सर्वश्रेठ भक्त कौन? | Marathon Felicitation | 6 Feb 2022 | Juhu | Śrīla Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī Maharaja

In this devotional felicitation event, Śrīla Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī Maharaja emphasizes that the most beloved devotee is the one who propagates the divine message. He stresses that the true shortcut to spiritual progress is the active dissemination and personal study of the sacred granths. The talk recounts how the scriptures, translated into multiple languages and distributed worldwide (over 600 centers and 60+ languages), have transformed lives, illustrated by an anecdote of a mechanic whose encounter with the books led him to spiritual awakening. Maharaja urges devotees to undertake a ‘marathon’ of service: reading the texts continuously throughout the year and distributing them simultaneously, describing this dual effort as essential, joyous, and spiritually rewarding. He also highlights the historical efforts of early propagators, the challenges of translation, and the collective responsibility of all devotees—full‑time, part‑time, or communicators—to sustain this mission.
Chapters
उदाहरण के लिए, गीता में, भगवान कहते
हैं
सब भक्तों में सबसे प्रिय कौन है? कौन है जो मेरा प्रचार करता है? कई बार भक्त पूछते हैं, कोई शॉर्टकट नहीं है। हम कहते हैं, यह 1 शॉर्टकट है। प्रचार करो जो भगवान कहते हैं, सब बलों सबसे प्रिय वो है, जो कि प्रचार करता है। चेतिदेवहप्रभुने भी इस पर बल दिया था। चीधिरमाबबूने कैसे जानते हो? दास कहा हरदास घर घर जाओ, क्या करो सबको 1 संदेश, 2 क्या बोल, कृष्णा, कृष्णा और फिर ठाकुर भारतीय विरोध थे, जिन्होंने सारे विश्व विश्व के कई प्रसिद्ध स्थानों में अपना 1 ग्रंथ भेजा, जो कि उन्होंने लिखा था, इसके ऊपर कानपुर और बाकी प्रॉपर जी को क्या आदेश दिया था? भगवान से सुविधा दे, क्या करो? प्रोपी अपने गुरु महराज के साथ थे खुद में, जबकि 1 पर कम हो रहा था। और ये जो ग्रंथों को प्रकाशित करना और बाद की सेवा है, क्या है यह? पापाजी ने कहा, क समय, अगर तुम मुझे पसंद करना चाहते हो, तो क्या करना चाहिए? तो अभी क्या कारण है? इन ग्रंथों की वतन की सेवा को इतना बल दिया गया? क्यूंकि इन ग्रंथों में है दिव्यज्ञान? और इस ज्ञान के द्वारा अब जीवन का लक्ष्य प्राप्त कर सकते हो। आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते ग्रंथों का प्रभाव 1 उदाहरण देता हूँ कि जलंदर 1 शहर है पंजाब में, तो वह 1 व्यक्ति अभी बक्स बना है। उसका काम है स्ट्रंक को रिपेयर करना। वो 1 आदमी ट्रंक लेकर आया था रिपेयर करने के लिए, उसने अपनी तरफ से पूरा खाली कर दिया, तो वो भूल गया था 3 छोटी किताबों को निकालने के लिए। तो जब इस कारगर ने ट्रंक खोला किस लिए, उसके हाथ में क्या गए? 3 चोर किसके थे उन गंधों को पड़ा बड़ा प्रभावित हुआ, मंदिर जाने लगा। और भजन, और यह परिचय कैसे हुआ? इन के माध्यम से? क्यूंकि वो भूल गया था? सू की ट्रंक से। तो आज सारे विश्व में, अगर आप देखते हो कि इस संस्था या प्रचार हो रहा है, आप जैसे जानते हो, 600 से अधिक केंद्र है, सारे विश्व में प्रचार हो रहा है। क्यों इन ग्रंथों के माध्यम से इन में ज्ञान की हवा करते भी यह बनता है? ग्रंथो को बातें व पड़ेंगे हमें यह नहीं सोचना चाहिए। हम केवल बांटेंगे बस में पॉइंट्स देने के लिए। सब हमें यह भी करना है गंध पड़े। और जब आप दूसरों को बाटते हो तो क्या संदेश देना चाहिए? इन गंधों? तो इन गंधों में है दिव्यज्ञान। और इन ग्रंथों के द्वारा हजारों लोगों का जीवन सुधरा है। अगर मैं आपसे पूछूँ आप में से कितने भक्तों को जुड़े थे? गंध के प्रभाव से? आप मेसे कितने भक्त हो जो जुड़े थे? इन ग्रंथों के प्रभाव से लगभग 80 प्रतिशत लोग, कहेंगे किसी ने गन दिया? हमारा जीवन सुंदर। सारे विश्व में प्रति की गंधों का अनुमान 60 से अधिक भाषा में हो गया है, उर्दू में भी हो रहा है। और लोग सारे विश्व में इन गंधों को पढ रहे है, जो आप सब से विनती है। क्या आप इन गंधों को बार पर पड़ोगे। इन गंधों को आप पढोगे ज्ञान ज्ञान है, वो पड़ेगा। और जब आपके पास ध्यान में ज्ञान हो, जब आप ये भेदभाव कर सकते हो, क्या लाभधारी है, क्या लाभदारीभें? तो प्रापा जी ने इन ग्रंथों को बड़ी कठिनाई के साथ उनको प्रकाश का। सबसे पहले प्रापा जी ने सीमा भाग, मोसम अंग्रेजी भाषा में 3 भागों में अनुवाद किया और प्रकाश किया। और जब प्रापा जी ने, जब प्राजी पास ये प्रथम सदन था, प्राप्त हो गया था अंग्रेजी भाषा में। फिर प्रॉपर जी ने क्या सोचा और मैं विदेश जाने को तैयार हूँ, पर हथियार है। फिर प्रॉपर जी विदेश गए, उन्होंने अपना अनुमान का कार्य और भी पड़ा है। 1 समय था विदेश जाने से पहले, जब प्रपा जी भारत धामदरमंधनमें निवास करते थे, तो प्रपा जी क्लास डब्बे में आते थे, बस और साइकिल लेकर बाजार में जाते थे, कागज खरीदने को और गंधों को प्रकाशित करने के बाद खुद ही जाते थे बाटने के लिए। वर्ल्ड मैन मी, फिर के बाद जैसे प्रचार बड़ा, माने, अच्छे, प्रतिनिधि, भेजे और उन सब के सहयोग से सारे विश्व में बुक डिस्टब्यूशन है, बहुत तेजी के साथ फैल गया। आज संडे देशो में भी, राज्य इत्यादि में हो, ठंड है, वहाँ भी हमारे भाग जा रहे हैं बर्फ में क्या करने के लिए। तो ये जो ग्रंथों के वतन की सेवा है, यह बड़ी महत्वपूर्ण सेवा है। और यह इस सेवा पर प्रभा जी ने बड़ा बल दिया। और हम जो स्कूल के भक्त हैं, चाहे आप फुल, टाइम, बरमचारी हो या कम्यूनिकेशन के भक्त हो, हम सब को क्या समझना चाहिए? इन ग्रंथों के वेतन की सेवा का महत्व इन घंटों में है। असली ज्ञान, राज, विद्या, इसका ध्यान करें, उसके द्वारा हम जीवन को सुधार कर। अभी हमें यह नहीं सोचना चाहिए। ना हो गया महीने छुट्टी मुझे बगला मेहनत करेंगे, ऐसा सोचना चाहिए। माया का मैराथन साल में कितने महीने होता है। भाग ने बॉम्बे में भी या लॉक डाउन नहीं है। तुम्हारा काम है कितना। तो हम भक्तों का 12 महीने रहना चाह है, 12 महीने सेवन सेवन, सुबह से रोज और सोचोगे थक जाओगे। नहीं, इन की सेवा में इतना आनंद है। अगर आप जुड़ोगे तो आपका दिल करेगा। और भी जो। श्रीमत भगवत के पांचवे सन में भगवान विशदेव उदाहरण देते हैं, कहते हैं कि 1 बुद्धिमान व्यक्ति अन्य व्यक्ति को ठीक रास्ते में जोड़ता है, तो क्या अनुभव करता है? प्रशंसा अंदर व्यक्ति है, सड़क के दूसरी तरफ जा रहा है। और 1 व्यक्ति पीछे से भाग कर उसके हाथ को खींच लेता है। तो वो क्या लगता है? बचा दिया उसने। तो उसी प्रकार इन ग्रंथों में इतनी शक्ति है कि अगर कोई 1 स्लो को ही ध्यान से पढ़ ले, उसका जीवन सुधर सकता है। तो आप सबसे निवेदन है। आप सब, जुड़िए इस सेवा में और हमारे दूसरे स्थानों में हमारे भक्त हैं, वो भी बहुत सेवा कर रहे हैं। बड़ा आनंद आता है इस सेवा में, तो आप सब से निवेदन है आप सब इन गधों को पढ़िए, इन गंधों का पढ़ना और प्रचार के लिए हमें उत्साहित होना चाहिए और क्यूँ नहीं आखिर इन गंधों में है किसका क्या भगवान के क्या तो आज हम उन भक्तों का आभार प्रकट करेंगे जिन्होंने बैरल के महीने में प्रयास किया। क्या अधिक से अधिक मास में को पाने के लिए और प्रयास सच सदा उत्साहित होना चाहिए पढ़े और और क्या बारे में और ये थी पर बड़ा भार जिन्होंने सेवा की है और जिन्होंने सेवा नहीं की उनसे निवेदन है वो अगले साल और भी उस से करें जिन्होंने सेवा की है उनका भाव रख किया जायेगा। और आप सब से निवेदन है कि आप सब जुड़े इस सेवा में हमारे कई गीत हैं जो कि बखिया हफते में 1 दिन 2 दिन जाते हैं बग से मैं जी जैसे शेयर में में 3000 कॉंगेशनकेभक्त जुड़े हुए और बम्बे में भी कई जुड़े हैं और जुड़ सकते हैं और इन ग्रंथों को गंध के माध्यम से सबका उद्धार करना है तब सब जुडेगे मे 7 साल करोगे 11 बजे से भूल जाओगे करोगे
कीजिये
वे की शुभ कामनाएं स्वीकार कीजिए
बहुत बहुत धन्यवाद महाराज जी आपके इस कृपा पूर्वक आशीर्वचन के लिए जिसके चलते हमें पता चला कि माया की मार 12 महीने चलता है और हम केवल दिसम्बर में कार्यरत रहते हैं तो महाराज से लेकर हमें 12 महीने मेराथन करना है भगवा का वितरण था कितने लोग सहमत हैं रहे हैं सी
डबल डबल बैनाथोनीरीडिंग
एंड डिस्ट्रीब्यूट तो हमें मारा का बहुत अनुमोलमालदर्शन है की केवल हमें वितरण नहीं करना है, हमें इस का पठन भी करना है, भगवान का जो है हमें पढने भी है ये महत्वपूर्ण संदेश आप लोग जान लीजिये की केवल वितरण नहीं करना है तो महाराज जी बोले हमे पढना भी है तो ये डबल मेहनत होने है अंदर से और बाहर से, तो इसीलिए हमको के ग्रंथ जो है वो 12 महीने पढने भी है और वितरण भी करना है यही हमारा कार्य प्रवचन मे बोलते है की अगर आप पुस्तक को जाओगे वो पूछेगा इस पुस्तक की क्या पड़ता आप पढ़ लो चल तो इसलिए महाराज जी के उसी बच्चन को दोहरा रहे हैं और हमको स्मरण दिला रहा की हमने इसको पढ़ना भी है और दूसरों को वितरण भी करना है ये डबल मैरथवरहैहरेकृष्ण धन्यवाद, मारजी, सुनाओ, के रिक्वेस्ट, दवेरी, सीरीज,
हारे, चाहे,
राम, राम, रे।
More from PRASAD

Rare Pastimes & Timeless Lessons of Guru Mahārāja | Stories Every Disciple Should Hear

ISKCON Legends- pure devotees meet-HH Jayapataka Swami, HH Gopal Krishna Goswami, HH Radhanath Swami

Jagannātha Ratha-yātrā Through Śrīla Prabhupāda's Mercy | 29 April 2006 | Nairobi, Kenya

Lord Jagannātha's Appearance Pastime | 21.07.2019 | ISKCON Calgary | Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

The Ācārya Teaches by His Own ExampleGuṇḍicā Mārjana by Guru Mahārāja #shorts

Guṇḍicā Mārjana – Lord Jagannātha's Pastime | 21.7.2019 | ISKCON Calgary |Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

H.H. Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī Mahārāja - Exemplary Sādhana and Deity Worship # shorts

भगवान की कृपा कैसे प्राप्त होगी ? | 11 Jan 2014 | Punjabi Bagh | Srila Gopal Krishna Goswami

Material Education vs Spiritual Education | Srila Gopal Krishna Goswami #shorts

