकारूपधारन किया तो इस माया देवी ने देवताओं को भी विचलित कर दिया था। माया देवी आई परीक्षा लेने के लिए हरिदास की कुटिया ले पोंची उसको प्रयास कर रही थी। विचलित करने के लिए वह असफल रहे। अंत में माया देवी ने कहा मैंने तो देवताओं को भी विष्टि कर दिया था। आपके साथ में असफल रहे। हनेराजठाकुरएक समय 1 कुटिया जॉब कर रहे थे और उस कुटिया में 1 झहेलू शाम बैठा हुआ था जिसके शरीर से बदबू आती थी। तो कई भाग जो आ रहे थे इलाज का दर्शन ले ले कह रहे थे ये बदबू कहाँ से आ रही है? ओह शाम से आ रही है। हिसाब को यहाँ से भगा देना चाहिए। हरिदास ने कहा मुझे तो कुछ फर्क नहीं पड़ता, अगर आप लोग को फर्क पड़ रहा है तो मैं कल अगले दिन यहाँ यहाँ से चल पड़ूंगा। मैं शाम को भर कर दूंगा। और अगले दिन शाम खुली निकल गया। उस साल तो है। राज, ठाकुर बहुत ही ऊँचे कोली के भक्त हैं। जैसे। मैंने कहा उस समय मुसलमानों का राज था, मुसलमान राजा के मंत्री थे। 14 काजी। गाजी ने कहा ये हरिदास को हम नहीं रोकेंगे तो सारे मुसलमान भी हिंदू बन जायेंगे। हमें हरिदास को सुझा देनी चाहिए। वो हरी राम को नहीं रोके कोई। राजा ने कहा बुलाओ हरिदास को मेरे सामने हो, हरी दाज ले आएंगे राजा के सामने। राजा ने कहा तुम्हारा धर्म इस्लाम इतना ऊँचा धर्म है। तुम्हारा क्या सौभाग्य है, रूचेधरमेंतुमने जन्म लिया है हम लोग। तो अगर कोई चावल के दाने को हिंदू का हाथ भी लग जाए तो खाते और तुम हिंदू भगवान का नाम ले रहे हो। शर्मनीआदीतुम्हे, माफी, मांगो और अल्ला का नाम। हरिदास ने समझाया कि ये भगवान के नाम हैं। भगवान के अनेक नाम हैं। किसी नाम का भी अपचालन कर सकते हो। पापा जी जब ईरान में गए थे, नाइनटीन सेवंटी फाइव में पापाजी, वहाँ केवल समय के कई मुसलमान विद्यार्थियों से मिले। धन में राजा का राज्य था, अलग राज्य था। तो उन्होंने पूछा आप हैं कि मंदर का जवाब करते हैं, हमें क्या करना चाहिए? पापा ने कहा, कोई भी प्रमाणिक भगवान का नाम लो, अलग का नाम लेना तो अलग का नाम लो। पर प्रामाणिक, भगवान का नाम लो। भाई। राज ने इस प्रकार से बेच दिया जाता संतुष्ट हो गया था। और उनका जो मंत्री था, कालकाजी वो संतोष नहीं हुआ। जानकारी के पास काफी शक्ति थी। यह प्रभाव था। काली ने कहा, नहीं, आगे नहीं, रोकेगा, भर नाम लेना, नहीं, रोकेगा, नहीं मानता। रोकने के लिए बिल्कुल सजा देनी चाहिए। बहुत भारी। सजा क्या था सजा का साधन। उन दिनों में सजा का 1 साधन था, जो गिल्टी मुजरिम व्यक्ति था, उसे घसीट कर जाते थे बाजारों में, और कई लोग रसीले थे और कई उन्हें पीते थे। वे के साथ चाबुखकोडेसेऔर। अक्सर ये अनुभव था। जब लगी दूसरे से जा पहुँचा था, उसकी मृत्यु हो जाती थी। तो काजी ने कहा, अगर तुम है नाम लेना बंद नहीं करोगे तो वो जान कर कोड़े के साथ पीटेंगे और तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी। हर नाम लोको जल्दी को स्वीकार करो। हल्ला दास ने कहा, आप मुझे टुकड़े टुकड़े काट सकते हो और मैंने यह है नाम लेना, नई बंद करना। जो वह संस्था रश्में गई थी। कम्युनिस देशों में। कम्युनिजम के समय तो कई समय नासिक सरकार थी, तुम्हारे कई भक्त पकड़े गए थे। उन्हें कहा जा रहा था हरी राम बंद करो, माज खाओ। फिर हम जेल से छोड़ेंगे। को ने इनकार कर दिया। को बड़ी घर गहरी जामनी। बोली भरीदा से कहा हमारे टुकड़े टुकड़े कर, 2 काट, 2 मुझे मैंने। हरी राम को नहीं छोड़ा। काजी ने कहा ये मानेगा नहीं पीटो, इसे से जीत कर ले जा रहे हैं। ले जाना शुरू किया। अलग अलग बाजारों में। पहले बाजार ने पीटा, लोगों ने देखा, इतनी गई, पीट रहे हैं। लोगों ने कहा हमें राजा के पास जाना चाहिए। ये संदेश के साथ इस प्रकार का पीटना ठीक नहीं है। न्होंने देखा और कहा हमें पैसे पीटने वालों को पैसे देने चाहिए, रिश्वर देनी चाहिए। ऐसे नहीं पीटे। सब देखकर आश्चर्य हो गए थे। हरिदास को इतने क्रोध के साथ पीटा जा रहा था। 1 बार गुजर गए, दूरे बाजार में पीटा, 30 में पीटा, चौथे में पीटा और जो पीट रहे थे, उनका पसीना निकल रहा था। हाय दास उन्हें किसी प्रकार की चोट नहीं लगी। वृंदावंदाजठाकुर इस जिला की तुलना करते हैं। तुलानमनाजकीजिला के साथ तुलान मनाज को भी उनके पिता ने अनेक कठिन स्थिति में दारा रेल। घरेलू सांपो ने घेरा, हाथी चले, झैर खिलाया गया, सागर में फेका और हर स्थिति में भगवान की सुरक्षा के तो हैरान। तो पीटा जाता था लगातार और अंत में वो बाइक बाजारों तक गजी ले गए, पीटते हुए और वो पीट रहे थे। उन्होंने देखा हरदास की श्री में कोई निशानी नहीं है। चोट की वो हरदास बडे हसा के साथ नई नाम कर रहा है। वो हैरान हो गए। ये देवता है, भगवान कौन है। अक्सर दूसरे या तीसरे बाजारों तक पहुँचने तक व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। हम 22 बाजारों से घिस पीट के पीटते आ रहे हैं। हरदा के शरीर में कोई निशान निशान छोड़ कर वो जो पीट रहे थे, उन्हें सोचने लगे। वो लोग चर्चा करने लगे। अब क्या होगा हमारा काजी हमे जिन्दा नहीं छोड़ेगा खाजी देखेगा कि हम असफल ते हमारे कार्य में तो हमें फालसी मिल चला जाएगा। तो हरिदास ने सुना इन 2 भक्तों की, इन 2 पीटने वालों की चर्चा पहरेदार सोचने लगे। मेरे कारण इन्हें कष्ट भुगतना पड़ेगा? मेरे कैश भुगतना पड़ेगा। मैना ने क्या सोचा, कैसे इनकम हुई में बचाऊ ये वैश्ना का भाव श्रद्धान समाज में वह भाव रहता है। क्या ने पे डरदा सच बात है तुम 1 सफर मारोगे, हम 2 मानेंगे तुम बेचती करोगे हमें बेचते करोगे देख लेंगे। भाई दा ने ऐसे नहीं सोचा सोचा गेंदों को फांसी लग जाएगी। मेरे कारण पूरी जिम्मेदारी उन्होंने अपने ऊपर ले लिया तो हरिदास में उनके पास योगिक शक्तियां भी थी। अपने योगिक शक्तियों द्वारा सांस लेना बंद कर दिया। ऐसे लगा कि उमर गए हैं। जब के पीटने वालों ने देखा हरिदा सांस भी नहीं ले रहा, कुछ बोल रहा नहीं हर नामी आप खुश हो गए, नाचने लगे। आज में हमने मार दिया तो राजा को सूचना भेजी। 22 बाजारों कूपर के पश्चात राज की मृत्य हो गई है। तो राजा ने कहा इनके अंतिम संस्कार मुस्लिम विजन के अनुसार करो, काजी ने नहीं, ये अपराधी था इसको ये सौभाग्य नहीं देना चाहिए। फिर दोजे शरीर को गंगा में उनको मुसलमान मिल के आधार पर अंतिम नुस्कान नहीं करना चाहिए। तो राजा थोड़ा नरम था काजी बड़े कठोर था तो गाजी के कहने पर ही लाज कशी इतना भारी हो गया था कि वो फेक भी नहीं पा रहे थे। वे हर रात को ला गंगा के पास जाकर। थोड़ी देर बाद दिप्फेकाश्वी फैल रहा था। फिर हीरा गंगा के पास जाकर 1 कुटिया के पेड़ के नीचे बैठ कर फिर उनने जॉब शुरू कर दिया। हरीदास तुलसी के पौधे के सामने बैठकर जाब करते थे। वैसे जाब करना शुरू या सूचना पहुंच गई। राजा तक यही हरिदास जिसे हम ने पीटा था, सोचा था कि मृत्यु हो गई है। औ अब ब्रिक्स के नीचे तुलसी के सामने जाक कर रहा है। राजा समझ गया ये हरिदास से धारण व्यक्ति नहीं है। राजा आया उधर हरीदास को प्रणाम किया, माफी मांगी और अरदास जहाँ जॉब करना है, जो जॉब करना है जब के लिए और चंद्र खान जिसने पहले योजना बनाई थी, उनकी बेसी करने के लिए। उनकी सारी से बोली सब नष्ट हो गई। फैशन अपराध का बड़ा भयंकर परिणाम होता है। आयेदाजठाकुरको भगवान ने लाज ठाकुर कोई वृंदावन में बैठकर भजन कर देते। जैसे हमने सुबह कहा था केचिनमागने आपके पूरी धाम में लगभग 24 साल काटे थे। रोहित महा प्रभु सुबह दर्शन के लिए जाते थे। जगना और उसके पश्चाद हाईदाजसेमिलने आते थे। 1 दिन महा पर हुआ है। हरदा से मिलने हाँ बोलेगा हाय राज। ये बताओ, ये म्रच्चोंका उधार कैसे होगा? और यमना का म्रच्चरयावनुसे कहते हैं शास् के विपरित कार्य करता है। हर राज ने कहा प्रभू चिंता न करे या आप चिंता मत करो। हर का नाम कोलचानकरेंगेपराधन से कार का होगा तो रोज ही ठाकुर को मिलने snatangosवamiजब उन्हें मिलने सुनास्ामीिका। कई लोग प्रचार करते हैं, उनका अचार नहीं है, सच बात है, सच है की झूठ है, प्रचार करते और आचार नहीं है। गंगा 4 है और प्रचार नहीं करते। पर आप में 2 लोग कोन हैं, अचार भी और प्रचार भी। तो आप ऊँचे कोटी के संत हो। तो परवाज की इच्छा थी कि संस्था के भक्तों में ये दोनों गुण हो, अचार का भी और प्रचार का भी। यह नहीं कि प्रचार का उसा अचार कल। वो ये नहीं कि अचार है और प्रचार दे। वो कहते है न मुंह में राम, राम, बगल, छोडीआमसुनावो कई प्रचार करते हैं। उनका चारनी आप, आभार का, 4 बचाने, दोनों गुण हैं। इसे आप ऊँचे कोड के साथ हो। तो चेतन महाप्रभु रोज आते थे, हाइदाजकादर्शन देने के लिए चर्चा करते थे और उनका सेक्रेटरी क्षेत्र महा प्रभु के 2 प्रसिद्ध सेकेंड सेवक थे गोविंदा और सरुना। गोविंदा। रोज जंगनधपुरीमंदिर का महा प्रसाद लाते थे। पिदाजने तो 1 दिन गोविंदा जब आया उसने देखा ये हैराज लेट कर जॉब कर रहे हैं। और ऐसा लगा कि हरदा का सवाल लाज महा प्रभु से 35 साल पहले प्रकट हो चुके थे। और हरिदास को पता था कि चेतन भाव को स्वयं भगवान हैं। श्री कृष्ण चेतन्या, राधा कृष्ण नया। हरिदास को ये भी पता था कि हाँ प्रभु होती जब अपनी लीलाओं को समाप्त कर देंगे इस पृथ्वी पर या दूसरे शब्दों में वहाँ प्रभु अ प्रकट हो जायेंगे। वहाराज लिए यह सेना बहुत ही कठिन था। गोपियों के लिए 1 पल भी बड़ा कठिन था। वां से दूर रहना। तो हरिदास ने सोचा कि अब माँ प्रभु अप्रकट होने वाले हैं, महापगोकेअप्रकटहोडी देर पहले मैं प्रकट हो जाऊं। तो हरिदास ने कर जॉब कर रहे थे। तो गोविंद को लगा के उनका साथी कोयला ने महा बबूल ये सूचना दी। तो माँ बबुआ ने कहा तुम तो इतने सालों से जॉब करते आ रहे हो, अब तुम जॉब मेरी जल्प हटा। 2 थोड़ी और क्या बीमारी है। हरदा से कहा मेरी ये बीमारी है कि मैं 3 जब रोज समाप्त नहीं कर सकता। और 1 दिन जब कि चेले महाराब समझे सारे भाग किरन कर रहे थे। फायदा ने अपने बड़े ध्यान से चेत ने महापाप के चरणों पर आँखें रखी और चेत में महापाप के न रखते हुए उन्होंने अपना शरीर स्वयं त्याग है। हरे लाल ठाकुर की हरलाज ठाकुर के पास ये सुविधा थी। जो भिष्मादेवके पास थी, वेष्मादेव को भगवान ने दिया था, वो चुन सकते थे। अपनी मृत्य समय। जेस्मादेव ने देखा कि विनेश राज्य आरम्भ हो गया है। उन्होंने निर्णय किया, क्या मुझे भौतिक जगत को त्याग देना चाहिए? और भगवान पाण्डव भाई देवता। सबके समक्ष थे। और सबका दर्शन करते हुए, देशों द्वारा, भगवान के चरण कमलों के दर्शन करते हुए। श्री यादव तो उसी प्रकार हदसदेवीत्यागा कभी अगर मैं आपसे पूछूं, क्या आप ये उम्मीद कर सकते हो? क्या आप भी इसी वतन में शरीर को त्यागोगे? आप? क्या? कहोगे? हाँ या ना? हा? हा? कैसे आएंगे आपके समक्ष के दिन हम आप को आएंगे? आएंगे क्या? तो फिर आज तो अच्छा है। रानी की सम्भावना तो बहुत कम है। बहुत कम। उम्मीद है कि भगवान कृष्ण देव न सरचा हमारे समाज पर इस विषय की चर्चा करते हैं। कहते हैं जो लाभ विश्व देव को प्राप्त हुआ, भगवान के समक्ष थे, उनके शरीर त्यागा। जो लाभ हर राज ठाकुर को प्राप्त हुआ, वो भी अपने नेत्रों द्वारा भगवान के चरण का दर्शन करते हुए, उन्होंने वो ही लाभ हम सब को प्राप्त। हो सकता है। आप चाहते हो। कैसे आपको पता है अगर हम हमारा अंतिम समय आये, वरना हम को सुनते हुए और गीता को सुनते हुए। आप भागवत क्यूंकि घरीनाऔरभगवान में कोई अंतर है? गीता में, भागवत में, भगवान में अंतर है? बाबाजी ने कहा, भगवान गीता, कृष्ण वाणी व पुर वाली दुंत हैं। बापू के रूप में प्रकट होते हैं। थोड़े समय के लिए, हिरवानी के रूप में, इसलिए महान सन ठाकर भक्तो ने कहा resonselsastdi ठाकुर भक्ति नोज की, वहां ना चाहिए थे। उन्होंने भरीदा ठाकुर की समाबदीममेंपहुंचकर कहा जो व्यक्ति ये कहे कि वैश्ना की मृत्यु होती है, वो मूर्ख है। क्यो? क्योंकि वैशनेवां हमेशा जीवित रहता है। किस माध्यम से, वाणी के माध्यम से। जो प्रापर्ली ने कहा रे समय वापू आवश्यक है। वाणी से, वाणी, वापस से ज्यादा महत्वपूर्ण है। वाणी, वानी का पालन करना है। तो है। गाज ठाकुर वो के कोटे के संत थे। मैनेजर 34 का वर्णन किया और 1 समय के 3 महा पगूनेनेतेनदाहरिदाज को बुला। सुनो सुनो नित नंदा हरिदास घर घर जाओ उन लोगों से कहो क्या? बोलो कृष्ण को कृष्णा का नाम लो, कृष्ण की उपासना करो, कृष्ण के शिक्षक अपना। तो शास्त्र में कहा गया है कि जो व्यक्ति मरे नाम की लीला का स्मरण भी करेगा, उसे भगवत प्रेम प्राप्त हो जाएगा। तो अगर हम केवल स्मलनहिकले ना चाय हिदाज ठाकुर की लीला के विषय में। और जिस प्रकार वह माया देवी असफल हुई, वैश्य असफल हुई, उसी प्रकार माया असफल होगी। हम भक्तों को विचलित करने से अगर हम भी ध्यान पूर्वक क्या करें। खाली काले नाम रूप कृष्ण होता। कलयुग में भगवान अपसारित होते है। नाम में तो हमें प्रयास करना चाहिए। वाणी नाम का उच्चारण ध्यान पूर्वक करें। 10 नाम अपराधों से बजते हुए और जितने ध्यान से जॉब करोगे। शादो पड़ोगे उतनी तेजी के साथ माया का प्रभाव समाप्त होगा। तो प्रॉपरजीने हमें शुद्ध संदेश दिया है। इसका हमें लाभ उठाना चाहिए। जो भाई दास और नीति नंदा घर घर जाकर प्रचार कर रहे थे, कई घरों में उनका बड़ा उचाई स्वागत हुआ। लोगों ने कहा, महात्मा आ गए हैं हमारे घर को पुरी से बुलाने के लिए। और कई घरो में उनकी बेचती हुई। लोगों ने कहा, मां तो पागल हो गया है। इन पागलों को हमारे घर भेज दिया है। जाओ, जाओ, जाओ, जाओ। और कई ने आरोप दिया। जो हमने प्रयास किया था कि तिल मंडी में उपस्थित होने के लिए ने रोक दिया था। वहाँ पर उन्हें शिवांग में अपना ही नाम संवेदन आराम किया था। केवल जो उनके निकट के भक्त हैं, उन्हें अधिकार था उपस्थित होने का। कई नवदवासी उनके शत्रु बन गए थे। उन्होंने कहा, हमने जो प्रयास किया, तुमने रोक दिया तो हम तुम्हें आने नहीं देंगे। तो इस प्रकार उनका अपमान किया। कहा भी जब प्रचार में जाते हो, कई जगह तो लोग कहते हैं धन्यवाद आने के लिए है। कई जगह का आपकी बेस्ट भी की जाती है। हमें से लेना चाहिए, यह सोच लेना चाहिए। गयलासनतेनंदा की बेस्टी हो सकती है। हमारी तो बात ही छोड़ो। हमें तो जूते खाने चाहिए। और जब भाई राज ना प्रचार करे थे, वो सोचे थे किसको कौन है ये शहर का सबसे पाती। उन्हें ये पता लगा। 2 भाई हैं जिनका जन्म हुआ था। ब्रामण खानदान में, जो गिर गए हैं, बुरी संगत में गिर गये हैं। वो भैया का नाम क्या था। जब पहले दिन हरी मदाय जगह का प्रचार किया, महिमा उन्होंने भगा दिया। दोनों को गाली देगा भगाने दोनों को भागना पड़ा है। और जगह मलाई के शराब पीते थे। आज जरा ज्यादा था वो पकड़ नहीं पाए। और यह जगह बनाएगा या से ह। तो हमें हर राज ठाकुर की सवारी भजन को टी में पहुंचकर यह प्रार्थना करनी चाहिए कि हमारी भी रूची बड़े किसमें है। नाम हम सब के लिए असली धन है। जी कहते हैं सुख में, दुख में, दोनों परिस्थिति में ही राम को अपनाओ। अक्सर जब हम सुख में होते, परिनाम को भूल जाते हैं। सच बात है, दुख में होते हैं तो भगवान की शरण मिलते हैं। भक्त कहते हैं सुख में, दुख में हरी नाम का माप कहते हैं। छे नाम की जॉब का 1 लाभ है। दूर होगी। और इसके साथ में आनंद भी आएगा ये मत सोचिये की मेरे नाम की जॉब में कोई आना नहीं है, आना नहीं होता। क्यों करते सच बात है आप जॉब कर रहे हो। कई बार हमारे में कोई भाव नहीं है, कोई उत्साह नहीं है। हम तो फॉर्मेलिटी के रूप से जॉब करते चाहे आप इस भावना से कर रहे हो। हाँ वचरभीआयतोहमें करना ही पड़ेगा। किसी भावना से भी कर रहे हो। करो और करोगे तो आनंद भी आएगा और अंत में परम विजय, कृष्णा में असली विजय, ये हर 1 क्रिश्ना मूवमेंट इसको कोई इस कोन के नाम से लोग जानते हैं, हर मूवमेंट के नाम से सब जानते हैं। ये प्रापर ने ये संदेश दिया कि शोक चाहिए तो कृष्ण, भगवान कृष्ण, हम लोग तो आप सब जो इधर पधारे हो, जैसे सोहा कहा था। हम सब का असली उद्देश्य यह होना चाहिए कि हमारे लिए हरी नाम में रूचि बढ़े, शास्त्र में रूचि बढे और हरी नाम में रूची बढ़ाओगे तो किसमें रुचि घटेगी। हा माया में अगर आप माया से बचना चाहते हो तो यही 1 उपाय है। और हरिदास ठाकुर से प्रार्थना कीजिए कि हरेला में हमारी रूचि बढे और मुशुगप्रेमरात करें। हमारे मन में यही भाव हो। कैबनेसकामभाव से तुम्हारी सेवा में जुड़े रहे। an la takur ke go okay so
श्री गुण तो आप सब भक्तों का बहुत धन्यवाद। बहुत ही उत्साह के साथ भक्तों ने प्रश्न पूछ दिए हैं। काफी सारे तो उनके फोन को हम
आज प्रेजेंट करेंगे और कितना समय प्रश्न? the drama is really? really do it now rely।
तुम्हारा पहला प्रश्न है कि हमें कैसे पता चलेगा की वे आगे बढ़ रहे हैं? how कlनoitepropiसing in deosनऔरकिसतरह? हम बात बार टेस्ट करते रहे कि हम सा नहीं कर
पहल तो आज ड्रामा नहीं है।
जेसे पता चलेगा की हम भक्ति का प्रोग्रेस कर रहे हैं या नहीं रहे प्रogsigindvosन एंड वेदर वीर साधना करेक्टर और
नॉरकरेकटली किसी जोशी के पास जाना चाहिए, उसे कहना चाहिए? हमारे कुरमी बताओ बताओ। कई बार भाग जोशियों के पास जाते हैं। मैंने कई स्थानों में देखा है, जो व्यक्ति हर काम में असफल होता है और जोशी बन जाता है। तो पहला प्रश्न यह था, क्या था पहला प्रश्न?
कैसे पता चले की हम प्रोफेस कर रहे हैं?
ये प्रश्न लगभग सारे श्रद्धालु भगत पूछते हैं। भक्ति में आगे बढ़ेंगे तो इसका परीक्षा कैसे लोगे? यह देखिये कि हीना में रूची बढ़ रही या घट रही है और सांसों के अध्ययन में रूचि बढ़ रही है या नहीं, सेवा भाव उत्पन्न हो रहा है कि नहीं, विनम्र भाव हो रहा है कि नहीं, ये हम जॉब कर रहे हैं। हम साथ में ये देखना चाहिए। सेवा भाव। जैसे सुबह हम कह रहे थे कितने मां का सिधान था, हम दासों के दास हैं, हम दासों के, दास के, दासों के दास बन रहे हैं। यह हम सब के मालिक बनना चाहते है। और विनम्रता का भाव हम बल coleman के नहीं। 1 prs पूछे करोध का grot हो जाता है। list tangan grid सो gosाmiकo 26 बुन दिए थे जो वैसों को अनुकूल करने जाए। ये देखिये कि गुन अनुकुल हो रहे हैं या नहीं। और साधन संघ में रहने का 1 लाभ यह है कि आप अपने साथियों से पूछ सकते हो, मैंने कोई कम या नहीं दिख रही है। आपको में क्या सुधार करना चाह? संगर लाभ उठा स्वामी जी कहते हैं छ प्रकार के समान हम अकतोमेंजोड़ सकते हैं। 1 है मन के भाव विचारों को उनको सुना जा से सकते में आ गए है। तो यह नहीं कि हम किसी से कुछ पूछे नहीं। तो शाम भक्तों की सनद लाभ उठाओ पूछो आपके विचार से तो भक्ति बनाने जा रहा हूँ या नहीं। तो आपको राय देंगे। और अगर जैसे चेतना ने कहा जो अनुकूल है, स्वीकार करो तो प्रतिकूल है, उसे या लो।
थैंक यू सो, मच गा बहुत सुदर दे दिया, 2 बार दर्शन किया।
मुझे अगर पता था ड्रामा नहीं है।
सॉरी रेडी
अभी पड़े रात की मेकअप मेकअप करे। मुझे कोई कह रहा था कि साउंड इंडेमिक फिल्मी कलाकार है, जो है जो लगभग 70 साल का हो तो मेकअप ऐसा करते हैं कि वो 30 साल का बन जाता है। मेरे नाम नहीं है
के दूसरा प्रश्न है कि अगर साधु सन और ग्र अध्यन दोनों सम्भव न हो तो क्या सिर्फ जॉब करने से ज्ञान प्राप्त हो जाएगा।
साल संगत और ग्रंथ अध्यात दोनों संभव
नहीं हुए तो केवल जॉब करने से सबकुछ प्राप्त होता।
जॉब करना सबसे महत्वपूर्ण है। प्रसाद में ग्रंथों का अध्ययन भी करना चाहिये। अगर आप पढ़े लिखे हो, पढ़ने की योग्यता है तो पढ़ना नहीं चाहिए। पर जब सबसे महत्वपूर्ण सेवा है और जब करोगे तो खुद ही खुद भाव होगा। अब मुझे क्या करना चाहिए? आगे बढ़ने के वे तो पापा ने पहला मंदर खोला। न्यूयॉर्क में उन्होंने भक्तों को कोई नियम नहीं दिया है। सिर्फ कहा क्या डाले। कई बार लोग कहते हैं तुम्हारे स्कूल में तो बहुत कड़क नियम है, गुरु देखो इतने दयालु है। जो को कहा था हर 23 हफ्ते बाद ये अमेरिकन भक्तों ने हरी नाम किया था। वो खुद ही आए प्रोपीके पास वो प्रॉपर जी से पूछने लगे, swami you don आप स्वामी जी बुलाते थे, उन में स्वामी। उन्होंने कहा स्वामी, आप चाहते नहीं कि आपको हम कोई नियम का पालन करें। और पापा ने कहा कि मैं इस दिन की राह देख रहा था तो तुम खुद आओगे पूछने के लिए फिर पापा जी ने ने 4 नियम दिए। तो अगर आप हाई नाम ले रहे हो तो चाहे आपके मन में हृदय में कितनी भी मेल हो वो मेल सिलना शुरू हो जाएगा और ग्रंथों का ध्यान भी आवश्यक है ये ग्रंथ में भगवान की वाणी, भगवान की वाणी, वाणी की वाणी और भगवान में अंतर है। नहीं जिस नाम और उनमें हमें भूलना नहीं चाहिए भागवत में भगवान भी कृष्ण जवानी आखिरी कृष्ण भगवान का संदेश है कि भगवान वाचा भागवत में 1 रूप से भगवान की वाणी है। तो इसलिए ग्रंथ बहुत ही महत्वपूर्ण है। आदत डालने आदत डालना बोलने ओके
सी कंटिरेशनमेंएकऔर डिमिट महाराज पेपर्स के डिस्टरी कारण, vers san redi सो what s में जॉब कर सकता हूँ और सी की सेवा कर सकता हूँ। यह जॉब के साथ अध्ययन कर सकता हूँ। हालांकि प्रयास की किस करने का यदि नहीं संभव तो भारत को काना।
अगर आप घर में मूर्तियों की स्थापना करते हो, यह पूजा शुरू करते हो तो मूर्तियों की स्थापना जमी करो। जब आप सरलता से उनकी देखभाल कर सकते हो अगर आप जल्दी ये सोचते हो हमारे बंचने मूर्तियों की स्थापना की है में करना चाहिए नहीं कर पा कर सकोगे तो मत करो। तो what we question अगर मोटी सेवा
करे या तो उसे टाइम लिमिट हो जाएगा।
तीनों करो मुझे मीनिंग ठाकुर सेवा अगर अपने ठाकुर जी को घर में बिठा दिया है फिर नहीं कह सकते भी चाहिए तो बिठाने से पहले ध्यान से सोचो आप उनकी सेवा कर पाओगे या नहीं कर पाओगे और अगर नहीं कर सकते को थोड़ी छूट है आप किसी और भग से कह सकते हो अगर कोई और भक्त करना चाहता है तो सेवा उनको दे। 2 तो अगर आप सेवा की जिम्मेदारी लेते हो तो में निभाना चाहिए और कृष्णराज का वे राजी कहते हैं 6 दिन महाप्रभु की कृपा से कठिन कार्य सरल बन जाता है की कृपा के बिना सरल कार्य कठिन बन जाता है। छे दिन महा प्रबुध कृपा से अंधा व्यक्ति देख सकता है, गूगा व्यक्ति बोल सकता है, बहरा व्यक्ति क्या कर सकता है? उल्लंगना व्यक्ति पहाड़ों के पार जा सकता है चलना नहीं पहाड़ों के पास। तो अगर आप श्रद्धा से सेवा करना चाहते हो भगवान आपको समय दे देंगे। थैंक यू महाराज महाराज।
1 िभूतीहैकाबहुतही वेरी बरिश जिनका प्रश्न है महाराज मेरे विदेश जाने की इच्छा होती है। वहाँ जाओ वहाँ अधिक से अधिक मंदिरों के दर्शन करो, वहाँ की सारी कॉम्बिनेशन को मिलो। वहां बहुत सारी साइड से करो और फिर कंडक्शन प्राप्त करो। मुझे जाता देश से, वही सब कुछ है।
अगर आपके पास टिकट के पैसे है, अगर मिल सकता है तो बड़ी खुशी से जा। हम थोड़ी। कहते हैं विदेश ज्यादा अपराध है। अगर आप विदेश में सेवा करना चाहते हो, वह भी कर सकते हो। अगर आप थोड़ा घूमना चाहते हो भक्त के बहाने घूम भी लेना। कई लोग डटेल करते ह तो भगवान बड़ा दयालु है। कहते हैं देश में जहां विदेशों में भी मंदिर हैं, पापा ने। कहा कि ये जो हिस्को्लकेमंदर हैं लंदन में, न्यू यॉर्क में, ऑस्ट्रेलिया में, ये मेल बॉन दनदन न्यूयॉर्क में नहीं है, यह वही कुंदा में है, सारे मंदर कुंदरा में है और आपको खुशियों की जानकर। लगभग हर कोने में आपको स्कोर का मंदर प्राप्त होगा। आप का जाना है, किधर भी जाना है साढ़े 600 साढ़े 600 से अधिक के बंदर हैं। अगर आपने सब बंदरों की यात्रा करनी है फिर तो आपको करोडपति होना पड़ेगा।
हमारा का प्रश्न है की कभी कभी शिष्य को गुरु से अपने अनाथों की चर्चा करने में भय लगता है। ऐसी अवस्था में क्या करना चाहिए। 1 शिष्य पेपर भी होता की दरों को पता नहीं बताए तो क्या करना चाहिए
सबसे बेतरआनतखोईबतबाय का प्रेशर भी नहीं उठेगा पर है तो सुना सकते हो, और हम ने भी बोला की तुम्हे पता ही है तो सबके हृदय में है, वो कोई कहे की मेरे हृदय में तो कोई दर्द नहीं है तो हो सम्भव है पर कम मात्र है तो हमें यह देखना है कि भगवान ने अन्तर दूर करने का उपाय क्या दिया है उपाय जान दिया गया है। हम भक्तों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सेवा ये जो 3 दिन का उत्सव किया है इसका उद्देश्य क्या है? सोनम के न केवल वैसे तो कहा गया कहा जाता है जहाँ हम किसी चीज के स्थान में जाएं मंदिर में जाएं वह भाव होना चाहिए। श्रवनम का सुनेंगे हम वित संदेश। इसलिए आपके इस यात्रा में भी सुबह शाम प्रवर्चन है और दर्शन क्यों की सनम के जनम के माध्यम से ही हनरथजहैिखलेंगे और हमें इसका लाभ ना जाए और जितना ज्यादा सुनोगे उतनी तेजी के साथ कई बार लोग कहते हैैं स्कल के बंदरों में 1 ही संदेश दिया जाता है मायाजबैड वक्त beutiful ये तो बात सच है जो प्रबल के लेक्चर स्कोप सुनो संदेश से यह ईमेल बा मायागवतयागभक्ति में जुडो हम ढीठ लाखों बार सुनने के बाद भी इनका असर नहीं पड़ता, हमें बार बार सुनना पड़ता है। वही सन्देश पापाजी गीता के तार में कहते हैं अंग्रेजी में रेपिटीशन जनससेरीतो ड्राइव द पॉइंट होम। फिर बार बार सुनोगे तो भाव के हृदय में बैठेगा आज कल इंडिया में जिसे भी आप जाओ कौन सी सेल फ़ोन का एडिट देखते हो, अपो पर भी वो देखते। अपोभीवोकहरजगामैं तो हर जगह 2 लम्बे चाइना में था वो पूरे चाइना में 1 ही बिल बोर्ड देखा और भारत में तो हर कोने और दोनो का मालिक 1 ही आदमी है तो तो हर जगह क्यों उन्होंने को कहा बड़े बल्ब के साथ 4 दिखाते है कि यहाँ जब सुनोगे सोचोगे keलीphoन खरीदना है महंगा तो उनको खरीदोगे तो उनका भी यही लॉजिक है। बार बार सुनोगे तो लोगों की हदे बैठेगा खरीदना है म शाम के नाम नियमित रूप से रोज करना
थैंक यू सो मच मारे मोटी है और बॉर्डर डिफेंस उनका प्रश्न है। भारत जीवन का लक्ष्य भगवान के धाम जाना है तो इससे शादी करना या ना करना, इससे क्या सम्बंध
शादी कर भी सकते हो पर आगे बढ़ सकते हो। न सातवें स्कंध में विदेश समाज ने मोनी से पूछा, हम गरियसाआश्रमें हैं और इस आश्रम में रहते हुए भगवान किषणनगत कैसे हो सकते हैं, ये देखिये। को को उत्तर नहीं पता था, पर हमारे हम भक्तों की भलाई के लिए ने पैशन कोजा।
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