श्रीपाद माधवेंद्र पुरी का जीवन || NVCC Pune || 27 Feb 2018 || Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Goswāmī Maharaja

The video records a devotional lecture delivered by Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Goswāmī Maharaja at NVCC Pune on 27 February 2018, focusing on the life and spiritual significance of Śrīpād Mādhavendra Puri. The speaker begins by explaining the theological principle that great saints appear on earth to establish dharma, citing examples such as Lord Krishna and his divine associates. He then narrates the biography of Śrīpād Mādhavendra Puri, highlighting his intense devotion, ascetic practices, and the miraculous events surrounding his life, including a vivid dream in which a child‑like deity instructed him to retrieve a hidden Gopal (Krishna) idol. The lecture describes the subsequent search, excavation, and restoration of the ancient idol, detailing the communal effort, the rituals of abhisheka, bathing, and offering of cow‑derived products, and the annual Anākūṭ festival that celebrates this discovery. Historical context is provided about the concealment of idols during periods of Muslim rule and their relocation to places like Jaipur. The speaker emphasizes core teachings of self‑less service (seva), non‑attachment, and the centrality of cow protection in devotional life. He also recounts various anecdotes illustrating the devotion of disciples, the collective contributions of devotees, and the spiritual benefits of sincere bhakti. The talk concludes with reflections on the importance of following the saint’s example and maintaining devotion amidst worldly challenges.
Chapters
hari om a the class a खगदामेनमुसलेपकरन बंदे हम शिरोशिवाशिरुशियो पं स सागनाहमश ztetmssaasreradakisna pdashaakृsणपना रो हो हा हा सीधा सीधा साफ सा सीधा सीधा से wenjocpsajisrekrishna अरे सारे सा हाई कृष्ण, आप सब भक्तों का हार्दिक स्वागत। तो आज जैसे आपने सुना 1 महान संत का तिरोभाव सीती है अविर्भाव और तिरोभाव अब अभिभाव करत हैं जब 1 महान सं प्रकट होता है पृथ्वी पर, क्यों भगवान के आदेश का पालन करने के लिए, और तिरोभाव कार्त है, जबकि वो प्रकट हो रहा है। और आज महान संत बांध पुरी का तिरोभाव दिन है। भगवान जब प्रकट होते हैं, भगवान प्रकट होते हैं धर्म की स्थापना के लिए, उनके प्रकट होने से पहले उनके सनातन साथी प्रकट हो जाते हैं। जैसे कि जब भगवान श्री कृष्ण प्रकट हुए तो उनके माता पिता बड़े भाई पहले प्रकट हो चुके थे। तो इसी प्रकार जेतनयामहाथूबुझी जो स्वयं भगवान हैं श्री कृष्ण चेतना और कुछ दिनों में ही आप गोल पूर्णिमा उत्सव मनाओगे। तो चेतन है प्रभु के प्रकट होने से पहले उनके सनातन साथी प्रकट हो गये थे। उनमें 1 से अवेदा और हयदाजसाकोहउन्होंने बड़ी गहराई के साथ भगवान से प्रार्थना की थी कि आप स्वयं प्रकट हो जाओ। और ईश्वर पुरी। और 1 थे माललंदपुरी मादपुर महाप्रभु के पग होने से पहले पगल हो चुके थे और वो थे ईश्वरपुरी के गुरू और ईश्वरपुरी किस के गुरु थे महाप्रभु के गुरु। तो बाल पुरी के विषय में चेतना भागवत में चर्चा है और न चेतन रीता जिसका अनुवाद श्री पापाजी ने किया है, उसके मध्य लीला चौथे दहाय बडे गहराई के साथ मालपुरा की भक्ति का वर्णन है। और आप में से कितने भक्तों के पास कितने चेतन है। घर में मां पूरी बहुत ही ऊँचे कोटि के भक्त हैं, दिन रात उनके 1 कार्य था क्या भगवान का नाम दिन रात भगवान का नाम ले लेते हैं। और उनको यह भय था कि मैं कभी किसी के साथ जल पर नही कर लू। तो इसलिए वो सदा अकेले रहते थे को साथ रखते नहीं थे कि कोई साथ में होगा तो फिर जल्पा का मौका मिलेगा और कभी किसी से कुछ मांगते नहीं थे अगर किसी ने कुछ धेरिया खाने के लिए तो खाते थे नहीं तो मान पूरी बहुत ही ऊंची कोटी के। तो 1 दिन भानपुर ने गोराल परिक्रम समाप्त की थी और वो गोविंद कुन में थोड़ा विश्राम कर रहे थे। ह भागोतम के दसवे साल में भगवान की गोरदानीलापड़ते हो, आप पढ़ते हो की किस प्रकार भगवान ने उनके पिता लाल महाज, जो ब्रिज भाषियों से, जो यज्ञ थे, यज्ञ इंदिरा की प्रशंसा के लिए किसान थे, तो उनके मन में यह भाव था। हमारी सफलता निर्भर है वर्षा के ऊपर वर्षा की प्राप्ति होगी, अगर इंद्र देवता प्रसन्न हो। और जो देवता हैं कई बार घमंडी भी हो जाते हैं। भगवान ने इंद्र रुकवा दिया और क्या गोदाने करवा दिया जिसके कारण इंद्र बड़े क्रोधित हुए सबद बादल को आदेश दिया जाओ। ब्रज के ऊपर सब बेजबाजियोंको डुबा 2 भयंकर ने देखा इन तेजी से बदल 2 और जो वर्षा गिरी थी हर पानी का बूंद खम्बे जितना भारी था। अंदाजा लगाओ तो ब्रिज बासी घबरा गए। उन्हें लगा कि अभी हमें इन से सजा मिलेगी तो देखे थे किसकी तरह भगवान की तरफ जो भक्त हैं सुख में और दुख में, दोनों ही परिस्थितियों में भगवान की शरण लेता है। भगवान ने क्या किया? भगवान ने विजवाजलकी रक्षा की गोदान पर्वत को उठाकर और इंदर ने स्वीकार किया क्योंकि भूल हो गयी है। इंदर ने भगवान की किया। इसका परिणाम है गोविंद। तो पुरी गोल कुल, गोल न कुल में विश्राम कर रहे थे। जब आप गोदान परिक्रम करते हो तो आपने सर नुभव किया होगा और कोई पांडे हैं। वो कहते हैं यह पुरी की बैठक है। विश्राम कर रहे थे तो 1 बहुत ही खूबसूरत बालक जिसका कंठ इतना मधुर था वो मार पुरी के पास 1 मटके में दूध लेकर आया। ये जो बालक था बहुत खूबसूरत। व बड़ा मधुर कंड। मानपुर ने इतना खुबसूरत बालक न कभी देखा था, न ही कभी इतना सुंदर कंड सुना था। और उस बालक ने कहा हे रिशी संत, मुझे लगता है कि तुम भूखे हो, ये दूध से पियो और मैं गायों की बच्चों की देखभाल करके लौटा हूँ। इस मटके को लेलेंगे और मेरे गाँव में कोई भूखा नहीं रहता। तो मानपुर ने पूछा आपको कैसे पता लगा के मैं भूखा हूँ? मेरे बालक ने कहा गाँव की औरतें कुएं की तरफ जा रही थी, पानी लाने ले और आपके चेहरे को देखकर। उन्हें लगा कि आप भूखे हो और प्यार से हो तो पीजिए। ये दूध में थोड़ी देर में लौटता हूँ। जबान में पुरी ने दूध तो पी लिया और वो राह देख रहे थे। तब बालक लौटेगा मडका लेने गये पर बालक लौटाई नहीं। मानी ने पुरी को हल्की सी नींद आ गई। उस नींद में पुरी ने उसी बालक का दर्शन प्राप्त किया और उस सपने में उस बालक ने कहा हे आनंदपुरी, मैं तुम्हारी भक्ति से बहुत ही प्रसन्न हूँ और मैं चाहता हूँ तुम मेरी सेवा करो। मुसलमानों के हाथे 4 से बचाने के लिए झाड़ियों ने मुझे झाड़ियों के बीच में जाणियों के नीचे छुपा दिया है और मुझे वहाँ बहुत गर्मी लग रही है। मैं चाहता हूँ कि तुम बृज वासियों का सहयोग लेकर मुझे स्थान से निकालो और गोवर्धन पर्वत के ऊपर में स्थापना करो। तुम धुन पुरी ने जो देखा वही बालक जिसने उन्हें दूध पिलाया था वो स्वयं भगवान हैं। मादुपुरी बड़े शर्मिंदा हुए और साथ में दुखी दुखी, इस दृष्टि से भगवान का दर्शन लिया। चानने भगवान हैं, आंखों को मिलने आये और बाद में आपको पता लगे ये वो तो भगवान है। क्या किया? मैंने दुखी थे, भगवान आये, पचा पाये के भगवान हैं। और दूसरी तरफ से शर्मिन्दा हो गए। क्यूँ मैंने भगवान से सेवा ली, भगवान से सेवा ली, जो भक्त हैं भगवान से सेवा लेना। नहीं चाहते। रगुनादादकोस्वामी बहुत घेरी गर्मी में राजकुल में अपना भजन कर रहे थे। वो इतनी गर्मी थी कि सड़क में किसी को देख नहीं पा रहे थे। तो राधा रानी जी आई को लेकर दास के सिर के ऊपर रखा छाता के रूप में और वहाँ से सनातन को स्वामी गुजर जा रहे थे। स्नान को स्वामी ने देखा ओह जॉब कर राजधानी छाता के रूप में का उपयोग कर रही है। पर बहुत गुस्से हो। तुमने भगवान ऐसी सेवा ली। तो वैसे तो हम सोचते है। गॉड इज और ऑर्डर सप्लायर भगवान का फर्ज है। ये इच्छा पूरी करो, ये इच्छा पूरी करो, ये इच्छा पूरी करो। अगर पूरी नहीं हो तो भक्ति में दोष है और तम गोदी का भक्त है और निष्काम भाव से सेवा करना चाहता है। जैसे की कहा गया है कृष्ण भक्त निष्काम मुक्ति, मुक्ति सीधी कामी जो भक्त निष्काम भाव से जुड़ते हैं वो सदा शांत रहेंगे और जो बहुत इच्छाओं की इच्छाओं को रखते हैं वो सदा शांत रहेंगे। तुमने पूरी 1 तरफ से दुखी थे, दूसरी तरफ से शर्मिन्दा देगे भगवान जैसे वाले हमारे पूरी ने अगले दिन वो अगले दिन सुबह बृजवास को बुलाया और सबको सपने का वर्णन किया। मानपुर ने कहा मुझे सपना आया। भगवान ने कहा कि गोपाल की मूर्ति, ये बड़ी प्राचीन मूर्ति है। इसकी थाना वज भगवान के पोते का बेटा था, उन्होंने की थी लगभग 5000 साल पूर्व उन्हें चुप दबाया हुआ है। क्योंकि उत्तर भारत में जब मुसलमानों का राज्य था तो भारत के कई हिंदू मंदर को नष्ट कर दिया था। इस कारण पुजारियों ने कई मूर्तियों को तो उठा कर जयपुर ले गए। इसलिए जयपुर में कई प्राचीन मूर्तियां हैं जयपुर का कौन नाम है, गुस विंदावन, छुपा विंदावन और कई मूर्तियाँ नष्ट हो गयी थी, कई मूर्तियों को छुपा दिया था मिट्टी के नीचे, तो मान पुरी को भगवान ने सपने में कहा था मुझे इस स्थान में झाइयों के नीचे छुपाया हुआ है। तुम आ कर, झाड़ियों को काट कर खोज कर मुझे इस स्थान में प्राप्त करोगे। तुम पुरी जा भी है। अपने साथियों को सुनाया सारे ब्रिज वासियों ने क्या निर्णय किया है। चलो देखते हैं सपना सच है या गलत और बड़े बड़े खंचिया लायें झाड़ियों को काटा खोदा और उसी स्थान जिसका वर्णन हुआ था, सपने में उसी स्थान में गोपाल बिरहा प्राप्त हुए जिसके पूरा चेहरा मिट्टी से भरा हुआ था। और वो मूर्ति इतनी भारी थी कि उसको उठाने के लिए कई उनके सहयोग की आवश्यक मिली। 1 आदमी उठा नहीं पाया तो महादान पूरी के निर्देश में मूर्ति स्थापना की योजना आरंभ हुई और भक्तों ने स्नान करवाया वो कोन से सौ लोटे। पानी के विमान मदन पुरी ने अभिषेक की योजना शुरू की, मानोगे नहीं, 1 दिन में माधुरी ने अभिषेक मुझे सापना के सारे कार्यक्रम का प्रबंध कर दिया। हम लोग जब पूरा खोल रहे थे हम लोग तो महीने महीने पहले शुरू करना पड़ा ा मानपुरी ने 1 दिन में साफ बंद 1 बड़ा पत्थर लिया जिसका सान बन गया। 1 दूसरा पत्थर डाला उसके पीछे उसे संभालने के लिए और गुनगुन से दौ सौ लोटे लाये गोमननकुनके जल से भरा हुआ और भगवान का पहले सौ लोटो के पानी से भगवान के शरीर से मिटटी को दूर किया। उसके पश्चात मदनपुर ने सिर लेकर भगवान के विग्रह का मसाज किया, व अच्छी तरह मसाज किया और मसाज करके पंच कमिया पंचम, उनका स्नान करवाया पंच। गमियां पंच अमृत में लगभग दूर ही दूर ह। हम पानी पर ये जो वस्तुएं हैं सब गाय से आ रही है। तो आप अंदाजा लगा सकते हो गाय माता का कितना महत्वपूर्ण स्थान है। हमारी 7 माताएँ होती हैं, उन में 1 कौन है गाय। इसके लिए पापा जी कहते थे जिस समाज में गाय की सुरक्षा नहीं हो, उस समाज में कभी सुख शांति प्राप्त नहीं हो सकता। प शान काजी को मिले तो उन्होंने उनसे पूछा ये कैसा धर्म है जिसमें माता का वध और पिता का वध किया जाता है। माता गाय तो बैल और गाय की सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। तो इस प्रकार 5 कमियां पंच से अभिषेक, फिर भगवान को स्नान करवाया, फिर इसके पश्चात, फिर भगवान का मसाज किया, 2 बार मसाज किया, फिर स्नान करवाया अभिषेक पश्चात हो। समाप्त होने के पश्चात फिर पुरी ने अनाकूट की योजना की। यह कोई उत्सव कब बीता था। गोला लीला में जितने बेज बासी थे, सब जुड़ गए। सेवा में। हर खानदान ने कहा कल प्रसाद हवाई तरफ से है, इस पर प्रसाद हमारी तरफ से है। और महान पूरी के प्रयास से। रोजी अनाकूट का उत्सव हो रहा था। हम लोग तो साल में 1 दिन करते है। जाते पूरी के प्रयास से। जितने ब्रिजवासी गोदान में थे। सब ने कहा हमारी तरफ से, कल हवाई तरफ से। और हर खानदान ने 11 गाय लाकर माधनपुरी को भेर के रूप में दी। और तो थोड़े में ही गोपाल, विग्रहा वो धनी बन गए। सब खादनों ने गाय और गाय नहीं। साथ ही उन्होंने घेरे भी दिए, चांदी के गहने भी दिये। सब भगवान को अर्पण किया। हम मास्क बनाने जा रहे थे। कई माताओं ने अपने गहने दिए, कहा बेचकर मान का मंदिर बना तो थोड़ी देर में ही गोपाल विग्रा जो है बहुत ही धनी बन गए। और विग्रह की खूबसूरती गोपाल। विग्रह की खूबसूरती इतनी गहरी थी को देख कर ही सारे, कष्ट और भौतिक इच्छाएं समाप्त हो जाती थी। कम बुद्धि के व्यक्ति समझ नहीं पाते कि भगवान आ के रूप में कर दे। चेत। महाप्रभु ने सनातन को स्वामी को शिक्षा देते हुए 5 महत्वपूर्ण विषयों पर बल दिया। पहला था साधु, दूसरा था हई नाम, तीसरा था भागोतम का दिन, चौथा था। भगवान के आज्चयविग्राह की उपासना तो भगवान अपने आप को आजचरविग्रहा के रूप में प्रकट करते हैं। और भगवान में कोई अंतर है, कोई अंतर नहीं है। आप साक्षी गोपाल की कथा में पढ़ते हो। जब ब्राहमण को कहा गया, तुम ने चापलूसी कर के हमारे पिता के सारे धन को ले लिया। जो ब्राहमण ने कहा भगवान गोपाल विग्रह से आप साक्षी बनिए। भगवान ने कहा मैं साक्षी कैसे बनूँ। मैं तो इतना चल नहीं सकता। भक्त ने क्या कहा आप बोल सकते हैं तो चल भी सकते है। साक्षी जब हम भगवान के बिगड़ा को देखते हैं तो हमें यह नहीं सोचना चाहिए। ये जो पत्थर की मुर्गी है। 1 समय 1 सजन मुझे मिलने आये थे, मैंने कई बार कहा, हाँ, भगवान के दर्शन 34 बार कहा और कोई बहाना दे रहे थे। वे कहने लगे मैं तो आया समाज में मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं कर। कहने लगा यह मूर्ती पूजा नहीं है, भगवान होते। इस प्रकार महानंद पुरी ने ब्रज के सब खादानों को जोड़ दिया और थोड़ी देर में ही बहुत ही धनी बन गए। जब नमाज प्राचीन समय में हवाई सम्बधी माँ पी जाती थी। ये देख कितनी खेती है, गाय है मराज के पास 9 लाख गायें थी तो गोपाल बगहा की इस प्रकार पूजा चली दूर दूर से लोग आते थे, कहते थे हमे भी जोड़ 21 ना कुछ हवाई तरफ से होगा, कई लोग आये फिर 2 साल इस प्रकार से सेवा होती रहे। 2 साल के बाद 2 बंगाली ब्रामण मारमेनपुरीने योग्य देखा, ब्राह्मीण दिक्षा दी और पूरी सारा दिन गोपाल बिगहा की सेवा करते थे। अकेले कुछ खाते नहीं थे और रात को भगवान को विश्राम विश्राम कर के वे थोड़ा सा दूध पीते थे। बस आप प्यार सारा दिन आज विग्रह की सेवा कुछ भी नहीं खाते थे और रात को भगवान वो विश्राम जैसे आप विश्राम करते हो। 9 बजे आपका मंदिर बंद होता है तो आपके भगवान खोलने जाते हैं। बस्तर में बाल पुरी ने विस्तरों का भी प्रबंध किया और जब भगवान विश्राम करते थे उसके पश्चात थोडा सा दूध पीकर विश्राम करते थे। ये थी उनकी खुराक। 2 साल बीत गए और 2 साल के पश्चात मानव पुरी को फिर से सपना है। और भगवान ने सपने में कहा मैं तुम्हारी भक्ति से बहुत ही प्रसन्न हूँ पर मुझे अभी भी गर्मी लग रही है तो मैं चाहता हूँ कि तुम मेरे चंदन लेकर आओ। चन्दन का से मनाया न। तो माधवन पुरी ने 2 ब्राह्मण जो आये थे उनको सौपी और मदन पुरी कहाँ गए जाकर पुरी की तरफ चले। अगर आज आपने कहाँ जाना हो तो ये इंडिया या इंडी गो के टिकट लेते हो और अगर आप इतने दानी नहीं हो तो ट्रेन की टिकट लेते हो की जाती हो। पर उन दिनों में न मोटर थी, न साइकिल थी, न हवाई जहाज से, न न शिप के जहाज से। 7 जगह जंगल और हर जंगल डाकूओं से भरा था और अंधेरे में चलना खतरे का काम था। जब भगवान ने कहा सपने में पूरी मुझे तुम जाकर मेरे लिए चंदन लेकर आओ पुरी, तुरंत यार हो गए, कहा कैसे जाऊंगी दूर की यात्रा, पंद्रह सौ मील की यात्रा है। लेके जगनाल पुरी से कहते हैं हवाईजाज की टिकट मिलेगी, हवाइजाज की डिग्री मिलेगी तो फर्स्ट क्लास की मिलेगी बादल पूरी भक्ति भाव देखो। उन्होंने कहा तुरंत स्वीकार कर लिया, क्या जाएंगे जगरतपुर। और हालांकि मुसलमानों का राज्य था, हर गाँव में चुंगी में 1 मुसलमान अधिकारी था जो कि हिंदू ब्राह्मणों को बहुत तंग करते थे। अभागन पुरी इतनी लंबी यात्रा की जिम्मेदारी स्वीकार कर लिया क्यों गोपाल को खुश करने के तो आप भक्तों में यह भाव होना चाहिए। राधा नाम की खुशी के लिए आपको अगर 2000 मील की यात्रा भी करनी पर करोगे करेगा। अभी हरी। तो जो मलपुरी जगनपुरी की ओर गये, जगनपुरी की तरफ जा रहे थे, तो रास्ते में रुके कहा यमुना में और यमुना में, जब रुके उन्हें याद आया। यहाँ 1 बहुत प्राचीन मंदिर है, किसका रहा मैं वो मंदिर में गया था। 3 पहले ही तो का मतलब ये कहा गया है, ये जो बिगड़ा है इस मंदिर के, उनको भगवान राम ने बनाया था। कहते हैं जब वो रमन मंदिर, गोमिया और चेतन महा प्रभु, जब सन्यास लेकर अधवेदाचायाके घर गए थे। शांतिपुर आज के दिन शांतिपुर में स्कार मायापुर के भक्तों द्वारा हजारों को प्रसाद खिलाया जाता है। मना में पहुँचे तो नाचे थे गोपीनाथ के बिगड़ा के सामने और गोपीनाथ बिगड़ा के हाथों के फूल का ब। उनके गले पर गिरा। वो बड़े प्रसन्न हुए और उन्होंने भगवान को कहा। मैं कथा सुनाता हूँ। यह वह कैसे बन गए जो मैंने सुना था किस के माध्यम से, ईश्वर के माध्यम से। तो जब रमना में, तुम के मन में ये इच्छा थी की मैं देखो यहाँ क्या क्या खिलाया जाता है, भगवान को खाने के लिए, क्या देते हैं, भोग में क्यूंकि मैं। फिर लौटकर अपने विग्रह को भी इस प्रकार का भोजन दूंगा जैसे आप लोग बिजनेस में टेक्नोलॉजी लेने के लिए विदेश जाते हो। अच्छा टेक्नोलॉजी हम पढने के लिए आप अपने बच्चों को अमेरिका भेजते हो। हालांकि विदेश में, जहाँ वहाँ 80 पर्सेंट स्टूडेंट इंडिया के ही होते हैं, 80 पर्सेंट टीचर इंडिया के होते हैं। और खाली धरती है विदेश की। अब ये बताएंगे कि अब विदेश में पढ़ के आये, तो मान पूरी सोचते थे, अगर मुझे पता लग जाए क्या आप भोग लगाते हैं। भगवान को? तुम्हें लौट कर अपने गोपाल को भी भोग लगाओ। तो मान पुरी ने पुजारियों से पूछा उस मंडल में जो खीर भगवान को भोग लगाते हैं। कहा जाता है कि वो खीर इतनी, ऐसी टेस्टी है, इतना सा टेस्ट है, कैसे लगता है, जैसे सोरग से बना है इसे, उस खीर का नाम क्या है। अमृत तुम्हारा पूरी की इच्छा थी, वो कभी किसी से कुछ मांगते नहीं थे। अगर कोई उन्हें खीच रखने के लिए दे देंगे तो उन्हें अंदाजा हो जाएगा। लौट कर अपने गोपाल के लिए पैसा बनाए। मालनपुर की इच्छा थी। और ये इच्छा प्रकट हुई जा के भगवान को भोग लग रहा था। मानपुर ने देखा, मैं चखने की उम्मीद रखता हूँ। यह भगवान को भोग लग रहा है। तो वो शर्मिंदा होकर छोडकर बाजार पड़ोस के गाँव में चले गए, जॉब करने गए। नियम। यह है जब आप भगवान को भोग बना रहे हो, आपका भाव होना चाहिए भगवान के लिए। यह नहीं, हम जल्दी जल्दी बनाएंगे, भोग लगाएंगे, फिर खाएंगे। ये भाव नहीं होना चाहिए। इसलिए भोग पर बनाते हैं, ढककर लाते हैं। भगवान के पास। चले बिना चले गए। बाजार में जॉब करने के लिए। भगवान ने क्या किया? भगवान का 1 नाम है भक्त बाद साब। भगवान को पता था कि मेरे भक्त की क्या इच्छा थी। तो उन्होंने रवीना मंदिर में रोज शाम को बारा खीर के प्याले भगवान को भोग लगाया जाता है। और मैं ले गया था 3 हफ्ते पहले, ब्रह्माचारी इस काल का भी मंदर खुल रहा है कुन चेतना अच्छे ब्रहमाचारी उन्होंने मंदर खोला तो वो मुझे ले गए थे दर्शन के लिए, हम गए गंदे चेते पूछा पुजारी से कोई खीर है हम शाम के न तो पुजारी नहीं, कोई खीर नहीं है। वो पीछे मुड़ के देखा तो 1 प्याला मिल गया, चेतन ने लाकर मुझे दिया। तो मा ठीक है पहले भगवान को तो भगवान ने क्या किया है। 1 प्याला को चुरा कर पर्दे के पीछे छुपा दिया और पुजारी को सपने में आदेश दिया मैंने खीर का प्याला चुरा कर छुपा दिया है पर्दे के पीछे। तुम्हें इस प्याले को लेकर। मादनपुरीकानानाम 1 भाग है जो बाजार में जब कर रहा है उसे जा कर दीजिए तो पुजारी आश्चर्य हो गया भगवान ने हीर का प्यारा चुराया है छुपाया है तो भौतिक समाज में कोई चोर बुलाई तो आपका मानने को तैयार हो जाओ। गया को चोर बुला ले। भगवान के अनेक नामों में 1 नाम है मक्खन चोर मक्खन चोर की तो आप पूजा करते हो और दूसरे चोर हों को जेल में डालते हो, चोर हो, वो जेल में जाता है और मक्खन चोर के पूजा करते हो। तो भगवान ने 1 पल चुरा लिया और कहा रिया साढ़े 6 बजे मंगला के आते हो तो पुजारी पहले उड़ जाते है। तो पुजारी ने भगवान को जगाया और देखा तो सच है पुजारी को कुछ अंदाजा नहीं था, कौन है मधुपुरी क्यूँकि मादुपुरी का कुछ परिचय नहीं था। तो पुजारी ने देखा कि ये सच है। तो बाजार में गये इस सपने का जिसका वर्णन सपने में प्राप्त हो। ता और पुजारी ने कहा यहाँ कोई महानंदपुर नाम का भक्त है क्या? मानपुर ने सुना कि उनके नाम को पुकारा जा रहा है। कहा तो बुझाई आश्चर्य था कौन है ये भाग्यशाली मान पुरी जिसकी प्रशंसा के लिए भगवान ने हर का प्याला चुराया उन्होंने ये खीर का प्याला मानद पुरी को दिया मानद पुरी बड़े प्रसन्न हुए और उन्होंने खीर सारी खीर खा ली, जो खीर का ढोना था उसे छोटे छोटे टुकड़ो में तोडा और 1 कपड़े में लपेट कर अपनी धोती के साथ जोड़ दिया और रोज 11 खीर के परे टुकड़े को चखते थे। तुम पूरी के जो लीला है इसकी महिमा पूरे शहर में फैल गई, सबको पता लगया रेमुना में यहाँ 1 भक्त हैं जेएस की खुशी के लिए। भगवान ने क्या किया माल पूरी की इच्छा थी यहाँ से भागा जाए हमारी तो स्थिति यह है हम जो चाहते हैं सब हमारी प्रशंसा करे सब के जिंदाबाद जो राजनीतिक नेता हैं वो भाषण देने जाते हैं तो ट्रकों में लोगो को लाया जाता है उनको जिंदा बात बोलने के लिए, फिर वही जो आपके मन में आते है उनको साढ़े 700 मिलता है दूसरे के में देखते है 1 लाख व्यक्ति आये थे सुनने के लिए और जो भक्त हैं वो किसी प्रकार की प्रशंसा नहीं चाहते कृष्णा कविराज जिन्होंने हमें चेतना मिला दिया है। उन्होंने कहा की मेरा नाम ही मत लो, मेरा नाम ही लोगे तो तुम्हारे सारे गुण समाप्त हो जायेंगे। मेरा नाम ही मत लो। और हमारी सीधी क्या है, म्हारा नाम जरूर लो। पूरी न चले गए। जगनादपुरीऔरजगनदपुरी वहाँ भी उनकी महिमा पहुँच गयी थी। जगनातपुरी में भी लोगों को सूचना पहुँच पुरी। वो भक्त हैं। जिसकी खुशी के लिए भगवान ने खेल का प्यारा चुरा हो गए। जगनलपुरी वहाँ के अधिकारियों ने सहयोग दिया। वो आई थी क्या लेने के लिए, तो टी टू पाउंड चंदन दिया, साथ में 8 हाऊंस कैंफर दिया, साथ में 1 पत्र दिया। ये जो कैंफर और चन्दन है, हम दान पुरी के मंदर और क्योंकी ये चिट्ठी दिखाई जाती थी। चुकी वालों को। साथ में 2 भाग दिए। प्रयोग देने के लिए। पूरी चन्दन लेकर खैनफोरलेकर 1 भक्त था। सहयोग देने के लिए। वापस लौटे लौट रहे थे। कहाँ कहाँ पहुँचने के लिए वृंदावन और गोवर्धन में 1 धनी शतिया व्यापारी ने गोपाल बिगड़ा के लिए अच्छा मंदिर बना लिया था। धन हो तो उस धन से हमें क्या कहना चाहिए? भगवान का मंदिर बनाना। चाहे लौटते समय मदद पूरी रेमुना में फिर से रुके और यमुना में रुके 1 रात के लिए रुके थे। और यही विचार था अगले धन सभा जाएंगे। मिलना उनकी और उन में जैसे मैंने कहा मुसलमानों का राज्य था। हर चुंगी में मुसलमान अधिकारी थे, जो हिंदू पुजारियों को बहुत तंग कर रहे हैं। मून मान पूरी 1 रात विश्राम करे थे। उस रात को उन्हें 1 और सपना आया। उस सपने में गोपाल ने आदेश दिया। गोपाल विगरा ने कहा तुम चंदन लेकर आये हो, मैं तुम्हारा भरी हो। पर ये जो चंदन तुम लगाओगे गोप गोपी नाथ को, वो चंदन, वहां लगाओगे, मैं भी ठंडा हो जाऊंगा। this is pिltltecनोलogी। मचल टेक्नोलॉजी तो कैसे आपका कैसे सम्भव है? आप चन्दन लगाओगे, गोपाल को, गोपिनाथ को रेमुना में गोपाल महसूस करेगा। ठंड। ये है स्पिटल टेक्नोलॉजी। जैसे आप भगवान को भोग लगाते हो। और जब भगवान को भोग लगाते हो, प्रसाद अर्पण करते हो, मानस का उच्चारण करते हो, भगवान से प्रार्थना करते हो, कृपा स्वीकार करो। पर जब भगवान खा लेते हैं तो आप कहते हो प्रशाद बन गया। और मायावी लोग क्या कहते हैं? देखो, यह मुल्क को कहते हैं। भगवान ने खा लिया थाली। तो वैसे के वैसे भरी हुई है। भगवान ने कैसे खाया? व मूर्ख लोग समझे। वह किसी 1 अंग से किसी और अंग का कार्य कर सकते हैं। अंगने reting this is special technology। तो गोपाल विग्रहा ने कहा माधव पुरी से तुम यही चंदन गोपीनाथ को दे। 2 और तुम गोपिनाथ को जब चंदन लगाओगे, उसका ठंडा मैं भी महसूस करूंगा। वातन पुरी ने अगले दिन सुबह पुजारियों को बुलाया सपने का वर्णन किया। तो पुजारी तो बहुत खुश हो गये। उनको ऐसी उन चन्द मिल गया। माधापुर के निर्देशन में रोज भगवान को चंदन लगाया जाता था। और माधनपुरी ने उसकी बेस में। तो आप माधपुर की कथा तो बहुत गहरी है। मानना पूरी व भगवान ने 3 दफा सपने में आदेश दिया कार्य करने के लिए। तो आप कहोगे मुझे भी सपने में आदेश मिलता है। हमें स्वीकार करना चाहिए। क्या है? उत्तर नहीं। पापा जी कहते थे, तो आप शुद्ध भक्त बन जाओगे। जब भगवान सपने में आदेश देंगे, जब तक शुद्ध भक्त नहीं बनते, जो आपको भगवान के प्रति वाला आदेश मिलता है, उसका न तो मालनपुर की कथा में आप देखते हो। भगवान ने मदन पुरी की परीक्षा ली। पहली बार भगवान ने उन्हें ऐसा आदेश दिया, जाओ मेरे चन्दर लेकर आओ। मदनपुरी तुरंत तैयार हो गए, गोपाल की खुशी के लिए इतनी लम्बी यात्रा करना। यह नहीं, उन्होंने कहा, मैं इतनी लम्बी यात्रा कैसे करूँगा? चोर डाकू, मुझे लूट लेंगे नहीं कहा। फिर जब भगवान ने देखा की माधवपुरी ने उनके आदेश का पालन किया है, चंदन ले आये हैं। और भगवान को पता था, रास्ते में मुसलमान अधिकारी तंग करेंगे। तो भगवान ने क्या कहा, अब मैंने तुम्हारी परीक्षा ले ली, तुम पास हो गए हो, अब आगे परीक्षा लेने की आवश्यकता नहीं। उसी प्रकार जब हम भक्ति में जुड़ते हो, हम सब की परीक्षा ली जाती है। और जब भगवान देखते हैं, तुम ने जे होकर निभाया है। भगवान खोल कुमार पुरी के अनेक शिष्य थे। इनमें 1 थे रामचंद्र पुरी से, ईश्वरपुरी, पुरी, जारे से ो ये सब जो की ये मेरे कर्मों का परिणाम है, भुगत लो। यही नहीं neलepdaksहोंगे लास्ट क्वेश्चन से की मुखर्जी से चीजें साझा करते हैं कि कैसे पता चले कि हमारी साधना से है। अगर आप नियमों का पालन कर रहे हो। गुरु ने दिया जो प्रोपासहराहै भगवान प्रसन्न है। अगर आप शिक्षक विरोध कर रहे हो, फिर ऐसा हो या कर रहे हो, पर रहे हो, तो ये माना जा, बांध सकते हो। मान खुश है आप सबको, पर्सनल पत्र नहीं आएगा से। buktisounkosa, but it is undersodokayogev stock, now to stock okay थैंक you ugee।
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Jagannātha Ratha-yātrā Through Śrīla Prabhupāda's Mercy | 29 April 2006 | Nairobi, Kenya

Lord Jagannātha's Appearance Pastime | 21.07.2019 | ISKCON Calgary | Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

The Ācārya Teaches by His Own ExampleGuṇḍicā Mārjana by Guru Mahārāja #shorts

Guṇḍicā Mārjana – Lord Jagannātha's Pastime | 21.7.2019 | ISKCON Calgary |Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

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