Memories of Guru Maharaj By his Secretary H.G.Dashavatar Prabhu | Navi Mumbai |Gopal Krishna Goswami

In this extended devotional discourse, H.G. Dashavatar Prabhu, former secretary of Guru Maharaj, recounts a wide range of personal memories, teachings, and daily practices of the guru. He explains the guru’s philosophy of sharing prasad in small portions to avoid attachment, the guru’s strict discipline despite serious health issues (multiple heart attacks and doctor’s advice), and the guru’s unwavering commitment to service. The talk details the unique practice of "DT worship" – a ritual involving devotional tokens such as photographs of deities, Shaligram and Giri‑Raj stones, and specially prepared plates – and the precise protocols for handling these items, including cleanliness, non‑contact, and the sequence of worship before meals, after Mangala Aarti, and at specific times of the day (morning, noon, evening Gayatri). The speaker also describes the guru’s travel habits, carrying deity photos for DT worship on the road, and the guru’s schedule that tightly interleaved meetings, classes, and worship without allowing time for prasad. Additional anecdotes cover the guru’s interactions with senior devotees, the gifting and reverence of unique stones, and the guru’s instruction on maintaining purity during worship. Throughout, the narrative blends devotional reverence with practical guidance, offering listeners insight into the guru’s lifestyle, ritual rigor, and the underlying spiritual principles that guided his life.
Chapters
आप सभी भक्तों का इवनिंग, महाराज के गुरु महाराज की गोपाल कृष्ण गोसावी महाराज की ग्लोरिफिकेशन की क्लास में आप सबका स्वागत है। थैंक यू तो हम क्लास शुरू करेंगे वैश्णव भजन से छोटा सा take tartan
हा, हे वेश्नव ठाकुर दयार सागर हदासे करूणा करी। ओ ओ वेष्णव ठाकुर दयार सागर अदा से करुना करी दिया। पद छाया सदेह माया दे दिया। पद छाया सोदे माया तुम्हारे चरण धरी तुमारा चरण धरी छाया वेगदा मी छाया 2 श सौधे छाया वेगदा मी छय दोष सौधे छय गुणा देह। दा से छाया सतसंग दे है माया छया सत संग देह माया बे सच संगेरा से बसे शी संगेरा से
ए
का किया, मार नहीं पाए बलो का ए क किया, मार नहीं पाये ब अल हरि नाम संकीरतन तुम कृपा करी श्रद्दा बन दिया। तुम्हे कृपा करी शुदा बंद दुदिया देह कृष्ण नाम धने
देहा कृष्णा
देहा कृष्ण नाम धाने
देहा कृष्णा
कृष्णा से तुमारा कृष्ण देते पारा तुमारा सकते छे कृष्ण से तुमारा कृष्ण देते पर तुमरा सकते से मी तो कंगाल कृष्ण कृष्ण बाली आमित कंगाला कृष्णा कृषना बाली धाई तब पाछे पाछे धाई त पाछे पाछे। ओ वेश्नव ठाकुर दयार सागर इदसे करुणा कौरी दिया। पद छाया सदेह आमा तुमारा चरने धरी जाया वेश्नव ठाकुर वेश नव ठाकुर वैष्णव ठाकुर जय विष्णव ठाकुर जय प्रभु पदाए प्रभु पदार प्रभु पदाई जय प्रभु पदा जय गुरु देवाय। गुरु देवाय। गुरु देवाय ज जय गुरु देव।
यह बहुत सुंदर विष्णु भजन है। शिला भक्तिन ठाकुर द्वारा रचित। इसका भावार्थ मैं पढ़ने का प्रयास करूंगा। आप ध्यान से सुनिएगा। मैंने इसमें कुछ चेंजेज किए हैं तो आप उसको भी श्रवण कीजिए है। हे वेश्नव ठाकुर गुरु महाराज। आप दया के सागर हैं। गुरु महाराज। अतएव मैं आपसे याचना करता हूँ कि आप इस दास पर करुणा करें। गुरु महाराज। मुझे अपने चरणकमलों की छाया देकर शुद्ध कीजिए, क्योंकि यह ही वह स्थान है, जहाँ गुरु महाराज शरणागति की मेरी इच्छा है। गुरु महाराज। आप कृपा पूर्वक मेरे छे वेगो का दमन करने में मेरी सहायता करें तथा मेरे 6 दोषों को सुधार कर। मुझे 6 गुण प्रदान करें। हे गुरु महाराज। हे वैश्णो ठाकुर। 6 प्रकार का सत्संग प्रदान करें। गुरु महाराज। मैं आपके निकट आपका संग प्राप्त करने की आशा में आया हूँ। गुरु महाराज। मुझमें पवित्र नाम के संकीर्तन करने की शक्ति नहीं है। अतः कृपया मुझे श्रद्धा का 1 बिंदु प्रदान कीजिए और भगवान कृष्ण के पवित्र नाम रूपी धन को प्रदान कीजिये। गुरु महाराज कृष्ण आपके हृदय के धन हैं, अतः आप कृष्ण भक्ति प्रदान करने में समर्थ हैं। गुरु महाराज। मैं तो कंगाल दीन हीन पतितात्मा हूँ। मैं कृष्ण कृष्ण कहकर रोते हुए आपके पीछे पीछे दौड़ रहा हूँ। श्रे गुरु महाराज की ज। ओ मज्ञान तिमिरण धस्या ज्ञानान जना शलाका चक्षु मिलित मेन तस मै श्री गुरुवे नम नम।
ओम विष्णु पादाय कृष्ण प्रेष्ठायभूतले श्रीमते गोपाल
कृष्ण गोस्वामी इति ना मिने प्रभुपादस्से साहित्यम प्रकाश अब तिर्यच प्रचारण कृत्वान साधु भगवत पादायतेनम नम।
ओम विष्णु पादाय कृष्ण प्रेष्ठा य भूतले
श्रीमते भक्ति वेदांत स्वामी तिनामिने नमस्ते सरस्वती देवी गौर वाणी प्रचारिणी निर्विशेष शून्यवादी पाश्चात्य देश तारणे, जय, श्री कृष्ण चैतन्य प्रभु,
नित्यानंद, श्री अद्वययत गदाधर, श्रिवासादी, गौर, भक्त वृंद, हरे कृष्णा, हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा, हरे हरे हरे राम, हरे राम राम राम र, हरे
हरे कृष्णा। आज संडे है तो बहुत सारे डिवोटीज पॉसिबल होता आने के लिए, मंदिर दर्शन करने के लिए। भक्तों का रिक्वेस्ट था कि आप आये हैं। तो गुरु महाराज का, कुछ ग्लोरिफिकेशन, कुछ मेमरीज, कुछ पास टाइम शेयर करना। तो मैंने भी प्रयास करता हूँ। तो ऐसे हम जब वैश्णो का गुणगान करते है तो इससे बोलने वाले का भी शुद्धिकरण होता है और सुनने वाले का भी शुद्धिकरण होता है। तो मुझे आप सब आशीर्वाद दीजिये कि मैं गुरु महाराज का अच्छी तरह गुणगान कर, सकू मेरा भी शुद्धिकरण हो और आपको भी फायदा हो। ऐक्चवली अगर हम महाराज का गुणगान करना शुरू करे तो आई थिंक 8 बज के भी 9 बजे तक, ये तो खत्म नहीं होने वाला, बट मैं प्रयास करूंगा, जितना भी हम कवर कर पाए। तो मैंने, क्योंकि मैं गुरु महाराज के साथ सेवा में था, ऑलमोस्ट लास्ट 12 से पंद्रह साल में महाराज के साथ था। ऐज सेक्रेटरी
तो
भक्त लोग बहुत रिक्वेस्ट करते थे कि आप गुरु महाराज के साथ हैं तो बहुत सारी मेमरीज होंगी। तो आप जरूर लिखिए। तो मैंने प्रयास किया, बट वो पॉसिबल नहीं हो पाया। क्योंकि गुरु महाराज के साथ सेवा करना मतलब बहुत टफ होता था। सुबह से शाम तक मतलब हमें पता ही नहीं लगता था कि कब सुबह होगी और कब शाम और कब रात। तो कभी कभी तो हम अपना खाना पीना सोना, उसको भी हम नहीं टाइम दे पाते थे। तो इसके लिए तो बैठना पड़ेगा लिखना, पड़ेगा सोचना पड़ेगा तो वो बड़ा मुश्किल होता था। बट फिर उसके बाद भी जब महाराज गुरु महाराज चले गए तो मैं थोड़ा सा प्रयास कर रहा हूं उन चीजों को याद करने का जो हम गुरु महाराज के साथ थे। महाराज हमें जो शिक्षाएं देते थे, हमें प्रेम से डांटते थे, कुछ हसी मजाक करते थे, बहुत सारी सुन्दर सुन्दर उनकी मेमरीज हैं। तो मैं कुछ शेयर करने की कोशिश करूंगा और आप ध्यान से सुनिएगा, आपको भी कुछ लाभ होगा उसमें
मैं ये
भी मैंने कुछ ऐक्च्वालीआमनोट गुड स्पीकर, मतलब मैं इतना ज्यादा अच्छा बोलने वाला वक्ता नहीं हूं क्योंकि अभी जब से मैं गुरु महाराज की सेवा में था, उससे पहले तो हम प्रचार करते थे, पंद्रह साल पहले आप समझ लीजिए, अब उसके जब से गुरु महाराज की सेवा में आये तो हम सब चीज, सब कुछ छोड़ दिया। सिर्फ महाराज की सेवा और कुछ नहीं, हमें कुछ और दिखता ही नहीं था क्योंकि और हमारे लिए और कुछ था ही नहीं। बस 1 ही था कि महाराज को किसी चीज की मतलब कोई दिक्कत न हो, वो किसी चीज में कोई प्रॉब्लम न हो, उनकी हर चीज का ध्यान रखना, उनकी मीटिंग रेंज करना, हर चीज का हम ध्यान रखने का प्रयास करते थे। तो फिर अपने बारे में सोचने का टाइम हीं होता था। तो बट जब मैं ये सेवा में आया था तो मैं थोड़ा सा घबराया हुआ था क्योंकि गुरु को से गुरु की सेवा करना इतना आसान नहीं है तो मैं कभी अपने सीनियर डिवोटी से पूछता था कि अभी गुरु महाराज की सेवा में मैं जा रहा हूं तो मुझे किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? तो यह बहुत शिक्षाप्रद उन्होंने मुझे बताया समझाया शिक्षा दी कि हमको 3 चीजों में बहुत सावधान रहना चाहिए फायर, अग्नि और अर्चा विग्रह डीटीज और गुरु
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चीजों के साथ जब हम डीलिंग करते हैं तो हमें बहुत सावधान रहना चाहिए। तो उन्होंने मुझे समझाया मैं उतना डिटेल में नहीं जाऊंगा बट मैं गुरु को लेकर बताता हूँ आपको तो उन्होंने मुझे एग्जाम्पल दिया, वैसे तो आप समझते ही हैं, डी टी आप के पास कोई जाएगा तो जल जाएगा तो हमें उसका फायदा, उसकी उष्णता से हमें फायदा भी उठाना है, प्रकाश से फायदा भी उठाना है, बट जलने से, जलने से अपने आप को ध्यान रखना है। वैसे अर्च विग्रह को भी हमें भगवान साक्षात प्रकट होते हैं अर्च विग्रह के रूप में तो हमें उनको मूर्ति नहीं समझना चाहिए पर पत्थर की है मेटल की नहीं तो अपराध होने के बहुत चांसेस रहते हैं। तो वैसे गुरु है उनको वो भी भगवान के बिल्कुल रिप्रेजेंटेटिव हैं, है न? तो उनके साथ भी जब डीलिंग करते हैं तो हमें सावधान रहना चाहिए। तो हमें मैं जब अपने सीनियर से वो मुझे समझा रहे थे कि गुरु की सेवा में आप जा रहे हैं तो किन चीजों का ध्यान रखना है तो उन्होंने बोला कि गुरु 1 दीपक के समान है अगर आप ज्यादा पास जाओगे तो जल जाओगे थोडा सा अगर आप देखेंगे दीपक तले अंधेरा भी आपने देखा सुना है तो अगर कोई 1 ऐसे डिस्टेंस पे अगर ज्यादा दूर चले जाओगे तो अंधकार आ जाएगा उसमें मतलब आप गुरु के साथ इंटरेक्ट नहीं कर पाओगे, आपका सम्बंध नहीं हो पाएगा, गुरु आपको इंस्ट्रक्शन नहीं दे पाएंगे, आप उनका पालन नहीं कर पाओगे तो ये चीज है। तो हमें क्या करना है कि गुरु के साथ शिष्य का ऐसा संबंध होना चाहिए न ज्यादा दूर न ज्यादा पास पास आ जायेंगे तो अपराध होने के चांसिज होंगे क्योंकि हम हम भौतिक बुद्धि, हमारी हम पूरी तरीके से शुद्ध नहीं हो पाये, हमारी चेतना तो हम कभी कभी गुरु को साधारण व्यक्ति समझ बैठते हैं। तो ये 10 नाम अपराध में भी आता है तो हमें बिल्कुल पास नहीं जाना जिससे अपराध न हो और दूर भी नहीं जाना जिससे हम अज्ञानता में आ जाएं उनकी शिक्षाओं का पालन न कर पाए वो हमारे पर ध्यान मतलब वाच न रख पाए है, हमारे पर नजर न रख पाए तो इस इसलिए हमें 1 डिस्टेंस रखना चाहिए जिससे वो हमको देखते रहे, गुरु हमेशा अपने शिष्य को देखते रहे, उनकी गलतियां सुधारते रहें और उनको मार्गदर्शन करते रहे। भक्ति में कैसे आगे बढ़ना है। तो ये शिक्षा उन्होंने मुझे दी कि गुरु की सेवा इस प्रकार करनी चाहिए तुम्हें ये सेवा, ये शिक्षा को मतलब आप समझ। लीजिये के गले में बांध लिया नहीं तो बहुत मुश्किल है गुरु की सेवा करना। कभी वैष्णव अपराध होने के हमेशा चांस रहते हैं। आप तो सुनते ही हैं हमेशा क्लास में की वैश्णव पराध से भक्ति नष्ट हो जाती है। तो इसलिए इस चीज को ध्यान रखते हुए फिर गुरु महाराज की सेवा करनी थी। तो गुरु भी गुरु महाराज भी कृपालु है, दयालु है वो, वो भी हम पर कृपा करते हैं, हमें शक्ति देते हैं कि अच्छी तरह सेवा कर पाये, बिना गुरु की कृपा के, तो उनकी सेवा करना भी असंभव है। तो भक्तों की कृपा, गुरु महाराज की कृपा से, आप सब भक्तों की कृपा से में 12 पंद्रह साल गुरु महाराज की सेवा कर पाया गुरु महाराज की कृपा से।
तो
आप लोग जो गुरु महाराज के डिसाइपल है, वैसे आप लोग भी जो बहुत पुराने हैं कान में, वो जब गुरु महाराज गए 5 मई को, तब से, तो आई थिंक 2 महीने से ग्लोरिफिकेशन प्रोग्राम चल रहे हैं। आप सब लोग सुन रहे हैं। आपने तो इतना ग्लोरिफिकेशन सुनाया होगा कि हम सब लोग तो हैरान होंगे कि मतलब सुनसुन कर। प्यूरिफिकेशन भी होता था और अच्छा भी लगता था जैसे आज ही भागवत क्लास में वैशणजांगरीप्रूव बोल रहे थे नियम भागवत सेवया है। तो बार बार वो बोल रहे थे कि जितनी बार हम भागवत का अध्ययन करेंगे, उ ना उसमें रस, निकलेगा हमारा शुद्धिकरण होगा। वही चीज में आज सोच रहा था कि जितना, क्योंकि ग्लोरिफिकेशन गुरु महाराज की भी जो दिव्य लीलाएं हैं और वो अनंत है। बट उनको हम शब्दों में बांध नहीं सकते। बट जितनी बार हम उसको सुनेंगे और बोल बार बार हम उसको रिपीट करेंगे, तो हर बार हमें वो नया रस प्रदान करेगा। हमेशा ऐसा लगता है कि इस बार तो कुछ नया मुझे, सुनने को मिला, कुछ सीखने को मिला। जैसे हम भागवत पढ़ते हैं, भगवत गीता पढ़ते हैं, हमें नया चीज, वही चीज हम पढते हैं। बार बार। बट हमें नई चीज सीखने को सुनने मिलती है। वैसे ही जब हम गुरु की दिव्य लीलाओं का श्रवण करते हैं तो हमें भी बहुत सी नई चीजें रसास्वादन होता है। तो शायद आपको भी हो, मुझे तो हो रहा है। क्योंकि मैं अभी पिछले कुछ दिनों से मैंने गुरु महाराज का गुणगान करने का प्रयास किया है। जुहू में भी निरोग में भी 12 क्लास हो गई। तो मैंने अभी क्या। जैसे जैसे मेरे को मैं गुरु महाराज के बारे में सोच रहा हूँ, वो 12 वर्ष जो मैंने गुरु महाराज के साथ 12 पंद्रह वर्ष बिताए हैं। तो बहुत चीजें याद आती हैं। तो मैं वो लिख लेता हूँ। वो कोई सीक्वेंस में नहीं होती। सीक्वेंस में लिखना बड़ा मुश्किल होता है। क्योंकि हम लोग सेवाओं में बिजी हैं। ईवन कभी कभी चलते, फिरते कुछ चीज याद आ जाता है कि महाराज इस टाइम ऐसे बोला करते थे, ऐसा करते, ऐसा किया करते थे। तो हम उसी टाइम मोबाइल में नोट कर लेते हैं। तो सीक्वेंस में नहीं हैं। बहुत सारी चीजें, कुछ चीजें ऐसी मैंने। जैसे जैसे मेरे को याद आती गई कुछ 23 महीने में, तुम्हे वैसे वैसे लिखता गया। तो वैसे ही मैं आपको बताता जाऊँगा। शेयर करता जाऊँगा। आप भी उसका साधन कीजिए। जैसे
हम
मैं 1 बार सोच रहा था कि हम तो आप सभी ने सुना है इसके बारे में बट। मैं उसको दुबारा रिपीट कर रहा हूँ और इसमें मैंने क्या सीखा क्या नोट किया। वो बताना चाह रहा था। जैसे आप सब को पता है कि महाराज का शिड्यूल इतना बिजी है। ट्वेंटी फोर बाई सेवन आप सब को पता है सुना होगा आप सब ने सुबह 3 बजे से लेकर रात को 11 साढ़े 11 12 बजे तक वो बिजी रहते है, दोपहर को रेस्ट भी नहीं लेते है। ये आप सब बहुत सारे क्लोरिशन में सुना होगा। तो 1 बार मैंने हिम्मत करके पूछ लिया, मैंने कहा महाराज आप सुबह से लगे 3 बजे से 11 बजे तक आप लगे हुए हैं, लगे हुए हैं, आप थोड़ा रेस्ट कर लीजिये, आपकी तबियत खराब हो जाएगी। डॉक्टर ने बार बार आते हैं, बोलते हैं कि महाराज को रेस्ट कराया करो। तो महाराज बड़े प्रेम से बड़े शांत होकर बोले स्लीपिंग मींस फॉर्गेटिंग कृष्णा मैं बिल्कुल है। अभी मेरे मुँह में कुछ शब्द ही नहीं मैं। क्या बोलूँ पलट के महाराज ने बिल्कुल 1 शिक्षा प्रद उन्होंने बताया कि मतलब हम सोना मतलब भगवान का भगवान को भूल ना और हम हमारी स्थिति क्या है। हम भागवतम सुनते सुनते सो जाते हैं, जब करते करते सो जाते हैं और गुरु महाराज सोते सोते भगवान की सेवा करते। आप लोगों ने अभी फेमस विडियो देखा था, वो हमने रिकॉर्ड किया था, दामोदर प्रवित हैं हू से, तो बहुत मतलब, हम तो हैरान हो गए वो वीडियो जब मतलब वो देख के महाराज की वो एक्टिविटी तो सम्भव उस टाइम तो नहीं था कैमरा तुरंत पर अगले दिन फटाफट हमने देखा कि इस टाइम अगर महाराज दोपहर को रेस्ट करेंगे तो उसको रिकॉर्ड कर लेंगे दामोदर। वो बहुत एक्सपर्ट थे, उन्होंने किया कर लिया तो आप उसको उस वीडियो में मतलब लोग शौक है। पूरी आरती शुरू से लेकर एंड तक की सारी आरती की अगरबत्ती दीप। चामर पंखा सब, फ्लावर ऑफरिंग सारा स्टेप बाई स्टेप तो देख के हम हैरान थे कि मतलब हम लोग जागते हुए सेवा सेवा नहीं कर पाते, गुरु महाराज सोते हुए, सेवा कर रहे। तो ये मतलब गुरु महाराज। हमको सिखाना चाह रहे हैं कि हमें ये जो मनुष्य जन्म मिला है, है न? वैसे मनुष्य जन्म मिलना ही अपने आप में बहुत बड़ी बात है। उसके ऊपर अगर हमें कृष्ण भक्ति मिलती है तो वो उससे भी बड़ी बात है। और उसके ऊपर अगर हमें किसी वैष्णों की सेवा मिलती है, वो सबसे ऊपर, सबसे बड़ी बात है। इसीलिए आपने बहुत सारे ग्लोरिफिकेशन में सुना होगा कि महाराज कितना वैष्णो सेवा स्कॉन में महाराज को सब पसंद करते थे, सब रूपा डिसाइपल से लेकर नया आदमी जो फर्स्ट टाइम कोई मंदिर आया है मिलने के लिए। और उसने महाराज को देख लिया। महाराज अपनी मिलियन डॉलर स्माइल जब उसको देते थे, वो खुश हो जाता था और बिल्कुल मतलब सेटिस्फाई हो जाता था। महाराज उसको पूछते थे सबको आपने भी एक्सपीरियंस किया होगा। कभी आप दिल्ली आये या कभी कहीं महाराज से आपकी भेंट हुई। महाराज पूछते हैं आप कैसे हैं? 1 फेवरेट उनका बढ़िया सुन्दर सा प्रेम से बोलते हैं। आप कैसे हैं ठीक हैं, कहाँ से आये हैं? आपका रहने का बंदोबस्त है। किसी चीज की जरूरत है तो बताइएगा तो मतलब बहुत प्रेम। सामने वाला न बिल्कुल त त हो जाता है जब महाराज ऐसे बोलते हैं न और नए नए लोग जो दर्शन करने आते हैं महाराज को जैसे कभी कोई ड्यूटी मिला नहीं आते हैं। किसी वी आई पी लोग को भी भक्त लोग प्रचार करने जाते है तो किसी वी आई पी को बुला लेते हैं। महाराज के दर्शन कराने उनका भाव यह रहता है कि महाराज के दर्शन करने मात्र से इसका शुद्धिकरण हो जायेगा और ये कुछ सेवा करेगा। मंदिर के ल। तो ऐसा होता है। महाराज बात करते हैं, सामने वाला मतलब हिप्नोटाइज हो जाता है। मतलब उसका फर्स्ट इम्प्रेशन मतलब अगली बार वो उसकी फीलिंग को खुद बयान नहीं पता बाकी बाद में जो उसका जो प्रीचर होते है उनको बोलता है प्रभु ये कौन थे आपके गुरु महाराज तो बहुत दिव्य है, मतलब तो ऐसा बहुत से एक्सपीरियंस है। ऐसे जो लोग प्रीचिंग करने जाते हैं कभी वीआईपी को महाराज से मिलाने लाते हैं उनको पता होगा क्योंकि उन्होंने वीआईपी जो लोगों से सुना होगा कि महाराज जब इंटरेक्शन होता है गुरु महाराज का उनके साथ, तो महाराज कितने प्रेम से उनको डील करते हैं। तो ये उनकी बहुत खासियत है। महाराज के केयरिंग नेचर हैं, सबको टाइम देते हैं। और आपने सुना होगा रिफिकेशन में कि गुरु महाराज की मेमरी बहुत स्ट्रोंग थी, अभी पिछले कुछ आई थिंक मैक्सिमम 1 या डेढ़ साल हुआ होगा। महाराज मेरे को बोलते थे की मेरी मेमरी न थोडी में स्मरण शक्ति कम हो रही है। मैंने कहा नहीं महाराज आपकी स्मरण शक्ति आज टी, इतने, आपके हजारों, डिसाइपल हैं। सबके नाम याद है मैं। मैं ऐसे बोला महाराज को महाराज नहीं नहीं अभी मैं मैं कुछ नाम भूलने लगा हूँ तो ऐसा होता था कभी कभी पिछले 1 साल में हुआ। महाराज पूछते थे ये मेरा डिसाइपल है न बॉम्बे से। मैंने कहा इसका नाम मैं भूल रहा हूँ। ये और नाम भूलते थे पर पूरी चीज बता देते थे। ये वो वहाँ रहता है, यह वो सेवा करता है, यह करता है, ये करता है। पूरा डीटेल बता देते थे और बोलते थे इसका नाम क्या। कभी तो महाराज बार बार ये बोलते थे कि मैं थोड़ा न भूलने लगा हूँ। बट ये तो अभी है। पिछले 1 साल डेढ़ साल में जब थोड़ा सा दिक्कत होने लगा अदरवाइज लोगों के पास इतना मतलब सरप्राइज्ड कि यार महाराज महाराज से मिलने जाते हैं और महाराज बोलते हैं तुम मुझको 20 साल बाद मिल रहे हो। ऐसे वो सामने वाला डर जाता है और सही में 20 साल बाद मिल रहे होते हैं। कहते तुम मेरे को लास्ट टाइम वहां मिले थे, ये कर रहे थे तुमसे। तुमको मैंने ये काम दिया था, तुमने वो किया। वो सामने वाले के तो पैरों से जमीन निकल जाती है या मैं क्या जवाब दूं मतलब इतनी महाराज की मेरी इतनी अच्छी थी, स्ट्रोंग थी लोग बहुत बहुत ही ज्यादा उसकी तारीफ करते थे, लोग स सरप्राइज होते थे जब लोग आते थे गुरु महाराज से मिलने के लिए 1 बार कोई मिल लेता था क्योंकि कुछ लोग अभी तो भक्त लोग हैं भक्त लोग दर्शन करने आते हैं। बट कभी कभी क्या होता था नॉन डिवोटीज जब कभी दर्शन करने है। क्योंकि महाराज तो सबके लिए ओपन थे कोई किसी भी टाइम आ जाए महाराज हमेशा टाइम देते थे, हम बोलते थे गुरु महाराज थोड़ा रेस्ट कर लीजिये। सुबह से आप लगे हुए हैं 24 घंटे से, तो आप थोड़ा अपने बारे में सोचिए। महाराज मेरे को बोलते थे, वो बेचारा कितनी दूर से आया है मेरे से मिलने के लिए मैं अपने बारे में सोचूं या उसके बारे में सोचो। मत इतना अपने बारे में बिल्कुल नहीं सोचते थे हमेशा इस तरीके से दूसरे के बारे में सोचते थे। तो वही मैं जस्ट वही आपको महाराज की मेंबरी के बारे में बताना चाह रहा था की इस टाइप ऐसे महाराज की बिल्कुल साफ मेमरी थी और बहुत लोग इससे प्रभावित हुए और भक्त बने हैं। क्योंकि महाराज की जस्ट महाराज इतनी मतलब प्यूरिटी है। गुरु महाराज की बस महाराज के फर्स्ट 1 बार दर्शन करने मात्र से बहुत लोग भक्त बन गए है, बहुत लोग भक्त बन गए हैं। तो अब अब इतने शुद्ध भक्त के साथ हमें सेवा करने में बहुत दिक्कत आती थी। हम तो शुद्ध है नहीं हम 1 मैं शायद पिछले ग्लोरिफिकेशन में बोला था कि सुपर सुपर फास्ट प्रीचुअल मास्टर, मल्टी टास्किंग स्प्रिचुअल मास्टर के साथ हम जैसे स्लोस्ट यूजलेस डिसाइपल का कॉम्बिनेशन बड़ा है रेयर था और महाराज ही हैंडल कर पाते थे। तो उसी में मुझे 1 आता था। तब पास टाइम याद आ रहा था महाराज महाराज मेरे को हमेशा बोलते थे यू आलवेज लेट क्योंकि हम जब ट्रैवलिंग करते हैं तो महाराज फटाफट तैयार हो के गाडी में बैठ जाते हैं। हम लोग सामान रखते हैं और ये सब सारा मैनेज करते हैं। तो फिर हमको आते आते 1 आध मिनट 2 मिनट हो जाते हैं। महाराज गाड़ी में बैठ जाते हैं, बोलते हैं अरे वो दशावतार कहाँ है अभी तक आया नहीं तो बुलाओ उसको जल्दी बुला। फिर जब मैं गाड़ी में आके बैठूंगा यू आर यूजलेस ऑलवेज लेट। मैंने कहा महाराज मेरे को थोड़ा सा 2 मिनट लेना पड़ता है क्योंकि अगर कोई चीज छूट गई आपकी कोई चीज छूट गई तो फिर गड़बड़ हो जाएगा। तो फिर महाराज कुछ बोलते नहीं थे। तो मतलब कहने का मतलब हम थोड़ा सा ध्यान रखते थे, लेट होते थे, जान के लेट होते थे क्योंकि कोई चीज छूट न जाए होता था जल्दी जल्दी में। अभी हम 34 डिवोटीज का टीम हुआ करता था तो मैं ऐसे 1 बार क्या हुआ हम ट्रैवलिंग कर रहे हैं। अब महाराज हम जब ट्रैवलिंग करते थे तो बहुत स्टॉप आते थे बीच में। अब जैसे वृंदावन से निकल रहे हैं या चंडीगढ़ से निकाल रहे हैं तो चंडीगढ़ से निकाल रहे है को बीच में पानीपत आ जाएगा, बीच में गुरु क्षेत्र आ जाएगा। तो फिर महाराज भक्त लोग सडक पर ही महाराज का वेलकम करने के लिए खड़े होते थे, महाराज को बोलते थे महाराज 2 मिनट के लिए घर आ जाए, 2 मिनट के लिए 2 मिनट। तो महाराज नाना करते थे, कभी कभी चले भी जाते थे। अब महाराज चले जाते थे। तो डी टी बोलते थे, गाडी में नहीं रखना। महाराज के जो अर्से विग्रह है, महाराज लेके ट्रेवल करते थे। हमेशा तो वो कहते थे कि अब हम घर जा रहे है, मतलब अंदर जा रहे हैं। तो गाड़ी में आप अच्छे विग्रहों को बैग जो है वो अंदर ले आओ, गाड़ी में नहीं रखना, लगेज, नहीं लेके आना। बट वो जो आपके डीटीस के बैग है, वो अंदर ले जाओ। कोई चोरा के शीशा तोड़ के मेरे डीटीस चुरा लेगा। महाराज ये लाइन बोलते थे। मतलब इतना प्रेम था डीटीसी के प्रति न। तो वो ऐसे बोलते थे मासूम बिल्कुल छोटे से बच्चे की तरह बोलते थे। मेरे डीटीसी को कोई चुरा के ले जायेगा तुम इसलिए तुम ले। कमरे में ये मैं इसलिए बता रहा हूँ, इस इसके कनेक्शन में फिर हम क्या होता था। अब भक्त लोग महाराज भक्तों से मिल रहे हैं। इधर और डी टीस को फिर कहते थे वो उनके घर के ऑल्टर में, वहाँ पर चेयर पे, पास में ऑल्टर के पास रख 2 ठीक है रख दिया। अब फिर वही सिचुएशन होती थी, महाराज तो 2 मिनट में प्रसाद पा लेते थे। और बोलते है मैं रहा हूँ। और हम लोग प्रसाद पाने के लिए अभी बैठे होते थे। तो महाराज कहते है जल्दी करो, हमें निकलना है। अभी महाराज गाड़ी में बैठ जाते थे। फिर हम भी फटाफट फटाफट हाथ धो कर निकलने लगते थे। जो हो गया हो गया। अब डीटीज वहीं रह गए। रैगिंग ऐसे हुआ तो हम बैठ गए। 23 बार। फिर महाराज बोले मेरे डी टीज हैं न पीछे, मैं मैं देख रहा हूँ। मैं पूछ आप किसी को सेवा दे रही थी। मैंने कहा डीटीज उठा के रखने की आप वो रही, नहीं। तो कहते हैं महाराज और डीटीज, तुम लोग यूजलेस हो, अब गाड़ी तो मोड़ेंगे नहीं, फिर उसको उधर फ़ोन करते हैं हम के महाराज आप चिंता मत करो, हम मैनेज कर लेंगे। वो फिर फ़ोन करते हैं। प्रभु डीटीज वहीं रह गए, दूसरी गाड़ी लेके आओ। पीछे से तो ऐसे मतलब होता था डीटीज कहीं मतलब महाराज रुकते नहीं थे, कहने का मतलब मैं जो चीज आपको बताने का यहाँ प्रयास कर रहा हूँ। कि महाराज अपने टाइम का इतना ध्यान रखते थे। सुबह से शाम तक वो बिजी रहते थे। पर वो बिजी ऐसे नहीं रहते थे। वो 11 मिनट बहुत इम्पोर्टेंट एक्टिविटी करते थे। कोई भी कहा ऐसा नहीं कि मतलब ठीक है, बिजी कोई भी फालतू की चीजों में बिजी नहीं मतलब। उनकी हर चीज बहुत ही टाइम आप कोई गलती कर लेते थे न। अगर हम में से कोई कोई गलती करता था, महाराज उनको माफ कर देते थे। कहते है इट्स ओके महाराज का टाइम। अगर हमारी वजह से वेस्ट हो रहा है। महाराज बहुत नाराज हो जाते, थ, महाराज नहीं चाहते थे कि उनका टाइम हम हमारी वजह से वेस्ट हो। क्योंकि महाराज बहुत बार आपने सुना भी होगा। महाराज बहुत बार बोलते भी थे कि क्लास में भी बहुत बार बोले हैं कि भक्तों को इतने ही हमने जन्म लिया है, हमें पता ही नहीं हमने कितने जन्म लिए हैं। अभी हमें प्रपात की कृपा प्राप्त हुई है। तो प्रउपात बोलते थे कि हमें मुझको 1 लाइफ 2 तो मैं तुम्हें वापस बैक, टू गॉड हेड ले जाऊंगा। तो हम महाराज बोलते थे। हमें इस शिक्षा को अपने जीवन में उतारना चाहिए, समय को बिल्कुल व्यर्थ नहीं गवाना चाहिए है। तो इसलिए महाराज हमेशा प्रयास करते थे कि उनका समय खराब न हो, इतने एक्सपर्ट थे मैनेजमेंट में आपने सुना होगा, और भी बहुत सारे ग्लोरिफिकेशन में महाराज सुबह डीटी वर्शिप करेंगे तो डी टी वरशिप भी करेंगे, साथ में भागवत भी सुनेंगे, साथ में किसी को बुलाएं, किसी किसी को बुला के उसको कुछ न कुछ इंस्ट्रक्शन भी देते रहेंगे। 34 चीजें 1 साथ करते थे। और मतलब ऐसा नहीं है कि वो उनका ध्यान हम सोचते थे, महाराज 1 साथ 34 चीजें कैसे कर लेते हैं? नहीं पर वो जब डीडी वर्शिप कर रहे हैं, उनका पूरा ध्यान डीटीवर्शिपमें हो रहा है, वो भागवत पढ़ रहे है, वो सामने वाले को बोलते हैं, पढने वाले को बोलते है, जो पिछले 2 लाइने पढ़ी है, इसको दोबारा रिपीट करो रोपद, इसमें बहुत अच्छा मैसेज दे रहे हैं। तो मैं देख रहा हूँ कि तुरंत वो डीटीवरशिपभी कर रहे हैं, साथ में भागवत में भी ध्यान से सुन रहे हैं। और वो किसी न किसी को बुला के उसे कोई मेसेज देते थे, उनको इंस्ट्रक्शन देते थे।
तो
ये चीज था। तो यह टाइम मैनेजमेंट का। मैं बता रहा था कि टाइम हैं। तो दूसरा इस पिच मेरको एकदम क्लिक किया। तो ये सुबह से था, मैं भी सुबह से शुरू कर रहा था। तो ये सुबह से, तो सुबह जैसे ही ये सब खत्म हो जाता था। फिर तुरंत मुझे बुलाते थे दशावतार टू डे इस वेरी बिजी डे कहते हैं। मुझे आज बहुत सारे काम करने हैं। मैंने कहा ठीक है महाराज मतलब, वो पूरी माइंड में प्लान कर लेते थे, मुझे यह करना है। और फिर लगे रहते थे, सुबह से, शाम तक लगे रहते थे उनको। फिर अगर, फिर दोपहर को फिर रेस्ट करने की भी फील होता था, रेस्ट करने की इच्छा है, बट, वो कहते है आई डोंट हैव टाइम टू टेक रेस्ट। मैंने कहा महाराज फिर ऐसे तो चलेगा ही नहीं, नहीं नहीं हावसोमनीथिंगस टू डू। तो फिर वो बस लगे रहते थे। और फिर इसको मैं इसलिए बता रहा था कि अगर दोपहर को उनको मतलब थक जाता था, शरीर थक जाता था, महाराज क्या करते थे, रेस्ट नहीं करते थे, स्नान करने चले जाते थे। कहते मुझे शौवर लेने। 2 मैं 1 बार नहा के आता हूँ। तो मैं थोड़ा फ्रेश फील करूंगा। और फिर खींचते थे मतलब ऐसे 12 जितनी बार वो लगता था उनको थकान हो रही है। वो स्नान करने चले जाते थे, हम उसको देख कर मतलब हैरान होते थे कि कैसे तो ऐसे सारा दिन चलता था। और फिर रात को महाराज को पता है मुझे मंगल आरती जाना है। 3 बजे और लोगों का मिलना खत्म नहीं होता था। तो महाराज बहुत एक्सपर्ट थे, वो हमेशा घड़ी देख लेते थे, सामने होती थी घडी लोग पुरे बाहर बहुत लोग होते थे मिलने के लिए। महाराज किसी को मना नहीं करते थे। बट उनका फिक्स प्लान होता था कि मुझे 8 सवा 8 तक वाइंड अप करना है, वाइंड अप करना। वो किसी को मना भी नहीं करेंगे कि मैं तुमसे नहीं मिलूंगा और 8 सवा 8 बजे तक उनको स्टॉप करना है।
तो
अब महाराज क्यूँ क्यूँकि? सोते। तो 11 बजे थे, बजे सोते थे कल? तो हम लोगों ने पीछे पढ़ के साढे 9 बजे डॉक्टर ने बोल बोल के उनको रेस्ट कराना शुरू कर दिया था। बट वो 11 बजे से पहले सोते नहीं थे। तो 8 सौ 8 बजे। अब भक्त लोग आ रहे है। तो क्या बोलते थे? कहते बुलाओ मैंने हमारा सबको बुलाया तो नहीं नहीं जिसका जैसे कोई फैमिली होती थी तो उसको सेपरेट अलग अलग जिसका अलग अलग से कुछ क्वेश्चन होते थे। तो अलग अलग बुला लेते थे। 1 साथ नहीं बुलाते थे। तो फिर उसको पहले कोश्चन पूछ लेते थे। हाँ बताइए आप ठीक हैं, कुछ पूछना चाहते हैं। तो वो बोलता था जब महाराज को लगता था इट्स नॉट वेरी इम्पोर्टेंट तो महाराज बोलते थे, बस अपना मिलियन मिलियन डॉलर स्माइल देते थे, बोलते थे क्या मैं आपसे कल मिल सकता हूँ। महाराज बिल्कुल मना नहीं करेंगे, उसको मैं नहीं आया। वो गुरु महाराज के दर्शन हो गए, उसको प्रणाम किया यह उसके लिए काफी है। अभी बड़े महाराज उसको बुरा न लग जाए। तो महाराज प्याम से, प्रेम से बोलते थे। क्या मैं तुमसे कल मिल सकता हूँ? इफ यू डोंट माइंड कल हो न आप यहाँ पर। पहले पहले पूछ लेते थे आप कितने दिन तक हो है ना, कब जा रहे हो? वापस। तो उस हिसाब से भी प्लान करेंगे महाराज बोल देते थे कि मैं तुमसे कल मिल सकता हूँ। तो इस तरीके से ऐसी सारी भीड़ गायब हो जाती थी। और फिर एग्जेक्ट 8 सवा 8 बजे। खत्म, अब 8 सौ 8 बजे खत्म करने का प्लान क्या होता था महाराज का। उसके बाद महाराज का शिड्यूल चलता था, प्रिपरेशन फॉर, मंगल आरती समझे, हम लोग को नेक्ट डे की प्लानिंग करनी चाहिए, नहीं तो 10 बज जाते। सोते सोते साढ़े 10 बज जाते हैं। फिर जब 10 साढ़े 10, 11 बज गए तो फिर सुबह उठने में फिर दिक्कत होती है। फिर लोग मंगल हारती में लेट आते हैं। नहीं आते ये सब होता है। तो महाराज बहुत परफेक्ट एग्जाम्पल थे मैं मैं मुझे हंसी भी आती थी। कभी कभी देख के बट हम बोल नहीं सकते, बस देखते थे, ऑब्जर्व करते थे महाराज सबह 8 बजे बोलते थे। तो तुरंत बोलेंगे पार्थ प्राण प्रूव को या जो भी महाराज का डिनर तैयार कर। हे हैं उनको बोलेंगे कि डिनर रेडी कर 2 और उनको बोलेंगे डिनर रेडी करने को और खुद गायत्री करेंगे, गायत्री करेंगे 10 पंद्रा मेंट में गायत्री करेंगे। उसके बाद फिर महाराज सोने से पहले एक्स्ट्रा राउंड्स करते थे तो महाराज गाय प्रसाद ले, गायत्री करेंगे 10 मिनट में पंद्रह मिनट में और फिर प्रसाद लिया और फिर जपा शुरू कर देंगे एक्स्ट्रा राउंड। अब वो एक्स्ट्रा राउंड करते रहेंगे। अब और 23 डिवोटिज। फिर महाराज का मसाज शुरू करेंगे और मसाज शुरू करते ही फिर जब महाराज ने एक्टर राउंड जो उनके करने की इच्छा है वो करते हैं। उसके बाद फिर कुछ बुला लेते मेरे को बुला लेते है, दशा होता को बुलाओ, फिर वो कुछ ईमेल टाइप करा लेते हैं। देखते है मेरे से पूछते हैं कोई इम्पोर्टेंट ईमेल, मैं बोलता हूं महाराज 1 ये है, ये है। तुम्हारा कहते हैं डिक्टेशन ले लेते थे। और फिर मैं भेज देता था। तो वो उसमें 5 10 मिनट लगते थे, उनका रोज का था मेरे को सोने से पहले बुला के बोलेंगे ईमेल है कोई रिप्लाई करने वाला तो रिप्लाई रात को वो करते थे। तो वो बस ईमेल कर दिया रिप्लाई फिर उसके बाद फिर महाराज का 1 नर्सिंग है न, नर्सिंग प्रेयर्स की बुक है। आप सब ने शायद सुना भी होगा ग्लोरिफिकेशन में। महाराज सोने से पहले उसको हमेशा पढ़ते थे। नर्सिंग प्रेयर की बुक्स हैं। तो वो 1 छोटा सा, छोटी सी बुक है उसको हमेशा सोने से पहले पढ़ते थे और बिल्कुल परफेक्ट अपना टाइमिंग पर रेस्ट करने चले जाते थे। अभी आजकल जो 10 बजे तक, पहले तो 11 बजे तक साढ़े 11 बजे तक कैसे खिंचता था, उसका कारण है अमेरिका में कॉल्स अभी होता क्या था मारा दिन में तो अमेरिका में कॉल कर नहीं सकते। उनका जो टाइमिंग होता है कॉल करने का, वो रात को शुरू होता है। यहाँ अगर हम इंडिया में हैं, अगर अमेरिका कॉल करना है तो महाराज फिर रात को कॉल करना शुरू करते थे। उनको तो जो भी इम्पोर्टेंट कॉल्स हैं, जो भी उनको मेसेज देना है, उनका मैसेज लेना है। तो महाराज रात को 10 15 मिनट कॉल्स खत्म कर लेते थे। अमेरिका की ईमेल स कर लेते थे। और अपना रेस्टिंग टाइम पे चले बिल्कुल टाइम पर अपना रेस्टिंग, उनका फिक्स टाइम था। 5 घंटे सोना है, बिल्कुल फिक्स 5 घंटे। मतलब मैंने देखा 1 घंटा एक्स्ट्रा भी नहीं सोना है, 5 घंटे ही सोना है। तो कभी कभी हम बोलते थे कि अगर कभी कभी लेट हो जाते थे। मान लो अभी हम ट्रैवलिंग से आये हैं कई से। रात को 11 बज गए, बॉम्बे से डेल्ली की फ्लाइट हो गई, उधर फ्लाइट एयरपोर्ट पे बिजी हो गए, आते आते 11 बज गए। अब महाराज क्या करेंगे। अब उनका फाइव आवर्स का फंडा है। तो महाराज क्या करते थे, बोलते थे कि कभी कभी तो बोलते थे कि कल मैं मंगल आरती नहीं जाऊंगा। ऐसे बोल देते थे मैं। मंगल आरती कल नहीं जाऊंगा। फिर आप से कुछ लोग तो
और
सुबह मंगल आरती बट। कभी कभी क्या होता था कि महाराज नहीं जा पाते थे। क्योंकि महाराज को क्लियरली महाराज ने माइंड में डॉक्टर्स ने बोला अभी की बात बता रहा हूँ, पहले नहीं अभी की पहले तो मतलब 4 घंटे रेस्ट करके भी मंगल आरती, अटेंड करना, ये सब तो उनका शेड्यूल था, तभी डॉक्टर ने भी उनको रोका हुआ था। तो फिर एटलीस्ट फाइव आवर्स सिक्स आवर रेस्ट करना है। तो वो अपना फाइव आवर्स के प्रिंसिपल पर चलते थे। तो वो देखते थे कि मेरे पास तो मेरा तो 4 घंटे का रेस्ट हुआ है, अगर हम सोते सोते उनको 11 साढे 11 बजे, फिर सुबह 3 बजे उठना मुश्किल है। तो फिर वो अपना फाइव आवर्स का कैलकुलेशन करते थे और वो बिल्कुल अपना फाइव आवर्स के बाद उठते थे, उनको अलाराम की जरुरत नहीं होती थी, अलाराम जब हम लगा देते थे, कहते थे अलाराम बंद कर 2 उसकी जरुरत नहीं है। और हम लोग साथ वाले कमरे में सोते थे, हमारा अलाराम बजता रहता था, बस्ता रहता था, बस्ता रहता था, कहते तुम लोग अलाराम उठते तो हो नहीं और लोग अलाराम ऑन करके सोते हो। तो हमने अलाराम लगाना छोड़ दिया था। क्योंकि 12 बार ऐसा हुआ देखा की अब महाराज थके, हम लोग भी थके उठना तो है ही, तो अलाराम महाराज तो बिना अलाराम के उठते थे, हम तो अलाराम लगाना पड़ेगा तो अब हम हो जाता था, बचता रहता था, नहीं पता लगता था। तो महाराज 12 बार ऐसे बोले कि तुमने मेरी तुम लोगों ने मेरी नींद खराब कर दी, अलाराम अगर लगे तो फिर हमने भी अगली बार साला राम नहीं लगना। अब किसी को बोल के रखना पड़ता था की भैया हमको टाइम पे साढ़े 3 बजे उठा देना। तो इस टाइप से होता था ये जो स्वीट इंटरेक्शन होती थी महाराज के साथ, तो वो 5 घंटे का जो मैं बता रहा था, उसमें फिर क्या करते थे महाराज 5 घंटे वो रेस्ट के लिए, मंगल आरती रेयर होता था, हमेशा नहीं होता था। अभी अभी शुरू जो अभी जब से महाराज की हेल्थ थोड़ी सी डाउन हुई थी तब से, नहीं तो वो 4 घंटे में ही मंगल आरती जाते थे। तो फिर 5 घंटे रेस्ट करेंगे, फिर उठेंगे और फिर अपना डी टी वर्षिप वगैरह सहारा करेंगे और फिर क्या करेंगे। अब मंगल आरती मिस हो गई तो डी टी वर्शिप करते टाइम शायद आप लोगों ने सुना होगा ग्लोरिफिकेशन में बहुत बार डी टी वर्शिप करते टाइम मंगल आरती गंवाएंगे, पूरा तुलसी आरती गवाएंगे, तुलसी आरती करेंगे, परिक्रमा करेंगे, जल देंगे, कमरे में ही तुलसी का गमला ला के तुलसी महारानी को प्रणाम करेंगे, प्रदिक्षणा करेंगे, सब करेंगे और फिर बोलेंगे कि गुरु पूजा, बी, गांव, सारा, मॉर्निंग, प्रोग्राम, मॉर्निंग की सारी प्रेयर्स गंवाते थे और फिर उसके बाद अपना नॉर्मल रूटीन करते थे, अब मंगल आरती नहीं अटेंड हुआ ना, फिर वो क्या करेंगे? अगर उनकी मीटिंग है तो फिर मीटिंग्स का शिड्यूल फॉलो होगा, नहीं तो वो सवा 7 के दर्शनार्थी का मौका मिलेगा। तो सवा 7 के दर्शनार्थी करेंगे नहीं तो साढ़े 8 साढ़े 8 की जो भोग के बाद जो आरती होती है उस में जाने का मौका मिलेगा तो वो करेंगे। अगर ये दोनों में भी अगर वो बिजी है, कोई किसी न किसी मीटिंग में बिजी हैं तो फिर वो राज भोग आरती साढ़े 12 बजे वाली आरती में करेंगे जाएंगे और वो आरती करेंगे अगर वो भी नहीं हुआ अगर किसी न किसी मीटिंग में, क्योंकि महाराज का शिड्यूल अगर महाराज सुबह अपना साधना वाला प्रोग्राम नहीं कर पाये तो दिन भर में उन्हें टाइम नहीं मिलने वाला था पर महाराज इतने एक्सपर्ट थे कि उसको मैनेज करते थे। 12 साढ़े 12 बजे वाली आरती में जायेंगे, वो नहीं मिला तो फिर सवा 4 बजे वाली आरती में जायेंगे, वो नहीं मिला तो फिर संध्या आरती में जायेंगे। मतलब उन्होंने उनका फिक्स, उन्होंने मतलब ठान रखा था कि दिन में 1 आरती फुल आरती करनी ही करनी है और फुल आरती में अगर 12 बजे वाली साढ़े 12 बजे वाली आरती में जायेंगे तो उसमें बोलते थे तुम मंगल आरती गाओ वहाँ पे आप। तो यहाँ पर वो दूसरा किर्तन करते हैं। महाराज अगर साढे 12 बजे वाली आरती होगी न तो हम में से किसी को बोलेंगे तुम आ जाओ और या फिर जो भी वहां पर अवेलेबल होगा हमारे में से कोई डिवोटी उनको बोल देगा जो किर्तन करेंगे बोलेंगे आप, मंगल आरती गांव, महाराज, मंगल आरती गाने को बोल रहे हो। मतलब सु परफेक्ट इन साधना वो एग्जांपल हैं हमारे लिए। तो अगर हमें भक्ति में आगे बढ़ना है तो हमें भी अपनी साधना में परफेक्शन लानी पड़ेगी। तो ये मॉर्निंग प्रोग्राम को लेकर 1 और चीज मुझे याद आई, शायद मैंने उधर बोला था मीरा रोड में अगर किसी ने सुना हो महाराज कई लोग ये सोचते थे कि कोई हम में से हम ये सोचते है की हम मंगल आरती आ गए तो हमने बहुत बड़ा तीर मार लिया, हम सब सोचते सोचते अरे ये तो आया ही नहीं, मंगल आरती तो सो रहा था मंगल जब हम मंगल आरती आ जाते तो हम बोले तुम नहीं आये थे न? मंगल आरती अच्छा ठीक है, ठीक है हम नोट करते हैं कौन कौन मंगल आरती आया, कौन कौन नहीं आया और मतलब अन्दर ऐसी महाराज तो वैसे ही महाराज मेरे 1 दिन बोल दिया, पूछ लिए ये तुम मॉर्निंग प्रोग्राम में थे, मैंने कहा ये महाराज मंगल आरती में था। मैंने कहा नहीं नहीं मॉर्निंग प्रोग्राम की बात कर रहा हूँ। मैंने कहा महाराज हाँ मैं, मंगल आरती में था, जनरल मंगल आरती के बारे में पूछते हैं। मैंने कहा नहीं मैं मॉर्निंग प्रोग्राम की बात कर रहा हूँ। फिर वो बोले कि मॉर्निंग प्रोग्राम का मतलब होता है मंगल आरती, चैंटिग, गुरु, पूजा, भागवतम, क्लास ये मॉर्निंग प्रोग्राम है। महाराज बोलते थे मंगल आरती, मतलब ट्वेंटी परसेंट, मंगल आरती, मतलब ट्वेंटी परसेंट, चैंटिंग, मतलब, थर्टी परसेंट, हम लोग तो हमारी स्थिति तो ये है कोई मंगल आरती में ही बीच में गायब हो जाता है, कोई चैंटिंग में खड़ा यहाँ पर 2 घंटा चैंटिंग करना चाहिए यही यहाँ से गायब हो जाते हैं। तो तो ऐसी स्थिति हम लोगों की तो महाराज से बताते थे मंगल आरती ट्वेंटी परसेंट, चैंटिंग थर्टी परसेंट, गुरु पूजा टेन परसेंट और भागवतम क्लास कितने बज गए बाकी परसेंटेज है। तो महाराज इस टाइप से महाराज ने उनको स समझाने के लिए, मतलब मेरे को समझाने के लिए। इस टाइप से हमें बताते थे कि चारों चीजें आपकी होनी चाहिए मंगल आरती चैंटिंग, गुरु पूजा और भागवतम क्लास तो ये मॉर्निंग प्रोग्राम है सिर्फ मंगल आरती आना ही मॉर्निंग प्रोग्राम नहीं है। अब जो ब्रह्मचारी मंदिर में रहते हैं उनका तो फिक्स सिड्यूल हैं उनको करना चाहिए पर जो लोग घर में हैं, जो गृहस्था घर पर हैं उनको भी प्रयास करना चाहिए। 4 चीजें करें प्रयास करना चाहिए अपने शिड्यूल के हिसाब से कर सकते हैं। ऐसा नहीं है कि 2 घंटा चैंटिंग अब सब लोग की अपनी नीति सेवाएं होती है गृहस्थों में बहुत सारी अलग सेवाएं होती है अपने घर में सबको देखना होता है बट कोशिश करना चाहिए फैमली को 1 साथ मंगल आरती करें छोटी मंगल आरती रखनी चाहिए है न 10 पंद्रह मिनट की फिर चैंटिंग के लिए थोड़ा टाइम रखना चाहिए फिर गुरु पूजा के लिए थोड़ा टाइम रखना चाहिए फिर भागवतम क्लास आधा घंटा पंद्रह मिनट कुछ न कुछ करना चाहिए ये मॉर्निंग प्रोग्राम है ये करना चाहिए। अगर आपके पास कम टाइम है तो कम कम टाइम देकर इसको कम्पलीट करो पर इसको करना है। तो महाराज ऐसे हमको समझाते थे। जब कोई गृहस्त आते थे तो उनको मैं ध्यान से सुनता था तो महाराज ऐसे समझाते थे उनको तो बहुत अच्छा लगता था कि महाराज कितना पर्सनल टच देते हैं सबको तो ये था मॉर्निंग प्रोग्राम को लेकर आगे बढ़ते हैं। मुझे चीजें मैंने जैसे जैसे याद आती है वैसे वैसे लिखा था तो वो देख के मैं आपको बता ता हूँ 1 चीज 1 बार मैं यह सोच रहा था कि मतलब आप लोगों ने भी रियलाइज किया होगा, क्लास में भी सुना होगा। तो मैंने भी 1 बार जस्ट मेडिटेट कर रहा था तो मुझे भी रियलाइजेशन हुआ कि हम अपने माता पिता का ऋण तो हम उतार नहीं सकते कभी चुका नहीं सकते उन्होंने हमको ये मनुष्य जीवन है न दिया है क्योंकि इस मनुष्य जीवन में हम भक्ति कर सकते हैं तो हम माता पिता का ऋण तो हम उतार नहीं सकते हैं बट हम गुरु का ऋण तो कभी भी नहीं उतर सकते कि उन्होंने क्योंकि उन्होंने हमको इस भवसागर से निकालने के लिए हमको दीक्षा दी है हमारा हमेशा मार्गदर्शन करते हैं इस भवसागर से निकालने के लिए तो माता पिता से भी बड़े होते है गुरु है तो ये मेरी रियलाइजेशन थी आप लोगों की भी होगी तो मैं जस्ट वो शेयर करना चाह रहा था। आपसे 1 और पास टाइम मुझे याद आ रहा है। महाराज को जब से हेल्थ इशू हुआ
था
तो महाराज अपने खान पीन का बहुत ध्यान रखते थे बहुत मतलब कम मिर्च मसाला न घी नो ऑयल ऑलमोस्ट बाइल की तरह बाइल होता था बॉइल्ड और बहुत क्वांटिटी कम खाते थे इतना ध्यान रखते थे क्योंकि महाराज इसलिए ध्यान रखते थे अपनी हेल्थ का, कि वो ज्यादा से ज्यादा सेवा कर। पाए। भक्त लोग हैं न, आते हैं महाराज के पास। महाराज बोले महाराज, मेरी तबियत ठीक नहीं है। महाराज बोलते थे, तुम दिख नहीं रहे हो। बहुत दिनों से मॉर्निंग प्रोग्राम में महाराज हेल्थी शूज हैं। ये सब मन का वहम है। दवाई खाओ और सेवा करो। मैं भी यही कर रहा हूँ। बोलते थे, महाराज अपना एग्जाम देते थे। मैं भी यही कर रहा हूँ। कहते थे मैं इतनी सारी दवाई खाता हूँ और प्रपात की सेवा कर रहा हूँ। दवाई खाओ और सेवा करो। ये माइंड में आप जितना सोचोगे की। मैं बीमार हूँ। तो वो ऐसे होते है न। हम बचपन में ऐसा करते थे। मम्मी सुबह उठाती थी मम्मी ने ही सर, दर्द हो रहा है, पेड़ हो रहा है, थोड़ी देर और सोना है। तो आप सब लोगों ने ये चीज ट्राई किया होगा अपने घर पर। तो हम लोग अभी वो आदत गई नहीं है, तो हम अगर किसी की कोई थोड़ी मोटी छोटी मोटी। हो सकता है कोई हेल्थ इशू है, तो हम उसको खींचते हैं, उसका बहाना बनाते हैं। और हम साधना में डिले करते हैं, मॉर्निंग प्रोग्राम में डिले करते हैं। तो इन सब चीजें। तो महाराज एग्जाम्पल देते हैं कि दवाई खाओ और सेवा करो। प्रउपात की सेवा में। वो हमेशा लगे रहते थे और इसलिए अपने हेल्थ का ध्यान रखते थे। जो चीज मैं, आपको भी यहां शेयर करने वाला था। बड़ा स्वीट पास टाइम है महाराज की महाराज। महाराज के दिल्ली में। महाराज के गुरू, महाराज के प्रसाद बनाने के लिए। महाराज की डिसाइपल थी। कृष्णा की माताजी महाराज से आई थिंक 10 साल उम्र में बड़ी होंगी। बहुत। वृद्ध बहुत उम्र में बड़ी थी। महाराज से, तो उनका वास्तल्य भाव था। महाराज को। मतलब अपने बच्चे की तरह ट्रीट करती थी। मैंने नोट किया है। कभी कभी जैसे होता है न, हम दिवाली दिवाली देते हैं। आप देखते हैं बड़े बुजुर्ग दिवाली वाले दिन बच्चों को गिफ्ट देते हैं या फिर कुछ पैसे दे देते हैं। कुछ तो वैसे वो भी आती थी। कभी कभी दिवाली वाले दिनिया, कभी कहती थी यह महाराज को दे देना महाराज को प्रणाम करने जाती थी। और वो वो दे देती थी। कहती महाराज या आपकी दिवाली ऐसे बोलते थे? मतलब इतना प्रेम था महाराज के प्रति और प्रसाद। जब खिला वो सुबह महाराज को ब्रेक फर्स्ट भी वही तैयार करती थी। अभी तो है नहीं। उन्होंने बहुत महाराज की सेवा किए। जब दिल्ली मंदिर बन रहा था, तब से वो अभी शायद थिंक 34 साल हो गए। उन्होंने शरीर छोड़ा अभी तक महाराज की सेवा किए। कोई नहीं था उस टाइम और माताजी अकेले घर से। वो अच्छी कंपनी में हाई पोस्ट प थी, कहीं जॉब करते थे। और फिर भी महाराज महाराज का बहुत सेवा किया उन्होंने वहां पर। तो फिर अभी, जब रिटायरमेंट के बाद फिर उनके पास 1 ही सेवा थी। महाराज का प्रसाद तो सुबह महाराज को ब्रेक फर्स्ट कराना दोपहर को लंच करना, इतना 2 करते थे। क्योंकि महाराज डिनर तो न के बराबरी लेते थे तो 2 चीज उनका ध्यान रखे। तो महाराज बोलते थे कृष्णा गी, मैं बच्चा नहीं हूं जितना ध्यान मत रखा करो मेरा पर, वो बैठी रहती थी, वो सुबह मॉर्निंग, उनका तो परफेक्ट था वो टेम्पल में, हमारे डेली टेम्पल में सारे माताजी इसके लीडर थी कोई मंगल आरती मिस नहीं होना और इतनी एजी थी बट मंगल आरती कोई मिस नहीं होता था। और फिर वहाँ से मंगल मॉर्निंग प्रोग्राम करके वो आ जाती थी महाराज के किचन में और महाराज का ब्रेक फर्स्ट वगैरह चलता रहता था, तैयार होता था फिर लंच अब बेचारी माताजी बैठी रहती थी क्योंकि महाराज का खाने का तो कोई टाइम ही नहीं है, कोई टाइम नहीं है क्योंकि मॉर्निंग में डिटिवरशिप करेंगे फिर वॉक पे जायेंगे जपा वॉक करेंगे। फिर कोई आ गया उनसे मिलना शुरू मीटिंग ये वो खल ब्रेकफास्ट लेते लेते लेते लेते। 11 बज जाते थे महाराज माताजी आ जाती थी प्लेट लेके महाराज ये क्या है अभी ब्रेक फर्स्ट का टाइम है की कृष्णा जी मुझे डिस्टर्ब मत करो, मेरे पास टाइम नहीं है। अभी मैं बाद में लूंगा, वो बेचारी माताजी बैठी रहती थी क्योंकि वो भी बिना खिलाए जायेंगे नहीं तो फिर वहीं बैठी रहेंगी और मैं इसलिए माता जी का क्योंकि महाराज को प्रसाद खिलाना और कृष्णा की माता जी के बारे में नहीं बताना तो ये मतलब नाइंसाफी होगी। तो ऐसे ही महाराज। तो माता जी लंच भी प्रीपेयर करती थी। तो कभी कभी उन्होंने बहुत सारी माता जी को ट्रेन किया था क्योंकि माता जी अभी धीरे धीरे एजेड हो गयी थी तो बहुत सारी माता जी को बताया कि महाराज ये खाते हैं, ये नहीं खाते, इन चीजो का ध्यान रखना, ये सब। तो वो सब चीजें बताती थी और करते थे सब लोग, तो 1 दिन क्या हुआ ऐसी माता जी ने ऐसी कोई कोई माताजी बना बना रही थी। मैं नाम नहीं लूंगा। तो फिर वो महाराज का लंज प्रीपेयर किया। अब महाराज थोड़ा सा स्वीट लेते हैं नाम के 1 चम्मच के लिए, तुम 1 दाल लेंगे, सब्जी लेंगे, थोड़ी सी खिचड़ी लेंगे, पापर चपाती और थोड़ा सा स्वीट तो उन्होंने बनाई होगी, खीर बनायी होगी। अब उन्होंने खीर बनाई होगी तो उसमें चीनी की जगह नमक डाल दिया आ चीनी की जान नमक क्योंकि सेम ही होता है बुरा चीनी होती है तो उसको उस करते तो नहीं ध्यान दिया। तो चले गए, हम ले गए प्रसाद की प्लेट महाराज के पास, महाराज महाराज ने खा लिया, 1 चम्मच खाया तो महाराज ने कुछ बोला नहीं, महाराज बोलते है कि इसमें न खीर में न चीनी नहीं है, नमक है। तो फिर महाराज बोलते है उनको बताना मत उनको बुरा लग जायेगा। ऐसे बहुत ध्यान रखते थे के माताजी को मत बोलना मेरे को बोल देते थे, बोले माता जी को मत बोलना ठीक है उनको बुरा लग जाएगा। तो फिर हम नहीं बोलते थे फिर पर माता जी को पता लग ही जायेगा। वो तो अंदर जब प्रसाद लेंगे तो पता लग जाएगा। जब महा प्रसाद लेंगे तो बट महाराज का भाव यह रहता था कि मेरी मेरी वजह से किसी को किसी की फीलिंग हर्ट न हो तो बहुत ध्यान रखते थे। तो ऐसी 1 बार क्या हुआ कि ऐसी किसी ने प्रसाद बनाया तो उसमें सब्जी में नमक डालना भूल गए। अब यो तो खीर में डाला था नमक, वैसे अब सब्जी में नमक डालना भूल गए। तो फिर सेम ऐसी मारा ने बोला। अब कभी कभी हम अलग अलग जगह ट्रेवल करने जाते हैं तो थोड़ा बहुत प्रसाद में ऊपर नीचे होता है नमक। मिर्च में सब थोड़ा हम प्रयास करते हैं, बट होता है कभी कभी, तो महाराज क्या करते हैं न। अब हम भक्तों का प्रेम होता है तो वो 56 भोग की तरह प्लेट बना देते हैं। इतनी सारी आइटम महाराज महाराज मेरे को बोलते है इतना थोड़ी मैं खाता हूँ तो महाराज भक्तों का प्रेम है ला के देते हैं कहते हैं इतना वेस्ट नहीं करना चाहिए। 1 कृष्णा की लक्ष्मी है 11 चीज हमें संभाल के करना चाहिए। तो फिर महाराज तो वोही महाराज 1 चपाती लेंगे उसमें से गिन के 2 चपाती जितना मर्जी चपाती दे दे उन्होंने गिन के 2 चपाती लेनी है थोडी सी सब्जी, थोड़ी सी दाल। अब क्या करते थे महाराज कहते हैं इतने सारे आइटम्स भक्तों ने इतने प्रेम से बनाया है। अब इसका क्या करें कहते थे 1 काम करो 1 प्लेट ले आओ सब में से थोड़ा थोड़ा निकाल लो और तुम लोग खा लेना। और जब ये प्लेट जाएगी वापस तो उनको लगेगा कि महाराज ने सब में से थोड़ा थोड़ा खाया है। तो महाराज ऐसे करते थे महाराज मतलब किसी की फीलिंग हार्ड नहीं होनी चाहिए। अब महाराज को जितना खाना महाराज उतना खायेंगे समझे महाराज ने इतना सा खाना है उतना ही खायेंगे पर सहारा बनाया क्या करें महाराज चाहते नहीं चाहते कि उन्होंने इतने प्रेम से बनाया है। तो महाराज कहते है इसमें से न सब में से 1122 चम्मच निकाल लो अलग दूसरी प्लेट में और यहीं पर रख 2 और वो वाली जो मेरी वाली प्लेट है वो लेके जाना। तो उनको लगेगा फिर क्यूंकी वो चेक करते है माताजी महाराज ने कौन सी सब्जी खाई इसका मतलब ये सब्जी उनको पसंद है। तो वो लोग भी होता है। तो ध्यान रखते हैं कि कौन सी कटोरी पूरी खाली है न। तो पता लग जाता है कि ये चीज महाराज को पसंद आई। तो वो खुश होते हैं कि महाराज को यह चीज पसंद है। अगली बार हम फिर बनाएंगे तो इस टाइम से तो ये बड़ा मतलब मुझे याद आया एकदम प्रसाद को लेकर। तो मैं आपसे शेयर किया हमारे पास टाइम कितना है फिर मैं उस हिसाब से आगे बढूंगा है न क्योंकि 9 बजे बंद हो जाएगा न है डीटी वरशिप के बारे में तो आप लोगों ने बॉस सुना होगा गुरु महाराज का इतनी ग्लोरिफिकेशन हुई पर मैं भी कुछ बोलना चाह रहा था उसमें, क्योंकि कुछ चीजें तो मैं सेम चीज बोलूंगा और कुछ चीजों में अपना एक्सपीरियंस बोलूंगा तो जैसे महाराज का हेल्थ इशू हुआ था नाइंटी फाइव नाइंटी सिक्स में महाराज को जब फर्स्ट हार्टअटैक आया था तो उस टाइम से महाराज बहुत केयरफुल हो गए थे, बहुत ही ज्यादा तो बहुत हर चीज में ध्यान रखते थे खाने पीने में, सब चीज में, तो क्योंकि 1 साथ आई थिंक, 5 छे स्टंट डले, 56 स्टंट डले थे हार्ट में, नाइनटी फाइव नाइनटी सिक्स में और डॉक्टर बोलते थे उनको अरेस्ट करने को कि आपको अभी पहले की तरह नहीं करना है, अभी रेस्ट करना है, टाइम पे रेस्ट करना है। पर वो महाराज वैसे नहीं करते थे। मैंने आपको बताया न मेडिसिन खाओ और चलते जाओ सेवा में बस यही उनका प्रिंसिपल था और वो हमें भी यही सिखाना चाह रहे थे। तो मैं फिर महाराज के 1 गॉडब्रदर थे भूमिपति पहु प्रोपारडसाइपल ही है, वो भी वृंदावन में रहते है उन्होंने बहुत सुंदर सुंदर बुक्स लिखी हैं। तो उन्होंने महाराज को सजेस्ट किया कि आप डी टी वर्शिप शुरू कीजिए उससे पहले महाराज ट्रेवल करते थे तो अपने साथ फोटो वाले डीटीज रखते थे मतलब डी जैसे ये है न वैसे छोटे छोटे महाराज के पास ऑल्टर की फोटोज थी महाराज उन्हीं को लेकर ट्रेवल करते थे उन्हीं को वर्शिप करते थे क्योंकि हर जगह जाते थे तो हर जगह आपको ओल्टर नहीं मिलता था ऑल्टर। तो अब मंदिर तो अभी बने हैं जो 30 साल पहले महाराज इतना ट्रैवलिंग करते थे तो मंदिर नहीं होते थे गृहस्थों के घर घर में जाते थे फिर वहां पर उनको भी डी डी वर्शिप सिखाते थे तो अपने साथ फोटोज लेकर ट्रैवल करते थे। तो ऐसे था फिर महाराज ने जब ये महाराज का हेल्थी शूज हुआ तो उन्होंने महाराज को सजेशन किया कि प्रपात भी जब ट्रैवल करते थे तो फोटोज लेकर ट्रैवल करते थे। आपने शायद सुना होगा महाराज प्रपात इतना ट्रैवल करते थे तो आई थिंक राधा रास बिहारी की फोटो लेकर ट्रैवल करते थे। हमेशा इतना मतलब प्रेम था प्रउप को राधा राज बिहारी से तो ट्रैवल करते थे। तो वैसे ही महाराज भी फोटोज महाराज। तो ऐज इट इज प्रउत जैसे करते थे वैसे ही महाराज ने किया अपनी पूरी लाइफ प्रपात की लाइफ जी है। हम लोग हैरान हो जाते थे, आप लोगों ने भी शायद नोट किया होगा। 3 डेली टेम्पल, वृंदावन टेम्पल और ये बॉम्बे टेंपल तो डेली टेम्पल में वृंदावन में आप हमेशा कभी अगर किसी ने देखा हो महाराज को मंगल आरती करते हुए तो हमेशा वो कृष्ण बलराम की मंगल आरती करते कभी भी वो नहीं गए राधा श्याम सुंदर में न गौरनेताऔर दिल्ली में उनका अपना मंदिर है कभी भी किसी भी ऑर्डर में जा सकते हैं पर वो हमेशा गौरनेताऑरल्टर में दिखेंगे आप दिल्ली में और बॉम्बे में हमेशा राधा राज पियारी इसका स्कू कोई न समझ पाया इसका रीजन और हमारे में हिम्मत नहीं थी ये चीज पूछने की हम कभी इतनी हिम्मत नहीं कर पाये पूछने की बट महाराज का ये 3 था पर किसी ने शायद स्पैकुलेट किया या गैस किया। शायद प्रबंधन महाराज भी बता रहे थे कि जिन डी टी को प्रपा ने वर्ष किया है महाराज शायद उसको वर्षिप करना ज्यादा प्रेफर करते थे। जैसे कृष्ण बलराम आई थिंक प्रोप ने 1 आरती कृष्ण बलराम की की है जो आप 1 फेमस फोटो देखते हैं। तो वो फोटो। तो महाराज भी कृष्ण बलराम की आरती करते थे। और राज बिहारी में भी राज बिहारी। तो मैं तो नहीं पूछ पाया। इसे डायरेक्ट हमने जस्ट अपने हिसाब से सोच कर बोला है। शायद प्रोदान महाराज ने भी शायद किसी ग्लोरिफिकेशन में बोला था। तो ये था डी डी स का। तो वैसे भूमिपति प्रभु बोले कि महाराज जब आपकी तबियत ठीक नहीं रहती। तो आप डी टी वर्शिप स्टार्ट कीजिए उसमें बहुत हेल्प मिलेगा। तो महाराज बोले अच्छा। तो फिर महाराज ने डी डी वर्शिप स्टार्ट करना शुरू किया। उन्होंने गोनीत इलाके दिए, 1 ब्रज भक्ति प्रभु थे, नोएडा के टेंपल प्रेसिडेंट थे उस टाइम तो उनके साथ उन्होंने साउथ इंडिया से प्रलाद नरसिंह लेके आये। फिर प्रूव महाराज ने कुछ शालीग्राम शिला दिए उनको और आयेंद्र प्रूव ने भी कुछ शालीग्राम शिला दिए हैं। इस तरीके से भक्त लोगों ने महाराज को बहुत सारी डीटीज दिया और महाराज के पास जितनी भी डीटीज है बहुत यूनिक है, बहुत यूनिक डीटीज है। प्रधान महाराज ने सुना होगा आपने प्रधान महाराज ने गिर्राज शिला दिया था महाराज को तो वो आप शायद कभी आप लोगों ने दर्शन करने का मौका मिला हो किया हो। महाराज के रूप में वो गिरिराज शिला, शालिग्राम शिला की जैसी लगती है। बिल्कुल चारों तरफ से गोल गोल मटोल है। गिरिराज शिला तो जनरली ऐसी दिखने को नहीं मिलेंगी बिल्कुल गोल मटोल है। और ऊपर उनकी राधा रानी का फुटप्रिंट है सर पर गिरिराज शीला के। तो प्रवधान महाराज बता रहे थे कि महाराज ने उनको बोला था कि मुझे गिरिराज शिला चाहिए। उन्होंने बहुत प्रार्थना किया गिरिराज महाराज से। तो सम्भव गिरिराज महाराज की कृपा थी कि उनको वैसी शिला मिली और महाराज को उन्होंने भेट किया। तो इस तरीके से था तो महाराज डी टी वरशिप का। इस तरीके से महाराज के पास जितनी शिला है न बहुत यूनिक है महाराज के पास 1 ऐसी शिला है जो बिल्कुल चरण है कृष्णा के चरन लोटस फीट उसमें तो थम मतलब आपका थम जो है क्या बोलेंगे उसको आप थम भी दिखता है, पैर का थम बना हुआ है उसमे मतलब पुरे बिल्कुल जैसे फुट प्रिंट होता। वैसा बना। तो मतलब बहुत यूनिक है शीला महाराज के पास। तो उसमें अभी शाली डी टी वरशिप का तो इतना महाराज का प्रेम था कि उनके उसके बिना रह ही नहीं सकते थे, बिल्कुल नहीं रह सकते थे। जब वो डी टी प्रऊपतकीडप्रउपत को ड्रेस करते थे। मैं शायद बहुत बताया था कल परसों प्रपात के डीटीसी को जब ड्रेस करते थे तो पता नहीं मैं गिनता रहता था। महाराज कभी पैर प्रपात के इस पर लेफ्ट पैर को टच करेंगे, कभी राइट पैर को टच करेंगे, फिर लेफ्ट, फिर राइट, फिर लेफ्ट। और ऐसे ऐसे करते रहेंगे, बहुत देर तक करते रहेंगे। मतलब मैं कितना लविंग एक्सचेंज था प्रपात के साथ और बोलते थे कि मैं जब डीटीसी को ड्रेस करता हूँ आप लोग लाइव मत किया करो। कहते थे आप लोग फोटो मत खींचा करो डी टीस को जब ड्रेसिंग करते हैं तो उनको उनको फोटो नहीं खींचने चाहिए, लाइव नहीं करना चाहिए। तो गुरु महाराज से एकदम मना नहीं करते थे, बट इंस्ट्रक्शन देते थे कि मैं गौरीताई को कपड़े पहना रहा हूं। तो फोटो नहीं खींचना। ऐसे बोलते थे मतलब इतना लविंग एक्सचेंज था तो वैसी प्रपात का करते थे। और जो मैंने आपको बताया न महाराज की 1 शालिग्राम शिला थी बिल्कुल लोटस की तरह, हमारे मतलब चरण की तरह लगते थे, भगवान के चरण लगते थे। तो महाराज उसको चूमते थे, बहुत बार चूमते थे मैं देखता था यार हम लोगो को जैसे हम तो हाथ से टच करना चाहिए, रुमाल ले के टच करना चाहिए महाराज। तो मैं मैं। मैं एकदम हिम्मत करके पूछ लिया मैंने कहा महाराज शालीग्राम शिला को हम चुन सकते हैं। कहते मैं चुन सकता हूँ तुम नहीं है महाराज इतना मतलब क्यूट से बोल देते थे हम बड़ा अच्छा लगता था तो बहुत प्रेम था महाराज का डीडी के प्रति। तो फिर ऐसे ही कभी कभी क्या होता था। फिर शाम को शयन कराना होता था डीडीस को लेके तो शयन करते टाइम शालीग्राम शिला है, उसमें ऑइल लगा होता है। तो फिसल जाती है हाथ से। तो 1 डिवोटी पुजारी डीटीस को शयन करा रहे थे। तो हाथ से वो शालीग्राम शिला फिसल गई और गिर गई। अब उसकी हालत खराब। अब महाराज सामने ही थे जैसी आवाज सुनी क्योंकि उनको आइडिया है आवाज की, न शालीग्राम शिला गिरने की, आवाज की। बहुत बार गिरती है, छोटी छोटी होती में कोई गिर जाती है, स फिसल जाती है, ऑइल लगा होता है न। तो महाराज क्या हुआ, शीला गिरी है क्या ये महाराज थोड़ा वो डिवरटघरकबोलामहाराज गिर गई, टूटी तो नहीं महाराज टूट गई है। तो वो बेचारा घबरा दिखाओ मेरे को पास में लेके आओ। तो फिर वो पास में बोलते थे लेके आने को और देख के। फिर बोलते थे फ़ोन करो जननिवास हो को और पूछो कि अब शालीग्राम शिला टूटा है तो अपराध हुआ है तो क्या करना चाहिए। तो फिर फोन करते थे, बताते थे कि वो शीला जोड़ लो उसकी वर्षिप कर सकते हैं। बट भगवत गीता का कोई चैप्टर पढ़ने को बोलते थे। 3 टाइम आई थिंक मुझे एग्जैक्ट ली, अभी याद नहीं आ रहा। मैंने लिखा हुआ था ई थिंक से। पता नहीं अभी वो आगे पीछे है तो भी है। तो हमेशा वो चीज मैं बताऊँगा जरूर क्योंकि वो इम्पोर्टेंट है सब ऊपर नीचे होता है न। तो फिर एकदम सौरी मैं आई थिंक, फिर चेप्टर हैं या सेकेंड चेप्टर है। पता नहीं वो कह रहे थे 3 बार पढ़ना चाहिए हैं। तो फिर कभी अगली बार बताएंगे इसमें लिखा हुआ मिले रावी हैं। तो हा हा शो नो प्रॉब्लम। तो ये था महाराज का डीटीसी का लविंग एक्सचेंज। तो अब इसमें मेरे साथ क्या होता था। महाराज इतना बिजी शिड्यूल होता था कि कभी सुबह सुबह डीटी वर्शिप नहीं कर पाते थे। तो कहते थे मैं वॉक पर चले जाता हूँ, फिर मीटिंग है, फिर मीटिंग रहेगा। तो मीटिंग होती थी मीटिंग खत्म। होते होते, डीटी वर्शिप कर नहीं पा रहे सुबह। क्योंकि कभी कभी भागवतम क्लास यहाँ देना होता है, कहीं पे भागवतम क्लास हो? तो फिर वो क्या करते थे? डीटी वर्शिप बाद में करते थे, भागवतम क्लास होता था उससे पहले या तो वॉक पर चले जाएंगे तो भागवतम क्लास करेंगे? फिर डीटी वर्शिप कहते तुम भागवतम क्लास के बाद फिर प्रसाद भी नहीं लेना। अब वो जब डीटी वर्शिप करते थे तो बिल्कुल प्रसाद नहीं लेते थे, सौरी डीटी वर्षिप। अगर उन्होंने नहीं की तब तक वो प्रसाद नहीं लेते थे। तो महाराज के सिड्यूल। तो मैंने आपको बताया है। बिल्कुल सुबह से एंड शाम तक। बिल्कुल मतलब टाइट रहता था, बिल्कुल टाइट तो उसमें अगर प्रसाद का बिल्कुल टाइम नहीं है। तो वो डीटीवर्शिप करेंगे। अब मेरे को बोलते थे कि तुम रेडी हो जाओ, मैं डीटी वर्शिप के लिए रेडी हो रहा हूँ। तो मैं रेडी हो के खड़ा हूं और फिर कोई और मिलने आ रहा है, मैं खड़ा हूं आधे घंटे तक। अब इतना मुश्किल होता था कि आप 1 बार महाराज का इतना स्टैंडर्ड हाई था डीटी वर्शिप का कि आप अगर डीटी वर्शिप के लिए रेडी हो गए तो आप किसी चीज को टच नहीं कर सकते, क्लीनीनेस का महाराज बहुत ध्यान रखते थे। तो अगर आप डीटीवर्शिप के लिए ऑल्टर में जा रहे हैं तो बटन को भी टच नहीं कर सकते, किसी भी चीज को टच नहीं कर सकते। अगर आप डी टी वर्शिप में जा रहे हैं नहीं तो महाराज बोलते थे कि अशुद्ध हो गए तो इतना ध्यान रखते थे, मैं तैयार हो कर खड़ा हो जाता था, आधा घंटा हो गया, महाराज मेरी तरफ देखते थे, या आम कमिंग कमिंग तो ऐसे ऐसे होता था। 1 घंटा हो गया। फिर बोलते थे सौरी मैं अभी मीटिंग आ गई है, मैं मीटिंग की बात करूंगा, फिर 1 बार मैं, हम सुबह 1 बार मंगल आरती में नहायेंगे, फिर उसके बाद डी टी वर्शिप में 1 बार नहायेंगे, फिर मना कर दिया, फिर तीसरी बार, फिर नहाएंगे। तो हमारा भी 34 बार नहाना हो जाता था, हमको बस नहा के खड़े रहना है महाराज की, क्योंकि किसी चीज को टच नहीं कर सकते, अभी हम प्रसाद लेंगे तो फिर प्रसाद लेंगे तो फिर नहाना है। तो हमारा भी 34 बार नहाना हो जाता था डीटी वर्शिप के लिए और महाराज का क्या था की अब डी टी 1 बार तो इतना बुरी, इतना मतलब, इतना हेड टिक शेड्यूल था कि 2 बजे तक डीटीवर्शिप नहीं कर पाए 2 बजे तक। अब मैं पीछे पड़ गया, मैंने कहा महाराज दवाई खानी है, अगर आप दवाई टाइम पे नहीं लेंगे तो फिर कैसे होगा उसके लिए प्रसाद लेना पड़ेगा। तो महाराज कहते हैं कि नहीं मैं डीटीवरशिप नहीं किया, मैं नहीं लूंगा। फिर मैंने कहा महाराज ऐसे कैसे चलेगा, फिर डॉक्टर बोलेंगे। तो फिर। तो महाराज कहते थे, महाराज बोले कि ठीक है तुम ऐसा करो, मुझको थोड़ा सा फ्रूट दे 2 और फिर दवाई दे 2 बट अन्न नहीं खाते थे, अन्न नहीं खाएंगे, जब तक डीटी वर्शिप नहीं करते तब तक वो ग्रेंस को टच नहीं करते थे। मतलब इत मतलब, वो अपना सेल्फ कंट्रोल था, साधना इतनी स्ट्रोंग थी। आप देखिए मतलब हम लोगों को अगर हम सिचुएशन, हम तो मत पूछो हम हम लोगों की इसकी स्थिति क्या है। मैं 1 चीज और शेयर करना चाहूंगा। लास्ट बहुत सारी चीजें हैं, बट खत्म। तो ये एंडलेस है चलता रहेगा। 1 चीज। मैं आपको गायत्री के बारे में महाराज के शेयर करना चाहूंगा क्योंकि भक्त लोग एक्सपीरियंस करते हैं। जो लोग ब्रामण दिक्षित है महाराज का इतना, इतना ज्यादा, उनका इंस्टिट्यूट टाइट रहता था। इतना ज्यादा। आप पूछो मत अगर ये जितने भी ब्रह्मचारी हैं या ईवन जिन्होंने गृहस्त जो ब्राहमण दिक्षित हैं उनको भी एक्सपीरियंस होगा कि गायत्री भूल जाते हैं हम लोग। टाइम 12 बजे वाली गायत्री, 2 बज जायेंगे, ढाई बज जायेंगे, 3 बज जायेंगे। 1 होता है भूलने की आदत भूल जाते हैं, कोई किसी टाइम पे कर रहा है, कोई किसी टाइम पे कर रहा है। पर महाराज हमेशा ये बोलते थे कि मॉर्निंग की जो गायत्री है वो तुरंत सुबह सुबह कर लेना चाहिए। मंगल आरती के बाद तो फिर मैंने 1 चीज नोट की। उन्होंने अपनी गायत्री का कैसे करते थे। मेरी हिम्मत तो कभी नहीं हुई, पूछ नहीं की उनसे बट मैंने हमेशा नोट किया। उनका फिक्स टाइमिंग था गायत्री का फिक्स टाइमिंग फिक्स अभी शायद पहले बताया भी था, मैंने रात वाली गायत्री का फिक्स टाइमिंग था मॉर्निंग में वो डीटी वर्शिप करने से मंगल आरती से मंगलाआरती करके नीचे आएंगे। सबसे पहले गायत्री करेंगे डीटी वर्शिप से पहले मंगल आरती आने के बाद करने के बाद फर्स्ट गायत्री करेंगे सेकेंड गायत्री वो दोपहर के लंच से पहले करेंगे। वो फिक्स है उसको मतलब आप हिला नहीं सकते। अगर उनके पास लंच करने का भी टाइम नहीं है होता था। हमारी तो हालत खराब हो जाती है। कृष्णा ने माता जी को मैं नाम लिया था न। वो बेचारी मतलब प्लेट लेके खड़ी रहती थी और बिठा के खिलाफ महाराज आप खाइए। कृष्णा जी तो मुझे डिस्टर्ब मत किया करो। महाराज आपको खाना पड़ेगा। मंगल आरती में आपकी हड्डियां दिखती हैं। इतना वास्तव्य भाव था तो महाराज को ऐसे तक बोल देती थी। महाराज आप इतने वीक हो गए हैं, आप खाते नहीं है और आपकी हड्डियां दिखती हैं। मंगल आरती में तो ऐसा मर्ज का उनका था रिलेशन पास्तलयभावका तो दोपहर की गायत्री फिक्स था। अगर वैसे तो फिक्स टाइम होना चाहिए, है न? जैसे सबको पता है 12 साढ़े 12 तक खत्म कर लेनी चाहिए। महाराज का फिक्स था कि लंच से पहले करना क्यों उन्होंने ये फिक्स क्यों। उनका फर्स्ट प्रायरिटी होती थी कि 12 बजे साढ़े साढ़े 12 बजे तक कर लेनी है। अगर मीटिंग में है, ट्रैवलिंग में है। इतना मतलब टाइम का बिल्कुल पता ही नहीं है। तो 1 माइंड में उन्होंने फिक्स करके रखा था के प्रसाद से पहले तो महाराज कोशिश करते थे ढाई बजे तक प्रसाद लेने को। हमेशा डॉक्टर डॉक्टर बोलते थे कि टाइम पर प्रसाद लेना चाहिए, महाराज 1 बजे ब्रेकफास्ट 9 बजे लेना चाहिए। और रोज बोलते थे थे। मैं आज से 9 बजे ब्रेक फास्ट लूंगा और 1 बजे लंच लूंगा। कब भी आज तक टाइम पर नहीं हुआ। हमेशा बोलते थे, कभी टाइम पर नहीं हुआ। तो वो क्या करते थे? वो दोपहर की गायत्री बिल्कुल, प्रसाद जैसी। और उनका स्टाइल वही होता था जैसे मैंने रात वाला बताया, वो स्नान करके आयेंगे और बोलेंगे मैं स्नान करने जा रहा हूँ, प्रसाद रेडी कर 2 और स्नान करके आयेंगे, गायत्री करेंगे, फिर प्रसाद लेंगे। तो वो माइंड में फिक्स था, फिक्स था, इसलिए वो कभी मिस नहीं होती थी, कभी नहीं मिस होती थी। और रात की गायत्री फिक्स थी डिनर से पहले, क्योंकि मीटिंग इतनी है, उनको टाइम नहीं मिलेगा, बिल्कुल टाइम नहीं मिलता था। अब मान लो शाम को 5 बजे से लोग दर्शन करने आ रहे हैं 8 बजे तक। अब महाराज इतना भीड़ होता था, महाराज मना नहीं कर पाते थे। महाराज ये थोड़ी बोलेंगे तुम वेट करो। मेरे को अपने कुछ काम करने हैं। महाराज नहीं बोलते थे, महाराज बोलते थे। आने 2 उनको बहुत दूर से आते हैं। भक्त लोग, तो आने। 2 तो महाराज फिक्स था, वह रात को बोलते थे, जब उनका शेड्यूल पैक हो जाता। सवा 8 बजे बोलते थे, डिनर रेडी कर 2 और तब तक वो गायत्री करते थे। और ऐसे करते थे। अब 1 बार क्या हुआ, गायत्री की बात बता रहा हूँ। 1 बार क्या हुआ, हम अमेरिका जाना था। अमेरिका, अमेरिका की फ्लाइट हमेशा रात को होती है। महाराज हमेशा मौस्को से जाते थे। जनरली पहले रशिया जाते थे, फिर अमेरिका जाते थे। तो हमने महाराज बोले कि रात की फ्लाइट थी 2 ढाई बजे की। अब उनका स्टाइल ये होता है कि 2 महीने के लिए आप बाहर जा रहे हो, 2 महीने के लिए बाहर जा रहे हो। 11 महीना, 1 महिना अमेरिका में, 1 महीना रशिया में। तो महाराज 2 महीने की सारे इंस्ट्रक्शंस देके रखते, सबको बुला लेंगे। सारे, एच, ओ, डी, सको, सारे, प्रीचर्स, को, जितने भी डिवोटिज के साथ उनका इंटरेक्शन है, जिनको उनको इंस्ट्रक्शन देनी है, सबको बुला लेंगे। फिर कुछ लोग मिलने भी आ जाते हैं। जो बहुत सीनियर डिवोटिज होते हैं, वो मिलने भी आ जाते हैं। महाराज जा रहे हैं लास्ट दर्शन। और फिर ये भी ऐसे भी होता है। तो ऐसे जैसे मैंने बोला। 5 से 8 तक दर्शन चल रहा है। अभी महाराज का चल ही रहा है। दर्शन इंस्ट्रक्शन दे जा रहे हैं, दर्शन चली जा रहा है। 5 हो गए, 8 बज गए, 9 बज गए, 10 बज गए, 11 बजे दर्शन दे जा रहे। मिल ही रहे हैं। सबको बता रहे हैं। ये करना है, ये करना है। ये सबको सब इंस्ट्रक्शन देगे। जब सब चलेंगे, फिर बोलते मेरा प्रसाद लगा। 2 साढे 11 बजे बोले, 11 बजे। और खाना उन्होंने कुछ नहीं होता। 1 दाने की चिड़िया जैसे खाते हैं न। अब मैं तो ऐसी यही शब्द यूज करूंगा जैसे चिड़िया खाती है न। वो प्लेट ऐज ही डिस रहती है। जब आप प्लेट दे दोगे, महाराज इसमें से हल्का सा टुकड़ा लेंगे, इधर से टुक डालेंगे बोलेंगे हो गया मेरा ले जाओ आज इट इज रे। अबडेट वैसे महाराज तुरंत बोलते हैं मेरी डिनर रेडी कर 2 और महाराज 11 बजे गायत्री सोचो उन्होंने अपना फिक्स कर रखा इसलिए वो मिस नहीं करते आप आप में से बहुत होंगे जिन्होंने रियलाइज किया कि दोपहर की गायत्री कोई शाम को कर रहा है है ऐसे बहुत लोगों को रियलाइजेशन होंगे तो ऐसा नहीं करना चाहिए जनरल प्रैक्टिस हमें नहीं करनी चाहिए। महाराज का कितना मतलब इतना अपना स्ट्रॉंग था उनके साधना बहुत स्ट्रॉंग थे तो इस टाइप से वो अपना कब वो 1 बार देखा मैंने सिर्फ 1 ही बार मैंने कहा यह क्या है मतलब भूले नहीं वो है उनका फिक्स है क्यो नहीं भूले क्यूकी उनका है कि प्रसाद से पहले गाय ये मैंने ये मेरा असटैडऑब्जर्शनहै की महाराज इस तरीके से उन्होंने अपनी चीज फिक्स कर रखी हुई
है
और फिर वही 11 बजे प्रसाद लिया कहते हैं मैं आधा घंटा 1 घंटा रेस्ट कर लेता हूँ फिर उठ के तैयार होना है फिर 1 बजे एयरपोर्ट जाना ऐसा तो ऐसा उनका लाइफ है ऐसा जो मतलब जिनसे हम बहुत कुछ सीखना चाह सकते चाहें तो सीख सकते हैं है न तो नेक्स्ट टाइम कभी मुझे मौका मिलेगा तो मैं और चीजें फास्ट टाइम शेयर करूंगा अरे नहीं महाराज बोलते थे न मंगल आरती की प्रीपरेशन स्टार्ट करनी है अभी मंगल आरती की प्रिपरेशन स्टार्ट करनी है अगर अभी आप लोगो को 3 बजे उठना है तो फिर अभी प्रीपरेशन स्टार्ट करनी ह ठीक है हरे कृष्णा गुरु महाराज की ज 10 हफ्तार प्रभु हरे कृष्ण।
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