My Servant | Ajay Gauranga Prabhu Remembering HH Gopal Krishna Goswami Maharaj

In this devotional remembrance video, Ajay Gauranga Prabhu narrates his personal journey of serving His Holiness Gopal Krishna Goswami Maharaj. He recounts how, upon arriving in the ashram, he was unaware of the Maharaj’s stature but soon felt a strong desire to serve. Ajay describes his early duties—cleaning, washing dishes, and providing massages—while learning the importance of disciplined chanting (the Hare Krishna mantra) and avoiding distractions. He shares several vivid anecdotes: a vehicle accident involving a truck, an incident of an ant infestation in the Maharaj’s bathroom, and the Maharaj’s strict response to unnecessary chanting during phone calls. The talk also covers the Maharaj’s meticulous health regimen, regular medical check‑ups, and his resilience despite injuries. Ajay reflects on the Maharaj’s character—his vigilance against wrongdoing, humility, and dedication to service—and expresses deep gratitude for the guidance received. The narrative concludes with a heartfelt thank‑you to the guru, the disciple community, and the broader ISKCON family for their support.
Chapters
जैसे गुरु महाराज सबको आकर्षित करते हैं। मैं जब इस काल में आया था मैं जानता भी नहीं था की कौन है ये गोपाल कृष्ण महाराज है कोई स्कान बड़े महाराज है जैसे मैं देखा न मेरा प्रबल इच्छा हो गया की मैं इनका सेवा करूँ बस थोड़े दिन के बाद ही जैसे मैं मंदिर रहता था धीरे धीरे धीरे भक्तों के टच में आया आप से जुड़ा आउट फिर ट्रेनिंग में जैसे आया और ट्रेनिंग होते होते जो है जैसे फ़ोन आता था वहाँ महाराज के किचन के लिए कि हाँ वहाँ पर जरूरत है भक्तों का रूम सफाई बर्तन धोना तो मैं आगे रहता था जाता था वहाँ पर दयानिधि प्रभु थे और महाराज का मसाज भी करता था मसाज 1 दिन दोपहर में करते करते गुरमार पूछे नाम वगैरह सब बोले अच्छा यह काम करो तुम रो जाया करो तुम्हें फिर डेली जाना शुरू हो गया डेली मसाज फिर कुछ टाइम के बाद ऐसा आया कि कुछ हो गया सेक्रेटरी सर्वे तो उनको जाना पड़ा। तो फिर सेवा हमें मिला और सुन्दर बाल बहु हमें और दसवतारों को सेवा में लगाये हम प्रो जी का बहुत आभार व्यक्त करना चाहते हैं और जैसे जैसे हम सेवा में लगे उसके बाद गुरु महाराज लेना नहीं चाहते थे। देखिये पहले किसी भी भक्त को महाराज अपने आस पास नहीं देखना चाहते थे कोई इधर टाइम पास कर रहा हो सबको भगवान के श्रम में लगा हुआ देखना चाहते थे महाराज अपने लिए भी ज्यादा भक्त को नहीं चाहते थे इसलिए बोलते थे मैं मैनेज कर लूंगा लेकिन फिर भी भक्तों की जरूरत थी। तो ऐसे करते करते करते करते फिर घुल मिल गया और मैं 1 चीज सोचा था की हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे डेली मतलब नाम उच्चारण करता रहूंगा। ऐसे करते करते तो महाराज को डिस्टर्ब होता था, 1 दिन डांट दिए बोले क्या तुम बोलते रहते हो, डिस्टर्व होता है तो इसको समझना बहुत मुश्किल था शुरुआत में जैसे जैसे हम आगे बढ़े तब हमें पता चला 1 बार ऐसे हम जा रहे थे गाड़ी में कविचन्द्र महाराज के साथ में कोई फ़ोन कॉल आया महाराज बात कर रहे हैं और कवि चंद महाराज जोर से हरे कृष्ण हरे कृष्ण महाराज डांट दिए गुरु महाराज चंद महाराज महाराज आप देखते नहीं है मैं बात कर रह हूँ फ़ोन पर आप जोर से कृष्णा बोल रहे है तो हमे किसी को डिस्टर्ब नहीं होना चाहिए हमारी वजह से थोड़ा ध्यान रखे महाराज अपराध के प्रति बहुत ही सतर्क रहते हैं किसी से भी क कोई अपराध न हो जाए बहुत सतर्क रहते हैं बहुत ही ज्यादा मनसा वाचा कर्मणा हमेशा 1 बार ऐसे आ रहे थे वॉकिंग करके तो गार्ड लेडीज गायब थी अपना जहाँ पुलिस चौकी है मंदिर के अन्दर तो उसके पास गन था बड़ा तो आते आते महाराज वहाँ रुक गए बोले क्या है ये तो बोले ये गन है बंदूक बोले अच्छा गोलियां हैं इसमें अच्छा फिर महाराज बोले चलाना आता है तो हम लोगो को हँसी आ गया जब महाराज आ गए महाराज बोले सुनो वो गार्ड को पीडा दे देना बुरा मान जाएगी, नहीं तो तो उसको पेरा देकर के आये। 1 बार क्या हुआ, हम भरतपुर से आ रहे थे, भरतपुर से आ रहे थे और भरतपुर के सारी जयपुर से आ रहे थे, भरतपुर के फ्लावर पर इधर से जा रहे थे, उधर से। 1 बाइक वाला जो है टेक ओवर करने का प्रयास कर रहा था। 1 ट्रक को 3 लड़के सवार थे, उसके ऊपर, एकदम महाराज की गाड़ी सौ की स्पीड पर कर देख लिया की हम भी सारा की स्लो कर दीजिये को गाड़ी रोक ही दिए। अब वो ट्रक को ट्रक ओवर करने के चक्कर में महाराज की गाडी के सामने आ गया, बिल्कुल गाड़ी रुकी हुई थी, टकरा गया, तीनों लड़के गिर गए और ट्रक वाला आगे निकल गया। महाराज बोले अरे देखो देखो, कुछ हुआ तो नहीं तो मैं मुझे बहुत गुस्सा उठाता, नहीं महाराज कुछ हुआ नहीं, अभी इसको नीचे जाके सबक सिखाता हूँ। तो महाराज बोले अरे अरे उसको नहीं गाड़ी को कुछ हुआ तो नहीं देखो मेरा तो बोले मेरा मोटर को कुछ तो हुआ नहीं देख महाराज ठीक है गुरु 1 बार क्या हुआ महाराज देख रहे हैं आपके इस पे कितने कितना बड़ा बड़ा बल है, इसे छोटा किरा है, हमें दिखाई नहीं देगा। गुरु महराज विंदावन चले थे, बैठे थे या एक्सप्रेस जैसे ये टाइम देखने के लिए जैसे घर ऐसे किए होंगे। तो महाराज देखिये किरा है बोले अजय देखो है, में ऐसा करके देख रहा हूँ, महाराज दिखाई नहीं दे रहा है, इधर बोले देखो ध्यान से देखो तो देखा। तो फिर पकड़ के तो मैं लगा बाहर फेंकना बोला बाहर मत फेंकना बोला ठीक गाड़ी में रख लेते हैं। महाराज तो इतना मत 1 बार सुबह सुबह पूजा कर रहे थे। तो क्या हुआ? गुरू महज जब भी जाते हैं न बातरूम में वो जो वे उसमे थोड़ी भी चिट्टी देख लेंगे न तो महाराज पानी नहीं गिराते हैं, उसमे बोले नहीं नहीं वो मर जाएगी, अपराध लग जाएगा। तो महाराज आवाज लगाए, महाराज बातरूम में गए देखो चिट्टी हटा। 2 थोड़ा तुम्हारा को हाथ धुला कर बाहर ले के बैठा दिया गया। बहुत सारा चिट्टी था, बाल लिया पानी से, पूरा क वाइपर से धो दिया, मरेगा भी नहीं ऐसे पानी के सहारे वो निकाल जाएगा। तो थोड़ी देर के बाद तुरंत आके बैठ गया, बोला चीटी हटा दिया है। और क्या किया मैंने पानी डाल के वाइपर मार दिया। बोला अरे बदमाश सारा चीटी मर जायेगा उसको बचाओ बचाओ बचाओ छोटी छोटी चीज को ऐसे जैसे नंद गोपाल पुर बता रहे थे कि महाराज के जाने से वो जो तूफ़ान है वो हो गया। द्वारका में 1 बार क्या हुआ कानपुर में रत यात्रा, वगैरह फिक्स है, देवकीनंदन जो डेट ले लिए तो उसको महाराज को आना ही आना है। कानपुर में तो गुरुमाराज गए, 2 दिन से बारिश लगातार बारिश। उस दिन भी बारिश हो रही थी जिस दिन रत यात्रा थी एकदम इतना बारिश, लेकिन सब सब बोल रहे थे। महाराज डेट चेंज कर देंगे आप यही रस्ट कीजिये। तो महाराज चले गए, बोले नहीं रथ यात्रा तो आज ही निकालेंगे जैसे जैसे भी हो महाराज हम भी गए तो बारिश हो रही थी, जैसे गए रूम में मीटिंग हुआ की आप रत यात्रा लेकर जाओ, बस महाराज को देखते देखते। थोड़ी देर में बादल साफ हो गया, धूप निकल आया एकदम पूरा रथ यात्रा, हरि नाम संकीर्तन निकालने लग गया। तो जैसे प्रहुजीकासुना मुझे याद आ गया। मैं फिर यहाँ लिख लिया, पंच तत्व का अभिषेक 2019 में हो रहा था, मेरा इच्छा था पंच तत्व का भी अभिषेक करूँ। लेकिन मैंने सोचा वहाँ पर तो परोपाडिसापलकोभी जाने नहीं देते हैं। और मैं कौन हूँ। तो में बस पूजा करके बाहर निकल आया। जैसे बाहर आया तो बोले होंगे या किसी को बुलाओ। अजय गोराम को बुलाया। तो गुर महाजी बोले अच्छा तुम तैयार होकर आ जाओ मेरे साथ पंत अभिषेक में चलना तो गुरमा जब मैं सुना तो एकदम रोंगटे खड़े हो गए मेरे की गुरु माज मुझे वहाँ लेकर जाना चाहते हैं। तो 1 बार ऐसे वृंदावन में पूजा कर रहा था, पूजा करते करते मैं सोच रहा था अभी गुरु माज वॉक पर चले जायेंगे और मेरा लेट हो जाता है तो मैं जा भी नहीं कर पाता हूँ तो मैं परिक्रमा निकल जाऊँगा और डेली परिक्रमा करता हूँ। मैं उधर भी जब भी रहता हूँ तो गुरबाज उसी टाइम बोलते हैं। ऐसे उठा कर बोले अच्छा तुम परिक्रमा पर जाओगे। अभी मैं उलाज गुणवा पर जाऊँगा तो वहाँ पर कोई थे बोले इसको परिकरमा बहुत पसंद है। तो गुरु महज ब्रह्मानंद पहु का नाम सुने न ब्रह्मानंद पहु गर्ग मुनि प्रभु इन लोगों को भी यही नहीं बहुत जितने पर सबको गुरु महराज बहुत हेल्प करते है मनसा वाचा कर्मणा जैसे भी हो व्यक्तिगत रूप से जाते हैं, मिलते हैं, बात करते हैं, नहीं भी जा पाते हैं तो बात करते हैं। फिर प्रसाद वगैरह का पूरा में जैसे आप सब को पता है। तो ब्रह्मानंद पहु जब जिस दिन शरीर गिरे थे इस सा गुरु महाराज के साथ में पहु जी थे। कृष्ण पर बहु गुलाटी जी के यहाँ मारा गुरु महज का होने वाला था। गुरु महराज गए अन्दर मार लिए और महाराज बोले की नर्सिंग आरती गाते रहना तो हम नर्सिंग आरती गा रहे थे। धर्मात्मा फ़ोन की धरमात्मा बोले की हमें बहुत जरूरी बात करना, महाराज से तो देखिये अभी बहुत इमर्जेंसी है आप थोड़ा नर्सिंग आरती गाते रहिये। तो वो बोले क्या हुआ मैं भी बताऊंगा नहीं थोड़ी देर के बाद बताऊंगा क्योंकि महाराज के बारे में बताऊँगा की एम आर आई के लिए गए तो घबरा जायेंगे सब। और वो महाराज हमेशा डॉक्टर के पास जाते रहते थे, बॉडी चेकअप के लिए कुछ न कुछ हालाँकि अपने आप को फिट रखने के लिए महाराज बहुत प्रयास किए। जैसे भी हो सके हमेशा नहीं जाते थे फिर भी कोई न किसी किसी न किसी डॉक्टर से अपॉइंटमेंट ले करके जाते थे। और महाराज आप सब को बताओ की महाराज का आंख बिल्कुल परफेक्ट था, उनको चश्मी का भी जरुरत नहीं था। लेकिन गुरु महाराज इतने सालों से चश्मा पहने ही आ रहे थे। तो इसलिए महाराज पहने हुए थे। तो उस दिन नर्सिंग आरती गा कर के। फिर महाराज आए तो बात करा दिए। धर्मात्मा प्रो बर्मन पर के बारे में बताएं। फिर ब्रह्मानंद पुर नेक्स्ट डे जो है नेक्स्ट डे सुबह सुबह पंद्रह जून 2015, 15 जून 2015 को। उस दिन फिर रथयात्रा शिफ्ट जगना शिफ्ट होने वाले थे, वहाँ पर गुर्गा में तो ब्रह्मानंद पुर शरीर छोड़ दिए थे। उसी दिन 3 साढ़े 3 बजे तो गुरु वहाँ जाने के वहाँ गए, वहाँ गए और कृष्ण बलराम के अंदर गए। रात में ऑल्टर बंद हो चूका था, तुलसी लिए चरण का माला लिए आये। फिर परवान के पास गए, वहाँ पर बैठे सब भक्त लोग कीर्तन कर रहे थे, माला अर्पण किए बैठे रहे, फिर गुरु उनको लेकर जा रहे थे। जब दिन हुआ तो महाराज को देख रहा था। ऐसे जैसे महाराज को लेकर हम लोग परिक्रमा कर रहे थे। न रोड पे कितना तेज गरम था, रोड जल रहा था। इसी गर्मी में गुरु महाराज, वेदव्यास महाराज जा रहे थे, रास्ते में बैठे थे तो गाड़ी से जा रहे थे। फिर गाड़ी मंगवाल अंदर बैठा दिए, पैदल चलने लगे, महाराज को बोले महाराज चप्पल ले लीजिये, चप्पल बोले चप्पल नहीं पहनूंगा। फिर इतना धूप था कि छाता छाता हम रखे महाराज को ऊपर तो महाराज बोले नहीं नहीं मैं कुछ नहीं पहनूंगा, नहीं लूँगा क्यूंकी ब्रह्मानंद ने कुछ नहीं लिया है, ब्रमानंद के ऊपर कुछ नहीं है तो मैं भी नहीं लूंगा। इतना गरम धूप भगवान महाराज कितना सम्मान दे रहे हैं। अब सोचिए यहाँ तक की किसी का कॉल भी अगर आ जाता है न किसी का कॉल लेटे हुए है तो महाराज तुरंत उठ के बैठ जाते हैं और फिर बात करते हैं किसी का भी कॉल ऐसा नहीं है। तो महाराज हमेशा बॉडी से कितना मतलब तपस्या करते हैं। आप सब देख चुके हैं कितना मैं तो बहुत लिस्ट में लिस्ट जान, बूझ कर नहीं देख रहा हूँ। में तो ऐसे जो याद रहा वैसे बता रहा हूँ। बहू जी का खासी आ गया है। तो तो सच में गुरु महाराज जो है। अभी जो आरती देखे हैं सपने में गुरु महराज कर रहे है, निंद में वो गौरनेतयकाआर्थी कर रहे है क्यूँ की मैं देखा पहले गौरांग महापुरो को, नित्य को फटाक से भक्ति सन महाराज परपज, फिर इधर करके तो में समझ गया गौरनितयकाआर्थि महाराज हमेशा करते हैं गौरनितयबहुतपरफेक्ट अभी मैं लास्ट वाली बात रहा हूँ, जब देहरा दून में हम जब गए थे, महाराज जाते ही रूम में जाते ही रूम में इतने खुश थे, महाराज बैठ गए और महाराज बोलते हैं मैं बहुत स्ट्रोंग फील कर रहा हूँ यहाँ पर मुझे किसी की हेल्प की जरुरत नहीं है, मैं दादा सदरपुर बोले नहीं महाराज हम आपके साथ जायेंगे, महाराज से बोले वो चेहरा अभी भी वो सीन याद है। महाराज बोले इतने खुश थे यहाँ के में बहुत स्ट्रोंग फील कर रहा हूँ गए फिर महाराज उसके बाद 1 दिन मीटिंग की, फिर दूसरे दिन सुबह सुबह जैसे महाराज अन्दर गये, योगी नाथ था बाहर, हालांकि महाराज आवाज लगाते है, उस दिन आवाज नहीं लगाये और में तैयार होकर आ गया जैसे नहा के योगनाथ बाहर आया मैं महाराज का हाथ पकड़ के बाहर आया, फिर महाराज को कपड़ा पहना कर के और योगनाथ फ़ोटो खींचने लगा पीछे से चोट जो लगी थी तो मैंने बोला क्या कर रहा है तो बोले महाराज गिर गए मैंने उनको योगनाथ की तरफ देखा तो गुरु मा सोचा इसको डाँटेगा महाराज बोले नहीं नहीं इसका कोई गलती नहीं है मेरा दोस्त है तो दर्द होने लगा धीरे धीरे फिर महाराज को तैयार होकर गैत्री किए, गौरनीतयका पूजा किए, नरसिंह देव का पूजा किए, जगनाथ बलदे सुविधा का पूजा किया और महाराज को उठा रहा था तो दर्द होने लगा तो फिर महाराज को यहाँ से पकड़ के उठा लेट गए महाराज और लेट के फिर दफ्तर बुलाया दर्द हो रही थी उसी दर्द के दौरान ही वो जो लेटर है लास्ट लेटर जो लिखे हैं उसी दर्द के दौरान मैं सोच रहा था महाराज क्यूँ इतना मैं गुरु महाराज आप रेस्ट कर लीजिये, बाद में लिखवा लीजियेगा लेटर उसी दर्द के दौरान ही महाराज जो है लेटर लिखवाए पूरा और फिर महाराज नर्सिंग आरती गाने के लिए बोले हम उग्र बिगड गा रहे थे तो गुरु महराज ऐसा था महाराज फिर रेस्ट कर लिए, इंजेक्शन भी दिए, टेबलेट भी दिए, राधा से बात किए, कृष्ण पाप को बुलाये फिर डिवोटी थे वहाँ के महाराज के टच में, वहाँ पर कोई गवर्नमेंट ऑफिसर है तो उस बाल पहले बात हो रही थी, वो मुझे लेकर कहीं दर्शन कराने जा रहे थे वही दुराचार के पास पास में सस धरा भी है। तो जैसे थोड़ा आगे गया, गुरु महाज का फ़ोन आया, वो लास्ट कॉल था गुरु महाज बोले अजय गोरांग वापस आ जाओ, मैं हॉस्पिटल जाऊँगा। तो मैं उसी टाइम आया देखे गुर महज रेस्ट कर रहे हैं, बस बोला ठीक है रेस्ट कर रहे हैं फिर रेस्ट करने देते महाराज फिर थोड़ी देर के बाद उठ के स्ट्रोंग फिल के थोड़ा प्रसाद भी लिया और फिर हॉस्पिटल के लिए गए थे ये है है बहुत कुछ है फिर बहुत लम्बा हो जाएगा जो भी गलती चलती आप सब से हुआ है दर्शन कराते है आते समय माफ कर दीजिएगा। हमारा यह प्रयास था कि महाराज का हेल्थ सही हो और महाराज के ऊपर ज्यादा प्रेशर न बने किसी भी चीज का हम अथक प्रयास किए, मनसा वाचा करना, कोई भी गलती हुई होगी तो प्लीज माफ कर दीजिएगा। हरी कृष्णा इस्कॉन दिल्ली और गोपाल कृष्ण गोसा में गुरु महाराज शिष्य समूह की ओर से विशेषतया शीला गुरुदेव के असिस्टेंट सर्वे टीम को राजय गौरांग प्रभु सहित सबके लिए 1 विशेष थैंक यू।
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