Lessons from Gajendra Moksham || SB 8.3.8-9 || ISKCON Rohini || 25.07.2021

A devotional lecture on the story of Gajendra Moksham explores how selfless service and sincere chanting bring spiritual benefit even through hardship. The speaker urges devotees to view difficulties as divine tests, emphasize community effort in temple work, and stay away from material illusion to maintain purity of heart.
Chapters
a राज ही करेंगे हरे कृष्णा तो हम सब का परम सभा है हमारे मे है आज की कथा करने के लिए बाल कृष्ण को संघ तो महाराज का और उसके बाद
की बात करती
रही रात महाराज पहुंचे उसके बाद भी
सेना
किया और हम सब लोग सुभागयशालीहैजआज समय करे आप सब लोग कथा का पूरा श्रवण कीजियेगा लेकिन कुछ व्यवहार बीच में आते है जो जानते अपने मोबाइल फोन आसबरू 1 निकाल लीजिये और दुबारा दे सारे और जो लोग नए वाले जब आपके साथ में बैठे जरूर बता ना
और जो छोटे बच्चे हैं उधर
ध्यान रखेगा उनके पंचों की जगह नहीं सुनाये जा सकते हैं और हमारे विश्व जारवा से आई भरते हैं और रोली से आई करते है हा हमारे विश में भारत के साथ विशेष थिति है जो रशिया से है जिनका नाम है
और हमारे सेवा gोलoजिसहैोलोजिस
तो स्वागत करते
हैं
तो by थोड़ा zयaदाbasbao hello
शाम साम आवाज भारी है ओडिसी बात पर
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हा जमा हा हा जाना वाला ना हवाला भा जरा जम जाहा जमा मीरा बन 44 ा राा लवालव
2
का का यह र का राधा जा प्यारा
हो
गा हे
करिश्णा केशना
आहाले रामा रामा रामा रामा रे आरे हरे के हरे हरे हरे रामा रामा रामा रामा
ना
या के रा रे कारे नरेगा रामा रामा रामा रामा रामा हरे के
केश
हारे हारे राम राम हमारा
र
हाय हाय किनारे कृष्णा का रे गा हरे हरे हरे हरे हार के ह हरे रामा रामा रामा रारे हर रमाला हाल हे हरे रामा रामा हमारा है ह ब हर राह म रा हे राधे हे राम हे राम रमरालेहरेर हरे रामा रामा रेह नाना आरा हमारा रे रा हरे हमारा राज रहा
ह
र
ह
हरे रामा रामा रा
हा
हा हा हा हा हा ह लो कबु बला बला
बु
यह शो मदिरा बल न काला को ब
पराया न बनो द वे
दब आरा हमारा रहा मारा की बरावा पा पा बेदम बचा बचा हो या हो या गा जा है
go i सब भक्तों का हार्दिक स्वागत हम नमो भगते वासुदेवा हम ने वासुदेव ओम नम भगवते वासुदेवाय वादेहमनभगतेवरसु
आज
हम भगत das
ना मततेयेसचजनम
रतेगनकोशएववथापि रोका
पयसंभायमाययामनी अनुपालन 10 मे ना कर इशारा कमली अनंतशक्ति हम पाई पाई न विदर नविदयस्तचजनकरवा म कुल 2 शतेववापिलोकापसंभाव या
से
शाया
शायद
या चर
हावोकायसंगवया
परेशाया
में पाया
आश्चर्य कर बड़े 23 पर और कोई जन करवा
पेगुनदसेसेव
का सर हलाया
अंत
था जी
हर
सेवा
या
a
शब्द न नहीं, वेसे विदमान हैं ऐसे जिसका जल भी जन जन करवा कर ना ना तो नाम के कोई नाम या कोई होश
वा
वा अथवा आधा पी लो इलाज तुम दबाए दृष्टि। यह जो माया के नीचे से काली कारों को अनुपालन शाशतीतीसेतेशार करता है, रस ने उसको नम मस्कारा करता, पर शाय ता को, रामनने
को
शक सवत शक्ति से अलपाया बोल पाई रो के गुवारा जिनके कार्य अद्भुत होते हैं। र पुश पूर्ण पुरशोतम भगवान वि जन गुडिया बुश से जगह जिस निराई सी, उसे के लिए वे अपनी भूल अंतरंगा शक्ति द्वारा राम चंद्र या राम, कृष्ण जैसे मानव सर उनकी शक्तिमान है। वे विभिन्न रूपों में परम् से सर्वथा मुक्त होकर अद्भुत कर्म करते हैं। अत वे
मे
अच्छी विश्वप्राण में कहा गया है कि ब्रांच कल्याण कोरी भगवान के न तो भौतिक ग्रुप होता है, न भाव। दोष अध्यात्मिक है और समस्त। आध्यात्मिक कणों के 1 मात्र लगा भगवान
ने अविका
का प्राण है। साधु नाम भक्तों को बचाने तथा अफसरों का सहारा करने के करने के भगवान के तारे होते। भगवान विकास संहार करते हैं। उसे भगवान द्वारा रक्षित भक्त की ही तरह मिलता है। दोनों का ही धर्म है। अंतर केवल ही रहता है कि भक्त जी जाकर भगवान की संजय बनता है। जबकि असुर ब्रह्म लोक को जाता है, जो भगवान के लिए विशेष दे दोनों का ही अध्यातमिक नुकसान है। भगवान वास संहार इस लौकी पर जगत को जैसा नहीं होता। जैसे की करती के। दोनों के अंतर्गत कार्य करते होते हैं, किन्तु वे प्रकृति के दोनों से उनका नाम भौती, गरीबों का अन्यथा कोई है। हरे कृष्ण, हरे राम के करके मुक्ति कैसे पा सकता है। राम तथा कृष्ण से भगवान के नाम साक्षात राम पर है। इस तरह हरे कृश्ण महामंत्री के जब से मनुष्य भगवान राम कृष्ण के सा
है।
इसका जीवन विभाग है। जो नरानके पे मात से अपने कार्य का जो से जाली के साथ यह सी करता है, तो भगवान के लिए क्या कहा जा सकता है? जब भगवान इस भी होते हैं तो वे करार से उत्पन नहीं होते। सम्पूर्ण भरता में इसकी पुष्टि भी है। जनकर्म धान के बाद अत जब हमारे लाभ के लिए कर्म करते हैं, तो भगवान भान होते हैं, तो हमें चाहिए कि हम उन्हें समान पुरुष नाम जब भगवान के होते हैं, तो वे अपनी आध्यात्मिक शक्ति के बल पर ऐसा करते हैं। समाया गया। क्यूंकि वे अब होने के लिए शक्ति द्वारा बाते नहीं किए जाते रहे? तो सभी मिल गए मनुष्य को कहेंगे कि वह भगवान को समान्य नानाने नाम तथा रूप को दुषित हो गए। किन्तु अध्यात्मिक धान तथा रूप दे ते है।
home े बंदे हम शिगुरु
ह हम स हर राधा कृष्णा पदान
कृष्णा करुणा सिंधु हीन बंधू जगत्पते चाचा कंचना गोरांगी
सारे रेरी
गई
रा हाई कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा है हे राम राम रा
e ugin on the on the to igi aditi di jerman a gun in cia late in soke परम भगवान का गुणगान जैसे हमने कहा जिन्दे कौन थे, यह कहा जा रहा है। और हम भगवान जो हैं उनका बहुत जनम ने का bagan a h o क्या है।
ना
ना दोनो ही revयोमे और प्रार्थना की है इसे परम भगवान आदि के साथ खेलते थे। 1 पहाड़ में बहुत ही ऊँचा पहाड़ था patni snan करने के अच्छा है स्नान का बीच में जाना रुचि है जाने में भी ये रिवाज है। साथ पहाड़ में खेल रहे थे जानते हो a l a में स्नान करने के लिए खेलने के लिए अपने ट्रंक से पानी और पतियों को
कौन है।
कौन आगे मेरा क्या हक था क्या किया के पैरों को पकड़ लिया तो होगे लडेगा और हजार साल के लिए हुआ हजार साल, हजार साल में हजार साल म से निकालने के लिए वो सफल नहीं हुए में था। और ये अनुभव था। मगर वो दिन ज्यादा पहलवान बन गया था। वो दिन ब दिन क्या हो गया को जल में रहो कैसे रहे को पानी बोलो गिजेल पूरा प्रयास किया, अपने पाँव को मुँह से निकाल जमा इतने टाइट से उनके हाथ पाव को अपने मुह में रखा था। हालाकि वो प्रयास करते या पाव को ो जो भक्त मुसीबत में होता है तो क्या करता है और गहराई के
साथ
में हिम्मत नहीं है। गम लड़ने के मैं अपने पांव को
नहीं
मुझे सहायता की आवश्यक है का स्मरण किया।
पो
कौन थे, कौन थे? तो ने क्या किया का उचारण किया
और
द्वारा पर भगवान का गुणगान कर रहा है इस अध्याय में जेंद्परभगवान का गुणगान कर रहे हैं ऐसे अनेक सदियों का उच्चारण करने के। तो सदा चाहता है। और जब मुह में था, जिन्होंने बहुत प्रयास किया सफलता नहीं हो उसकी। पत्नियां लिया देख रहे थे। और यहाँ उन्होंने देखा भी उनका पति ने पैरों को नहीं निकाल पाया। और जो देवता थे देवता भी देख रहे थे। देवता ने देखा जिंदा जो है हमें तो हमारे को सहयोग मांग रहा न कम क्यों आगे बढ़े। मदद करेगा ने पत्नी से मांगा कि देवता से मांगा। और देवता क्या कर रहे थे कि
वो
उम्मीद करते हुए विरिंदा हमारी हेल्प मानेगा से भी किसी प्रकार का सहयोग नहीं मांगा और उन सुधियों का उधारण उच्चारण किया कि उन्होंने ने याद से प्रुजनक। तो। आज के इस लोक में कहा जाता है कि परम भगवान जो हैं उनका जन्म और प्रगट होना दोनों में क्या है में क्या कहते हैं में तो हमें नहीं सोचना चाहिए कि भगवान है मारे समान बन जाते हैं। उदाहरण के लिए भगवान प्रकट हुए और आप इस विषय को पढ़ते हो। दसविसघरमें भगवान पर कौन से माता पिता को यकीन ना चाहते थे मैं प्रकट हो गया। और जब माता पिता ने ही क पता लग जाएगा भगवान ने क्या किया? तुरंत ही अपने अपने आप को साधारण व्यक्ति जैसा बना रहे। साधारण बच्चे जैसे बना तो भगवान के कोई भी कार्य असंभव नहीं है। तो वो कह रहे है आप जो हो बिल्कुल। हमें कभी ये नहीं सोचना चाहिए कि परम भगवान क्या हमारे समान है या हमारे जैसे बन जाते है। और विजेंद्र को ये पता था कि परम भगवान देवताओं की उपासना में आंसर क्यू के जन्म में वो मंत्रों का उच्चारन कर रहे थे, वो कौन से बंदरों का चालन करते थे पता था ईश्वर पार्मा कृष्णा लंदन 1 ईश्वर है। तो यहाँ का। आज भगवान कह रहे हैं कि आपका जन्म और आपके गुण गुण वाली आदि है, हम भगवान की जुडगिलाए है। ध्यान में आप भगवान लीलाओं में पढते हो। अगर आप सी साधारण पुरुष को ये सूचना। 2 भगवान प्रकट, आधे पुरुष आधे पशु के रूप में वो मानेगा। कोई 30 या 50 साल पहले केस होल्ड में उस केस में सामने जो party थी उन्हे फोटोराज by god he sir god हफमैन ये कैसे संभव हो सकता है? तो भगवान को समझना है, क्या है माध्यम भक्त? परम भगवान बिल्कुल दिव्यम है और वह अपनी इच्छा के अनुसार ये प्रकट होते हैं। हम अपनी इच्छा नुसार जन्म लेते है, हमें जन्म लेना पड़ता है कर्मों के आधार पर। पर भगवान जो हैं, प्रकट होते हैं अपने इच्छा के अनुसार। तो गजेंदर ये कह रहे हैं आप प्रकट होते हो अपने इच्छा के अनुसार। आपका जो दे वो है। पर भगवान जब प्रकट होते हैं, वो अद्भुत भीरा प्रकट होते है। सच बात है। जैसे अगर आप देखो सब विश्व का दिया किसे मुह खोल के दिखाओ अन्दर क्या है? तो क्या देखेगा? क्या देखेगा जब भगवान भगवान मूल खोलते है, क्यूंकि भारत को क्या अधिक है? पूरे प्रबंध यह किस प्रकार सब जिवात्मा का परिणाम हुआ? 33 करोड़ देकर देवियों प्रदर्शन पर है तो ये है परमान। इसलिए भगवान जब रोते हैं, अपने देवी रूप में रोते हैं। भगवान राम के, भगवान राम के कुल, भगवान राम ने है ब्रिज क्रॉस करना है उन्हें पत्थर फेंके जो डूबने करने थे। जब जब भगवान पागल होते हैं, नीरा पगड़ करते है और वो अपने आप को अनेक रूपों में पकड़ करते हैं। भगवान के अनेक रूप है। जैसे कि भगवान के अवतार, अवतार किसे कहते हैं? अवसर कहते हैं क्यूं कि धाम से पकड़ होता है, भगवान जो हैं वो पकड़ते हैं अपनी के अनुसार। तो यहाँ इस अध्याय में विजेंद्र उन लोगों की का वर्णन कर रहे जो उन्होंने सीखा था। अपने पूर्व जन्म में प्रपालकापिरमें क्या करे है? मत रहे हैं कि भगवान को अगर आप समझना चाहते हो, हमें क्या करना चाहिए उनके name is name is armati drwisefodonget libratedaio? भगवान के नाम है, वो क्या है बिल्कुल नहीं। तो आप कैसे कह सकते हो? तुम मेरे नाम का उचारण सारा धन कर सकते हो। जब किसी से नाम का चलन कहते है, रोज करोगे तो क्या है? तो भगवान के नामों का उच्चारण हम सब के लिए सबसे महत्वपूर्ण सेवा है। और साथ में ब्रा जी इसी विषय की स्थापना करे। तो भगवान के जो नाम है, क्या है बिलकुल? तो भगवान अपसारित होते है कैसे? कैसे उनके देवी नाम कलीकालेनामरउपातो? इस कलयुग में भागवत पापी का साधन क्या है? भगवान के नामों का गान अपने नामों में पूरी शक्ति है। और न भगत में उधार कैसे हो? is a price to do do? भगवान के नाम है उनके द्वारा किया मुक्ति प्राप्त। तो इस में वर्णन वर्णन किया गया कि हमें क्या करना चाहिए भगवान के नाम का विजिंरकस्टकीस्थिति में, उसे उन सोचों का स्पान किया। उन्होंने पर जन्म में परम भगवान का गुमान किया था। तो भगवान के नामों में भगवान है क्या? पूरी jintai भगवान के जो नाम है, कैसे है? जिनता चेतावनी पर आप क्या बन जायेगा? सोना बन जाता। तो भगवान के नामों के विषय में पढ़ते ज्ञान से, अज्ञान से भगवान के नामों का उच्चालनकरेगा को क्या मिलेगा नाम मिला भगवा नाम है 39, जाते हैं। तो सारपजमेंप्रबोजी कहते है कि भगवान के जो नाम है वो भगवान से, अभिन्न हमें उनके नामों को अपनाना चाहिए। तो विजेंद्र जब कठिन स्थिति में था, क्या किया? भगवान का गुणगान किया। इस अध्याय में बड़े सुन्दर श्लोक है। जिन में परम भगवान का गुणगान हो रहा है। असल में अगर आप पूरे भागवत में देखो तो परम भगवान का गुणगान अनेक भक्त है। और जो है वो जानते हैं क्या? कृष्णा भगवान, स्वयं कृष्ण भगवान पर। तो भगवान का जो है। लो के अनुसार भगवान की लीला है, है क्या? उदाहरण के लिए, भगवान जब प्रकट होते हैं, अदभुत मिला पकड़ करते हैं। अगर आप आज के असान हो, आप भी मजबूत पकड़ कर सकते हो। वो क्या? कहेंगे आज नहीं a, a turn और भगवान छोटे से पैदा हुए थे, आपको कोई विश्वास नहीं करता। तो भक्ति के मांग से अगर आप प्रयास करोगे। तब समझ पाओगे की भक्ति के माध्यम से क्या होता है? शुद्ध मन या शुद्ध बंध शुरू हो जाते और शुद्ध बुद्धि के साथ, आप भगवान के दिव्य रूप को समझ सकते हैं। अगर हम भगवान को केवल भौतिक कार्यों द्वारा समझने का प्रयास करें तो हम सफल नहीं होंगे। इस की यह कहा जाता है की परम भगवान जो हैं उनकी लीला है, वो सब दिव्य उनकी तुलना से धारा नहीं करते। तो भगवान राम वो भी के लीला, उन्होंने प्रकट की। तो इस लोक में कह रहे हैं भगवान का गुणगान करते ह या आप राम जी आप दोनो दिव्य हो इसलिए पयतरसाधुधमसपना तो हमे भी वन के कामों में रुचि लेने चाहे, भगवान की लीला में रूचि लेनी चाहिए। और क्या होगा? आपका जो मन है। जुड़े रहेगा किस में में, भागवत में भगवान की अदभुत लीला। और अगर आप इन्हें समझना चाह क्या है माध्यम पर ये 1 ही साधन है जिसके द्वारा आप परम भगवान को समझ सकते है। उन्हें पता था कृष्ण भगवान है, परम भगवान देखता हूँ और परम भगवान में तर है। इस में आने से पहले हम सब के थे और 1 ही परिणाम यह सच है भगवान क्या के स्वाद और नाम की महिमा के आज ही था।
पर
जी का जन्म ब्राह्मण कुल में हुआ और बचपन से ही उसे आध्यात्मिक शिक्षा दी गई थी और और 1 दिन जंगल में गया था किसलिए लिए पूजा के लिए, फूल लाने के पूजा के लिए ूलानेऔरजबफूरलौट रहे थे। उन्होंने क्या उन्होंने देखा, 1 वैश्य अपने प्रेमी के साथ और इस घटना के प्रति वार्षित हो गए और समय के साथ पत्नी को छोड़ दिया, पिता को छोड़ दिया, घर को छोड़ दिया और वैसे को पत्नी के रूप में स्वीकार किया।
उनके
10 बेटे थे, सबसे छोटे नाम क्या था, सो, सबसे छोटे बेटे के पति उनका बहुत था और इस छोटे बेटे का नाम नारायण था। तो जब भी वो उन्हें बुलाते थे नरायन राव नारायण, तो इस प्रकार पूरे दिन भर में हजारों, बार दिन में नारायण शब्द पुकार और साथ में आज ही पूरी संघ में गिरने के कारण उनके जो विचार, विचार थे वो भी बुरे बने और यामा जामरा से परिचित हो। रामराज ने कहा आप इसके मृत्यु के समय, इसके मृत्यु का समय आ गया है। उन्होंने 3 प्रतिनिधि भेजे है। आज मन को करने के लिए, उनके पास लाने के लिए, सुझाव यामोदूधहै हम यहाँ पर दूध की फोटो देखे देखोगे तो डर जाओगे। और जब मैंने दूतुकोदेखातू एकदम गम्भागहैडरगयऔरबड़े घेरी आवाज से उन्होंने किसका नाम पुकारा, नारायण का नाम पुकारा? जैसे नारायण नाम पुकारा, जो वो वहा पर और उन्होंने रोक दिया इन यमदूतों को, आज उनको यामुदूथेवो आश्चर्य हो। पहली बार ऐसी घटना बीती थी यार जिनोने भेजा था किसी को जालाने, किसी ने रोक लिया हो। उन्होंने कहा 1 प्रश्न दे आपसे ऊँची विकुक शक्ति है। यमराज क्या कौन है ा उन्होंने कहा आगे से उनको मत छूना जिनकी वाणी से हरि के नाम का 4 सो ऐसा आज भाई मान किस प्रकार भाई नाम उचारण से क्या होता है आपके पापा पाप जो भक्तों को तो कहा था भक्ति संत स्वामी का अभाव मनाया था मनाया मेने इधर से दाल दिया है, वो किसी ने दिया तो हनान की महिमा आप काम पढ़ते हो तो हैरान महिमा सबसे महत्वपूर्ण है। तो आज ही मिल के कथा में आप देखते हो क्यूंकि वो नारायण शब को पुकारे थे? दिन में हजारों बार क्या परिणाम हुआ कि उन्हें उनकी सुरक्षा हो तो भगवान के जो लाभ हैं तो भगवान से बिन। और सासों में सासों में अनेक उदाहरण है, जिनके द्वारा क्या देखते हो नाम की और नाम जो है वो ही उपाय है। इस कलियुग में क्या कहा हमारे हेज में जो मैल है, ये मैल है या नहीं है? क्या कारण है? जा हम हम भगवान यश्करनेभगवान कहते हैं। यार की तलवार से ज्ञान का क्या, शास्त्र क्या शास्त्र में परिणाम की महिमा का गुना। जैसे इस प्रकार भगवान की दियों का उच्चारन करके आप की सुरक्षा होगी तो भगवान के जो नाम हैं, उनसे हमें हमारी रुचि होनी चाहिए। 44 और से 1 भक्त मिशा सो सन्यासी थे। मायावती सन्यासी की निंदा करे। snासमाईसमे
a
this an बड़े विन से काम मिटाया। जहाँ के लोग पवत होते हैं, वहाँ बैठते हैं ने कहा, थोड़े समय पहले जब भगवान प्रकट होते हैं, अपने देवे रूप में प्रकट होता है। अनेक अलग चेहरे से इतना प्रकाश प्रकट किया कि सारे माया वाली सन्यासी जो बैठे थे वो समझ गए। जरूर ये सन्यासी समझ के प्रकाश था। लाखों सूर्य को जोड़ा फिर तुम हमारे साथ ऊपर आकर क्यों नहीं बैठे ऊपर आके बैठा और माँ। तो मैंने कहा मैं तुम्हारे मुकाबले मे कुछ नही हूँ नीचे आये हाथ के का to be an a a a a a e a e a e a a e
a
guru man
को
आरंभ किया तो को ने किया। अगर हम ये निवाई के शमकििनाडॉलरको नहीं रोकेंगे तो सारे मुसलमान बनायेगे। 1 मुस्लिम था वाह वाह जाकर काजी को कहता था मा को रोको के अंदोलन को जी ने कहा तुम दिन में 10 बार आते हो, मुझे शिकायत करने के लिए रोको रोको रोको मायके संकृत में नाली राम के अंदोलन को भी मैं देखता हूँ। तुम्हारे नाम का उच्चारण कर रहे हो। क्या है? शिकार करते हो, ये नाम का उच्चारन करते हो। ये बात सच है। जब से मेरा परिडकेहुआहइसहरिनाम के साथ का महाप्रभु से चर्चा कर रहे थे,
गुरु
ने 1 ऐसा मंत्र दिया है, मुझे छोड़ ना जाओ तो भी। और फिर कई नाम की महिमा का गुणगान करते हुए, गुणगान करते हुए क्या सारे मायावी नियाजी के क्या बन गए सब गयwname नाम करने हे तो भगवान के नामों में रुचि बनानी है। भगवान के नामों में हमें श्रदा बचाना है। तो भगवान अपने नामों से हम जो आप में अनेक श्लोक पढ़ोगे। यहाँ की आई नाम की महिमा का वर्णन है। और के प्रगट होते किसलिए आई नाम का प्रचार करे। बचपन में भी जब बच्चे रोते हैं, रोना कवन कर देते, जब इनाम पहचान हो, सो भगवान राम, भगवान, ये दोनों क्या हैं? ये नाम, उनका नाम क्या है। और अगर हम राम रूचि बढ़ाएंगे तो क्या परिणाम होगा? तेजी के साथ जो आकर्षण है उससे देवी माया जरुरत हो या भगवान के हैं। माया का विरोध करना क्या है? यार बहुत कठिन है। पर मां अमृता जो मेरी इच्छा में आएगा उसके लिए में आयेगा। शिक्षा का पालन करके आप हरीराम का लाभ उठा सके है। कहते हैं भगवान के जो नाम है वो दिव्य में है। जैसे हा है भगवान की लीला, भगवान के गुण में रूप कुस्वामी? कहते है कि भगवान के जो नाम हैं, चीनी से भी ज्यादा म। an lila a a lelahadesha, जिन्होंने गीता को 140 बार पढ़ा है और कभी लगता है गीता इतनी बार पढ़ तो और नहीं, पर अब जितना पढ़ोगे पापाजी ने इन ग्रंथो में पूरा किया, म पापा ने कहा ओके नो। तो कई बार बग्स मिलते है। तो कहते हैं हम वो किताब पढ़ सकते हैं, वो किताब पढ़ सकते हैं। हम कैसे है प्रभाजी की किताबें पढ़ी प्रभा ने गधों का अनुवाद किया उस भावना के साथ कि इस श्रद्धा से सर समझ पाएंगे। पापाजी ने। तातपर्य देते समय जो आचारों का की व्याख्या थी, उसको आगे रखते थे और जोर देते थे उसके साथ, और जो शिक्षा, जो आवश्यक है उसके युग में, वो पापा के साथ जो है। टेलर मेड फॉर कलयुग यह में कलियुग का देखते हुए बाबा जी ने तो अगर आपने 1 बार पढ़ भी लिया इन ग्रंथों को और दूसरी बार पर जितना पढोगे। क्या परिणाम होगा, क्या परिणाम होगा? उतना ज्यादा जितना, ज्यादा, उसका क्या परिणाम होगा? आपकी बुद्धि तेज हो जाएगी, बुधि तेज हो जाएगी। क्या मतलब अज्ञानता का, अविद्या की बिमारी को हम सब का कर्तव्य होना चाहिए। विद्या की बीमार को दूर करना मेरी कैसे सम्भव है। भगवान के नामो के तो हमारे में पूरा विश्वास होना है कि इन ग्रंथों में जो ज्ञान हमें आवश्यक है, वो सब को पूरा ज्ञान इन ग्रंथों में to anand the body, भगवान के नाम के उच्चारण का लाभ क्या है? कहते हैं की आज कैसे प्राप्त होगा? तो हम सब को इन शा का अध्ययन करना चाहे। ये साल जैसे हो, हम क्या बना रहे हैं और इसके वि संबंध में भारत सरकार 1 पोइंट उन्होंने बनाया है देखो में हुआ है मेल मीडिया कमेंट में जो कि कालकाता में, और ये वातन के कारण हो गया क्योंकि लॉक डाउन था में 2 महीने चली नही तो हमारे बोर्ड आप लोगो ने पॉइंट की फोटो देखी है तो अभी बात चल रही हैं और शेयर प्रधानमंत्री उसको रिलीज करेंगे ये जो कोइ है को को आप क्या कर सकते हो,
ह
दे सकते हो और हम सबको प्रयास करना चाहिए अधिक से अधिक मात्र में पोइंसकाउडरयसबको पोइंट के प्र कम कम 4, 5, 6000 कोइ ऑर्डर करे क्योंकि सरकारी में कुछ करेगी नहीं बड़ा ऑर्डर नहीं हो तो इससे मेरे हजार के सम्बन्ध में क कई प्रोग्राम किए जा रहे हैं। ये प्रोग्राम है ग्रंथों का, वेतन बढ़ाना पापाजी जीवन का लीला है, उस में ज्ञान है कॉपरडी लंबे समय उसको ज्यादा डिस्ट्रीब्यूट करना। तो आप सब से निवेदन the जो speslmeratanहोगा छोटी ces है, हम सब भक्तों के ओनली चांस उम्मीद करता है, ढाई सौ साल तक रहेगा, सकी उम्मीद है ढाई सौ साल। a this is your one to take a man। जुड़ोगे barton, तो आज आज के लोक में क्या कह रहे हैं? वो कहते है आप हो बिल्कुल है दिव्यम। और आपका जो नाम है, क्या है। और इसलिए हमें भगवान के नामों में रूची बढ़ाने के कई बार लोग पूछते हैं, रूची कैसे बढ़ेगी, ऐना में रूची कैसे बढेगी, क्या है में रूची कैसे बढ़ेगी, रूची बढ़ेगी, भाई नाम का उछालन, नाम का उच्चालनकरोगे, रूची बढेगी, अगर आप शास्त्र को पढोगे तो शास्त्र में रूची बढ़ेगी और bhot रूची बढ़ाएअमकाउचछालन करे। तो विजेंद्र जो थे, उन्हें पता था कृष्ण, भगवान, परम भगवान, इसलिए जब उन्होंने बंदों का उच्चारण किया, उन संबंधों में केवल भगवान कृष्ण का गुणगान था। देवता, जो थे दे, जैसे आप स्पोर्टिंग मैच देखते हो। देवताओं को भगवान की लीला का शन में बड़ी गुच्छी देख रहे थे, सोच रहे थे कि जिंदा हमें भी संयोग के लिए मांगेगा वो देख रहे थे, सोच रहे थे विजेंद्र हमारी मदद मांगेगा भगवान। और जैसे पेड़ की जड़ में पानी डाला, तो पूरे पेड़ में उसका असर आ जाता है, उसी प्रकार किशन भगवान की भक्ति के द्वारा क्या होता है। क्या सब देवता और देवियों के प्रति नव का भार है? सब का, सब का पालन होगा। आप, आप भी घर में आप बिजली का बिल भरते हो, पानी का भी बढते हो, कॉपी टैली भरते हो, मान लो, सब टॉक्स भरते हो, पर तेतीस करोड़ देर तक नहीं भर पाते। आप 33 करोड़ जगहों में आप पे अपना वार कर सकते हो। नहीं तो अगर आप प्रयास भी करो देवताओं को प्रसन करने के लिए। इसलिए शास्त्र में क्या क्या उदेश्य है। जल में पानी डालोगे प्रभाव है। इस अध्याय में आप अनेक शो सुनोगे, इसमें क्या किया जा रहा है? परम भगवान का गुणगान और परम भगवान के गुणगान में आध्यात्मिक की हैं। और परम परम भगवान साधन क्या है। वह मंत्र का उच्चारण और इन मंत्रों का होता है। श्रीमद भरवाने शुरू से अंतर क्या है? भगवान का गुणगान अभ्यास थेभीउे, रचना की संतोषी हो गए। मुनि न मुनी क्या कहा तुमने केवल शुद्ध भर्ती पर किया। इसके पश्चात उन्होंने हमें सीमा ज्ञान दिया। तो सीमा भागवत में परम भगवान का गुणगान किया जाता है। कई नाम की महिमा का गुणगान होता है और ये उदेश्य होते हैं। कलियुग में सब क्या है उपाय
तो
ये दिया विष्णु कलियुग में नाम के उच्चारण के द्वारा वो ही लाभ आपको मिलेगा जो की सत्य मिलता था। कैसे भगवान का चिंतन लोगों की आदि थी। 1 लाख स और 70, 80 हजार साल तक वो भगवान का चिंतन कर सकते थे। फिर कौन सा युग 10 गुना कम हो गए और भगत प्राप्त का साधन किया था। बड़े बने गया, जिसमें मंटो का उच्चारण किया जाता था। अग्नि का गनी को जलाते थे। कैसे? a, a, a, a, a, a लाल सकल प्राप्त हो। का है कैसे? तो हमारे लिए क्या याद आपको यही कहा जाता है। ये मंत्र उचारण कोई भी कर सकता है, कोई डिग्री देने की कोई आवश्यकता नहीं है। संस्कृत के पद बनने की आवश्यकता नहीं है। जाओ कोई मिले जो कहेगा नाम का उचारण नही तो भगवान विजेंदर प्राथना सुनकर भगवान ने आकर क्या किया? विजेंदर के पाव को कर के मुँह से का या फिर जिद। तो इस अध्याय में आप सुंदर लोगों को पढ़ते हो। जिसमें परम भगवान के गुणों का वर्णन है और महामंत्र की दिव्य शक्ति का वर्णन है। how to get border सादा बक्ती सबके लिए आवश्यक है। चाहे आप बिस्तर हो या हो। अगर आप साधना बक्सी का आते है का पालन आप नियम का पालन करोगे। तो भक्ति मांगे क्या आगे भी है कृष्णा। jaldi to meeting at at any questions yes
port transla
ट्रांसलेशन में है ही comi
lord ne is means the lord comes on a i was thus तपस्या
की थी
वो चाहते थे 1 पुत्र भगवान जैसे है आम
बताया की पापा सम्पूर्ण जान है, बताते है की
है
उनकी सारी,
आपने बताया की प्राजी बताया है की अगर उसका के कम ज्ञान है, जो भी आपको सही जायेगा। परन्तु प्रो ऐसा भी किया है कि आप जो जा रहे हैं उनकी किताब
में 2 बार दिन चा, फिर उनके गाबा था, वो अपने सामने रखे श्रीधर के सा प्रभा तीनों को पढ़ते थे और फिर अपने काम को जोड़ते थे। इसलिए आप कह सकते हो बाबा जी के ताते महान छाया है। उनके विचारों को भी प्रस्तुत किया गया है। yes we gain is a कईबार को समझने जिसे गीता सेन नेट्रोमिशनकेलिए सौ सौ
के मिशन को इस चीज को क्या करना चाहिए करना चाहिए या फिर प्रोफानीबुक्सी करना ना चाचा। कई बार हम प्रोफाल बुक्स को समझने के लिए कई और रूप से अलग कर, जैसे गीता के लिए क्या हो
की मैं समझा को पढो दिया प्रभि घंटो को अच्छी तरह समझने के लिए है। se is friend विचार दिया paba का मूड बिलकुल न है okay
i धन्यवाद
पर बोला कि गजेदरकेजीवनमें कश पाया
जीवन
में कशातेहैी भगवान कहते है 4 कारण में धन चाहिए anजिासुजोलोगही पीड़ित है तु भगवान कहते है 4 पुनीता कम से कम मेरे पास नहीं, चारों में सर्वशेस्ट कौन है। ज्ञान के आधार पर निष्काम भाव से मेजर में आता तो अगर आप। तो जब कठिन स्थिति हम सब को कठिनाई का सामना करना पड़ता है। जैसे कोविद के समय प्रयोग या हुआ और भयंकर स्थिति भी। मेरे को बढ़ाओ को बड़ा बढ़ाओ तो सादे भी कहते है। क्यूंकि जितना आप बढ़ाओगे, उतना ज्यादा
मैं
आपका स्मरण करूँगा, जितना स्मरण करोगे, उतनी जल्दी मुझे, मृत्यु के बंधन से छुटकारा मिलेगा जल्द देखो। जैसे। वो तो इंडिया टिप्स के मूड में थे, पत्नियों के साथ, सिलियों के साथ साथ जाने दे। सुन्दर बगीचे में खेलने के लिए
बाहर
बाहर था, बहुत ऊचपबहाडजोबड़ासूरत बगीचा था, वो जाने थे। भगवान ने कहा इसका उद्धार किया जाए और भगवान और परिणाम क्या हुआ? भगवान आये विज, an, e, e, e, e,
e,
e, e o करनाई का सामना नहीं करना चा। अगर कठिन स्थिति आती है तो भगवान का उचारण करो और उसे
समाम।
इससे राज जानते हैं की आपको अपने ही किसी हालत में खाया में रुचि नहीं करनी चाहिए। किसी हालत में शास का अध्ययन नहीं कम होना चाहिए। इसी हालत में हमें साधुसंग से दूर ही रहना चाहिए। ये कलयुग में माया का प्रभाव तो आप पढते हो। बार बार साधु, बार बार पढ़ते है नाम की महिमा ninety five percent to name, mahima bar, bar, so be a sbi क con है जो मंदिर बना
है,
इसे तेजी से बोलना चाहिए या mal gady sped, esa से malgadyspedsuper चाइना ने गाड़ी ट्रेन बनाई है 600 तो वो सुपर, सुपर, सुपर, फास्ट सुपर, फार सुपरा तो हमें बनाने बंद सुपर। तो ये बंदर को काफी समय हो गया है। है की नहीं तो आप सब जो भक्त हो, आप सब को प्रयास करना चाहिए। सहयोग दे देगा। ऐसे तो आप सहयोग देते आये हो और आपके सहयोग से ही ईमानदार यहाँ तक पहुँच पाए। अभी थोड़ा सा काम है। आज सुबह हम जब के थे और सामने के पाक से वहाँ से आप मंदिर को खूबसूरत दिखता है। वहाँ जाकर देखो बहुत दूर से बहुत खूबसूरत दिखता है। तो अभी थोड़ा और प्रयास रह गया है। अगर आप सब को हमने जल्द से, जल्द से है। भगवान आप सुविधा देंगे। ऐसे तो कई बार बहुत मेहनत कर रहे हैं। okay anymore question yeah बताते हैं किस में बताते हैं कि मां की सेवा में दुख है
सेवा,
सेवा के दौरान, सेवा के दौरान अगर आपको कठिन सीधी का भी सामना करना पड़े। आपको ये सोचना चाहे भगवान चाहते हैं। मैं और भी प्रयास करूँ। भगवान भक्तों की भी परीक्षा देते हैं। भगवान ने मा पु को आदेश दिया, जाओ मेरे चंदन लेकर गए, यमुना में चन्दन दिया। भगवान ने कह दिया अब यहाँ तक लाने की जरुरत है। मुसलमान की। वे संग करेंगे ना तो भगवान की परीक्षा भी देते। प्रॉपर को भी लगभग 40 साल संघर्ष करना पड़ा की स्थापना के लिए म bade
कर
ो कोन वो लास्ट से, शायद, न, सेवा से साथ आप को
कैसे होगा।
ये मन बंदर बंद है भक्तों के सहयोग से और प्रयास करते है। कभी थोड़ी ज्यादा समय नहीं जाता बंद बंद हो जाते हैं। ऐसा कोई मंत्र नहीं है जो अधूरा छोड दिया और सब जगह यही संघर्ष होता है। नहीं, बम्बे में संघर्ष नहीं होता। यह समस्या क्यूँकि हिंदू भाई बहनों में गरुदान की भावना होनी चाहिए। उन्हें देखोगे अरब देशों में थोड़ी थोड़ी दूरी पर चोर फॉर्म बनाता है। loan pryas on question सोन में प्रश्न
है कि यदि हमार पर सरे समय है तो हमें क्या बनाना चाहिए, जार बनाना चाहिए या
बचाया sore inteliigence समय है 42, तो फिर दोनों गोल आपके रेयलाइज हो जाएंगे। okay i mo kdagoryes
s,
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chandi fell like sand ka to, हो खुद पर से हो खुद मंडराते हो stop दादाजी पूछा शादी
नाम
के साथ 4 की फॉलो करने देती है तो
वो 4 से कुछ वैसे सब कुछ फॉलो करते है कभी कोई 1 हो तो क्या कोई असर पड़ता है
play krishna s, r, jan muझkrmdokayया जान
जैसे
गजिदेबदकाप्रयोग किया हम सॉरी सॉरी फिर बोले जब तो तो गजेंद्र जी अपने साथ
का प्रयोग
माता ने अपने रिश्तेदारों की तरफ भी देखा शुरुआत में वैसे हम भी वैसे करते हैं पहले अपने कार से तो यह अच्छा नहीं पर कौन? तो वही काम करते है की 2 दोनों रूट अवेलबल है कई हैं जो तुरंत भगवान के पास जाते हैं, कई हैं तो प्रयास करते हैं दोनों ही ठीक है में दोनों के द्वारा भगवान की शरण में रहे
शिव
से धान से मिलते है मैंने कहा यह प्रॉपर कहते हैं ग्रंथों में अगर आप अज्ञान से भी नाम कर लंदन में मेकिंग तो उसने अपराध किया और उसने हरी का नाम मिल जाए तो उसने उसको हो जाते हैं लोग कहते हैं की तो नोingereजन 2 देते है हां जेंज या नाम लेते है तो लाभ मिलेगा कि नहीं अगर जो लोग कहते हैं तो भाई नाम लेते हैं लाभ मिलेगा या नहीं मिलेगा उनकी उनका विश्वास नहीं है हर नाम में, इसलिए वो कहते है इनका पूरा विश्वास है भाई नाम में अगर उन्हें कष्ट भी सहना पड़े तो कहेंगे कश को बढ़ाओ तो मुझे हर नाम का उचारन करने 2
thank you so much newad। निवासी को किया और आपको परोसी
और
आज जैसा की आप नही है अभी सारे से बीडी ही है।
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