Morning Bhagavatam Class | ISKCON Kurukshetra | Gopal Krishna Goswami

In this segment of the morning Bhagavatam class at ISKCON Kurukshetra, Gopal Krishna Goswami and senior devotees address several practical and philosophical issues that arise in a modern devotional community. The discussion begins with a devotee’s concern about giving equal respect to all sadhus and counselors, emphasizing that true respect must be universal and not limited to those with whom one has a personal connection. The teachers then highlight the importance of systematic scriptural study, announcing the registration of a new Bhakti‑Shastra Examination Centre and the establishment of education colleges to support bhakti education. They celebrate recent large‑scale devotional events and world‑record achievements, linking them to the inspiration of the guru and the divine. A brief mythological narrative recounts the origin of the Rath‑Yatra, describing the spiritual ‘war’ between the forces of love and materialism and how the devotees of Vrindavan won Krishna’s heart. Finally, devotees pose practical questions about ISKCON rituals (e.g., the correct performance of “dagonugabacti” and other procedural matters), receiving reassurance that sincere devotion and guru‑blessing are the essential guides. Throughout, the tone remains reverent, instructional, and encouraging, aiming to foster inclusive respect, disciplined study, and heartfelt devotion among all participants.
Chapters
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हरे राम राम राम राम राम रामा रहा हरे हरे हरे हरे
हरे राम राम राम राम हरे हरे
हरे राम राम हा राम हरेराम
हरे रामा
हरे कृष्णा हरे कृष्णा
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हरे रामा हरे रामा रामा रामा
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b आतमअव्यहविद्वान पुरुष जानते हैं। वा वही साधु भक्तों में प्रयुक्त मुक्ति का दरवाजा अपाप्रतमखुला हुआ। अनुवाद और तात् द्वारा प्रत्येक विद्वान व्यक्ति अच्छी तरह जानता है कि पदार्थ के लिए आ सकती है। आत्म से बड़ा बंधन है किन्तु वही अशक्ति यदि स्वरूप भक्तों के प्रति हो जाए तो मुख्वाद्वार खुल जाता है। कृपया में बात दुराएंगे। प्रत्येक विद्वान व्यक्ति अच्छी तरह जानता है कि पदार्थ के लिए अशक्ति ही आत्मा का बंधन सबसे बड़ा बंधन है, किन्तु वही अशक्ति यदि के प्रति तो मोक्ष का है। यहाँ पर यह स्पष्ट कहा गया है किसी वस्तु के लिए आशक्ति होना बस जीवन में बंधन का कारण है। किसी अन्य के प्रति हो तो मोक्ष का दरवाजा खुल जाता है। आशक्ति की हत्या नहीं की जा सकती। इसे केवल स्थांतरित करना होता है। भौतिक वस्तुओं के लिए आशक्ति को चेतना कहते हैं और भगवान श्री कृष्ण या उनके भक्तों के लिए शक्ति को कृष्ण चेतना कहते हैं। अतः चेतना आशक्ति की अभियक्ति का पटल है। यहां यह स्पष्ट उल्लेख है कि जब हम अपनी भौतिक चेतना को शुद्ध करके कृष्ण चेतना में परिवर्तित कर लेते हैं तो हमें मोक्ष प्राप्त होता है। इस कथन के बावजूद की आशक्ति का प्रत्योग किया जाए। जीवात्मा के लिए संभव नहीं कि वह इच्छा वीन हो। सके जीवन में स्वभावता किसी न किसी वस्तु से अशक्त होने का झुकाव होता है। हम देखते हैं कि यदि किसी के पास कोई शक्ति की वस्तु नहीं होती, यदि उनको संतान नहीं होती तो वह अपनी अशक्ति, कुत्तों और बिलियों में स्थांतरित कर देता है। इससे सूचि होता है कि आशक्ति के झुकाव को रोका नहीं जा सकता। अत इसे शेष कार्य के लिए उपयोग में लाना चाहिए। भौतिक वस्तु के प्रति हमारी आसक्ति होने से हमारी बद अवस्था चलती रहती है। किन्तु यदि इसी अशक्ति को श्री भगवान में या उनके भक्तों में लगा दिया जाए तो वह मुख्स का स्रोत बन जाती है। यहां स्तुति की गई है कि आसक्ति को स्वरूपसिद्ध भक्तों या साधुओं में स्थांतरित कर दिया जाए। पर साधु है कौन साधु को सामान्य व्यक्ति नहीं होता, जो वीर वस्त्र पहने हो या लंबी दाढ़ी रखे हो। श्रमित भगवत गीता में बताया गया है कि साधु वह दरता से निरंतर भक्तियों में लगा रहता है। भले वह भक्तियों के नियमों का दता से पालन न करता हो, किन्तु यदि परमपुरुष अवान अड़िकसताहैसाधु जाता है, धु समझा जाता। साधु समंतव्यसाधुरसमतव तियों साधु का भ्नियोंताहैका पक्का होता है की गयी है है स्कार चाहता है, ध्यान है। उसे चाहिए की साधु या भक्त भगवान की चितन है, रुष्टि की है। मार साधु सर्व मात्र मात्र की संगति से जा की जा। समाती। महात्मा शब्द साधु का परयिपरयावाचित है। कहा जाता है कि महात्मा की सेवा है। द्वारम् आहुल अर्थात का राज मार्ग है। महज सेवा द्वारं द्वार है। वादियों सेवा का प्रभाव होता है। यदि किसी से कोई किसी निरे भोतिक अंदर भूख सेवा करता है, कहा ऐसे व्यिसंगदीसेनकका दरवाजा खुल जाता है। यह किसी सिद्धांत की पुष्टि की गई के प्रति, आशक्ति भगवत्सेवा के प्रति शक है। कहा क्यों यकिदिहामईसाधुी संगति करता है तो उसका प्रणाम यह होगा कि वह शिक्षा देगा कि किस प्रकार श्री भगवान का भक्त पूजक और निष्ठावान दास बना जाए। साधु के यही वरदान है। यदि हम साधु की संगति करना चाहें तो हमें यह उम्मीद नहीं रखनी चाहिए कि वह हमें बताएगा कि हम अपनी भौतिक स्थिति किस प्रकार सुधारें। अपतु हमें यह शिक्षा देगा कि भौतिक आकर्षण रूप कल मस की गांठ कैसे काटी जाए और भक्ति में हम कैसे ऊपर उठें। साधु की शंक्ति का यही फल है। भगवान श्री कपिल सरप्रथम बताते हैं कि मुक्ति का माल ऐसे ही शंक्ति से प्रारंभ होता है।
my jaan mndehami sri raha krishna कृष्णा
का गौरांगी राधे ब्रंदावलेश्वरी मृषबनसेरीपरणमनी हरी मरछापदरुहस्या पा सिंधु बचापतिदान
क्या
लल्ला शिवासार भक्त कृष्णा
सो लोग का उच्चारण कौन कर रहा है? कौन भगवान सो उन माल का सो
राहुल रात
भगवान ज्ञान को दूर करना चाहे? ज्ञान सुना रहा है। m माता का नाम था तो इस अध्याय के आरंभ में ही उनके बेटे से कुछ हुती ने कहा कि तुम मेरे अध्यान हो, तुम मेरी अज्ञानता को दूर कर सकते हो। उसी को पता था क्या मेरा बेटा भगवान का अवसर है। वो जो ज्ञान देगा उसके द्वारा अज्ञानता दूर होगे। ध्यान से देखा जाए। वो हसी भी भगवान की मां है, उसे ज्ञान नहीं सकी। पर भगवान अपने भक्तों को ही ऐसी पोजिशन स्थिति में डालते हैं कि वो प्रश्न पूछें और उनके भक्त जवाब दें और ज्ञान को देख। भगोकीतमेहै क्वेश्चन आंसर मेरे खयाल से जब आप कॉलेज में पढ़े थे, भाई कूल में किताबें पढ़ी हुई केशन के आंसर सो बाग बात गीता में आप देखोगे प्रशन सर है पूरे गीदम अर्जुन क्या कर रहे हैं से प्रश्न पूछ रहे हैं और प्रश्न के उसे ला कर रहे हैं। श्रीमत भगवत भक्त है। वो प्र इस अध्याय में बहुत ही प्रश्न पूछ रही है। प्रश्न पूछना चाहिए किसके द्वारा, प्रामाणिक प्रतिनिधि के द्वारा? यह नहीं कि हम किसी को भी पकड़े और हमें ज्ञान प्राप्त करना चाहिए। इसके माध्यम से हमार के शुभत द्वारा। तो इस हजार में ही खा के ये पूछा कि कैसे हमारे ज्ञानता हम सबको प्यार करना चाहिए? ज्ञान को दूर करे बड़े भगत और उनके पास विज्ञान में था और बड़े है। 24 घंटे जुड़े रहे सो माँ बहू से हम में हम अकेले था है, आज बांग्लादेश में है, कल था नुकसान का बंग्लादेश में गए। उन्होंने कहा कि लोग सोचते हैं कि हम बड़े बुद्धिमान हैं यानी है जाना। उन्होंने कहा हम बोलते है। ganमारजनहथाज्ञान ता में अक्सर हम पलते हैं, ज्ञान में भी गाने या वो किसी सबभगजोंकी बकरी में जुड़े हैं। सबके बड़े ऊँचे संस्कार है, सबके अच्छे संस्कार है, जुड़ते हैं सो। you are my transient la सो मेरे आध्यात्म ने से हो में आप ध्यानेश हो और आप में आध्यात्मिक न हो और आप गांजा को दूर कर सके। तो फिर उन्होंने कहा आप मुझे ज्ञान दीजिए, हमें ज्ञान की भूख होनी चाहिए। यह नहीं ज्ञान को दूर का प्रयास नहीं करे। हमें ये सब ना चाहिए। हम जन्म लेते हैं। ज्ञान में। a, e से क्या मिलता है? पी का बीज पके बीज है, उसका अर्थ क्या है? अर्थ ये है ये ज्ञान की भक्ति योग सबसे महत्वपूर्ण ज्ञान है। गुलने बाद प्राप्त होता है सो और क्या ज्ञान है जिसके द्वारा आप लक्ष्य को प्राप्त करता हो। सो जो बुद्धिमान व्यक्ति है, भाग्यशाली व्यक्ति है, उसे ज्ञान प्राप्त होता है। साल के दवारा सो भगवान के पीरा हा आपका जो प्रश्न है, बहुत ही महत्वपूर्ण है। और प्रेशर की वजह से पूरा समाज लाभ उठाया सो। मान लो आप आपसे कोई पूछ रहा है भक्ति में थोड़ा ज्ञान 2 तो आप खुश हो जाते है। आप बोलो हरे कृष्ण की क्या महिमा है? आप खुश हो जाते। उसी प्रकार कपिल भगवान भी खुश हो गए। ये प्रश्न पूछे पूरा विश्वास था कि इन प्रश्नों का उत्तर हम सब को प्राप्त करना। आज सारे विश्व में अनेक महा मिला है, पर बहुत कम स्थान है जहाँ की आपको ज्ञान प्राप्त हो ा है। हमारी रुचि भी नहीं। तो अभी माता का भाव पकड़ के आपने बड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न पूछा, सो भाग मैंने प्रश्न पूछे। पहले उन्होने क्या पूछा? जिस व्यक्ति का अंत नेवला उसे क्या करना चाह और क्या कहा? आपको सम्बन्ध में न। तो बुद्धिमान व्यक्ति कौन है? बुद्धिमान व्यक्ति वो है, जीवन के क समझता है? वो व्यक्ति वो हैं जो कि जीवन के लक्षण को प्राप्त करना चाहता है। तो यहाँ भगवान क्या कह रहे हैं? कि कह रहे हैं? हर बुद्धिमान व्यक्ति जो है वो जानता है कि आ सकती। अगर हम वादिकविमेंरखेग उसका क्या हो, गा और गहराई से जन्म बंधन में फंस जाएंगे। और अगर हमारा भाग्य हो, यह हमारी आशक्ति, आत्मजन व्यक्तियों के प्रति हो। क्या होगा, क्या होगा? तो यहाँ कहा जा रहा है? यह बुद्धिमान व्यक्ति जानता है कि हमें वो आ सकती है, अनुकूल करनी चाहिए जिसके द्वारा हमारा आकर्षण भगवान, उन्हें बक्सु के प्रति उत्पन ओवर बढ़े। बहुत रखेंगे और आपका जीवन सफल नहीं माना जायेगा। तो दे भगवान बड़े प्रसन्न हुए सुना, क्योंकि उनकी माता की इच्छा है। वो ज्ञान प्राप्त करें जिसके द्वारा लक्ष प्राप्त हो सो सकती। इस डेफिनिट आर शक्ति रहेगी। किसी न किसी के परे के इंग्लिश में मैन सोशल कोई जी नहीं सकता। सो किसी न किसी के प्रति क्या आसक्ति रखना है? बलिक समाज में क्या देखते हो? प्रॉपर 1 बुरे तारे में क्या कह रहे हैं जो आ सकती है? ये गान के भक्त और भगवान की आसक्ति रखते हैं के पति वह क्या होता है? और गाई प्रभा जी के में कुछ उदाहरण दे रहे। भारत में शायद कुछ भी नहीं है। अगर हमारे पास कोई बहुत से गा सकती, आप का बौस गा सकती। सो कुछ रखना पश्चिम देशों में खासकर वो कौन बन गया भारत में भी ज्यादा करना वह कहीं लोग अमेर कुत्ते को लेकर कुछ लेकर घुमा रहे हैं
तो
उनको बोलता हूँ मैं आप वृंदावन में ले रहे हो। कम से कम आज की भगवान के बोल। तो आप देखते हो। अगर आप आपके पास कोई बहुत जगह आ सकती नहीं है। हम किसी तर जाते हैं। खुशी बिलियो, सो खुशी और बिल क्यों रखे रखा और विजय रखा। क्या है fashion very con, आप अपना लाइफ इंसुरेंस खरीदने जाते है। s your cadena पना भी मदद हो, प्रसाद में कुर्सी डिस्काउंट नहीं सो इतना आकर्शन सो हमें यह आकर्शन बढ़ाना चाह इसके पति भगवान। तो इस इस अध्याय में देव ने कहा आपको साधु संघ में रहना चाहिए। सालुसंघमेंरहोगे भी हो जाएगा सो साल में। और शालू संघ के इस अध्याय में महत्वपूर्ण लोग 5 कि। इनका मूल उद्देश्य यह है कि शालू कई बार हमारा भौतिक मन कहता क्या फायदा साल में संघ में रहेंगे और घर सो तो सबसे महतवपूरण सेवा है। क्या? क क्या फायदा था सबसे महत्वपूर्ण map, cेwlpanचmusbse, swajas, सो जैसे मा बाबू ने सबसे पहले साल का बना लिया।
माँ
साल की संगत में, शुभ की संगत में 1 पलक मे भी रहोगे आपका जीवन। कई उदाहरण हैं कि बाबा जी यात्रा कर रहे थे, पर किसी व्यक्ति को मिले केवल 5 मिनट में ज्यादा से यादा भक्ती का बीज गले में साबित हो गया। जो भरे भगती का बीज स्थापित होता है में वे क्या करते हैं? ये जो हृदय के बीच प्राप्त होता है वो कैसे है, वो प्राप्त होता है बरसालू और गंद शालू के द्वारा। क चर्चा कर दे तो गले की चर्चा इसलिए कर दे जब लोगों को यह पुस्तक मिलती हैं तो क्या होता है? मगर यानि मान आया मुझाताहैऔरफिर आगे जल्द है। सो गलत बा रे हो। कई बार हमारे भक्त, कई बार
इन
गंधों के मेजर को नहीं समझ पाते। वो बुक माइथोलोजी का बनाया। पर ये जो गंद है, इनमें हैं भगवान की वाणी। भगवान की वाणी में कोई पुलसारहतीहैऔरकोई सोचे वो मुर्ख है भगवान की वाणी में किसी प्रकार का दोषी पिचल गीता पढ़ते हो। आपको लगता है गीता 2345 बार पढ़ लिया है, पढते पढते हो, उसका ताजा बना हो। आज है नाम करते हो। आपको कैसे लगता है नाम हम करते हैं। इतने साल सो आप अगर शुद्ध साधु की में आओगे तो आपको क्या मिलेगा? असली ज्ञान क्या है? या is most important इसकी महिमा का, और फिर कई लोग इस ज्ञान से प्रभावित होकर ही शुरू कर दे। तो ये सब शुरू होता है। पापाजी अकेले गए थे अमेरिका के 40 में प्रापाजीनेएभगोदमकर से बेच दिया था जो प्रपा प्रकाशित किया था। 3 भागों में, 3 भागों में तयार सोचा, now, i hv मसाला पश्चिम देश के लोगो को आकर्षित करने गये। सो वे अकेले गए थे और में बग रशिया गए थे 4 दिन के लिए और वह 4 दिन में 1 ऐसा पक्का भग बनाया कि उनके पास दिन निकलने के बाद 4 करते गए। बाजार सो कहने का सार यह है कि अगर आपको शुरभकीसगनमिले या गंज मिले सो सबसे पहले है, इसलिए भगवान का कैसे और जो व्यक्ति मेरा पर 4 करता है उसे क्या पर मेरे नाम है। a hot import a m e seva seva
nam he
this most important se matvapulचाहe। किसी में हो सुनी सेंगर देव का गुणा सोसंगरदेवभगवान क्यों प्रगट हुए हैं प्रगट हुए हैं की सुरक्षा करने के लिए उन्होंने देखा कि
ये
के हो सके उनके भग्यबदीबड़ासोपूछा ने क्या पूछा कि तुम्हारे भगवान किधर है जाएगा? उनके पिता ने पूछा था तुमने क्या सीखा स्कूल में बताओ? jan is so ये सबसे महत्वपूर्ण है खा सके कलयुग में कल से राज कलयुग में 2 ही दोष है जहाँ देखो आप पर 1 गुण है में वो क्या है क्या है आपको है द्वारा मुक्ति सो। इस कलयुग में भगवान ने अलार्मिक को पोज बना। उदाहरण के लिए किसी अध्याय में सबसे पहले आज प्राप्ति का स्वागत भगवान का चिंतन में लोगों के पास ऐसी योग्यता थी सी हजार साल हो
बड़े बड़े
बड़े बड़े हजारों पं आ जाएगा किसी को मसल लो वो पूछेंगे हमें क्या मिलेगा? और ये बिना किसी धन की उम्मीद रखे हुए यज्ञ करते थे और अग्नि को भी पैदा करते थे। मंजूर तो ये था से में यग्य वो ही लाभ आये। तो आप आज मूर्ति की सेवा भगवान के मन में हम आपको नोटिस देंगे मन में आना है सो आप को हजार डॉलर लाना पड़ेगा
वोह लाभ
भगवान ने बहुत बड़ी छूट दी है कोई वस्तु दुकान प्राप्त हो रही है ा वो डिस्काउंट ने 1 लाख का माल 1 पैसे में डिस्काउंट हुआ ना तो उसी प्रकार का डिस्काउंट पर बना
ये
जो कठिन मार्ग से वो लाभ आपको प्राप्त हो सकता है कैसे में है सो वेरी हैवी डिस्काउंट में इसका बुरा लाभ उठाना चाह। हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि माया कैसा तेज प्रभाव है कि हम इसमें नहीं जुड़ सकते। ब भगवान बड़े क्या कहता है
माँ
बाबू की ऐसी कृपा है जाओ हिमालय पर्वत में वहाँ पर हमें क्या करना है ये सखी बढ़ानी है आशकी रहेगी। कई बार कहते हैं हमारी बड़ी आ सकती है। बच्चों के सो ये नेचुरल है हम ये नहीं कहते कि माँ को इसी प्रकार की आसक्ति नहीं होनी चाहिए। आज शक्ती का क्या रे। धार्मिक शक्ति का अर्थ है। आप बच्चे हैं अपने बच्चों को धार्मिक ज्ञान दे रहे हो। अपने को मान जीवन प्राप्त हुआ रिश्ते रिश्ते हैं रिश्ते रखो पर उनका लक्ष्य क्या होना चाहिए। आज हम क्या देखते हैं हम देखते हैं कि धनी खानदान के हैं। अपने बच्चों को अमेरिका भेजेंगे पढाई के लिए ज्ञान की 1 पर बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने का अगर आप मादा पैसा भरना चाहते हो क्या करना को ऐसा ज्ञान 2 की जन्म से मुक्त हो जाए सो आ सकती हमें नहीं कहते है की मत रखो हमें नहीं कहते हैं जंगल बजाके रहो की सीमा आपके शहर में रहना है बच्चों के साथ रहना है पर उनको जान में जान आ सकती जो है हम बदल सकते हैं या अगर हो और रीडिंग कर सो बिना शाखा के आप आ सकती यह आ सकती है प्रसाद की तरफ आ सकती है। प्रसाद के मायामें फैसला होता है। पीर पीड़ा की दुकाने बनाते और सारे पैसा हो। वो पीड़ा मिले सो हमें ध्यान में आज तक बढ़ानी है। आज तक कृष्णा प्रसाद के रा यार भी आवश्यक है। जो व्यक्ति मुझे पर बिना खाये क्या खा रहा है, केवल पाप खा रहा है, हमारे हम खाएंगे तो केवल दूसरी शक्ति क्या होती जा? हा नाम, नाम ऊंची कैसे बढ़ाए रूची बढ़ाओगे। हाई नाम के उचाल उचारन करोगे सो रूची बढ़ेगी आप नहीं करोगे, आपकी रूची नहीं बढ़ेगी तो पैला आकर्षण होना चाहिए, होना चाहिए। शास्त्र के अध्ययन में भी रूचि लेने। ज आप में से कितने भक्त हो सभा में जो कम से कम थोड़ी देर ही रोज पढ़ते हैं। क्या प्यार करना जाए, रोज पढ़ें, रोज पड़ोगे तो क्या होगा? आगे आना भगवान देखेंगे पापा, ये सब बड़ी हो। वाल ंडरस्टandमीलेt मी अंदर। यहाँ यह व्यक्ति है जो मुझे संभालना चाहता, क्यूंकी आप भगवान को समझना चाहते हो? इसके लिए आप ग्रंथों को पढ़ते हो। और भगवान क्या कहते है? मुझे इसे बुद्धि दे।
देने।
2 जिसके द्वारा मुझे सब भगवान देखते है, ग्रंथो को पढ़ रहे हैं तो बड़े प्रसन होते है। आजकल मैं देख रहा हूँ कि जब से कोविद आया है, रीडिंग बढ़ गई है, भक्त होंगे। जब से कोविद आया है, बहुत से ऑनलाइन कोर्सेज हैं। और ये जो भक्त हैं, ये रीडिंग क्लास बनाते हैं? शाम को रोल 5, सो, 20, 25 औरतों का ग्रुप है। जो रोज नियमित रूप से भागवत पढ़ते हैं। सो ये अच्छी बात है कि हमारी रूची बढ़ रही है शास्त्र में और शास्त्र ध्यान में बढ़ेगी। यह 1 रूचि है। तो में में और क्या और कुछ है? किसी ने बाबा से पूछा। उन्होंने कहा कि 2 प्रकार के गम देखते हैं। 1 जोकी who is better the one was tning prshad ne was giving iseg? पापा पर चोरी का खाओ कई लोग हैं, वहाँ खुद आगे में खाएं, नीचे खाओ। जो केवल सो हमारा प्रयास होना चाहिए कि हम साल सो आगे हदी का प्रशन हम लोग के लिए है। तो वह माता संभव ही नहीं कि वो ज्ञान में आये, उन्हों पर पूजा। इसलिए हम भाग है। हम हमें ज्ञान में, हमें अंदर कायम है। हमें क्या आवश्यक है? बक्सों की सो। इस अध्याय में ने पूछा कैसे ज्ञान हो? सो? बेटे ने जवाब दिया साल में साल हो, ये साल नही की। हम ज्ञान को अब हम नहीं रहे। वह क्या कहते हैं? क्या ये जागो चाय का हमें विचार करना है कि मंदिर बन रहा है। सब भक्तों का बाहर प्रयास है, यह मंदिर बन रहा है, मंदिर बनते हैं के प्रयास है को अपने लिए कुछ नहीं चाहिए, अपने लिए के नीचे सो जाएं। the was सी भगवान क्या किया, क्या किया, मंदर बनाये। more advansed मुझे धन नहीं चाहिए की धन से तुम का मंदर बनाओ, मोहन का मंदर बनाया। सो जो भक्त है। क्या कह रहा है सो मंदिर का निर्माण? इस नेसेसरी वाई मंदिर पर होते हैं। सब लोग जाते दर्शन ले, अपने जीवन को सुधार दे। जैसे कि आजकल आप देख रहे हो आशवारमं्रमेंरोन 30, 40 हजार लोग आते हैं। इस आगे देखोगे मंदर श्याम की, बता की भक्तियों का ज्ञान चाहिए। इस मंदर में जाओ और मंदर में जाओगे नाम की महिमा सुनोगे की महिमा सुनोगे साधु जी है, भगवान की खुशी है। क्या बड़े मंदर मनाये का मन है। इसलिए यह बड़े बड़े कमरों में हम बड़े कमरे बन रहे हैं, दिया जायेगा बन रहे हैं लोग आयेंगे, देखेंगे और ज्ञान पड़ेगा। अभी भी आप देखते हैं कि लोग आते हैं, बसें भी आ रही है। आपको क्या करना, जाए उनका स्वागत करो, चाहे उनकी कुछ भी मात भाषा हो। अगर आज जोड़कर उसका स्वागत करोगे, उनका भार मान, भगवान प्रजनन हो। क्या कोई आपके घर में आप के स्थान में आ रहे है? आप को क्या करना, क्या करना, जा का स्वागत करो। जो करने के लिए कोई कीमत नहीं है, कोई कीमत है र की इच्छा। हर व्यक्ति जो इस के केंद्र में आये, उसे पूरा भंडारा देना चाहिए। ग सबको सबसे बेहतर है। अगर आप अदिती को प्रशाद 2 प्रशाद भी नहीं दे सकते और पानी पीने के पानी भी नहीं दे सकते। पानी भी बहुत महंगा हो गया। मैं उन्हें देख रहा था, मुझे देख रहा था देने में ठंडा पानी बेचते हैं। अब 2 रुपए ग्लास हो गया। मुझे याद है 1 समय था 2 पैसे मिल था, पानी भी नहीं ले सकते। बहुत महंगा हो गया। वे कम से कम चढाई तो बैठने के लिए उमीदे शब्दों से आएगा। मीठे शब्दों से स्वागत करना कठिन है, सरल है हां, मेरे खयाल से सबसे कठिन है। यह कठिन इसलिए है हम सबके हृदय में बहुत भारी है। और ये हक है। हम क्या दोस्त है माँ बाबू ने किस विषय पर बल दिया ये हम सब जानते हैं। का चयन पर कठिनाई आती है इसके पालन में में क्या करना giv प्रयास कीजिये मंदिर को जल्द से जल्द बनाने के लिए और गोल हेल्प 222 भगवान गंगा से योग करते हैं तो स्वयं प्रयास करते हैं। भगवान के आदेश का पालन करने है। सो हमें अनुकूल करना चाहिए। सम्भव है अगर हम प्रयास है। भगवान कह रहे हैं बुधिमान व्यक्ति है, उसे आ सकती गेम चार्ट बहुत गाली है, शराबी है। rt ndrnationtapevl give pete नॉलेज क्या करें पंजाब भयाना के हर कोने में है भयाना बंजा कोई मना नहीं था। 1 चलनी हर्श मेहनत कीजिये नाम जाब के लिए महिना की महिमा का बचा और प्रयास करो। हमारी बोधि गाय, यह बहुत आवश्यक है। ये जो बासिक सुविधाएं हैं,
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भक्तों में भी हम देखते हैं। उनके बाद लेटेस मोबाइल वाणी मतलब नो हजार डौलर गया, गुड सो ऐसे हथियार को अपने साथ रखोगे वान गया। जल्दी ही इसका क्या लाभ है। सब देखोगे इसमें आपका डेटा मिला जाता है। टाइम भी ऐसा बोल जा। उन्होंने बताया है की ज्यादा आकर इतना महंगा स्मार्टफोन खरीदोगे उतने, ज्यादा खरजना है वो स्मार्फोन खुदा कम तो क्या होता है कमजोर होने लग जाता है। क्योंकि आपका आकर्षण किसी बोले सो
वो
बताए सिंपल में मतलब सादा जीवन सादा जीवन का 1 अर्थ है साधा स्मार्टफोन साल। इस पर आप भक्तों के लिए सबसे खतरनाक हथियार है। आपका स्मार्टफोन कई भगत सुपर स्मार्टफोन को चाहिए 2000 का स्मार्टफोन जितना महंगा स्मार्टफोन रखोगे उतना, ज्यादा खतरा है। अब धार्मिक जीवन को और जितना सादा स्मार्टफोन रखोगे उतना। ऐसान होगा। भक्ति मान में आगे बढने। यहां कहा जा रहा है आ सकती जो कि बोली भलिया के प्रति है, वह क्या करना है, ट्रांसफर करना है। आप आ सकती को इनविजिबल रोक नहीं सके श सर स्वागत करो सब लोग अपना नाम वांजले भगवान अपने घर में और भक्त बनाओ। please so thank you my dasatanugod। क्रिएट
महाराज का बहुत बहुत धन्यवाद है महाराज ने हमारे को अपनी इंस्पायर किया है और महाराज की जानकारी के लिए महाराज यहाँ पर प्रात 9 बजे से लेकर रात के 9 बजे तक प्रसाद भी और ठंडा पानी भी दिया जाता
है
सुबह 9 बजे सुजाता है प्रसाद वितरण और रात्रि के 9 बजे तक
चलता है
और पूरा भर पेट दोनो में देते है जितना खाए है भर पेट के लिए बोला होगा 2 बार खाए 3 बार खाए कोई बात नहीं खिचड़ी देते हैं, दलिया देते हैं, हलवा देते हैं और कई बार सब्जी पूरी भी देते हैं, खेर भी देते हैं रोटी दाल भी देते हैं
अलग अलग
अलग अलग अलग अलग अलग 1 दिन म, कभी खेलोगी तो कभी दलिया होगा, कभी खिचड़ी होगी, कभी चलता है। फेस्टिवल के दिन मारा सब
कुछ
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भी स्वागत साथ चलता रहता है। बहुत रहते स्वागत कर यात्री आते उनको वेलकम करते हैं। महाराज दिन वेलकम चलता रहता है। डायरी मेंटेन नहीं हो रही महाराज ये एड हो जायेगा। ये शानावाज कुछ पूछना चाहती
राज जैसे
आपने सबसे महत्वपूर्ण है जो चैतन्य महापर लेकिन हम देखते हैं साधुओं के साथ हम रहते हैं लेकिन उनके साथ फिर मनमुटाव हो जाते हैं। त तो उसी साधु संघ में फिर हम उतना उसका फायदा नहीं ले पाते। राज तो साधु संघ में हम अच्छे से कैसे वो साधु संग ले पाए हैं। इसके क्या
ara, nb, hota, ha, mol, im, riteroe अथॉरिटी हम सबके और सब की सेवा करना चाहते को बोला तो हम ऐसे बोल आमिर को सबक लेंगे कि टेबल पर पूछा गाय के कारण
ह
हरे कृष्ण महाराज आपने बहुत सुन्दर प्रवचन में आपने बताया किस प्रकार जो गोस्वामी मेशा 1 सादा जीवन और वैरागय के जीवन पालन करते थे, इतना सब होने के बावजूद भी तो हम कैसे यह अपने जीवन में हमें यह वैराग के पद पर आगे बढ़ सकते है। क्योंकि हमें कभी कबार भय होता है इस पर आगे बढ़ते हैं। तो समाज का और समाज का और पेरेंट्स का अगर सबका भय रहता है। तो हम बराके के पद पर आगे बढने से डरते हैं।
बेटा शराबी बना पंजाब हरियाणा में poison
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a a a a a a संघ
जब हम साधु संग में भक्ति के नियमों का पालन कर रहे होते हैं तो उस टाइम पे हमारी जो पुरानी भौतिक आसकती वो उसकी वजह से हमारा मन बहुत परेशान करता है। उस टाइम पर हम कैसे डील करें
in different from profes बी स्पीक बॉगवपरा से दवाई ठीक अगर आप दवाई लो, मेरे पुराने आ सकती है, पुराने पुराने आ सकते हो, कंट्रोल कर सके पॉलिटि वीनी वे पॉजिटिव पॉजिटिव ऑल्डsलॉगमेंथा हमें मालीवान तरफ है, उसको बदलना है
हर किशन गुरु महाराज महाराज मेरा प्रश्न है कि ग्रंथ का अध्ययन करते समय या तो नींद आ जाती है या तो फिर कुछ और दिमाग में चलता रहता है, कुछ और सोचते रहते हैं। तो महाराज कैसे करें कि अच्छे से ग्रंथ का अध्ययन कर, पाए रात को
जल्दी सो जाओ, 9 बजे सोने जाओ और टी वो हमें नींद आ जाती है, क्यूँ आपको प्रसाद खाते नींद आती, नींद आ जाती है। तो इसलिए रूप कहते हैं भाग भगवान के जो नाम हैं चीनी, जैसे मीट वह लीला है, वो भी मीडिया है, वहां की जो ग्रुप है, वो भी मीडिया में अज्ञानता की बीमारी है। मतलब कि काम विद्या बीमारी है। हम आगे नहीं हो। जब के समय आपको नींद आ जाती है, ग्लास में नींद आ जाती है और शाम के समय कभी नहीं नहीं आती सो। हमें सुधार करना है, सुधार कैसे करेंगे समस्या मिल सकती है।
गुरु महाराज आपके चरणों में कोटि कोटि प्रणाम, साधु संघ के बारे में गुण माज जितना सुंदर आपने प्रवचन दिया। 1 प्रश्न यह आ रहा है गुरु महाराज की, अब साधु संघ की कमी तो नहीं है। हर मंदिर में बहुत सारे साधु हैं ब बहुत सारे कौंसलर्स भी हो गए हैं। तो कभी कभी ऐसी मानसिकता आती है कि जिन साधु के साथ मैं जुड़ा हुआ हूं या जिन कांसिलर के साथ मैं जुड़ा हुआ, मैं उनका सम्मान तो करता हूँ, उनको प्रणाम करता हूं और उनको समय भी देता हूं लेकिन उसी मंदिर में या सेंटर में और भी साधु है, और भी भक्त हैं उनको शायद मैं उतना सम्मान नहीं दे पाता हूं। तो ऐसी मानसिकता आ जाती है। तो इससे कैसा कैसे बचा जाए सोचो
कि केवल जो व्यक्ति मुझे संग ले रहा है, न नहीं ले रहा है, उसी को बाकी निकम है, कोई योग्यता नहीं है आगे हमें सबको आदर से देखना चाहिए, सबको आदर देना चाहिए और सब पर दादा बना, सब से मिठा सबको आदर दोगे वहापे गुल बढेंगे अगर हम देखते हैं इसे गुन उनमें कोई अवगुण नहीं है तो आप आगे नहीं बढ़ पाओगे वांसडवांसपेशली मेटली गॉड आध्यानिकजीवनमें आगे बढ़ने के लिए आपको कम से कम भगवान की कृपा चाहिए और जिनके मन में हे उनके हृदय में आंका है उनके हिले में की कृपा prapt नहीं होगी। i okay thank you last cesnougoinr।
महाराज धन्यवाद महाराज जी आपने इतना अच्छा प्रवचन दिया और महाराज आपने शास्त्रों के अध्ययन पर भी बहुत जोर दिया और आपने बताया कि सारे स्टडी ग्रुप चल रहे हैं तो महाराज जी आपके आशीर्वाद से जो हमारे स्कॉन कुरु क्षेत्र मंदिर है वो भी अभी 1 भक्त शास्त्री एग्जामनेशन सेंटर के रूप में रजिस्टर हो चुका है और यहां पर बहुत सारे भक्त जो आपके सामने ब भक्ति शास्त्री कोर्स भी कर रहे हैं कई सारे सारे भक्त शास्त्री कोर्स स्टूडेंट्स हाथ उठाए भक्ति शास्त्री, rit, नो, mad, the hundred, ऑलमोस्ट, हंडरेड, फिफटी, dibites, doing, भक्ति शास्त्री, भक्ति शास्त्र, भक्ति, भक्ति, वरना तो महाराज
एजुकेशन कॉलेज,
एजुकेशन कॉलेज भी जी महाराज आपके आशीर्वाद तो जल्द शीघ्र बन जाएगा जी।
g n o old world
स, हम श्रीमान सुंदर गोपाल प्रभु का स्वागत करना चाहेंगे। सुंदर गोपाल पर आप सभी जानते हैं, सभी भक्त परिचित भी होंगे। विश्व खात है अपने प्रचार के लिए अभी ओरिजनल सेक्रेटरी असिस्टेंट आरेस जोनल सिप्रवाइजर का रोल कर रहे हैं ईस्ट यूपी में और गाजियाबाद में, और नाना प्रकार कई नाना भारत के नाना हिस्सों में वह प्रचार कर रहे हैं। और बड़े फेमस बहुत बड़े विशाल उद्गार उत्स होल्ड करते हैं, जिसमें 12 हजार युद्ध, 1 साथ पार्टिसिपेट करते हैं, स्वयं पंद्रह हजार महाराज करीब, पंद्रह हजार युद्ध और प्रभुजी आईआईटी डेली के मनाए हैं। और his pricing in many many plas और हुजी फेस्टिवल किया है वर्ल्ड रिकॉर्ड वर्ल्ड बुक गिनिसविकवर्ल्ड रिकॉर्ड में भी आ चुका है तो उसके लिए यों को हम बधाई देते हैं।
harywold सारे रिकॉर्ड्स जो हैं वो गुरु महाराज के हैं, जाय महाराज के इंस्पेरेशन से ही संपन्न हो सकता है। गुरु क्षेत्र बहुत ही महत्त्वपूर्ण स्थान है, हमारे गडी संप्रदाय के लिए भी और वैसे भी सनातन संस्कृति के लिए भी।
दोनों
ये 3 चीजें बहुत महत्वपूर्ण। तो यह भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश दिया और दूसरा इम्पॉर्टेंट है कि यहां पर रथयात्रा कार्यक्रम का शुरुआत यहीं से हुआ है। तो यह से 2 युद्ध यहां पर हुए हैं, 1 तो कौरव और पांडव के बीच में और 1 प्रेम का युद्ध हुआ युद्ध वंशी और ब्रजवासियों के बीच में कौन कृष्ण को लेके जाएगा
यहां से,
तो ब्रजवासी जीत गए उन्होंने कृष्ण को अपने हृदय रूपी रथ पर बिठा कर यहाँ से वृंदावन लेकर गये। हरे क्रष्ण थैंक यू सो मच
मने मदद कर होसबके बन जाएगा।
this question is from on behave some devotes mit beside to ask marad so marad wy riding proper at boks and other places with the come to no of o ati so we want to know? what is dagonugabacti? and how it is to be practice in iscon? how does a debute has to do something special? what is it please through some like?
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should definitely ga in devotion, we got ingainavotialse busy, just be in wall thank you thank you।
तो महाराज जी, अभी आप सभी भक्तों को पता होगा महाराज जी के आशीर्वाद से और महाराज जी की कृपा से, दिल्ली में भगवान लक्ष्मी नरसिंह देव प्रहलाद महाराज के साथ प्रकट हुए हैं। हरि महाराज ने स्वयं नरसिंह भगवान को आमंत्रित किया और भगवान वहां प्रकट हुए हैं। उनका विषेक हुआ और भगवान की प्राण। प्रतिष्ठा में अर्पित हुए जो भोग था उसमें से महा प्रसाद सभी भक्तों के लिए यहां पर लाया गया हरी कई भाग जानी पाये थे तो महाराज जी तो डिस्ट्रीब्यूट नेकर में महाराज के ब्याव पे सभी भक्तों के लिए महा प्रसाद बाहर बढेगा साथ में अन्य भक्तों के लिए भी सभी भक्तों के लिए कुछ प्रसाद भी है स्नैक्स प्रसाद है आप सभी ग्रहण करे।
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