Memories of Guru Maharaj By his Secretary H.G. Dashavatar Prabhu | Vrindavan

In this extended recollection, the secretary H.G. Dashavatar Prabhu narrates his personal experiences serving Guru Maharaj during a period that spanned several months of travel, fasting, and intense devotional activity. He describes his attempt to observe a four‑month Chaturmas fast while Guru Maharaj was alternating between the United States, Russia, and India for festivals such as Janmashtami and Vyasa Puja. The guru’s strict standards for accepting service are highlighted: he would not take offerings from anyone who was fasting, distributing books, or performing massages on Ekadashi, and he was especially wary of accepting help from those he deemed “offensive” to his spiritual practice. Several incidents are recounted where the secretary broke his fast, prompting the guru’s admonition and a temporary suspension of service. Symbolic objects—particularly a gold‑plated ring bearing a photo of Prabhupada and a custom‑made jacket with Prabhupada’s name—are described, along with the guru’s meticulous care in handling them. The narrative also covers the guru’s health concerns, the need for a wheelchair, multiple falls, and the constant vigilance of devotees in assisting him. Throughout, the guru’s disciplined daily routine, lack of rest, and relentless service are emphasized, as is the collective devotion of the community, which is urged to continue supporting the guru through prayer and mutual assistance.
Chapters
सोलेस गोपाल कृष्ण, गोस्वामी गुरु महाराज की, हरे कृष्ण हरे कृष्ण, आप सब लोग मुझे आशीर्वाद दीजिये कि मैं गुरु महाराज का गुणगान आप सब लोगों की प्रसन्नता के लिए अच्छी तरह कर सकू। अपने प्यूरिफिकेशन के लिए भी मैं कुछ सोच रहा था जैसे हम भागवतम क्लास में जब हम हम हर रोज सुबह भागवतम क्लास अटेंड करते हैं और हमेशा हम सुबह ये श्लोक का उच्चारण करते हैं, है न नष्ट प्राय शुअभद्रेशुनित्यम भागवत शो से या भगवती उत्तम श्लोक के भक्ति रस्टी नश्ट की तो मैं यही सोच रहा था कि जिस टाइप से इसका ट्रांसलेशन में पढ़ना चाहूँगा बहुत इम्पोर्टेंट है तो उसको हम रिलेट करेंगे। गुरु मारा से भगवान की कक्षाओं में नियमित रूप से उपस्थित रहने तथा शुद्ध भक्ति की सेवा करने से हृदय को कष्ट देने वाली समस्त वस्तुएं लगभग पूरी तरह से नष्ट हो जाती है तथा दिव्य गीतों से की स्तुति किए जाने वाले भगवान की प्रेममय सेवा अटल सत्य के रूप में स्थापित हो जाती है तो मैं इसी पर चिंतन कर रहा था कि अगर हम स्पेशली गुरु महाराज के सारे शिक्षेगंडसाइपल्स अगर किसी न किसी बहाने से हम 1 साथ बैठे है हफ्ते में 1 बार जैसा भी प्लान आप लोग बनाये और हम गुरु महाराज की लीलाओं का गुणगान करें या फिर उनकी वाणी को हम पड़े उनका लेक्चर सुने तो मतलब हम गुरु महाराज के साथ अपने कनेक्शन को और मजबूत बना पाएंगे कनेक्शन तो है ही बट जैसे प्रपात के बुक्स आपने जैसे मैंने रियलाइज किया तो आप लोगों ने भी रियलाइज किया होगा जब हम प्रपात का लेक्चर सुनते हैं तो ऐसे लगते है प्रपात सामने बैठे और हमको बोल रहे हैं तो बहुत 1 कनेक्शन फील होता है तो वैसे अगर आप गुरु महाराज के टाइम टू टाइम क्लासेज सुने है न भक्तों का गुनगान गुरु महाराज, गुणगान गुरुमहारज का गुणगान भक्त लोग करे उसको सुने तो हम मतलब बहुत कनेक्शन फील होगा और डेफिनिटली जैसे भागवत नित्य भागवत सेवा करने से हमारा प्यूरिफिकेशन होता है तो है न गुरु महाराज की लीलाओं का सुनने से उनको मनन करने से हमारा भी प्यूरिफिकेशन होगा। तो मैं ये चाह रहा था कि आपसे ये प्वाइंट शेयर करूँ क्यूंकि अब कुछ चीजें जो मैंने गुरु महाराज से सीखी है वो मैं आपसे शेयर करूँगा क्योंकि अभी महाराज नहीं है तो हमारे पास उनकी वाणी ही है तो और 1 तरीके से हम सब का यह कर्तव्य है कि हम सबको हम सबको 1 दूसरे की मदद करके भक्ति में आगे बढ़ने का हेल्प करनी चाहिए भक्ति में तो ये मेरा 1 प्वाइंट था जो मैं चिंतन कर रहा था तो मैंने कहा आपसे मैं थोडा सा डाइट करना नीचे से गया अभी कल तो बहुत सारे पॉइंट्स डिस्कस हुए थे तो जैसे कल बहुत अच्छा प्वाइंट मुझे देवकीनंदन प्रूव का लगा है न कि आप लोगों ने भी सुना कि बता रहे थे कि ये हम पर डिपेंड करता है कि अगर हम कृष्ण को फील करते हैं तो कृष्ण सामने है और फिर भगवान उसी प्रकार से रेसिप्रोकेट करते है अगर हम फील करेंगे कि भगवान हैं हमारे सामने है तो भगवान ऑटोमेटिकली रेसिप्रोकेट करते है। अगर हम अगर हम भगवान को उस लेवल, उस एंगल से नहीं फील करते तो फिर भगवान उतना कृपा नहीं देते। थोड़ा सा दे दिया या मतलब दूर से ही सब कुछ वैसे अगर गुरु महाराज को अगर हम वाणी रूप में फील करेंगे तो आपको मतलब ऐसा लगेगा कि गुरु महाराज आपके साथ है तो यह प्वाइंट मुझे बहुत अच्छा लगा की हमारे ऊपर डिपेंड करता है। अभी हम सब लोग विरह फील कर रहे हैं। गुरु महाराज से बट अगर हम फील करे की महाराज है हमारे साथ है न तो हम रियली उसको महसूस कर पाएंगे। मेरे साथ हो रहा है इसलिए मैं बता रहा हूँ क्योंकि पहले हम इतने मैं, इतने साल महाराज के साथ था 12 15 साल बट हम सुबह से शाम तक सेवा में बिजी रहते थे तो हमारा सेवा के सिवा और फोकस नहीं था। पर अभी हम क्या कर रहे हैं सिर्फ गुरु महाराज को याद कर रहे हैं तो वो कनेक्शन ज्यादा फील हो रहा है बहुत कनेक्शन फील हो रहा है। 1 बार मोहन क्लास में बता रहे थे कहते कि पहले से ज्यादा हम मतलब क्लोजनेस फील हो रही है। ऐसा लगता है जैसे महाराज अभी बुला लेंगे, अभी हमको कॉल करके बुला लेंगे, ऐसी फीलिंग आती है तो मतलब क्लोजनेस बढ़ गई है। अगर हम उनको वाणी रूप में बार बार स्मरण करे याद करें उन्होंने इतना टाइम हमें दिया सिखाया हमें बहुत कुछ किया उन्होंने हमारे लिए तो वो चीज मैं आपसे शेयर करना चाह रहा था कि अगर हम चाहे तो हम ये फील कर सकते हैं कि गुरु माज हमारे सामने है, हमारे साथ हैं तो हम बहुत अलर्ट रहेंगे हर चीज करने में जैसे आप लोग भक्तों ने सुना होगा क्लास में कि जब हम चैटिंग करते हैं तो हमें भगवान और भगवान के नामों में कोई अंतर नहीं है तो हमें जब करते टाइम बहुत सावधान रहना चाहिए क्योंकि नाम भगवान और भगवान के नामों में कोई अंतर नहीं है। हमारे जीवा पर भगवान राधा कृष्ण डांस कर रहे हैं से आप लोगो ने क्लास में सुना तो वैसे ही हमें सावधान रहना पड़ेगा। फिर तो ऑटोमेटिकली गुरु की कृपा प्राप्त होती है जब उनको हम स्मरण करते हैं उसी तरह तो कल हम बेसिकली मैं महाराज जो कल मैं यही सोच रहा था कि महाराज महाराज के जो वृंदावन के प्रति महाराज का जो प्रेम है वो महाराज छुपाते थे बट बहुत सारा है। तो वो मैं चाह रहा था कि उसमें कुछ दिव्वेलीलाएं जो इतने सालों में हमने देखी है वो मैं डिस्कस करना से कनेक्टेड तो वृंदावन तो आप लोगों ने देखा होगा कि महाराज वृंदावन रेगुलर आते थे, रेगुलर आते थे हर 23 महीने में आते थे वृंदावन धर्मात्मा प्रो को पता है और बाइचांस पर ऐसा नहीं है कि बिना किसी काम से नहीं हमेशा कोई न कोई सेवा होती थी पर उसी कारण आते थे बट 23 महीने में चक्कर लग जाता था। तो वो प्रेम है गुरु महाराज का वृंदावन के लिए तो बहुत ही मतलब दिव्य था। बट जब भी जैसे आप देखेंगे, महाराज हमेशा न्यू ईयर में वृंदावन आते थे। फर्स्ट वीक में इस बार नहीं आए सिर्फ। इसी बार था जो महाराज नहीं आये। सीधा 4 महीने के बाद आए जस्ट बिकॉज ऑफ हेल्थ रीजन, नहीं तो महाराज हमेशा मतलब सो कॉल्ड क्रिश्टियन न्यू यर बट महाराज आते जरूर थे वो न्यू ईयर का मतलब भक्तों को एंगेज रखने के लिए हम न्यूर फेस्टिवल बनाते थे डेली में। उसके बाद तुरंत वो वृंदावन आते थे। तो महाराज वृंदावन इस टाइम आते थे न्यू पे। फिर महाराज कब आते थे, ये तो आप सब को पता है। कार्तिक में आते थे, 1 महीना रुकते थे कार्तिक में, पहले 1 महीना रुका करते थे कार्तिक में 11 महिना उसको हम आगे डिस्कस करेंगे और 1 और बार महाराज। जब भी महाराज अमेरिका जाते थे, उससे पहले हमेशा वृंदा बनाते थे हमेशा मतलब महाराज, हमेशा अपने आप को कनेक्टेड फील करते थे। कृष्ण बलराम से कभी भी कोई कार्य करना हो तो भगवान का आशीर्वाद ले जाते थे। हमेशा आपने देखा होगा, धर्मातनप्रू ने भी नोट किया होगा जब भी हम ईवन वृंदावन से 23 दिन का टाइम, जब महाराज 34 दिन रुकते थे, मैक्सिमम 23 दिन। फिर जब वापस जाते थे तो महाराज क्या करते थे कि हमेशा डीटीसी को प्रणाम करके जाते थे और मैंने नोट किया। वो ऐसा प्लान करते थे अपने पूरे दिन का कि या तो 12 बजे से पहले निकल जाए, क्योंकि ऑल्टर न 12 से 4 बंद रहता है 1 से 4। तो महाराज ऐसे प्लान करते थे कि वो 1 बजे से पहले पहले, 12 बजे से पहले पहले निकल जाए। भगवान को प्रणाम करके या फिर सीधा 4 बजे के बाद। तो इस तरीके से वो बहुत प्लान करते थे। हम उस चीज को हमने बहुत बार नोट किया, महाराज आज सुबह से बोलते थे, आज हमें निकालना है। मैंने कहा ठीक है, महाराज चलते हैं है। हमको पहले बोल देते है कि चलना है, चलना है। बट वो या तो 12 बजे से पहले निकालेंगे या फिर हमें नहीं बताते थे ये चीज बात हमने बहुत बार नोट किया कि या तो वो 12 बजे से पहले निकालेंगे या 4 बजे के बाद। यही कि प्रणाम करके कितना भी लेट हो, कहीं पर भी, कितना भी लेट हो। महाराज यह चीज करना नहीं भूलते थे, कभी भी नहीं। ईवन डेली में हो, कहीं पर भी हो, महाराज की फ्लाइट हो न। तो ये प्लान हमेशा करते हैं की कितना लेट हो फ्लाइट लेट। हम तो थक जाते थे विष्णु राम प्रो को भी आइडिया है इस चीज का। हम बोलते थे, महाराज अभी निकालना है, 11 घंटे पहले एयरपोर्ट पहुंचना है महाराज बिल्कुल शांत सभा में। मतलब उनको पता है मुझे क्या करना है। हम थक जाते थे बोल बोल के बट, उनको पता है क्या करना है। वो आराम से जायेंगे प्रणाम है। निकालने का टाइम हो गया और जायेंगे शांति से प्रणाम करेंगे और चरनामृत लिए बिना नहीं जाते थे। वो तो फिक्स है बट अगर आगे पीछे भी कोई नहीं अगर सुबह नहीं ले पाया। चरना में तो चरणामृत लिए बिना नहीं जाते थे। तो ये जो चीज है न, मुझे बहुत अच्छा लगता था कि महाराज हम मतलब कितने डिपेंडेंट है, गुरु महाराज भगवान पे तो वह चीज है, हमें भी वैसा मतलब अपने अन्दर प्रयास करना चाहिए कि अगर हम पूरी तरीके से भगवान पर डिपेंडेंट रहे तो फिर भगवान हमेशा हर पल हमारा साथ देते हैं। मेरे को 1 बहुत छोटा सा, 1 मतलब चुटकुला तो नहीं कहेंगे उसको 1 बहुत छोटी सी चीज याद आ रही है। जिस तरीके से बच्चा और माँ का रिलेशन होता है न। जब तक बच्चा रोता है मतलब माँ, माँ क्या करती है किचन में अपने काम करने के लिए बिजी रहती है तो वो क्या करती है? बच्चे को है न, वो खिलौना पकड़ा देती है, खिलौना पकड़ा देती थी कि वो उसके साथ खेलते रहे, खेलते रहे। और मैं किचन में अपना काम करती हूँ। बट अगर वो जो खिलौना 1 तरीके से माया है देखा जाए तो वो एंगेज कर देते तो माँ अपने लिए टाइम निकाल लेते। तो वैसे ही क्या होता है कि अगर भगवान और हमारा भी यही है रिलेशन, भगवान को हम इतना प्रेम करते हैं न। अगर प्रेम रियल में करते हैं तो वो क्या करते है न? हमारी डिजायर फुल फिल कर देते हैं कि ये मटेरियल डिजायर फुल फिल करते है और हम भटक जाते हैं। बट हम अगर कुछ देखा होगा, कुछ बच्चे होते हैं न। खिलौना हाथ में दोनों फेंक देते हैं, फेंक देते हैं खिलौना और वो नहीं मानते माँ मतलब जब तक माँ अपने गोद में पकड़ना लेना तब तक रोना शुरू मत बन नहीं करते। तो उसी टाइप से है। भगवान भी क्या करते हैं, हमारा टेस्ट लेते हैं। जब हमको भगवान, हम भगवान की बहुत मतलब इतना करते है की भगवान प्लीज, हेल्प मी, प्रोटेक्ट, मी है न। तो पर वो क्या करते? भगवान पूरी तरीके से आपको गोद में नहीं उठाते, कुछ न कुछ आपकी इच्छाएं पूरी कर देंगे, आपकी इच्छाएं पूरी कर देंगे। पर अगर आप उनको फेंक देंगे और बोलेंगे कि मुझे सिर्फ शुद्ध भक्ति चाहिए तो तभी वो फिर आपको शुद्ध भक्ति देते। तो यह चीज मुझे महाराज के केस में व बहुत अच्छा लगता है कि महाराज इस फुल्ली डिपेंड न कृष्णा। तो वो मतलब कुछ भी इधर उधर की कोई चीज होना, व डायवर्ट नहीं होते, बिल्कुल फोकस रहते हैं कि मुझे प्रपात की, गुरु महाराज की, प्रपात की सेवा करनी है, भगवान की सेवा करनी है। तो ये चीज हम समझ सकते हैं कि हम भगवान से भक्ति कर रहे है न? तो भगवान बहुत सारी चीजें देते हैं साथ मे। तो हम वो सारी चीजों पर न फोकस करते हुए अगर हम शुद्ध भक्ति पर फोकस करें और वो सब चीजें जो डिजायर्स भगवान दे रहे हैं उस पर उसको इग्नोर करें न लें। तो फिर भगवान हमारी सोसाइटी देखते हैं, हमारा समर्पण देखते हैं। तो उसी प्रकार गुरु महाराज का इतना भगवान के साथ इतना कनेक्शन था, प्रपात के साथ आपने देखा। यह फिल्म में किस तरीके से उन्होंने सरेंडर शो किया, डेडिकेशन शो किया है, प्रपात के प्रति, स् कॉन के प्रति, तो आगे बढ़ते है। तो लास्ट में कल हमने डिस्कस किया था गुरु महाराज का, जो साधना में इतनी स्ट्रांग है, तो वो मैं आज नहीं डिस्कस करूंगा। 33 वृंदावनी 1 ऐसा धाम है जिसे हमारा 2 बार आरती करते थे, मैंने कल बताया था तो अभी उसमे नहीं जायेंगे और कृष्ण बलराम की आरती उन्हें बहुत पसंद थी। तो आगे हम 1 और चीज में बताना चाहूँगा महाराज हमेशा धर्मात्मा ब्रू को फ़ोन कर के बोलते थे कि मैं आ रहा हूँ, मैं आरती में जान जाऊँगा। तो प्लीज ज्यादा लोग न खड़े रहे वहाँ पर, मेरे वेलकम के लिए, मुझे तुरंत निकालना है। यहाँ पर, यहाँ पर भी बोलते थे वृंदावन में, जहाँ पे वन बॉम्बे में बोलते थे, और डेल्ही में भी बोलते थे डेली में। महाराज तो डाट डाट के सबको पहले ही बोल के रखते थे, कोई भी नहीं खड़ा रहेगा वहाँ वेलकम के लिए धर्मात्मा को स्पेशली बोलते थे, फ़ोन करके की कोई वेलकम के लिए खड़ा नहीं रहेगा, मेरे पास टाइम नहीं है, मैं सीधा भागूंगा ऑल्टर के लिए, तो बहुत एम्बेरेस फील करते। अब भक्त लोग सुनते नहीं थे, आते थे सब लोग इतने बड़े बड़े गारलैंड, फिर महाराज बोलते थे, रमात्मा बोला था न, तब महाराज ने इतने हम्बल है की सबको यही करते है, कहते तुम सारी सेवाएं छोड़ के यहाँ पर खड़े रहते है। 1 आधा घंटा अच्छा नहीं लगता उनको, तो ये मैं शेयर करना चाहता था, महाराज कल भी मैंने बोला था कि महाराज जब भी वृंदावन आते थे और कोई भी भक्त उनको दिखता था, तो वो सबसे पहले 1 ही क्वेश्चन पूछते थे की कितने दिन वापस कब जा रहे, सीधा बोलते थे, ये नहीं पूछते थे क्या हालचाल है, वापस कब जा रहे सबको बहुत भक्तों को महाराज से मिले। तो उनको पता होगा महाराज का क्लियर फंडा था कि आप आओ वृंदावन 23 दिन रहो स्प्रिचुअली रिचार्ज हो जाओ और फिर तुरंत अपने अपने मंदिर जाइए और अपने अपने सेवाएँ कीजिए कभी नहीं वो महाराज चाहते, खुद भी वो यही करते थे, 23 दिन के लिए रहते थे, और तुरंत कभी कभी तो आ जाते थे और अगले दिन ही चले जाते थे, पर हम अभी रोक लेते थे, महाराज आये हो तो 12 दिन रुकिये कहते नहीं नहीं आई हैव, सोमनी सर्विसेज तो ये है की हम लोगो को वृंदावन आना चाहिए, बट अपना अपना रिचार्ज करके, इस आध्यात्मिक रूप से अपने आप को रिचार्ज करके तुरंत चले जाना चाहिए, ज्यादा टाइम यहाँ नहीं रहना चाहिए, नहीं तो मना करते थे। तो 1 और ये था बताना चाह रहा था आपको अब आप देखेंगे। मैं 1 चीज और नोट की थी जब हम यहाँ वृंदावन में रहते हैं, महाराज देखेंगे महाराज जब, क्योंकि उनके वो इतना बिजी रहते थे, वृंदावन में थे तो वो तब भी बहुत बिजी रहते थे, या तो भागते हुए भागते हुए आरती के लिए जाते थे, और रास्ते में बहुत डिवोटीज मिलते थे, भागते हुए जायेंगे न तो पर वो कभी भी किसी डिवोटी को इगनोर नहीं करते थे। 1 सेकेंड के लिए रुकेंगे और उनकी मिलियन डॉलर स्माइल जो है न वो मुस्करा देंगे और 1 बार जरूर बोलेंगे आप कैसे हैं मैं आपको मिलता हूँ बाद में हमेशा कम से कम ये शब्द कम से कम इतना तो उनका आदान प्रदान रहता ही था भक्तों कम से कम आप कैसे हैं और बड़ा भक्त लो इसी से मतलब तृप्त हो जाते थे। इतना बोलने सिर्फ देखने मात्र से से कहते हैं न भगवान हमारी तरफ द देख ले तो वैसी हमारी स्थिति है जैसे महाराज 1 बार डांस कर देते थे हमारे ऊपर, हम मतलब त्रिपत जाते थे और ये जाते टाइम और वहाँ से आते टाइम दोनों टाइम वो भागते हुए जाते क्योंकि जब वापस आते थे तो वो उनको लगता था मेरी मीटिंग है तो वहाँ से भी भागते हो जाते थे। बट 1 चीज आपने नोट किया होगा धनमाधमरोनेभीनोट किया होगा कि वो पूरे स्टाल पे होते हुए जाते थे कोई भी स्टाल हो सब पे जायेंगे कैसे चल रहा है आपका कोई दिक्कत तो नहीं है आप कैसे हैं सब ठीक और स्पेशली बुक स्टाल पर जाकर रुकते थे और हमेशा कोई न कोई बुक उठा लेते थे कोई न कोई कहते है दिस इज नाइस बुक और यह धर्मा पकड लेते कहते ये रख लो मेरे लिए मतलब वो इतना एनकरेज करते थे सबको सारे स्टॉल्स पर जा जा के सब को एनकरेज करना और स्पेशली आई थिंक देवी शक्ति माता जी उनका भी स्टॉल होता था न मैशलेजगउसपेभीजाके रुकते थे बहुत और बहुत हमेशा महाराज हाथ जोड़ के थैंक्यू होते थे कि थैंक यू फॉर डूइंग सो वन्डरफुल सर्विस फॉर प्रपात। तो भक्त लोग उसी से सेटिस् जाते तो उनको लगता था उनको सब कुछ मिल गया महाराज जब थैंक्यू बोलते थे तो उनको लगता था सब कुछ मिल गया उनको तो ये बहुत अच्छा लगता था कि किसी को भी मतलब महाराज मिले तो इगनोर नहीं करते थे सबको मिलियन डॉलर स्माइल जो है वो उनसे खुश कर देते थे। ये चीज मैं जस्ट याद कर रहा था तो ये था मुझे याद आ रहा था 1 और बहुत अच्छी चीज मुझे याद आई क्योंकि मैं न धर्मात्म प्रो को पता है कि बहुत सारी चीजें तो हमारे साथ ही हुई है। तो महाराज गायत्री जो गायत्री थ्रेड ब्राह्मण थ्रेड जो था वो हमेशा कृष्ण बलराम का यूज करते थे हमेशा गायत्री जो महाराज का गायत्री थ्रेड होता था ब्राह्मण थ्रेड हमेशा कृष्ण बलराम का यूस करते थे स्पेशली कृष्ण का और धर्मात्मा हमेशा रखते थे संभाल के एकादशी को यहाँ पर चेंज होता है जो पुजारी है उनको पता है एकादशी वाले दिन वो पुराना ब्राह्मण थ्रेड चेंज करते भगवान का और नया पाते तो वो जो पुराना निकालता है वो धर्मात्मा प्र ब बड़े प्रेम से उसको रखते थे थे और उसको जब गुरुमाराज आते थे नेक्स्ट टाइम तो उनको देते थे थे हमारे पास हमेशा 23 एक्स्ट्रा रहते थे ब्राहमंथ्रेडहम उसको डी टी बैग में रखते थे हमेशा रहते थे तो में सोचता रहता था की हम लोग तो ये वाला ब्रामंथ्रेडयूस करते हैं, गुरु माराज, ये वाला ब्रामंथ्रेडउस करते। पर मेरी हिम्मत कभी नहीं होती थी। पूछने की बहुत सी चीजें ऐसी होती थी जो मैं पूछने की इच्छा होती थी। तो पूछ नहीं पाता। अभी हम पूना गए तो प्रबोधन महाराज मैं थोड़ा संग करने की कोशिश कर रहा था। प्रधान महाराज पूना में आये थे। तो उन्होंने किया भी बलराम जी ती आने वाली है। तो महाराज ने ब्रह्मचारी क्लास में बलराम जी का गुणगान और सहारा कर रहे थे, लीला पर। तो गुरु महाराज बता प्रधान महाराज बता रहे थे कि भगवान जब आते हैं तो बलराम जी मतलब के सारे जो पार्षद हैं वो आते हैं, है न? तो भगवान के आसपास जितनी भी चीजें हैं, वो बलराम जी का एक्सपेंशन है। आपने सुना होगा यह मृदंग भी बलराम जी का एक्सपेंशन है, है न? अनंत शेष टेम्पल को सपोर्ट करते हैं, वो भी बलरामजी एक्सपेंशन है। ईवन मैंने सुना की, टेंपल के जो पिलर्स होते हैं वो भी बलराम जी की एक्सपेंशन है। तो वो बता रहे थे कि तो मैं वही सोच रहा था कि भगवान कृष्ण उन्होंने स्पेशली यह वर्ड यूज किया कि कृष्ण के जो कृष्णा के जनी होते हैं, उनका सब सारी चीजे जो होती है वो सारे बलरामजी का एक्सपेंशन है। तो मैं सोच रहा था कि महाराज मैं मैं स्पेकुलेट कर रहा था, बट मैं ये सोच मुझे मन में आया कि अगर वो कृष्ण के ऊपर बलराम जी से जने हैं, रामन वो महाराज उसको पहनते। तो वो मतलब बलराम जी की जो शक्ति है उसको वो धारण करते और प्रचार के लिए प्रपात के प्रचार मिशन में मतलब जो उनको शक्ति चाहिए, स्प्यूचुअलस्ट्रैंक चाहिए। मैंने स्पैकूलेट किया, पता नहीं मैं कितना सही हूँ कि बलराम जी को धार, क्योंकि वो बलराम जी का एक्सपेंशन है। तो उसको धारण करके अपने आप को वो स्यूचुअलली रिचार्ज करते हैं। तो मैं इस टाइप से सोच रहा था। तो तो मैं आपको शेयर करूँ। तो मुझे बहुत फील हुआ कि मतलब किस तरीके से महाराज इतनी छोटी छोटी चीजों को ध्यान देते थे, कभी आपने पूछा महाराज को की महाराज ने हम लोगों की हिम्मत नहीं होती थी, पूछने की बट मैं सोचता रहता था कि महाराज सिर्फ सिर्फ और सिर्फ बलराम जी का, मतलब कृष्ण बलराम का गायत्री थ्रेड पहनते थे। तो तो ये था 1 भी जैसे मैंने आपको भी बताया कि महाराज कार्तिक में 1 महिना रुकते थे, तो वो अभी भी है जो शायद थोड़ा कम रुकना शुरू किया, नहीं तो महाराज तो शुरू से मतलब 40 45 साल हो गए। तो महाराज हमेशा कोशिश करते थे कि 1 महिना वो यहाँ रुके और उनका 1 ही पर्पस होता था, सेवा ऐसे नहीं रुकते थे, उनके 3 सेवाएं होती थी कार्तिक में, 1 तो रशियन डिवोटिज को पूरा संग देना क्योंकि वो इतनी दूर से कार्तिक में आते थे। तो महाराज एव्री डे उनको क्लास देते थे, एवरी डे सबसे वन टू वन मिलते थे और मतलब बहुत बहुत संग देते थे। हम लोग सोचते थे कि मतलब रशियन डिसाइपल ही डिसाइपल है के हम लोग डिसाइबल नहीं है। नहीं बात महाराज महाराज बोलते थे, जब भक्त लोग आते थे न भक्त, दोनो मिल के रशियन डिवोटिज भी आते थे, बाकी लोग भी आते थे, बट महाराज हमेशा उनको प्रेफरेंस देते थे, और महाराज मेरे को बोलते थे कि ये लोग कितनी दूर से आये हैं। ये लोग पूरा साल पैसा कट्ठा करते हैं, सिर्फ कार्तिक में वृंदावन आने के लिए बहुत मतलब, वेल्दी रिच लोग नहीं है सारा साल पैसा इकट्ठा करते हैं कि यहाँ पर कार्तिक में आये और भगवान भगवान का, वृंदावन का, भक्तों का संग करे, गुरु महाराज का संग करे। तो महाराज कहते है की अगर मैं इनको टाइम नहीं दूंगा तो फिर 1 तरीके से नाइंसाफी हो जाएगी। तो महाराज बहुत और महाराज बोलते थे कि रशिया में बहुत शुद्ध भक्त हैं, हम पूछ लेते थे, हम हम पूछते थे, बोला होगा न? धनमान बोला था, है न? हम पूछते थे महाराज इंडिया में नहीं है, जवाब नहीं देते थे, जवाब नहीं देंगे पर बोलेंगे की रशिया में बहुत है, ऐसे बोलते थे। तो 1 तो यह कारण था महाराज का कार्तिक में रुकने, का की रशियन डिवोटिज को पूरा संग देना दूसरा इंडिया में भी क्या करते थे, सब कार्तिक यात्रा होती थी तो सब जगह से ऑल ओवर इंडिया सारे लोग आते थे अपने अपने ग्रुप्स के साथ कोई 200 लोग लेके आ रहे है, सूरज से, डेली से 304 सौ लोग बॉम्बे से आ रहे हैं। तो फिर महाराज उनको भी टाइम देते थे, अलग अलग जगहों में जाके उनके कैम्स होते थे, वहाँ क्लास देने जाते थे। तो 1 ये सेवा थी महाराज की, कार्तिक में तीसरी सेवा थी। अब ये तो रशिया ऑल ओवर द, वर्ल्ड भी लोग सारा दिन यही प्लान करते है, उनका, और कुछ तो होता नहीं है उनका इंडिया आने का 1 ही परपज होता है, कार्तिक कार्तिक होता है या फिर मायापुर या वृंदावन धाम। तो महाराज इन सब लोगों को बहुत टाइम देने के लिए क्योंकि उनका शेड्यूल में डेली बॉम्बे नहीं होता था, मेन होता था। वृंदावन तो महाराज को पता था कि सब लोग इधर आये है, मुझे यहाँ पे बहुत टाइम देना है, बट 1 और इसमें न रुकावट आती थी ये जो मिट टम जी बी सी मीटिंग स्टार्ट हुई, पहले जो जी बी सी मीटिंग थी, साल में 1 बार होती थी मायापुर में। अब ये फिर कुछ सालों से आई थिंक मुझे एग्जैक्ट ली नहीं पता पर शायद 10 पंद्रह साल पंद्रह साल से ये 2 टाइम शुरू हो गई मिट टम मीटिंग और मिट टम मीटिंग। पंद्रह दिन में न महाराज को बड़ा बहुत भारी लगता था, महाराज को मतलब फटाफट सोचते थे की मैं कब वृंदावन जाऊँ, भक्त लोग वहाँ मेरा वेट कर रहे है। वो मिट मीटिंग या तो बॉम्बे में होती थी या कहीं जहाँ पे फैसिलिटी तिरुपति में हुई थी। पर जनरल बॉम्बे में होती थी। तो ये मैं बताना चाह रहा था, आपको कि महाराज तो आप देखेंगे कि महाराज कार्तिक वृंदावन में थे, कार्तिक में तो 1 ही कारण था सेवा और कोई कारण नहीं था। आप लोगों ने महसूस किया होगा कि महाराज किसी और मंदिर भी जाते भी नहीं थे, कहीं नहीं जाते थे सिर्फ भक्तों को सर्व करने के लिए आते थे। कहीं नहीं मंदिर तो इसी में, कार्तिक में। तो कल मैं गोर्धन परिक्रमा की बात कर रहा था। तो कार्तिक में गोर्धन परिक्रमा, उनका फिक्स, सब लोग 1 ही चीज़ पूछते थे कि कब महाराज गोर्धन परिक्रमा करेंगे 1 ही चीज। तो वो गोर्धन परिक्रमा के पूजा के अगले दिन करते थे। लोग हमेशा फ़ोन करते रहते थे, प्रहुजी कब मैंने कहा प्रहुजीअजबओग तो आप लोगो को पता लग स्पेशली दिल्ली वाले परेशान करते थे, क्यूंकि उनको पता है जैसे महाराज पता लगेगा की महाराज जा रहे है। नेक्ट देन, उठ के सब लोग आ जाते थे दिल्ली पंजाब जो आसपास एरिया है सारे और वही गोरधन परिक्रम। महाराज कभी मिस नहीं किया, इतने सालों में कभी नहीं लास्ट के में कल बता रहा था आपको कि लास्ट के 2 सालों से वो परिक्रमा आदि कर रहे थे, नहीं तो गोवर्धन परिक्रमा। तो मतलब उनका फेवरेट था और उनका फेवरेट कल भी मैं बोल रहा था कि बिना स्लिपर्स के चलते थे। तब उन्होंने बहुत तपस्या व तपस्या का भाव तो कूट कूट के भरा हुआ था। और हमें भी वो यही बोलते थे। हम कहते हैं ब्रह्मचारी लाइफ मतलब तपस्या। अब हमको तो बोले ग्रस्त को तो नहीं बोल पाते थे। शायद हम लोग हम लोगों को बोलते थे कि ब्रह्मचारी लाइफ में तपस्या उन्होंने शो करके दिखाया अपने अपने कमरे में। आपने देखा होगा छोटा सा कमरा है गुरु महाराज का, उनके स्टेटस के हिसाब से, उनके स्टेटस के हिसाब से क्या होना चाहिए। और वो छोटा सा कमरा है। महाराज सारा दिन बोलते थे कि मैं थकाव फील कर रहा हूँ, थका फील कर रहा हूँ। तो क्या करते थे वो सोफे पे लेट जाते थे 10 मिनट के लिए, पंद्रह मिनट के लिए, उनके कमरे में बैठ भी नहीं था सोफे पर लेट जायेंगे और फिर 10 मिनट में उड़ जायेंगे। मुझे नहीं मुझे बहुत सेवा है मुझे। हमने। मतलब बहुत वो लगता था कि क्योंकि और भक्त लोग बाहर खड़े रहते थे। तो और महाराज अंदर अगर 10 मिनट और पंद्रह मिनट रेस्ट करते तो उनको बुरा लगता था, बहुत बुरा लगता था उनको कहते है भक्त लोग मेरा वेट कर रहे हैं और मैं कैसे रेस्ट कर सक। मैने कहा महाराज ऐसे कैसे ऐसे दिन ऐसे तो नहीं चलेगा न। थोड़ा तो आपको अपने हेल्थ पर ध्यान देना पड़ेगा, पर नहीं, नहीं, मुझे उठना है मुझे उठना है भक्त लोग वेट कर रहे हैं। महाराज बोलते थे और इतने हंबल थे उसमें कि महाराज बोलते थे कि समबडी इंटेलिजेंट कैन स्टे आउटसाइड नाम कभी नहीं लेते थे किसी का नाम 23 डिवोटीज होंगे न मेरे को भी बोलेंगे मेरी को बोलेंगे समबडी इंटेलीजेंट शुड बी सी, आउटसाइट क्यूँ क्यूंकि लोग महाराज अगर रेस्ट कर रहे हैं। तो भक्त लोग आयेंगे। तो उनको प्रेम से बोलना है कि मैं इतने बजे मिल सकता हूँ। या आप लोग कॉन्फ्रेंस रूम में बैठ जाओ। या इस टाइप से मतलब सबको अटेंड करना है ऐसे मतलब सबको भगाना नहीं है। मान बोलते थे स्पेशली एवार्ड युस करते है समबडी इंटेलिजेंट शुलबीसस्ैंडआउटसाइड किसी को किसी को भी न वो ऐसे डायरेक्ट सेवा नही बोलते थे हमेशा न मतलब रिक्वेस्ट करके बोलते थे कैन यू डू दिस फॉर मी मेरे लिए तुम कर सकते हो। और अभी मैं वहाँ बैठा हूँगा न अजय गुराम को बुलायेंगे हरी बुल मैंने कहा यस महाराज अजय ग्राम कहाँ है। मैंने कहा महाराज साथ ले मैंने कहा मैं बुला के लाता हूँ क्या हरी बुल 1 गिलास पानी 2 गया मैंने कहा ये क्या मैं मैं यहाँ बैठा हूँ आप मेरे को बोल 2 कि मैं पानी नहीं वो वो क्या करते है उनके माइंड में था किस को क्या सेवा देती है आप बैठे भी रहोगे न तब भी नहीं आपको बोलेंगे आपको कोई और सेवा दी है सबको उन्होंने फिक्स करके रखा हुआ था मैंने वहाँ ये क्या ऐसे तो नही दे दे तो आपको पानी नही नई इट्स ओके तो फिर से घुमा देते थे बात को चेंज कर देते थे आपको स्टेज पानी में उसको बुला के लाओ पानी क्या है। ये था गर्दन परिक्रमा की हम बात कर रहे थे तो हमने शायद कल भी डिस्कस किया था पर 23 चीजें उसमें मैं डिस्कस करना चाह रहा था जो कल रह गई थी। तो महाराज आप सब को पता है कि महाराज फेवरेट प्लेस कौन से गोविंद कुंड राधा कुंड और है उधवकुणडसरीकुंड उसमें उ्धवकुंडमें बाबाजी थे उनका नाम मुझे याद नहीं है अभी आप में से किसी को याद होगा तो अभी उन्होंने शरीर छोड़ दिया है। महाराज का बहुत ही न वो था, 1 मतलब 1 अलग ही रिलेशन था उनके साथ उधव कुंड में जा के बहुत टाइम उनके साथ बैठते थे और बहुत बात हस हस के बात करते थे उनके साथ मतलब बहुत अमेजिंग था वो और वो भी बहुत मतलब खुले दिल से महाराज को स्वागत करते थे और बहुत मतलब वो मैंने वो बॉन्डिंग बहुत वो रेयर देखी है, वो तो और कभी मिस नहीं करते थे कभी भी नहीं तो वो जो चीज है और 1 और चीज आपने नोट किया होगा। गोरधन परिक्रमा में महाराज जगह जगह जाकर रुकते थे फिर कृष्ण कथा करते थे, फिर महाराज को बीच बीच में महाराज बिना चप्पल के परिक्रमा कर रहे हैं फिर थक जाते थे। तो भक्त महाराज आपके लिए में नारियल पानी लेकर आता हूँ कितने लोग ले आयेंगे अपने अपने नारियल महाराज इसमें से ले लो इसमें से महा प्रसाद के रूप में सब लोग बाटते थे। उसको महाराज ने 2 सिप ले लिया और फिर वो सब महा प्रसाद सब मतलब लेना तो उनका मोटी कुछ और होता था उनको महाराज को नारियल पानी नहीं पिलाना और खुद को माफ सा लेने महाराज के मैं ले लिया फिर भी नहीं महाराज इसको इससे इससे भी ले लिया इस लिया मतलब मैं देखते मतलब हंसी आ जाती थी पर कुछ बोल नहीं सकते थे और जैसे कहीं थोड़ी देर बैठ जाते थे। तो भक्त लोग तुरंत भागते। जाते थे, मसाज करने लग जाते थे, अब महाराज मना भी नहीं करते, आपने देखा होगा कहीं बैठ जाते तुरंत भक्त लोग आगे मौका मौका नहीं छोड़ते थे, मसाज करने का नही नही, नही नही नही। वो कहते नहीं महाराज प्लीज हमें मौका मिलता है। तो यही है भक्त लोग इसलिए दूर दूर से आते थे, ऐसा ही हमें करना चाहिए, जितना भी मौका मिले भक्तों का संग, महाराज का संग लेने के लिए सब लोग दूर दूर से आते थे, कार्तिक में बहुत एंजॉय करते थे, महाराज के साथ 1 बार है और ब्रज मंडल परिक्रमा कभी मिस नहीं करते थे, वो पूरी नहीं करते थे, हाँ कभी पूरी नहीं करते थे, बट हमेशा साधारण महाराज को फोन करके बोलते थे, मैं आऊंगा, म आऊंगा और ब्रज मंडल परिक्रमा महाराज हमेशा इंजॉय करते थे, जितना भी टाइट शेड्यूल रहे, बिजी सिड्यूल रहे, पर वो कुछ दिन के लिए ब्रज मंडल परिक्रमा जाते ही जाते थे, 1 बार क्या हुआ ब्रज मंडल परिक्रम में मारा जनरली मॉर्निंग वॉक पे जाते थे होगा कम से कम 78 साल हुए होंगे उस चीज को, मैं डेट तो कभी नोट किया नहीं किसी चीज के लिए, बट 1 बार ऐसे ही चल रहे हैं, मैं भी साथ में चल रहा हूँ, मैं मैं चल रहा हूँ, राइट में अजय गोरांग है चल रहे हैं, चल रहे हैं। महाराज ने मेरा हाथ पकड़ लिया और हाथ पकड़ कर चलने लगे, शायद वो शायद वो रोड जो थी वो क्या बोलते हैं को पत्थरों की थी, पूरी बनी नी थी मिटटी की, तो शायद थोड़ा बैलेंस के लिए बट मैं फील कर रहा था, उस टाइम मुझे एकदम फीलिंग जैसे कहते है रोंगटे खड़े हो जाते है। तो वो हो गए थे, तो मैं ऐसा फील कर रहा था, मैं अपनी फीलिंग बता रहा हूँ की ऐसा महाराज का तो दिव्य है। तो मैं सोच रहा था कि तुम चिंता मत करो, मैं हूँ तुम्हारे साथ तुम्हें पकड़ के रखा है, मतलब ऐसा फीलिंग आई की मतलब तुम जब तक साथ मतलब फॉलो करते रहोगे, प्रपात को मैं हूँ तुम्हारे साथ तो एकदम ऐसे में साथ में चल रहा और ऐसे पकड़ लिया मेरे को, मैं तुम्हें कहीं जाने नहीं दूंगा साथ में रखूंगा ऐसे मतलब फीलिंग। एकदम माइकी महाराज बोल रहे हैं कि मैं तो मैं वो वृंदा ब्रज मंडल परिक्रमा में था तो वो बड़ी टचिंग सा था, तो मैं उसको मतलब बहुत फील कर रहा था, आप लोगों ने देखा होगा कार्तिक में विश्व पंचक सुका प्रिया माता जी को पता है, गोविंद माताजी को पता है की लास्ट में हमेशा हमेशा बोलते थे, मुझे विश्व पंचक करना है और पूरा प्रयास करते थे, पूरा प्रयास करे और पूरी कोशिश करते थे कि विश्व पंचक कम से कम मैं वृंदावन में करूँ, क्योंकि मीटिंग की वजह से बहुत दिक्कत होती थी, बट पूरा प्रयास रहता था, कम से कम प्रसाद लेना, एकादशी प्रसाद लेना। अब वो वैसा नहीं कर पाते थे, जैसे भीष्म पंचक में फॉलो होता है, उतना नहीं कर पाते थे, डॉक्टर अलाव नहीं करते थे, पर वो कहते हैं न वो भक्ति के सारे अंगों को अपने लेवल पे जितना कर सकते हैं। वो पूरा प्रयास करते थे, पूरा ऐसा नहीं की मतलब नहीं करते थे, उसको रैलिश करते थे। वो। ये था ब्रज मंडल परिक्रमा में, कार्तिक परिक्रमा, कार्तिक में, गोर्धन परिक्रमा में, तो मैं 1 और चीज शेयर करूंगा वृंदावन गुरुकुल। क्योंकि वृंदावन में आता है। तो मुझे वृंदावन गुरु को मैं कैसे भूल सकता हूँ। अभी मैंने अपनी पिछली स्टोरी, मुझे नहीं पता। बट मैंने जो आपने उसमें देखा कि जब प्लान किया कि वृंदावन गुरुकुल को खाली करना है। और फिर आपको उन्होंने नई लैंड लिया, राधाकांत प्रभु लीला। पुरषोतम प्रभु। मतलब। महाराज ने इतना हेल्प किया, उनको इतना मोटिवेट किया। क्योंकि इस 1 टाइम ऐसा आया था कि गुरुकुल को बंद करने का पूरा प्लान हो गया था। पूरा प्लान पर गुरु महाराज ने। मतलब उनके माइंड में क्लियर था कि प्रभुपाद ने यह स्टार्ट किया, गुरु कुल, तो हम इसको नहीं बंद कर सकते। मैं करके दिखाऊंगा मैं करूंगा। और उन्होंने अपनी टीम बनायी राधाकांत प्रो को लगाया लीला। पुरुष प्रो को लगाया, भगवान की कृपा से। अब गुरु महाराज का इतना प्यार मोटिव रहता था। तो फिर भगवान प्रोप तो हेल्प करते थे। तो भगवान की कृपा से इतना सुन्दर लैंड। मिला वहाँ पे और कुछ स् प्रोजेक्ट में। महाराज ने बहुत टाइम दिया। बहुत मतलब उसको बनाने के लिए, कोई आगे नहीं आया। आप देखेंगे कोई आगे नहीं आया। कुछ प्रोजेक्ट को। अकेले महाराज ने उस प्रोजेक्ट को बनाया। अकेले महाराज ने राधा कांत को लीला। पुरुषोतम पर को बहुत हेल्प, टाइम, टू टाइम उनको गाइडेंस करते थे। हमेशा उनसे पूछते थे क्या प्रोग्रेस है, क्या है? महाराज के जितने भी जान पहचान वेलविशर्स थे, डोनर्स थे, उनको। हमेशा बोलते थे कि आप आइए वृंदावन गुरु को विजिट कीजिए। तो मतलब भगवान की कृपा से, गुरु मैच के प्रयास से। आप देखिये आज की डेट में कितनी मतलब, कितनी अच्छी तरह वृंदावन अभी तो नया टेम्पल, कृष्ण बलराम, टेम्पल भी खुल गया। मतलब। ये सब गुरु महाराज का अथक प्रयास है न। अकेले सिंगल ही उन्होंने हैंडल किया। अकेले किसी और मैंने देखा है न मैं। पता नहीं किसी और किसी ने हेल्प किया नहीं किया। जो मैंने देखा है। पंद्रह साल में हमेशा बुलाते थे, हर विजिट में वृंदावन जब जाते थे। हमेशा उनको राधानपुर को बुलाते थे, प्रोग्रेस रिपोर्ट लेते थे। और क्या क्या अगर वो सही कर रहे हैं तो उनको मोटिवेट करते थे। कुछ लैकिंग है, कुछ प्वाइंट्स तो हमेशा गाइड करते थे। सब बहुत उन्होंने हेल्प किया था। तो अभी अभी देखिये, आप पूरा कितना सुन्दर बन गया। अभी तो विश्राम प्रूव भी हैंडल कर रहे हैं। उधर गौशाला भी आ गया। गुरुकुल और गुरुकुल स्कूल के साथ साथ थिंक गुरु कुल भी आ गया। और दिन ब दिन और उसका अच्छा रिकॉर्ड्स भी है। अभी जो टॉप स्कूल, टॉप बोर्डिंग स्कूल में आ रहा है। तो यह गुरु महाराज का अथक प्रयास है। प्रउपपात के लिए। सरेंडर है। मतलब। वही चीज। महाराज ने चीजें, चीजें परिस्थितियां चेंज हो रही है, नई नई चीजें आ रही हैं। बट जो चीज प्र ने शुरू की थी, महाराज चाहते वो एजिटिज रहे। वो महाराज का हमेशा मतलब था कि वे एजिटिजरहेतोकविदा उन गुरु कुल का मेरे को ध्यान आ रहा था की महाराज ने बहुत और वो हमेशा मोड ऑफ गुडनेस में रहते थे। पैशन पैशन अगर खत्म करना है तो बिना पैशन के कभी नहीं हो सकता। अब देखिये महाराज ने जिस भी प्रोजेक्ट को हाथ लगाया वो खत्म किया, सक्सेसफुली खत्म किया, पूना का टेम्पल बनाने का प्लान किया था राधे श्याम ने, तो वो कह रहे थे महाराज ज्यादा नहीं है, छोटा सा, छोटा सा प्रोजेक्ट बनायेंगे 56 करोड का। महाराज के इस 56 करोड में तो इसकी दीवारें भी नहीं खड़ी होगी। ऐसे मतलब उनको बोलते थे। और फिर जब उन्होंने उनको विजन दिया, जिन लोगों ने भी पूना टेम्पल विजिट किया, एन बी सी सी कितना बड़ा प्रोजेक्ट था, आई थिंक आज की डेट में सक्सेसफुल टेम्पलों में से है। पूना टेम्पल। तो कहीं न कहीं महाराज का विजन है तो वैसे ही गुरु गुल का, महाराज का विजन है भी था। तो महाराज ने लीला पुरषोत्तम को इंगेज किया। अभी तो शायद गुरुकुल यूनिवर्सिटी का गुरू यूनिवर्सिटी का भी प्लान कर रहे है। वो लोग तो महाराज हमेशा इनकरेज करते थे, हमेशा तो वो सब चीजे है न, बहुत ही मतलब मोटिवेटिंग है। हा 1 और था मैंने ये तो जैसे मैं बता महाराज छोटे से कमरे में रहते थे, वो तो मैंने बता दिया बट है उसमें 1 चीज शायद मैं बोलना भूल गया था कि इतने सालों वो जब भी उनको रेस्ट करना होता था तो वो मैट्रिसेज में नीचे सोते थे, नीचे प्रसाद पाते थे और नीचे सोते थे। अभी पिछले 34 सालों से महाराज टेबल पर बैठ के प्रसाद पाना शुरू किया है, नहीं तो नीचे बैठकर प्रसाद पाते थे और नीचे ही सोते थे। कभी बैड ने यूज किया अभी अभी क्या होता है जो एज हो जाती है तो हमको नीचे से उठने में तकलीफ होती है। तो तब हमने कहा महाराज ऐसे तो नहीं चलेगा। कहते है नहीं नहीं मैं सन्यासी हूँ, मैं बेड पे कैसे सोच सकता हूँ। महाराज ठीक है डॉक्टर जो बोल रहे है उसको न। तो फिर हमने बेड लिया और पता बैड कहाँ लगते थे हम आपको आप सोचोगे न। तो आपको सही में ऐसी दया दया जैसी आएगी बालकनी में महाराज की कमरे की जो बालकनी थी उसमे हम बैड लगते थे हम महाराज, हमेशा भक्त लोग बोलते थे, गणपति प्रूफ बोलते थे, महाराज 1 रूम और ले लीजिये साथ वाला उसको आप बैडरूम बना लेते हैं। कहते है नहीं नहीं नहीं मैं प्रपात की है, प्रॉपर्टी को मतलब वेस्ट नहीं करना चाहता, ऑलरेडी गेस्ट हाउस में कमरे कम हैं, लोग बाहर से आते हैं। तो महाराज इतना मतलब हम्बल थे कि कहते है कि नहीं मैं मेरे को यहीं पर बैठ लगा। 2 मैं इधर ही सो जाएगा वहाँ पर आप देखोगे। महाराज के कमरे के नीचे जनरेटर जनरेटर की आवाज आती रहती थी, वो खिड़कियों से उस वहाँ पे पंखा नहीं चलाते थे, कुछ नहीं चलाते थे। पूरा कुर्ता गीला हो जाता था, पसीने से कहते थे नई पंखा नहीं चाहिए मुझको मैने हमारा क्या है, ये देखिये न आप क्या थे, चलेगा बिना पंखे के सोते थे, बालकनी में इतनी धूप आती थी वहाँ से वह मतलब हम को देख के न, इतनी तपस्या तो बहुत ही ज्यादा थी, बहुत ज्यादा थी। तब तो वो चीज मैं देख रहा था कि वृंदावन में राधा गोलोक महाराज हमेशा बोलते थे कि महाराज आपको साथ वाला रूम भी कर देते हैं। अब भी लास्ट विजिट में उन्होंने राधा गोलोक महाराज ने बोल बोल के महाराज के साथ वाले रूम को कंबाइन कर दिया। बालकनी से ये चीज हम कब कर सकते थे हमने 7 वे बालकनी से दूसरी बालकनी में रूम कनेक्ट किया, कि बैडरूम में उधर और उधर बेडरूम सेट किया। बट महाराज वहाँ पर सिर्फ आई, थिंक 1 बार 1 बार सो पाये। इस बार जब आये थे उसी बार 1 बार रेस्ट किया, नहीं तो बोल बोल के हम थक गए, सब थक गए, बट इस बार आये थे तो 1 ही बार वहाँ पे रेस्ट कर पाये, नहीं तो वो 1 ही कमरे में रहते थे। तो वो चीज था और हम 1 चीज और मैं याद आ रही थी, मैंने नोट किया था, आप देखेंगे वृन्दावन में व्यास पूजा। आप देखिये दिल्ली में हमें व्यास पूजा होती है, सब लोगों को गुरु महाराज बोलते है। आप सब लोग आए बट वहाँ पर क्या होता है, न की चरण, अभिषेक का मौका नहीं मिलता, सबको वहाँ पर दिल्ली के आप, सीनियर, डिवोटीज, वो सब सामने आ जाते हैं। मैं ईवन मैं भी नहीं जाता, स्टेज पे इतना भीड़ होता है, वहाँ पर बहुत मुश्किल हो जाता है। महाराज के चरण टच करने, गोविंदा मादा जी, हमेशा वहाँ पर स्टेज पर स्टेज विशाखा माताजी और गोविंदा मादा जी, वो हमेशा वहाँ पर स्टेज पर रहती है। मैंने देखा उनको हमेशा स्टेज पर रहते, अच्छा प्रेम है। गुरु महाराज के प्रति बहुत अच्छा लगता था, देख के बात हम नही जाते थे, कि डर लगता था, कि बहुत लोग होते थे वहाँ पर स्टेज तो तो महाराज क्या कहते थे की और भक्त लोग क्या करते थे। फिर ठीक है हम लोग क्या करेंगे। जब महाराज महाराज एकदम व्यास पूजा के बाद वृंदावन आते थे, जन्माष्टमी के बाद वो जोपरपस जन्माष्टमी प्रउप पेरेंस डे, उसके बाद गुरु महाराज का व्याज तुरंत, उसके बाद सीधा वृंदावन आते थे, यहाँ पर, भक्त लोग पूरा प्लान करके बैठे होते थे की यह हमने महाराज का व्यास पूजा करना है। महाराज कहते नहीं नहीं ऐसा थोड़ी होता है। 223 दिन बार ब्याज पूजा करोगे लोग लोग सोचेंगे मतलब, वो बहुत सावधान रहते थे, सतर्क रहते थे, जी बी, सी, क्या, सोचेंगे की महाराज जैसे 223 दिन बार पर भक्त तो भक्त है, अपने हिसाब से चलते थे तो परमप्र घर में या फिर अर्जुन हरी घर में हमेशा व्यस्त हो। तो फिर महाराज बोलते थे कि ठीक है जब आप लोग कर ही रहे हो तो सब लोग सब भक्तों को बोलना की सब लोग आये जरूर है न, क्योंकि मैं उनको मिलना चाहता हूँ, बात करना चाहता हूँ। तो वो हमेशा उनका कंसर्न था हमेशा वृंदावन में उनका कंसर्न यही था कि सब भक्त लोग 1 साथ रहे, मिलते रहे, गुरु महाराज का लेक्चर सेवन करें, 1 दूसरे की मदद करे, भक्ति में आगे बढने का बढ़ने के लिए हेल्प करें। तो ये चीज का ही मेन पर्पस था। जब वो वृंदावन में व्यास पूजा, छोटी सी व्यास पूजा मनाते थे, उसमें सबको मौका मिलता था चरण अभिषेक का। मैंने तो देखा है जो लोग वृंदावन वाले डिवोटिज को जो वहाँ नहीं कर पाते थे तो वहाँ पे हमेशा उनको मौका मिलता था। आपने देखा होगा कार्तिक में प्रोप डिस्पेंस डे का वो दिन महाराज के लिए इतना इम्पॉर्टेंट दिन है क्योंकि महाराज क्योंकि प्रपात पेरेंस डे वाला दिन है वो, तो आपको वही पर करना पड़ेगा दिल्ली में, क्योंकि तुरंत जन्माष्टमी के नेक्सट डे है बट प्रपा डिस्पेरेंस वाला जो दिन है महाराज, हमेशा उसको पूरा वृंदावन में सेलिब्रेट करते थे और पूरा मतलब उनका देखेंगे की सुबह मंगला आरती व समाजी आरती पर आरती करेंगे, फिर भागते हुए कृष्ण बलराम के आरती करेंगे वो दिन तो आप देखो धर्मात्म पता सूबे से भागते रहते है स सुबह से। फिर दोनों आरती अगर के कमरे में आकर डीटी वर्शिप करेंगे, फिर उसके बाद लेक्चर के लिए तैयार करेंगे, नोट्स बनायेंगे और फिर नोट्स बना, फिर तुरंत बोलेंगे चेक करो की शुरू हो गया गया प्रोग्राम में आ रहा हूँ, फिर वहाँ चले जायेंगे, फिर वहाँ पर आरती करेंगे, फिर ग्लोरिफिकेशन तो यहाँ पर मैं 1 चीज में आपको मेंशन करना चाह रहा था कि जब महाराज ग्लोरिफिकेशन करते थे न चाहे यहाँ पे हो, चाहे कहीं पर भी हो, कहीं पर भी महाराज प्रोपर की ग्लोरिफिकेशन करते, टाइम, प्रोप की ग्लोरिफिकेशन के सिवाए और कुछ भी बोलते थे साथ में, वो अपनी रिपोर्ट देते थे। एनवलरिपोर्ट आप लोगों ने पता नहीं नोट किया या नहीं नोट किया हम रोज हम प्रभु जी धनवान पूरा महाराज के लिए प्रीपेयर कर पढते थे, महाराज सुनते थे, जब डीटीवर्शिपकरेहोते थे तो सुनते थे, महाराज बोलते थे यहाँ से पढो, वहाँ ऐसी पड़ो, फिर वो पढ़ लेते थे और वन प्वाइंट बनाने को बोलते थे, पॉइंट्स बनाते थे पर उसमे से कुछ नहीं बोलते थे। हम लोग हैरान हो जाते थे, इतने सारे पॉइंट्स बनाये होते थे, उसमे से कुछ नहीं बोले। बोलेंगे क्या बहुत सिम्पल पूरा प्रपात के लिए मतलब आप से सिर्फ ग्लोरिफाई करते थे। प्रपात की प्रउपाऔरएकही चीज पर उनका ग्लोरिफिकेशन रहता था कि प्रउपपाद ने बहुत स्ट्रगल किया है अपनी लाइफ में, वही चीज और इस चीज को लेकर वो बहुत रो भी देते थे। आजकल कुछ सालों से वो उस चीज को सोच के न रो पड़ते थे। प्रभुपाद ने इतना स्ट्रगल किया है तो उसी चीज को मेडिटेट करके वो भी अपनी लाइफ में उस स्ट्रगल को करना चाहते थे। प्रपात के लिए, प्रभुपाद ने कृष्णा के लिए किया है तो गुरु महाराज प्रपात के लिए स्ट्रगल करना चाहते थे। तो वो चीज वो हमेशा क्लास में फो बताते थे कि प्रउप बारी स्टीट में रहते थे, इतना स्ट्रगल करते थे, ऐसे करते थे, वैसे करते थे और लास्ट में पूरा अपना एनबल रिपोर्ट बताते थे। पुरे साल का आप, लोगों ने महाराज की व्यास पूजा बुक। जैसे प्रपात की जो व्यास पूजा बुक होती है, उसमे गुरु महाराज की व्यास पूजा ऑफरिंग होती है। तो ईवन नंदगोपाल जीवन ने गोल्डन मीडिया में प्रपात की सारी व्यास पूजा बुक। व्यास पूजा ऑफरिंग जो है उसकी 1 कंपाइलेशन की है। सारी नाइनटी मतलब। 1980, नाइन्टी टी से लेकर आज तक की सारी व्यास पूजा ऑफरिंग गुरु महाराज की 1 बुक में है। नंद गोपाल जीवन प्रो ने उसमें कंपाइल किया आप उस किताब को पढ़ेंगे न तो हर ऑफरिंग में 1 ही चीज है। आपके साल भर की रिपोर्ट कार्ड रिपोर्ट कार्ड है। वो की हमने ये जब आप प्रपात को मिलने। जैसे जैसे आपने देखा होगा फोटो इस बार की जो मैराथन की फेमस फोटो है, प्रपात गुरु महाराज प्रपात को बुक हैंड, हैंडर कर रहे हैं। तो महाराज प्रपात हमेशा पूछते थे, रिपोर्ट पूछते थे। प्रीचिंग रिपोर्ट। तो प्रपात को गुरुमाराज ऑफरिंग इन द फॉर्म ऑफ रिपोर्ट देते थे। की में ये ये किया है। तो सारे साल में पूरा मह बड़ा हैरान हो जाता था। क्योंकि मारा 2 घंटा लगते थे। व्यास्फुजऑफरिंग लिखने में जी बी सी मेल आती रहती थी की लास्ट डेट है व्यासफूज ऑफरिंग की और महज कहते है कि टुडे आल राइट मय व्यासफुज ऑफरिंग मैंने कहा यस महाराज। फिर महाराज बैठा देते थे, डिक्टेशन देना शुरू करते थे, फिर 1 बार मजा नहीं आ रहा, फिर तो 12 बार चेंज करते थे। उसको बट उसमें 1 ही चीज होती थी। रिपोर्टिंग पूरे साल में उन्होंने क्या क्या एक्टिविटी की है प्रपात के लिए हमने ये टेम्पल खोला है, प्रपात हमने आपके लिए ये किया है। फिर ये किया। वो सारी रिपोर्टिंग होती थी जैसे मोदी इस इस साल हमने बड़ी वाली भगवत गीता डेली में इनस्टॉल की है। इस साल हमने प्रपात आपका वो क्वाइन रिलीज किया है। इस इस साल इस साल ये टेंपल ओपनिंग किया तो उसका सारा डीटेल्स बताते थे। इस स हम 23 टेंपल ओपनिंग करने वाले हैं। इस ऑफरिंग में आई थिंक महाराज ने रोहिनी टेम्पल का मेंशन किया था। व्यास पूजा ऑफरिंग में। तो ऐसे वो पूरा अपना रिपोर्ट कार्ड देते थे। तो मैं वही मेडिटेट कर रहा था कि हम लोगों को भी अपना रिपोर्ट कार्ड गुरु महाराज को देना चाहिए। अगर नहीं नहीं मतलब अगर हम कनेक्शन अगर जैसे मैंने स्टार्टिंग में बोला था। अगर हम फील करना चाहते हैं कनेक्शन गुरु महाराज के साथ, तो फिर हम अगर फील करेंगे तो होगा, कनेक्शन? नहीं फील करेंगे तो नहीं होगा। तो अगर हम फील करते हैं तो ये 1 स्टेप है फर्स्ट स्टेप गुरु महराज के साथ अपना कनेक्शन फील करने का कि हमको भी अपना रिपोर्ट कार्ड देना चाहिए। आप लिखिए और ऑल्टर में रख दीजिए ये शायद मैंने मीरा रोड की ऑफरिंग में भी बोला था कि ये 1 अच्छा तरीका है गुरु महाराज के साथ अपना रिलेशन और स्ट्रॉंग करने का। आप आप क्या क्या अच्छा कर रहे हैं क्या क्या गलतियां कर रहे हैं क्या क्या आपको सुधारना है वो सब अपना रिपोर्ट कार्ड गुरु महाराज को आप सब के घर में ऑल्टर होता है जहाँ आपने फोटोज रखी हैं गुरु महाराज की बात की ऑल्टर में तो आप रिपोर्ट कार्ड तो उससे क्या होगा। आप कौंशस रहेंगे सचेत रहेंगे। ठीक है इस बार तो मैं ये ये गलतियां की है नेक्स्ट टाइम नहीं करूंगा फिर अगली बार फिर अगर कांशेस रहेंगे तो इम्प्रूवमेंट का स्कोप है रिलेशन स्ट्रॉंग रहेगा, इम्प्रूवमेंट का स्कोप रहेगा। गुरु महाराज हमेशा कृपा बनाये रखेंगे हमेशा आपको गाइड करते रहेंगे। तो ये फीलिंग है। 1 तरीके की जो अगर आप करेंगे तो रिलेशन स्ट्रोंग बनेगा। जो मैं महाराज ने एग्जाम्पल देके दिखाया करके दिखाया है वो अपना रिपोर्ट कार्ड पर पात को देते थे। तो हमको भी अपना रिपोर्ट कार्ड गुरु महाराज को देना चाहिए। है न? तो मैं फील कर रहा था, सो मैंने आपसे शेयर किया तो आगे मैं आगे देखते है और हम कब तक 9 बजे तक कर सकते हैं या फिर कर सकते 9 बजे तक या फिर ठीक है आप लोगों ने अभी थोड़े दिन पहले बीवी महाराज का और गुरु महाराज का, वो वीडियो देखा होगा। थोड़े दिन पहले आये थे, वो लास्ट विजिट में ही आये थे, लास्ट विजिट में आए थे। और वो जो ब डिंग थी न मतलब हम लोग वहाँ खड़े थे, देखे तो महाराज बीबी कोइन महाराज इतना थैंक्स कर रहे थे गुरु महाराज को, महाराज आपने प्रपात के लिए इतना कुछ किया है। वो थक नहीं रहे थे, थैंक करते करते थकने आपने ये कर दिया, वो कर दिया, यह कर दिया किसी ने नहीं किया इतना जितना आपने किया बोल ही जा रहे थे। बीवी गो महाराज रो रहे थे, इमोशनल हो गए थे, दिसम्बर पर साथ में थे, पूरे इमोशनल हो गए थे और बोले जा रहे थे प्रपात का, ग्लोरिकेशनगुरु महाराज का ग्लोरिफिकेशन कर रहे थे, बोले जा रहे थे और मतलब थैंक करे और महाराज बोल रहे थे। नहीं नहीं ये महाराज के गुरु प्रो पात की कृपा है। प्रपात महाराज ऐसे बार बार उसको काउंटर रिप्लाई कर रहे थे। और फिर वो रोना शुरू कर दिया और महाराज भी रोना शुरू। दोनो मतलब इमोशनल हो गए थे। पूरे मतलब वो मैं इसलिए आप लोगो के साथ शेयर कर रहा था की मतलब अलग ही सीन था। वो बीवी गोन महाराज, गुरु महाराज को इतना थैंक्स कर रहे थे और महाराज प्रपात का स्ट्रगल को याद करते रहते थे और उन्होंने इतना स्ट्रगल किया है। प्रपात ने हमने तो कुछ नहीं किया, हमको तो सब कुछ बना कर मिला है। इस टाइप से बोल बोल के वो दोनों ही मतलब इमोशनल हो गए थे। मैंने कहा चलो आपसे मैं शेयर करना चाह रहा था, वो फोटोज तो बहुत सर्कुलेट हुई थी। वीडियो भी आजकल एकदम ही सोशल मीडिया पर डाल देते हैं। महाराज के रूप में ही बीवी को इन महाराज आये थे मिलने के लिए है महाराज वृंदावन में मैं सबकुछ वृंदावन का ही बता रहा हूँ, मैं कहीं से बाहर का कुछ नहीं बताने वाला और भी बहुत कुछ है बट वृंदावन से कनेक्टेड ही बताऊँगा नहीं नहीं उसके 1 दिन पहले और मैं स्पेशली थैंक्स करना चाहूँगा माताजी को मुझे नाम याद नहीं है नहीं दीदी माताजी माताजी सामने बैठी है, ये सामने है, डिजी ड्रेस बनाती है, महाराज महाराज है अनुराधा माताजी अनुराधा माताजी तो महाराज हमेशा बोल माता जी अगर मैं विंदावन में महाराज की लीलाएँ बता और माताजी का नाम न लो तो भैया ये तो नाइन साह की हो जाएगी गुरु महाराज की ड्रेसिस, इतनी सुन्दर ड्रेस आप जितनी भी ड्रेसेज सुन्दर देखी न अनुरदामाताजीने बनाई है और और बिल्कुल लक्ष्मीनी लेते थे उनके पास लक्ष्मी नहीं है फिर भी वो गुरु महाराज के लिए ड्रेसेस बनाते थे कैसे अपने अपने तरीके से, या तो किसी ने कुछ दे दिया लक्ष्मी, किसी ने कुछ हेल्प कर दी, आरोप महाराज से कभी नहीं लक्ष्मी मांगी मेरे को महाराज बुला के बोलते थे महाराज माता जी आती थी ड्रेस देने, महाराज बड़े प्रेम से थैंक्यू बोलते थे और उनको कुछ नहीं बोलते थे, फिर मेरे को बोलते थे। तुमने माताजी को लक्ष्मी दिया मैंने कहा नहीं है माताजी को ड्रेस का लक्ष्मी 2 इनके पास कुछ नहीं है। तो मैंने कहा ये मारा फिर अदिति माता जी को पता है। और 1 और माताजी थी तुम मुझे याद नहीं आ रहा 1 और माताजी है रामेश्वरी माता जी उनके साथ मैं हमेशा टच में रहता था। तो उनको फिर महाराज हमेशा बोलते थे, तुमने लक्ष्मी दिया मैंने कहा महाराज मैंने दिया है या दे दूंगा। तो मैं ऐसे बोल के हमेशा माता जी को लक्ष्मी देता था मतलब महाराज बहुत कांशस थे हमेशा ध्यान महाराज को पता है कि पैसे हैं नहीं लक्ष्मी है नहीं ये लोग किस तरीके से रह रहे हैं, इन भक्ति कर रहे हैं, शुद्ध भक्ति कर रहे हैं। तो महाराज बहुत ध्यान रखते थे बहुत महाराज कितने ही लोगों को भक्त लोग इधर आते थे वृंदावन में महाराज बोल देते थे इनके पास बिल्कुल लक्ष्मी नहीं है कभी कभी कोई और वो लक्ष्मी देते थे महाराज को डोनेशन में, महाराज तुरंत वापस कर दे। हाथ लगते थे नहीं नहीं नहीं महाराज आपके लिए है ब महाराज नहीं लेते थे। और फिर महाराज उल्टा दे देते थे कि तुम अपने लिए रखो मतलब रशियन डिवोटिज बहुत ही सरेंडर थे गुरु महाराज के लिए बहुत ज्यादा तुम्हें ये अगर आज मैं माताजी को थैंक्स नहीं बोलूंगा तो कैसे चलेगा तेजस्विनी माताजी को भी थैंक्स करना है। वो भी महाराज के लिए इतने सुन्दर सुन्दर बीड बैक बनाते थे। जितने भी आपने वीड बैक देखे हैं उसमें गौरनिताययाप्रउपात की फोटोज हैं। और माता जी को, माता जी को भी थैंक्स कर वो काउंटर बनाती थी, वीड बैक का काउंटर बना देते थे। तो भक्त हमेशा प्रयास करते थे कि किसी न किसी तरीके से गुरु महाराज की सेवा में लगे रहे और महाराज हमेशा एप्रीशिएट करते थे, थैंक्यू करते थे गोविंदा माताजी, सुगा प्रिया माताजी, मदन, मोहिनी माता जी और बहुत सारी माता जी जो भी कुकिंग में थे महाराज उनको हमेशा प्रसाद पालेंगे फिर सबको बुलायेंगे बोलेंगे कॉल गोविन्दा माता जी सबको बुलायेंगे बोलेंगे थैंक यू वेरी मच प्रसाद, व वेरी नाइस महाराज हमेशा सुखा प्रिया माता जी को पता है गोविन्दा माता जी को भी। और बेचारे ये लोग सारा दिन बैठे रहते थे महाराज को प्रसाद खिलाने के लिए। महाराज को प्रसाद खिलाना इतना आसान थोड़ी होता उनका 9 बजे 9 बजे बेचारे रेडी कर देते थे खाते खाते 11 बज जाते थे, फिर प्रसाद लंच प्रसाद खाते खाते 4 बज जाते थे। तो मतलब सारा दिन वो बैठे बड़ा मुश्किल होता था मदन महीने माता जी का तो सब जानते ही हैं। बात बहुत, वो भी बहुत डेडिकेटेड थे, बहुत सेवा किया उन्होंने भी अभी तो नहीं शरीर छोड़ दिया उन्होंने, बट उन्होंने भी बहुत सेवा किया। महाराज की महाराज है न उनको मैंने शायद 1 जोक बोला था महाराज उनका प्रसाद बहुत लाइक करते थे। बात बहुत अच्छा बनाती थी, बहुत अच्छा प्रसाद बनाती थी महाराज बहुत लाइक करते थे। बट हमेशा उनको डांटते थे, महाराज हमेशा डांटते थे, जान के डांटते थे, जान के डाँटते थे कि मतलब अब वो क्या बोलते है। उसको क्या वो 1 वर्ड यूज भूल गया। मैं बहुत फैमिली आई, टी नहीं आये, फैमिली आई टी जो होता है न, वो न आये। क्योंकि फैमिली टी आने से महाराज क्या करते है। जिन जो गुरु महाराज के पास होते है न जो जैसे मैं हो गया धर्मात्मा प्रूफ सब जीतने भी डिवोटीज है उनको महाराज ज्यादा डाटते है। क्योंकि फैमिली टी न आए है न फैमिलारिटीन आए तो फिर अपराध नहीं होते अगर फैमिलारिटी आ जायेंगे तो अपराध हो जायेंगे। तो महाराज हमेशा प्रयास करते थे कि जो लोग बहुत क्लोज सेवा करते है न, तो हमेशा उनको डांटते थे। तो यही था अदरवाइज वो बहुत लाइक करते थे प्रसाद उनके सामने कभी नहीं बोलते थे ही प्रसाद बहुत अच्छा बनाया, बट पीछे से हमेशा बोलते थे। माता जी ने प्रसाद बनाया हमेशा गोविन्दा, माताजी, विशाखा सब लोग लगे रहते थे। और विशाखा माताजी का बड़ा था। 1 में ऑब्जर्व करता था। माता जी किसी को नहीं पूछेंगे। अभी तो हमारे साथ नहीं है। ब मुझे में ऑब्जर्व करता था। तो मुझे बड़ा अजीब सा लगता था बट क्यूंकी वो महाराज के साथ 1 रिलेशन है इतने सालों से न उनके भाइयों का है, न उनका रिलेशन है, माताजी का रिलेशन है। तो वो क्या करेंगे। मुझे महाराज के दर्शन करने जाने मैंने ठीक है महाराज अभी तो बहुत लेट हो गया, नहीं नहीं मुझे जाना है। वो साढ़े 8 बजे, पौने 9 बजे सब महाराज बोलते थे। अब मैं किसी से नहीं लगा। फिर भी मैं कहता है डी टी दर्शन करने महाराज 1 ही चीज बोल के आती थी मुझे डीटीसी के दर्शन करने मैंने माता जी आप लेट हो गए। महाराज नहीं नहीं बोले कौन है आने 2, आने 2, उसको आने 2 महाराज कभी नही मनाने को विशाखा माताजी को कब भी नहीं महाराज। किसी भी मतलब आप समझ लो कि प्रॉपर ड्रेस में भी न हो, न अगर उतरी, न पहनी, प्रॉपर ड्रेसिंग न हो तब भी रेसिंग मोड में भी हो तब भी महाराज बोलते थे, आने 2 मतलब इतना भक्तों के साथ 1 रिलेशन था, कु कुछ लोग माता जी को पता है, सुकाप्रियामाताजी को पता है बहुत ही 1 कनेक्शन था, वो था। तो मैं इसको अगर नहीं बोलूंगा, तो कैसे रहेगा? तो वो चीज था। तो नेक्स्ट आगे बढ़ते हैं मैं आपको 1, अब इसमें से थोड़ा है। तो महाराज का ही बट इस मेरे से कनेक्टेड है, पता नहीं शायद मैंने पहले भी बोला था क्योंकि यह कार्तिक से, वृंदावन से कनेक्टेड था। तो मैंने कहा ये भी शेयर करेंगे, 1 बार क्या हुआ तो हमेशा ओवरवेट था, शुरू से ही ओर बैठ था, तो मैं कोशिश करता था कि थोड़ा वेट कम हो जाए। तो मैं आई थिंक टू थाउजन्ड थर्टीन में जब आया था उसी टाइम 2 साल बाद, तो मैंने सोचा था कि महाराज की सेवा करनी है। तो थोडा भागा दौड़ी बहुत रहती थी। तो मैंने कहा थोडा वेट कम रहेगा, तो थोड़ा भाज भागा दौड़ी आसानी से कर ले। मैंने सोचा था चलो चतुरमास में फास्टिंग करे मैंने चतुर्मास में 4 महीने फास्टिंग करने का प्लान किया। तो अब उसमें क्या हुआ की फास्टिंग फास्टिंग जो होती है, चतुर्मास जुलाई से शुरू हो जाता है, जुलाई से 4 महीने शुरू जा। अब जुलाई और अगस्त, ये जो 2 महीने थे, महाराष्ट है अमेरिका में है महाराज आते जनमास्टीमेंऐसी 4 दिन पहले उसी दिन आते है। 1 कहीं, कई बार तो सीधा ऑल्टर के अन्दर ही लैंड करते हैं, सच बोल रहा हूँ, वो आज जन अष्टमी है। महाराज आयेंगे सुबह 34 बजे और नहा के सीधे होल्टर में, मतलब ऐसे करते थे मैं इसलिए बोलता हूँ की सीधा ऑल्टर में लैंड करते थे। तो ऐसा था कि 2 महीने का था। तो मैं जुलाई में। फिर मैंने कहा महाराज कर लेते, आसानी से हो जाएगा। तो मैंने शुरू कर दिया, अब 2 महीने हो गए, अब उसके बाद तुरंत जन्माष्टमी का फेस्टिवल में बिजी हो गए, जलमास्ीऐसीव्यास पूजा तक बिजी हो गए। फिर महाराज 1 महीना, फिर रशिया चले गए, महाराज पहले 1 महिना रशिया जाते थे, पहले 2 महिना, 1 महिना अमेरिका, 1 महिना रशिया रह के, फिर व्यास पूजा के लिए आते थे, जन्माष्टमी के लिए आते थे और उसके बाद फिर जाते थे रशिया 1 महीना 1 और तो 1 महीना। फिर 3 महीने हो गए, मेरे निकल गए। 3 महीने पता नहीं चला। फिर जी बी सी मीटिंग में चले गए, बॉम्बे तो पंद्रह 20 दिन और निकल गए, अभी इन 4 महीने निकल गए। से साढ़े 3 महीने महाराज का, मेरे ऊपर ज्यादा ध्यान गया, नहीं मेरा टी केजी वेट कम हो गया था। नहीं नहीं ऐसे तालीबान की दर मई में 1 ही टाइम फ्रूट्स ले रहा था। तो मेरा थी गेज वेट कम हो गया। अब महाराज का 32 महीने अमेरिका रशिया 33 महीने तो बाहर ही हो गए। फिर पंद्रह 20 दिन मीटिंग में चले गए। तो इतना भाग दौड़ में महाराज को मेरी तरफ ध्यान ही नहीं गया। 1 दिन सड़क ली बॉम्बे से फ्लाइट में हम जा रहे थे, वापस जा रहे। थे। डेली महाराज, महा बोलते है, हम महाराज को पैकिंग प्रसाद देते है। ट्रैवलिंग में, तो महाराज ने थोड़ा सा प्रसाद लिया, कहते यू फिनिश ट। मैंने कहा महाराज मैं बाद में ले लूंगा। अच्छा यू आर फास्टिंग अभी। धीरे धीरे उनको नजर आने लगा, कहते हैं यू नो इटिंग एनीथिंग नहीं नहीं महाराज, मैं बाद में ले लूंगा। अभी। फिर उसके बाद दिल्ली पहुँच गए, फिर अब महाराज का ध्यान जाने लगा, इसका तो कुछ कुछ गड़बड़ लग रही है, इसको हरे कृष्णा लाइट गयी, क्या? नहीं नहीं कोई बात नहीं, आवाज तो आ रही है। तो महाराज का ध्यान जाने लगा मेरे ऊपर। और फिर उसके बाद जी बी सी, मिडिेतुरंतवृंदावन आना था, तुरंत वृंदावन आना था क्यूँकी जी बी सी मीडिंग जैसे खत्म होती है। और अक्टूबर में नवंबर में तुरंत कार्तिक शुरू हो गया, अभी 1 हफ्ता जी 6 दिन बचे होंगे चतुर मास खत्म होने म पहुँच गया। अभी महाराज सुबह मतलब दिल्ली में थे, और 2 दिन बाद हमको शाम को निकालना था वृंदावन के लिए। तो महाराज बोले महाराज ने अजय को, राम को पूछा क्या दशा कुछ खा नहीं रहा है, क्या? नहीं महाराज यह न चतुर मास कर रहे है, चतुर्मास कर रहे है। अच्छा। तो महाराज बोले की बुलाओ उसको मेरे को बुला लिया, अभी पूछे की भाई तुम कुछ खा नहीं रहे हो। मैं कोशिश कर रहा था की चतुर्मास करने के लिए, पता है वो क्या वो गंभीर हो गये, पूरे एक्स्पेक्ट नहीं किया था की महाराज ऐसा कुछ बोलेंगे, वो इतने गंभीर हो गए और बोले आई कॉन टेक सर्विस फ्रॉम हूम हो स्टार्विंग होल डे मेरको ऐसे बोले कि मैं तुम से सेवा नहीं ले सकता, क्योंकि तुम सारा दिन भूखे हो, इट इज एन ऑफेंस फॉर मी, यह मेरे लिए अपराध है, महाराज बोले कभी हम सोच ही नहीं सकते, जिस लेवल पर महाराज सोचते हैं न, हम बिल्कुल नहीं सोच सकते। महाराज ने सीधा बोला की मतलब इस इन ऑफेंस फॉर मी, ये मेरे लिए अपराध है, मैं नहीं कर सकता। तो महाराज महाराज को लगा है कि अब ये कंटिन्यू करेगा। 45 कहते है कुछ दिन के लिए, मुझे फिर किसी और से सेवा लेनी पड़ेगी। मैंने कहा महाराज नीनी आप, ऐसे मत सोचिए मैं अभी तोड़ देता हूँ, मैंने तुरंत तोड़ फास्टिंग मैंने बोल दिया, मैंने बोल दिया की मैंने कहा महाराज तोड़ दिया, तोड़ दूंगा फास्टिंग। हाराज कहते हैं, ठीक है, ठीक है। और बोल के फिर गेट रेडी फॉर वृंदावन हमें वृंदावन निकालना। अब वृंदावन जा रहे हैं। तो फिर पूछ रहे हैं गाड़ी में महाराज को जब तक चीजें सामने नहीं होती है, यकीन नहीं होता, कब भी नहीं है किसी 1 चीज में नोट बताऊंगा की महाराज कभी विश्वास नहीं करते, जब तक चीज हो ना जाए, पर सामने ही विश्वास नहीं करते। तो बोले की तुमने फास्टिंग तोड़ दी है की नहीं? मैंने कहा महाराज हैं तो हाँ बोला पर फिर भी नहीं विश्वास किया, फिर विदान पहुँचे, फिर अजय को राम से पूछे चेक करो दशावतार कुछ खा रहा है कि नहीं? 23 लोगों से कन्फर्म किया। फिर जब अजयगुलामबोलायस महराज प्रिया ने प्रसाद ले लिया है, कहते हैं तो वो थोड़े से सर्टिस्फाई हुए धर्मात्मा प्रभु को भी पता है, उनको भी कहीं। महाराज को पता लग गया था की प्रभु जी निर्जला फास्टिंग कर रहे हैं। तो महाराज ने तुरंत तुड़वा दिया, कहते नहीं तोड़ो पियो ये सोच रहे थे की अभी कुछ घंटे बचे हैं, सुबह करेंगे। महाराज कहते अब भी पियो पानी मतलब ऐसा है तो 1 यह चीज थी। महाराज बहुत सतर्क रहते हैं सेवा लेने के लिए। न बहुत सावधान रहते हैं किस से सेवा। पहली बार तो वो सेवा लेते नहीं है, किसी की, किसी की सेवा नहीं लेते पर कोशिश करते हैं। जब भी लेना हो तो सावधान रहते थे। तो 1 और चीज पर बहुत सावधान रहते हैं, जब डिवोटिज मसाज करते है तब भी सावधान रहते हैं। सेवा लेने से पहले वो डिवोटिज से पूछते हैं आप क्या सेवा करते हो? आप क्या सेवा करते हो? और जब देखते हैं कि वो बुक मैराथन में मतलब बुक डिस्ट्रीब्यूशन करते हैं उनसे सेवा नहीं लेते। कहते हैं आप लोग सारा दिन प्रपात के लिए इतना मेहनत करके बाहर बुक डिस्ट्रीब्यूशन करने के लिए गए हो। मैं आप से सेवा नहीं ले सकता, सीधा मना बुक डिस्ट्रीब्यूटर को सीधा मना कर देते है। तो फिर सेवा करनी है। भक्त लोग भी झूठ बोलते हैं। महाराज मैं आज गया ही नहीं बुक डिस्ट्रिब्यूशन, भक्त लोग भी कंपनी है, वो सब ऐसे बोलते हैं एकादशी वाले दिन भी क्या होता है, सेवा करनी है न? तो फिर हमें हम में सच बताऊँ न। हमें बहुत टाइम झूठ बोलना पड़ता था सेवा करने के लिए की सेवा चीज हो जाए, सही सही सही ढंग से हो जाए। तो। तो 1 और चीज पर महाराज मना करते थे। और वो है एकादशी। एकादशी में भी जब होते थे न, कुछ लोग मसाज करने आते थे तो महाराज जनरली नहीं लेते थे मसाज एकादशी वाले दिन, फिर भी महाराज, हम लोग पीछे पड़ जाते थे तो महाराज लेते थे, पर कोई 1 चीज पूछते थे की किसी ने निर्जला तो नहीं किया, पूछते थे क्लियरली? जिसने अगर निर्जला किया है उससे सेवा नहीं लेते थे। महाराज कहते यू गो एंड टेक रेस्ट बट, फिर वही भक्त लोग झूठ बोलते हैं। तो फिर वही करते थे। मैंने कहा महाराज नहीं किसी ने किया भी होगा तब भी नहीं करते। तो सेवा, ये महाराज सतर्क है। मतलब कहने का मतलब जो मैं बताना चाह रहा था कि महाराज इस वेरी केयरफुल सेवा, लेते, टाइम सब सेवा लेते थे, पर सावधान रहते थे कि किसी तरीके से, कोई मन से, वाणी से या उनकी कोई एक्टिविटी से, किसी के प्रति कोई अपराध न हो। पर कल भी देवकी नंदन पर वो बता रहे थे कि महाराज ऑलवेज डिफेंसिव है न। ऑफेंसिव तो कभी थे ही नहीं, कभी नहीं थे। आप लोगों ने तो कितना सुना होगा लोकेशन में ऑलवेज डिफेंसिव। तो वही महाराज बहुत सतर्क रहते थे, हमेशा यह भाव रहता था कि तृणादि सुनी चेन वाला और ऑलवेज केयरफुल। तो ये मैं तो ये था मैं वृंदावन से कनेक्टेड था इसलिए मैंने कहा मैं शेयर करूँगा और ठीक है आप भी मैं इतना ही बोलूंगा है पंद्रह मिनट चलो पंद्रह मिनट है महाराज का गुरु महाराज का प्रपात के लिए जो प्रेम है वो तो जग जाहिर है बट आपने शायद पता नहीं मैंने 12 बार बोला शायद किसी ने सुन नहीं सुना रिंग रिंग जो है रिंग का आपने देखा होगा वो रिंग मदन मोहिनी माताजी बनाके देती थी मैं भी वो मुझे अभी उनका नाम लेना चाहिए क्योंकि किसी ने कुछ सेवा की है तो फिर नाम भी लेना चाहिए तो महाराज के लिए वो हमेशा वो रिंग बना के देती थी तो उसमें गुरु प्रउपपात की फोटो होती थी उन्होंने 23 बार बना के दिया और वो हमेशा महाराज को गोल्डन नर्सिंग का वश नर्सिंग में गोल्डन नर्सिंग भवन का उसको क्या बोलेंगे फेस होता था वो महाराज हमेशा वीड बैग में रहते थे हमेशा महाराज के वीडेक में गोल्डन नरसिंह भगवान का फेस रहता था तो वो उन्होंने महाराज को गिफ्ट किया महाराज हमेशा डांटते थे उनको कि मुझे ये गोल्ड वगैरह मत दिया करो बट जब महाराज के प्रति डेडिकेशन थी सरेंडर था तो समभाव उन्होंने दिया था तो वो रिंग का जो था आई थिंक वो बता रहे थे कि महाराज के पास तो कुछ था ही नहीं तो शायद 1 बार देवकीनंदन पर बता रहे थे कि उनकी मदर ने कुछ दिया था सोना तो उन्होंने शायद उसमें उसका शायद चेन और 1 रिंग बनाया था तो उस रिंग में उन्होंने प्रउपात को डाला प्रपात की फोटो डाली थी तो मैं ये बताना चाह रहा था कि आप लोगों ने बहुत बार ग्लोरिफिकेशन सुना होगा कि वो रिंग जो है महाराज हमेशा पहनते थे और जब भी वाशरूम यूज करेंगे उस रिंग को निकाल देते थे आप इतना मतलब कांशस तो होना बहुत डिफिकल्ट होता था बट मतलब प्रपात को डीडी की तरह रखते थे मानते थे गुरु महाराज प्रपात को साक्षात हरित वेन की तरह करते थे तो रिंग हमेशा जब भी वाशम जायेंगे तुरंत रिंग निकाल के साथ में जो डिवोटी होगा उसको दे देंगे 1 बार भी आपने रीसेंट ली मैंने शायद मेसेज डाला था आप लोगों ने सुना था की महाराज की रिंग गुम हो गई महाराज के साथ अजय गौर था उस ने अपने बीड बैग में डाल दिया उसको पता ही नहीं भूल गया हम सबको पूछ रहे हैं कहाँ गई रिंग कहाँ गई किसने लिया भाई साहब जब पंद्रह दिन बाद वीड बैग चेंज करने लगा तो उसको अपने बीड बैग में रिंग मिली महाराज वो भी भूल गया की क्यूंकी कैजुअल होता है न याद नहीं रहता कभी कभी हम चीजें हमारा अपने आप ही हो जाती है हमें ध्यान नहीं रहता और चीज अपने आप हो जाती है तो जल्दी से उसने लिया रिंग और उसने डाल दिया अब भूल गया हम सब ढूंढ रहे हैं और रिंग ने तो अभी अभी आप लोगो ने सुना था तो महाराज हमेशा प्रपात की रिंग को बहुत संभाल के रखते थे और वाशरूम कभी यूज नहीं करते थे जाते थे तो बाहर निकालते थे और इंटेंशन भूलते भी नहीं थे। हम चीजें भूल जाते हैं। बट महाराज इस चीज को कभी नहीं भूलते थे। तो शायद आप लोगों ने सुना होगा पहले और 1 और चीज मैंने पहले भी शेयर की थी और टीशर्ट वाली बुक मैराथन में अपनी डेली में जब बुक मैराथन हुआ था तो उन्होंने क्या किया 1 प्रपात का जो जैकेट होती है बुक मैराथन की जैकेट उन्होंने बनाई थी और पीछे लिख दिया था स् प्रउप द बुक मारा थान। तो हम सब लोग चाह रहे थे कि महाराज इसको महाराज को बुक डिस्ट्रीब्यूशन, अच्छा लगता है। तो सब चाह रहे थे कि महाराज इस जैकेट को पहने और हम उसको 1 फोटो खींचे। तो महाराज के साइज का भी हमने 1 जैकेट बनवाया था। फिर महाराज के वो बी, बी, टी, इंचार्ज, संकीर्तन, इंचार्ज वाले लेके आये महाराज के लिए जैकेट और उन्होंने महाराज को बोला कि महाराज ये जैकेट आपके लिए हम 1 फोटो लेना चाहते हैं, इसके साथ आपका ठीक है। महाराज ने दिखा के महाराज ने देख लिया कि उसके पीछे लिखा हुआ है। प्रपात बुकमारथनमहारजशिल प्रपात बुक मैराथन। तो महाराज बोले मैं इसको नहीं पहन सकता, हम लोग एकदम हो शौक की क्यों क्या हुआ, महाराज क्या हुआ? कहते हैं इस पर प्रपात का नाम लिखा है इसको पहन के मैं वाशरूम नहीं जा सकता। और इसको पहन के ये मेरे पीठ, ये अगर पहनूंगा। तो ये पीठ के पीछे नाम आएगा, इस लेवल तक वो सोचते थे। अगर आप इस जैकेट को पहनोगे तो नाम है न, पीछे पीछे आयेगा। तो मतलब। मैं ऐसे नहीं पहन सकता कि प्रपात का नाम मेरे पीठ के पीछे लिखा हो। तो आप सोचिए वो नाम को भी इतना वैल्यू देते, नाम फोटो को वैल्यू देते। प्रोपर की इंस्ट्रक्शन को तो उनकी वैल्यू तो सबको पता है, क्या उनके लिए थी प्रोप। तो ये चीज मैं बताना चाह रहा था। और यहाँ वृंदावन में इतने वो मतलब डिटरमिन। तो पहले बहुत ही ज्यादा डिटर्मिनेशन। तो उनका इतना स्ट्रांग था। आप लोगों ने देखा ही है अभी लास्ट में। अब मैंने आपको ऑफरिंग में बोला भी था उस लास्ट ऑफरिंग में कि महाराज। हम 1 ही चीज से भी लड़ते थे, महाराज से 1 ही चीज के लिए लड़ते थे। अब तो मैंने लड़ना शुरू कर दिया था उनको हेल्थ को लेकर के महाराज आपको, वील चेयर पर बैठना पड़ेगा नहीं तो क्यूंकि हमें बहुत डर लगता था, हमे हर सेकेंड डर लगता था, है ही एकदम गिर न जाए क्योंकि 3 बार गिर चुके थे तो हमें बहुत डर लगता था हम 1 बार। तो मैं महाराज सोफे में बैठे महाराज के कमरे में डायनिंग टेबल पर बैठा हूँ, कु कुछ महाराज, कुछ ईमेल डिक्टेट कर रहे हैं, मैं कर रहा हूँ। एकदम खड़े चलने लगे। मैंने कहा महाराज ये क्या हम लोग यहाँ बैठे हैं आपके पास, इसलिए बैठे हैं हमने। अभी महाराज के रूप में। हमेशा 1 डिवोटी महाराज के पास बैठा रहता था, उसका कोई कोई सेवा नहीं होती थी। सिर्फ महाराज को बैठना है। देखना अगर महाराज उठते हैं उनको सिर्फ 2 टाइम हेल्प चाहिए होती थी चेयर से उठने में और बैठने में बैठने में तो नहीं। ज्यादा हेल्प चाहिए तो उठने में हेल्प चाहिए होती थी उस टाइम के लिए, इतनी सी चीज के लिए कोई ड्यूटी बैठे रहते थे। और वॉक करते टाइम ध्यान रखना क्योंकि महाराज नॉर्मल वॉक करेंगे और सरल ली ऐसे गिर जायेंगे पता ही नहीं चलता था। तो हम तो बहुत ही मतलब, पर क्या होता था कि जनरली डिवोटीज आसपास होते थे, तो एकदम पकड़ लेते थे, हमेशा पकड़ लेते थे, पर समय तो ये चीज हमें पता थी, हम इस पर बहुत ध्यान देते थे, अनफॉर्चुनेटली वो 3 इंसीडेंट हो गए, वो तीनों इंसीडेंट में महाराज के साथ डिवोटी थे, महाराज के साथ डियुटी थे। महाराज ने भेज दिया उनको जाओ तुम ये कर लो जाओ। और खुद वैसी सामने बैठा हूँ और महाराज उठने का प्रयास कर रहे। मैंने महाराज को बोला मैंने यह क्या तरीका है। अभी मैं यही पर हूँ, आप मुझे बोल देते तो मैं हेल्प कर देता। अगर गिर जाते तो फिर डिवोटीज बोलते है की इतने भक्त है गुरु महाराज के साथ क्या बात है। तो ये लोग डिवुडिस का भी कंसर रहता है, सही कंसर रहता है। पर अभी क्या करे तो वह चीज था कि महाराज वील चेयर के लिए हम बहुत रिक्वेस्ट करते थे। इतने पर इतने ज्यादा डिटरमिन थे न कि मुझे वील चेयर टच नहीं करनी, मैं नहीं टच करूँगा विल चेयर। ये उनका बड़ा। मैंने कहा महाराज जयपताका महाराज वील चेयर पर है और पूरी दुनिया में प्रचार कर रहे हैं, क्या फर्क पड़ता है, कहते हैं नहीं इस वेरी डिटरमिन, इतने मतलब उनका 1 प्लस पॉइंट, डिटरमिनेशन की वजह से उन्होंने प्रपात को इतना सर्व कर पाया। बहुत स्ट्रोंग डेटिनेशन है, बहुत ऐसे रशिया में प्रीचिंग करने जाते थे जहाँ पर इतना हालत खराब थी। चाइना में गये, पाकिस्तान गए, डेटा में बहुत डिटरमिनेशन था महाराज के अन्दर सरपत के लिए करना, तो कैसे कैसे। वो रशिया में पहले क्या था, वो जो प्रॉब्लम था बेसमेंट में प्रिंट है, सी आई ए बेसमेंट में बुक्स प्रिंट करते थे, मतलब तब भी महाराज डरे नहीं डिटरमिनेशन था, पूरा उस उस चीज को लेकर न तो वही चीज में डिटरमिनेशन पर मैं महाराज का कर रहा था की वील चेयर पर, तो यहाँ पर वृंदावन में क्या करते हैं, पूरा डिटरमिनेशन रहता है की मुझे सारा दिन वो तो मैंने पहले भी ऑफरिंग बोला है की महाराज दोपहर को सोते नहीं थे, सारा दिन कोई न कोई सेवा में अभी थोड़ा। हमने पीछे पड़ पड़ के डॉक्टर ने सोना शुरू कराया था, दोपहर को 1 घंटा आधा घंटा पर नहीं सोते थे, अभी क्या थक जाते, सुबह 3 बजे से सेवा कर रहे हैं, थक जाते है। अभी अब दिन में क्या है न थक जाते, फिर बोलते हैं सुबह से बोलेंगे मंगल आरती में जब जिले के जाते है न जो साथ में डिवोटी होता है। आपको शायद बोला होगा कभी जो भी महाराज को मंगल से लेके जाये। टुडे आम फीलिंग वेरी टायर्ड मॉर्निंग में बोलेंगे 4 बजे सारा दिन बोलते रहेंगे। ऐसा टेक ेस्ट नहीं, बट वो सेकेंड एक्टिविटी करेंगे, फिर थर्ड एक्टिविटी करेंगे, बैक टू बैक एक्टिविटी करेंगे, बोलते जायेंगे। आम। मैं थका हुआ हूँ, आई वन टू टेक रेस्ट पर करेंगे नहीं। और फिर इसको खत्म करने का 1 तरीका क्या करते थे, वो नहाते रहते थे, नहाते थे 1 बार जैसे उनको लगता था कि म फीलिंग टायर्ड 1 शावर लेने के लिए चले जाते थे, फिर 23 घंटे बाद फीलिंग टायर शौर लेने के लिए चले जाते थे, बट रेस्ट नहीं करते थे तो ये मतलब मुझे देख के बड़ा अजीब सा लगता था। फिर यहाँ पे बैक टू बैक डिवोटिज बाहर खड़े रहते थे। महाराज बोलते हैं आई डोंट हैव टाइम फॉर रेस्ट, ई डोंट हैव टाइम फॉर, मसाज डोंट हैव टाइम फॉर। एक्सरसाइज अभी महाराज को डॉक्टर ने बोल के रखा हुआ था कि ये सब बहुत जरुरी है महाराज अगर मैं ये नहीं करूंगा तो फिर मेरे को चलने में दिक्कत होगी तो ये सब चीजें डिटरमिनेशन था, स्ट्रॉंग था इसलिए प्रपात की सेवा कर पाए तो हमें भी, मैं भी आप लोगों से यही प्रार्थना करूंगा। हाथ जोड़ के की गुरु महाराज की सेवा में लगे रहिये न आपस में 1 दूसरे को सपोर्ट करते रहिये है और मेरे लिए भी प्रार्थना कीजिये कि मैं भी गुरु महाराज को अच्छी तरह सर्व कर पाऊँ हरे कृष्ण दन।
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